प्यासी दुल्हन
मैं अर्चना हूँ और यह तब की बात है जब मैं नई नई दुल्हन बनी थी। मेरी शादी को 3 महीने हो गए थे। मेरे पति राजीव मुझसे बहुत प्यार करते थे। उनके 6 इंची मोटे लंड का स्वाद मेरी चूत तीन महीने में सौ से ज्यादा बार चख चुकी थी। जब वो घर पर होते थे तो चूचियाँ कभी भी दब जाती थीं। रात को कंप्यूटर पर कई बार ब्लू फिल्म मुझे दिखा चुके थे।

एक दिन बातों बातों में मैंने पूछ लिया- क्या लंड इतने लम्बे लम्बे और मोटे भी होते हैं?

राजीव बोले- प्यारी, वैसे तो 5-7 इंची ही लम्बे होते हैं लेकिन कुछ के बहुत लम्बे और मोटे भी होते हैं मेरे दोस्त अतुल का लंड 9 इंची लम्बा है।

मैंने पूछ लिया- आपको कैसे पता?

हँसते हुए राजीव बोले- हम लोग एक ही हॉस्टल में रहते थे तो हम दोनों ने कई बार एक दूसरे की मुठ ब्लू फ़िल्में देखते हुए मारी थी।

बातें करते हुए उन्होंने मुझे नंगा कर दिया और बोले- तुम बात बहुत करती हो ! असल में लंड वही अच्छा होता है जो चूत की खुजली मिटा दे। चलो, अब घोड़ी बनो और चूत मारने दो।

मैं बोली- घोड़ी बनती हूँ लेकिन पहले आपके कपड़े तो उतार दूँ !

दो मिनट में मैंने उनका पजामा और बनियान उतार दी तो रोज़ की तरह उनका 6 इंची कड़क लंड मेरी आँखों के आगे था।मेरी आँखों में कामुक चमक आ गई थी। मैं बिस्तर पर घुटने रखकर घोड़ी बन गई, राजीव ने पीछे से मेरी चूत में उँगलियाँ घुसा कर घुमानी शुरू की और मेरी चूत के साथ साथ चूत के दाने को भी रगड़ने लगे।

मुझे लंड की प्यास लग रही थी, मुझसे रहा नहीं जा रहा था, मैं बोली- राजीव चोदो न ! बहुत खुजली हो रही है।

अपनी चिर परिचित आवाज़ के साथ राजीव बोले- रानी, अभी दोपहर में ही तो तुम्हारी चोदी है, इतनी पागल क्यों हो जाती हो?

इसके बाद उन्होंने अपने लंड को मेरी चूत में छुला दिया और मेरा सर पलंग पर लगा कर मेरी चूत में अपने लंड को घुसा दिया और चूचियों को पकड़ कर मुझे चोदने लगे।

आह ऊह ऊह की आवाज़ों से कमरा गूंजने लगा।

एक औरत जब अपने अच्छे पति से चुदती है तो उसके मन में कहीं न कहीं यह बात छुपी होती है कि यह उसका अपना लंड है इसलिए उसमें कोई हिचक नहीं होती और वो खुल कर लंड का मज़ा लेती है। मैं भी इस समय खुल कर चुद रही थी। कुछ देर बाद मेरा चूत रस बाहर आ गया। राजीव बहुत अच्छे चोदू हैं, दो बार तो मुझे झड़ा ही देते हैं।

फ़िर इन्होंने मुझे सीधा लिटा दिया और मेरी चूत में अपना लंड दुबारा पेल दिया मेरे गालों और चूचों को दबाते हुए मुझे चोदने लगे और मेरी चूत में इनका लंड दुबारा दौड़ने लगा। दस मिनट चुदने के बाद मैं दुबारा जब झड़ने को हुई तो इन्होने भी अपना रस मेरी चूत में छोड़ दिया। हम लोग एक दूसरे से चिपक गए। सच अद्भुत चरम आनन्द का अनुभव था, आपकी भाभी ने चुदाई का स्वर्गीय सुख ले लिया था।

रात को चुदने के बाद अच्छी नींद आती है, मैं और राजीव सो गए। सुबह 6 बजे ही राजीव के बॉस का फ़ोन आ गया कि ऑफिस 8 बजे जाना है। मैं उठ गई और 7 बजे तक नाश्ता तैयार कर दिया इसके बाद ऑफिस जाने से पहले रोज़ की तरह राजीव का लौड़ा उनकी पैंट की ज़िप खोलकर बाहर निकाला और उसे मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। वीर्य निकलने तक मैंने उनका लौड़ा पूरी मस्ती से चूसा और वीर्य पूरा अपने मुँह में गटक लिया।

इसके बाद राजीव ऑफिस चले गए।
शाम को राजीव जब वापस आए तो बोले- अर्चना, मुझे दो दिन बाद अमेरिका 6 महीने के लिए जाना है।

