मेरी डायरी के कुछ पन्ने
थोड़ी देर बाद मैंने दीदी के चुन्चियों से खेलते हुए पूछा - दीदी तुम कब जगी ?
दीदी - तुम जब बाहर से अन्दर आकर दरवाजा बंद कर रहे थे , फिर तुम जब खिड़की बंद कर रहे थे तब मेरे मन में संदेह उठा की ये लड़का क्या कर रहा है ,फिर मेरा ध्यान मेरे साडी और पेटीकोट पर गया जो मेरे जांघो तक चढ़ी हुई थी , मैं अपने कपडे ठीक करने का सोंच ही रही थी की तुम मेरे पैरों के पास आकार खड़े हो गए ,फिर तुम झुककर टॉर्च से मेरी बुर देखने लगे , जी में आया की तुम्हे थप्पर मार दूँ लेकिन टॉर्च की मध्यम रौशनी में तुम्हारा वासना से तमतमाया चेहरा देखकर मन पसीज गया , मुझे अपने ऊपर गर्व हुआ और एक साल से मेरी अनचुदी बुर मचलकर गीली होने लगी ,मेरा दिल धड़कने लगा की तुम अगर मुझे चोदोगे तो मैं कैसे प्रतिक्रिया करुँगी ,फिर तुम जब मेरी बुर को अच्छे से देखने के लिए साडी और पेटीकोट को ऊपर उठाने का प्रयास कर थे तो मैं कुनमुना कर तुम्हारा काम आसान करने की कोशिश की लेकिन तुम डरकर वापस अपने जगह पर लेट गए ,मैं सोंचने लगी ये तो बड़ा डरपोक निकला तभी तुम अपने पैरो को मेरे पैरों से सटाकर उसे गिराने लगे तो मैं समझ गए की तुम क्या चाहते हो ,मैंने अपने हांथो से साडी को कमर तक उठाकर मैंने दोनों जांघो को छितरा दिया ताकि तुम जब दूसरी बार उठकर देखो तो मेरी फैली चुदासी बुर का आमंत्रण ठुकरा न सको लेकिन तुम तो जैसे मेरी धर्य की परीक्षा ले रहे थे बस ऊँगली बुर से सटाकर हटा लिया और फिर लेटकर अपना घुटना मेरी बुर से लगभग सटा दिया जो की मेरे बर्दास्त से बाहर हो रहा था ,मन कर रहा था की तुम्हारे ऊपर चढ़ जाऊं और जी भरकर अपनी बुर की प्यास बुझा दू इसलिए जब मैं तुम्हारी तरफ करवट बदली और तुमने अपना पैर सीधा किया तो मैंने महसूस किया की तुम्हारा लंड खडा है और नंगा है फिर मैंने अपनी बुर को तुम्हारे लंड पर धीरे धीरे घिसना शुरू किया तब जाकर तुम्हे सिग्नल मिला और तुमने मुझे बांहों में भर लिया और मुझे जिन्दगी की सबसे मस्त चुदाई का आनंद दिया |
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दीदी की बात सुनकर मै फिर गरम हो रहा था और मेरा लंड तनने लगा था जिसे बड़े प्यार से दीदी सहला रही थी | वो बोली – एक बात है तुम बड़े जबरदस्त चोदु निकलोगे , मै तो सपने में भी नहीं सोंच सकती थी कि एक किशोर से लड़के का इतना बड़ा हथियार भी हो सकता है , एक ही बार में तुने मेरी बुर का हर अनछुआ कोना –कोना रगड़ दिया |
मैं बोला - दीदी मैं भी हैरान हूँ कि आपकी चूत मेरा सारा लंड गटक कैसे गयी , क्या जीजाजी का भी इतना ही बड़ा है ?
