मध्यम वर्गीय परिवार की विवाहित महिला
नमस्ते मेरा नाम स्मिता जोशी है , मैं मध्यम वर्गीय परिवार की विवाहित महिला हूँ , यह मेरी इस साइट पर पाही कहानी है और मेरी हिन्दी कुछ खास नहीं है इसलिए वर्तनी और व्याकरण की ग़लतियों को कृपया नज़रअंदाज़ कर दीजिए और कहानी का लुत्फ़ उठाइए | मेरे पति की हाल ही में पुणे की एक ऑटोमोबाइल वर्कशॉप में बतौर मॅनेजर नौकरी लगी लिहाज़ा हम मुंबई से पुणे शिफ्ट हो गए , पुणे की एक मध्यमवर्गीय परिवारों की हाउसिंग सोसाइटी मे ही जान पहचान से हमें एक २ क्मरों का ब्लॉक भाड़े पर मिला , मैं बहुत खुश हुए पास पड़ोसी सब हमारे जैसे ही मध्यम वर्गीय थे , हमारे नन्हे-मुन्नों के लिए भी खेलने के लिए साथी मिल गए | मैं ३६ वर्ष की गृहिणी हूँ , मैने हालाँकि कंप्यूटर और अकाउंट्स में डिप्लोमा किया है किंतु शादी के बाद गृहस्थी में व्यस्त होने के बाद नौकरी करने का टाइम ही नहीं मिला | अब नयी जगह पर जहाँ पतिदेव और बेटा बेटी अपने ऑफीस और स्कूल में सुबह १० से पाँच व्यस्त रहते तो मुझे भी इस खाली समय का सदुपयोग करने की सूझी | आस पास की महिलाओं से जल्दी ही मेरी दोस्ती हो गयी लेकिन उनकी गॉसिप और चर्चाएँ सुन कर मुझे कोफ़्त होती कि पढ़ी लिखी महिलाएँ भी आम महिलाओं की तरह साड़ी , कपड़े-गहने-लत्ते और घरेलू बातें करतीं है| अपना खाली समय मैं लॅपटॉप और मोबाइल में वीडियो देखने में गुज़ारती , कुछ नया सीखने और जानने को मिलता | मेरे पति इस साइट के शौकीन हैं और यहाँ लिखी कहानियाँ बड़े चाव से पढ़ते हैं , मुझे भी उनकी तरह ही ऐसी कामुक कथाएँ पढ़ने का चाव सा लग गया , धीरे धीरे मैं पॉर्न फिल्में भी देखने लगी और उनमें सेक्स की पोज़िशन सीख कर रात में पति के साथ आज़माती , शुरू शुरू में तो बहुत मज़ा आता लेकिन जब पति पर काम का बोझ बढ़ने लगा तो वह मेरे साथ सेक्स करने से बचते| "ओह स्मिता आज नहीं , आज मेरे सिर में दर्द है" "ठीक है" मैं कहती "आज नहीं आज अमावस है , अमावस और पूर्णिमा को डेक्स नहीं किया करते , पाप लग जाता है" "आज नहीं ब्ग्ल के कमरे में बकचे सो रहे हैं उठ जाएँगे " "आज तो नाम ही मत लो सुबह जल्दी उठना है" जब सेक्स में लगातार दो तीन हफ्ते का नागा होने लगता तो मेरा मिज़ाज चिड़चिड़ा हो जाता और फिर ह्म्में लड़ाई हो जाती "हर रोज तुम्हारा कोई न कोई बहाना ही रहता है विक्रम , आज सर दर्द हैं कल कुछ है परसो कुछ ऐसा कैसे चलेगा? मैं कहती "सच बात तो है स्मिता तुम्हारी उम्मीदें बहुत बढ़ गयी हैं दिन भर घर में रह कर पॉर्न फिल्में देखती हो और फिर वह सब तुम मुझ पर आज़माती हो, मैं आम आदमी हूँ यार कोई पॉर्न स्टार नहीं जो रोज़ रोज अलग अलग पोज़िशन में तुम्हारे साथ सेक्स करूँ , बीच बीच में ब्रेक लेना अच्छा होता है नही तो सेक्स की लत लग जाती है" एक दिन विक्रम ने कह ही दिया | मैं मन मसोस कर रह गयी , सेक्स मेरी ज़रूरत थी और पति से इसकी उम्मीद नहीं करती तो और क्या करती ? मैने अपने पति विक्रम से इस पर खुल के बात की तो उनने सुझाया कि मैं कहीं नौकरी जाय्न कर लूँ इससे मेरा मन भी लगा रहेगा और सेक्स से ध्यान भी हटेगा | तो जी मैने बाकचो के लिए डे-केयर ढूँढा और खुद नौकरी की तलाश में अपने सर्टिफिकेट्स ले कर दिन भर भाग-दौड़ करने लगी , काफ़ी सालों बाद इस तरह की भागदौड़ , नौकरी की तलाश करना शुरुआत में तो अच्छा लगा लेकिन ३ महीनों के बाद भी जब मनचाही नौकरी न मिली तो फ़्रस्ट्रेट हो गयी रात में जब विक्रम आते तो उनके लिए खाना लगा कर नन्हे मुन्नों को सुला कर खुद लॅपटॉप ले कर नौकरी की साइट पर अपना रेज़्यूमे अपडेट करती , अपने पति से अब सेक्स को लेकर बातें कम ही होतीं क्योंकि वह भी व्यस्त रहते| उस दिन मंगलवार था , पति अच्छे मूड में थे , नन्हे मुन्ने भी खाना खा कर जल्दी सो गये थे और मैं इस समय का लाभ उठा कर कल होने वाले वॉक-इन के लिए तैयारी कर रही थी कि तभी विक्रम बेडरूम में धमक पड़े "क्या हो रहा है?" उन्होने पूछा "कुछ नहीं , बस कल के इंटरव्यू की तैयारी कर रही हूँ" मैने नजरें लॅपटॉप पर गड़ाए हुए उनकी बातों का उत्तर दिया "तुम्हारी भाग दौड़ मुझसे देखी नहीं जाती यार स्मिता" उन्होने पैरों के पास बैठते हुए कहा "और ये लॅपटॉप गोद में मत रखा करो , मेनेपॉज़ जल्दी आ जाएगा" उन्होने हंसते हुए कहा "हूँ" मैने अनदेखा किया , मैं अब भी अपना रेज़्यूमे बना रही थी , विक्रम ने मेरा पैर गोद में लेते कहा "बड़ी टेन्षन में लग रही हो?" फिर मेरे पैर के तलवों को अपने हथेलियों से मसाज करते हुए कहा "आओ तुम्हारी ज़रा थकान उतारता हूँ" "विक्रम प्लीज़" मैने परेशान हो कर कहा "डोंट बॉदर मी...मैं काम कर रही हूँ न ?" "अच्छा , तो बीवी काम कर रही है ?" उन्होने मुझे चिढ़ाते हुए कहा | "च्च." मैने मुँह बनाते हुए कहा "तुम जब काम करते हो तो मैं तुम्हें यूँ परेशान करती हूँ ?" "चलो न आज सेक्स करते हैं" विक्रम मेरे तलवों पर हौले हौले मसाज करते हुए बोले , ड्रेसिंग टेबल पर पड़ी हुई वॅसलीन की शीशी उन्होने उठा ली और मेरे तलवों पर उसे लगाते हुए कहा | "नो वे विक्रम" कहते हुए एक झटके से मैने अपने पैरों को खींच कर मोड़ लिया "तीन महीनो से नौकरी के लिए मैं अपना सर खपा रही हूँ और तीन महीनों में यह ८ वा काल है सात जगह सेलेक्ट नहीं हुई , अब की बार कोई कसर नहीं छोड़ूँगी" "अच्छा?" उन्होने मुझे चिढ़ाते हुए कहा "ज़रूर सर खपाओं , लेकिन मेरे इस डंडे को तेल कौन पिलाएगा?" अपने पायज़ामे का नाडा खोलते हुए विक्रम ने कहा "शिट , विक्रम मेरे सामने यह सब न करो , जाओ अपना प्रेज़ेंटेशन बनाओ या टीवी देखो अभी मेरा मूड नहीं है" मैने अपना हाथ आगे करते हुए कहा | "तुम्हारे मूड की ऐसी की तैसी , ३ हफ्तों से हमने सेक्स नहीं किया सुबह तैयार हो कर तुम एक्टिवा पर निकल जाती हो , रात में भी जल्दी सो जाती हो और मुझे टाइम नहीं देती" विक्रम ने चिढ़ कर कहा , शायद मेरे मना करने पर वह बुरा मान गये| "विक्रम समझने की कोशिश करो , तुम्हीं ने तो कहा था न कि सेक्स से ध्यान हटाने के लिए नौकरी कर अपना मन लगाने को और अब तुम ही शिकायत कर रहे हो?" "हाँ हाँ हाँ...यार कहा था मैने कहा था लेकिन मैने कहाँ सोचा था कि तुम हाथ धो कर नौकरी के पीछे पड़ जाओगी? मेरे और हमारे नन्हो के लिए भी तुम्हारे पास आजकल टाइम नहीं रहता , चलो कोई नहीं मैं अगले १५ मिनट में लौटता हूँ नहा कर , तुम तब तक अपना काम निपटा लो फिर आराम से सेक्स करते हैं" विक्रम ने झल्ला कर बात बदलते हुए कहा मारती क्या न करती , पति की बात तो माननी ही थी और अपनी जगह वह भी सही थे , इन तीन महीनों में वाकई मैं परिवार को समय नहीं दे पा रही थी , सुबह जल्दी निकलती तो देर शाम को लौटती , नन्हों को डे केयर से लाती तो वह भी दिन भर मुझसे अलग रहकर रुआंसे हो जाते फिर घर लौट कर उनके पापा उनके साथ समय बिताते और मैं खाना बनाने की तैयारी में लग जाती , आज विक्रम की बात सुनकर मुझे बड़ा गिलटी फील हो रहा था , रेज़्यूमे बनाने से मेरा ध्यान हट गया था , मैं कुछ सोचते हुए अपने बालों को सुलझा रही थी कि विक्रम बाथरूम से तौलिया लपेट कर बाहर आ गये , जैसा फिल्मों में अक्सर दिखाया जाता है कि हीरोइन नहा कर लौटती है तो बड़ी खूबसूरत लगती है , वैसे ही मुझे इस वक्त मुझे अपने पति नज़र आ रहे थे यह सोच कर मैं हंस दी "यूँ मुझे देख कर क्यों हंस रही हो? क्या तुमने मुझे ऐसे पहली बार देखा है?" विक्रम ने पूछा "नहीं बस यूँ ही" "कमाल है , खुद में उलझी हुई हो और अपने बालों को सुलझा रही हो , लगता है रेज़्यूमे वर्ड में हैंग हो रहा है" मेरी ओर पीठ कर खुद को शीशे में देखते हुए वह बोले | शीशे