हम सब लोग जाने की तैयारी में लग गए। मेरे सास ससुर भी यह सुनकर देहली आ गए। सब लोगों के साथ दो दिन बड़ी जल्दी निकल गए और राजीव अमेरिका के लिए उड़ गए। मेरे सास-ससुर देहली मेरे पास रुक गए। दो दिन ठीकठाक कटे लेकिन तीसरे दिन रात को मेरी चूत बुरी तरह खुजियाने लगी, मुझे पता लगने लगा कि चूत की प्यास क्या होती है। उस समय मैं एक प्यासी दुल्हन थी जिसे सिर्फ इस समय एक लंड की चाहत थी। अमेरिका से उनसे 5-7 मिनट से ज्यादा रोज बात नहीं हो पाती थी। चैटिंग जरुर 1-2 घंटे रात को होती थी। लेकिन चूत की आग तो लंड से बुझती है। किसी तरह मैं रात को सो पाई।

अगले दिन राजीव रात को 12 बजे वेब केम पर थे। मैंने उन्हें बताया कि उनके पप्पू की याद मुझे कितनी आती है। पूरी रात हाथ चूत में घुसा रहता है। चूत की प्यास बुझ नहीं रही है।

राजीव बोले- रानी, मेरे लंड का भी बुरा हाल है, देखो तुम्हारी आवाज़ सुनकर पप्पू कैसा हिनहिना रहा है।

और उन्होंने अपना नेकर उतार दिया, उनका 6 इंची लंड कड़क, तना हुआ मेरे सामने था।

मुझसे रहा नहीं गया, मैंने कहा- राजीव, इसे मेरी चूत में डालो ना !

मैंने अपनी मेक्सी उतार दी, तब मैं पूरी नंगी थी। राजीव बोले- अर्चना, तुम्हारी गेंदें देखकर मुझसे रहा नहीं जा रहा है !

और वो लंड की मुठ मारने लगे, मुझे पुचकारते हुए बोले- अपनी रानी के दर्शन तो कराओ !

मैंने अपनी चूत चौड़ी कर ली और कैमरा अपनी चूत से कुछ दूर रख लिया। चूत रानी को राजीव निहारने लगे और उनका हाथ लंड पर जोरों से चलने लगा। दो प्यासे, बुद्धू बक्से पर चूत और लंड देखकर खुश होने की कोशिश कर रहे थे।

एक बजे लाइट चली गई। कंप्यूटर बंद हो गया। मेरी चूत गीली हो गई थी लेकिन उसकी प्यास नहीं बुझी थी। मैं रसोई में चाय बनाने चली गई।

लाइट दस मिनट बाद आ गई थी, राजीव ने फ़ोन कर के कहा- मैं अब ऑफिस जा रहा हूँ।

चाय पीने के बाद मैं जब मैं अपने कमरे की तरफ जा रही थी तो मुझे अपने सास-ससुर के कमरे से कुछ आवाजें सुनाई दीं। मैंने उनके कमरे में झांक कर देखा। पापा जी उठकर टीवी बंद कर रहे थे शायद मूवी ख़त्म हो गई थी। मेरी सास जो 45 साल के करीब थी, ने अपना ब्लाउज उतार दिया था, मोटी-मोटी, गोल-गोल थोड़ी लटकती हुई चूचियां सासु जी की बाहर थीं।

एक अंगड़ाई लेती हुई बोलीं- जब से बहू आई है, ठन्डे पड़ गए हो, पिछले तीन महीने में दो बार ही चोदा है, पहले तो हफ्ते में एक बार सवार हो ही जाते थे।

पापा जी ने मम्मीजी के गले में हाथ डालकर उनकी चूचियाँ अपने हाथों में पकड़ ली और उन्हें मसलते हुए बोले- रानी थोड़ी शादी की भाग दौड़ हो गई थी, अब तो मैं फ्री हूँ, अब हफ्ते में दो बार तेरी मुनिया को ठंडा किया करूँगा, नहीं तो तेरा भरोसा नहीं किसी और का घुसवा ले ! अभी तो तू जवान है।
सासु की चूचियां और निप्पल मसल मसल के पापाजी ने खड़े कर दिए थे। मेरा मन किया कि मैं वहाँ से हट जाऊँ। अपने पति से तो मरवाने का हर औरत को अधिकार है। लेकिन मेरे मन मैं एक चोर था, मैं पापाजी का लंड देखना चाह रही थी। पापाजी ने अपने कपड़े उतार दिए थे और अब सिर्फ एक अंडरवीयर उनके बदन पर था। मम्मीजी उर्फ़ मेरी सासु ने अपना पेटीकोट उतार दिया था और वो पूरी नंगी हो चुकी थीं लेकिन मुझे उनकी चूत दिख नहीं रही थी। मेरी आँख दरवाज़े की झिरी पर थी और हाथ अपनी चूत के ऊपर था।

