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हाय क्या इलाज था
02-01-2013, 08:03 AM
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हाय क्या इलाज था
मेरी 2 बजे की अपॉयंट्मेंट थी। एक हफ्ते पहले यह अपॉयंट्मेंट पक्की हुई थी, तब से आज तक चैन से नींद नहीं आई है, पहली बार किसी से सेक्स के प्रति अपना डर बताने वाली थी..
मेरी सहेली सपना ने इस डॉक्टर के बारे में बताया था कि कैसे इस डॉक्टर ने उसके मन से डर को हटाया और साथ ही उसे अपने पति को खुश रखने का तरीका भी बताया। पहले सुन कर थोड़ा अजीब लगा कि कैसे एक अनजान आदमी से यह सब कहूँगी पर है तो वो डॉक्टर ही, यह सोच कर अपॉयंट्मेंट ले लिया। सपना भी बहुत जोर दे रही थी।
सच भी है, पहले तो सपना इतनी शर्मीली थी कि किसी से नज़र उठा कर बात करने में भी डरती थी, पर अब बहुत आत्मविश्वास आ गया है उसमें और तो और पूरी चुदक्कड़ भी हो गई है। अपने पति के अलावा न जाने किस-किस से चुदवाती फ़िरती है.. मेरे फ्लैट में ही कई बार अपने नए नए आशिकों के साथ आती रहती है, उसके कमरे से आती आवाज़ें सुन कर अच्छा तो लगता था पर पता नहीं किस बात का डर था मेरे मन में कि चुदाई का नाम सुनते ही डर के मारे जान निकल जाती थी।
मैं टैक्सी लेकर उसके बताए पते पर पहुँची, आज तक फ़ोन पर ही बात की थी।
क्लिनिक एक पोश सी कालोनी में थी, एक बंगले को क्लिनिक के रूप में प्रयोग कर रहे थे। मैंने जैसे ही अन्दर कदम रखा, ऐसा लगा की जैसे किसी पाँच सितारा होटल में आ गई हूँ।
सामने एक बहुत सुन्दर सी लड़की और एक हीरो जैसा लड़का था। मैंने उस लड़की को अपना नाम बताया, उसने मुस्कुरा कर उस लड़के को देखा और कहा- मैडम, ये आपको सारी बातें बताएँगे, आप इनके साथ जाइये।
मुझे थोड़ा अजीब लग रहा था, पर अब तो मैं आ ही चुकी थी तो चुपचाप उसके पीछे चल पड़ी। वो मुझे उस लॉबी के आखिरी कमरे में ले गया। कमरा दो हिस्सों में बंटा हुआ था, सामने इटेलियन डिजाईन का कुछ था और एक कॉफ़ी टेबल था और दूसरा हिस्सा परदे से ढका था। कुछ दिखाई ही नहीं दिया।
उसने मुझे एक फॉर्म दिया, कहा- आप पहले रेलक्स हो जाइये और इसे फिल कर लीजिये, डॉक्टर थोड़ी देर में आ जाएँगे।
और फिर मेरे लिए कॉफ़ी ले आया। उस फॉर्म की डिटेल्स बड़ी अजीब थी, जैसे- आपने कभी सेक्स किया है? क्या आप हस्तमैथुन करते हैं? अगर हाँ तो किस चीज़ का इस्तेमाल करते हैं, हाथ या सब्जी या कुछ और? वक्ष का आकार, फिगर वगैरा !
वो लड़का लगातार मेरी तरफ देखे जा रहा था, मैं और भी अजीब महसूस करने लगी। वो आगे झुका और मेरे फॉर्म को पढ़ने लगा। जब मैंने फॉर्म भर लिया तो वो उसे लेकर जाने लगा, जाते जाते मुड़ कर कहा- आपने सच में कभी हस्तमैथुन भी नहीं किया? मैडम, आप बिल्कुल सही जगह आई हैं, सर आपकी हेल्प करेंगे।
मैं कुछ कहूँ, उसके पहले उसने कहा- आप उस रूम में जाकर चेंज कर लीजिये, एक ड्रेस वहाँ है, चेक अप के लिए आपको वही पहनना होगा !
और चला गया।
परदे के उस पार, एक आलिशान कमरा था, बहुत बड़ा बेड, एक सोफा और मेज पर एक ड्रेस !