में वह अपने गीले बालों को हाथों से संवार रहे थे और साथ ही साथ अपने पके हुए बलों को भी आईने में देखने की कोशिश कर रहे थे मेरे पति विक्रम ४० साल के गठइले बदन के मर्द , किसी भी स्त्री का मन इनको देख कर बहक जाए ऐसी इनकी चाल ढाल और शख्सियत , यूँ तो कम बोलते हैं और लोगों से कम घुलते हैं लेकिन बिस्तर में पक्का बेशर्म लौंडा बन जाते हैं | मुझे याद है हमारी नई नई शादी हुए थी और हम घूमने नैनीताल गए थे , बाहर घूमना तो छोड़िए रात भर होटल के कमरे में मेरे साथ बंद हो जाते , टीवी देखने नहीं देते और शाम को ही खाना खा कर सोने की ज़िद करते , इतनी ठंड में भी कमरे के हिटर को बंद ही रखते और उल्टे एसी को इतना तेज़ कर देते क़ि गार्माहट पाने के लिए और कोई साधन न होने की वजह से इनके साथ रज़ाई में ही दुबकना पड़ता और यह भी मौके का फाय्दा उठा कर अपने लॅपटॉप पर पॉर्न वीडियो दिखा कर पहले तो मुझे गर्म करते और फिर मज़बूत बाहों में मुझे कस कर इतना दबाते कि सूरज उगने तक मैं इनकी बाँहों की गिरफ़्त में क़ैद हो कर इनकी बाहों से खुद को आज़ाद कराने के लिए कसमसाती , इनकी नुकीली दाढ़ी मेरे गोरे मुलायम गालों को बेह्द चुभती सुबह सुबह मेरे गाल इनकी दाढ़ी की चुभन से गुलाबी हो जाया करते | विक्रम के शरीर के तले मैं खुद को ऐसा असहाय दबा पाती मानों कोई हाईद्रौलिक प्रेस , पूरी निर्ममता के साथ कोई चीज़ दबाती हो सुबह उठने पर मेरा शरीर मानों पापड ही बन जाता , विक्रम इतने हेल्दि और मैं इतनी नाज़ुक दुबली कि हमारी जोड़ी किसी टेडी बेयर और गुड़िया की लगती हनीमून के उन १५ दिनों में हमने इतना जबरदस्त सेक्स किया कि प्रफेशनल पॉर्न स्टार्स भी यूँ सेक्स न करते होंगे | सारी चिंताओं से दूर उन पहाड़ों झीलों के बीच हमने प्रकृति की गोद में एकदुसरे की बाहों में दुनियाँ जहाँ से बेख़बर खूब रंगरेलीयाँ मनाईं फिर जब घर लौटे तो तीन महीनों बाद ही हम विक्रम के प्रोजेक्ट के सिलसिले में अमेरिका आ गये | विक्रम काम के मामले में बड़े प्रफेशनल थे पाँच दिन डट कर काम करते और फिर वीकेंड पर मुझे ले कर सैर पर निकल पड़ते , कभी फिल्म का प्रोग्राम बनता तो जानबूझ कर कोने की सीट ले कर जब भी स्क्रीन पर रोमांटिक किसिंग सीन या बेड सीन आता तो मेरे मुँह से अपना मुँह भिड़ा कर घंटों मेरी जीभ अपने होठों से चूसा करते , कभी मेरी आँखों को चूमते कभी गर्दन को , कभी कभी तो मुझे अपनी गोद में ही बिठा कर घंटो चूमते चाटते , अंधेरे में किसी को कुछ पता नहीं चलता और कोई इस ओर देखता भी नहीं था क्योंकि उधर यह सब बातें आम सी थी , एक दिन देर रात हम यूँ ही पिक्चर देख कर पैदल लौट रहे थे कि एक गली में जोरों से हँसने बोलने की आवाज़ें आईं मैं और मेरे पति उस गली से गुज़रे तो देखा सड़क किनारे फुटपाथ पर आग जलाए कुछ काले लड़के हँसी मज़ाक कर रहे हैं , हमने उन्हें नज़रअंदाज़ किया लेकिन विक्रम को न जाने उन्हें देख कर क्या सूझी उनको जलाने की खातिर उन्होने मेरे गले में हाथ डाल दिया और प्यार जताने लगे , गालों पर किस कर धीरे धीरे चलने लगे , मुझे बड़ी घबराहट हुई , लगा कि ये काले लड़के मुझ पर टूट ही पड़ेंगे , वह तो भला हो अमेरिकन पुलिस वालों का कि उनकी पेट्रोलिंग वॅन उधर से गुज़री , हम होटल तक पंहुच गये थे , बाद में बिस्तर पर प्यार करते वक्त मैने विक्रम के गाल पर चिकोटी काटते हुए जब पूछा कि उन हरामी काले लड़कों के सामने प्यार जताने की क्या ज़रूरत थी तो उन्होने बोला "क्या यार स्मिता तुम भी कौन सी बातें याद रखती हो ज़हन में , उन आवारा लड़कों को मैं यह दिखलाना चाहता था क़ि देखों मेरे पास प्यार करने के लिए मेरी अपनी गर्लफ़्रेंड है और तुम लोग साले ठलुए आँखें फाड़ फाड़ कर हमें देख रहे हो" इससे भड़क कर जब मैने अपने दाँत उनकी गर्दन में गड़ाए तो तुरंत ही उन्होने मेरी नाभि में अपनी उंगली घुसा कर घुमाई , दर्द से मेरी चीख ही निकल गयी "अरे वह लड़के मेरा रेप कर देते तो ? बेकार के एडवेंचर करते हो" मैने दर्द से कराहते हुए कहा | " स्मिता तुम इंटररेशियल वीडियों देखती हो कि नहीं चार काले मुस्टंडे मिल कर अकेली सुनहरी बालों वाली लड़की के साथ सेक्स करते हैं?" "करते होंगे" मैने अपने कुल्हों तले तकिया रखते कहा "अब तुम आ जाओ जलदी से मेरे अंदर , वह इंटर-रेशियल की बात भूल जाओ मिस्टर , तुम्हें सेक्स के लिए देशी बीवी ही मिलेगी कोई सुनहरे बालों वाली लड़की नहीं" और ज़ोर ज़ोर से हँसने लगी अपनी दोनो टांगे खोल कर मैं अपने पति को संभोग का न्योता दे रही थी , वे मेरी टाँगों के बीच घुटनों के बल चल कर आते तो मेरे स्त्रियोचित अहम को बड़ी संतुष्टि मिलती फिर जब वह मेरी योनि में प्रवेश करते तो मैं अपनी दोनो टाँगों के बीच उनको वैसे ही जाकड़ लेती जैसे वह मुझे अपनी बाँहों में क़ैद कर लिया करते थे| "नहीं यार ज़रा इसे तनने दो" विक्रम ने कहा "भूल जाओं मेरे पास इतना समय नहीं है , मैं इसे मुँह में लेकर खड़ा नहीं करूँगी" मैने तुनक कर कहा , अक्सर विक्रम अपना लिंग तानने के लिए मुझसे मुख मैथुन करवाते थे लेकिन आज मेरा मूड नहीं था | "अरे यार क्यों भाव खा रही हो? अच्छा चलो करवट बदल लो तुम्हारी मलाईदार मांसल गाअंड पर ही रगड़ खा कर मेरा डंडा खड़ा हो जाएगा" बेहद अश्लील लफ़्ज़ों में उन्होने अपना इरादा जाहिर किया "अच्छा चलो" कहते हुए मैं अपनी बाँयी करवट पर लेट गयी और अपनी गाअंड की दरार के बीच मुझे उनके लिंग के चुने से गुदगुदी होने लगी "ही ही ही" मैं हंस दी "बड़ी हँसी आ रही है?" विक्रम ने पूछा "हां यार , ज़्यादा कसरत मत करो , सीधे अंदर आ जाओ मेरे" मैने उन्हें मनाते हुए कहा | "पहले मेरी बात तो सुन लो" विक्रम ने अपना लिंग हाथों में पकड़ कर उसका सिरा मेरे पिछवाड़े की दरार से छुआते हुए कहा , मैने गर्माहात पाने के लिए अपना पिछवाड़ा उनकी जांघों के बीच दबाया और आँखें मूंद कर उस नर्म-गर्म अहसास को महसूस करती चली गयी "उन काले लड़कों के लिए तुम गोरी हिन्दुस्तानी लड़कियाँ कोई परियो से कम नहीं हो , तुम्हें देख कर वह सिर्फ़ आहें भर सकते हैं तुम्हें पा कर तुम्हारे साथ सेक्स नहीं कर सकते" विक्रम ने धक्के लगा कर कहा "अच्छा जी?" मैने पूछा और उसकी जांघों के बीच अपने चूतड़ हिलाते कहा "तुम्हें पकड़ कर अगर तुम्हारे सामने वह मेरा रेप कर देते तो?" मुझे भी अब गंदी बातें करने मे मज़ा आ रहा था "वाह रेप की बात कर तुमने तो मेरा जी खुश कर दिया स्मिता यार" विक्रम ने और एक धक्का लगाते हुए कहा "मैं तुम्हें उन चार काले लड़कों से मरवाते देख रहा हूँ" "छी कितनी गंदी सोच है तुम्हारी , अपनी पत्नी को किसी और के साथ सेक्स करते हुए देखने की बात तुम सोच भी कैसे सकते हो?" मैने कहा "वाह इसे अराउज़ल कहते हैं यार ये कोई गंदी सोच नहीं सेक्स में हमेशा कुछ नया सोचना और करना चाहिए" विक्रम अपना लिंग मेरी दरार में घुसेड़ते हुए बोले और इधर मैं मीठे दर्द से कराह उठी , वह मुझमे ऐसे समाते जा रहे थे जैसे कोई पेच अपनी चूड़ियों में समा रहा हो पुरानी हनीमून की बातें याद आई तो मैं ताज़ा हो गयी , विक्रम अभी भी शीशे के आगे खड़े हो कर अपने बाल संवार रहे थे "अरे अब आओ भी यूँ खड़े हो कर एक-एक सफेद बाल क्यों छांट रहे हो ? " मैने कहा "रूको पहले थोड़ा 'वार्म -अप तो कर लूँ" विक्रम बोले
"हाय आओ न उधर से इधर क्या खुद को शीशे में अपना नंगा बदन निहारते हुए यूँ एक एक सफेद बाल छांट रहे हो ?" मैने परेशान होते हुए कहा "और ये मरा लॅपटॉप भी गरम हो रहा है , ये नहीं होता कि इसकी सर्विसिंग करा लाओ , क्ल मेरा इंटरव्यू है और मेरा रेज़्यूमे अपडेट करते वक्त ये हॅंग हो रहा है जब तब"

