मजा आया चुत चुदवा कर
ऑफिस टूर पर काफ़ी मजा आया चुत चुदवा कर

मेरा नाम पूजा है लेकिन घर में सभी मुझे नैना भी कहते हैं, मेरी उम्र 28 साल है, मेरी फिगर 32-27-34 की है व मेरी हाईट 5 फ़ीट है। वैसे मेरा प्यार सचिन नाम के लड़के से काफी दिनों से है, लगभग 10 सालों से और आज भी है। अभी मैं सरकारी नौकरी कर रही हूँ। मैं दिसम्बर 2013 में मेरे साथ जो हुआ.. उसके बारे में बता रही हूँ। उस वक्त मैं एक प्राइवेट इंस्टिट्यूट में नौकरी कर रही थी। मैं आपको बताते चलूँ कि मैं अपने बॉयफ्रेंड से बहुत प्यार करती थी और हर 3 से 4 महीने में वो मुझसे मिलने आता था। मैं ऑफिस के कामों से दूसरी ब्रांच में फ़ोन करती रहती थी.. तो एक नितिन नाम का लड़का फ़ोन उठाता था। उस वक्त उससे ऑफिस के बारे में ही बातें होती थीं। काफी दिनों तक बात होने से हम दोनों एक-दूसरे को जानने लगे। नितिन मुझे लाइक करने लगा था, वो मेरे मोबाइल पर भी मैसेज और कॉल करने लगा और फ़ोन पर ही हमारे बीच हंसी-मजाक होने लगा। एक बार नितिन मुझसे मिलने मेरे ऑफिस भी आया.. तब वो मेरी उससे पहली मुलाकात थी। फिर ऐसे ही उससे बातचीत कुछ दिनों तक चलती रही। इसके बाद ऑफिस में न्यू ईयर पर नैनीताल टूर का प्लान बना.. जिसमें दोनों ब्रांच के सभी लोगों को जाना था, लेकिन इस टूर में सभी लोग नहीं गए थे। उस दिन 30 दिसम्बर को दोनों ब्रांच से 3 कारों से लगभग 11 लोग निकले, जिसमें मुझ समेत 2 लड़कियां ही थीं। मैं और नेहा मैडम सभी लोग शाम को 6 बजे कार से निकले। कार में पीछे वाली सीट पर नितिन मेरे बगल में बैठा था। रास्ते में हम दोनों ने खूब बातें कीं.. फिर रात को ढाबे पर खाना खा कर चल दिए। क़ार में अन्दर की लाइट बन्द होने के कारण अँधेरा था, इस समय नितिन अपने पैर से मेरे पैर को टच कर रहा था, मैं बार बार अपने पैर को हटा रही थी.. पर वो नहीं मान रहा था। मैं कुछ बोल भी नहीं पा रही थी.. क्योंकि सर आगे बैठे थे। नितिन फिर और आगे बढ़ने लगा, उसने मेरी जांघों पर हाथ रख दिया, मैं उसका हाथ हटाने लगी.. पर वो नहीं माना। धीरे धीरे उसने मेरी जींस की ज़िप खोल दी और पेंटी के ऊपर से मेरी चुत को टच करने लगा। थोड़ी देर बाद मैंने उसका हाथ हटा दिया। कार में इतना ही हुआ था। फिर हम सब 2 बजे रात को नैनीताल पहुँच गए। होटल में सर ने मेरे और नेहा मैम के रूम अलग-अलग बुक किए थे और बाकी सभी लोगों को एक रूम में दो-दो लोग के हिसाब से व्यवस्था की गई थी। मैं अपने रूम की चाभी लेकर रूम में गई और थकान होने के कारण जल्द ही सो गई। सुबह 9 बजे नितिन ने दरवाजा पीटा, वो बोला- मैम उठो.. अभी गर्म पानी आ रहा है, फ्रेश हो जाओ। मैं उठी.. दरवाजा खोल कर बाथरूम में पानी चैक करने लगी कि तभी पीछे से नितिन भी आ गया और उसने मुझे पकड़ लिया। मैं हड़बड़ा कर बोली- यह क्या कर रहे हो.. जाओ इधर से! पर वो नहीं माना.. और मुझे किस करने लगा, मैं उससे किसी तरह छूट कर बाहर आकर बोली- जाओ.. नहीं तो सर आ जाएंगे। फिर वो चला गया। कुछ देर बाद हम सब फ्रेश होकर घूमने निकले.. नितिन भी साथ में था। हम सभी ने साथ-साथ बोटिंग भी की.. और बातें भी हुईं। वो बोला- मैम रात को आपके रूम में आऊंगा। मैं बोली- किस लिए? वो बोला- कुछ बात करनी है। मैं बोली- क्या बात करनी है.. यहीं बोलो! वो बोला- नहीं.. रात को ही बताऊंगा। मैं बोली- ओके। नितिन की हरकतों से मुझे अपनी चुत में कुछ कुछ महसूस होने लगा था, इसलिए रात को डिनर करके मैं अपने रूम में आकर होटल के फोन से ब्वॉयफ्रेंड से बात करने लगी.. तभी मेरे मोबाइल पर नितिन का मैसज आया ‘मैम दरवाजा खोलो.. आ रहा हूँ।’ मैं फोन कट करके दरवाजा खोल कर लेट गई, नितिन आया और दरवाजा बंद करके मेरे बाजू में लेट गया। हम दोनों में थोड़ी देर बातें हुईं.. फिर उसने मुझे अपने पास खींच लिया। मैं बोली- क्या कर रहे हो.. बात करने आए हो.. तो बात करो! वो बोला- प्लीज़ मैम समझा करो! यह बोल कर वो मुझे लिप किस करने लगा। मैंने थोड़ी देर तक मना किया, फिर मैं भी उस किस करने लगी। थोड़ी देर बाद वो मेरा टॉप निकालने लगा.. तो मैं उसे मना करने लगी। वो बोला- तुम ऐसे नहीं मानोगी! फिर मुझे अपने ऊपर लेकर मेरे दोनों हाथ जबरन ऊपर करके मेरा टॉप निकाल दिया। टॉप उतरते ही मैं केवल ब्रा में हो गई। फिर वो ब्रा के ऊपर से ही मेरी चूचियों को दबाने लगा.. तो मैं भी गर्म होने लगी। अब उसने मुझे लिटा दिया और मेरे पूरे शरीर को किस करने लगा, कुछ देर बाद उसने मेरी ब्रा को भी निकाल दिया। अब मैं ऊपर से नंगी थी.. वो मेरी चूचियों से खेलने लगा उसने बहुत देर तक मेरे मम्मों पर किस भी किया और मेरे निप्पलों को चूसा भी। मुझे भी अब अच्छा लगने लगा था। मेरा विरोध न पाकर वो मेरी जींस निकलने लगा.. तो मैंने मना कर दिया, मैं बोली- बस बहुत हो गया.. अब कुछ नहीं.. नीचे कुछ नहीं करने दूँगी। मैंने उसे बहुत बार मना किया। वो बोला- प्लीज मैम.. कुछ नहीं करूंगा.. केवल देखूंगा। उसके कहने पर मैं भी मान गई क्योंकि चुदास तो मेरी भी भड़की हुई थी। मैंने पैर सीधे कर दिए.. और उसने एक ही झटके में मेरी जींस और पेंटी दोनों साथ में ही निकाल दिए। अब मैं पूरी नंगी हो गई थी, मेरी चुत भी पूरी नंगी थी, फिर वो भी नंगा हो गया और मुझे पूरे शरीर में किस करने लगा। उसने मेरी चुत के बगल में भी किस किया और उंगली से चुत को टच करने लगा। उसकी मंशा मुझे चोदने की थी, मुझे लगा कि अब वो लंड डालेगा.. पर मैं सेक्स नहीं करना चाहती थी, मैंने उससे बोल दिया- मैं आगे कुछ नहीं करने दूंगी.. तुम चाहो तो पीछे डाल लो। यह सुनकर उसने मुझे पेट के बल लिटा दिया। अब उसने मेरे बैग से कोल्ड क्रीम निकाल कर मेरी गांड के छेद में लगाई.. फिर अपना लंड मेरी गांड में डालने लगा। जैसे ही थोड़ा सा लंड मेरी गांड में गया.. मुझे बहुत तेज़ दर्द हुआ। मैं तुरंत ही आगे से हट गई और सीधी लेट गई। वो फिर से मेरे ऊपर आ गया और फिर से मुझे चूमने लगा। यह हिंदी सेक्स स्टोरी आप अन्तर्वासना सेक्स स्टोरीज डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं! इस बार उसने मुझे मना लिया और अपना लंड मेरी चुत में लगा दिया। अभी मैं कुछ समझ पाती कि उसने एक ही ठोकर में लंड पेल दिया। एक बार तो मेरी चीख निकल गई.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… पर उसने मुझे नहीं छोड़ा और मेरी चुत में धक्के देता रहा। चूंकि मैं पहले से ही अपने ब्वॉयफ्रेंड से चुद चुकी हूँ.. तो मुझे कोई खास दिक्कत नहीं हो रही थी। कुछ देर बाद वो मेरे पैरों को ऊपर करके मुझे हचक कर चोदने लगा। कुछ देर की चुदाई में मुझे मजा आने लगा तो उसने मुझे अपने ऊपर ले लिया। वो बोला- अब तुम करो। मैंने मना कर दिया और मैं बोली- ये सब मुझसे नहीं होगा। फिर उसने मुझे लिटा कर देर तक चोदा.. मैं झड़ गई उसके कुछ देर बाद ही उसका पानी भी मेरे पेट के ऊपर निकल गया। वो मेरे बाजू में लेट गया और बोला- मैडम, आप बहुत सेक्सी हो। एक बार चुदने के बाद मैं उसके साथ खुल गई थी। कुछ देर चूमा-चाटी के बाद हम दोनों फिर से गर्म हो गए, अबकी बार मैं उसके ऊपर आ गई.. और उसके शरीर को चूमने लगी.. उसके लंड से खेलने लगी। मैंने उसके कहने पर उसके लंड को किस किया.. और उसके जोर देने पर मैं उसके लंड को चूसने भी लगी। उसने मेरे मुँह को ही चुत समझ कर चोदना शुरू कर दिया था.. कुछ ही देर में मैंने उसके लंड को चूस कर पानी निकाल दिया। मैं उससे बोली- हो गए संतुष्ट? वो बोला- अभी नहीं.. एक बार और लूँगा। मैं बोली- अब नहीं.. अब जाओ। उसने अपने कपड़े पहने और चला गया। मैं दरवाजा बंद करके यूं ही नंगी सो गई। ऐसे ही नितिन ने मुझे गर्म करके चोद ही दिया, मुझे भी काफ़ी मजा आया अपनी चुत चुदवा कर!
