हरामी की कहानियां
अब तक इंतजार करते करके मै, कपिल और दिनेशभाई दो दो पेग लगा चुके थे।

दरवाजे की गंटी बजी, तो हम सबके कान एक साथ खड़े हो गये।
कपिल और दिनेश भाई को बैठने का इशारा करके, मैं खड़ा हुआ, "लगता है खान भाई ने माल पहुंचा दिया।"

मैने दरवाजा खोला, तो खुद खान भाई थे।

पर वो तो माल भेजने वाले थे ना?

हल्के नशे की हालत में अपनी जबान संभाल कर मैने पूछा, "अरे खान भाई, आप? मुझे बुला दिया होता?"

खान भाई थोड़ी मुश्किल में लग रहे थे, मुझे ही बाहर खींच लिया और दरवाजा बंद कर दिया, "अजय, तेरे से जरूरी बात करनी है।"
"कुछ लफड़ा है क्या?"

"नहीं रे। साली मुंबई में कोई ऐसा लफड़ा है जो खान न हैंडल कर सके? बस एक जरूरी काम है, नीचे चल, बताता हूं।"

"एक मिनट खान भाई" मैने दरवाजा खोला, और अंदर बैठे कपिल और दिनेशभाई को बता दिया की मैं खान भाई के साथ जा रहा हूं। खान भाई जितना पहुंच वाला है, उतना ही खतरनाक भी। डांस बार से लेकर ड्र्ग्स तक की सप्लाई, रेलवे का टेंडर फिक्स करने से लेकर सुपारी लेकर मरवाना, हर काम में खान भाई माहिर था। पुलिस और नेता, दोनो में खान भाई की दखल है। आखिर मैं भी तो खान भाई की वजह से बांद्रा की एक शानदार सोसायटी में मुफ्त में रह रहा हूं? ये जो शराब ऊपर कपिल और दिनेशभाई पी रहे है, वो भी तो उनके ठेके से आधे दाम मे लेकर आया हू?

फिर मैं खान भाई के साथ नीचे आ गया। नीचे खान भाई की चमचमाती एंडेवर खड़ी थी। खान भाई ने दरवाजा खोला और मुझे अंदर घुसने को बोला। मै अंदर घुस गया। अंदर एक लड़की बैठी थी, बुर्का पहन कर।
"तूने आज माल मांगा था न, ये रहा तेरा माल" - खान भाई ने लड़की को इशारा किया, तो उसने अपना बुर्का हटाया। गज़ब की खूबसूरत लड़की थी वो। मेरे लिए आज की रात का इतना शानदार इंतजाम हो गया था की मैं कुछ समझ ही नहीं पा रहा था। वैसे खान भाई के लिए मुश्किल नहीं था - वो तो एक फोन पर सिरियल और माडलिंग में काम करने वाली खूबसूरत लड़कियां भी ला सकते थे। पर ज्यादा टेंशन इस बात की थी की खान भाई को क्या जरूरी काम है।

"ये नीतू है।" खान भाई ने मेरा मेरी रात की हमसफर के साथ परिचय कराया, "ये ***EDITED*** की थी जब मैने इसे बंगाल से खरीदा था। इसके आने के कुछ दिनों के बाद मेरा बेटा मर गया, तो मैने चोदना, शराब, सब छोड़ दी। इसे अपने लिए लाया था, पर आजतक छुआ भी नहीं है। आज से ये तेरी, इसकी ट्रेनिंग तू करेगा।"

मै सुन रहा था, और मन ही मन खुश हो रहा था। इतनी कमसिन और कोमल लड़की, जिसे किसी ने आज तक छुआ भी नहीं था, वह आज से मेरे पास रहने वाली थी?

"ठीक है खान भाई, जैसा आप बोलो।" मैने सहमति दी, खान भाई ने आगे कहा, "पर ये अभी बिल्कुल कच्ची है। इसीलिए खुद ही पहुंचाने आया हू। आगे इससे जो भी करा ले, पर अभी ये तुझ अकेले को नहीं झेल पाएगी, तीन मे तो मर जाएगी।"

ओह्ह, तो इस लिए खान भाई खुद आए थे - उन्हे मेरा एक पर तीन वाला खेल पता है।

"इसलिए कपिल और दिनेश को आजके लिए मना कर दे।" खान भाई ने कहा, "मेरे पास उनके लिए दूसरा अरेंजमेंट है। पर इसे कुछ दिनों तक बस तू ही छुएगा, और अकेला छुएगा। तेरा वो अमेरिकन स्टाईल पता है मुझे, ऊपर नीचे दोनो तरफ एक साथ वाला, पर इसके साथ नहीं, समझा ना?"

