नेहा की चूत खोली-1
किरण आँटी की चुदाई से मैं ऊब चुका था। उनकी बेटी नेहा जवान हो रही थी। बड़ी-बड़ी चूचियाँ, उभरी हुई गाँड, क़यामत लगती थी। ख़ैर किरण आँटी मुझे उसके पास फटकने भी नहीं देती थी।

एक दिन मैं उसके यहाँ किसी काम से गया तो नेहा ने दरवाज़ा खोला। उसने स्कर्ट पहन रखी थी. मेरी नज़र उसके चिकने-गोरे पैरों पर पड़ी। मेरा लंड खड़ा होने लगा तो मैंने अपनी साँसों रोककर किसी तरह स्वयं पर नियंत्रण किया। उसने मुझे ड्राईंगरूम में बिठाया। ख़ुद मेरे सामने बैठ गई। मैंने पूछा - "आँटी कहाँ हैं?" तो मालूम हुआ कि बाहर निकली हुईं हैं। हमारे बीच काफी बातें हुईं। उस दौरान उसने इस बात का ख़ास ख़्याल रखा कि कहीं से उसकी स्कर्ट न उठे और उसके जाँघें मुझे न दिखाई दे।

फिर वह पानी लाने के लिए उठी और जाने लगी। उस दौरान मैं उसकी गाँड निहारता रहा। मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा। तभी वह पानी लेकर आ गई। इस बार बैठते समय मुझे उसकी काली पैन्टी दिख गई। ख़ैर बातों-बातों में मुझे मालूम हुआ कि उसके कम्प्यूटर पर कुछ प्रोजेक्ट बनाने हैं, तो मैंने तुरन्त उसे प्रस्ताव दिया कि मेरे यहां बना लो।

उसने कहा - ठीक है, माँ से पूछकर आऊँगी।

फिर मैं वहाँ से चला आया।

एक दिन मैं अपने कमरे में सोया था कि नेहा किरण आँटी के साथ आई। मैं नीचे गया तो मालूम हुआ कि नेहा को मुझसे कुछ काम है। जब मैंने पूछा तो मालूम हुआ कि वह कम्प्यूटर पर प्रोजेक्ट बनाना चाहती है। शायद उसने अपनी माँ से हमारी पिछली मुलाक़ात का विस्तृत ब्यौरा नहीं दिया था।

मैंने कहा- ठीक है चलो। तो वह मेरे पीछ आने लगी। किरण आँटी भी उठी और आने लगी, तो मेरी माँ ने कहा- आप बच्चों के पीछे कहाँ जा रहीं हैं?

इसपर आँटी ने कहा- कहीं नहीं भाभीजी, मैं भी देखूँ यह कम्प्यूटर क्या बला है।

माँ- ठीक है, तबतक मैं चाय बनाती हूँ।

मैं दोनों को अपने कमरे में लाया और कम्प्यूटर को चालू किया। नेहा काम करने लगी तो आँटी ने कहा, चलो तुम्हारे छत से अपना मक़ान देखते हैं।

मैं उन्हें ऊपर ले जाने लगा। ऊपर पहुँचकर मैं बाहर का दरवाज़ा खोलने लगा तो किरण आँटी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे रोक लिया।

मैंने कहा,"क्या हुआ आँटी?"

तो वे मेरे कान के पास आकर बुदबुदाई,"ऊपर आना तो एक बहाना था, असल में तुमसे चुदवाना था।" यह कहकर वो मुझसे लिपट गई और चुम्मा-चाटी करने लगी। उसने मेरा लोअर सरका दिया और सीढ़ियों पर बैठ गई, फिर मेरा लंड मुँह में लेकर चूसने लगी।

मैं भी जोश में था। मैंने उनकी चोटी पकड़ी और उनके मुँह में ही धक्के लगाने लगा। उनका गला घुट गया और आँखों में आँसू आ गए पर मैं नहीं रुका। हाँलाँकि उन्होंने छूटने की कोशिश की पर चूँकि वह सीढ़ियों के बीच बैठीं थीं और मैं ठीक सामने खड़ा था इसलिए उनके छूटने की सम्भावना नहीं थी।

तभी नीचे से चाय के लिए आवाज आई। चूँकि हम सीढ़ी पर ही थे इसलिए मुझे रुकना पड़ा क्योंकि हमारी चुदाई की आवाज़ें नीचे तक जा सकतीं थीं। इसका फ़ायदा उठाकर उन्होंने मेरा लंड अपने मुँह से निकाला और फिर उसने अपना एक पैर उठाकर सीढ़ियों की रेलिंग पर रख दी और अपनी साड़ी कमर तक उठा दी।

फिर उसने अपने दोनों हाथों से अपनी चूत फैलाकर मुझे निमंत्रण दिया। मैं घुटनों पर बैठ गया और अपने दोनों हाथों से उनकी जाँघ पकड़कर उन्हें अपनी ओर खींचकर उनकी चूत चाटने लगा। फिर अपना लंड उसकी चूत में लगाया और पेल दिया। चूत गीली होने के कारण बिना रुके सीधे जड़ तक पहुँच गया। फिर मैंने धक्के लगाने शुरु किए। मैं ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगा रहा था। कुछ ही देर बाद उनकी चूत कुछ टाईट हुई और वे झड़ गईं। मैं भी तेज़ी से झड़ा। फिर उन्होंने अपने कपड़े ठीक किए, मुझे एक चुम्मा दिया और नीचे चली गई।

