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प्रोमोशन का आनन्द
11-22-2010, 06:26 AM
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प्रोमोशन का आनन्द
मैं देविका हूँ, उम्र 24 वर्ष और लम्बाई 5 फ़ुट 3 इन्च। मैंने अपने बॉब हेयर कट करवा रखे थे। मैं दुबली पतली पर आकर्षक लगने वाली युवती हूँ। मैं मुम्बई की एक निजी कम्पनी में पीए हूं। आईये आपको मैं बताती हूँ कि मुझे कम्पनी में कैसे प्रोमोशन मिला।

मेरी नौकरी के लिये जब इन्टरव्यू हुआ था तब कम्पनी का मालिक एक बुजुर्ग इन्सान था और उसने मेरी काबलियत पर मुझको रखा था। पर वो अब कम्पनी नहीं चलाते थे। उनका बेटा अंकित जो 28 वर्ष का था और उसका एक खास दोस्त रोहित, तो कम्पनी का पार्टनर भी था, कम्पनी का काम काज देखते थे। मुझे इस कम्पनी में काम करते हुए सात माह हो चुके थे.... मुझे अंकित और रोहित दोनों ही बहुत पसन्द थे। दोनों स्टाफ़ के साथ घुल मिल कर काम करते थे। समय समय पर रीसोर्ट में सभी को पार्टी देते थे और पिकनिक भी ले जाते थे। अंकित की नजरें शुरु से ही मुझ पर थी। मुझ पर, शायद खूबसूरत और मोडर्न टाईप की दिखने पर, लाईन मारता था। मैं उसकी लाईन को इज्जत से स्वीकार करती थी, और एक मतलबी मुस्कान बिखेर देती थी। मेरी अदाओं पर मर कर आखिर एक बार उसने मुझे अपने केबिन में बुला ही लिया....

"देविका.... तुम्हारा काम हमें बहुत पसन्द आया है.... रोहित चाहता है कि तुम्हारा प्रोमोशन हो और वेतन सात से बढ़ा कर बारह हज़ार कर दिया जाये।"

"आपका बहुत बहुत धन्यवाद सर.... मैं हमेशा आपकी आभारी रहूंगी सर....!" मैंने खुश हो कर अंकित से हाथ मिलाते हुए कहा।

"आप तो खुश हो गई ना .... अब हमें भी खुश कर दो...." अंकित मुस्करा कर बोला....और मेरा हाथ दबा दिया।

"जी....अभी पार्टी की तैयारी करती हूँ...." मैंने भी उनका हाथ दबाते हुए कहा।

'तो पहले बाबा को कॉफ़ी के लिये कहो....और मेरे निजी कमरे में आ जाओ...." अंकित ने आज्ञा देते हुए कहा। और उठ कर अपनी आराम करने के कमरे में चले गये.... कुछ ही देर में बाबा कॉफ़ी ले आया.... हम तीनो कॉफ़ी पीने लगे.... रोहित कॉफ़ी पी कर चला गया।

"देविका.... देखो प्रोमोशन को सेलेब्रेट करना चाहिये.... मेरे पास आ जाओ....!"

"जी.... पास क्या....कहां...." मैं थोड़ा सा हिचक गई।

"यहा....मेरे पास.... सोफ़े पर...."

"जी...." मैं जैसे ही सोफ़े पर बैठने को हुई.... अंकित ने मुझे खींच कर अपनी गोदी में बैठा लिया।

"यहाँ पर....आओ...." उसके अचानक इस हमले को मैं समझ नहीं पाई.... मैंने देखा कि वहां कोई नहीं था.... तो मैंने गोदी में बैठे रहना ही उचित समझा।

"सर....कोई देख लेगा...."मैं शर्माते हुए और उठते हुए बोली।

"देविका डरो मत.... यहां कोई नहीं आयेगा.... फिर मैं तुम्हें सच बताऊँ तो तुम मुझे बहुत ही अच्छी लगने लगी हो...."

