मस्त है यह सानिया भी
मैं हूँ बाबू, उम्र 43 साल, अविवाहित पर सेक्स का मजा लेने में खूब उस्ताद। मेरी इस कहानी में जो लड़की है उसका नाम है- सानिया खान। वो मेरे एक दोस्त प्रोफ़ेसर जमील अहमद खान की बेटी है। सानिया के पिता और मैं दोनों कॉलेज के दिनों से दोस्त हैं। उनकी शादी एम०ए० करते समय हीं हो गई। मेरी भाभी यानि उनकी बेगम रिश्ते में मौसेरी बहन थी। खैर मैं तो सानिया के बारे में कहने वाला हूँ उसके माँ-बाप में तो शायद ही आप-लोगों को रुचि हो।

सानिया 18 साल की बी कॉम प्रथम वर्ष की छात्रा है, बहुत सुन्दर चेहरे की मालकिन है। एकदम गोरी, 5’5" लम्बी, पतली छरहरी काया, लहराती-बलखाती जब वो सामने से चलती तो मेरे दिल में एक हूक सी उठती। मेरे जैसे चूतखोर मर्द के लिए उसका बदन एक पहेली था, कैसी लगेगी बिना कपड़ों के सानिया ?

तब मैं भूल जाता कि वो मेरे गोद में खेली है, उसके बदन को जवान होते मैंने देखा है। उसकी चूची नींबू से छोटे सेब, संतरा, अनार होते देखा है, महसूस किया है। सोच-सोच कर मैंने पचासों बार अपना लंड झाड़ा होगा।पर उसका मुझे चाचा कहना, मुझे रोक देता था कुछ भी करने से। उसके दिल की बात मुझे पता नहीं थी न। वैसे सानिया का चक्कर दो-तीन लड़कों से चला था, घर पर उसे खूब डाँट भी पड़ी थी, पर उन लोगों ने हद पार की थी या नहीं मुझे पता न चल पाया।

और जब भी मेरे दोस्त और भाभी जी ने इस बात की चर्चा की, तब उनके भाषा से मुझे कुछ समझ नहीं आया।

और एक बार...भगवान की दया से कुछ ऐसा हुआ कि...

हुआ यह कि सानिया के नाना की तबियत खराब होने की खबर आई और सानिया के अम्मी-अब्बा को उसके ननिहाल मेरठ जाना पड़ा। सानिया की पढ़ाई चलते रहने की वजह से वो उसको नहीं ले जा सके। उनके घर में नीचे के हिस्से में जो किरायेदार थे वो भी अपने गाँव गए हुए थे, सो सानिया को अकेला वहाँ न छोड़, उन लोगों ने उसको एक सप्ताह मेरे साथ रहने को कहा। असल में यह प्रस्ताव मैंने ही उन लोगों को परेशान देख कर दिया था। वो तुरंत मान गए।

मेरे दोस्त ने तब कहा भी कि यार मैं भी यही सोच रहा था पर तुम अकेले रहते हो, लगा कहीं तुम्हें कोई परेशानी ना हो।

बातचीत करते हुए जमील ने हल्की आवाज में बताया कि एक बार पहले भी वो सानिया को अकेले तीन दिन के लिए छोड़े थे तो आने पर किरायेदार से पता चला कि दो दिन लगातार सानिया के साथ कोई लड़का रहा था, जो उसके साथ स्कूल में पढ़ता था, अब कहीं इंजीनियरिंग पढ़ रहा है। वो अपनी परेशानी मुझे बता रहा था और मैं सोच रहा था कि जब सानिया अपने घर पर एक लड़के को माँ-बाप के नहीं रहने पर रख सकती है, तो घर के बाहर तो वो जरूर ही चुदवाती होगी।

खैर ! अगले दिन सुबह कोई 7 बजे वो लोग सानिया को मेरे अपार्ट्मेंट पर छोड़ने आए, चाय पी और मेरठ चले गये। सानिया तब अपने स्लीपिंग ड्रेस में ही थी- एक ढ़ीली सा कैप्री और काला गोल गले का टी-शर्ट।

उसको को नौ बजे कॉलेज जाना था, दो घंटे के लिए।

मेरी नौकरानी नाश्ता बना रही थी, जब सानिया किचन में जाकर उससे पूछने लगी- साबुन कहाँ है?

असल में अकेले रहने के कारण मेरे कमरे के बाथरूम में तो सब था पर दूसरे कमरे, जिसमें सानिया का सामान रखा गया था, वह बाथरूम कपड़े धोने के लिए ही इस्तेमाल होता था।

मैंने तभी कहा- सानिया, तुम मेरे कमरे का बाथरूम प्रयोग कर लो, मुझे नहाने में अभी समय है।

और सानिया अपन कपड़े लेकर मुस्कुराते हुए चली गई। मैं बाहर वाले कमरे में अखबार पढ़ रहा था, जब सानिया तैयार हो, नाश्ता करके आई, बोली- चाचा, मैं करीब बारह बजे लौटूँगी, तब तो घर बंद रहेगा?

मैंने उसके भीगे बालों से घिरे सुन्दर से चेहरे को देखते हुए कहा- परेशान होने की कोई बात नहीं है, तुम एक चाबी रख लो !

और मैंने नौकरानी से चाबी ले कर उसको दे दी। (मैंने एक चाबी उसको इसलिए दी थी कि वो शाम को आ कर काम कर जाए और मेरा खाना पका जाए) साथ ही नौकरानी को शाम की छुट्टी कर दी कि शाम को हम लोग होटल में खाना खा लेंगे। थोड़ी देर में नकरानी भी काम निपटा कर चली गई, और मैं तैयार होने बाथरूम में आया।

और..

बाथरूम में सानिया की कैप्री और टी-शर्ट खूँटी से टंगी थी और नीचे गीली जमीन पर सानिया की ब्रा-पैन्टी पड़ी थी। ऐसा लग रहा था कि उसने उन्हें धोया तो है, पर सूखने के लिए डालना भूल गई। मेरे लन्ड में सुरसुरी जगने लगी थी।

मैंने उसके अन्तर्वस्त्र उठा लिए और उनका मुआयना शुरु कर दिया। सफ़ेद ब्रा का टैग देखा-लवेबल 32 बी। सोचिए, 5’5" की सानिया कितनी दुबली-पतली है।

मैंने अब उसकी पैन्टी को सीधा फ़ैला दिया। वो एक पुरानी पन्टी थी-रुपा सॉफ़्ट्लाईन 32 नम्बर। इतनी पुरानी थी कि उसके किनारे पर लगे लेस उघड़ने लगे थे और वो बीच से हल्का-हल्का घिस कर फ़टना शुरु कर चुकी थी। मैंने उसे सूँघा, पर उसमें से साबुन की ही खुशबू आई। फ़िर भी मैंने ऐसे तो कई बार उसके नाम की मुठ मारी थी, पर आज उसकी पैन्टी से लन्ड रगड़-रगड़ कर मुठ मारी और अपना माल उसके पैन्टी के घिसे हुए हिस्से पर निकाला और फ़िर बिना धोये ही पैन्टी-ब्रा को सूखने के लिए डाल दिया।

मेरे दिमाग में अब ख्याल आने लगा कि एक बार कोशिश कर के देख लूँ, शायद सानिया पट जाए। पर मुझे अब देर हो रही थी सो मैं जल्दी-जल्दी तैयार हो कर निकल गया।

शाम को करीब सात बजे मैं घर आया, सानिया बैठ कर टीवी देख रही थी। उसने ही मुझे चाय बना कर दी।

हम दोनों साथ चाय पी रहे थे, जब मैंने कहा- तैयार हो जाओ सानिया, आज बाहर ही खाएंगे !

खुशी उसके चेहरे पर झलक गई और मैं उसके उस सलोने से चेहरे से नजर हटा न पाया। हम लोग इधर-उधर की बात कर रहे थे, तभी उसे ख्याल आया, बोली- सॉरी चाचा, आज आपके बाथरूम में गलती से मेरे कपड़े रह गए। असल में मेरे जाने के बाद अम्मी जब सारे घर को ठीक करती है, तो वो यह सब भी कर देती है। कल से ऐसा नहीं होगा।

उसके चेहरे पे सारी दुनिया की मासूमियत थी।

मैंने भी प्यार से कहा- अरे, कोई बात नहीं बेटा, मुझे कोई परेशानी नहीं हुई। तुम तो धो कर गई ही थी, मैंने तो सिर्फ़ सुखने के लिए तार पर डाल दिया।

फ़िर थोड़ी शरारत मन में आई तो कह दिया- वैसे भी तुम तो खुद दस किलो की हो, तो तुम्हारी ब्रा-पैन्टी तो १० ग्राम से ज्यादा नहीं होनी चाहिए न। उसको सूखने डालने में कोई मेहनत तो करना नहीं पड़ा मुझे।

उसने अपनी बड़ी-बड़ी आँखो को गोल-गोल नचाया-"पूरे 41 किलो हूँ मैं !

मैंने तड़ से जड़ दिया- ठीक है, फ़िर तो मैं सुधार कर देता हूँ, फ़िर ४१ ग्राम होगी ब्रा-पैन्टी?

वो मुस्कुरा कर बोली- मेरा मजाक बना रहे हैं, मैं तैयार होने जा रही हूँ।

और वो अपने कमरे में चली गई, मैं अपने कमरे में।

कोई आधे घण्टे बाद हम घर से निकले। सानिया ने एक गहरे हरे रंग की कैप्री और गुलाबी टॉप पहनी थी। बालों को थोड़ा ऊपर उठा पैनीटेल बनाया था, पैर में बिना मोजा रीबॉक के जूते।

मैं उसकी खूबसूरती पर मुग्ध था।

हम लोग पैदल ही एक घण्टा घूमे और फ़िर करीब नौ बजे एक चाईनीज रेस्तराँ में खाना खाकर दस बजे तक घर आ गए। थोड़ी देर टीवी देखने के बाद करीब 11 बजे सानिया अपने कमरा में और मैं अपने कमरा में सोने चले गए। सानिया के बारे में सोचते सोचते बड़ी देर बाद मुझे नींद आई।

अगले दिन करीब छः बजे सानिया ने मुझे जगाया, वो सामने चाय लेकर खड़ी थी। मेरे दिमाग में पहला ख्याल आया कि आज का दिन अच्छा हो गया, उसकी सलोनी सूरत देख कर।

हमने साथ चाय पी। वो तब मेरे बिस्तर पे बैठी थी। उसने एक नाईटी पहनी हुई थी जो उसके घुटने से थोड़ा नीचे तक थी। रेडीमेड होने के कारण थोड़ा लूज थी, और उसके ब्रा के स्टैप्स दिख रहे थे। आज उसे साढ़े आठ बजे निकलना था, सो वो बोली-"आप बाथरूम से हो लीजिए, तब मैं भी नहा लूँगी, आज थोड़ा पहले जाना है।

मैं जब बाथरूम से बाहर आया तो देखा कि उसने मेरा बिस्तर ठीक कर दिया है और अपने कपड़े हाथ में लेकर मेरे बेड पर बैठी है।

जब वो बाथरूम की तरफ़ जाने लगी तब मैंने छेड़ते हुए कहा- आज भी अपना 41 ग्राम छोड़ देना।

वो यह सुन जोर से बोली- छीः ! और हल्के से हँसते हुए बाथरूम का दरवाजा बन्द कर लिया।

मैं बाहर बैठ पेपर पढ़ रहा था, जब वो बोली-"मैं जा रही हूँ चाचू, करीब एक बजे लौटूँगी, मेरा लंच बनवा दीजिएगा, नस्ता मै कैंटीन में कर लूँगी।

मैं उसको कसे पीले सलवार कुर्ते में जाते देखता रहा, जब तक वो दिखती रही। उसकी सुन्दर सी गांड हल्के हल्के मटक रही थी।

थोड़ी देर में मेरी नौकरानी मैरी आ गई और अपना काम करने लगी, मैं भी तैयार होने बाथरूम में आ गाया। मुझे थोड़ा शक था कि आज शायद मुझे ब्रा-पैन्टी ना दिखे, पर मेरी खुशी का ठिकाना न रहा जब मैंने देखा कि आज फ़िर उसने अपनी ब्रा-पैन्टी धो कर कल की तरह ही जमीन पर छोड़ दी है। कल शायद उससे गलती से छूट गया था, पर आज के लिए मैं पक्का था कि उसने जान-बूझ कर छोड़ा है। मुझे लगने लगा कि यह साली पट सकती है। मैंने आज फ़िर उसकी पैन्टी लंड पे लपेट मूठ मारी और माल उसके पैन्टी में डाल दिया। यह वाली पैन्टी कल वाली से भी पुरानी थी, और उसमें भी दो-एक छोटे छेद थे। पर मुझे मजा आया। मैंने अपने माल से लिपटी पैन्टी को ब्रा के साथ सूखने को डाल दिया।

शाम को मुझे आने में थोड़ी देर हो गई, मैरी हम दोनों का खाना बना कर जा चुकी थी। मैं जब आया तो सानिया ने चाय बनाई और हम दोनों गपशप करते हुए चाय पीने लगे।

सानिया ने ही बात छेड़ दी- आज फ़िर आपको मजा आया मेरी सेवा करके?

मैं समझ न सका तो उसने कहा- वही 41 ग्राम, सुबह ! और मुस्कुराई।

मैंने भी कहा- हाँ, मजा तो खूब आया पर सानिया, इतने पुराने कपड़े मत पहना करो, फ़टे कपड़े पहनना शुभ नहीं माना जाता।

वो समझ गई, बोली- "ठीक है चाचू, आगे से ख्याल रखूँगी।

मैंने देखा कि बात सही दिशा में है तो आगे कहा- अच्छा सानिया, थोड़ा अपने निजी जीवन के बारे में बताओ। जमील कह रहा था कि तुम्हारा किसी लड़के के साथ चक्कर था। अगर न बताना चाहो तो मना कर दो।

वो थोड़ी देर चुप रही, फ़िर उसने रेहान के बारे में कहा, जो उसके साथ स्कूल में 5 साल पढ़ा था, दोनों अच्छे दोस्त थे पर ऐसा कुछ नहीं किया कि उसको इतना डाँटा जाए, रेहान तो फ़िर उस डाँट के बाद कभी मिला भी नहीं। अब तो वो उसको अपना पहला क्रश मानती थी।

मैंने तब साफ़ पूछ लिया- क्यों, क्या सेक्स-वेक्स नहीं किया उसके साथ?

वो अपने गोल-गोल आँख घुमा कर बोली- छीः, क्या मैं आपको इतनी गन्दी लड़की लगती हूँ, रेहान मेरा पहला प्यार था, अब कुछ नहीं है !

मैंने मूड को हलका करने के लिए कहा- अरे नहीं बेटी तुम और गन्दी, कभी नहीं, हाँ थोड़ी शरारती जरूर हो, बदमाश जो अपनी ब्रा-पैन्टी अपने चाचू से साफ़ करवाती हो।

वो बोली- गलत चाचू ! साफ़ तो खुद करती हूँ, आप तो सिर्फ़ सूखने को डालते हो।

हम दोनों हँसने लगे।

फ़िर खाना खा कर टहलने निकल गए। बातों बातों में वो अपने कॉलेज के बारे में तरह तरह की बात बता रही थी और मैं उसके साथ का मजा ले रहा था।

तीसरे दिन भी सुबह सानिया के चेहरे पर नजर डाल कर ही शुरु हुई। उस दिन मैरी थोड़ा सवेरे आ गई थी, सानिया का नाश्ता बना रही थी। मैं भी अपने औफ़िस के काम में थोड़ा व्यस्त था कि सानिया तैयार हो कर आई।

मैंन घड़ी देखी- 8:30

सानिया बोली- चाचू आज भी रख दिया है मैंने आपके लिए 41 ग्राम.... और आज धोई भी नहीं हैं।

और वो चली गयी।

मैंने भी अब जल्दी से फ़ाईल समेटी और तैयार होने चला गया। आज बाथरूम में थोड़ी सेक्सी किस्म की ब्रा-पन्टी थी और उससे बड़ी बात कि आज सानिया ने उस पर पानी भी नहीं डाला था। दोनों एक सेट की थी, गुलाबी लेस की। इतनी मुलायम कि दोनों मेरी एक मुट्ठी में बन्द हो जाए। मैंने पैन्टी फ़ैलाई-स्ट्रिन्ग बिकनी स्टाईल की थी। उसके सामने का भाग थोड़ा कम चौड़ा था, करीब 4 इंच और नीचे की तरफ़ पतला होते होते योनि-स्थल पर दो इंच का हो गया था, फ़िर पीछे की तरफ़ थोड़ा चौड़ा हुआ पर 5 इंच का होते होते कमर के इलास्टिक बैंड में जा मिला। साईड की तरफ़ से पुरा खुला हुआ, बस आधा इंच से भी कम की इलस्टिक।

मैंने प्यार से उस गन्दी पैन्टी का मुआयना किया। चुत के पास हल्का सा एक दाग था, जो बड़े गौर से देखने पर पता चलता, मैंने उस धब्बे को सुंघा। हल्की सी खट्टेपन की बू मिली और मेरा लन्ड को सुरूर आने लगा। मैंने प्यार से उसी धब्बे पर अपना लन्ड भिड़ा, पैन्टी को लन्ड पे लपेट मजे से मुठ मारने लगा और सारा माल उसी धब्बे पर निकाला, फ़िर उस पैन्टी-और ब्रा को सिर्फ़ पानी से धो कर सुखने डाल दिया।

शाम साढ़े सात बजे घर आया, साथ चाय पीने बैठे तो मैंने बात छेड़ दी- आज तो सानिया बेटी, तुमने कमाल कर दिया।

वो कुछ नहीं बोली तो मैंने कह दिया- बिना धुली ब्रा-पैन्टी से तुम्हारी खुशबू आ रही थी।

वो शर्माने लगी, तो मैंने कहा- सच्ची बोल रहा हूँ, मैंने सूँघ कर देखा था। तुम्हारे बाप की उम्र का हूँ, पर आज वाली 41 ग्राम की खुशबू ने मेरे दिल में अरमान जगा दिये।

वो थोड़ा असहज दिखी, तो मैंने बात थोड़ा बदला- पर मैंने भी दिल पर काबू कर लिया, तुम परेशान न हो।

वो मुस्कुराई, तब मैंने कहा- पर आज वाली तो बहुत सेक्सी थी, अब कल क्या दिखाओगी मुझे?