"अरे स्मिता यार थोड़ी ठंड रखो" विक्रम ने कहा "लॅपटॉप जान गया है कि मालिक मालकिन के साथ पलंगतोड़ सेक्स करेगा इसलिए इस सिचुयेशन को एंटीसिपेट कर गर्म हो रहा है , वह तो ठहरा बेजान बक्सा , साले की डाइमेन्षन ही इतनी बड़ी है कि चाह कर भी तुम्हारी चूत में फिट बैठ नहीं सकता" विक्रम मज़ाक करते हुए बोले और पलंग के एक छोरपर बैठ गए|

इसी बीच लॅपटॉप अचानक चूहे की तरह चिन्हुक उठा और बंद हो गया "सत्यानाश" मैंने मुट्ठी भींच कर गद्दे पर मुक्का मारा
गद्दे में जमी हुई धूल उड़ गयी "इस लॅपटॉप को भी अभी ही खराब होना था" , विक्रम मेरी इस हालत पर हंस पड़े "दिन भर इस लॅपटॉप को गोद में ले कर यूँ पलंग पर लेट कर पॉर्न फिल्में देखोगी तो यह ऐसे ही ओवर हीट हो कर शटडाउन होगा न?"

मैने मुँह बिचकाया
"अब कर ली न थियरी जी भर के ? अब प्रॅक्टिकल का वक्त है!" कहते हुए विक्रम ने मेरी दोनो टाँगे पकड़ लीं और तेज़ी से मुझे अपनी ओर खींचा
"अरे अरे , आराम से लॅपटॉप गिर कर टूट गया तो दिक्कत हो जाएगी न , फिर तुम मुझे नया खरीद कर देने में दिक्कत करोगे" मैने अपना गाऊन सम्हाल्ते हुए कहा
"बीवियाँ जुलरी मांगती हैं कपड़े साड़ीयों गहनों की माँग करतीं है और तुम एक हो कि लॅपटॉप चाहिए?" विक्रम मेरे दोनो पैरों को दूर फैला कर उनके बीच अपने घुटने मोड़ कर बैठते हुए बोले "हद है यार स्मिता"
मैने मुँह बनाया
"हद है यार सेक्स के टाइम पर यूँ ऐसे बंदरों जैसे मुँह न बनाया करो"
"हुन्ह , एक तो जब मूड नहीं है तभी तुमको सेक्स का भूत चढ़ता है तुम्हे , सेक्स सेक्स हरदम सेक्स" मैने चिढ़ते हुए कहा
"अरे तुम्हीं से तो एमसी कांट्रॅक्ट हुआ है सात ज़िंदगियों का , तुमसे सेक्स की माँग न करूँ तो तुम्हारी मम्मी से करूँ?" विक्रम ने मेरे गाऊन में हाथ डालते हुए कहा |
मैने विक्रम का बढ़ता हुआ हाथ बीच में ही पकड़ कर पूरी ताक़त से मोड़ दिया और दाँत भींच कर बोली "देखो विकी हमारे बीच में मेरी मम्मी को न लाओ"
"तेरी माँ की आँख कुतिया साली , मुझ पर धौंस जमाती है" विक्रम भड़क कर बोल पड़े "तुम अपनी इंटरव्यू की टेंशन मुझ पर मत उतारों , चुपचाप सेक्स करोगी तो गुस्सा भी शांत हो जाएगा और क्ल सेलेक्षन भी हो जाएगा" विक्रम ने तेज़ आवाज़ में कहा

"मुझे नहीं देना है कोई इंटरव्यू - विंटर्वियवू हर बार मेरे माँ बाप को गलियाते रहते हो" मुझे रोना आ गया
"तुम्हें मेरा हाथ मोड़ने की भला क्या ज़रूरत थी पागल औरत? अब भुगतो"
"आईईईई मुझे छोड़ो प्लीज़ विक्रम , देखो ब्ग्ल के कमरे में बक्चे सो रहे हैं , इस हंगामे से वह जाग जाएँगे और रोएंगे , फिर चुप करते रहना उनको"
मेरी इस भभकी ने असर दिखाया , दोनो बकचे विक्रम पर ही गये थे , एकदम ज़िद्दी एक बार अड़ जाएँ तो लाख सर पटक लो नहीं मानेंगे लेकिन विक्रम भय से काठ हो गया , बकचों के जागने का मतलब था नींद हराम होना
"फिर सेक्स करो और मुझे ब्लो जॉब दो" विक्रम हल्के से मेरे कान में बोला और कान के किनारे चाट कर काट खाया
"आहह" मेरे होंठो से लकी सी चीख निकल गयी
विक्रम उठ कर मेरे बगल में घुटनों के बल खड़े हो गया , सिरहाने का तकिया उठा कर मेरे बगल मे रखा फिर बाँया हाथ गाऊन में डाल कर दाँये हाथ मेरे कंधे के नीचे रख कर मुझे पकड़ कर उसने बिस्तर से थोड़ा उपर उठाया और तकिये परखुद लेट गया|
"तुम्हारा वह जेल किधर गया जो तुम अपने पैरों में लगती हो?" साइड में ड्रेसिंग टेबल पर पड़ी हुई जेल की डिबिया मैने दी मुझे लगा कि शायद उसे अपनी ग़लती का अहसास हो गया होगा और अब वह मेरे पैरों पर वॅसलीन लगा कर मसाज करते हुए मुझसे सेक्स की भीख माँगेगा , लेकिन यह क्या उसने वॅसलीन की डिबिया में अपनी उंगली घुसेड दी और फिर उसी उंगली को मेरे गाउन के रास्ते ले जा कर छिंगली से मेरी झालारदार पेंटी को अपनी दूसरी उंगलियों में उलझा कर बीच वाली उंगली मेरी गॉंड में घुसा कर पहले तो जगह बनाई फिर वॅसलीन वाली उंगली उसमें घुसेड कर अंदर उंगली के पोर घुमा घुमा कर पूरी वॅसलीन मेरी गॉंड की अंदरूनी दीवार पर चुपड़ी
"हाय ये गुस्से में पीछे से मुझको चोद कर मेरी गॉंड फाड़ देगा , फिर अपनी फटी हुई गॉंड ले कर मैं कल कैसे इंटरव्यू में जा सकूँगी" मैं यह सोच ही रही थी कि मुझे कपड़ा फटने की आवाज़ सुनाई दी , विकी मेरा गाउन फाड़ चुके थे , मैने कंधे से पलट कर दूसरी करवट देखा , मेरी कमर पर फटे गाऊँन के चिथड़े लिपटे हुए थे ,अब किसी भी वक्त विकी अपनी अप्राकृतिक इच्छा मुझ पर लाद सकते थे , हालाँकि उनको यह हक था और मैं भी केवल नाममात्र विरोध कर उनको चाभी लगा रही थी सच तो यह था की उसी दिन सुबह मैने ब्रुनेट एनल सेक्स का इंटररेशयल वीडियो देखा था और तब से वही दृश्य मेरे दिमाग़ में चल रहा था कि किस प्रकार काला कलूटा बलिष्ठ व्यक्ति मेक्सिकन लड़की की कमर पकड़ कर उसकी गॉंड को पूरी बेदर्दी और ताक़त के साथ अपनी जांघों पर पटक रहा था , इस प्रक्रिया के दौरान उसका लौह स्तंभ बार बार उस लड़की की गांद से अंदर बाहर हो रहा था , हाय मेरे यह सोचते ही मेरे दो पैरों के बीच लिसलीसी रसधारा फूट पड़ी |

