दो बेटों की विधवा मा
रात का खाना सौरव बाहर से लाने चला जाता हैं और इधर रचना किचन का काम निपटाने में लग जाती है.... रवि हॉल में बैठा आने वाले चुदाई को ले कर सोच रहा था आखिर उसने और उसके भाई ने जीत हासिल कर ही ली थी.... अब कोई नही था उनके बीच न शर्म न हया न पर्दा कुछ नही....तभी सौरव खाना ले आता है रचना भी उसकी आवाज सुन कर बर्तन ले कर टेबल पर आती है वो नंगी घर मे घूमती हुई बहुत ही मादक दिख रही थी और खाना खाने के बाद वो तीनो कमरे में आये जहा रचना सोती थी....आज से सब मा बेटे वही सोने वाले थे....

सौरव - मा आज हम तुम्हे खूब प्यार देंगे और लेंगे भी.....आज से एक नई जिंदगी की शुरुवात हो रही है हमारी....
रवि - हॉ भाई सही बोले जीवन के इस पड़ाव पर आ कर पता चला कि प्यार मिलना भी क्या होता है खास कर जब वो तुम्हारे जैसे औरत का हो माँ....
वो तीनो नंगे ही थे कमरे में खरे थे....
रचना - मेरे बच्चो आज से जैसा तुमलोग कहोगे वैसा मैं करूंगी आख़िर मेरे पास तुमदोनो के अलावा है ही कौन जिसको मैं अपना कह सकू......रवि रचना को एक चुची को पकड़ कर कहता है माँ अब इन्हें हमसे दूर मत करना कभी...हम सब अब एक है तीन शरीर एक जान. ....माँ हम तुम्हे बहुत प्यार करते है और करेंगे भी....
रचना - अच्छा जब तुम दोनों की पत्नियां आ जाएंगी तब इस बुड्ढी औरत को भूल जाओगे....
रवि - नही माँ ये ऐसा कभी हो ही नही सकता..... सौरव भो उसकी हा में हा मिलाता है.....और दोनो उसके गले लग जाते है.....और रचना उन्न दोनो को कस कर दबा लेती है और तब सौरव कहता है चलो भाई अब सोने चलते है....और एक शरारत भरी मुस्कान हस देता है....जिसका मतलब रचना बखूबी समझती है....
सौरव बेड पर चढ़ जाता है और रचना भी फट से बेड पर चढ़ जाती है...रवि अपनी माँ की हरकतो को देख कर मन्द मन्द मुस्कुरा रहा था...वो भी बेड पर चढ़ जाता है और फिर दोनों भाई रचना को एकदम चिपका लेते है खुद से....रचना भी उनका साथ देती है....
रचना के नंगे बदन ने तो उनके लन्ड में आग लगा रखी थी ही अब उसके बदन का स्पर्श ने उसमे आग में घी का काम कर दिया था....दोनो के लन्ड अकड़ कर उसकी चुत और गांड से टकरा रहे थे....कमरे की बत्ती अभी भी जल रही थी तो एक दूसरे को अच्छे से देख सकते थे जो माहौल को और रोमानी बना रह था....
सौरव सबसे पहले रचना की पीठ पर चुम्मबन की बरसात कर देता है और रवि उसके गर्दन पर बस्स इतना ही काफी था रचना की आग को भड़काने के लिए....औऱ रचना उनदोनो के लन्ड पकड़ कर सहलाने लगती है और तभी सौरव उठ कर रचना की एक चुची को मुह में भर लेता है और रवि भी ऐसा ही करता है....और उनके हाथ रचना कक चिकनी चुत पर आ जाते है और रचना उनका स्वागत खुले टांगो से करती है....सौरव फटाक से अपनी दो उंगली उसकी चुत में घुसा देता है जिससे रचना तड़प उठती है....
रचना - आह.....बेटा आह....और वो अपनी कमर उठाने लगती है तभी रवि सौरव को हटा कर रचना की टांगो के बीच आ कर उसकी चुत में मुह लगा देता है....औऱ सौरव भला कैसे पीछे रह सकता था उसने तुरंत रचना को ऐसे पलट जिससे रचना की गांड उपर आ गयी और रवि नीचे चला गया उसकी चुत को चाटते हुए और सौरव रचना की गांड को फैला कर उसके छेद को चाटने लगता है जिससे रचना तो लगभग पागल ही हो जाती है...रचना - आह बेटे...... ओह्हहहह....मा मरी मैं....उफ्फ बेटा रवि अब रचना की चूत को दांतों से ले कर चुभला रहा था जिससे रचना झरने के कगार पे आ रही थी तभी रवि उसकी चुत से मुह हटा लेता है और सौरव उसकी गांड से रचना तड़प कर रह जाती है और उठ कर कहती है क्या हुआ रवि हट क्यों गए...दरअसल ये दोनों रचना को तड़पाना चाहता था जिससे उनकी पहली चुदाई में ओर मजा आने वाला था...तभी दोनो भाई अपने लन्ड रचना को दिखाते हुए कहते है माँ अगर तुम झर जाओगी तो इन् बेचारो का क्या होगा.....और इतना कहना था कि रचना फुर्ती के साथ झुक के उनके लन्ड को मुह में भर लेती है एक साथ दो दो लन्ड उसकी मुह में अट नही रहे थे फिर भी वो पूरी कोसिस कर रहीं थी कि दोनों को खुश कर सके क्योकि वो उनदोनो को अब दुखी नही करना चाहती थी....10 मिनट की चुसाई के बाद रचना की मुह थक गया था जिसे उनदोनो ने देख लिया था मगर फिर भी रचना उनके लन्ड चूसे जा रही थी और तभी सौरव अपनी माँ की गांड को सहलाते हुए उसे दबा देता है ओर रवि उसे उठा देता है और रचना लाल लाल चेहरा लिए उन्नदोनो की तरफ सवालिया नजरो से देखती है ....सौरव रचना की टांगो को पकड़ कर बेड के किनारे कर देता है और रचना की जगह खुद लेट जाता है.....
