रंगीन हवेली
भाग 1

ठाकुर साहब की हवेली में हमेशा तीन खूबसूरत नौकरानियॉ चहकती रहती थी। ये तीनों नीरा बेला और शीला राजा ठाकुर विजयबहादुर ​सिंह की चहेती थी। नीरा का रंग गोरा कद ठिगना कमर पतली बड़े बड़े गोल बेलों सी चूचियां बड़े बड़े गुदाज चूतड़ शीला का रंग गेंहुँआ ताम्बई सिल्की चिकना बदन कद लम्बा कमर लम्बी केले के तने जैसी लम्बी थोड़ी भरी भरी मांसल जॉघें बड़े बड़े कटीले लंगड़ा आमों जैसे स्तन गोल बड़े बड़े उभरे हुए नितंब बेला का रंग गुलाबी कद बीच का बेहद गुदाज बदन तरबूज के जैसी बड़ी बड़ी चूचियों मोटी मोटी चिकनी गोरी गुलाबी जांघें भारी घड़े जैसे चूतड़ थे।
ठाकुर साहब की उम्र लगभग चालीस की थी। वे शादी शुदा भी थे। ठकुराईन भी लम्बी तगड़ी पर बेहद गोरी चिटटी व सुन्दर महिला थी। ठाकुर साहब व ठकुराईन दोनो ही बहुत रंगीन मिजाज थे और वो दोनो ही एक दूसरे के कामों में दखल नही देते थे। अधिकतर ठाकुर साहब हवेली के बाहर के हिस्से में रहते थे और ठकुराईन हवेली के अन्दर के घर मे रहती थी। इस समय रात के 10 बज रहे हैं। ठाकुर साहब की हवेली के सोने के कमरे मे उनकी अय्यासी का दरबार लगा था। ठाकुर साहब अपने लम्बे चौड़े पलगं पर अधलेटे थे उनके एक तरफ बेला और दूसरी तरफ शीला बैठी थी।टीवी पर एक ब्लू फिल्म लगी थी और सब लोग फिल्म देख रहे थे । थोड़ी देर में उसका असर होने लगा। ठाकुर के हाथ बेला और शीला के मांसल जिस्मों पर लापरवाही से घूमने लगे। थोड़ी देर में उनका बॉंया हाथ शीला की गरदन के पीछे से उसके ब्लाउज में कसे बड़े बड़े कटीले लंगड़ा आमो जैसे गुलाबी स्तनों में घुस गया और दॉंया हाथ बेला की गरदन के पीछे से उसकी ब्लाउज में कसी दूधसी सफेद तरबूज के जैसी बड़ी बड़ी चूचियों जोकि बड़े गले के ब्लाउज से फटी पड़ रही थी को सहला दबा व पकड़ने की कोशिश कर रहा था। नीरा उनकी गोद में उनके साढ़े सात इंच फौलादी लण्ड को बड़े बड़े गुदाज चूतड़ों के बीच में दबाये बैठी थी और अपने हाथों से उनका बदन सहला रही थी। ठाकुर ने एक हाथ में बेला का बेहद सफेद दूध सा विशाल उरोज व दूसरे हाथ में शीला का बड़े लंगड़ा आम के जैसा स्तन थामे थामे ही मुंह आगे बढ़ाकर नीरा के होठों से अपने होठ लगा दिये।तभी नीरा ने अपने ब्लाउज के बटन खोल कर अपने बायें उरोज का निपल उनके मुंह में दे दिया। वह पूरे जोश में थी ।
नीरा ठाकुर साहब के कपड़े खीचने लगी तो ठाकुर साहब ने नीरा का ब्लाउज नोच डाला और दोनों फड़फड़ाते बड़े बड़े दूध से सफेद कबूतरों पर मुंह मारने लगा नीरा के उरोज बिल्कुल कसे कसे बड़े बेल से थे। नीरा ने ठाकुर साहब के अन्डरवियर को भी खीचकर निकाल दिया। ठाकुर साहब का साढ़े सात इंच का फेोलादी लण्ड बिल्कुल टाइट खड़ा था । तीनों औरतें उनके मोटे लण्ड को देखकर बेहद खुश हो रही थीं। ठाकुर साहब ने बेला की तरबूज के मानिन्द बड़ी बड़ी सफेद चूचियों पर मुंह रगड़ते हुए पूछा क्या बात है नीरा आज बहुत मचल रही है। बेला ने नीरा के बड़े बड़े भारी चूतड़ों के बीच में हाथ डालकर ठाकुर साहब के साढे़ सात इंची फौलादी लण्ड को सहलाते हुए जवाब दिया असल में हम इसे चिढ़ाते थे कि तू सबसे आखीर मे चुदवाती है क्योंकि तू ठाकुर साहब की पहली चुदायी झेल नहीं सकती इसीलिए आज ये पहले चुदवाना चाह रही है।
ठाकुर साहब ने नीरा को गोद में उठाया और बेड पर लिटाते हुए कहा ठीक है अगर ऎसा है तो यही सही।
वो उसके बदन को चूमने लगा। नीरा उनके लण्ड को हाथ मे ले सहलाने लगी।अब उनका लण्ड और भी कड़क हो गया। ठाकुर साहब ने अब उसकी बड़ी बड़ी चूचियों के काले काले निपलो को मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। नीरा के मुंह से सिसकारियॉ निकल रही थी । ठाकुर साहब का हाथ धीरे धीरे उसकी नाभी से होता हुआ चूत की तरफ बढ़ने लगा। उनके हाथ नीरा की गोरी पावरोटी सी फूली चूत को सहला रहे थे। उसने अपनी उंगली चूत के अन्दर बाहर करना शुरू किया। नीरा को बहुत ही मजा आ रहा था। थोडी देर मे उसने अपनी कमर को ऊपर नीचे करते हुए सिसकारी भर कर बोली चोदा जाय मालिक अब बरदास्त नही होता । इधर बाकी दोनो औरते ठाकुर साहब का साढे सात इंच का फौलादी लण्ड पकड़कर बारी बारी से अपनी गोरी पावरोटी सी फूली चूतों पर मल रही थीं। जिससे लण्ड का सुपाड़ा उनकी चूतों के पानी से तर हो गया था।
वह उठा और उसने अपने भीगे लण्ड को नीरा की गोरी पावरोटी सी फूली चूत के मुँह पर रखा और धीरे से अन्दर की तरफ धक्का दिया। नीरा का बदन दर्द से कॉप गया। वह चिल्लाने लगी बाहर निकालो मालिक क्या खाते हो इतने सालो से चुदवा रही हूँ फिर भी जान निकाल देते हो। ठाकुर समा गया कि नीरा अब क्या चाहती है उसने उसके मुंह पर हाथ रखा और एक जोर का धक्का दिया। उसका पूरा का पूरा लण्ड अन्दर चला गया। नीरा फिर मचली लेकिन ठाकुर ने अपने लण्ड को अन्दर ही रहने दिया। उसने नीरा की चूची के निपल को अपनी जीभ से सहलाना शुरू कर दिया और दूसरी चूची को हाथ से सहलाने दबाने लगा। थोडी देर मे नीरा को मजा आने लगा। उसने अपनी कमर को ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया। ठाकुर धीरे धीरे अपने लण्ड को अन्दर बाहर करने लगा । थोडी देर मे नीरा ने भी जोरदार धक्के देने शुरू कर दिये और जब ठाकुर का लण्ड बुर मे रहता तो नीरा उसे कसकर जकड लेती थी और अपनी बुर को सिकोड़ लेती थी।अब ठाकुर नीरा पर औंधकर उसकी बड़ी बड़ी चूचियां को दोनो हाथो मे दबोचकर दबाते हुए जोर जोर से धक्का मारने लगा ।
नीरा ठाकुर से बुरी तरह से लिपट हुयी थी। उसने ठाकुर को बुरी तरह से जकड रखा था । सारे कमरे में सिसकारियों कि आवाज उठ रही थी। नीरा के मुँह से आह आह की आवाजें निकल रही थी । उसने और जोर से और जोर से बड़बड़ाना शुरू कर दिया। ठाकुर उसकी चिकनी संगमरमरी जांघों को दोनो हाथो से सहलाते नितंबों को दबोचकर अपने लण्ड पर दबाते हुए फुल स्पीड में चोदने लगा नीरा बुरी तरह से उससे चिपटने लगी। तभी ठाकुर ने तीन चार धक्के बहुत जोरदार ढ़ंग से हुमच हुमचकर लगाये ही थे कि नीरा झड़ने लगी और ठाकुर से बुरी तरह चिपक गयी। नीरा उसके ऊपर ही गिर कर हॉफने लगी। फिर नीरा उठकर बाथरूम की ओर चली गयी।

ठाकुर बेड पर लेटा रहा। वह थका कम नीरा के झड़ जाने से बौखलाया ज्यादा लग रहा था। उसका लण्ड अभी भी मुस्तैद खड़ा था और बुरी तरह फनफना रहा था क्योंकि झड़ा नहीं था। अब बेला और शीला उसपर झपटे और शीला ने लपककर उस फनफनाते लण्ड को थाम लिया। ठाकुर अपनी जगह उठकर और उन दोनो की चिकनी तांम्बई लाल केले के तने जैसी जांघों पर अपने हाथ फिराने लगा। शीला जो पहले से ही मदहोश थी वह अपने आप पर काबू नही कर पा रही थी। अब वह ठाकुर के सामने बिल्कुल नंगी खडी थी। ठाकुर शीला के सामने खड़ा हो गया। ठाकुर का लण्ड उसकी चूत की तरफ मुंह किये मुस्तैद खड़ा था और अभी पूरे मूड मे था। उसने झपटकर उसके बड़े बड़े कटीले लगंड़ा आमों जैसे उत्तेजना से तांम्बई लाल हो रहे स्तन थाम लिये और उन्हें बुरी तरह से चूमने लगा। शीला बेकाबू हो रही थी उसके हाथ में ठाकुर का लण्ड था जिसे वह दोनों हाथों से सहला रही थी। तभी ठाकुर ने शीला को टांगे फैलाने का इशारा किया। शीला ने टांगे फैलायी और एक पैर उठाकर बेड पर रख लिया जिससे चूत ऊपर उठकर ठाकुर के लण्ड के सामने आ गयी । बेला आमने सामने खडे़ ठाकुर और शीला के बीच मे बेड पर पैर नीचे लटकाकर बैठ गयी और उसने शीला के हाथ से ठाकुर के लण्ड को ले लिया ठाकुर बिल्कुल अचकचा गया जब बेला उसे शीला की चूत पर रगड़ने लगी। ठाकुर ने बेला की तरफ देखा बेला ठाकुर के लण्ड को अपने हाथ से शीला की चूत पर रगड़ रही थी।
उसने ठाकुर की तरफ देखा मुस्कुरायी और बोली मालिक आप अभी आधे रास्ते पर हो सो इसे भी निपटा लो फिर आखरी मुकाबला मेरा तुम्हारा इत्मिनान से होगा।
ठाकुर पूरे जोश मे आ गया और बोला ठीक है।
ठाकुर ने अपने बॉयें हाथ से शीला के बड़े बड़े गद्देदार चूतड़ों और दायें हाथ से उसके बड़े बड़े कटीले लगंड़ा आमों जैसे स्तनों को सहलाते हुए उनपर झुककर मुंह मारने लगा। बेला ने ठाकुर के लण्ड का हथौडे़ जैसा सुपाड़ा शीला की उभरी हुई चूत के मुहाने पर रखा और ठाकुर ने कमर उचकाकर सुपाड़ा अन्दर की ओर ठेला। उस जबरदस्त सुपाड़े के चूत में घुसते ही शीला के मुह से हूकसी निकली औफ्ओह।
ठाकुर उसके स्तनों के निपलों को बारी बारी अपने मुँह मे ले कर चुभलाकर चूसने लगा और दायें हाथ से स्तनों को दबाने और निपलों को मसलने लगा। शीला की चूत पनियाने लगी़ और सुपाड़ा अपनी जगह बनाता हुआ चूत में आगे बढ़ने लगा। ठाकुर ने अपने दोनों हाथ शीला के बड़े बड़े गद्देदार चूतड़ों पर लगाकर उन्हें अपने लण्ड की ओर दबाते हुए अपना पूरा फौोलादी लण्ड उसकी चूत में धांस दिया। शीला उत्तेजना भरी सिसकी ली इस्स्स्स्स्स्स्सीउउफ और धीरे धीरे अपनी कमर चलाने लगी । शीला का धड़ इतना लम्बा था कि बिना झुके ठाकुर का मुंह उसके स्तनों के ठीक सामने आ रहा था ठाकुर ने उसके बड़े बड़े कटीले लगंड़ा आमों जैसे स्तनों पर मुंह मारते निपलों को बारी बारी अपने मुँह मे ले कर चुभलाकर चूसते हुए अपनी स्पीड बढ़ायी । अब शीला और ठाकुर एक दूसरे मे पूरी तरह से समाने की भरपूर कोशिश कर रहे थे। शीला ने अपनी संगमरमरी बाहें ठाकुर के गले में डाल अपनी दोनों केले के तने जैसी जॉघें ठाकुर की कमर के चारो तरफ लपेट ली ठाकुर ने अपने दोनों मजबूत हाथों में शीला की संगमरमरी जांघें और भारी चूतड़ों को दबोचकर गोद में उठाया हुआ था और उसकी मांसल बाहों बड़े बड़े कटीले लगंड़ा आमों पर जॅहा तॅहा कभी मुंह मारते कभी उनके निपलों को होंठों दांतों मे दबा चूसते हुए चोद रहा था। शीला भी ऊपर से अपने गुदगुदे गददेदार चूतड़ उछाल उछाल कर ठाकुर की गोद में पटककर अपनी गोरी पावरोटी सी फूली चूत मे जड़तक लण्ड धॅंसवाकर पूरी स्पीड से चुदवा रही थी। पूरे कमरे मे सिसकारियों की आवाज गूँज रही थी।
अचानक शीलाउम्म्म्म्म्म्म्म्ह़ आहहहहहहहहहहहहहहह।
शीला अचानक बहुत जोरो से धक्के मारते हुए ारने लगी। उसने ठाकुर की कमर को उसने अपने पैरो से जकड़ लिया फिर वह थोडा ढीली पड गयी। ठाकुर शीला का लिये लिये ही बिस्तर पर गिर के जोरो से तीन चार शॉट लगाये और शीला की चूत मे जोरो से झरने लगा।

ठाकुर पुराना खिलाड़ी था। उसने एक ही बार में दो दो औरतों की शान्दार और तगड़ी चूतें अपने फेोलादी लण्ड से रौंदकर चोद डाली थी। वो थका हुआ लग रहा था बेला ने उसकी तरफ देखा और मुस्कुरायी वह समा गया और उसने बेला से एक गिलास गरम दूध लाने को कहा। वो उठकर दूध लाने जाने लगी। ठाकुर रसोई की तरफ जाती बेला को देख रहा था। वो पूऱी तरह नंगी थी उसकी गोरी गुलाबी भरी हुई चिकनी पीठ बड़े बड़े गुलाबी चूतड़ चलने पर थिरक रहे थे झुककर चीनी का डिब्बा उठाते समय बड़े बड़े गुलाबी चूतड़ों के बीच में से गोरी पावरोटी सी फूली चूत भी दिख गयी जिसे वो पहले भी चोद चुका था। पर तमाम चूते चोद चुकने के बाद आज भी उसे सबसे ज्यादा पसन्द थी ठाकुर ने देखा अब वो वापस आ रही थी । हाथों में थमे दूध के गिलास के दोनो ओर झाँकती थिरकती बड़ी बड़ी चूचियां मोटी मोटी केले के तने जैसी चिकनी गोरी गुलाबी जांघों के बीच में से गोरी पावरोटी सी फूली चूत देख ठाकुर का लण्ड फिर से तरह खड़ा होने लगा जब बेला दूध का गिलास ठाकुर को पकड़ाने आगे को झुक़ी तो उसकी बड़ी बड़ी चूचियां फड़ककर और बड़ी व तनाव से भरी लगने लगी। ठाकुर ने लपक कर उनको दोनों हाथों मे दबोच लिया और बोला अब तू ही अपने हाथ से पिला दे और फिर मेरा कमाल देख।
बेला ठाकुर की गोद मे उनके साढ़े सात इंच फौलादी लण्ड को बड़े बड़े गुदाज चूतड़ों के बीच में दबाकर बैठ गयी अपने हाथ से दूध का गिलास ठाकुर के होंठों से लगा दिया। ठाकुर उसकी बड़ी बड़ी चूचियां सहलाते हुये दूध पीने लगा। दूध पीकर ठाकुर फिर से ताजादम हो गया।
बेला और ठाकुर दोनो बेड पर लेटे हुये थे। ठाकुर ने बेला के भरे भरे गुलाबी होंठों पर होंठ रख दिये फिर उसके होंठ बेला के टमाटर जैसे गालो से होते हुये गरदन और वहां से तरबूज के मानिन्द बड़ी बड़ी सफेद चूचियों पर जॅहा तॅहा मुंह मारने और कभी नुकीले निपलो को बारी बारी से होंठों में ले कर चुभलाने चूसने लगे। बेला उसके लण्ड को अपने हाथो में लेकर उसे सहला रही थी। ठाकुर बेला के गदराये गोरे गुलाबी नंगे जिस्म को दोनों हाथों मे दबोचकर उनके ऊपर झुककर बड़ी बड़ी गुलाबी चूचियों के साथ खेलने और सारे गोरे गदराये जिस्म की ऊचाइयों व गहराइयों पर जॅहा तॅहा मुंह मारने लगा। ठाकुर का लण्ड अब पहले जैसा तगडा हो रहा था। वो ठाकुर के लम्बे फौलादी लण्ड को अपनी दोनों मोटी मोटी नर्म चिकनी जांघों के बीच दबाकर मसल़ने लगी। ठाकुर बेला की टांगो के बीच बैठ गया। उसने बेला की दोनो मोटी मोटी नर्म चिकनी गोरे गुलाबी जांघों को फैलाया और अपने हाथो से बेला की गोरी पावरोटी सी फूली चूत को फैलाकर अपनी जीभ उसमें डाल दी । ठाकुर की जीभ बेला की चूत के अन्दर की दीवारों के साथ खेल रही थी। बेला अब बेचैन होने लगी थी। वो बोली अब चोदो ठाकुर हो जाए मुकाबला ठाकुर ने अपनी जीभ बेला की चूत से निकाली और वह अब चोदने को तैयार था। बेला ने दोनों हाथों से अपनी चूत की फांके फैेलायी ठाकुर ने अपने फेोलादी लण्ड का सुपाड़ा उसपर धरा और एक हल्का सा धक्का दिया बेला के मुँह से निकला-उफ़ आहहहहहहहहहहहहहह।
