मेरी बीवी रजिया
1994 के आसपास की.. अभी ज्यादातर उत्तर प्रदेश के गांव में बिजली नहीं आई थी लोबिया लालटेन से अपने घर की रोशनी जलाते थे और अक्सर एक जगह से दूसरी जगह साइकिल से जाया करते थे

रात के 11:00 बज रहे थे गुप्त अंधेरा था जंगल में छोटे-छोटे जानवरों की आवाज़ आ रही थी
मैं भी बहुत घबरा रहा था न जाने क्यों लग रहा था शायद आज जिंदगी बदल जाएगी
मैं धीरे-धीरे जंगल में आगे बढ़ा मेरे हाथ में ना टॉर्च था ना किसी तरह की लाइट बस चांद के उजाले में अपना रास्ता ढूंढता हुआ मैं आगे बढ़ रहा था
मेरा नाम नवाज है और मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव में रहता हूं
मेरी उम्र तकरीबन 34 साल की हो चुकी है पुश्तैनी जमीन है थोड़ी जिस पर मैं खेती करता हूं और समय आने पर दूसरे के खेतों में मजदूरी भी करता हूं इसी से हमारा गुजारा चलता है
मैं शादीशुदा हूं मेरी बीवी है जिसका नाम है रजिया एक बेटी है जो अभी 6 साल की है बहुत प्यारी है मुझे जान से भी ज्यादा
आज जब मैं करीब 8:00 बजे अपने घर से खेत की तरफ निकलने लगा नहर से पानी खेत में डालने के लिए
.. उस वक्त काफी अंधेरा था मैं खेत की तरफ जा रहा था कि तभी वहां वहां से कोई दो इंसान साइकिल पर बड़ी तेजी से जा रहे थे
हम एक दूसरे को नहीं पहचान पा रहे थे क्योंकि अंधेरा बहुत था मगर देखने से लगता था मानो कोई भारी भरकम शरीर वाला आदमी है और दूसरा कोई 18 19 साल का जवान लड़का
कुछ नई बात नहीं थी अक्सर रात में साइकिल वाले बगल से गुजर जाया करते थे
मगर यह दोनों जैसे ही मेरे बगल से गुजरे उनकी एक बात मेरे कान में आई जिसने मुझे धोखा दिया
वह भारी व्यक्ति जवान लड़के से बोला
….. देखना आज जंगल में रजिया के कैसे मैं गांड फाड़ता हूं
मैं इतना ही सुन पाया और साइकिल दूर चली गई

मुझे बड़ी हैरानी हुई क्योंकि रजिया तो मेरी बेगम का नाम है और अपने गांव में मैं किसी दूसरी रज़िया नाम की औरत के बारे में नहीं जानता हूं
मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं इस बात के बारे में किस तरह सोचु
मगर वह कहते हैं ना एक बार दिमाग में कीड़ा आ गया तो आप उसे चाह कर भी नहीं निकाल सकते
मेरे दिमाग में अचानक से रजिया को लेकर गंदे गंदे ख्याल आने लगे
मुझे लगा मुझे घर जाकर देखना चाहिए कि मामला क्या है
मैं आधे रास्ते से अपने घर की तरफ वापिस आने लगा करीब 40 मिनट बाद मैं अपने घर के पास पहुंचा
मैं घर के अंदर गया
मेरा दिल बहुत जोरों से धक-धक कर रहा था
मुझे लग रहा था कि अगर मैंने आज रजिया को किसी गैर आदमी के साथ देख लिया तो शायद मैं यह सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाऊंगा
मैं एक-एक कदम बहुत शांति से रख रहा था
मगर घर में घुसते वक्त मुझे ना वह साइकिल दिखी ना किसी तरह का कोई और एहसास हुआ
मेरे दिल को थोड़ी तसल्ली आई और मैं अपने बेडरुम की तरफ जाने लगा
बेडरूम में जाकर देखा तो बिल्कुल अंधेरा था मैंने लालटेन जला या और देखा वहां मेरी बेटी चैन की नींद सो रही है
मुझे भी सुकून आया और खुद पर हंसी भी आई कि देखो सब ठीक है .. बेटी को सुलाकर शायद नहाने या बाथरूम गई होगी और मैं कैसे उस पर शक कर रहा था..
मैं बेड रूम से बाहर आकर रजिया को ढूंढने लगा.. मैंने उसको बाथरूम में शौचालय में और छत पर ढूंढा अगर वह मुझे कहीं ना मिली
मेरा दिल अब वापिस थोड़ा-थोड़ा बैठने लगा था मैंने पूरा घर छान मारा रजिया मुझे कहीं नहीं मिली
मुझे समझ नहीं आ रहा था मैं क्या करूं मैं घर के बाहर आया आसपास भी देखा मगर मुझे कुछ नहीं दिखा

मुझे अब उस लड़के की बात याद आई जिसमें उसने जंगल शब्द का प्रयोग किया था , हमारे गांव के पास एक ही जंगल है मैं बिना सोचे समझे उस जंगल की तरफ चलने लगा.

मैं जंगल में तेजी से अंदर जा रहा था मेरे दिमाग में तरह-तरह के सवाल उठ रहे थे
अगर सच में मैंने रजिया को किसी गैर मर्द के साथ देख लिया तो मैं क्या करूंगा
उस मार दूंगा या खुद को मार लूंगा ये उन दो लड़कों को मार दूंगा जो उसके साथ होंगे
हजार तरह के ख्याल मेरे दिमाग में चल रहे थे और मैं बस जंगल में चले जा रहा था
तभी मुझे किसी की आवाज सुनाई दी..
यह तो रजिया की आवाज थी..

मेरा दिल एक पल के लिए मानो रुक गया
मानो जो मैं नहीं देखना चाहता था आज जिंदगी मुझे वह दिखा कर रहेगी
मैं कमजोर कदमों के साथ उस आवाज का पीछा करने लगा..
और वह आवाज धीरे धीरे मुझे साफ सुनाई देने लगी..

थोड़ी दूर जाने के बाद मुझे रजिया दिखाई दे.. मेरी आंखों में आंसू आ चुके थे.. वक्त बहुत धीरे चल रहा था... मुझे मालूम था आज जो यह होगा शायद वह मेरी जिंदगी बदल देगा
मेरा मन कर रहा था कि मैं अभी चिल्ला दूं और इस सब को रोक दूं रजिया को तलाक दे दो..
मगर मैं रजिया को बहुत प्यार करता था.. उससे एक पल भी दूर नहीं रह सकता था…
और मैं ही नहीं जिस भी मर्द को रसिया मिलेगी उससे एक पल भी दूर नहीं रह सकता... रजिया काम की देवी है..
आपको रजिया के बारे में मैं जरा सा बता दो
रजिया की उम्र करीब 29 साल है मेरी और उसका निकाह करीब 8 साल पहले हो गया था..
शादी की रात ही रजिया ने पहली बार सेक्स किया था और उसकी चूत से बहुत खून निकला था…
मगर धीरे-धीरे रजिया सेक्स के मामले में बहुत तेज हो गई…
वह मुझे किसी भी वक्त अपने जिस्म के जाल में फंसा लेती थी.. मानो उसे मर्द को रिझाना बहुत अच्छे से आता है..
भगवान ने उसे शरीर भी बहुत मादक दिया है.. उसका इस्तेमाल उसे बहुत अच्छे से करना आता है…..
रजिया का उठना बैठना चलना देखना बोलना सब वासना से भरा है….
इसलिए रजिया जब चाहे जैसे चाहे मुझे पा लेती है.. और मैं उसे रोक नहीं पाता हूं
और यही कारण है मेरे घर में शायद मेरा नहीं रजिया का राज है... वह जो कहती है मैं मान लेता हूं क्योंकि उसके जिस्म से दूरी मैं बर्दाश्त नहीं कर पाता हूं…

खैर वापिस जगह पर आते हैं..
मैं जहां खड़ा हूं वहां से मैं कुछ दूरी पर रजिया और उस भारी बड़े इंसान को एक साथ खड़ा देख पा रहा हूं वह जो जवान लड़का था वह उनसे करीब 20 25 फीट दूरमानो चौकीदारी कर रहा था..
मुझे एहसास हुआ कि मैं गलत रास्ते से आ गया हूं... जंगल में आने जाने के लिए जो रास्ता है मुझे उसका एहसास नहीं था तो मैं भी जंगल से ही चलाया जिसकी वजह से मैं रजिया और उस आदमी के ज्यादा करीब हूं , बजाये वो जवान लड़के के जो रास्ते पर चौकीदारी कर रहा है…
शायद वह किसी के आने जाने की वक्त रजिया और उस व्यक्ति को चौकन्ना करने के इरादे से खड़ा है..
मुझसे अब रहा नहीं गया और मैं रजिया और उस आदमी की बातें सुनना चाहता
मैं जानना चाहता था आखिर क्यों मेरी रजिया ने मेरे साथ ऐसा किया
ऐसी क्या कमी रह गई थी मेरे प्यार में

मैं बड़ी ही सावधानी से कुछ कदम उनकी तरफ बढ़ा
अब मुझे उनकी आवाज सुनाई देने लगी
रजिया बोली - तुम बिल्कुल पागल हो यह नहीं हो सकता है.. मैं तुमसे प्यार करती हूं इसका मतलब यह नहीं कि मैं रंडी हूं रोहित..

