Post Reply 
वो लड़की
02-22-2013, 01:10 PM
Post: #1
वो लड़की
हेल्लो फ्रेंड्स में अनुज सिंह ,देल्ली का रहनेवाला हूँ . एक कंपनी में सेल्स मेनेजर हूँ और मध्य प्रदेश में पोस्टेड हूँ. दिसम्बर २००5 की बात ही, में टूर पर था. मुझे खरगोन से धार जाना था. और रस्ते मेंतीन जगह रुक कर पेमेंट लेने थी. यहाँ बहुत ज्यादा ठण्ड नहीं पड़ती. दोपहर तक मौसम ठीक था पर शाम होते -२ बादल हो गए और ठंडी हवा चलने लगी . जब मै लास्ट पॉइंट से निकला तब तक शाम हो गए थी और वास्तव में , मै लेट हो गया था. यहाँ से धार लगभग ४ घंटे का रास्ता था.मैंने टाइम देख ५.३० बज चुके थे. मैंने अपनी गाड़ी स्टार्ट की और चल पड़ा . रोड खली थी. मैंने पेग बनाया और मौसम का मज़ा लेते हुए चल पड़ा. थोड़ी देर में तेज बारिश शुरू हो गयी.पर में मजे से जा रहा था. सड़क काफी ख़राब थी और एक दो गाड़ी कभी -२ नज़र आते थी. अंधेरे में मुझे पता ही नहीं चला और मेरी गाड़ी सड़क पर एक गड्ढे में फंस गयी. मैंने निकलने की कोशिश की पर नहीं निकली मै किसी गाड़ी के आने का इंतजार करने लगा लहभग १५ मिनट बाद एक बस आई मैंने उसे रोक्का और उस से हेल्प मांगी उस में सवार कुछ लोगो ने मेरी गाड़ी निकलवा दी.तभी ड्राईवर ने पूछा आप कहाँ जा रहे हो, मैंने कहा धार, उसने कहा ध्यान से जायेगा रोड बहुत ख़राब हे और लूट का खतरा भी हे. कोई भी रोके मत रुकना. और अगरमेरी बात ठीक लगे तो किसी सरकारी गेस्ट हाउस में रुक जाओ सुबह चले जाना, मैंने उससे पूछा तो वो बोला की आप दल्ल्ली के हो आप को नहीं पता ये खतरनाक एरिया हे. अगर बड़ा बुजुर्ग समझ कर मनो तो ठीक नहीं तो तुम्हारी मर्जी. मैंने उसके और ध्यान से देखा और पूछा कितने दूर हे गेस्ट हाउस. वो कहने लगा आगे जाओगे तो लगभग ५ किलोमीटर हे और अगला उसके १५ कम पर . पीछे जाओगे तो लगभग १२ किलोमीटर पर. मैंने उसे धन्यवाद् कहा और चल दिया. पर डर लगने लगा. थोड़ी देर में गेस्ट हाउस आ गया में रुकने वाला था पैर तभी मुझे ख्याल आया कही मुझे फसाया तो नहीं जा रहा. सो में मै नहीं रुका और गाड़ी दौरा दी. घडी देखि ७.३० बज गए थे और में अभी आधे रस्ते से भी कम पहुंचा था. बारिश भयंकर हो रहे थी. मैंने दूसरा गेस्ट हाउस भी क्रोस कर दिया और लगभग ५ किलोमीटर चला था की गाड़ी में पंचर हो गया, मेरी गांड फट गयी, मेरे मन में आ रहा था बेटा अनुज घर वाले बस इंतजार करते रहेंगे मै ने मोबाइल चेक किया नो नेटवर्क, फटी गांड हलक में आ गयी , मै ने गाडी ऐसे ही चलने की सोची पर टायर की माँ चुद चुकी थी, मज़बूरी में मैंने उत्तर कर जैक लगाया और स्टेपनी बदली, और दोस्तों आप विश्वास करो गे मैंने सिर्फ ८ मिनट में पहिया बदल कर चल पड़ा था. अगर और कोई स्थिति होती तो आधा घंटा लगता. लेकिन मैंने सोच लिया जो भी पहली जगह मिले गी वही रुक जाऊंगा . बारिश ने से मेरे कपडे भीग गए थे. और ठण्ड लग रही थी मैंने एक पेग नीट का लगाया और चलता रहा. थोडा आगे मुझे एक बिल्डिंग दिखाए दी. मैंने गाडी गेट में घुसा दी. पर वह क ोई नहीं था. मैंने आवाज लगाये पर सन्नाटा . मैंने टोर्च से देखा वो कोई स्कूल था , मैंने सोचा कोई चौकीदार होगा और दुबारा आवाज़ लगाये. तभी एक औरत की तेज आवाज़ आयी ए कौन हे क्यों शोर मचा रहे हो. लेकिन अंधेरे में दिखाए कुछ नहीं दिया , मैंने अपने बारे में बताया और रात को रुकने के लिय कहा. लेकिन उसने ना कहा दिया. मैंने रेकुएस्ट की तो उसने टोर्च की रौशनी से मुझे देखा , बाप टोर्च क्या थी सर्च लाइट थी फिर मेरा ID CARD माँगा मैंने दिया तो उसने कहा ठीक हे , सामiन उतार लाओ

मैंने सामन उतरा और उसके पीछे-२ एक कमरे में पहुंचा,आप कपडे बदल लो और दुसरे कमरे में आ जाना. मै तब तक खाना तैयार करती हूँ कहकर वो चली गयी. मैंने कपडे बदले और उसके बारे में सोचने लगा. लेकिन समझ नहीं सका, मैंने उसका चेहरा ठीक से नहीं देखा था. उसने साडी पहने थी और शाल ओढ़ रखा था जो की उसके सर को ढके था. दुसरे कमरे में अलाव जल रहा था और वहां एक छोटी लाइट थी पर उसके रौशनी काफी कम थी वो वहीँ रसोई में खाना बना रही थी मुझे ठण्ड लग रही थी तभी मैंने वहां रखी सिगरेट देखी तो मैंने उस से सिगरेट की पूछ ले. उसने हाँ कहा और कुछ देर में मेरे पास रखी कुर्सी पर बैठ गयी. मै उसे देखकर उसकी उम्र के बारे में अंदाज लगाने की कोशिस कर रहा था पर उसने चेहरा इस तरह धक् रखा था की पता नहीं चल रहा था. वो फिर रसोई में चली गयी जब वो वापस आयी तो उसके हाथ में व्हिस्की का गिलास था. बड़े सपाट शब्दों में बोली मेरे पास और नहीं है इसलिय नहीं पूछ सकतीमेरी गाडी में है मैंने कहा. चलो ले आते हैं कहकर वो चल दी उसने खिड़की में से बहार देखा और कहा तुमने गाडी इतनी दूर क्यों खरी की. एक काम करो अन्दर ले आओ मै बड़ा दरवाज़ा खोलती हूँ. और वो दुसरे तरफ चल दी मै उसके पीछे-२ बाहर आ गया हलकी बारिश हो रही थी उसने गेट खोलते हुए कहा ध्यान से जाना और जल्दी वापस आना बहार कोई भी हो सकता है. मै लगभग दौड़ता हुआ गाडी में बैठा ही था के कुछ लोग दौड़ते हुए मेरी तरफ आये और तभी एक बन्दूक की आवाज़ आयी धाय . मेरी तो गांड हलक में आ गए मैंने गाडी दौड़ा दी और गेट में घुसते ही दौड़ कर गेट बंद किया. मेरा हलक खुश्क हो रहा था मैंने पानी पिया और फिर बोतल और सिगरेट उठाई और उसके साथ चल दिया. मेरे मन में बार-२ यही आ रहा था बेटा आज तो दारू के चक्कर में जान गए थी. अन्दर आकर मैंने बोतल रख दी मेरी टी शर्ट हलकी भीग गयी थी तभी मै एक बार फिर चौंक पड़ा उसने अपना शाल उतारा और एक ख़ूबसूरत लगभग २४-२५ साल की लडकी मेरे सामने थी लेकिन तभी एक और झटका लगा उसने एक पिस्तोल टेबल पर रख दी. मै उसका चेहरा देख रहा था, गोली मैंने चलायी थी वो बोली. और अन्दर रसोई में से कुछ नमकीन और गिलास लाई. और मेरे लिए पेग बना दिया.
