दो बेटों की विधवा मा
रात के वक़्त रचना को रवि एक पैकेट पकडाते हुए कहता है खोल कर देखो माँ कैसा है और हमे भी दिखाओ .....वो सब के सब अभी खाना खाने के बाद हॉल में बैठे थे संभु भी वही पे था .....

रचना पैकेट खोल कर देखती है और वो हैरान हो जाती है उसमे एक बहुत ही कामुक नायटी थी जो की एक बहुत ही झीने से कपडे की बनी हुयी थी.......
रचना उसे पैकेट से बहार निकलती है और उसे रवि और बाकी मर्दों को दिखाते हुए कहती है की ये क्या लाया है रवि तू मई ऐसे कपडे कब से पहनने लगी.....
रवि - माँ तुम भी न बुद्धुओ जैसी बाते करती हो ये मैंने खास तुम्हारे लिए लायी है इस्क्सो पहनोगी न तुम तो तुम्हे नंगी न होने का एहसास आएअगा और हमे तुम पूरी नंगी ही नजर आओगी .....
रचना - अच्छा बेटा वाह क्या जुगार लगाया है अपना तुमने .....
सौरव - वाह भाई वाह दिल खुस कर दित्ता तुस्सी माँ के लिए और कुछ नहीं लाये हो क्या ....
रवि - फिलहाल तो यही लाया हु अभी अगले महीने की सैलरी मिलने के बाद ही कुछ सोचूंगा .......
वैसे भी मेरा बस चले तो मै तो माँ को दुनिया की सारी खुशिया उसकी झोली ....नहीं नहीं उसकी चोली में डाल दू ....और हस देता है
रचना उसे आखे गोल कर के देखती है इस वक़्त उसने अपने बदन पे साडी लपेट राखी थी केवल और केवल साडी ......
रवि कहता है माँ जरा दिखाओ भी कैसी दिखती हो तुम इसमें ...अब इन्तेजार नहीं होता है ....वही संभु भी बरी उत्सुकता से कहता है हां बहु हमे भी दिखाओ जरा .....
सौरव - वाह बुढऊ बड़ी जल्दी है अपनी ही बहु को नंगी देखने में...हा देखो तो कैसे लौड़ा हाथ में लिए बैठे है जैसे की अभी अपनी बहु की चूत में पेल देंगे ....संभु सौरव के ऐसे व्यवहार से जरा सा दुखी हो जाता है.....
इधर रचना उतने देर में उन् मर्दों के सामने ही नंगी हो जाती है और साडी वही जमीं पे गिरा देती है जिसे सब मर्द अपनी सासे रोके देखते रहते है तभी...
सौरव - अब आ कर मेरी माँ की साड़ी को उठा कर उसे सही से कर के कमरे में रख आइये बैठे बैठे देख क्या रहे है .....माँ कही भागी नहीं जा रही है समझे ना....संभु बेचारा बेमन से उठ कर आता है और रचना की साडी को उठा कर समेटने लगता है जबकि रचना नंगी खड़ी हो कर उस नायटी में लगे हुए सील को तोडती है ....उसकी लटकती हुयी चुचिया और भारी भारी जन्घो के बिच की चूत की दरार हलकी हल्की बालो से ढकी हुयी काफी कामुक दृश्य बना रही थी तबाही सौरव अपना लंड निकल कर सुके टोपे को रगड़ने लगता है जबकि रवि आहे भार्फ्ते हुए कहता है माँ ये रंग तुम्पे बहुत फबेगा कमल लगोगी तुम ....तभी रचना उस नायटी को अपने गले से होते हुए अपने बदन पे ले आती है जिसे देखते ही सौरव और रवि दोनों के मुह से एक हि आवाज आती है माशाल्लाह माँ बहुत ही सुन्दर और सेक्सी लग रही हो ......
रचना के गोर बदन पे वो काली रंग की नायटी और उसके चुचियो पे बनी जालीदार डिजाईन जिसमे से उसकी चुचिया की घुन्दिया साफ़ साफ़ नजर आ रही थी और उसकी चुचिया की बिच की गहराई तो अलग ही कहर ढा रही थी और निचे की ओर उसकी चूत को आधा आधा साफ़ साफ़ देखा जा सकता था....
तभी रचना उन् दोनों के नजरो का पिछा करते हुए घूम कर उनको अपनी गांड दिखाती है जो आधे से भी कम ढकी हुयी थी और उसकी भारी भारी तरबूजे के जैसे चुतर नुमयिन्दा हो रखे थे ...इतना देखने के बाद रवि और सौरव उसके तरफ बढ़ ही रहे थे की तभी संभु की आवाज आती है बहु ये लो मेरी तरफ से......तीनो की नजरे संभु की तरफ घूम जाती है ......
संभु हाथ में एक चान्दी की पायल होती है जो वो रचना की तरफ बढ़ाते हुए कहता है बहु इसे भी पहन लो इस कपडे के साथ काफी जचेगी ...
सौरव - वाह बुढऊ काफी रंगीनिया छाई हुयी हिया दिमाग में वाह .....पहन लो माँ पहन लो ....
रचना उसको अपने हाथ में लेते हुए वही सोफे पे बैठ कर उसे पहन्न्ने लह्गती है ज्सिके लिए वो अपनी टांग उठती है जिसके कारण उसकी चूत के लब खुल जाते है और उसका गुलाबी छेद दिखने लगता है सब मर्दों की नजरे वही पे जम जाती है रचना बारी बारी से पायल को पहनती है और फिर उठ खड़ी हो कर सब को अपना बदन दिखाती है वो दोनों फिर उसकी तरफ बढ़ने लगते है और संभु अपने जगह पे ही जमाँ रहता है तभी रचना उनको रोकती है और कहती की अभी कुछ मत सोचना अभी मेरा पूरा बदन दुःख रहा है सुबह से बहुत चुसी गयी हु मै और मुस्कुरा देती है .....और वो अपनी गांड मटकाते पायल छाम्छामाते वहा से चली जाती है .....बाकी तीनो मर्द अहि सोफे पे बैठ जाते है ये सोचने के लिए की आज की रात कैसे कटेगी......
घर आने के बाद रवि सौरव से दादा के साथ कर रहे व्यवहार को ले कर बात करता है .......सौरव एक एक कार के सारे अपनी मंशाएं रवि को बताता है और टैब रवि बोलता है की दादा ऐसा व्यवहार से कुछ बोलेंगे नही.....

सौरव - उनहे तो अपनी माँ का बदन चाहिए जिसके लिए वो कुछ भी करने को तैयार है और यहां तक कि जब आज दोपहर में मैन उनके साथ ऐसी ही हरकत करी तो उन्होंने बिना कोई पलटजवाब दिए सारा कहना मानते गए.....आखिर करते भी क्यों न माँ के बदन को स्पर्श करने का मौका जो मैं उन्हें दे रहा था.....
ईन सब की ये वार्तालाप संभु भी खड़े हो कर सुन रहा था....ये सब सुन कर संभु की आंखों में आँसू आ गए उसने अपने पोतों और बहू के उनके प्रति ऐसी मंशा कभी कल्पना भी नही की थी.....
उसने सोच लिया था कि अगली सुबह ही वो वहा से चला जाएगा.....
कमरे में जा कर उसने सोचा की बहु के लिए मेरा उतावलापन देख कर ये लोग मेरे साथ ऐसा करने की सोच सकते है ....छी ,! आखिर मैंने किया ही क्या है जब ये लोग रचना के साथ ऐसा कर सकते है तो मै क्यों नहीं....और अगर मै चाहता तो इनके इस रिश्ते पे आपत्ति भी जाहिर कर सकता था........तभी वो सोचता है की कल सुबह मै इनसब का व्यवहार देखता हु फिर फैसला करूँगा....
इधर ये तीनो अपनी एक राउंड चुदाई के बाद सो गए.....
सुबह सब अपने अपने समय पे जागते है ....रचना आज एक सिम्पल नाइटी में थी उसके अंदर उसने कुछ भी नहीं पहना रखा था और सुबह सुबह की हलकी हल्की धुप आँगन में आ रही और उस धुप के कारन रचना की टाँगे और उसके हिलती हुयी चुचिया और उसके चुतरो का अक्स साफ़ साफ़ दिखाई पर रहा था जिससे संभु जोकि अखबार पढ़ रहा था उसका तम्बू सर उठाने लगा ...उसका गला सूखने लगा ....रचना ने आने के बाद ना तो संभु को चाई के लिए पूछा था नाही कोई और बात करी थी ....वो चुपचाप अपने काम में लगी हुयी थी
इधर सौरव और रवि आपस में बाते कर रहे होते है की आखिर दादा को ऐसा क्या कहा जाए की वो हमारे लिए झुकने लगे ....मगर कोई भी उपाय नहीं सूझ रहा था ...
इधर संभु अचानक से अपने मन से कहता है की बहु आज मै वापिस चला जाऊँगा मेरा जो भी फ़ालतू सामान है उसको निकाल के अलग कर दो मै बाँध लूँगा....
रचना - क्यों बाबूजी आपके पेंशन के पैसे आ गए क्या ...
संभु - उन् पैसो का सम्बन्ध मुझसे है तो उनकी फिकर तुम मत करो बहु ...संभु उखरे हुए स्वर में बोला
रचना हक्की बक्की संभु की इस बेरुखी को देखती है और कहती है जी बाबूजी
और कमरे में जाती है जहा सौरव और रवि थे
रचना आती है और उनके चेहरे को देखते हुए कहती है अरे ये सब छोड़ो बाबूजी यहाँ से जाने के बारे में बोल रहे है और कह रहे है की मेरा सामान बाँध दो मै आज चला जाऊंगा
रवि और सौरव सोच में पड़ जाते है की यहाँ तो उनका ही पासा उल्टा पड़ गया ...अब क्या करे....कम्र्फे में तीनो में गंभीर स्तिथि को भापते हुए कुछ देर तक बाते होती है फिर सब संभु के पास जाते है ....संभु अपने जाने की तैयारी में लगा हुआ था ....सौरव - क्या हुआ दादा आप काहनक जाने की बात क्यों करने लगे क्या हुआ ....संभु सीधे सीधे साफ़ साफ़ कह दिया की कल रात की साड़ी बाते मैंने सुन ली थी और मे अब ये समझ गया हु की तुमलोगों को केवल मेरे पैसो की कामना है और तो और य्त्तुम्हारे विचार मेरे प्रति क्या है वो मई देख चूका हु ....वो रोने लगता है ...
संभु - अरे मैंने तो तुम्हारे लिए कभी कोई गलत भावना मन में नहीं लाया जहा तक मैंने तुम्हारे बिच के इस नाजायज रिश्ते को भी कबूला और तुम लोग छि,,..!और वो कहता है जादा मत परेशां हो मै कुछ ही देर में निकल जाऊंगा यहाँ से और फिर तुम्हारे बिच कभी नहीं आऊंगा वो अपने लिए ट्रेन की टिकट लेने बाहर चला जाता है...
ये लोग बाहर हॉल में आ कर बैठते है और इस मुद्दे पे बात करते है और फैसला ये होता है की रचना को बाबूजी को यहाँ से जाने को रोकना पड़ेगा ...रचना को समझाया गया की उनको केवल तुम्हारे बदन से खेलना है वो तुम्हे भोगना चाहते है ....मगर उनको इसके अलावा किसी और बहाने से मनाना होगा .....
रचना - अगर उन्होंने कोई ऐसी वैसी बात कर दी तो फिर मै क्या करुँगी ...देखो मै साफ़ साफ़ कहे देती हु मुझे उनको भोगने का सुख कभी नहीं मिलेगा मै केवल तुमदोनो की ही हु और रहूंगी समझे न ....