भाभी की चुदाई का मस्त मजा लिया

आज मैं आपके सामने एक सच्ची सेक्स कहानी लेकर आया हूँ। यह कहानी सच्ची घटना पर आधारित है। मेरा निक नेम सोनू हैं, मेरी हाईट 5 फुट 11 इंच है और कसरती शरीर है। मैं करनाल ज़िले का रहने वाला हूँ। मैं अन्तर्वासना को नियमित रूप से पढ़ता हूँ। हमारे परिवार में सब चाचा ताऊ.. वगैरह सभी मिल-जुल कर पास-पास ही रहते हैं, इसलिए हमारा एक-दूसरे के यहाँ आना-जाना लगा रहता है। एक दिन मुझे किसी काम से अपने चाचा के घर जाना पड़ा और मैंने दरवाजा खोला और सीधा अन्दर चला गया। मैंने देखा कि अन्दर सभी कमरों के दरवाजे बंद थे। जब मैं वापस जाने लगा तो मैंने महसूस किया कि कहीं से पानी गिरने की आवाज आ रही है, ध्यान से सुना तो लगा कि वहाँ कोई नहा रहा था। जब मैंने नजदीक जाकर देखा तो उधर मेरे चचेरे भाई की पत्नी यानि मेरी भाभी नहा रही थी, भाभी बिल्कुल नंगी थी। मैं भाभी के नंगे मदमस्त शरीर को निहारने लगा। जब भाभी का ध्यान मेरी तरफ गया.. तो उसने जल्दी से तौलिया उठाया और मेरी तरफ देख कर मुस्कुराते हुए कमरे में घुस गई। इस वक्त वो बहुत सुन्दर लग रही थी। उसका साईज 38-34-38 का रहा होगा। उसे नंगा देख कर और उछलते मम्मे देख कर मेरा लंड पजामे से बाहर आने को हो रहा था। मेरे भाई की शादी को 4-5 साल हो गए हैं.. और उसके दो बच्चे भी हैं। लेकिन मेरी भाभी बहुत ही सेक्सी है। फिर मैं वहां से चला आया और उसको चोदने की तरकीब सोचने लगा। भाभी मेरे साथ बहुत ही ओपन थी, वो मेरे साथ इधर-उधर की बातें कर लेती थी। अब तक उसके लिए मेरे दिमाग ऐसा कुछ नहीं था, लेकिन इस घटना के बाद मेरे दिमाग में उसको चोदने की प्लानिंग चल रही थी। मैंने उसके उछलते मम्मों के नाम पर कई बार मुठ भी मार ली। कुछ दिन बाद में उसके घर फिर से गया आज भी घर में उसके अलावा कोई नहीं था। उसके दोनों बच्चे स्कूल गए थे और पति किसी काम से बाहर गया था। उसके सास ससुर यानि मेरे चाचा-चाची पहले ही भगवान को प्यारे हो गए थे। जब मैं अन्दर गया तो वो टीवी देख रही थी। मैं जाकर बैड पर बैठ गया.. भाभी इस वक्त सोफे पर बैठी थी। मैं बैठ कर इधर-उधर की बातें करता रहा। कुछ देर बाद मैं भाभी से धीरे-धीरे सेक्सी बातें करने लगा और वो मेरी बातों का जवाब देती रही। मुझे वहां बैठे करीब एक घन्टा हो गया था। मैंने भाभी से नहाने वाले दिन की चर्चा करते हुए उसके सेक्सी शरीर की तारीफ़ की और उससे खुली फ्रेंडशिप करने का कहा.. लेकिन वो बार-बार ना में जवाब दे रही थी। लेकिन मना करते समय उसके मुस्कुराने से उसकी ‘ना’ में भी ‘हाँ’ दिख रही थी। फिर मैं बेड से उठा और भाभी के करीब जाकर उसके होंठों पर किस कर दिया.. लेकिन उसने मुझे अपने से दूर धकेल दिया। फिर मैंने उसे उठाया और बेड पर लिटा लिया और उसको किस करते-करते उसकी सलवार खोल कर नीचे सरका दी। इस दौरान वो मछली सी मचल तो रही थी, मगर चिल्ला नहीं रही थी। मैं एक हाथ से भाभी की नंगी चुत से खेलने लगा.. उसकी चुत पर एक भी बाल नहीं था। मैंने उसकी चुत में अपनी उंगली डाल दी और उंगली हिलाने लगा। ऐसे 10-15 मिनट चलता रहा.. लेकिन भाभी अपनी सलवार ऊपर खींच रही थी, ऐसा लग रहा था.. जैसे वो अभी तक पूरी तरह तैयार नहीं हुई थी। वो बार-बार कह रही थी- छोड़ दे मुझे.. कोई आ जाएगा, अगर तेरे भाई को पता चल गया तो वो मुझे घर से निकाल देगा। इसलिए उसके बार-बार कहने पर मैंने उसे छोड़ दिया और अपने घर चला गया। शाम को उसका फोन आया और वो मुझे समझाते हुए बोलने लगी- जो भी हुआ, वो अच्छा नहीं हुआ.. तुम्हें समझना चाहिए था कि हमारा रिश्ता क्या है। मैंने फिर