रोहित का नाम सुनते ही मेरा दिमाग झन्ना गया.. रोहित पड़ोस के गांव में रहने वाले पंडित जी का लड़का है..
बहुत पैसा है उनके पास और रुतबा भी आसपास के कई गांवों में है.. पंडित जी बड़े ही शांत स्वभाव के आदमी हैं.. मगर उनका बेटा ऐसा होगा मैंने कभी सोचा नहीं था
रोहित भी शादीशुदा है और जहां तक मुझे पता है उसके दो लड़के हैं.. उसके बारे में यह खबर तो थी कि वह थोड़ा दिल फेक है अगर मैंने कभी यह न सोचा था कि मेरी रजिया उस के चक्कर में फस जाएगी ..

तभी रोहित बोला - मेरी जान तुझे पता ही कौन है, यह ठाकुर का लड़का है .. पिछले दिनों में जो भी तुझे मौज कर आई है वह सब का पैसा कहां से आता है... इसी से तो उधार लिया था मैंने... अब यह मुझ से पैसा मांग रहा है.. मेरे पास तो है नहीं देने को तो उसने बोला कि अगर मैं नहीं दूंगा तो यह तुम्हारे घर आ जाएगा..
आवाज़ को हम दोनों के बारे में बता देगा
रजिया यह सुनते ही थोड़ा डर जाती है और कहती है
तुम पागल हो गए हो तुम हमारे बारे में किस किसको बता रहे हो.. तुम्हें पता है ना हम दोनों शादीशुदा है.. मेरी नहीं तुम्हारी भी जिंदगी खराब हो जाएगी.. बोलो मुझसे शादी करोगे अगर मेरे पति ने मुझे छोड़ मुझे छोड़ दिया..

माहौल बिगड़ता देख रोहित ने तुरंत रजिया के कंधों पर हाथ रखा और बोला मैं संभाल लूंगा तुम चिंता ना करो.. यह ठाकुर के लड़के का हिसाब मैं कर लूंगा... अब मिले हैं तो माहौल क्यों खराब कर ना मेरी जान अपनी चूत का पानी नहीं पिलाएगी अपने आशिक को
यह कहकर रोहित ने हल्के से रजिया की चुचियों को मसल दीया..

मेरा मन कर रहा था कि मैं अभी कूदकर बीच में चला जाऊं और इन तीनो को मार मार के भरता बना दो…
मगर मैंने देखा कि ठाकुर के लड़के के हाथ में एक लोहे की रॉड है शायद अपनी सुरक्षा के लिए लेकर आए होंगे..
दूसरी तरफ रोहित भी गरीब सवा छे फीट लंबा आदमी ...करीब सौ किलो वजन.. सच कहूं तो मेरी गांड फट गई..
मुझे यह पता था कि मैं अगर अभी इन से भिड़ा तोते है मेरा हाथ पैर टूटना.. मैंने सोचा समझदारी इसी में है कि घर पहुंचने के बाद मैं रजिया से निपटे..


रजिया भी मानो हर वक्त चुदासी रहती है.. पुरानी बातें तुरंत भूल उसके चेहरे पर एक कामुक मुस्कान आ गई
और रोहित ने उसको बाहों में ले उसके नरम होठों पर अपने होठों को चूसना शुरू कर दिया….
दोनों एक दूसरे के जिसमें खोने लगे... दोनों एक दूसरे को खा जाने के अंदाज में चूस रहे थे...मानो जैसे चुसाई में कंपटीशन हो रहा हो कि कौन दूसरे का हॉट ज्यादा चूसने का…
रोहित का हाथ रजिया के शरीर पर चल रहा था बुर्के के ऊपर से ही रोहित कभी रजिया की कमर पर हाथ फेरते तो कभी उसकी मुलायम गांड को मसल देता ..

तभी रोहित ने रजिया को पलट दिया और अब रजिया की पीठ रोहित की छाती में लग रही थी रोहित अपने दोनों हाथों से रजिया की दोनो चुचियों को बुर्के के ऊपर से ही दबाने लगा.. और अपने होठों से उसके गर्दन के हिस्से को बड़े ही प्यार से चाटने लगा..
कभी गर्दन तो कभी कांद तो कभी गाल.. धीरे धीरे उसकी चूचियों को भी मचल रहा था.. मानो सब स्लो मोशन में चल रहा हूं.. मेरे और रजिया के बीच सीधा चुदाई होती थी..
मगर आज जो मैं देख रहा था वह कुछ नया था मेरे लिए... पिछले 3-4मिनट से वह दोनों एक दूसरे को सिर्फ चूम ही रहे थे.. एक दूसरे के जिस्म से खेल रहे थे
अब रजिया के मुंह से मादक आवाज निकलने शुरू हो गई थी..
आह …..रोहित..
..मम्म…
.धीरे…

मैं समझ चुका था कि रजिया अब चुदाई चाहती है क्योंकि जब वह मेरे साथ होती है तब भी वह ऐसी ही आवाज निकालती है जब उसे बर्दाश्त नहीं होता है..
रज़िया की आवाज इतनी मादक थी कि ना चाहकर भी मेरा लंड खड़ा होने लगा था.. मुझे खुद पर शर्म आ रही थी मगर लंड को यह बात समझ नहीं आई और कुछ ही पलों में वह तन र मेरी पजामे में खड़ा हो गया

उधर मैंने सामने देखा तो रोहित रसिया का बुर्का उतारने लगा तो रजिया ने उसे रोक दिया और कहा ऐसे ही कर लो यह समय नहीं है कपड़े उतारने का..
फिर रोहित ने रजिया को वहीं जमीन पर लिटा दिया जहां उसने पहले से ही बोरी बिछा रखी थी..
और फिर वह रजिया के ऊपर छा गया
वह दोनों फिर एक दूसरे को चूमने में खो गए रजिया रोहित के आगे बहुत छोटी लग रही थी
मुझे तो डर भी लग रहा था कहीं रोहित के वजन से रजिया दब ना जाए.. कहीं उसकी सांस ना अटक जाए
फिर रोहित ने रजिया के दोनों हाथ पकड़ सर के ऊपर खींच दिया और रजिया के बालों को पकड़ उसे एक तरह से अपना बंधक बना लिया
अब रजिया चाह कर भी हिल नहीं पा रही थी..

धीरे-धीरे रोहित फिर रजिया के होठों की तरफ अपने होंठ लाया रजिया को शायद लगा कि वह उसे चूसने वाला है रजिया ने भी अपना हॉट खोल दिया.. मगर तभी रोहित ने अपना सर पीछे कर लिया..
वाह रजिया के साथ खेल रहा था.. रजिया गर्म हो चुकी थी और इस खेल से और गरम हो रही थी..
रोहित बार-बार उसके होंठों की तरफ जाता कभी उसे हल्का सा चूमता कभी जोर से काटता तो कभी बिना छुए वापस आ जाता…
रजिया इस वक्त उस के टुकड़ों पर पल रही थी... एक किस के लिए भी रजिया को रोहित की मर्जी का गुलाम होना पड़ा….
लेकिन शायद रजिया को इसमें मजा आ रहा था…
फिर वह अचानक एक-दूसरे के साथ गहरी किस में डूब गए.. कुछ देर बाद जब की शुरू की तब मैंने देखा कि रजिया की सांसे बहुत तेजी से चल रही है…
मेरा ध्यान रोहित के हाथ की तरफ गया तो मैंने देखा कि उसने रजिया का बुर्का नीचे से उसकी कमर तक उठा दिया है
रजिया शायद पूरी तैयारी से आई थी उसने बुर्के के नीचे कुछ नहीं पहना था
मादरजात एकदम नंगी... चांद की रोशनी में मेरी बेगम रजिया का दूध सा गोरा शरीर चमक रहा था..
मैं देख रहा था कि रोहित की उंगलियां रजिया की चूत के ऊपर है और शायद उसे खेल रही है रजिया का शरीर अकड़ रहा है
रोहित वापिस रजिया को किस करने लगता है.. और और इधर उंगलियों से उसकी चूत में अन्दर बहार हो रही थी …
रज़िया आह..
रोहित...आई माँ..… की आवाजे निकले सिसक रही थी..