तभी रवि - माँ तुम सौरव के ऊपर आ जाओ....रचना बिना देर किये उसके ऊपर आ जाती है रचना की लटकती हुई चुचियो को देख कर सौरव का लन्ड एक झटका खाता है...और रवि कहता है कि माँ अपनी कमर को उठाओ वो उठती है तभी रवि उसकी चुत को फिर आए चाटने लगता है....जिससे रचना फिर से पागल होने लगती है और उत्तेजना भरे स्वर में कहती है......तुमदोनो के ये काम मुझे समझ नही आते...आह...उह ओह.....आई.... कुछ ही मिनट के बाद जब रचना की चूत पूरी गीली हो जाती है तब रवि सौरव के लन्ड को सीधा पकड़ कर रचना की चूत के मुहाने पे लगाता है...तभी सौरव एक करारे झटके में आधा से ज्यादा लन्ड माँ की चूत में पल देता है जिससे रचना सहन नही कर पाती है और जोर से चीख पड़ती है....जिसको रवि जल्दी से आगे आ कर उसके होठ चुसने लगता है...और रचना अपने आप को संभाले हुए उकड़ू सौरव के दोनों तरफ पैर किये बैठी थी तभी सौरव जब देखता है कि माँ का दर्द कम है तो एक और झटका देता है और पूरा का पूरा लन्ड पेल देता है....इस बार रचना को चीखने का मौका नही मिलता क्योकि रवि उसके होठो को चूस रहा था.....सौरव अपना लन्ड ऐस ही घुसाए रखता है और जब रचना शांत होने लगती है तब्ब रवि उसके होठ छोड़ देता है और तुरंत नीचे झुक कर रचना की चूत जिसमे सौरव का लन्ड घुसा पड़ा था उसे साइड साइड स चुसने लगता है.....जिससे रचना का दर्द कम होने लगता है और मजा आने लगता है.....जिसे सौरव देख कर अपनी कमर हिलाने लगता है औऱ रवि रचना को सौरव के ऊपर झुका देता है रचना की चुचियो उसके लन्ड को और भड़का रही थी नतीजतन ये की अब सौरव पूरी ताकत से अपना लन्ड अंदर बाहर कर रहा था.....औऱ रचना उसके सीने पर लेटी गांड हवा मे उचकाए आह आह ओह्ह ओह्ह करती हुई अपने बेटे के लन्ड का स्वाद अपनी चुत से चख रही थी....
तभी रवि सौरव के टांगो के बीच आता है जहाँ रचना की गांड उसे न्योता दे रही थी....वो उधर आ कर सौरव को रुकने बोलता है सौरव रवि का इरादा समझ कर रचना के होंठ चुसने लगता है ...और इधर रवि अपने माँ की गांड को फैलाता है औऱ उसमे एक साथ दो उंगली डाल देता है...जिससे रचना को बहूत दर्द होता है मगर होठ चुसवाने के कारण वो चीख नही पाती पर अपने हाथों से उसे छिपाती है कि नही वहा नही मगर रवि को तो करना था और तभी रवि पास ही रखी वेसिलीन की डिबिया उठता है और पूरी की पूरी डिबिया उसके गांड के छेद पे रगड़ देता है रचना बहुत बार हाथो से उसे रोकने की कोसिस की मगर सब बेकार और अछि तरह से छेद को मलने के बाद रवि अपना लन्ड को उसके छेद पे रगड़ता है रचना आने वाले लम्हे को सोच कर थर्रा उठती है....उसकी सारी उत्तेजना गायब हो गयी थी...तभी सौरव उसके होठ छोर देता है....रचना अपनी साँसों को नियंत्रित करते हुए उससे कहती है....
रचना - नही बेटा नही वहां नही वो जगह पे मैं इसे नही ले पाऊंगी..... तू आगे से कर ले बेटा मैं तुझे नही रोकूंगी.... पर बेटा वहा नही....मैं मर जाऊंगी....वो लगभग गिरगिराते हुए कहती हैं मगर रवि नही मानता हैं
रवि - कुछ नही होगा माँ बस्स तुम हौसला रखना....तुम्हे पहले थोड़ा दर्द होगा मगर फिर बहुत मजा आएगा....
अब भला जिसकी गांड फटने वाली हो उसे क्या मजा सूझेगा
रचना - नही बेटा वहां नही तू रवि के साथ आगे ही कर ले....मगर वहां नही बेटा ....
रवि - तुमने जो कहा मा एक साथ सौरव के लन्ड के साथ मैं भी डाल दु तुम्हारी चुत में वो भी करूँगा मगर इसके बाद ओर रचना की गांड़ पर एक करारा थप्पर लगा देता है....रचना कराह उठती है.....और रवि अपना लन्ड उसके गांड़ की छेद पे रखता है और तभी सौरव अपनी माँ को होंठ दुबारा चुसने लगता है....और इधर रवि रचना की गांड में जैसे जैसे लन्ड का दबाव डाल रहा था वैसे वैसे उसकी गांड़ का छेद फैलता जा रहा था और साथ साथ रचना की आंखे भी....वो हाथों से रवि को रोकती है धकेलती है मगर नतीजा सिफर ही रहता हैं......
तभी अपने लन्ड के सुपारे को उसके छेद पर बैठाने के बॉद एक करारा जानदार झटका मारता है और पूरा का पूरा लन्ड एक ही बार मे अंदर जड़ तक पेल देता है.....रचना की आंखे फैल के बाहर आने को होती है......उसकी कुँवारी गांड से खून बहने लगता है.....वो छटपटाने लगती है.....सौरव से अपने होठो को जबरदस्ती खिंच कर छुरा कर दर्द से कराहने लगती हैं लगभग लगभग उसकी गांड़ फट गयीं थी....जिसका असहनीय दर्द उसे हो रहा था रवि के लन्ड को रचना की गांड़ के छल्ले ने एकदम कस कर पकड़ा हुआ था तुरंत सौरव और रवि उसकी एक एक चुची को मुह में भर लेते हैं और उसके दर्द को कम करने की कोशिस करते है तब रचना कहती है मार डाला तुमलोगों ने आह मेरी कुँवारी गांड़ ओह उफ्फ....ऎसे कोई करता है भला....अपनी माँ के साथ....
सौरव उसकी चुची छोर कर कहता है... कोई मा तुम जैसे प्यार भी तो नही कर सकती ना अपने बेटो के साथ.....रचना का दर्द के मारे बुरा हाल था वो सुबकते हुए कहती है चुप कर तू...आह तब सौरव वापिस से उसकी चुची कक मुयः में भर लेता हैं....
आलम ये था कि सौरव सबसे नीचे बीच मे रचना और उसके ऊपर रवि.....हर रचना की चूत और गांड़ दोनो में ही लन्ड.....जिसके दर्द को दोनो भाई मिल कर कम करने की कोशिश में लगे थे......
थोरे ही समय मे रचना का दर्द कम हो जाता है ऑयर तभी रचना खुद कहती है रवि बेटा अब हो गया न अब उसे बाहर निकाल ले जलन हो रही हैं वहाँ..... वो नही सुनता और फिर दोनों भाई लग जाते है धक्के लगाने में और साथ ही साथ उसकी चुचिया का कचुम्बर बनाने में.........और रचना जिसका दर्द अब मजे में बदल चुका था वो थर्राते हुए लफ्जो से कहती है आह बेटो आह तुमदोनो ने तो मेरे बदन में तुमदोनो ने क्या कर दिया है आह बेटे मैं मर रही हु.....आह बेटे कुछ तो रहम कर अपनी माँ पे....और रवि कहता है तो मर जाओ ना मा हम तुम्हे फिर से जिंदा कर देंगे अपने इस इलाज से.....

