दो बेटों की विधवा मा
कुछ देर के बाद डॉक्टर को होश आता है और उसके सामने रचना सौरव संभु और रवि तीनो बैठे थे और संभु के चेहरे से साफ़ साफ़ पता चल रहा था की उसकी फटी पड़ी है....हो भी क्यों न आखिर सौरव ने डॉक्टर को इतने जोर से घुसा मारा था की वो बेहोश हो गया था और साथ ही साथ उसके नाक से खून भी बहने लगा था तक़रीबन आधे घंटे बाद डॉक्टर होश में आया और उसको होश में आता दख सौरव फिर से उसके सामने आ खड़ा हुआ जिसको देख डॉक्टर कुछ भी बोल नहीं पाया हालाकि वो उठा था की अभी ग़दर मचा देगा मगर सौरव का घुसा उसे उसका चेहरा देखते ही याद आ गया और वो शांत बैठ गया.......

सौरव - देखिये अंकल हम आपको कुछ नहीं करते मगर आपकी हिम्मत कैसे हुयी मेरी माँ को इस तरह से छूने की...और कुछ भी बोलने से पहले मेरी बात आप ध्यान से सुनिए उसके बाद आप जो भी करो हमे कोई फर्क नहीं पड़ेगा ज्यादा से ज्यादा हमे ये अपार्टमेंट छोड़ कर जाना होगा मगर उसके बाद तो मै आपका वो हाल करूँगा की आप सोच भी नहीं सकते आपकी नर्स के साथ जो सम्बन्ध है और जितनी औरतो को आपने भोग लगाया है वो सब हमे पता है तो ज्यादा शातिर बन्ने की कोई कोशिश मत करना.....
डॉक्टर की अपनी नर्स वाली बात सुन कर झटका लगा था इसलिए वो अभी कुछ नहीं बोला ....
सौरव - अब आप जा सकते है और बेहतर होगा की इस बारे में आगे कोई चर्चा ना ही हो.......
डॉक्टर - बेटा मुझे गलत मत समझना मै बस थोडा बहक गया था.......लेकिन तुम्हारी माँ है ही ऐसी की ...
इससे आगे कुछ बोलता की सौरव ने उसे हाथ दिखा कर रोकते हुए कहा ....बस आप जा सकते है ..
डॉक्टर - तुम्हारी माँ का इलाज ...
सौरव - वो हम बाहर से करा लेंगे आप ज्यादा न सोचिए...रचना जो अभी अपने पेटीकोट और ब्लाउज में खड़ी थी उसको डॉक्टर ने एक नजर देखा और वह से अपने नाक से बहे खून को पोछते हुए अपना बैग उठा कर वहा से निकल गया इस दरमियाँ संभु और रवि कुछ नहीं बोले मगर सौरव डॉक्टर के जाने के बाद दरवाजा बंद कर के आया और कमरे में आते ही रचना उससे लिपट कर रोने लगी
सौरव - माँ कुछ नहीं हुआ है बेफिजूल में आसू मत बहाओ हम है न ....
रवि - हां भाई तु ही तो है वरना डॉक्टर अंकल के सामने मेरा दिमाग एकदम सुन्न पड़ गया था ....
संभु - आखिर तूने रचना बहु के सच्चे आशिक होने का प्रमान दे ही दिया...
रचना जो अभी तक रो रही थी वो मुस्कुराते हुए भरी आँखों से संभु को देखि और शर्मा सी गयी......
सौरव - चलो चलो अब ज्यादा नहीं भूख भी लगी है और माँ को बाहर किसी अछे से डॉक्टर से दिखा आते है....
रचना - मुझे अब कुछ नहीं हुआ है मेरा बुखार जो बाबूजी उस डॉक्टर के कहने पे लाये थे उसी से ठीक हो जाउंगी ......
संभु - हां बहु ठीक कह रही है ..
रवि - ठीक है फिर मै और सौरव बाजार से खाने का कुछ सामान और एक थर्मामीटर ले आते है.....दादा जी आप माँ का ख्याल रखियेगा हम अभी आते है ....
सौरव- आते है माँ ज्यादा सोचो मत एक बुरा सपना समझ के भूल जाओ .......
इधर डॉक्टर अपने फ्लैट में बैठा था और अपने नाक की मरहम पट्टी कर रहा था और साथ ही साथ ये भी सोच रहा था की वो रचना को चोद के ही रहेगा चाहे जैसे भी हो ...
इधर रवि और सौरव अपार्टमेंट के निचे थे सड़क पे निकले ही थे की रजनी सामने से आती दिखी और राजने काफी परेशां सी लग रही थी ...हो भी क्यों न उसकी बात जो रवि से नहीं हुयी थी ना ही वो ऑफिस आया था ......
रजनी सीधे सीधे रवि के सामने आ खाड़ी हुयी और उसने सौरव की तरफ बिना ध्यान दिए रवि के गले लग गयी ...इस कदम से सौरव और रवि शॉक में थे क्युकी रजनी का ऐसे अचनाक मिलना और गले लग्न दोनों भाइयो के गले नहीं उतर रहा था.....
रवि से अलग होते हुए रजनी ने बोलना चालू किया....
रजनी - कहा हो तुम पिछले दो दिनों से...हां ....पता भी है की मै कितनी परेशां हु तुम्हारे लिए न कोई फोने न कोई मेसेज न कुछ.... और वो रोने लगती है सड़क पे इस तरह से एक लड़की रोने लगे तो लोग देखने लग जाते है ...वही हाल यहाँ भी था....तभी
सौरव बोलता है की भाई आप वापिस घर जाओ मै हो आता हु बाजार से .......इधर सौरव बाजार निकल लेता है और रवि रजनी को ले कर अपार्टमेंट ना जा कर पास के ही एक पार्क में ले जाता है....पुरे रास्ते रजनी कुछ नहीं बोलती है बस रवि का हाथ पकडे रहती है......
इधर संभु रचना से कहता है की बहु लगता है तुम्हारा बुखार उतरा हुआ है तभी तुमने पसीने आ रहे है...ऐसा करो मुह हाथ धो लो और कपडे बदल लो लाओ मै बदल देता हु...और ऐसा कह कर वो बिस्तर पे बैठी हुयी रचना के पास जाता है और उसे उठा कर फर्श पे खड़ा करता है....रचना अभी तक ब्लाउज और पेटीकोट में थी .....रचना कहती है बाबूजी आप भी मेरा कितना ख्याल करते है और मई इस बात के लिए शर्मिंदा हु की मई आपको वो सब के होते हुए भी वो सुख नहीं दे पाती जो आप मुझसे उम्मीद रखते है...और उसका गला रुवासी हो जाता है इतने समय में संभु रचना का पेटीकोट खोल चुका था......और वो निचे से नंगी हो जाती है.....संभु अभी भी कुछ नहीं बोल रहा था मगर उसका साप उसके धोती में सर उठा चूका था और रचना उस तम्बू को देख भी चुकी थी ......और अब संभु रचना का ब्लाउज खोलने लगता है ....धीरे धीरे वो रचना का ब्लाउज उसके बदन से भी अलग कर देता है.....और वो पूर्ण रूप से नंगी हो जाती है......
रचना कहती है बाबूजी आप भले ही मेरी बातो का कोई जवाब ना दे मगर अब मैंने आपके लिए भी कुछ सोचा है......वक़्त आने पे बताउंगी.........संभु उसकी इस बात से थोडा खुश जरुर था मगर अभी वो ज्यादा खुश हो कर अपने आप को दुःख नहीं पहुचाना चाहता था इसलिए उसने अपने भावनाओं पे काबू रखा और रचना को बोला की बहु अगर कहो तो तुम्हारे पीछे गरम पानी से सेक दू....
