मेरी पड़ोस वाली भाभी
प्यारे दोस्तो !

मैं राहुल …आप लोगों को अपनी पहली कहानी सुनाने जा रहा हूं।

एक दिन मैं अपने घर की तरफ़ जा रहा था कि मैंने देखा कि कोई मुझे बुला रहा है। मैं उनके पास गया तो देखा कि वो मेरे पड़ोसी हैं और बहुत ज्यादा पीने की वजह से वो चल नहीं पा रहे हैं। मैंने अंकल की मदद की और उन्हें उनके घर तक छोड़ने गया। डोरबेल बजाई तो एक औरत ने दरवाजा खोला जिन्हें मैं भाभी बुलाता था और जब उन्होंने मुझे अपने पति के साथ देखा तो चिड़चिड़ाना शुरू कर दिया।

मैंने कहा- पहले अन्दर तो आने दो फ़िर जो मर्जी कह लेना, पर वो गुस्से से लाल हो रही थी। मैंने उनके पति को बेडरूम में ले जा कर लिटा दिया और वापिस जाने लगा तो मुझे अन्तर्वासना की एक कहानी याद आ गई और मैंने जानबूझ कर एक गिलास पानी मांगा तो भाभी पानी लेने चली गई। जब वो वापिस आई तो पानी पीने के बाद मैं उनसे बोला कि मुझे नींद आ रही है और मैं जा रहा हूं।

इसपर भाभी ने कहा - आप बहुत थक गए होंगे।

मैंने कहा- भाभी कोई बात नहीं।

मैं तो घर ही जा रहा था कि देखा भैया बुला रहे हैं, तो वो बोली कि इनका तो रोज़ का काम है और आज तो हद कर दी इन्होंने !

मैं उनको समझा कर जाने लगा तो भाभी ने पूछा कि आप चाय लेंगे?

मैंने कहा- इतनी रात को क्यों तकलीफ़ करती हो भाभी !

तो वो बोली- क्या तकलीफ़ ! बस दो मिनट लगेंगे।

मैंने कहा- ठीक है।

वो चाय बनाने चली गई और मैं टीवी देखने लगा। तभी टीवी पर एक ब्लू फ़िल्म आने लगी। करीब रात के 1 बजे और आप तो जानते हैं कि दिल्ली की कालोनी में देर से ब्लू फ़िल्म आती ही है। फ़िल्म देख कर मैं एक्साईटिड हो गया और मेरा लण्ड खड़ा हो कर पैन्ट की ज़िप तोड़ने लगा। इतने में भाभी चाय लेकर आ गई और मैंने चैनल बदल दिया। फ़िर हम चाय पीने लगे तो उनकी नज़र मेरी जीन्स पर गई तो मैं थोड़ा टेढा होकर बैठ गया। फ़िर वो मेरे जोब के बारे में पूछने लगी। मैं उनकी बातों का जवाब देता रहा।
अचानक उनके मुंह से छूटा कि तुम शादी कब कर रहे हो, तो मैंने कहा कि जैसे ही कोई लड़की मिल जाएगी। तो वो हंसने लगी और कहने लगी कि तुम्हारे लिए लड़कियों की क्या कमी है।

मैंने कहा- मुझे लड़की नहीं मैच्योर औरत चाहिए।

वो बोली- तुम पागल हो।

मैं चाय पीकर जाने को उठा तो वो बोली- क्या हुआ? नींद आ रही है?

मैंने कहा- नहीं भाभी, सुबह ड्यूटी पर जाना है।

तो वो बोली- बैठो, थोड़ी देर और गप्पें मारते हैं।

मैं बैठ गया। मुझे औरतों से बात करने में शरम आती है इसलिए कुछ बोल नहीं रहा था। जितना वो पूछती, केवल उसका ही जवाब देता और चुप हो जाता। तब वो बोली कि तुम इतना चुप क्यों रहते हो।

तो मैंने कहा- पता नहीं। अब मैं नोर्मल हो गया था पर पता नहीं भाभी का क्या इन्टेंशन था जो मेरी समझ में नहीं आ रहा था। शायद मैं गलत हूं पर आखिरकार मुझे लगा कि मुझे ही शुरूआत करनी पड़ेगी।

मैंने उनकी दुखती रग पर हाथ रख दिया और बोला कि भाभी आप लोग फ़ैमिली प्लानिंग कर रहे हैं क्या। वो बोली- नहीं ! ऐसी कोई बात नहीं है।

" फ़िर आपकी शादी को कई साल हो गए हैं और आपके घर में नया मेहमान नहीं आया?"