देख कर मुझे थोड़ा डर लगा, पर साइड टेबल पर कुछ उपकरण रखे देख कर तसल्ली हुई। ड्रेस के साथ एक पर्ची थी, जिस पर लिखा था- चेकअप के लिए सिर्फ ये पहने और कुछ भी नहीं ! खुद को साफ़ कर लें, सारी चीज़े बाथरूम में हैं।
मैं ड्रेस लेकर बाथरूम की तरफ बढ़ी, वहाँ हर तरह के शेम्पू-साबुन थे, और तरह तरह के हेयर रेमूविंग क्रीम और रेजर्स थे।
तब समझ आया कि मुझे अपनी झांट साफ़ करनी पड़ेगी।
थोड़ी देर में ड्रेस पहन कर मैं बाहर आ गई... सिल्क की ड्रेस थी सामने से खुली हुई सिर्फ दो रिबनों से बंधी, मैंने पेंटी या ब्रा भी नहीं पहना था. मेरे बदन पर सिल्क का एहसास गुदगुदा रहा था।
तभी किसी के दरवाज़ा खोलने की आवाज़ आई... देखा तो एक बहुत लम्बा और हट्टा कट्टा आदमी, मुश्किल से 40 का होगा, सफ़ेद कोट पहने खड़ा था।डॉक्टर सूरज !
उनके हाथ में मेरा फॉर्म था और कुछ उपकरण !
मुस्कुरा कर मेरी तरफ देख कर उन्होंने हल्की-फुलकी बात शुरू की, पूछा कि मुझे किस बात का डर है।
मैंने कहा कि सेक्स से दर्द होगा और फिर अगर मेरा बदन पसंद नहीं आया तो, क्या पता मैं किसी को संतुष्ट कर पाऊँगी या नहीं।
उन्होंने कहा- आप आराम से खुल कर बात कीजिये, सम्भोग सबसे सामान्य चीज़ है।
उनके मुँह से यह सुन कर अजीब तो लगा पर थोड़ा सुकून आया कि अब औपचारिकता की ज़रूरत नहीं है।
उन्होंने कहा- कभी सेक्स नहीं किया, पर क्या लण्ड देखा है? आदमी और औरत का शरीर एक दूसरे के लिए ही बने हैं, इसमें शर्माने या डरने की ज़रूरत नहीं ! और कोई परेशानी हुई तो मैं ठीक कर दूँगा। अब आराम से बेड पर लेट जाओ और मुझे चेकअप करने दो।
मैं ड्रेस को सँभालते हुए लेट गई, मेरे पैर जांघों तक खुले थे और रिबन के गेप में से मेरा पेट और चूचियाँ साफ़ दिख रहे थे... मैं बता दूँ कि भगवान ने मुझे बहुत ही बढ़िया चूचियों से नवाज़ा है, मेरा साइज़ 38-30-34 है... हर कोई मेरी चूचियों पर ही अटक जाता है, डॉक्टर की नज़र भी बार बार वहाँ जा रही थी।
पहले तो उन्होंने मेरी सामान्य सी जांच की, फिर बोले- अब गहराई से चेक करना है, आप आराम से आँखें बंद कर लीजिये, घबराने की ज़रूरत नहीं !
मैं आँखें बंद करके अपने शरीर पर घूमते उनके हाथ को महसूस कर रही थी। उन्होंने एक धातु की छड़ जैसी चीज़ से मेरी योनि कि जाँच की, फिर परेशान आवाज़ में कहा- हम्म ! यहाँ थोड़ी समस्या है, चूत का छेद छोटा है और बिल्कुल गीला नहीं है। हमने आपको कॉफ़ी के साथ कुछ दवा दी थी जिससे गीलापन होना चाहिए था।
मैंने अपनी आँखे खोली और उठते हुए पूछा- अब क्या होगा डॉक्टर?
उन्होंने मेरे कंधे पकड़ कर मुझे लेटाते हुए कहा- आप आराम से लेटिये, यह सब मैं ठीक कर दूँगा, पहले हमें गीलापन लाने को कुछ करना होगा, फिर अलग-अलग औजार डाल कर चूत के अन्दर की जांच करनी होगी। थोड़ा दर्द हो सकता है पर फिर सब ठीक हो जाएगा !