कहानी जारी रहेगी, कई भागों में समाप्य !
शाम साढ़े सात बजे घर आया, साथ चाय पीने बैठे तो मैंने बात छेड़ दी- आज तो सानिया बेटी, तुमने कमाल कर दिया।

वो कुछ नहीं बोली तो मैंने कह दिया- बिना धुली ब्रा-पैन्टी से तुम्हारी खुशबू आ रही थी।

वो शर्माने लगी, तो मैंने कहा- सच्ची बोल रहा हूँ, मैंने सूँघ कर देखा था। तुम्हारे बाप की उम्र का हूँ, पर आज वाली 41 ग्राम की खुशबू ने मेरे दिल में अरमान जगा दिये।

वो थोड़ा असहज दिखी, तो मैंने बात थोड़ा बदला- पर मैंने भी दिल पर काबू कर लिया, तुम परेशान न हो।

वो मुस्कुराई, तब मैंने कहा- पर आज वाली तो बहुत सेक्सी थी, अब कल क्या दिखाओगी मुझे?

वो मुस्कुराई- कल ३० ग्राम मिलेगा।

मै- क्यों?

वो बोली- क्योंकि आज मैंने नीचे पहनी ही नहीं है। वो दोनो पुरानी वाली पहननी नहीं थी और ये वाली तो आज धुली है, कल पहनूँगी।

मैंने कहा- ऐसी बात है तो चल आज ही खरीद कर लाते हैं। मैंने आज तक कभी लेडीज पैन्टी नहीं खरीदी, आज यह भी कर लेते हैं।

वो थोड़ा सकुचाई तो मैंने उसको हाथ पकड़ कर उठा दिया, बोला- जल्दी तैयार हो जाओ।मैं तब जींस और टीशर्ट में था, और वो अपने नाईटी में। वो दो मिनट में चेंज करके आ गई- नीले स्कर्ट और पीले टॉप में वो जान-मारू दिख रही थी।

उसने आते हुए कहा-"स्कर्ट में सुविधा होगी, एक तो वहीं पहन लूँगी, और एक और ले लूंगी।

बहुत मस्त लौन्डिया थी वो। मेरे जैसे मर्द को टीज करना खूब जानती थी।

जब भी मैं ये सोचता कि साली नंगी चूत ले कर बाजार में है, मेरे दिल से एक हूक सी निकल जाती। हम एक लेडीज अंडरगार्मेंट्स स्टोर में गए। मेरे लिए यह पहला अनुभव था। दो-तीन और लेडीज ग्राहक थीं। हमारे पास एक करीब 28-30 साल की एक सेल्सगर्ल आई तो मैंने उसे एक ब्र-पैन्टी सेट दिखाने को कहा।

क्या साईज? और कोई खास स्टाईल? कहते हुए उसने एक कैटेलॉग हमें थमा दिया।

एक से एक मस्त माल की फ़ोटो थी, तरह तरह की ब्रा-पैन्टी में। मैं फ़ोटो देखने में व्यस्त हो चुका था कि सानिया बोली- सिर्फ़ पैन्टी लेते हैं ना।

मैंने नजर कैटेलग पर ही रखते हुए कहा- एक इसमें से ले लो, फ़िर दो-तीन पैन्टी ले लेना।

सेल्सगर्ल ने पूछा-"दीदी के लिए लेना है या मैडम के लिए? मैंने सानिया की तरफ़ इशारा किया।

वो मुस्कुराते हुए बोली- किस टाईप का दूँ, थोड़ी सेक्सी, हॉट या सॉबर?

मैंने जब उसे थोड़ा सेक्सी टाईप दिखाने को बोला तो वो मुस्कुराई। वो समझ रही थी कि मैं उस हूर के साथ लंपटगिरी कर रहा हूँ।

उसने कुछ बहुत ही मस्त सेट निकल दिए। एक तो बस सिर्फ़ पैन्टी के नाम पर 2" का सफ़ेद पारदर्शी जाली थी ब्रा भी ऐसा कि जितना छुपाती नहीं उतना दिखाती। मुझ वो ही खरीदने का मन हुआ, पर सानिया ने एक दूसरा पसंद किया।

जब मैंने कहा कि एक वह सेक्सी टाईप ले कर देखे, तो वो बोली- नहीं, पर अगर आपका मन है तो सिर्फ़ पैन्टी में ऐसा कुछ देख लेंगे, पैसा भी कम लगेगा।सानिया की पसंद की पैन्टी उसकी सेक्सी पैन्टी से थोड़ी और छोटी थी। चूतड़ तो लगभग 90% बाहर ही रहता, पर योनि ठीक ठाक से ढक जाती। उसने उसका चटख लाल रंग पसंद किया। फ़िर उसने हेन्स की स्ट्रींग बिकनी पैन्टी माँगी, तो सेल्सगर्ल ने एक 3 का सेट दिया। अब मैंने उस सेक्सी पैन्टी के बारे में कहा और जोर दे कर एक सफ़ेद और एक काली पैन्टी खरीद ली। सानिया ने हेन्स की एक पैन्टी पैक से निकाली और ट्रायल कमरा में चली गई और पहन ली।

सामान पैक करते समय सेल्सगर्ल ने सानिया से उसकी पुरानी पैन्टी के बारे में पूछा तो सानिया ने कहा- इट्स ओ के ! आई हैडन्ट बीन वीयरिन्ग एनी !

(सब ठीक है, मैंने नहीं पहना हुआ था)

सेल्सगर्ल ने भी चुटकी ली- आजकल के बच्चे भी ना...? इस तरह बिना चड्डी बाजार में निकल लेते हैं।

दुकान पर मौजूद तीनों सेल्सगर्ल और मैं भी हँस दिया और सानिया झेंप गई।

अगले दिन सुबह चाय पीते हुए मैंने कहा- सानिया, अब आज का दिन मेरा कैसे अच्छा बीतेगा, आज तो 30 ग्राम ही मुझे मिलेगा।

वो मुस्कुराई और बोली- सब ठीक हो जायेगा, फ़िक्र नॉट।

जब वो जाने लगी तो मुझे बोली- चाचू, जरा अपने कमरे में चलिए, एक बात है।

मुझे लगा कि वह शायद कुछ कहेगी पर वो कमरे में मुझे लाई और मुझे बिस्तर पर बिठा दिया, फ़िर एक झटके में अपनी जीन्स के बटन खोल कर उसे घुटने तक नीचे कर दिया, बोली- देख कर आज का दिन ठीक कर लीजिए।

उसके बदन पर वही सेक्सी वाली सफ़ेद पैन्टी थी, उसकी त्रिभुजाकार सफ़ेद पट्टी से उसकी बुर एकदम से ढकी हुई थी, पर सिर्फ़ बुर ही, बाकी उस पैन्टी में कुछ था ही नहीं सिवाय डोरी के ! उसकी जाँघ, चूतड़ सब बिल्कुल अनावृत थे एकदम साफ़ गोरे, दमकते हुए, झाँट की झलक तक नहीं थी।

मेरा गला सूख रहा था। वो २०-२५ सेकेन्ड वैसे रही फ़िर अपना जीन्स उपर कर ली, और मुस्कुराते हुए बाय कह बाहर निकल गई।

मैंने वहीं बिस्तर पर बैठे-बैठे मुठ मारी, यह भी भूल गया कि मैरी घर में है।

उस दिन बाथरूम में मुझे पता चला कि आज मेरे ही रेजर से सानिया झाँट साफ़ की थी, और अपने झाँट के बालों को वाश बेसिन पर ही रख छोड़ा है। दो इन्च की उसकी झाँट के काफ़ी बाल मुझे मिल गये, जिन्हें मैंने कागज में समेट कर रख लिया। मैंने फ़िर मुठ मारी।

शाम की चाय पीते हुए मैंने बात शुरु किया- बेटा, आज मेरे लिए पैन्टी नहीं थी तो तुमने मेरे लिए रेजर साफ़ करने का काम छोड़ दिया !

मेरे चेहरे पर हल्की हँसी थी। वो शरमा गई।

तब मैंने कहा- किस स्टाईल में शेव की है?

उसके चेहरे के भाव बदले, बोली- मतलब?

मैंने आगे कहा- मतलब किस स्टाईल में अपने बाल साफ़ किए हैं?

उसे समझ नहीं आया तो बोली- अब इसमें स्टाईल की क्या बात है, बस साफ़ कर दी।

मैंने अब आँख मारी- पूरी ही साफ़ कर दी?

वो अब थोड़ा बोल्ड बन कर बोली- और नहीं तो क्या, आधा करती? कैसा गन्दा लगता।

मैंने सब समझ गया, कहा- अरे नहीं बाबा, तुम समझ नहीं रही हो, लड़कियाँ अपने इन बालों को कई तरीके से सजा कर साफ़ करती हैं !

उसके लिए यह एक नई बात थी, पूछने लगी- कैसे?

तब मैंने उसको बताया कि झाँटों को कैसे अलग अलग स्टाईल मे बनाया जाता है, जैसे लैंडिन्ग स्ट्रीप, ट्रायन्गल, हिटलर मुश्टैश, बाल्ड, थ्रेड, हार्ट... आदि।

उसके लिए ये सब बातें अजूबा थीं, बोली- मुझे नहीं पता ये सब ! मैं तो जब भी करती हूँ, हमेशा ऐसे ही पूरी ही साफ़ करती रही हूँ। अभी दो महीने बाद किए हैं आज ! इतनी बड़ी-बड़ी हो गई थी। अम्मी को पता चल जाए तो मुझे बहुत डाँटती, वो तो जबरदस्ती बचपन में मेरा 15-18 दिन पर साफ़ कर देती थी। वो तो खुद सप्ताह में दो दिन साफ़ करती हैं अभी भी।

मैंने भी हाँ में हाँ मिलाई- हाँ, सच बहुत बड़ी थी, दो इन्च के तो मैं अपने नहीं होने देता, जबकि मैं मर्द हूँ।

मैं महीने में दो-एक बार काल-गर्ल घर लाता था। इसके लिए मैं एक दलाल राजेन्दर सूरी की मदद लेता। उसके साथ मेरा 5-6 साल पुराना रिश्ता था। वो हमेशा मुझे मेरे पसन्द की लड़की भेज देता। अब तो वो भी मेरी पसन्द जान गया था और जब भी कोई नई लड़की मेरे मतलब की उसे मिलती, वो मुझे बता देता।

ऐसे ही उस दिन शाम को हुआ। सूरी का फ़ोन आया करीब आठ बजे, तब मैं और सानिया खाना खा रहे थे।

सूरी ने बताया कि एक माल आई है नई उसके पास, 18-19 साल की। ज्यादा नहीं गई है, घरेलू टाईप है। आज उसकी ब्लड टेस्ट रिपोर्ट सही आने के बाद वो सुबह मुझे बतायेगा। अगर मैं कहूँ तो वो कल उसकी पहली बुकिंग मेरे साथ कर देगा।

सानिया को हमारी बात ठीक से समझ में नहीं आई, और जब उसने पूछा तो मैंने सोचा कि अब इस लौन्डिया से सब कह देने से शायद मेरा रास्ता खुले, सो मैंने उसको सब कह दिया कि मैं कभी-कभी दलाल के मार्फ़त काल-गर्ल लाता हूँ घर पर ! आज उसी दलाल का फ़ोन आया था, एक नई लड़की के बारे में।

उसका चेहरा लाल हो गया।
काल-गर्ल के बारे में सुन कर सानिया का चेहरा लाल हो गया।

वो चुप-चाप खाना खाने लगी। फ़िर हम टीवी देखने लगे, वो एक फ़िल्म लगा कर बैठ गई। मुझे लगा कि शायद काल-गर्ल वाली बात उसे अच्छी नहीं लगी। पर मैंने उसे अब नहीं छेड़ा, सोचा देखें अब वो खुद कैसे मुझे मौका देती है।

अगली सुबह फ़िर सूरी का फ़ोन आया। मुझे लगा कि यह शायद ज्यादा हो रहा है, सो मैंने सूरी को मना कर दिया। सानिया फ़ोन पर मेरी जो बात हो रही थी, वो सुन रही थी। मेरे फ़ोन काटने पर उसने सब कुछ ठीक से जानना चाहा।

एक बार फ़िर उसकी इच्छा देख मुझे लगा कि बात फ़िर पटरी पर आने लगी है। मैं चाहता था कि कैसे भी अब आगे का रास्ता खुले जिससे मैं सानिया के मक्खन से बदन का मजा लूँ। पाँच दिन बीत चुके थे और दो-तीन दिन में उसके अम्मी-अब्बू आ जाने वाले थे।

मैंने गंभीर बनने की ऐक्टिंग करते हुए कहा- बुरा मत मानना सानिया ! पर तुम्हें पता है कि मैं अकेला हूँ, इसलिए अपने जिस्म की जरूरत के लिए एक दलाल सेट किया हुआ है, वो हर महीने 5 और 25 तारीख को मुझे फ़ोन पर पूछता है। मेरा जैसा मूड हो मैं उसको बता देता हूँ, वो लड़की भेज देता है। अक्सर जैसी फ़र्माईश की जाती है, वो इन्तज़ाम कर देता है।

वो बोली- प्लीज चाचू, आज बुला लीजिए ना। मैंने कभी काल-गर्ल नहीं देखी।

मैंने कहा- पर मैं तो तुम्हारे बारे में सोच कर मना कर रहा था, तुम क्या समझोगी मुझे अगर मैं घर पर लड़की बुला लूँ तब? ना ! यह ठीक नहीं होगा, तुम्हारे रहते !

पर अब वो जिद कर बैठी। शनिवार का दिन था, बोली- आज कॉलेज नहीं जाउंगी, अगर आपने हाँ नहीं कहा।

करीब एक घण्टे बाद मैंने कह दिया- ठीक है, पर..."

वो तुरन्त मेरा फ़ोन लाई, काल-बैक किया और स्पीकर ऑन कर के सामने बैठ गई।

मैं कह रहा था- हाँ सूरी, भेज देना आज 8 बजे, कोई ठीक-ठाक, घरेलू भेजना, पर नई भेजना, रचना या पल्लवी नहीं।

सूरी बोला- नई वाली सही है सर, रेट थोड़ा ज्यादा लेगी, पर मस्त माल है। आप उसके पहले दस में ही होंगे। मेरे से पहली बार बुक हो रही है। इसी साल +2 किया है और यहाँ पढ़ाई के लिए इस शहर में आई तो हॉस्टल से उसको रोजी मेरे पास लाई। दिखने में टॉप क्लास चीज है सर ! एकदम मस्त सर ! मैंने कभी गलत सप्लाई आपको किया आज तक। 34-23-36 है सर, एक दम टाईट।

मैंने रेट पूछा, तो उसने 6000 कहा, फ़िर 5000 पर बात पक्की हुई।अचानक मुझे थोड़ा मस्ती का मूड हुआ, मैंने कहा- सूरी, कहीं वो छुई-मुई तो नहीं, जरा उससे बात करवा सकोगे पहले?