मेरी चूत के नीचे फिसल्न सी हो गयी और उसे चूम कर विक्रम का सोटा मेरे पैरों के बीच आ गया , इससे पहले मैं कुछ कर पाती , विक्रम ने पीछे हो कर अपने बाँये हाथ से मेरी गॉंड का गड्ढा चौड़ा किया दाँये हाथ से अपने लौडे पर नारियल तेल चुपडा और आयेज कमर सरका कर मेरी गॉंड के गड्ढे में अपना लंड घुसा ही दिया , उसकी जाँघ पर उगे काँटेदार बेतरतीब बाल मेरी गॉंड को चुभने लगे ठप ठप ठप करते ५-६ दफे तेज़ी से उसने अपनी कमर और कुल्हों का वज़न मेरी नाज़ुक गॉंड पर यों हस्तांतरित किया कि बेचारा हमारा किंग साइज़ बेड भी चरमरा गया

"आहह स्मिता तुम्हारे बाल कितने खुश्बुदार हैं क्या आज ही तुमने इन्हें धोया है आहह क्या खुश्बू है इस शांपू की , कौनसा शांपू लगाती हो स्मिता"

विक्रम की हज़ारों खामियों में से यह एक खामी है जो मेरे तन-बदन में आग लगा देती है , सेक्स के वक्त इन्हें बेकार बातें बड़बड़ाना बेहद पसंद है , मुझे तो यह एक किस्म का मनोरोग सा लगता है , इसकी पुष्टि के लिए जब शादी के बाद पहली बार ऐसा हुआ तो दूसरे ही दिन इनको ज़बरदस्ती मनोचिकित्सक के पास ले गयी , वहाँ उसने इनका मुआयना किया और बताया कि यह आदत काफ़ी पुरुषों को होती है और यह काफ़ी नॉर्मल है कि चरमवस्था पर पंहुच कर बहुत से पुरुष बेकार बड़बड़ाते हैं , यह सुन कर एक ओर तो मुझे खुद पर फख्र हुआ कि मैं अपने पति को सेक्स की चरम अवस्था पर ले जा सकती हूँ लेकिन डसरी ओर ऐसा लगा कि अब तो ज़िंदगी भर यह मुसीबत झेलनी पड़ेगी