मैं वैसे ही डरी हुई थी, चुपचाप लेट गई। उन्होंने मुझे एक दवा पिलाई फिर अलमारी से एक तेल की शीशी निकाली, कहने लगे- चूत के साथ साथ बाकी हिस्सों का भी ध्यान रखना होगा, दवा के असर करने तक मैं आपको मालिश का तरीका बता देता हूँ।
उस दवा के असर से मुझे अजीब सा लग रहा था, सब अच्छा लग रहा था, उनके हाथ जब भी मेरे नंगे बदन पर पड़ते तो सिहरन सी होती थी। उन्होंने धीरे से मेरी ड्रेस के रिबन खोले और थोड़ा तेल मेरे पेट और चूचियों पर टपका दिया, फिर अहिस्ते से पेट पर मालिश करना शुरू किया।
मुझे बहुत अच्छा लग रहा था !
उन्होंने कहा- अब आप मुझे बताती जाना कि कैसा लग रहा है ताकि मैं ठीक से मालिश कर सकूँ !
मैंने कहा- ‘आपके हाथों में जादू है, मुझे बहुत अच्छा लग रहा है, करते रहिए !
उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा- इसी तरह आपको अपने पेट की रोज़ मालिश करनी होगी, और फिर इस तरह से वक्ष की !
कह कर उन्होंने मेरी बड़ी बड़ी चूचियों को दबा दबा कर मालिश करना शुरू किया।
"आपको तो घबराना ही नहीं चाहिए, मैंने आज तक इतने अच्छे उरोज़ किसी के नहीं देखे ! आपका पति बहुत खुश होगा आपसे !"
मुझे पता नहीं क्यों शर्म सी आ गई, मालिश तो चूचियों की हो रही थी पर मेरी चूत में अजीब सा लग रहा था, मैंने कहा- मुझे वहाँ नीचे अजीब सा लग रहा है !
"कहाँ पैरो में?"
"नहीं वहाँ !"
"खुल कर बताइए वरना मुझे कैसे समझ आएगा?"
"मुझे वहाँ जांघों के बीच में... योनि में अजीब सा लग रहा है !"
"हम्म ! दवाई का असर हो रहा है, सब ठीक हो जाएगा !"
उनके हाथ मेरे बदन को न जाने कहाँ कहाँ छू रहे थे, मुझ पर तो जैसे नशा छा रहा था, मैंने सुरूर में अपनी आँखे बंद कर ली। थोड़ी देर में मुझे अपनी चूचियों पर कुछ अजीब सा लगा, आँखें खोली तो डॉक्टर मेरे निप्पल चाट रहा था।
मैंने पूछा- यह क्या?
"यह सब इलाज के लिए है ताकि पता चले कि आपके अंग ठीक हैं या नहीं ! वरना आपके पति को परेशानी होगी। हमें सब कुछ सही तरीके से चेक करके उसका इलाज करना है। आप बस आराम कीजिये, आपको अच्छा ही लगेगा, बस बोलते जाना कि कैसा लग रहा है !"
वो अब मेरी चूची जोर जोर से दबा कर चूसने लगे.... मैं तो सातवें आसमान पे थी- आःह्ह्ह डॉक्टर, और चूसो, स्सस्सस्स !
थोड़ी देर में वो रुक गए.... मेरे हाथ खुद बा खुद अपनी चूची दबाने लगे...
"वाह, बस ऐसे ही दबाओ इन्हें !" और मेरे हाथ पकड़ कर दबवाने लगे। मैं अपनी चूची दबा रही थी और उनके हाथ मेरे पेट से सरक कर मेरी जंघाओं पर आ चुके थे।
"अब इसकी बारी !" धीरे धीरे मेरी योनि के दाने को सहलाने लगे, फिर थोड़ी देर रुक कर मेरे पैरों के बीच में आ गए और मेरी चूत को अपनी जीभ से सहलाने लगे- अब कैसा लग रहा है?
"बहुत अच्छा ! और चाटो... स्सस्सस्सस..... आःह ह ह ह.... चाटो और चाटो !"
"गीलापन तो आ रहा है, अब उपकरण डाल कर चेक करता हूँ।" फिर कुछ रबर का डण्डा जैसा उठाया, उसे तेल से भिगोया और मेरी चूत पर रगड़ना शुरू किया। "अह्ह्ह ह ह ह ह ह ह..... डॉक्टर.... कुछ करो ! मुझे अजीब सा लग रहा है... हईई ई ई इ इ..... कुछ करो !"
"थोड़ा दर्द हो सकता है पर इलाज के बीच में रुक नहीं सकते, तो आप चाहे तो हम रुक जाते हैं या फिर शुरू होने के बाद दर्द के कारण रुक नहीं सकते !"