दीदी - नहीं रे ! उनका तो तुमसे थोडा छोटा ही है लेकिन तेरा उनसे दूना मोटा है , देख मै तेरा तो अपनी पूरी मुठ्ठी में भी नहीं पकड़ पा रही हूँ और मेरे देवर का तो तेरे सामने पिद्दी सा है , वो लंड भी दो साल से नसीब नहीं हुआ , दो साल से मेरा देवर भी काम के सिलसिले में बाहर रहता है अपनी बीबी के साथ , साला अब मुझे याद भी नहीं करता है , पिछली दिवाली में घर आया था , मैंने अपनी बुर को चिकना करके रखा था कि रात में किसी न किसी समय आकर मेरी बुर जरूर चोदेगा ,मै साड़ी रात अपनी बुर सहलाती रही परन्तु वो साला , बहनचोद , बीबी का गुलाम नहीं आया फिर मैंने अपनी उँगलियों से रगड़ कर ही अपनी बुर कि खुजली शांत क़ी |
मैं - दीदी आश्चर्य है क़ी लगभग साल भर से आपकी बुर चूड़ी नहीं है फिर भी आपने इतनी आसानी से मेरा पूरा लौड़ा ले लिया
दीदी - हंसते हुए ..ये सब बैगन और मूलियों का कमाल है |
घर में जब कभी मोटा बैगन , मूली या खीरा दीखता है तो मै जरूर उसे अपनी चूत में ले लेती हूँ |
दीदी की बातें सुनकर मेरा लंड फुफकारने लगा और मै दीदी के ऊपर चढ़ गया , दीदी ने भी अपनी पैरों को फैलाकर अडजस्ट किया और मेरा लंड पकरकर अपने हांथो से बुर के छेद पर भिड़ा दिया और मुझे छोड़ने केलिए बोली | मैंने जोर से ठाप मारते हुए अपना लंड दीदी की बुर में चांपा | दीदी आ ..आ ..ह .ह .ह करते हुए कराही फिर मैंने उनकी एक चूंची को अपनी हथेली में भरकर मसलने लगा और दूसरी चूंची को मुंह में भरकर चुभलाने लगा और जब मैं उनके निप्पलस को चुभलाते हुए दांतों से हलके से काटता साथ ही नीचे से जोर का ठाप मरता तो वो सिसकते हुए प्यारी झिडकी देती – इ.इ इ.....श श श .....धी .रे ..ब..ह..न …चो ..द. धी ..रे .. अपनी ..बहन .. को इतनी ..बे ..द अ .र .दी से .. ना ..चो …द …में ..री…फ ..ट…जा ..आ ..इ ...गी … मैंने भी दीदी को गालियाँ निकालना शुरू किया ..साली …. बुरमरानी…अपनी बूर तो पहले ही बैगन से फा ..ड़..चुकी है और ..भाई का लंड लेते हुए नखड़ा करती है ..रंडी ..आज तो मै तेरी बूर का कचूमर निकालकर ही दम लूंगा आ .आ …गालियाँ सुनकर दीदी काफी उत्तेजित होगयी और मेरी पीठ को अपने बांहों के घेरे में कस लिया और नीचे से चुतर उठा उठा कर मेरे करारे धक्को के साथ समन्वय बिठाने लगी फिर उनका शरीर अकड़ने लगा और वो झड गयी लेकिन मै अभी झडा नहीं था , झड़ता भी कैसे अभी थोड़ी देर पहले तो मैंने अपना पूरा माल उनकी चूत में निकाला था
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इसलिए उसी रफ़्तार में उन्हें चोदता रहा |दीदी के झड़ने के कारण उनकी बूर काफी गीली हो गयी थी इसलिए मेरा लंड बिना किसी अवरोध के बुर के आख़िरी हिस्से तक चला जा रहा था और तब सुपाडे पर जो दबाब बन रहा था वो आनंद की चरम सीमा थी | कुछ ही देर में दीदी फिर गरम होकर अपना चुतर उछालने लगी थी और थोड़े पलों में ही फिर उनका शरीर अकड़ने लगा , मुझे लगा जैसे वो फिर झड रही है | चूँकि मै भी झड़ने को बेताब था इसलिए मै लगातार धकाधक पेले जा रहा था और वो लगातार अस्फुट शब्दों में बडबडबडाये जा रही थी ,उनकी आंखे बंद थी और मै उनके होंटो और गालों को चुसे जा रहा था ,वो थोड़ी देर मेरा साथ देती और फिर शांत हो जाती | फिर मेरा शरीर भी तनने लगा और मै झड़ने लगा ,मैंने अनुमान लगाया की मेरे झाड़ते –झाड़ते दीदी कम से कम 6/7 बार आ चुकी थी | फिर मै उनके शरीर से उतारकर चित्त लेटकर गहरी साँसे लेने लगा और दीदी अपने सूखे होंटो पर जीभ फेर रही थी फिर वो बिस्तर से उठी तो मैंने पूछा क्या हुआ ? वो बोली – पानी पीने जा रही हूँ | वो पानी पीकर कब लौटी मुझे पता नहीं चला क्योंकि मैं सो चुका था |