अगला पल मेरे लिए कभी न भूलने वाला था, सासु माँ ने पापाजी की चड्डी उतार दी और उनका लंड अपने हाथ में लेकर सहला रहीं थीं। थोड़ी देर में उन्होंने उसे मुँह में ले लिया और चूसने लगीं। चूसने के बाद जब ससुर का लंड बाहर निकला तो टनाटन कड़क 6 इंच का हो रहा था। बिल्कुल राजीव के लंड जैसा था। मेरी चूत गर्म भट्टी हो रही थी, मन कर रहा था कि पापाजी लंड मेरी चूत में डाल दें।

मैंने अपनी मेक्सी उतार दी थी और अपनी उंगलियाँ चूत में घुसा लीं थीं। सास ने 5 मिनट तक ससुर जी के लौड़े की चुसाई और चटाई की। उसके बाद पापाजी ने उन्हें बिस्तर पर लिटा दिया, मम्मीजी ने दोनों टांगें फ़ैला दीं थीं। पापाजी कोंडोम लेने अलमारी की तरफ चले गए. सासु माँ की चिकनी चमचमाती चूत मेरी आँखों के सामने थी। उस पर एक भी बाल नहीं था आज ही शेव की हुई लग रही थी।

पापाजी ने अपने लंड पर कोंडोम लगाया और और सास को तिरछा कर के उनकी चूत में पेल दिया। सासु माँ की आह ऊह निकलने लगी जो बाहर तक आ रही थी, पापाजी का लोड़ा चूत में दौड़ रहा था, सास का मुँह मेरी तरफ था उनकी चूचियों की मसलाई और चूत की चुदाई साफ़ दिख रही थी, सास मज़े ले लेकर चुद रही थी और बहु मुठ मार रही थी।

पापाजी अच्छे चोदू थे, 5 मिनट तक उन्होंने सासु माँ की चूत चोदी, उसके बाद उन्होंने सासु को घोड़ी बना दिया।

कुतिया सास बोली- आज गांड का सुख दे दो, मुझे बड़ा मज़ा आता है गांड मरवाने में।

अगले पल जो था वो मेरे लिए नई चीज़ थी !

ससुर ने लंड मम्मीजी की गांड में डाल दिया था, मुझे लंड गांड में घुसता हुआ नहीं दिखा लेकिन उनके आसन से यह साफ़ था कि लंड गांड में ही घुसा है।

ऊपर से सास चिल्ला रही थी- कुत्ते, गांड फाड़ दी ! वाह वाह ! क्या मज़ा दिया है।

सास की गांड मारी जा रही थी और मेरी चूत रो रो कर गीली हो रही थी।

दस मिनट यह खेल चला होगा, उसके बाद पापाजी बोले- मैं यह कोंडोम बाहर डाल कर आता हूँ !और वो दरवाज़े की तरफ आ गए मैं अपनी मेक्सी उठाकर नंगी ही अपने कमरे में दौड़ ली।

दस दिन बाद - मेरा बैंक का पेपर लखनऊ में था। मेरी कोई तैयारी नहीं थी। मैं घर मैं बोर हो रही थी, मैंने सासु मां से कहा- मैं पेपर दे आती हूँ।

सासु ने हाँ भर दी, सासु माँ बोली- तू अमित के घर कानपुर चली जाना, वहाँ से वो लखनऊ पेपर दिला लाएगा। उसकी मकान मालकिन बहुत अच्छी है, तेरी कम्पनी भी हो जाएगी, चाहे तो 6-7 दिन रुक भी आना।

अमित सासु की बहन का लड़का था और कानपूर मैं नौकरी करता था। देवर के यहाँ जाने की बात सुनकर मेरी चूत चुलबुली हो गई। मन ही मन ख़ुशी भी हो रही थी।
मैं गुरुवार को शताब्दी से कानपुर जा रही थी। मेरा पेपर रविवार को था। अमित बीच में देहली आया था, 3-4 दिन रुका था तो हम लोग आपस में थोड़ा खुल गए थे। उसने मुझे नॉन वेज जोक भी सुनाए थे और सेक्सी बातें भी की थीं। अब मेरे मन के किसी कोने मैं उसके साथ मस्ती करने का मन कर रहा था, आज मंगलवार था। अभी जाने में एक दिन बीच में था। बुधवार को मैंने अपनी चूत के बाल साफ़ किये और ब्यूटी पार्लर मैं जाकर अपना बदन चिकना करवाया। रात को सामन रखते समय दो जोड़ी सेक्सी ब्रा-पैंटी और मेक्सी जिनसे पूरी चूचियाँ और चूत चमकती थीं जाने के लिए रख लीं। दो छोटी स्कर्ट और 2-3 लो-कट ब्लाउज भी रखे।

रात को अमित का फ़ोन 9 बजे आया, मुझसे बोला- और भाभी कैसी हो?