इस दौरे तोहरे वार को शायद रजिया ज्यादा देर झेल नहीं पाई.. और उसका शरीर कांप उठा... वो जोर जोर से झड़ने लाही... उसका शरीर ढीला पड़ गया…
Part 2 :
रोहित ने किस छोड़ दी.. रजिया की चूत में रोहित की दो उंगलियां घुसी हुई थी जो उसने बाहर निकाली तो रजिया की चूत के पानी से सनी हुई थी.. गाढ़ा चमकता पानी मुझे चांद की रोशनी में रोहित की उंगली पर साफ साफ दिखाई दे रहा था.. मुझे घिन आ रही थी..
मगर इसके बाद जो हुआ उसे देखकर तो मुझे बहुत हैरानी हुई..
रोहित ने वह दोनों उंगलियां अपने मुंह में डाल कर रजिया के चूत का पानी चाटने लगा... मैंने ऐसा कभी सोचा भी नहीं था अपनी जिंदगी में.. ना जाने उस गंदे पानी को चाटकर रोहित को क्या मिला…
उसके बाद जो हुआ उसने तो मुझे और हैरान कर दिया..
आधा चाटकर रोहित ने रजिया के चूत के पानी से सनी उंगलियां रजिया के मुंह की तरफ बढ़ा दी..
और रजिया ने भी बिना एक पल गवाए आए उसकी उंगलियों को चूसना शुरू कर दिया...मानो जैसे कोई केक मिल गया हो…
चाट चाट कर रजिया ने अपनी ही चूत का पानी रोहित की उंगलियों से साफ की…
अब रोहित रजिया के पैर की तरफ आकर बैठ गया उसने रजिया की दोनों टांगों को घुटने से मोड़ा.. और नीचे झुक कर एक बार रजिया की चूत को चूमा ..

रोहित की जबान अपनी चूत पर महसूस करके रजिया का शरीर एक बार तुरंत कूद गया और उसके मुंह से एक जोरदार करा
ओ माँ,, आहह्ह्ह्ह

रोहित फिर से उसकी चूत चाटने लगा और इस बार बहुत जोरदार तरीके से... मानो जैसे कोई कुत्ता चाट रहा हूं.. उसकी ज़बान उसकी चूत पर ऐसे चल रही थी मानो किसी लॉलीपॉप को चाट रहा…
दूसरी तरफ रजिया का का बदन अकड़ रहा था.. रजिया के चेहरे के भाव देखकर लग रहा था कि शायद इतना मजा उसे जिंदगी में कभी नहीं आया…

रजिया रोहित के हाथ की गुड़िया हो गयी थी.. उसकी जबान रज़िया को नचा रही थी..
वो मस्ती में अपना सर इधर उधर कर रही थी..
उसकी साँसे एक बार फिर जूर पकड़ने लगी थी ..

रजिया से अब बर्दाश्त नहीं किया गया और उसने रोहित का सर अपनी जांघों से दबा लिया..
और फिर वह कांपने लगी.. रोहित का सर उसने अभी भी अपनी टांगों में दबा रखा था.. कांपते कांपते शायद वो एक बार फिर झड़ गई उसके मुंह से तरह-तरह की आवाज निकल रही थी.
आई..
उफ्फ्फ्फफ्फफ्फ्फ़…. आहह्ह्ह्ह
म्म्म्मम्म्म्मम्म


.. दूर खड़ा ठाकुर का लड़का भी अब तक अपनी पेंट से लंड निकाल हिला रहा था…
मेरा भी हाथ अपने लंड पर चले जा रहा था…

कुछ एक 2 मिनट बाद रजिया ने अपनी जांघों को ढीला किया और रोहित को आजाद किया…
रोहित के होंठ और मूछों पर मैं साफ-साफ रजिया के चूत का गाढ़ा चमकता पानी देख पा रहा था….
रोहित के चेहरे पर किला फ़तेह कर लेने वाली जीत की कुटिल मुस्कान थी ..

वह वापिस रजिया के ऊपर आ गया.. और अपने होठों को रजिया के होठ से मिला वह दोनों चूसने..
कुछ पलों की चुसाई के बाद रजिया खुद बोल पड़ी.. अब मुझे चोदो रोहित अब मुझसे बर्दाश्त नहीं होता है तुम मुझे बहुत परेशान करते हो…
रोहित बोला.. कुत्तिया तू दो बार झड़ चुकी है.. अगर मैं परेशान करता तो तो झडती ना... बोल तुझे झड़ने में मजा नहीं आता क्या..
रसिया रोहित की आंखों में देख कर बोलती है... तूने तो मुझे वह सुख दिया है जो मुझे कभी पता ही नहीं था कि मिल सकता है.. मैं तेरी गुलाम हूं रोहित.. और मुझे झड़ने में बहुत मजा आता है मानो ऐसा लगता है कि मैं जन्नत पहुंच गई हूं वह कुछ पल मेरी जिंदगी के सबसे सुंदर पल होते हैं…
मगर अब मुझे तेरा लंड मेरी चूत में चाहिए मुझे जल्दी से चोद दे..
मुझसे अब रहा नहीं जा रहा..

रोहित बोला ठीक है लेकिन आज चुदाई दूसरे तरीके से होगी ..
वह बोली कैसा तरीका.. यह कोई समय नहीं है मजाक करने का जल्दी से करो ताकि हम फारिक हो सके…

रोहित ने ठाकुर को आवाज दी और वह तभी कुछ सामान लेकर वहां आ गया... रिया अब बेशर्म हो चुकी थी उस ठाकुर के सामने वह वैसे ही टांगे खोले नंगी पड़ी रही…
रोहित के हाथ में एक रस्सी आई जिससे उसने पास के ही पेड़ में रजिया के हाथों को बांध दिया... रजिया थोड़ा घबराई मगर शायद मैं रोहित के आगे कुछ बोल ना पाई…

अब रोहित ने रजिया का बुर्का उसके शरीर से पूरा उतार दिया... इस बार रजिया कुछ ना बोली
शायद जिस्म की हवस उसके सर चढ़ चुकी थी…
अब रस्सी से बांधने के बाद रजिया को किसी गाय की तरह उसने अपने सामने झुका दिया और अपनालंड लेकर रजिया के सामने खड़ा हो गया और बोला कुत्तिया इसे चूस…

रजिया भी किसी वफादार गुलाम की तरह तुरंत उसका लंड मुंह में लेकर चूसने लगी.. रोहित का लंड मेरे लंड से छोटा ही था इस बात की मुझे खुशी हुई... कि शायद मैं एक बेहतर मर्द हूं क्योंकि मेरा लंड बड़ा है और मोटा है…

खैर रजिया रोहित का लंड चूसने लगी.. इस चांदनी रात में मेरी बेगम मादरजात नंगी दूध सी गोरी... किसी गाय की तरह झुकी हुई हाथ सामने पेड़ के तने पर बंधे हुए एक गैर मर्द मर्द का लंड चूस रही है…

तभी रोहित ने इशारा किया और ठाकुर का लड़का रजिया के पीछे आकर बैठ गया…
इससे पहले कुछ रजिया समझ पाती... रजिया के मुंह से एक जोरदार कर आह निकली..
ओ मां यह क्या .. नहीं मत करो….
फिर रोहित में अपना लंड रज़िया के मुह में पेल दिया और वो गूं गूं के अलावा कुछ ना कर सकी..

ठाकुर ने रजिया की चूत को पीछे से चाटना शुरू कर दिया…
इस वक्त मेरी बीवी दो गैर मर्दों के साथ हवस का नंगा नाच कर रही थी मगर दोस्तों सच कह रहा हूं सामने का नजारा इतना मादक था कि मैं संभाल ना सका...
यासीन मेरे लिए बर्दाश्त से बाहर हो गया और मेरे लड़ने पानी छोड़ दिया….

ठाकुर का लड़का मानो जैसे किसी गाय को पीछे से सांड चाटता हो वैसे ही मेरी झुकी हुई बीवी को पीछे से गांड को चौड़ा कर चाट रहा था..
कभी वह पानी से लबालब आए रजिया की चूत चूसते.. तो कभी उसकी गांड के छेद को चाहता…
रजिया बंधी हुई थी तो चाह कर भी इसका विरोध ना कर पाई और करती भी क्यों चूत चटाई में उसे बहुत मजा आ रहा था..
उसकी आवाज कांप रही थी वह ….

आह..मम…
. यह सब कुछ 3-4 मिनट चला..
रजिया की चूत एक बार फिर उफान पर चड़ने को थी ..और फिर उसकी टांगें कांपने लगी और वह जोर से झड़ी... कुछ बूंदें ठाकुर के मुंह पर आ गिरी लेकिन उसने सब चैट कर साफ कर दिया…
ठाकुर रजिया को चोदना चाहता था मगर रोहित के इशारे पर वह अपना खड़ा लंड लेकर साइड हो गया….

रोहित ने रजिया के कान में पूछा... क्यों दोनों तरफ से हुए हमले में मजा आया..
कैसा चाटता है ठाकुर जो तुम्हारी.. तुम तो झड गई कुछ ही मिनट में…

रजिया ने रोहित की तरफ देखा और कुछ ना बोली... उसकी आंखों में बस नशा था... मानो वह कह रही हो कि अभी तो मुझे किसी कुत्ते से भी चुद्वायेगा तो मैं चुदने को तैयार हो जाऊंगी मगर बस मुझे चोद मुझे कुछ बोल मत बस जो करना है कर मगर चोद

रोहित अब रजिया के पीछे आ गया अपना लंड उसके चूत के मुहाने पर धीरे-धीरे रगड़ने लगा... रजिया किसी गाय की तरह रम्भाई....