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मेरी नींद खुली तो मैंने अपने लंड पर दबाब महसूस किया | सुबह के 4:30 बज रहे थे और दीदी मेरे ऊपर चढ़कर मेरे लंड पर उछल -उछलकर मुझे चोद रही थी | मैंने दोनों हाथ बढ़ाकर उनकी ऊपर नीचे होती गदराई चूंचियों को अपनी हथेली में भरकर मसलना शुरू कर दिया , बड़ा मजा आ रहा था , मुझे पहली बार महसूस हुआ की नीचे लेटने का आनंद क्या है | फिर दीदी थक कर , चोदना बंद करके आगे झुक कर अपनी चुचकों को बरी -बारी से मेरे मुंह में देने लगी जिसे मै चुभलाने लगा और अपने कार्यमुक्त हाथों को दीदी के चूतरों पर जमाकर उँगलियों से उनके गांड के छेद को कुरेदना शुरू कर दिया और नीचे से अपने कमर को उठा -उठा कर दीदी को चोदना चालु कर दिया | बीच -बीच में अपनी एक ऊँगली दीदी के गांड के छेद में पेल देता तो वो चिहुंक कर सिसक उठती … बड़ा मजा आ रहा था कि तभी बाहर से आवाज आयी - रागनी !! सुबह होने वाली है , खेतों में नही जाना है क्या , सारी रात भाई से चुदाते ही रहेगी क्या ??( औरतों का हुजूम खेतों में टट्टी के लिए उजाला फैलने से पहले जा रहा था ) मै घबराया कि इनलोगों को कैसे पता चला कि दीदी मेरे से चुद रही है , फिर ध्यान आया कि वो लोग भाभियाँ है और दीदी को मजाक में गालियाँ देने के लिए एसा बोल रही है | दीदी भी आवाज सुनते ही झट से कूदकर मेरे ऊपर से उतर गयी | मेरा लंड फ ..क .. कि आवाज के साथ दीदी के बुर से निकला और स्प्रिंग कि तरह उछलकर खडा होकर हवा में लहराने लगा | दीदी बिस्तर के बगल में खड़ी होकर अपना कपड़ा ठीक करने लगी और मुझे लंड ढकने का इशारा करने लगी | बड़ी मुश्किल से अपने खड़े लंड को दबाकर अपने पैंट में ठुंसा तब दीदी दरवाजा खोलकर उन औरतों के साथ बाहर चली गयी |
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अगले दिन दहेज़ के सामानों की नुमाइश शुरू हुई फिर सम्बन्धियों के कपडे की बारी आयी तो मेरे हिस्से में धोती और कुरते का कपड़ा आया | दीदी , मामी और भाभियाँ हंसने लगी और बोली कुरता तो सिलके तैयार होगा , धोती अभी पहनो | उनके काफी जिद करने पर मैंने धोती लुंगी की तरह लपेट लिया ,फिर मैंने महसूस किया की धोती में काफी आराम रहता है इसलिए मैंने फैसला किया की रात को अब धोती ही पहनकर सोऊँगा | अगली रात भी दीदी मेरे साथ ही सोयी और मैंने उस रात उनको चार बार चोदा |तीसरे दिन से मेहमान सारे जाने लगे और मैं दुखी होने लगा की आज शायद मुझे मौक़ा न मिले | दीदी सचमुच उस रात मेरे साथ नहीं सोयी लेकिन मैंने दरवाजा अन्दर से बंद नहीं किया था , वो देर रात को आयी और बोली – राजन ! जल्दी से चोद ले भाई !! मेरा पेट दुःख रहा है , मेरा मासिक कभी भी आ सकता है | उसके बाद मैंने तूफानी गति से दीदी को पेलना शुरू किया फिर भी मेरे पलते -पलते ही उनका मासिक शुरू हो गया ,जब झड़कर मैंने अपना लंड निकाला तो उसपर खून की बुँदे चमक रही थी |