मैंने कहा- अच्छी हूँ ! भाभी के स्वागत की तैयारी कर लेना।

हँसते हुए बोला- मैंने तो कर ली है। तुम क्या तोहफ़ा ला रही हो मेरे लिए।

मुस्कराते हुए बोली- दो संतरे ला रही हूँ।

देवर हँसते हुए बोला- चूस चूस कर खाऊँगा, जल्दी लेकर आओ।

अमित बोला- कल मुर्गा खाओगी या आराम से दो दिन बाद खाओगी?

मैं हँसते हुए बोली- मुझे मुर्गे की आवाज़ आ रही है। कुँकङु कूं कुँकङु कूं बोल रहा है। अभी इसे सुला दो आकर बताउंगी की कब खाना है।

फ़ोन पर बातें करने के बाद मैं अपनी चूत सहलाती हुई सो गई।

अगले दिन मैं शताब्दी से कानपुर पहुँच गई, अमित मुझे लेने आया था, उतरते ही उसने मुझे गले लगाया और बोला- घर पर अच्छी तरह से गले मिलूँगा, मुझे आप से मिलकर बहुत ख़ुशी हो रही है।

मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और हम लोग बाहर आ गए। अमित की बाइक से हम उसके घर पहुँच गए। वहाँ उसकी 35 साल की मकान मालकिन रजनी ने मेरा स्वागत किया और हम लोगों के लिए चाय-नाश्ता ले आई।

हम सभी ने चाय पी, इसके बाद रजनी बोली- जाकर फ्रेश हो लो जब तक मैं बच्चों को देख लेती हूँ। आज रात को मेरे साथ सोना, इस नालायक का भरोसा नहीं, रात को सोने भी न दे।

मैं अमित के साथ उसके ऊपर वाले किराए के टू-रूम सेट में आ गई। कमरे की एंट्री बाहर और अंदर दोनों तरफ से थी। पहला कमरा बहुत छोटा था उसमें 4 कुर्सी, मेज और एक तखत था, अंदर का कमरा काफी साफ़ सुथरा और बड़ा था उसमें एक बड़ा पलंग पड़ा था, छोटी सी किचन और एक बाथरूम कमरे से जुड़ा था।
शाम के 4 बज रहे थे।

कमरे में घुसकर मैंने कमरा बंद कर लिया। अमित बोला- भाभी, मैं बाहर के कमरे मैं बैठता हूँ, आप अंदर फ्रेश हो लो।

मैंने कामुक अंगड़ाई ली और बोली- बाहर क्यों बैठते हो? अंदर आ जाओ। इतना शरमाओगे तो 5-6 दिन कैसे काटेंगे।

अमित और मैं अंदर वाले कमरे में आ गए। मैंने मुस्कराते हुआ कहा- सुबह से साड़ी लपेटी हुई है, अब कुछ हल्का हो लेती हूँ !

और मैंने अपनी साड़ी अमित के सामने उतार दी मेरी तनी हुई चूचियां अमित को ललचा रही थीं। पेटीकोट थोड़ा ठीक करते हुए मैंने नाभि के नीचे सरका दिया। मैंने अपनी बाहें फ़ैलाते हुए कहा- गले तो मिल लो !

अमित एक पुतले की तरह मेरी बाँहों में आ गया मैंने उसे कस कर चिपका लिया, अब मेरी चूचियाँ उसके सीने से दब रही थीं, अमित के लंड का उभार मैं अपनी नाभि पर महसूस कर रही थी। मैंने उसे 5 मिनट तक अपने से चिपके रखा और उसके गालों को कस कर चूम लिया। यह हमारा पहला सेक्स अनुभव था।

उसके बाद मैं बाथरूम में चली गई, मैंने अपनी चड्डी और ब्रा उतार दी और ब्लाउज दुबारा से पहन लिया। बाहर आकर अमित को दिखाती हुई बोली- इन्हें उतार कर बड़ा आराम लग रहा है।

अब मेरे बदन पर ब्लाउज और पेटीकोट था। बिस्तर पर अमित को बैठाकर मैं उसकी गोद में लेट गई और अपने चिकने पेट पर उसका हाथ रख लिया। अमित मेरी नाभि और पेट को सहलाने लगा।उसका मन मेरे दूध दबाने का कर रहा था लेकिन वो इसकी हिम्मत नहीं कर पा रहा था, मैं अंदर ही अंदर मुस्करा रही थी। मैंने 2 मिनट बाद अमित के गले में हाथ डालकर उसके होंटों को 2-3 बार चूमा और बोली- यह प्यार अब तुम्हें पूरे हफ्ते मिलेगा।

दस मिनट हम बात करते रहे। इसके बाद मैं उसे उठाकर उठ गई। मैंने अपना एक सलवार-कुरता निकाल लिया। बाथरूम अंदर से बहुत छोटा था और उसमें टांगने के लिए कुछ नहीं था। मैं अंदर सिर्फ अमित की टॉवेल लेकर चली गई और अमित से बोली- जब मांगूं तो केवल मेरा कुरता दे देना वो भी आँखें बंद करके।