सौरव - हा मा भैया बिल्कुल ठीक कह रहा है....और तो और हमदोनो इससे इलाज के माहिर डॉक्टर है....2 इंजेक्शन्स में तुम एकदम घोड़ी की तरह काम करोगी मा औ तभी रवि रचना के बालों को पकड़ कर खिंचता है और जोर जोर से रचना की गांड म3 धक्के लगाने लगता है....रचना दर्द और मजे से दोहरी हो जाती है उधर सौरव भी कोइ कसर नाहज छोर रहा था वो भी अपनी पूरी ताकत झोंक कर रचना की चूत में धक्के लगा रहा था....इस बिच रचना 4 बार झड़ चुकी थी और इससे उम्र में 4 बार झड़ना बहुत बड़ी बात थी मगर उसके दोनों बेटे तो जैसे चोदने की मशीन बने हुए थे.....तभी रवि पचाक की आवाज के साथ रचना की गांड़ से लन्ड खिंच लेता है और सौरव भी इधर उसकी चुत में से लन्ड निकाल कर रचना को बेड पर गिर देता है और फिर सौरव की जगह रवि ले लेता है और रवि की जगह सौरव और फिर वक बार रचना का सैंडविच बन जाता है......अजर उसकी दर्द और मजे से भरी सिसकियों से कमरा अगले 1 घण्टे तक गूंजता रहता है.....और अंत मे दोनो अपना अपना वीर्य उसकी गांड़ और चुत मव चोर देते है इनके साथ साथ रचना भी 6थ्वी बार झड़ जाती है और फिर तीनो उसी हालत में हफ्ते हुए एक दसरे के ऊपर लेटे हुए रहते है.....रचना की हालत देखने वाली थी दोनो बेटो के मुरझाए हुए लन्ड अभी भी उसकी चुत और गांड़ में फसे हुए थे....और दोनो चुचिया रवि ले सीने के दोनों तरफ लताल रही थी और रचना की टांगे एकदम चौरी फैली हुई.....बाल बिखरे हुए....अपनी साँसों को नियंत्रित करने में जुटी हुई थी उसके बदन में इतनी भी जान नही बची थी कि वो उनपे से उतर कर बेड पर लेट जाएं....आज कई सालों बाद उसकी चुदाई हुई थी औऱ वो भी उसके दोनों छेदों में एक साथ..... उसके अपने ही बेटो से.....
बिस्तर पर रचना की गांड़ से निकला हुआ खून इससे बात की गवाही दे रहा था कि उसकी गांड़ बहुत बुरे तरीके से फाड़ी गयी थी.....उस दो घण्टे की कामलीला के बाद वो तीनो मा बेटे वैसे ही सोये रह गए जो सुबह ही उठे सीधे.....
सुबह जब रचना जागी तो देखी की सो अपने दोनों बेटों के बीच लेटी हुई है और उसके दोनों बेटे उसके अगल बगल.... रवि का लन्ड सिकुड़ कर रचना की गांड़ से लग रहा था और सौरव अपनी माँ की एक चुची को मुह में भरे अपना लन्ड उसको चुत के मुहाने पे फसाये हुए सो रहा था....तभी रचना उठने की कोशिस करती है और एक चीख़ के साथ बिस्तर पर वापिस गिर जाती है क्योकि उसकी गांड़ का छेद दर्द कर रहा था और उसकी इस चीख से दोनो शैतान भी जाग गए और बोले.....गुड़ मॉर्निंग मा....और एक एक चुम्बन उसके होठो पर रसीद कर दिए.....

रवि - मा यहां दुख रहा है क्या....वो उसकी गांड़ पे हाथ रख कर पूछता है.....रचना कहती है चुप करो कितनो बेदर्दी से मेरी कुँवारी चुतर में अपना ये मूसल जैसा हथियार डाल दिया जरा भी दया नही दिखाई तुमलोगो ने मेरे पे.....अब बताओ मैं काम कैसे करूंगी उठ भी नही पा रही चलना तो दूर की बात है....
रवि - माफ करना माँ मुझे मगर क्या करता तुम्हारी ये कयामती गांड़ देख देख कर मैं पागल सा हो गया था..... और जब मुझे बर्दास्त नहीं हुआ तो मैंने ये कर डाला...सॉरी माँ.... और वो उसके गले लग जाता है....
रचना उसे अपने खुले हुए सीने से चिपका लेती है....और तभी
सौरव - माँ मानता हूं तुम्हे दर्द हुआ है मगर बाद में तुम अपनी ये कमर उछला उछला कर भाई का लन्ड ले रही थी और मेरा भी....दोनो के हथियारों से खूब मजा मिला तुम्हे मा
रचना इस बात से शर्मा गयी थी क्योंकि बात तो सच थी मजा तो उसे बहुत आया था ये और बात थी कि गांड़ की पहली चुदाई में दर्द हुआ मगर अब नही होगा....
सौरव - मजे के टाइम पर मजे कर लिए और अभी दर्द दर्द चिल्ला रही हो....लाओ अभी ठीक किये देते है....और दोनो भाई रचना को खुद से चिपक लेते है.....और उसकी गर्दन पर अपने होठ रगड़ने लगते है....तभी रचना उनदोनो को दूर करते हुए कहती है अभी नही अभी मुझे माफ़ करो भाई....मेरे दोनो जगह आगे पिछे दर्द हो रहा है....तब वो दोनो भाई कहते है माँ लाओ ना अभी तुम्हारा दर्द दूर कर देते है....औऱ उसे लिटा देते है मगर रचना तुरत उठ जाती है और कहती है अभी नही अब मुझे काम करना है और तुम दोनों अपने अपने काम मे लगो.....जाओ और नहा धो लो.....तब तक मैं बाकी के काम निपटा लेती हूं.....और वो उठने लगती है पर गांड़ के दर्द से वो चीख पड़ती है.....और धम से बिस्तर पर गिर जाती है.....