"ठीक है भाई।" मैने कहा। खान भाई ने नीतू को प्यार से निहारा, "अपनी बच्ची की तरह पाला है मैने इसे। किसी और को नहीं देता, पर तू भी मेरे बेटे की तरह है, आखिर जब इसे किसी से शुरुआत करनी ही है, तो तू ही सही।"

फिर वह सारी भावनाओं को झटका देकर मेरी ओर मुडे, "तू कपिल और दिनेशभाई को फोन लगा और नीचे बुला, और इसे सीढ़ी से लेकर जा, जब वे पहुंच जाएंगे तो मै तुझे मिस काल कर दूंगा, तू लिफ्ट ले लेना। मै नहीं चाहता की वो ठरकी इस फूल सी बच्ची को देखें।"

मैने दिनेशभाई को फोन किया और बोला की खान भाई बुला रहे है। फिर खान भाई ने खुद ही उनसे बात की और उन्हे बुलाया। वो लोग मेरे फ्लैट से निकल रहे होंगे जब खान भाई ने मुझे एक कैमरा दिया और कहा, "और हां, जो भी करना, मतलब जो भी करना, इसमें रिकार्ड करते जाना, नई लड़की का विडियो, पुरानी दारू से भी महंगा बिकता है। ये भर जाए तो अपने लैपटाप में सेव कर लेना, लेकिन जो भी करना, चाहे जितनी बार, जैसा भी, सबकुछ रिकार्ड कर लेना। बहुत पैसा खर्च किया है मैने नीतू पर।"
खान भाई को मै समझ न सका। अभी तो बच्ची जैसी लग रही थी उन्हे, अब उससे कमाना है। खैर, यह तो उनकी पुरानी आदत है - न कभी खान भाई अपने बेईमानी के धधे को छोड़ पाए, न कभीं अपने ईमान को।

मैने नीतू का हाथ पकड़ा और उसे लेकर सीढीयों पर आ गया। मेरा फ्लैट 16वे माले पर है, इतना न कपिल और दिनेश नीचे सीढीयां उतर कर आ सकते थे, और ना ही मैं और नीतू सीढ़ीयां चढकर जा सकते थे। मुझे दिख गया था की लिफ्ट नीचे आ रही है। मैं नीतू को लेकर तीसरे माले की सीढ़ियों पर खड़ा हो गया। नीतू ने बुर्का चेहरे पर डाल रखा था, इसलिए उसका चेहरा दिख नहीं रहा था। बस नाजुक सी हथेली मेरे हाथों में जकड़ी हुई थी।

खान भाई की मिस काल आई, तो मैने लिफ्ट का बटन दबाया। लिफ़्ट नीचे से आई, खाली। वैसे भी रात के पौने बारह बजे बिल्डिंग के कम लोग ही लिफ्ट का इस्तेमाल करते हैं।

मैं नीतू को लेकर अपने फ्लैट में आ गया और उसे अंदर से अच्छे से बंद कर लिया। यह फ्लैट भी खान भाई की वजह से मिला था।

मै तो एक काल सेंटर में काम करने वाला साधारण लडका था, जिसकी कमाई बस इतनी थी की एक कमरे में हम दो दोस्त - मै और कपिल रहते थे, और मिला जुला कर जी लेते थे। मैने एक जीम ज्वाइन किया था, जिसमें रात की फीस कम होने की वजह से रात में जाता था। एक रात दो बजे के करीब जब मैं जिम से बैडमिंटन खेल कर लौट रहा था, तो देखा की सुनसान सड़क पर एक आदमी को कुछ लोग मारने के लिए दौड़ा रहे थे। जाने क्यू, किस बेवकूफी में, मै उन लोगों की ओर दौड़ पड़ा और जब वे उस आदमी को घेरने ही वाले थे, मै बीच में पहुंच गया और मारने वाले लोगों मे से एक के सिर पर रैकेट दे मारी, जिससे वह वही ढेर हो गया और मेरी रैकेट दो टुकड़े हो गई। मुझे अपनी गलती का अहसास तब हुआ जब उसमें से एक ने बंदूक निकाल कर मेरे उपर गोली दाग दी। मैने बचने की कोशिश की, पर गोली मेरे कधे पर लग गई। मै दर्द और गुस्से से पागल हो गया, और मैने रैकेट का टूटा हिस्सा उसकी आंख में घुसेड़ दिया। जाने क्यूं मैने उस आदमी के लिए जान का खतरा मोल लिया था।

मै शायद उस रात मर ही जाता अगर अचानक चार पाच गाड़ियों मे उसके आदमी न आते, जिन्होने न सिर्फ़ उस आदमी को बचा लिया और उस पर हमला करने वाले गुंडों को घेरकर गोलीयों से उड़ा दिया, बल्कि मुझे लेकर लीलावती अस्पताल, जो मुंबई के सबसे बड़े अस्पतालों मे से एक है और जहां बड़े बड़े फ़िल्म स्टार्स आते है, वहां इलाज भी कराया।

जब मुझे होश आया तो पता चला की मैने मुंबई के सबसे खतरनाक और पहुंच वाले आदमी की जान बचाई है।