तभी इन्वेर्टर की बीप आने लगी और अँधेरा हो गया . उसने एक मोमबत्ती रसोई में जला दी जिससे सिर्फ इतनी रौशनी हो रही थी की ये कह सकते थे की अँधेरा नहीं है बाकि दिखाई कुछ नहीं दे रहा था.थोड़ी देर बात करते -२ हम काफी खुल गए और हमरे बीच मजाक और जोक शुरू हो गए. इस बीच मै ने तीन पेग लिए जबकि उसने सिर्फ एक लिया हमने खाने खाया और उसने मेरे लिए अलाव के पास ही बिस्तर लगा दिया हम दोनों वही बैठ कर बात करते रहे. बातों -२ में उसने मेरे बारे में सब कुछ पूछ लिया और अपने बारे में बताया की उसका नाम चांदनी है वो यहाँ टीचर है और कुछ और टीचर के साथ यहाँ रहती है छुटियोंके कारन बाकी सब चले गए पर उसका कोई नहीं है इसलिए वो यहाँ ही रहते है . उसने मेरे प्रोग्राम के बारे में पूछा तो मैंने उससे कह दिया के मै कल सुबह चला जाऊंगा. कल तो सन्डे है तुम्हारी छुट्टी नहीं है. चांदनी ने पूछा, है मैंने कहा , कल यहीं रुक जाओ आस पास काफी खुबसूरत जगह है घूम के आते है सोमवार को चले जाना. ठीक है मैंने कहा. थोड़ी देर बात करके हम अपने-२ बिस्तर पर सो गए मै अभी तक ठीक से न तो उसका चेहरा देख पाया था न ही उसके बारे में ठीक-२ आईडिया लगा पा रहा थातभी इन्वेर्टर की बीप आने लगी और अँधेरा हो गया . उसने एक मोमबत्ती रसोई में जला दी जिससे सिर्फ इतनी रौशनी हो रही थी की ये कह सकते थे की अँधेरा नहीं है बाकि दिखाई कुछ नहीं दे रहा था.थोड़ी देर बात करते -२ हम काफी खुल गए और हमरे बीच मजाक और जोक शुरू हो गए. इस बीच मै ने तीन पेग लिए जबकि उसने सिर्फ एक लिया हमने खाने खाया और उसने मेरे लिए अलाव के पास ही बिस्तर लगा दिया हम दोनों वही बैठ कर बात करते रहे. बातों -२ में उसने मेरे बारे में सब कुछ पूछ लिया और अपने बारे में बताया की उसका नाम चांदनी है वो यहाँ टीचर है और कुछ और टीचर के साथ यहाँ रहती है छुटियोंके कारन बाकी सब चले गए पर उसका कोई नहीं है इसलिए वो यहाँ ही रहते है . उसने मेरे प्रोग्राम के बारे में पूछा तो मैंने उससे कह दिया के मै कल सुबह चला जाऊंगा. कल तो सन्डे है तुम्हारी छुट्टी नहीं है. चांदनी ने पूछा, है मैंने कहा , कल यहीं रुक जाओ आस पास काफी खुबसूरत जगह है घूम के आते है सोमवार को चले जाना. ठीक है मैंने कहा. थोड़ी देर बात करके हम अपने-२ बिस्तर पर सो गए मै अभी तक ठीक से न तो उसका चेहरा देख पाया था न ही उसके बारे में ठीक-२ आईडिया लगा पा रहा थातभी इन्वेर्टर की बीप आने लगी और अँधेरा हो गया . उसने एक मोमबत्ती रसोई में जला दी जिससे सिर्फ इतनी रौशनी हो रही थी की ये कह सकते थे की अँधेरा नहीं है बाकि दिखाई कुछ नहीं दे रहा था.थोड़ी देर बात करते -२ हम काफी खुल गए और हमरे बीच मजाक और जोक शुरू हो गए. इस बीच मै ने तीन पेग लिए जबकि उसने सिर्फ एक लिया हमने खाने खाया और उसने मेरे लिए अलाव के पास ही बिस्तर लगा दिया हम दोनों वही बैठ कर बात करते रहे. बातों -२ में उसने मेरे बारे में सब कुछ पूछ लिया और अपने बारे में बताया की उसका नाम चांदनी है वो यहाँ टीचर है और कुछ और टीचर के साथ यहाँ रहती है छुटियोंके कारन बाकी सब चले गए पर उसका कोई नहीं है इसलिए वो यहाँ ही रहते है . उसने मेरे प्रोग्राम के बारे में पूछा तो मैंने उससे कह दिया के मै कल सुबह चला जाऊंगा. कल तो सन्डे है तुम्हारी छुट्टी नहीं है. चांदनी ने पूछा, है मैंने कहा , कल यहीं रुक जाओ आस पास काफी खुबसूरत जगह है घूम के आते है सोमवार को चले जाना. ठीक है मैंने कहा. थोड़ी देर बात करके हम अपने-२ बिस्तर पर सो गए मै अभी तक ठीक से न तो उसका चेहरा देख पाया था न ही उसके बारे में ठीक-२ आईडिया लगा पा रहा थातभी इन्वेर्टर की बीप आने लगी और अँधेरा हो गया . उसने एक मोमबत्ती रसोई में जला दी जिससे सिर्फ इतनी रौशनी हो रही थी की ये कह सकते थे की अँधेरा नहीं है बाकि दिखाई कुछ नहीं दे रहा था.थोड़ी देर बात करते -२ हम काफी खुल गए और हमरे बीच मजाक और जोक शुरू हो गए. इस बीच मै ने तीन पेग लिए जबकि उसने सिर्फ एक लिया हमने खाने खाया और उसने मेरे लिए अलाव के पास ही बिस्तर लगा दिया हम दोनों वही बैठ कर बात करते रहे. बातों -२ में उसने मेरे बारे में सब कुछ पूछ लिया और अपने बारे में बताया की उसका नाम चांदनी है वो यहाँ टीचर है और कुछ और टीचर के साथ यहाँ रहती है छुटियोंके कारन बाकी सब चले गए पर उसका कोई नहीं है इसलिए वो यहाँ ही रहते है . उसने मेरे प्रोग्राम के बारे में पूछा तो मैंने उससे कह दिया के मै कल सुबह चला जाऊंगा. कल तो सन्डे है तुम्हारी छुट्टी नहीं है. चांदनी ने पूछा, है मैंने कहा , कल यहीं रुक जाओ आस पास काफी खुबसूरत जगह है घूम के आते है सोमवार को चले जाना. ठीक है मैंने कहा. थोड़ी देर बात करके हम अपने-२ बिस्तर पर सो गए मै अभी तक ठीक से न तो उसका चेहरा देख पाया था न ही उसके बारे में ठीक-२ आईडिया लगा पा रहा था जब मै सुबह उठा तो चांदनी वहां नहीं थी मै टोइलेट गया. जब वापस आया तब भी चांदनी कमरे में नहीं थी मै उसे धुंडने लगा तभी मुझ एक दरवाजे के पीछे से पानी की आवाज़ आयी मै समझ गया वो अन्दर नहा रही है. और भाई मेरे कमीने दिमाग में उसे देखने की इच्छा होने लगी मैंने इधर उधर से कोशिश की पर कुछ नहीं दिखा हार कर वापस आ गया और धुप मै बैठ कर सिगरेट फूंकने लगा. कुछ देर बाद चांदनी कपडे सुखाने आयी और बोली मै नाश्ता बना रही हूँ तुम तब तक नहा लो. उसने मुझे बाथरूम दिखाया . उसका रास्ता अन्दर से ही था. जहाँ मै देख रहा था वहां कुछ नहीं था. मैंने ब्रुश करके शेव बनाई और नहा के जींस और टी शर्ट पहन ली. जब मै उसके कमरे में गया तो नाश्ता टेबल पर लगा रही थीउसने सलवार कमीज़ पहना था . और कल से अब तक पहली बार उस का दुपट्टा हल्का सा अपनी जगह से हिला था और मुझे उसकी हलकी से क्लेवेज़ और चेहरा दिखाई दी पर सिर्फ १-२ सेकंड के लिए . नाश्ता करके उसने कहा कुछ सामान रखा है गाड़ी में रख लो तब तक मै तैयार हो कर आती हूँ.

मैंने गाडी मै सामान रखा. सारी रात की बारिश से गाडी धुल चुकी थी. मैंने सामने वाले शीशे पे कपडा मारा और सिगरेट जला ली लगभग ५ मिनट में वो आयी यार सही मायने में मैंने उसे पहली बार देखा था क्या गजब माल देखते ही दिमाग घूम गया.लगभग ५.५ फिट हाईट गोरा रंग जैसे दूध में हल्का सा सिन्दूर मिला दिया हो बड़ी-२ ऑंखें लम्बी पतली सुराहीदार गर्दन उन्नत वक्ष सपाट पेट चौडे नितम्ब लम्बी हलकी मांसल टाँगे गदराया बदन खुले लम्बे बाल उसके गालों को बार बार चुमते, पतले गुलाबी होठ जिन्हें देख कर किसी का भी ईमान ड़ोल जाये. .ऐसा लगा अभी बेहोश हो जाऊंगा वो इस्किन फिट जींस और शोर्ट शर्ट पहने थी.उसकी शर्ट इतनी टाईट थी की उसकी दोनों गोलाइयां शर्ट फाड़ कर बहार निकलने को बेताब थी. चांदनी मेरे बराबर से गुजरी तो हवा में मस्त खुसबू छोड़ गयी.वो सीधी गेट पे गयी और गेट खोलने लगी मेने गाडी स्टर्ट की और बाहर आ गया. उसने दरवाज़ा बंद किया, इस बीच मैंने गाडी में फ्रेशनर का स्प्रे कर दिया. गाडी में बैठते ही उसने मुझे रास्ता बताया मै मंत्र मुघ्द सा चलने लगा उसने सिगरेट जलाई और आराम से बैठ गयी. . मै चुपचाप गाड़ी चला कर रहा था उसने मुझे सिगरेट दी .मै सोच रहा था की मैंने कल रात से उसे देखा नहीं या ये लड़की कोई और है . मैंने अपने दिमाग पे जोर डाला तो ठीक-२ याद आया रात तो लगभग अँधेरा था और उसने शाल ओढा था. और सुबह भी उसने दुपट्टा सर पर ओढा था और मेरे सामने नहीं आ रही थी. कुछ देर चांदनी चुप चाप बैठी रही पर थोड़ी देर में वो बात करने लगी. कुछ देर में हम जंगले में पहुँच गए और घूमते-२ एक झरने के किनारे हम ने गाडी रोक दी . उसने गाडी में से सामान उतरा और मुझे जग दिया मै पानी ले आया, चांदनी गाडी के बोनट पे बैठी थी दो गिलासों में व्हिस्की थी दो पलते में नमकीन चिप्स और फ्रेंच फ्रैयी थी. मैंने मुजिक सिस्टम की आवाज़ बढ़ा दी , अब हम दोस्तों की तरह बात कर रहे थे और एन्जॉय कर रहे थे . दो-२ पेग लगाते -२ हम मस्ती करने लगे और पैदल घुमने चल दिए अब हम दोस्तों की तरह बात कर रहे थे और एन्जॉय कर रहे थे सरुर हम दोनों पर था मैंने उससे पूछा अगर कोई शेर आ जाये तो वो जुली स्टाइल बोली मै शेर से कहूँ वो तुम्हे छोड़ दे मुझे खा जाये . क्यों मैंने पूछा. मेरी ज़िन्दगी में है ही कौन जिसके लिया जीना, तीन फायेदे होंगे तुम्हारी जान बच जायेगी शेर को खाना मिल जायेगा और मै इस ज़िन्दगी से निकल जाउंगी और फिर से मस्ती करने लगी. घुमते-२ हम वापस अपनी गाडी पे पहुंचे भूक लग चुकी थी. हमने १-१ -1 पेग और लगाया और खाना खाने लगे. खाना खाकर हम फिर घुमने चल दिए . थोड़ी देर में वापस आकर हम झरने के किनारे बैठ गए. और पेग लगाने लगे.