तब भाभी ने बताया कि तुम्हारे भैया ने डाक्टर से चेक अप कराया था और डाक्टर ने उनमें कमी बताई है, उस दिन से ये शराब पीने लगे हैं और रोज रात को ऐसे ही लेट आते हैं।

मैं उन्हें दिलासा देने लगा और वो रोने लगी।

मैं उनके पास गया और उनके कंधे पर हाथ रख कर कहा- आप चिन्ता ना करें, सब ठीक हो जाएगा। फ़िर मैं थोड़ा पीछे हट गया क्योंकि मेरे दिमाग में गंदे ख्याल आने लगे थे।

तब भाभी बोली- कहाना बहुत आसान है पर जिस पर बीतती है उसे ही मालूम पड़ता है।

फ़िर मैंने उनका हाथ पकड़ा और कहा- आप चुप हो जाएं, नहीं तो मैं चलता हूं।

वो बोली- नहीं … बैठो… कोई और बात करते हैं, और उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर बैठा लिया।

मैंने कहा कि आप कुछ दिनों के लिए अपनी मम्मी के पास चली जाएं तो आपका दिल बहल जाएगा। वो मेरे करीब आ कर बोली कि वहां जाने की सोच तो रही हूं पर कोई साथ नहीं मिल रहा है और इनसे कहा तो कहते हैं कि छुट्टी नहीं मिल रही है।

" ठीक है… मेरी शनिवार की छुट्टी रहती है, मैं आपको छोड़ कर रविवार को वापिस आ जाऊंगा। " मैंने कहा। फ़िर मैंने घड़ी की तरफ़ देखा तो मुझे लगा कि काफ़ी देर हो गई है और मैं चलने को उठा तो वो बोली- शनिवार तो कल ही है।

मैंने कहा- हां मैं तो भूल ही गया था। तो भाभी बोली- तभी तो कहती हूं, शादी कर लो, कब तक अकेले रहोगे तो मैं हंस दिया।

फ़िर भाभी मेरी होबीज़ के बारे में पूछने लगी। मैंने एकदम से उनके और हस्बैंड के सम्बंधों के बारे में पूछा तो वो बोली क्यों मूड खराब करते हो।

मैंने कहा कि बस पूछ ही रहा हूं। फ़िर वो उठने लगी तो मैं भी उठ गया और कहा कि भाभी आपको भी नींद आ रही है और मैं भी सोने जाता हूं।

फ़िर मैं अपने घर आ गया और सारी रात मुझे नींद नहीं आई। अगले दिन दरवाजा खटखटाने की आवाज से मैं उठा और दरवाजा खोला तो देखा कि भाभी खड़ी थी।

वो बोली- कैसे घोड़े बेच कर सो रहे हो और वो अन्दर आ गई।

मैंने पूछा कि भैया कहां हैं तो उन्होंने कहा कि ओफ़िस गए हैं, तुम घर आ जाओ, मैंने आलू के परांठे बनाए हैं।

मैं फ़्रेश होकर गया तो भाभी टेबल पर नाश्ता लगा रही थी। उन्होंने काली टी और कैप्री पहनी थी जिसमें उनके हिप्स साफ़ दिख रहे थे।मैंने अपना ध्यान वहां से हटाया और पूछा कि भाभी आज मुझ पर आप इतनी मेहरबान कैसे?
तो वो बोली- बस ! ऐसे ही।