यह आदमी खान भाई थे, जिनके लिए मै एक फरिश्ता हो चुका था, जिसमें उन्हे अपने मर चुके बेटे का अक्स नजर आता था। सजोग की बात देखिए, खान भाई का बेटा भी उस रात बैडमिंटन का टूर्नामेंट खेलकर उनके साथ ही घर आ रहा था, जब खान भाई की कार पर हमला हुआ था, और उनका लड़का उनके हमलावरों के सामने ढाल बनकर खड़ा हो गया था। सोलह साल का लड़का अपने अब्बू को बचाने में मर गया था। आज वह जिंदा होता तो खान भाई के मुताबिक, मेरी ही उमर का होता।

मेरा उसके बराबर होना, रात को बैडमिंटन खेलकर लौटना, और हमलावरों के सामने कूद पड़ना, जाहिर है, खान भाई के लिए मै एक आम आदमी से बढ़ कर था। कभी कभी नशे की हालत में वो मुझे फोन करते थे तो अजय नही, रिजवान कहते थे, जो उनके मर चुके बेटे का नाम था।
खान भाई ने ही अपने कांटैक्ट की मदद से मेरी अच्छी नौकरी लगवाई और मुझे अपना ही प्लैट रहने को दे दिया। मुंबई में पासपोर्ट बनावाना हो या फिल्मस्टार्स की पार्टी में जाना, मुझे तो बस खान भाई को एक फोन करना होता था। कपिल उसी काल सेंटर में है, पर आज वह वहां का रिजनल हेड है - खान भाई की बदौलत। खान भाई का खजाना - दारू और लड़कीयां, मेरे लिए खुला हुआ था - मैने तो चार चार लड़कियां एक साथ चोदी हैं। एक बार एक क्रिकेट खिलाड़ी की गर्लफ़्रेंड को मै स्टेडियम के बाहर तब चोद रहा था जब वह क्रिकेटर अंदर बैटिंग कर रहा था, और उसके आउट होते ही वह कपड़े पहन कर अंदर चली गई थी।

मैने नीतू को बोला, "तू कंफर्टेबल हो जा। चाहे तो कपड़े बदल ले, और कुछ खाना हो तो खा ले। मै जरा कैमरा सेट कर लू।"

मैने दूसरे कमरे में से दारू की बोतल, ग्लास और नमकीन की प्लेट हटा दी। झाड़ू लगा कर निचे पड़ी गंदगी को साफ कर दिया। बिस्तर की चादर बदल दी, और खिड़की बंद करके ए सी चालू कर दिया। रूम फेशनर भी छिड़क दिया।

नीतू बुर्का उतार चुकी थी। सलवार कमीज में थी। पहली बार मैने उसे रोशनी में देखा था, वह गजब की खूबसूरत थी। गोल, गोरा चेहरा, कजरारी बड़ी बड़ी आखें। खान भाई की खान का सचमुच हीरा थी वो। मेरी किस्मत बहुत अच्छी थी की मै ही उसका कौमार्य तोड़ने वाला था।

मोबाईल बजा, देखा तो खान भाई का मैसेज था, "लड़की को अच्छे से तैयार कर लेना, फिर चढ़ना। कली है, फूल बनाने में मसल मत देना।"

मै समझ गया की क्या करना है। नीतू इतनी सुंदर और कमसिन थी, की जबरदस्ती करने का ख्याल मन से निकाल दिया। आखिर जब तक चाहूं, तब तक इसे अपने पास रख सकता था। जल्दी क्या है? मैं वैसे भी उन टी वी कलाकारों से तंग आ चुका था तो रात में 2 घंटे के लिए आती थीं, खूब सारी दारू पीकर मशीन की तरह चुदवाती थीं, और समय पूरा होते ही नहा कर कपड़े पहन कर निकल जातीं थी की सुबह शूटिंग पर जाना है।

"तुम कुछ खाओगी?" मैने नीतू से पूछा। उसने बस सर को हिला कर ना में जवाब दे दिया। शायद वह बहुत डरी हुई थी।

मुझे पता था की उसका डर कैसे दूर करना है, ताकि उसे भी मजा आए और वह खुल कर मेरा साथ दे।
नीतू : 2


मोबाईल बजा, देखा तो खान भाई का मैसेज था, "लड़की को अच्छे से तैयार कर लेना, फिर चढ़ना। कली है, फूल बनाने में मसल मत देना।"

मै समझ गया की क्या करना है। नीतू इतनी सुंदर और कमसिन थी, की जबरदस्ती करने का ख्याल मन से निकाल दिया। आखिर जब तक चाहूं, तब तक इसे अपने पास रख सकता था। जल्दी क्या है? मैं वैसे भी उन टी वी कलाकारों से तंग आ चुका था तो रात में 2 घंटे के लिए आती थीं, खूब सारी दारू पीकर मशीन की तरह चुदवाती थीं, और समय पूरा होते ही नहा कर कपड़े पहन कर निकल जातीं थी की सुबह शूटिंग पर जाना है।

"तुम कुछ खाओगी?" मैने नीतू से पूछा। उसने बस सर को हिला कर ना में जवाब दे दिया। शायद वह बहुत डरी हुई थी। उसके काले घने बाल कमर तक लंबे थे, जिसे उसने बांध रखा था।