मैंने बाथरूम मैं अपना ब्लाउज और पेटीकोट उतार दिया अब मैं पूरी नंगी थी। अमित के साथ मस्ताने से मेरी चूत गीली हो रही थी। मैंने उँगलियों से ही अपनी चूत को शांत कर लिया। यह तो कुछ देर की ही शांति थी दोस्तो, असल में लंड खाई चूत लंड से ही शांत होती है।
उसके बाद मैं नहा ली। अमित का तौलिया बहुत छोटा था, चूत ढकती तो चूचियाँ खुली रहतीं और चूची ढकती तो चूत खुली रहती। मैंने तौलिया अपनी कमर पर बाँध लिया और स्तन खुले छोड़ दिए। दरवाज़ा खोल कर बहार झाँका तो अमित टीवी देख रहा था, मैंने जानबूझ कर बाहर निकल कर अमित को आवाज़ दी, अमित तुम सुन नहीं रहे हो, मेरी कुर्ती दो न।

अमित ने मुड़कर देखा तो मेरी नंगी चूचियाँ और भरी भरी चिकनी जांघें देखता ही रह गया। अमित ने मुझे कुरता दे दिया, मैंने चूचियाँ कुरते से ढक लीं और मुस्कराती हुई मुड़कर बाथरूम में आकर कुरता पहना, कुरता सिर्फ मेरी जांघें ढक रहा था। जैसे ही मैं दरवाज़े से बाहर निकली, मैं चौंक गई, अमित अपने लंड की मुठ मार रहा था। उसने मुझे नहीं देखा, मैं बाथरूम के दरवाज़े के पीछे छुपकर अमित का लंड देखने लगी।

वाह ! क्या मोटा लंड था, मेरे पति से थोडा लम्बा ही लग रहा था, मन किया दौड़ कर मुँह में ले लूं और एक महीने से तड़प रही चूत में डलवा लूँ। दो मिनट बाद मैंने दरवाज़ा आवाज़ करके खोला तो अमित ने लंड जींस में डाल लिया और अपनी जींस ऊपर चढ़ा ली। इसके बाद मैं बाहर आ गई।

मैं कुरता पहन कर बाहर आई तो मेरी गुदाज़ जांघें और चूचियाँ अमित घूर घूर कर देख रहा था। मैंने अमित को आँख मारी और बोली- ऐसे क्या देख रहे हो? मेरी पजामी दो न। अमित ने हड़बड़ाते हुए मेरी पजामी मुझे दे दी। अमित के सामने ही मैंने अपनी पज़मी चूत छुपाते हुए ऊपर चढ़ा ली लेकिन अपनी गुदाज़ जांघें पूरी खोलकर अमित को दिखलाईं। अमित ललचाई नज़रों से मेरा बदन देख रहा था।

अमित को देखकर मैं मुस्कराई और शीशे के सामने जाकर खड़ी हो गई। शीशे में अपने को देखकर मैं चकित रह गई, मेरे गोल-गोल गीले स्तन और चुचूक कुरते में से बिल्कुल साफ़ दिख रहे थे। मैं समझ गई कि अमित इतना घूर घूर कर चूचियाँ क्यों देख रहा है, अगर मेरे पति इतना देख लेते तो मुझे अब तक नंगा करके मेरी चूत में लंड डाल चुके होते।

अमित को मैंने आवाज़ लगाई और बोली- अमित, इधर आओ !

अमित मेरे पीछे आकर खड़ा हो गया।
"अपनी भाभी को एक मीठी पप्पी दे दो न !" मैंने उसके हाथ पकड़ कर अपनी कमर मैं डलवा लिए।

अमित गर्म था, उसने पूरा अपना लोड़ा मेरी गांड की दरार से छुलाते हुए मेरे गालों पर एक पप्पी दे दी और हटने लगा।

मैंने उसे प्यार से डांटा- इतना क्यों शर्मा रहे हो? चिपके रहो न ! अच्छा लग रहा है। अच्छा इधर कान में यह बताओ कि जब मैं बाहर आई थी तो मुझे घूर घूर कर क्या देख रहे थे?

अमित झेंपते हुए बोला- कुछ नहीं।

मैंने धीरे से कहा- हूँ, झूठ बोलते हो? सच सच बताओ, अभी तो 5 दिन साथ रहना है।

अमित धीरे से बोला- आपके दूध देख रहा था !

मैंने शीशे में देखते हुए कहा- ऊह ! ये तो पूरे नंगे दिख रहे हैं। तुम तो बहुत शैतान हो।

मेरी बातों से अमित पूरा गर्म हो रहा था, उसने मेरी चूचियाँ पीछे से दबाने की कोशिश की लेकिन मैंने उसका हाथ कमर पर रख दिया और बोली- थोड़ा रुक जाओ ! सारे मज़े आज ही ले लोगे क्या? अच्छा अमित। यह बताओ मेरी चूचियाँ कैसी लगीं?

