मेरी पहली चुदाई
मैं जन्म से एक गाँव की हूँ, अपनी चालाक माँ की तरह मैं एक बहुतचालाक लड़की निकली थी, लड़के क्या मुझे फ़ंसाएँगे, मैं उनको अपने जालमें फ़ंसाना जानती हूँ। मैं अभी-अभी एक बच्चे की माँ बनी हूँ, दस महीनेपहले !
मेरा चुदना स्कूल से चालू हो गया था, संस्कार ही वैसे थे, पापा के विदेशजानेके बाद और फिर चाचा भी पीछे-पीछे विदेश च्ले गए। पीछे मटरगश्तीके लिए दो बला की खूबसूरत बीवियाँ छोड़गए मेरे बापू और चाचू यानि मेरीमाँ और चाची! खर्चा वहाँ से आता था लेकिन बिस्तर यहीं किसी और केसंग सजाती थी दोनों!
वैसे तो मैं काफ़ी छोटी थी जब एक लड़के ने मुझ पर हाथ फेरा था, तबमेरी छाती पर नींबू थे, उसका नहीं मेरा कसूर था, फिल्में देख देख मेरा भीमन फ़िल्मी बन गया था। वो बेचारा तो मुझसे भागता था मगर मैं उसकेपीछे पड़ गई हाथ धोकर, जब उसका जवाब नहीं मिला तो एक दिन मैंउसके घर चली गई। वो मेरा पड़ोसी था, अकेला घर था, मैंने उसका कालरपकड उसको खींचा और कहा- लड़का है या पत्थर? एक लड़की तुझे खुदप्यार करना चाहती है और तू है कि बस देखता ही नहीं?
"तुम अभी बहुत छोटी हो!"
"कौन कहता है? कहाँ हूँ छोटी?"
उठकर उसके होंठ चूम लिए और बोली- देखो, मुझे सब कुछ पता है किलड़का लड़की को क्या करता है।
मैंने उसकी टीशर्ट उतार दी, वो गुस्सा होने लगा तो मैंने फ्रॉक उठा करकहा- यह देखो यहाँ भी बाल आने लगे हैं!
मैं बिना पैन्टी के थी।
"तू पागल हो गई क्या?" मैंने ज़बरदस्ती उससे हाथ फिरवाया लेकिन बाद में वो बहुत पछताता रहा किक्यूँ उसने मेरी पतंग की डोर छोड़ी। वो मुझे हवा में उड़ाना चाहता था लेकिनमैं औरों से उड़ने लगी थी।
धीरे धीरे नींबू अब अनार बन गए, वो भी रसीले ! मैं खुलेआम लड़कों कोलाइन देती थी, सभी मेरी इस अदा के दीवाने बन गए। कुछ ही दिनों मेंअनारों के आम बन गए वो भी तोतापरी, क्यूंकि तोतापरी आगे से तिरछेहोते हैं, मेरे चूचूक भी तोतापरी बन गए थे।
हम तीन सहेलियाँ थी, जब अकेली बैठती तो एक दूसरी की स्कर्ट उठवा करचूतों को देखती। गुड़िया और कम्मो की चूत मेरी चूत से थोड़ी अलग थी,उनकी झिल्ली बाहर दिखने लगी थी, वहीं मेरी झिल्ली लटकती नहीं थी।
तभी हमारे स्कूल में मर्द स्पोर्ट्स टीचर आये, पहले हमेशा कोई औरत हीउस पोस्ट पर आती थी।
उसको नई-नई नौकरी मिली थी, बहुत खूबसूरत था, स्मार्ट था, हमलड़कियों ने उसका नाम चिपकू डाल दिया क्योंकि वो किसी न किसी मैडमसे बतियाता रहता था।
उधर मैं उस पर जाल फेंकने लगी, उसको अपनी जान बनाने के लिए ! मैंस्टुडेंट, वो टीचर था लेकिन मेरी ख़ूबसूरती उस पर हावी पड़ने लगी, वोजान गया था कि मैं उस पर फ़िदा हुई पड़ी हूँ। हमारा स्कूल सिर्फ लड़कियोंका था, वो अभी नया था इसलिए भी और वैसे भी अपनी रेपो बनानी थी तोवो मुझसे दूरी बना कर रख रहा था मगर मुझे उस पर मर मिटना था,कच्ची उम्र की मेरी नादान दीवानगी ने मेरे दिमाग पर पर्दा डाल रखा था।
लेकिन वो भी मुझे चाहता है, यह मैं जानती थी। छुटी के वक़्त वो सबसेबाद में हाजरी लगाता था।
एक दिन जब सारे टीचर चले गये, मैं तब भी अपनी क्लास में बैठी रही,जब वो स्पोर्ट्स रूम बंद करके आया, मैं क्लास से निकली। मुझे देख वोथोड़ा हैरान हुआ।
"गुड आफ्टर नून सर!" मैंने कहा।
उसने भी जवाब दिया। स्कूल में और कोई नहीं था, मैं उसकी इतनी दीवानीहो गई थी कि मैं उसके पीछे दफ़्तर में चली गई।
"तुम घर क्यूँ नहीं जाती?"