वो बोला- नहीं सर ! घरेलू है, पर मस्त है, खूब मस्ती करती है, एक बार मैंने भी चखा है उसको, तभी तो आपको कह रहा हूँ। उसको मैं आपका नम्बर दे देता हूँ।

करीब दस मिनट बाद मेरा फ़ोन बजा, तो मैंने स्पीकर ऑन कर के हैलो किया।

उधर से वही लड़की बोली- जी, मेरा नाम रागिनी है, सूरी साहब ने मुझे आपसे बात करने को कहा है।

मैंने गंभीर आवाज में कहा- हाँ रागिनी, आज रात तुम्हारी मेरे साथ ही बुकिंग है। असल में मै तुमसे एक बात जानना चाहता हूँ, तुम तो नई हो। सूरी जो पैसे देगा तुमको वो तो ठीक है, पर क्या तुम्हें ऐतराज होगा, अगर मेरे साथ कोई और भी हो तो। मैं और पैसे दूंगा।

थोड़ी चुप्पी के बाद बोली- दो के साथ कभी किया नहीं सर।

मेरे मन में शैतान घुसा था कि आज जब सानिया साली खुद मुझे रन्डी बुलाने को कह रही है, तब आज उसको दिखाया जाए कि रन्डी चोदी कैसे जाती है।

मैं योजना बना रहा था, कहा- अरे नहीं, वैसा नहीं है, करना तुम्हें मेरे साथ हीं होगा। असल में एक लड़की मेरे साथ होगी, वो देखेगी सब जो तुम करोगी।

मैं यह सब बोलते हुए सानिया की तरफ़ देख रहा था। उसके चेहरे पे सुकून था, जैसे मैंने उसके मन की बात की हो।

रागिनी ने अब थोड़ा सहज होकर पूछा- कोई फ़ोटो-वोटो नहीं होगा ना?

मैंने कहा- बिल्कुल नहीं"

वो राजी हो गई, फ़िर पूछने लगी- सर, आपको कोई खास ड्रेस पसंद हो तो?

मैंने कहा-"नहीं, जो तुम्हें सही लगे। और कुछ याद करके पूछा- रागिनी, बुरा मत मानना, पर तुम्हारी योनि साफ़ है या बाल हैं?

वो बोली- जी बाल हैं, करीब महीने भर पहले साफ़ किया था, फ़िर अभी तक काम चल रहा है। सूरी सर ने भी कहा कि जब तक कोई आपत्ति ना करे मैं ऐसे ही रहने दूँ। आप बोलेंगे तो साफ़ करके आऊँगी।

मैंने खुश होकर कहा- नहीं-नहीं, तुम जैसी हो, वैसी आना। जरुरत हुई तो यहाँ कर लेंगे।

और फ़ोन बंद कर दिया।

इसके तुरंत बाद जमील का फ़ोन आया कि उन्हें अभी वहाँ दस दिन और रुकना होगा, जब तक ऑपरेशन नहीं हो जाता, सानिया के नाना का।

मेरे लिए यह अच्छा शगुन था। मेरे लिए रागिनी भाग्यदायिनी साबित हुई थी।

मैं देख रहा था कि सानिया भी यह सब सुन खुश हो रही है। सानिया सब चुप-चाप सुन रही थी।

मैंने उसकी जाँघ पर हाथ फ़ेरा और कहा- अब तो खुश हो सानिया ! तुम्हारे मन की ही हो गई।

वो बिना बोले बस मुस्कुरा रही थी।

मैंने कहा- आने दो रागिनी को, आज उसकी लैंडिंग स्ट्रीप स्टाईल में बना कर बताउँगा। वो भी नई है, थोड़ा सीखेगी मेरे एक्स्पीरियेंस से।

सानिया कॉलेज़ चली गई। मैरी आकर घर का सारा काम कर गई। जाते समय मैंने मैरी को शाम को आने को मना कर दिया।

जब सानिया कॉलेज़ से आई तो बहुत खुश दिख रही थी। मैंने सानिया को बता दिया कि मैंने मैरी को शाम को आने के लिए मना कर दिया था।

फ़िर शाम को वो बोली- अब खाना बना लेते हैं, दो घण्टे में तो वो आ जायेगी।

सानिया किचन में गई, मैं टीवी में व्यस्त हो गया। साढ़े सात तक हमने डिनर कर लिया और बैठ कर रागिनी का इंतजार करने लगे।

8:10 पर काल-बेल बजी, तो सानिया तुरंत कूद कर दरवाजे तक पहुँची और उसे खोला।

मैंने देखा कि एक छरहरे बदन की थोड़ी सांवली लगभग सानिया की लम्बाई की ही लड़की सामने थी।

सानिया ने उसका नाम पूछा और भीतर ले आई।

मैंने रागिनी को बैठने को कहा तो वो सामने सोफ़े पर बैठ गई। सानिया अभी भी खड़े होकर उसको घूर ही रही थी।

रागिनी ने चटख पीले रंग का सूती सलवार-सूट पहना हुआ था, जो उसके बदन पर सही फ़िट था। लौन्डिया 18 की ही लग रही थी, 34-26-36 ! मेरी अनुभवी नजरों ने उसका माप ले लिया।

मैं अपनी किस्मत पर खुद हैरान था। मेरे पास दो-दो जवान लौन्डियाँ थी और दोनो बीस बरस से भी कम। रागिनी तो सानिया से भी उमर में छोटी थी, सानिया ने दो साल पहले इंटर किया था जबकि रागिनी ने इसी साल किया। हाँ, उसका बदन थोड़ा सानिया से ज्यादा भरा था। पर फ़र्क सिर्फ़ उन्नीस-बीस का ही था।

मैंने रागिनी से कहा- यह सानिया है, यही हमारे साथ में रहेगी कमरे में और सब देखेगी।

रागिनी ने अब भरपूर नजर से सानिया को घूरा ऊपर से नीचे तक।

मैंने पूछा- डिनर करके आई हो या करोगी?

उसने कहा- नहीं, जिस दिन बुकिंग होती है, रात में नहीं खाती।

रागिनी ने बताया कि वो सिर्फ़ शनिवार को ही सूरी से बुकिंग कराती है, और यह सब थोड़े मजे और थोड़े पैसे के लिए करती है।

बोली- इजी मनी, यू नो।

मैंने उसको 5000 दे दिये और कहा कि ये जो सूरी से बात थी, और फ़िर 2000 उसको देकर कहा- कि ये उसका अलग से हैं मेरी बात मानने के लिए।

वो संतुष्ट थी, बोली- एक बारऽऽ सर ! मैं बाथरूम जाना चाहूँगी।

मैंने कहा- ठीक है ! थोड़ा साफ़ कर लेना साबुन से, आगे-पीछे सब !

और मैंने उसको आँख मारी ताकि पहली बार की झिझक कम हो। मुझे उसके चेहरे से लग रहा था कि वो सही में नई थी। मैंने सानिया को उसे पानी पिलाने को कहा और वो पानी लेने चली गई। पानी पीकर रागिनी ने अपना दुपट्टा सोफ़े पर डाला और सानिया से पूछा- बाथरूम...?

करीब दस मिनट बाद वो आई और कहा- मैं तैयार हूँ, किस कमरे में ऽऽ ?

हम सब मेरे बेडरूम में आ गए, तब रागिनी ने पूछा- मैं खुद कपड़े उतारूँ या आप दोनों में से कोई?

मैं सानिया की तरफ़ देख रहा था कि उसका क्या मिजाज है। उसे लगा कि मैं शायद उसको कह रहा हूँ कि वो कपड़े उतारे, इसलिए वो रागिनी की तरफ़ बढ़ गई।

रागिनी ने उसकी तरफ़ अपनी पीठ कर दी। जब सानिया उसके कुर्ते की जीप नीचे कर रही थी, रागिनी ने सानिया से हल्के से पूछा- ये आपके पापा है?
हम सब मेरे बेडरूम में आ गए, तब रागिनी ने पूछा- मैं खुद कपड़े उतारूँ या आप दोनों में से कोई?

मैं सानिया की तरफ़ देख रहा था कि उसका क्या मिजाज है। उसे लगा कि मैं शायद उसको कह रहा हूँ कि वो कपड़े उतारे, इसलिए वो रागिनी की तरफ़ बढ़ गई।

रागिनी ने उसकी तरफ़ अपनी पीठ कर दी। जब सानिया उसके कुर्ते की जीप नीचे कर रही थी, रागिनी ने सानिया से हल्के से पूछा- ये आपके पापा है?

सानिया सिटपिटा गई।

उसे परेशानी से बचाने के लिए मैंने कहा- नहीं ! सानिया मेरे दोस्त की बेटी है, अभी मेरे साथ रहेगी। इसका ही मन था कि वो एक बार यह सब देखे।

रागिनी के मुँह से एक हल्का सा सॉरी निकला।

सानिया ने उसकी कुर्ते को खोलने के बाद उसकी शमीज (स्लीप) भी निकाल दी। रागिनी काले रंग की एक साटन ब्रा पहने थी। रागिनी का सपाट पेट देख मैं मस्त हो रहा था। चुचियाँ भी मस्त थी, एक दम ठोस ! 18 साल की लड़की की जैसी होनी चाहिए। मैं उसकी गदराई जवानी को घूर रहा था।

सानिया ने उसके सलवार की डोरी खींची और उसको नीचे कर दिया। उसने काले रंग की जालीदार लेस वाली पैन्टी पहनी हुई थी। पैन्टी में से भी उसकी चूत अपने फ़ूले होने का आभास दे रही थी। सुन्दर सी लम्बी टाँगें, एक दम हल्के-हल्के रोएँ थे जाँघों पर। उसके जवान बदन को मस्त निगाह से देखते हुए मैंने कहा- अब रहने दो सानिया, तुम आराम से देखो बैठ कर, बाकी मैं कर लूँगा।

फ़िर मैंने प्यार से रागिनी को बाँहों में उठाया और बेड पर लिटा उसके ओंठ चूमने शुरु किये। दो मिनट भी नहीं लगे और रागिनी के प्रत्युत्तर मुझे मिलने लगे। सानिया अपने कैप्री-टी-शर्ट में पास ही कुर्सी पर बैठ गई थी। मैंने रागिनी की ब्रा खोल दी और उसकी चूचियों से खेलने लगा। उसकी ठस्स चूचियाँ आजाद हो कर झूमने लगीं। एक बड़े से संतरे के आकार की थी उसकी चूचियाँ, जिन पर भूरे रंग के चुचूक मस्त लग रहा था। मैं उन्हें कभी चूमता, कभी चाटता, कभी चुचूक खींचता, कभी दबाता... मेरे दोनों हाथ भी कभी इधर तो कभी उधर मजा ले रहे थे।

करीब दस मिनट की चुम्मा-चाटी के बाद मैंने रागिनी की पैन्टी उसकी कमर से खिसकाई, तो उसकी झाँटों भरी बुर के दर्शन हुए। मैंने रागिनी की झाँटों पर हाथ फ़ेरा। उसकी झाँट करीब आधा-पौन इंच की थी। उसकी चूत पर मैंने अपनी ऊँगली घुमाई और अंदाजा लगाया कि सही में उसकी अभी चुदाई ऐसी नहीं हुई है, जैसी आम रन्डी की हो जाती है। अभी भी वो घर का माल ही थी, सूरी ने सही कहा था।

उसकी चूतड़ों का भी मैंने जायजा लिया, गोल-गोल, मुलायम गद्देदार ! उन चूतड़ों को हल्के से मैंने दबाया फ़िर उन पर एक हल्की चपत लगाई।

मैंने उसकी योनि को सूँघा- सुभानल्लाह... क्या जवानी की खुशबू मिली मुझे !

मेरे लण्ड ने एक अँगड़ाई ली, मेरे मुँह से निकला- बहुत मस्त चीज हो मेरी जान !

उसे अब तक चुप देख मैंने कहा- थोड़ा बातचीत करती रहो स्वीटी, वरना मजा नहीं आयेगा।

उसने कहा- ठीक है सर।

मेरे दिमाग ने मुझे उकसाया तो मैं बोला- अब ऐसे सर-सर ना करो। मुझे तुम डार्लिंग कहो, राजा कहो, जानू कहो, ऐसा कुछ कहो।

तो रागिनी बोली- अभी ऐसा सब बोलने की आदत नहीं हुई सर, सॉरी डार्लिंग !

फ़िर बोली- मैं डार्लिंग नहीं बोल पाउँगी, आप मेरे से बहुत सीनियर हैं।

मुझे मौका मिल गया, मैं तो अब रागिनी में सानिया को देख रहा था, सो मैंने कहा- ठीक है, तो तुम मुझे अंकल तो कह सकती हो।

रागिनी मुस्कुराई- ठीक है अंकल।

अब मैंने कहा- रागिनी, आज मुझे अपनी झाँट बनाने दो, इसके तुम्हें मैं 500 रूपए और दूँगा।

वो चुप रही तो मैंने सानिया से कहा- सानिया वो शेविंग किट और पानी ले आओ।

सानिया तुरंत उठ कर चली गई।

वो जब तक आई, मैंने रागिनी को बेड पर तौलिया बिछा उस पर बैठा दिया था। मैंने रागिनी को पहले पलट कर घोड़ी बनने को कहा, फ़िर पीछे से उसकी गाँड और योनि के आस-पास के बाल पहले कैंची से काट कर फ़िर रेजर से शेव कर दिया।

बड़े प्यार से मैंने उसकी झाँट बनाई थी, और सोच रहा था काश एक दिन इस सानिया की झाँट बनाने का मौका मिले तो मजा आए।

मैंने रागिनी को अब सीधा लिटा दिया और साईड से उसकी झाँटों को कैंची से काटने लगा। चूत की फ़ाँक के ठीक ऊपर और चूत की होंठ पर निकले बाल रेजर से साफ़ कर दिए। अंत में मैंने उसकी झाँटों को दोनों तरफ़ से छीलना शुरु किया। सीधा-उल्टा दोनों तरफ़ से रेजर चला कर मैंने उसकी झाँट दोनों साईड से छील दी, और बीच में जो जैसे था छोड़ दिया।

करीब दस मिनट बाद रागिनी की बुर एक दम साफ़ हो चमक उठी थी, उसके बुर के ठीक उपर से जहाँ से लड़कियों की झाँट शुरु होती है वहाँ तक करीब आध इंच चौड़ी एक पट्टी के तरह अब झाँट बची हुई थी। नाप के हिसाब से बोलूँ तो करीब तीन इंच लम्बी और आधा इंच चौड़ी और करीब पौना-एक इंच लम्बी झाँटों से अब रागिनी की बुर की सुन्दरता बढ़ गई थी।

मैंने अपने कलाकारी से संतुष्ट हो कर कहा- देख लो सानिया, यही है, लैंडिंग स्ट्रीप, दुनिया की सबसे ज्यादा मशहूर झाँट की स्टाईल !

रागिनी की भी नजरें मेरे कला की दाद दे रहीं थी।

मैंने कहा- रागिनी, जाओ एक बार फ़िर से चूत धो कर आओ।

वो अपने कटे हुए झाँटों को तौलिए में लेकर बाथरूम में चली गई। सानिया भी शेविंग किट रखने चली गई, तो मैंने अपने कपड़े उतार दिए, और पूरी तरह से नंगा होकर अपना लण्ड सहलाने लगा। मैं सोच रहा था कि कैसे अब सानिया मेरा लण्ड देखेगी।

सानिया पहले लौटी। मुझे नंगा देख थोड़ा हिचकी, पर मैं बेशर्म की तरह उससे नजरें मिला कर लण्ड से खेलते हुए बोला- बैठो, आराम से डेढ़-दो घन्टे तो पेलूँगा ही उसको। अगर तुम्हें बुरा लगे तो तुम चली जाना सोने के लिए। मुझे तो अपना पैसा भी वसूल करना है।

सानिया थोड़ा लजाते हुए कुर्सी पर बैठ गई। रागिनी अब तौलिए से अपनी चूत को पौंछते हुए कमरे में आई और तौलिए को एक तरफ़ फ़ेंक दिया।

मैंने उसको कहा- आओ रागिनी, जरा लण्ड से खेलो, एक बार पहले निकाल दो, फ़िर तुम्हारी चूत चूस कर तुमको भी मजा दूँगा। कोई झिझक मत रखो। अब थोड़ी देर भूल जाओ कि तुम कालगर्ल हो और पैसे लेकर चुदाने आई हो। आराम से सेक्स करो, जैसे प्रेमी-प्रेमिका करते हैं। तुम्हें भी मजा आयेगा और मुझे ही।

वो मेरे सामने घुटनों पर बैठ गई और प्यार से मेरे लण्ड को, जो अभी तक लगभग ढीला ही था, अपने कोमल हाथों में पकड़ लिया। मेरा लण्ड अभी कोई 5" का था ढीला सा, काला। उसने दो चार बार अपने हाथ से पूरे लण्ड को हल्का-हल्का खींचा और फ़िर मेरे लण्ड के टॉप से चमड़े को पीछे करने लगी। पर चमड़ा तो पीछे टिकता तब जब लण्ड कड़ा होता, सो वो बार-बार आगे आ जा रहा था। मेरे हाथ उसके कंधों तक फ़ैले बालों के साथ खेल रहे थे।

रागिनी ने फ़िर मेरे लण्ड को मुँह में ले लिया और चूसने लगी। धीरे-धीरे मेरे लण्ड में सुरूर आने लगा, वो अब थोड़ा खड़ा हो रहा था। करीब दो मिनट की चुसाई के बाद मेरा लण्ड ठीक से खड़ा हो गया। उसकी पूरी लम्बाई करीब 8" थी। रागिनी भी मस्ती से लण्ड चूस रही थी, और मेरे अंडकोष तथा झाँटों से खेल रही थी। लड़की धंधे में नई जरूर थी, पर लण्ड चूसने में उस्ताद थी। मुझे खूब मजा दे रही थी।

मैंने रागिनी की तारीफ़ की- वाह रागिनी ! मजा आ गया ! तुम तो बहुत उस्ताद हो यार ! वाओ, मजा आ रहा है।

रागिनी ने एक नजर मेरे से मिलाई और फ़िर मेरे लण्ड को दोगुने जोश से चूसने लगी।

कोई 7-8 मिनट में मुझे लगा कि मैं झड़ जाऊँगा। मैं अभी 5-7 मिनट और रुक कर झड़ना चाहता था इसलिए रागिनी को कहा- आअह, अब रुको बेटा। मुझे जोर की सु-सु आई है।

रागिनी ने लण्ड मुँह से बाहर कर दिया। मैं तो थोड़ा समय चाहता था कि लण्ड एक बार थोड़ा शान्त हो ले तो फ़िर चूसवाऊँ ! सो मैं बाथरूम की ओर नंगे ही चल दिया।

बाथरूम में मैं सुन रहा था कि रागिनी और सानिया बात कर रही हैं। रागिनी ने उससे पूछा कि वो कब ज्वाईन करेगी?