सौरव - माँ जायदा जज्बाती मत बनो ..रवि भाई माँ को समझाओ ...अभी कैसी भी दादू को रोकना ही होगा ...जादा हुआ तो माँ की चूत गांड न सही उनका मुह ही भोगने दे देंगे कम से कम उस्नको ये सुख तो मिलेगा की उनको उनकी बहु का कोई एक छेद तो मिला.....
वैसे भी माँ की चूत वो चाट ही चुके है और माँ नंगी भी रहती है उनके सामने तो ऐसे में किसी का भी मन होगा ......
रवि - अच्छा चलो कोई नहीं पहले उनको आने तो दो फिर देखते है की क्या होता है .....
रचना ने सारा पैक किया हुआ सामान वापिस से कमरे में रख दिया और इस बार उसने संभु का बिस्तर अपने कमरे में शिफ्ट कर दिया ....
संभु कुछ देर ने वापिस आया और आते के साथ चिल्लाते हुए लगभग कहा की बहु मेरा सामान और कुछ खाने के लिए दे दो बस यही तकलीफ दे रहा हु...दे दो मै निकलने वाला हु कुछ देर में मेरी गाडी आ जाएगी....बहु ओ बहु ...तभी हॉल में तीनो एक साथ आते है और रचना सीधे जा कर संभु से लिपट जाती है और कहती है बाबूजी हमे माफ़ कर दीजिए हमने आपके लिए ऐस्सा सोचा और रोने लगती है ....उधर सौरव और रवि भी रचना की हां में हां मिलाते है ...संभु रचना को एकदम से अलग करता हुआ बोला...
संभु - देखो तुमसब को मै कुछ नहीं कह रहा हु और नाही बोलूँगा उस वक़्त जो कुछ भी मैंने कहा उसके लिए माफ़ी चाहता हु गुस्से में मै बोलता चला गया मुझे माफ़ कर दो ...मै अब यहाँ से जा रहा हु अब तुम्हारे लिए कोई तकलीफ नहीं दूंगा और अपने कमरे में चला जाता है जहा अपना सामन ना देख कर वो वापिस से हॉल में आता है और सामने देखता है रचना नंगी खड़ी है और सौरव और रवि एक साथ कहते है ....
दादू अब हम आपको ऐसी किसी भी बात के लिए नहीं बोलेंगे हमसे गलती हो गयी और अब माँ आपको भी संतुष्ट कर दिया करेगी इसके लिए माँ ने ही अपने कहने पे आपका बिस्तर अपने कमरे में लगवाया है ...देखिये कैसे माँ अभी आपके सामने खड़ी और वो रचना को संभु की बाहों में जाने बोलते है ...रचना फटाक से उसके पास चली जाती है और तभी संभु एक हाथ से उसे रोकते हुए कहता है की देखो मै नहीं जनता की तुमलोगों के दिल में मेरे लिए प्यार है या मेरे पैसो के लिए ...रवि संभु की बात को बिच में काटते हुए कहता है की दादू आप से सब बातो के लिए हमने माफ़ी मांग ली है अब प्लीज़ हमे माफ़ कर दीजिये .....और अपना गुस्सा शांत कर लीजिये प्लीज ..संभु नंगी रचना को अपने सामने देख रहा था और रचना ने फटाक से आगे बढ़ कर संभु की धोती में हाथ घुसा कर उसके लंड को पकड़ लिया और उसे बाहर निकाल कर चूसने लगी अब संभु को बर्दास्त करना मुस्किल हो गया और उसने उसके बालो को पकड़ कर घपाघप अपना लंड उसके मुह में पेलना शुरू किया और रवि और सौरव इस गरम दृश्य को देख कर उत्तेजित हो जाते है ...और वही पे नंगे हो कर रचना की तरफ टूट पड़ते है.......घुटनों के बल बैठी रचना..... संभु अपनी आखे बंद किये उसके बालो को मुट्ठी में भरे हुए अपना लंड चुसवा रहा था और इधर रवि उसकी लटकती चूची पे टूट पड़ता है और सौरव निचे झुक कर रचना की गांड की छेद और चूत की दरार में जीभ से आक्रमण कर देता है और इस तिन तरफ़ा हमले से रचना काफी उत्तेजित हो गयी और संभु के लंड को और तेजी से चूसने लगी ....जिसका नतीजा ये हुआ की संभु आज पहली बार रचना के मुह में झडा और उसका वीर्य आज बर्बाद नहीं गया ...रचना को हैरानी हुयी कि सम्भु ने रवि और सौरव से भी जादा माल उडेला था ...इधर रवि और सौरव रचना को फर्श पे वही लिटा देते है और सौरव फटाक से रचना की गीली चूत में लंड पेल देता है और सौरव अपना लंड रचना के मुह में वही संभु अपनी भारी सासों को काबू कर रहा था ....रवि और सौरव के झड़ने के बाद रचना उठी और संभु से पूछी ....बाबू जी हमे एक बार फिर से माफ़ कर दीजिए बहुत गलत थे हमलोग ....
संभु - मै तुमलोगों से गुस्सा कहा था मै तो बस तुमलोगों के लिए रुककावट नहीं बनना चाहत था ...और कोई बात नहीं मगर मुझे क्भुसी है की तुमलोगों ने मेरी परेशानी को समझा ....और हां बहु मै तुम्हारी उस हसरत को जनता हु की तुम केवल इनकी ही हो तुम्हारे दोनों छेद ....उसका इशारा रचना की चूत और गांड की तरफ था ....इनके ही है और मेरा उनपे कोई हक नहीं है मगर मै तुम्हारे इस कदम से ही खुश हु और संतुष्ट भी ....रचना मन ही मन संभु पे बहुत प्यार आता है वही सौरव और रवि ने भी राहत की साँस ली
अब ठण्ड का मौसम आ गया है इन् सब की जिंदगी जैसे चल रही थी ...घर के अंदर वैसी ही है मगर बाहर की दुनिया में कई बदलाव आ गए है इनके जीवन में ...रचना की भी अब मोहल्ले में कई औरतो से दोस्ती हो गयी है मगर वास्ता वो केवल घर के बाहर तक ही रखती है.....

संभु भी अब सुबह सुबह सैर पे निकलता है तो उसके भी कई दोस्त बन गए है जो की सब के सब विधुर है (जिनकी पत्निय इस दुनिया में नहीं है) पार्क में टहलते वक़्त ये लोग केवल अपने आस पास टहल रही लडकियों और औरतो के बदन को ले कर ही चर्चाये करते रहते है...इतने महीनो में संभु ने अपनी बहु रचना के बदन को भोग नहीं पाया था वो आज भी केवल रचना की चूस कर ही संतुस्ट हो जाता था और रचना उसका भी ऐसे ही संतुस्ट करते आ रही थी ....और संभु ने अपने इस रिश्ते के बारे में अपने सैर मंडली में किसी को नहीं बतलाया था ...उसके ग्रुप में पांच लोग थे सब के सब अपने जीवन के बचे आखिरी कुछ सालो को जी रहे थे ....
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रवि भी अब अपने कम्पनी में सीनियर मेनेजर बन गया था तो राजस्व में अब कोई कमी नहीं थी ..उसकी भी जिंदगी में उसकी माँ के अलावा कोई और आ गयी थी जिसकी जानकारी सब को थी ...रजनी.....रवि के ऑफिस में ही काम करती थी और रवि की जीवन संगिनी बन्ने की सपने बुन रही थी ......दोनों में काफी अछे सम्बन्ध थे बस जिस्मानी रिश्ते को छोड़ कर .....इनका भी जीवन मजे से कट रहा था ....
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अब बारी आती अपने असली हीरो सौरव बाबु की ...इन्होने भी अपने पार्ट टाइम जॉब से संन्यास ले कर घर पे ही रहते थे और अब पूरी तरह सरकारी नौकरी की तैयारी शुरू कर दी थी ......कोचिंग क्लास की कई लडकियों की रात और दिन ये भी रंगीन बना चूका था ......फिलहाल ये बस इतने पे ही थे और अभी शादी का कुछ सोचा नहीं है ....
यहाँ से आगे कहानी एक मोड़ लेगी ...कमेंट्स का वेट है अपडेट कमेंट्स के बाद दूंगा दोस्तों..
रचना और उसका परिवार अब एक अपार्टमेंट में रहने लगे थे वो भी सबसे उपरी माले पे ...रवि की पदौन्नती के बाद से ये सारे बदलाव आ गए थे उनमे और पुराने घर को किराए पे दे दिया था और संभु ने वाराणसी वाला घर भी किराए पे दे रखा था औउर उसकी पेंशन बदस्तूर जारी थी रचना के परिवार में चौतरफा पैसे आ रहे थे और इन् कुछ महीनो में ही उनके जीने का तरीका काफी हद्द तक बदल गया था रहने खाने अपने बूढ़े दोस्तों संग काफी वक़्त गुजारने लगा था क्योकि जितने भी उसके साथ के लोग थे सब के सब रिटायर्ड थे कोई डॉक्टर तो कोई बैंक वाला तो कोई पोलीस वाला कोई खानदानी किरानी का दूकानदार और एक था उस अपार्टमेंट का सेक्रेटरी.......इन् सब बुड्ढो ने अपनी सेटिंग भिड़ा रखी थी पार्क में हुयी गरमा गरम बातो को हकीक़त में ये लोग अपनी सेटिंग पर आजमाते थे....

डॉक्टर साहब ने अपने क्लिनिक की एक जवान नर्स को ही फसा रखा था...वही पुलिस बाबु ने अपने पुराने कॉन्टेक्ट्स के बल पर अपने लिए लडकियों का इन्तेजाम कर लिया करते थे ....
किरानी दूकानदार एक एजेंट से लडकियों का इन्तेजाम करवाता था ....अब बचे बेचारे सेक्रेटरी साहब ये बिचारे अभी भी मुठ ही मारते थे क्योकि इनके पास न कोई एजेंट था नाही कोई पुराने कॉन्टेक्ट्स और नाही कोई सेटिंग ....बस अपने अपार्टमेंट की बहु बेटियों और औरतो को देख कर आहे भरते रहते थे और फिर मुठ मार का खुद को शांत करते थे.....दरसल इनके एकलौते बहु और बेटे विदेश में रहते थे ....इंडिया आना कम ही होता था उनका और सेक्रेटरी साहब का खाना पीना अपार्टमेंट के कंपाउंड में ही बने मेस से होता था.....
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.. अब चलते है अपने कहानी के असली किरदारों की तरफ ......रचना में अब काफी बदलाव आ गये थे ....पहले के मुकाबले वो अब ज्यादा चुदवाने लगी थी और कपड़ो में भी काफी बदलाव आ गये थे अब वो ब्रा पहनने लगी थी जबकि पैंटी के मामले में उसका कहना था की इसको पहनने से उसको काफी दबा दबा सा महसूस होता है ......रात को सोते वक़्त काफी सेक्सी सेक्सी नाईटी पहनने लगी थी.....और अब वे चारो एक ही कमरे में सोते थे और ऐसा कोई दिन नहीं जाता था जब रचना के तीनो छेदों में लंड न जाता हो .....
घर के अंदर रचना एक कामुक स्त्री थी जबकि बाहर एक सीधी साधी औरत ....मगर सेक्रेटरी साहब को उसके पहनावे को देख कर उसपे शक जरुर होता था...जबकि रचना को उनकी नजरो से साफ़ पता चलता था की वो उसे चोदने की नजरो से देखते है ........
आज सन्डे था और सब मर्द घर पे ही थे ...रवि रजनी से फ़ोन पे बाते कर रहा था जबकि सौरव रचना जो कपडे ठीक कर के रख रही थी को छेड़ रहा था और संभु दाढ़ी बना रहा था....आज ठण्ड बहुत ज्यादा थी ...और ऊपर से छुट्टी का भी दिन था...इसलिए रचना ने सब के सामने एक प्रस्ताव रखा की आज कही बाहर घुमने चला जाए और रात का खाना बाहर ही खा कर आएँगे ...और साथ साथ कुछ कपडे भी खरीदेंगे.....सौरव ने भी हां में हां मिलाते हुए कहा की हां भाई चलो चलते है ...तभी रवि ने कहा की माँ मुझे आज एक जरुरी काम से कही बाहर जाना है तो मै नहीं आ पाउँगा...तुम दादा और सुरु के साथ चली जाओ...अगली बारी पक्का मै भी आऊंगा माँ बहुत जरुरी काम है वरना मना नहीं करता .....रचना उसे कहती है की आज तो इतवार है आज कौन सा काम है....