आप में से जो महिला पाठक हैं उन्होने भी यह बात महसूस की होगी कि आपका पार्टनर सेक्स के दौरान बेकार की बातें बड़बड़ाने लगता है और ऐसे में इन पुरुषों की हालत वह होती है कि शायरी की पूरी किताब ही ईजाद कर दें , सेक्स की उस चरमावस्था के दौरान यह गुलज़ार हो जाते हैं
तो साहब मेरे पति सारी रात यूँ ही बेवकुफों के जैसे बड़बड़ाते रहे और एनल किया , १५ मिनट गॉंड मारी फिर रात भर बस चूमा चाट ही की , लब्बोलुआब ये कि साहब तो अपना कर कुरा के कुंभकर्ण की तरह घोड़े बेच के सो गए और मैं बेचारी प्यासी की प्यासी ही रह गयी| मैने शांति से साओते हुए विक्रम को देखा , उसकी छाती खुली हुई थी और छाती पर उगे बेतरतीब बाल यूँ उगे थे जैसे खेत में खरपतवार सोते समय सीना साँसों के साथ बार बार उपर नीचे हो रहा था , और मुझे इस से खिज हो रही थी , मुझे गर्म तो कर दिया लेकिन दो टाँगों के बीच लगी हुई आग को कैसे बुझाऊं अब? मैं उस फटे हुए गाऊन में उठ करअधनंगी ही डाइनिंग रूम में गयी , टेबल के बाजू में फ्रिज था उसे खोल कर पानी की बोतल ली और मुँह से लगाई , अभी दो घूँट लिए ही थे कि मेरा ध्यान डाइनिंग रूम की खिड़की की तरफ गया , विक्रम ने हवा आने के लिए उसे खुला ही छोड़ दिया था , सामने वाले फ्लॅट की गॅलरी में खड़ा एक शख्स इसी तरफ देख रहा था , मैं ठीक से उसे देख नहीं पाई लेकिन वह एकटक मुझे ही देख रहा था , मैं तो यह सोच कर ही कि वह मुझमें दिलचस्पी दिखा रहा है खिल उठी थी, सोचा इसे थोड़ा तरसाया जाए| मैने अपने बँधे हुए बाल खोल लिए और डाइनिंग रूम में स्ट्रीट लाइट की सीमित रौशनी में ही कामुक नृत्य करने लगी , बीच में डाइनिंग तबल की कुर्सी के पर उल्टी बैठ जाती और यों नाटक करती कि कुर्सी पर बैठ कर कोई मुझे चोद रहा हो , फिर उसे और उकसाने के लिए मैने अपना गाऊन चर्र्र से फाड़ दिया अब केवल ब्रा पेंटी ही मेरी इज़्ज़त बचा रही थी , मैं तो ठहरी बेशर्म खिड़की की ग्रिल पर चढ़ कर उकड़ू बैठ गयी और डाइनिंग टेबल पर रखी सब्जी की टोकरी से करेला उठाया और अपनी चूत में एक रिदम के साथ अंदर बाहर करने लगी| वह व्यक्ति अब उत्सुकता के साथ मुझे देख रहा था , स्ट्रीट लाइट की हल्की रौशनी में मुझे उसका चेहरा मोहरा दिखा मज़बूत देह यष्टि में वह तगड़ा नौजवान बेहड़ आकर्षक लग रहा था , चौड़े जबड़े बलिष्ठ भुजाएँ और सलमान ख़ान जैसे दौले , हाय कौन औरत न मर मिट जाएगी ? मेरी उत्तेजना से भरपूर "हूँ हां हूँ हां" की हल्की आवाज़ उस शांत रात में गूँज सी रही थी , उस यक्ति ने भी अपना पायज़मा खोल लिया था और हाथों से अपने लॅंड को सहला रहा था , यह देख कर मुझे और ज़ोर चढ़ गया , करेले के शल्क मेरी योनि को और अधिक गुदगुदा रहे थे मेरे कूल्हे भी हिलने लगे , मेरी चूत उस ५ इंची करेले को अपने भीतर समाने के लिए बेताब थी उधर उस व्यक्ति का बुरा हाल था ,दो बिल्डिंग के बीच में गॅप और वह लोहे की मज़बूत ग्रिल न होती तो वह कूद कर हमारे घर ही आ जाता और फिर मुझे डाइनिंग टेबल पर प्त के बल लिटा कर आप खड़ा हो कर मेरे साथ धुआँधार सेक्स करता , खैर वह आदमी अपना लवड्*ा हिला हिला कर थक गया और अपनी ही गॅलरी में ढेर हो गया | इधर चार बार झड़ कर भी मैं संतुष्ट न हुई , मैने घड़ी की ओर देखा रत का डेढ़ बज रहा था , मेरे चिपचिपे चीकट रस से भरपूर वह करेला मैने टेबल पर रखा और रुआंसी हो कर सोने बेडरूम गयी| मर्दों का अच्छा है जब चाहा जिसके साथ चाहा भरपूर सेक्स किया और भूल गये , लेकिन यही आज़ादी हम स्त्रियों को नहीं मिलती , घर परिवार और समाज के तमाम प्रतिबंध | मैं बिस्तर पर लेट कर अपनी जांघों के बालों को सहलाते हुए यह सब सोच ही रही थी कि नीचे से कुत्तों के भौंकने की आवाज़ आई , मैने उठ कर खिड़की से बाहर झाँका तो देखा जहाँ गॅलरी में थोड़ी देर पहले वह आदमी खड़ा था उसी गॅलरी के नीचे कोई कपड़ा मुँह में पकड़े कुत्ते झगड़ रहे थे| "हाय मुझसे बेहतर तो इन कुत्तों की ज़िंदगी है , मुझे देख कर उस नेक इंसान ने पानी बहाया , और नेग इन कुउटों को मिलेगा" मैने सोचा "काश विक्रम मेरे साथ सेक्स करते , अपनी गॉंड मरवा कर भी मेरी बुर प्यासी रह गयी , वाकई इंसानों से बेहतर कुत्ते ही हैं , कुत्ते कुतिया को पूरी आज़ादी देते हैं और तो और कुतिया जब हीट में आती है तो चार चार कुत्ते एकसाथ उस कुतिया के साथ सेक्स करते हैं , मेरा - तेरा की भावना नहीं आती बस शुद्ध जंगली सेक्स! यही तो मुझे भी चाहिए था , लेकिन विक्रम जैसे पति से इसकी उम्मीद करना ही बेकार था जो अपनी पत्नी की इच्छाओं से बेख़बर अपने ही विश्व में सोया पड़ा था कभी कभी तो मुझे स्वयं से घृणा होती कि क्या मैं हर वक्त सेक्स के बारे में सोचती रहती हूँ , आम स्त्रियों की तरह घरेलू बाते क्यों नहीं सोचती कल खाने में क्या बनाना है यह बात मैं सोच ही रही थी कि मेरे दिमाग़ में उस चिपचिपे रस से सराबोर उस करेले का चित्र कौंध गया , बस अब कल उसी की सब्ज़ी बना कर विक्रम को टिफिन में दूँगी , मैं खुद से बोली और हंस पड़ी | मेरे हँसने की आवाज़ से मेरे बगल में लेटे विक्रम की नींद उचट गयी और वह उठ कर बहराया हुआ सा बेवकुफों की भाँति उठ बैठा "क..क...