मुझे पता था की उसका डर कैसे दूर करना है, ताकि उसे भी मजा आए और वह खुल कर मेरा साथ दे।

मै किचेन में गया, एक डिब्बे में नमकीन रखा था। मुंबई में इसे फरसाण कहते हैं। मैने एक प्लेट में निकाला और थोड़े बिस्कुट भी प्लेट में एक तरफ रख दिए। मै कमरे में वापस आया। नीतू अभी तक वैसे ही, बिस्तर के एक तरफ, सिकुड़ कर बैठी हुई थी। वह तो इतनी डरी हुई थी की मेरी तरफ देखा तक नहीं। मैने प्लेट उसकी तरफ सरका दी, और कहा, "ये लो, खाओ। खाने में क्या लोगी? मैं आर्डर कर देता हूं।"

"जी, मैनें खाना खा लिया है?" उसने नजाकत और डर में घोल कर अपनी आवाज सुनाई।

"कहां खाया खाना?" मैने पूछा, अब मौका था उससे घुल मिल जाने का।

"जी, घर से खा कर चली थी।" उसने पहली बार आखें मिलाई, और जैसे ही मेरी नज़रों से उसकी नज़र मिली, उसने फिर से आखें घुमा ली और जमीन की ओर देखने लगी। उसकी आखें बहुत सुंदर थी। बड़ी और चमकीली। गोरे चेहरे पर काली भौहें जो बीच में हल्के से मिल रहीं थी। उसके ठीक नीचे एक नुकीली सी नाक। नाक के थोड़ा नीचे भरे, गुलाबी होठ। बला की खूबसूरत थी वो।

वैसे तो मैने एक से बढ़कर सुंदर लड़कियों को चोदा है, कुछ तो मॉडल और स्ट्रगलींग हिरोइनें भी थी, पर वो सारी मेकअप से पुती रहती थी, जिनके चेहरे की सुंदरता उनके मेक अप आर्टिस्ट की बदौलत थी। चोदने के बाद पसीने से या चेहरे पर वीर्य गिराने से जब मेक अप धुल जाता है तो उन लड़कियों की ओर देखने का भी मन नहीं करता। यह लड़की बहुत अलग थी। कोई बनावट नहीं, सबकुछ बिल्कुल प्राकृतिक और सुंदर। जाने ऐसी लड़कियां हिरोइन क्यों नहीं बन पाती। शायद उनकी खूबसूरती ही उनके इस नर्क में जाने का कारण बन जाती है।

पर मुझे ज्यादा सोचना नहीं है। खान भाई ने मुझे इसे तैयार करने को कहा है, और मुझे इसे तैयार करना है। मुझे इसे हर तरीका सिखाना है, इंडियन भी और अमेरिकन भी।

मुझे रुकना नहीं है। बहुत मजा आने वाला है।
मैने फिर एक सवाल दागा, "तुम रहती कहा हो?"

"नूरी आपा के घर" नीतू ने जवाब दिया। नूरी आपा से मैं कभी मिला तो नहीं, पर ये जरूर जानता था की खान भाई की खान के सारे अनगढ़ हीरे नूरी आपा के वसई वाले घर में तब तक रहते हैं जब तक वह धंधे के लिए तैयार नहीं हो जाते। यह नूरी आपा ही बाहर से खरीदी गई बच्चीयों को सम्भालती थीं। पहले की कई लड़कियां भी नूरी आपा के घर पर ही पली थीं। जिस समाज में उनके शरीर की कीमत लगती है, नूरी आपा उस समाज में इन बेसहारा लड़कियों के लिए मा, सहेली और शिक्षिका थीं। वही एक विश्वास पात्र थीं जिनसे हर तरह से सवाल जवाब, ख्याल और दर्द ये लड़कियां बांट सकती थीं।

"पर अब तो नूरी आपा के घर नहीं रहोगी ना?" मैने पूछा। खानभाई और नूरी आपा का एक नियम था की धंधे पर आ चुकी कोई भी लड़की नूरी आपा के वापस नहीं जाएगी। वह नूरी आपा से बात कर सकती है, मिल भी सकती है, पर कभी भी उनके घर पर वापस नहीं जा सकती। ऐसा आगे वाले लड़कियों को सम्भालने के लिए किया गया था।

"हां।" उसने जवाब दिया। उसका हाथ नमकीन की तरफ बढ गया, "खान साहब ने कोई जगह देखी है, किसी अजय के घर पर रहने को बताया है। कल वे ही ले जाएंगे।"

"अजय के घर?" मन ही मन बुदबुदया। मुझे थोड़ा आश्चर्य हुआ। अजय तो मैं हूं। तो क्या ये लडकी कुछ दिनों तक मेरे फ्लैट पर रहेगी? मेरे तो जलवे हो गये। अब तो मै और मदहोश हो गया।