पर बेला ठाकुर से पीछे नहीं रहना चाहती थी सो उसने भी दॉत पर दॉत जमा कर धक्का मारा। दोनो पुराने खिलाड़ी थे पहले धीरे धीरे धक्के लगाने लगे जब बेला को भी मजा आने लगा तब वह नीचे से भारी नितंबों को उछाल कर सहयोग देने लगी। दोनो एक दूसरे को जोरो से धक्के दे रहे थे। कमरे में उन दोनो की सिसकारियॉ गूँज रही थी। तभी बेला ने ठाकुर को पलट दिया ऊपर चढ़कर ठाकुर के लण्ड को पकड़कर सुपाड़ा चूत पर धरा और धीरे धीरे पूरा लण्ड चूत में धंसा लिया फिर बरदास्त करने की कोशिश में अपने होंठों को दांतों में दबाती हुयी पहले धीरे धीरे धक्के मारने शुरू किये जैसे जैसे मजा बढ़ा वो सिसकारियॉ भरने लगी और उछल उछलकर धक्के पे धक्का लगाने लगी उसके बड़े बड़े उभरे गुलाबी चूतड़ ठाकुर के लण्ड और उसके आस पास टकराकर गुदगुदे गददे का मजा दे रहे थे उसकी गोरी गुलाबी बड़ी बड़ी उभरी चूचियां भी उछल रही थी जिनपर ठाकुर मुंह मारता तो कभी दोनों हाथों से पकड़ निपल चुभलाता तो कभी उछल कूद में वे फिर से छूट जाते करीब आधे घंटे तक ठाकुर बेला के गदराये गोरे गुलाबी नंगे उछलते जिस्म को दोनों हाथों मे दबोचने बड़ी बड़ी गुलाबी चूचियों पर झपटने सारे गदराये जिस्म की ऊचाइयों व गहराइयों पर जॅहा तॅहा मुंह मारने के बाद ठाकुर ने दोनों हाथों मे बड़ी बड़ी उभरी चूचियां पकड़कर एक साथ दोनों निपल मुंह में दबा लिये और उसके चूतड़ों को दबोचकर अपने लण्ड पर दबाते हुए चूत की जड़तक लण्ड धॉंसकर झड़ने लगा तभी बेला के मुंह से जोर से निकला उम्म्म्म्म्म्म्म्म्म्हहहहहहहहहहह वो जोर जोर से उछलते हुए अपनी पावरोेटी सी फूली चूत में जड़ तक ठाकुर का लण्ड धॉंसकर और उसे लण्ड पर बुरी तरह रगड़ते हुए वो भी झड़ते हुए बेला ठाकुर के ऊपर ही औंध गयी। ठाकुर ने बेला के गुदाज़ जिस्म को बॉहो में जकड़ लिया। झड़ चुकने के बाद दोनो एक दूसरे को बॉहो में लिये हुये लेट गये। दोनो एक दूसरे की बाहों मे पडे हॉफ रहे थे कि नीरा और शीला भी आकर उनसे लिपट गयी और सभी एक दूसरे की बाहों में लिपटे सो गये।
दूसरे दिन जब तीनो औरते सोकर उठी तो जल्दी जल्दी कपडे़ पहनकर हवेली के घर मे जाने लगी। उन्होने देखा कि उनके आदमी अन्दर से निकलकर बाहर के हिस्से मे जारहे हैं सब एकदूसरे को देख कर मुस्कुराये और अपने रास्ते चले गये।
वो तीनो आदमी इतने सबेरे कहॉ से आरहे थे और सब एकदूसरे को देख कर क्यों मुस्कुराये ।यह सब जानने के लिए पढ़े सम्पूर्ण उपन्यास रंगीन हवेली।
भाग 2
ठकुराईन का इन्साफ़
दरअसल ठाकुर रोज रात मे हवेली की किसी एक औरत को चोदने के लिये बुलवाता था लेकिन सप्ताह मे एक बार अय्यासी का दरबार लगाता था। जब पहली बार इन तीनों को एक साथ बुलवाया था तो इनके आदमी फरियाद लेकर ठकुराईन के पास गये थे।ठकुराईन के पूछने पर बेला के पति बलदेव उर्फ* बल्लू ने डरते हुए कहा –
“मालकिन अभी तक तो ठाकुर साहब हम मे से किसी एक की औरत को अपनी सेवा मे बुलवाते थे हमे कोई एतराज नहीं क्योंकि हमारा तो काम ही आप सबकी सेवा करना है और हमारी औरतो की तरह हम सब भी दोस्त हैं सो अगर तीन मे से दो भी घर मे हो तो हमारा भी काम चल जाता था क्योंकि हम सब भी मर्द हैं हमें भी रात मे औरत की जरूरत पड़ती है।”
सुनकर ठकुराइन मुस्कुरायी उन्होंने एक भरपूर नज़र तीनो मर्दों पर डाली नीरा का पति नन्दू ठिगना पर मजबूत जिस्म का मालिक था शीला का पति धीरा लम्बा तगड़ा बाडीबिल्डर जैसा था बल्लू का कद बीच का बदन तगड़ा कसरती पर थोड़ा भारी था फिर ठकुराइन मुस्कुराते हुए बोली –
“ ठीक तुम लोग अभी काम से आये हो थके होगे नहाधो आओ तुम्हारा इन्साफ़ होगा।”
जब वे नहाधोकर आये तो देखा ठकुराइन के कमरे मे उनके पलंग से अलग एक बहुत बड़ा गददा बिछा है उसपर गाव तकिया लगाये ठकुराइन मुस्कुराते हुए अपनी पीठ के बल अधलेटी हैं उनके बदन पर कपड़ों के नामपर सिर्फ़ पेटीकोट ब्लाउज थे। जिसमें से उनका गदराया गुलाबी बदन जगह जगह से झॉक रहा था। उनके बड़े गले के लोकट ब्लाउज में से उनके बड़े बड़े उरोज फ़टे पड़ रहे थे इन तीनों को देखकर मुस्कुराते हुए बोली –
“आओ आओ बैठो बैठो। अब मुझे विस्तार से बताओ कि ठाकुर साहब के कमरे मे तुमने क्या देखा।”
तीनो ने एक दूसरे की तरफ़ देखा फिर नन्दू ने कहना शुरू किया –
“अब क्या बताये मालकिन मैने देखा ठाकुर साहब की नंगी गोद में नीरा पेटीकोट ऊपर किये अपने बड़े बड़े गुदाज नंगे चूतड़ों के बीच में उनके साढे सात इंची हलव्वी लण्ड को दबाये बैठी थी।”
ठकुराइन मुस्कुराते हुए बोली –
“अरे तेरा हिसाब साफ़ करना तो बहुत ही आसान है।”
यह कहकर उन्होंने खीचकर उसे बगल में बैठा लिया और झटके से उसकी धोती खीचकर निकाल दी फिर अपने दोनों हाथों से धीरे धीरे अपना पेटीकोट ऊपर उठाने लगी पहले उनकी पिण्डलियाँ फिर मोटी मोटी चिकनी गोरी गुलाबी जांघें बड़े बड़े गुलाबी भारी चूतड़ दिखे और फिर पावरोटी सी फूली दूधिया मलाई सी सफेद बिना बालों चूत देखकर तीनों दंग रह गये। अपना पूरा पेटीकोट ऊपर समेट कर नन्दू की नंगी गोद में बड़े बड़े गुलाबी भारी चूतड़ों को रखकर बैठ गयीं। फिर बोली –
“अब बताओ फिर क्या हुआ।”
ठकुराइन का यह मस्ताना रूप देखकर उनकी हिम्मत बढ़ी और धीरा बोला –
“हमने देखा ठाकुर साहब के एक तरफ़ शीला और दूसरी तरफ़ बेला बैठी थी । ठाकुर साहब के हाथ उनकी गरदनों के पीछे से होकर उनके ब्लाउज में घुसे हुए थे और उनके उरोजों से खेल रहे थे।”
ठकुराइन चहकी –
“अरे ये तो और भी आसान है आ जाओ दोनों फ़टाफ़ट।” इतना सुनना था कि दोनों ठकुराइन की तरफ झपटे। ठकुराइन के ब्लाउज में एक तरफ से धीरा ने हाथ डाला और दूसरी तरफ से बल्लू ने । ठकुराइन के ब्लाउज के बटन चुटपुटिया वाले थे कसा ब्लाउज दो दो हाथों का तनाव बरदास्त नहीं कर पाया चुटपुटिया वाले बटन एकदम से सारे के सारे खुल गये और उनके बड़े बड़े खरबूजों जैसे गुलाबी स्तन कबूतरों की तरह फ़डफ़ड़ा़कर बाहर आ गये। धीरा और बल्लू अपने दोनों हाथों से उनके एक एक विशाल स्तन को थाम कर उनके निप्पल को कभी चूसने लगते तो कभी अपने अंगूठो और अंगुलियो के बीच मसलने लगते। उधर नन्दू का लण्ड ठकुराइन के बड़े बड़े गुलाबी भारी चूतडों के बीच साँप की तरह लम्बा होकर उनकी गोरी पावरोटी सी फूली चूत तक फैल रहा था। वो ठकुराइन के गोरे गुलाबी गुदाज कंधों पर मुंह मार रहा था उनकी गोरी गदरायी कमर को सहलाते हुए उनके गुदगुदे चिकने पेट और नाभी को टटोल रहा था और उनकी गोल नाभी में उंगली डाल रहा था। ठकुराइन सिसकारी भरते हुए बोली –“इस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स आहऔर बताओ आगे क्या हुआ।”
धीरा और बल्लू ठकुराइन के बड़े बड़े गुलाबी कबूतरों को सहलाते और अपने अंगूठो और अंगुलियो के बीच उनकी चोंच मसलते हुए बोले –
“पता नहीं मालकिन क्योंकि फिर हम चले आये आपके पास फ़रियाद लेकर।”
-- ठकुराइन ने चुटकी ली –
“ अभी तो कह रहे थे कि तुम भी मर्द हो क्या अन्दाज़ा नहीं लगा सकते।”
यह कहते हुए उन्होंने झटसे उनकी धोतियॉं खीचकर निकाल दी अब उनके नीचे के बदन बिलकुल नंगे थे ठकुराइन ने देखा कि उनके औजार बार बार हवा में ऊपर नीचे हो रहे हैं। ठकुराइन भी हवा में लहराते फौलादी लण्डों को देखकर मस्त हो रही थी। उन्होंने अपने दोनों हाथों में उनका एक एक लण्ड थाम लिया और सहलाने लगी। ठकुराइन के ऐसा करने से वे और भी जोश में आ गये और उनकी बड़ी बड़ी चूचियॉं को जोर जोर से दबाने और उनके निप्पल को कभी चूसने कभी चुभलाने लगे। तभी नन्दू ने ठकुराइन की गोरी पावरोटी सी फूली चूत को फैलाया और अपनी अंगुली उसमें डाल दी ठकुराइन के मुंह से एक सिसकारी सी निकली वो अपने होंठों को दांतों में दबाये थी। वह अपने आपको रोक नही पा रही थी। वह नन्दू को उत्साहित कर रही थी। नन्दू का लण्ड भी चूत के लिए तड़प रहा था। अचानक ठकुराइन उठ गयी और पलट कर नन्दू की तरफ घूम कर फिर से उसकी गोद में बैठ गयीं। ऐसा करने से उनकी चूचियॉं धीरा और बल्लू के हाथों से छूट गयी नन्दू ने उनके गदराये गोरे गुलाबी नंगे जिस्म को देखा धीरा और बल्लू ने चूचियों को दबादबाकर निपलों को मसल़मसल़कर और होंठों से चूसकर लाल कर दिया था। उनकी मोटी मोटी नर्म चिकनी गोरी गुलाबी जांघों भारी नितंबों के बीच मे उनकी गोरी पावरोटी सी फूली चूत का मुंह खुला था और उसके फौलादी लण्ड का सुपाड़ा चूत के मुंह की दोनों फूली फांको की तरफ़ मुंह उठाये था । नन्दू की उत्तेजना आपे से बाहर हो रही थी उसने झपट़कर दोनों हाथों मे बड़ी बड़ी चूचियों दबोच ली और उठकर उनपर मुंह मारने लगा । अब ठकुराइन ने नन्दू के लण्ड को पकड़कर सुपाड़ा चूत पर धरा और धीरे धीरे पूरा लण्ड चूत में धंसा लिया फिर बरदास्त करने की कोशिश में अपने होंठों को दांतों में दबाती हुयी पहले धीरे धीरे धक्के मारने शुरू किये जब मजा बढ़ा तो उन्होंने अपने दोनों हाथों में धीरा और बल्लू का एक एक लण्ड थाम लिया और वो सिसकारियॉं भरते हुए उछल उछलकर धक्के पे धक्का लगाने लगी उनके बड़े बड़े उभरे गुलाबी चूतड़ नन्दू के लण्ड और उसके आस पास टकराकर गुदगुदे गददे का मजा दे रहे थे उनकी गोरी गुलाबी बड़ी बड़ी उभरी चूचियां भी उछल रही थी जिन्हें नन्दू कभी मुंह से तो कभी दोनों हाथों से पकड़ने की कोशिश करता कभी पकड़ में आ जाते तो कभी उछल कूद में फिर से छूट जाते करीब आधे घंटे तक की उठापटक में नन्दू ने उनके गदराये गोरे गुलाबी नंगे उछलने जिस्म को दोनों हाथों मे दबोचने बड़ी बड़ी गुलाबी चूचियों पर झपटने सारे गदराये जिस्म की ऊचाइयों व गहराइयों पर जॅहा तॅहा मुंह मारने के बाद दोनों हाथों मे बड़ी बड़ी उभरी चूचियां पकड़कर एक साथ मुंह में दबा ली और उनके चूतड़ों को दबोचकर अपने लण्ड पर दबाते हुए चूत की जड़तक लण्ड धॉंसकर झड़ने लगा तभी ठकुराइन के मुँह से जोर से निकला –“उम्म्म्म्म्म्म्म्हहहहहहहहहहह
वो जोर से उछली और अपनी पावरोटी सी फूली चूत में जड़ तक नन्दू का लण्ड धॅंसा लिया और चूत को लण्ड पर बुरी तरह रगड़ते हुए वो भी झड़ने लगी।
धीरा व बल्लू के लण्ड अभी भी उन्होंने अपने हाथों में पकडे हुए थे जो बुरी तरह फनफना रहे थे। खासतौर से धीरा और उसका लण्ड बुरी तरह फनफना रहा था उसकी हालत बहुत खराब थी यह हालत देखकर ठकुराइन मुस्करायी –
“घबराओ नहीं मैं अभी आधी ही झड़ी हूँ और एक रात में मैं कम से कम दो राउण्ड तो चुदवाती ही हूँ।”
बल्लू ने धीरा और ठकुराइन की तरफ देखा और बोला,“तो फिर ठीक है मालकिन आप अभी आधे रास्ते पर हो सो इसे भी निपटा लो मैं इत्मिनान से दूसरे राउण्ड में चोदूँगा क्योकि आधे राउण्ड से मेरा काम नहीं चलता।”
ठकुराइन मुस्कराते हुए बोली “अच्छा ये बात है तो फिर तैयार रहना ।”
उन्होंने धीरा को इशारे से बुलाया धीरा उनके गदराये गोरे गुलाबी नंगे जिस्म और लाल पड़ गयी बड़ी बड़ी चूचियों को देख रहा था वह उनके निप्पल को अपने मुंह मे लेकर चुभलाने और अपनी जीभ से खेलने लगा। ठकुराइन ने अपनी नंगी नर्म चिकनी संगमरमरी जांघों को अलग किया उनके के बीच मे दबी अपनी गोरी पावरोटी सी फूली चूत का लाल मुंह अपने दोनो हाथों से खोल कर दिखाते हुए कहा आजा प्यारे धीरा चूत तैयार है धीरा ने चूत के मुंह की दोनों फूली फांको के ऊपर अपने फौलादी लण्ड का सुपाड़ा धरा और उसे चूत पर रगड़ने लगा। थोड़ी देर में ठकुराइन मारे उत्तेजना के आपे से बाहर हो गयीं और सिसकारियॉं भरने लगी और बोली अब जल्दी डाल। धीरा समझ गया उसने झपट़कर दोनों हाथों मे बड़ी बड़ी चूचियाँ दबोच उनके ऊपर झुककर गुलाबी होंठों पर अपने होंठ रखकर लण्ड का सुपाड़ा चूत मे धकेला सुपाड़ा अन्दर जाते ह़ी उनके मुँह से निकला “ओहहहहहहहहहहह शाबाश धीरा सुपाड़ा तगड़ा है अब बाकी लण्ड भ़ी डाल कर दिखा।”
धीरा बड़ी बड़ी चूचियों को जोर जोर से दबाने गुलाबी होंठों को चूसने लगा। ठकुराइन की चूत एक लण्ड से चुदने के बाद भी बेहद गरम थी। धीरा को ऐसा लग रहा था जैसे लण्ड अन्दर खिचा जा रहा हो या चूत अपने मुंह की दोनों फूली फांको मे लण्ड दबाकर उसे अन्दर चूस रही हो। पूरा लण्ड अन्दर जाते ह़ी ठकुराइन के मुँह से निकला- “आहहहहहहहहहहहहहहह आह वाहहहह शाबाश लगा धक्का।”
धीरा ने थोड़ा सा लण्ड बाहर निकालकर वापस धक्का मारा दो तीन बाहर ह़ी धीरे धीरे ऐसा किया था कि ठकुराइन के मुँह से निकला- “अबे थोड़ा जोर जोर से। शाबाश लगा धक्के पे धक्का धक्के पे धक्का चोद ठकुराइन की चूत को उधर तेरी बीबी ठाकुर साहब के लण्ड से जम के मजे ले रही होगी। तू भी मजे ले उनकी बीबी की चूत चोद के। मेरी चूचियों और जिस्म का रस चूस और जोर जोर से चोद।”

धीरा मारे उत्तेजना के आपे से बाहर हो जोर जोर से धक्के पे धक्का लगाकर चोदने लगा उनके गदराये गोरे गुलाबी नंगे जिस्म को दोनों हाथों मे दबोचकर उनके ऊपर झुककर बड़ी बड़ी गुलाबी चूचियों के साथ खेलने और सारे गदराये जिस्म की ऊचाइयों व गहराइयों पर जॅहा तॅहा मुंह मारते हुए चोदने लगा हर धक्के पे उनके मुंह से आवाजें आ रही थी-
आह आहहहह उम्म्म आहहहहहहहहहहहहहहह उम्म्म्ह

उनकी संगमरमरी जांघें और भारी चूतड़ों को देख धीरा पागल हो रहा था ठकुराइन ने अपनी दोनों टांगे हवा मे फैला दी जिससे लण्ड उनकी चूत की जड़ तक धॉंसकर जा रहा था फिर उन्होंने दोनों टांगे उठाकर धीरा के कंध़ों पर रख दी अब हर धक्के पे उनकी चिकनी संगमरमरी जांघें और भारी चूतड़ धीरा की जांघों और लण्ड के आस पास टकराकर गुदगुदे गददे का मजा दे रहे थे जिससे फट फट की आवाज आ रही थी। लम्बे चौड़े धीरा ने दोनों हाथों में उनकी संगमरमरी जांघें और भारी चूतड़ों को दबोचकर उन्हें गोद में उठा लिया और खड़ा हो गया। उनके गुलाबी मांसल बाहों बड़ी बड़ी गुलाबी चूचियों पर जॅहा तॅहा कभी मुंह मारते कभी उनके निपलों को होंठों दांतों मे दबा चूसते हुए चोदने लगा ठकुराइन भी ऊपर से अपने गुदगुदे गददेदार चूतड़ उछाल उछाल कर गोरी पावरोटी सी फूली चूत मे जड़तक लण्ड धॅंसवाकर चुदवा रही थी। करीब आधे घंटे तक पागलों की तरह उनके गदराये गोरे गुलाबी नंगे जिस्म को दोनों हाथों मे दबोचकर उनके ऊपर झुककर बड़ी बड़ी गुलाबी चूचियों के साथ खेलते तो कभी दांतों मे दबा निप्पलो को तो कभी बारी बारी से होंठों में ले कर चुभलाते व चूसते हुए और सारे गदराये जिस्म की ऊचाइयों व गहराइयों पर संगमरमरी जांघ़ों और भारी चूतड़ों पर जहॉ तहॉं मुंह मारते हुए चोदने के बाद ऐसा लगा कि अचानक दोनो के जिस्म ऐठ रहे हों तभी धीरा ने ठकुराइन को नीचे गद्दे पर लिटा दिया और हुमच हुमचकर धक्के मारने लगा कि अचानक तभी ठकुराइन ने जोर से अपने चूतड़ों को उछाला और धीरा ने अगला धक्का मारा कि उनके जिस्मों से जैसे लावा फूट पडा़ ।
ठकुराइन के मुंह से जोर से निकला- उम्म्म्म्म्म्म्म्म्म्फ्फहहहहहहहहहहह ।
वो नीचे से अपनी कमर और चूतड़ों का दबाव डालकर अपनी चूत मे जड़ तक धीरा का लण्ड धॉंसकर झड़ रही थी और धीरा भी उनके गदराये जिस्म को बुरी तरह दबाते पीसते हुए दोनों हाथों में उनके चूतड़ों को दबोचकर अपने लण्ड पर दबाते हुए चूत की जड़तक लण्ड धॉंसकर झड़ रहा था। दोनों निढाल हो एक दूसरे के ऊपर पड़ गये।
थोड़ी देर में ठकुराइन उठी और बोली हाय बल्लू मैं तो बहुत थक गयी हूँ अब मैं गरम पानी से स्नान करूंगी तभी थकान उतरेगी ।