तब सानिया ने कहा कि वो सिर्फ़ देखेगी अभी सब।

रागिनी ने कहा- क्यों ? आ जाईए दीदी, आपको भी मजा आयेगा।

पर सानिया ने छोटा सा जवाब दिया- नहीं ऐसे ही ठीक है।

मैं समझ गया कि यह साली सानिया आसानी से नहीं चुदेगी, "साली कुतिया" मैं बड़बड़ाया।

अब तक पेशाब करने के बाद मैंने लण्ड को पानी से धोया और वो अब तक आधा ढ़ीला हो चुका था, जैसा मैं चाहता था।

मैं कमरे में आ गया, बिस्तर पर लेट कर कहा- यहाँ आ जाओ और चूसो, एक पानी निकाल दो मेरा। तुम भी तो नीचे बैठ कर थक गई होगी।

रागिनी ने फ़िर से मेरे लण्ड को मुँह में डाला और शुरू हो गई। मैं अब सानिया साली को उसके हाल पर छोड़ रागिनी से मजे लेने की मूड में आने लगा था।

मेरे मुँह से अनायास निकलने लगा- वाह स्वीटी, बहुत खूब...., अच्छा चूसती हो लण्ड, मजा आ गया...।

रागिनी ने भी लण्ड मुँह से बाहर करके कहा- थैक्यू, अंकल !

और फ़िर से चूसने लगी।

मैं बोल रहा था- बहुत खूब बेटा, चूसो और खेलो इसके साथ... आज तुम्हें बहुत मजा दूँगा, तुम बहुत अच्छी हो.. थोड़ा हाथ से भी करो रानी...मैं तुम्हें सिखाऊँगा कि कैसे मर्द को खुश किया जाता है, वेरी गुड... ऐसे ही करो !

रागिनी ने हाथ से लण्ड सहलाना शुरु किया और अंडकोष चाटने लगी- अब ठीक है, अंकल?

मैंने जवाब दिया- हाँ बेटी, बहुत अच्छा... सही कर रही हो..आआआह्ह्ह्ह मजा आ रहा है, चूस अब और निकाल कर सारा माल चाट जा..!

रगिनी अब जोर जोर से लण्ड चूस रही थी। मैं झड़ने की स्थिति आने पर बिस्तर से उठा और रागिनी को कहा- मुँह खोलो बेटा, सब पी जाओ !

और उसके मुँह में झड़ गया। रागिनी भी सहयोग करते हुए सारा निगल गई, चूस-चाट कर लण्ड साफ़ कर दिया। लण्ड अब हल्के-हल्के ढीला होने लगा।

मेरा पूरा ध्यान अब रागिनी पर था, सानिया को मैंने उसके हाल पर छोड़ दिया था।

मैंने अब रागिनी को कहा कि अब वो आराम से लेटे और मैंने अपनी ऊँगलियाँ उसकी ताजा-ताजा साफ़ हुई चूत पर घुमाई। उसकी चूत एक दम गीली हो गई थी, ऐसा लग रहा था कि पसीज रही हो। मैंने एक नजर सानिया पर डाली, वो एक टक हमें ही देख रही थी, उसकी नजर भी रागिनी की चूत पर थी।

मैं झुका और एक प्यारा सा चुम्मा उसके चूत की फ़ाँक की ऊपर की तरफ़ चिपका दिया- मजा आया रागिनी बेटा?

हल्के से काँपती आवाज में उसने कहा- हाँ अंकल, बहुत ! आप बहुत अच्छे हैं।

मैं अब अपनी जीभ उसकी चूत की फ़ाँक पर घुमा रहा था और नमकीन पानी चाट रहा था। फ़िर मैंने उसके पैरों को फ़ैला कर उसकी चूत खोल ली और उसके चूत तो चाटने-चूसने लगा। रागिनी कभी आह भरती, कभी सिसकती, तो कभी एक हल्का सा उउउम्म्म्म्म्म्म आअह्ह्ह...। उसे मजा आने लगा था।

लड़की चोदते हुए मुझे करीब 25 साल हो गए थे और मैं अपने अनुभव से किसी भी रन्डी को मस्ती करा सकता था। रागिनी तो अभी भी बछिया ही थी मेरे लिए, जब कि मैं एक साँड, जो शायद तब से चूत चोद रहा था जब से इसकी मम्मी ने चुदाना भी नहीं शुरु किया होगा। मैं अब रागिनी को सातों आसमान की सैर एक साथ करा रहा था।

थोड़ी देर बाद मैंने रागिनी की चूत से मुँह हटाया। वो बिल्कुल निढ़ाल दिख रही थी। मैंने उसको तकिये के सहारे बिठा दिया और अपने दाहिने हाथ की बीच वाली ऊँगली चूत में घुसा दी। फ़िर ऊपर की तरफ़ उँगली को चलाते हुए रागिनी के जी-स्पॉट को खोजना शुरु किया, और तभी रागिनी का बदन हल्के से काँपा। मुझे अपने खोज में सफ़लता मिल गई थी। मैंने अपनी उँगली से चूत के भीतर उस जगह कुरेदना शुरु किया तो रागिनी मचलने लगी- आआआआआअह्ह्ह्ह्ह अंकल ! उउईईईमाँ.... इइइस्सस....।

अचानक वो छटपटाई और फ़िर एकदम से ढीली हो गई।
थोड़ी देर बाद मैंने रागिनी की चूत से मुँह हटाया। वो बिल्कुल निढ़ाल दिख रही थी। मैंने उसको तकिये के सहारे बिठा दिया और अपने दाहिने हाथ की बीच वाली ऊँगली चूत में घुसा दी। फ़िर ऊपर की तरफ़ उँगली को चलाते हुए रागिनी के जी-स्पॉट को खोजना शुरु किया, और तभी रागिनी का बदन हल्के से काँपा। मुझे अपने खोज में सफ़लता मिल गई थी। मैंने अपनी उँगली से चूत के भीतर उस जगह कुरेदना शुरु किया तो रागिनी मचलने लगी- आआआआआअह्ह्ह्ह्ह अंकल ! उउईईईमाँ.... इइइस्सस....।

अचानक वो छटपटाई और फ़िर एकदम से ढीली हो गई।

मैं समझ गया कि साली को पहला चरमसुख मिल गया। मैंने ऊँगली बाहर निकाल ली। उसको पहली बार जी-स्पॉट का मजा मिला।

रागिनी एकदम से शांत हो गई थी। मैंने उसे पुकारा- रागिनी बेटा, कैसा लगा... कुछ बताओ तो !

वो उठी और मेरे से लिपट गई, मुझे जवाब मिल गया। हम दोनों एक-एक बार झड़ गए थे। मेरा लण्ड फ़िर से मस्त हो चुका था। मै बिस्तर से उठा और साईड-टेबल पर रखे जग से थोड़ा पानी पिया, और रागिनी की तरफ़ देखा तो उसने इशारे से पानी माँगा।

एक गिलास पानी पीने के बाद उसके मुँह से बोल निकले- ओह अंकल, आज तक ऐसा नहीं लगा था। बहुत अच्छा लगा अंकल, थैंक्स। अभी तक तो मेरा अनुभव था कि मर्द लोग धक्के लगा-लगा कर खुद मजा लेते, पर मेरे मजा आने के पहले ही, शांत हो जाते। आज पहली बार पता चला असल सेक्स क्या है।

मैंने सानिया की तरफ़ देखा। वो शांति से सब देख रही थी, पर अब उसकी टाँगें थोड़ी आपस में जोर से सटी हुई लगी। उसकी भी चूत गीली हो गई थी।

मैंने उसी को देखते हुए कहा- अभी कहाँ तुम्हें पता चला है कि सेक्स क्या होता है। वो तो अब पता चलेगा जब इस लण्ड को तुम्हारी बुर में पेल कर तुम्हारी चुदाई करुँगा। जल्दी से तैयार हो जाओ चुदवाने के लिए।

मैं अपने लण्ड को सहला-सहला कर सांत्वना दे रहा था कि पप्पू जल्दी ना कर, अभी लाल मुनिया मिलेगी चोदने के लिए।

दो मिनट बाद रागिनी बोली- आ जाइए अंकल, मैं तैयार हूँ।

वो तकिये पर सिर रख कर सीधा लेट गई। मैंने उसके पैरों को घुटने से हल्का मोड़ कर उपर उठा दिया जिससे उसके गीली गीली बुर एक दम से खुल गई। भीतर का नन्हा सा गुलाबी फ़ूल सामने दिख रहा था। मैं उसकी खुली टाँगों के बीच आ गया और अपने 72 किलो के बदन को उसके ऊपर ले आया। फ़िर अपने बाँए हाथ से थूक निकाला और अपने लण्ड की फ़ूले हुए सुपारे पर लगा कर लण्ड रागिनी की बुर पर टिका लिया, पूछा- पेल दूँ अब भीतर रागिनी?

उसका सिर हाँ में हिला।

ठीक है फ़िर चुदो बेटा ! कहते हुए मैंने लण्ड भीतर ठाँसने लगा। रागिनी हल्के से कुनमुनाई। मैंने एक जोर का ध्क्का लगाया और पुरा ८" लण्ड भीतर पेल दिया। रागिनी की आँख बन्द थी, "आआअह" मुँह से निकली, और उसने आँख खोल कर भरपुर नजरों से मुझे देखा।

मैंने उसके कान में कहा- जब मैं चोदूँगा तो मुझे खूब गाली देना, मजा आएगा !

मैंने रागिनी से पूछा- बोलो मेरी बच्ची, चोदूँ तुम्हें?

और सानिया की देख उससे पूछा- दिखा साफ़-साफ़, नहीं तो एक बार फ़िर बाहर निकाल कर पेलूँ भीतर?

यह कहते हुए मैंने लण्ड बाहर खींचा और दुबारा से रागिनी की बुर में पेल दिया। रागिनी के मुँह से दुबारा आऽऽ आऽऽ आह निकली। सानिया इस बार खड़ी हो गई ताकि सब साफ़ देख सके।

रागिनी ने सानिया को खड़ा देख बोला- आईए न दीदी आप भी। अंकल बहुत अच्छे हैं।

आगे कुछ कहने से पहले ही मैंने लण्ड को बुर के बाहर भीतर करके लौण्डिया की चुदाई शुरु कर दी। सानिया का चेहरा चुदाई देख एकदम लाल हो गया था, पर वो सिर्फ़ खड़े-खड़े देख रही थी। रागिनी को पहली बार मेरे जैसे मर्द से वास्ता पड़ा था जो लड़की को खूब मजे लेकर चोदता है और लड़की को भी साथ में मजे देता है।

मेरी आदत है कि मैं रन्डी भी चोदता तो प्रेमिका बना कर। जब भी किसी को चोदा तो उसको अपने लिए भगवान का उपहार माना और उसके शरीर को पूरे मन से भोगा।

मैंने रागिनी से कहा- मजा आया रागिनी?

उसकी आँख बंद थी, होठ से कांपती आवाज आई- हाँ अंकल बहुत। आप बहुत अच्छे हैं। आऽऽ अह अंकल अब थोड़ा जोर से धक्का लगा कर चोदिए ना ! जैसा धक्का लण्ड पेलते समय लगाया था। असल में अभी खूब प्यार से धीरे-धीरे लण्ड अंदर-बाहर करके उसको चोद रहा था। पूरा पैसा वसूल हो इसके लिए जरूरी था कि उसकी बुर कम से कम आध घंटा मेरे लण्ड से चुदे।

उसके जोर का धक्का लगाने की फ़रमाईश पर मैंने आठ-दस दमदार धक्के लगाए और धक्के पर रागिनी के मुँह से आह की आवाज आई।

मैंने रागिनी से कहा- आँख खोल और देख ना कौन चोद रहा है तुझे ! मुझसे आँख मिला, कुछ बात कर ना। रन्डी हो तो थोड़ा रन्डीपना दिखा।

उसे मेरी बात से ठेस पहुँची शायद ! पर वो आँख खोल कर बोली- हाँ साले बेटीचोद, लूट मजा मेरी चूत का साले। मेरे बाप की उमर का होकर साले, मुझे चोद रहा है?

मुझे उसकी गालियों से जोश आ गया- चुप साली ! फाड़ दूँगा तेरी चूत आज ! साली कुतिया ! मुझे बेटी-चोद बोलती है ! बाप से चुदा-चुदा के जवान हुई है साली और मुझे बोल रही है बेटी चोद... ? ले साली चुद, और चुद, और चुद, रन्डी साली।

और मैंने कई जोरदार धक्के लगा दिए।

8-10 मिनट चोदने के बाद मैं थोड़ा थक गया तो लण्ड बाहर निकाल लिया और बोला-"अब बेटा तुम मेरे ऊपर बैठ कर चोदो, मुझे थोड़ा आराम से लेटने दो, फ़िर मैं चोदूँगा।

उसने कहा- ठीक है अंकल !

और मेरे ऊपर चढ़ कर बैठ गई। सानिया बार-बार अपने पैर सिकोड़ रही थी, उसकी चूत भी गीली थी, पर उसमें गजब का धैर्य था। खड़े-खड़े ही वो हम दोनों की चुदाई देख रही थी- चुपचाप !

रागिनी के मुँह से हुम्म्म हुम्म्म की अवाज निकल रही थी पर वो मेरे लण्ड पर उछल उछल कर खुद ही अपनी बुर चुदा रही थी। मैं ऐसी मस्त लौन्डिया को पाकर धन्य हो गया।

कुछ देर बाद मैंने कहा- चल साली, अब घोड़ी बन। घुड़सवारी करने का मन है।

वो बोली- जरूर अंकल, आपके लिए तो आप जो बोलो करुँगी। आपने मुझे सच्ची मजा दिया है और मुझे पहली बार रन्डीपन का मजा मिल रहा है।

और वो बड़े प्यार मेरे ऊपर से उठी और फिर बिस्तर से उतर कर जमीन पर हाथ-घुटनों के सहारे झुक गई। वो अब सानिया के बिल्कुल पास झुकी हुई थी। उसकी खुली हुई बुर अपने भीतर की गुलाबी कली के दर्शन करा रही थी।

मैं भी बिस्तर से उतर कर पास आ गया और सानिया से पूछा- मस्ती तो आ रही होगी, कम से कम अपनी उंगली से ही कर लो मेरी बच्ची !

मैंने प्यार से उसके गाल सहला दिए।

फिर रागिनी पर सवार हो गया। मेरा लण्ड अब मजे से उसकी गीली चूत के भीतर की दुनिया का मजा ले रहा था। करीब 40 मिनट हो गए थे, हम दोनों को खेलते हुए। रागिनी एक बार और परम आनन्द प्राप्त कर चुकी थी।

मेरा भी अब झड़ने वाला था तो मैंने उससे पूछा- कहाँ निकालूँ रागिनी?

