बरसों की प्यास
दोस्तो, यह मेरी पहली कहानी है और मैं इसको अपनी दोस्त कविता की ज़ुबानी लिख रहा हूँ। अगर कोई ग़लती हो तो माफ़ करना पर अपने कम्मेंट्स ज़रूर भेजना क्यूँकि कविता जानना चाहती है कि आपको उसकी आप बीती कैसी लगी।
यह घटना क़रीब दस साल पुरानी है।

कविता एक बहुत सुंदर और आकर्षक औरत है जिसको देख कर कोई भी मर्द अपने लण्ड को उसकी चूत में पेलना चाहे।
कविता गोरे रंग की छरहरी औरत है जिसका बदन 36-28-30 की औसत का होगा, लाल होंठ, काली आँखें और लम्बे बालों में कविता किसी अप्सरा से कम सुंदर नहीं थी।

कविता की शादी को कई साल हो चुके थे और देखते ही देखते वो तीन बच्चों की माँ भी बन गई। उसके बाद ज़िंदगी बस कट रही थी क्यूँकि उसका दर्द समझने वाला उस घर में अब कोई भी नहीं था। पति अपनी आग बुझा कर सो जाता और कविता जलती रहती।
उसको इंतज़ार था उसका जो उसके दर्द को समझे और उसको वो सब सुख दे जिसके लिए वो बरसों से प्रतीक्षारत थी।

एक दिन उसकी मुलाक़ात उसके पति के भानजे मोहित से हुई। मोहित उससे 14 साल छोटा था पर क़द काठी में कविता के पति से बहुत मज़बूत।
मोहित का कविता के घर आना जाना बढ़ रहा था और कभी कभी वो कविता के घर रात को रुक भी जाता।

कविता ने कई बार यह महसूस किया था कि मोहित की नज़रों में उसके लिए कुछ ख़ास है। मोहित भी कविता को चाहने लगा था और अब वो इस इंतज़ार में था कि कब वो कविता से प्यार करेगा, कब उसका रसपान करेगा, कब उसकी आँखों से आँसू और मुँह से चीख़ें निकलवाएगा।

कभी कभी मोहित कविता को छूता, कभी अपनी कोहनी से कविता के चूचों को दबाता तो कभी उसके चूतडो को रगड़ता हुआ निकल जाता।
कविता समझ गई थी हो ना हो, यही उसको वो सब दे सकता था जिसकी उसको कब से तलाश थी।
धीरे धीरे दोनों में दोस्ती होने लगी।

एक दिन, बातों बातों में मोहित ने कविता के माथे पे एक पप्पी दे दी जिससे कविता के तन बदन की आग भड़क गई और अब वो इंतज़ार करने लगी कि कब मोहित अगला क़दम बढ़ाए और कविता को उसका प्यार मिले।
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कुछ दिन और बीते और फिर एक रात मोहित ने अपने होंठ कविता के होंठ पर रख दिए।
रात के 11 बजे थे, सर्दी का मौसम था और घर में बाक़ी सब सो चुके थे। कविता इस मौक़े के इंतज़ार में जाने कब से थी और उसने मौक़ा ना गँवाते हुए मोहित को अपनी बाहों में लेकर पागलों की तरह चूमना शुरू कर दिया।

जैसे ही कविता को अहसास हुआ कि घर में और लोग भी हैं और वो अपने कमरे में जाने को हुई, मोहित ने पूछा- फिर कब मिलोगी मेरी जान?
कविता- कोई आ गया तो बहुत परेशानी हो जाएगी, सही समय का इंतज़ार करो।

पर मोहित ऐसे नहीं मानने वाला था, उसने कविता के संतरो को अपनी हथेलियों में भर लिया और उनको निचोड़ने लगा।
कविता की कामग्नि भड़कने लगी और उसकी योनि गीली हो चली।
मोहित ने कविता की पैंटी में हाथ डालकर, अपनी उँगलियाँ उसकी चूत में डाल उसका चूत रस अपनी उँगलियों पर ले उसको चाटने लगा।

कविता ने ऐसा होते पहली बार देखा था और वो उत्तेजित हो रही थी पर उसने मोहित से जल्दी मिलने का वादा किया और अपने कमरे में सोने चली गई।