कई चीज एक साथ हो रही थी रोमांटिक मौसम, जंगल की तन्हाई , हलकी आवाज़ से बहेता झरना ख़ूबसूरत लड़की और शराब का सरुर. ये कहना मुश्किल है की नसः किसका था शराब का ,मौसम का ,या हुस्न का. अचानक चांदनी बोली चलो झरने के बीच में बैठेंगे . हम धीरे -२ पत्थरों पे चलते हुए जा रहे थे की एक पत्थर थोडा दूर था मै पहले पहुंचा और उसका हाथ पकड़ कर उसे भी खींच लिया. छोटे से पत्थर पे हम दोनों आमने सामने खड़े थे चांदनी का चेहरा और उभार मेरे से नाम मात्र की दुरी पे थे मैंने उसकी आँखों में देखा वो मुझे देख रही थी. और अचानक मेरा हाथ उसकी कमर पे कस गया और मेरे होठ उसके होठों से छु गए पर वो वहीँ चिपक कर रह गए. उसकी ऑंखें बोझिल होते हुए बंद होने लगी और चांदनी ने मुझे अपनी बाहों में कास लिया चांदनी किसी लता की तरह चिपक गयी उसके गुलाबी रसीले होठ मेरे होठों से चिपक गए थे . योवन कपोत मेरे सीने में घुस रहे थे मै उनकी कठोरता अपने सीने पे महसूस कर रहा था, मेरा पप्पू अपना सर उठा चूका था टाइट जींस जगह नहीं दे रही थी पर उसका एहसास चांदनी महसूस कर रही थी उसने मुझे अपनी बाँहों में कस लिया था और ऐसा लग रहा था जैसे मेरे में समां जाएगी . थोड़ी देर में वो अलग हुई और बराबर के पत्थर पे बैठ गयी. उसकी साँसे तेज चल रही थी उसकी शर्ट और ज्यादा टाईट हो गयी थी योवन कपोत बहार आने को उतावले हो रहे थे हमारे होंठ चुप थे और शायद हम दोनों निगाह चुरा रहे थे. मैंने गिलास उठा के चांदनी की तरफ बढ़ा दिया और अपने लिए सिगरेट जला ली उसने एक ही सिप में पूरा पी लिया और हाथ बढ़ा के सिगरेट मांग ली. उसकी सांसे तेज थी उसे जोर दे खांसी आ गयी वो खडी हो गयी पर खांसी अब भी आ रही थी मै उसके पास गया और धीरे -२ उसकी कमर सहलाने लगा थोड़ी देर में वो नोर्मल हो गयी वो अलग हुई और बहार की तरफ चल दी. मै उसके पीछे-२ बहार आ गया. चांदनी ने सारा सामान गाड़ी में रखा मेरी तरफ मुड कर देखा और बोली घूम के आयें और गाड़ी में बैठ गयी हम जंगल में अन्दर चले गए एक जगह गाड़ी रोक कर उतर गए. चांदनी ने कोल्ड ड्रिंक की बोतल में व्हिस्की दल ली और सिप करके बोली अब ठीक है. चलो घूमते हैं कहकर वो आगे -२ चलने लगी मै पीछे था जींस में कसे उसके नितम्ब उबड़ खाबड़ रस्ते पे और ज्याद मदमस्त लग रहे थे. थोड़ी दूर जा कर हम रुक गए आगे गहरी खाई थी. चांदनी एक पत्थर पे बैठ गयी. मै उस से कुछ दूर एक छोटे से पत्थर पे बैठा था. तभी चांदनी ने हाथ ऊपर करके अंगड़ाई ली और हुस्न का नज़ारा मेरे सामने था, उसके हाथ ऊपर करते ही उसके शोर्ट शर्ट काफी ऊपर हो गयी और उसका गोरा चिकना पेट और साइड मेरी आँखों को सुख दे रही थी लेकिन जल्दी ही उसे एहसास हो गया और उसने अपने हाथ निचे कर लिए. हम जंगल के बारे में बात कर रहे थे तभी चांदनी ने इशारे से मुझे बुलाया वो देखो कहते हुए उसने अपनी ऊँगली एक पेड की तरफ कर दी बहुत सुंदर चिड़िया बैठी थी चांदनी मेरे कंधे पे हाथ रख कर पत्थर पे खडी हो गयी उस का पेट मेरे चेहरे के सामने था वो चिड़िया देख रही थी और मै उसका पेट. उसे भी एहसास हो गया तो वो निचे उतर ने लगी, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी मै उसकी कमर थाम चूका था और जैसे ही वो निचे आयी मैंने अपने होठो को उसके जलते हुए लबों पे रख दिया दो जवान जलते लब जलने लगे और जलते हुए अपनी प्यास बुझाते रहे. मेरे हाथ उसके नितम्बो और कमर पे कसे थे थोडा होश आया तो मै उस से अलग हुआ और पत्थर पे बैठ गया पर अब चांदनी मदहोश हो चुकी थी वो मेरी गोद में बैठ गयी और मुझे पागलों की तरह चूमने लगी उसकी चुचिया मेरे सीने पे दब गयी थी वो थोडा अलग हुई और एक बार फिर मेरे चेहरे पे अपने गालों का एहसास देने लगी कुछ देर बाद वो अलग हुई और वही घास पे बैठ गयी उसकी साँसे उखड रही थी मै उठ कर उसके पास बैठ गया और उसे अपनी बाँहों में भर लिया और धीरे -२ घास पे लिटा दिया और उसे चूमने लगा मेरे हाथ उसके पेट और जांघों पे थे मै एक पल के लिए अलग हुआ तो वो घास पे करवट बदलते हुए खडी हो गयी और मुझे जीभ दिखाते हुए भागने लगी अमी उसके पीछे भागा तो वो जोर से चिल्लाई बोतल ले के आना मुझे रुकना पड़ा वो भी रुक गयी थी.हम धीरे-२ चलते हुए गाडी तक पहुंचे वो बोनट पे बैठ गयी मै उसके सामने खड़ा था. और बरी-२ से बोतल से पे रहे थे . उसने आखरी सिप करते हुए बोतल खाली की. और मेरे से सिगरट ले कर कश लगाने लगी . उसकी छातियाँ मुझे मदहोश कर रही थी ऐसे क्या देख रहे हो चांदनी ने कहा और मेरे सब्र का बांध टूट गया मैंने उसे कस के पकड़ लिया और चांदनी के गालों ,होंठों पे चुम्बन लेते हुए नीचे की और बढ़ने लगा जैसे ही मरे लबों ने उसकी गर्दन को छुआ वो पीछे लेट गयी और मै साइड होते हुए उसके सीने पे अपना चेहरा रगड़ ने लगा उसकी उँगलियाँ मेरे बालों में उलझ गयी. मै धीरे -२ नीचे की और चल दिया और मेरे गाल उसकी छातियों पे थे उसने मुझे कस के भींच लिया. मै उसकी चुचियों का आनद ले ही रहा था की अचानक मुझे लगा जैसे कोई आस पास है मै एक दम अलग हुआ और इधर उधर देखने लगा पास ही २-३ हिरन नजर आ गए हम उन्हें देखने लगे लेकिन उस का मूड कुछ और था वो फिर मेरे से चिपट गयी और मुझे पागलों की तरह चूमने लगी अपनी चुचियों पे मेरा चेहरारगड़ने लगी मै उसकी मदमस्त चुचियों का मज़ा ले रहा था के अचानक वो रुक गयी और अलग हो गयी बस और नहीं वापस चलो कहते हुए वो गाडी में बैठ गयी और पानी पी ने लगी उसकी हालत अजीब से थी उस ने सिगरट जलाई और जल्दी -२ कश ले ने लगी. लगभग २०--- -मिनट में हम पहुँच गए उसने दरवाजा खोला, मै सोना चाहती हूँ प्लीज़ डिस्टर्ब मत करना कह कर अन्दर चली गयी मैंने गाडी खडी की दरवाज़ा बंद किया और कमरे में पहुंचा चांदनी कम्बल ओढ़ कर लेट चुकी थी २ बजे थे . मै भी दुसरे बिस्तर पे सो गया जब आँख खुली तो चांदनी मेरे ऊपर झुकी थी और उठा रही थी अभी भी वो उन्ही कपड़ो में थी. मेरे आंख खोलते ही बोली क्यों इतनी पीते हो जब संभलती नहीं है चलो उठो चाय पी लो . मेरा सर उसे अपने इतने पास देख कर घूम गया और मैंने उसे कमर से पकड़ कर अपने ऊपर खींच लिया अगले ही पल वो मेरी बाहों में थी और मैंने उसके नर्म होठो को अपने होठों में गिरफ्तार कर लिया मेरा एक हाथ उसकी कमर पे फिसल रहा था और दूसरा उस के नितम्बो का जायजा ले रहा था. वो खामोश थी उस की शोर्ट शर्ट थोड़ी ऊपर हो गयी और मेरा हाथ उसकी नर्म मुलायम कमर को छु भर पाया था की वो जोर से लिपट गयी पर ये आनंद पल भर का था वो एक दम खडी हुई और रसोई की तरफ दौड़ गयी. मैने टाइम देखा ५ बजे थे थोड़ी देर में मै और वो चाय पी रहे थे . फिर हम बाहर घुमने लगे बात काफी खुली -२ होने लगी उसने पुछा आर यु वर्ज़न मै मुस्कराया हाँ मैंने कहा. वो जोर से हंसी कोई मिली नहीं या बता नहीं रहे . कोई मिले नहीं मैंने कहा. तभी लाइट आ गयी . रात होने लगी थी भूक लग रही है मैंने कहा. अन्दर चलो खाना १० मिनट में तैयार हो जायेगा. वो रसोई में चली गयी. मैंने TV चला लिया. ६.