तब सौरव रचना को पकड़ कर उसे उल्टी लिटा देता है औऱ कहता है माँ एकदम चुपचाप लेटी रहो.... काम बाद में करना....और रवि पास में अलमिरह से.....एक क्रीम ला कर सौरव को देता है और रवि रचना की गांड़ को फैलाता है सौरव उसमे क्रीम मलता है जिससे रचना आह कर उठती है और सौरव कहता है बस माँ थोड़ी देर ऐसे ही लेटी रहो आराम मिलेगा और हा भइया तुम गांड़ को ऐसे ही फैलाए रखना थोड़ा जल्दी आराम मिलेगा....सौरव अच्छे से रचना कि गांड़ को मलता है कुछ ही देर में रचना की चूत बहने लगती है जिसे सौरव उसकी गाड़ को मलते हुए उसकी चुत में भी तीन तीन उंगली घुसाने लगता है जिसे रचना अपनी कमर को हवा में उठा कर उसे और अच्छे से अंदर तक महसूस करती है.....और सौरव अपनी तीनो उंगलियो को फैला फैला कर अंदर बाहर कर रहा था जिससे रचना को दर्द और मजा दोनो आ रहा था....15 मिनट की उंगली चुदाई और गांड़ घिसाई के बाद रचना का बदन अकड़ने लगता है और तभी वो हांफती हुई सीधी हो कर दोनो को अपने सीने से सटा कर कहती है तुमदोनो ने आखिर सुबह सुबह भी अपनी मनमानी कर ही ली.....बहुत शरारती हो दोनो और आह करते हुए उठती है कहती है चलो अब तो हो गया न....अब कुछ काम भी कर ले.... दोनो बेटे मा को सहारा दे कर उठाते है और रचना कहती है अब रहने दो तुम दोनों जाओ और फ्रेश हो जाओ....रचना बाहर हॉल में आती है और वहां पड़े अपनी पेटिकोट उठती है और उसे पहन लेती है और ब्लाउज पहनने के बाद कामो में लग जाती है.....
सुबह का काम निपटने के बाद वो हॉल में खाने के टेबल पर आ कर खाना रखते हुए उन्न्दोनो से कहती है की अभी तक तुमदोनो ने कपडे क्यू नहीं पहने है

वोदोनो एक साथ कहते है की हमे अभी कपड़ो की जरुरत नहीं रही माँ तभी उनकी नजर रचना पे जाती है जिसने ब्लाउज और पेटीकोट पहन रखा था तो वो बोले ली माँ ये क्या है तुमने कपडे क्यू पहन लिए
रचना - तो क्या मई दिनभर घर में नंगी घुमु और वैसे भी मैंने पुरे कपरे पहने कहा है केवल ब्लाउज और पेतीकोट ही तो पहने है
सौरव - उठ कर रचना के पास आता है और उसके ब्लाउज के पांच में से तिन बटन खोल देता है और उसकी छातिया बहार निकलने को आतुर हो रही थी
सौरव - माँ इन्हें हमेसा ऐसे ही रखा करो ताकि जब हमारा मन करो ताकि जब हमारा मन हो हम इसने चूस सके....और फिर वो निचे घुटनों के बल बैठ जाता है और रचना के पेटीकोट के नाड़े को खोल कर उसे घुमाता है और पेटीकोट के कटे हुए भाग को चूत के सामने ला कर उसे इतना निचे कर के बांधता है जिससे रचना की चूत की दरार और पीछे घुमने पर गांड की दरार दिख रही थी
रचना - ऐसे पहनने का क्या मतलब हुआ फिर मई नंगी ना हो कर भी नंगी ही हु और तुमदोनो का तो कुछ समझ ही नहीं आ रहा मुझे की आखिर करना क्या चाहते हो....
रवि - माँ मुझे मिली है एक महीने की छुट्टी और इस एक महीने को मई पूरी तरह खुल कर जिऊँगा और वो भी तुम्हारे और सौरव के साथ
रचना - हां वो तो दिख ही रहा है की कितना खुल कर जी रहे हो कल से ......और हस देती है
सौरव - माँ प्लीज तुमने कहा नंगी नहीं रहूंगी ठीक है मगर माँ ऐसे तो रह ही सकती हो और प्लीज इसके लिए मन मत ही करना वरना मई तुम्हे फिर नंगी ही रखूँगा और वो भी जबरदस्ती ......तभी रचना उसके कान पकड़ कर खींचते हुए कहती है अच्छा बेटा माँ को आँखे दिखा रहा है जरा सी ढील का इतना असर हुआ है तुझपे
सौरव - आह माँ आह सॉरी गलती हो गयी माँ मेरे कहने का मतलब वो नहीं था माँ आह माँ
प्लीज माँ मै तो कह रहा था की मै तुम्हे बस इतना कह रहा था की बात मुझे मनवानी आती है अगर ऐसे नहीं मानी तो तुम्हारी मालिश कर के मनवा लेता....और हस देता है रचना उके कान छोर देती है और शर्मा जाती है की कैसे सुबह उसकी मालिश के बहाने उसका पानी निकाला था इन्न्दोनो ने....
उधर रवि कहता है - बात तो सौरव ने ठीक ही कही है माँ....हेहेहीहेहेह
रचना - जाओ मई तुम दोनों से बात नहीं करती और घूम कर जाने लगती है और तभी सौरव रचना को पीछे से पकड़ कर उसकी गर्दन पे वार कर देता है और रवि उसकी पेटीकोट में हाथ डाल कर उसकी चूत को रगड़ने लगता ही जिससे रचना फिर से पिघलने लगती है और कुछ ही पालो के बाद रचना नंगी हो कर अपने दोनों बेटो के बिच खरी थी और दोनों के दोनों लौड़े उसकी खिदमत में लगे हुए थे रचना के मान में ये आभास होते ही की फिर से उसके दोनों छेदों की दुर्दसा होने वाली है वो एक पल को सिहर जाती है मगर अगले जी पल सौरव निचे बैठ कर उसकी जन्घो को थोरा सा फैला क्र उसकी चिकनी चूत पे अपना मुह लगा देता है और रचना न चाहते हुए भी अपनी दोनों टांगो को जितना हो सके फैला देती है और तभी रवि पीछे से आ कर उसकी गांड को फैला कर वह अपना मुह लगा देता है रचना इस दोतरफा हमले से पागल हो उठती है और अपने दोनों हाथो से दोनों के सर को पकड़ कर अपने दोनों छेदों पे दबाती है दस मिनट की चुसाई के बाद वो दोनों रचना को वही फर्श पे लिटा देते है......
रवि रचना की चूत में अपना लंड एक ही बार में पेल देता है और रचना चिख उठती है मगर उन्दोनो को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है चूत में लंड डालने के बाद रवि रचना को ले कर पलट जाता है......