रवि - माँ है न काम तभी तो जा रहा हु ...रात को देर से लौटूंगा ...और वो तैयार होने चला जाता है ....
दरअसल आज रवि और रजनी एक होटल में मिलने वाले थे और आज उनके प्यार पुरे परवान पे था .....इधर रचना रवि के जाने से दुखी हो आगयी और उसने बाहर जाने से मना कर दिया मगर सौरव ने उससे जिद किया तो वो मान गयी वही संभु ने भी साथ आने का आग्रह किया तो वो उसे भी ले जाने को तैयार हो गये ...इधर रवि सभी को आता हु बोलते हुए निकल गया .......इस वक़्त रचना एक नाईटी में थी जिसमे से उसकी बिना ब्रा की चुचिया आधे से जायदा दिख रही ठिऊ और उसकी जांघो के निचे का सारा भाग नंगा था .........रचना को सौरव ने कहा की माँ चलो फटाफट तैयार हो जाओ हमे निकलना है....और उसने आगे बढ़ कर रचना की नाईटी को खीच कर उसे नंगी कर देता है जिससे देख कर संभु की सासे अटक जाती है वो तुरत बोल उठता है की सौरव क्या तू भी ऐसी हरकते क्यों करता है जनता है मुझे परेशानी होती है और वो भी उठ कर अपना धोती खोल कर गिरा देता और अपना फनफनाता हुआ लंड रचना और सौरव के सामने कर देता है .......रचना मन ही मन सोचती है की कैसे उतावले हो जाते है ये अगर मै इन्हें कह दू की मई आपका लंड अपनी चूत और गांड में लेना चाहती हु तो अभी के अभी ये मुझे चोद दे ...और वो हस देती है...तभी संभु आगे बढ़ कर रचना की एक चूची की दबा देता है और साथ ही सतत उसकी चूत को सहलाने लगता है जिससे रचना अपना सर ऊपर कर के आह करने लगती है तभी सौरव आगे बढ़ कर संभु को अलग करता है और कहता है की बस दादू बस अभी हमे बाहर भी जाना है चलिए तैयार हो जाइये ....
रचना फटाक से बोल पड़ी की नहीं अभी आप दोनों ले क मुझे बाथरूम चलिए और वह मुझे गरमा गरम पानी से नहलाइए तब जा कर तैयार हो कर निकलेंगे मार्केट ....सौरव बोला वैसे माँ आपको आज हमारे साथ मार्किट जाने की कैसे सूझी .....
रचना बोली की तुमने ही मेरी आदत बिगाड़ी है मुझे इतने अच्छे अच्छे ब्रा और नायटी ला कर देने की अब आज मुझे कुछ नए लेने का मन किया तो सोचा की तुम्हारे साथ ही चलती हु साइज़ देख कर लुंगी तुम हमेशा तुम मेरी साइज़ से छोटे ही लाते हो जिससे मुझे परेशानी होती है ज्यादातर वक़्त मुझे उन्हें उतार कर ही रखना पड़ता है .....जिससे तुमलोग मुझे निचोड़ते रहते हो....वो अभी भी नंगी खड़ी थी ...तभी सौरव ने कहा की माँ कोई नहीं आज आप अपने हिसाब से कपडे ले लेना वो भी वही पहन कर चेक कर लेना तुम....इतना कहते हुए वे लोग बाथरूम में आ गये तभी संभु बोला की बहु वहां उस दूकान में कैसे कपडे देखेगी वो भी पहन कर ....रचना भी बोली हां ये कैसे करुँगी मै.....सौरव बोला की माँ वो दूकान मेरे एक पहचान के अंकल की है तो आपलोग ज्यादा तेंतिओं मत लो वैसे भी मेरा बस चले तो मै तो तुम्हे यही से नंगी ले जाऊ ....और वो आगे बढ़ कर उसके चुतरो को कस कर दबा देता है और एक थप्पर भी जमा देता है...जिससे रचना चिहुक जाती है .....
संभु - मगर वहा उस दूकान में कैसे....
सौरव - दादू उन् अंकल को मैंने बता रखा है की मैंने इनको पटा रखा है तो आप चिंता मत कीजिए और वो खुद हमसे जादा रंगीन मिजाज के है....समझे आप....... रचना - मगर फिर भी ...
सौरव - माँ वह उनके दूकान में एक कमरा है वही चलेंगे ना तुम चिंता मत करो .....
संभु - और मै क्या कहूँगा .....की मै कौन हु..
सौरव - आप भी इनके सेटिंग का एक हिस्सा है बस ...और आज माँ वहां नंगी होंगी देखिएगा और माँ आप कोई ना मत कहना ....चुप चाप जैसा मै करता हु आप करती जाना समझी ना
रचना - उसके गले में बाहे डालते हुए जैसा तुम कहो मेरे बेटे.....
फिर वे लोग नहाते है और गरमा गरम पानी में नहाते वक़्त रचना की चूत और मुह दोनों एक बार फिर से बज जाते है .....बाहर आ कर ये लोग तैयार हो कर मार्किट निकल जाते है रास्ते में इन्होने सोचा की अभी सबसे पहले मॉल जाएँगे वहा वे लोग घर के लिए कुछ छोटी मोटी खरीददारी करेंगे फिर वहा से वे लोग ढाबे पे जा कर कुछ खायेंगे और फिर शाम को एक मूवी देखने का सोचे मगर यहाँ जाना अभी कन्फर्म नहीं था क्योकि कार्नर सीट्स मिलनी बहुत मुश्किल थी...और रचना को ले कर कार्नर सीट्स में ही जाना सही रहता वो भी तब जब मूवी जूली 2 जैसी हो....उसके बाद ससे अंत में इन्होने सोचा की अंकल के दूकान पे जाएँगे जहा रचना अपनी खरीददारी करेगी....
इधर रवि रजनी को ले कर एक रेस्त्रौंत में गया जहा इन्होने खाना खाया और फिर वह से ये लोग मोटरसाइकिल पे सवार हो कर अपने होटल की तरफ चल दिया जहा इनका रूम बुक्ड था ....होटल पहुच कर कमरे में पहुचते ही रवि रजनी को बहो में जकड लिया ...रजनी उसके इस उतावलेपन को देख कर बोली की रवि मै कही भागी नहीं जा रही हु मै तुम्हारी ही हु.....
रवि - जाना अब बस भी करो आज मत रोको मुझे ...आज उझे तुम्हारे इस हुस्न को पि लेने दो जिसके लिए मैंने और तुमने इतना इन्तेजार किया है आज वो पल हमारे सामने है ....और वो रजनी के होठो पे अपने होठ जमा देता है ...आज दोनों में से कोई रुकने को तैयार नहीं था अब दोनों हवस के दरिया में गोते लगाने लगे थे ...कुछ ही देर में रजनी के समीज के चेन पे रवि ने उसको उसके बदन से अलग कर दिया और साथ ही साथ उसके सलवार को भी अब वो उसके सामने केवल एक लाल रंग की ब्रा पैंटी में थी .....और यही हाल रवि का भी था वो भी एक अंडरवियर में खड़ा था ......और उसका तम्बू साफ़ साफ़ दिख रहा था जिसे देख कर रजनी की सासे अटकने लगी थी ....रवि ने उसे कहा की जान घबराओ मत मै तुम्हे ज्यादा दर्द नहीं दूंगा .......रजनी उसे अपने ऊपर खीच कर कहा की भरोसा है तुमपे और वैसे भी इस दर्द को झेलने के लिए ही इतने दिन इन्तेजार किया है .....
रवि - वाह जान दिल खुश कर दिया.....और वो उसे ले कर कम्बल में घुस जाता है...और फिर शुरू होती है घमासान लड़ाई....अगले कुछ ही देर में रवि ने रजनी के ब्रा के हुक को खोल कर उसके बदन से अलग कर दिया और वो उसकी गोल गोल सुडौल मुलायम चुचियो पे टूट पड़ा और रजनी की सिसकिय तेज होती जा रही थी आज उसके जीवन में पहली बार किसी ने इस्पे मुह लगाया था और वो इस आनदं को पूरी तरह से जीना चाहती थी तभी रवि झुकते हुए निचे आया और उसके कमर पे अपने दातो से उसकी पैंटी में फसाते हुए उसे निचे खीचना शुरू किया और अब रजनी उसके सामने पूरी तरह से नंगी लेटी हुयी थी ....रवि भी अपने बदन के एकमात्र कपडे को उतार कर नंगो हो गया और उसके ऊपर आ गया और फिर से उसके होठो को चूसने लगा.....फिर धीरे धीरे वो निचे आता गया और उसकी अनछुई बिना बालो की एकदम चिकनी चूत पे मुह लगा दिया जिससे रजनी चिख उठी ...ऊओह्ह्ह्ह रर्र्र्राआव्व्वी आःह्ह्ह अब रवि ने उसकी टांगो को फैला कर उसकी चूत में लपालप अपनी जीभ से हमला करना शुरू किया और तुरत ही रजनी झड गयी और उसका सारा पानी रवि के चेहरे पे आ गया उसके जीवन का ये पहला चरम सुख था......रजनी और रवि दोनों को अब बर्दास्त करना मुश्किल हो रहा था रवि ने अब अपना लंड पे अपना ही थूक लगा कर उसके चूत के मुहाने पे टिकाया ...इस स्पर्श को पाते ही रजनी फिर से चिहुक गयी और वो एक बार फिर से झड गयी .....रवि झुक कर उसके होठो को चूसने लगा और इधर एक करारे झटके के साथ उसने अपना लंड का टोपा ९उस्कि चूत में घुसा दिया ...जिससे रजनी की चूत की झिल्ली फट गयी और रजनी की आँखे बाहर आने लगी मगर रवि उसके होठो को चुसे जा रहा था और उसने कुछ देर रुक कर उसके चूत में एक और करारा झटका मारा और अपना पूरा लंड उसकी चूत में घुसेर दिया ......जिससे रजनी बुरी तरह छटपटाने लगी रजनी ने उसके पीठ पे नाख़ून गारा दिए मगर रवि के बलिष्ठ बाहों के शिकंजे में वो एकदम सिकुड़ कर रह गयी ....रवि ने कुछ देर रुक कर रजनी को शांत होने दिया और इस दरमियाँ वो उसके होठो को चूसता रहा ....रजनी के शांत होने पे उसने उसके होठो को छोरा तो रजनी ने उसे कहा की कितना हब्शी लंड है उसका उसकी चूत एकदम फट गयी होगी आह माँ मै मरी माँ....... और सुबकने लगती है साथ ही साथ रवि के पीठ पे मुक्के मरने लगती है की उसने उसपे जरा भी दया नहीं दिखाई .....उफ़ मेरी तो जान हलक में आ गयी थी....
रवि - कोई बात नहीं जान आखिर में मैंने तुम्हे पूरी तरह से अपनी बना ही लिया
रजनी - अभी कहा जनाब पहले शादी की रसम निभाइए फिर ये बात कहियेगा.....
रवि - जरुर मेरी जान... और वो उसके होठो पे फिर से अपने होठ जमा देता है ......और फिर दोनों अपने आलिंगन में चुदाई का भरपूर मजा लेने लगते है और कमरा रजनी की सिसकियो से गूंजने लगता है.......
....
अब शाम के 7 बज रहे थे इतने देर में ये तीनो ने काफी कुछ कर लिया था ....