कुछ दिन बाद, कविता घर पर अकेली थी कि घर की घंटी बजी।
कविता ने दरवाज़ा खोला तो वहाँ मोहित खड़ा था।
घर में घुसते ही मोहित ने कविता को अपनी बाहों में भर लिया और चूमने लगा।

कविता ने लाल सूट पहना था और वो क़यामत ढा रही थी। मोहित कविता को अपनी गोद में उठा के कमरे में ले गया और कविता को पलंग पे लिटा दिया।
उसने एक भी पल बिना गँवाये कविता के कांपते होंठ चूसने शुरू किए और धीरे धीरे वो कविता के चूचों को सहलाने लगा।
कविता का कमीज ऊपर उठा कर उसने कविता की ब्रा से उसके बड़े बड़े चूचों को आज़ाद किया और उन पर किसी भूखे शेर की तरह टूट पड़ा। कविता के बड़े चूचों पे उसके गुलाबी से निप्पल चार चाँद लगा रहे थे।

मोहित ने कविता के निप्पलों को तब तक चूसा जब तक वो लाल नहीं हो गए और कविता की आँखों से आँसू नहीं बहने लगे।
कविता के होंठ काँप रहे थे पर उसने हिम्मत करके मोहित से कहा- यह तुम क्या कर रहे हो?
मोहित- तुम्हें अपनी बनाना चाहता हूँ मैं कविता, ना मत करो आज!
कविता- जल जाओगे मोहित, दूर रहो इस आग से!
मोहित- तो जला दो आज, मगर इन दो बदनों को एक होने दो।

मोहित यह कहते हुए कविता की चूत पर उसकी सलवार के ऊपर से हाथ फेर रहा था और वो जान गया था कि कविता की चूत पूरी गीली हो चुकी है।
मोहित की बातें सुनकर कविता अपनी आँखें बंद करके उसकी अगली आहट का इंतज़ार कर ही रही थी कि9 मोहित ने कविता की सलवार का नाड़ा खोल उसकी पैंटी में हाथ डाल दिया।

कविता काँप उठी पर इससे पहले वो कुछ कहती, मोहित की उँगलियाँ उसकी चूत के होंठों के बीच पहुँच चुकी थी।
मोहित ने देर ना करते हुए अपने कपड़े उतारे औरअपना लण्ड कविता के हाथों में पकड़ा दिया।

कविता इसके लिए तैयार नहीं थी पर उसको इस पल का जाने कब से इंतज़ार था। मोहित के 6 इंच लम्बे और 2 इंच मोटे, एकदम काले तगड़े लण्ड को देखकर कविता हैरान हो गई, उसका सुपारा देख कविता के रोंगटे डर से खड़े हो गए थे पर यहाँ से वापसी सम्भव नहीं थी।

मोहित कविता के ऊपर आ गया और उसने कविता को अपनी टाँगें खोलने को बोला।
कविता ने टाँगें खोली तो मोहित ने कविता को कहा कि वो लण्ड को अपने हाथ से अपनी चूत पर रखे।
कविता ने कांपते हाथों से मोहित के लण्ड को अपनी चूत पर रखा और अपनी आँखें बंद कर ली।

मोहित धीरे धीरे अपने लण्ड पे ज़ोर बढ़ाता जा रहा था और उसका लण्ड कविता की चूत की दीवारों को चीरता हुआ अंदर जगह बनाता जा रहा था। इतना लम्बा और मोटा लण्ड कविता पहली बार अपनी चूत में ले रही थी और इसलिए दर्द होना स्वाभाविक था। कविता की आँखों से सुख के आँसू बह रहे थे और होंठों से हल्की चीख़ें उसके आनंद को बयान कर रही थी।

मोहित का पूरा लण्ड कविता की चूत में उतर चुका था और अब मोहित धीरे धीरे धक्के लगाने लगा था, कविता भी मोहित के लण्ड के आकार से स्वाभाविक होकर आनन्द लेने लगी थी और नीचे से उसकी हर ठप का जवाब दे रही थी।
कविता की टाँगें हवा में लहरा रही थी और कविता मोहित के चेहरे को बेतहाशा चूम रही थी।
मोहित अपनी रफ़्तार बढ़ाता जा रहा था और कविता उसके हर वार का जवाब बराबर दे रही थी।

