विधवा चाची की चुदाई
विधवा चाची की चुत चुदाई

आप सबको मेरा नमस्कार! मेरा नाम राजेश है, मेरी उम्र अभी 21 वर्ष की है, रंग गोरा है और मैं बिलासपुर (छत्तीसगढ़) के एक गाँव से हूँ। मैं अन्तर्वासना को पिछले दस साल से पढ़ता आ रहा हूँ.. तो मैंने सोचा कि मैं भी अपनी एक सच्ची कहानी आप सब को बताऊँ। बात 5 माह पहले की है, मैं परीक्षा खत्म होने के बाद गाँव आ गया था। मुझे पता चला कि मेरे पड़ोस के चाचा का देहांत हो गया है।

उस समय चाची की उम्र 45-46 की रही होगी.. पर देखने में वो बहुत कम उम्र की लड़की जैसी दिखती थीं। यदि चाची को जींस टी-शर्ट पहना दी जाए.. तो कोई नहीं कह सकता था कि वो तीन बच्चों की माँ होंगी। मेरा दावा है कि जींस टी-शर्ट में उनके इस मदमस्त हुस्न को देख कर लौंडों का लंड खड़ा होने में बिल्कुल देर नहीं लगेगी। चाची का नाम रानी (बदला हुआ) है, उनकी तीन बच्चे हैं और उनका रंग बहुत गोरा है। जब मैं गांव आया तो चाची के यहाँ सिर्फ चाची और उनके बच्चों के अलावा उनकी बूढ़ी सास थीं.. तो मैं थोड़ा बहुत उनकी मदद कर दिया करता था। पर अब तक मेरे मन में उनके प्रति कोई कामुक विचार नहीं था।

एक दिन मैं सुबह उनके बुलाने पर घर गया। उस वक्त चाची की सास बाहर बैठ कर धूप सेंक रही थीं और अन्दर टीवी चल रहा था, जिसकी आवाज बाहर तक आ रही थी। मैं अन्दर चला गया, बच्चे स्कूल चले गए थे और चाची अन्दर नहीं थीं। मैं चाची को आवाज लगाने वाला ही था कि बाथरूम से पानी गिरने की आवाज आई। चाची का हॉल बाथरूम से लगा हुआ है.. तो मैंने सोचा कि चाची नहा रही होंगी। मैं बैठ कर टीवी देखने लगा। करीब दस मिनट बाद बाथरूम का दरवाजा खुला तो मैं बाथरूम की ओर देखने लगा। चाची एक छोटी सी तौलिया लपेट कर बाहर आईं तो मैं उन्हें एकटक देखता ही रह गया।

मेरा तो पसीना ही छूट गया.. इतनी गोरी और चिकनी जांघें देखने से मेरा लंड खड़ा हो गया। चाची मुझको देख कर फिर वापस अन्दर चली गईं और मुझे आवाज देते हुए बोलने लगीं- राजेश राजेश.. मैं- हाँ चाची क्या हुआ? चाची- सामने टेबल पर मेरी कपड़े रखे हैं, क्या तुम लाकर दे दोगे? मैंने टेबल से उनके कपड़ों के साथ ब्रा और पेंटी उठाई और बाथरूम के पास जाकर बोला- ये लो.. चाची अपने हाथ बाहर करके लेने लगीं.. तो मैंने उनका हाथ पकड़ लिया और बोला- आपने तौलिया पहना तो है.. आप बाहर आ सकती हो।