सौरव संभु और रचना ने मॉल में खरीददारी करने के बाद खाना भी खा लिया था और अब वे मूवी के लिए हॉल जा रहे थे रास्ते में उन्होंने कहा की अगर मूवी की टिकेट नहीं मिली तो हम पास के मैदान में लगे गरम कपड़ो के मेले में हो आयेंगे और वह भी कुछ न कुछ खरीद लेंगे और फिर सौरव के कहे मुताबिक उसके अंकल की दूकान पे जाएँगे ....संभु ने भी हां में हां मिलाई.....हॉल पहुच कर उन्हें मालुम चला की शो मव टिकट्स तो है मगर कार्नर की सीट्स नहीं है.......वे तीनो मायूस हो गये मगर फिर सौरव ने कहा की कोइबात नहीं मूवी अगले सन्डे को चली जाएगी वैसे भी अभी ऐसे ठंड के मौसम में माँ के साथ जूली 2 देखने जाना जरुर चाहिए ......उफ़ माँ और वो सब की नजरे बचा कर रचना की गांड को बिच सड़क पे ही मसल देता है ....वैसे भी रचना जब भी बाजार आती थी तो उसकी चूत चूची और गांड मसली जरुर जाती थी जिससे रचना की चूत रास्ते भर गीली रहती थी और नतीजतन घर आते ही रचना नंगी हो कर खुद से सौरव ,रवि और संभु के लंड से खेलने लगती थी ....आज भी वैसा ही हो रहा था जबकि अभी अंकल के दूकान में जाना बाकी ही था .......खैर मेले में खरीदारी करते करते रात के साढ़े नौ बज गये थे....इधर रवि रजनी को घर ड्राप कर कर अपने घर की और चल दिया था तभी उसे याद आया की क्या पता वे लोग घर पे हो या नहीं सौरव से बात कर लेता हु......रवि सौरव को फ़ोन लगता है और पूछता है की वे लोग कहा है .....
सौरव कहता है की वो भी थोड़ी देर में घर पहुचेंगे तुम घर पे ही मिलो.....रवि उससे ये पूछता है की वे लोग है कहा ...सौरव उसे बता देता है तो रवि कहता है की मई भी औ मगर सौरव मना कर देता है...तो रवि वहा से सीधे घर चला जाता है वो सोचता है की कुछ देर रजनी से फ़ोन पे विडियो कॉल पे बाते करेगा ......इधर सौरव रचना और संभु उन् अंकल की दूकान पे पहुचते है ....वो अंकल की दूकान एक कॉलोनी के अंत में थी जिसका दूसरा सिरा एक मार्किट की तरफ खुलता था ....और सौरव रचना को ले कर कॉलोनी की तरफ से गया था जिससे मार्किट के लोग उन्न्लोगो को देख ना पाए.....सौरव दुकान में घुसता है साथ ही साथ रचना और संभु भी ....इस वक़्त दूकान में केवल अंकल ही थे और वो गल्ले में रखे पैसो का हिसाब कर रहे थे ....मेन शटर लॉक हो चूका था इसका मतलब अब दुकान बंद थी .....रचना और बाकी तीनो को देखते ही अंकल ने पैसे गिनना बंद कर दिया था ...और सौरव ने कहा की नमस्ते अंकल जी कैसे है .....
अंकल - मै ठीक हु तुम अपनी बताओ आज इधर कैसे आना हुआ ये लोग कौन हुए.....
सौरव - अंकल के पास आता है और कहता है अंकल अब आपसे क्या छुपाना ये अपनी सेटिंग है.....
अंकल - और ये बुढऊ कौन है ????
सौरव - ये भी अपनी ही बिरादरी से सम्बन्ध रखते है ....और कहते हुए वो एक गन्दी मुस्कान देता है जिससे अंकल सारा माजरा समझ जाते है ......
वो सौरव से कहते है वाह बेटा क्या सेटिंग भिडाई है खूब मजा देती होगी ये जरा हमे भी चखाओ इनका स्वाद...
सौरव - अंकल जी इनसे क्या है न अपना जरा सेंटीमेंटल अटैचमेंट है तो इनको छोड़ ही दीजिए कोई और होगी तो चखाऊंगा नहीं सौप दूंगा .....वो भी कमसिन जवानी .....
अंकल कहते है कोई बात नहीं बेटा चलो तुम्हारी बात का भी भरोसा करते है अपनी तो पुरानी पहचान है ......
सौरव - जी अंकल....
अंकल - और बोलो कैसे आना हुआ....
सौरव - इनके लिए कुछ अंतर्वस्त्र और नायटी लेनी थी मको एकदम फिटिंग साइज़ की चाहिए .....ट्रेल ये यही लेंगी ...कमरे में ...और सौरव ने आँख मार दी अंकल को की वो ना कह दे .....
अंकल - बाकी सब तो ठीक है मगर बेटा ट्राइल रूम में तो अभी अभी कुछ माल को शिफ्ट कर दिया है वह तो मुश्किल होगी इनको अगर तुम कहो तो ये यही पे देख लेंगी मई कपडे निकाल देता हु....कोई दिक्कत तो नहीं है न बेटा ....
सौरव - जी नही बिकुल नहीं अंकल....आप दिखाइए कपडे ....
और वो रचना की तरफ देख कर मुस्कुरा देता है .....
अंकल - बेटा साइज़ क्या बताया....
सौरव - अंकल आप 34 बी साइज़ की निकाल दो....और नाइटी तो फ्री साइज़ ही रहेगी मगर जरा जालीदार वाली और छोटी छोटी निकालना ....
अंकल - वाह बेटा ....बहुत बढ़िया चॉइस है तुम्हारी....
इस बिच रचना और संभु वही पे खड़े थे सौरव उनके पास गया और बोला माँ तुम निश्चिंत रहो बिकुल मत घबराओ इनसे कोई खतरा नहीं है और हां ये तुम्हे छुएंगे तक नहीं.......अंकल जब कपडे निकाल लिए तो उसने कहा की लो बेटा
सौरव - आइये और पसंद करिए.....रचना को अब कोई झिझक नहीं थी क्योकि सौरव वहां पे था और वह कोई खतरा नहीं था....
रचना सौरव के पास आई तब सौरव ने कहा की अंकल जरा अपना cctv ऑफ कर देंगे नहीं तो इनके लिए मुसीबत हो जाएगी और हमारे लिए भी.....
तब अंकल ने cctv ऑफ कर दिया ....और रचना एक एक कर उन ब्रा और नाइटी को उठा उठा कर देखना शुरू किया...उन् सब में से उसने कुछ ब्रा और नाइटी निकाल कर अलग कर ली इस काम में संभु और सौरव ने भी उसकी मदद करी जबकि अंकल रचना की ब्लाउज से झाक रही चुचिया की दरार पे नजर गडाए हुए थे ......तभी सौरव अंकल से कहता है की अंकल अभी इतने ही है बाकी आप साइड कर दीजिए ...अब रचना ने उन्हें चेक करना था तो उसे अपने साइन पे रख रख कर देखने लगी..जबकि संभु और सौरव उसे देखने लगे....
तभी सौरव बोला की अरे इनको अच्छे से चेक कर लो न यहाँ कोई नहीं है हमारे सिवा ..और ये अंकल अपने ही है......
रचना - फिर भी मई इन्हें ऐसे ही देख लेती हु कोई दिक्कत होगी तो तुम यहाँ से बदल कर ला देना....
सौरव के कहने से पहले अंकल बोले...जी नहीं माफ़ कीजियेगा बीके हुए कपड़ो को हम वापिस नहीं करते.....ये है तो अंडरगारमेंट्स ही ना सो आप इन्हें यही चेक कर लीजिए आराम से कोई दिक्कत नही है.......
रचना की झिझक को दूर करने के लिए सौरव आगे बढ़ कर रचना की शाल को उतरता है और फिर साडी का पल्लू खुद निचे गिरा देता है और उस साडी के पल्लू को संभु रचना के बदन के इर्द गिर्द लपेट कर साडी को उतारने लगता है और कुछ ही पलो में रचना उस दूकान में पेटीकोट और ब्लाउज में खड़ी थी और तभी सौरव रचना के ब्लाउज के हुक खोलने लगता है ....संभु का लंड अब खड़ा होने लगा था वही हाल अंकल का भी था ....अब रचना का ब्लाउज पूरा खुल चूका था .....और उसकी दोनों चुचिया लटक रही थी जिसे तीनो मर्द साफ़ साफ़ देख सकते थे सौरव ने बिना देर किये ब्लाउज उसके बदन से अलग कर दिया........तभी रचना ने खुद से अपने पेटीकोट का नाडा खीच दिया और पेटीकोट सरसराता हुआ उसकी टांगो के बिच आ गिरा....अब रचना एक दूकान में पूरी तरह नंगी खड़ी थी .....तीनो मर्दों की हालत ख़राब हो चुकी थी जबकि अंकल की तो कुछ ज्यादा ही.....
संभु ने आगे बढ़ कर रचना को अंकल की तरफ घुमाया और उसके बालो को समेट कर एक जुड़ा सा बना दिया था ...रचना सामने से नंगी खड़ी थी अंकल का मन भुत खराब हो चूका था मगर वो कण्ट्रोल करना जानते थे....अब रचना ने एक एक कर ब्रा पहननी शुरू की ....एक से एक मॉडल की ब्रा थी ..और सौरव और संभु दोनों मिल कर उसकी चुचियो को ब्रा में सेट करने में मदद कर रहे थे ....अंकल अपनी साँस रोके उन्न्लोगो को देख रहे थे....कुछ देर में उसने आखिरी ब्रा पहन कर उतारी और अब बारी थी नाइटी की....वो नाइटी पहनने लगी तो इसमें भी संभु और सौरव उसकी मदद कर रहे थे......जब सारे कपडे उसने ट्राइ कर लिए तो वो आखिरी नाइटी भी उसने उतार कर नंगी खड़ी हो कर अंकल से मुखातिब हो कर बोली की आप सारे पैक कर दीजिये हम सारे लेंगे.....अंकल ने झुक कर ड्रावर से एक बहुत ही ज्यादा सेक्सी सी ब्रा निकाली और कहा की ये मेरी तरफ से आपके लिए....और उसने उसे रचना के हाथो में देते हुए उसकी एक चूची को दबा दिया और कहा की आप पे ये खूब फबेगी और आपके ये अंगूर के दाने बहुत ही मस्त दिखेंगे इसमें....पहन कर दिखाइए ना जरा....रचना थोड़ी मुस्कुराई और उसने अंकल की तरफ मुह किए ही पहन कर दिखाया तभी अंकल ने उसकी चुचियो को सेट करने के लिए हाथ बढ़ाया तो सौरव ने उसे रोक कर खुद उसकी चुचिया एडजस्ट की....और संभु ने ब्रा की हुक को लगाया ......अंकल बोले वाह बहुत ही सुंदर ....और हस दिया .......जब तक बिलिंग न हुयी रचना वैसे ही नंगी खड़ी रही....और सौरव ने उसके गांड पे हाथ रखे सारे पेमेंट किया जबकि संभु पॉलिथीन में सारे कपडे समेटने लगा.....सारे काम होने के बाद रचना को कपडे सौरव और संभु ने मिल कर पहनाया ....और वो अंकल को फिर आयेंगे कह कर निकल गए ....इन् सब कामो में उनको डेढ़ घंटे लग गये अब रात के 11 बज रहे थे....वह से वे लोग तेज तेज कदमो से चलते हुए घर को निकले..रस्ते में रचना बोली की आखिर तूने मुझे नंगी कर ही दिया....वो आदमी क्या सोच रहा होगा मेरे बारे में और तो और उसने मेरी चूची भी दबा दी ..सौरव बोला की माँ तुम उसके सामने नंगी हो कर कपडे बदल रही थी बिचारे की जान हलक में आ गयी होगी तो जाने दो वैसे भी उसने तुम्हारी चूची ही दबाई है और जब दूसरी बार उसने हाथ लगाया तो देखा नहीं कैसे मैंने उसे रोक दिया .....रचना बोली की अच्छा अच्छा ठीक है मगर आगे से ऐसी हरकत मत करवाना मुझसे मै खुद को रोक नहीं पाती...तीनो हस पड़े और इसी बिच वे घर पहुक गये.....इधर रवि ने रजनी से फ़ोन पे ही विडियो कॉल किया और एक बार फिर उसे नंगी कर के उसको झाड दिया और खुद भी झड़ा....घर पहुच कर रचना सीधे किचन में गयी और पूरा एक बोतल पानी गटक गयी .....वापिस कमरे में जब आई तो सौरव संभु और रवि सब के सब अंडरवियर में बैठे थे....रचना अभी भी पुरे कपड़ो में थी.....आते ही उसने अपने आप को बिलकुल नंगी कर लिया और बिस्तर पे चढ़ बैठी .....और रवि से बोली की मिल गयी फुर्सत तुझे .....किस्से मिलने गया था तू....रवि इस सवाल से हडबडा गया मगर अगले ही पल रचना हस दी और बोली गधा कहा था सुभह से....आज पता है इस शैतान ने क्या क्या किआ है ....रवि सवालिया नजरो से उन् दोनों की तरफ देखने लगा ....सौरव हस्ते हुए कहता है ....पता है भाई आज माँ को हमने एक दूकान में पूरी नंगी कर दिया और उनके सारे कपडे एकदम फिटिंग साइज़ के लिए.....रवि बोला क्या बात कर रहा है तू....रवि रचना की तरफ देखते हुए पुछा की और तुम हो भी गयी माँ वाह....