बल्लू ने कहा ठीक है मालकिन चलिये मैं भी आपकी मदद करता हूँ ।
वो देख रहा था कि ठकुराइन का जिस्म डबल चुदाई की थकान से निढाल है। उसने उनकी दोनों बगलों में हाथ डाल सहारा देकर ठकुराइन को उठने में मदद की। बगलों में हाथ डालकर उठाने में ठकुराइन की बड़ी बड़ी चूचियां भी बल्लू के हाथों में आ गयी। वो उनकी तरफ़ देखने लगा। बल्लू को अपनी तरफ़ देखता पा कर ठकुराइन बोली, “क्या देख रहा है बल्लू।”
बल्लू ने जवाब दिया- “कुछ नहीं मालकिन देख रहा था कि सालों ने रगड़कर सारा कोमल बदन लाल कर दिया है।” ठकुराइन ने मुस्कराते हुए बल्लू के फ़नफ़नाते फौलादी लण्ड को थामकर सहलाते हुए जवाब दिया- “तू घबरा मत अभी ठकुराइन में बहुत दम है अभी गरम पानी से स्नान करने के बाद दूसरा राउण्ड पूरा का पूरा तेरा। अगर उसके बाद भी दम बचे तो सारी रात अपनी है।”
बल्लू मान गया कि दो जबरदस्त फौलादी लण्डों से चुदवाने के बाद भी ठकुराइन तीसरे से चुदवाने का दम रखती है और अपने ठाकुर साहब से किसी तरह कम नहीं है।
ठकुराइन आगे आगे और वो पीछे पीछे बाथरूम की तरफ़ जाने लगे। बल्लू बाथरूम की तरफ जाती ठकुराइन को देख रहा था। वो पूऱी तरह नंगी थी उसकी गोरी गुलाबी भरी हुई चिकनी पीठ बड़े बड़े गुलाबी चूतड़ चलने पर थिरक रहे थे। बाथरूम में पहुँचकर ठकुराइन टब का फव्वारा चलाने के लिए झुककर उसकी टोटी घुमाने लगी। झुकी हुयी ठकुराइन बड़े बड़े गुलाबी चूतड़ों के बीच में से गोरी पावरोटी सी फूली चूत दिखी जिसे वो चोदने वाला था। ठकुराइन टब में घुस गयी ओर बल्लू एक हाथ में फव्वारा लेकर दुसरे हाथ से ठकुराइन का संगमरमरी गदराया बदन मलमलकर नहलाने लगा। बल्लू के मर्दाने हाथ बड़े बड़े उरोजों पर फिसल रहे थे। मर्दाने हाथों के स्पर्श से ठकुराइन को हल्की मालिश का मजा आ रहा था और वो फिर से उत्तेजित होने लगी थी। थोड़ी देर में बल्लू ने देखा कि ठकुराइन के उभरे हुए बड़े बड़े खरबूजों जैसे गुलाबी स्तन और भी उभारदार व गोल हो गये। उनके निप्पल कठोर और बड़े बडे़ हो गये थे उसे मालुम था कि ऐसा तब होता है जब औरत बेहद उत्तेजित हो जाती है। वो देख रहा था कि पानी की बूंदे उनके नंगे गदराये गोरे गुलाबी जिस्म संगमरमरी बाहों बड़े बड़े उरोजों पर मोती के समान चमक रही थी। ये मोती उनक़ी बड़ी बड़ी चूचियों के निप्पलो से भी टपक रहे थे। जिन्हें बल्लू होंठों से पकड़कर चूसने लगा निप्पलो को बारी बारी से होंठों में ले कर चुभलाने चूसने लगा बल्लू के बल्लू के मरदाने हाथ उनकी मोटी मोटी चिकनी गुलाबी जांघों उनके बीच में उनकी गोरी पावरोटी सी फूली चूत से होते हुए भारी नितंबों सुन्दर टांगों पर फिसल रहे थे। बल्लू के होंठ ठकुराइन के बड़े बड़े उरोजों गदराये पेट गोल नाभी से फिसलकर पावरोटी सी फूली दूधिया मलाई सी सफेद बिना बालों वाली चूत जोकि धुलकर और भी कमसिन लगरही थी पर पहुंचे। बल्लू ने चूत होंठों में दबाकर चूसते हुए कहा- “हाय मालकिन मैनें कभी सोचा भी नहीं था कि चूत इतनी सुन्दर दूधिया मलाई सी सफेद बिना बालों वाली हो सकती है। आपकी इतनी सुन्दर चूत और बेला मेरी बीबी बता रही थी ठाकुर साहब का लण्ड भी जबरदस्त है फिर ठाकुर साहब क्यों हर रात दूसरी दूसरी औरतों को चोदते हैं।”
ठकुराइन ने बल्लू के होंठों में दबी चूत चुसवाते हुए सिसकी ली – “स्स्स्स्स्स्स्सी हाय बल्लू आखिर बिचारी दूसरी शानदार चूतों को भी तो ठाकुर साहब के जबरदस्त लण्ड का मजा मिलना चाहिये और उसी तरह तेरे जैसे जबरदस्त लण्डों को भी मेरी इस तेरे कहे मुताबिक दूधिया मलाई सी सफेद बिना बालों वाली चूत में हिस्सा मिलना चाहिये।”
यह कहकर ठकुराइन ने बल्लू का साढ़े सात इंच का फ़ौलादी लण्ड थाम लिया और बल्लू का मुंह अपनी चूत से हटा कर लण्ड का हथौड़े जैसा सुपाड़ा अपनी फूली चूत पर रगड़ने लगी बल्लू ने अपना एक पैर टब की दीवार पर जमाया और उस पर ठकुराइन ने अपनी संगमरमरी जांघ चढ़ायी अब लण्ड का सुपाड़ा ठीक चूत के मुंह पर था ठकुराइन ने लण्ड अपनी चूत पर लगाया बल्लू ने अपने दोनो हाथों की उंगलियां उनके भारी चूतड़ों पर जमा लण्ड उचकाया तो सट से पूरा लण्ड अन्दर चला गया। पूरा लण्ड अन्दर जाते ह़ी ठकुराइन ने सिसकारी भरी उम्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्मह । बल्लू ने अभी तीन चार धक्के ही मारे थे कि ठकुराइन बोल पड़ी- “उफ़ मुझे कमरे में ले चलो बल्लू राजा मैं तुमसे इतमिनान से चुदवाना चाहती हूँ।”
बल्लू बोला- “ठीक है मालकिन।”
उसने लण्ड चूत के अन्दर ही रहने दिया और ठकुराइन को वैसे ही गोद में उठा लिया। ठकुराइन ने अपनी दोनो टॉगें उसकी कमर से लपेट ली और अपनी संगमरमरी सुडोल मांसल बाहें गले में डाल दी। उनके बड़े बड़े खरबूजों जैसे गोल गोल गुलाबी स्तन बल्लू के गालों से टकरा रहे थे। बल्लू अपने दोनो हाथों की उंगलियां उनके भारी गुदाज चूतड़ों पर जमाये हुए उन्हें कमरे की तरफ़ ले चला । चलने से लगने वाले हिचकोलों से बल्लू का लण्ड ठकुराइन की चूत में थोड़ा अन्दर बाहर हो रहा था। कमरे में पहुँचकर उन्होंने देखा नन्दू और धीरा जमीन वाले से गद्दे से उठकर पलंग पर सो रहे हैं।
ठकुराइन को हॅंसी आगयी वो बोली-“ काफ़ी समझदार हैं साले हमारे चुदायी के खेल के लिए पूरा ही गद्दा खाली कर दिया।”
फिर वो हॅंसते हुए बल्लू की गोद से उतर गयी जिससे बल्लू का लण्ड ठकुराइन की चूत से झटके से निकल गया बल्लू के मुँह से “हाय” निकल गयी। उसने एक तौलिया बल्लू को दिया क्योंकि वो भी भीग गया था दूसरे से अपना बदन पोंछने लगी। बदन पोंछकर दोनों गद्दे पर आ गये। बल्लू का लण्ड मीनार की तरह खड़ा था। ठकुराइन और बल्लू ने एक दूसरे की तरफ करवट ली बल्लू ठकुराइन की बड़े बड़े उरोजों और निप्पलों को टटोलते हुए बोला “हाय मालकिन अब तो शुरू करें।”
ठकुराइन ने अपनी बाईं टांग बल्लू की जांघ के ऊपर चढ़ा दी बल्लू के लण्ड का सुपाड़ा ठकुराइन की संगमरमरी जांघों के बीच पावरोटी सी फूली चूत के मॅुह के ठीक सामने आ गया। दोनों पुराने खिलाड़ी थे ठकुराइन ने लण्ड हाथ से पकड़ कर सुपाड़ा ठिकाने से लगाया और पूछा क्या ऐसे डालकर चोद सकते हो। जवाब में बल्लू ने धक्का मारा। पूरा का पूरा लण्ड अन्दर चला गया ठकुराइन के मुँह से निकला –
ओहहहहहहहहहहह भई वाह।
बल्लू उनके निप्पल को अपने मुँह मे लेकर चुभलाते और अपनी जीभ से खेलते हुए धीरे धीरे कमर चला कर रगड़ते हुए चोदने लगा। बल्लू के दोनो हाथों की उंगलियॉं ठकुराइन की गुदाज़ पीठ और मोटी मोटी संगमरमरी चिकनी जांघों को सहला गद्देदार भारी नितंबों को दबा रही थी करीब आधे घंटे तक दोनो गद्दे भर में लोट ते हुए चुदायी करते रहे कभी ठकुराइन ऊपर तो कभी बल्लू ऊपर कि अचानक बल्लू ठकुराइन को ऊपर करके खुद नीचे हो गया दोनो की नजर मिली बल्लू ने कुछ इशारा किया तो ठकुराइन उठकर बैठ गयी। अब उनके गद्देदार भारी चूतड़ बल्लू की जांघों पर आ गये। बल्लू ने बड़ी बड़ी चूचियां थाम कर कमर उचकायी तो ठकुराइन अपने आपको उछलने से रोक नहीं पायी और उसकी कमर की ताकत का लोहा मान गयीं। ठकुराइन को उछालकर बल्लू ने अपनी कमर रोकली तो लण्ड बाहर आने लगा जैसे ही बल्लू ने महसूस किया कि सुपाड़ा बाहर निकलने वाला है उसने हाथों में थमी बड़ी बड़ी चूचियां नीचे खीच ली।ठकुराइन का जिस्म अपने वजन के साथ नीचे आकर गिरा पावरोटी सी फूली चूत में जड़ तक बल्लू का लण्ड धॅंस गया जांघें और भारी चूतड़ बल्लू की कमर जांघों और लण्ड के आस पास जोर से टकराये ठकुराइन जैसी जबरदस्त चुदक्कड़ औरत भी उफ़ कर गयी। लेकिन ठकुराइन को मजा भो बहुत आया वो बोली –
“हाय बल्लू फिर ऐसे ही कर।”
बस फिर क्या था बल्लू ने अपनी कमर के जोर से ठकुराइन की पावरोटी सी फूली चूत उछाल उछालकर अपने लण्ड पर पटक पटक कर चोदी।
बल्लू करीब आधे घंटे तक उनके गदराये गोरे गुलाबी नंगे उछलते जिस्म को दोनों हाथों मे दबोचता तो कभी बड़ी बड़ी गुलाबी चूचियों पर झपटता और सारे गदराये जिस्म की ऊचाइयों व गहराइयों पर जॅहा तॅहा मुंह मारता रहा। काफी उठापटक के बाद बल्लू ने दोनों हाथों मे बड़ी बड़ी उभरी चूचियां पकड़कर दोनो निपल एक साथ मुंह में दबा लिये फिर दोनों हाथों मे उनके चूतड़ों को दबोचकर अपने लण्ड पर दबाते हुए चूत की जड़तक लण्ड धॉंसकर झड़ने लगा तभी ठकुराइन के मुँह से जोर से निकला- उम्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्ह आहहहहह

और फिर जोर से उछलकर हुए अपनी पावरोटी सी फूली चूत में जड़ तक बल्लू का लण्ड धॉंसकर और उसे लण्ड पर बुरी तरह रगड़ते हुए वो भी झड़ने लगी । दोनों एक दूसरे की बाहों मे पडे हॉफ रहे थे एक दूसरे की बाहों में लिपटे लिपटे ही सो गये।
दूसरे दिन जब सब सोकर उठे तो नन्दू धीरा और बल्लू जल्दी जल्दी कपडे़ पहनकर जाने लगे तभी ठकुराइन बोली- हवेली के सब लोगों को बता देना कि जिस किसी आदमी की औरत को ठाकुर साहब चुदायी के मजे लेने के लिए रात में बुलायेंगे। वो आदमी अगर चाहे तो उसी रात ठकुराइन से इंसाफ़ मांगने आ सकता है। ठकुराइन ऐसे ही सबको इंसाफ़ देगी।
यह सुनकर वे बोले- कोई बेवकूफ़ ही होगा जो आपका इंसाफ़ नही पसन्द करेगा और फिर हॅं*सते हुए चले गये।
ठकुराइन जब उन्हें भेजकर उठी तो उनके बदन का जोड़ जोड़ चुदायी की कसरत के मारे दर्द कर रहा था। रोजमर्रा के काम खत्म करते करते दोपहर हो गयी। दोपहर के खाने के बाद ठकुराइन ने सोचा कि थोड़ा आराम करले क्योंकि बदन का जोड़ जोड़ टूट रहा था। लेटते ही आँख लग गयी। ठकुराइन करीब सात बजे तक सोती रहीं जब उठी तब भी बदन टूट रहा था। वो सोचने लगीं कि उनका ऐलान अबतक तो हवेली में फैल गया होगा और नामालूम आज ठाकुर का मन किस औरत पर आजाये और रात में उसे कैसे मुस्टंडे आदमी से निपटना पड़े। वे अभी सोच ही रही थी कि रामदास माली आ धमका। ठकुराइन ने उस लम्बे तगड़े बलिष्ठ रामदास माली की तरफ़ देखा और पूछा-
“क्या बात है रामदास।”
रामदास ने जवाब दिया- “आज तो हद ही हो गयी मालकिन ठाकुर साहब ने मेरी औरत फुलवा को अभी से बुलवा लिया कहा कि मालिश करवाना है और फुलवा मालिश बहुत अच्छा करती है आपका ऐलान नन्दू धीरा और बल्लू ने बताया सो मैं इधर चला आया।”
ठकुराइन ने एक जोरदार अंगड़ाई लेते हुए पूछा- “बदन तो मेरा भी बहुत टूट रहा है तूने अपनी बीबी से मालिश करना सीखा या नहीं।”
ठकुराइन की अंगड़ाई ने रामदास के होश उड़ा दिये। अंगड़ाई लेते समय उनकी कमर पतली व सीने के बड़े बड़े गोल उभारदार उरोज और भी गोल बड़े बड़े और भारी लगने लगे जैसेकि दो बड़े बड़े गोल खरबूजे या बेल हों। वो आवाक उन्हें देखता रह गया। ठकुराइन ने ये भांप लिया और मुस्कराते हुए बोली तूने जवाब नहीं दिया।
रामदास ने चौंककर हड़बड़ाते हुए जवाब दिया- “मम्मालकिन फुलवा ने मालिश करना मुझसे ही सीखा है।”
ठकुराइन चहकी- “अच्छा ये बात है तो आजा मैदान में ठाकुर तेरी बीबी से मालिश करवा रहा है तू उनकी बीबी की मालिश कर तेरा इंसाफ़ भी हो जाएगा और मेरे बदन का दर्द भी मिट जाएगा। ड्रेसिंग टेबिल पर तेल क्रीम व पाउडर रखे उन्हें उठा ला और अलमारी से एक बड़ा तौलिया निकाल के उधर कोने में पडे़ उस गद्दे पर बिछा दे।”
रामदास बोला बहुत अच्छा मालकिन।
रामदास ने वैसा ही किया। वो तो नहा धोकर तैयार होकर ही आया था क्योंकि नन्दू धीरा और बल्लू की बातों से उसे ऐसा ही होने की उम्मीद थी। ठकुराइन ने साड़ी उतार दी और खाली पेटीकोट ब्लाउज में आकर गद्दे पर बिछे तौलिये पर बैठ गयी और बोली पहले मेरी कमर की मालिश कर दे। रामदास सोचने लगा कहीं ये सचमुच ही मालिश कराके बिना चुदवाये टरका तो नहीं देगी उधर मेरी बीबी को तो ठाकुर बिना चोदे आने नहीं देगा। दोनों हथेलियों में तेल लेकर पीठ की ओर बैठ गया और गद्देदार चूतड़ों के ऊपर कमर पर दोनों हाथों से मालिश करते हाथों को आगे उनके मांसल गुदगुदे पेट पर फेरते हुए दाये हाथ की बीच की उंगली गोल गहरी नाभी में डाल दी। ये बरसों पुराना चुदक्कड़ो़ का इशारा था जिसका मतलब है मैं तेरी चूत चोदना चाहता हूँ चुदवाओगी या नहीं। ठकुराइन पुरानी चुदक्कड़ खिलाडि़न थी रामदास का इशारा समझ गयी उसने मुस्कुराकर रामदास की तरफ़ आँख का इशारा किया जिसका मतलब था कि वो चुदाई के मुकाबले के लिए पूरी तरह तैयार है। रामदास की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वो खुशी खुशी कमर की मालिश करने लगा वो बार बार ठकुराइन की कमर पर दोनों हाथों से मालिश करते हाथों को आगे उनके मांसल गुदगुदे पेट पर फेरते हुए पेटीकोट के नारे से टकरा देता चार छ बार ऐसा करने के बाद वो बोला- “मालकिन इस तरह बार बार हाथ नारे से टकरा जाते हैं ठीक से मालिश करते नहीं बनता अगर नारा खोल दें तो ठीक से मालिश कर पाऊँगा।”
ठकुराइन समझ गयी रामदास चूत सहलाना चाहता है उसे मालिश में बहुत मजा आ रहा था वो बोली- “तू ही खोल दे ना।”
रामदास ने नारा खोल दिया। अब उसके हाथ ठकुराइन की रेशमी पावरोटी सी फूली गुदगुदी चूत तक पहुंचने लगे मालिश के बहाने वो बीच बीच चूत को हाथ में पकड़कर दबा भी देता। पेटीकोट नीचे सरक गया था और ठकुराइन के उभरे हुए गद्देदार चूतड़ आधे नंगे हो गए थे। उन्हें भी रामदास बीच बीच में हाथों दबोच लेता था। थोड़ी देर में ठकुराइन के मुंह से सिसकारियॉं छूटने लगी वो अपने ब्लाउज के बटन खोलते हुए बोली अब थोड़ा पीठ पर मालिश कर रामदास। बटन खोल के वो पेट के बल लेट गयीं। लेटने में उनके उभरे हुए बड़े बड़े गुलाबी गद्देदार चूतड़ और भी नंगे हो गए।रामदास का लण्ड अकड़कर फेोलाद हो रहा था। वो उनका मतलब समा गया उसने ब्लाउज पीठ पर ऊपर सरका दिया फिर अपनी एकटांग उनके चूतड़ों के दूसरी तरफ़ ले जाकर उन्हें अपनी टांगों के बीच में कर लिया। अब वो घुटनों के बल होकर उनकी नंगी गदरायी हुयी गुलाबी नर्म चिकनी पीठ पर मालिश करने लगा। मालिश करते समय जब वो आगे पीछे होता तो उसका 7 फौलादी लण्ड जो कि अकड़कर धोती से बाहर आ गया था उनके उभरे हुए चूतड़ों की नाली से रगड़ जाता था। तभी ठकुराइन के मुंह से उत्तेजना भरी
ऊॅऊॅऊॅऊॅऊॅऊॅऊॅऊॅ की आवाज आने लगी।
थोड़ी देर में ठकुराइन पलटी और अपने बड़े बड़े दूध से सफेद उरोजों को सहलाते हुए बोली- “रामदास कल साले नन्दू धीरा और बल्लू ने दबादबाकर चूस चूस कर मेरी चूचियां सुजादी थी फिर सुबह से ब्रा ब्लाउज में कसे कसे इनकी हालत और भी खराब हो गयी है जरा पाउडर लगा कर थोड़ा सहलाओ तो कुछ आराम मिले।”