फ़िर मैं नाश्ता करने लगा। खाते खाते मुझे धस्का सा लगा तो वो भाग कर मेरे पास आई और मेरी पीठ मसलने लगी और मुझे पानी पिलाया। उनका हाथ मेरी कमर पर नाच रहा था। मैंने कहा- अब ठीक है।

वो बोली- तुम खाओ, मैं तुम्हारे पास ही बैठ जाती हूं। उनका हाथ अभी भी मेरी पीठ पर था। खाते खाते मैंने जान बूझ कर अपना हाथ उनके बूब्स पर लगा दिया तो उन्होंने मेरी इस हरकत को नज़र अंदाज़ कर दिया। मैं हाथ धोने को उठते हुए अपने हाथ को उनकी जांघ पर रख दिया। हाथ धोने के बाद मेरे पीछे से भाभी तौलिया लेकर बोली - लो इससे पौंछ लो, और जैसे ही मैं मुड़ा तो वो मेरे बिल्कुल पीछे ही खड़ी थी और मेरे लिप्स उनके लिप्स से टकरा गए और वो शरमा गई। मैंने सोरी बोला तो वो बोली कोई बात नहीं।

नाश्ते के बाद हम लोग इधर उधर की बातें करने लगे और भाभी धीरे धीरे मेरे पास आ गई। हम दोनो टीवी भी देख रहे थे। तभी अचानक टीवी पर एक किसिंग सीन आ गया। भाभी मुझ से पूछने लगी कि क्या तुमने किसी को किस किया है?

मैंने कहा- हां ! किया है।

तो भाभी ने पूछा- किस के साथ?

मैंने कहा- आपको ! अभी अभी ।

तो वो हंस पड़ी और कहने लगी कि वो कोई किस है।

मैंने कहा - किस्मत से ज्यादा कभी किसी को नहीं मिलता।

तब उन्होंने कहा- ऐसा नहीं है, वो तो महज़ एक घटना थी।

मैंने कहा- जो समझ आए वो दुर्घटना और जो कुदरती हो वो घटना !

और वो हंस पड़ी , मुझे छूने लगी तो मैने भी उनका हाथ पकड़ कर कस कर दबाने लगा। वो शरमाने लगी। मैने पूछा - क्यों क्या हुआ? भाभी बोली- कुछ हलचल हो रही है।

मैंने पूछा- कहां?

तो वो बोली- नीचे।

मैंने देखा कि वो मेरे लण्ड को देख कर कह रही है।

मैंने तभी कहा- जब आप जैसी खूबसूरत औरत पास हो तो मेरा क्या भगवान की भी नियत डोल जाए।

वो बोली- अच्छा! क्या तुम्हें मैं इतनी खूबसूरत दिखती हूं?

मैंने कहा- हां! आप का फ़ीगर- वाउ ! 32 30 36 ब्रिलिअन्ट !

तो वो बोली- नहीं ! तुमने नापने में गलती कर दी- मैं 36 20 32 हूं।

तो मैंने कहा- क्यों झूठ बोलती हो।

तो उन्होंने कहा- खुद ही देख लो।

मैने कहा - कैसे?

उन्होंने कहा क्लि बताती हूं, उन्होंने झट से अपनी शर्ट उतार दी और हाथ में लेकर बोली- देखो ! हैं ना 36 !

मैंने कहा कि भाभी चाहे कुछ भी हो, इनका साईज़ है जबरदस्त ! मैं इन्हें छू लूं?

वो बोली- रुको ! मैं अभी आती हूं, और वो टायलेट जाकर वापिस आईं। मैं उनके पास गया और उनके होठों को चूमने लगा और ऐसी किस की कि मेरे ही रौंगटे खड़े हो गए। फ़िर मैं उनके बूब्स कस के दबाने लगा। वो सिसकारियां भरने लगी। अब मैंने उनके बूब्स को चूसना शुरू कर दिया तो वो जैसे पागल हो गई। शायद मैं इसी तरह करता हूं और उनके निप्पलों पर अपनी जीभ चलाने लगा। उन्होंने मेरे शोर्ट्स में हाथ डाल कर मेरा लण्ड पकड़ लिया तो मैंने कहा कि भाभी इसे चूसो, तो भाभी मना करने लगी। पर जब मैंने जोर दे कर कहा तो उन्होंने अपनी जीभ मेरे लण्ड पर छुआई। इससे उनको और भी मज़ा आ गया और कहने लगी और चूसने दो, तो मैने कहा- पहले तो आप मना कर रही थी- अब क्या हुआ?