"जी....आप ये क्या कह रहे हैं? मैं एक साधारण परिवार से हूँ और आप ...." मैंने अपनी मजबूरी दिखाई पर मन ही मन में मेरे लड्डू फ़ूट रहे थे.... कि अंकित ने लिफ़्ट तो दी.... मैं उसकी गोदी से उठने की नाकाम कोशिश करती रही।

"देविका....कुछ मत कहो.... बस प्यार की बातें करो.... तुम्हारी अदाएँ मुझे तुम्हारी तरफ़ खींचती हैं...." उसने अपनी गोदी में मुझे जकड़ते हुए कहा।

मेरे चूतड़ो के स्पर्श से उसका लण्ड खड़ा होने लगा था। लण्ड का कड़ापन का मुझे नीचे अहसास होने लगा था।

"सर.... सच आप मुझसे प्यार करते हैं...." मुझे पता था कि ये तो मुझे चोदने का एक बहाना है.... फिर भी मैंने भी अंकित की तरह ही बोलना शुरु कर दिया।

"हां ....सच देविका....तुम्हारा ये सेक्सी जिस्म .... तुम्हारे ये उभार लिये हुए सीना .... तुम्हारी कमर और ये मांसल जांघें.... मुझे दीवाना बना देता है....देखो मेरा नीचे क्या हाल है...."

"हाय अंकित .... आप कितने अच्छे हैं...."मैं भी अपना चेहरा उनके चेहरे के पास ले आई।

उसने धीरे से अपने होंठ मेरे होंठो से लगा दिये.... उसके हाथ मेरे सीने की ओर बढ़ चले.... कुछ ही क्षणों में उसके हाथ मेरी गोल गोल से उन्नत उरोज़ों को सहला रहे थे। उसका लण्ड मेरी गाण्ड में घुसने को तड़प रहा था, दरारों में अपनी जगह ढूंढ रहा था। मैं वासना में मदहोश होती जा रही थी। उसके होंठ मेरे होंठो को चूस रहे थे....बीच बीच में उसकी जीभ मेरे मुख के अन्दर भी जायजा लेती जा रही थी।

तभी रोहित भी आ गया...."अरे भई....ये क्या हो रहा है.... मैं जाऊ क्या?"

मैं एकदम से घबरा उठी। अंकित ने मुझे कस कर पकड़ रखा था।

"आओ....रोहित.... आज प्यार का मौसम है....इसलिये प्यार हो रहा है...." अंकित ने शरारत से कहा। और उसके सामने ने मेरे बोबे सहलाते हुए मसलने लगा।

मैं शरमा गई,"सर प्लीज....छोड़िये ना....!" मैं अपने आपको छुड़ाने लगी।

रोहित भी मुझे रंगीन नजरो से निहारने लगा," तो क्या हमारा नम्बर भी आयेगा.... प्यार करने में ....देविका जी....?"

"जी क्या कह रहे आप....मैं तो अंकित को प्यार करती हूं...."

"देविका जी....जरा रोहित को भी एक किस तो दे ही दो....प्लीज.... प्रोमोशन तो रोहित ने ही दिया है...." मुझे छोड़ते हुए अंकित ने कहा। मेरे उठते ही रोहित ने प्यार से मुझे अपनी तरफ़ खींच लिया। और मेरे होंठो को चूमने लगा। मुझे तरावट आने लगी....यहां तो एक छोड़ दो दो मिल रहे थे....रोहित ने अपना हाथ मेरे चूतड़ो पर रख कर दबा दिये.... उसके हाथ मेरे शरीर को सहलाते हुए बोबे को कभी चूत को मसल रहे थे।

तभी बाहर से एक कॉल आया.... अंकित उठ कर चला गया। रोहित ने मुझे छोड़ते हुए कहा,"जाओ अपने ऑर्डर ले आओ और शाम को हमारे साथ आपका होटल में डिनर है....घर पर बोल देना कि आपको रात में देर हो सकती है....!"

