भाई का दर्द
नरेंद्र की शादी उसके गाव से लगभग 80 km दूर एक दूसरे गांव में सोनम नाम की लड़की के साथ हुई थी

शुरु से वह बहुत ही आवारा गर्दी करता रहता था नाही पढ़ाई लिखाई करता नाही कोई काम

सारा दिन वह अपने आवारा दोस्तो के साथ घूमता रहता था

शादी के बाद उसका और उसके पत्नी सोनम के बीच मे हमेशा झगड़ा होता था

चुकी उसको कोई काम भी नही आता था आवारा गर्दी के काराण शराब ,सिगरेट गांजा भांग सब चीजों की भी लत लगी हुई थी

उसको जब भी पैसा और मौका मिलता वह अपने दोस्तों के साथ नशा करने चला जाता

और गाँव मे जब भी मौका मिलता तो किसी भी लड़की को बहला फुशला कर चोद लेता।

एक दिन सोनम अपने कमरे में लेटी हुई आंखें मूंद कर पड़ी थी, नरेंद्र उस कमरे में आया और दो तीन बार सोनम को आवाज लगाई , सोनम ने जान बूझ कर उसकी बात का अनदेखा करते हुए आंख बन्द कर लेती थी , थोड़ी देर में उसने कनखियों से देखा तो नरेंद्र उसको शादी में मिले गहने को चुरा रहा था, जिसको उसने चुपके से देखा और चुप चाप उसकी हरकतों को देख रही थी।

नरेंद्र ने घर की आलमारी को धीरे से खोला और उसमें से सोनम की कान की बाली निकाली और चला गया

शाम को नरेंद्र के घर आने के बाद सोनम ने उससे पूछा।

सोनम : तुमने अलमीरा से कुछ निकाला है क्या? मेरी कान की एक बाली नही मिल रही है।

नरेंद्र : कल शाम तक तुम्ही तो पहनी हुई थी , और मैं सुबह से कमरे में भी नही आया, तुमने कही खो दी होगी,

सोनम सब जानते हुए भी नरेंद के मुह से सुन्ना चाहती थी कि वह क्या जवाब देता है।

कुछ दिनों तक नरेंद्र की ऐय्याशी का खर्चा उस कान की बाली को बेचने से चलता रहा लेकिन लगभग 10 दिनों के बाद उसके पैसे खत्म हो गए थे तो उसने फिर सोचा कि क्यूँ न दूसरी बाली भी बेच कर आगे का जुगाड़ कर ले।
वो जनता था कि दोपहर को सोनम घर के सारे काम खत्म कर के सोती है

अगले ही दोपहर नरेंद्र चुपके से अपने कमरे में घुसा , देखा तो सोनम सो रही थी। उसने तसल्ली के लिए सोनम को आवाज लगाई ,

सोना।।।।म सोना।।।।म, फिर उसने उसके कमर पर हाथ रख कर हिलाया डुलाया पर वो बिल्कुल नींद में थी।।

फिर उसने धीरे से तकिये के नीचे से अलमीरा की चाभी निकली और अलमीरा खोलने लगा ।

इधर सोनम जो अभी अभी ही सोई थी कच्ची नींद होने के कारण जाग गई थी पर जान बूझ कर सोने का नाटक कर रही थी।

वह नरेंद्र को रंगे हाथ पकड़ना चाहती थी.....

जैसे ही नरेंद्र ने अलमीरा से दूसरी कान की बाली निकली और अलमीरा बन्द किया सोनम झट से उठी और नरेंद्र के मुट्टी में कैद अपनी कान की बाली को मुट्ठी के ऊपर से पकर कर नरेंद्र को घूरने लगी।

नरेंद्र की चोरी अब पकड़ी जा चुकी थी,

सोनम: मैं जानती हूँ पिछले बार भी तुम ने ही मेरी बाली चुरा ली और आज तो हद कर दी है।

आज मैं नही छोरूँगी, छोरो मेरी कान की बाली को, मैं तुम्हे इस तरह मेरे जेवर बेच कर उड़ाने नही दूंगी,

नरेंद्र: देख सोनम हट जा मेरे रास्ते से वरना आज जान ले लूंगा तुम्हारी,
और उसने सोनम का हाथ झटक कर अलग कर लिया और जाने लगा

सोनम: ऐसे कैसे जाने दूंगी तू साला ऐयासी करते रहे वो भी मेरे गहने बेच कर ,
सोनम ने तेजी से नरेंद्र का टी-शर्ट पकर कर उसको खिंचा