रचना बिना कुछ बोले उलटी लेट जाती है और साथ ही साथ अपने चुतरो को थोडा फैला भी लेती है जिससे उसका भूरा छेद नजर आने लगता है और संभु बिचारा ये नजारा देख कर गला सूखने लगता है उसका और वो अपनी धोती उतार देता है .....और चड्डी में आ जाता है.....रचना बोलती है बाबूजी जरा आराम आराम से सेकियेगा....संभु थर्मस में से गरम पानी एक कटोरे में उडेलता है आर एक कपडे से उसके चुतरो पे सकने लगता है...साथ ही साथ उसके भूरे छेद पे भी जिससे रचना की हलकी हलकी आह निकल रही थी और संभु का तम्बू और भी बड़ा होटा जा रहा था....कुछ समय बाद रचना बोली आआह्ह्ह बाबूजी बस्स अब आगे भी जरा सेक दीजिये...ऐया बोल कर वो घूम जाती है और अम्भु के सामने उसकी चिकनी चूत उभर आती है और संभु रचना की टांगो को एक दुसरे से अलग कर देता है और उसकी चूत की गुलाबी भाग को वो एकक बार के लिए देख कर और ज्यादा गरम हो जाता है ठीक यही हाल रचना का भी था उसकी भी चूत बह रही थी .........और उसका बहता हुआ रस साफ़ साफ़ संभु देख पा रहा था .......अब उसने कपडे और पानी को अलग रखा और बिस्तर पे चढ़ कर उसकी खुली हुयी चूत पे अपना मुह लगा देता है....और रचना की जोर की सिसकारी निकल जाती है क्युकी उसे अभी दोहरा दर्द और मजा मिल रहा था...एक तो इंजेक्शन का दर्द और संभु की चूत चटाई का मजा....तभी संभु के मन में ना जाने क्या आता है वो रचना की चूत के अंदरूनी हिस्सों को मुह में भर कर चुभलाने लगता है जिसे रचना को अधिक दर्द और अत्यधिक मजा आने लगता है और इसी क्रम में उसके टाँगे आपस में बंद होने लगती है.....लेकिन संभु अपनी पकड़ बनाये रखता है और वो उसकी चूत को लगातार चाटे जा रहा था और इससे रचना अब झड़ने के करीब आ रही थी और संभु के लंड में अब दर्द होने लगा था और अगले ही पल रचना झड जाती है और संभु अब बिस्तर से उतर कर अपनी धोती उठाने लगता है क्योकि वो जनता था इससे आगे वो कुछ कर नहीं सकता था.....नाही रचना इससे आगे बढती....उधर रचना बेचारे संभु को धोती पहनता देख रही थी मगर वो चाह कर भी कुछ नहीं बोल पायी ....धोती पहनने के बाद संभु रचना से मुखातिब होता हुआ बोला की बहु बच्चे आते होंगे चलो मुह हाथ धो लो और कपडे पहन लो ....रचना नंगी उठती है और उसकी लटकती हुयी चुचियो को देख कर संभु के लंड में दर्द होने लगता है क्युकी उसका लंड अभी भी खड़ा था.....
रचना कहती है की बाबूजी अगर आप कहे तो............उसके मन में ये बात आई थी की आप कहे तो मेरी चूत में अपना लंड डाल कर खुद को शांत कर ले मगर वो बात दबा ली.......बस इतना ही बोल कर वो रुक गयी.......
उसके मन की बात संभु भी थोड़ी थोड़ी समझ रहा था मगर वो देखना चाहता था की बहु के मन में आखिर है क्या ......संभु रचना को कहता है बहु वो सब छोरो कपडे पहहने है चलो जल्दी से हाथ मुह धो लो.....ऐसा कहते ही रचना नंगी ही बाथरूम में चली जाती है...और इधर संभु अपने लंड को बाहर निकाल कर मुठीयाने लगता है.....क्युकी उसका लंड बहुत दर्द कर रहा था इधर संभु मुठ मारने में लगा था तभी रचना नंगी बाहर आती है और संभु को देख कर हस देती है...तभी संभु का माल निकलने को होता है और वो जोर से आवाज निकालता है और रचना दौड़ कर उसके लंड को मुह में ले लेती है और अन्दर बाहर करने लगती है और अगले ही पल रचना के मुह में संभु का माल बहने लगता है और संभु को अत्यधिक आनंद आता है......रचना उठती है और संभु से कहती है की ये देखिये बाबूजी आपने मेरे चेहरे को फिर से गंदा कर दिया अब दुबारा मुझे मुह्ह धोना पड़ेगा....और ये कहते हुए वो उठ कर जल्दी से बाथरूम में जाती अहि और मुह धो कर बाहर आती है तब तक संभु भी अपने सही हाल में आ चूका था और रचना को अब वो कपडे पहनाने में मदद करता है.....इधर पार्क में रवि ने दो दिनों में हुए काण्ड का पुत्र ब्यौरा रजनी को सूना डाला डॉक्टर वाला वाक्य उसने थोडा बदल कतर सुनाया ....ये सब जान्ने के बाद्फ़ रजनी भी बोली की तो कम से कम मुझे इक्तिलाह तो दे देते ...खैर छोड़ो समझ सकते है .....
रवि - वो सब तो ठीक है मगर अब ये बताओ की तुम्हे मालूम है क्या की वो जो लड़का मेरे साथ उस वक़्त था वो कौन था,......
रजनी - नहीं क्यों कौन था वो....
रवि - वो मेरा छोटा भाई था अब मुझे तुम्हारे बारे में सब बताना ही होगा घर में वरना बात बिगड़ सकती है लेकिन मै सब संभाल लूँगा
रजनी - ओह्ह शीट मै बिलकुल भी नहीं जानती थी वरना....
रवि - कोई बात नहीं जान जाने दो जो हो गया सो हो गया अब वैसे भी कभी न कभी ये बात सब को बतानी ही थी....कल से भला आज ही सही ....और हसने लगता है और रजनी से कहता है की चलो अब तुम्हे घर के लिए निकलना चाहिए मै तुमसे कल मिलता हु ऑफिस में .....और वो उसे वह से ऑटो में बिठा कर घर निकलता है और इधर सौरव घर आ चुका था और वो मुस्कुराते हुए खाना निकाल रहा था संभु ने उससे पुचा भी तो उसने बोला रवि भईया को आने दो फिर बताता हु.....और माँ ये लो थर्मामीटर तुम्हारा बुखार नाप दू पहले...वो आ ही रहां था की संभु बोल पड़ा ला मै नाप देता हु.....और वो रचना की और घूमता है इतने देर में रचना ने अपना ब्लाउज के सारे बटन्स खोल दिए थे और उसकी दोनों चुचिया लटकती हुयी नुमयिन्दा हो रही थी जिसे देख संभु के लंड ने एक झटका खाया और पीछे से सौरव बोला वाह माँ क्या कहर ढा रही हो उफ़ और वो भी पीछे से आता है तभी दरवाजे पे दस्तक होता है......
दरवाजे पे रवि था संभु ने दरवाजा खोला और वो भी अन्दर हॉल में आ गया.....

रचना की खुली चुचियो को देख कर वो बोला ....
रवि - मा तुम तो ऐसे अपनी छाती खोले खड़ी हो जैसे अभी हम आये और उनको चूस चूस कर लाल कर दे....और वो आगे बढ़ता है और संभु उसके पीछे था जबकि सौरव नाश्ता निकाल रहा था सब की बाते सुनते हुए....
रवि और संभु को अपने तरफ आते देख रचना बोली - लाल करो या कुछ भी करो है तो तुम सब के ही और तुम तीनो का बराबर का हक़ है इसपे चाहे जो करो मसलो चुसो या लाल करो....और वो इतना बोल कर हस देती हैं......