अगले दिन सारे मेहमानों के चले जाने के बाद मैंने भी जाना चाह तो मामी ने दो चार दिन और रोक लिया | दीदी भी मेरे जाने के बारे में सुनकर उदास हो गयी | तभी मेरे दिमाग में एक आईडिया आया की जीजाजी तो है नहीं , इसलिए दीदी को ससुराल जाने की कोई जल्दी तो नहीं है ,महीने दो महीने बाद जायेगी ,तो क्यों नहीं दीदी को भी साथ अपने घर माँ से मिलाने के बहाने ले चलूँ , वहाँ माँ के कालेज जाने के बाद हम दोनों घर में अकेले रहेंगे और जैसे चाहे मस्ती करेंगे | ये बात मैंने दीदी को बताया तो उनका उदास चेहरा खिल उठा | फिर वो मामी से मेरे साथ जाने की जिद करने लगी की पता नहीं बुआ ( मेरी माँ ) से फिर कब मुलाक़ात होगी | मामी के राजी होने के बाद तीसरे दिन दीदी चलने की तैयारी करने लगी | जाने से पहले वो कमरे में मेरे पास आयी और मेरे से फुसफुसाते हुए बोली –आज मेरा मासिक भी ख़त्म हो गया , मैंने फट से उनका गाल चुमते हुए साडी उठाकर अपना लंड उनके हलकी झांटो भरी बुर में पेलते हुए उनके कान में कहा – दीदी ! चूत चिकनी कर लो , चोदने में मजा आयेगा | वो मेरे लंड पर अपनी बुर ५-७ बार रगड़कर हटा लिया और फिर मेरा लंड उमेठते हुए बोली - हट बदमाश ! यहाँ नहीं वहीँ चिकना करुँगी | बस में मैंने उनसे पुचा -दीदी निरोध ले लूँ तो वो बोली – नहीं रे ! निरोध में मजा नहीं आता है , पुरे तीस दिन की गोलियां आती है , तू गोलियां ही खरीद लाना और एक हेयर रिमूवर भी ले आना |जब हम घर शाम को पहुंचे तो माँ दीदी को देखकर बहुत खुश हो गयी , फिर वो दोनों बात करने लगे और मै बाजार दीदी की चीजे खरीदने चल पड़ा |
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बाजार से लौटते वक्त मेरा दोस्त समीर मिला ,हाल चाल जानने के बाद जब मै उससे पूछा कि वो आजकल क्या कर रहा है तो वो बोला – बस रिजल्ट का इन्तजार है , उसके बाद कालेज में एडमिशन लूंगा , आजकल सभी कि छुट्टियां है इसलिए वहां लौज (जहां ढेर सारे स्टुडेंट किराए पर रहते है ) में खूब धमाचौकारी होती है , हफ्ते में एक रात बी एफ आता है , आज भी आया है , इसी सब में मन लग जाता है | मैंने पूछा –यार ये बी फ क्या होता है ? वो मेरी ओर आश्चर्य से देखता हुआ बोला - यार बी एफ यानी ब्लू फिल्म .. तुम्हे नहीं पता ? उसमे बिलकुल नंगे होकर लड़का लड़की को चोदते हुए दिखाया जाता है | मुझे उसके कहे पर विश्वास नहीं हुआ कि बिलकुल नंगा कैसे दिखा सकता है , इसलिए पूछा – सच में ? उसने कहा – और नहीं तो क्या ? तुम्हे देखना है तो चल मेरे साथ मेरे लौज | मै आश्चर्य ओर कौतुहल के कारण उसके साथ चल पडा | वहां सचमुच वी सी आर आया हुआ था ओर सब लोग खाना खा रहे थे , उसके बाद बी एफ का प्रोग्राम होने वाला था , मै तब तक समीर के रूम में बैठ गया ओर वो खाना खाने चला गया , तभी मेरी नजर तकिये के नीचे एक पतली सी मैगजीन पर पडी , तकिया हटा कर देखा तो मैगजीन के साथ दो मटमैले रंग कि किताब भी पडा था जिसका शीर्षक था – मचलती जवानी ओर भींगा बदन , उसके लेखक के नाम पर मस्तराम लिखा था | पहले मैंने मैगजीन देखा जिसमे नंगे अंग्रेज लड़के लड़कियों कि तस्वीर थी , जैसे ही मैंने पन्ने पल्टे तो मै दंग रह गया – एक लड़की दो लड़कों के साथ मजे ले रही थी , एक उसे चोद रहा था दूसरा उसे अपना लंड चूसा रहा था , मुझे रोमांच हो रहा था साथ ही घिन भी आ रहा था कि पेशाब करने वाला लंड क्या चूसने कि चीज है ..