रामदास टांगें फैला कर बैठ गया और अपनी टांगों के बीच में जगह बना कर बोला मालकिन अगर आप यहॉं बीच में आकर बैठ जाये तो यह काम बढि़या और आसानी से हो सकता है। ठकुराइन ने उसके धोती में अकड रहे साढ़े 7’’ फौलादी लण्ड देखा और मुस्कुराकर उठीं और रामदास की टांगों के बीच में दोनो पैर एक ही तरफ करके बैठ गयीं ताकि वह उनके चूतड़ों के बीच की नाली में अपना लण्ड लगा कर ना रगड़ सके। रामदास उनकी चालाकी पर मुस्कुरा उठा। उसने हाथ में पाउडर लिया और ठकुराइन के आगे से खुले ब्लाउज में से झाँकती थिरकती बड़ी बड़ी चूचियों पर लगा कर सहलाने लगा। उत्तेजना से ठकुराइन की सॉसें तेज हो रही थी। थोड़ी देर में बोला मालकिन मेरा हाथ बार बार ब्लाउज से टकराता है और मैं पाउडर ठीक से नहीं लगा पा रहा हूँ अगर आप ब्लाउज उतार दें तो आसानी होगी पेटीकोट तो आप पहने ही हो। ठकुराइन ने चिकनी संगमरमरी बाहें ऊपर उठा दीं और रामदास ने ब्लाउज उतार दिया। अब ठकुराइन का ऊपर का गोरा गुलाबी गदराया बदन बिलकुल नंगा था जिसपर रामदास पाउडर छिड़क छिड़क के पाउडर लगाने के बहाने जम के सहला रहा था । ठकुराइन की सॉसें और तेज हो गयीं। रामदास फिर बोला- “मालकिन थोड़ा पास आ जायें तो आसानी हो।”
ठकुराइन रामदास की तरफ़ खिसकी तो पेटीकोट का नारा खुला होने से वो उनके चूतड़ों से और नीचे उतर गया। ऐसे ही बार बार बोल बोल के खिसका खिसका के रामदास ने ठकुराइन का गोरा गुलाबी गदराया नंगा बदन अपने सीने से बिलकुल सटा लिया और अपने हाथों और जिस्म से उनकी पीठ बाहों कन्धों और बड़े बड़े उरोजों बुरी तरह रगड़ रहा था। उसका फौलादी लण्ड ठकुराइन की गोरी गुलाबी चिकनी जांघ से टकरा रहा था और बुरी तरह अकड़ रहा था। कुछ सोच के रामदास फिर बोला – “मालकिन अगर आप मेरी तरफ़ घूम जाएं तो मैं आपके निपलों की मालिश कर दूँ क्योंकि इन की मालिश होंठों से की जाती है।” ठकुराइन रामदास की तरफ़ घूमने लगीं तो पैरों में फॅ़सा पेटीकोट उनकी टॉग रामदास के जिस्म के दूसरी तरफ़ नहीं जाने दे रहा था । रामदास फिर बोला –“मालकिन अगर आप पेटीकोट उतार दें तो आसानी होगी। आप चाहें तो मेरी धोती ओढ़ ले।”
यह कहकर उसने अपनी धोती उतार दी। ठकुराइन ने उसका फनफनाता फौलादी लण्ड देखा तो फटाफट पेटीकोट उतार फेंका और उसकी तरफ़ घूम गयी। फिर रामदास की जांघों के ऊपर अपनी मोटी मोटी गोरी गुलाबी संगमरमरी जांघें चढ़ा कर बैठ गयी । जिससे उनकी गोरी गुलाबी पावरोटी सी फूली चूत की फॉकें खुल कर चूत का मुँह रामदास के फनफनाते फौोलादी लण्ड के सुपाड़े से टकराने लगा। रामदास अपने दोनों हाथों में उनके बड़े बड़े उरोजों पकड़ कर उनके गुलाबी निपलों को बारी बारी से होंठों में दबा चुभलाने लगा। उसके मुंह से उोजना भरी निपल चुभलाने चूसने की उम्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्मह जैसी आवाजें आ रही थी। ठकुराइन की गोरी गुलाबी पावरोटी सी फूली चूत का मुँह उसके लण्ड के सुपाड़े से टकरा टकराकर बुरी तरह पनिया रहा था उनके मुंह से उत्तेजना के मारे ऊॅऊॅऊॅऊॅऊॅऊॅऊॅऊॅ की आवाजें आ रही थी।
रामदास का लण्ड भी बुरी तरह पनिया रहा था। उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि अब बात आगे कैसे बढ़ाये। तभी ठकुराइन बोली- “रामदास तूने मेरे पैरों की मालिश तो की ही नहीं।”
रामदास ने तीन चार तकिये अपने पैरों की ओर रखे और कहा- “आप इनपर लेट जायें मैं अभी किये देता हूँ।” तकिये इतने ऊँचे थे कि ठकुराइन उनपर अधलेटी सी हो पायी थी। रामदास यही तो चाहता था इससे उसका बदन अभी भी ठकुराइन के बदन ऊपर के गोरे गुलाबी गदराये हिस्से के बिलकुल करीब था पर उनकी गोरी गुलाबी पावरोटी सी फूली चूत उभर कर सामने आ गयी थी। रामदास बारी बारी से उनकी संगमरमरी टांगें अपने कन्धों पर रखकर मालिश करने लगा। दोनों बुरी तरह उत्तजित हो रहे थे। ठकुराइन की मोटी मोटी केले के तने जैसी चिकनी गोरी गुलाबी जांघों पिण्डलियों पर रामदास के हाथ फिसल रहे थे। कभी कभी मारे उत्तेजना के रामदास उनकी गोरी गुलाबी पिण्डलियों पर मुँह भी मार रहा था। रामदास के हाथों नंगी नर्म चिकनी मोटी मोटी गोरी गुलाबी संगमरमरी जांघों को सहलाने नितंबों को दबाने स्तनों के साथ खेलने से ठकुराइन के मुँह सिसकारियां छूट रही थी। तभी ठकुराइन ने अपनी दोनों टांगें उसके कन्धों पर रख ली और उनकी मोटी मोटी केले के तने जैसी चिकनी गोरी गुलाबी जांघों पिण्डलियों को रामदास दोनों हाथों में दबोचने जोरजोर से सहलाने लगा। बीच बीच में मारे उत्तेजना के उनकी गोरी गोरी गुलाबी पिण्डलियों पर दॉत गड़ा देता था। ठकुराइन की मोटी मोटी केले के तने जैसी चिकनी गोरी गुलाबी जांघों के बीच में से गोरी पावरोटी सी फूली चूत की फॉकें जो कि टांगें रामदास कन्धों पर रखी होने के कारण फ़ैल गयी थी और चूत का मुँह ठीक सुपाडे़ के सामने आ गया। लण्ड और चूत एक दूसरे से टकरा टकराकर बुरी तरह पनिया रहे थे। ठकुराइन रामदास की तरफ़ खिसकीं उनकी चूत लण्ड से फिर टकराई ठकुराइन बोली – “रामदास तू क्या सोचता है ठाकुर और तेरी फुलवा अभी क्या कर रहे होंगे।”
रामदास बोला – “फुलवा ठाकुर साहब की मालिश खतम कर राजरानी सी आराम से लेटी होगी और ठाकुर साहब के लण्ड से अपनी चूत की मालिश करवा रही होगी यानि चुदवा रही होगी ।”
ठकुराइन बोली – “तो क्या मैं और तू उनसे कम हैं।”
रामदास बोला- “बिलकुल नहीं मालकिन।”
ठकुराइन हाथ से उसके फौलादी लण्ड का सुपाड़ा पकड़ अपनी चूत के मुँह से लगा कर बोली- “तो फिर लगा धक्का।”
रामदास ने धक्का मारा। सुपाड़ा अन्दर घुस गया और रामदास उसे गोल गोल घुमाने लगा। चूत की दीवारों से घूमकर रगड़ते सुपाड़े का मजा लेते हुए ठकुराइन ने सिसकारी ली और बोली - “वाह माली राजा बगिया खोदने में तेरी खुरपी तो जबरदस्त घूमती है ही चूत में लण्ड तो उससे भी जबरदस्त घूमता है अगर पूरा लण्ड डाल के घूमाता तो और भी मजा आता।”
रामदास धक्का मारते हुए बोला- “ये लो मालकिन पूरा लण्ड।”
इस धक्के से रामदास का पूरा का पूरा फ़ौलादी लण्ड ठकुराइन की पावरोटी सी फूली हुयी चूत में समा गया और रामदास अपना लण्ड चूत में गोल गोल घुमाने लगा। ठकुराइन मजे से कराहते हुए बोली- “अबे जोर जोर से चोद ये ठकुराइन की चूत है अगर तुझसे न बने तो मैं चोदूँ तुझे पटक के।”
इतना रामदास के लिए काफी था। उसने जोर जोर से चोदना शुरू किया। अब रामदास ठकुराइन की गद्देदार फूली हुयी चूत पर अपनी कमर पटक पटक के चोद रहा था ठकुराइन की दोनों टांगें रामदास के कन्धों पर होने के कारण उनकी गद्देदार फूली हुयी चूत मोटी मोटी गोरी गुलाबी चिकनी जांघें भारी गद्देदार चूतड़ रामदास के लण्ड के आस पास टकराकर डनलप के गुदगुदे गद्दे का मजा दे रहे थे और उनसे फटफट की आवाज आ रही थी। रामदास ने दोनों हाथों से ठकुराइन के उछलते बड़े बड़े गोरे गुलाबी उरोजों को थामकर एकसाथ दोनों काले काले निपल होंठों में दबा लिये फिर ठकुराइन की नंगी नर्म चिकनी गोरी गुलाबी संगमरमरी मांसल बाहों को उँगलियॉं में दबोच कर निपल चूसने लगा। अचानक ठकुराइन ने अपनी बायीं टांग रामदास के कन्धे से उतार ली और बायीं करवट ले ली। ठकुराइन के आदेश पर रामदास ने उनकी दूसरी टांग भी बायीं तरफ़ ही उतार दी। अब वो बगल से चोद रहा था। इसी तरह करीब आधे घंटे तक तरह तरह से जैसे जैसे ठकुराइन ने बताया वैसे वैसे रामदास ने अगल बगल दायें बायें ऊपर नीचे घुमा घुमाकर उठापटककर रगड़ते हुए चुदाई करने के बाद अचानक ठकुराइन के मुँह से जोर से निकला- “उम्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्हआाााहहहहह।”
और उन्होंने रामदास को पलट दिया ऊपर चढ़कर जोर जोर से उछलते हुए अपनी पावरोटी सी फूली चूत में जड़ तक रामदास का लण्ड धॉंसकर उसे लण्ड पर बुरी तरह रगड़ते हुए झड़ने लगी। रामदास भी ठकुराइन की आग हो रही चूत की गर्मी झेल नहीं पाया उनके बड़े बड़े गुलाबी चूतड़ों को दोनो हाथों में दबोचकर अपने लण्ड पर दबाते हुए चूत की जड़ तक लण्ड धॉंसकर झड़ने लगा दोनों एक दूसरे की बाहों मे पडे़ हॉफ रहे थे एक दूसरे की बाहों में लिपटे लिपटे ही सो गये।
दूसरे दिन जब रामदास जाने लगा तो ठकुराइन ने कहा- “मैं बुधवार को उन तीनों का दरबार लगाती हूँ बहुत थक जाती हूँ बदन का जोड़जोड़ दर्द करता है तू हर वृहस्पतिवार को मालिश के लिए आजाया कर।”
रामदास- “जी बहुत अच्छा ।”
उधर फुलवा ठाकुर साहब के कमरे में पहुंची। ठाकुर अपने लम्बे चौड़े पलगं पर अधलेटा था।
भाग 3
शुरुआत
ठाकुर साहब शुरू से ही अय्याश थे और शिकार पर भी जाते थे। उन्होंने अपने इन शौकों की जानकारी ठकुराइन को भी शुरू से ही दे रखी थी ताकि कोई बवाल न खड़ा हो। जवाब में ठकुराइन ने जता दिया था कि वे भी आजाद खयाल की हैं तो ठाकुर बहुत खुश हुआ और उसने ठकुराइन को भी मनमानी करने की छूट दे दी। आजकल बेला की लड़की आशा ठाकुर के शिकार के लश्कर के साथ जाती है तो उस दिन जय बहादुर जोकि छोटे ठाकुर कहे जाते हैं ठकुराइन का बिस्तर गरम करते है इस की भी एक अलग ही कहानी है। हुआ यों कि उन्हीं दिनों ठाकुर साहब का दूर के रिश्ते का भाई जय बहादुर जिनके मॉबाप अब इसदुनियॉ में नहीं हैं उनके के यहॉं रह कर पढ़ने के लिए आया। जय मात्र 17 साल का था। उम्र में छोटा और रिश्ते में ठाकुर साहब का छोटा भाई लगने के कारण लोग उन्हें छोटे ठाकुर कहने लगे। एक दिन मनचली ठकुराइन ने नहाते समय उसका 7ष् हथियार देख लिया बस उन्हें ठाकुर से मिली खुली छूट की शुरूआत का आसान रास्ता मिल गया।
अब ठकुराइन बड़े प्यार से छोटे ठाकुर जय का ख्याल रखने लगीं और उसे कभी भी यह एहसास नहीं होने देती थी कि वह घर में अकेला है। वह उसे प्यार से लाला कह कर बुलाती थी। वो भी जानता था कि हवेली में अकेली होने के कारण नौकर चाकर के अलावा वही तो जिसके साथ वो बात चीत कर सकती हैं खास तौर पर जब ठाकुर साहब शिकार पर जाते थे। वो भी हमेशा उनके पास रहना पसन्द करता था। ठकुराइन लम्बी तगड़ी और बेहद खुबसूरत तो थीं ही एकदम गोरी चिट्टी लम्बे लम्बे काले बाल और 38 24 38 का फिगर। वो उनके बड़े बड़े भारी उरोजों पर फिदा था और हमेशा उनकी एक झलक पाने को बेताब रहता था। जब भी काम करते वक्त उनका आंचल उनकी छाती पर से फिसल कर नीचे गिरता या वह नीचे को झुकती वो उनके उरोजों की एक झलक पाने की कोशिश करता। ठकुराइन भी यह भांप गईं थी और जान बूझ कर अक्सर ही उसे अपने जोबन का जलवा दिखा देती थीं।
उन दिनों आशा की मॉ बेला और बाप बिल्लू दोनों ठाकुर साहब के साथ शिकार पर जाते थे। इस बार जब ठाकुर साहब शिकार पर गए और ठकुराइन पर हवेली संभालने की जिम्मेदारी बताते समय जय को घर पर ही रह कर पढ़ाई करने को कह गए क्योंकि उसकी परिक्षायें नजदीक थीं। और ठकुराइन भाभी को भी अकेलपन महसूस ना हो।
ठकुराइन उस दिन बहुत खुश थी। ठाकुर साहब के जाते ही उन्होंने उसे अपने कमरे में बुलाकर बताया कि उन्हें अकेले सोने की आदत नहीं है और जब तक भैया वापस नहीं आते वो उनके कमरे में ही सोये। उन्होंने छोटे ठाकुर से अपनी किताबें वगैरा भी वहीं ला कर पढ़ने को कहा। वो तो खुशी से झूम उठा और फटाफट अपनी टेबल और कुछ किताबें उनके कमरे में पहुंचा दीं। ठकुराइन ने खाना पकवाया और दोनों ने साथ साथ खाया। आज वो छोटे ठाकुर पर कुछ ज्यादा ही मेहरबान थी और बार बार किसी न किसी बहाने अपने उरोजों का जलवा दिखा रहीं थीं। खाने के बाद ठकुराइन ने फल मंगवाये और फल देते वक्त उन्होंने उसका हाथ मसलते हुए कहा कि इतनी पढ़ाई करता है ठीक से खायाकर नहीं तो कमजोर हो जायेगा और बडी ही मादक अदा के साथ मुस्करा दीं। वो शरमा गया क्योंकि यह मुस्कान कुछ अलग ही तरह की थी और इसमें शरारत झलक रही थी। खाने के बाद वो तो पढ़ने बैठ गया और ठकुराइन अपने कपड़े बदलने लगीं। गर्मियों के दिन थे और उस दिन गर्मी भी कुछ ज्यादा ही थी। वो भी अपनी शर्ट और बनियान उतार कर केवल पैन्ट पहन कर पढने बैठा था। छोटे ठाकुर की टेबुल के ऊपर दीवाल पर एक शीशा टंगा हुआ था और वो उसमें ठकुराइन को देख रहा था। ठकुराइन भी उसकी ओर देख रहीं थीं और अपनी साड़ी उतार रही थीं। वो सोच भी नहीं सकती थी कि छोटे ठाकुर शीशे में उनकी परछाई को घूर रहा है। ब्लाउज में कसे उनके बड़े बड़े उभारदार उरोज और पेटीकोट में से उभऱे उनके बड़े बड़े भारी चूतड़ छोटे ठाकुर की पैन्ट में हलचल मचा रहे थे फिर उन्होंने अपना ब्लाउज भी उतार दिया। वो पहली बार लेस वाली ब्रा में बन्धे बड़े बड़े दूध से सफेद कपोतों को देख रहा था जोकि ब्रा में समा नहीं रहे थे और बुरी तरह फड़फड़ा रहे थे। उनके उरोज छलक कर आधे से ज्यादा तो बाहर ही निकल आए थे। ब्रा पेटीकोट के ऊपर एक झीनी सी नाइटी पहन कर वह बिस्तर पर चित्त लेट गईं और कोई किताब पढ़ने लगीं पढ़ते पढ़ते वो सो गईं और कुछ ही देर में उनकी नाइटी सीने पर से हट गयी और सांसों के साथ उठती गिरती उनके मस्त रसीले बड़े बड़े भारी गुलाबी स्तन साफ साफ दिखाई देने लगे। एक पल को तो छोटे ठाकुर का मन विचलित हुआ कि कहीं ठकुराइन भाभी चुदवाना तो नहीं चाहती है फिर मनमारकर अपनी पढ़ाई में लग गये।
रात के बारह बज चुके थे। छोटे ठाकुर ने पढ़ाई खत्म की और बत्ती बुझाने ही वाला था कि ठकुराइन की खनखनाती हुई आवाज उनके कानों में पड़ी पढ़ चुके लाला थक गये होगे थोड़ी देर यहॉं बैठो हम थोड़ी देर बात करेंगे फिर जब नींद लगे तब अपने बिस्तर पर जाकर सो जाना वो बोली।
छोटे ठाकुर फिर कुछ उम्मीद हुई वो उनकी तरफ बढ़ा। अब उन्होंने अपनी नाइटी सीने पर ठीक कर ली थी।
“अब सुनाइये भाभी” वो बोला।
आओ लाला यहॉं मेरे पास बैठो वो बोली।
फिर वो थोड़ी देर इधर उधर की बातें करती रही। बात आगे बढ़ती न देख थोड़ी देर बाद जय ने जमुहाई ली। ठकुराइन बोली नींद आ रही है क्या।
थोड़ी थोड़ी - वो बोला।
ऐसा करो यहीं लेट जाओ ना। वहॉं अकेले बोर हो जाओगे। आओ आओ शरमाओ मत- वो बोली।
छोटे ठाकुर हिचकिचाते़ हुए मान गये। और बोले- मैं लुन्गी पहन कर सोता हूं सो अब मुझे पैन्ट में सोने में दिक्कत हो रही है।”
वह छोटे की परेशानी समझ गईं और बोलीं “कोई बात नहीं लाला। तुम अपनी पैन्ट उतार दो और जैसे रोज सोते हो वैसे ही मेरे पास सो जाओ। शरमाओ मत। आओ भी। ”