रचना - हां इस शैतान ने मुझे करवा के ही दम लिया ......और दादू रवि ने पुचा ....रचना बोली की ये भी जनाब आज मेरी साडी उतारने का काम किये है....रवि का ये सीन का मन में सोच कर ही खड़ा हो गया और वो नंगा हो गया और उसने रचना को बोला की माँ जरा इसे आराम दो तभी सौरव भी नंगा हो गया और संभु भी नंगा हो कर बिस्तर पे आ गया ...और अब चारो नंगे थे और ठंड में गरमा गरम चुदाई शुरू हो गयी थी......
अगली सुबह रचना जब जागी तो वो नंगी सोयी हुयी थी अपने बेटो और ससुर के बिच में जब वो उठ कर बैठी तो उसका सर भारी हो रखा था और तबियत सही नहीं लग रही थी ....उसने बाकिओ को जगाया और कहा की उसकी तबियत सही नहीं लग रही है .....

सौरव ने उसका गले के पास हाथ लगाया और उसे बुखार का अहसास हुआ वो बोला माँ तुम्हे तो तेज बुखार है....
संभु भी आया और उसकी एक हथेली को पकड़ कर बोला हां बहु मगर ये हुआ कैसे ......
रवि रचना के बदन को खुद से चिपकाते हुए बोला कल तुमलोगों ने इनको उस दूकान में नंगी कर दिया था ना शायद इसी वजह से हुआ है इनको ठंडी लग गयी है शायद ...और करो नंगी इनको तुमलोगों को तो कुछ समझ ही नही आता की कौन सा काम कहा करना है बस शुरू हो गए कही भी जरा भी ख्याल नहीं आया माँ का .....
रचना रवि को रोकते हुए बोली की बस न रवि हो गया न जाने भी दो और इनके इस काम में मै भी बराबर की जिम्मेदार हु तू केवल इनको क्यों डाट रहा है ...और अभी मुझे मेरी तबियत सही करने में मदद करों ऐसे लड़ो मत.....रवि उठा और हॉल में जा कर दराज से थर्मामीटर ले आया और इधर संभु और सौरव ने रचना को लिटा दिया और संभु कपडे पहनते हुए बोला की मै मेरे डॉक्टर दोस्त को बुला लाता हु....इधर रवि कहता है रुकिए दादू मिया पहले माँ का बुखार देख लू फिर आप जाना .....रवि ने नंगी पड़ी रचना जो की अब रजाई से ढकी थी उसको वापिस से नंगी कर दिया और थर्मामीटर सीधा उसके मुह में घुसा दिया .....कुछ देर बाद रवि थर्मामीटर बाहर निकाल कर देखता है और संभु की तरफ मुखातिब हो कर कहता है की दादू इनका बुखार 102 है काफी ज्यादा है ....आप डॉक्टर साहब को सीधे यही ले आइयेगा .....इतना सुनते ही संभु झटके से कमरे से बाहर निकल पड़ता है और रास्ते में ही डॉक्टर बाबू को इक्तिलाह कर देता ही ताकि वो उसे रास्ते में ही मिल जाए....इधर रवि और सौरव रचना को उसी नंगी हालत में रजाई ओढा कर लिटाये रखते है और रवि सौरव को ये बताने में लगा था की रचना का ख्याल कैसे रखना और वही रचना रजाई में लेती उनकी बाते सुन और मुस्कुरा रही थी ..,.उन सब को इसका ज़रा भी ख्याल नहीं था की रचना नंगी है और डॉक्टर आने वाले है......इसी बिच संभु डॉक्टर को ले कर घर में आ जाता है मगर अगले ही पल संभु को याद आता ही की रचना नंगी होगी पता नहीं उन्न्दोनो ने उसे कपडे पहनाये भी है या नहीं .....लेकिन अब वो डॉक्टर को क्या बोल कर रोकता उसके पास कोई चारा नहीं था ...इसलिए वो रूम में घुसा जहा बाकी तीनो पहले से मौझुद थे और रचना रजाई में लेटी थी ......
डॉक्टर - अरे भाई बहुरानी क्या हो गया हा तबियत कैसे ख़राब कर लिये ....
रचना तो कुछ नहीं बोली पर रवि बोला ....वो अंकल कल शायद माँ ने छोटे भाई के साथ बाजार में आइस क्रीम खा ली थी और ठंड भी काफी है और घर का भी काम यही देखती है तो ......तभी अचानक से उसे भी इस बात का अहसास हुआ की माँ तो नंगी है अब क्या करेंगे संभु को तो कुछ बोलते नहीं बन रहा था वही सौरव अपनी खुराफाती दिमाग को जोर दे कर सोच रहा था की क्या किआ जाये मगर अब तक बहुत देर हो चुकी थी .....
डॉक्टर साहब ने उसको कहा की रजाई हटा दो बेटा मई चेकअप कर लू .....और वो हाथ आगे बाधा कर रचना के रजाई को......
बिस्तर में रचना नंगी थी और डॉक्टर बाबु उसकी तरफ बढ़ रहे थे तभी सौरव ने डॉक्टर बाबु को जोर से आवाज देते हुए कहा ....सौरव - अंकल जी आपने अपना आला का बक्सा तो लिया ही नहीं तो जाँच कैसे कीजियेगा पहले वो तो ले आइये .....

डॉक्टर बाबु उसकी इस बात पे थोड़े शर्मिंदा हुए और बोले ठीक कह रहे हो बेटा मै वो हड़बड़ी में भूल आया वो तुम्हारे दादा जी जरा ज्यादा ही परेशां थे इसलिए ऐसे ही चला आया ....मै अभी ले आता हु और वो घूम जाता है ....और कमरे में मौझुद सभी लोगो ने राहत की साँस ली ...डॉक्टर बाबू कमरे से ये बोल के निकल गये की वो अभी गए और अभी आये .....उनके और संभु के जाते ही रवि और सौरव रचना को बिस्तर में से उठाते है और नंगी हालत में खड़ी कर के उसके बदन पे जल्दबाजी में एक नायटी पहना देते है जबकि उसके निचे कुछ भी नहीं पहनाते ....और उसे उसी तरह बिस्तर में वापिस लिटा देते है .....इस दरमियाँ तीनो में कोई बात नही होती..कुछ ही देर में डॉक्टर साहब वापिस आ जाते है और अपना आला निकाल कर गर्दन में टांगते हुए सौरव से कहते है.....- बेटा अब तो सब है न ....सौरव - जी अंकल ....वो वापिस अपने बक्से की ओर घूमते है और थर्मामीटर निकाल कर रचना के पास पहुचते है और सीधा उसके बदन से रजाई हटा देते है और सामने रचना की मंझि हुयी जवानी देख कर लार टपकाने लगते है और रचना की चुचियो की गहराई पे उनकी आँखे जम जाती है ....तभी संभु कहता ही क्या हुआ देख ना भाई....डॉक्टर हडबडा कर रचना को कहते है की बहु जरा अपनी एक बाह उठाना मुझे थर्मामीटर लगाना है रचना अपना हाथ उठाती है मगर उसके जबान से एक कराह निकल जाती है और रचना अपनी एक बाह पूरी की पूरी उठा देती है जिससे रचना की कांख नंगी हो जाती है और उसकी चुचिया बहुत ही नुमयिन्दा होने लगती है जिसको देख कर डॉक्टर अपना कण्ट्रोल खोने लगता हैऔर थर्मामीटर लगाने के बहाने उसकी चूची से हाथ सटा देता है और उसके बाद वो रचना से कहता है की अभी कुछ देर तक बाह निचे कर लो और उसकी बाह को पकड़ कर निचे करता है और उसकी मुलायम बाहों का भी मजा ले लिया ....और बाकी तीनो वही खड़े थे .....रचना की चुचियो की गहराई देख कर तीनो मर्दों की वासना की घंटी जोरो से बज रही थी .....पांच मिनट बाद रचना कहती हिया की उसकी बाह दुखने लगी है आप इसे निकालिए न और खुद से आना हाथ उठा देती है और डॉक्टर साहब उसकी चूची की फिर से छु लेते है और रचना और बाकी सब इस हरकत को देख कर भी कुछ नहीं बोलते .....इधर डक्टर साहब ने थर्मामीटर देखते हुए कहा की इनका बुखार तो काफी है जल्द आराम के लिए एक दिन तीनो पहर इंजेक्शन लेना होगा और मै कुछ दवायिया लिख दूंगा उनको माँगा कर समय समय पे देते रहना ....और वो पर्ची निकाल कर लिखने लगते है .....रचना कहती है की वो इंजेक्शन नहीं लगवायेगी ....डॉक्टर - बहु ज्यादा डरने की जरुरत नहीं है कुछ नहीं महसूस होगा और जब तक महसूस होगा तब तक इंजेक्शन खाली हो चूका होगा.....चलो ज्यादा मत सोचो अगर इतना लग ही रहा है तो हाथो की जगह पीछे ले लो वहा तो बिलकुल भी दर्द नहीं होगा तुम्हे ....बहुत ही बेशर्मी से वो ये बात कह गया क्युकी रचना का बदन काफी भरा हुआ था और सुडौल भी.....बात में छुपी शरारत को समझते हुए सौरव बोला
सौरव हां माँ अंकल सही कह रहे है ...साथ में रवि ने कहा की मगर अंकल माँ को वहा कैसे देंगे इंजेक्शन .....
डॉक्टर - तुम चिंता मत करो बेटा यहां सब घर के ही लोग है और डॉक्टर से कैसा शर्माना
संभु - नहीं भाई बहु को तुम इंजेक्शन हाथ में ही लगा दो वहा कुछ ठीक नही रहेगा
डॉक्टर - अरे भाई डॉक्टर तुम हो या मै मुझे ही करने दो जो करना है वरना ले जाओ किसी और डॉक्टर के पास वो शायद सही से इलाज कर दे....
इसके बाद संभु और रवि कुछ नहीं बोल पाए और अब डॉक्टर इंजेक्शन तैयार करने में लगा था..........