क्या हुआ?" "कुछ नही तेरी बस बीवी की जाँघ में आग लग गयी" मैने कहा "सो जाओ" "अच्छा?" कहते हुए वह सो गया | "बेवकूफ़" मैने मन ही मन कहा "कल के इंटरव्यू के लिए रेज़्यूमे का प्रिंट लेना है , ब्यूटी पार्लर जा कर तैयार होना है लेकिन इस सब से पहले मुझे अच्छी नींद लेनी है" मैने घड़ी की ओर देखा सवा दो बज रहे थे , मेरी आँखें भारी हो रहीं थी और मैं सपनों की दुनिया में खोती जा रही थी| मैंने सपने में देखा वेस्टर्न ऑफीस वेयर और स्टॉकिंग्स में मैं बड़े से केबिन में बैठी टाँगे चौड़ी किए हुए कुर्सी पर बैठी हुई थी और मैने अपनी जांघों में एक अधेड़ चेहरा दाढ़ी मूँछे बढ़ाए हुए क़ैद था वह अपनी नाक और जीभ के कॉम्बिनेशन से मेरी चूत में यों तूफान मचा रहा था कि मैं कुर्सी के दोनों हत्थे पकड़े हुए अपने कूल्हे सरका कर पीठ टिका कर अपनी चूत रगडे जा रही थी , उसकी ज़ुबान पर मेरा शह्द था और उसके होंठ मेरी चूत के होंठों को चूमते जा रहे थे ...
उस रात बड़ी अच्छी नींद आई और चुदास सपनों ने मेरे मन को खुश कर दिया , सुबह उठ कर विक्रम के लिए टिफिन की तैयारी की , सब्जी उसी करेले की बनाई जो रात भर मेरी चूत की गहराई नाप रहा था , सुबह के सवा आठ बज रहे थे बाकचों को उठा कर तैयार कर उन्हें स्कूल बस में बिता आई , घर लौटी तो पतिदेव बाथरूम में क़ैद थे तो इसी बीच मैने प्रिंट आउट भी ले लिया और फाइल जमाने बैठ गयी की इतने में पीछे से पतिदेव आए और मुझे बाँहों में भर लिया "स्मिता तुम काम करते वक्त बेहड़ सेक्सी लगती हो , तुम झुक कर जब यह काग़ज़ फाइल में लगाती हो तो कसम से तुम्हारी गॉंड यूँ फूल कर चौड़ी हो जाती है कि तुम्हें चोदने का मन करता है" विक्रम मेरे पतिदेव बोले | "देखो विक्रम अभी मैं सेक्स नहीं कर सकती बहुत काम बाकी है , दूधवाला आएगा फिर मेड आएगी तुम्हे ओफिस भी जाना है" मैने समझते कहा "एक शॉट , प्लीज़" विक्रम गिडगीडा कर बोला "चलो ब्लो जॉब ही दे दो" "उफ़" ये विक्रम भी पॉर्न फिल्में देख कर मुझसे उल्टे सीधे काम करवाता है...बल्कि होना तो यह चाहिए कि यह मेरी चूत का पानी पिए "प्लीज़ स्मिता" कहते हुए उसने मेरा चेहरा अपनी हथेलियो में भर लिया और अपने होंठ मेरे काँपते होंठों पर रख दिए और अपनी जीभ से मेरे होंठों को खोल कर मेरी जीभ से भिड़ा दी , फिर जिस तरह दो तलवार बाज़ अपनी तलवार से युद्ध करते हैं वैसे ही मेरी और मेरे पति की जीभ के बीच मुँह में ज़ुबानी जंग छिड़ गयी , कभी उनकी जीभ सरक के मेरे मुँह में आती तो कभी मैं पूरी ताक़त के साथ अपनी जीभ उनके मुँह में ठेल देती , मैं अपने तेज़ नाख़ून विक्रम की पीठ में गाड़ा रही थी क़ी मेरा ध्यान गॅलरी की तरफ गया , रात वाला आदमी हम पति पत्नी की प्रणयलीला देख कर तेज़ साँसे लेते हुए अपना लॉडा हिला रहा था "देखो विक्रम वह बाजू के फ्लॅट वाला , हमारा किसिंग सीन देख रहा है" मैने धीरे से उसके कान में कहा "देखने दो , उसका मुफ़्त मनोरंजन हो जाएगा , उसकी ओर ध्यान मत दो तुम" विक्रम ने मेरी भौंहों के बालों पर अपनी ज़ुवान फेर कर अपनी मुँह की लार से गीला करते कहा "तुम भी कमाल करते हो , ऐसे कैसे उसको अपने प्राइवेट पल देखने दे सकते हैं?" मैने झुंझला कर कहा "यार...बेकार में मूड खराब न करो.." विक्रम ने मेरी भौंहों के बीच अपनी ज़ुबान से चाटते कहा मेरा मुँह उसके मुँह की लार से लगभग पुत ही गया था "हटो , मुझे नाश्ते की तैयारी करने दो" मैने अपने आप को उसकी बाँहों की गिरफ़्त से छुड़ाते हुए कहा "स्मिता उस माधरचोद के लिए क्या तुम सेक्स अधूरा छोड़ कर जाओगी?" विक्रम ने कहा "उसको कोई काम धंधा नहीं है यूँ ही लोगों की खिड़की में झाँकता रहता है" "उसको कोई काम हो न हो ...लेकिन कोई मुझे इस हालात में कोई देख ले तो मैं बड़ी अनकंफर्टबल फील करती हूँ" मैने नाश्ता टेबल पर लगाते कहा "यूँ नो स्मिता मेरी फॅंटेसी हैं कि हम फॉरिन टूर पर जाएँ तो मैं पब्लिकली सरेआम तुम्हें किस करूँ" विक्रम ने कहा "बेकार की बातें मत करो हम शादी के बाद स्विट्ज़र्लॅंड घूमने गये थे तब मैने तुम्हें किस किया था तो पूरी ट्रिप के दौरान तुम शर्मा रहे थे" मैने कहा "तब मैं शरीफ था न " विक्रम ने भाव खाते हुए कहा "अच्छा अब बड़े हराम खोर बन गये हो" मैने कहा "अब चोदु जो बन गया हूँ" उसने जवाब दिया "दिन में दो तीन दफे तो सेक्स करना चाहिए" "मेरा मूड भी तो बनना चाहिए न" मैने उसकी प्लेट में नाश्ता डालते कहा "मूड का क्या है ? थोडा टीज करो बन जाता है" वह बोला "अच्छा स्मिता?" "हाँ" "यह चार हज़ार रुपए रख लो , इंटरव्यू से पहले फेशयल करवा लेना , और वह जो एक्ज़िबिशन से तुम्हारे लिए वह सिल्ककुर्ती खरीदी थी वह लेगिंग के साथ पहन कर जाना , एकदम बढ़िया तैयार हो कर जाना इंटरव्यू के लिए" "रियली? विक्रम तुम कितने अच्छे हो" "मैं जानना चाहता हूँ कि मेरी खूबसूरत बीवी को देख कर कितनों की पतलूनों में तंबू बन जाते हैं , इसलिए लौट कर मुझे इंटरव्यू की डीटेल बताना" विक्रम नाश्ता करते हुए बोले
"ज़रूर विक्रम , भला यह भी कोई कहने की बात है ? तुम मेरे पति हो और नौकरी मिलने की खुश खबरी तुम्हें ही सुनाऊँगी" वह उठकर खड़ा हो गया और ऐसी ही बेसिर पैर की उल्टी सीधी बातें करता रहा , वह तैयार हो चुका था इसलिए मैने उसकी बातें नज़र अंदाज़ कर