छि.. छि! फिर मैंने कहानी कि किताब को पलटा –उसमे पहली कहानी एक रिक्शावाला का एक मेमसाब के साथ चुदाई का था और उसमे निरंतरता नहीं था क्योंकि अगले कुछ पन्नो में एक पठान एक गाँव कि छोरी को पेल रहा था लेकिन अगली कहानी एक भाई बहन कि चुदाई कि थी जिसे पढते पढते मेरा लौड़ा तनकर खडा हो गया फिर दुसरी किताब देखा जिसमे एक माँ बेटे का और दूसरी कहानी एक बहु का अपने ससुर के साथ चुदाई का था | मै सनसनाहट से भरता जा रहा था कि तभी समीर खाना खा कर कमरे में आया ओर मेरे हांथो में किताबे देखकर हँसने लगा | मैंने सकुचाते हुए किताबों को बिस्तर पर रख दिया ओर बोला – यार इसमें तो खुल्लम -खुल्ला लिखा है , मेरा तो खडा हो गया , तुम्हारा खडा होता है तो तुम क्या करते हो ? मुठ मारता हूँ और क्या ? फिर उसने मुझे मुठ मारना बताया और फिर मुझे बी एफ दिखाने ले गया | फिल्म में जैसा उसने बताया था वैसे ही बिलकुल नंगे लड़के लडकियां खुलेआम चुदाई कर रहे थे अंग्रेज लड़की लड़के का लंड चूसती तो लड़का भी अपनी जीभ निकालकर लड़की का बुर चूसता बल्कि एक सीन में तो तीन लड़के एक ही लड़की को पेल रहे थे …एक चूत चोद रहा था , दुसरा गांड मार रहा था और तीसरा अपना लंड चूसा रहा था | मुझे पहली बार एहसास हुआ कि औरतों कि गांड भी मारी जा सकती है ..मेरे मन ने कल्पना में उड़ान भरी कि मै तो इस सुख से अभी तक वंचित हूँ ..आज ही रात को दीदी कि गांड जरुर मारूंगा , मेरा मोटा है तो क्या हुआ मेरे जैसे ही मोटे मोटे लंडो को फिल्म में लड़की बड़ी आसानी से अपने कमसिन गांड में लील रही थी और दीदी कि गांड तो फिर भी चौड़ी है | फिल्म देखते देखते एक घंटे में ही मेरी हालत खराब होने लगी ..मुझे चूत कि तुरंत आवश्यकता महसूस हो रही थी इसलिए मैंने समीर को बुलाकर कहा –यार मै चलता हूँ , घर पर बोलकर नहीं आया हूँ और हाँ मुझे पढ़ने के लिए वो मस्तराम वाली किताबे और पिक्चर वाली बुक दे दो | उससे किताबे लेकर अपने कसमसाते -फुफकारते लंड को प्यार से पुचकारते हुए घर वापस चल पडा |
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रात को खाना खाने के बाद माँ जब किचेन में बरतन रखने गयी तभी मैंने हेयर रिमूवर और गोलियां देते हुए दीदी के कान में फुसफुसाया कि तुम रात को मेरे पास आना मै दरवाजा अन्दर से बंद नहीं करूंगा (उनको भैया भाभी वाला कमरा मिला था जो माँ के कमरे के बाईं ओर था ओर मेरा कमरा माँ के कमरे के दाईं तरफ था )| फिर मै बेड पर लेटकर दीदी का इन्तजार करने लगा , इन्तजार करते करते मैंने मस्तराम कि बुक निकालकर फिर से एकबार भाई बहन कि चुदाई कि कहानी पढ़ा और पढ़कर अपने कसमसाते लौड़े को सहलाते हुए शान्त्वना देने लगा कि तू ज्यादा तड़प मत अभी तुझे दीदी कि रसीली चूत और मखमली गांड मारने को मिलेगा | अपने लंड को सहलाते सहलाते पता नहीं मुझे कब नींद आ गयी और जब नींद खुली तो देखा सबेरा हो गया है और माँ आँगन में झाडू लगा रही है और दीदी वही बरामदे में खड़ी है | मुझे उनपर बहुत गुस्सा आया कि वो रात को मेरे पास क्यों नहीं आयी फिर बाथरूम जाकर फ्रेश होकर ‘मोती ’ (हमारा कुत्ता ) को बाहर सैर कराने ले गया | लौटकर मै दीदी से बात करने का मौक़ा ढूंढने लगा पर दीदी थी कि माँ के साथ ही चिपकी चिपकी घूम रही थी , आखिर में नाश्ता करने के बाद दीदी को लंच बनाने को कहने के बाद जब माँ कालेज जाने लगी तो मेरा अंतर्मन खुशी से झूम उठा लेकिन जैसे ही मै बाहर का गेट बंद करके लौटा वैसे ही दीदी झट से बाथरूम में नहाने के लिए घुस गयी | मेरी उत्तेजना बढती जा रही थी साथ ही गुस्सा भी कि आखिर क्यों वो शरारत से मुझे खिंझा रही है | अगर छोटी होती तो शायद डांटता भी पर ये तो बड़ी थी , मुझे रह रहकर कल देखे फिल्म का सीन याद आ रहा था जिसमे एक प्रौढ़ शिक्षक अपने गर्ल स्टुडेंट कि गलती पर उसे बेंत से चूतरों को नंगा करके मारता है फिर प्यार से चूतरों को चुमते चाटते हुए पीछे से ही चूत को चूसना शुरू कर देता है फिर जबरदस्त ढंग से उस लड़की को पेलता है ,सीन याद करके ही