अमित बोला- भाभी, बहुत सुन्दर हैं, चूसने का मन कर रहा है।

हँसती हुई मैं बोली- चूस लेना लेकिन पहले एक रसीला चुम्बन होटों पर दे दो !

और मुड़कर मैंने उसे बाँहों में भरा और उसके होंठ अपने होटों में दबाकर दो मिनट तक उसके होंट चूसे। अमित के लंड का उभार मैं अपने पेट पर महसूस कर रही थी, मेरी चूचियाँ अमित के सीने से दबी हुई थी।

मैंने कहा- चूची चूसनी है?

अमित बोला- चुसवाओ न !

मैंने अपना कुरता ऊपर उठाया और बोली- सिर्फ एक-एक बार दोनों चुचूक चूस लो और काटना नहीं। मेरे दोनों चूतड़ों को दबाते हुए अमित ने दोनों चुचूक एक एक करके मुँह में लिए और लॉलीपोप की तरह एक एक बार चूसे।

इस बीच अमित झड़ गया। मेरी बुर भी पूरी गीली हो गई थी, मेरा देवर के साथ यह पहला सुंदर कामुक अनुभव था। अब हम दोनों अलग हो गए। मैंने हल्का सा शृंगार किया और कुरते पर चुन्नी डालकर नीचे आ गई।

रात के सात बज रहे थे, भाभी के साथ मैंने खाना बनाया, भाईसाहब टूर पर थे, भाभी ने बताया- मेरे साहब महीने में 10-12 दिन बाहर रहते हैं।

हम सब लोग 9 बजे तक खाना खाकर फ्री हो गए। इसके बाद 10 बजे तक हम गप्पें मारते रहे।

दस बजे भाभी बोली- चलो अर्चना, अब हम सोते हैं।

मैं और भाभी सोने वाले कमरे में आ गए, अमित ऊपर चला गया, दोनों बच्चे अपने कमरे में चले गए। मैं और भाभी एक घंटा बातें करते रहे।

इसके बाद भाभी बोलीं- सो जाते हैं।

मैंने भाभी से कहा- भाभी, मेक्सी तो ऊपर है, अमित तो सो गया होगा।
भाभी हँसते हुए बोली- जब मैं अकेली होती हूँ तो कई बार नंगी ही सो जाती हूँ। ऐसा करते हैं, हम दोनों दरवाज़ा बंद करके नंगी ही सो जाती हैं। बच्चों के उठने से पहले मैं जाग जाती हूँ, तुम्हे भी उठा दूंगी।

उन्होंने मेरी पजामी का नाड़ा खोल दिया नीचे सरकाने लगी, मैंने रोकने की कोशीश की तो भाभी बोली- इतना क्यों शर्मा रही हो, अब तो तुम्हारी चूत का गेट भी खुल गया है।

मैं झेंपती हुई बोली- भाभी, आप भी तो उतरिये न।

"ओह, यह बात है !" और भाभी ने एक मिनट में ही अपना पेटीकोट और ब्लाउज उतार दिया।

हलकी काली झांटो वाली भाभी की चूत मेरी आँखों के आगे थी। भाभी की चूचियाँ मुझसे थोड़ी बड़ी बड़ी और मर्दों का लंड खड़ा करने वाली थीं। उन्होंने मेरा भी कुरता उतरवा दिया, मुझे साथ लेते हुए वो पलंग पर गिर गईं, मेरी साफ़ चिकनी चूत देखते हुए बोलीं- वाह, बिल्कुल दुल्हन जैसी चूत है, कोई आदमी देख ले तो चोदे बिना नहीं छोड़ेगा। संतरे भी तने हुए बिल्कुल ताज़े ताज़े लग रहे हैं।

और उन्होंने मेरे दोनों संतरे मसल दिए। भाभी ने मेरी चूत में अपनी उंगलियाँ डाल दीं और मेरी उंगलियाँ अपनी चूत में डलवा लीं अब हम दोनों एक दूसरे की बुर रगड़ रहे थे। हम दोनों खुल गए थे और मस्तिया रहे थे बड़ा मज़ा आ रहा था। हम लोगो की शर्म उतर गई थी। भाभी मुझे कुतिया कह रही थीं मैं भी उन्हें भाभी रांड बोलने लगी थी।

मस्ती में मैं और भाभी नहा रहे थे।, भाभी मेरी चूचियाँ दबाती हुई बोली- तेरी चूत परेशान नहीं करती? एक महीने से बिना चुदे पड़ी है। एक बार लंड घुस जाए तो उसके बाद कितना ही बैंगन-गाज़र चूत में डाल लो, सुख नहीं मिलता। मौका अच्छा है, अमित से चुदवा ले, कुत्ते का लंड भी अच्छा मोटा है। इनके पीछे महीने में 5-6 बार मैं भी कुत्ते से चुदवा लेती हूँ, बहुत मज़ा देता है।
मैं भाभी की बातें सुनकर चकित थी, मैंने भाभी से कहा- भाभी, विश्वास नहीं होता कि आपने भाईसाहब के अलावा भी किसी का लंड चूत में डलवाया हुआ है।

भाभी बोलीं- प्यासी चूत पता नहीं औरत से क्या क्या करवा ले, मैं तो पुरानी रांड हूँ !

