पड़ोसन का सामूहिक बलात्कार तीन दोस्त
हाय दोस्तों, मैं जानू फिर एक पड़ोसन की सेक्सी कहानी के साथ हाज़िर हूँ, जिसका मैंने बलात्कार किया, पर अकेले नहीं बल्कि अपने तीन दोस्तों के साथ।

मेरी उम्र २८ साल है, पर यह घटना ४ साल पहले की है। उस समय मैं बी.एस.सी तृतीय वर्ष में था। उस समय मैं ट्यूशन पढ़ाता था। उसी समय मेरे पड़ोस में रहने वाली एक भाभी, जिसका नाम गीता था, से उसकी बेटी को पढ़ाने के बहाने दोस्ती हो गई, जो हमारे सेक्स तक पहुँच गई। क्योंकि उसका पति दिल्ली में काम करता था। अतः अपनी चूत को किसी अच्छे और तगड़े लण्ड से चुदवाने की चाहत उसमें भी थी। ३ की माँ होने के बावज़ूद वह कभी-कभी मुझे बुला कर मेरे लण्ड से पेलवाती थी। पर साली की चूत थी या भट्ठी, समझ में नहीं आता था। उसके भोंसड़े से इतने सारे कैलेण्डर जो निकले थे, कि उसकी चूत का छेद काफी बड़ा हो गया था। मुझे पता चला था कि उसके घर दो मर्द और भी आते थे। वो उन्हें भी फँसाने का प्रयास करती थी। उस भोसड़ी छिनाल को ज़बर्दस्त चुदाई की ज़रूरत थी। सो अपने २ दोस्तों के साथ जाकर उसके बलात्कार का कार्यक्रम मैंने बनाया

एक रात ८ बजे उसके घर गया। घर में कोई नहीं था। मुझे पता था कि उसकी बेटियाँ एक शादी में गईं थीं। पहले मैं उसके घर में घुसा। वह अपने कमरे में सो रही थी। मैं गया तो वह सोई ही रही। मैं जान गया कि उसे चुदवाने का मन है। मैं उसके पास बैठ गया। उसे सहलाने लगा तो वह गरम होने लगी। मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिए। मैं उसकी चूचियाँ ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगा। वह सिसकारी भरने लगी और तेज़ी से मेरे कपड़े उतार दिए और मेरा लण्ड मुँह में लेकर चूसने लगी। मुझे भी जोश आ गया था, मैंने उससे कहा कि गीता डार्लिंग ! आज तेरे तीनों छेदों की चुदाई होगी।

वह बोली- नहीं राजा केवल मेरे बुर को चोदो। गाण्ड चुदवाने में दर्द होता है।

इतने में मेरे सारे दोस्त भी आ गए। वह उन्हें देखकर डर गई। मैंने अपने दोस्तों से कहा- आओ दोस्तों ! इस हरामज़ादी, भोसड़ी की रण्डी को चुदवाना है। इस छिनाल का एक लण्ड से मन नहीं भरता।

वह गिड़गिड़ाने लगी- नहीं... नहीं... मुझे छोड़ दो।

मैंने गरज कर कहा- चुप बुरचोदी रण्डी, अधिक नखरे किया तो...

इतने में मैं उसके ऊपर चढ़ गया। एक दोस्त ने उसके मुँह में अपना लण्ड घुसाया। एक उसकी चूची ज़ोर से दबाने लगा। तब मैंने कहा कि दोस्तों इसे कुतिया बना देते हैं। चारों का काम हो जाएगा।

मैंने गीता को कहा "चल साली रण्डी, कुतिया बन जा ! आज तेरे बुर को फाड़ कर उसकी प्यास बुझानी है।"

और मैंने उसे कुतिया बना डाला... मेरे एक दोस्त ने नीचे लेट कर उसके बुर में लण्ड डाल दिया। मैंने पीछे से पहले उसकी गाण्ड में थूक लगा कर अपना लण्ड उसकी गाण्ड में ठेल दिया। एक ने उसके मुँह में लण्ड डाल दिया और एक ज़ोर-ज़ोर से उसकी चूचियाँ दबाने लगा। उसकी ऐसी चुदाई कभी नहीं हुई थी। वह रो रही थी... चिल्ला रही थी... कह रही थी- बहुत दर्द हो रहा है, मुझे छोड़ दो।

तब मैंने कहा- साली रण्डी, एक लण्ड से तुझे संतोष ही नहीं था। तुझे तीन-चार मर्दों के ही लण्ड चाहिए, तो अब नाटक क्यों। अब हम चारों तेज़ी से अपना काम कर रहे थे। उसकी चूत ने तीन बार पानी छोड़ दिया था।

अब उसे भी मज़ा आ रहा था। वह भी गन्दी-गन्दी गालियाँ देने लगी। वह बोले जा रही थी कि मैं रण्डी हूँ। मेरे पति ने कभी ऐसा नहीं किया। अब मुझे मज़ा आ रहा है। फाड़ डालो मेरी चूत को। इसके चिथड़े-चिथड़े कर दो। हाय जानू, आज तक कभी मैंने गाण्ड नहीं चुदवाई। पर आज पता चला कि चूत से कम मज़ा इसमें नहीं। ओहहहहहह... सीसीसीसीसीसी.... हमने जगह बदल कर चार बार चुदाई की। अब चार मर्दों के लण्ड खाने के बाद उसका शरीर भी टूटने लगा। अब हमारा भी झड़ने का समय आ गया, मेरे लण्ड ने पाँच-सात झटकों के बाद गाण्ड में ही अपना उजला द्रव छोड़ दिया। एक ने उसके मुँह को अपने रस से भर दिया। एक चूत में झड़ा, और एक ने मुट्ठ मारकर अपना माल उसकी चूचियों पर गिराया। वह भी संतुष्ट हो गई थी।


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