मन में लड्डू फूंट रहे थे, पर जल्दी किस बात की है? जब खान भाई ने बोला की आराम से करो तो आराम से ही करूंगा। अब तो मुझे इस लड़की को छुने से भी पहले इसका दिल जीतना है, ताकी ये मेरा पूरा साथ दे सके। भले इसके लिए आज की रात मुझे बिना कुछ किए बितानी पड़े। मर्दों के लिए आसान है पागल कुत्तों की तरह टूट पड़ना और दो मिनट में झड़ जाना, पर असली खिलाड़ी तो वो है जो पूरे इत्मीनान से जन्नत की सैर करे और हर नजारे का पूरा फायदा उठाए।

कुछ पल कमरे में सन्नाटा छाया रहा, वह अभी भी डरी हुई थी, हालांकि डर अब कम था। कम से कम अब वह इधर - उधर देख ले रही थी, और प्लेट से नमकीन भी खा रही थी। शायद उसे भी समझ आ गया था की मैं इसांन ही हूं, वरना पहले तो उसने मुझे राक्षस वाली निगाह से देखा था।

"अजय के घर?" मैने कमरे का सन्नाटा मिटाते हुए पूछा। उसने मेरी तरफ देखा। इस बार थोड़ी ज्यादा देर तक मेरी नज़रों से नज़रें मिलाए रखीं। "जी हां। ऐसा ही कुछ बताया था उन्होने। आप जानते हैं अजय को?" उसने पूछा। चलो, पहली बार उसने मुझसे कुछ पूछा तो।
"मिला तो नहीं हूं, पर सुना है बहुत हरामी है। कई लड़कियों ने उसके बारे में बताया है की वह जल्दी नहीं हारता। लंबी रेस का घोड़ा है और हद दर्जे का कमीना भी।" मैने अपनी प्रशंसा में चंद शब्द कहे। उसके चेहरे पर उतर आई सुर्ख लाली देखकर ही समझ आ गया की वह बहुत ज्यादा डर गई थी। अभी तक जो थोड़ा बहुत आराम उसके चेहरे पर आया था, वह उड़ गया।

"तुम्हे पता तो है ना की तुम क्या करने वाली हो?" मैने चुटकी लेते हुए पूछा।

उसने नजरें झुका कर जवाब दिया, "हां"।

मै तो दर हरामी हूं ही। लड़की के मजे लेने से कौन रोक सकता है मुझे? "तो बताओ, की तुम क्या करने वाली हो?"

"जी… जी… वो… वो" वह शर्म और डर से गड़ी जा रही थी। उसने चेहरा झुका लिया था, और अपने पैरों को देख रही थी। "क्या वो वो?" मैने जोर दिया, "बताओ ना, क्या करने वाली हो? उसे क्या कहते है?"

उसने हथेली से चेहरा छुपा लिया, "जी… जी… वो…"

मैने उसे और डराया, "जब बोलने में तेरी ये हालत हो रही है, तो वो हरामी अजय तो तुझे मार ही डालेगा।"

उसका हाथ काप रहा था। पूरी हिम्मत जुटा कर, उसने नीचे देखते हुए ही धीमे से बोला, "सेक्स"

"क्या?" मैने आवाज ऊंची करके फिर से पूछा, "क्या बोला?"

"जी…" उसने आवाज को जोर लगाते हुए भी धीमा करते हुए कहा, "जी… सेक्स"

"इधर देख कर बोलो ना" मैने अपनी हथेली से इशारा करते हुए कहा, "साफ़ सुनाई नहीं पड़ रहा है।"

उसने एक पल को नजर मिलाई। चेहरा लाल हो गया था, पलकें जोर से बन्द करके उसने ताकत लगा कर बोला, "जी, सेक्स करना है, सेक्स।"

"ये क्या होता है?" मुझे महीनों बाद कोई ऐसी लड़की मिली थी, जो इतनी शर्मीली थी। यह साबित करती है की लड़की बिल्कुल नई है, क्यूंकि इस खेल में लड़की जैसे जैसे पुरानी होती जाती है, उसकी चूत की चौड़ाई बढ़ती जाती है और शरम कम होती जाती है। मुझे यकीन हो गया कि मुझे एक बहुत टाईट चूत की गहराई नापने का मौका मिलने वाला है। जब लडकी ये शब्द बोल भी नही सकती, तो क्या खाक किसी ने इसकी सील तोड़ी होगी? सील तोड़ना तो दूर की बात है, मुझे तो लगता है, किसी ने किस भी नहीं किया होगा इसे।

वह शरम से लाल हो रही थी।

"बताओ ना, ये सेक्स क्या होता है?" मैने नौटकी की हदें पार करके कहा।

वह शरम, हया, और मासूमियत का पुतला बन गई थी। शायद वह सोच रही थी की वह क्या बोले जब मैने उसपर थोड़ी दया कर दी - "देखो, मुझे इंग्लिश नहीं आती। इसे हिंदी में क्या कहते है?"
वह शरम से लाल हो रही थी।

"बताओ ना, ये सेक्स क्या होता है?" मैने नौटकी की हदें पार करके कहा।

वह शरम, हया, और मासूमियत का पुतला बन गई थी। शायद वह सोच रही थी की वह क्या बोले जब मैने उसपर थोड़ी दया कर दी - "देखो, मुझे इंग्लिश नहीं आती। इसे हिंदी में क्या कहते है?"

