सुहागरात की कहानी : तान्या की जुबानी
मेरा नाम तान्या है . मैंने दिल्ली के एक नामी कॉलेज से इंजीनियरिंग किया है। अभी 2 महीने पहले मेरी शादी हुई है। मैं आप लोगों से अपनी सुहागरात एवं उसके बाद के अनुभव शेयर करना चाहूंगी।

मेरी शादी कॉलेज ख़तम होते ही तय कर दी गयी थी। लड़का पापा ने पसंद किया था क्यों की वो काफी खानदानी लोग थे और धनवान भी। मैं शादी के पहले अपने पति से मुश्किल से 2-3 बार ही मिली थी, वो भी घर वालो की उपस्थिति में। फ़ोन पर भी बातें कम ही हुआ करती थी। पर मेरे पति मुझे काफी डराया करते थे की शादी के बाद देखना ये करूँगा वो करूँगा। मैं उनकी बातें सुन क शर्मा जाती थी। पर कुछ बोलती नहीं थी। मेरी सहेलियों ने भी कभी कुछ ज्यादा नहीं बताया था सुहागरात के बारे में।

हमारी इंगेजमेंट वाले दिन मुझे पहली बार पता चला की उन्हें नाभि देखने का काफी शौक है। मेरे फ़ोन पर उनका सन्देश आया सगाई के एक दिन पहले की मैं अगले दिन नाभिदर्शना ड्रेस पहनू तो उन्हें अच्चा लगेगा। मैं एक लेहेंगा पहन ने वाली थी। मैंने अपनी फ्रेंड से पुछा की क्या मैं नाभिदर्शना ड्रेस पहन लू। उसने बोल की अपने मंगेतर से पूछ वो ही बताएँगे की क्या पहनना है और कैसे। अब उसे क्या बताती की उन्होंने ही तो यह मांग की है।

अगले दिन मैंने वही पेहेंगा पहना पर उसे कुछ नीचे से बंधा ताकि मेरी नाभि दिखती रहे। पहनने के बाद अपने अप को आईने मैं देखकर कुछ समय के लिए मैं भी शर्मा गयी। हालांकि मैं अच्छी दिख रही थी, मगर लाइफ मैं पहली बार सबके सामने ऐसे जाने वाली थी। मेरी नजरें बाकी लोगों से मिला नहीं पा रही थी मैं। फंक्शन के दौरान मैं अपनी आखें नीचे किये रही। पर जब भी उनसे नजर मिली, तो पाया की उनकी आखें मेरी कमर पर टिकी हुई थी।
चलिए एक फोटो भी शेयर करती हूँ मैं अपनी इंगेजमेंट का।

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कैसी लगी मेरी कहानी आपको? आगे सुनना पसंद करेंगे?


खैर जो हुआ वो हुआ। सगाई के कुछ दिनों बाद शादी थी। मेरे मन मैं थोडा भय भी था की शादी के बाद क्या क्या होगा, सब से ज्यादा दर सेक्स को लेकर था। पर पूछती भी किस से। शादी के दो दिन पहले उनकी बहन का फ़ोन आया मुझे। थोड़ी बात करने करने के बाद वो बोली "भाभी अभी आपको एक मेसेज करुँगी, ध्यान से पढ़ लेना ". कॉल रखते ही मेसेज आया। उसमें लिखा हुआ था की इन्हें नाभि बड़ी पसंद है, तो मैं सुहागरात को अपनी नाभि सजाने के लिए कुछ स्पेशल करू ताकि इन्हें अच्चा लगे। मैंने सोचा की क्या क्या करना पड़ता है पति की ख़ुशी के लिए। मैंने अपनी एक फ्रेंड को बोला की मेरे साथ पारलर चले। वहां पर मैंने बाकी मेकअप के अलावा अपनी नाभि पर भी मेहंदी बनवा ली। ऐसा करना सुरक्षित था क्यों की शादी के दिन ट्रेडिशनल लेहेंगा पहनना था इसलिए किसी को नाभि दिखने का कोई दर नहीं था।