उसे टिफिन थमाते हुए ऑफिस के लिए विदा किया | उसके ऑफीस जाते ही सबसे पहले तो मैंने ब्यूटीशियन को फ़ोन लगाया और उसे तुरंत आने कहा |
घंटे भर बाद ही दरवाज़े पर दस्तक हुई मैने दरवाज़ा खोला तो वॅनिटी बॉक्स लिए दो महिलाएँ खड़ी थी इनमें से एक नम्रता थी
"क्या बात है स्मिता जी , आज बड़ी जल्दी में बुलाया ?" नम्रता ने कहा "यह मेरी असिस्टेंट लक्ष्मी है" उसने दूसरी लड़की से मिलवाते कहा "हेलो लक्ष्मी" मैने उसे विष किया , "आप लोग भीतर आ जाइए" मैने कहा और तब उन्होने प्रवेश किया
"आप बेडरूम के कोने में रखे ड्रेसिंग टेबुल के पास सेटल हो जाइए , मैं ज़रा आपके लिए चाय पानी ले कर आती हूँ" मैने कहा
"स्मिता मैड्म आप क्यों फॉरमॅलिटी कर रहीं है , चलिए काम शुरू करते हैं बताइए क्या करना है?" नम्रता सीधे मुद्दे पर आते बोली , नम्रता की मुझे यही बात सबसे पसंद थी , काम की पक्की प्रफेशनल बेकार की बातें वह नहीं करती थी और मेकअप एक दम बढ़िया वाला