अब उसकी हालत देखने लायक थी। सेक्स को पूरी तरह परिभाषित करने से तो वह अभी बच गई थी, पर उसे अब वो शब्द अपनी जबान से लेना था। मुझे पता था की उसे भी अब मजा आ रहा है।

"जी… चुदाई।" उसने हल्के से जवाब दिया।

"चुदाई!" मैने इतनी जोर से बोला की उसे पूरा शब्द साफ साफ सुनाई दे।

"हां, तुम्हे चुदाई करनी है। तुम्हे पता है ना की चुदाई कैसे करते है?" मैने एक और बाऊंसर डाला, "तुम्हे आती है चुदाई करने?"

"नही।" उसने अब जाके अपनी शरम को दूर हटाया, "पर मुझे पता है की क्या क्या करते हैं।"

"अच्छा जी?" मैने आखें तरेर कर कहा। नीतू अब थोड़ी सहज हो चुकी थी। मुझे समझ आ चुका था की वो गरम भी हो रही होगी। यह सोचकर की उसकी टाईट चूत गीली हो रही होगी, अभी तक दुपट्टे से ढके उससे मम्मों के निप्पल टाईट हो रहे होंगे, उसके जिस्म कि बढ़ती गरमी को सोचकर ही मेरा लंड खड़ा होने लगा।

पर अभी तो मुझे बहुत कंट्रोल करना है। ऐसी लड़की मिली है जिसकी सील भी नहीं खुली, कल सटर्डे और परसों संडे की वजह से आफिस में छुट्टी है, और कपिल भी तभी लौटेगा जब मैं खान भाई को उसे भेजने के लिए कहूंगा, मेरे पास बहुत समय है। जल्दी जल्दी में मैं इस खास मौके के मजे को खोना नहीं चाहता। आखिर एक सील को प्यार से, मजे लेते और देते हुए तोड़ने की बात ही कुछ और है। हर लड़की के लिए ये पल बहुत कीमति होते हैं जब वह पहली बार अपने चूत के दरवाजे से किसी लंड को अन्दर बुलाती है। उस खास पल के लिए लड़कियों में भी बहुत सारे सपने और उम्मीदें होती हैं, उनसे जुड़ा बहुत सारा प्यार और अपनापन होता है, पर नीतू जैसी लड़कियों की किस्मत में वो सारे सपने, उम्मीदें, प्यार और अपनापन नहीं होता। ज्यादातर से तो तभी उनकी मासूमियत छीन ली जाती है जब उन्हे पता भी नहीं होता की इस खेल में मजे भी होते हैं। बहुतों के लिए तो ये बस एक दर्द भरे डरावने सपने की तरह होता है, जिसमें सनक, वासना, अत्याचार और धोखा ही भरा होता है।

धीरे धीरे उन्हे आदत पड़ जाती है, इस अधेरे, दर्द भरे जीवन की और फिर वह जिंदा लाश की तरह हो जाती हैं, बिना किसी दर्द, बिना किसी प्यार, बिना किसी अपनेपन के, बस एक बेशर्म, निर्लज्ज जिस्म की तरह, और उनकी जिंदगी उसी अंधेरे में डूब जाती है, जहां न तो कोई उम्मीद है, न चाहत, न कोई रंग।

नहीं, कम से कम नीतू के साथ ऐसा कुछ नहीं करुंगा। एक लड़की मिली है, जिसे प्यार क्या होता है, दिखाउंगा। चाहे एक पल के लिए ही सही, उसकी जिंदगी में वो रंग भरूंगा जो हर लड़की का ख्वाब होता है। आगे तो उसे दर्द और दहशत मिलनी ही है, पर मेरे पास से उसे कम से कम एक बार तो प्यार जरूर मिलेगा।

अपने अजगर को मनाया की शांत हो जा, अभी तो शिकार करने को बहुत समय है।

"तो बताइये की क्या क्या करते है?" मैने ये सवाल दागा तो नीतू के चेहरे का लाल रंग और सुर्ख हो गया।
अपने अजगर को मनाया की शांत हो जा, अभी तो शिकार करने को बहुत समय है।

"तो बताइये की क्या क्या करते है?" मैने ये सवाल दागा तो नीतू के चेहरे का लाल रंग और सुर्ख हो गया।

मेरे इतने बोलने, समय काटने का असर ये हो रहा था की नीतू थोड़ी सहज हो गई थी। उसके चेहरे का डर कम हो गया था, पर हां, शर्म की लाली बढ़ गई थी।

मैने उसके जवाब का इंतजार किया। वह कोशिश कर रही थी, या समय काट रही थी, ये समझने की जरूरत नहीं थी मुझे। मुझे जो सही लग रहा था, वह मै कर रहा था। लड़कियां तो अपने आप लाईन पर आ ही जाती हैं।

उसकी बड़ी बड़ी आखें, नीचे जमीन पर, इधर उधर घूम रही थीं। वह इस सवाल से भागने कि कोशिश कर रही थी।