उसके कहने का साफ साफ मतलब था कि अब उसकी चूत और गांड और मुह उसकी चुचिया उसका पूरा बदन अब उसके बेटो के साथ साथ संभु का भी है अब संभु भी रचना का भोग लगाएगा.... और संभु तो बिचारा कब से इसके ताक में था....औऱ तभी रवि रचना के खुले ब्लाउज को पूरी तरह से उतार देता है...और संभु उसकी पेटीकोट के नाड़े को खोलते देर नहीं करता रचना एक बार फिर हॉल में पूरी नंगी खड़ी थी.....
रवि रचना को गले लगा कर उसकी चुचियो का मर्दन करने लगता है जबकि संभु नीचे बैठ कर उसकी चुत की दरार पे जीभ फेरने लगता है साथ ही साथ उसके चुतरो को भी दबाने लगता है....और इस दो तरफा हमले से रचना की सिसकिया निकलने लगती है....
तभी सौरव पीछे से बोलता हुए आता है कि ओफ्फो अब चलो उठो दोनो सेवकराम और रवि भइया क्या तुम भी मा का बुखार नापने बोला था नाकि बुखार बढ़ाने को....रचना की सिसकिया बन्द हो जाती है मगर उसके बेचैनी से साफ साफ पता चल रहा था कि इससे वक़्त वो कितनी गरम और चुदासी महसूस कर रही है.....
सौरव रचना के इस भावना को समझ लेता है और कहता है घबराओ मत मा अभी बुखार का लोचा खत्म हो जाने दो फिर बराबर तुम्हारी बेचैनी का भी इलाज करेंगे...
इधर रवि रचना को पकड़ कर वही लिटा देता है....और उसकी चुचियो को आपस मे पकड़ कर सटा देता है और संभु उसकी चुचियो की दरार में थर्मामीटर घुसेड़ देता है और अपना एक हाथ से रचना की चूत पे फेरने लगता है....और इसका पुरा आनंद लेने के लिए रचना अपनी टांगो को पूरा फैला लेती है......और सम्भु अपनी तीन उंगलिया उसकी चुत में घुसेड़ कर घपाघप उसको उसके चरम की तरफ ले जाने लगता हूँ रवि और सौरव भी कुछ नही बोलते.......
कुछ ही देर में रचना की साँसे तेज होने लगती है...और रवि फटाक से रचना की चुचियो में रखी थर्मामीटर को निकाल कर सौरव की तरफ बढ़ा देता है और उसकी चुचियो को चूसने लगता है....सौरभ भी कुछ करता लेकिन उसने पहले बुखार देखने की सोची और ये देख कर वो बड़ा खुश हुआ कि रचना का बुखार अब नियंत्रण में था और कुछ दवाइयों के डोज लेने के बाद वो ठीक हो जाएगी....इधर दादा पोते ने मिल कर रचना को उसके चरम की तरफ तेजी से पहुचाने में लगे थे और हुआ भी ऐसा ही .....रचना एक संतुष्टिपूर्ण चरम का आनंद लेते हुए झड़ी थी.... और उसकी चीख ये बताने के लिए काफी थी कि वो अब पूरे तरह दे संतुष्ट हो चुकी है.....
सौरव बिचारा मुह ही देखता रह गया.....और रचना झड़ गयी....
सौरव - मुझे तो मौका ही नही मिला....और रचना हसने लगती है साथ ही साथ रवि और संभु भी....
रवि - कोई बात नही मेरे भाई मा कौन सा भागी जा रही है जब मन हो तब मा हमारे लिये अपनी टांगे खोल देगी.....
रचना उसकी इस बात पे शर्मा कर रह जाती है....
तभी सौरभ मुह बनाता हुआ कहता है ठीक है ठीक है...चलो नाश्ता करते है....
अब रचना उठ कर अपना गिरा हुआ पेटिकोट उठा कर पहन लेती है और फिर सब नास्ता करने लगते है और नास्ता करने के दरमियान ही सौरव बाकियो को रचना के बुखार का हाल भी बता देता है.....
नाश्ते के टेबल पे सौरभ रचना को बोलता है...

सौरव - माँ भइया ने आपके लिए एक बहु ढूंढ रखी है.....नाम वाम का पता नही बाकी सब रवि भइया ख़ुद बताएंगे....
रवि को इस हमले की उम्मीद नही थी और सब के हाथ एकाएक रुक गए थे....
रचना - रवि की तरफ देखते हुए ....
रचना - सौरव क्या बोल रहा है रवि.....
रवि - वो मा मैं एक अपने आफिस की लड़की को पसंद करता हु....रजनी नाम है हम दोनो एक दूसरे को प्यार करते है शादी करना चाहते है.....
रचना - वो सब तो ठीक है मगर मेरा क्या हमारे बीच जो रिश्ता बन गया है उसका क्या....क्या उसे पता है ये सब के बारे में.....वो कैसे इन सब को अपनाएगी अपनाएगी भी या नही कैसे पता....हे भगवान....रचना की बेचैनी को देखते हुये सौरव ने कहा शांत हो जाओ मा पहले रवि भाई की बात तो सुन लो वो क्या कहना चाह रहे है.....
रवि - मा मैं आपको सब बताता हूं तुम प्लीज शांत हो जाओ दरअसल मा मेरा ट्रांसफर होने वाला है कुछ दिनों में और सौरव की पढ़ाई और पार्ट टाइम जॉब यही कि है और फिर हम यही के रहने वाले है और अब अनजान सहर में फिर से सब कुछ शुरू से स्टार्ट करना हमारे बस की बात नही है तो मैं वह अकेला ही जाऊंगा और इसीलिए मैंने रजनी को अपनी तरफ से शादी की बात छेड़ी....
संभु - ये तू क्या बोल रहा है बेटा.... हम तुझसे अलग कैसे रहेंगे... पागलो वाली बात मत कर हम सब साथ जाएंगे....रही बात तेरे प्यार की तो वो तो तू आज ना तो कल करता ही और सौरव बेटा भी आज ना तो कल शादी करेगा ही....ये तो जीवन की सच्चाई है.....मगर बेटा ये सब फैसलो के लिए तू कम से कम हमसे हमारी राय ले सकता था
रवि - दादा जी मैं बताने वाला ही था मगर सौरव ने और रजनी ने नीचे आ कर सब गड़बड़ कर दिया....मेरे आफिस ना जाने से वो परेशान हो कर यहां चली आ रही थी और ये सब हो गया....
रचना - तो तेरा मतलब तू हमे हम सब को यहां छोर कर चला जायेगा....और कहा जायेगा किस शहर में
रवि- मा जबलपुर..... और मा मैं बराबर आता रहूंगा न मिलने.....और अभी मेरे जाने में वक़्त है माँ घबराओ मत....
रचना - मैं कहा कुछ बोल रही हु वैसे भी नई नवेली दुल्हन के सामने मेरे जैसे विधवा की कहा औकात....ठीक है बेटा जल्दी रजनी और उसके घर वालो से मिल कर बात पक्की कर आते है....क्यों बाबूजी ठीक है ना....