फोन पर उससे माफी माँग ली। वो हँस दी और मुझसे बोली- मुझे तुमसे मिलना है.. सुबह के वक्त आ जाना, उस वक्त घर पर कोई नहीं होता। मैंने कहा- ठीक है। मैं समझ गया था कि भाभी को मेरा साथ पसंद आ गया था। अब मुझे भी सुबह का बेसब्री से इन्तजार था क्योंकि भाभी की चुदाई का मौका मिलना था। फिर सुबह उसका फोन आया कि आ जाओ.. घर कोई नहीं है। मैं उसके घर पहुँच गया। मैंने वहाँ देखा कि आज कुछ अलग ही नजारा था, भाभी पहले से तैयार होकर मेरा इन्तजार कर रही थी, मैं जाकर बैठ गया.. वो मेरे लिए चाय बना कर लाई और मुझसे चाय पीने को कहा। मैं चाय पीने लगा, तो उसने वही बात छेड़ दी और मुझसे बोली- अगर किसी को हमारे बारे में पता चल गया.. फिर क्या होगा? मैंने उसकी इच्छा समझते हुए कहा- भाभी किसी पता नहीं चलेगा। वो मेरे पास आकर बैठ गई और बोली- जो काम कल अधूरा छोड़ा था.. उसे पूरा नहीं करोगे? फिर क्या था.. मैं भाभी पर टूट पड़ा.. जैसे बॉर्डर पर फौजी दुश्मनों पर टूट पड़ते हैं। मैं भाभी के होंठों पर होंठ रखकर चूसने लगा और दोनों हाथों से उसकी चूचियों को मसलने लगा। धीरे-धीरे मैंने भाभी के सारे कपड़े उतार दिए, अब वो काले रंग की पेंटी ब्रा में थी। उसने भी मेरे सारे कपड़े उतार दिए। उसके मुँह से अजीब सी आवाजें निकल रही थीं। अब हम दोनों बिल्कुल नंगे हो गए थे। फिर भाभी ने मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया और कुल्फी जैसे चूसने लगी। थोड़ी देर में हम दोनों 69 की पोजीशन में हो गए। उसकी चुत से एक मस्त सी सुगंध आ रही थी। मैं उसकी चुत को चाट रहा था तो उसके मुँह से ‘उह.. उन्ह.. आह..’ की आवाजें आ रही थीं। कुछ ही पलों में उसकी चुत से रसधार मेरे मुँह में आ गई.. और मैं भाभी की चुत का सारा पानी पी गया। थोड़ी देर में मैं भी उसके मुँह झड़ गया लेकिन मेरा लंड अभी भी उसी पोजीशन में था क्योंकि आज मैंने दवा खा रखी थी। वो बोली- तुम्हारा लंड मेरे पति से काफी बड़ा है। मेरे लंड का साईज वास्तव में बहुत लम्बा और मोटा है। यह हिंदी सेक्स स्टोरी आप अन्तर्वासना सेक्स स्टोरीज डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं! वो बोली- जल्दी से मेरी आग बुझा दो। फिर मैंने उसकी टांगें ऊपर उठाईं और अपना लंड उसकी चुत पर रख कर एक ही झटके में पूरा लंड उसकी चुत में उतार दिया। एकदम से हुए मेरे इस प्रहार से वो चिल्ला उठी.. तो मैं रूक गया। फिर मैंने धीरे-धीरे हिलना शुरू किया, थोड़ी देर में वो मेरा साथ देने लगी। कुछ देर इसी तरह चोदने के बाद मैंने उसे घोड़ी बनाया और पीछे से उसकी चुत में लंड पेल दिया। लंड उसकी चुत में सटाक से घुसा तो उसके मुँह से बहुत तेज आवाज आई- ओह्ह.. मार दिया.. आह.. जरा धीरे.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… आह.. मजा आ गया..! कुछ ही देर की चुदाई में वो दो बार झड़ चुकी थी। मैं अपनी पूरी स्पीड से चोद रहा था। उसकी चुत भठ्ठी की तरह तप रही थी। अब मेरा भी होने वाला था, तो मैंने पूछा- पानी कहाँ निकालूं? वो बोली- अपना रस मेरी चुत की गहराई में डाल दो। मैंने पूरी ताकत से झटके लगाना शुरू कर दिए और एक ही झटके से चुत भर दी। मैं झड़ने के बाद उसके ऊपर ही लेट गया। बाद में हम दोनों ने कपड़े पहने और मैं अपने घर आ गया। अब जब कभी मौका मिलता है तो मैं भाभी की चुदाई करता हूँ।
चुत चुदाई की चाहत में उसने मुझे घर बुलाया