४५ बजे थे .बोटेल कहाँ है मैंने पूछा. ख़तम हो गयी है . चांदनी बोली थोड़ी देर में खाना लग गया हमने दोनों ने खाना खाया. वो रसोई में बर्तन साफ़ करने लगी. ७.३० बजे तक वो काम ख़तम करके आ गयी . आप TV देखो मुझे थोडा काम है मै दुसरे कमरे में हूँ.कहकर वो चली गयी मै थोड़ी देर टीवी देखता रहा लगभग १ घंटा हो चूका था चांदनी नहीं आयी मै उसे देखने अन्दर गया लेकिन कहीं दिखाई नहीं पडी. एक कमरे का दरवाज़ा अन्दर से बंद था वो उस में थी. मैने आवाज़ लगाई तो चांदनी ने कहा 2 मिनट में आती हूँ. मै वापस टीवी देखने लगा. थोड़ी देर मे चांदनी आयी.मैंने सिगरट जला रखी थी उसने कपडे बदल लिए थे और एक नोर्मल सी नाईटी पहने थी. वो मेरे पास ही बेड पे बैठ गयी और सिगरट मांगी मैंने अपने मुहं का सारा धुआं उसके चेहरे पे छोड़ दिया उसने मुझे जोर से धक्का दिया तो मैंने उस कस के पकड़ लिया और बेड पे लिटा लिया और उसके चेहरे को चूमने लगा वो बोली रुको मै जैसे ही रुका वो बोली क्या इरादा है उसका इशारा समझ कर मैंने कहा तुम्हे खाना है चांदनी एक पल खामोश रही फिर बोली ५ मिनट बाद दुसरे कमरे में आओ कुछ बात करनी है. कहकर चांदनी चली गयी. और मुझे लगा यार ये तो के एल पी डी हो गयी . पर मै ५ मिनट बाद दुसरे कमरे में गया दरवाज़ा बंद था . जैसे ही मै ने दरवाज़ा खोला एक तकड़ा झटका लगा

Find all posts by this user
Quote this message in a reply
02-22-2013, 01:10 PM
Post: #2
RE: वो लड़की
कमरा टूएब लाइट की रौशनी में नहाया हुआ था गुलाब और फूलों की खुशबु उसे महका रहे थी. छोटी सी टेबल पर एक जग गिलास और पानी की बोतल रखी थी. कमरे के बीचों -बीच एक बेड पड़ा था जो की लाल और सफ़ेद फूलों से सजा था. और उस पर लाल कपड़ो में चांदनी बैठी थी ये मेरे लिए काफी था मै धीरे -२ बेड के पास गया और बेड पर बैठ गया वो घूँघट में बैठी थी मै धीरे से उसके पास बैठ गया और उसका घूँघट हटा दिया उसने मेरे तरफ देखा वो बिलकुल दुल्हन की तरह शर्मा रही थी मै उसके सामने बैठ कर उसे देखने लगा कुछ देर बाद वो बोली ऐसे क्या देख रहे हो. बहुत सुंदर लग रहे हो मैंने कहा और उसके हाथों को अपने हाथ में लेकर चूम लिया फिर उसके बराबर आकर बैठ गया और चांदनी को अपने पास बिठा लिया हम बात करने लगे और बात करते-२ मैंने धीरे से उसकी साड़ी का पल्लू उसके कंधे पर से हटा दिया और धीरे से उसके गालों पर एक चुम्बन ले लिया वो शर्मा गयी और मैंने तुरंत उसे अपनी बाहों में कस लिया वो भी मेरे से चिपक गयी कुछ देर बाद जब हम अलग हुए तो मैंने उसकी साड़ी का पल्लू एक तरफ कर दिया. उसके लाल ब्लाउज में कसे योवन कपोत बाहर की और झाँकने लगे,लो कट ब्लाउज में उसके ऊँचे पर्बतों की गहरी घाटियाँ दिखाई पड़ रही थी.जिसे देख कर किसी का भी दिल बईमान हो जाये. मैंने धीरे से उसके गले में पहना हुआ हार उतार दिया और उसकी गर्दन पे एक किस कर दी. और कब मेरे होठ उसके सीने पे जा पहुंचे पता ही नहीं चला मै उसे चूमता जा रहा था उसने मुझे अपनी बाँहों में कास लिया जैसे ही मै चांदनी की छातियों को चूमता उस के मुहं से आह निकल पडी. मै ब्लाउज के ऊपर से ही उसकी चोटियों को चूम रहा था वो मेरा सर अपनी छाती पे दबा रही थी. मुझे आगे जाना था मै चांदनी के पेट को चूम रहा था और वो हर पल का आनंद ले रही थी. नाभि को चूमा तो मेरी जीभ उसमे समां गयी. तभी चांदनी ने करवट ली और बेड से उतर गयी. उसने जग से दूध गिलास में डाला और मेरे होठो पे लगा दिया मैंने सिप किया और उसके मुहं से लगा दिया और उसे अपनी गोद में बीठा लिया हमने बारी -२ से सिप करते हुए गिलास खाली किया. वो गिलास रखने के लिये गयी तो मैंने चांदनी की साड़ी का पल्लू पकड़ लिया और धीरे-२ खींचने लगा साड़ी उसके बदन से अलग हो गयी. वो ब्लाउज और पेटीकोट में मेरे सामने थी मैंने आगे बढ़कर उसका पेटीकोट उसके शरीर से अलग कर दिया वो शर्मा के फर्श पे बैठ गयी जैसे अपनी नग्नता को छुपा रही हो मैंने उसे गोद में उठाया और बेड पे लिटा दिया. मैंने अपनी शर्ट और जींस उतर दी और चांदनी के पास लेट कर उस से बात करने लगा वो हाँ ना में जवाब दे रही थी. बात करते -२ मैंने उसके ब्लाउज के हूक खोल दिए और कुछ ही पलों बाद वो लाल ब्रा और पैंटी में थी. उसकी ऑंखें बंद थी मै ने उसे चुमते हुए धीरे से उसकी ब्रा को आजाद कर दिया और पेंटी कब उसके बदन से अलग हुई ये तो मुझे भी ठीक याद नहीं मै उसे एक टक देख रहा था चांदनी वाकई बहुत सुन्दर थी.बड़ी-२ नशीली ऑंखें गुलाबी गाल, गुलाब की पंखुड़ी से होंठ लम्बी गर्दन पर्बतों जैसी ऊँची और कठोर छातियाँ और उन पे ऊपर गुलाबी घेरा और बीच में एक बड़ा सा अंगूर. मद मस्त चूचियां गोरा चिकना समतल पेट केले के पेड जैसी चिकनी पुष्ट जांघे और उनके बीच में छुपी एक प्यारी से थोड़ी उभरी हुई योनी. चिकना बदन कहीं एक बाल नहीं और अगर मै शायर या कवी होता तो कम से कम एक किताब उस पे लिख देता.कुछ देर देखने के बाद मैंने उसके होठों को चूम लिया और उसके बाद तो जैसे ज्वार आ गया मै उसके बदन को चूमता रहा और चांदनी मुझे कसती रही मेरे बदन से चड्डी बनियान कब अलग हुए पता ही नहीं चला हम एक दुसरे की बाँहों में समां रही थे और कब मेरे लंड ने उसकी चूत पे दस्तक दी पता नहीं चला जब लंड चूत को चूम रहा था तब होश आया पर तब तक देर हो चुकी थी चूत ने लंड को रास्ता दिखा दिया था और बाकी काम मुझे करना था मै धीरे धीरे लंड का दबाव बढ़ने लगा और लंड चांदनी की चूत में जा रहा था चांदनी नीचे से सह्यूग कर रही थी पर कुछ देर में उसके चेहरे पे दर्द झलकने लगा मैंने उस की आँखों में देखा वो दर्द पी रही थी दर्द मुझे भी हो रहा था तभी चांदनी बोली मेरा कोमार्य तुम्हे समर्पित और मेरा तुम्हे मैंने कहा और एक झटका लगाया उस की झीली फट गयी मेरे टाँके टूट गए उसकी उँगलियों के नाख़ून मेरे कंधे और कमर पे चुभ रहे थे पर हम आगे बढ़ते रहे कुछ देर में उसकी चूत से रस निकलने लगा और लंड थोडा आराम से अन्दर बहार होने लगा हम दोनों मस्त थे और मै ऊपर से जितने जोर से जितनी मेरे में ताकत थी धक्के लगा रहा था पर कुछ देर बाद उस की चूत से जो रस निकला उस ने मेरे लंड पे जादू कर दिया और मै जितनी तेज़ी से धक्के लगा सकता था लगा ने लगा उस ने मुझे अपनी बाहों में कास लिया उसके पांव मेरी कमर पे लिपट गयी और वो हर पल का आनंद ले रही थी लेकिन ये ज्यादा देर न चल सका उसकी चूत से पानी का फवारा निकला और मेरे लंड ने उसकी प्यासी चूत पे बारिश कर दी. हम दोनों कुछ देर में शांत लेट गए ऐसा लग रहा था जैसे कई मील दौड़ कर आये हों और कब सो गए पता ही नहीं चला.