रोहित ने एक कागज पर कुछ लिखा.... मैंने बाहर आ कर बड़े बाबू को देखा....और उन्हें वो कागज दे दिया। कुछ ही देर में मेरे आदेश टाईप हो गये थे। ऑफ़िस में सबको पता चल गया था....सभी बधाई दे रहे थे.... मैंने पांच सौ रुपये अटेन्डेन्ट को मिठाई लाने के दिये.... कुछ ही देर में आदेश मेरे हाथ में थे। मेरा वेतन 12000 की जगह 15000 देख कर मैं विश्वास नहीं कर पाई। मैं अब उनकी पर्सनल एडवाईजर थी। मैंने तुरन्त फोन करके प्रोमोशन की घर पर सूचना दी। मैं अंकित से इजाजत ले कर घल चली आई। घर पर सब खुश थे.... मिठाईयां मंगाई गई....मुझे मेरे मम्मी पापा ने दुआएँ दी.... और खूब प्यार किया.... सबका प्यार देख कर मैं भी खुशी से बहुत रोई....।

शाम को ठीक 8 बजे मेरे घर के आगे उनकी कार खड़ी थी.... मैं सजधज के कार में बैठ गई। वहां जो होने वाला था उसकी शुरुआत तो ऑफ़िस में हो ही चुकी थी। मैंने अपने आप को इसके लिये पहले ही तैयार कर लिया था। घर पर मैंने अच्छी तरह से चूत की शेव कर ली थी....चूत में और गाण्ड की छेद में बढ़िया सी चिकनी क्रीम अन्दर तक मल ली थी। ब्यूटी पार्लर पर बाल ठीक करा कर और फ़ेशियल करा कर चेहरा और मुलायम कर लिया था।

गाड़ी एक शानदार होटल में रुकी.... शायद 5 स्टार होटल था। दरबान ने मुझे झुक कर सलाम किया और मेरे आगे आगे चला....और एक खाली चेम्बर में सोफ़े पर बैठा दिया। ये अंकित और रोहित का स्थाई बुक किया हुआ चेम्बर था। कुछ ही देर बाद एक अटेन्डेन्ट आया और मुझे लिफ़्ट से एक कमरे में लेगया। वहां अंकित और रोहित दोनों ही थे.... खाने टेबल लगी थी.... मेरे आते ही उन्होने मेरा स्वागत किया.... शायद रोहित को जल्दी थी....उसने आते ही मुझे लिपटा कर प्यार कर लिया।

"प्रोमोशन की बधाई स्वीकार करो .... !!" रोहित ने मुझे एक लिफ़ाफ़ा दिया। मैंने रोहित की तरफ़ प्रश्न भरी निगाहों से देखा।

"हां हां देख लो देविका...." रोहित मुस्कुराया।

मैंने लिफ़ाफ़ा देखा तो उसमें गोआ का फ़्री ट्रिप और तीन दिन की यात्रा थी। साथ में 25000 का एक चेक था खर्चे के लिये।

"और ये मेरी तरफ़ से है........" अंकित ने एक ओर लिफ़ाफ़ा दिया। ये कम्पनी की ओर से रहने के लिये एक बड़ा फ़र्निश्ड क्वार्टर था.... मैं तो जैसे स्वर्ग में पहुँच गई। मैं झूम उठी .... दोनों ने मुझे हवा में उठा लिया और मैं अंकित बाहों में झूल गई। मेरे कपड़े हवा में उछल गये.... कुछ ही देर में हम तीनों नंगे थे। उन दोनों ने शराब की बोतल उठा ली और तीन गिलास बना लिये। अंकित ने अपनी दूसरी पीए को फोन कर दिया कि घर पर सूचना दे दो कि घर दूर होने की वजह से देविका अपनी सहेली के यहा रात को रुक जायेगी इसलिये इंतज़ार नहीं करें।