आहह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह.
.
और धीरे से रोहित ने अपनेलंड का सुपाड़ा रजिया की चूत में उतारा…

उसका सुपाड़ा ही अंदर ले के रसिया चीख पड़ी... यह चीख दर्द की नहीं थी यह चीज उस हवस की थी जो रोहित ने रजिया के अंदर भड़का दी थी.. वह इस पल का पिछले आधे घंटे से इंतजार कर रही थी इसके लिए रोहित ने उसे बहुत तड़पाया था…

तभी रोहित ने अचानक से अपना पूरा लंड उसकी चूत में पेल दिया.. अचानक हुए हमले से रजिया की टांगें कांप उठी और उसके मुंह से एक चीज निकल पड़ी..
अब रोहित धीरे-धीरे रजिया की चूत मारने लगा... कभी वह आधा लंड अंदर बाहर करता तो कभी अचानक से पूरालंड उसकी चूत में धोखा देता.. कभी धीरे धीरे अंदर बाहर करता तो कभी मशीन गन की तरह फटाफट उसे छोटा... यह करते-करते 6 -7 मिनट गुजर चुके थे…
इधर ठाकुर भी रोहित का इशारा पाकर रजिया के मुंह की तरफ आ गया और अपना खड़ा लंड रजिया के होठों पर टच करने लगा रजिया भी अब सेक्स के नशे में अंधी हो चुकी थी..
सही गलत अब उसके दिमाग से परे था…

उसने तुरंत अपना मुंह खोल दिया और ठाकुर के लंड को अंदर लेकर चूसने लगी... ठाकुर को अपनी किस्मत पर यकीन नहीं हो रहा था उसके मुंह से एक कराह निकली और वह तेजी से रजिया के मुंह में लंड अंदर बाहर करने लगा…

इधर पीछे से रोहित रजिया को लगातार चोद... अब उसकी रफ्तार काफी बढ़ गई थी मानो उसका वक्त करीब आ रहा
इधर रजिया भी उसकी हर हमले का जवाब अपनी गांड को पीछे धक्का देकर बता रही थी.. पूरे जंगल में फच फच की आवाज गूंज रही थी.. कि तभी रोहित गुरुराया और 3-4 झटकों के बाद रजिया की चूत में अपना गाढ़ा वीर्य भर दिया
और वह थक कर रजिया के ऊपर ही गिर पड़ा..
रजिया अब रोहित का वजन संभाले वही झुकी खड़ी थी.. उसकी चूत से एक-एक बूंद करके रोहित का वीर्य जमीन पर गिर रहा था…
इधर ठाकुर भी कुछ ही पलों में अपने लंड का सारा वीर्य रजिया के मुंह में झाड़ देता है... और लंड बाहर निकाल अपनी पैंट में डाल लेता है…
रजिया के मुंह से ठाकुर का वीर्य उसके टुडे गालों और गले पर चिपक रहा था और कुछ नीचे गिर गया..
कुछ पलों बाद रोहित ने अपने आप को संभाला और रजिया की तरफ से खा…
रजिया बानो बेहोश झुकी हुई खड़ी थी.. शायद इतना सेक्स व संभालना पाई करीब 4 बार झड़ी आज रज़िया पिछले एक घंटे में ….
रोहित ने रजिया के हाथ खोलें और रजिया को नीचे बिठाया…
प्यार से उसके होठों को चूस आ.. और पूछो बोलो रानी मजा आया...
रजिया ने वापिस रोहित के होठों को चूसा और कहा
….तुम्हें मेरी हालत देखकर क्या लगता है.. तुमने मेरा कचूमर निकाल दिया मैं बेहोश हो जाती अगर तुम कुछ और देर ऐसे ही चोदते रहते... अब मुझे बस घर जाना है मुझे बहुत नींद आ रही है..

गिरते-पड़ते रजिया ने अपने कपड़े पहने और फिर वहां से घर की तरफ निकलने लगे मैं वहीं बैठा रहा क्योंकि मुझे तो खेत जाना था..
यह सब देखने के बाद नवाज अधमरी हालत में वही पेड़ के नीचे बैठ गया
उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसके साथ यह क्या हो गया है..
उसकी बेगम जिसे वह अपनी जान से भी ज्यादा प्यार करता है वह किसी गैर मर्द के आगे आधी रात को नंगी होकर कैसे चुद सकती है
हजार बातें उसके दिमाग में आने लगी वक्त समझने की कोशिश कर रहा था कि यह सब कैसे हुआ
उसे इस बात की बिल्कुल भी भनक क्यों नहीं लगी...
….आखिर यह कितने समय से चल रहा है
क्या यह आज पहली बार था, या कुछ महीनों से चल रहा है, या जब से शादी कर के लाया हूं तब से यह गैर मर्दों से चुद रही है?

नवाज परेशान था उसके दिमाग में हजारों सवाल थी जिसका जवाब उसके पास नहीं था..
उससे सुबह का इंतजार नहीं हो रहा था.. उसने फैसला किया कि वह अभी घर जाएगा और सीधा रजिया से इसके बारे में बात करेगा
न जाने क्यों नवाज के अंदर इस सब मामले को लेकर गुस्से से ज्यादा डर था…
उसे समझ नहीं आ रहा था कि जिस औरत को उसने इतना प्यार किया... वह उसे धोखा कैसे दे सकती है..
उसे यकीन था रजिया उस से बेइंतहा प्यार करती है... उसका दिल कह रहा था हो ना हो इसके पीछे कुछ और ही कारण है और ना मेरी रजिया ऐसी तो नहीं थी..

इसी उम्मीद के साथ वह अपने घर की तरफ चला..
लड़ाई झगड़े की ताकत उसमें अब नहीं बची थी.. वह समझ चुका था अगर उसने बहुत बड़ा बवाल भी किया तो गांव भर में उसकी बेइज्जती होगी.. उसे लोग शायद नामर्द भी कहें कि अपनी औरत को खुश भी नहीं कर सकता..
बड़े ही दवे मन के साथ नवाज अपने घर की तरफ पहुंचा..
घर के अंदर एक-एक कदम रखना उसे बहुत भारी पड़ रहा था... सवाल तो कई थे मगर उसे यह समझ नहीं आ रहा था कि कैसे वह इस बात को आगे बढ़ाएं..
वह रजिया से बेइंतहा प्यार करता था.. और यह कह सकते हैं कि वह उसके हुस्न का गुलाम भी था..

रजिया जो चाहती जैसे चाहती वैसे अपने जिस्म की गर्मी दिखाकर नवाज से करवा लेती थी…
नवाज को एक डर ये भी था कि कहीं रजिया घर छोड़कर ना चली जाए.. क्योंकि ऐसा हुआ तो बदनामी के साथ वह अपनी बीवी को भी खो देगा जिससे वह बहुत प्यार करता है..
नवाज बस यह चाहता था कि किसी तरह वह अपनी बीवी को रोहित के चंगुल से बाहर निकाल ..उसे रज़िया पर गुस्सा तो था मगर वह रजिया से दूर नहीं होना चाहता था..
उसने सोचा अगर रजिया ने उस से माफी मांग ली तो वह बात को ज्यादा नहीं बढ़ाएगा..

आखिर वो पल आ ही गया नवाज अपने बेडरूम की तरफ गया वहां उसने देखा रजिया बेटी के साथ लेटी हुई है..
रजिया एकदम नंगी हालत में पड़ी हुई थी अपनी दोनों टांगों को खोले हुए.. मानो घंटे भर हुयी चुदाई से उसकी छूट जल रही हो ..
उसकी चूतपर रोहित के वीर्य के निशान भी दिख रहे थे लालटेन की रोशनी में..
रजिया सोई नहीं थी.. मेरी आहत सुनते ही वह तुरंत उठ खड़ी हुई और अपने आप को ढकने की कोशिश करने लगी..
और पूछती है अरे आप कब आए..

नवाज चुपचाप रजिया की आंखों में देखता रहता है..
कुछ पलों में रजिया अपने आप को एक नाइटी में ढक लेती है और नवाज के पास आकर फिर से पूछती है..

आज आप आधी रात को ही कैसे वापस आ गए.. खेत में सिंचाई हो गई क्या..?

नवाज हैरान था.
रजिया की आवाज में किसी तरह का चोर नजर नहीं आ रहा था.. ना वह डरी हुई लग रही थी..
वह अंदर ही अंदर टूटने लगा..
कि यह कैसी बीवी है जो अभी-अभी गैर मर्दों से चुदकर आई है और मुझे अचानक देख कर डरी भी नहीं ..

रजिया ने फिर नवाज से पूछा.. आप कब आए
इस बार नवाज ने दबी सी आवाज में जवाब दिया
…...जब तुम जंगल में जा रही थी..
यह सुनकर अब रजिया के पैरों तले जमीन खिसक गई..
वह समझ गयी अब ढोंग करने से कोई फायदा नहीं होने वाला..
उसे बस ये समझ नहीं आरहा था आखिर नवाज इतने शांत क्यों है.. कोई और होता तो शायद अभी तक मारना पीटना शुरू कर दिया होता..
रज़िया को कुछ समझ नहीं आरहा था..