Find all posts by this user
Quote this message in a reply
02-22-2013, 01:10 PM
Post: #3
RE: वो लड़की
जब मेरी आंख खुली तो चांदनी मेरे पास गहरी नींद में सो रहे थी मेरा हाथ उसके सर के निचे था और उस के और मेरे पाँव आपस में गुथे थे मुझे जोर से सु सु लगी थी मैंने धीरे से चांदनी को अलग किया और चला गया . जब मै वापस आया वो सो रही थी मै उसे पलंग के पास खड़ा देखता रह गया. कितनी मासूम और भोली लड़की है. चांदनी बहुत सुन्दर लग रहे थी चादर पे उसके खून और हमारे दोनों के मिश्रित रस के निशान थे जो की लगभग सुख गए थे. मेरे दिमाग में रात का सारा वाकया घूम गया. मन एक बार फिर वही सब करने को कर रहा था पर उसे सोता देख मैंने अपना इरादा बदल लिया और धीरे से पलंग पे लेट गया पर आहट से उसकी नींद खुल गयी और मुझे देख कर बोली क्या हुआ कहते हुए वो उठने लगी पर तभी उसको अहेसास हुआ की वो बिलकुल नंगी है उसने जल्दी से इधर उधर देखा और कोई कपडा धुंडने लगी पर वहां कुछ नहीं था उसने शरमाते है कहा दुसरी तरफ देखो मैंने मुह दुसरी तरफ किया वो जल्दी से उठी और अपनी साड़ी लपेटे हुए कमरे से बहार दौड़ गयी. मैंने कमरे में इधर उधर देखा तो मुझे एक टावल नज़र आया मैंने उसे लपेट लिया कुछ देर बाद आयी तो साड़ी कुछ ठीक से पहने थी पर ब्लाउज नहीं पहना था क्योंकि वो जल्दी में लेजाना भूल गयी थी . उसने आकर ब्लाउज उठाया और पलंग पे मेरी तरफ पीठ करके बैठ कर बिना साड़ी हटाये ब्लाउज पहने लगी और बोली आप सोये नहीं. मैंने उसे रोकते और उसके हाथ से ब्लाउज लेते हुए कहा जब इतनी खुबसूरत जवान लडकी बराबर में लेटी हो तो कौन बेवकूफ सोये गा. चांदनी ने मेरी तरफ पलट के देखा पर कुछ नहीं कहा.मै आराम से लेट गया जबकि चांदनी अभी भी बैठी थी
मै: लेट जाओ
चांदनी :मेरा ब्लाउज दो
मै: क्यों
चांदनी चुप रही और चुपचाप दुसरी तरफ मुह करके लेट गयी और सो गयी मै भी चुप चाप सो गया लेकिन कुछ देर में आंख खुल गयी चांदनी अभी भी सो रही थी लकिन अब उसका चेहरा मेरी तरफ था . करवट ले ने के कारन उसकी साड़ी उसके सीने से हट गयी थी और चांदनी के सुडौल स्तन मेरे सामने थे और मेरे होठ अपने आप उसके गुलाबी चुचकों को चूसने लगे चांदनी मेरी
तरफ खिसकने लगी और मुझ से लिपट गयी. होठ चुचियों से होठों पे पहुँच चुके थे और मेरा हाथ धीरे -२ उसकी मांसल जांघ पे फिसल रहे थे और बहुत ज़ल्द उसकी साड़ी उसके बदन से दूर होके फर्श पे पडी थी और मेरा टावल कहाँ था ये मुझे सोचने पे भी याद नहीं आ रहा है. हमारे बदन चिपकते गए दोनों के जिस्म एक दुसरे की आग से जल रहे थे उतेजना के कारन हाथ इधर उधर पड़ रहे थे
चांदनी और मै एक दुसरे से चिपटे हुए थे पर फिर भी ऐसा लग रहा था जैसे दूर हैं और फिर उसकी चूचियां चूसते-२ कब मै उसके ऊपर आ गया पता ही नहीं चला . मेरे होठ उसके होठों से चिपक गए और मेरा लंड उसकी चूत चूमने लगा . चांदनी की चूत ने उसका स्वागत किया और चांदनी ने धीरे से अपनी टांगों को खोलते हुए रास्ता बना दिया , बाकि काम लंड और चूत ने अपने आप किया लंड ने चूत को चूमा तो चूत ने उसे अन्दर बुला लिया और लुंड धीरे -२ अन्दर जाने लगा मै धीरे -२ दबाव बढ़ता गया और उसकी चिकनी चूत लंड को हड़प करती गयी उसकी चूत में लंड पूरा फिट था और फिर शुरू हुआ घमासान मै ऊपर से धक्के लगा रहा था और वो नीचे से पूरा सहयोग कर रही थी हम दोनों नए खिलाड़ी थे पर इस खेल में अब कुछ अपने आप आ जाता है, हम दोनों धीरे -२ स्वार्थी होने लगे और ये परवाह न करते हुए की साथी को क्या चाहिय सिर्फ अपना मज़ा करते रहे और इस मज़े में दुसरे को उतना ही मज़ा आ रहा था जितना की किसी एक को. एक को थकन होने लगती तो दूसरा मोर्चा संभल लेता और हमारा खेल चलता रहा चूत में लंड का आना जाना चुचियों का चुसना और मेरे चूतडों को दबाना होटों का चूमना सब कुछ चल रहा था चांदनी की चूत कई बार पानी बरसा चुकी थी पर हार नहीं मान रही थी हर बार फिर से तैयार हो जाती थी, पर समय को ये मंज़ूर नहीं था न जाने कब वो चरमोत्कर्ष पे पहुँच गयी और मेरे लंड पे पानी की ऐसी बारिश की मेरा लंड उस बारिश पे निहाल हो गया मेरे ध्कों की स्पीड अपने आप बढ़ती चली गयी और मेरे लंड ने भी बरसात कर दी . उसके नाख़ून मेरी कमर को जकड रहे थे पर किसे परवाह थी और कुछ ही देर में हम दोनों तृप्त होक एक दुसरे के बाँहों में समां गए. उसने मुझे चूमा और सिर्फ इतना कहा काश ये रात कभी ख़तम न हो. हम एक दुसरे की बाँहों में कब सो गए पता ही नहीं चला.

Find all posts by this user
Quote this message in a reply
02-22-2013, 01:11 PM
Post: #4
RE: वो लड़की
चाय ठंडी हो रही है उठो न, सुनकर मेरी आंख खुली चांदनी मेरे ऊपर झुकी थी और मुझे जगा रही थी. ऑंखें खोलते ही सबसे पहले मेरी निगाह चांदनी के होठों पे गयी . चांदनी ने मेरे होठों पे एक चुम्बन दिया और गुड मोर्निंग कहा. मैंने उसे अपनी बाँहों में भर लिया और अपने ऊपर लिटा लिया .लेकिन वो एक दम उठी और मै चाय लाती हूँ कह कर बहार चली गयी. मुझे जोर से पेशाब आ रहा था सो मै ने टोवल लपेटा और बाहर जा कर मूत आया. मै कपडे पहनने के लिए कपडे खोज रहा था के चांदनी कमरे में आयी उसने रात वाली साड़ी पहने थी चाय टेबल पे रख कर बेड पे बैठ गयी. मेरे कपडे वहां नहीं थे मैंने उस से अपने कपड़ों के लिए पूछा तो वो बेड से खडी हो गयी और बोली मुझे क्या पता कहाँ है तुम्हारे पास है मै ने कहा तो वो बोली अपने कपडे संभल के रखते . जब मैंने फिर से कहा तो चांदनी बोली मैंने तो अपने कपडे पहने है देख लो कह कर अपनी साड़ी हिलाने लगी मुझे तुम्हारे कपड़ों का क्या पता . वैसे इस ड्रेस मै भी बुरे नहीं लग रहे हो. कह कर हंस दी. मै उसके पास गया तो उस ने मेरा टोवल खिंच लिया और मै एक दम नंगा हो गया. जैसे ही उसने मेरा टोवल खिंचा मैंने उसकी साड़ी का पल्लू पकड़ कर खिंच लिया वो संभल पाती उस से पहले उस की साड़ी खुल गयी और वो टॉपलेस हो गयी उसने ब्लाउज और ब्रा नहीं पहनी थी साथ ही वो वो मेरे एक दम्पास आ गयी हमारी दोनों की नज़रें मिली और हम एक दुसरे की बाँहों में समां गए होठ चिपक गए सीने से चूचियां लिपट गयी पेट पेट को चूम रहा था और हाथ एक दुसरे की कमर पे कसे थे मेरे हाथ फिसलते हुए उसके नितम्बों पे पहुंचे तो उसकी साड़ी अपने आप उसका बदन छोड़ के चली गयी और मैंने हल्का सा एडजेस्ट करते हुए अपना लंड उसकी चूत पे रगड़ने लगा. पर वो मेरे से ज्यादा आतुर थी उस ने एडजेस्ट करते हुए लंड को अपनी चूत के होठों में दबा लिया मैंने बिना देर किये उसके चूतडों को दबाते हुए हल्का सा झटका दिया तो लंड लगभग १.५ इंच अन्दर चला गया कुछ देर हम ऐसे ही खडे रहे मैंने अपने होंठ उसके होठों से आजाद कराये और उसे गोद में आने को कहा वो उसी तरह मेरी गर्दन में हाथ डालकर अपनी टांगेमेरी कमर पे लपेट दी और मै उसे लेकर बेड की तरफ चल दिया मेरा लंड उसकी चूत में था चलने से उसकी चूत मेरे लंड को गुदगुदा रही थी और फिर जैसे ही मैंने उसे पलंग पे लिटाया उस ने मुझे फिर से कास लिया . मै भी जोश में था और जोश -२ में लंड चूत में जाता गया बहार आता गया फिर गे फिर आया ये सब कितनी देर हुआ नहीं पता पर जब होश आया तो हम दोनों निढाल थे हम दोनों एक दुसरे की बाँहों में काफी देर तक लेटे रहे . लाओ यार चाय पिलाओ तो वो उठ ते हुए बोली इतनी मेहनत के बाद तो जो माँगो वो मिलेगा और फिर हम दोनों नंगे चाय पीने लगे.