वो तपाक से बोली- मेरे मुँह में ! मेरे मुँह में अंकल ! आपका एक बूंद भी बेकार नहीं करुँगी।

मैंने अपना लण्ड बाहर निकाल और उसके मुँह की तरफ़ आया। उसने अपना मुँह खोला और मैं उसके मुँह को अब चोदने लगा। दस-बारह धक्के के बाद मेरे लण्ड से पिचकारी निकलने लगी, जिसे रागिनी अपने होंठ दबा कर मुँह में लेने लगी और फ़िर मैंने लण्ड बाहर खींच लिया तब उसने मुँह खोल कर मेरे माल को अपने मुँह में दिखाया और फिर मुँह बन्द करके निगल गई।

मैंने उसको जमीन से उठाया और फ़िर अपने गले लगा लिया और कहा- तुम बहुत अच्छी हो रागिनी, मैंने जो गालियाँ तुम्हें दी, उसके लिए माफ़ करना। चोदते समय यह सब तो होता ही है।

वो भावुक हो गई, उसकी आँखों में आँसू तैर गए, भरी आवाज में बोली- नहीं सर, आप बहुत अच्छे हैं। मैं रन्डी हूँ, पर आपने इतनी इज्ज्त दी, वरना बाकी लोग तो मेरे बदन से सिर्फ़ पैसा वसूल करते हैं। थैंक्यू सर।

उसकी यह बात दिल से निकली थी, मैंने उसकी पीठ थपथपाई- सर नहीं अंकल। अब मैं तुम्हारा अंकल हीं हूँ। जब भी परेशानी में रहो, मुझे बताना। मैं पूरी मदद करुँगा।
एक-एक बूँद आँसू उसके दोनों गालों पर बह निकले। उसने अपने हाथों से अपना चेहरा ढक लिया।

5-6 सेकेण्ड बाद मुस्कुराते हुए हाथ हटाए और बोली- बेटीचोद !

और मेरे गले से लिपट गई।

सानिया की आँख भी गीली हो गई। उसकी नजरों में भी मेरे लिए अब प्यार दिख रहा था। वो बोली- मैं आप दोनों के लिए पानी लाती हूँ !

और वो बाहर चली गई।

जब वो पानी लेकर आई तब मैं कुर्सी पर बैठा था और रागिनी बिस्तर ठीक कर रही थी। हम दोनों अभी भी नंगे ही थे। मेरा लण्ड एक दम शांत और भोला बच्चा बन गया था। पानी आगे करते हुए सानिया बोली- चाचू ! अब आप दोनों सो जाएँ, बारह बजने को हो रहे हैं। अब कल सुबह मैं चाय लाऊँगी आप दोनों के लिए।

फ़िर हँसते हुए कमरे में से भाग गई।

अगली सुबह सानिया ने ही कमरे में आकर मुझे और रागिनी को जगाया। मैने देखा कि सानिया के हाथ की ट्रे में दो गिलास पानी और अखबार है। मैं और रागिनी अभी भी नंगे थे जैसे कि हम रात को सो गए थे। रागिनी पानी पीकर बाथरुम की तरफ़ चल दी और मैंने उसका तकिया उठा कर अपने गोद में रख लिया जिससे मेरे लण्ड को सानिया नहीं देखे। सानिया यह सब देख बड़े कातिलाना अंदाज में मुस्कुराई, फ़िर चाय लाने चली गई।

मैंने अखबार खोल लिया। जब सानिया चाय लेकर आई, तब तक रागिनी भी बाहर आ गई थी और अपने कपड़े जमीन पर से समेट रही थी। सानिया सिर्फ़ एक कप चाय लाई थी, जिसे उसने रागिनी की तरफ़ बढ़ा दिया।

रागिनी ने चाय ली और पूछा- अंकल की और तुम्हारी चाय ?

अब जो सानिया ने कहा उसे सुन कर मेरी नसें गर्म हो गई। बड़ी सेक्सी आवाज में हल्के से फ़ुसफ़ुसा कर सानिया बोली- तुम पीयो चाय, चाचू को आज मैं अपना दूध पिलाऊँगी !

और उसने अपने टॉप को नीचे से पकड़ कर उठाते हुए एक ही लय में अपने सर के उपर से निकाल दिया।

मेरे मुँह से निकल गया- जीयो जान ! क्या मस्त चूचियाँ निकली है तेरी।

सच उसकी संतरे जैसी गोल-गोल गोरी-गोरी चूचियाँ गजब का नजारा पेश कर रही थी और उन पर गुलाबी-गुलाबी लगभग आधे आकार को घेरे हुए चुचक बेमिसाल लग रहे थे। सानिया के बदन के गोरेपन का जवाब नहीं था। वो इसके बाद मेरे बदन पर ही चढ़ आई।

मैंने पहले उसके चेहरे को पकड़ा और फ़िर उसके गुलाबी होठों का रस पीने लगा। उसका बदन हल्का सा गर्म हो रहा था, जैसे बुखार सा चढ़ रहा हो। बन्द आँखों के साथ वो हसीना अब टॉपलेस मेरे बाहों में थी। मैंने रागिनी की तरफ़ देखा। वो मुझे देख मुस्कुरा रही थी और चाय की चुस्की ले रही थी।

मैंने सानिया को अपने बदन से थोड़ा हटाया और फ़िर उसकी दाहिनी चूची का चुचूक मुँह में लेकर उसे चुभलाने लगा। सानिया आँख बंद करके सिसकी भर रही थी और मैं मस्त होकर उसकी चूचियों से खेल रहा था, चूस रहा था।

वो भी मस्त हो रही थी।

मैंने अपने हाथ थोड़ा आगे कर उसकी कैप्री के बटन खोले और फ़िर उसको अपने सामने बिस्तर पर सीधा लिटा दिया। भीतर काली पैन्टी की झलक मुझे मिल रही थी। प्यार से पहले मैंने कैप्री उतार दी। फ़िर मक्खन जैसी जाँघों को सहलाते हुए भीतर की तरफ़ जाँघ पर 2-3 चुम्बन लिए। उसका बदन अब हल्के से काँप गया था। और जब मैं उसकी पैन्टी नीचे कर रहा था तब उसने शर्म से अपना चेहरा अपने हाथों से ढ़क लिया। इस तरह से उसका शर्माना गजब ढ़ा गया।

चूत को उसने एक दिन पहले ही साफ़ किया था, सो उसकी गोरी चूत बग-बग चमक रही थी। मैंने उसके चूत को पूरा अपने मुट्ठी में पकड़ कर हल्के से दबा दिया, तो वो आआह्ह्ह्ह कर उठी।

मैंने अपना मुँह उसकी चूत से लगा दिया और वो चुसाई की, वो चुसाई की गोरी-गोरी चूत की कि वो एक दम लाल हो गई जैसे अब खून उतर जाएगा।

वो अब चुदास से भर कर कसमसा रही थी, कराह रही थी। उसकी हालत देख मैंने रागिनी की तरफ़ आँख मारी और कहा- सानिया बेटा, अब जरा तुम भी मेरा चूसो, अच्छा लगेगा।

वो काँपते आवाज में बोली- नहीं चाचू, अब कुछ नहीं ! अब बस आप घुसा दो मेरे भीतर ! अब बर्दाश्त नहीं होगा, प्लीज...!

मैंने उसको छेड़ा- क्या घुसा दूँ, जरा ठीक से बोलो ना।

रागिनी मेरे बदमाशी पर हँस दी, बोली- अंकल, क्यों दीदी को तड़पा रहे हो, कर दो जल्दी।

सानिया लगातार प्लीज घुसाओ ! प्लीज ! कर रही थी। मैंने फ़िर कहा- बोलो भी ! अब क्या घुसा दूँ, कहाँ घुसा दूँ, मुझे समझाओ भी जरा।

सानिया सच अब गिड़गिराने लगी, बोली- चाचा, प्लीज...!

वो अपने हाथ से अपनी चूत सहला रही थी।

मैंने भी कहा- एक बार कह दो साफ़ साफ़ डार्लिंग, उसके बाद देखो, जन्न्त की सैर करा दूंगा, बस तुम्हारे मुँह से एक बार सुनना चाहता हूँ पहले।

अब सानिया ने बोल ही दिया- मेरे अच्छे चाचू, प्लीज अपने लण्ड को मेरी चूत में डाल कर मुझे चोद दो एक बार, अब रहा नहीं जा रहा।

मेरा लण्ड जैसे फ़टने को तैयार हो गया था ये सब सुन कर। वर्षों से यही सोच सोच कर मैंने मुठ मारी थी सैकड़ों बार। मैं जोश में भर कह उठा- ओके, मेरे से चुदाना चाहती हो, ठीक है खोलो जाँघें। और मैंने उसकी जाँघों के बीच बैठ कर लण्ड को उसकी लाल भभूका चूत की छेद से भिड़ा दिया।

मैंने कहा- डालूँ अब भीतर?

सानिया चिढ़ गई- ओह, अब चोद साले ! बात मत कर ! आह।

इस तरह जब वो बोल पड़ी तो मैं समझ गया कि अब साली को रन्डी बन जाने में देर ना लगेगी। मैंने एक जोर के धक्के के साथ आधा लण्ड भीतर पेल दिया। उसके चेहरे पर दर्द की रेखा उभरी पर उसने होंठ भींच लिए। अगला धक्का और जोर का मारा और पूरा 8" जड़ तक सानिया की चूत में घुसेड़ दिया।

वो चीख पड़ी- हाय माँ, मर गई रे....।

उसकी आँखें बन्द थी और उस जोरदार धक्के के बाद मैं थोड़ा एक क्षण के लिए रुका कि रागिनी की आवाज सुनाई दी- ओह माँ।

मैंने आँख खोली, देखा सानिया की दोनों आँखों से एक-एक बूँद आँसू निकल कर गाल पर बह रहे थे, रागिनी साँस रोके अपने हाथों से मुँह ढ़के बिस्तर देख रही थी।

और तब मुझे अहसास हुआ कि सानिया कुँवारी कली थी और मैंने उसकी सील तोड़ी अभी-अभी। बिस्तर पर उसकी कुँवारी चूत की गवाही के निशान बन गए थे, बल्कि अभी और बन रहे थे।

मैं समझ गया कि कितनी तकलीफ़ हुई है सानिया को, सो अब मैंने उसको पुचकारा- हो गया बेटा हो गया सब, अब कुछ दर्द ना होगा कभी।

रागिनी भी उसके बाल सहला रही थी- सच दीदी, अब सब ठीक है, इतना तो सब लड़की को सहना होता है...।

सानिया भी अब थोड़ा सम्भली और होंठ भींचे भींचे सर को हिलाया कि सब ठीक है। और तब मैंने अपना लण्ड बाहर-भीतर करना शुरु किया। 4-6 बार बाद लण्ड ने अपना रास्ता बना लिया और फ़िर हौले-हौले मैं भी अब सही स्पीड से सानिया की चुदाई करने लगा। वो भी अब साथ दे रही थी। 8-10 मिनट बाद मैंने अपना सारा माल चूत के ऊपर पेट की तरफ़ निकाल दिया। वो निढ़ाल सी बिस्तर पर पड़ी थी। रागिनी ने चादर से ही उसकी चूत पौंछ दी और फ़िर उसको सब दिखाया।

सानिया बोली- अब तो पक्का हुआ ना कि मैंने रेहान के साथ कुछ नहीं किया था, पर ये सब अम्मी-अब्बू कैसे जान पाएँगें?

उसकी आँखों में आँसू आ गए। मैंने उसे अपनी बाँहों में समेट लिया- छोड़ो यह सब बात, आज तो सिर्फ़ अपनी जवानी का जश्न मनाओ।

मुझे अब पेशाब लग रही थी, सो मैं बिस्तर से उठ गया। अब दोनों लड़कियाँ भी उठ कर कपड़े पहनने लगीं। आधे घन्टे बाद चाय-बिस्कुट के साथ सानिया अपनी पहली चुदाई का अनुभव बता रही थी।

रागिनी ने उसे समझाया कि अभी एक-दो बार और दर्द महसूस होगा पर ऐसा नहीं, मीठा दर्द लगेगा, उसके बाद जब बूर का मुँह पुरा खुल जायेगा तब बिल्कुल भी दर्द नहीं होगा, चाहे जैसा भी लण्ड भीतर डलवा लो। मुझे अब बिल्कुल भी दर्द नहीं होता।
करीब नौ बजे रागिनी चली गई। सानिया ने उससे वादा लिया कि वो फ़िर एक बार आयेगी, तब शुक्रवार को आने की बात कही, क्योंकि शनि और रविवार को राजिन्दर उसकी मेरे साथ बुकिंग के बाद एक घन्टे में अगले 5 सप्ताह की बुकिंग कर चुका था। मुझे भी रागिनी बहुत अच्छी लगी थी।

जाते-जाते वो मुझे कह गई- अंकल आपको जब मन हो, फ़ोन कर दीजिएगा, सूरी सर वाले दिन छोड़ कर ! चली आऊँगी, अब आपसे पैसे नहीं लूँगी, आपने सच मुझे बहुत इज्ज्त और प्यार दिया, धन्यवाद।

उसके जाने के बाद मैंने और सानिया ने अगले एक घण्टे में घर साफ़ किया और फ़िर कपड़े वाशिंग मशीन में डालने के बाद सानिया मेरे पास आई और बोली- चाचू, एक बार और कीजिएगा, अब दर्द बिल्कुल ठीक हो गया है।

सुबह साढ़े छः के करीब सानिया पहली बार चुदी और अभी साढ़े दस बजे वो दूसरी बार चुदाने को तैयार थी। मेरे लिए तो सानिया का जिस्म दुनिया का सबसे बड़ा नशा था सालों से ! कैसे मना करता। तुरंत ही अपने कपड़े उतार दिए और बोला- आओ।

सानिया आई और घुटनों पर बैठ गई। मैं समझ गया कि अब वो होगा जो मैंने हमेशा सपने में होने की उम्मीद करता था।

हाँ, सानिया ने मेरे ढीले लण्ड को पकड़ अपने मुँह में डाल लिया और उस पर अपनी जीभ चलाने लगी।

अचानक वो बोली-"चाचू, अब आपका बूढ़ा होने लगा है, देखिए कई बाल सफ़ेद हो गए हैं।

वो मेरी झाँट के बारे में बात कर रही थी। उसे इस प्रकार बात करते देख अच्छा लगा कि अब ज्यादा मजा आएगा, पहली बार तो कुछ खास बातचीत हुई नहीं थी।

मैंने उसे थोड़ा उत्साहित किया- अभी बूढ़ा न कहो इसको। बारह घण्टे में दो जवान लौन्डियों को चोदा है इस पट्ठे ने। एक की तो सील तोड़ी है। मर्द तो साठ साल में पट्ठा होता है- साठा तब पाठा - सुना नहीं क्या? अभी पाँच मिनट रुको, पता चलेगा जब तेरी बुर की बीन बजाएगा ये काला नाग।

उसने अपनी आँख गोल-गोल नचाई- हूँ ! ऐसा क्या?

सच में उसकी यह अदा लाजवाब थी। वो चूस-चूस कर मेरे लण्ड को खड़ा कर रही थी और काफ़ी अच्छा चूस रही थी।

मैंने कहा- अभी थोड़ा और चूसो आआअह्ह्ह, सानिया तुम तो सब बहुत जल्दी सीख गई।

उसने नजर मिला कर कहा- मेरा प्यारा चाचू सिखाए और मैं ना सीखूँ? ऐसा कैसे होगा?

मैं- आय हाय, बड़ी मस्त लौन्डिया हो रे तुम चाचा की भतीजी।

उसने मुझसे हँसते हुए पूछा- मैं लौन्डिया हूँ?

मैंने जवाब दिया- हाँ तुम लौन्डिया हो लौन्डिया, मेरी लौन्डिया, मेरी लौन्डी हो।

वो बोली- अच्छा और क्या हूँ मैं?

और मेरे लण्ड को हल्के-हल्के चूसती जा रही थी। मैं मस्ती की मूड में आ गया- दिखने में तो तुम माल हो माल ! वो भी टॉप क्लास का ! आआअह्ह्ह, मक्खन हो साली तुम। खिलती हुई गुलाब की कली हो जान। वाह बहुत अच्छा चूस रही हो, इइस्स्स, मजा आ रहा है। और चूस मेरी लौन्डी। कैसा लग रहा है, जरा बता ना साली। थोड़ा खेल भी हाथ में लेकर।

सानिया ने लण्ड को अब हाथ से सहलाना शुरु किया- बहुत बढ़िया है आपका लवड़ा।

मैंने सुधारा- लवड़ा नहीं लौड़ा बोल इसे। चुदाते समय रन्डियों की तरह बोलना सीख।

वो मचल कर बोली- तो सिखाओ ना कैसी रन्डी बोलती है, मुझे थोड़े न पता है। मैं तो सीधी-साधी लड़की हूँ, अम्मी-अब्बू ने इतने प्यार से पाला और अब आप मुझे यह सब कह रहे हो, कैसे होगा?