छोटे ठाकुर हैरान हो गये। उसे अपने कानों पर यकीन नहीं हो रहा था। लुन्गी पहन कर उसने लाईट बन्द की और नाईट लैम्प जला कर बिस्तर पर उनके पास ही लेट गया। जिस बदन को वो अब तक सिर्फ़ निहारता था उसी के पास लेटा था। भाभी का अधनंगा शरीर बिल्कुल पास था। वो ऐसे लेटी थी कि उनके गुलाबी स्तन लगभग पूरे दिखरहे थे क्योंकि थोडा ही हिस्सा ब्रा में छुपा था।
“इतने महीनों से मैं अकेली नहीं सोई ना इस लिए अब आदत नहीं है अकेले सोने की” - वो बोलीं।
“और मैं कभी किसी के साथ नहीं सोया ” वो लड़खड़ाते हुए बोला।
वह खिलखिलाई और बोली -“अनुभव ले लेना चाहिए जब भी मौका मिले। काम आएगा। मुझे यहां पीठ में कुछ खुजा रहा है जरा खुजलाओ ना।
यह कहकर उन्होंने उसकी तरफ पीठ कर ली और बोली- “लाला ये अंगिया का हुक खोल दो और ठीक से खुजलाओ”
जय ने नाइटी के पीछे की जिप खोलकर अंगिया का हुक खोल दिया और उनकी पीठ खुजलाने लगा। उसका लण्ड अब खड़ा होने लगा था और अन्डरवियर से बाहर निकलने के लिए जोर लगा रहा था। ठकुराइन के उभरे हुए बड़े बड़े चूतड़ों के बिल्कुल पास होने के कारण बीच बीच में उनसे टकरा भी जाता था।
तभी ठकुराइन ने उसका हाथ पकड़ कर धीरे से अपनी ओर खींचा और अपने उभरे हुए सीने पर रख दिया। वो बोली- “यहॉ कुछ सुरसुराहट सी हो रही है जरा सहलादो ”
वो कुछ भी बोल नहीं पाया और ब्रा के ऊपर से ही उनकी चूचियों को सहलाने लगा। ठकुराइन ने उससे हाथ ब्रा के अन्दर डालकर सहलाने को कहा और उसका हाथ अपने हाथ से पकड़ कर ऊपर से ब्रा के अन्दर डाल दिया। अब उसके हाथ में ठकुराइन के बड़े बड़े उरोज थे जिनके निपलों को वो अपनी हथेली में महसूस कर रहा था। वो उन्हें सहलाने लगा। जय की हथेली की रगड़ से ठकुराइन के निप्पल कड़े हो गए। सहलाते सहलाते वो ठकुराइन के बदन के बिल्कुल पास आ गया था और उसका लण्ड उनके बड़े बड़े उभरे हुए भारी नितंबों से रगड़ खा रहा था।
अचानक वो बोली – “लाला यह मेरे पीछे क्या चुभ रहा है जरा देखूं तो।” उन्होंने पूछा ।
लेकिन जय के जवाब देने से पहले ही अपना हाथ उसके लण्ड पर रख कर टटोलने लगीं। अपनी हथेली में लण्ड थाम कर कस कर मुट्ठी बन्द कर ली और बोली – “अरे ये तो तेरा लण्ड है बाप रे ये तो अभी से बहुत बड़ा और सख्त है ठाकुर साहब के जैसा। क्या सभी ठाकुरों के लण्ड बड़े और सख्त होते हैं।”
वह जय की तरफ घूमी और अपना हाथ उसके अन्डरवियर में डालकर फड़फड़ाते हुए लण्ड को इलास्टिक के ऊपर निकाल लिया। लण्ड को कस के पकडे हुए वह अपना हाथ लण्ड की जड़ तक ले गई जिस से सुपाड़ा बाहर आ गया। सुपाड़े का साइज और आकार देखकर हैरानी का नाटक करते हुए बोलीं - मुझे क्या पता था कि तेरा इतना बड़ा होगा। छोटे का लण्ड बड़े के लण्ड के बराबर भी हो सकता है। ”
“लाला कहां छुपा के रखा था इसे इतने दिन –“उन्होंने लण्ड सहलाते हुए पूछा।
“यहीं तो था पर ये आप क्या कर रही हैं मुझे पता नहीं क्या हो रहा है जो ये कड़ा और सख्त होकर दर्द भी कर रहा है ” -जय सकपकाया।
उसे उनकी बिन्दास बोली पर आश्चर्य हुआ जब उन्होंने लण्ड कहा साथ ही बड़ा मजा भी आया। वह लण्ड को अपने हाथ में लेकर सहला रही थी और बीच बीच में कस कर दबा भी देती थी। मुलायम हथेली का स्पर्श बहुत ही अच्छा लग रहा था नाइटी उनके गुलाबी बदन से इस छीन झपट में कब उतर गयी पता ही नहीं चला ब्रा का हुक खुला होने से वो भी नाम मात्र को लटकी थी उसमें से उनके बड़े बड़े भारी गुलाबी स्तन झॉंक रहे थे लेकिन ब्रा के अन्दर हाथ करके सहलाने में जय को दिक्कत सी हो रही थी।
हिम्मत करके उसने कांपते हुए हाथों से ठकुराइन की ब्रा को बदन से उसे उतार दिया। अब उनका कमर के ऊपर का गोरा गुलाबी मांसल बदन पूरी तरह नंगा हो गया गोरे मांसल सुडोल कन्धे मांसल संगमरमरी बाहें बड़े बड़े गुलाबी स्तन देख कर जय बुरी तरह उत्तेजित हो रहा था। अधनंगी ठकुराइन ने उसके दोनों हाथ अपने सीने पर ले जा कर अपने बड़े बड़े दूध से सफेद पर हल्के गुलाबी स्तन थमा दिये और बोली – “अरे थोड़ा कस के दबा ना। ”
मारे उत्तेजना के जय उनके बड़े बड़े उरोजों से जम कर खेलने लगा और जोर जोर से दबाने लगा। ठकुराइन को भी बहुत मजा आ रहा था वो अपनी गुदाज हथेली में लेकर उसका फ़ौलादी लण्ड सहला रही थी। उनकी चूचियों को सहलाते दबाते जय उनके बदन के बिल्कुल पास आ गया था और उसका 8 इन्च का फनफनाता लण्ड पूरे जोश में उनकी मोटी मोटी जांघों में रगड़ रहा था।
फिर वह जय की तरफ करवट ले कर लेट गई और अपना पेटीकोट अपनी कमर के ऊपर उठा लिया और उसके तने हुए लण्ड को अपनी मोटी मोटी गोरी गुलाबी संगमरमरी जांघों के बीच दबा कर मसलने लगी। बड़े बड़े बेल से उरोजों पर चेरी से भूरे रसीले निप्पल जय के मुंह के बिल्कुल पास थे और वह उन्हें बीच बीच में पकड़कर मसल देता था। अचानक उन्होंने अपना बायां निप्पल उसके मुंह में ठेलते हुए कहा – “हाय इनको मुंह में लेकर चूस ना। ”
जय ने उनके बायें स्तन का निप्पल अपने मुंह में भर लिया और जोर जोर से चूसने लगा।
फिर क्या था। भाभी की हरी झन्डी पाकर छोटे ठाकुर टूट पड़े ठकुराइन भाभी की चूचियों पर। उसकी जीभ उनके कड़े निप्पल को महसूस कर रही थी। उसने अपनी जीभ ठकुराइन भाभी के उठे हुए कडे़ निप्पलों पर घुमाई। वो दोनों बेलों को कस के पकड़े हुए था और बारी बारी से निप्पलों को चूस रहा था। वो ऐसे कस कस कर चूचियों को दबा रहा था मानो इनका पूरा का पूरा रस ही निचोड़ लेगा। ठकुराइन के मुंह से
आह उई सी स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्ससी
की आवाज निकल रही थी। वो जय के लण्ड को मोटी मोटी गोरी गुलाबी संगमरमरी जांघों के बीच ले कर बुरी तरह से मसल रही थी और उससे पूरी तरह से सटती जा रही थी। उन्होने अपनी बाईं टांग उसकी जांघ के ऊपर चढ़ा दी । जय के लण्ड को उनकी जांघों के बीच एक मुलायम मुलायम रेशमी अहसास हुआ। यह उनकी चूत थी। भाभी ने पैन्टी नहीं पहनी थी और उसके लण्ड का सुपाड़ा उनकी झांटों में घूम रहा था और उसकेे सब्र का बान्ध टूट रहा था।
भाभी मुझे कुछ हो रहा है़ मैं अपने आपे में नहीं हूं। प्लीज मुझे बताओ मैं क्या करूं।
अरे तो क्या तुम्हें कुछ नहीं मालुम तुम जैसे खेल रहे थे उससे तो लगा था कि सब जानते हो।
ये सब तो सुना पढ़ा और वयस्क पिक्चरों में देखा था।
वो अपनी गुदाज हथेली में लेकर उसका फ़ौलादी लण्ड सहलाते हुए बोली – “इतना तगड़ा लौंड़ा ले के भी कुछ नहीं किया। कितने दुख की बात है। कोई भी लड़की इसे देख कर कैसे मना कर सकती है। क्या शादी तक ऐसे ही रहने का इरादा था।”
जय बोला – “ये तो मालुम है कि क्या करना है पर कैसे ये नहीं मालुम।
“वाह कैसे ठाकुर हो क्या शादी के बाद बीबी से पूछोगे या क्या करोगे। ”- ठकुराइन बोली।
जय के मुंह में कोई शब्द नहीं थे। वो चुपचाप नजर नीची किये उनके हुए स्तनों से खेल रहा था। उन्होंने अपना मुंह उसके मुंह से बिलकुल सटा दिया और फुसफुसा कर बोली- “कोई बात नहीं अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा अपनी ठकुराइन भाभी से सीख लो।
“क्क क्यों नहीं ” जय बड़ी मुश्किल से बोल पाया।
उसका गला सूख रहा था। वह बड़े मादक अन्दाज में मुस्करा दी और उसके लण्ड को आजाद करते हुए बोलीं ष्तब ठीक है। अपने अनाड़ी देवर राजा को ठकुराइन भाभी सब सिखा देगी। पर गुरू दक्षिणा देनी पड़ेगी ।
क्या गुरू दक्षिणा देनी होगी। ”-जय ने पूछा।
“चोदना पडे़गा मूरख और क्या वो भी जब और जितनी बार मैं बुलाऊॅं आखिर सिखाने में मुझे अपनी चूत का इस्तेमाल करना पड़ेगा और मुझे तेरे इस लण्ड की आदत पड़ जायेगी कि नहीं। चल अपनी चडढी उतार कहते हुए ठकुराइन ने उसकी चडढी खीच कर उतार दी।
छोटा ठाकुर पलंग पर से उतर गया और अपने तने हुए लण्ड को लेकर नंग धडंग सा अपनी अधनंगी ठकुराइन भाभी के सामने खड़ा हो गया। ठकुराइन ने हाथ बढ़ा कर उसके तने हुए लण्ड को थाम अपने रसीले होठों को अपने दांतों में दबाकर देखने लगी।
आप भी तो इसे उतार कर नंगी हो जाओ कहते हुए छोटे ठाकुर ने उनके पेटीकोट का नाड़ा खींच कर ढीला कर दिया और पेटीकोट नीचे से पकड़कर खींचा। भाभी ने अपने भारी चूतड ऊपर कर उठा दिए जिससे कि पेटीकोट उनकी मोटी मोटी गोरी गुलाबी संगमरमरी जांघों पिण्डलियों से होता हुआ टांगों से उतर कर अलग हो गया। ठकुराइन अब पूरी तरह नंगी होकर उसके सामने चित्त पड़ी थीं। ठकुराइन ने अपनी टांगें फैला दीं और जय को रेशमी झांटों के जंगल के बीच छुपी हुई उनकी पावरोटी सी फूली रसीली गुलाबी चूत दिखी। नाईट लैम्प की हल्की हल्की रोशनी में चमकते हुए उनके नंगे जिस्म को देखकर उत्तेजना के मारे उसका लण्ड फड़फड़ाने लगा।
ठकुराइन ने अब जय से अपने ऊपर आने को कहा। वो झट से उनके ऊपर चढ़ गया और उनके बड़े बड़े दूध से सफेद गुलाबी उरोजों को थाम कर दबाते हुए उनके रसीले होंठों पर होंठ रख चूसने लगा। ठकुराइन ने भी उसे कस कर अपने बाहों में कस कर जकड़ लिया और उसके मुंह में अपनी जीभ डाल दी। जय उनकी जीभ को जोर जोर से चूसने लगा। कुछ देर बाद जय ने अपने होंठ ठकुराइन के गुलाबी टमाटर जैसे फूले गालों पर रगड़ रगड़ कर चूमने लगा। ठकुराइन ने जय का सर पकड़ लिया और उसे नीचे की ओर ठेला। जय के होंठ उनके होठों से उनकी ठोड़ी पर होते हुए सुराही दार गरदन और गोरे मांसल कन्धों को चूमते दांत गड़ाते हुए उनके बड़े बड़े उरोजों पर पहुंचा। जय उन्हें थाम कर दबाते हुए उनके निपलों को उंगलियों से मसलता और खेलता हुआ जोर जोर से काटने और चूसने लगा। ठकुराइन ने अपना बदन जय के बदन के नीचे से निकाला। अपने दाएं हाथ से वह मेरा लण्ड थामकर सहलाने लगीं और बांए हाथ से जय का दाहिना हाथ पकड़कर अपनी मोटी मोटी गोरी गुलाबी संगमरमरी चिकनी जांघों के बीच ले गईं और उसे अपनी पावरोटी सी फूली चूत पर रख दिया। समझदार को इशारा काफी । जय उनकी बड़ी बड़ी चूचियों दाब कर निपलों को चूसते हुए उनकी पावरोटी सी फूली चूत को सहलाने लगा।
ठकुराइन ने टांगें फैलायी फिर एक हाथ से अपनी चूत की दोनों फॉके फ़ैला कर दूसरे हाथ से छोटे ठाकुर के फड़फड़ाते हुए लण्ड को पकड़ कर सुपाड़ा चूत के मुहाने पर रखा अब जय अपना लण्ड चूत के मुहाने पर रगड़ने लगा। ठकुराइन मजे और उत्तेजना से सिसकारी भरे जा रही थी। थोड़ी देर में छोटे ठाकुर का लण्ड और ठकुराइन की चूत काफी गीली हो गई तब उत्तेजना से सिसकारी भर ठकुराइन बोली ष्अब अपना लण्ड मेरी चूत में डाल। धीरे धीरे प्यार से। नहीं तो मुझे दर्द होगा क्योंकि तेरा बहुत बड़ा है।
जय नौसिखिया था इसलिए शुरू शुरू में मुझे अपना लण्ड उनकी टाईट चूत में नहीं गया। जब जोर लगा कर लण्ड अन्दर ठेलना चाहा तो ठकुराइन के मुँह से उफ़ निकल गयी। लेकिन पहले से ही लण्ड रगड़ने से उनकी चूत काफी गीली हो गई थी। ठकुराइन ने हाथ से लण्ड को निशाने पर लगा कर रास्ता दिखाया। रास्ता मिलते ही एक ही धक्के में सुपाड़ा अन्दर चला गया।
आााााााह।
“ऊई ई ई ई ई ई ई ई मांााााा ऊऊऊऊहहहहहह ओह लाला। ऐसे ही रहो कुछ देर। हिलना डुलना नहीं।
हाय रे बडा जालिम है ठाकुर तुम्हारा लण्ड तो। मार ही डाला अनाड़ी देवर राज्ज्ज्जा। ”
-ठकुराइन को काफी दर्द हो रहा था। पहली बार किसी अनाड़ी से पाला पड़ा था। क्योंकि बड़े ठाकुर तो चुदायी के माहिर खिलाड़ी थे। जय को कसी हुई चूत में लण्ड डाल कर बड़ा मजा आ रहा था वो अपना लण्ड उनकी चूत में डाले चुपचाप पड़ा रहा। ठकुराइन की उठी हुई बड़ी बड़ी चूचियां काफी तेजी से ऊपर नीचे हो रही थी। जय ने हाथ बढ़ा कर दोनो चूचियों को पकड़ लिया और निपल मुंह में लेकर चूसने लगा। थोड़ी देर में ठकुराइन की चूत धीरे धीरे फड़कने लगी और अन्दर ही अन्दर उसके लण्ड को पकड़ने लगी। ठकुराइन को कुछ राहत मिली और उन्होंने कमर हिलानी शुरू कर दी।
“छोटे ठाकुर शुरू करो चुदाई। चोदो ठकुराइन की चूत। दिखा दो कि तुम भी ठाकुर हो। ले लो मजा जवानी का छोटे राज्ज्ज्ज्जा ”
-कहती हुई ठकुराइन अपने चूतड़ हिलाने लगी।
अनाड़ी छोटे ठाकुर ने पहले अपनी कमर को ऊपर किया तो लण्ड बाहर आ गया। फिर जब नीचे किया तो ठीक निशाने पर नहीं बैठा और भाभी की चूत को रगड़ता हुआ नीचे फिसल गया। मैंने दो तीन बार धक्का लगाया पर लण्ड चूत में वापस जाने के बजाए फिसल कर नीचे चला जाता। ठकुराइन से रहा नहीं गया और ताना देती हुई बोली – “अनाड़ी का चोदना और चूत का सत्यानाश । अरे मेरे भोले छोटे राजा जरा ठीक से निशाना लगा कर ठेलो। नहीं तो यूंही चूत के ऊपर लण्ड रगड़ रगड़ कर झड़ जाओगे। ”
जय बोला- “भाभी अपने इस अनाड़ी देवर को कुछ सिखाओ। जिन्दगी भर तुम्हें गुरू मानूंगा और लण्ड की दक्षिणा दूंगा।”
ठकुराइन लम्बी सांस लेती हुई बोली “हाँ लाला। मुझे ही कुछ करना होगा नहीं तो देवरानी आकर कोसेगी कि तुम्हें कुछ नहीं सिखाया। ”
जय का हाथ अपनी चूची पर से हटाया और लण्ड पर रखती हुई बोली- ”इसे पकड़ कर मेरी चूत के मुंह पर रखो।”
जय ने वैसा ही किया। ठकुराइन ने अपने दोनों हाथों से अपनी चूत की फांके फैलायी और बोली- “लगा धक्का जोर से। ”
छोटे ठाकुर ने धक्का मारा और लण्ड ठकुराइन की चूत को चीरता हुआ पूरा का पूरा अन्दर चला गया।
“अब लण्ड को बाहर निकालो लेकिन पूरा नहीं। सुपाड़ा अन्दर ही रहने देना। फिर दोबारा पूरा लण्ड अन्दर पेल देना। इसी तरह से बारबार करो। ”
छोटे ठाकुर ने वैसे ही करना शुरू किया और लण्ड धीरे धीरे ठकुराइन की चूत में अन्दर बाहर होने लगा। फिर ठकुराइन भाभी ने स्पीड बढ़ा कर जल्दी जल्दी अन्दर बाहर करने को कहा।
छोटे ठाकुर ने अपनी स्पीड बढा दी और तेजी से लण्ड अन्दर बाहर करने लगा। ठकुराइन भाभी को भी पूरी मस्ती आ रही थी और वह भी नीचे से कमर उठा उठा कर छोटे ठाकुर के हर शॉट का जवाब देने लगी। लेकिन ज्यादा स्पीड होने से बार बार छोटे ठाकुर का लण्ड बाहर निकल जाता। इससे चोदाई की लय टूट जाती। आखिर ठकुराइन से रहा नहीं गया और करवट लेकर छोटे ठाकुर को अपने ऊपर से उतार दिया और उसे चित्त लिटा कर उसके ऊपर चढ गईं। अपनी जांघों को फैला कर छोटे ठाकुर की जांघों के अगल बगल कर के उसकी जांघों पर अपने गद्देदार चूतड रखकर बैठ गई। ठकुराइन की चूत छोटे ठाकुर के लण्ड केसामने थी और हाथ कमर को पकड़े हुए थे। बोली – “मैं दिखाती हूं कि कैसे चोदते हैं ”