रवि - रुको मा मैं आपको दिल दुखाना नही चाहता था और आपने औकात की बात कर के अपना दुख जाहिर कर दिया है....मैं आपको इतनी आसानी से नही छोर कर जाने वाला.....अभी वक़्त है माँ....इधर रचना की आंखों में आंसू थे क्योंकि उसे अब उन सब की आदत हो गयी थी और उसके सुहाग के मिटने के बाद उसके जीवन मे सूनेपन को इन् लोगो ने दूर किया था और अभी इन् रंगों के आये हुए ज्यादा समय भी नही हुआ था और उनमे से एक ने जाने की फरमाइश कर डाली जो रचना को बर्दाश्त के बाहर हो रहा था.....और वो भी उसके सामने एक और चुदायी कि मूरत आने वाली थी और अगर वो भी इन् सब का हिस्सा बनती है तो फिर उसका जीवन में वो बात नही रह पाएगी जो आज है और वो इसी बात से चिंतित हो रही थी.....
और अगर रवि चला जाता है तो उसकी कमी उसको खलेगी दोनो ही सूरतो में रचना चिंतित हो रही थी....
रवि रचना के करीब जाता है और उसे गले लगा लेता है और कहता है बस अब रोना मत मा मैं कही नही जा रहा हु मैं रजनी से बात करूंगा.....
इतने में सौरव आ कर कहता है माँ तुम इस बात से निश्चिन्त रहो मैं तुम्हे कभी अकेला नही छोड़ने वाला.... मेरी दुनिया ही तुम हो और भइया की भी और दादू तो कब से तुम्हारे इससे दुनिया मे घुसने को बेताब है...और वो बोल कर हस देता है....उसका ये कहने का मतलब था कि माहौल थोड़ा ठंडा हो जाये मगर संभु के मन मे एक आस की लौ जल गई थी कि आज नही तो कल वो भी रचना को चोदेगा.....इतने में रवि रचना की पेटीकोट की डोरी को खींच देता है और रचना नीचे से नंगी हो जाती है और वो उसके गर्दन और कानों को चूमने लगता है और इधर सौरव बिना ब्लाउज खोले उसकी चुचियो को बेदर्दी की तरह बाहर निकाल देता है और उन्हें चूसने लगता है और अपनी दो उंगलिया रचना की गांड में घुसा देता है जिससे रचना चिहुँक जाती है इधर रवि रचना की चूत को हाथों में ले कर मसलने लगता है और रचना भी उसकी उंगलियो को रास्ता देते हुए अपनी टांगे फैला लेती है और रवि झट से उसके अंदर दो उंगलिया प्रवेश करा देता है और वो प्रवेश इतना जोरदार था कि रचना की जोरदार चीख निकल जाती है अब रचना को दोहरा मजा मिल रहा था जिसमे दर्द और उत्तेजना का मिश्रण था....और तभी संभु जो कि अपनी धोती में से लन्ड बाहर निकाल कर हिलाते हुए कहता है अरे बच्चो कमरे में तो चलो.....
कमरे में जाने से पहले रचना की चूत को मसलते हुए रवि ने एक करारा चमाट लगाया जिससे रचना की दर्द भरी चीख निकल गयी और पहली बार उसने रवि को गाली दे कर बोला क्या करता है हरामजादे...उफ़्फ़ मार डाला आह आह कितनी जोर से मारा है.......और उधर सौरव ने रचना के चुतरो पर दो चमाट खीच कर लगाए....जिससे उसके चुतरो में थिरकन आ गयी और उसे देख कर सौरव नीचे झुक कर उसके चुतरो को चूमा इससे दोहरे मार से रचना तड़प उठी और उसकी आँखों मे वासना और दर्द साफ साफ दिख रहा था जिसे देख कर रवि और सौरव रचना को प्यार से बोले कयामत ढाती हो मा कयामत...और फिर वे उठ कर रचना को नंगी हालत में कमरे की तरफ ले जाने लगा....इधर संभु कमरे में उनके साथ गया मगर वो जनता था कि उसको कुछ हाथ नही लगने वाला इसलिए वो दरवाजे से ही लौटने लगा.....

रचना संभु को जाते देख उनको आवाज दे कर बोली....बाबूजी आप कहा जा रहे है इधर आइये....हमारे साथ इधर ही रुकिए....
रचना की आवाज में जो मादकता थी उससे रवि और सौरव दोनो और उत्तेजित हो रहे थे और साथ ही साथ सोच भी रहे थे कि माँ सोच क्या रही है....संभु बोला कोई बात नही बहु मैं इधर ही ठीक हु....और वो वापिस बाहर बरामदे में आ कर सोफे पे बैठ कर रचना के गिरे हुए पेटीकोट को सूंघने लगता है और उसके साथ साथ मुठ मारने लगता है....
इधर कमरे में रचना अपने दोनों नंगे हो चुके बेटो से कहती है.......
रचना- बच्चो मैं सोच रही थी कि जब बाबूजी मेरे साथ हर चीज कर रहे है मेरा ख्याल भी रखते है घर का सब काम भी करने में हाथ बटाते है तो फिर उनको इस चीज से दूर क्यों रखु जबकि उन्होंने कभी भी मेरे साथ जबर्दस्ती नही करनी चाही अगर वो चाहते तो मुझे कब का भोग लगा चुके होते क्योंकि ऐसे कई मौके आये है जब मैं उनके सामने नंगी हुई हु और एक तरह से उन्हें खुला आमंत्रण भी दिया मगर उन्होंने कभी उसका फायदा नही उठाया....इसलिए मैं चाहती हु की वो भी तुमदोनो के साथ साथ मुझे भोगे.....संभु के लिए ऐसी बाते सुन कर रवि और सौरभ को भी की बात कही न कही से सही ही बोली है माँ ने....और दादू है भी अपने घर के जबकि वो घर मे रह कर भी कभी हमारी मर्जी के खिलाफ नही गए....इधर रचना ने जिस तरह से संभु के लिए दोनों बेटों से बात करि थी उस अंदाज़ से वो खुद में शर्मा गयी थी कि कैसे उसे उसके सुसर का लन्ड की प्यास उसकी तरफ खीच ले गयी और अपने दोनों बच्चो के सामने बेबाकी से बोल गयी.......
रवि और सौरव हस कर बोले वाह मा रवि भाई के जाने से पहले अपने लिए एक जुगाड़ लगा ही लिया....
रचना - चुप करो और बोलो कैसे उनको बुलाऊ.... क्योंकि उनको तुमदोनो की बात अभी गक जेहन में बैठी हुई है जो तुमदोनी ने उनसे कहा था कि तुमदोनो के अलावा मेरे साथ किसी का हक़ नहीं है मगर अब हालात क्या है तुमदोनो देख चुके हो....
रवि फिर से रचना की चूत पे चमाट लगाता है और रचना उछल जाती है और धम से बिस्तर पे गिर जाती है और अपनी चुत को सहलाने लगती है और कहती है कि ये क्या नया सीखा है तूने हाँ..... आह कितनी जोर से मारता है ....सौरव रचना के हाथों को हटा कर देखता है उसकी चुत बहुत ज्यादा लाल हो गयी थी... जिसे सौरव चाटने लगता है और रचना की दर्द भरी आहे अब लज्जत भारी आहो में बदल जाती है और रवि कहता है कि बस कर छोटे अभी माँ को दादू के पास जाने दो आज उनको भी अपनी दुनिया मे शामिल कर ही लेते है जब हमारी रानी मा का ही आदेश हो गया हो तो हमे कोई ऐतराज़ नही है....
सौरव - जी भइया ....रचना जो सौरव के चुत चटाई से जोर जोर से साँसे ले रही थी उसकी तरफ देख कर दोनों बोले जाओ मा दादू को मौका दो....और उद्धघाटन करवाओ अपनी चुदी हुई चुत का....
सौरव - हा माँ और साथ ही साथ अपनी भारी भरकम गांड का भी.....उफ़्फ़ मा अब तुम्हारी इस मंझि हुई जवानी पे तुम्हारे ससुर का भी राज होगा.....रचना अब उठ कर खड़ी हो गई थी और रवि और सौरव को बोली....मैं उन्हें बुलाने जाती ह और अगर वो वही शुरू हो गए तो तुमदोनो वही आ जाना....