चाची हँस कर बोलीं- ये क्या कर रहे हो राजेश, कोई देख लेगा.. मेरा हाथ छोड़ो! मैं- यहाँ मेरे अलावा कोई नहीं है.. आप आ सकती हो। चाची- नहीं मुझे शर्म आती है। मैं- मुझसे कैसी शर्म! मेरे जिद करने पर वो बाहर आ गईं और अपने कमरे में जाकर कपड़े पहनने लगीं, मैं दरवाजे के छेद से सब देख रहा था। वो कपड़े पहन कर बाहर आने लगीं, तो मैं कुर्सी पर बैठ कर टीवी देखने लगा। चाची भी मेरे पास आकर बैठ गईं और बदले हुए स्वर में बोलीं- आज तुमने ऐसा करने की हिम्मत कैसे की? पहले तो मेरी डर के मारे गांड फटनी चालू हो गई और मैंने सर झुका कर बोला- आपको बुरा लगा हो तो सॉरी! तभी चाची एकदम हँस कर बोलीं- मुझे बुरा नहीं लगा.. तुम डरो मत! अब मैं शांत हुआ और बोला- आपने मुझको क्यों बुलाया था? चाची बोलीं- मेरा हीटर खराब हो गया है.. तुम ठीक कर दो।

मैं झट से बोला- ठीक है.. अभी कर देता हूँ। हम दोनों किचन की तरफ आने लगे.. पर मेरे दिमाग में कुछ खुराफात चल रही थी। मैं सोच रहा था कि जब चाची को बुरा नहीं लगा तो इसका मतलब है कि अब मैं उनको चोद सकता हूँ और अब मैं उसको चोदने के तरीके सोचने लगा। मैं चाची के पीछे चल रहा था, इस समय चाची की गांड गजब हिल रही थी.. जिसे देख कर मैं और भी पागल हो रहा था। यह हिंदी सेक्स स्टोरी आप अन्तर्वासना सेक्स स्टोरीज डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं! मैंने किचन में आकर हीटर ठीक किया और बोला- चाची मैंने आपका हीटर ठीक कर दिया है.. तो आप अब मुझको क्या दोगी? वो मेरे गाल को सहलाते हुए बोलीं- क्या चाहिए मेरे छोटे नवाब को? मैंने हिम्मत जुटा कर कहा- मुझको आपको किस करना है।

चाची- नहीं किसी को पता चल गया तो..! मैं- कैसे पता चलेगा, आप किसी को बताओगी नहीं.. और मैं भी किसी को नहीं बताने वाला नहीं हूँ! चाची- नहीं.. मैं ये नहीं कर सकती! पर मेरे जोर देने पर वो मन ही मन मान गई और वो बोलीं- अच्छा सिर्फ एक बार! मैं अपना होंठ उनके होंठ से चिपका कर उन्हें किस करने लगा.. पर चाची ने मुझे कुछ पल बाद अपने से अलग करके कहा- बस हो गया! पर मैं कहाँ मानने वाला था, मैं बोला- सिर्फ एक किस की बात हुई थी.. पर मैं चाहे जितना लंबा किस करूँ, ये तय नहीं हुआ था। मैंने हँस कर उन्हें पकड़ लिया और फिर से किस करने लगा। चाची ने कोई आपत्ति नहीं की, तो मेरी हाथ उनकी पीठ को सहलाने लगा। धीरे-धीरे मैं अपना हाथ उनकी गांड पर फिराने लग गया.. इस कारण उन्होंने छूटने की बहुत कोशिश की.. पर वो मेरी पकड़ छूट नहीं पाईं।

कुछ ही देर में उनका विरोध ढीला पड़ गया और वो मुझे चूमने में साथ देने लगीं। अब मैं अपना हाथ उनकी गोलाइयों पर ले आया और उनके दूध सहलाने लगा.. जिससे उनके मुँह से हल्की सी ‘आह..’ निकल गई। सच में चाची के क्या मस्त दूध थे.. एकदम मुलायम..! अब मैं चाची की चूचियों को मसलने लगा.. जिससे वे कामुकता से सिसकारने लगीं- आह उम्म्ह… अहह… हय… याह… सी सीई.. मैं उनकी चूचियों को कपड़ों को ऊपर से चूसने लगा, वो सिसकारते हुए बोलीं- आह छछोड़ो.. ममुझे.. रराज्जेश.. स्सासू माँ देख लेंगीई..! मैंने देर ना करते हुए उन्हें किचन कि स्लैब पर बैठाया और अपना लंड लोअर से निकाल कर उनके हाथ में दे दिया।