जिससे रचना की गांड औरव के सामने आ जाती है और सौरव अपनी रचना की गांड को अछे से फैला कर उसके गिले छेद में अपना लंड उसके मुहाने से छुआता है
रचना उसे हाथ पीछे कर के रोकने का प्रयास करती है मगर सौरव उसके हाथो को पकड़ कर उसकी पीठ से लगा देता है और अपना तैयार लंड रचना की गांड में एक झटके के साथ आधा पेल देता है जिसे रचना की रात की घायल गांड इर से लाल हो जाती है और खून की एक पतली धारा उसकी गांड से बह उठती है और रचना की आँखों से आसुओ की धारा...उस झटके के बाद सौरव बिना रुके एक और करारा झटका मरता है और पूरा का पूरा लंड पेल देता है रचना अपना सर इधर उधर घुमाने लगती है क्योकि कल रात के झाख्म अभी भी ताजे थे और ये प्रहार रचना की घायल गांड के लिए कहर बन के आया था मगर दोनों बेटो पे वासना पूर्णतः सवार हो चुकी थी और फिर हॉल में ही शुरू हुआ रचना के दोनों छेदों का एक बार फिर से मर्दन औए साथ ही साथ दोनों उसकी एके एक चूची को अपने अपने मुह में लिए हुए थे रवि तो सीधे चूस सकता था मगर सौरव एक बेदर्दी की तरह चूची को पीछे की और खीच कर मुह में भरे हुए थे जिससे रचना का दर्द दोहरा हुआ जा रहा था मगर दोनों के झटको ने रचना के बदन में एक आनद की लहर दौडानी शुरू कर दी थी और कुछ ही समय के बाद रचना अपनी कमर उचका उचका कर दोनों के लंडो का सवागत अपनी चूत और गांड में करने लगी.........
एक घंटे की ताबरतोड़ चुदाई के बाद दोनों ने रचना के छेदों में अपना अपना वीर्य उसके अन्दर छोड़ दिया उसके बाद तीनो हाफ्ते हुए वही पड़े रहे कुछ देर के बाद रचना उठ कर बैठी उसकी हालत देखने लायक हो हो गई थी नंगी औरत अपने हॉल में दो दो लंडो से चुदने के बाद अपनी दुखती गांड और चूची के दर्द को कम करते हुए और फिर दोनों को बोली की तुमदोनो ने ना मुझे क्या से क्या बना दिया है और वो सौरव को ओने नंगे जांघ पे लिटाते हुए कहती है की कितना बेदर्द है रे तू कैसे मेरी इसको.....(अपनी चूची की और इशारा करते हुए) खिचे ही जा रहा था जरा भी प्यार नहीं आया तुझे जरा भी दया नहीं दिखलाई और तो और मेरी घायल चुतरो लो कितनी बेदर्दी से अपने इस मुसल से कूट दिया उफ़ मेरी जान निकल दी तुमदोनो ने......चलो अब उठो खाना खाते है और रचना उन्दोनो के साथ साथ खाने के टेबल पर आती है और फिर पीछे घूम कर वही फर्श पे गिरे हुए अपने कपडे उठाती है और पहनते हुए उन् दोनों की तरफ देखती है और वो सौरव को कहती है इधर आ सौरव उसका मतलब समझ कर उसके पास आता है और उसके ब्लाउज के तिन बटन खुले छोर कर केवल दो बटन्स लगा देता है और उसके पेटीकोट को भी उसी तरह पहनता है और इधर रवि अपने भाई और माँ के इस हरकत को अपने मोबाइल में कैद करने लगता है रचना उसे देख कर मुस्कुरा कर पूछती है....ये क्या कर रहा है...
रवि - कुछ प्यारे और अनमोल लम्हों को कैद कर रहा हु माँ .....और एक फ्लाइंग किस रचना की तरफ उछाल देता है.....
इर दोनों खाना खाते है और उसके बाद खाने के टेबल पर ही रवि कहता है चलो आज कही घूम कर आते है
सौरव - हां भईया चलो आज घूम कर आते है
रवि - पर कहा
सौरव - मूवी चलते है अभी काफी मूवीज लगी हुयी है....
रवि - कौन कौन सी
सौरव -लखनऊ सेंट्रल ....सिमरन.... बी.अ. पास 2.....
रवि - कोई हॉलीवुड की मूवी है तो बता...
सौरव - एनाबेले 2 लगी है मगर....
रचना - मगर क्या
रवि - हा बोल मगर क्या
सौरव - भूतीया मूवी है...
रवि - तुरत 3 टिकट्स बुक कर दल आज रात की आज नाईट शो चल रहे है और खाना भी होटल में खाएंगे
सौरव चहकते हुए जी भाई अभी लो
रचना - बिलकुल नहीं मै नहीं कही जा रही कोई पिक्चर वागैराह् तुमदोनो के साथ तुमदोनो की शरारत मै खूब समझती हु और मुस्कुरा देती है
सौरव - तिन टिकट्स बुक हो चुके है और तुम हमारे साथ चल रही हो माँ प्लीज....और सौरव के साथ साथ रवि भी उसे जोर दे कर कहता है तब रचना बुरा सा मुह बना कर रह जाती है.....
खाने की टेबल पर उसके बाद कुछ खास नहीं हुआ दोनों भाई आने वाली शाम के बारे में सोच सोच कर रोमांचित हो रहे थे........रचना किचन का सारा काम निपटाने के बाद जोर से आवाज दे कर दोनों लडको को बुलाती है...चलो नहला दू तुमदोनो को....उनकी आँखे चमक उठती है.....वो तो पहले से नंगे ही थे....झट से बाथरूम में घुस गए.......रचना उनके पीछे पीछे आती है वो अभी भी सौरव के हाथो पहनाये हुए कपड़ो में थी अधखुले ब्लाउज और पेटीकोट से झांकती हुयी उकी चूत और गांड की दरार की झलक काफी मादक लग रही थी.....आते के साथ वो अपनी ब्लाउज उतर देती है और बाल्टी में पानी भरने के लिए नल खोल देती है रवि और सौरव को फर्श पर बैठने के लिए कहती है वो दोनों एक छूते से बच्चे की तरह अपनी माँ की आगया का पालन करते है बाल्टी से पानी निकाल कर उन्न्दोनो के सर पर डालती है गिले करने के बाद.....और फिर उन्हें साबुन लगाने लगती है और ऊपर साबुन मलने के बाद उनको खरा कराती है और फिर घुटनों के बल बैठ कर उनके अन्डकोशो को हाथो में ले कर बारी बारी से साबुन मलती है......और इधर उन्न्दोनो की हालत पतली हो चली थी .....आखिर एक तो रचना के लटकती चुचियो के दर्शन उनके लंड को अकड़ने पे मजबूर किये हुए थे और खरे लंड पर साबुन जलन पैदा कर रहा था कुछ देर के बाद रचना ने उनपे पानी डाला और साबुन धुलने के बाद उन्के लं मुह में ले कर चूसने लगी.....रचना का ये अकस्माक उत्तेजित कर देने वाले कदम से दोनों बेटे अपनी जीत पर एक बार फिर गौरव्नान्वित हो रहे थे....उधर रचना उनके लंड चूसते चूसते अपनी पेटीकोट के नाड़े को खोल देती है और रचना बैठे बैठे ही अपना पेटीकोट अपने बदन से अलग कर देती है और पूरी नंगी हगो जाती है और उसके चूसने की रफ़्तार भी बाधा देती है....