हैलो फ्रेंड्स, मैं पहली बार सेक्स स्टोरी लिख रहा हूँ! वैसे अजय राज मेरा रियल नाम नहीं है, कुछ दोस्त, खास कर महिला मित्र मुझे अजय और कुछ राज के नाम से भी संबोधित करती हैं। मैं अमदाबाद से हूँ.. मेरी हाइट 6 फुट है। मैं एक औसत और मजबूत शरीर का मालिक हूँ। मेरा औजार (लंड) कोई बहुत बड़ा नहीं है.. जैसे यहाँ के मेरे बाकी दोस्त लिखते हैं। मेरे औजार का साइज साधारण 6 इंच का ही है.. हाँ इसकी मोटाई जरूर औसत से कुछ ज्यादा है। मैं अपने लंड के आकार पर अभिमान नहीं करता.. लेकिन इतना जरूर कह सकता हूँ कि मैं किसी भी औरत को पूरी तरह से संतुष्ट कर सकता हूँ। ये तो सभी जानते हैं कि किसी भी औरत को संतुष्ट करने के लिए लंड का साइज नहीं.. चुत चोदने का तरीका प्रभावित करता है। अब आता हूँ इस कहानी की नायिका पर.. जिसका नाम निक्की है, जो एक मल्टीनेशनल कंपनी के सर्विस सेंटर में फ्रंट डेस्क पर काम करती थी। उस कम्पनी का ऑफिस उसके घर के करीब भी था। वैसे उसकी कंपनी मेरी क्लाइंट भी थी। वो मेरे कैरियर का शुरूआती दौर था.. जो मैंने सर्विस में रह कर शुरू किया था। मैं रेग्युलर सर्विस कॉल पर उस कम्पनी में जाता रहता था। इसी दौरान उससे मेरी दोस्ती हो गई। सब कुछ इतना आसान नहीं था.. क्योंकि वहाँ निक्की अकेली नहीं थी, उसकी एक और दोस्त भी थी.. जिसका नाम निम्मी था। वो किसी लड़के के साथ पहले से ही फंसी हुई थी। असली दिक्कत यहाँ से शुरू हुई। यह भी बोल सकते हैं या यूँ भी कह सकते हैं कि एक पर दूसरी फ्री की जुगाड़ थी। अब तो मेरा रोजाना का शेड्यूल कुछ ऐसा हो गया था कि जैसे मेरी एंट्री मेरे ऑफिस में होती कि तुरंत ऑफिस की रिंग बजती और ‘गुड मार्निंग’ ग्रीट करने के लिए निक्की मुझे कॉल करती। धीरे-धीरे यह स्माइली वाली ‘हाय.. हैलो..’ आगे चलकर एक अच्छी दोस्ती में तब्दील हो गई, उसके कॉल बढ़ने लगे और मैं अपनी आदत के मुताबिक तारीफ करता और कमेंट पास कर देता। एक दिन की बात है, जब मैं एक क्लाइंट की कॉल पर था, उसी वक्त उसका फोन आया- जब शाम को ऑफिस लौटो तो सीधा मेरे ऑफिस आना। मैंने सोचा कुछ प्राब्लम हुई होगी.. मैं और मेरा एक और सर्विस इंजीनियर उसके ऑफिस में चले गए। फ्रंट डेस्क पर निम्मी बैठी थी, सच में इस वक्त निम्मी एक सेक्सी माल लग रही थी। मैंने उससे निक्की के लिए पूछा तो वो उसे अन्दर से बुला कर लाई। आज तो निक्की भी बड़ी मस्त माल लग रही थी, उसे देखते ही मेरी नियत में खोट आ गई.. जो उसने भी भाँप लिया था। उसने निम्मी को अन्दर भेज दिया और मुझसे बोला- मुँह खोलो। जैसे ही मैंने मुँह खोला तो उसने मेरे मुँह में अपने हाथों से बनाया हुआ खजूर पाक डाल दिया और बोली- अब लो चख लो मेरे हाथों का स्वाद। मैं थोड़ा चौंक सा गया.. फिर मुझे ध्यान आया कि मेरे साथ एक और बंदा भी है। तो मैंने थोड़ा ठीक होते हुए ‘थैंक्स..’ बोला और मैं वहाँ से अपने ऑफिस के लिए निकल आया चूंकि हम दोनों का ऑफिस एक ही बिल्डिंग में है। शाम को ऑफिस से छूटने के बाद उससे फोन पर बात हुई और पता चला कि वो घर पर अकेली थी। क्योंकि उसका हस्बैंड टूर पर गया हुआ था। मुझे मौका अच्छा लगा तो मैंने बातों बातों बातों में कह दिया- अकेली हो तो कंपनी देने आ जाऊँ? इधर आप भी कह सकते हो कि मेरा नसीब अच्छा था तो उसने कह दिया- हाँ आ जाओ। मैंने उसका पूरा एड्रेस लिया, ऑफिस के दोस्तों से अलग हुआ और उसके घर पहुँच गया। उसके घर के दरवाज़े पर पहुँच कर मैंने घंटी का बटन दबाया और उसने दरवाजा खोल दिया। हाय.. क्या माल लग रही थी वो.. लंड एकदम से उछल कर खड़ा हो गया साला। अब मैं आपको उसकी कातिल फिगर के बारे में भी बता दूँ। निक्की एक 5’8″ लंबी अच्छे और भरे हुए शरीर की मालकिन है। उसके चूचों की साइज 34बी है.. 