रचना का कहने का मतलब साफ था कि अभी उसके ससुर और उसके बीच मे कोई नही चाहिए जब जरूरत होगी तब आना.....रवि और सौरव एक स्वर में बोले जैसी आपकी इच्छा मा.....
और रचना नंगी ही कमरे से बाहर चली जाती है हॉल में जहाँ संभु रचना का पेटीकोट लिए हुए सूंघ कर मुठ मारने में लगा हुआ था.....रचना ने जब ये दृश्य देख तो उसे बड़ी दया आयी कि हे भगवान सामने नंगी औरत होंते हुये भी बिचारे की ये दशा.....वो तेज कदमो के साथ चलते हुये सम्भु के पास पहुची और उसके हाथ से पेटीकोट ले कर फेंक दिया.... और संभु उठ खड़ा हुआ और बोला....क्या बात है बहु....तुम यहाँ कोई परेशानी हो गयी क्या......
रचना संभु के कंधे पे हाथ रख कर उसे वापिस सोफे पे बिठाती हुई खुद घुटनो पर बैठ कर उसके तरफ देख कर बोली.... जी बाबूजी परेशानी तो है और उसे ही दूर करने आई हूं यहां आपके पास....
रचना धीरे धीरे संभु की तरफ देखते हुए नीचे झुक कर उसके लन्ड को मुह में ले लेती है और संभु मजे के सातवे आसमान पर पहुच जाता है.....और वो रचना के सिर को अपने लन्ड की तरफ दबाने लगता है सुर रचना की चुसाई और तेज तेज होने लगती है वो साथ साथ उसके गोलियों को भी अपने मुह का शिकार बना रही थी.....

संभु - आह बहु ये क्या कर रही हो तुम जाओ बच्चो के पास वो राह देखते होंगे तुम्हारी.....आआआठहठह बहु ओफ्फो आह रचना क्या कर रही हो....अब बर्दाश्त नही हो रहा बहु.....इतना सुनते ही रचना झट से खड़ी होती है और अपनी दोनों टांगे फैला कर संभु के लन्ड को पकड़ते हुए उसे अपनी चुत के मुहाने पे लगा कर उसके इर्दगिर्द बैठने लगती है जिससे कि संभु का लन्ड उसकी चुत में घुसने लगता है.....इधर संभु भौचक्का से उसे देखने लगता है हालांकि उसका लन्ड अब भी खड़ा ही था और जब तक संभु कुछ बोलता या करता तब तक रचना की चूत संभु के लन्ड को निगल चुकी थी.... और संभु का लन्ड सीधा रचना की बच्चेदानी पे लग रहा था....रचना इस एहसास से ही झड़ गयी कि जब ये अंदर बाहर करेंगे तब कहा तक पहुचेगा उनका लन्ड.....और इधर संभु अब कुछ बोलने करने की स्तिथि में नही था....तभू रचना ने आगे बढ़ते हुए एक बार उसके लन्ड पे कूदी.... जो मानो संभु पल भर में समझ गया....और संभु ने एक झटके में अपना मुह उसकी चुचियो पे लगाया और दोनो हाथ से उसकी कमर को पकड़ते हुए अपने लन्ड को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया.....अजर आज पहली बार रचना को पेलने की खुशी उसके चेहरे पे मिलाजुला असर कर रही थी जिसमे चोदने की खुशी और ये नई बात होने का आश्चर्यपन भी था.....कुछ झतको के बाद रचना की एक करारी आह निकली जिससे सम्भु उत्तेजित हो अब सारे एहसासों को पीछे छोड़ते हुए.... उसे सोफे पे वही लिटा दिया और खुद जमीन की तरफ आ कर उसकी चुत में छेद करने लगा....।
और अब संभु के झटकों से रचना की दर्द और लिज्जत भारी आहे पूरे हॉल में गूंजने लगी.....वो अपने दोनों हाथ सोफे के पीछे की तरफ कर के उसके कपड़े को मरोड़ने की नाकाम कोशिश करते हुए अपनी उत्तेजना और दर्द को कंट्रोल कर रही थी इससे उसकी छातियां काफी बड़ी और चुसाउ लग रही थी जिसे संभु ने चूस चूस कर गिला कर रखा था.... जबकि संभु का लन्ड उसकी चुत के हर कोने में हलचल मचा रहा था.....रचना को संभु का लन्ड उसके पेट तक महसूस हो रहा था.....और संभु की ताकत कर क्या कहना ऐसे लग रहा था जैसे कि आज तक जितना उसने बर्दाश्त किया था आज वो सारी की सारी कसर निकाल लेने वाला था....संभु रचना की चूत में ताबड़तोड़ ठुकाई कर रहा था.....
इधर रवि और सौरव लन्ड को हिलाये जा रहे थे और अपनी माँ की धुआंदार चुदायी अपने दादू के हाथों देख रहे थे.....
इधर हॉल में संभु अब थक चुका था धक्के लगाते लगाते जिस बात को रचना ने बखूबी जान लिया था इसलिए वो चुदते हुए बोली बाबूजी आप नीचे आ जाइये.... और अगले ही पल रचना संभु के ऊपर थी ठीक वैसे ही जैसे चुदायी शुरू हुई थी....
इधर दोनो भाइयों ने आपस मे फैसला लिया यही सही वक्त है रचना के पास जाने का....और वो दोनों भाई हॉल में रचना के पास आ पहुचते है और कहते है......
रवि सौरव- मा अब जरा हमे भी आराम दो....आह क्या चुदायी हो माँ वाह ....और दादा जी आप अपने अपनी सारी बर्दाश्त की हद को आज पार कर डाला ....रचना और संभु रुक जाते है दोनों के दोनों हाफ रहे थे....इतने में रचना को सौरव दादू के गोद से उतार देता है और रचना की चूत से संभु का लन्ड निकल जाता है....