और उन्होंने अपनी कहानी बताना शुरू कर दी उन्होंने बताया एक बार उन्हें 6 महीने अकेले रहना पड़ा था, उनके तब तक एक बच्चा भी हो चुका था लेकिन इस निगोड़ी चूत ने इतना तंग किया कि दस दिन बाद लंड-लंड चिल्लाने लगी। तब तो मैं 24 की थी कितनी आग लगी थी इस चूत में कि जो भी जवान, बूढ़ा दिखता तो बस यही मन करता था कि मेरी चूत में लंड डाल दे। लेकिन साली जब जरुरत हो तो लंड डालने वाला भी नहीं मिलता।

भाभी की बातें सुन सुन कर मेरी बुर पानी छोड़ने लगी थी। भाभी बोलती जा रही थीं उन्होंने मेरी तीन उंगलियाँ चूत में डलवा ली थीं और मुझसे जोर जोर से अपनी बुर मसलवा रही थीं।

भाभी का बोलना जारी था, उन्होंने मुझे बताया कि पहले वो कलकत्ता में रहती थी जब उनके पति 6 महीने को बाहर गए तो उनकी चूत चुदने को कुलबुलाती रहती थी। उन्होंने अपनी दो तीन सहेलियों को जब यह बताया तो वो हँस कर मजाक में उड़ा देती थीं। उसके बाद पड़ोस में एक भाभी किराए पर रहती थीं। उनको जब मैंने अपनी चूत की खुजली के बारे में बताया उन्होंने मुझे एक आंटी से मिलवाया। आंटी ने मेरी चूत का जुगाड़ करवाया, उन्होंने मेरी एक महंगे होटल में सेटिंग करा दी।

मैं होटल मैं दोपहर में जब मन आता, चुदने जाने लगी, महीने मैं 4-5 बार चुदवा लेती थी। नए नए लंड से चुदने में बड़ा मज़ा आता था, चूत भी ठंडी हो जाती थी और ऊपर से कुछ कमाई भी हो जाती थी। इन 6 महीनों में मैंने 18 साल से लेकर 60 साल तक के 22 मर्दों के लंड खाए। हर लंड का अपना एक अलग मज़ा होता है।

उसके बाद तेरे भाईसाहब आ गए हम लोग कानपुर आ गए। जिंदगी आराम से चलने लगी। मेरी शर्म छूट गई थी, 10-12 आदमियों से आज भी मेरे सम्बन्ध हैं। तुम्हारे देवर अमित भी इस सूचि में है, बहुत अच्छा चोदू है, कुत्ता 3-4 बार मेरी गांड भी फाड़ चुका है लेकिन मस्त मज़ा देता है, तू भी चुदवा ले, इससे अच्छा मौका नहीं मिलेगा।

मेरी साँसें भाभी की बातें सुनकर तेज़ हो गई थी, मैं बोली- भाभी, मन तो चुदवाने का कर रहा है लेकिन डर लगता है !

भाभी हँसते हुए बोली- मस्त होकर चुदवा ! यहाँ कोन देखने वाला है? कल अमित के साथ अकेले ऊपर सोना और रात भर चुदना ! परसों बच्चे चले जाएँगे, तू अगर राज़ी होती है तो हम दोनों साथ साथ चुदेंगी।

मैं पहले से ही अमित से चुदने की सोच रही थी। अब मैंने सोच लिया कि कल अमित का लंड डलवा ही लूंगी। तभी भाभी ने घूमकर मेरी चूत की पलकों पर अपना मुँह रख दिया। आह ! जबरदस्त मज़ा था, मुझसे भी नहीं रहा गया मैं भी भाभी की चूत चूसने लगी। दस मिनट बाद हम दोनों का चूतरस एक दूसरे के मुँह में था। रात के दो बज़ गए थे, भाभी और मैं नंगी ही सो गईं।

सुबह 9 बजे मेरी नंगी चूत में भाभी ने अपनी उंगली घुसा दी, मैं हड़बड़ा कर उठी, भाभी ने मेरी चूचियाँ दबाते हुए चुटकी ली और बोलीं- अब उठ जाओ, देवर जी ऑफिस जाने वाले हैं, दो बार पूछ गए कि भाभी उठीं या नहीं ! जाओ और थोड़ा अपनी जवानी का रस पिला आओ।

मैंने उठकर कुरता-पजामा पहन लिया और ऊपर अमित के कमरे में आ गई। मैं जब ऊपर गई अमित मुस्करा कर देखते हुए बोला- आप तो बहुत देर तक सोईं? मैं आपके लिए चाय बना कर लाता हूँ।