28 इंच की कमर और 36 इंच के उठे हुए हाहाकारी चूतड़.. कुल मिला कर वो पूरी मस्त फुलझड़ी थी। जब मैं उसके घर पहुँचा तो उसने सिल्क का गाउन पहना हुआ था.. गाउन लाइट पिंक शेड का था और उस गाउन में देख कर साफ़ लग रहा था कि पट्ठी ने अन्दर ब्रा नहीं पहनी है। अब जो बातें हमारे बीच हुईं.. वो मैं वैसे ही बयान कर रहा हूँ। मैं- क्या बात है.. बुलाया तो खाने पर है.. पर तुम तो क्या बिजली ढा रही हो.. कहीं नजर ना लग जाए। निक्की- अच्छा जी.. फिर शुरू हो गए.. चलो अन्दर आओ। मैं- क्या कोई खास बात है.. जो इस तरह कहर ढा रही हो, या कुछ और प्लान है या कोई आ रहा है? निक्की- नहीं यार.. बस ऐसे ही, तुम जो खाने पर कंपनी देने आ गए.. बस! मैं- तुम्हें ऐसे देख कर तो खाना छोड़ तुम्हें खाने का मन करने लगा है। निक्की- बहुत उछलो मत.. और बातें तो बाद में भी हो सकती हैं, तो चलो पहले खाना खा लेते हैं। मैं- ठीक है। उसको देख कर तो यह साफ लग रहा था कि वो पूरी तरह से चुदासी है। बस सही वक्त पर सही वार कर दिया.. तो आज तो मैं उसे बिना चोदे नहीं जाने वाला था। वो मौका उसने मुझे खाने के बाद दे भी दिया। मैं इतना तो जानता था कि वो मुझे कुछ हद तक पसंद करती है और वो प्यासी भी रहती है.. क्योंकि उसका रजिस्टर्ड लंड यानि हस्बैंड महीने में 20 दिन बाहर रहता था। खाना खत्म करके हम लोग बैठे और थोड़ी यहाँ-वहाँ की बातों में से ही एक टॉपिक निकला। जिस पर उसने मुझसे पूछा- तुम्हें राकेश पता है ना.. वो मेरे ऑफिस वाला..! मैं- हाँ.. जानता हूँ.. उसका क्या? निक्की- मैंने उसे एक दिन ए सी ठीक करने के लिए अपने घर बुलाया था। वो ए सी ठीक करने के बाद थोड़ा ऐसे ही बैठ गया.. और बदतमीज़ी करने लगा। मैं- बदतमीज़ी.. मतलब? निक्की- हाँ यार.. साला यहाँ वहाँ छूने लगा.. इससे मुझे गुस्सा आ गया.. तो मैंने उसे जाने को बोल दिया। मैं- अच्छा.. और मैं? मुझे तो तुमने कंपनी देने बुलाया है.. तो बोलो खाने की कंपनी तो दे दी और अब कौन सी दूँ? यह बोल कर मैंने उसकी जांघ पर हाथ रखा और उसकी पट सहलाने लगा। निक्की हँस कर बोली- तुम ना बड़े बदमाश हो.. और यह तुम क्या कर रहे हो? मैं- क्यों.. तुम्हें नहीं पता? शादीशुदा हो तो तुम्हें तो यह अच्छे से पता होना चाहिए ना। तेरे हस्बैंड ने कुछ नहीं किया क्या तुम्हारे साथ? ये बोल कर मैं हँस पड़ा और फिर बोला- तुम्हें सहला रहा था यार.. क्यों क्या तुमको अच्छा नहीं लगा? निक्की- नहीं यार ऐसा कुछ भी नहीं है। मैं- तो मतलब अच्छा लगा ना? निक्की- हम्म.. हाँ अच्छा लगा। अब मैं चाहता था कि वो थोड़ा गर्म हो तो मैंने उसका घर देखने की इच्छा जताई। वो मुझे अपने साथ घर दिखाने लगी, घर को देखते हुए हम दोनों उसके बेडरूम में पहुँच गए, हम दोनों उसके बेड पर बैठ कर बातें करने लगे। मैं हौले-हौले उसे कभी हाथों पर तो कभी जाँघों पर.. तो कभी पीठ पर सहलाने लगा। अब उसके भी अरमान जागने लगे, वो मेरे थोड़ा करीब आ कर बोली- क्या इरादा है? मैं- प्यार करने का इरादा है। यह मैंने अपनी आदत के मुताबिक कमेंटिंग करते हुए कहा और मेरा तीर बिल्कुल निशाने पर लगा। निक्की- तो करो.. मना किसने किया है? मैं- डरता हूँ.. कहीं राकेश की तरह घर से निकाल दिया तो कोई गारंटी है कुछ.. कि मुझे भी नहीं निकालोगी और नाराज भी नहीं हो जाओगी? निक्की ने मुझे प्यार से धकियाते हुए कहा- चुपचाप बिस्तर पर लेट जाओ और आँखें बंद कर लो.. बहुत बोलते हो। मैंने बिल्कुल वैसे ही किया और वो थोड़ी सी हवा में रह कर मेरे ऊपर आ गई और मेरे लबों पर एक प्यारी सी पप्पी जड़ दी। इससे मेरी आँखें खुल गईं। मैं- यह क्या था.. और यह कर रही हो? निक्की- गारंटी दे रही हूँ। यह कह कर वो