मेरा लौड़ा निकर में तम्बू बना हुआ था |आखिर में लगभग एक घंटे बाद जब दीदी बाथरूम से निकली तो उसने अपने शरीर पर केवल टावेल लपेटे हुए थी जिसका उपरी शिरा बूब्स के बीच में कसा था जिसके कारण आधी से अधिक मदमस्त चूंचियाँ बाहर को छलक रही थी और निचला शिरा चूत को बस ढके था | मै लपककर उनके पास पहुंचा और उन्हें अपनी बाहों में भरना चाहा तो उन्होंने हाथ के इशारे से रोक दिया , वो कुछ बडबडा रही थी शायद शिवजी की आरती गा रही थी फिर वो टावेल में ही पूजा घर में चली गयी |
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मै बाहर खडा कुंठित हो रहा था , जब वो बाहर मुस्कुराते हुए आयी तो मै उनके पीछे पीछे उनके कमरे की और चल पडा | पीछे से टावेल गांड को पूरी तरह से ढक भी नहीं पा रहा था , चूतरों का मांसल उभार नीचे से झलक रहा था | मै खींजकर रूखे शब्दों में बोला –दीदी ये क्या है ? तुम रातको मेरे पास क्यों नहीं आयी ?( तबतक दीदी झुककर अटैची से अपने कपडे निकालने लगी ..आ ..ह .. क्या नजारा था ..पीछे से दीदी की नशीली चूत बाहर को झांक रही थी जिसके साथ मिलकर उनकी मखमली गांड चार चाँद लगा रही थी ,चूत की फांके खुली हुई थी और अपने मर्दन का आमंत्रण दे रही थी | मै आगे बढते बढते रूक गया और वहीँ कुर्सी पर बैठकर नज़ारे लेने लगा )तब दीदी पहली बार खुलकर बोली – सॉरी भाई ,गलती हो गयी .. बुआजी के सोने का इन्तजार करते करते मुझे खुद ही नींद आ गयी | मै खींजकर बोला – तुम्हे पता है मै सारी रात लौड़ा हाथ में थामे किस तरह से तड़पता रहा हूँ और तुम बोलती है की गलती हो गयी ..गलती हुई है तो सजा भी भुगतनी पड़ेगी !!
वो मेरी तरफ घूमकर पलटी और अपने कमर पे हाथ रखकर बोली - मुझे हर सजा मंजूर है , मेरे राजा भैया !! बोलो क्या कहते हो ? मेरे मन में एक शैतानी चमक उभरी ..मै बोला -रूको मै अभी आता हूँ और कमरे से निकलकर सीधा बाथरूम गया और पेशाब करके अपने कमरे में आकर वेसलीन का डब्बा जेब में डाला और खिड़की के परदे का लकड़ी का डंडा निकला साथ ही मस्तराम एवं पिक्चर वाली बुक लेकर दीदी के कमरे में लौटा और फिर कुर्सी पर बैठ गया तथा डंडा हिलाने लगा | मेरे हाथ में लकड़ी का डंडा देखकर दीदी सहम गयी और बोली – भैया !! तुम मुझे मरोगे क्या ? (अपने सामने बड़ी उम्र की रिश्तेदार लगभग नंगी औरत तो डरते देख मेरा लंड फिर से तनतना उठा) मै थोडा कठोर और आदेशात्मक स्वर में बोला –दीदी तुम चुप रहो ! जैसा मै कहता हूँ वैसा करती जाओ ..थोड़ा आगे आओ ..वो थोड़ा आगे आयी तो मैंने आदेश दिया – अपना कान पकड़ो ! उसने कान पकड़ लिया , फिर मैंने डंडे को उसके बूब्स से सटाया और फिर टावेल के फोल्ड में फंसाकर खिंच दिया ..टावेल खुलकर नीचे जमीन पर गिर पडा | अब दीदी का संगमरमरी तराशा नंगा बदन मेरे सामने था , उनके हाथ कान पर थे और आँखे शर्म के कारण जमीन पे लगी थी ..जो बुर रात के अँधेरे में मेरे विकराल लंड से द्वन्द युध्ध करने का दुह्साहस कर सफलता पाई थी वही दिन के उजाले में अपने नंगेपन का एहसास कर जांघो के जोड़ में संकुचित होती जा रही थी | चूत को चिकना करके दीदी ने तो कमाल ही कर दिया था , वह अपने साइज से काफी छोटी लग रही थी ..बिलकुल १६ साल की लौंडिया की चूत की तरह …लगता ही नहीं था की इस चूत ने एक बच्चा पैदा किया है और तीन तीन लंडो का वार झेला है | मैंने डंडे के अगला शिरा को चूत के होतो को छुलाया ..