ये दृश्य देख कर दोनों की उत्तेजना बढ़ जाती है और दोनों रचना के सर को पकड़ कर उसके मुह में ही अपना माल छोर देते है ......रचना का मुह पूरा भर जाता है और उनका माल उसके मुह से बहार बहने लगता है रचना उठा कर खरी हुयी नंगी उनके सामने और कहती है
रचना - चलो महासे दोनों की नहलाने की कवायद यहाँ पूरी हुयी अब जा कर अपने अपने कमरे में कपरे पहनो और चुप चाप बैठो मै नहा कर आती हु ......और घूम जाती है वो मन ही मन ये सोच रही थी की उसकी मतवाली घायल हुयी पड़ी गांड को देख कर दोनों उसके पीछे लटकेंगे जरुर और होता भी वैसा ही है वो उसे पीछे से पकड़ लेते है और कहते है ऐसे कैसे माँ हमको तो तुमने नेहला दिया अब हम भी तो तुम्हे नहला दे आओ इधर और उसे पकड़ कर बाथरूम की फर्श पर सीधा लिटा देते है और उसके गोरे बदन पर पानी गिराने लगते है फिर यो भी उसके बदन पे पुरे जोरशोर से साबुल मलते है उसकी दोनों जन्घो को खोल कर चूत में अन्दर तक साबुन लगाते है और फिर उसे पलट कर उसकी पीठ और गांड की भी उसी तरह मालिश करते है....बेचारी इनके हाथो के जादू के कारन एक बार फिर उसका बदन अकड़ने लगता है और वो बाथरूम की फर्श पर भी एक बार झड जाती है मगर इस क्रिया में दोनों शैतानो की हवस फिर से हावी हो गयी और बाथरूम में ही फर्श पे रचना एक बार फिर से चुद जाती है और उसकी चूत काफी सूज जाती है और गांड की छेद भी काफी दर्द से भर जाती है अब हाल ये था की रचना को गांड और चूत सिकाई की जरुरत थी जो उसे उसके दोनों बेटे कमरे में ले जा कर देते है...
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रचना की चूत और गांड की सिकाई के बाद वो तीनो सो जाते है इस वक़्त रचना केवल एक ब्लाउज में थी ब्लाउज के भी सारे बटन्स खुले हुए थे और निचे से वो पूरी नंगी थी क्योकि उसकी गांड और चूत की सिकाई के वक़्त दोनों ने उसका पेटीकोट उतर दिया था और फिर हलके गुनगुने पानी से उसकी सिकाई की थी जिससे उसे काफी आराम मिला था.........और उसके बाद उसकी चुचियो का रसपान करते हुए नींद की आगोश में चले गये थे..........

शाम ५ बजे के आसपास रचना की नींद खुली और वो अपने बेटो को भी उठती है और कहती है उठो बच्चो शाम हो गयी है घुमने जाना है न.....उठो मै चाय बना कर ले आती हु और वो नंगी ही अपने खुले ब्लाउज में वह से उठ कर चली जाती है...कुछ देर बाद जब दोनों उठ कर बाहर हॉल में आते है तो रचना पेटीकोट और ब्लाउज में बैठी टीवी देख रही होती है और चाय पि रही होती है और तो और जैसे सौरव ने उसे उसके ब्लाउज और पेटीकोट पहनाया था उसने भी उसी तरह कपडे पहने हुए थे....जिसे देख कर सौरव कहता है वाह माँ क्या बात है
रचना उसे देख कर मुस्कुरा देती है सौरव और रवि उसके पास आते है और और उके गालो को चुमते हुए उसकी एक एक चूची को मसल देते है जिससे रचना आह कर उठती है...और कहती बदमाश कही के...चुचियो के मसलने के कारन वो दोनों बहार की और लटक जाती है जिसे देख कर दोनों के मुह में पानी आ जाता है | रचना उन्न्दोनो को अपनी बाहे फैला कर बुलाती है और अग्ले ही पल उसकी दोनों चुचियो की घुन्दिया उन्न्दोनो की मुह में हूति है और रचना का हाथ उन्दोनो के सर पर और सौरव का हाथ रचना की पेटीकोट से झाकती हुयी चूत की दरार पे फिरने लगते है जिसका स्वागत रचना अपनी टाँगे फैला कर करती है.......कुछ ही देर में रचना झटके के साथ दोनों को अलग करती है और कहती है की अब बस अभी के लिए इतना काफी है.....चलो अब चाय पीओ और तैयार हो जाओ जाना भी तो है.....
रचना - अच्छा बताओ क्या पहनू....उसके इस सवाल से दोनों उसकी तरफ देखने लगते है जिससे रचना शर्मा जाती है की उसने ये क्या पुछ दिया और वो शर्मा कर उठने लगती है.....तभी रवि उसका हाथ पकड़ कर उसे अपनी गोद में बैठा लेता है और कहता है माँ ऐसे ही चलो न
रचना अपनी आखे गोल कर के कहती है धत्त बदमाश ऐसे बहार जाउंगी नंगी पुंगी पता चला वापिस नहीं आ पाऊँगी
सौरव - क्या बात करती हो माँ हमारे रहते तुम्हे कोई नजर उठा कर भी नहीं देख सकता तुम्हारी इज्जत हिफाजत खुसी जरुरत दुःख सुख सब हमारे जिम्मे है समझी न...तो चिंता मत करो और ऐसे ही चलो....और जोर से हस देता है.....
रचना कहती है की कमरे में आ कर खुद मुझे तैयार करो....और उठ कर हस्ते हुए बाथरूम भाग जाती है....वो दोनों अपनी अपनी चाय ख़तम करने के बाद कमरे में आते है और रचना को आवाज लगते है कहा हो माँ...
रचना - आई बाथरूम मर हु...कुछ देर में रचना नंगी बाथरूम से बहार आती है और दोनों के लंड उसके गिले बदन को देख सलामी देने लगते है .....
रचना - सोचना भी मत चुप चाप मुझे तैयार करो और घुमने चलो.....
सौरव - वाह भाई वाह सुबह तो मुह बना रही थी की कही भी नहीं जाना तुमदोनो के साथ और अभी नंगी हो कर हमे कह रही की जल्दी से तैयार करो और घुमाने ले चलो ....हाहाहाहाहाहाहा
रवि - हा छोटे कह तो तू बिलकुल सही रहा है मगर अब माँ का भी मन है हमारी शरारतो में हमारा साथ देने के लिए.....क्यों सही कहा न माँ
रचना सर झुका कर हस देती है क्योकि बात तो बिलकुल सही थी....