Find all posts by this user
Quote this message in a reply
02-22-2013, 01:11 PM
Post: #5
RE: वो लड़की
मैंने चांदनी से कपडे मांगे तो वो बोली तुम मुझे इस ड्रेस में ज्यादा अच्छे लगते हो इस लिए तुम नंगे रहो तो अच्छा है पर अगर पहनने है तो ये टोवल पहन सकते हो.चाय पी सिगरेट पी फ्रेश हुआ और बाकि काम निबटते -२ मुझे भूक लगने लगी . मै अन्दर गया तो चांदनी एक नार्मल गोउन पहने हुए नाश्ता बना रही थी. मैंने उसे पीछे से जा कर पकड़ लिया और उसके मोमे दबाने लगा और दुसरे हाथ से उसके नितम्ब दबाते हुए उसकी चूत खुजलाने लगा. ये बताने की जरुरत नहीं है के वो ब्रा या पंतय नहीं पाहे थी. वो थोड़ी देर मज़े लेती रही फिर बोली पहले नाश्ता कर लो फिर कर लेना . कहती हुई नाश्ता ट्रे में रख के कमरे की तरफ चल दी. मुझे ठण्ड लग रही थी तो मैंने कहा कुछ तो दे दो पहनने को मुझे ठण्ड लग रही है. चांदनी ने जवाब दिया तुमने भी एक कपडा पहना है और मैंने भी एक कपडा पहना है और अगर ठण्ड लग रही है तो बहार धुप में बैठते है ठीक है मैंने कहा . फिर हम दोनों धुप में बैठ के नाश्ता करने लगे . नाश्ता क्या था सॉलिड आलू के पराठा और माखन चार पराठे खा के तबियत मस्त हो गयी . नाश्ता कर के हम वहीँ आराम करने लगे बात करते -२ और सिगरेट पीते रहे और मुझे कब नींद आ गयी पता नहीं चला. आँख खुली तो चांदनी वहां नहीं थी. मै उठ के अन्दर गया तो वो रसोई में कुछ बना रही थी मैंने पुचा क्या कर रही हो . कुछ नहीं बस हो गया कहते हुए वो रसोई से बाहर आ गयी. मैंने एक बार फिर उसे बाँहों में कास लिया तो वो बोली छोड़ो मुझे नहाना है. कह के वो बाथरूम की तरफ चल दी मै उसके पीछे -२ चल दिया. बाथरूम कहने को था पर एक अच्छा खासा कमरा था मैंने अन्दर घुसते ही उस के कपडे उतर दिए और उस ने मेरा टोवल खिंच दिया हम दोनों ने एक दुसरे को नहलाया उस ने मेरे पुरे बदन पे साबुन लगाया मेरे लंड को अच्छी तरह साफ़ किया मैंने भी उसकी चुचियों को खूब रगडा और चूत को ऊँगली डाल के साफ़ किया नाह के हम दोनों बहार आ गए उस ने मुझे टी शर्ट और पायजामा दिया और खुद दुसरे कमरे में गांड मटकाती हुई चली गयी. मै कपडे पहन के बहार धुप में बैठ गया. थोड़ी देर बाद उस ने आवाज़ लगाई तो में अन्दर कमरे में गया. वो सलवार कमीज़ पहने थी. वो बोली व्हिस्की ख़तम हो गयी है कहाँ मिलेगी मैंने पूछा. दुकान पे उसने कहा. मेरा मतलब है कहाँ है . लगभग ५ किलोमीटर पे है. मैंने रास्ता पूछा कपडे बदले और गाडी ले के चला गया. मैंने तीन बोतल ब्लेंदेर्स प्राइड की ली और सोडा सिगरेट वगेरह ले के वापस आ गया.
जब में वापस पहुंचा तो कमरे में टेबल सजी हुई थी और स्टीरियो पे दारू वाली ग़ज़ल चल रही थी और नीचे फर्श पे बिस्तर लगा था. पर चांदनी वहां नहीं थी तभी वो आयी . उस ने गुलाबी रंग की फ्रंट ओपन टाइट शर्ट और इस्कर्ट पहनी थी, उस की शर्ट इतनी टाइट थी की बटन टूटने को थे उस ने पेग बनाये और हम नीचे बिस्तर पे बैठ के पीने लगे . वो मेरे सामने बैठी थी उस ने कहा एक गेम खेलते है हम दोनों में जो भी दुसरे को हाथ लगाये गा उसे दुसरे की एक बात माननी होगी. और दूसरा जो भी उसे करने को कहेगा वो करना होगा. उसकी गोरी जांघ मेरी आँखों के सामने थी चूचियां आधी आँखों के सामने थी मन कर रहा था की दबा दूँ पर मै गेम का मज़ा लेना चाहता था. दो -२ पेग अन्दर जाते -२ हमारी शरारत बढने लगी वो अपने पैर से मेरे लंड को बार-२ दबा रही थी मैंने भी उसकी स्कर्ट में पाँव घुसा के जांघे सहला रहा था वो शायद ज्यादा गरम हो गयी उस की ऑंखें और चेहरा लाल हो गया . वो अचानक खडी हुई और मेरी गोद में बैठ गयी और मेरे होठों पे होठ रख के चूसने लगी एक शानदार चुम्बन होठ सिले थे जीभ एक दुसरे को चाट रही थी और इस सब में मै इतना मस्त हुआ की भूल गया के मुझे हाथ नहीं लगाना मै ने उसे बाँहों में कस लिया और एक शानदार की समाप्ती पे उसने कहा छोड़ो मैंने उसे अपनी बाँहों से आजाद किया तो याद आया, मै एक राउंड हार गया था उस ने खडे होते हुए कहा तुम हार गए . और अपनी जगह पे बैठ गयी अपनी पेंट उतारो . मै खड़ा हुआ और अपनी पेंट उतार दी मैंने अंडरवियर नहीं पहना था सो मेरा कड़क लंड उसके सामने था. हम फिर से पेग लगाने लगे मैंने अपने पाँव के अंगूठे से उसकी शर्ट के चूची वाले बटन खोल दिए और उसकी चूत के ऊपर पाँव से रगड़ने लगा. कुछ देर में मै खड़ा हुआ और उस की चूचियां शर्ट के ऊपर से चूसने लगा और अपने पाँव से उसकी स्कर्ट को ऊपर कर दिया और लंड उसकी जांघों पे रगडने लगा वो पगला गयी और मेरे सर को अपनी चुचियों पे दबाने लगी . मै खड़ा हुआ . वो समझ गयी और बोली . क्या करना है . शर्ट उतारो मैंने कहा उस ने शर्ट उतारी और एक और फेंक दी. इस तरह हमारी शरारत चलती रही और कपडे उतरते रहे मै पूरी तरह नंगा था पर उस के बदन पे स्कर्ट थी. शरारत इस कदर बड़ी की उस ने अपनी स्कर्ट ऊपर की और मेरे र दोनों साइड पैर रख के बैठ गयी मेरा लंड उस की चूत को छु रहा था मैंने अपना लंड अड्जेस्ट किया और उसकी चूत पे लगा दिया वो थोडा सा अड्जेस्ट हुई और बैठ गयी लंड उस की गीली चूत में फिसलता हुआ अन्दर गया तो वो चीख पडी और एक दम खडी हो गयी . मै हंस पड़ा उस की आँखों में दर्द था फिर से बैठ गयी पर अबकी बार लंड चूत से काफी दूर था और मेरे सीने पे घूंसे मारने लगी. तुम हार गयी मैंने कहा. वो खडी हुई और स्कर्ट सरका के बोली तुम पहले हार चुके हो और इस गेम में कौन हरता है देखते हैं कह के बिस्तर पे लेट गयी और मुझे अपने ऊपर खींच लिया . मै चूचियां दबाता रहा चूसता रहा और वो मुझे बाँहों में कस ते हुए चूमती रही मैंने भी उसकी चिकनी और गीली चूत पे लंड रखा तो वो निहाल हो गयी आओ ना - ही कह पाई थी की लंड के झटके ने उसे हिला दिया और फिर झटके जब तक चले जब तक्ल की लंड पूरा नहीं घुस गया चांदनी हर झटके का मज़ा ले रही थी और मज़ा दे रही थी हम दोनों टूट कर एक दुसरे में समां जाना चाहते थे कौन क्या कर रहा था याद नहीं पर याद है तो इतना की वो नीचे लेट कर पूरा सहयोग कर रही थी और मै ऊपर लेट कर उसके हाथ कभी मेरे चूतड़ों को नोचते थे तो कभी कमर उसके होठ कभी मेरे होठ चुस्ती थे तो कभी उसके दांत मेरे कंधे पे होते थे. उस के मुहं से आन्हें और मस्त आवाजें मुझे मस्त कर रही थी वो मुझे उत्तेजीत कर रही थी की मै और ज्यादा झटके लगाऊ और ज्यादा उस की चूचियां दबाऊ और ज्यादा उस के बदन