खैर शादी हो गयी और वो रात भी आ गयी जिसको लेकर मुझे इतने दिनों से इन्तेजार भी था और हल्का सा डर भी था दिल के किसी कोने मैं। मेरी सहेलियां मुझे कमरे मैं अकेला छोड़कर चली गयी। कुछ देर बाद पति आये। आकर उन्होंने दरवाजा बंद किया और मुझे बोले "थकी तो नहीं हो ना, आज सोने नहीं दूंगा तुम्हे". मैं सुन के थोडा सा दर गयी और बिस्तर पर सिकुड़ के बैठ गयी। ये मेरे पास आये और बोले "ऐसे ही सोने का इरादा है क्या तुम्हारा ?" मैंने उन्हें हैरत भरी नजरों से देखने लगी। तभी वो हँसे और बोले, "अरे मैं तोह मजाक कर रहा था। तुम्हे ऐसे थोड़े सोने दूंगा, ये कितना वजन होगा तुम्हारे जेवरों मैं, चलो उतार दो इन्हें "

मैंने शरमाते हुए अपने जेवर उतरना चालू किया। वो मुझे एकदम खा जाने वाले नज़रों से देख रहे थे।
मैंने अपने जेवर उतरना ख़त्म किया ही था की वो मेरे पास आकर बोले, "बड़ी ख़ूबसूरत लग रही हो". चलो एक खेल खेलते हैं। मैंने पुछा "कौनसा खेल ". वो बोले "मैं बताता हु". ये कह के उन्होंने अलमारी में से एक कपडे की लम्बी से काले रंग की पट्टी निकली और मेरे आखों पे बाँध दी। इसके बाद उन्होंने मुझे पकड़कर पलंग पर ले जा कर लेता दिया। कुछ देर मैं मुझे अपने हाथ के पास रस्सी जैसा कुछ महसूस हुआ। मैंने पुछा - "क्या कर रहे हैं आप . ". वो बोले - "तुम बस चुप रहो ". ऐसा कह के उन्होंने मेरे दोनों हाथ एवेम दोनों पैर अची तरह से पलंग के चारो कोनो से बाँध दिए। अब मैं ज्यादा से ज्यादा थोडा छात्पता ही सकती थी। इसके बाद कुछ देर तक वो कुछ नहीं बोले, तो मुझे लगा की हो न हो कोई शैतानी है इनके दिमाग मैं। तभी मुझे ऐसा महसूस हुआ मानो कमरे में कोई कपडा केंची से काट रहा है। मैंने पुछा - "ये कैसी आवाज है?" उन्होंने कहा - "तुम्हारा चीरहरण हो रहा है तान्या ". तभी मुझे लगा की वो असलियत मैं मेरा लेहेंगा मेरे पैरो के बीच मैं से कैंची चला कर काट रहे हैं। मैंने बोल - "ये क्या कर रहे हैं आप". वो बोले - "मेरी पत्नी हो तुम, जो करना होगा करूँगा। तुम चुप चाप एन्जॉय करो". मैं दर से चुप हो गयी। उन्होंने धीरे धीरे कर के मेरा पूरा लेहेंगा काट कर मेरे शरीर से अलग कर दिया। मुझे मेरी चड्डी पर ठंडी हवा महसूस होने लगी। मैंने बोल - "क्या कर रहे हैं। रहने दीजिये ना" . मेरा ये बोलना था की मुझे एक जोरदार थप्पड़ अपने गाल पर पड़ा। इसके बाद मैं समझ गयी की अब चुप रहने मैं ही भलाई है।