वो चिहुंकी और मेरी तरफ होटों को काटते हुए देखने लगी | मै शुष्क स्वर में बोला - दीदी अपनी टाँगे फैलाओ ! जैसे ही उसने खड़े खड़े अपनी टाँगे फैलाई वैसे ही बुर के पपोटे खुल गए तब मैंने अपने डंडे को बुर के फांको के बीच फिराने लगा ..दीदी सिहर उठी ..हांलाकि लकड़ी का डंडा आवेश का कुचालक होता है फिर भी उस समय दीदी के रोम रोम का सिहरन डंडे पर महसूस किया जा सकता था ..मैंने आहिस्ते आहिस्ते डंडे को चूत की दरारों में फिराने लगा ..दीदी पूरी गरम हो चुकी थी , इस बात का अंदाजा ऐसे लग रहा था की जब मै डंडे के मूवमेंट को रोक देता तो वो खुद ही हौले हौले कमर हिला कर अपनी चूत को डंडे पर घिसने लगती और जब मैंने डंडा हटाया तो वो चूतरस से भींगा हुआ था |
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दीदी जब बाथरूम से वापस आयी तो आते ही शिकायत करने लगी – ये क्या किया राजन ! सारा मुँह गंदा कर दिया , मुझे तो उलटी आ गयी | मै बोला कुछ नहीं , मेरी नजरें उनके पैरों के बीच सजी चिकनी बुर पर टिकी थी | अपनी लगातार निहारी जा रही बुर को देखकर शायद उन्हें कुछ शर्म महसूस होने लगी , तभी वो अपने पैरो को जोड़कर टेबल के किनारे दीवाल से सटकर खडी हो गयी | मै उनके पास जाकर उनके सामने घुटनों के बल बैठ गया , अब मेरी आँखों के ठीक सामने उनकी बुर थी और उसपर पानी की बुँदे चमक रही थी , शायद मेरे पैर के अंगूठे से झड़ने के कारण वो अपनी बुर को भी धो कर आयी थी | मैंने अपनी एक अंगुली से उनके बुर की दरारों को छेड़ा, उनके सारे शरीर में सिहरन दौड़ गयी फिर मैंने बोला – दीदी अपने पैरों को खोलो | उन्हें लगा की मै उनका बुर ठीक से देखना चाहता हूँ , उन्होंने टाँगे फैलाई , मैंने अपनी जीभ निकालकर उनकी बुर को चाटना शुरू कर दिया | दीदी मचल गयी , शायद उनकी बुर को पहली बार किसी खुरदुरी जीभ ने स्पर्श किया था , वो गनगना रही थी पर मै पूरी तन्मयता से उनकी बुर चाटते जा रहा था साथ ही अपने दोनों हाथों से उनके चूतरों को मसल रहा था , अचानक मेरे बाएं हाथ की बीच की उंगली उनके गांड के छेद से टकराया , वो उछल पडी और मेरे सर को पकड़ लिया और मस्ती में आकर अपनी बुर को मेरे मुंह से रगड़ने लगी | मैंने ऊँगली का दबाब गांड के छेद पर बनाया परन्तु वो अन्दर घुस ही नहीं पा रहा था | तभी मैंने अपनी जीभ को बुर के अन्दर घुसेड दिया , अब दीदी मस्ती में आँखे बंदकर सिसियाने लगी और मेरे सर को अपने बुर पर दबाने लगी | मैंने दायें हाथ को उनके चुतरों से मुक्त कर जेब से वेसलीन का ट्यूब निकालकर ढेर सारा वेसलीन अपनी उँगलियों में चुपड़ लिया और फिर हाथ को पीछे ले जाकर बाए हाथ की अँगुलियों में भी चुपड़ लिया और ढेर सारा वेसलीन उँगलियों से उनके गांड के छेद पर लगा दिया और फिर बीच की उंगली का दबाब छेद पर बढाया , इसबार बड़ी सरलता से मेरी उंगली बेआवाज छेद में घुस गयी | अबकी वो अपनी चीख रोक न सकी और चिल्लाई -आ ..आ ..ह ..ह .हह .......सा ..ला ..............मार …डा ..ला … रे ….पर मै रुका नहीं और ऊँगली के अन्दर बहार करने की रफ़्तार बढाता रहा बल्कि अब तो मै अपने दोनों हाथ की बीच की ऊँगली को एक साथ उनके गांड में अन्दर बाहर कर रहा था |वो लगातार बड़बड़ाये जा रही थी , अचानक उसने मेरे सर को अपनी पूरी ताकत से बुर पर दबाना शुरू कर दिया और कांपते हुए झड़ने लगी ..आ..ह.ह......मै ... ग...ई...ई...., उनके बुर से निकलता नमकीन पानी मेरी जीभ को तर कर रहा था | ये स्वाद मेरे लिए बिलकुल नया था , मै बुर से निकलते पानी की एक एक बूंद को चाट गया | फिर दीदी निढाल होकर बेड पर वैसे नंगी ही पसर गयी |