डॉक्टर साहब इंजेक्शन लिए रचना की तरफ बढ़ रहे इथे और अंततः उसके पास पहुच कर उन्होंने झटके से रजाई को हटाते हुए उससे कहा की बहु जरा उलटी दिशा में लेट जाओ मगर ये क्या रचना अपने ससुर और दो जवान बेटो के सामने इस हालत में लेती हुयी है और उन्होंने रचना को अभी तक आधा ही देखा था मगर जितना भी देखा उनको समझते देर न लगी की रचना ने इस वक़्त इस नायटी के अलावा अपने बदन पे कुछ नहीं डाला है और वो शायद मेरे आने से पहले पूरी नंगी थी और इसी वजह से इन् सब ने मुझे यहां से भगाया था ताकि इसको कुछ पहना सके.....

तभी सौरव और रवि एक साथ बोल पड़ते है की क्या हु अंकल मम्मी को उलटी लिटा दिया है आप इंजेक्शन लगा दीजिये........कहा खो गये ...क्या हुआ .....
डॉक्टर साहब - कुछ नहीं बेटा तुम्हारी माँ की तबियत खराब है और वो इस तरह से लेटी हुयी है वो भी ऐसी कडाके की ठंड में .....उन्होंने सीधा वार किया ताकि कुछ बोलती बंद हो और मेरा काम निकले मगर सौरव बहुत चालाक था उसने भी फटाक से कहा की माँ को गैस की प्रॉब्लम भी हो रही थी इस्ल्सिए उन्होंने कपडे बदल लिए और रजाई में लेट गयी वैसे भी अभी मम्मी को कोई काम तो करना था नहीं उनकी सेवा के लिए हम दोनों है ना.....
पीछे से संभु की आवाज आई की भाई अब इंजेक्शन दे भी दे कब से बेचारी उलटी घूमी पड़ी है....
ये सुन कर डॉक्टर साहब जैसे होश में आये और उन्होंने थोड़ी जल्दबाजी में रचना की नायटी उठा दी जो की थोड़ी ज्यादा ही उठ गयी थी और अब हाल ये था की रचना को गांड की दोनों भारी भरकम फाके कटे हुए तरबूजो की तरह नुमायिन्दा हो रही थी अब कमरे का माहोल काफी गर्म होने लगा था और संभु के हथियार ने तो सर उठाना भी शुरू कर दिया था ....
डॉक्टर साहब कीस हरकत पे रवि को बहुत तेज गुस्सा आया मगर तभी रचना ने रवि के हाथ को डर के मारे जोड़ से पकड़ लिया ...और रवि का सारा ध्यान अपनी माँ की और चला गया ......उधर सौरव इस मौके को एक अलग ही तरीके से सोच रहा था ......और उसने इस हाल की साड़ी तस्वीर अपने मोबाइल में कैद करनी शुरू कर दी .....इसके लिए उसने कुछ और ही सोच रखा था.....डॉक्टर की इस हरकत पे संभु कुछ चन बाद बोल पड़ा की यार ज़रा देख समझ कर करो ....कपडा कुछ ज्यादा ही नहीं उठा दिया है तुमने .....डॉक्टर जो की रचना की गांड पे रगड़ने के लिए रुई को स्पिरिट में भीगा रहा था वो संभु की तरफ मुखातिब होते हुए बोला....तो तुम इस कमरे में अभी तक क्यों खड़े हो बाहर चले जाते ......डॉक्टर से क्या शर्माना और अभी तुम यहा खड़े रहो या बाहर जाओ संभु ये तुम्हारे मन के ऊपर है मुझे मेरा काम करने दो अभी.....और वो रचना की तरफ घुमटा है जहा रचना अपने आधी पीठ से ले कर पैर के तालुओ तक पूरी नंगी थी ......और अपना सर तकिये में घुसाए उलटी पड़ी थी.....उसने रुई को उसके चुतरो पे रगड़ने से पहले उसके पैरो को थोडा सा फैला दिया जिससे उसकी गुलाबी चूत के भी लब थोड़े खुल गये और उसकी कामुकता अब डॉक्टर साहब से नियंत्रण नहीं हो पा रही थी.......इन् सब हरकतों से सभी वाकिफ हो रहे थे और साथ ही साथ ये भी जान गए थे की डॉक्टर अंकल को पूरा शक हो गया है मगर वे लोग भी डॉक्टर की अगली चाल के अनुसार ही चलने वाले थे ...इसलिए कोई कुछ नहीं बोल रहा था ......तभी रचना की चुतरो की दरार के पास डॉक्टर ने रुई को रगडा और रुई को इस तरह से रगड़ते हुए निचे की ओर लाया की रचना की चूत से डॉक्टर की उंगलिया स्पर्श कर गयी और रचना की एक दबी सी सिसकी निकल गयी जिसे डॉक्टर न्जे सुना और मन ही मन बोला की साली कितनी गरम हूँ गयी है...काश ये मेरे हाथो में आ जाये पूरी की पूरी मसल दूंगा...और रुई का फांका फेकते हुए उन्होंने टेबल से सुई उठायी और रचना की चुतर में घुसेड दिया इस हमले के लिए रचना तैयार तो थी मगर पूरी तरह नहीं और नतीजतन रवि के हाथ वाला हाथ उसने और जोर से दबा दिया और दुसरा हाथ उसकी चुतर पे आने को हुआ और वो अपना हाथ पीछे घुमा दी जिससे वो अपने चुतर को सहला सके मगर डॉक्टर ने उसका हाथ झटक दिया और इंजेक्शन खाली करने के बाद बड़ी ही ताक़त से उसके चुतरो पे हाथ मलने लगे इन् कुछ सेकंडो में रचना के चुतरो का पूरा मजा लिया डॉक्टर साहब ने .......सौरव डॉक्टर की आँखों का पीछा करते हुए बोला की अंकल अब कब इंजेक्शन देना होगा आपको इनको..तभी डॉक्टर जो की रचना की अधनंगी जवानी को देख कर गरम हो रहा था वो निद्रा से बाहर आया और बोला की बेटा अभी दोपहर तक देख लो आराम हुआ तो शाम को दे देंगे वरना दोपहर में भी दूंगा एक इंजेक्शन....और हां बेटा तुम वो दवाईया ले आओ और इनको जल्दी से दो...ताकि इनको आराम मिले.....इतनी बाते करने तक रचना की चुतरो पे डॉक्टर का ही हाथ था ...तभी संभु जो की कमरे में ही खड़ा था वो जल्दी से रचने के पास आया और डॉक्टर का हाथ हटाते हुए उसके चुतरो पे उसने कब्जा जमा लिया जबकि रचना की आँखों से आसुओ की धरा बह निकली थी......तभी डॉक्टर को एक और मौका मिल गया वो बोला की अरे अभी तो कैसे कह रहे थे की कपडा कुछ ज्यादा ही उठ गया है और अभी आ गए बहु की इस हालत में भी उसके पास.....और हस दिया....इससे पहले की कोई कुछ बलता डॉक्टर ही बोले की मै जनता हु की जब घर की औरते बिमाड पड़ती है तो सबसे ज्यादा तकलीफ घर के मर्दों को ही होती है और इतना कह कर वो कमरे से निकल गए और जाते जाते कहते गये की बहु की हालत मुझसे छुपाना मत समय समय पे बताते रहना और एक सबसे जरुरी बात कपडे पहनने के लिए बहु को बोलो.........डॉक्टर की बातो का द्विआर्थी मतलब सब समझ रहे थे...और रचना भी बेचारी सुबूकते हुए रवि के हाथ में अपना हाथ दिए चुतड मलवा रही थी ...और साथ ही साथ सब समझ भी रही थी........की डॉक्टर बाबु को शक बैठ गया है और जल्दी ही इसका कुछ करना पड़ेगा वरना बात बिगड़ सकती है
तभी सौरव ने कमरे के सन्नाटे को तोड़ते हुए कहा की वो बाजार से दवाई ले कर आता है....और कुछ नाश्ता भी ले आएगा .......
मगर इन् सब में सबसे ज्यादा परेशां संभु था क्युकी ये डॉक्टर किस प्रविर्ती का व्यक्ति था उसे भली भाँती पता था और अब उसे ये चंता खाए जा रही थी की अगर ये बात उसके ग्रुप में फैली तो क्या होगा......
इधर रजनी रवि को शादी के लिए कह रही थी और बेचारा रवि को कोई मौका नहीं मिल रहा था जिससे वो रजनी की बात सभी को बता सके ...इधर संभु बहु के पास ही बैठ गया और रवि ये कहते हुए कमरे से बहर चला गया की माँ तुम आराम करो मै चाय बना के लाता हु....रचना अभी तक सामान्य हो चुकी थी मगर उसका बदन अभी भी वैसे ही नंगा था ...और उसे ढकने की कोशिश ना तो संभु ने की ना ही रचना ने उसे ढका.....
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अपने फ्लैट पे पहुच कर डॉक्टर साहब ये सोचने लगे की साला ये संभु कितना बड़ा भोसड़ीवाला निकला कही ना कही इसके अपनी बहु से नाजायज़ सम्बन्ध है ...और मै इसका पता लगा कर रहूँगा और क्या पता इसी बहाने मुझे इस बिल्डिंग में ही अपनी सेटिंग भिडाने का मौका मिल जाए .....वो ये सोच कर ही उत्तेजित हो गया की रचना जैसे गदराये जिस्म की मालकिन उसको भोगने को मिलेगी......मगर ये उसकी गलत फ़हमी थी ....क्युकी रचना को जब उसके ससुर ने नहीं भोगा तो वो क्या भोगेगा.....
इधर रचना के यहा सब वापिस आ गये थे और रचना की आव भगत में लगे थे क्युकी उन् सब की जान की तबियत बिगड़ी हुयी थी और सौरव ने दवाईया ला कर रचना को दी थी जिसको खाने के बाद रचना ने सोने की इच्छा जताई और वो सो गयी बाकिओ ने भी यही उचित समझा और बाहर हॉल में बैठ गए और बैठते ही संभु बोल पड़ा अपने मन की बात और ये सुनने के बाद रवि बोला की दादू आप क्यों फिकर करते है हुम सब मिल कर इससे निपटने का कोई न कोई तरीका जरुर निकाल लेंगे...शक तो उन्हें हो ही गया है ...मगर बात सिर्फ शक तक ही है.....तभी सौरब ने अपने मोबाइल में की हुयी साड़ी रिकॉर्डिंग वाली बाते बता दी और दिखा भी दी ...और साथ ही साथ उसने ये भी समझा दिया की कैसे इस हालत से निपटना है.....उसकी बात सुन कर सभी निश्चिंत हो गए ....आखिर रचना का सच्चा और पहला प्रेमी था तो सौरव ही न......
दोपहर को बहु की हालत जाचने के लिए संभु कमरे में आया ज़हा रचना उसी नायटी में सो रही थी .....संभु ने उसको थोडा सा हिलाया और रचना ने आध्खुली आखो से संभु की तरफ देखा और संभु बोला अब हालत कैसी है बहु बुखार में कुछ कमी आई और ऐसा कहते हुए वो रचना के गर्दन पे हाथ फेरता है जो की बुखार से तप रहा था और तभी रचना कहती है बाबूजी मेरा पूरा शारीर दुःख रहा है ...और जहा डॉक्टर ने इंजेक्शन दिया है वह पे बहुत तेज दर्द है और वो पलट जाती है और संभु रचना की नायटी को थोडा सा ऊपर की ओर उठा कर उसकी गांड को देखता है और उसे वो जगह दिखती है जहा इंजेक्शन लगा था वो जगह थोड़ी सी लाल हो रखी थी.....संभु उस जगह को हल्के से दबा देता है जिससे रचना हल्के से चीख देती है......

संभु - बहु तुम आराम करो और हां कपडे भी पहन लो डॉक्टर को बुलाना ही होगा और अबकी बार मै नहीं चाहता की वो तुम्हे वैसे देखे...तभी सौरव कमरे में आता है और कहता है माँ पहले तुम कपडे बदल लो उसके बाद दादू डॉक्टर को बुला लायेंगे.....