जाम छलक उठे.... कमरे में वासना का नंगा नाच शुरू हो गया। मैं भी उनके साथ वासना में बह निकली....मस्त हो उठी। चूत गीली होने लगी.... मैं कभी एक की गोदी में तो कभी दूसरे की गोदी में उनके लण्ड पर बैठ कर मजे लेती रही। वो भी मेरे जिस्म से खेलने लगे। मेरे बोबे, मेरे चूतड़ों को, चूत को सहलाते और दबाते रहे। सरूर चढ़ता गया.... रोहित बिस्तर पर लेटा हुआ था....। उसका तन्नाया हुआ लण्ड देख कर मुझसे रहा नहीं गया और उछल कर उसके लन्ड पर बैठ गई।

मेरे चूत लपलापाने लगी....फ़ड़क उठी। लण्ड चूत में घुसेगा ये सोच के मैं तड़प उठी। मैंने अपनी चूत उठाई और निशाने पर रखी और दबा दिया लण्ड पर....लण्ड मेरी चूत में सरसराता हुआ घुस गया। मैंने अपने चूतड़ उठा कर ज्योंही धक्का मारा....कि पीछे से अंकित ने दोनों हाथों से मेरे चूतड़ थाम लिये....और बिस्तर पर चढ़ गया। मेरी गाण्ड उसके लण्ड का निशाना थी। मैं तो आनन्द से भर उठी कि मेरे दोनों छेदों में एक साथ लण्ड पिरोये जायेंगे।

अब मेरी चिकनी गाण्ड में पीछे से अंकित का लण्ड उतरने लग गया। मैंने अपनी गाण्ड में क्रीम लगा कर पहले ही तैयारी कर ली थी। बस अब तो मजा लेने की बारी थी। चूत में रोहित का लण्ड पहले से ही घुसा हुआ था। दोनों के बीच में मैं भिंच गई.... मेरी चुदने की इच्छा भी पूरी होने लगी। कहते है कि जिन्दगी में ऐसे मौके बहुत कम आते है जबकि दोनों छेद में दो व्यक्तियों के दो लण्ड एक साथ जायें और गांड और चूत दोनों चुद जाये। मेरी अच्छी तकदीर थी कि मुझे ऐसा मौका आज मिल गया।

दोनों ओर से लण्ड धक्के मार रहे थे मेरी चूत और गाण्ड दोनों चुद रही थी। डबल मजा.... रोहित नीचे से उछल उछल कर चोद रहा था और अंकित का मोटा लण्ड मेरी गाण्ड को मस्त किये दे रहा था। खास कर मुझे मजा यूं भी आ रहा था कि मेरी भी किस्मत खुल गई थी और मुझे मुम्बई जैसी जगह में एक बढ़िया मकान मिल गया था और एक गोआ के ट्रिप.... । जिससे चुदने को मेरी साथ की सहेलिया तड़पती रहती थी....उसी से आज मैं जी भर के एक तरफ़ नहीं बल्कि दोनों तरफ़ से चुदवा रही थी।

मेरा तन और मन आज खिल उठा था। जोरदार धक्के पर धक्के दोनों मार रहे थे.... मेरे मुख से सिसकारियाँ निकली जा रही थी.... मेरे बोबे अंकित बुरी तरह भींच रहा था.... मैं भी आखिर मजा कितना उठाती.... जिस्म ने साथ नहीं दिया और मेरा बदन जैसे बिजलियों से भर उठा और चूत कसकने लगी....