मेरी आँखों में वासना भरी निगाहों से देखने लगी। दोस्तो, अब तक मेरा लंड बिल्कुल कड़ा हो गया था, मैंने थोड़ा उसे एड्जस्ट किया और निक्की को बांहों में ले लिया। उसके लबों से अपने लबों को मिला दिया और हम एक दूसरे के लबों को चूसने और थोड़ा सा काटने भी लगे। हम दोनों एक-दूसरे के मुँह में एक-दूसरे की जीभ डालते और जीभों को चूसने लगे। सच में बहुत मजा आ रहा था। इसी बीच मैंने उसका गाउन भी निकाल दिया, तो वो सिर्फ़ पेंटी में रह गई। जैसा कि मैंने सोचा था.. उसने ब्रा नहीं पहनी थी। उसने भी मेरी शर्ट खोल दी और निकाल दी। अब वो धीरे-धीरे नीचे की ओर आई और मेरे गले से होते हुए मेरे चौड़े सीने पर अपने लबों से अपनी मुहर लगाने लगी। साथ ही वो मेरी छाती की घुंडियों को भी अपने होंठों में दबाते हुए हौले से चूसने लगी। घुंडियों को दबाने से मुझे सुरसुराहट सी होने लगी। वो भी बीच-बीच में थोड़ा दांतों से मेरी घुंडियों को काट भी लेती.. जो मेरी उत्तेजना को काफ़ी बढ़ा देता। अब वो धीरे-धीरे और नीचे की ओर बढ़ने लगी। उसने मेरी पैंट की बेल्ट खोली और फिर पैंट खोल कर निकाल दी। मैंने भी अपनी टाँगों को उठा कर पैंट निकालने में साथ दिया। अब माहौल कुछ ऐसा था कि मैं सिर्फ़ अंडरवियर में था और वो पेंटी में थी। हम दोनों वासना की आग से झुलस कर एकदम चुदासे और मस्त हो गए थे। एक दूसरे को चूमने में कामाग्नि भड़कती ही जा रही थी। इसी के साथ मैं उसके मदमस्त भरे हुए चूचों को भी मसल रहा था। मैं उसके चूचों पर अकड़ दिखा रहे निप्पलों को भी बड़ी जोर से मरोड़ रहा था.. जिसकी वजह से वो आउट ऑफ कंट्रोल हो गई। मुझे जब तक कुछ समझ आता तब तक वो जोर-जोर से हाँफती हुए झड़ गई। मैंने मजाक करते हुए कहा- अभी तो सिर्फ़ शुरूआत हुई है रानी.. और तुमने हथियार डाल दिए? तो उसने कहा- एक बार हथियार गिरने से क्या होता है.. और तुमने किया ही कुछ इस तरह से.. कि मैं खुद को रोक नहीं पाई और इतने दिनों से प्यासी भी थी, सो झड़ गई। मैं- तो अब मेरा क्या होगा? ‘अब तुम्हारा मर्डर होगा राजा..’ उसने हँसते हुए मुझे लेटा दिया और अपना निप्पल मेरे मुँह में दे दिया। मैं बारी-बारी से उसके दोनों लाल निप्पलों को मस्ती से चूसे जा रहा था और साथ ही पेंटी के अन्दर हाथ डाल कर उसकी चुत में भी उंगली कर रहा था। उसने मुझसे विपरीत दिशा में घूमने को कहा। जैसे ही में 69 वाली पोज़िशन में आया.. तो उसने मेरा अंडरवियर निकाल दिया और मेरा लंड मुँह में ले लिया। मैंने भी देर ना करते हुए उसकी पेंटी उतार दी और उसकी चिकनी चुत मेरे मुँह के सामने सजी थी। उसकी चुत पर हल्की मगर बहुत ही पैनी झांटें थीं.. जैसे 2-3 दिन पहले ही साफ की गई हों। मैं अपने पूरे उफान पर था.. तो जल्द ही झड़ने के करीब हो गया था। अभी उसे कुछ चेताता कि अचानक से उसके मुँह में ही झड़ गया और उसने मेरा सारा पानी मुँह में ले लिया। जब मेरे लंड का सारा पानी निकल गया तो वो जल्दी से उठी और लंड के माल को बाथरूम में जा कर थूक आई। उसके हाथों के द्वारा थोड़ी देर सहलाने के बाद मेरा लंड फिर हरकत में आने लगा था। उसने अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए उसे पूरा कड़ा कर दिया। इसी बीच हम दोनों के मुँह से काफ़ी सीत्कारें भी निकल रही थीं। जब वो मेरा लंड चूस रही थी.. तो मैं कहे जा रहा था- आह.. और जोर से चूसो.. आह्ह.. और जी भर के चूसो इसे रानी.. वो भी साली किसी रंडी की तरह बोलने लगी- आज तो इसे नहीं छोड़ूँगी कमीने.. साले बहुत परेशान किया है.. तो आज तो तेरा और तेरे लंड का पूरा रस निचोड़ लूँगी.. आहह.. क्या मजा आ रहा है.. हुम्म.. आहह्ह.. फिर जब मेरा पूरी तरह से कड़ा हो गया तो उसने कहा- अब देर मत करो यार.. जल्दी से पेल दो। मुझे भी सही लगा। मैं जैसे ही उसकी टाँगों के बीच में आया.. तो उसने अपनी टांगें फैला दीं और मैंने उसकी चुत पर लंड सैट करके धक्का लगा दिया। वो कुछ कहती.. उससे पहले ही आधा लंड उसकी चुत में पेवस्त हो गया। लंड की धमक इतनी तेज थी कि उसके मुँह से हल्की सी चीख निकली- उई..