बस में दीदी की चुदाई
अपने परिवार की किसी सदस्य को नहीं चोद सकता है, पर कई बारे कुछ ऐसे मौके बन जाते है और फिर सब कुछ अपने आप हो जाता है. आज मैं आपको अपनी एक ऐसी ही कहानी लिख रहा हु, जो मेरी दीदी रुपाली की है, रुपाली दीदी मेरे से दो साल बड़ी है, और वो कम्पटीशन की तैयारी कर रही है और मैं कॉलेज के फर्स्ट ईयर में पढता हु.

मेरी कोई गर्ल फ्रेंड नहीं है, मेरा दोस्त विक्रम जो मुझे सब बात शेयर करता है, उसने एक बार मुझे पूछा था की यार रमन कल रात एक बहुत ही गलत बात हो गया है, मेरे और मेरी बहन के बिच में सेक्स रिश्ता कायम हो गया है, माँ पापा दोनों मामा जी के यहाँ गए थे, और कुछ ऐसा हुआ की दोनों में सम्बन्ध बन गया, मुझे बहुत ग्लानि हो रही है, तभी मैंने उसको समझाया था यार, ये बात तो गलत है मैं भी मान रहा हु, पर क्या करेगा अब जो हो गया सो हो गया. उस समय मैं दिन रात सोचता था की विक्रम कितना कमीना है, उसको चोदना भी था तो अपने ही बहन को, अरे कोई गर्लफ्रेंड पटा लेता या तो कोई कॉल गर्ल से काम चला लेता, फिर धीरे धीरे पटा नहीं क्या हो गया, अब मैं भी रुपाली दीदी को देखने लगा, जब वो कभी घर में झुकती तो मैं ऊपर से उनकी चूचियाँ देखने की कोशिश करता, और फिर जब चलती थी घर में तो मैं उनके चूतड़ को निहारते रहता था, कभी कभी उनके होठ को देखकर लगता था की कास मुझे एक किश दे देती होठ पे……… उसके बाद जब कभी कुछ ज्यादा देख लेता, कभी कपडे बदलते या तो रात में अस्त व्यस्त सोते हुए तो मैं तुरंत ही जाकर बाथरूम में या तो छत पर के रूम में मूठ मार लेता.

कई बार तो मैं रात में उनके नाम से ही मूठ मारा करता था पर एक दिन सब कुछ बदल गया वो रात की ही कहानी आपको सूना रहा हु. आज से तिन दिन पहले की बात है. दीदी को बैंक का एग्जाम देना था तो सेंटर दिल्ली के वसंत विहार में पड़ा था, हम लोग जोधपुर के रहने बाले है, ट्रैन में टिकट नहीं मिली थी तो माँ पापा बोले की एक दिन पहले ही चले जाओ, बस से, ऐसी बस में टिकट करवा देते है, दोनों आराम से चले जाना रात रात में ही पहुंच जाओगे दूसरे दिन आराम कर लेना और तीसरे दिन वापस आ जाना. हुआ भी वैसा ही, पापा जी एक एजेंट को फ़ोन किये और टिकट घर पे ही ला के दिया, हम दोनों की बस शाम को चार बजे थी. हम दोनों बस स्टैंड गए बस लगी थी, हम दोनों का ऊपर बाला स्लीपर था, आपने तो स्लीपर बस देखा होगा, हरेक कम्पार्टमेंट में दो लोगो को सोने की जगह होती है और पूरी प्राइवेसी होती है, आप अपना छोटा सा दरवाजा बंद कर ले, तो हम दोनों को ऊपर का कम्पार्टमेंट मिला था निचे एक गद्दा बिछा हुआ था, दीदी ने एक और अपने बेडशीट निकली और बिछा दी, बस चल पड़ी, मैं गाना सुन रहा था और वो पढ़ रही थी, फिर कुछ देर बाद हम दोनों बात चित करने लगे, जब नौ बज गया तो मम्मी ने पूरी और सव्जी बना कर दी वो खाये और फिर सो गए.
आपको तो पता है, घर से बाहर जाने के बाद सिचुएशन कुछ अलग हो जाता है, ऐसे घर में कभी भी दीदी के साथ नहीं सोता पर बस में हम दोनों को कुछ ऐसा लगा भी नहीं और दोनों सो गए. थोड़े देर बाद दीदी को नींद आ गई, फिर वो एक करवट ली और मेरे साइड घूम गई. जैसे वो घूमी उनकी चूचियाँ मेरे हाथ पर आ गई अब, मेरा लैंड खड़ा होने लगा, धीरे धीरे मैं भी सोने का नाटक करने लगा और उनके बूब्स को छूने लगा, धीरे धीरे जब भी कभी ब्रेकर आता उस समय मैं उनके बूब्स को दबा देता, ताकि उनको फिल नहीं हो की मैंने जान बूझकर किया है, मेरी नींद कहा दोस्तों, वो मस्त मस्त बूब्स को देखकर तो किसी की भी हालत खराब हो जाये. फिर क्या था मैं थोड़ा और भी नजदीक हो गया और फिर मैंने अपना एक टांग ऊपर चढ़ा दिया, और नींद का नाटक करते रहा, रुपाली दीदी भी कुछ नहीं बोली वो और भी मेरे में सट गई और फिर से नींद लेने लगी. उनकी गर्म गर्म साँसे मेरे फेस पे लग रहा था धीरे धीरे मैं अपना मुंह उनके मुंह के पास ले गया और मैं अपना होठ उनके होठ पे रख दिया. और पहले तो पांच मिनट कुछ भी नहीं किया और फिर मैं हौले हौले किश करने लगा. फिर मैं अपना हाथ उनके बूब्स पे रख दिया और सहलाने लगा.