और ठकुराइन ने धक्का लगाया। लण्ड घप से चूत के अन्दर चला गया
ठकुराइन भाभी ने अपनी बड़ी बड़ी चूचियों को छोटे ठाकुर की छाती पर रगड़ते हुए अपने गुलाबी होंठ उसके होठों पर रख दिए और जीभ मुंह के अन्दर ठेल दी। फिर ठकुराइन मजे से कमर हिला हिला कर धक्के लगाने लगी। बडे़ कस कस कर धक्के लगा रही थी ठकुराइन। चूत लण्ड को अपने में समाए हुए तेजी से ऊपर नीचे हो रही थी। छोटे ठाकुर को लग रहा था कि जैसे जन्नत मिल गई हो । अब ठकुराइन छोटे ठाकुर के ऊपर कन्धों को पकड़ कर घुटनों के बल बैठ गई और जोर जोर से कमर हिला कर लण्ड पर अपनी पावरोटी सी फूली चूत पटककर को तेजी से लण्ड लेने लगी। उनका सारा बदन हिल रहा था और सांस तेज तेज चल रही थी। ठकुराइन भाभी की चूचियां तेजी से उछल रही थी। जिन्हें उसने को दबादबाकर निपलों को मसल़मसल़कर और होंठों से चूसकर गुलाबी से लाल कर दिया था। छोटे ठाकुर से रहा नहीं गया और झपट कर दोनों चूचियों को पकड़ लिया निपल मुँह में भरकर जोर जोर से चूसने और चूचियों को हार्न की तरह दबाने लगा। भाभी एक सधे हुए खिलाडी की तरह कमान अपने हाथों में लिए हुई थी और कस कस कर शॉट लगा रही थी। जैसे जैसे वह झड़ने के करीब आ रही थी उनकी रफ्तार बढती जा रही थी। कमरे में फच फच की आवाज गूंज रही थी। जब उनकी सांस फूल गई तो खुद नीचे आकर जय को अपने ऊपर खींच लिया और टांगों को फैला कर ऊपर उठा लिया। बोली “मैं थक गई मेरे छोटे राज्ज्ज्जा। अब तू मोर्चा संभाल। ”
छोटे ठाकुर ने झट उनकी मोटी मोटी गोरी गुलाबी संगमरमरी जांघों के बीच बैठ निशाना लगाया एक ही धक्के में लण्ड अन्दर धॉस कर बड़ी बड़ी चूचियां थाम चोदने लगा। ठकुराइन बोली भई वाह।
“अब मैं उतना अनाड़ी नहीं रहा। ”
-छोटे ठाकुर ने जवाब दिया।
ठकुराइन भाभी ने अपनी टांगों को छोटे ठाकुर की कमर पर जकड़ लिया और जोर जोर से चूतड़ उछाल उछाल कर चुदाई में साथ देने लगी। कमरे में मोटी मोटी गोरी गुलाबी संगमरमरी जांघों को सहलाने गद्देदार चूतड़ों को दबाने बिस्तर जिस्मों के रगड़ने स्तनों के साथ खेलने हमारी चुदाई की उठापटक ठकुराइन की सिसकारियों की आवाजों से भर रहा था। छोटे ठाकुर ने उनकी दोनों टॉगें उठाकर अपने कन्धों पर रखलीं और मोटी मोटी गोरी गुलाबी संगमरमरी जांघों को सहलाते हुए गोरी गुलाबी पिण्डलियों को दॉतोंसे पकाड़ते हुए जोर जोर से चोदने लगा और बोला- “हाय भाभी मैं हमेशा तुम्हारे ब्लाउज में कसी तुम्हारी चूचियों नहाते कपडे़ बदलते समय इन बड़े बड़े गुलाबी चूतड़ों संगमरमरी जांघों पिण्डलियों को देखता था और हैरान होता था। इनको छूने सहलाने दॉत मारने की बहुत इच्छा होती थी और दिल करता कि तुम्हारी चूचियों को मुंह में लेकर निपल चूसूं और इनका रस पिऊं। पर डरता था। तुम नहीं जानती भाभी कि तुमने मुझे और मेरे लण्ड को कितना परेशान किया है। ”
“अच्छा तो फिर आज अपनी तमन्ना पूरी कर ले। जी भर कर दबा चूस और मजे ले। मैं तो पूरी की पूरी तुम्हारी हूं। जैसे दिल चाहे वैसे कर।”
ठकुराइन कमर हिला कर बड़े बड़े गुलाबी चूतड़ उछालकर चुदा रही थी और बोले जा रही थी
आाााह आाााह ऊंहहह आाोाोाााह ओोाोेाोोोोोह हाााााााया मेरे राज्ज्ज्ज्ज्जाााा। मर गई रे। लााााााल्ल्ल्ल्लाााा चोद रे चोद। उफ़ईईईईईई हाय फाड़ दी ईईईईईईईईईईइ रे आज तो छोटे ठाकुर राज्ज्ज्ज्ज्जा ने बड़ा जालिम है तुम्हारा लौंड़ा। एकदम महीन मसाला कूट दिया रे। ”
छोटा ठाकुर भी बोल रहा था-
“ले ठकुराइन रान्न्न्न्न्नी ले ले मेरा लण्ड अपनी ओखली में। बड़ा तड़पाया है तूने मुझे। ले और ले। ले छोटे ठाकुर का यह लण्ड तेरा ही है। आाााााााहहहहह ऊऊऊऊऊऊऊहहह क्या मजा सिखाया है तूने। मैं तो तेरा गुलाम हो गया। ”
ठकुराइन चूतड़ उछाल उछाल कर छोटे ठाकुर का लण्ड अपनी चूत में ले रही थी और वो भी पूरे जोश को साथ चूचियों को दबादबाकर चोदे जा रहा था।
उफ्फ्फ्फ्फ्फ क्या आग सी लगी हुई थी दोनों को तन बदन में।
ठकुराइन ललकार कर कहती लगा ठाकुरों वाला धक्का छोटे ठाकुर राजा।
छोटा ठाकुर जवाब देता ये ले ठकुराइन रानी ले ले अपनी चूत में।
जरा और जोर से मार धक्का अपने लण्ड का छोटे ठाकुर राजा
ये लो रानी साहिबा ये लण्ड तो बना ही आपके लिए है ।”
“देख छोटे राज्ज्ज्जा मेरी चूत तो तेरे लण्ड की दीवानी हो गई। और जोर से और जोर से आाााााााााईईईईईईईईई छोटे ठाकुर राज्ज्ज्ज्जाााा। मैं गईईईईईईईईईईईईईईईई रे”
कहते हुए ठकुराइन ने छोटे ठाकुर को कस कर अपनी गोरी गुलाबी संगमरमरी मांसल बांहों में जकड़ लिया और उनकी चूत के ज्वालमुखी ने लावा छोड़ दिया।
मेरा भी गयाााााा ठकुराइन रान्न्न्न्न्न्न्न्न्न न्नीईईई ईईईईईईई तेरीईईईईईईईईईइ चूत में ले ले पूरे लण्ड का रस चूस ले अपनी चूत से।
कहते हुए छोटे ठाकुर के लण्ड ने भी पानी छोड दिया और मैं हांफते हुए ठकुराइन की चूचियों पर सिर रखकर उनके गोरे गुलाबी संगमरमरी गदराये मांसल जिस्म को दबोचकर लेट गया।
यह छोटे ठाकुर की पहली चुदाई थी और ठकुराइन ने भी चुदाई सिखाने और चुदाने में आज नया लण्ड मिलने के जोश में बहुत मेहनत की थी इसलिए दोनों को काफी थकान सी महसूस हो रही थी। दोनों सो गए। कुछ देर बाद जब होश आया तो जय ठाकुर ने ठकुराइन भाभी के रसीले होठों का चुम्बन लेकर उन्हें जगाया। ठकुराइन ने करवट लेकर उसे अपने ऊपर से हटाया और बांहों में कस कर कान में फुसफुसा कर बोली-
“तुमने तो कमाल कर दिया लाला। क्या गजब की ताकत है तुम्हारे लण्ड में। ”
“कमाल तो आपने किया है भाभी। आजतक मुझे मालूम ही नहीं था कि अपने लण्ड का इस्तेमाल कैसे करना है। ये तो आपकी ही मेहरबानी है जो आज मेरे लण्ड को आपकी चूत की सेवा करने का मौका मिला। ”
अबतक उसका लण्ड उनकी चूत के बाहर आकर झांटों के जंगल में रगड़ मार रहा था।
ठकुराइन ने अपनी मुलायम गुदाज हथेलियों में छोटे ठाकुर का लण्ड थाम कर सहलाना शुरू किया। उनकी नाजुक उंगलियों का स्पर्श पाकर छोटे ठाकुर का लण्ड भी जग गया और एक अंगडाई लेकर ठकुराइन की पावरोटी सी फूली चूत पर ठोकर मारने लगा। ठकुराइन ने कस कर अपनी मुट्ठी में मेरे लण्ड को कैद कर लिया और बोली- “बहुत जान है तुम्हारे लण्ड में। देखो फिर फड़फड़ाने लगा। अब तो मैं इसे छोडुंगी नहीं। ”
दोनों अगल बगल लेटे हुए थे। ठकुराइन ने छोटे ठाकुर को चित्त लिटा दिया और उसकी जांघ पर अपनी जांघ चढ़ा कर लण्ड को हाथ से उमेठने लगी। साथ ही साथ भाभी अपनी कमर को हिलाते हुए अपनी चूत मेरी जांघ पर रगड़ने लगी। उनकी चूत पिछली चुदाई से अभी तक गीली थी और उसका स्पर्श मुझे पागल बनाए हुए था। अब जय ठाकुर से रहा नहीं गया और करवट लेकर ठकुराइन की तरफ मुंह कर के लेट गया। उनकी बड़ी बड़ी चूचियों को हाथों में थाम चेरी से निपल मुंह में दबा कर चूसते हुए अपना लण्ड को चूत के मुँह पर रगड़ने लगा। ठकुराइन एक सिसकारी लेकर जय ठाकुर से कस पर चिपक गई और जोर जोर से कमर हिलाते हुए अपनी का चूत मुँह मेरे लण्ड के सुपाड़े पर रगड़ने लगी। जय ठाकुर का लण्ड पूरे जोश में अकड़ कर लोहे की तरह सख्त हो गया था। अब ठकुराइन की बेताबी हद से ज्यादा बढ़ गई थी सो उन्होंने खुद चित्त होकर छोटे ठाकुर को अपने ऊपर खींच लिया।
ठकुराइन जय ठाकुर के लण्ड को पकड़ कर अपनी चूत पर रखती हुई बोली-
“बोलो छोटे ठाकुर राज्जा। सेकेन्ड राउन्ड हो जाए। ”
छोटे ठाकुर ने झट कमर उठा कर धक्का दिया और उसका लण्ड ठकुराइन की चूत को चीरता हुआ जड़ तक धंस गया। ठकुराइन चिल्लाई “जियो मेरे राज्जा। क्या शाट मारा है। अब मेरे सिखाए हुए तरीके से दो शॉट पर शॉट और फाड़ दो ठकुराइन की चूत को।”
ठकुराइन का प्रोत्साहन पाकर छोटा ठाकुर दूने जोश में आ गया और चूचियों को पकड़ कर हुमच हुमच कर उनकी की चूत में लण्ड पेलने लगा। पहली चुदाई से गीली ठकुराइन की चूत में लण्ड सटासट अन्दर बाहर हो रहा था। ठकुराइन नीचे से कमर उठा कर हर शॉट का पूरे जोश के साथ जवाब दे रही थी। ठकुराइन भाभी ने अपने दोनें हाथों से मुँह बोले देवर छोटे ठाकुर की कमर को पकड़ रखा था और जोर जोर से अपनी पावरोटी सी फूली चूत में उसका ठाकुरी फौलादी लण्ड डलवा रही थी। वह उसे इतना उठने देती कि बस लण्ड का सुपाड़ा अन्दर रहता और फिर जोर से नीचे खींचती हुई घप से लण्ड चूत में घुसड़वा लेती। पूरे कमरे में हमारी तेज सांस और फटाफट की आवाजें गूंज रही थी।
कुछ देर बाद ठकुराइन ने कहा-
“अब तू काफी सीख गया चल तुझे एक नया आसन सिखाती हूँ। ” और छोटे ठाकुर को अपने ऊपर से हटा कर किनारे कर दिया। लण्ड पक की आवाज के साथ बाहर निकल गया। वो चित्त लेटा था और लण्ड पूरे जोश में सीधा खडा था। ठकुराइन उठ कर घुटनों और हथेलियों पर उसके बगल में ही चौपाया बन गई। जय लण्ड को हाथ में पकड कर बस उनकी हरकत देखता रहा।
ठकुराइन ने उसे खींच कर उठाते हुए कहा –
“ऐसे पड़े पडे़ क्या देख रहा है । चल उठ अब पीछे से लण्ड डाल।
छोटे ठाकुर उठ कर ठकुराइन के पीछे आ कर घुटनों के बल बैठ गये ठकुराइन ने जांघों को फैला कर अपने गोल बड़े बड़े गद्देदार गुलाबी मस्ताने चूतड़ ऊपर को उठा दिए जिससे उनकी पावरोटी सी फूली रसीली चूत साफ नजर आने लगी। छोटे ठाकुर अपना फ़ौलादी लण्ड हाथ में पकड़कर उसका सुपाड़ा उनकी चूत पर रगड़ने लगा। थोड़ी देर में जब उत्तेजना से ठकुराइन की चूत गीली हो गयी तो उन्होंने इशारा किया भाभी का इशारा समझ कर छोटे ठाकुर ने लण्ड का सुपाड़ा उनकी चूत पर रख कर धक्का मारा और लण्ड चूत को चीरता हुआ जड तक धंस गया। भाभी ने एक सिसकारी भर कर अपने चूतड़ पीछे कर के जय की जांघों से चिपका दिये। छोटा ठाकुर ठकुराइन की संगमरमरी गदरायी पीठ से चिपक कर लेट गया और बगल से हाथ डाल कर उनकी दोनों बड़ी बड़ी बेल सी चूचियों को थाम कर दबाने लगा। वो भी मस्ती में धीरे धीरे चूतड़ों को आगे पीछे करके मजे लेने लगी। उनके मुलायम बड़े बड़े गद्देदार मस्ताने चूतड़ उसकी मस्ती को दोगुना कर रहे थे। लण्ड उनकी रसनही पावरोटी सी फूली चूत में आराम से आगे पीछे हो रहा था। मस्ती का वो आलम था कि बस पूछो मत।
कुछ देर यूंही मजा लेने के बाद ठकुराइन बोली-
“चल राज्जा अब आगे उठ कर शॉट लगाओ। अब रहा नहीं जाता।”
छोटा ठाकुर उठ कर सीधा हो गया और ठकुराइन के चूतडों को दोनों हाथों से कस कर पकड़कर हमला बोल दिया। जैसा कि ठकुराइन भाभी ने सिखाया था पूरा लण्ड धीरे से बाहर निकाल कर जोर से अन्दर कर देता। शुरू तो धीरे धीरे किया लेकिन जैसे जैसे जोश बढ़ता गया धक्कों की रफ्तार भी बढती गई। धक्का लगाते समय ठकुराइन के चूतड़ों को कस के अपनी ओर खींच लेता ताकि शॉट तगड़ा पडे। ठकुराइन भी उसी रफ्तार से अपने चूतडों को आगे पीछे कर रही थी। दोनों की सांस तेज हो गई थी। ठकुराइन की मस्ती पूरे परवान पर थी। नंगे जिस्म जब आपस में टकराते तो धप धप की आवाज आती। जब हालत बेकाबू होने लगी तो जय ठकुराइन भाभी को फिर से चित्त कर उन पर सवार हो गया और भीषण चुदाई शुरू की। तभी भाभी ने उसे कस कर जकड़ लिया और अपनी चिकनी मोटी मोटी गोरी गुलाबी संगमरमरी जांघें उसकी कमरं पर कस कर जोर जोर से चूतड़ हिलाते हुए चिपक कर झड़ गई। तभी जय भी ठकुराइन भाभी की बड़ी बड़ी बेल सी चूचियों को हार्न की तरह जोर जोर से दबाते हुए झड़ गया और हांफते हुए उनके ऊपर लेट गया। दोनों काफी देर तक एक दूसरे से चिपके पड़े रहे।
कुछ देर बाद ठकुराइन ने पूछा- “क्यों लाला कैसी लगी चुदाई।”
छोटे ठाकुर -
“हाय भाभी जी करता है जिन्दगी भर इसी तरह तुम्हारी चूत में लण्ड डाले पडा रहूं।”
ठकुराइन –
“जब तक बडे़ ठाकुर नहीं आते तब तक तो दिन हो या रात ये चूत तुम्हारी है। जो मर्जी हो कर सकते हो। फ़िलहाल अब थोड़ी देर आराम करते हैं।”
छोटे ठाकुर –
“नहीं भाभी। कम से कम एक बार तो और हो जाए। देखो मेरा लण्ड अभी भी बेकरार है ।”
ठकुराइन ने छोटे ठाकुर के लण्ड को अपनी गुदाज हथेली में कस लिया और बोली –
“ये तो ऐसे रहेगा ही चूत की खुशबू जो मिल गई है। पर देखो रात के तीन बज गए हैं। अगर सुबह टाईम से नहीं उठे तो हवेली के नौकरों को शक हो जाएगा। अभी तो सारा दिन सामने है और आगे के भी कई दिन हमारे हैं। जी भर कर मस्ती लेना। मेरा कहा मानोगे तो रोज नया स्वाद चखाउंगी।”
ठकुराइन का कहा मान कर छोटे ठाकुर ने जिद छोड़ दी ठकुराइन करवट लेकर लेट गई। छोटे ठाकुर उनकी गदरायी पीठ से सट बगल से हाथ डालकर दोनों हाथों में बड़ी बड़ी चूचियों थाम उनके बड़े बड़े गद्देदार गुलाबी चूतड़ों की दरार में लण्ड फंसा दिया और उनके मांसल कन्धों पर होंठ रख कर लेट गया। नींद कब आगई इसका पता ही नहीं चला।


भाग 2
सुबह जब अलार्म घड़ी बजी तो छोटे ठाकुर ने समय देखा। सुबह के सात बज रहे थे। ठकुराइन भाभी ने उसकी तरफ मुस्करा कर करवट लेकर देखा और एक गरमा गरम चुम्बन होठों पर जड़ दिया। उसने भी ठकुराइन भाभी को जकड़ कर उनके चुम्बन का जोरदार जवाब दिया। फिर ठकुराइन उठ कर अपने रोज के काम काज में लग गई। वह बहुत ही खुश थी और उनके गुनगुनाने की आवाज उसके कानों में शहद घोल रही थी। तभी घन्टी बजी और नौकरानी आशा आ गई।
उस दिन जय ठाकुर कालेज नहीं गये। नाश्ता करने के बाद वो पढ़ने बैठ गया। जब बेला की बेटी आशा कमरे में झाडू लगाने आई तब भी वो टेबल पर बैठा पढ़ाई करता रहा। पढ़ाई तो क्या खाक होती। बस रात का ड्रामा ही आँखों के सामने घूमता रहा। सामने खुली किताब में भी भाभी का संगमरमरी बदन उनकी दूध सी सफेद बेल सी चूचियां और पाव सी चूत ही नजर आ रही थी।
बाबू जरा पैर हटा लो झाड़ू देनी है।