रचना - बिस्तर से उतर कर खड़ी हो गयी और संभु ने उसके बदन से नायटी उतार दी और उसे पूर्णतः नंगी कर दिया तभी सौरव ने संभु की तरफ एक साडी और ब्लाउज पेटीकोट के साथ फेक देता है.....
रचना - सुरु मुझे इतने कपडे क्यों दे रहा है केवल ब्लाउज और साडी से ही काम हो जायेगा ना...
रवि - वाह मोरी मैया तुम्हे भी अब कम कपड़ो की आदत हो गयी है .....कहो तो ऐसे ही रहने देते है क्यों दादू.....
रचना उसकी इस बात पे शर्मा जाती है और कहती है जिस माँ के तुम जैसे शैतान बच्चे हो उस माँ को ऐसी ऐसी आदते लगनी लाजमी है.....
संभु - बहु अभी ऐसा कुछ भी नहीं करना है तुम अभी पुरे कपडे पहन के रहो.....डॉक्टर भाई को पहले से ही शक हो गया हा और वैसे भी मई नहीं चाहता की कोई रायता फैले...वो भी तुम्हे ले कर.....और इस कमीने की नियत सही नहीं है....और ये मुझसे ज्यादा अच्छी तरह कोई नहीं जानता.....
अभी तक रचना नंग धडंग खड़ी थी.....उसे ठंड महसूस हुयी तो वो बोल पड़ी.......
रचना - अच्छा भाई अब मुझे मेरे कपडे दो मई पहन लू वैसे भी मेरी सुई वाली जगह में काफी दर्द हो रहा है और मुझसे ऐसे खड़े नहीं रहा जा रहा....
सौरव फटाक से रचना के पास आता है और उसे ब्लाउज पहनाने लगता है और संभु उसे पेटीकोट .....उन् दोनों के बाद रवि रचना को साडी पहनाता है...और वो वापिस से कम्बल में घुस जाती अहि....जबकि सौरव और रवि खाने का इन्तेजाम के लिए रसोई में चले जाते है और संभु डॉक्टर को बुलाने के लिए जाता है...कमरे में किसी को ना देख कर रचना सौरव को कहती है की ऐसे कैसे मुझे सब छोड़ कर चले गए हो मेरी कोई फिकर ही नहीं करता है ....तभी सौरव रसोई से कहता है कैसी बाते करती ही माँ ...तुम हम सब की जान हो ....रुको मई आया और वो रचना के पास आता है....जबकि रवि कुछ देर बाद रचना क के लिए गरमा गरम सूप ले कर आता है .....अभी रचना उसे पि ही रही होती है की कमरे में संभु डॉक्टर के साथ दाखिल होता है....
डॉक्टर - कैसी हो बहु तबियत में कोई सुधार आया.....
रचना - कुछ नहीं बोलती...
रवि - जी नहीं डॉक्टर साहब कहा कोई सुधार आया माँ का बुखार तो कम होने का नाम ही नाह ले रहा है....आपके इंजेक्शन से भी कोई असर नहीं हुआ ...अब ऐसी कोई दवा दीजिए की हमारी माँ ठीक हो जाए....
सौरव - जी अंकल हमे हमारी माँ ऐसे बीमार सी अच्छी नहीं लगती....
डॉक्टर - हां भाई मै तो अपनी पूरी कोशिश कर ही रहा हु....वो रचना के पास आता है और उसकी कटोरी को ले कर साइड में रख कर उसकी हथेली को पकड कर कुछ पलो के बाद कहता है मुझे नहीं लगता की बुखार में कोई कमी आई है..खैर अभी मै चेक किये लेता हु....और वो तुरत रचना को कहता है बहु ज़रा अपने ब्लाउज को ढीला कर दो मुझे थर्मामीटर लगाना है तुम्हारे काख में....अब रचना कैसे करती मगर करना तो था ही.....तभी डॉक्टर हालात की चुटकी लेते हुए संभु को कहता है की अरे भाई क्या देख रहा है बहु की मदद कर.....
संभु - अरे पगले मई ऐसे कैसे बहु को हाथ लगा दू....कुछ भी बोलता है....
डॉक्टर भी कम तेज नहीं था वो तुरत बोला अरे इसमें शर्माने की क्या बात है जब तू बहु के कुल्हे सहला कर उसका दर्द कम कर सकता है तो ब्लाउज के कुछ बटन्स नहीं खोल सकता....और हलके से हस देता है...संभु बिचारा बुरी तरह झेप जाता है मगर वो आगे नहीं बढ़ता है...
सौरव और रवि अपनी अपनी जगह पे खड़े रहते है क्युकी अभी उनका कोई भी कदम डॉक्टर के शक को यकीं में परिवर्तित कर सकता था....
डॉक्टर किसी को ना बढ़ता देख.....अरे भाई अगर तुम लोग नहीं करोगे तो मै ही कर देता हु...और अपना हाथ आगे बढाता है...तभी रचना उसके हाथ को रोकते हुए कहती है की रुकिये रुकिये मै ही खोलती हु......
ऐसे कह कर वो अपने साडी के पल्लू को निचे गिरा देती है जिससे उसके भरी भरकम चुचियो की दरार दिखने लगती है और फिर वो अपने ब्लाउज के दो बटन्स खोल देती है....ये देख कर डॉक्टर तुरत बोला बहु एक और....रचना अब असमंजस में पड़ गयी थी क्युकी एक और बटन खोलने का मतलब था की उसकी एक चूची का निप्पल दिखने लगता और डॉक्टर तो यही चाह रहा था...खैर अब जब उन्होंने कह ही दिया था तो करना तो था ही सो उसने अपना ब्लाउज का एक और बटन खोल दिया नतीजतन उसकी एक चूची का आधे से ज्यादा हिस्सा दिखने लगा और डॉक्टर के लंड ने झटके खाना शुरू कर दिया....रचना अपने बिस्त्तर पे बैठी थी.....उसका ब्लाउज लटका हुआ दिखाई पड़ रहा था चुचियो के भार के कारण और इस कारण उसकी दोनों की दोनों चुचियो के निप्पल दिखाई पद रहे थे तभी डॉक्टर ने उसके एक चूची से हाथ रगड़ते हुए उसके काख में थर्मामीटर घुसाया और जब वो हाथ बाहर ला रहा था तो रचना की चूची से वो कुछ ज्यादा ही रगड़ दिया जिस कारण रचना की एक चूची पूरी की पूरी बाहर लटक गयी...अपनी चूची पे हुए इस हमले से रचना थोड़ी उत्तेजित महुसू कर रही थी और उसका निप्पल फूलने लगा था और अब जब उसकी एक चूची पूरी की पूरी लटक गयी तो वो घबरा सी गयी मगर फिर भी उसने चूची को अन्दर नहीं किया और इधर संभु कुछ भी करने में संकोचित महसूस कर रहा था और साथ ही साथ ये भी सोच सोच कर खुद को कोस रहा था की उसने बहु को साडी क्यों पहनाई....कमोबेश यही हाल रवि और सौरव का भी था....तभी रवि खुद को रोक नहीं पाया और उसने सौरव को हल्के से धक्का देते हुए बोला की वो कुछ करे वरना वो इस डॉक्टर को मार बैठेगा....सौरव - अंकल आप भी ना कैसे करते है....माँ तुम ब्लाउज सही कर लो अपना...अंकल जब थर्मामीटर का वक़्त पूरा हो जायेगा तो आप नहीं मा खुद निकाल कर दे देगी....रचना अपनी चूची को अंदर करने लगी मगर उसे हाथ हिलाने में बन नहीं रहा था तभी डॉक्टर बोला की अरे बहु रहने दो कोई दिक्कत नहीं है कुछ ही मिनटों की बात है...फिर पूरा का पूरा ब्लाउज पहन लेना न....और हस्ते हुए कहता है की ये दोनों ने तो तुम्हारे इनको कई बार देखा ही है....उसका इशारा सौरव और रवि की तरफ था.....और रही बात संभु की तो ये तुम्हारे पिता समान है इनसे कैसा घबराना या शर्माना और जबरदस्ती करने से थर्मामीटर अगर टूट गया तो वो तुम्हे लग जाएगी और फिर ब्लाउज उतार कर ही रहना पडेगा....उससे बेहतर तो यही है.....डॉक्टर के इस तर्क पे कोई कुछ नहीं बोल पाया.....रचना की लटकी हुयी चूची को डॉक्टर ने पूरी तरह मजे ले ले कर देखा और रचना को ये आभास उत्तेजना से परिपूर्ण कर रहा था जिस कारण उसकी चुचियो में तनाव आने लगा था......
.....
खैर कुछ देर बाद रचना की तरफ डॉक्टर बाबु बढे और उसकी चूची का दुबारा से मर्दन करते हुए वो उसके काख से थर्मामीटर निकाले और देखने लगे इस बिच रचना ने अपनी लटकती चूची को ब्लोसे के अंदर कर लिया था मगर बटन्स नहीं लगाए थे ...और ना ही अपना पल्लू सही किया था...थर्मामीटर देख कर डॉक्टर बोला की बहु के बुखार में कोई कमी नहीं आई है उलटे बुखार दो डिग्री बढ़ ही गया है......इनकी दवाईया जो मैंने लिखी थी वो समय पे देते रहना और उसमें मिया कुछ और भी जोड़ देता हु वो भी ले आना और अभी मिया एक और इंजेक्शन दे देता हु अगला इंजेक्शन रात को देने आऊंगा .....इतना कह कर वो रचना से बोला...बहु लेट जाओ और साडी कमर तक ऊपर चढ़ा लो....तभी संभु बोला की यार इंजेक्शन जरुरी है क्या...वो क्या है न की इससे बहु की तकलीफ बढ़ जाती है ....इसका वैकल्पिक इलाज नहीं है क्या ....
डॉक्टर - मेरे भाई अगर होता तो मै वो ना देता..क्यों मै इसको इतनी तकलीफ में डालता....मगर भाई समझा कर इंजेक्शन से जल्दी आराम मिलता है....और बाकी तो दवाईया मैंने लिख ही दी है.....
सौरव - माँ लेट जाओ इंजेक्शन ले लो.....कुछ भी नहीं हगा तुरंत हो जायेगा यु चुटकी बजाते....
रचना - अंकल प्लीज कोई और दवाई लिख दीजिए मै सब खा लुंगी पर ये इंजेक्शन नहीं...बहुत दर्द होता है...
डॉक्टर - अरे बहु क्या बच्चो जैसी हरकते करती हो ...चलो लेटो आराम से और तुम्हे तो कुछ महसूस भी नहीं होता होगा.....उसका इशारा साफ़ तौर पे उस्क्सी भारी भरकम चुतरो की तरफ था....अंत में रचना को लेटना ही पडा और अबकी बार संभु ने भी डॉक्टर की बात को साथ में लिया .......जब रचना लेटने लगी तो डॉक्टर बोला की अरे बहु अपनी साडी कमर तक उठाओगी या इसे उतारोगी...मेरे हिसाब से उतारना ही सही रहेगा और इससे देने में भी आसानी होगी.....