उन्होंने कहा- अच्छा लग रहा है। वो मेरे लण्ड को काफ़ी देर तक चूसती रही मगर मैं नहीं झड़ा। मैं उनकी चूत में उंगली डाल कर अन्दर बाहर करने लगा तो वो बहकने लगी और मुझे नीचे दबाने लगी।

तभी मैंने उनकी चूत पर मुंह रख दिया और कुछ देर तक उनकी प्यासी चूत को चाटता रहा। इसी बीच वो दो बार झड़ चुकी थी और अपना सारा पानी मेरे मुंह में भर दिया था।

उन्होंने मुझे कहा कि वो अब थक गई है। तब मैंने अपना लण्ड उनके मुंह में डाल कर गीला कर लिया और हिलाने लगा। वो तड़पते हुए बोली - क्यों तड़पा रहे हो, डालो ना !

मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और उनके भी कपड़े उतार कर पूरा नंगा कर लिया।

अब उनकी चूत के मुंह पर लण्ड रख कर एक झटका दिया, जिससे वो चिल्ला पड़ी और कहने लगी- अरे ! आराम से डालो। मुझे कुछ भी महसूस नहीं हुआ, मैंने फ़िर एक जोरदार झटका मारा और वो रो पड़ी। उनसे बरदाश्त नहीं हो रहा था मेरा मोटा लण्ड।

मैंने कहा- रुको ! अभी दर्द कम कर देता हूं, और मैंने उन्हें अपने उपर बुला लिया। वो मेरे ऊपर आकर मेरे लण्ड पर अपनी चूत को टिका कर धीरे धीरे डालने लगी और तेज़ तेज़ आवाज़ें निकालने लगी आह ह उ उ ऊफ़्फ़ च चो चोद चोद्…आह। अब मैं समझ गया कि वो मूड में आ गई हैं। अभी मेरा आधा लण्ड ही अन्दर गया था। मैंने उन्हें ऊपर उठाया और उनकी कमर को पकड़ कर नीचे से ही एक झटका दिया जिससे वो चिल्ला पड़ी- उई मां ! इस बार मेरा पूरा लण्ड उनकी चूत में समा गया था। थोड़ी देर मैंने कोई हरकत नहीं की पर बीच बीच में मैं उनके बूब्स दबाता रहा। जब वो सामान्य हुई तो उन्होंने तेज़ी से कमर चलानी शुरू कर दी और जल्दी ही वो एक बार फ़िर झड़ गई।

वो मुझ से बोली कि तुम अब ऊपर आ जाओ। मैंने ऊपर उनकी टांगों के बीच में आ कर अपना लण्ड फ़िर से उनकी चूत में डाल दिया और तेज़ी से अपनी कमर को हिलाने लगा। उन्होंने अपने दोनो पैर ऊपर कर लिए जिससे उनकी चूत में ढीलापन महसूस होने लगा। मैंने कहा- भाभी पैर नीचे कर लो और हमने अपने पैर आपस में जोड़ लिए और वो कमर उठा कर मुझसे चुदवा रही थी। मैं भी पूरी तन्मयता से उनको चोदे जा रहा था। मुझे लगा कि अब मैं झड़ने वाला हूं तो मैंने भाभी को बताया। उन्होंने कहा कि अन्दर मत झाड़ना, मेरे मुंह में झाड़ दो। भाभी ने मेरा लण्ड अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी। मैंने पूरे वेग से ढेर सारा वीर्य उनके मुंह में डाल दिया जिससे उनका पूरा मुंह भर गया। बाद में मैंने उनकी चूत को चाट चाट कर ठण्डा कर दिया।

तो यह थी मेरी भाभी की चुदाई की कहानी
 


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