उसके बाद मैं थोड़ा निचे गया लेगिंग के ऊपर से ही उनके चूत को सहलाने लगा. वो कभी कभी थोड़ा हिलती पर फिर चुपचाप सो जाती. मैंने हिम्मत कर के लेगिंग के निचे हाथ डाला, पर चूत का स्पर्श नहीं हुआ क्यों की वो टाइट स्किनी पेंटी पहनी थी, पेंटी के ऊपर से ही थोड़ा सहलाया पर मेरा लंड मुझे बार बार कह रहा था की यार देर मत कर देर मत कर, तभी दीदी जग गई. उस समय मेरा हाथ उनके पेंटी के अंदर था, वो उठ कर बैठ गई. और बोली, ये क्या कर रहे हो. शर्म है की नहीं तुमको, पता है कौन हु मैं, दीदी हु, बहन लगती हु, मैंने कहा दीदी मुझे कुछ भी नहीं पता, मैं क्या कर रहा था, मैंने नींद में था, मुझे कुछ भी नहीं याद आ रहा है, तभी दीदी बोली बदतमीज, मैंने कब से इंतज़ार कर रही थी की अब हटाओगे अब हटाओगे अपना हाथ, मैंने थोड़ा आँख खोल कर देख रही थी तुम जगे हुए थे.

दीदी बोली की ये सब बात मम्मी और पापा को बताउंगी. सच बताऊँ दोस्तों मैं डर गया, मैंने हिम्मत कर के बोल ठीक है कह देना पर तुम समझ लेना की तुम एक भाई को खो दोगी. मेरा या बात काम कर गया, थोड़े देर तक तो चुप रही फिर मुझे गले लगा ली, बोली ठीक है पर ये सब बात किसी से कहना नहीं. मैंने कहा किसी से मैं क्यों कहूंगा, दीदी बोली खैर जो भी कर रहा था मुझे भी अच्छा लग रहा था, पर ये सब घर पे नहीं चलेगा, जो करना है यही कर लो और बाकी दिल्ली में कर लेना, मैंने खुश हो गया, और फिर क्या था वो भी अपना बाह फैला दी और मैंने भी अपना बाह फैला दिया. और दोनों एक दूसरे से लिपट गए.

दीदी मेरे होठ को चूमने लगी और मैं भी दीदी के होठ को चूमने लगा धीरे धीरे मैं उनके चूचियों पे हाथ फेरने लगा. बस अपनी पूरी रफ़्तार में थी, उसके बाद दीदी लेट गई, और मैं उनके ऊपर चढ़ गया. मैं उनके करते को ऊपर से निकाल दिया, अंदर वो ब्लैक कलर की डिज़ाइनर ब्रा पहनी थी ओह्ह्ह्ह ज़िंदगी में पहली बार मुझे मौक़ा मिल रहा था. मैंने ऊपर से दबा रहा था तभी दीदी पीठ के तरफ हाथ करके अपना हुक खोल दी, तभी उनका दोनों बूब आज़ाद हो गया, और बस के साथ साथ उनकी दोनों चूचियाँ भी हिलोरे लेने लगा. मैंने टूट पड़ा उनके बदन पे, फिर मैंने उनकी निचे का लेगिंग खोल दिया और फिर ब्रा के ही मैचिंग उनका पेंटी था. ओह्ह्ह दोनों खोल दिया, और फिर मैं उनके दोनों पैर के बिच में बैठ कर उनके चूत को चाटने लगा. वो बार बार अंगड़ाई लेती और मेरे बाल पकड़कर अपने चूत में रगड़ने लगती. और उफ़ उफ़ उफ़ आह आह आह औच की आवाज निकलती.