"नीचे लिखा है क्या?" मैने पूछा? जवाब में फिर से उसकी नजरें मेरी तरफ बढ़ी, मेरी नज़रों से मिली, और झुक गई। और यह सब कुछ निहायत ही खूबसूरत था। यूं हीं नही हर शायर की नज्म में इसका जिक्र होता है। ऐसे ही नहीं गज़लों गीतों में यह अदा शायरों को परेशान करती है। दिल में एक ठहराव, दिमाग में एक सूकून सा आ जाता है, बस एक पल के लिए, जिस पल में आपकी दुनिया रंगीन हो जाती है। जब ग़ालिब और फ़ैज जैसे शायरों ने उस पल के लिए कसीदे काढ़े हैं, तो मुझ जैसे की औकात क्या की मै उस पल को बयान कर सकू।

वह बस मुस्कुरा दी। एक शरारत, नजाकत और हया से भरी मुस्कान। इसके पीछे कोई दर्द भी होगा, शायद कोई भयानक इतिहास, पर अभी के लिए वो यादें, वो दुख हम दोनो से दूर था।

बांद्रा की इस हाउसिंग सोसायटी के सोलवहे माले पर बने इस तीन बेडरूम के फ्लैट में, जहां से समुद्र, बांद्रा वरली सी लिंक (जो इस घटना के समय बन रहा था), और बैंड्स्टेण्ड पर बनी वो बिल्डिंग जिसके दूसरे माले पर सलमान खान रहता हैं, दिखते थे, और जहां हर शाम मै, मेरा कालेज का दोस्त कपिल, और खान भाई के चहेते शेयर दलाल दिनेशभाई समुद्र से आती हवाओं का लुत्फ़ उठाते हुए शराब की बूंदों के बीच खूबसूरत लड़कियों के जिस्म की गहराइयों और उंचाइयों के मजे लेते थे, उसी फ्लैट के हॉल में आज दो जिस्म, दो जान एक दूसरे में समा जाने के लिए एक दूसरे से नजदिकियां बढ़ा रहे थे।

मैने जवाब के इंतजार में एक बार पूरी तरह से नीतू के जिस्म का मुआयना किया। बीच में जुड़ती भौहों, बड़ी आखों, नुकीली नाक, सुर्ख होठों और कुहनियों तक आते लंबे बालों के बारे मे तो मै बता ही चुका हूं, अब आपको उसके सलवार कमीज में छिपे उस जिस्म के बारे में बताता हूं। आप उसके जिस्म को देखकर ही कह सकते है की हद से हद बीस साल की उमर होगी। उसके उरोज, आप चाहे तो उसे वक्ष या मम्मे भी कह सकते हैं, कमीज पर कस कर चिपके हुए थे। गरदर से चिपक कर शुरु हुआ दुपट्टा भी उसके मम्मों पर टिका हुआ था और अपने काम को बखूबी कर रहा था, जिसकी वजह से मेरी तरफ उसके हल्का झुके होने के बावजूद मुझे भीतर का कुछ नजर नहीं आ रहा था। कुछ चींजों की बस संभावना की जा सकती है, और मै नीतू के निप्पल के रंग और आकार - प्रकार की बस कल्पना ही कर सकता था। कमीज आधे बांह की थी, जिससे उसके दोनो गोरे हाथ साफ साफ नजर आ रहे थे। नीचे कमीज में कमर की तरफ ऐसा कोई थी उभार नहीं था जिससे यह अंदाजा लगाया जा सके की नीतू मोटी है। शायद एक कतरा भी एक्स्ट्रा चर्बी का नहीं था। कमर के नीचे का हिस्सा, जो उस चूड़ीदार सलवार में कैद था, छरहरा था। चूड़ीदार सलवार से पैरों का अंदाज लगाना थोड़ा मुश्किल होता है, पर मेरे लिए यह समझना आसान था की नीतू के जिस्म का एक एक हिस्सा जैसे सांचे में ढला था।

वह जिस्म जिसे अभी तक किसी ने नहीं छुआ था।

खान भाई ने जो जिम्मेदारी नूरी आपा को सौंपी थी, नीतू को बनाने की, उन्होने उसको भरपूर निभाया था। अब मेरी बारी थी, उसे इस धधे के लिए तैयार करने की।

इतनी देर तक समय बिताने के बाद शायद नीतू को भी लगने लगा की मैं वह सवाल भूल गया जिसकी वजह से उसके मन में फुलझड़ियां जलने लगी थी। मैने घड़ी को देखा, साढे बारह बजने को आए थे। मैने कुछ खाया नही था, आज शाम से चायनीज खाने का मन कर रहा था, इसलिए नीतू की ओर घूरते हुए फोन उठाया, " तो बताओ?" मैने थोड़ा जोर से पूछा।