मैं बोला- तुझे लड़की कौन बेवकूफ़ कहेगा। मैंने बताया न, तुम माल हो वो भी एक दम टंच माल। एक चुदाई के बाद जैसे लण्ड खा रही है, लगता है कि अम्मी-अब्बू के घर जाने तक तू पूरी रन्डी बन जाएगी।

सानिया मेरी बात सुन कर बोली- हाँ चाचू, मुझे सब सीखना है, जल्दी-जल्दी सीखाओ न अब, एक सप्ताह तो तुमने बर्बाद कर दिया मेरा उदघाटन करने में। वो भी हुआ तब, जब मैं कालगर्ल लाने को बोली, वर्ना तुम तो मुझे ऐसे ही अपने घर से विदा कर देते। मैं जब आई थी तब से यह सब सोच कर आई थी। शुरु से तुमको लाईन दे रही थी और तुम साधु बने हुए थे। पहले दिन से ही मैंने तुम्हारे बाथरुम में अपना अन्डरगार्मेन्ट छोड़ना शुरु किया पर तुम थे कि आगे बढ़ ही नहीं रहे थे।

मैंने सब सुना और कहा- हाँ बेटा, तुम सही कह रही हो। असल में मुझ लग रहा था कि थोड़ी-बहुत छेड़-छाड़ तो ठीक है, पर शायद तुम सेक्स के लिए ना कह दोगी तो मुझे बहुत शर्म आयेगी फ़िर तुमसे। यही सब सोच मैं आगे नहीं बढ़ रहा था। पर मैंने भी धीरे-धीरे ही सही पर तुम्हारी तरफ़ आगे बढ़ रहा था ये तो मानोगी। और पता है, रोज हस्त-मैथुन करके तुम्हारी पैन्टी पर अपना लण्ड का रस डाल देता था, तुम्हें पता चला कुछ?

वो मुस्कुराई- सब पता है, सूखने पर भी थोड़ा तो अलग लगता है। अब ऐसे अपना क्रीम मत फ़ेंकना, मैं हूँ ना, सब खा जाऊँगी। कहीं पढ़ा है कि मर्द का रस बहुत पौष्टिक होता है।

मेरा लण्ड अब जैसे माल निकालने की स्थिति में आ गया था। मैंने समय लेने के लिए कहा- अब बात बन्द कर और चल बिस्तर पर लेट। तेरे चूत का स्वाद लेना है अब मुझे।

वो झट से उठी और बिस्तर पर लेट गई। मैं भी साथ ही आ गया और तुरंत उसकी चूत पर मुँह भिड़ा दिया। पूरे दस मिनट तक उसकी चूत को खूब चुभला-चुभला कर चूसा, चबाया। उसकी गीली चूत का नमकीन स्वाद मस्त था। साली खूब मस्त हो कर अपना चूत चटवा रही थी। एक बार पानी भी छोड़ा, पर थोड़ा सा। इसके बाद वो थोड़ा शान्त हो गई।

तब मैंने पूछा- क्या हाल है? कैसा लगा इस चूतिया चाचा के मुँह का मजा?

बेचारी कुछ बोल न सकी, बस हाँफ़ती रही, और मुझे समझ आ गया कि बछिया अब हार चुकी है। मैं एक बार फ़िर साँड बन कर बछिया पर चढ़ गया और सिर्फ़ उसके चेहरे पर नजर गड़ा कर साली की जोरदार चुदाई शुरु कर दी। अब वो जैसे छोटे पिल्ले केंकीयाते हैं, वैसा आवाज मुँह से निकाल रही थी। आप सबने ऐसी आवाज चाईनीज या जपानी लड़की की चुदाई वाली ब्लू-फ़िल्म में सुनी होगी। उसकी चूत से निकलने वाला "राग मस्त-चुदाई" मुझे एक विशेष मजा दे रहा था।

थोड़ी देर में मैंने पूछा- क्या रे ! अब रोना-चीखना छोड़ और बोल कहाँ निकालूँ अपना वीर्य, अब मेरा छुटेगा।

वो संभली और बोली- मेरे मुँह में चाचु, मेरे मुँह में।

यह सुन मैंने अपना लण्ड बाहर खींचा और उसके चेहरे की ओर आ गया। उसने अपना मुँह खोला और मैं उसके मुँह में लण्ड घुसा उसका मुँह चोदने लगा। मैं अपने किस्मत पर खुश था, मुझे सानिया जैसी हूर चोदने को भगवान ने दे दी थी।

दस-बारह बार के बाद मेरे लण्ड ने पहली पिचकारी छोड़ी और फ़िर अगले 5 बड़े झटके में मेरा कम-से-कम एक बड़ा चम्मच वीर्य उसकी मुँह में गिरा। वो बड़े चाव से वो सब माल निगल गई, हाँफ़ रही थी पर शौक से खा गई। फ़िर मेरे लौंड़े को चाट-चूस कर साफ़ भी किया। जब वो मेरा लण्ड चाट रही थी, तब मैंने भी उसकी ताजा चुदी चूत को चाटा और उसके नमकीन गीलेपन और कसैले-खट्टेपन से भरी गंध का मजा लिया।
करीब बारह बजे हम दोनों साथ ही नहाए और नंगे ही बाहर आए तो मैंने कहा- जल्दी तैयार हो जाओ, आज बाहर ही लंच लेंगे।

वो जल्दी ही आ गई। उसने एक सफ़ेद स्कर्ट और गोल गले का लाल टॉप पहन रखा था और पोनी टेल में बंधे बाल के साथ वो बहुत सुन्दर दिख रही थी।

मैंने आँख मारी और कहा- ऐसा जानमारूँ माल बन कर घर से निकलोगी, तो सड़क पर हंगामा हो जायेगा।

वो हँस दी और मैं उसकी मोहक मुस्कान पे फ़िदा हो उसके होंठों पर एक हल्का सा चुम्बन जड़ दिया। हम अब एक अच्छे से रेस्तराँ में गए और खाना खाया। फ़िर पास के ही एक मल्टीप्लेक्स में दो बजे के शो में एक अंग्रेजी रोमांटिक फ़िल्म देखी।

फ़िल्म में तीन शानदार बैड़रूम दृश्य थे। हॉल में इधर-उधर कई सिसकारियाँ सुनाई दे रही थी। मैंने सानिया का ध्यान एक जोड़े की तरफ़ किया। एक 21-22 साल की लड़की नीचे झुक कर शायद अपने बायफ़्रेन्ड का लण्ड चूस रही थी। हम दोनों अब बीच-बीच में उस जोड़े की हरकतों का भी मजा ले रहे थे। सानिया ने भी मेरे लण्ड को अपने हाथ से मसल मसल कर झाड़ा और जब मेरा वीर्य उसके हाथों पर फ़ैल गया तब उसने उसके चाट कर अपना हाथ साफ़ किया।

फ़िल्म के बाद हम मार्केट गए और वहाँ पर मैंने सानिया के लिए एक सुन्दर सा लाल और हरा का एक कामदार सलवार-सूट खरीदा।

तभी सानिया की अम्मी का फ़ोन आ गया कि अभी वो लोग एक सप्ताह और रुकेंगे। सुन कर हम दोनों खुश हो गए। उन्होंने जब सानिया से पूछा कि कोई परेशानी तो नहीं, तब सानिया ने मेरी तरफ़ देख कर हँसते हुए कहा कि कोई परेशानी नहीं है, चाचा मेरा बहुत ख्याल रखते हैं, मुझे बहुत प्यार करते हैं।

फ़िर भाभी जी ने मुझसे बात की और मुझसे माफ़ी माँगी कि उनके बाहर रहने से सानिया के कारण मुझे परेशानी उठानी पर रही है।

मैंने भी कहा कि वो संकोच ना करें, मुझे सानिया से कोई परेशानी नहीं है। बल्कि सानिया की वजह से अब मैं ज्यादा घरेलू हो गया हूँ, शाम में घर आने पर अच्छा लगता है। सानिया ही मुझे चाय पिलाती है बना कर। भाभी जी संतुष्ट हो गईं और फ़ोन काट दिया।

सानिया बोली- अम्मी से तो ऐसे कह रहे थे जैसे मैं आपकी बीवी की तरह चाय पिला रही हूँ आपको?

मैंने तपाक जड़ दिया- और नहीं तो क्या? न सिर्फ़ बीवी की तरह चाय पिलाती हो, अब तो रोज़ बीवी की तरह चुदाती भी हो। कहो तो यह भी कह दूँ तेरी अम्मी से?

सानिया शर्मा गई- छिः, ये बात कहीं अम्मी से कही जाती है?

फ़िर हम करीब आठ बजे डिनर लेकर घर लौटने लगे, तब सानिया ने कहा- मैंने कभी ब्लू-फ़िल्म नहीं देखी है, अगर हो सके तो एक ब्लू-फ़िल्म दिखा दो, वर्ना अपने घर जाने के बाद तो ऐसी चीज कभी देख नहीं पाउंगी।

मेरे लिए यह कौन सी मुश्किल बात थी। मैंने रास्ते से ही तीन डीवीडी अपने एक परिचित दुकानदार से ले ली। सानिया तो उनके कवर को देख कर ही खुश हो रही थी।

घर आने पर उसने तुरंत ही एक को प्लेयर में डाला और सोफ़े पर बैठ गई। मैंने रात के कपड़े पहने और फ़िर कॉफ़ी बनाने लगा। जब कमरे में आया तो सानिया को फ़िल्म देखने में मग्न पाया। सामने टीवी पर एक काली लड़की को दो काले लड़के चोद रहे थे। एक का लण्ड लड़की के मुँह में था और दूसरे का उसकी चूत में ! उसकी काली-काली चूत के चारों तरफ़ खूब झाँट थी। आह, ओह खूब हो रहा था। फ़िर दोनों बारी-बारी से लड़की की झाँट पर झड़े, तब उसकी काली झाँट पर सफ़ेद वीर्य खूब चमक रहा था। झड़ते समय ही मैं कमरे में आया था। मैंने एक कॉफ़ी मग सानिया को पकड़ाया और फ़िर वहीं सामने सोफ़े पर बैठ गया।

अगली फ़िल्म में एक लड़की का इन्टरव्यू हो रहा था। एक से एक गन्दे सवाल पूछे जा रहे थे और वो भी बेशर्म की तरह बेबाक जवाब दे रही थी। वो लड़की ब्रा-पैन्टी में थी। वो नई थी और तीसरी बार अपनी चुदाई का वीडियो बनवा रही थी, इसलिए ब्लू-फ़िल्म निर्माता उसका परिचय करा रहा था। मर्द की आवाज से शुरुआत हुई, लड़की का नाम और उमर पूछी, फ़िर उसने पूछा कि वो कब से सेक्स इन्डस्ट्री में है?

तब उसने हँस कर कहा करीब एक साल से ! पर उसने पिछले महीने से ही वीडियो करना शुरु किया, इसके पहले वो नाईट कल्ब में स्ट्रीप-डाँसर थी। जब उससे पूछा गया कि क्या उसके घरवालों को पता है कि वो क्या करती है। तब थोड़ा रुक कर उसने कहा- दुर्भाग्य से हाँ, दो महीने पहले पता चल गया। जब उसके छोटे भाई ने उसको नाईट क्लब में डाँस करते देखा। मैं जब घर आई तब मम्मी ने बहुत डाँटा और तब मैंने घर छोड़ दिया और एक दोस्त के पास आ गई। इसके एक महिने के बाद जब ठीक-ठाक पैसे का ऑफ़र मिला तो मैंने वीडियो के लिए काम करना मंजूर कर लिया। फ़िर अब जब आप अच्छे पैसे दे रहे हैं तब मैं आज आपके प्रोडक्शन के लिए काम कर रही हूँ।

तब मर्द की आवाज आई- हाँ, सो तो है, पर आज तुम्हें तीन मर्द एक साथ चोदेंगे। बहुत जबर्दस्त चुदाई होगी तुम्हारी आज। तीनों प्रोफ़ेशनल हैं, और लड़की को चोद-चोद कर बेदम कर देते हैं। हमारे दर्शकों के लिए तुम चुदवाने को तैयार हो? 19 साल की उमर में तुम शायद उन लोगों के लिए कुछ कम उमर की ही हो और कम अनुभवी भी।

वो लड़की भी हँस कर बोली- ठीक है तीन हैं तो कोई बात नहीं, जब पोर्न करना है तो ये सब क्या सोचना।

और अब जब उस मर्द की आवाज आई- और अगर यह वीडियो तुम्हारे घर के लोगों ने देख लिया तब?

वो फ़िर हँसकर बोली- तब क्या ? कुछ नहीं ! उन्हें भी मजा आए देख कर ! कोशिश तो यही करुँगी कि मेरी चुदाई देख कर उनको दूसरी कोई फ़िल्म पंसद न आए और वो बार-बार मेरी वीडियो को ही देखें।

फ़िर आवाज आई- ठीक है ! अब तुम अपने कपड़े उतारो और अपने घर वालों को और हमारे दर्शकों को भी अपने नंगे बदन की नुमाईश कराओ और देखो तुमको चोदने के लिए तीनों मुस्टंडे आ गये हैं। उसने खूब आराम से अपने कपड़े खोले और फ़िर पास आये तीनों मर्दों की तरफ़ बढ़ कर उनके पैन्ट खोल कर उनके लण्डों को बाहर खींच लिया। वो बारी-बारी से उन्हें चूस-चूस कर खड़ा कर रही थी। इसके बाद खूब जम कर उन लण्डों द्वारा उस लड़की की चुदाई हुई, बल्कि उसकी चूची, चूत, चुतड़ और गाल सब पर उसको कई थप्पड़ भी खाने पड़े, पर उसने खूब मजे लेकर चुदवाया। थप्पड़ लगने पर चीखती, फ़िर तुरंत ही उन मर्दॊं को उकसाने लगती और वो सब खूब जोर से उसको पेलते और फ़िर वो कराह उठती।

बड़ी गर्म फ़िल्म थी। मुझ जैसे अनुभवी की नसें गर्म हो गईं तो सानिया साली का क्या हाल हुआ होगा आप सब समझ सकते हैं।

इसके बाद रात को सानिया ने फ़िर मेरे साथ चुदाई का खेल खेला। साली को नई जवानी आई थी सो सब्र ही नहीं था, लगातार चुदा रही थी। दो बार चुदाने के बाद वो सोने की बात की, फ़िर हम दोनों सो गये।

अगली सुबह सानिया नंगी ही उठी और चाय बनाने चली गई। दोनों ने एक साथ बिस्तर पर बैठ चाय पीने के बाद कपड़े पहने और फ़िर रोज की दिनचर्या शुरु हुई। आज मुझे ऑफ़िस भी जाना था।

शाम को घर आने पर सानिया ने एक अनोखी बात कही।

रोज की तरह डीनर के बाद हम दोनों टहलने निकल गए और तभी सानिया ने अपने मन की बात की। उसने कहा कि वो एक बार जैसे रागिनी मेरे घर चुदाने आई थी वैसे ही किसी एकदम अनजान आदमी से चुदा कर देखना चाहती है।

यह सुन मेरा लण्ड एक झटके में खड़ा हो गया। ये साली ढंग से चार दिन नहीं चुदी थी और रन्डी बनने को तैयार थी। मुझे चुप देख वो घबरा गई, बोली- आप अम्मी-अब्बू से यह बात तो नहीं कहेंगे ना प्लीज।

उसके डरी देख मुझे मजा आया, मैं बोला- अरे नहीं बेटी, तुम डरो मत। यहाँ मेरे घर रह कर जो तुम कर रही हो वो बात तुम्हारे घर पर कोइ नहीं जानेगा। मैं तुम्हें बेइज्जत नहीं होने दूंगा।

उसको तसल्ली हुई तो फ़िर बोली- असल में चाचू, जब तक आपके घर हूँ, सब तरह का मजा कर लेना चाहती हूँ, अपने घर तो मुस्लिम कल्चर हैं इसलिए यह सब मजा लेने को नहीं मिलेगा। मैं एक दम अनजान के साथ एक बार सेक्स करना चाहती हूँ कि कैसा लगता है। आप कोई उपाय कीजिए न प्लीज।

मैंने देखा कि साली एक दम चुदास से बहक कर बोल रही है तो कहा- ठीक है देखता हूँ कि क्या कर सकता हूँ, पर तुमको ऐसा करके डर नहीं लगेगा?

वो बोली- यही डर तो खत्म करने के लिए ऐसे चुदना चाहती हूँ। आपके साथ करने में भी तो डर था, पर अपनी अन्डरवीयर दिखा कर पटा लिया ना आपको, अब जब मन होगा आपके साथ तो कर ही लूंगी। अम्मी-अब्बा को ना आप बताएँगे ना मैं।

मैं समझ गया कि अब साली बिना रन्डी बने मानेगी नहीं, तो मैंने सोचा को अब एक बार दलाली मैं भी कर लूँ। सानिया साली जैसी मस्त माल का दलाल बनना भी कम किस्मत की बात नहीं थी।

मैंने सूरी को फ़ोन लगाया-"यार सूरी, एक लड़की है, बहुत मस्त। उसको सिर्फ़ एक बार के लिए बुक कर दो आज-कल में। नहीं-नहीं घंटा वाला नहीं, फ़ुल टाईम। हाँ दिन में भी ( मैंने सानिया से इशारे से पूछा और सानिया ने हाँ की) कर सकते हो। पर उसको मर्द थोड़ा सही देना। बच्ची है। हाँ, अपनी ही समझो, घर की बच्ची है, जरा मस्ती के मूड में है। अरे यार सूरी, नहीं, मैं तो ठीक है पर उसका मन जरा पैसा कमाने का है। नहीं बस एक बार अभी। ठीक है, तुम फ़ोटो ले लो एक उसकी। किधर हो? वाह, फ़िर आ जाओ मेरे घर मैं हूँ, ओके।

मैंने अब सानिया से कहा- सूरी इसी इलाके में है, अभी आ कर तुम्हारी फ़ोटो ले लेगा, फ़िर एक दो दिन में कोई फ़िक्स कर देगा। पर तुम एक बार सोच लो।

सानिया बोली- अभी पूरा एक हफ़्ता है ना अम्मी को आने में ! तब तक तो हो जायेगा ना एक दिन कोई?