"आप जब सब जानते हैं तो फिर यह सवाल क्यूँ?"
"देख, मैं यहाँ नया हूँ, क्यूँ मेरी बदनामी करवाना चाहती है सबके सामने?"
"कौन है यहाँ? और आप बताओ, कभी स्कूल टाइम मैंने आपको कुछ कहाहै?"
मैंने अपना बैग परे रख दिया, उसके करीब गई, बिल्कुल सामने उनके कंधेको पकड़ते हुए उनके सीने से लग गई।
वो परेशान हो गया था, मैंने दोनों बाहें अब कस दी। मेरी जवानी का दबावपड़ता देख वो पिंघलने लगा, उसने भी मेरी पीठ पर हाथ रख लिए, उसकेहाथ रेंगने लगे थे।
मेरी दीवानगी मालूम नहीं कैसी है, हालाँकि यह मेरा ऐसा दूसरा अवसर था।
मैंने अपने अंगारे से तप रहे होंठ उसके होंठ पर लगाए तो वो और पिंघलगया, उसने अपना हाथ मेरी कमीज़ में घुसा दिया और मेरे एक मम्मे कोदबाया।
यह पहली बार था कि मेरे मम्मा दबाया गया, मैंने उसके सर पर दबावडाला अपने मम्मों पर ताकि वो मेरे मम्मे चूसे और निप्पल चूसे
वो वैसा ही करने लगा, उसने मेरा हाथ पकड़ा और अपने लौड़े पर रखदिया। किसी आहट सुन अलग हुए, मैं प्रिंसिपल के निजी वाशरूम में घुसगई और वो वहीं बैठ रजिस्टर कर पन्ने पलटने लगा।
वो स्कूल का चौकीदार था, जब वो गया तो हम वहाँ से निकले और उसनेअपना कमरा दुबारा खोला, मैं भाग कर उसमें घुस गई।
उसने मुझे बिठाया और खुद बाहर गया, जाकर चौकीदार से कहा कि दफ्तरवगैरा बंद कर दे, मैं अपना थोड़ रजिस्टर का काम पूरा करके जाऊँगा।
वो वापिस आया, मैंने दोनों बाहें उसके गले में डाल दी और उसके होंठचूमने लगी। उसने मेरी शर्ट उतार और फिर ब्रा को खोला, मेरे दोनों मम्मोंको चूसने लगा।
मैंने भी उसकी जिप खोल दी, उसने बाकी काम खुद किया, लौड़ा निकाललिया, पहली बार जोबन में पहला लौड़ा पकड़ा और वहीं बैठ कर चूसने लगी।
बहुत सुना था लौड़ा चुसाई के बारे में! सर का लौड़ा था भी मस्त! खूबचूसा और फिर टांगें खोल दी। ये सब बातें भाभी से सुनी थी, अपनी कज़नभाभी से!
जब सर ने झटका दिया, मेरी चीख निकल गई लेकिन मैंने खुद को संभाललिया। यह फैसला मेरा था, मुझे मालूम था कि पहली बार दर्द होगा, उसकेबाद मजा ही आता है और मर्द मुट्ठी में आ जाता है। जल्दी मुझे बहुत मजाआने लगा।
उस दिन जब मैं स्कूल से निकली तो बहुत खुश थी। मैं कलि से फूल बनगई थी और अपनी दीवानगी की हद पूरी कर ली थी।अपनी सर को पटानेवाली जिदपूरी की !
दोस्तो, यह तो है मेरी पहली चुदाई !


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