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पूरी सन्तुष्टि
11-16-2010, 08:31 PM
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पूरी सन्तुष्टि
मेरा नाम रेशमा है। मैं इस्लामाबाद पाकिस्तान से हूँ। मैं विवाहित हूँ । मेरी उम्र 26 वर्ष है। यह बात तब की है जब मैं कालेज में थी। मुझे अपने क्लास के एक लड़के मोइन से प्यार हो गया। हम दोनों अकसर कालेज से घूमने के लिये निकल जाते थे। फिर दोनों पिक्चर देखने के लिये भी जाने लगे। हम दोनों धीरे धीरे बहुत करीब आते गये। मोइन मुझे हमेशा हाथों पर और फिर धीरे धीरे गालों पर चूम लेता था।

एक दिन उसने मुझे मेरे होठों पर चूम लिया। अब वह थोड़ा निडर हो गया था। एक दिन उसने मुझे कस कर पकड़ लिया और मेरे होठों को चूम लिया, फिर उसने मेरे कन्धों पर, फिर मेरी गर्दन को चूम लिया। उसने मेरे उरोजों को छू लिया। पहली बार किसी ने मेरे वक्ष को छुआ था मुझे बहुत अच्छा लगा था। धीमे धीमे वह और आगे बढ़ गया था। अब वह अपने हाथों से मेरी जांघों को, कभी कभी वह अपने हाथों से मुझे पीछे से कमर के नीचे के भाग को दबा देता था। मुझे बहुत मजा आता था, मैंने कभी विरोध नहीं किया।

एक दिन हम दोनों पिक्चर देखने गये। हम सबसे पीछे की सीट पर बैठे थे। हॉल में भीड़ बहुत कम थी और हमारे आस पास कोई नहीं बैठा था। पिक्चर शुरू होने के 10 या 15 मिनट बाद मोइन ने अपना हाथ मेरे कन्धों पर रखा और अपनी तरफ खींचा। थियेटर में काफी अन्धेरा था। वह मेरे गालों पर चूमने लगा उसने मेरे होठों पर अपने होंठ रख दिये उसकी सांसें बहुत गर्म थी। हम दोनों ने एक दूसरे को बहुत बेताबी से चूमना शुरू कर दिया। तभी मैंने उसका हाथ अपने दुपट्टे के नीचे महसूस किया। उसका हाथ मेरे उरोजों को कमीज के ऊपर से दबाने लगा। इस दौरान भी वह मुझे चूम रहा था।

मैंने अपनी आँखें बन्द कर ली मुझे बहुत मजा आ रहा था। अचानक मुझे महसूस हुआ कि उसका हाथ मेरी कमीज के ऊपर के दो बटनों को खोल चुका था। उसका हाथ मेरी ब्रा के कोनों के अन्दर मेरे स्तनों को सहला रहे थे। धीरे धीरे उसका हाथ मेरे चुचूकों को अंगुलियों से छेड़ने लगा जिससे वे एकदम कठोर हो गये। मैं कुछ सोच नहीं पा रही थी कि मैं क्या करूँ। मेरे पूरे शरीर में अजीब सी तरंगें दौड़ रही थी जो कि मेरी जिन्दगी में पहली बार हुआ था।

उसने अपने हाथ को मेरी कमीज से निकाला और मेरे पेट पर रखा और इधर उधर घुमाता रहा। फिर उसका हाथ नीचे की ओर बढ़ने लगा। मेरे अन्दर अजीब सी फीलिंग हो रही थी। उसने अपना हाथ मेरी जांघों पर रखा और धीरे धीरे ऊपर की ओर ले गया। उसने मेरे प्राइवेट भाग को मेरी सलवार के ऊपर से ही छूआ। मेरे मुँह से उॅहहहहह करके आवाज निकली मेरे पैर फैल गये और उसकी हथेली ने उस जगह को भर लिया। अपनी अंगुलियों से वह मेरे प्राइवेट अंग को रगड़ रहा था। उसका ऐसा करना मुझे पागल बना रहा था। मेरा बदन मेरे वश में नहीं था, मैं अपनी कमर को आगे पीछे करने लगी थी।

अचानक उसने मुझसे अपनी कमीज के बटन बन्द करने और उसके साथ बाहर चलने को कहा। मैंने वैसा ही किया। हमने टैक्सी ली और कॉलेज की ओर चल पड़े। शाम हो गई थी, कॉलेज बन्द हो चुका था केवल एक-दो बच्चे थे। हम दोनों कॉलेज के पीछे की ओर से कॉलेज की छत की ओर गये। कॉलेज बन्द हो चुका था किसी के उधर आने की उम्मीद नहीं थी। हमने ऐसी जगह चुनी जहाँ से हमें कोई देख नहीं पाये। हम दोनों दीवार के सहारे खड़े हो गये और बगैर वक्त बर्बाद किये एक दूसरे को बेसब्री से चूमना शुरू कर दिया।