छोटे ठाकुर चौंक कर हकीकत की दुनिया में वापस आये। देखा आशा कमर पर हाथ रखे पास खड़ी है। वो खड़ा हो गया और आशा झुक कर झाड़ू लगाने लगी। वो उसे यूं ही देखने लगा। आशा का रंग गेंहुआ अपने बाप बल्लू के जैसा, और भरा भरा बदन अम्मा के जैसा। तीखे नाक नक्श । बडे़ ही साफ सुथरे ढंग से सज संवर कर रहती थी। आज से पहले मैंने उस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया था। वो आती थी और अपना काम कर के चली जाती थी। पर आज की बात ही कुछ और थी। चुदाई की ट्रेनिंग पाकर एक रात में ही उसका नजरिया बदल गया था। अब वो हर औरत को चुदाई के नजरिये से देखने लगा था। उसे पता था कि आशा की गोरी चिट्टी मुटल्ली अम्मा बेला बड़े ठाकुर से जम के चुदवाती है हो सकता है ये भी चालू हो। आशा लाल हरी साड़ी पहने हुई थी जिसका पल्लू छाती पर से लाकर कमर में दबा लिया था। छोटा सा पर गहरे गले का चोलीनुमा ढीला ब्लाउज उसकी चूचियों को संभाले हुए था। जब वो झुक कर झाडू लगाने लगी तो ब्लाउज के गहरे गले से उसकी गोल गोल बेल सी चूचियां साफ दिखाई दे रही थी। छोटे ठाकुर का लण्ड फनफना कर तन गया। रात वाली ठकुराइन भाभी की चूचियां मेरे दिमाग में कौंध गई। तभी आशा ने नजर उठाई तो छोटे ठाकुर को एक टक घूरता पाकर उसने एक दबी सी मुस्कान दी और अपना आंचल संभाल कर चूचियों को छुपा लिया। अब वो छोटे ठाकुर की तरफ पीठ कर के टेबल के नीचे झाडू लगा रही थी। उसके चूतड़ तो और भी मस्त थे। गोल बड़े बड़े और गद्देदार। छोटा ठाकुर मन ही मन सोचने लगा कि इसके गद्देदार चूतड़ों पर लण्ड रगड़ने और चूचियों को मसलने में कितना मजा आएगा। बेखयाली में उसका हाथ तन्नाए हुए लण्ड पर पहुंच गया और पाजामे के ऊपर से ही उसे सहलाने लगा। तभी आशा अपना काम पूरा कर के पलटी और छोटे ठाकुर की हरकत देख कर मुंह पर हाथ रख कर हंसती हुई बाहर चली गई। छोटा ठाकुर झेंप कर कुर्सी पर बैठ पढ़ाई करने की कोशिश करने लगा।
जब आशा काम कर के चली गई तब ठकुराइन ने खाने के लिए बुलवा भेजा। जय डाईनिंग टेबल पर आ गया। ठकुराइन भाभी ने खाते समय पूछा-
“क्यों छोटे , आशा के साथ कोई हरकत तो नहीं की।”
वो अचकचा गया-
“नहीं तो। कुछ बोल रही थी क्या?”
ठकुराइन –
“नहीं कुछ खास नहीं। बस कह रही थी कि आप के देवर छोटे ठाकुर अब जवान हो गये हैं जरा खयाल रखना।”
वो कुछ नहीं बोला और चुपचाप खाना खा कर अपनी स्टडी टेबल पर आ कर पढ़ने बैठ गया। ठकुराइन ने हवेली का काम निबटवा कर नौकरों की बाकी के आधे दिन की छुटटी कर दी कि ठाकुर साहब हैं नहीं सो कोई खास काम शाम को है नहीं सो तुम लोग भी आराम करो। सबको भेज भाज कर ठकुराइन कमरे में आई और छोटे ठाकुर के सामने उसकी स्टडी टेबल पर बैठ गई और पैर सामने कुर्सी पर बैठे छोटे ठाकुर की दोनो जॉघों पर रख लिये। उसके हाथ से किताब लेते हुए बोली-
“ज्यादा पढ़ाई मत कर। सेहत पर असर पड़ेगा।”
और अपनी एक आंख दबा कर कनखी मार दी। फिर छोटे ठाकुर की दोनो टॉगों के बीच में अपने पैर के अंगूठे से उसका लण्ड सहलाते हुए बोली-
“छोटे ठाकुर तेरा लण्ड तो बहुत जोरदार है। कितना मोटा लम्बा और सख्त। रात जब तुने पहली बार मेरी चूत में डाला तो ऐसा लगा कि ये तो मेरी बुर को फाड़ ही डालेगा। सच कितना अच्छा होता अगर एक रात मैं बारी बारी से दोनों ठाकुरों के लण्ड अपनी चूत में लेकर मजे लेती और देखती दोनो ठाकुरों से एक साथ चुदवाकर कि कौन ऊंचा कलाकार है ।”
जय के हाथ उनके पैरों को सहलाते हुए धीरे धीरे उनकी पिण्डलियों की तरफ बढ़ने लगे उनका लंहगा ऊपर सरकने लगा।
“तुम कितनी अच्छी हो भाभी”
वो बोला- “मुझे अपनी चूत देकर चोदना सिखाया।”
धीरे धीरे छोटे ठाकुर ने ठकुराइन का लंहगा उनके घुटनों तक ऊपर सरका दिया और उनकी पिण्डलियों को दोनों हाथों से सहलाने हथेलियों में दबोचने लगा। बीच बीच में उत्तेजित हो उनकी गोरी गोरी गुलाबी पिण्डलियों पर दॉत भी गड़ा देता था। धीरे धीरे ठकुराइन का लंहगा उनकी के जांघों तक ऊपर सरककर पहुंच गया और जयठाकुर उनकी मोटी मोटी केले के तने जैसी चिकनी गोरी गुलाबी जांघों पिण्डलियों को दोनों हाथों से सहलाने हथेलियों में दबोचने लगा। बीच बीच में उत्तेजित हो जहॉ तहॉ मुँह भी मार रहे थे। फिर छोटे ठाकुर मारे उत्तेजना के खड़े हो गये और ठकुराइन के रसीले होंठों को अपने होंठों में दबाकर चूसने लगे और उनका लंहगा अपने हाथों से उनकी के जांघों से ऊपर कर उनकी चूत और चूतड़ों को नंगा करने की कोशिश करने लगे ठकुराइन ने टेबिल पर बैठ बैठे बारी बारी से दायें बायें झुककर अपने बड़े बड़े भारी चूतड़ों को उठा कर उनकी मदद की अब उनका लंहगा उनकी कमर तक सिमट गया था आज ठकुराइन नीचे कुछ भी नहीं पहने हुई थी और अब वो कमर के नीचे बिलकुल नंगी थी। उनके बड़े बड़े गद्देदार गुलाबी चूतड़ गोरी गुलाबी रेशमी पावरोटी सी फूली चूत मोटी मोटी नर्म चिकनी गोरे गुलाबी जांघें और पिण्डलियां देख कर छोटे ठाकुर उत्तेजना के मारे जहॉ तहॉ नोचने हथेलियों में दबोचने मुँह मारने लगे। ठकुराइन के मुँह से सिसकारियॉं छूटने लगी। ठकुराइन ने छोटे ठाकुर का सर दोनों हाथों में थाम उसका मुँह अपने उभरे सीने पर रख दिया। छोटे ठाकुर अपने हाथ उनकी गदराई पीठ पर कस कर उनके बड़े बड़े उरोजों पर अपना चेहरा रगड़ने लगे। छोटा ठाकुर एक हाथ पीछे ले जाकर उनके ब्लाउज के बटन खोलते हुए दूसरा हाथ ब्लाउज के अन्दर डाल उनके उरोज सहलाने लगा और निपल पकडकऱ मसलने लगा। फिर एक हाथ से उरोज सहलाते हुए दूसरा हाथ नीचे ले जाकर ठकुराइन का विशाल चूतड़ पकड़ लिया।ठकुराइन से रहा नहीं गया तो छोटे ठाकुर के नारे को ढीला कर के ऊपर से ही हाथ घुसा कर छोटे ठाकुर के फौलादी लण्ड को सहलाने लगी फिर अपनी दोनों मोटी मोटी नर्म चिकनी जांघों के बीच दबाकर मसल़ने लगी अब छोटे ठाकुर के होंठ और हाथ उनके सारे गदराये जिस्म की ऊँचाइयों व गहराइयों पर पहुँच रहे थे और सहला टटोल दबोच रहे थे उनके गदराये जिस्म पर जॅहा तॅहा मुँह मार रहे थे और ठकुराइन धीरे धीरे टेबिल के पीछे की दीवार से सटती जा रही थी धीरे धीरे वे पूरी तरह सट गयीं, केवल दोनों टांगे छोटे ठाकुर की कमर से लपेट ली थी। छोटे ठाकुर उनके गदराये जिस्म को दोनों हाथों मे दबोचकर उनके ऊपर झुककर बड़ी बड़ी चूचियों और सारे गदराये जिस्म की ऊँचाइयों व गहराइयों पर जॅहा तॅहा मुंह मार रहे थे बीच बीच मे उनके निप्पलो को बारी बारी से होंठों में ले कर चुभला व चूस रहा था। ठकुराइन छोटे ठाकुर का लण्ड अपनी चूत पर रगड़ते हुए बोली –
“टेबिल चुदाई सीखेगा।”
छोटे ठाकुर –
“ये क्या होता है?”
ठकुराइन –
“सीखेगा तब तो जानेगा। इसके बड़े फायदे हैं जैसेकि कपड़े नहीं उतारने पड़ते और यदि किसी के आने की आहट हो तो जल्दी से हट सकते हैं जैसे कुछ कर ही नहीं रहे थे इसे चोरी की चुदाई या फ़टाफ़ट चुदाई भी कहते हैं।”
छोटे ठाकुर –
“तब तो जरूर सीखूँगा।”
ठकुराइन –
“तो जल्दी से आजा।”
छोटे ठाकुर-
“जैसा आप कहें, पर कैसे?”
ठकुराइन ने टेबिल से लगी दीवार से पीठ लगा अपने दोनों पैर मोड़कर टेबिल पर कर लिए और दोनों हाथों से अपनी चूत की फांके फैलायी और बोली–
“ऐसे।”
बसछोटे ठाकुर ने अपने फौलादी लण्ड का सुपाड़ा उस पर धरा। ठकुराइन ने अपने हाथ से उसका लण्ड पकड़कर निशाना ठीक किया। ठकुराइन की मोटी मोटी नर्म चिकनी गोरी गुलाबी जांघों भारी नितंबों के बीच मे उनकी गोरी पावरोटी सी फूली चूत का मुँह खुला था। चूत के मुँह की दोनों फूली फांको के ऊपर धरा अपना फौलादी लण्ड का सुपाड़ा देख छोटे ठाकुर अपना सुपाड़ा ठकुराइन की चूत पर रगड़ने लगे।
ठकुराइन से जब उत्तेजना बरदास्त नहीं हुई तो चिल्लाई “अबे जल्दी लण्ड डाल।”
और तभी उत्तेजना में आपे से बाहर हो छोटे ठाकुर ने झपट़कर दोनों हाथों मे बड़ी बड़ी चूचियाँ दबोच झुककर उनके गुलाबी होंठों पर अपने होंठ रखकर लण्ड का सुपाड़ा चूत मे धकेला सुपाड़ा अन्दर जाते ह़ी उनके मुँह से निकला “उम्म्म्म्म्म्महहहहहहहहहहह शाबाश छोटे अब धीरे धीरे बाकी लण्ड भ़ी चूत मे डालदे।”
वो बड़ी बड़ी चूचियों को जोर जोर से दबाने गुलाबी होंठों को चूसने लगा। ठकुराइन की चूत बैठे होने से बेहद टाइट लग रही थी पर जैसे लण्ड अन्दर खिचा जा रहा हो या चूत अपने मुंह की दोनों फूली फांको मे लण्ड दबाकर उसे अन्दर चूस रही हो। पूरा लण्ड अन्दर जाते ह़ी ठकुराइन के मुँह से निकला-
“आहहहहहहहहहहहहहहह आह वाहहहह छोटे शाबाश अब लगा धक्के।”
छोटे ठाकुर ने थोड़ा सा लण्ड बाहर निकालकर वापस धक्का मारा दो तीन बाहर ह़ी धीरे धीरे ऐसा किया था कि ठकुराइन –
वाहहहह बेटा शाबाश अब लगा धक्के पे धक्का धक्के पे धक्का और जोर जोर से लगा धक्के पे धक्का । चोद ठकुराइन की चूत को अपने लण्ड से। मेरी चूचियों और जिस्म का रस चूस और जोर जोर से चोद।”
छोटे ठाकुर ने ठकुराइन की मोटी मोटी नर्म चिकनी गोरी गुलाबी जांघों को दोनों हाथों मे दबोचकर उनके ऊपर झुककर बड़ी बड़ी गुलाबी चूचियों के साथ खेलते और सारे गदराये जिस्म की ऊचाइयों व गहराइयों पर जॅहा तॅहा मुंह मारते हुए जोर जोर से धक्के पे धक्का लगाकर चोदने लगे। हर धक्के पे उनके मुंह से आवाजें आ रही थीं आह आहहहह आहहहहहहहहहहहहहहह।
ठकुराइन ने अपनी दोनों टांगे मोड़कर टेबिल पर कर रखी थी जिससे उनकी संगमरमरी जांघें छोटे ठाकुर सीने की सीध में और पावरोटी सी फूली चूत बड़े बड़े गद्देदार गुलाबी भारी चूतड लण्ड की सीध में हो गये थे जिन्हें देख देख जय पगला रहा था साथ ही उसका लण्ड भी ठकुराइन की चूत की जड़ तक धॉंसकर जा रहा था हर धक्के पे उनकी चिकनी संगमरमरी जांघें और भारी चूतड़ छोटे ठाकुर की जांघों और लण्ड के आस पास टकराकर गुदगुदे गददे का मजा दे रहे थे जब ठकुराइन के थिरकते हुए बड़े गद्देदार गुलाबी भारी चूतड़ों से छोटे ठाकुर की जांघें टकराती तो लगता कोई तबलची तबले पर थाप दे रहा हो। पूरे कमरे में चुदाई की थप थप फट फट गूंज रही थी। छोटे ठाकुर दोनों हाथों मे उनकी संगमरमरी जांघें और भारी चूतड़ों को दबोचकर उनकी गुलाबी मांसल पिण्डलियों पर जॅहा तॅहा कभी मुंह मारते कभी दांतों मे दब चूसते हुए चोदने लगा ठकुराइन भी अपने चूतड़ हिला हिला कर गोरी पावरोटी सी फूली चूत मे जड़तक लण्ड धॅंसवाकर चुदवा रही थी। करीब आधे घ्ंटे तक वो पागलों की तरह उनके गदराये गोरे गुलाबी नंगे जिस्म को दोनों हाथों मे दबोचकर उनके ऊपर झुककर बड़ी बड़ी गुलाबी चूचियों के साथ खेलते तो कभी दांतों मे दबा निप्पलो को तो कभी बारी बारी से होंठों में ले कर चुभलाते व चूसते हुए और सारे गदराये जिस्म की ऊचाइयों व गहराइयों पर संगमरमरी जांघों और भारी चूतड़ों पर जहॉ तहॉं मुंह मारते हुए चोदता रहा। ठकुराइन बार बार ललकार रही थी-
“चोद ले छोटे राजा चोद ले अपनी भाभी की आज फाड़ डाल इसे। शाबाश मेरे शेर। मजा ले ले जवानी का। और जोर से छोटे राज्जा और जोर से। फाड़ डाल तू आज मेरी तो। नीचे से अपने चूतड़ उछाल उछाल कर चुदवाती रही कि अचानक ऐसा लगा जैसे जिस्म ऐठ रहे हों तभी ठकुराइन ने नीचे से जोर से अपने चूतड़ों को उछाला और छोटे ठाकुर ने अगला धक्का मारा कि उनके जिस्मों से जैसे लावा फूट पडा़ । ठकुराइन के मुँह से जोर से निकला- “उहहहहहहहहहहह ।”
नीचे से अपनी कमर और चूतड़ों का दबाव डालकर अपनी चूत मे जड़ तक लण्ड धॉंसकर झड रही थी और वो भी उनके गदराये जिस्म को बुरी तरह दबाते पीसते हुए दोनों हाथों मे उनके चूतड़ों को दबोचकर अपने लण्ड पर दबाते हुए चूत की जड़तक लण्ड धॉंसकर झड रहा था। जब दोनों झड चुके तब भी बुरी तरह चिपटे हुए थे ।दोनों उसी तरह से चिपके हुए पलंग पर लेट गए और थकान की वजह से सो गए।
भाग 4
नतीजा आशा की अक्लमन्दी का
छोटे ठाकुर बड़ी ठकुराइन के साथ नंग धडंग एक दूसरे से लिपट कर सो रहे थे। जब छोटे ठाकुर की आंख खुली तो देखा अन्धेरा हो गया था। जय ने धीरे से ठकुराइन का हाथ अपने ऊपर से हटाया और टेबल लैम्प आन कर दिया ताकि भाभी की नींद में खलल ना पडे। फिर वापस पलंग पर ठकुराइन के पास आकर बैठ गया। ठकुराइन अब हाथ पैर फैला कर नंगी चित्त पड़ी थी। वो उनके खूबसूरत संगमरमरी गोरे गुलाबी बदन को निहारने लगा। ठकुराइन की मस्त बड़ी बड़ी दूध सी सफेद गुलाबी चूचियां तनी हुई थी। । चिकना भरा भरा बदन। पतली कमर। फैले हुए बड़े बड़े गद्देदार गुलाबी चूतड़़। केले के तने सी मोटी मोटी नर्म चिकनी गोरी गुलाबी कसी हुई जांघें और पिण्डलियां और अपना पूरा जलवा दिखाती हुई ठकुराइन की गोरी गुलाबी रेशमी पावरोटी सी फूली रसीली चूत। छोटे ठाकुर से और रहा नहीं गया। उसने झुक कर भाभी की प्यारी चूत का चुम्बन ले लिया। फिर उठ कर ठकुराइन भाभी की गदराई जांघों के बीच आ गया। हौले से भाभी की जांघों को और फैलाया और जीभ से धीरे धीरे भाभी की चूत को सहलाने लगा। चुदक्कड़ औरतें नींद में भी चुदवाने के मूड में रहती हैं सो ठकुराइन ने नींद में ही अपने आप अपनी जांघें फैला दी। अब उनकी गुलाबी चूत का मुंह थोडा सा खुल गया था। ठकुराइन की मस्ती देख कर छोटे ठाकुर से और रहा नहीं गया। उनका ठाकुरी लण्ड अबतक तन कर फन फनाने लगा था। वो घुटनों के बल झुक गया और अपना सुपाड़ा ठकुराइन की चूत के दरवाजे पर रख कर रगड़ने लगा। चुदक्कड़ ठकुराइन ने नींद में ही अपनी जांघें और फैलायी छोटे ठाकुर ने एक अपने फौलादी सुपाड़े से चूत के दाने को सहलाना शुरू कर दिया। ठकुराइन शायद सपने में भी चुदवा रही थी सो सोते सोते ही कमर हिलाने लगी। छोटे ठाकुर ने हल्का सा धक्का दिया। ठकुराइन की चूत तो अपना रस छोड़ ही रही थी। घप से सुपाड़ा अन्दर दाखिल हो गया। फिर वो ठकुराइन के ऊपर सीधा होकर लेट गया और उनकी एक निपल को मुंह में लेकर चूसते हुए कस कर कमर का धक्का लगाया। उसका पूरा का पूरा लण्ड दनदनाता हुआ ठकुराइन की चूत के अन्दर चला गया।
ठकुराइन चौंक कर उठ गई और बोली –
“कौन है।”
छोटे ठाकुर ने ठकुराइन के होठों को चूमते हुए कहा आपकी चूत का दीवाना देवर।
ठकुराइन ने मुस्कुराते हुए जय को बांहों में जकड़ लिया और बोली –
“अरे वाह रे चुदक्कड़ ठाकुर। ये ठाकुर साले एक ही दिन में पूरे एक्सपर्ट हो जाते हैं। मुझे सोते सोते ही चोदना शुरू कर दिया। कल तक तो यह भी नहीं मालूम था कि अपने आठ इंच के लण्ड का करना क्या है।”
जय ठाकुर ने भी ठकुराइन के सेब से गालों को काटते हुए जवाब दिया –
“यह तो तुम्हारी मेहरबानी है भाभी वरना मेरी जवानी यूं ही निकल जाती। क्या करूं भाभी तुम्हारी मस्त नंगी जवानी को देख कर रहा नहीं गया। बुरा नहीं मानना।”
ठकुराइन ने छोटे ठाकुर को और कस कर जकड़ कर नीचे से चूतड़ उछालते हुए जवाब दिया –
“अरे नहीं छोटे राजा। बुरा काहे मानूंगी।मजा तो मुझे भी बहुत आ रहा है।”
ठकुराइन का जवाब पाकर जय बहुत खुश हुआ उसने जोश में एक झटके से लण्ड बाहर निकाला और ठकुराइन की चूत में जड़ तक धांस दिया फिर कमर हिला हिला कर चोदते हुए पूछा भाभी अगर बड़े ठाकुर इस चुदायी के बारे में जान जाएं तो क्या हो।
ठकुराइन ने पूरे जोश में चूतड़ उठा उठा कर चुदाते हुए जवाब दिया –
“जब तूने पूछ ही लिया है तो चल तुझे एक राज की बात बताती हूँ। बड़े ठाकुर जानते हैं।”
“क्या मतलब?”