चूत चुदाई करते करते 15-20 मिनट हो चुके थे और कविता 3 बार झड़ चुकी थी पर मोहित रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था। मोहित पसीनो से नहा चुका था कि तभी कविता ने उसके सीने पे अपनी जीभ और पीठ पे अपनी उँगलियाँ चलाना शुरू किया।
देखते ही देखते मोहित का लावा बनने लगा, मोहित ने कविता को कहा कि वो बस छूटने वाला है तो कविता ने उसको अपनी चूत में ही छूटने को बोला और मोहित ने एक सैलाब की तरह कविता की चूत को अपने वीर्य रस से भर दिया।

कविता ने ज़िन्दगी में पहली बार इतनी लम्बी पारी खेली थी और वो जानती थी कि यह सिर्फ़ शुरुआत है।
मोहित कविता के ऊपर ही ढेर हो गया और जाने कब दोनों को नींद आ गई।

नींद खुली तो मोहित ने पाया कि कविता उसकी पलकों को अपनी जीभ से चाट रही थी और उसका खड़ा लण्ड कविता की चूत पर टक्कर मार रहा था।
पर अब बच्चों के घर आने का समय हो चुका था और कविता जानती थी कि एक बार शुरू होने पर मोहित को कम से कम एक घण्टा चाहिए शांत होने के लिए।
इसलिए कविता ने मोहित से वादा किया कि वो जल्दी ही कोई मौक़ा ढूँढेगी उन दोनों के अगले मिलन के लिए।
मोहित अपने ऑफ़िस चला गया, शाम को मिलने का वादा करके।

रात को सोने से पहले जब कविता मोहित को दूध देने आई तो मोहित ने कहा- मुझे ताज़ा दूध पीना है।
कविता- सब घर पे हैं, दिन में तुम्हारा मन नहीं भरा क्या?
मोहित- दूध पिए बिना मैं तुझे नहीं जाने दूँगा।

और इतना कहकर मोहित ने कविता को अपने कमरे में खींच लिया। मोहित ने कविता के चूचों को दबाना शुरू किया और एक चूचा बाहर निकाल कर चूसना शुरू कर दिया।
कविता मोहित और दीवार के बीच फँसी कोशिश कर रही थी छूटने की पर मोहित उससे ज़्यादा बलवान था, उसने कविता का चूचा चूसते चूसते उसकी सलवार खोल दी और अपना पजामा भी नीचे सरका दिया, कविता की टाँगों में टाँग डालकर मोहित ने उसको अपनी टाँगें खोलने का इशारा किया।

कविता समझ चुकी थी कि चुदाई किए बिना मोहित से बचके जाना उसके लिए सम्भव नहीं है तो उसने अपनी टाँगें खोल दी। उसने कभी इस आसन में चुदाई नहीं की थी और मोहित द्वारा उसके चूचे चूसे जाने से वो उत्साहित भी हो चुकी थी इसलिए वो चूदाई का भरपूर मज़ा लेने के लिए तैयार हो गई।

मोहित ने एक भी पल गँवाये बिना अपने लण्ड को कविता की चूत पर साधा और एक ज़ोरदार धक्का लगाया जिससे उसका पूरा लण्ड एक ही बार में कविता की चूत में घुस कर उसकी बच्चेदानी पर दस्तक देने लगा।
यह चोट इतनी ज़ोरदार थी कि कविता के मुँह से एक हिचकी निकली जिसको उसने अपने मुँह में ही दबा लिया।
मोहित धक्के पे धक्के लगा रहा था और कविता उसके और दीवार के बीच फँसी चुदाई का मज़ा ले रही थी।

लम्बी तूफ़ानी चुदाई के बाद मोहित ने कविता की चूत को अपने लावे से फिर भर दिया और कविता के होंठों की पप्पी लेकर उसको ‘आई लव यू’ कह कर अपना लण्ड उसकी चूत से बाहर निकाला तो उन दोनों के रसों का मिश्रण कविता की चूत से जाँघों पर होता हुआ ज़मीन पे टपकने लगा।

आज कविता को पहली बार पता चला था कि शारीरिक सुख, यौनानन्द किसे कहते हैं और उसको क्या मिला है। वो मोहित से बेपनाह मोहब्बत करने लगी थी और यही सोचते सोचते उसने अपने कपड़े ठीक किए और ज़मीन साफ़ करके, अपने कमरे की तरफ़ बढ़ गई।
 


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