मेरा लंड खड़ा हो गया था और अब मेरे बर्दास्त के बाहर था तो मैंने अपना लंड अपने दीदी के चूत के ऊपर रखा और पहले थोड़ा ऊपर से निचे रगड़ा, ओह्ह उनका तो पूरा शरीर अंगड़ाई ले रही थी. फिर क्या था मैंने घुसाने की कोशिश की पर चूत बहुत ही ज्यादा टाइट थे शायद वो पहले नहीं चुदी थी. मैंने फिर से कोशिश की पर पफिर छटक गया, दीदी बोली क्या कर रहे हो. फिर उन्होंने मेरा लंड पकड़ कर अपने चूत के छेद पर सेट किया, और मैंने एक धक्का लगाया, वो छटपटा गई. वो कहने लगी बाहर निकालो बाहर निकालो, बहुत दर्द हो रहा है. पर मैं शांत हो गया और उनके बूब को सहलाने लगा और होठ को छूने लगा. थोड़े देर बाद वो शांत हो गई और मैंने हौले हौले दो झटके दिए और मेरा पूरा लंड उनके चूत में समा गया, अब क्या था दोस्तों, मैंने उनके दोनों पैर को अपने कंधे पर रख लिया, और फिर जोर जोर से चोदने लगा, बस फुल स्पीड में चल रही थी. सारे लोग सो गए थे, और मैं अपने बहन को चोद रहा था, और वो अपने चुदाई का खूब मजा ले रही थी.

थोड़े देर बाद दीदी मेरे ऊपर आ गई और फिर लंड पकड़कर खुद अपने चूत पे सेट की और बैठ गई. मेरा पूरा लंड को वो अपने चूत में समा ली और वो ऊपर से चुदवाने लगी. वो अपना गांड उठा उठा के मेरा लंड अपने चूत में ले रही थी. और फिर मेरे ऊपर लेट गई और धक्के देने लगी. और फिर थोड़े देर बाद मैं झड़ने बाला था, मैंने कहा मेरा निकल रहा था निकल रहा है. दीदी तुरंत ही निचे हो गई और मेरे लंड को अपने मुंह में ले ली और ऊपर निचे करने लगी. मैंने तभी एक पिचकारी मारी और अपना सारा वीर्य उनके चूत में डाल दिया, दीदी मुझे किश की और बोली आई लव यू, मैंने भी कहा आई लव यू टू, और फिर दोनों कपडे पहन लिए, और एक दूसरे को पकड़ कर सो गए, दूसरे दिन दिल्ली पहुंच गए, वही करोलबाग में होटल लिए और फिर दिन भर चोदते और चुदवाते रहे. पापा जी का फ़ोन आ रहा था पूछ रहे थे क्या कर रहे हो उस समय दीदी कहती पढ़ रही हु, जब की वो मुझसे चुदवा रही थी. पर शाम होते होते उनके चूत में काफी दर्द होने लगा. काफी सूज भी गया था. शाम को उनके लिए दर्द की दबे और बच्चा नहीं ठहरने का भी टेबलेट लाया.

रात में जैसे ही उनके चूत में लंड डालने लगे, पर दर्द की वजह से मुझे बाहर निकालना पड़ा, फिर मैंने उनके गांड को सहलाना सुरु किया, उनका चूतड़ काफी उभरा हुआ और गदराया हुआ था. अब मैं उनके गांड के छेद को देख कर पगला गया, मैंने अपने ऊँगली में थूक लगाईं और गांड के अंदर डाल दिया, गांड भी काफी टाइट थे, फिर मैंने आपने लंड में थूक लगाया और उनके गांड में डाल दिया, अब रात में करीब ३ बार मैंने उनका गांड मारा, वो अपने बहन की चुदाई और गांड मारना कभी नहीं भूल सकता, आज ही हमलोग जोधपुर आये है. अभी तो उन्ही दो दिनों की याद करके मूठ मार रहा हु, अब देखो आगे होता है क्या.
 


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