“मतलब ये क़ि जब हमारी शादी हुई सुहाग रात में बड़े ठाकुर ने प्यार मोहब्बत की बातों के बाद मुझे बाहों में भर पहले धीरे धीरे कपड़ों के ऊपर से ही मेरा जिस्म सहलाते रहे मैं झूठमूठ ना ना कर रही थी फिर धीरे धीरे जैसे जैसे हमारा उत्तेजना बढ़ी उन्होंने मेरे ना नुकुर के बावजूद मेरे कपडे़ साड़ी ब्लाउज ब्रा पेटीकोट उतार डाले और मेरे स्तनों के साथ खेलने नितंबों जांघों पिण्डलियां को सहलाने दबोचने लगे जब चुप रहने की लाख कोशिश के बावजूद मारे उत्तेजना के मेरी सिसकियॉं तेज होने लगी तो उन्होंने हौले से मेरी जांघों को फैलाकर अपने घोंड़े जैसे लण्ड का फौलादी सुपाड़ा मेरी बुरी तरह से पनिया रही फूल सी चूत पर रखकर रगड़ा तो मुझसे चूतड़ उठाये बगैर रहा नहीं गया बड़े ठाकुर समझ गये और मेरी ना नुकुर के बावजूद तीन चार जोरदार धक्कों में अपना पूरा घोंड़े जैसा लण्ड मेरी पनियाई चूत में धांस दिया और चोदने लगे। थोड़ी ही देर में हम दोनों जान गये कि दोनो ही शौकीन मिजाज हैं उन्होंने यह बात मुझपर जाहिर कर दी और समझाया कि उन्हें ऐसी ही शौकीन मिजाज पत्नी चाहिए थी क्योंकि वो खुद शौकीन मिजाज हैं और उन्हें वेसी ही औरतें पसन्द हैं हवेली की तमाम खुबसूरत नौकरानियॉ उनसे चुद चुकी हैं और जबतब चुदती रहती हैं। उन्हें नयी नयी चूतें और चूतें बदल बदल कर चोदने का शौक है। इससे जो चूतें वो सालों से चोद रहे हैं उन्हें भी जब कभी चोदते हैं तो वो नयी चूत का मजा देतीं हैं। इतना शानदार तजुर्बे की सुनने के बाद मैं उनसे पूरी तरह खुल गयी थी सो इसी तरह जोर जोर से चूतड़ उछाल कर चुदाते हुए पूछा –
“मेरे लिये क्या हुक्म है ठाकुर राजा मैं क्या करूँ कि जब भी आप मेरी चूत चोदें तो मुझे भी आपका लण्ड नया लगे और हमदोनों को भरपूर मजा आये।”
– ठाकुर साहब बोले –
“मेरी इन तमाम खुबसूरत नौकरानियों के के मुस्टंडे आदमी भी तो हमारे नौकर हैं वे सब आपकी नजर है जैसे चाहे इस्तेमाल करें। फिर आप हमारी ठकुराइन हैं शेरनी हैं जब चाहें जहॉ चाहें मुँह मार लें मुझे क्या एतराज हो सकता है।”
ठकुराइन ने अपनी टांगों को ऊपर कर के जय ठाकुर की कमर पर कस आगे बताया-
“चालाक ठाकुर ने कह तो दिया कि चुदवा लो पर कहॉ से और कैसे शुरू करें यह नहीं बताया। मैंने भी मारे हेकड़ी के नहीं पूछा । तभी तू आया मेरी नजर तुझ पर पड़ी और मैंने तुझे अपना पहला शिकार बना लिया ।....”
जय ठाकुर जोर से धक्का मारते हुए बोले –
“पहला और आखरी अब आपको और शिकार तलाश करने की कोई जरूरत नहीं बन्दे का लण्ड आपकी खिदमत में हमेशा तैनात रहेगा।”
ठकुराइन ने अपनी दोनों टांगे उठाकर जय के कंध़ों पर रख दी और चूतड़ उछालते हुए समझाया –
“भूल गया बड़े ठाकुर के तजुर्बे वाली बात लण्ड और चूतें बदल बदलकर इस्तेमाल करने से उनका नयापन बना रहता है। लेकिन मेरा पहला शिकार वो भी कॅुवारा लण्ड होने के कारण मेरी चूत में तेरा हिस्सा रूपये में एक आने भर हमेशा रहेगा।”
“ क्या खुब याद दिलाया भाभी मैं तो भूल ही गया था। मेरा हिस्सा पक्का करने का शुक्रिया।”
ठकुराइन कोई बात नहीं मेरी मानोगे तो ऐसे ही खुब मजे करोगे इसी बात पर चल आसन बदलते हैं।
ठकुराइन की बात सुन जय बहुत खुश हुआ बोला ष्ठीक है।
और फट से लण्ड बाहर निकाल लिया ठकुराइन पलंग पर पेट के बल लेट गई और अपने घुटनों के बल होकर अपने चूतड हवा में उठा दिए। देखने लायक नजारा था। ठकुराइन के बड़े बड़े गोल गोल गद्देदार गोरे गुलाबी चूतड़ मोटी मोटी नर्म चिकनी गोरी गुलाबी जांघें उनके बीच में गोरी गुलाबी रेशमी पावरोटी सी फूली चूत छोटे ठाकुर की आंखों के सामने लहरा रही थी।जोश में आ छोटे ठाकुर ने अपना फौलादी लण्ड एक ही झटके में ठकुराइन की चूत में जड़ तक धांस दिया ठकुराइन जोर जोर से चूतड़ों से धक्का मार रहीं थीं। पूरे कमरे में फचाफच का मधुर संगीत गूंजने लगा। छोटे ठाकुर ठकुराइन की गदराई पीठ पर लेट दोनो बगल से हाथों को डाल उनकी बड़ी बड़ी चूचियां थाम लीं हार्न की तरह दबाते हुए धक्के मारकर चोदने लगा। उसने अपनी रफ्तार बढा दी। अब वो हुमच हुमच कर शॉट लगा रहा था। पूरा का पूरा लण्ड बाहर खींच कर झटके से अन्दर डालता तो ठकुराइन जैसी चुदक्कड़ औरत की भी चीख निकल जाती। छोटे ठाकुर का लावा अब निकलने ही वाला था। उधर ठकुराइन भी अपनी मंजिल के पास थी। दोनों की सांस फूल रही थी। ठकुराइन छोटे ठाकुर को कस कर जकडे़ हुई थी। उनकी चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था जिससे फच फच की आवाज और तेज हो गई थी। ठकुराइन हांफते हुए छोटे ठाकुर की गर्दन में बांहें डाल कर अपने से चिपकाते हुए बोली –
“मैं तो गई छोटे राजा। तुम्हारी ठकुराइन भाभी झड़ गई। उई मां क्या जालिम लौंडा है तुम्हारा। चोद डाला साले दोनों ठाकुरों ने मुझे। मैं गईईईईई*र्ई*र्ईईईईईई।”
और ठकुराइन छोटे ठाकुर से चिपक कर शान्त हो गई। छोटा भी और नहीं रूक पाया आखिर ज्वाला मुखी फूट पड़ा और ठकुराइन को चिपका कर उनकी चूत में झड़ गया।
कुछ देर तक दोनो यूंही पडे रहे। फिर ठकुराइन छोटे ठाकुर को अपने ऊपर से हटा कर पलंग से उतर कर खड़ी हो गई। झुक कर अपनी चूत देखी तो एक आह सी निकल गई। छोटे ठाकुर को अपनी चूत दिखाती हुई बोली –
“देखो छोटे राजा क्या हाल किया है तुमने मेरा। कितनी सूज गई है मेरी चूत।”
छोटे ठाकुर ने देखा सचमुच ठकुराइन भाभी की चूत डबल रोटी जैसी सूज गई थी। उसने लेटे लेटे ही भाभी के चूतडों को पकड़ कर उन्हें अपने पास खींचा और चूत का चुम्बन ले लिया। भाभी ने नखरे दिखाती हुई बोली-
“अब छोड़ मुझे। रात भर भूखे ही रहना है क्या। कुछ खायेगा नहीं तो कमजोर हो जायेगा। मालूम है इतनी चुदाई करने के बाद ठीक से खाना खाना चाहिए। तभी जवानी का असली मजा आता है। मैं खाना गरम करती हूँ।”
जय ठाकुर जब मुहॅ हाथ धो कर आया तब तक ठकुराइन ने खाने की पूरी तैयारी कर ली थी। ठकुराइन ने झटपट खाना परोसा और दोनों ने एक दूसरे को खाना खिलाया। जय जब सोने के कमरे में पहुंचा तो देखा ठकुराइन ने पूरी तैयारी कर ली थी। और कमरे में रूम स्प्रे भी कर दिया था। हल्की हल्की रोशनी में पूरा माहौल सेक्सी लग रहा था।ठकुराइन ने झीनी सी नाईटी पहनी हुई थी जिस में से उनका मंसल बदन पूरा का पूरा नजर आ रहा था। छोटे ठाकुर ने आगे जाती बड़ी ठकुराइन के पीछे से दोनों बगलों में हाथ डालकर उनके दोनों बड़े बड़े उरोज थाम अपना लण्ड उनके थिरकते बड़े बड़े गुलाबी गद्देदार चूतड़ों की दरार में दबाते हुए अपनी बांहों में जकड़ लिया और कस कर गालों को चूसने लगा। ठकुराइन ने अपने मुंह हटाते हुए कहा –
“गाल पर नहीं। निशान पड़ जाएगा।”
छोटे ठाकुर ने बिस्तर पर बैठ ठकुराइन की कमर में हाथ डाल कर अपनी ओर खींचा तो उन्होंने अपना बदन ढीला छोड़ उसकी गोद में अधलेटी सी हो गई। छोटे ठाकुर बड़ी ठकुराइन की नाईटी को खोल कर उनकी बड़ी बड़ी दूध सी सफेद गुलाबी चूचियॉं सहलाने लगे। फिर ठकुराइन करवट ले कर लेट गई। जिससे अधखुली नाईटी लगभग पूरी तरह हट गयी । छोटे ठाकुर ने उनके पीछे से उनके बड़े बड़े गुलाबी गद्देदार चूतड़ों की दरार में लण्ड दबा लिया और पीछे से दोनों बगलों में हाथ डालकर उनके दोनों बड़े बड़े उरोज थाम लेट गये। वो एक हाथ से चूचियां सहला दबा रहा था और दूसरे हाथ से उनकी चूत को सहलाने लगा। ठकुराइन अपना एक हाथ पीछे करके उसका लण्ड सहलाने लगी कुछ देर बाद बोली –
“क्या छोटे क्या अभी और जान बाकी है।“
छोटे ठाकुर बोले –
“भाभी आपकी चूत के लिए तो मेरा लण्ड हमेशा तैयार है।
ठकुराइन उसकी तरफ घूमते हुए बोली –
“तो फिर आ जा मोर्चे पर।”
ठकुराइन के उसकी तरफ घूमने से उनकी बड़े बड़े बेलों सी चूचियां छोटे ठाकुर के मुंह के पास झूल गयी। वो बार बार उन्हें मुंह में लेता और छोड़ता। पर कैसे और कब दोनों सो गए पता नहीं ।

सुबह जब ठकुराइन ने छोटे ठाकुर को उठा कर चाय दी तो आठ बज चुके थे। बोली –
“जल्दी से उठ कर कपड़े पहन ले। आशा आती ही होगी बाकी नौकरों को मैंने छुट्टी दे दी है क्योंकि बड़े ठाकुर आज नहीं कल वापस आ रहे हैं। है न खुशखबरी।”
छोटे ठाकुर ने बड़ी ठकुराइन को पकड़कर अपने पास लिटा लिया और एक गरमागरम चुम्बन ले कर बोले –
“तब तो आप बस मेरे पास ही रहो। देखो ना सपने में भी तुम ही आती रही और लण्ड देव फिर से फड़ फड़ा रहे हैं ।
ठकुराइन –
“पर आशा।”
छोटे ठाकुर –
“आने दो उसे भी देख लूँगा।”
ठकुराइन किसी तरह अपने को छुड़ा कर खड़ी हुई और जाते हुए बोली –
“लगता है कि तुम्हारे लिए परमानेन्ट चूत का इन्तजाम जल्दी ही करना होगा। खैर वो भी कर ही दूंगी। पर अभी छोड़ मुझे। वादा कि आशा के जाते ही मैं आ जाऊॅगी।”
“भाभी आशा को भी पटा लो ना। फिर साथ साथ मजे लेंगे बड़ी मस्त है।”
“शैतान कहीं के। एक चूत क्या मिली चारों तरफ नजर डालने लगे। वैसे तुम्हारी बात में दम है। वह लगती तो चालू है और आसानी से पट सकती है। मौका देख कर कोशिश करूंगी। पर आज तो बस हम और तुम दूसरा और कोई नहीं”
- कहते हुए ठकुराइन कमरे के बाहर चली गई।
ठकुराइन के जाने के बाद छोटे ठाकुर उठ कर बाथरूम में घुस गये। नहा कर तौलिया लपेट कर ही बाहर निकले तो देखा कि आशा बिस्तर ठीक कर रही है। चादर पर पड़े लण्ड और चूत के पानी के धब्बे रात की कहानी सुना रहे थे। आशा झुक कर निशान वाली जगह को सूंघ रही थी। छोटे ठाकुर की तो ऊपर की सांस ऊपर और नीचे की सांस नीचे रह गई। छोटे ठाकुर के कदमों की आहट सुन कर आशा उठ गई और उनकी तरफ देखती हुई अदा से मुस्करा दी। फिर इठलाते हुए उनके पास आई और आंख मार कर बोली लगता है रात देवर भाभी ने जम कर खाट कबड्डी खेली है।
छोटे ठाकुर हिम्मत कर के बोले –
“क्या मतलब।”
वह छोटे ठाकुर से बिल्कुल सटती हुई बोली –
“इतने भोले भी मत बनो। मैं कोई बेवकूफ नहीं सब समझती हूँ तुम भी सब समझ रहे हो और ये चादर तो रात की सारी कहानी सुना ही रही है। अब इनकी कहानी मैं सुनाउंगी सबको।”


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