मुठ मारते पकड़ा गया
मैं अहमदाबाद में रहता हूँ मेरे पड़ोस में एक आंटी और अंकल रहते हैं, आंटी की उम्र 40-42 साल होगी। उनका एक बेटा है जो दूसरे शहर में रहता है।एक दिन मैं कॉलेज नहीं गया तो दोपहर को मैंने एक फिल्म देखी, उसमें बहुत सेक्सी दृश्य देख कर मेरा मन में सेक्स करने की बहुत इच्छा होने लगी तो मैं अपनी छत पर गया और मुठ मारने लगा।जब मैं मुठ मारने में मशगूल था तब बाजू वाली आंटी कपड़े सुखाने छत पर आई और उन्होंने मुझे देख लिया।मैं घबरा गया और जल्दी अपनी ज़िप बंद की, नीचे चला गया, और सोचने लगा कि आंटी मम्मी को बता देंगी, ऐसे ख्याल आते रहे और पूरा दिन बीत गया।दूसरे दिन मैं कॉलेज से घर आया, आंटी ने मुझे देखा तो मैं जल्दी से अपने घर में चला गयाl मैंने खाना खाया और टीवी देखने लगा। मम्मी बाजार चली गई, मम्मी ने बाजू वाली आंटी से पूछा बाजार चलने को, पर वो नहीं गईlयह सब मैं अन्दर से सुन रहा था।थोड़ी देर बाद आंटी ने मुझे आवाज दी, मैं घबराता हुआ उनके पास गया तो उन्होंने मुझे दूध लेने भेजा।जब मैं वापस आया तो आंटी ने पूछा- चाय पिओगे?

तो मैंने मना किया।फिर उन्होंने मुझे पिछ्ले दिन वाली बात के बारे में पूछा तो सर झुकाए नीचे देखता रहा, कुछ नहीं बोला, सिर्फ इतना कहा कि किसी को बताना नहीं।तभी आंटी मेरे पास बैठ गई और बोली- इस उम्र में सभी करते हैं, तुमने कोई गुनाह नहीं किया, राजेश(उनका बेटा) को भी मैंने एक बार देख लिया था, जब वो बारहवीं कक्षा में था।मेरे तो होश उड़ गए कि आंटी इस उम्र में क्या बके जा रही हैं।उन्होंने मुझे कहा- मुझे थोड़ा काम है, तुम इधर बैठो !और वो टीवी चला कर चाय बनाने चली गई।मैं टीवी देख रहा था।आंटी वापस आई और मेरे पास बैठ कर टीवी देखने लगी।तभी आंटी ने मेरे पांव पर हाथ फेरना शुरु किया, तब मुझे समझ आ गया कि आंटी की इच्छा क्या है।तब धीरे धीरे आंटी ने हाथ आगे बढ़ाया और मेरा लंड सहलाने लगी जो पहले ही पूरे रौब में था।मुझे भी मजा आ रहा था पर कुछ नहीं बोला। धीरे धीरे आंटी गर्म हो गई और मैं भी उनके संतरे जैसे चूचे सहलाने लगा।वो और भी गर्म हो गई। दस मिनट के बाद मैंने अपना हाथ उनकी चूत पर रख दिया और उसमें उंगली घुसा दी।

आंटी को झटका लगा पर मुझे कुछ नहीं बोली। यह मेरा पहला अनुभव था, कभी चूत नहीं देखी थी, आंटी ने चूत को एकदम साफ किया हुआ था। मैंने ब्लू फिल्म देखी थी, उस तरीके से मैंने उनकी चूत पर जीभ रख दी और चाटने लगा। आंटी उछल पड़ी और मेरे लंड को बाहर निकाल कर चाटने लगी।मैं खड़ा था, मैंने बोला- 69 की अवस्था में मजा आयेगा।उन्होंने वैसा ही किया। करीब 5 मिनट के बाद आंटी ने कस कर मेरे सर को दबोच लिया और खड़ी हो गई और मेरा लंड चूसने लगी और बोली- दस साल से भूखी हूँ, रोज उंगली डालती हूँ, तुझे पकड़ लिया इसलिए हिम्मत आ गई कि तेरी भी चुप मेरी भी चुप !आप समझ गए होंगें मेरा कहने का मतलब !और मैं झड़ गया उनके मुँह में ! थोड़ी देर बाद आंटी ने मुझे दूध पिलाया और फिर मेरे लंड से खेलने लगी।मैं फ़िर गर्म हो गया, फिर आंटी को बिस्तर पर लिटा कर मेरा सात इंच का लण्ड उनकी चूत में डालने लगा, पर जा नहीं रहा था।आंटी बोली- जल्दी कर ! फाड़ दे इसको ! बहुत खुजली हो रही है !तो मैं जोश में आ गया और जोर का धक्का लगाया। आंटी दर्द के मारे चिल्ला उठी पर मुझसे कुछ नहीं बोली, बस मुझे कस कर पकड़ लिया और नीचे से धक्के लगाने लगी।करीब 20-22 मिनट बाद मैं झड़ गया। इस बीच आंटी दो बार झड़ चुकी थी।फिर आंटी से बोला- आप कभी किसी को बताना नहीं !तो उन्होंने बोला- मुझे जीने की राह मिल गई, मैं भला क्यों किसी को कहूँगी।

 
Return to Top indiansexstories