फिर

"रोहित.... प्लीज बस.... अब नहीं ....मैं गई....हाय...." मेरा जिस्म कांप उठा और मैंने रोहित को जकड़ लिया और मेरा पानी छूट पड़ा। मैं झड़ने लगी....इतने में रोहित ने भी वीर्य छोड़ दिया.... अंकित जरा दमदार था....टाईट गांड ने अभी तक लण्ड पेल रहा था....पर कुछ ही समय में उसकी पिचकारी भी निकल पड़ी.... मेरी चूत और गाण्ड दोनों ही वीर्य से भर चुकी थी। अब हम तीनों ही बिस्तर पर निढाल पड़े थे.... दोनों के लण्ड मुरझा चुका थे.... मैं भी चुद कर शान्त हो चुकी थी। उठ कर हमने अपने आप को ठीक किया। मैंने भी मेकअप ठीक किया फिर कुछ ही देर बाद हमने डिनर मंग़ा लिया। रोहित डिनर करके चला गया था.... खाना खा कर मैं फिर ताजा दम हो गई थी।

"अंकित....मेरे साथ गोआ कौन जायेगा...." मैंने अपने साथी के बारे में पूछा।

"ये तुम्हारी मर्ज़ी पर है कि अपने बॉय फ़्रेन्ड को ले जाओ या रोहित को या चाहो तो मुझे.... हम तुम्हारी पसन्द की इज्जत करेंगे...."

"जी मेरा तो बॉय फ़्रेन्ड नहीं है .... आप जैसा चाहे.... !" ये सुन कर अंकित खुश हो गया।

"फिर ठीक है....कोई तुम्हारी सहेली बताओ.... जो रोहित के लायक हो....उसे भी एक प्रोमोशन मिल जायेगा...." उसे मैं पसन्द आ गई थी अब वो शायद रोहित के लिये सोच रहा था।

"जी........" मैं खुशी से उछल पड़ी...."सर सुमन को प्रोमोशन दे दीजिए.... वो रोहित के सपने में खोई रहती है।" मेरे मुख से अचानक निकल पड़ा।

अंकित मेरे पर झुका जा रहा था। उसके कपड़े उतर चुके थे.... मैं भी अपने कपड़े उतार चुकी थी.... उसने मुझे चूमना चालू कर दिया था....मेरी चूत गीली होने लगी थी। अंकित मेरे ऊपर छा चुका था। उसका लण्ड मेरी चूत पर गड़ा जा रहा था। मेरी चूत के दोनों पट लन्ड ने खोल दिये और वह गहरी गुफ़ा में उतरने लगा.... मैं एक बार फिर से मस्ती में खोने लगी.... आनन्द में बहकने लगी....शरीर कसमसाने लगा.... और लण्ड चूत की तह में जा पहुंचा........अब अंकित ने मुझे अपनी बाहों में जकड़ लिया और धीरे धीरे उसकी कमर चलने लगी.... मैं सुख के सागर में गोते खाने लगी....

यह थी मेरी प्रोमोशन की दास्तान। मेरे बॉस ने मेरी दिल की इच्छा भी पूरी की और साथ में गिफ़्ट, प्रोमोशन और रहने एक बड़ा मकान भी दिया.... अब मुझे अपने बॉस को खुश करने का तरीका भी आ गया है.... आज मैं अपनी काबलियत के बल पर सीईओ के पद पर हूँ....ये काबलियत नहीं तो और क्या है? हां, पर मैं अपने साथ की सहेलियों का ध्यान भी रखती हूँ.... अगर वो बॉस के लिये कुछ मन में फ़न्तासी रखती है तो उसका रास्ता मैं निकाल देती हूँ.... इससे मेरा वेतन भी बढ़ जाता है....और स्टाफ़ में मेरी इज्ज्त भी बढ़ जाती है....

बस नुक्सान एक ही है....

जब कोई बिजनेस डील होती है तब हमें और मेरी प्रोमोटेड सहेलियो को उन सेठों के बीच में मीटिन्ग में आकर सेक्सी स्टाईल मारनी पड़ती है, फिर उनकी डिमांड पर उन्हें स्टाईल और नखरे दिखा कर घरेलू शरीफ़ औरत बन कर चुदना पड़ता है.... पर बदले में वो भी खासा पैसा भी इनाम में दे जाते हैं........

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