नवाज वही सर झुकाए खड़ा था.. इस उम्मीद में कि शायद रजिया अब अपनी गलती मानेगी और कुछ कहेगी..
रजिया फिर बोली - क्या कह रहे हैं आप.. मैं तो सो रही थी..

नवाज को यह सुनकर बहुत गुस्सा आया.. चोरी और ऊपर से सीना जोरी…

वह इस नाटक को जल्द ही खत्म कर इस बेवफाई का असली कारण जानना चाहता था..
उसने रज़िया को एक जोर दर तमाचा जड़ दिया …

वह तुरंत रजिया को पकड़ बाहर के कमरे में आ गया.. ताकि सोती हुई बेटी परेशान ना हो..
बाहर रखें तखत पर उसने रजिया को धक्का दिया.. रजिया उसे पीठ के बल गिर पड़ी

बिना पल खोए नवाज ने अपना एक हाथ रजिया की नाइटी में डाल दिया और तुरंत अपनी दो उंगलियां रजिया की चूत में घुसा दी..
रोहित का वीर्य जो अभी भी रजिया की चूत में भरा हुआ था..
नवाज की उंगलियां उस वीर्य से सन गई..

इधर रजिया नवाज की इस हरकत से बिल्कुल हैरान बेसुध पड़ी रही.. उसे भी अब एहसास हो गया था कि शायद अब बचना नामुमकिन है..
नवाज ने अपनी उंगलियां बाहर निकाली.. और उंगलियों पर चमचमाते रोहित के वीर्य को दिखाकर बोला..

तो फिर सोते सोते तुम्हारी चुद में गैर मर्द का वीर्य कौन पिला गया..

और गुस्सेमें रोहित ने रजिया के बाल पकड़े.. और ऐठ दिए.. दर्द के मारे रजिया की चीख निकल गई और उसके खुले मुंह में तुरंत नाम आवाज ने अपनी दोनों उंगलियों पेल दी..
जबरदस्ती उसने रजिया को एक बार फिर रोहित का वीर्य चटाया..

उसके बाद नवाज बगल में बैठ गया.. और अपनी हालत पर फूट-फूट कर रोने लगा..

वह बिना रुके रोए जा रहा था.. रजिया को भी एहसास हो गया कि वह उस की की गई गलती बहुत बड़ी थी और शायद अब उसका परिवार टूटने की कगार पर है..
वह किसी भी हाल में नवाज को नहीं छोड़ना चाहती थी.. रोहित के साथ जो भी चला वह शायद हवस था मगर प्यार वह नवाज से ही करती थी..
अब तक रजिया की आंखों में भी आंसू फूट पड़.. अपनी का कह गलती का एहसास कर वह भी रोने लगी..
और नवाज के पैर पकड़ माफी मांगने लगी..

.. मुझे माफ कर दीजिए नवाज.. मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई..
आज के बाद ऐसा कभी नहीं होगा नवाज…
.. प्लीज मुझे माफ कर दीजिए…

नवाज रजिया की तरफ देखता भी नहीं और उसे एक हाथ से धक्का दे देता है.. वह अभी भी रो रहा है..
रजिया रोते रोते हैं फिर नवाज के पास आती है और उस से चिपक कर माफी मांगने लगती है.

नवाज अब खड़ा होकर एक दूसरे कोने में चला जाता है और वहां गुमसुम सा खड़ा रहता है..
कुछ पल बाद वह बोलता है..
क्यों रजिया.. आखिर क्यों किया तुमने यह मेरे साथ..
मेरे प्यार में आखिर ऐसी क्या कमी थी..

रजिया रोते हुए एक बार फिर नवाज को पीछे से अपनी बाहों में भर लेती है..
और रोते हुए फिर कहती है..
नवाज मुझे माफ कर दीजिए..
मुझे नहीं मालूम मुझसे या गलती कैसे हो गई मगर मुझे अपनी गलती का एहसास है..
आप जो भी सजा देंगे मुझे मंजूर है मगर मुझे छोड़िए गा नहीं..
मुझे माफ कर दीजिए नवाज…

नवाज फिर पूछता है- तुमने अभी तक मेरी बात का जवाब नहीं दिया रज़िया .. क्यों किया तुमने ये सब ..
उसने भी शायद वही कहा जो ऐसी हालत में एक मर्द सुनना चाहता था..

नवाज़ शायद रजिया से कुछ सुनना चाहता था.. लेकिन रजिया एक चालाक किस्म की औरत थी वह इतनी जल्दी अपने राज नहीं खोलने वाली थी..

रजिया कहती है.. नवाज आपको तो पता है इन सब बातों की तरफ तो मेरा कभी ध्यान भी नहीं जाता है..
उस कमीने रोहित ने ही मुझे अपने जाल में फसाया.. और इससे पहले मैं कुछ समझ पाती यह सब हो गया..
और वह फूट फूट कर रोने लगती है..
नवाज शांत खड़ा है.. उसके मन में एक तसल्ली है कि उसकी बीवी सामने से रोहित के पास नहीं गई..
मन ही मन उसने रोहित को शातिर जालबाज समझ अपनी बीवी को बड़ा मासूम करार दे दिया..

और फिर वह बोला-- मुझे मालूम है रजिया तुम ऐसी नहीं हो.. लेकिन आज जो हुआ है मुझे यकीन है उस कमीनी रोहित की कारस्तानी है.. लेकिन मैं यह जानना चाहता हूं कि आखिर यह हुआ कैसे
ताकि मैं उसे रोहित को मजा चखा सकूं.. उसने मेरी बीवी के साथ ये किया कैसे..

नवाज की बात सुन रजिया की सांस में सांस आई.. उसे समझ आ गया कि नवाज रजिया पर ज्यादा नाराज नहीं है.. उसका सारा गुस्सा रोहित के खिलाफ है.. उसने इस मौके का फायदा उठाया और नवाज को और दबाने की कोशिश की…

रजिया बोली - नहीं नवाज.. यह तो सच है कि उस कमीनी रोहित ने ही मुझे अपने जाल में फसाया.. उसने मुझे ब्लैकमेल किया..
लेकिन मैं अब आपके सामने कोई भी बात कहूंगी तो आप क्यों यकीन करेंगे..
………….मैं तो एक रंडी बन चुकी हूं अब आप की नज़रों में... मैंने आपका अपमान किया है..

इसकी सजा तो मुझे मिलनी ही चाहिए.. आप मुझे मारी नवाज.. आप मुझे बेल्ट से मारीये है आप मुझे थप्पड़ मारिए.. लेकिन मुझे सजा दीजिए नवाज..
मैं इसी की हकदार हूं.. मैंने आपका भरोसा तोड़ा है... उस कमीनी रोहित ने मुझे ब्लैकमेल किया.. लेकिन मेरी भी तो गलती है कि मैंने उसे ब्लैकमेल करने दिया.. आप मुझे इसकी सजा दीजिए नवाज…

यह कहते हुए रज़िया खुद की ही गाल पर दो तीन थप्पड़ मार दीए..

यह देखते ही नवाज के दिल में एक टीस उठी…

नवाज़ रजिया को बहुत प्यार करता था.. और रजिया की बात सुनकर उसे यकीन हो गया कि शायद रोहित ने ही रजिया को फंसाया और ब्लैकमेल करके चोदा है..
रजिया को यूं खुद को मारते देख उससे रहा ना गया उसने रजिया के हाथ पकड़ लिए और उसे अपने गले से लगा लिया…

अब रज़िया को यकीन हो चला था कि उसने नवाज को अपनी बोतल में उतार लिया है.. यह अक्सर वो नवाज के साथ करती थी..
और अगला कदम भी उसे अच्छे से पता था..

नवाज ने उसे रोकते हुए कहा.. नहीं मुझे तुम पर पूरा यकीन है.. उससे रोहित को तो मैं देख लूंगा जिसने मेरी बीवी को इतना परेशान किया है..
तुम खुद को सजा मत दो.. वो हरामी ही जिम्मेदार है.. सजा तो उसको मिलनी चाहिए..


इस वक़्त रजिया ने एक पतली सी सिल्की नाइटी पहनी हुई थी.. रजिया की कड़ी चूचियां नवाज के सीने में चुभ रही थी जिसका एहसास उसे भी था…
रजिया को समझाते हुए नवाज का हाथ भी रजिया के जिस्म पर चल रहा था..

रजिया ने अब अपना अगला हथियार नवाज पर डाला..
रजिया नमाज की बाहों से निकल अपना चेहरा ठीक उसके सामने रख उसकी आंखों में ध्यान से देखने लगती है..
मानो कुछ ढूंढ रही हो..माफ़ी ?

फिर बड़े ही प्यार से नवाज को देखते हुए बोलती है..