रचना नंगी रूम में आती है और उसके साथ साथ दोनो शैतान भी.....कमरे में आ कर रवि रचना के गीले बालों को पोछने में मदद करता है और साथ ही साथ उसके बाकी शरीर को भी पोछता है.....जबतक सौरव रचना के अलमीरा में से एक साड़ी और एक ब्लाउज और इनको निकलने के बाद दौर कर अपने कमरे से एक रस्सी ले कर आता है.....रचना उसे सवालिया नजरो से देखती है जबकि रवि मुस्कुराता है....

रचना - मेरी पेटिकोट कहा है और ये रस्सी क्यों लाये हो....
सौरव - तुम बस देखती जाओ माँ....और जबतक काम पूरा नही हो जाता मुह बन्द रखना .....
भइया तुम माँ को नंगी तैयार करो मैं तुम्हारे बाद उसे खूबसूरती में चार चांद लगाऊंगा.....
रवि रचना के बालों को कंघी से सुलझाने लगता है और उन्हें सुलझाने के बाद उसके बदन को डीओ से खुश्बूदार बना देता है उसके बाद वो उसे उसकी बाहों को उठा कर काँखों में पाउडर लगता है और उसके बाद डियो दुबारा उठा कर उसकी गांड़ और चुत पे भी स्प्रे कर देता है और डियो के ठंडे अहसास से रचना गनगना जाती है |
रचना - क्या करते हो रवि ये वहा लगाने की चीज थोरे ही है |
रवि हस कर रह जाता है और चिल्ला कर कहता है
सौरव अब जल्दी करो और माँ को कपरे पहना दो या ऐसे ही ले जाने का इरादा है आर ये कहते हुए रचना की चूची को मुह में भर लेता है .....रचना उसे कुछ देर चूसने देती है जबतक सौरव उसके लिए कपरे ले आता है और रवि जा कर अपने मोबाइल से रचना और सौरव की विडियो बनाने लगता है सौरव रचना की कमर में वो रस्सी बांध देता है और रचना को ब्लाउज पहना देता है वो उसके ब्लाउज की दो बटन्स खुले छोर देता है
रचना - ये क्या कर रहा है कमर में रस्सी ब्लाउज के खुले बटन्स ऐसे ले जाओगे मुझे मई ऐसे नहीं जा रही हु कही सौरव उसकी कमर को पकड़ कर कहता है की रुको माँ तुम बस देखती रहो और मैंने और रवि भईया ने क्या कहा है याद है ना |
रचना - हां
सौरव - तो बस
और वो रचना को साडी पहनाने लगता है साडी का एक भाग जिसकी पेटीकोट में डालते है वो औरव उस रासी के अंदर डालता है जो साडी को अछे से थाम लेता है निचे गिरने नहीं देता रचना आँखे गोल किए उए देखती रहती है उसे तैयार करने के बाद दोनों भाई भी तैयार हो जाते है और निकल पड़ते है हॉल की तरफ ऑटो में रचना उन् दोनों के बिच बैठती है और रचना को बिना पेटीकोट के साड़ी काफी अजीब एहसास दे रहा था मगर अथ ही साथ उसकी चूत भी गीली हो रही थी ऑटो में उन तीनो के अलावा दो और मर्द आ कर बैठे ड्राईवर के अगल बगल और वो दोनों भी साइड मिरर से रचना को देखने लगते है पूरी की पूरी रंडी लग रही थी ब्लाउज के खुले हुए दो हुक्स और साडी कमर से काफी निचे वो दोनों को समझते देर ना लगी की ये दोनों लौंडे आज रात के ग्राहक है इस्सके वो दोनों उसे पूरी तरह घूरते हुए अपने मंजिल पर पहोच जाते है और ऑटो से उतर कर चले जाते है जाते वक़्त घूम कर उसकी तरफ देखते जरुर है और रचना भी उन्न्दोनो को ही देखते रहती है जिसके बाद रचना गुस्से में सौरव को देखती है और सौरव आँख बचाते हुए उसकी चूची को दबा देता है....
रचना झटके से उसका हाथ हटाती है.......
रवि इन्न्दोनो की हरकतों को देखते रहता है कुछ ही देर में हॉल पहुच जाते है नाईट शो होने के कारण लोग कम ही थे वो दोनों अन्दर आने के बाद अपनी सीट पर बैठ जाते है और ऑटो की ही तरह रचना उन् दोनों के बिच बैठी होती है.....
हॉल में औरते ना के बराबर थी जो थी वो लगभग अपने बोय्फ़्रिएन्द्स के साथ मस्ती करने ही आई थी | फिल्म शुरू हुयी ..........भूतिया मूवी थी कुछ देर मर ही अपना असर दिखाना चालू कर दी......जब जब हॉल में चीखने या ऐसी कोई भी जोरदार आवाज होती तो रचना डर के मारे दोनों के हाथो को कस के पकड़ लेती.......रचना के स्पर्श से दोनों के अंदर सुरसुरी और हवास खून बन कर दौरने लगे.......उन्होंने रचना की अधखुले ब्लाउज में से झाकती हुयी चिचियो को ऊपर ही उपर होठ रगरना चालू कर दिया जिससे रचना का भी मन बहकने लगा और सबसे साइड की सीट होने का फायदा वो दोनों बखूबी उठा रहे थे कुछ ही देर में रचना ने अपने ब्लाउज के बटन्स खुद ही खोल दिए और पूरी की पूरी चूची उन्न्दोनो के मुह में ठूस दी और वो दोनों भी पुरे मन से रचना की चूची चूसने काटने लगे.....जिससे रचना को दर्द के साथ साथ मजा भी आ रहा था मगर वो बरी ही मुस्किल से ओनी सिसकियो को रोक रही थी पाच मिनट चूसने के बाद रवि अपना हाथ रचना की टांगो की और ले जाता है और रचना बात को समझते हुए अपनी टाँगे खोल देती है.......

अब कौन मूवी देखे...वो दोनों तो बस रचना को गरम करने में लगे थे आज वो दोनों ने ठान लिया था की रचना को पूरी तरह से बेशरम बना कर रहेंगे रवि रचना की चिकनी चूत को साड़ी के ऊपर से ही मसल रहा था....