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इस दौरान मेरा लंड निकर में तनकर दर्द करने लगा था , मैंने फ़ौरन अपना निकर निकालकर उसे मुक्त कर दिया | अब मेरा लंड अपने पुरे जोश में आकर हवा में लहराने लगा लेकिन उसकी सहेली बेदम हो सुस्त पडी थी | मैंने उनसे पुचा – दीदी इसका क्या होगा , वो हडबडाकर जल्दी से बोली – भाई .. अभी नहीं ! खाना खाने के बाद दोपहर को कर लेना , मै कहीं भागी थोड़े जा रही हूँ , अभी थोडा आराम करने दो , मुझे खाना भी बनाना है , ये कहते हुए वो पेट के बल लेट गयी , उसे लगा की बुर के ढक जाने से शायद मेरा जोश ठंडा पद जाएगा | परन्तु मै कहाँ माननेवाला था , खड़े लंड के कारण मै बेकरार था जो उनके मांसल गांड को देखकर और कड़क हो गया था | मैंने दीदी के गांड पर हाथ फेरना शुरू कर दिया | पहले तो वो थोड़ा इनकार करती रही - सोने दे भाई ! क्यों तंग कर रहा है ? पर मेरी उंगलियाँ गांड के दरारों में घुसकर छेद से टकराया तो वो शांत होकर मजे लेने लगी | गांड का छेद वेसलीन से गीला तो था ही इसलिए मैंने हाथ के एक अंगूठे को गांड में घुसाकर अन्दर बाहर करने लगा | अब दीदी के चुतरों ने थिडकना चालू कर दिया और स्वमेव ही बेड से उठने लगा | मैंने दुसरे हाथ के अंगूठे को भी धीरे धीरे उनके गांड में घुसा दिया | दीदी थोडा ऐंठी और हलके से कराही ….. पर मैंने उंगली चोदन जरी रखा , मै एक अंगूठे को बाहर निकालता तो उसी समय दुसरे को अन्दर पेलता…दुसरे को निकालता तो पहले को पेलता ..पुरे रिदम के साथ मै उनके नाजुक सी छोटी छेद को चौड़ा करने में लगा था ताकी लंड डालते समय दिक्कत ना हो | दीदी गरम होकर बडबड़ा रही थी - मै ..तो ..बच्चा …ही ..समझती ..थी …..सा …ला … पूरा …..ह ..ह ..रा ..मी …नि ..क ..ला ……में ..री ….गां..ड…..भी …न .ही ….छो..डा …..उनकी सेक्सी आवाज सुनकर मेरा तना लंड फुफकारने लगा | वेसलीन को लंड पे चुपड़कर अपने फनफनाते लौड़े को गांड के छेद पे टिकाया , दीदी को मेरे अगले हमले का एहसास हो चुका था परन्तु इससे पहले वो संभलती मैंने एक जोरदार झटका मारकर लंड को तकरीबन एक तिहाई गांड में पेल दिया ..वो जोर से चींखी …मैंने फ़ौरन पीठ पे झुककर अपने हाथों से उनका मुंह बंद कर दिया …वो गुं..गुं ..करते हुए मचलने लगी और गांड चुदाई के दर्द से बचने के लिए अपने पैरों को सीधा करने लगी जिससे गांड के छेद का छल्ला लंड पर कस गया , वो तुरंत दर्द से दोहरी होकर पुनः अपने गांड को उठाकर चुतरों को फैला लिया | दर्द से तो मेरा भी बुरा हाल था , उस लंड को दीदी के इस पोज से थोड़ा राहत मिला | फिर मैंने उनके मुह से हाथ हटाकर उनके उभरे चुतरों को पकड़कर धीरे धीरे लंड को अन्दर बाहर करने लगा और आहिस्ते आहिस्ते लंड को क्रमशः अन्दर सरकाने लगा | मेरे लंड पर खून की बुँदे भी चमक रही थी …पहले तो मै डरा, पर फिर सोचा शायद चूत की तरह गांड का भी शील होता होगा | मै धीरे धीरे अपने चोदने की रफ़्तार बढ़ा रहा था और अब दीदी भी गरम चुदासी होकर बडबड़ा रही थी – अ.आ.ज पहली बार मेरी गांड में कोई लंड गया है ….फाड़ डाल मेरी गांड को भाई … और जोर से …और जोर से …अब रोकना मेरे लिए बहुत मुश्किल था …मै झड़ने लगा …मेरे लंड से निकलता गरम गरम लावा दीदी की गांड को भरता चला गया …उनकी आँखे भी मस्ती में मुंदती चली गयी …मै निढाल होकर उनके बगल में लेट गया …दीदी की आँखे अभी तक बंद थी ..शायद अभी भोगी आनंद का लुफ्त उठा रही थी |
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