थोड़ी देर में मेरा ब्लाउज भी केंची से काटा जा रहा था और मैं असहाय लेती हुई थी। शायद मेरे पति मेरी इस अवस्था को काफी एन्जॉय कर रहे थे। आखिरकार उन्होंने मेरी चोली को भी मेरे बदन से अलग कर दिया। अब मैं चड्डी और ब्रा मैं थी। मुझे काफी शर्म आ रही थी क्यों की लाइफ मैं पहली बार मैं किसी और के सामने इतने कम कपड़ो मैं थी। पर एक अजीब सा रोमांच भी महसूस हो रहा था। पति ने पुछा - "नाभि पे मेहँदी किस के लिए बनवाई है जानेमन". मैं बोली - " आप ही के लिए जी" इतना सुनना था की वो मेरी नाभि को जोर से चूमने लगे। मैं सिहर उठी। तभी उन्होंने एकदम से अपना मुह दूर हटाया। मैंने पुछा -"क्या हुआ जी ". वो नोले " नाभि को ठीक से साफ भी नहीं किया तुमने, वो भी मुझे ही करना पड़ेगा". मैंने पुछा= "कैसे?". वो बोले - "वो मुझ पर छोड़ दो". फिर वो पलंग से उठ कर कहीं गए और 5 मिनट बाद वापिस आये। मुझे कमरे में कुछ जलने की बदबू आई। मैंने पुछा - " मुझे ऐसा क्यों लग रहा है की कमरे मैं कोई मोमबत्ती जल रही है". उन्होंने कहा - "बस लग रहा है, अभी फील भी होगा". इतना कहते ही मुझे अपनी नाभि पर गर्म गर्म सा कुछ फील हुआ। मैं जोर से चिल्लाई - " क्या कर रहे हैं आप?" वो बोले - " तेरी नाभि की सफाई कर रहा हु, अब ज्यादा नखरे मत कर". मैं दर्द से पागल हो रही थी, हिल भी नहीं पा रही थी। करीबन 2 मिनट तक वो ऐसे ही मेरी नाभि पर गर्म गर्म तरल पदार्थ गिरते रहे। हर बूँद के साथ मेरी आह निकल जाती थी। 2 मिनट बाद मुझे मोमबत्ती बुझाने की आवाज आई। मैंने चैन की सांस ली। मेरे पति मेरी कमर को हिल कर मॊओम को अछ्छी तरह से नाभि के एकदम अन्दर तक पहुचाने मैं लगे हुए थे।
गरम गरम मॊओम मेरी जान निकल रहा था। मगर कुछ देर मैं वो ठंडा होकर कड़क हो गया तथा जलन भी बंद हो गयी। मैंने बोला - "अब तो आपका शौक पूरा हो गया" वो बोले - " अरे अभी तो सफाई बाकी है" . मैं मन में सोचने लगी , अब ये क्या करने वाले हैं। तभी मैंने कोई धारदार ठंडी धातु का स्पर्श अपनी कमर पर फील किया। ओह ये तो एक चाक़ू था। मैं डर गयी और उनसे बोली - " प्लीज ऐसा मत कीजिये।" पर वो कहाँ मानने वाले थे। वो चाकू की नोक से धीरे धीरे नाभि मैं जमा हुआ मॊओम खुरचने लगे। मुझे चाकू का स्पर्श होने से मीठा सा दर्द हो रहा था। तभी मैंने अपनी जांघो पर गीलापन महसूस किया। और मुझे समझ मैं आया की मेरी योनि से पानी निकल रहा था, वो भी इतना ज्यादा की वो पूरी योनि को गीला करते हुए जांघो तक जा पहुंचा था। मैं ये सोच ही रही थी की तभी मेरे पति ने मॊऒम का आखिरी अंश मेरी नाभि से निकालते हुए बोला - " ये हुई न बात, देखो कितनी चमक रही है सफाई होने पर". मैंने कहा - " थैंक यू पतिदेव". अब मेरी नाभि थक हार कर ऐसी दिखाई दे रही थी :
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