आप मुझे इतना प्यार करते हो नवाज कि आप सब समझ जाते हो.. मेरी गलती नहीं थी.. मुझे ब्लैकमेल किया गया..
मुझे तो लगा था कि आज मेरी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी..
मगर आप मुझे इतने अच्छे से समझते हो इसका मुझे एहसास ना था…

रजिया की बातें सुनकर नवाज पिघल रहा था.. उससे रज़िया पर प्यार आ गया और उसने अपने दोनों होठ रजिया को होठों पर रख दिए..

रजिया को शायद इसी का इंतजार था..
उसने तुरंत नवाज की होठों को चूमना और तू सुना शुरू कर दिया.. अपने बदन को नवाज के बदन पर रगड़ धीरे-धीरे उसको अपनी गिरफ्त में लेने लगी…

रजिया को पता था कि नवाज की कमजोरी रजिया की गांड है..
नवाज को चूमते हुए रजिया अपने दोनों हाथ से नवाज के हाथ को पकड़ती है जो इस वक्त रजिया के कमर पर था..
और धीरे से किस करते हुए उसे अपनी गांड पर ले जाती है..

रजिया की गांड पर अपना हाथ महसूस करते हैं नवाज के अंदर एक चिंगारी भड़क जाती है.. इतनी मुलायम गद्देदार गांड पर हाथ पड़े तो अच्छे से अच्छे मर्द पिघल जाए..
नवाज सब कुछ भूल अब रशिया में खो चुका था..
रजिया की गांड को मसल रहा था और रजिया उसके होठों को चूस रही थी..

रजिया ने अब नवाज़ को पास पड़े बिस्तर पर गिरा दिया.. उसे यकीन था यह बाजी जीत चुकी है…

नवाज को बिस्तर पर लिटाते ही तुरंत अपनी नाईटी निकल दी... और कूदकर नवाज के ऊपर बैठी…

रजिया का नंगा जिस्म नवाज के ऊपर था. .रजिया की चूत ठीक नवाज के लंड के ऊपर थी.. उन दोनों के बीच एक पतला सा पजामा था..
रजिया आगे झुक कर एक बार फिर नवाज के होठों को अपने होठों में ले लेती है.. और किसी जंगली बिल्ली की तरह उसे चूसने लगती है..
नवाज केवल नीचे पड़ा उसकी इन हरकतों का साथ दे रहा होता है.. यह अक्सर होता है.. बिस्तर में रजिया के आगे नवाज की एक नहीं चलती है.. नवाज बिस्तर में रसिया से 19 ही पड़ता है…

रजिया नवाज की छाती पर हाथ फेरने लगती है.. और धीरे से उसकी एक निप्पल को दबा देती है..
नवाज़ के मुंह से आह निकल जाती है..
धीरे धीरे कर वो नवाज़ आज के सारे कपड़े उतार देती है और वापस इसी पोजीशन में आ जाती है…

आमतौर पर इस पोजीशन में आते ही रजिया नवाज का लंड अपनी चुद में सरका लेती है और फिर उसके ऊपर किसी घुड़सवार की तरह घुड़सवारी करती है..
अगर आज शायद उसके इरादे कुछ और थे..
रजिया नीचे जा कर नवाज का लंड अपने मुंह में ले ले.. आज से पहले यह कभी नहीं हुआ था.. लेकिन रजिया को मालूम था कि आज नवाज ने उसे दूसरे का लंड चूसते देखा है.. तो कुछ नया दिखाना चाहती थी..

कुछ देर लंड चूसने के बाद उसने नवाज से डॉगी पोजीशन में आने को कहा. नवाज अब सब गुस्सा भूल अपनी बेगम के इशारे पर नाच रहा था.. उसको इस समय बहुत मजा आ रहा था…
नवाज जैसे ही डॉगी पोजीशन में आया उसकी टांगों के बीच में रजिया आ कर लेट गई..
नवाज का लंड ठीक रजिया के मुंह के सामने था..
रजिया ने नवाज का लंड अपने मुंह में लिया और उसे चूसने लगी.. और दूसरे हाथ से नवाज के लंड को किसी गाय के थन की तरह नीचे उड़ने लगी..

नवाज अब गर्म सांसे लेने लगा था.. उसे आज तक लंड चुसाई के बारे में कोई अंदाजा नहीं था..
रजिया की जबान नवाज के लंड पर ऐसे थिरक रही थी मानो कोई स्वादिष्ट लॉलीपॉप…

रजिया की जबान की धड़कन का जवाब नवाज के पास नहीं था.. वह बस अपनी आंखें बंद किए अपनी कमर हिला उसके मुंह कर चोदना चाह रहा..

तभी रजिया ने अपनी एक उंगली डॉगी पोजीशन में पड़े नवाज की गांड के छेद पर कुरेदने शुरू की…
नवाज के मुंह से एक बड़ी कर आह निकली..

आहह्ह्ह्हह्ह रज़िया…. आहहह

उसके गांड के छेद पर आज तक ऐसा कोई हमला नहीं हुआ था..

लेकिन यह कुरेदना उसे बहुत अच्छा लगा.. वह बस मस्ती में झूम रहा था..
उसे लग रहा था कि वह ज्यादा देर रुक नहीं पाएगा... इससे पहले वह कुछ समझ पाता.. रजिया ने अपनी एक उंगली उसकी गांड के छेद में घुसा दी..

यह हमला वह सह नहीं पाया.. और अगले कुछ ही पलों में नवाज़ अपना ढेर सारा वीर्य रसिया के मुंह में ही निकाल बैठा..
उसे समझ नहीं आया कि यह क्या हुआ.. वह खुद को रोक क्यों नहीं पाया..
रजिया अच्छे से जानती थी एक गांड में उंगली डालने से वीर्य जल्दी बह जाता है.. वह इस मामले में एक बड़ी खिलाड़ी थी.. लेकिन नवाज तो उसके सामने केवल एक बच्चा..

नवाज का सारा वीर्य छोड़ छोड़ कर रजिया पी गई..
नवाज़ एक तरफ गिर गया और सांस लेने लगा… ऐसा मजा उसे आजतक नहीं आया था..
मन ही मन वो सोचने लगा अब तो रोज़ चुस्वाऊंगा लंड रज़िया से..

लेकिन रजिया का खेल अभी खत्म नहीं हुआ था.. वह तुरंत के ऊपर चढ़ गई और उसके होठो को अपने होठो में ले कर चूसने लगी..नवाज को इससे पहले कुछ एहसास होता रजिया नवाज का वीर्य जो उसके मुंह में बचा हुआ था उसको ले नवाज को चखा दिया....
नमाज को अपने ही वीर्य का स्वाद चखा दिया आज रजिया ने..

मगर वह कुछ बोल ना सका क्योंकि अब बहुत देर हो चुकी थी और रजिया किसी जंगली बिल्ली की तरह उसे जोरों से चुसे जा रही थी…

एक बार फिर आवाज के लंड को पकड़ हिलाने लगती है.. आज दो बार झड़ चुका था अब उसमें और हिम्मत नहीं बची थी..
उसने रजिया का हाथ पकड़कर हटा दिया.. और बोला अब नहीं होगा..
रजिया नहीं मानी उसके ऊपर सवार होकर उसे चूसने चाटने लगे.. लड हिलाने लगी..
नवाज अब कुछ चिड़चिड़ा हो गया क्योंकि उसे मालूम था कि वह काफी थक गया है और अब मुझसे नहीं होगा…

उसने फिर से रजिया को साफ कहा कि अब मत करो अब मेरा कोई मन नहीं…
रज़िया को शायद इसी का इंतज़ार था..

रजिया ने गुस्से से नमाज की तरफ देखा.. और उसे नीचा दिखाते हुए धीरे से कहा..
अगर आप खत्म नहीं कर सकते थे तो शुरू ही क्यों किया..
अब मेरा मन हो रहा है तो आप ठन्डे पद गए.. और नवाज़ के सामने खडी वो अपनी चूत को ऊपर से मसलने लगी…
अपने एक होठ को दातो के निचे दबा वही खड़े खड़े वो चूत से खेलने लगी..
उसकी कमर मानो उसकी उंगलियो के साथ थिरक रही थी..
जैसे वो खड़े खड़े चुद रही हो…

अपनी बेगम ये कामुक रूप देख का नवाज़ तड़प उठा..इन्ही अदाओ ने तो उसे रज़िया का गुलाम बना दिया है..
तभी रज़िया ने अपनी आँख खोली.. नवाज़ की तरफ गुस्से से देखा.. और कमर मटकती अन्दर चली गयी..

नवाज जो आज आया तो गुस्से में था अपने घर.. यह सोच कर कि अपनी बीवी से सवाल जवाब करेगा उसकी बेवफाई के लिए.. रात खत्म होते-होते उसकी बीवी उसे ही ताला मार गई कि मैं उसे संतुष्ट नहीं कर पा रहा है…
पुरानी बातें भूल वह गिलानी में चला गया कि मेरी गर्म बीवी आज प्यासी रह गई मेरी वजह से..
वह वही पड़े पड़े सो गया..