मैं उसकी बेताबी देख हैरान था। करीब आधे घन्टे बाद सूरी आ गया। मैंने सानिया को बुलाया। सूरी उसकी सुन्दरता पर दंग था। एक पल के लिए तो सन्न था सानिया के मक्खन बदन से नजर ना हट रही थी साले भड़वे की।

सानिया सर नीचे करके खड़ी थी सामने।

मैंने ही कमरे की शान्ति भंग की- यही लड़की है सूरी, कब तक सेट कर दोगे? मेरे घर तीन दिन है। (मैंने झूठ कहा, ताकि जल्दी काम हो), जिसमें एक दिन तुम इसको ले जा सकते हो।

सूरी बोला (उसकी आवाज हल्का सा लड़की जैसा लगता था)- अरे सर, ऐसी चीज के लिए तो लाईन लगा दूँगा। एकदम फ़्रेश दिख रही है, कहाँ से लाये सर?

उसकी आवाज में शरारत थी।

मैंने कहा- अरे कहा ना घर की लड़की है। यार हमेशा दूसरे की बेटी चोदता हूँ तो फ़र्ज बनता है कि अपने घर से भी थोड़ा दे दूँ दुनिया के लिए।

मैं अपनी ही बात पर हँस दिया।

वो बोला- हाँ सर, हम लोग तो धर्म का काम करते हैं, लड़के को लड़की से मिला देते हैं और लड़की को पैसे दिला देते हैं, दोनों खुश और हम भी खुश।

हम दोनों हँस दिए।

सानिया बोली- मैं पानी लाती हूँ।

और चली गई।

शायद उसको शर्म आ रही थी अब।

मैंने सूरी को बता दिया कि सानिया को मैं रोज चोद रहा हूँ, जब से वो शुरु हुई है, और अब वही चाहती है कि थोड़ा स्वाद बदल कर देखे और पैसा भी कमा ले।

मैंने कहा कि तब मुझे सूरी की याद आई कि क्यों न सूरी भी थोड़ा कमा ले, वर्ना जब लड़की का मन हो गया तो उसको चोदने वाले बहुत मिल जाएँगे।

सूरी मेरा अहसान माना और बोला- सर अगर यह हफ़्ते में एक बार भी आए ना तो मेरा 5000 पक्का हो जायेगा। तभी सानिया पानी ले कर आ गई। सूरी ने उपर से नीचे तक उसको घुरा फ़िर उसके चारों तरफ़ घूम कर उसको सब तरफ़ से देखा, बोला- बहुत सही चीज खोजी है सर आपने ! इसके एक रात की बुकिंग दस हज़ार की करुँगा कम से कम।

फ़िर सानिया से बोला- क्यों ठीक है? 10000 तुमको मिल जायेगा, पर एक बार मेरे साथ करना पड़ेगा फ़्री, मेरा कमीशन यही होगा पहली बार का। उसके बाद तुमको जो मिलेगा उस्का 20% मेरा, और मेरे लिए 500 पर शॉट। मंजूर है तो बोलो?

सूरी थोड़ा भारी बदन का था, और ऐसे तो कोई सेक्सी लड़की उससे नहीं चुदाती, पक्का। सानिया को यह सब समझ नहीं आया ठीक से, तो वो मुझे देखने लगी।

मैंने कहा- अरे बेटी, सब ठीक है, पहली बार करा लो, फ़िर बाद का बाद में सोच लेना। आगे तो तुम्हारी मर्जी है।

सानिया ने हाँ कर दी। सूरी ने उसको टॉप और पैन्ट खोलने को कहा, और फ़िर ब्रा पैन्टी में उसकी अपने मोबाईल में 3-4 फ़ोटो खींची, फ़िर चला गया।

सानिया कपड़े पहनने लगी तो मैंने कहा- क्यों अब सिर्फ़ दस हज़ार देने वाले से ही चुदाओगी क्या, फ़िर मेरा क्या होगा?

बच्ची शरमा गई, और मैं उसको अपने बाहों में उठा कर बेडरूम में आ गया।

आगे की बात आप को पता है, कि क्या हुआ होगा उस माल के साथ जब मेरे जैसा चुदक्कड़ हरामी बिस्तर पर हो तो।
अगले दिन सुबह 8 बजे सूरी का फ़ोन आया- सर, आज दस बजे उसको तैयार रहने बोलिए, कल सुबह तक के लिए बुक किया है उसको। बहुत किस्मत से मेरे एक क्लाईंट का फ़ोन आया अभी। पाकिस्तानी हैं, अबुधाबी में रहते हैं। बाप-बेटा हैं पर एक साथ ही लड़की चोदते है। पूरी दुनिया में बिजनेस है उनका। जहाँ जाते हैं पहले एक दिन सिर्फ़ वहाँ की स्थानीय लड़की चोदते हैं। पैसा बहुत देते हैं सर। उसको बीस हज़ार में बुक किया है, आज दिन और फ़िर रात के लिए। काफ़ी भाग्यशाली है यह माल। पहली बार ही बुड्ढा और जवान दोनों मिल जायेंगे उसको।

सानिया तब बाथरुम में थी। मैंने जब उसको बताया तो वो बहुत खुश हुई।

मैंने कहा- मुझे ट्रीट देना पड़ेगा !

तो वो जवाब में बोली- रोज तो आपको टीट(चुची) देती हूँ, अभी ट्रीट बाकी है क्या?

सानिया ने शब्दों से अच्छा खेला था। फ़िर मेरे ऑफ़िस जाते समय वो भी साथ ही घर से निकली। रास्ते में मैंने सूरी को फ़ोन किया कि सानिया को मैं कहाँ छोड़ूँ !

सूरी ने सानिया को एक चौराहे पर छोड़ने को कहा कि वो खुद सानिया को लेकर के होटल ले जायेगा।

सूरी हम लोग का वहाँ इंतजार कर रहा था। मैंने सानिया को "बेस्ट ऑफ़ लक" कहा और ऑफ़िस के लिए निकल गया।

मेरे दोस्त की बेटी सनिया खान एक टीपिकल मुस्लिम लड़की बनी हुई थी। आज उसने सफ़ेद जौर्जेट का हल्का कामदार सलवार-सूट पहना था और हरे दुपट्टे को सर पर से ओढ़ा था। उसका गोरा चेहरा सुर्ख हो कर दमक रहा था। पूरे आत्मविश्वास के साथ वो मुझे बाय करके सूरी की गाड़ी में बैठ गई।

सूरी ने कहा- सर, सुबह को आठ बजे तक इसकी बुकिंग है, फ़िर एक-सवा घन्टा मैं इसके साथ हूँगा और करीब दस बजे तक मैं इसको आपके घर के पास छोड़ दूँगा।

इसके आगे की बात सानिया के शब्दों में : क्योंकि जब वो लौटी तो अगले एक दिन उसने मुझसे नहीं चुदवाया और इस दौरान उसने जो बताया वही मैं लिख रहा हूँ।

उसने तीन बार नोट-बुक को पढ़ा और फ़िर जब अपनी कहानी से संतुष्ट हो गई तब खुश हो गई कि अब वो भी कहानी लिख सकती है।

तो पढ़िए सानिया की कहानी सानिया की जुबानी !

सूरी मुझे होटल पोल्का में एक स्यूएट में ले गया। वहाँ पहले से ही दोनों मौजूद थे। बाप का नाम था वकार अली खान और बेटे का आसिफ़ अली खान। बेटा 25-26 साल का खूबसूरत मर्द था जबकि बाप 55 साल के करीब होगा, मेरे अब्बा से बड़ा था उमर में पर फ़िट था। बाल सब सफ़ेद हो गये थे पर दिखने में वो भी अच्छा था।

मुझे देख दोनों बहुत खुश हुए और सूरी से कहा- इसीलिए सूरी हम तुम्हें ही खोजते हैं। तुम माल बहुत जानदार लाते हो।

सूरी भी दाँत निकाल कर हँसा और झूठ कहा- सर आपके लिए इसको लखनऊ से बुलवाया है। इसकी मौसेरी बहन सबीहा मेरे साथ टीम में है, वही इसको लाई है। एक दम घर की चीज है सर। आप चखेंगे तो खुद समझ जाएँगे।

वकार अली बोला- देखने में तो हूर है, पर थोड़ा अनुभवी भी हो तो मजा ज्यादा आयेगा। कच्ची लड़की चुदाते समय बहुत ड्रामा करती है।

इस पर सूरी बोला- कच्ची नहीं है सर, घर पर चुदी है, दो-चार बार अपने रिश्ते के एक चाचा से। सबीहा के साथ तो हमेशा ही मजे करती है, जब सबीहा इसके घर जाती है।

फ़िर मुझसे कहा- तुम भी बोलो न, सर जो कह रहे हैं तो बात करना चाहिए।

फ़िर उन दोनों से बोला- पहली बार आज होटल में आई है सर, इसलिए शायद सकपका रही है।

आसिफ़ चुपचाप बैठ कर मुझे घूर रहा था, उसके अब्बा ही सारी बात कर रहे थे। उन्होंने सूरी को एक बीयर ऑफ़र किया और मुझसे पूछा- तुम भी लोगी क्या?

तो मैंने मना कर दिया। सूरी ने जब तक बीयर पी, वकार ने पैसे उसको दे दिए।

सूरी ने मुझसे पूछा- पैसे तुम रखोगी?

मैंने ना में सर हिला दिया, तो वो सब पैसे अपने साथ ले कर निकल गया कि वो अब कल सात बजे आ जायेगा।

सूरी के जाने के बाद वकार ने मुझसे मेरा नाम पूछा तो मैंने अपना असली नाम सानिया खान बता दिया।

उन्होने फ़िर पूछा- पठान हो?

मैंने हाँ मे सर हिलाया तो पहली बार मुझे छुआ उन्होंने। मेरा हाथ अपने हाथ में लेकर बोले- डरो मत, इस तरह चुप मत रहो। बात करो ! तुम तो चुदा चुकी हो, तुम्हें सब पता है। तुम्हारी मर्जी है ना इस काम की, या सूरी किसी मजबूरी में पकड़ लाया है?

मैंने कहा- ऐसी बात नहीं है। मुझे यह सब करने में मजा भी बहुत आता है।

अब आसिफ़ पहली बार बोला- कुछ खाओगी, मँगाऊ?

तो मैंने कहा- मैं नाश्ता करके आई हूँ।

वकार अब बोले- आसिफ़ बेटा, ले जाओ इसको बेड पर और तुम्हीं पहले चोद लो इसको, जवान हो तुम बार बार चोद सकते हो। मैं शाम में एक बार चोदूँगा। साढ़े ग्यारह बज गए हैं, डेढ़ बजे के लिए लंच ऑर्डर कर देता हूँ।

ओके अब्बू ! कहते हुए असिफ़ उठ गया।

वकार ने रुम सर्विस को ऑर्डर किया- चार बीयर अभी और खाना डेढ़ बजे।

आसिफ़ बेडरूम के दरवाजे पर पहुँच कर मुझे बोला- आ जाओ सानिया डार्लिंग !

और मैं भी उठ कर पीछे पीछे चल दी। वकार हँसते हुए पास आया और मेरा दुपट्टा मेरे बदन से खींच लिया, कहा- पहले बुजुर्ग से इजाजत लो बेटी !

मैं सिटपिटा गई, तो वो हँसा और मेरे चेहरे पर नजर गड़ा कर कहा- जाओ और मेरे बेटे को अपने बदन का पूरा मजा दो।

आसिफ़ अब बोला- अब्बूज़ान, आप इसको ठीक से चेक कर लो ना पहले। तब तक मैं जरा फ़ारिग हो ही लूँ ! फ़िर जरा जम के लूटूँगा इसे। ऐसी मस्त हूर जैसी चीज हरदम नहीं मिलती !

और उसने पेट पर हाथ फ़ेरा कि उसे टट्टी जाना है। मुझे कहा- जाओ अब्बूज़ानी का एक बार चूस कर खाली कर दो।

मुझे समझ आ गया कि ये दोनों बाप-बेटे मिल कर आज मुझे एक बार की बुकिंग में ही रन्डीपने की डिग्री देने लायक पढ़ा देंगे। मेरी चूत गीली होने लगी।

आसिफ़ बाथरुम चला गया और वकार ने इशारे से मुझे अपने पास बुलाया और अपने पजामे की डोरी को ढीला कर दिया। साफ़ था कि मुझे अब उसका लण्ड चूसना था।

मैंने पजामा नीचे खींच दिया। उसका लण्ड लगभग सिकुड़ा हुआ था, करीब 5"। थैली भी ढीली थी, पर बड़ी थी और उसके भीतर का दोनों गोटी साफ़ दिख रहा था फ़ूली हुई। लण्ड के चारों तरफ़ बड़ी-बड़ी झाँटे थी और उसमें से कई बाल सफ़ेद थे। लण्ड का सुपारा भी थोड़ा सफ़ेद रंगत लिए था।

मैंने लण्ड हाथ में लिया और मुँह में डाल चूसने लगी। वकार का वो इलाका हल्के पसीने की खुश्बू या बदबू से भरा था, पर मुझे तो ये सब कहना नहीं था। धीरे-धीरे लण्ड में ताव आने लगा। जब वो 6" का हो गया तब वकार बोला- बेटा अब तुम भी कपड़े हल्के कर लो। तुम्हारे तराशे हुए बदन को देख यह साला जल्दी निपट जायेगा।

मैं उठी और कुर्ते के ऊपर के दो बटन खोल कर उसको अपने सर के ऊपर से निकाल दिया। फ़िर मैंने अपनी सलवार को खोला और अपने पैरों से बाहर कर दिया।

वकार सब देख रहा था। मैंने अब अपनी सफ़ेद शमीज भी उतार दी। फ़िर पहली बार वकार से नज़र मिलाई। अभी मेरे बदन पर एक सफ़ेद ब्रा और काली पैन्टी थी। मैंने अपना हाथ पीछे किया और ब्रा का हुक छुआ हीं था कि वकार बोला- अब रहने दो, कुछ आसिफ़ के सामने खोलना।

मैं रुक गई और एक बार फ़िर उसका लण्ड चूसने लगी। वो अब मेरे पीठ और चूचियों पर अपने हाथ घुमा रहा था। मेरा बदन हल्की सिहरन से भर रहा था और चूत भी गीली हो रही थी। वो मेरे लण्ड चूसने की कला की दाद देता और मैं और जोर से चूसती।

तभी आसिफ़ आ गया और पास आकर मेरी ब्रा का हुक खोल दिया, जिसके बाद उसके अब्बा का हाथ अब मेरे चुचूक से खेलने लगा और मैं सिसक उठी।

वकार यह देख आसिफ़ से बोला-"बहुत ताज़ा माल दिया है सूरी इस बार, पूरा पैसा वसूल।

वकार अब छुटने वाला था, तब वो बोला- तुमको मेरा सारा मणि खा जाना है।

मेरे लिए यह कोई नई बात नहीं थी, पर यह शब्द नया था, शायद पाकिस्तान में वीर्य को मणि बोलते हैं। मुझे तो हिन्दी के शब्द ही आते थे। मैं मुँह खोल कर सामने जमीन पर बैठ गई और वकार ने हाथ से अपना लण्ड हिला-हिला कर पिचकारी मारी। छः बार में सारा वीर्य मेरे मुँह में डाल दिया जिसे मैं चाट गई।

अब उसने मेरा मुँह चूम लिया और बोला- अब जाओ और आसिफ़ से चुदो अच्छे से।
वकार अब छुटने वाला था, तब वो बोला- तुमको मेरा सारा मणि खा जाना है।

मेरे लिए यह कोई नई बात नहीं थी, पर यह शब्द नया था, शायद पाकिस्तान में वीर्य को मणि बोलते हैं। मुझे तो हिन्दी के शब्द ही आते थे। मैं मुँह खोल कर सामने जमीन पर बैठ गई और वकार ने हाथ से अपना लण्ड हिला-हिला कर पिचकारी मारी। छः बार में सारा वीर्य मेरे मुँह में डाल दिया जिसे मैं चाट गई।

अब उसने मेरा मुँह चूम लिया और बोला- अब जाओ और आसिफ़ से चुदो अच्छे से।

मैं उठी तो आसिफ़ ने मेरी पैन्टी खींच दी, कहा- इतना सा बदन अब्बू से क्यों छुपा रही हो, सब दिखा दो एक बार फ़िर चलना।

मैं उठी और अपना पैन्टी खोल दी। आज सुबह ही जब मुझे चाचू ने बताया तो अपने झाँट को साईड से साफ़ की थी, जिससे 1" चौड़ी पट्टी में पिछले 5-6 दिन में उगे छोटे-छोटे काले-काले झाँट मेरी गोरी बुर की खूबसूरती को और बढ़ा रहे थे।

मेरी ऐसी मस्त चूत देख दोनों के मुँह से एक साथ आह निकली और फ़िर निकला- सुभानल्लाह !