"नहीं, रुको मत, इलाज पूरा होना चाहिए, रुकना मत ! मैं कहूँ तो भी नहीं !"
उन्होंने धीरे से उस डण्डे को मेरे चूत के छेद पर रखा और एक झटके में अन्दर डाल दिया... मेरी चीख निकल गई, आँखों से आँसू आने लगे, मेरी चूत में इतनी जोर का दर्द हुआ... "थोड़ी देर में सब ठीक हो जाएगा, बस लेटी रहो !"
और थोड़ा तेल मेरी चूत पर टपकाया और उस डण्डे को अन्दर-बाहर करने लगे।
थोड़ी देर में दर्द कम हुआ, मेरी चूत में वो डण्डा मुझे अच्छा लग रहा था- डॉक्टर ! इसे अन्दर-बाहर करने से मुझे दर्द में आराम है !"
"अन्दर-बाहर करना नहीं कहते, यह डण्डा एक डिल्डो है, जिससे मैं चूत को चोद रहा हूँ, ताकि आगे की तकलीफ दूर हो !"
"इसे चुदाई कहते हैं? यह तो बहुत अच्छी लग रही है, मुझे तो मज़ा आ रहा है डॉक्टर !"
"यानि अब तुम्हारी आधी प्रॉब्लम ख़त्म !" उन्होंने डिल्डो मेरी चूत से निकाल दिया, उस पर खून लगा था, जिसे देखकर मैं डर गई।
"यह खून तुम्हारी योनि की झिल्ली फटने से निकला है, अब जाकर धो लो, फिर आगे इलाज जारी रखेंगे !"
मैंने बाथरूम में जाकर अपनी चूत को सहला सहला के साफ़ किया, जब वापस आई तो डॉक्टर ने मेरी आँखों पर पट्टी बाँध दी और कहा- अब सिर्फ महसूस करना है।
मुझे लिटा कर मेरी चूचियों को दबा दबा के चूसने लगे.... मैं जोर जोर से सिसकारियाँ लेने लगी....सस सस स स स... अहह ह हह ह ह ह.... और चूसो ! ओ ओ ओ ओ... अच्छा लग रहा है...
थोड़ी देर में मुझे उनका भार अपने ऊपर लगा, उन्होंने अपने कपड़े उतार दिए थे- अब असली इलाज होगा, बस मज़े लो !
और जोर जोर से मुझे हर जगह चूमने लगे... उन्होंने अपना लण्ड मेरी चूत पर रगड़ना शुरू किया !
"ये डिल्डो तो अलग लग रहा है डॉक्टर?"
"हा हा हा, ये डिल्डो नहीं मेरा लंड है, चूत का इलाज सिर्फ लंड ही कर सकता है, तुम बस मज़े लो !"
मेरी चूत पूरी गीली थी.... उन्होंने अपना लण्ड मेरी चूत में डाला... हाय क्या लंड था... बहुत मोटा और एकदम कड़क... और धीरे धीरे चोदना शुरू किया.... हमारे नंगे बदन आपस में चिपके हुए थे.. वो मोटा लंड मेरी गीली चूत को ठोक ठोक कर बजा रहा था।
मैंने भी अपनी कमर उचका उचका के उनका पूरा साथ दिया... चुदाई के साथ साथ वो मेरी चूचियों को चूस रहे थे...
"आह्ह हह... और चोदो मुझे... मेरी चूत का अच्छे से इलाज करो... और चोदो... !"
थोड़ी देर में मेरा शरीर अकड़ने लगा, कुछ अजीब सा लगा और एक कंपकंपी के साथ मेरी चूत में से कुछ निकला...
बाद में डॉक्टर ने बताया कि इसे चरमोत्कर्ष यानि झड़ना कहते हैं....
डॉक्टर तो अभी भी मुझे चोद रहे थे... अब उनके झटके तेज़ हो गए थे... मुझे थोड़ा दर्द भी हो रहा था पर बहुत मज़ा आ रहा था...
थोड़ी देर के बाद उनका शरीर अकड़ने लगा, उन्होंने झटके से लंड बाहर निकाला और अपना सारा पानी मेरे पेट पर छोड़ दिया...
उस दिन के बाद लगातार एक हफ्ते तक ऐसे ही स्पेशल इलाज चला...
इलाज के बाद से न जाने मैं कितनों के नीचे लेटी हूँ... न जाने कितने लण्ड खाए हैं... पर उस डॉक्टर जितना मज़ा किसी ने नहीं दिया.... हाय क्या इलाज था

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