मैं अपने कपड़े ठीक कर नीचे अपने कमरे में आया। वहाँ नेहा कम्प्यूटर पर अभी भी काम कर रही थी। मैं पीछे से उसके अंगों को देख रहा था। कुछ देर बाद उसने कहा कि उसका काम खत्म हो गया। वह उठी और जाने लगी। ज्यों ही वह खड़ी हुई, मेरा ध्यान उसकी स्कर्ट पर गया। उसकी स्कर्ट ठीक उसकी गाँड के नीचे गीली हो गई थी।

मैंने उसे रोका और कहा- ज़रा यहाँ तो आना।

नेहा- क्या है? कहते हुए मेरे पास आई।

मैं- तुम्हारी स्कर्ट पीछे से गीली हो गई है।

नेहा- बैठे-बैठे पसीना हो रहा था ना, इसलिए हो गई होगी।

मैं- सिर्फ एक गोल सा धब्बा है, अजीब सा लग रहा है।

उसने स्कर्ट घुमाकर पीछे का हिस्सा आगे किया और यह देखकर असमंजस में पड़ गई। फिर उसने कहा- मैं नीचे कैसे जाऊँगी? माँ और आँटी क्या सोचेंगी।

मैंने कहा- कुछ देर खड़ी रहो, सूख जाएगा।

मैं कम्प्यूटर पर बैठ गया और वह मेरे पीछे खड़ी हो गई। मैंने उससे कहा- तुमने अभी तक जो भी काम किया, वह इसमें ही होगा।

उसने कहा- प्लीज़ उसे खोलिएगा मत।

मैंने पूछा- क्यों?

उसने कहा- बस ऐसे ही।

मैंने कहा- मैं खोलता हूँ, और बताता हूँ कि उसे कैसे ग़ायब करते हैं।

मैंने खोला तो देखा कि उसने मेरी गुप्त फाईलों को खोला था और नंगी चुदाई वाली तस्वीरें देखीं थीं।

मैंने उसे यह साफ करना सिखाया। फिर उसने कहा कि अच्छा हुआ आपने बता दिया वरना मैं किसी दिन पकड़ी जाती।

मैंने कहा- पकड़ी तो तुम फिर भी जाओगी।

उसने पूछा- वह कैसे?

मैं- इसी तरह, यदि तुम नैपकिन का प्रयोग नहीं करोंगी और स्कर्ट गीली करोगी तो कोई भी पकड़ लेगा।

वह शरमा गई, उसका चेहरा लाल हो गया।

मैंने कहा- फिल्म देखोगी?

उसने कहा- नहीं मैं सबसे नई फिल्म देख चुकी हूँ।

मैं- बेवक़ूफ, वो वाली।

नेहा- है?

मैं- हाँ।

नेहा- तो दिखाईए।

मैंने एक डीवीडी निकाली और उसे चालू किया। फिल्म शुरु हुई, 69 की मुद्रा दिखा रहे थे। मेरा खड़ा हो गया और लोअर उठ गया। ख़ैर उसका ध्यान फिल्म पर था। उसकी साँसें तेज़ हो गईं, वह गर्म हो गई। वह मेरी बगल वाली कुर्सी पर बैठने लगी तो मैंने उसे अपना रुमाल दिया और कहा- उसे अपनी चड्डी में डाल लो। उसने उसको मोड़कर अपनी चड्डी में डाल ली।

फिल्म में लड़का लड़की को तरह-तरह की मुद्राओं में चोद रहा था। तभी नीचे से उसकी माँ की आवाज़ दी कि जाना नहीं है क्या?

उसने कहा - बस दो मिनट माँ।

फिर वह उठी और जाने लगी।

मैंने कहा - मेरा रुमाल?

उसने कहा - बाद में नया दे दूँगी।

मैंने कहा - मुझे वही चाहिए।

नेहा - अच्छा, साफ़ करके दे दूँगी।

मैं- मैं कर लूँगा।

तब उसने चड्डी में हाथ डाला और रुमाल निकालकर टेबल पर रख दिया। मैं उठा और रुमाल लेकर सूँघने लगा।

उसने पूछा- यह क्या कर रहे हो?

मैं- देख रहा हूँ, कैसी ख़ुशबू है!

उसने पूछा- कैसी है?

मैं- बिल्कुल मदहोश कर देने वाली।

फिर वह चली गई। शाम को वह और उसकी माँ छत पर टहल रहे थे। मैं भी अपने छत पर आया। उनसे दो-चार बातें हुईं। फिर मैंने अपना रुमाल निकाला और पसीना पोंछने लगा। तभी उनकी काम वाली बाई आ गई और किरण आँटी नीचे लगी गईं। फिर मैं रुमाल सूँघकर नेहा को चिढ़ाने लगा। बीच-बीच में उसे रुमाल चाटकर भी दिखाता। मानों वह रुमाल उसकी बुर है। वह शरमा जाती।

एक दिन वह फिर अपनी माँ के साथ कम्प्यूटर पर काम के बहाने आई। मैं समझ गया कि माल गर्म है।

उसने कहा- आज बाकी की मूवी देखनी है।

मैंने फिर वही डीवीडी लगा दी। चुदाई का सीन चलने लगा, वह गर्म हो रही थी।

शेष दूसरे भाग में !
 


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