आसिफ़ बोला- अब चल पहले चोदूँ तुमको वरना अफ़सोस होने लगेगा कि देरी क्यों की।

मैं बोली- पहले बुर को धो लूँ, बहुत गीली हो गई है और रास्ते में आते समय गर्मी से थोड़ा पसीने की भी बदबू आ रही है।

मुझे तो वकार के पसीने की बू याद आ रही थी। पर आसिफ़ की बेकरारी में कोई फ़र्क नहीं पड़ा, बोला- अबे चल, जवानी लौन्डी की बुर के पसीने की बू से यार लोग का लौड़ा ठनक जाता है। अभी तक घर में चुदी है ना, इसीलिए बदबू/खुश्बू की बात करती है। कुतिया की चूत से बदबू कभी नहीं आती। अपने अब्बा के देखते झुका और चूत की फ़ाँक से शुरु करके हलके झाँटों वाली पट्टी तक अपने जीभ से चाट लिया।

मेरा बदन गुदगुदी से भर गया। उसने एक चपत मेरे चूतड़ों पर लगाई और बेडरुम की तरफ़ बढ़ गया।

बिस्तर पर लिटा वो मेरे चूत के पीछे पड़ गया। लगातार जोरदार तरीके से चाटा, या कहिए खाया उस पूरे इलाके को। मेरे मुँह से अजीब-अजीब आवाज निकली, जो पहले नहीं निकली थी और मैं एक बार झड़ी तो उसने पूरी बुर उँगली से खोल चाटा। मैं शान्त हो गई थी। पर आसिफ़ पक्का हरामी था। उसने अब अपनी पैन्ट खोली और पहली बार मैंने उसके लण्ड को देखा। नौ इन्च से कम न था, गहरा भूरा और खूब मोटा। उसकी चमड़ी देख लगा नहीं था कि उसका लण्ड इतना काला होगा। मुसलमान था, सो खतना किया हुआ था और उसके लण्ड की चमड़ी उसके आधे लण्ड से ज्यादा नहीं पहुँच रही थी।

मैं एक बार झड़ कर शान्त लेटी थी, इतनी मस्ती कभी मिली नहीं थी पहले। शायद माहौल का असर था। पर आसिफ़ का इरादा कुछ और था। उसने बिना कुछ बोले मेरे पैरों को फ़ैलाया और ऊपर चढ़ गया। मैं जब तक कुछ समझूँ उसने मेरे चूत में अपना लण्ड ठांस दिया। दो धक्के में पूरा नौ इन्च भीतर। मैं दर्द से बिलबिला उठी- उईईई माँआँआआँ, छोड़ो मुझे प्लीज !

आज पहली बार चुदाते समय अम्मी याद आई और आँखों में आँसू आ गए। आसिफ़ बोला- अब चुप भी कर साली रन्डी ! दलाल को बीस हज़ार देकर चलता कर दिया और अब चुदाने में नानी मर रही है? ज्यादा नखरे ना कर और आराम से चुद पहले। ऐसे ही लण्डों की बदौलत तो तू बाज़ार की रानी बनेगी एक दिन।

मैं रोने लगी थी, सोचा था कि सब, चाचू ने जैसे रागिनी को चोदा था, वैसे चोदते हैं।

रागिनी की बात सब याद आई।

पर मुझे रोता देख आसिफ़ प्यार से समझने लगा- देख चुप हो जा, अभी तू नई है, इसलिए तकलीफ़ है, पर तू तो चुदी हुई है पहले से, फ़िर क्यों डर रही है? आम लोगों से मेरा थोड़ा बड़ा है पर अपनी तरह का अनोखा मजा देगा जब भीतर तक धक्के खाएगी तू। पहले मेरे दो-चार धक्के बर्दाश्त कर ! फ़िर खुद से फ़ुदक फ़ुदक कर मरवायेगी अपनी चूत !

सच ! जल्दी ही मेरी बुर उसके इस भारी भरकम लण्ड के धक्के बर्दाश्त कर के एक बार फ़िर पानी छोड़ने लगी और कमरा हच-हच, फ़च-फ़च की आवाज से भर गया।

दस-बारह मिनट मेरी चूत ठोकने के बाद आसिफ़ ने लण्ड बाहर खींचा और कहा- चल चूस अब इसको।

मैं हिचक रही थी क्योंकि लण्ड पर मेरे चूत का गीलापन लगा हुआ था। एक बार चेहरा पास ले गई पर मन न हुआ, बोली- इसमें से कैसी खट्टी सी बू आ रही है।

आसिफ़ हँसा-"अबे, यह बू ही तो खुशबू है, बताया था न तुझे। और यह खट्टी बू तेरी ही मस्त चूत की है। अब आजा बच्ची ! देर ना कर ! अभी तुझे पीछे से ठुकना बाकी है।

मैंने लण्ड मुँह में डाला और खुद की चूत के पानी का स्वाद लिया। पाँच मिनट में बिना कोई चेतावनी के आसिफ़ मेरे मुँह में झड़ गया और बोला- बिना रुके चूसती रह।

उसका लण्ड हल्का सा ढ़ीला हुआ और फ़िर जल्द ही टनटना गया। इस बार आसिफ़ ने मुझे पलट दिया और जैसे कुत्ता कुतिया पर चढ़ कर चोदता है, वैसे मुझे चोदा। हर धक्के पर मस्ती से मैं कराह उठती और वो आवाज सुन एक और धक्का और जोर से देता। ऐसे ही मैं थकने लगी और धीरे-धीरे बिस्तर की तरफ़ झुकने लगी। जल्द ही मैं लगभग बिस्तर पर पेट के बल हो गई, और आसिफ़ मेरे ऊपर लेट मेरी चुदाई करता रहा। मेरे नीचे हो जाने से उसको अब परेशानी हो रही थी धक्का लगाने में, तो बोला- चल अब पलट, सीधी हो। इस बार की ठुकाई में तेरी चूत को भर देता हूँ मणि से।

अब मुझे याद आया कि ऐसा तो मैंने सोचा न था, अब अगर इसके वीर्य से मुझे बच्चा रह गया तो। पर मैं कुछ बोलने की हालत में न थी। बस एक बार अल्लाह को याद किया और सीधी हो कर पैर खोल कर ऊपर उठा दिए। आसिफ़ ने अपने लण्ड को तीन बार मेरे चूत की ऊपर की घुन्डी पर पटका। उसकी चोट मुझे एक अजीब सी मस्ती दे रही थी कि तभी उसने एक झटके में पूरा नौ इन्च भीतर पेल दिया।

मैं अब आआह उउउउह इइइस्स्स हुम्म्म्म्म जैसी आवाज कर रही थी। मैं एक बार और झड़ चुकी थी पर आसिफ़ अपनी धुन में मुझे चोदे जा रहा था। फ़िर 5-6 तगड़े झटके के साथ उसके वीर्य ने मेरी चूत की प्यास बुझा दी। आसिफ़ ने अपना लण्ड भीतर ही घुसा कर रखा था।थोड़ी देर हम दोनों ऐसे ही शान्त पड़ रहे फ़िर उसने अपना लण्ड निकाला और मेरे मुँह में डाल दिया- साफ़ कर चाट कर इसे मेरी कुतिया !

और प्रोफ़ेसर जमील अहमद खान की प्यारी इकलौती बेटी बीस हज़ार लेकर एक रन्डी की तरह चुदाने के बाद अब लण्ड पर लगे हुए वीर्य को चाट रही थी।

तभी बाहर से वकार ने आवाज लगाई- अब खत्म करो भाई ! एक से ज्यादा बज गए, खाना आ जायेगा अब। थोड़ा आराम भी करो खाने से पहले।

करीब डेढ़ घंटे से मैं लगातार चुद रही थी। अब मुझे लगा कि हाँ, यह अनुभव हमेशा याद रखने वाला है।

मैं उठी और सिर्फ़ सलवार और शमीज पहन ली। तभी रुम-सर्विस खाना ले आया। दोनों वेटरों के लिए यह सब देखना नई बात नहीं थी।

मेरी सलवार और शमीज के बीच से करीब 5" के सपाट पेट पर उन वेटरों की नज़र बार-बार जा रही थी। 20-22 साल के नौजवान वेटरों को दिखा कर जमीन पर पड़ी हुई अपनी ब्रा और पैन्टी उठाई। मेरे झुकने से उनको मेरी सुन्दर चूचियों की झलक मिल गई।

चूत में जो वीर्य भरा हुआ था अब हल्के-हल्के बाहर आने लगा था। मैंने सब को दिखा कर अपनी सलवार की मियानी से अपनी चूत को पौंछा और फ़िर गीली हुई मियानी को देख कहा- भीतर निकाल दिया, देख लीजिए, कपड़े खराब हो गए।

वकार हँस दिया- अरे बच्ची, अगर पेट से रह जायेगी तो पूरा ताजमहल बिगड़ जायेगा और तू कपड़े की चिन्ता कर रही है।

बेशर्म बूढ़ा मेरी फ़िगर की बात कर रहा था। मुझे अब उन दोनों के साथ मजा आ रहा था। आसिफ़ मेरे बदन की खूब तारीफ़ कर रहा था और उसका बाप मजे लेकर सुन रहा था, फ़िर पूछा- तुझे मजा आया ना बेटा इसको चोद कर?

आसिफ़ खुशी से बोला- बहुत अब्बा, चूत तो बिल्कुल कसी हुई है। पर लौन्डिया मस्त है, आँखों से आँसू निकल आए जब दो ही धक्कों में पेल दिया था पूरा भीतर। यह रान्ड साली इतनी सुन्दर है कि मैं बेकाबू हो गया। पर क्या मस्त चुदी अब्बा, अम्मीजान की कसम मजा आ गया।

हम सब ने साथ खाना खाया और वकार ने कहा कि मैं दो घन्टे आराम कर लूँ। क्योंकि शाम की चाय के पहले वह मुझे चोदेगा और फ़िर रात में तो मुझे लगातार चुदना है। मैं भी आराम से बेड पर जा कर आराम करने लगी और मुझे नींद आ गई।

करीब साढ़े चार बजे मुझे लगा कि कोई मेरा चेहरा सहला रहा है, तो हड़बड़ा कर उठी।

वकार बिल्कुल नंगा मेरी बगल में लेटा हुआ था। मुझे जगा हुआ देख वो मेरे मुँह को चूमने लगा और फ़िर अपने मुँह से ढ़ेर सारा थूक मेरे मुँह में गिरा दिया। मैं इसके लिए तैयार नहीं थी, पर वो मेरी हकबकाहट देख खुश हुआ और बोला- निगल ले मेरा थूक, जब मेरा मणि खा सकती है तो मेरे थूक से क्या परेशानी।

मुझे अब समझ आ या कि मैं तो उसके लिए एक रन्डी थी, और मुझे वही करना था जो वो कहे।

मैं जब य्हूक निगल गई तो वो मेरे ऊपर चढ़ कर लेट गया, मुझे अपने बदन से पूरी तरह से दबा कर और फ़िर से मेरे होंठ चूसने शुरु कर दिए। फ़िर पलट गया और वो नीचे था, मैं ऊपर ! होंठ से होंठ मिले हुए।

तभी वो मेरे चूतड़ सहलाने लगा और फ़िर अचानक मेरी सलवार की मियानी पकड़ कर उसे एक झटके से करीब 4" फ़ाड़ दिया।

मैं चौंक गई- हाय अल्लाह, अब मैं घर कैसे जाउँगी?

मैं एकदम से परेशान हो गई और बिस्तर पर बैठ गई। वकार मेरी बेचैनी देख हँस पड़ा, बोला- क्यों ? फ़टी सलवार पहन कर जाना, अम्मा खुश होएगी। इतना सज धज के आई है तो तेरी अम्मी को पता तो चले कि बेटी सही से चुदी, क्यों?

उस हरामी को कहाँ पता थी कि मेरे अम्मीजान को जरा भी अंदाजा न था कि बेटी रन्डी बन चुद रही है। पर ऐसी मजबूरी में मेरी आँख फ़िर नम होने लगी, तभी वह बोला- अरे खुश हो जा, तुझे नये कपड़े में विदा कर देंगे। आसिफ़ को भेजा है, तेरे लिए नये कपड़े लेने। इससे अच्छे कपड़े में घर जाना।

मेरे चेहरे को अपने हाथ में पकड़ बड़े प्यार से पूछा- अब तो खुश है तू। देख अगर तू दुखी होगी तो चोदने का मजा कम हो जाएगा। अरे तू इतनी हसीन है, जवान है कि तेरे साथ शरारत करने का मन बन गया। अब हँस भी दे।

उसके ऐसे मनाने से मुझे दिल से खुशी हुई और मैं मुस्कुरा दी।

वो भी मुस्कुराया- जवान लौन्डिया को कपड़े फ़ाड़ कर चोदने में जो मजा है वो किसी चीज में नहीं है।

और मेरे छाती पर हाथ रख मेरी शमीज को भी चीर दिया। मेरी दोनों चूचियों को देख हल्के से उन पर चपत लगाया तो वो हल्के से हिल गए। उनके हिलते देख वो खुशी से बोला- देख कैसे ये कबूतर मचल रहे हैं और 3-4 चपत और लगा दए। इसके बाद उसने मुझे पूरी तरह से नंगा कर दिया और मेरी चूत चूसने लगा। धीरे-धीरे मुझमें मस्ती छाने लगी और तब मुझे मस्त देख बुढ़्ढ़ा मेरे पैरों के बीच आ अपना लण्ड मेरी चूत में घुसा कर धक्के लगाने लगा। बीच-बीच में चूची पर चपत भी लगा रहा था और मैं मस्त थी।

थोड़ी देर बाद वो लेट गया और मुझे ऊपर से उसके लण्ड की सवारी करनी पड़ी। 2-3 मिनट बाद वो फ़िर मुझे नीचे लिटा दिया और ऊपर से मुझे चोदने लगा। वो अब तेजी से धक्के लगा रहा था और मैं मस्त हो गई थी। तभी लगा वो झड़ रहा है। 4-5 झटके के बाद उसका माल मेरी चूत में निकल गया। वो मेरे ऊपर लेट मुझे चूमने लगा फ़िर उठा और बोला- जाओ, अब हाथ मुँह धो लो। खाकर सो गई थी सो मुँह से हलकी बास आ रही है।

मुझे याद आया कि मुझे उठने के बाद मौका ही नहीं दिया था साला हरामी। तभी आसिफ़ लौट आया एक बड़ा सा पैकेट ले कर और हम दोनों को नंगा देख पूछा- चोद लिया इसको अब्बू?

वकार बोला-"हाँ बच्चे, गीले खेत में बीज डाल दिया इस बार।

यह सुन मैं मस्त हो गई, और थोड़ी चिंतित भी। मैं बाथरुम में चली गई।

मैं जब नहा कर आई तो आसिफ़ मेरे साथ सेक्स करने के लिए तैयार था। एक बार मुझे उसने अपने अब्बू के सामने चोदा और फ़िर मुझे वो पैकेट दे दिया कि अब मैं ये कपड़े उन बाप-बेटों के सामने पहनूँ।

मैं नंगी ही उठी और बाथरुम में जा कर अपने आप को साफ़ किया फ़िर नंगी ही लौटी और पैकेट खोला। उसमें एक खूबसूरत सा गुलाबी सिल्क का जरी-काम वाला डिजायनर सलवार-सूट था और एक लाल रेशमी धागे से काम किया हुआ मैरून रंग का ब्रा-पैन्टी का सेट।

मैंने एक-एक कर के कपड़े पहने और आसिफ़ सामने खड़ा हो कर मेरे बदन और मुझे कपड़ों को एक-एक कर पहनते हुए अपने मोबाईल फ़ोन से वीडियो बनाता रहा। हम सबने रात का खाना खाया। वो दोनों भी थक गये थे, सो अब हम सब बैठ कर टीवी देखने लगे और इधर-उधर की बातें करने लगे। हम सब सो गये और अगले दिन करीब 8 बजे सुबह सूरी आ गया। हम सबने साथ में चाय पी और फ़िर सूरी मुझे ले कर आ गया।

समाप्त


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