रवि - दादू अब आपको मा की गांड का भी सैर करना चाहिए क्यों मा है ना ....इतने में संभु उठ खड़ा हुआ और सौरव फट से सोफे पे लेट गया और रचना को भी अपनी तरफ खीच लिया.....रवि ने रचना को सौरव पे लेटने में मदद की औऱ सौरव ने अपना लन्ड झट से रचना की चूत पे सेट किया और अगले ही पल रचना की एक मादकता से भरी चीख निकली....और सौरव अपनी गर्मी रचना पे निकालने लगा जबकि इधर रवि रचना के मुह की ओर गया औऱ रचना ने उसके सामने आते ही गप्प से उसका लन्ड अपने मुह में भर लिया और अब हालात ऐसे थे कि रचना के चुत में सौरव का लन्ड और मुह में रवि का और उसकी दोनो चुचिया सौरव के मुह पे तांडव मचा रही थी और उसी को रवि अपने हाथों में ले कर बेदर्दी से मसल रहा था और उसकी घुंडीयो को कस कर अपने उंगलियो ने भीच रहा था जिससे रचना की चुत और भी ज्यादा बह रही थी....दर्द और मजे से रचना दोहरी हो चुकी थी मगर चुत की प्यास ऐसी की बुझते न बुझे.....इधर संभु रचना की गांड की फाकों को अलग कर के उसके छेद को देख रहा था....जिस गांड को आज तक उसने छुआ सेका दवाई लगाई जिसको सोच सोच कर मुठ मारा आज उसी गांड ने अपना मूसल घुसाने वाला था....उसने रचना की गांड को बेदर्दी की तरह इस क़दर अलग किया कि रचना के चुतर अब दो हिस्सों में फट कर अलग हो जाएगी....इस प्रहार से रचना के मुह से रवि का लन्ड बाहर निकाल दिया और जोर से चीखी और बोली बाबूजी बस कीजिए मेरे चुतरो के साथ आप क्या कर रहे है....इधर संभु उसके चुतरो को फैलाये जा रहा था और रचना की चीख तेज होती जा रही थी....और रवि अपना लन्ड रचना के चीखते मुह पे रगड़ रहा था और नीचे से झटके लगते सौरव ने रचना के चुत को एक पल के लिए भी आराम से नही रहने दिया ......थपाथप उसके लन्ड से रचना की ठुकाई चालू थी.... इधर संभु को रवि ने कहा दादा अब डाल व दो देखो मा कैसे चीख रही है आपके लौड़े के लिए....और इससे पहले रचना ये कहती कि गांड के छेद को गीला कर दे उससे पहले ही संभु ने रचना के कमर के इर्दगिर्द अपने पाव रखे एक पैर सोफे पे और एक जमीन पे और एक ही पल में रचना की सूखी गाँड़ में संभु ने लगभग आधा लन्ड पेल दिया जिससे रचना की गेंद फट गई और एक बहुत ही तेज चीख निकल गयी एक पल के लिए सब रुक गए क्योंकि चीख काफी तेज थी जो कि उनके लिये ठीक नही था....लेकिन तभी रवि ने रचना के बाल पकड़े और झट से अपना लन्ड उसके मुह में ठूस दिया और तभी संभु ने भी एक और झटका मारा और पूरा लन्ड रचना की सूखी गाँड़ में पेल दिया....और रचना को बेहोशी जैसी आ गयी क्योंकि संभु ने उसकी गाँड़ को ऐसे चोदा था जैसे उसकी कुवारी गाँड़ उसे मिली हो....और सभी ने अपना एक भी पल बिना गवाए रचना की तीन तरफा चुदायी शुरू कर दी......अब रचना को सहना बहुत ही मुश्किल हो रहा था मगर उसके तीनो छेदों में घपाघप लन्ड अंदर बाहर हो रहे थे......जो कि रुकने वाले नही थे....और उसकी गोल मटोल चुचियो की दुर्दशा करने में उन तीनों के हाथ और मुह अलग ही लगे हुए थे....बिचारि रचना अपने इससे दर्द और लिज्जत से भरी चुदायी को आज दरकिनार करने का सोचा क्योंकि आज उसने अपने ससुर को भी एक विधुर के जीवन जीने से बचाया था इतने दिन तड़पाने के बाद आज रचना ने खुद को उसके दोनों बेटों और एकमात्र ससुर को भी सौप दिया था और आज अपने दर्द के कारण वो नही चाहती थी कि इनकी ये उत्तेजना से परिपूर्ण चुदायी की रस्म अधूरी रह जाये.....
दो घण्टो तक सब ने अपनी जगह बदल बदल कर रचना के हर छेद को अच्छे से चौड़ा किया....और नतीजा ये हुआ कि रचना में जान एकदम नही बची थी.....और अंत मे सबने अपने अपने हिसाब से जगह पकड़ कर सुस्ताने लगे जबकि रचना धम्म से वही हॉल में नंगी टाइल्स की ठंडी जमीन पे नंगी अपने दोनों हाथ और पैर फैलाये...चुत से बहते रस जो पता नही तीनो में से किसका था के साथ लेटी हुई थी औऱ अपनी थकान और साँसों को काबू करने में मशगुल थी.....
रचना की चुदाई के बाद सब वैसे ही कुछ देर तक पड़े रहने के बाद.....सौरव उठा और बोला की भाई आज चलो कही घूम कर आया जाए और माँ का भी मन बहल जाएगा......तभी रवि सोचता है की आज अच्छा मौका है माँ को रजनी से मिलवाने का....आज उनको मिलवा देता हु और आज ही सारी बाते भी निपटा लूँगा...रवि को इस्स तरह से सोचते देख सौरव उसके पास गया और उससे फुसफुसा कर बोला क्या भाई रजनी भाभी को बुलाने की सोच रहे क्या......रवि - अबे साले तूने मेरे मन की बाते कह दी सोच तो यही रहा हु की आज तुम सब की मुलाक़ात करवा दु...वैसे भी मेरे बाहर जाने का दिन नजदीक है अब...जितनी जल्दी हो सके सब काम नीपटा ही लेना चाहिए........इधर रचना जो की अब तक नंगी अपनी टांगे फैलाये लेटी हुयी थी समभू झुका और जमीन पे उसके पास बैठ कर बोला

समभू - बहू आज से मुझे अपनी जिंदगी से कोई शिकायत नहीं रहेगी....बल्कि अब तो मै अपनी जिंदगी को और मजे से जीऊँगा....इस्स बात पे रचना उठ बैठी और समभू ने देखा की उसकी आंखो मे आसू थे....समभू कुछ कहता इससे पहले रचना अपनी भरी हुयी आंखो से बोली बाबूजी मुझे माफ कर दीजिये मैंने आपको इतने दिन इस्स वासनी की अग्नि मे जलने पे मजबूर किया.... मुझे मालूम ही नहीं चला की मै क्या पाप कर रही हु अंजाने मे ही सही मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गयी....और इतना कह कर उसने समभू को अपने छाती से सटा लिया...और समभू रचना की भारी भरकम चूचियो के बीच पीसने का आनाद से प्रफुल्लित हो उठा ...और अगले ही पल उसने रचना की एक छूछी को अपने मुह मे भर लिया.....और एर्क बार फिर रचना अभी कुछ देर पहले के चुसाई और काटाई के दर्द के कारण ...हल्के से चीख उठी...जिधर रवि और सौरव रचना और समभू के इस्स खूबसूरत मिलन को देख कर मन्द मन्द मुस्कुरा रहे थे.....तभी सौरव रचना के पीछे गया और जमीन पे बैठते हुये रचना की गाँड के आधे नुमाइंदा हो रहे हिस्से पे हाथ घुमाते हुये एक जबर्दस्त चिमटी काट लेता है और चिमटी काटना जारी रखते हुये रचना से कहता है की माँ अभी पूरी रात पड़ी है...चलो तैयार हो जाओ फिर घर आने के बाद हम तीनों तुम्हारी सेवा आज एक नए अंदाज़ मे करेंगे जिसे सुन रवि बोला नहीं भाई....बिलकुल भी नहीं.....वो दर्द माँ सहन नहीं कर पाएगी.....
तभी रचना समभू के चेहरे को अपने सिने से हटाते हुये दर्द मे कराहती कहती है क्यू बे कमीने ऐसी कौन सी अंदाज़ की बाते कर रहे हो तुमदोनों जो मै सहन नहीं कर पाऊँगी.... हा बोलो...
सौरव - क्यू इतनी उतावली हो रही हो माँ...वो सब रात को पता चल जाएगा.....रचना बोली ठीक है तो मेरा भी ये चैलेंज है मै कोई भी दर्द सहन करूंगी चाहे वो कैसा भी दर्द क्यू ना हो....ज्यादा से ज्यादा चुदाई होगी और क्या हो सकता है...और वो हस देती है जबकि रवि कहता है नहीं माँ तुम्हें ये नहीं कहना चाहिए था....