सौरव की तरफ देखते हुए रचना..उससे इशारों में पूछती है और सौरव हां कहता है...तब रचना उठने लगती है तो संभु सौरव से कहता ही की बेटा जाओ अपनी माँ की मदद करो.....उससे कमजोरी सी आ गई है.....सौरव और रवि दोनों आगे आते है......जबकि डॉक्टर वही साइड में खड़ा हो जाता है.....रचना को सहारा दे कर सौरव खड़ी करता है उअर रवि उसकी साडी की गाँठ जो की उसने पेटीकोट में फसा राखी थी वो निकाल देता है....और अगले कुछ पलो में रचना अपने ब्लाउज के तिन बटन्स खुले और अधनंगी चुचियो को लिए केवल एक पेटीकोट में खाड़ी थी....तभी रचना को वापिस से बिस्तर पे चढाने लगते है तो डॉक्टर कहता है की बेटा पेटीकोट का नाडा भी ढीला कर लेना......रचना खुद से पेटीकोट का नाडा ढीला कर लेती है...और अपने पेटीकोट की डोरियो को अप्पने हाथो में थामे वो वापिस से बिस्तर पे लेट जाती है...लेकिन सीधी.....जब रचना लेटी तो उसने अपनी डोरियो को छोड़ दिया था जिससे रचना का पेटीकोट हल्का सा खिसक गया था और उसकी चूत का उभरा हुआ हिस्सा दिखने लगा था...जिसे रवि ने देखा और सौरव ने भी मगर सौरव के पहले रवि ने आगे बढ़ कर रचना के पेटीकोट को सही कर दिया..और वापिस अपनी जगह पे आ कर खडा हो गया...और सौरव वही बिस्तर के किनारे रचना के साथ लग कर खड़ा हो गया..और रचना ने उसका हाथ पकफ्द लिया...डॉक्टर ने आगे बढ़ कर रचना को बोला बेटा सीधे क्यों लेट गयी आगे लेने का इरादा ही क्या.....मगर बेटा बहुत तकलीफ होगी आगे...और हस देता है...रवि को बहुत गुस्सा आता है और वो बोल पड़ता है ये क्या बोल रहे है अंकल आप.....
डॉक्टर उसके तेज आवाज से थोडा घबरा गया मगर वो तुरत ही माहोल को हल्का करते हुए बोला की बेटा मैंने तो तुम्हारी माँ को थोड़ा हसाने का प्रयास किया....don't be serious about it...i know my limitations..as i am a doctor...this much is normal among paitents..son..be calm....
ऐसे बात करते देख रवि को लगा की उसका ये व्यवहार शायद गलत था....तभी डॉक्टर रचना को बोलता है की बेटा पलट जाओ....और वो रचना को पलटने में मदद करता है और इस बार किसी के मन में कोई भी बात नहीं आई मगर डॉक्टर तो अपना काम करने में लगा था ..उसने रचना को पलटने के बहाने से उसके बदान को अच्छे से छुआ...सहलाया और नापा भी और साथ ही साथ रचना को इस तरह से पलटा की पलटते वक़्त उसको रचना की चूत क दरार की शुरुवाती भाग नजर पड़ गयी और रचना की एक चूची ब्लाउज से छलक कर बाहर की ओर आ गयी .......अब रचना उलटी हो चुकी थी और डॉक्टर ने उसकी पेटीकोट को निचे खिसकाना शुरू किया और धीरे धीरे रचना के गोर गोर चुतर कमरे की दुधिया रौशनी में चमक उठे....मगर एक जगह पे आ कर उसका पेटीकोट जांघो के निचे अटक गया.....डॉक्टर ने रचना को बोला की बहु ज़रा उठो ...और रचना उठी और डॉक्टर ने फटाफट उसकी पेटीकोट को घुटनों तक खीच दिया....और अब रचना अपनी एक चूची को बिस्तर पे बाहर की ओर डॉक्टर की नजरो की सामने किये हुए अपने चुतरो को नंगा किये घुटनों तक लेटी थी......डॉक्टर साहब ऊपर आते वक़्त रचना की एक चुतर को सहलाते हुए पूछे की बहु उस वक़्त का दर्द कम है ना ......रचना कुछ नहीं बोल पायी बस अपनी गर्दन हल्के से ना में हिला दी.....अब डॉक्टर ने अपने बैग से इंजेक्शन तैयार करना शुरू किया जबतक रचना वैसे ही नंगी लेटी रही....इंजेक्शन तैयार करने के बाद ...डॉक्टर ने रचना के चुतरो को सहलाया और उसके चुतरो की दरार के एकदम पास रुई को रगडा और उसके चुतरो पे इंजेक्शन को सटाते हुए कहा बहु आराम से रहना कुछ महसूस नहीं होगा...बिलकुल आराम से हो जायेगा और इतना कहते हुए उसने रचना की चुतरो में इंजेक्शन घुसेड दिया इस बार रचना सहन नहीं कर पायी उसने सौरव के हाथो को भी बहुत जोर से दबा दिया और साथ ही साथ चीख भी पड़ी.....और इस बार रचना को इंजेक्शन देने में डॉक्टर ने कुछ ज्यादा ही वक़्त लगाया ..इंजेक्शन देने के बाद डॉक्टर ने रचना के चुतरो में रुई को दबाया और रवि ने फटाक से बढ़ कर उस फाके को रगड़ना चालु किया ...
इधर डॉक्टर ने रचना को कहा की बहु क्या तुम भी कैसे चीखी ...और हस देता है और अब वो इंजेक्शन निचे रखता हुआ कहता है की मै चलता हु अब इसके बुखार में कमी आएगी .....चिंता मत करो ठीक हो जाएगी.....और कहते हुए निकल गया...जबकि बाकी तीनो मर्द दर्द में आध्नंगी पड़ी हुयी रचना को संभाल रहे थे.........
दोपहर को जब रचना को इंजेक्शन दिया गया था उसका असर भी दिखा और शाम तक रचना का बुखार उतर चुका था मगर उसके बदन में कमजोरी अभी भी बरकरार थी.......दोपहर के बाद वो उठी और पास में ही सौरव लेटा हुआ था और बाकी दोनों भी वही थे...... वो अभी भी अधनंगी हालत में थी डॉक्टर के जाने के बाद उन्होंने रचना की बहुत सेवा की ताकि उसे आराम मिले ........और कुछ ही देर में रचना नींद की आगोश में समा गयी थी...अभी शाम के 7:30 बज रहे थे....रचना कराहते हुए उठती है और उसकी कराह सुन कर बाकी भी होश में आ जाते है और सब एक साथ पूछते है की अब तबियत कैसी है .....

रचना - मुझे लगता है बुखार उतर गया है मगर मुझे काफी कमजोरी महसूस हो रही है और भूख भी बहुत जोरो की लगी है ....
सौरव - माँ क्या खाना पसंद करोगी अभी लाये देता हु....तुम बस हुकुम करो.....
रचना - मुझे अभी एक कप चाय और कुछ हल्का ही दो खाने को फिर थोड़ी देर बाद देखते है क्या मंगवाना है......
संभु रचना के करीब आता है और इउसकी बाह को पकड़ कर देखता है और कहता है की बहु तुम्हारा बुखार उतर गया है ......अब थोरा सा आराम कर ललो ठीक हो जाओगी कल तक....
रवि - दादू क्या अभी भी उन् डॉक्टर अंकल को बुलाने की जरुरत है ....
संभु - देखते है बेटा फिलहाल तो कोई जरुरत नहीं है...बहु तुम आराम करो मई अभी आता हु उसके यहाँ से.....
संभु कही जाता इससे पहले रचना बोली...बाबूजी कम से कम मुझे सही से कपडे तो पहना दीजिये फिर कही जाईएगा.........और वो अपने बदन को सब के सामने अधनंगी हालत में उजागर कर देती है..जहा उसका चुतरो वाला हिस्सा और उसके ब्लाउज से लटकती एक चूची सब के सामने हाजिर थी.....सौरव ने तुरत माँ को अपने आलिंगन में भर कर कहा माँ तुम जितना इन् अदाओं से हमे रिझाती हो उतना ही हमे तुमपे प्यार आता है......रचना हल्के से मुस्कुरा कर कहती है की सब तेरा ही किया धरा है......सौरव और रवि साथ में संभु भी हस देता है .......तभी रचना कहती है की उसे पिशाब करने जाना है.....रवि चलो माँ मै ले चलता हु...तभी संभु कहता है रवि बेटे तुम रहने दो मै ले जाता हु इसे ...और रचना जो बिस्तर से उतर कर खड़ी होती है और तभी उसका पेटीकोट पूरा का पूरा निचे गिर जाता है अब रचना लगभग नंगी थी क्युकी उसका ब्लाउज भी अस्तव्यस्त हालत में था और तो और उसकी एक चूची पहले से ही लटक रही थी.....संभु उसे इसी हालत में बाथरूम ले जाता है जबकि रवि उस्क्से बिस्तर और कपड़ो को सही से करने लगता है जबकि सौरव किचन में सब के लिए चाय बनाने जाता है.....
...

....अभी संभु रचना को बाथरूम में ले कर गया ही था की दरवाजे पे दस्तक होती है जिसे रवि और सौरव सुनते है.....और सौरव धडाक से दरवाजा खोलने पहुच जाता है.....दरवाजे के उस पार डॉक्टर खड़ा था......अब डॉक्टर हॉल में दाहिल हो चुका था ...और तभी रचना को लगभग नंगी हालत में लिए उसे सहारा दे कर कमरे में ले जाते हुए संभु हॉल में दाखिल होता है......
हॉल में अधनंगी रचना संभू के बाहों का सहारा लिए खड़ी डॉक्टर की तरफ भौचक्की सी देख रही थी........कमोबेश यही हाल रवि और सौरव का भी था और संभू को तो जैसे काटो तो खून नहीं .........उसे सबसे ज्यादा जिस बात डर था वहीं हुआ था......

कमरे की खामोशी को डॉक्टर ने तोड़ा और बोला.......
डॉक्टर - घबराने की कोई बात नहीं है संभू भाई मुझे जिस बात का शक था वो अभी अभी यकीन मे बदल गया ......
और इतना बोल कर वो कमरे में दाखिल हो गया.....
उसके पीछे पीछे बाकी चारों भी कमरे में आए रचना अभी भी उसी हाल मे थी ब्लाउज के बटन्स खुले हुए और नीचे से पूर्ण रूप से नंगी अपनी चिकनी चूत लिए उन्न सब मर्दों के बिच खड़ी थी......सब के कमरे में पहुंचते ही डॉक्टर बोला की संभू घबराओ मत मै ये बात बाहर नहीं ले जाऊंगा अब जो मजे तुमलोग रचना बहू के लेते हो वहीं जरा हमें भी चखा दो क्युकी रचना बहू जैसी माल बहुत नसीब से मिलती है......और अब मना कर के मेरा दिल मत तोड़ना ..... सब बात सुन कर सौरव को गुस्सा तो बहुत आ रहा था मगर मामले की गंभीरता को वो भली भांति समझ रहा था इसलिए वो चुप चाप खड़ा था मगर अब उसके सब्र का बांध टूट रहा था और अंततः वो बोल पड़ा.....
सौरव - अंकल आप जो समझ रहे है वैसा कुछ भी नहीं है .....
सौरव की बात को बीच मे काटते हुए डॉक्टर बोला
मै बिल्कुल सही समझ रहा हूं बेटा और अब बात को घुमाने की कोशिश करना बेकार है.....रचना अभी तक नंगी ही खड़ी थी संभू उसके पास आया और उसे उसका पेटीकोट देते हुए वो डॉक्टर के बातो को रोकते हुए बोला कि यार देख मेरा बहू से कोई संबंध नहीं है आज तक मै तो बस उसके सहायता कर रहा था उसकी बीमारी में उसका ख्याल रख रहा था और यही काम ये दोनों बच्चे भी कर रहे थे.....और बहू इस हालत में इसलिए है क्योंकि उसको तुम्हारे दिए इंजेक्शन से दर्द हो रहा था
डॉक्टर मुस्कुराता हुआ खड़ा हुआ और रचना को अपने तरफ खींच कर उसे बाहों में भरते हुए उसके इंजेक्शन लिए हुए चूतड़ों पर रख कर मसल दिया रचना और बाकी सब अचानक से हुए इस हमले से सब सकते में थे और रचना तो मारे दर्द के उछल पड़ी और उसकी जोरदार चीख निकल गई इतने में सौरव ने आव देखा ना ताव एक घुसा जड़ दिया डॉक्टर के मुंह पे ......अगले ही पल डॉक्टर बिस्तर पे था और सब सौरव के इस कदम से भौचक्के थे.....
 


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