ई..माँ.. मर गई.. भूतनी के भेनचोद.. मार दिया.. थोड़ा आराम से नहीं डाल सकता था क्या.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… कमीने चुत फाड़ दी साले.. आह्ह.. मैं- अगर आराम से करता.. तो तुम मुझे भूल जातीं.. अब यह चीख हमेशा तुम्हें मेरी और मेरे लंड की याद दिलाती रहेगी। यह कह कर मैंने एक और बार लंड बाहर खींचा और एक ही धक्के में पूरा लंड उसकी चुत में घुसेड़ दिया। इस बार वो फिर से जोर से चीख पड़ी ‘ओई.. भोसड़ी के मार डालेगा आज तो.. आहह.. उफ़.. उम्मह..’ वो चुत की तड़फ से खुद को थोड़ा एड्जस्ट करने लगी। कुछ देर बाद मुझे लगा कि अब सब सही हो गया है.. तो मैं उसकी चुत में धक्के मारने लगा। साथ ही उसके निप्पल अपने होंठों में दबा कर चूसने लगा। अब वो भी लंड का पूरा मजा ले रही थी, बेडरूम में सिर्फ़ तीन आवाज़ें थीं.. मेरी ‘आहह.. आहह..’ की और उसकी ‘उम्म्म आहह.. ऊहह.. यस यस.. फक मी.. हार्डर.. अह.. बहुत मजा आ रहा है.. और जोर से चोदो.. और जोर से.. और स्पीड से चोद दे..’ और तीसरी आवाज थी चुदाई की.. लंड और चुत के धक्कों से आने वाली ‘फॅक.. फॅक..’ की। हम दोनों की गरमागरम चुदाई पूरे जोश में चल रही थी। वो इतनी उत्तेजित हो गई थी कि उसने मेरी पीठ में अपने नाख़ून से कुछ निशान तक बना दिए थे। निक्की- और जोर से चोदो.. बड़ा मजा आ रहा है.. उन्न्ह्ह.. और जोर से उउउंम्म.. आहहहा.. यस यस.. कम ऑन हाँ.. बस ऐसे ही.. ओह्ह.. मार दिया.. और जोर से चोदो मेरे राजा.. आह्ह.. मैं- आहह.. ले.. खा ले मेरा लंड.. पूरा ख़ा ले साली कुतिया.. वो अब झड़ने के करीब थी और मैं भी चरम पर आने वाला था। मैंने उससे कहा- मैं कुछ ही देर में आ जाऊँगा.. तो कहाँ निकालूँ? निक्की- थोड़ा कंट्रोल करो ना.. मेरा भी हो रहहा है.. आह्ह.. सो मैंने थोड़ा सा अपनी भावनाओं पर काबू पाने की कोशिश की। मैं- पर यह तो बताओ कि निकालूँ कहाँ? निक्की- मेरे अन्दर छोड़ देना.. पूरे का पूरा अन्दर.. आह्ह.. और अब जोर से चोदो.. मैं बस आ रही हूँ। वो जोर से चीखी- आअहह.. जोर से चोदो.. मेरा निकलने वाला है.. अया आहहा ऊहह उउम्म्म्म.. तभी वो एकदम से अपने शरीर को ऐंठते हुए झड़ गई। उसके झड़ने के कुछ ही धक्कों बाद मैं भी उसकी चुत में ही झड़ गया। मैं तब तक उसके ऊपर पड़ा रहा.. जब तक मेरा लंड खुद सिकुड़ कर बाहर नहीं आ गया। उसके बाद थोड़ी देर हम लेटे रहे और फिर साथ में नहाने चले गए। बाथरूम में शावर के नीचे नहाते हुए मैंने उसको पीछे से झुका कर एक बार और चोद दिया। फिर हम दोनों नहा कर निकले और तैयार हो गए। हम दोनों के चेहरों पर पूरी संतुष्टि थी। वो बहुत दिनों के बाद हुई इस चुदाई से बहुत खुश थी। इसके बाद हम दोनों ने कई बार चुदाई की, ख़ासकर जब उसका हस्बैंड टूर पर गया होता.. तो हमारा खेल शुरू हो जाता। उसके बाद उसने मुझे निम्मी की चुत भी दिलाई। हम तीनों ने काफ़ी बार साथ में थ्री-सम सेक्स भी किया। वो सब मैं फिर कभी बताऊँगा।


Read More Related Stories
Thread:Views:
  चुदवा कर दीदी खुश 72,364
  बीवी को चुदवा कर खोया 34,817
  मैंने जीजू से चुदवा ही लिया 18,172
 
Return to Top indiansexstories