से खेलूं . और मै वो सब कर रहा था जिस में उसे मज़ा आये क्योंकी उस के मजे में मुझे मज़ा आ रहा था. हम दोनों काफी देर तक मज़ा करते रहे वो दो तीन बार झर चुकी थी पर मैदान नहीं छोड़ रही थी मुझे लगा मै जल्द ही झरने वाला हूँ . मैने उसे कहा मै आ रहा हूँ तो उस ने कहा नहीं . और मुझे अपने ऊपर से हटा दिया . मेरी हालत ऐसी थी जैसे किसी बच्चे से उसका खिलौना छीन लिया हो थोड़ी देर हम दोनों ऐसे ही लेटे रहे . कुछ देर बाद वो उठी और सुसु करने चली गयी मुझे भी सु सु आने लगी तो मै उसके पीछे चला गया वो सु सु कर रही थी मै भी उस के बराबर में सु सु करने लगा . तभी उसने बाल्टी मे से मग भरा और मेरे ऊपर पानी डाल दिया और एक बार फिर मस्ती शुरू हो गयी हम दोनों एक दुसरे को नहला रहे थे और बारबार एक दुसरे के अंगो को छेड़ रहे थे चूची चूसते और पपियां लेते-२ हम एक बार फिर चूत और लंड को मिलने लगे पर ठीक से हो नहीं पा रहा था तो मैने उसे गोद में उठा लिया और बिस्तर पे लिटा दिया. वो बैठ गयी और पेग बनाने लगी . सिगरेट पिलाओ न यार चांदनी बोली मुझे पता नहीं क्या सुझा मे खड़ा हुआ और लंड उसके होटों से लगा दिया, सिगार पियो ज्यादा मज़ा आयेगा. उस ने मेरे लंड पे पप्पी ली और बोली मुझे सिगरेट का शौक है. मैंने सिगरेट जलाई और उसे दे दी. हम दोनों बराबर -२ बैठ गए और पी ते रहे और एक दुसरे के साथ खिलवाड़ करते रहे. वो जब भी प्लेट में से पकोडे उठाने के लिए झुकती थी तो उसकी चूचियां मेरे सीने से रगड़ ती थी. मे बार बार दबा देता था . लेकिन अबकी बार मैंने हाथों की जगह होटों को कष्ट दिया और उसकी चूची चूसने लगा . वो सरक के मेरे पास आ गयी और मैंने उसे बाँहों में भर लिया . वो मेरे ऊपर बैठ गयी और मे मजे से चूचियां चूसता रहा वो अपने सीने में मुझे दबाती रही . और फिर हमारे होठ एक दुसरे से चिपक गए उस ने मुझे बाँहों में कस लिया मेरा लंड उसके चूतड़ों को चूम रहा था. और मुझे अपने ऊपर लिटाते हुए वो बिस्तर पे लेट गयी. मेरा लंड उसकी चूत पे सैट हो गया और कैसे वो अन्दर तक गया पता नहीं. झटकों, धक्कों , आँहों और करहने का सिलसिला चालू हो गया हम दोनों मस्ती में मस्त थे और एक शानदार चुदाई का मज़ा ले रहे थे हर धक्का अलग मज़ा दे रहा था उस की चूत से फव्वारा निकला तो ढाकों की स्पीड और बढ़ गयी , वो चुमते -२ काट लेती थी पर किसी परवाह थी , उसकी चूचियां मेरे सीने के नीचे फ्लैट हो गयी थी जब भी मैं ऊपर होता था तो वो फिर से खडे हो कर चैलेंज दे दे ते थे और मुझे उन्हे दबाना पड़ता था हर बार दबाने से मुझे लगता था की वो कठोर हो गयी हैं मेरे होठ बरबस चुचियों को चूसने लगते थे लगभग २० -२५ मिनट ये सिलसिला चलता रहा. इस बीच २-३ बार उसकी चूत ने फव्वारा छोड़ा और मेरा लंड नहला दिया. झटकों के बीच मेरे होठ उसके होटों से सटे तो स्पीड बढ़ गयी उस के दांत मेरे कंधे पे काट रहे थे तो उँगलियों के नाख़ून कमर को छील रही थी पर किसी परवाह थी. हम दोनों तो उस समाया जन्नंत में थे.पर तभी उसकी चूत का फव्वारा निकला तो मेरे लंड ने उसकी चूत में फव्वारा छोड़ दिया. हम दोनों अपनी-२ मजिल पे पहुँच चुके थे और मे बेदम सा उसके ऊपर लेट गया पर कुछ मिनट बाद मे उसके बराबर में लेटा तो वो मेरे से चिपक के लेट गयी और कब हम दोनों सो गए पता नहीं.l

Find all posts by this user
Quote this message in a reply
02-22-2013, 01:11 PM
Post: #6
RE: वो लड़की
चांदनी मुझे झकझोर रही थी जैसे ही मैंने ऑंखें खोली वो बोली यार तुम तो ऐसे सो रहे हो जैसे कोई पहाड़ तोडा हो. मे मुस्कुराते हुए उठा उसने सिगरेट मेरी तरफ बढ़ा दी और अपने लिए पेग बनाने लगी . मैंने पूछा टाइम क्या हुआ है चांदनी ने बहुत जल्दी से बोला चूत चुदने में एक घंटा बचा है. क्या बोला मैंने कहा तो वो बोली यार ८.३० बजे हैं. और एक घूंट पी के पेग मेरी तरफ बढ़ा दिया और सिगरेट ले कर किचन में चली गयी. उसने गाउन पहने था मै उसके पीछे किचेन में गया गिलास स्लैब पे रख कर और उसके पीछे खड़ा होकर उसे बाँहों में भर लिया और कपड़ों के ऊपर से ही चूचियां दबाने लगा. उसने गिलास उठाया और घूंट भरते हुए एक पकोड़ा खाया और मेरे मुह में पकोड़ा डालते हुए बोली पकोड़ा खाओ, मैंने उसके गाउन में हाथ डाल के चूचियां दबाते हुए कहा ये पकोडे ज्यादा अच्छे है. चांदनी अचानक मेरी तरफ घूमी तो मैंने उसके गाउन की बेल्ट खोल दी और उसका फ्रंट ओपन गाउन पूरा खुल गया. अब गाउन का होना या न होना कोई मेटर नहीं था वो बड़े गुस्से में मुझे धक्का देती हुयी बिस्तर तक ले गयी और धक्का दे कर गिरा दिया ये मेरे लिए अप्रत्याशित था. मेरे लेट ते ही उसने अपना गाउन एक तरफ किया और मेरे सर के दोनों तरफ पैर करके खडी हो गयी वो नीचे से ऊपर तक नंगी थी गाउन एक तरफ था क्या कह रहे हो मेरी चूचियां पकोड़ा हैं. ये ३४ डी साइज़ की चूचियां तुझे पकोड़ा लगती हैं. मै हाथ जोड़ के बोला गलती हो गयी मैडम, वो बोली पकोड़ा खाना है, मैने हंसते हुए कहा हाँ . तो वो अचानक मेरे ऊपर बैठ गयी उसकी चूत मेरे मुहं पे थी. अपनी चूत मेरे मुहं पे रगडती हुए बोली ये है पकोड़ा खा इसे, रसीला पकोड़ा, और मैंने उसकी चूत पे हल्के -२ काट ते हुए चाटना शुरू कर दिया और उसका गाउन उसके कंधे से हटा दिया वो पुरी नंगी थी , मैने उसकी चूत को मुह में खींचते हुए उसकी चुचियों को दबाने लगा. मुश्किल से दो मिनट हुए थे वो मेरे बालों को पकड़ कर खींचते हुए मेरे मुह पे चूत दबाने लगी और अचानक उसकी चूचियां जो की मेरे हाथों से मस्ती लूट रहीं थे पत्थर की तरह कठोर हो गयीं उसकी कमर धनुष की तरह हो गयी और उसके मुहं से आवाज़ निकली आह माआआआआआ मै मरीईईईई . और उसकी चूत से पानी का फव्वारा निकल पड़ा कुछ देर वो ऐसे ही बैठी रही और फिर मेरे ऊपर से फिसलती हुई बिस्तर पे गिर गयी, मै उसे देखता रहा वो ऐसे लेटी थी जैसे उसमे जान ही न हो ऑंखें बंद सच में बहुत सुन्दर लग रही थी, कुछ देर बाद उसने ऑंखें खोली तो मैंने पूछा क्या हुआ. वो मुस्कुरा के मेरे से लिपट गयी, फिर बोली सिगरेट दो ना . मै उठा और सिगरेट जला के उसे दे रहा था की मुझे शरारत सूझी मैने उस से कहा मुह खोलो तो जैसे ही उसने मुह खोला मैने अपना लंड उस के मुह से लगा दिया उस ने जीभ से उसे गुदगुदाया और तीन चार बार चूसते हुए मुहं से बहार निकल दिया, और बोली मुझे सिगरेट चाहिये क्रीम रोल नहीं और मेरे हाथ से सिगरेट ले के पी ने लगी.