नीतू अचकचा गई। "क… क्या?" वह जैसे सवाल भूल गई थी। चालाक लड़की सवाल को भूलने का नाटक कर रही थी। मै भी कम नौटंकीबाज नहीं हूं। मैने पलट कर कहा, "वही जो मैने पूछा था…"
मैने एक पल को इंतजार किया। नीतू क्या बोलने वाली थी, क्या वो चुदाई कैसे करते हैं मुझे समझाने जा रही थी, या कुछ और कहने जा रही थी, यह जानने की जरूरत नहीं थी मुझे। मैने उसके मुह खोलते ही अचानक से खेल पलट दिया, "बताओ ना क्या खाओगी? मैं ऑर्डर करने जा रहा हूं।"

उसकी जान में जान आई। फिरसे उसके चेहरे पर मुस्कुराहट तैर गई, इस बार थोड़ी लंबी लकीर में। हम तो श्रृंगार रस के कवि ठहरे। ऐसी मनमोहक मुस्कुराहट पर फिदा होना ही तो हम जैसे परवानों की फितरत है? मैं भी मुस्कुरा दिया। हम दोनो मुस्कुराए, नजरें फिर से मिली। दूर देश की हवा का एक झोंका समुद्र के रास्ते पर चलता हुआ आज मेरी खिड़की के अंदर आकर, नीतू के बालों को हल्के से छूकर अपनी मंजिल पा गया हो जैसे। मेरे कमरे में जैसे बहार आ गई हो। या शायद रिलायस की बिजली सप्लाई में एक पल को फ्लकचुएशन हुआ हो और मेरे कमरे के बल्ब जैसे थोड़ा तेज चमक उठे हों। या बादलों का टुकडा चांद के सामने से हट गया हो शायद, और मेरे कमरे में तेज चांदनी सी फैल गई हो। जो दीवार मुझे तोड़नी थी, नीतू के होठों को चूमने से पहले, उससे एक ईंट जैसे खिसक गई हो। हम दोनो के बीच की दूरी कुछ कम हो गई थी शायद।

नीतू ने पहली बार अपने बालों को पीछे किया, और अपने बैठने का ढंग थोड़ा बदला। वह थोड़ा आराम से बैठ गई। हालाकिं अभी भी उसके जिस्म का दीदार होने की कोई गुंजाइश नहीं थी, और मुझे मेरी कल्पनाओं का सहारा लेना पड़ रहा था, पर जल्दी किस चूतिये को थी और कौन सा रात भागी जा रही थी?

"मैने खाना खा लिया है।" उसने फिर से वही कहा। मैने नंबर मिलाते हुए कहा, "फिर भी, रात में भूख लग गई तो? मै तो अपने लिए चाइनीज़ ऑर्डर कर रहा हूं, तुम्हे कुछ चाहिए तो बोलो। कुछ पीना हो तो भी बोल दो वरना दुकानें बंद होने वाली होंगी।"

"नहीं" उसने मना कर दिया, पर इस बार वह काफी सहजता से बोली, "मुझे चाइनीज खाना बिल्कुल पसंद नही और वैसे भी, मैं रात को कुछ नहीं खाती।"

"चलो, जैसी तुम्हारी मर्जी। वैसे अगर भूख लगे, तो बता देता, मैं कुछ बना दूंगा। रात लंबी है…" मैने थोड़ा प्यार दिखाया और थोड़ा रूक कर एक लंबी सांस ली और बोला, "…और आज रात मैं तुम्हे सोने नहीं देने वाला। बहुत थकाने वाला हूं" मैने उसकी नजरों से नजरें मिलाते हुए शरारती लहजे में कहा। उसने भी बस नजरें झुका कर और अपने होठों को दांत से दबाकर मुझे इशारों ही इशारों मे ये समझा दिया उसके मन से भी अब झिझक मिट रही है और वह धीरे धीरे तैयार हो रही है।

सेक्स करने की इच्छा प्राकृतिक होती है। यह आदमी और औरत, दोनो मे होती है। बस, आदमी अपनी इच्छाओं का खुलकर प्रदर्शन कर देते हैं, औरतों पर समाज की कई बंदिशें होती है, जिसकी वजह से वह अपनी भावनाओं का खुलकर इजहार नहीं कर पाती। जिन्हे लगता है की ये इच्छाएं मॉडर्न होते समाज का दोष हैं, वे लोग यह क्यों भूल जाते हैं की पिछड़े से पिछड़े गावों मे भी शादी शुदा महिलाओं के गैर मर्द से संबंधो के किस्से मिल जाते हैं। सेक्स की वजह से ये संसार चल रहा है, और इस बात तो चाहे जो भी तर्क दे दो, झुठलाया नहीं जा सकता।

और नीतू तो जिनके बीच जगह पली - बढ़ी, उसे तो अच्छे से पता है की आगे उसे क्या करना होगा। वह भी धीरे धीरे अपने डर पर काबू कर रही थी।

आखिर डर के आगे चूत… मेरा मतलब जीत है!

मैने अपने लिए खाना आर्डर कर दिया।


Read More Related Stories
Thread:Views:
  हरामी फैमिली 147,461
  एक नम्बर के हरामी बूढ़े 21,131
 
Return to Top indiansexstories