सुबह हुआ तो उसे रात में हुआ सब याद आया.. उसका दिमाग फिर गुस्से से भर गया..

तभी रज़िया उसके लिए चाय लेकर आई..साडी में उसे देख नवाज़ को अपने पुराने दिन याद आगये..और वो मुस्कुराया मगर.. रज़िया फिर उससे गुस्से में मुह फेर वापिस चलि गयी...
कुछ दिन ऐसे ही गुजर गए
नवाज और रजिया के बीच अब सब नॉर्मल हो गया था.. लेकिन तभी एक दिन नवाज शाम को हल्के अंधेरे के वक्त अपने घर वापस आ रहा था..
वह देखता है कि घर के बाहर पेड़ की आड़ में जल्दी आ और वह ठाकुर बात कर रहे..
यह देखकर नवाज को बहुत गुस्सा आया.. वह वहीं रुक गया..
वह देखना चाह रहा था कि क्या हो रहा है..

उसने देखा कि ठाकुर रजिया से कुछ कह रहा है और कहते कहते उसने रजिया का हाथ पकड़ लिया..
रजिया ने तुरंत उसका हाथ झटक कर खुद से दूर कर दिया..
नवाज को अपनी बीवी पर बड़ा नाज हुआ..
उसके बाद कुछ देर तक ठाकुर रजिया को समझाता रहा.. मगर रजिया के चेहरे से साफ नजर आ रहा था कि वह ठाकुर की बातों में दिलचस्पी नहीं रखती है..

अचानक ठाकुर ने रजिया पर हमला कर दिया..जैसे उसका बलात्कार करना चाहता हूं..
उसने रजिया को अपनी बाहों में ले उसकी चुचियों को जबरदस्ती मसलना शुरू कर दिया.. रजिया से यह सुहाना गया और उसने अपने आप को किसी तरह से आजाद कर.. ठाकुर को एक जोरदार तमाचा मार दिया..
और उसके ऊपर जोर से चीख पड़ी..
चीक इतनी जोरदार थी कि ठाकुर डर गया और उसे लगा शायद आसपास के घरों से कोई बाहर ना निकल आए तो वह तुरंत वहां से भाग खड़ा हुआ..

उसके जाते ही नवाज भी अपने घर पहुंचा..
नवाज को घर में पा रजिया अचानक से रब नवाज से आकर लिपट गई और जोर जोर से रोने लगी..
नवाज सब जानते हुए भी अनजान बनकर रजिया से उसके रोने का कारण पूछता है…

रज़िया सुबकते हुए उसे बताती है कि कैसे ठाकुर उसे फिर ब्लैकमेल करना चाहता था..
वह उसे आज रात जंगल में बुला रहा था.. फिर से वही सब करने के लिए.. उसने रजिया को हजार रुपए भी देने की बात की..
रजिया ने बताया कि वह इस तरह बात कर रहा था मानो रजिया कोई वैश्या हो.. और उसने ठाकुर को थप्पड़ मार दिया.. और ठाकुर वहां से जाते-जाते बोल गया कि अगर हजार रुपए चाहिए हो तो रात में जंगल में आ जाना..

रजिया ने नवाज को ठाकुर और अपने बीच हुए गुत्थम-गुत्था के बारे में कुछ नहीं बताया.. शायद उसे लगा होगा कि नवाज उसे गलत समझेंगे..

यह बताते हुए रजिया फूट-फूट कर रो रही थी.. नवाज ने भी आंखों देखा ही था तो उसे भी इस बात पर कोई शक नहीं था कि ठाकुर अपनी हद पार कर गया था.. उसे अपनी बीवी पर बहुत प्यार भी आ रहा था कि कैसे नवाज की गैरहाजिरी में उसने अपने आप को बहकने दिया…

उसने किसी तरह रजिया को चुप कराया और फिर रात का खाना खाकर खेत की तरफ निकल पड़ा…

दो-तीन दिन यूं ही गुजर गए.. तभी गांव में एक खबर उठी कि ठाकुर का कत्ल हो गया है और उसकी लाश जंगल में पड़ी हुई मिली..
लास से जब बदबू फैली तो दूर से जाने वाले किसी इंसान का ध्यान उस तरफ गया और तब पता चला कि यह ठाकुर की लाश है.
पूरे गांव में अफरा-तफरी फैल गई और किसी को अंदाजा भी नहीं हुआ की ये किसने किया होगा.

मगर यह खबर सुनते ही रजिया के कान खड़े हो गए.. उसे यकीन था कि हो ना हो यह काम नवाज का है..

उसे यकीन नहीं हो रहा था.. जिस नवाज को वह जानती थी वह मार पिटाई में बिल्कुल यकीन नहीं रखता था.. उसे अब डर लगने लगा था.. कि कहीं यह मेरा कत्ल भी ना कर दे..
रजिया ने रात के खाने के वक्त नवाज़ से इस बारे में पूछा.. नवाज ने बात का सीधा जवाब ना देते हुए बात घुमा दी.. और कहा उस साले के कर्म ही खराब थे उसको तो यह सजा मिलनी ही थी.. जिसने बिजी बहुत अच्छा किया लेकिन इससे मेरा कोई वास्ता नहीं..
ऊपर वाला सब देख रहा है सबको अपने कर्मों की सजा जरूर मिलेगी.

यह शब्द रजिया की गांड फाड़ गए.. उसे यकीन था कि यह बात वह रज़िया को सुना रहा है.. रजिया को समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करें.. उसे अपनी जान खतरे में नजर आ रही थी.. उसने खुद ही तय कर लिया खुद से कि आज के बाद चाहे जो हो जाए और नवाज के अलावा किसी और के बारे में सोचेगी भी नहीं..
पूरी रात रजिया ने इसी बारे में सोचते हुए निकाल दी..

अगले दिन भी उसका दिल घर के किसी काम में नहीं लग रहा था.. हर वक्त इसी उदेध बुंद में थी .. नवाज के घर में घुसते ही उसके शरीर में कपकपी छा जाती थी... जिस नवाब को अपने हाथों का खिलौना समझती थी वह अब उसकी मौत का हथियार बन चुका था.

उससे रहा ना गया उसने अपनी सबसे खास सहेली से इस बारे में बात करने का फैसला किया.. जिसका नाम था कल्पना.
कल्पना और रश्मि दोनों स्कूल की दोस्त थी , रश्मि में घर से भाग कर नवाज़ से शादी की और रज़िया बन गयी ..
अगले दिन सुबह का खाना बनाकर रजिया कल्पना के घर की तरफ निकलती..
कल्पना की ससुराल रजिया की ससुराल से कुछ 6 किलोमीटर दूर थी.. अक्सर रजिया कल्पना से मिलने और कल्पना रजिया से मिलने आया जाया करती थी.. यह सफर पैदल ही तय होता था..
करीब 1 घंटे का सफर तय कर रजिया अपने स्कूल की दोस्त कल्पना से मिलने चली गई..

रजिया को हुआ चांद देख कल्पना हैरान भी थी और खुश भी थी..

इस वक्त कल्पना के घर में केवल उसकी एक बूढ़ी सास थी जो बिस्तर पकड़े हुए थी.. उसका पति और ससुर इस वक्त खेत में काम कर रहे थे..
रजिया कल्पना के साथ बैठ अपनी कहानी बताने लगी.. उसने वह जंगल की कहानी फिर नवाज पर काबू पा लेने की एक कोशिश और ठाकुर का बेवकूफी भरा काम और उसकी मौत….
रजिया बताने लगी कि कैसे एक ठाकुर की बेवकूफी की वजह से अब उसकी और हो ना हो रोहित की भी जान खतरे में है…
कल्पना को रजिया पर बहुत गुस्सा आया.. उसने बोला इसमें नवाज की आखिर क्या गलती है..
तुम ऐसे बाहर मर्दों से मरवाती फिरोगी तो वह क्या तुम्हारी आरती उतारेगा.. इस पर रजिया बहुत शर्मिंदा हुई..
और गर्दन नीचे करली..
कल्पना फिर बोली.. तुम्हें याद है ना रज़िया हमने अपने स्कूल में एक-दूसरे से यह वादा किया था कि शादी के बाद हम अपने पति की ही हो कर रहेंगे.. वरना तो स्कूल में शायद कोई मर्द ऐसा हो जिसके नीचे हम दोनों ना सोई हो..
वह बचपना था और जितना मजा करना था उतना कर चुकी..
शादी की जिम्मेदारी अलग होती है तुम अपने जिस्म की आग में बहकर कि कैसे कर सकती हो..

आखिर तुम्हे क्या हो गया था रज़िया..
रजिया फिर रोने लगी और कहती है ठीक है मैं तुम्हें बताती हूं यह कैसे हुआ..
आगे की कहानी रजिया की जुबानी..