Find all posts by this user
Quote this message in a reply
02-22-2013, 01:11 PM
Post: #7
RE: वो लड़की
चांदनी मुझे झकझोर रही थी जैसे ही मैंने ऑंखें खोली वो बोली यार तुम तो ऐसे सो रहे हो जैसे कोई पहाड़ तोडा हो. मे मुस्कुराते हुए उठा उसने सिगरेट मेरी तरफ बढ़ा दी और अपने लिए पेग बनाने लगी . मैंने पूछा टाइम क्या हुआ है चांदनी ने बहुत जल्दी से बोला चूत चुदने में एक घंटा बचा है. क्या बोला मैंने कहा तो वो बोली यार ८.३० बजे हैं. और एक घूंट पी के पेग मेरी तरफ बढ़ा दिया और सिगरेट ले कर किचन में चली गयी. उसने गाउन पहने था मै उसके पीछे किचेन में गया गिलास स्लैब पे रख कर और उसके पीछे खड़ा होकर उसे बाँहों में भर लिया और कपड़ों के ऊपर से ही चूचियां दबाने लगा. उसने गिलास उठाया और घूंट भरते हुए एक पकोड़ा खाया और मेरे मुह में पकोड़ा डालते हुए बोली पकोड़ा खाओ, मैंने उसके गाउन में हाथ डाल के चूचियां दबाते हुए कहा ये पकोडे ज्यादा अच्छे है. चांदनी अचानक मेरी तरफ घूमी तो मैंने उसके गाउन की बेल्ट खोल दी और उसका फ्रंट ओपन गाउन पूरा खुल गया. अब गाउन का होना या न होना कोई मेटर नहीं था वो बड़े गुस्से में मुझे धक्का देती हुयी बिस्तर तक ले गयी और धक्का दे कर गिरा दिया ये मेरे लिए अप्रत्याशित था. मेरे लेट ते ही उसने अपना गाउन एक तरफ किया और मेरे सर के दोनों तरफ पैर करके खडी हो गयी वो नीचे से ऊपर तक नंगी थी गाउन एक तरफ था क्या कह रहे हो मेरी चूचियां पकोड़ा हैं. ये ३४ डी साइज़ की चूचियां तुझे पकोड़ा लगती हैं. मै हाथ जोड़ के बोला गलती हो गयी मैडम, वो बोली पकोड़ा खाना है, मैने हंसते हुए कहा हाँ . तो वो अचानक मेरे ऊपर बैठ गयी उसकी चूत मेरे मुहं पे थी. अपनी चूत मेरे मुहं पे रगडती हुए बोली ये है पकोड़ा खा इसे, रसीला पकोड़ा, और मैंने उसकी चूत पे हल्के -२ काट ते हुए चाटना शुरू कर दिया और उसका गाउन उसके कंधे से हटा दिया वो पुरी नंगी थी , मैने उसकी चूत को मुह में खींचते हुए उसकी चुचियों को दबाने लगा. मुश्किल से दो मिनट हुए थे वो मेरे बालों को पकड़ कर खींचते हुए मेरे मुह पे चूत दबाने लगी और अचानक उसकी चूचियां जो की मेरे हाथों से मस्ती लूट रहीं थे पत्थर की तरह कठोर हो गयीं उसकी कमर धनुष की तरह हो गयी और उसके मुहं से आवाज़ निकली आह माआआआआआ मै मरीईईईई . और उसकी चूत से पानी का फव्वारा निकल पड़ा कुछ देर वो ऐसे ही बैठी रही और फिर मेरे ऊपर से फिसलती हुई बिस्तर पे गिर गयी, मै उसे देखता रहा वो ऐसे लेटी थी जैसे उसमे जान ही न हो ऑंखें बंद सच में बहुत सुन्दर लग रही थी, कुछ देर बाद उसने ऑंखें खोली तो मैंने पूछा क्या हुआ. वो मुस्कुरा के मेरे से लिपट गयी, फिर बोली सिगरेट दो ना . मै उठा और सिगरेट जला के उसे दे रहा था की मुझे शरारत सूझी मैने उस से कहा मुह खोलो तो जैसे ही उसने मुह खोला मैने अपना लंड उस के मुह से लगा दिया उस ने जीभ से उसे गुदगुदाया और तीन चार बार चूसते हुए मुहं से बहार निकल दिया, और बोली मुझे सिगरेट चाहिये क्रीम रोल नहीं और मेरे हाथ से सिगरेट ले के पी ने लगी.

Find all posts by this user
Quote this message in a reply
02-22-2013, 01:11 PM
Post: #8
RE: वो लड़की
सिगरेट पीते -२ वो किचन में गयी और पकोडे तैयार करके ले आयी हम दोनों पकोडे खा रहे थे और पेग लगा रहे थे इस के अलावा जो चीज साथ -२ चल रही थे वो थी चुम्बन , चूची से खेलना दबाना, और वो सब कुछ जो के फॉर प्ले में होता है कुछ देर में पकोडे ख़तम हो गए तो वो खडी हुए और पकोडे तैयार करके ले आयी, वो जैसे ही पकोडे की प्लेट रखने के लिए झुकी मैंने उस की चूचियां दबा दी जो की मेरे मुहं के सामने थी . वो तुरंत सीधी खडी हुई और बोतल ले के बैठने वाली थी की मैने कहा यार ठण्ड लग रही है तो चांदनी ने पूछा आग जला दूँ, मैंने कहा वो तो पहले से लगी है वो हँसते हुए फायर प्लेस की तरफ गयी और झुक के आग लगाने लगी . इस समय उस की गांड मेरी तरफ थी , और झुकने से उस की चूत भी अब मेरे मुहं के पास थी . उसने थोड़ी सी व्हिस्की लकड़ियों पे डाली और कुछ देर रूक के उस में आग लगा दी, वो कुछ देर ऐसे ही खडी रही, मेरा शैतान मन जग गया था, मैंने उसे कमर से पकड़ा और उस की चूत पे ऊँगली रख के सहलाने लगा , तुम आराम से नहीं बैठ सकते चांदनी बोली, और फिर आग ठीक करने लगी मेरी ऊँगली काम कर रही थी, चांदनी गीली होने लगी थी, मुझे लगा उस का काम हो चूका है और वो सीधी होने वाली है तो मैने एक दम से अपनी ऊँगली उस की चूत में घुसा दी , ऊँगली ज्यादा तो नहीं घुसी पर वो उचल पडी और मेरी तरफ मुडते हुए बोली तुम ऐसे नहीं मानोगे और मुझे बिस्तर पे धक्का दे के गिरा दिया और मेरे लंड पे बैठ गयी वो इस तरह बैठी की थोडा सा लंड उस की चूत में घुस गया पर बाकि लंड टेढ़ा हो गया , अब की बार चीखने की मेरी बारी थी, मै उस से उठने के लिया कहता रहा पर वो उसी तरह बैठी अपनी चूत पे लंड घीस्ती रही मुझे मज़ा भी आ रहा था पर हल्का -२ दर्द भी हो रहा था,मैने उस की चुचियों को मुह में ले के चुसना शुरू कर दिया और दुसरी को दबाने लगा, साथ ही उसकी चूत को ऊँगली से छेड़ने लगा, कुछ देर हम ऐसे ही मस्ती करते रहे और बीच -२ में पेग भी पी ते रहे और वो मेरे महू में पकोड़ा भी खिलती रही, बड़ा मज़ा आ रहा था के उसका बदन ऐठने लगा और तीन चार बार उसने मेरे लंड को अपनी चूत में घीसा और पानी छोड़ दिया, और फिर अलग बैठ के अपनी साँस नार्मल करने लगी.

Find all posts by this user
Quote this message in a reply
Post Reply 


Possibly Related Threads...
Thread:AuthorReplies:Views:Last Post
  नंगी जवान लड़की Le Lee 0 1,715 06-01-2017 03:49 AM
Last Post: Le Lee
  गावं की लड़की Penis Fire 10 51,263 05-26-2015 04:58 AM
Last Post: Penis Fire
  लड़की से औरत बनी Penis Fire 1 25,121 03-13-2014 07:56 PM
Last Post: sangeeta32
  मेरे दफ़्तर की लड़की Penis Fire 1 17,737 03-04-2014 04:43 AM
Last Post: Penis Fire
  लड़की की चुत Sex-Stories 0 12,417 05-16-2013 09:07 AM
Last Post: Sex-Stories
  एक लड़की Sex-Stories 0 6,882 05-16-2013 09:06 AM
Last Post: Sex-Stories
  कामुक लड़की Sex-Stories 0 7,177 05-16-2013 09:02 AM
Last Post: Sex-Stories
  मैं और मेरी मौसी की लड़की गौरी Sex-Stories 0 16,841 12-19-2012 04:13 PM
Last Post: Sex-Stories
  मैंने अपनी बुआ की लड़की को चोदा chachanlpanday 1 56,920 07-15-2012 06:11 PM
Last Post: Sex-Stories
  माऊंट आबू में मुम्बई की लड़की Fileserve 0 4,407 03-01-2011 06:01 PM
Last Post: Fileserve