मेरा लोहे सा सख्त और लम्बा लंड देख कर चाची खुश होकर बोलीं- ओह्ह.. इतना बड़ा और मोटा हथियार..! मैं बोला- आपके लिए ही कसरत करके बनाया है। वो बड़े प्यार से मेरे लंड को सहलाने लगीं। अब मैंने उनके ब्लाउज के बटन खोल दिए और उनके मम्मों को एक-एक करके चूसने लगा। इसके साथ ही मैंने एक हाथ से उनकी साड़ी उठा कर उनकी चुत मसलने लगा। चाची की चुत में में बहुत ज्यादा झांटें उगी थीं.. जो मखमल का अहसास दे रही थीं। अपनी मखमली चुत पर हाथ मेरा लगते ही वो और मादक हो उठीं और सिसकारने लगीं। चाची बोलीं- जल्दी से अपना लंड मेरी चुत में डाल दो.. नहीं तो कोई आ जाएगा। मैंने भी देर ना करते हुए अपना लंड हाथ में लेकर उनकी टांगों को फैलाते हुए उनकी चुत पर रख दिया और एक जोरदार धक्का मारा.. जिससे चाची की चीख निकल गई और वे दर्द से गिड़गिड़ाने लगीं- ओह.. बहुत मोटा है.. प्लीज अपना लंड बाहर निकालो.. मुझे बहुत दर्द हो रहा है! पर मैं कहाँ मानने वाला था.. मैंने अपने होंठ उनके होंठ पर रखे और फिर से एक जोर का धक्का दे मारा।

मेरा लंड उनकी चुत को चीरता हुआ पूरा अन्दर घुस गया। उनकी आँखों से आंसू निकल आए.. पर मैं रुका नहीं। मैं उनके दूध दबाते हुए धक्कों पर धक्के देता रहा। ‘आह.. आह मर गई रे.. धीरे कर.. प्लीज धीरे.. बहुत दर्द हो रहा है.. मर गई रे..!’ वो कुछ देर तक सीत्कारती रहीं.. पर कुछ समय बाद वो भी मेरे लंड से अपनी चुत की खुजली मिटने के मजे लेने लगीं। पूरे किचन में बस चाची और मेरी चुदास भरी आवाजें ‘आह आह आह..’ और ‘थपथप.. थप..’ ही गूँज रही थीं। अब चाची भी बोलने लगीं- ओह.. राजेश जोर से कर.. और जोर से.. हाँ अहा.. बस ऐसे ही जोर से चोदो.. मेरे राजेश जान..’ ‘क्यों मजा आ रहा है ना चाची..!’ ‘आह्ह.. हाँ.. क्या मस्त चोदते हो.. आह आह.. अब मैं तेरी चाची नही हूँ.. आह्ह.. चोद दे.. मुझे.. आह्ह.. चोदते भी हो और चाची भी बोलते हो आह.. आह मेरा आह नाम लेकर बोलो.. आह..!’ ‘हाँ मेरी रानी जान.. मजा आ रहा है ना..!’ ‘आह.. बहुत मजा आआह आ रहा है.. आह आहह और जोर से.. मेरा होने वाला है.. आह्ह..’ मैं भी पूरे जोश और ताकत से अपनी स्पीड बढ़ा कर चाची को चोदने लगा।

तभी चाची ‘आहईईई..’ करके झड़ गईं। उनके झड़ जाने के 5 मिनट में मैं भी झड़ गया। सच में इस चुदाई में बहुत मजा आया था। अब मैं हमेशा चाची की चुदाई करता हूँ.. चाची भी खूब चुत खोल कर मुझसे चुदवाती हैं।
 


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