यह बात आज से 2 महीने पहले की है.. तुम तो जानती हो सुषमा को जो तीन घर छोड़कर रहती है मेरे पड़ोस में..
कल्पना बोली हां बिल्कुल जानती हूं छिनाल को.. सुना है हर ऐरे गैरे के साथ सो लेती है..
रजिया बोली हां वही..
वह मेरी काफी अच्छी सहेली है.. और एक दिन वह मेरे पास आई और बोली रजिया मेरे साथ पास वाले गांव तक चलो ना..
मैंने पूछा क्या बात हो गई.. वह बोली तुम तो जानती हो मेरे पति कितने शक्की हैं.. मुझे अपनी एक सहेली से मिलने पास के गांव में जाना है और वह मुझे अकेले नहीं जाने दे रहे.. तुम साथ चलोगी तो वह बिल्कुल शक नहीं करेंगे..
मैं उसे बोली कि वह क्यों ना शक करें तुम कितनी ही बार तो खेतों में पकड़ी जा चुकी हो अपनी गांड मराती..
फिर भी तुम उसको बुरा कह रही हो..
सुषमा बोली अरे तुम वह सब छोड़ो बस मेरे साथ चलो..
थोड़ी ना नुकुर के बाद मैं मान गई..

गर्मी का समय था करीब 11:00 बजे हम दोनों अपने अपने घर से निकले..
गांव से करीब 3 किलोमीटर दूर निकलने के बाद.. वह खेत में बने एक पुराने से मकान की तरफ बढ़ने लगी..
मुझे उस पर शक हुआ.. मैंने उससे कहा सुषमा तुम मुझे झूठ बोलकर यहां लाई हो ना..
वह खिलखिलाकर हंसने लगी और बोली देखो रजिया बुरा मत मानना आज के बाद ऐसा नहीं करूंगी , बस आज साथ दे दो मेरा..
बहुत दिन से सूखी हु एकदम. मेरा पति तो हिजड़ा है..
खुद चोद नहीं सकता और दूसरों को चोदने नहीं देता…

मुझे समझ नहीं आया मैं उसे क्या बोलूं..

मैंने सोचा जो भी है जल्दी से खत्म करके वापस घर जाते हैं..

हम घर में घुसे तुम्हारे सामने एक खाट पर एक भारी भरकम आदमी बैठा हुआ था.. इसका नाम ही रोहित था..
कल्पना- यही है जो तुम्हें बाद में जंगल में ले गया..
हां लेकिन पूरी कहानी तो सुनो फिर मुझे गलत भी कह लेना तू…

रोहित सुषमा को देखकर बहुत खुश था और सुषमा उसे देखकर खिलखिला उठे.. फिर रोहित की नजर मुझ पर पड़ी.. मैं उस वक्त साड़ी पहन कर गई थी.. मुझे नहीं पता था कि यह सुषमा मुझे किसी गैर मर्द के सामने खड़ा कर देगी वरना मैं बुर्का पहन लेती…
रोहित ने मुझे ऊपर से नीचे तक खा जाने वाली नजरों से घूरा...
सुषमा कभी रोहित तो कभी मुझे देख रही थी.. तभी रोहित ने उसका हाथ पकड़ा और अपनी बाहों में उसे खींच लिया..
सुषमा उसकी बाहों में लिपट गई और किसी बेशर्म औरत की तरह उसके बदन पर हाथ फिर आने लगी..

रोहित अभी भी मुझे घूर रहा था.. मुझे यह अटपटा लग रहा था.. मगर ना जाने क्यों बहुत बुरा नहीं लग रहा था.. कई सालों बाद कोई गैर मर्द मेरे जिस्म को गंदी नजरों से घूर रहा था.. मेरा दिमाग कह रहा था कि यह सही नहीं है..
तभी मुझे देखते हुए उसने अपने हाथों से सुषमा की गांड को मसल दिया.. मेरे बदन में झुनझुनी फैल गई..
उसने मसला तो सुषमा को था मगर ना जाने क्यों उसका हाथ मुझे अपनी गांड पर महसूस हुआ…

अब मुझसे और ना देखा गया तो मैंने अपना मुंह दूसरी तरफ फिर आलिया..

तभी सुषमा रोहित को अपने साथ अंदर के कमरे में ले गई और उसने दरवाजा बंद कर लिया..
मैं वही बाहर खाट पर बैठ गई और उनके कार्यक्रम के खत्म होने का इंतजार करने लगी…

बहुत अजीब लग रहा था मुझे.. समझ नहीं आ रहा था कि मैं कैसे इस के साथ आ गई.. मुझे पता था वह अंदर अभी जिस्म का नंगा नाच कर रहे होंगे.. और मैं बाहर बैठकर उनकी चौकीदारी कर रही हूं..

ना चाहते हुए भी मेरा दिमाग अंदर होने वाली घटनाओं की तरफ खींचा जा रहा था.. दोपहर का सन्नाटा था गर्मी ने कहर ढाया हुआ था.. दूर-दूर तक इंसान क्या परिंदा भी नहीं दिख रहा था..

तभी मुझे अंदर से खिलखिलाने की आवाज आई.. मेरा दिमाग फिर उन दोनों की तरफ चला गया.. कभी मुझे एक छोटी सी सुषमा की चीख सुनाई दी.. मेरे बदन में एक लहर दौड़ जाती..

मैं समझ रही थी कि शायद रोहित सुषमा के जिस्म से खेल रहा है.. और सीमा को भी इसमें बहुत मजा आ रहा है जिसका सबूत उसकी चीख में मुझे बाहर सुनाई दिया..
ना चाहते हुए भी मैं उनके इस खेल में शामिल हो रही थी..

अब तक मेरी चूत में पानी छोड़ना शुरू कर दिया था.. मुझे यकीन था कि आस-पास कोई नहीं है तो मैं भी थोड़ी बेशर्मी से साड़ी के ऊपर से ही अपनी चूत को मसल दिया..
खुद का ही हाथ लगने से मेरी चूत और मचलने लगी... ना जाने क्या हो गया था इसे.. मानो आज पानी नहीं बांध टूटने वाला था…

मुझे अंदर से कभी सुषमा की तो कभी रोहित की आवाज़ आ रही थी..
मेरे और नवाज के बीच में भी आम तौर पर जब भी सेक्स होता था बहुत शांत होता था. कोई आवाज नहीं निकलती थी..
वह आते थे रात में.. खाना खाने के बाद अक्सर सोने से पहले.. मेरे ऊपर चढ़कर अपना ल** मेरी चूत में डाल कर 3:00 4 मिनट ही लाते थे और फिर मेरी चूत में अपना वीर्य भर देते थे..
इसके बाद वह पलट कर दूसरी तरफ सो जाते थे..
जब तक मेरी चूत गरम होती तब तक वह अपना वीर्य छोड़ चुके होते थे.. इसलिए इतना शोर शराबा कभी हुआ ही नहीं.. ऊपर से हमारी बेटी भी बगल में ही होती थी इसलिए कभी मौका ही नहीं मिला..

मगर आज ये मर्द और औरत के बीच का खेल.. और उस का शोर.. जो मेरे कानों में आ रहा था. वह मेरे जिस्म में उतरता जा रहा था..

मैं उन दोनों की आवाज में अब ध्यान देने लगी थी.. मैं अंदाजा लगा रही थी कि अंदर इस वक्त क्या हो रहा होगा..
तभी सुषमा की दबी दबी गूं गु सुनाई देने लगी.. बीच में कुछ चाटने जैसी आवाज आ रही थी.. मैं समझ गई कि इस वक्त शायद सुषमा रोहित का लंड चूस रही है..

यह घर काफी पुराना था यह घर जगह जगह से टूटा हुआ था.. मेरे अंदर की उत्सुकता अब मुझे उन टूटे हुए हिस्सों की तरफ ले जाने पर मजबूर कर रही थी..
ना जाने क्यों मैं अंदर झांक कर देखना चाहती थी.. ऐसा कुछ था नहीं जो मुझे मालूम ना हो मगर फिर भी मैं देखना चाहती थी कि क्या वह सच में इतना ही मजाक कर रहे हैं जितनी आवाज सुनकर मुझे लग रहा है…

कुछ देर इधर उधर देखने के बाद मुझे यकीन हो गया कि आस पास दूर दूर तक कोई इंसान नहीं है..
मैं धीरे से एक कोने में बनी खिड़की की तरफ से ली गई.. जिस का एक हिस्सा टूटा हुआ था..
इतना बड़ा हिस्सा था कि मेरा पूरा चेहरा दूसरी तरफ से कोई भी देख सकता था गर्दन तक…

मैंने न जाने क्यों उस वक्त यह बिल्कुल नहीं सोचा कि अगर सुषमा आया रोहित मुझे देखते हुए देख लेंगे तो वह मेरे बारे में क्या सोचेंगे..
मेरे जिस्म की आग ने अपने दिमाग पर काबू पा लिया था..
मैं खड़ी होकर उस खिड़की की तरफ चलने लग.. मेरा दिल थोड़ा तेज धड़कने लगा था.. मेरे दिमाग में अंदर होने वाले खेल को लेकर अलग ही ख्याल आ रहा था..

आखिर मैं उस खिड़की के पास पहुंच गई... मैंने बड़े ध्यान से खिड़की से अंदर झांका..


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