फिर सब तैयार होते है और बाहर जाने के लिए निकलते है.....आज रवि ने ओला की कैब बूक कर रखी थी....जिसे देख रचना बोली क्या बात है आज चार पहिया से ले जा रहे ....रचना ने एक सादी सी ऑरेंज रंग की साड़ी पहनी थी और एक काला रंग का ब्लाउज़....और सौरव ने उसको वो दोनों कपड़े बिना पेटीकोट के पहनाए थे बस उसकी कमर पर एक नाड़े जैसा रस्सी बांध कर उसकी साड़ी को टिकाया था....अगर इस्स वक़्त रचना कही भींग जाती तो उसकी कंचन काया उजागर हो जाती....रचना जानती थी की उसके तीनों आशिको ने उसे मिल कर ये कपड़े पहनाए है तो वो कही भी जाये वे लोग उसके साथ छेरखानी किए बगैर रहेंगे नहीं.....और रचना की चुत को अब मिलने वाले तीन तीन लंडो का स्वाद उसके रग रग मे बस चुका था जिसके कारण उसकी भी प्यास हमेशा अब लगी रहती थी जहा मौका हाथ लगता था वो बिना चुदवाए नहीं रहती थी...मगर आज बात कुछ और थी....वे लोग बाहर खाना खाने जाने वाले थे... और रचना ये जानती थी की उसकी चुत की सवारी उनके लड़ करे या फिर उनके हाथ मगर सवारी तो होनी ही थी ये तय है......इधर रवि को बड़ी ही अजीब सी स्थिति से गुजरना पड़ रहा था ...क्योकि उसे रजनी की मुलाक़ात आज अपने परिवार से करवा देनी थी.....इधर रवि ने मौका देख रजनी को उसके बताए पते पे अछे से सज कर आने का न्योता दे दिया था.....जिसके बाद रजनी ने आज खुद को अछे से तैयार किया था और वो निकल पड़ी थी अपने रवि को अपना बनाने के तरफ एक कदम बढ़ाते हुये..... आज रजनी ने ब्लू रंग की समीज और उजले रंग की सलवार पहनी थी जिसके नीचे उसने बकायदा टेप ब्रा और अपनी मनपसंद जाली वाली चड्डी पहनी थी जो की रवि को बहुत ज्यादा पसंद थी.....इधर रचना और बाकी लोग कार मे बैठ कर अपने गंतव्य की ओर बढ़ चले थे....आलम ये था की सौरव आगे ड्राईवर के बगल मे बैठा था....और पीछे समभू और रवि के बीच मे रचना...शाम के 7:30 बज रहे थे सड़क पर अंधेरा लगभग लगभग हो चुका था....सौरव बार बार पीछे मुड़ मुड़ कर उनलोगों को देख रहा था...क्यूकी उनदोनों ने रचना के बदन से खेलना शुरू कर दिया था...और इधर रचना की हालात खराब होने लगी थी.....बहुत मुश्किल से रचना अपनी सिसकियो को रोक रही थी....वर्ण जीसस वहशियाना तरीके से रवि और समभू उसे पागल बनाने मे लगे थे...उसस तरह से रचना ज़ोर ज़ोर से चीखना चाहती थी....दरअसल रवि रचना के चुत के लबो को खोल कर बड़ी बेदर्दी से मसल रहा था और साथ ही साथ उसकी चुत मे तीन तीन उंगलिया पेल रहा था जबकि समभू रचना की कमर मे हाथ घुसा कर उसके दोनों पैरो मे दूरी बनाए रखने की पूरी कोशिश कर रहा था जिससे रचना की चुत और ज्यादा ही बहने लगी थी...वो बार बार अपनी आखे बड़ी बड़ी कर के रवि और समभू की तरफ देखती मगर वे लोग तो बस मजे लौटने मे लगे थे...... इधर सौरव मुह बनाए उन्न तीनों को देख रहा था.....और साथ ही साथ ड्राईवर पे भी ध्यान रख रहा था...... तभी रवि के जादुई हाथो ने अपना कमाल दिखा दिया और रचना की हल्की सी चीख निकाल गयी झड़ते वक़्त.....जब तक वे लोग होटल पाहुच नहीं गए तब तक रचना की चुत वैसे खुली राखी समभू और रवि ने.....जिसे कभी रवि तो कभी समभू सहलाता....रचना बार बार कहती की रहने दो मत करो फिर से गरमी चढ़ जाएगी मुझे लेकीन वो मना नहीं कर रही थी.....खैर जैसे तैसे वे लोग होटल पाहुचे और बाहर निकलते ही रवि ने कहा...माँ हमारे साथ कोई और भी है....
रवि पास मे खड़ी रजनी की तरफ इशारा करते हुये उसे पास बुलाता है और वो आ कर सीधे पहले रचना और फिर समभू के पैर छूती है...और उठ कर सौरव को स्माइल पास करती है.....रचना रजनी को देख कर कहती है ये जरूर मेरे बेटे की पसंद होगी.....और वो उसका सर पकड़ कर चूम लेती है और कहती है... वाह रवि तू तो बड़ा छुपा रुस्तम निकला.... इतनी सुंदर बहू मेरे लिए ढूंढ रखी थी मुझे बताया तक नहीं.... समभू भी बीच मे बोला हा बेटा रवि हुमे तो लड़की पसंद है...वो रजनी से मुखातिब होते हुये कुछ कहने ही वाला था की रवि बोल पड़ा अरे भाई सारी की सारी बातें यही खड़े खड़े कर लोगे क्या चलो अंदर चलते है....और खाना खाते खाते बाते भी हो जाएंगी....सब को यह बात सही लगी और वो खाना खाने ही तो आए थे....सब अंदर गए जबकि सौरव और रवि खाना का ओर्डर देने के लिए निकाल लिए... इधर रचना और समभू रजनी से बोले बेटे तुम्हारे घर मे और कौन कौन है....

इस बात पे रजनी भावुक हो कर बोली....मैं एक अनाथालय में पली बढ़ी हु...वही की दायीं माँ ने मेरा भरण पोषण किया और आज मैं जिस मुकाम पे हु वो सब उनके बदौलत ही हु....वो मेरी सगी मा न सही लेकिन सगी मा से बढ़ कर है मेरे लिये.... मेरे जीवन मे उनके बाद अगर किसी ने प्यार के दो शब्द बोले तो वो है रवि जी.....उन्होंने मेरे रंग रूप और मेरे काबिलीयत को जाना और मुझे अपने काबिल समझा.... और अब तो मुझे मेरे पूरा परिवार मिल गया है आप सब के रूप में आप जैसी मा और दादू जैसे दादु और सौरव जैसे देवर जो कि छोटे भाई से कम नही मेरे लिए....इतना कह कर रजनी सर झुका कर सिसकने लगती है....जिसे देख रचना उठ कर उसके पास जाती है और उसे अपने गले से लगा लेती है....और कहती है एक जोर का लगाऊँगी अगर आज के बाद किसी को याद कर के रोई तो....इतने में रवि और सौरव एक वेटर के साथ वहां आ पहुचते है...
रवि - अरे भाई क्या वार्तालाप हो रही है तुमदोनो में जरा हमे भी तो बतलाओ....
रचना - कुछ नही बस अपनी बहू से कुछ बाते कर रही थी....
उसके बाद सबने ख़ाना खाया और फिर उसी दौरान शादी की बात भी तय कर डाली.... आज से ठीक एक महीने बाद शादी का दिन तय किया था....
होटल से बाहर आने के बाद रचना संभु और सौरव तीनो एक साथ घर के लिए निकल गए जबकि रवि और रजनी एक दूसरे के साथ....
होटल से निकालने के बाद सब लोग घर पाहुचे अभी इधर रवि रजनी को उसके घर के पास ले कर पाहुचा और वही अंधेरे मे उसे पकड़ कर उसके लबो को चूसने लगा साथ ही साथ रजनी की चूचियो को भी मसलने लगा जिसमे रजनी उसका पूरा साथ दे रही थी....अभी कुछ ही पल बीते होंगे की रवि का फोन बजा जिससे उन्नदोनों का ध्यान भटका और रजनी उससे शर्माती हुयी वही छोड़ कर अपने घर के अंदर भाग गयी...इधर रवि अपना फोन रिसीव करता है उधर से सौरव था...