सोनम के खीचने के कारण नरेंद्र का टी-शर्ट पीछे से चर्र ......... से फट गया।

एक तो चोरी पकड़ी गई उसका गुस्सा था ही साथ मे टी-शर्ट फटने पर नरेंद्र का गुस्सा सातवें आसमान पर चला गया

वह झट से कान की बाली को अपने पैकेट में रखा और पीछे मुड़ कर सोनम को सामने से पकड़ा

नरेंद्र: मादरचोद तू समझती क्या है अपने आप को, और उसने सोनम का ब्लाउज सामने से पकड़ कर एक जोड़ से ताकत लगा कर फाड़ दिया।

सोनम की साड़ी इस खीच तान में कब का उसके कंधे से नीचे गिर चुका था और ब्लाउज फटने के कारण अब उसकी हल्की पिंक कलर की ब्रा साफ नजर आ रही थी। आगे से उसके ब्रा के अंदर की कसी हुई चुचियाँ साफ दिखाई दे रही थी

नरेंद्र ने फिर से उसका ब्रा पकड़ कर उसके मुंह पर जोर दार तमाचा मारा। हट बहनचोद .....और उसके पेट पर लात मार कर सोनम को धकेल दिया

सोनम सीधे बेड पर जा गिरी और उसका सर बेड के किनारे की लकड़ी पर जोर से लगा और उसके सर से खून गिरने लगा।

नरेंद्र नशे की लत के कारण वह अंदर से खोखला हो गया था, लेकिन सोनम जवानी के सबसे ताकतवर चरण में थी।

वह झट से उठी और नरेंद्र की पेंट को पकड़ कर उसके एक पैकेट में हाथ डाल दिया , सोनम ने जिस पैकेट में हाथ डाला वो अंदर से फटा था जिसके कारण सोनम का हाथ नरेंद्र के लंड पर चला गया ।

सोनम ने दिमाग दौड़ाते हुए नरेंद्र के दोनों अंडकोष अपनी मुट्ठी में कैद कर के एक बार जोर से दबा दी,

नरेंद्र तिलमिला गया .............आआआ....आआ

सोनम : जल्दी से मेरी बाली दो वरना तुम्हारी सारी नशा फाड़ दूंगी। और एक बार फिर से उसके अंडकोष को दबा दिया।

नरेंद्र के पास कोई दूसरा चारा नही था , उसने एक हाथ से सोनम के हाथ को पकड़ा और दूसरे हाथ से अपनी दूसरी जेब मे हाथ लगा कर स
उसकी बाली वापस दे दी।

सोनम बाली लेकर बिस्तर पर बैठ गई और एक हाथ से अपने सर के बहते खून को रोक रही थी।

फिर भी खून ज्यादा बहने के कारण वह बेहोश होने लगी उसे चक्कर आने लगा

नरेंद्र पहले तो अपने अंडकोष को पकड़ कर उसे सहला रहा था कि उसे आराम मिल सके और जब उसे आराम मिला तो उसने सोनम की तरफ देखा और उसे चक्कर आता देख उठा और उसके पास गया।और उसको बेड पर धकेल कर लिटा दिया और उसके पैर के पास जाकर उसकी सारी को नीचे से खीच कर ऊपर की ओ सरका दिया और जल्दी से उसकी लाल रंग की पैंटी को खीचने लगा।

सोनम की हालत बहुत ही बद्दतर हो गई वो चक्कर के कारण कुछ भी करने में नाकाम थी पर जो नरेंद्र उसके साथ कर रहा था वो वह उसे सिर्फ अपने मन की शक्ति से बरी ही मुश्किल से देख और महसूस कर सकती थी

नरेंद्र : रंडी साली तू मेरा नशा फड़ेगी , देख कैसे मैं तेरा चूत फाडूंग , साली कुतिया।।


नरेंद्र ने सोनम की पैंटी खीच कर उसके चूत में दो उंगली डाल कर उसको उंगलियों से चोदने लगा।


सोनम के शरीर मे हुए इस हमले को वह सिर्फ महसूस कर सकती थी पर कुछ करने की हालत में नही थी।

नरेंद्र बहुत तेजी से उसके चूत में उंगली करने लगा और सोनम इस दर्द के कारण तड़प रही थी। उसने अब उसकी चूत में तीन उंगली गुसा दी और बहुत बेदर्द तरीके से उसके चूत में उंगलिया पेले जा रहा था ।
 


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