उसने मेरे दुपट्टे को उतार दिया। मेरी कमीज के सारे बटन खोल डाले और अपना हाथ मेरी कमीज में डालकर मेरे उरोजों को हाथ में ले लिया। उसने इतनी जल्दी में यह सब किया कि मुझे कुछ समझ ही नहीं आ पाया। उसके इस तरह से छूने से मुझे करंट सा लगा। उसने मेरी ब्रा को खोल दिया और बड़ी बेदर्दी से मेरे स्तनों को मसलने लगा। मेरे स्तन एकदम सख्त हो गये। वह अब मेरे उरोजों को चूमने लगा और मेरे एक चुचूक को मुँह में ले लिया और बड़ी सख्ती से उन्हें चूसने लगा। उसका एक हाथ मेरे चूतड़ को मसल रहा था।

उसने मुझे पीछे से अपनी बाहों में जकड़ लिया और मेरे वक्ष को दबाने लगा। उसका सख्त हो चुका अंग मेरे पीछे चूतड़ों में चुभने लगा। उसका हाथ मेरी कमीज के नीचे मेरे पेट पर टहल रहा था। शलवार के ऊपर से ही वह मेरे प्राइवेट भाग को रगड़ रहा था। मेरी शलवार का वह हिस्सा गीला हो गया जहाँ उसने अपना हाथ रखा था और मेरी चूत को रगड़ रहा था। मोइन ने मेरी शलवार खोल दी और मैंने उसे नीचे गिर जाने दिया। उसकी अंगुलियाँ सीधे मेरी पैंटी के अन्दर पहुँच गई और अगले ही पल उसकी अंगुलियाँ मेरी चूत के अन्दर पहुँच गई, वह उन्हें वह अन्दर बाहर करने लगा।

मैंने महसूस किया कि उसका सख्त लण्ड मेरी कमर में चुभ रहा है और धक्के लगा रहा था। उसने मेरी पैंटी को नीचे खींच दिया। मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था, मैंने पलट कर उसकी पैंट खोल डाली और उसके अन्डरवियर में हाथ डालकर मैंने उसके अंग को हाथों में ले लिया। उसने अपना पैंट नीचे गिरा दिया और मेरी पैंटी को उतार दिया। उसने मुझे अपनी गोद में उठा लिया। मैंने अपनी टांगों को उसकी कमर में लपेट लिया। उसका कठोर अंग मेरी चूत के मुँह को ढूंढने लगा। मैंने उसे अपने हाथ से पकडा और अपनी चूत का रास्ता दिखाया और एक झटके से उसका मोटा और कठोर लण्ड मेरे अन्दर प्रवेश कर चुका था। मुझे लगा कि कोई जलती हुई चीज मेरे अन्दर घुस गई। मैं दर्द से तड़प उठी।

उसने मेरे मुँह को एक हाथ से दबाया और मेरी कमर को एक हाथ से थाम लिया। अगले ही पल मेरे चुचूक उसके मुँह में थे। वह उन्हें जोर से चूसने लगा। उसका लण्ड अभी भी मेरे अन्दर ही था। उसने मेरी कमर को कस कर पकड़ रखा था जिससे मैं ऊपर ही नहीं उठ पा रही थी। धीरे धीरे मुझे मजा आने लगा मेरा दर्द जाने कहाँ चला गया। मैं अपने आप को ऊपर नीचे करने लगी।

फ़िर उसने वहीं जमीन पर मुझे लिटाया और मेरे पैरों को फैलाया और उसका लण्ड अगले ही पल मेरी चूत में था। उसका पूरा लण्ड मेरे अन्दर तक समा रहा था। उसने मेरी कमर को हाथों से पकड़ा और जोरों से धक्के देने लगा। इस बीच मेरी चूत से पानी निकल गया। उसने अपनी स्पीड बढ़ा दी। उसके लण्ड का ऊपर का सिरा मेरे अन्दर तक पहुँच रहा था। उसका लण्ड मेरे अन्दर और कठोर और सख्त होता जा रहा था। हम दोनों एक दूसरे को बहुत जबरदस्त धक्के दे रहे थे। अचानक हम दोनों ने एक दूसरे को कसकर पकड़ लिया, उसने अपनी स्पीड चालू रखी और अगले ही पल उसका वीर्य मेरी चूत में भर गया, तभी मैं भी एक बार फिर झर गई। वह मेरे ऊपर ही निढाल हो कर गिर गया।

हम दोनों बुरी तरह से हांफ रहे थे। हम दोनों ने कपड़े पहने एक दूसरे को देख कर मुस्कुराये। हम दोनों एक दूसरे से पूरी तरह से सन्तुष्ट थे।

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