सौरव - भाई घर पाहुचा दिये या नहीं....अभी और वक़्त लागने वाला है...
रवि - नहीं भाई रास्ते मे ही हु घर ही आ रहा हु....बोलो क्या हुआ....
सौरव - भाई एक नारियल की रस्सियों का गुछा लेते आना.....
रवि - क्यू वो क्यू भला उसका क्या करोगे...
सौरव - भाई आप समझा करो यार आज माँ को उसके चैलेंज के अनुसार दिखाना तो पड़ेगा न की दर्द भरी चुदाई किसे कहते है.....
रवि - अबे साले क्या खुराफाती आइडिया सोचा है मेरे भाई मेरा तो सोच कर ही ठनकने लगा है... यानि की माँ की आज बॉनडेज वाली चुदाई होगी....ओहोहों वाह भाई मजा आने वाला है आज तो वैसे तूने माँ को इसके बारे मे बतलाया है की नहीं....
सौरव - हा भाई बतलाया भी हु और तैयार भी कर रहा हौ...अभी दादा जी उसको नंगी कर के उसके बदन को चिकना कर रहे है....फिलहाल माँ के काँख चूत गाँड पैर इन्न सभी जघो के बाल साफ कर रहे है दादू क्रीम की पूरी बॉटल दादू ने खाली कर डाली है ये माँ पे दूसरी मर्तबा उन्होने क्रीम लगा रखा है....यहा तक की उन्होने माँ के गांद को फैला कर उसमे एक चिकने लकड़ी के टुकड़े को फसा कर उसके अंदर तक क्रीम लगाया है जिससे की माँ के बदन पे एक भी बाल तो ना ही रहे साथ ही साथ उसके अंदरूनी हिस्सो पे भी बाल एकदम ना रहे और उसस वक़्त माँ की जलन के कारण हालत देखने वाली थी मगर माँ को दादू और मैंने अपने नीचे दबा रखा था....
रवि - क्या मतलब एक राउंड चुदाई की कर ली क्या तुमदोनो ने....
सौरव - अरे नहीं मेरे भाई दरअसल माँ के पीठ पर मै बैठा था और टाँगो पे दादू जिससे माँ हिल भी नहीं पा रही थी बस अपनी जलन के मारे चिल्ला रही थी की अरे बस भी करो अब जला कर ही मानोगे क्या बहुत जल रही है बेटा अब छोड़ भी दो आह ओहह आहह ...और अपने हाथो को बिस्तर पे पटक रही थी.....मैंने क्रीम की बॉटल पकड़ राखी थी जिसे लगाने का काम दादू कर रहे थे.....
रवि - अबे सालो कुछ देर रुक नहीं सकते थे इस्स काम के लिए उफ़्फ़ क्या क़यामत ढाई तुमलोगों ने माँ पे बेचारी..... चल मै आया रस्सी ले कर कितने गुछे ले लूँगा...बोलो...
सौरव - भाई 4 गुछे ले लेना.... आज माँ को अछे से रगड़ना है...लाल लाल कर दंगे आज तो .....क्यू माँ है ना.....
रचना - पता नहीं क्या और कैसे कैसे तू ये सब सोच लेता है मेरे साथ करने के लिए....और वो झूठ मूठ का रोने वाले अंदाज़ मे कहती है हे राम कहा फसी मै आज.... आज तो मेरी खैर नहीं.....
सौरव - ठीक है भाई तुम रस्सिया ले कर आओ बाकी इंतेजाम मैंने कर रखा है....
रवि - बाकी इंतेजाम ....... से तेरा क्या मतलब है क्या क्या है बता मुझे अभी ही क्यूकी मुझसे रहा नहीं जा रहा.....
इतने मे रवि एक हार्डवेर की दुकान पे रुकता है..... और दुकानदार से 5 गुछे 50 रुपयो के ले लेता है नारियल की रस्सियों का गुछा और सौरव से बात करते घर की ओर निकाल पड़ता है.....
सौरव - भाई आज मैंने पूरा इंतेजाम किया है॥तुम आओ तो सही.... और इतने कह कर वो फोन काट देता है.....
रवि को जैसे अब बेचैनी के मारे रुकना मुश्किल हो रहा था,,,,
इसलिए वो तेज तेज कदमो के साथ घर की ओर चल पड़ा... अगले 7 मिन्टो मे वो घर के दरवाजे पे था...वो लगभग लगभग दौड़ते हुये घर की तरफ आया था और लिफ्ट छोड़ सीढ़ियो पे एक साथ 4-4 सीढ़िया चढ़ते अपने घर के दरवाजे पे पाहुचा था....घंटी बजाया उसने और दरवाजा खुलते ही उसके लंड ने एक करारा झटका खाया.....सामने रचना गीले बदन लिए नहाई हुयी अवस्था मे बिलकुल नंगी खड़ी थी....और रवि ने उसे ऊपर से नीचे तक निहारा जैसे उसके बदन पे मुलतानी मिट्टी का लेप किया गया हो...और उसके बदन से आ रही भिनी भिनी खुसबू उसको और भी मादक बना रही थी.... उसको अपने तरफ इस्स तरह से मंत्रमुग्ध हो कर देखते हुये रचना बोली बेटा यही खड़े रहने का इरादा है या अंदर भी आएगा चल अब रवि का जैसे ध्यान भंग हुआ वो हैरानी भरा चेहरा लिए कमरे मे दाखिल हुआ जहा समभू रचना के पीछे नहाया हुआ नंगा कड़ा खड़ा लंड लिए खड़ा था और रवि के आने के लिए जगह बनाते हुये रचना अपने ससुर के नंगे बदन से जा चिपकी ...उफ़्फ ...... माँ क्या क़यामत ढा रही हो .... इतना भी मत तड़पाओ माँ की आज हुमतिनों मिल कर तुम्हारी बदन की अंग अंग मे तड़प और दर्द दोनों पैदा कर दे....ऐसा बोल कर रवि रचना के गले लग गया और कुछ ही पलो मे रवि भी नंगा हो चुका था और वे सब अब बेडरूम मे मौजूद थे.... जहा सौरव ने पहले ही सारा कार्यक्रम सेट कर रखा था...जिसे देख कर रवि की गाँड फट गयी... उधर रचना के मुह मे तो जैसे जबान ही नहीं बची थी.... उसका हलक सुख चुका था...वही समभू मुसकुराते हुये कहता है वाह मेरे नन्हें शेर सारा बंदोब्स्त एकदम उस विडियो की तरह ही किया है... इसे सुन कर सौरव कहता है क्यू नहीं दादू आपने वो विडियो ही ऐसा दिखलाया और आपने इच्छा जाहीर कर के मेरे मुह की बात छिन ली.....
उसस कमरे मे सौरव ने एक लकड़ी का टेबल रख रखा था जिसपे वो रचना को लिटा सके और उस टेबल के किनारो पे रस्सी बांधने के लिए हुक जैसे बने हुये थे...ठीक वही दूसरी चीज थी कुछ तारे और एक बल्ब जैसी चीज ...और कुछ क्लिप्स रखी थी बैटरी वाली.... और दो नकली लंड रखे हुये थे....तकरीबन 8 8 इंच लंबे और 3 3 इंच मोटे जो बैटरी से चलते थे...सीधे शब्दो ने वाइब्रेटर कह सकते है.... ये सब सामान देख कर वे सब लोग आने वाले समय के लिए बहुत ही ज्यादा उत्तेजित थे...जबकि रचना की बोलती बंद थी.....
 


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