करती थी|
"हाँ तो नम्रता मेरा ऑफीस के लिए मेकअप कर दो प्लीज़ मेरा आज इंटरव्यू है"
"ओके मैड्म" नम्रता ने कहा और तुरंत वह कम में जुट गयी बीच बीच में वह अपनी असिस्टेंट लक्ष्मी को निर्देश दे रही थी|
नम्रता ने पहले तो मेरा चेहरा वॉश किया फिर क्रीम और कन्सीलर लगा कर आई लाइनर और मस्करा लगाया फिर गालों को ब्ल्श किया और लिपस्टिक लगा कर उसपे ग्लॉस लगाने से पहले बर्फ का टुकड़ा मेरे होंठों पर फेरा ही था कि उसे फ़ोन आ गया , वह फ़ोन रिसीव

करने बरामदे में गयी और इतने में लक्ष्मी शुरू हो गयी
"मैडम हम यूष्यूयली तो लोगों के घर किसी विशेष मौके पर ही मेकअप करने जातीं है , आमतौर प्र महिलाएँ तो ऑफीस के लिए खुद ही तैयार होना पसंद करतीं है , क्या मैं जान सकती हूँ कि आपने ऑफीस मेकअप के लिए प्रफेशनल ब्यूटीशियन क्यों क्यो बुलाया"
"वह इसलिए कि मेरे मिस्टर चाहते हैं कि मैं इंटरव्यू में कॉन्फिडेंटली परफॉर्म करूँ , क्योंकि आज कल इंटरव्यू में स्किल्स से ज़्यादा आपके लुक को लोग ज़्यादा तवज्जो देते हैं मैने अपने बाल संवारते कहा"
"लाइए यह मैं कर देती हूँ" कहते हुए लक्ष्मी मेरे पीछे खड़ी हो गयी और मेरे बाल अपने बाएँ हाथ में पकड़ कर दाँये हाथ में कंघी पकड़ते हुए बोले "सर ने यह बात खूब कही , आपको सर बहुत प्यार करते हैं न ? सॉरी मैं ज़रा पर्सनल हो रही हूँ"
उसने मेरे बाल संवारते हुए कहा
"बहुत"
"और आप?"
"थोडाबहुत" मैं अब खुलने लगी थी
वह हंस पड़ी "यानी आप किसी और को चाहती हैं?"
"किसी को चाहती हूँ ऐसा नहीं है , लेकिन कोई आकर्षक पुरुष दिख जाए तो मैं उस पर फिदा हो जाती हूँ" मैने कहा
"मतलब?"
"लड़कों के नहीं लॅंड खड़ा हो जाता है खूबसूरत लड़कियों को देख कर?"
"हां?" वह बोली
"वैसे ही मेरी चूत में पानी भर जाता है आकर्षक मर्दों को देख कर" मैने गर्व से कहा

"आप तो बड़ी रंगीन मिजाज़ हैं मैडम"
मैं मुस्कुरा दी
"वैसे मैडम एक बात कहूँ?"
"कहो"
"आप शादीशुदा है आपके दो बक्चे हैं फ़िर भला क्यों ऐसे शौक रखतीं हैं?" उसने मेरे बालों को ब्रश करते हुए पूछा
"तुम्हारी शादी हुई है?"
"नहीं"
"जाओ फिर नहीं समझोगी इस बात को तुम"
"अरे मैडम आप तो नाराज़ हो गई , मेरा यह मतलब न था"
"क्या मतलब था?"
"मैं तो यह कह रही थी कि कैसा हो अगर आप को शौक के साथ साथ कुछ पैसे भी मिल जाएँ?"
" हैं ? ए देखो मैं वैसी नहीं हूँ , मैं लेस्बियन नहीं हूँ" मैने चौंकते हुए कहा
"अरे मैडम पूरी बात तो सुन लीजिए" उसने मेरे कंधों पर हाथ रख कर मुझे वापिस कुर्सी पर बैठते हुए कहा
"आप मर्दों को देख कर आँहे भरती हैं , है कि नहीं?"
"हाँ तो?"
"कैसा हो अगर आपके मज़े करने के लिए मर्द मैं ले आऊँ ? आप इसके बदले में मुझे कुछ एक हज़ार दे दिया करना" उसने फुसफुसाते कहा
"तू दलाल है मर्दों की?" मैने भौंहे चढ़ाते हुए कहा "मेरे पास फालतू पैसे नहीं है यह सब करने के"
"मैडम अगर आप चाहे तो मैं आपका हुक अप भी करवाउंगी न ७०-३० की डील में , आपको एकदम मोरनी की माफिक चमका दूँगी , अमीर कौवे-गिद्ध आपके लिए तो अच्छी अमाउंट पे करेंगे" उसने डरते डरते कहा
एक औरत दूसरी औरत के जिस्म की यूँ ऐसे बोली लगा रही थी , वैसे तो यह बेहद शर्मिंदगी वाली बात थी लेकिन आख़िर इसमें हर्ज़ ही क्या है ? मेरे जैसी चुड़क्कड़ औरत अपने शौक के साथ चार पैसे भी कमा ले तो क्या दिक्कत है?ठीक है मैं किसी की पत्नी हूँ , बहू हूँ ,

बेटी हूँ , बहन हूँ और माँ भी हूँ तो क्या इन रिश्तों के लिए और नैतिकता का ढिंढोरा पीटने के लिए मैं अपने अरमानों की बलि चढ़ा दूं ?नहीं नहीं कभी नहीं - मैने सोचा
लेकिन एकदम से बेशर्म तो नहीं बन सकती , इससे सही वक्त पर खुल कर बात करनी होगी , अभी यह सही समय नहीं है , इसका कहा ज़रूर करूँगी लेकिन अभी नहीं अभी तो मुझे इंटरव्यू पर फोकस करना है |

"लक्ष्मी" मैने उसे पुकारा
"जी मैडम" उसने जवाब दिया , लेकिन सामने से नम्रता को आता देख मैने बात बदली
"तू मेरा मेकअप कर दे , आज मेरा इंटरव्यू है , कल तुझसे इस बारे में फ़ुर्सत से बात करूँगी"
सच कहूँ तो मैं अपना मन मार कर रह गयी , चुदाई न सही चुदाई के बारे में बातें करने से ही मन बहाल जाता है , और ये इंटरव्यू की स्ट्रेस , चूत में थोड़ी उंगली कर लेती या इस लक्ष्मी से ही करवा लेती तो दिन अच्छा जाता और इंटरव्यू के लिए तैयार भी हो जाती ,

लेकिन...फूटी किस्मत और क्या?

खैर ये इंटरव्यू हो जाने दो , रात में बेड पर विक्रम के साथ कूल्हे उचका उचका कर सेक्स करूँगी एकदम पलंग तोड़!
बाकी की कहानी कहां गई


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