मैंने कहा- नींद ही नहीं खुली।

मैंने आगे बढ़कर अमित को बाँहों में भर लिया, कस कर चिपकते हुए बोली- आज ऊपर ही सोऊँगी। पूरी रात तुम्हारी याद आती रही !
हम दोनों आपस में एक दूसरे की बाँहों में 5 मिनट सिमटे रहे। इसके बाद अमित चाय बनाने चला गया और मैंने कुरता पजामा उतार कर स्कर्ट ब्लाउज बिना ब्रा पेंटी के पहन लिया। अमित जब चाय लेकर आया तो मेरा शवाब उसे ललचा रहा था।

चाय पीने के बाद अमित से बोली- थोड़ा मेरी गोद में लेट लो !

अमित मेरी गोद मैं लेट गया। मैंने उसकी टीशर्ट उतरवा दी नीचे वो कुछ नहीं पहने था। मैं उसकी निप्पल हल्के से नोचते हुए उसके जवान सीने पर हाथ फेरने लगी, उसके बाद होंटों में उंगली चुसवाते हुए बोली- रात को मेरी याद आई थी?

अमित बोला- भाभी, रात भर सो नहीं पाया, आपके दूध चूसने का मन करता रहा।
मैंने अपने ब्लाउज के दोनों बटन खोल दिए और अमित का मुँह अपने दूधों की टोंटी में लगा दिया और बोली- लो, जी भरकर चूस लो।

अमित ने मेरा एक स्तन अपने मुँह में भर लिया और दूसरा हाथों से दबाने लगा, वो कभी एक चूची को चूसता कभी दूसरी को। मैं उसे कस कर अपने स्तनों से चिपकाए हुए थी।

अमित मेरे स्तनों से खेलते हुए बोला- भाभी, आज ऑफिस जाने का मन नहीं कर रहा है। लेकिन बहुत जरूरी काम है, साला जाना पड़ेगा।

मैंने नेकर के ऊपर से अमित का लौड़ा सहलाया और बोली- चलो, अब उठ जाओ, शाम को मस्ती करेंगे।
अमित और मैं उठ गए।

मैं उठी और दरवाज़े के पास पड़ा अख़बार उठाने लगी। मेरी स्कर्ट ऊपर उठ गई, अमित दूर से मेरे नंगे चूतड़, गांड और मस्त हिलती चूचियाँ देखकर पगला गया और दौड़ते हुए आकर घोड़ी बनी मुझे पीछे से लपक लिया और मेरी चूचियाँ दबाने लगा- भाभी, बहुत मन कर रहा है !

मैं बोली- थोड़ा हटो न।

अमित को हटाकर मैंने उसे बाँहों में भरा और बेशर्म बनते हुए पूछा- चोदने का मन कर रहा है क्या?

अमित बोला- हाँ भाभी, आपकी नंगी गांड देखकर आपको चोदने का मन कर रहा है।

मैं अपना पानी छोड़ रही थी, मैं बोली अमित- तुम्हारा घोड़ा बहुत टनटना रहा है, पहले उससे दोस्ती करती हूँ !
और मैंने अमित की नेकर नीचे सरका दी, अमित का 8 इंची लम्बा और 4 इंची मोटा लौड़ा फनफनाता हुआ बाहर आ गया। एक महीने बाद इतना सुंदर लोड़ा देखकर मैं पागल हो गई, मैंने बिना देर किए उसे मुँह में ले लिया और चूसने लगी। अमित मेरी स्कर्ट उठा कर मेरी चूत में उंगलियाँ आगे पीछे करने लगा।

आह ! मुझे लोड़ा चूसने का गजब सुख मिल रहा था। बहुत देर से अमित का लौड़ा टनक रहा था, 2-3 मिनट के बाद लंड बाहर खींच कर अमित ने मेरे मुँह और स्तनों पर वीर्य की बारिश कर दी। इसके बाद हमने एक दूसरे को बाँहों में भरकर 10-12 प्यार भरी पप्पियाँ गालों पर लीं और मैं उससे बोली- अब तुम ऑफिस जाओ, शाम को अपने लंड को सही जगह घुसाना। मैं और मेरी रानी तुम्हारा इंतज़ार करेंगी।
अमित ऑफिस चला गया और मैं बाथरूम मैं घुस गई।


Read More Related Stories
Thread:Views:
  कुंवारी दुल्हन 26,063
  भांजे के लंड कि प्यासी 16,521
  मेरे लंड की प्यासी 14,387
  भांजे के लंड कि प्यासी 31,657
  साली की प्यासी चूत 16,046
  प्यासी भाभी और उसकी सहेली पूजा 14,420
  लण्ड की प्यासी - मधु 9,471
  प्यासी की प्यास बुझाई 6,541
  प्यासी भाभी और उसकी सहेली पूजा 13,252
  प्यासा दिल प्यासी रात 5,730
 
Return to Top indiansexstories