तभी सौरव रचना की चूची से हाथ हटा कर निचे की और लाता है और उसकी साडी को ऊपर करने लगता है रचना उसे रोकने की कोसिस करती है मगर रवि उसका हाथ पकड़ कर रोक लेता है और ओने नंगे लंड पर हाथ रख देता है रचना नजर घुमा कर देखती है तो उसे विस्वास नहीं होता की दोनों ने अपने अपने लंड बहार निकल लिए है और अब उसके तरफ बढ़ रहे थे ......और उसे आभा हुआ की उसने अपने ब्लाउज को पूरा खोल रखा है तो उसे बहुत ही शर्मिंदगी भी हुयी और तभी रवि उसकी चूची को छोर कर उसके गर्दन पर अपने होठो से वार कर देता है और ये रचना की चूत में बाढ़ लाने के लिए काफी सरल उपाय था और हुआ भी ऐसा ही एक तो चूची पे सौरव का मुह और दुसरे पे रवि के हाथ उफ़ .....रचना आह कर उठी और उधर परदे पर भूत पूरा तांडव मचा रहा था रात के समय का जंगल का सिन था और हॉल में घुफ्फ़ अँधेरा था जिसका फायदा ये दोनों पूरी तरह उठा रहे थे........इधर सौरव ने मौके का फायदा उठाते हुए रचना की साड़ी कमर तक उठा दी जिसे रचना ने अपनी गांड उठा कर पूरी तरह अपने कमर पर ले लिया अब वो एक तरह से पूरी नंगी थी हॉल में सीट पे बैठी हुयी....झटपट सौरव ने दो ऊँगली रचना की गीली चूत में डाल दिया जिसे रचना की तेज सिसकी निकली मगर वो हॉल के शोर में दब कर रह गयी रचना की गीली हुयी चूत में सौरव धनाधन ऊँगली अंदर बहार करना शुरू किया और रचना अपनी कमर उचका उचका कर उसके उंगलियों को निगलने पे तुली थी.....अनायास ही रचना के हाथ दोनों के लंड पे आ जाते है और वो उनकी मुठ मरने लगती है इधर रवि उसके गर्दन से होते हुए उसके होठो को चबाने लगता है....और सौरव ऊँगली दनादन पेल रहा था उन्न्दोनो के लंड को रचना इतने जोर से हिला रही थी की वे दोनों भी उत्तेजना के चरम पर थे....कुछ ही देर में रचना की चूत से फवारा छुट पड़ता है और इधर ये दोनों भी अपना अपना माल एक आह के साथ छोर देते है रचना का पूरा हाथ गिला हो जाता है और रचना झरने के बाद भी उनके लंड हाथो में लिए हॉल की सीट पे लगभग नंगी बैठी अपनी सासों को नियंत्रित करने में लगी थी तभी सौरव और रवि दोनों रचना की एक एक चूची को अपने हाथो में ले कर उसके निप्पल को उमेठते हुए कहते है वाह माँ मजा आ गया ......
रचना जो अपनी दोनों की दोनों चुचिया नंगी अपनों चूत गांड सब नंगी किए अपनी टाँगे फैलाये उस हॉल की एक सीट पे बैठी थी और उसके हाथ अभी भी उसके दोनों बेटो के लंड पर थी ..............
उनकी सीट प्रोजेक्टर के बिलकुल पास थी अगर कोई दर्शक पीछे की और आता या देखता तो रचना की पुरे मिलकियत के दर्शन उसे हो जाते.....जो की एक खुली तिजोरी के माफिक थी...........
सौरव - माँ क्या हुआ कुछ बोलती क्यों नहीं हो.....और रचना की चूत को हाथ में ले कर मसल देता है रचना आँखे बंद किए अपनी कमर उठा कर आह करती है और कहती है
रचना - नजर घुमा कर देखो कौन औरत ऐसे नंगी बैठी होगी यहाँ....आह सौरव छोरन दर्द हो रहा है....ऊँगली कर ले मगर उसे निचोड़ मत ना आह बेटा.....सौरव फटाक से अपनी दो उंगलिया उसकी गीली चूत में घुआ देता है रचना चिहुक जाती है और रवि अपनी माँ के कमर को हल्का सा ऊपर की और उठा कर अपनी दो उंगलिया उसकी गांड में घुसा देता है जिसे रचना बर्दास्त नहीं कर पाती और उसके मुह से एक हल्की मगर थोरी तेज चीख निकल जाती है ...........वो तो गनीमत रही की किसी ने देखा नहीं वरना बहुत कुछ हो सकता था.....रवि की दोनों उंगलिया रचना की ताज़ी ताज़ी फटी हुयी गांड में घुसी हुयी थी और उसके गांड के चालले ने उसे बहुत ही जोर से पकड़ रखा था...
सौरव - क्या करती हो माँ कितनी जोर से चीखी थोरा बर्दास्त किया करो मेरी माँ...और हस देता है
रचना जो दर्द से बेहाल थी क्योकि उसकी चूत में दो ऊँगली और गांड में दो दो उंगलिया अपनी चुचिया खोले.....वो भी एक सिनेमा हॉल की सीट पे बैठी थी....कहती है जिसकी गांड नयी नयी तुम्हारे इस मुसाल से फाड़ी गयी हो उससे हगने पर भी दर्द होता है यहाँ तो तूमने एक तरह से अपनी लंड के छोटी हमशकल ऊँगली घुसा दी है.....दर्द नहीं होगा तो क्या होगा मजा आएअगा.....आह रवि निकाल ले न....बेटा
रवि - माँ मजा भी आएअगा रुको तो सही...और ऊँगली हिलाने लगता है हलाकि हिलाने में बन रहा नहीं था फिर भी वो हिलाए जा रहा था मगर रचना दर्द से और बेहाल होते जा रही थी और इधर सौरव ने भी अपनी ऊँगली हिलानी शुरू कर दी थी रचना उनके लंड से हाथ हटा लेती है और उन्न्दोनो के हाथो को पकड़ लेती है मगर केवल नाम के लिए.....वो दोनों ऊँगली करते हुए दुबारा से उसकी चूची की चूसने लगते है जिससे रचना का दर्द और मजा दोहरा हो जाता है और कुछ ही पालो में रचना की चूत और गांड रिसने लगती है और इन्न्दोनो की उंगलिया लपालप अंदर बाहर होने लगती है रचना लगातार अपनी कमर उठाये हुए थी और अपनी टांगो को फैला रही थी और दोनों के हाथो के उंगलियों को अन्दर तक ले रही थी कुछ देर में रचना एक बार दुबारा झड जाती है ...और जोर जोर से हाफ्ते हुए वही सीट पे बेहाल पस्त हो के फ़ैल जाती है और वो दोनों अपनी माँ को ऐसे देख के रोमांचित हो रहे थे.... कुछ ही देर में इंटरवल होने को था तो वो रचना को सँभालने में मदद करते है और उसके और खुद के कपडे सही कर लेते है.....रचना उन्न्दोनो को कहती है कौन सी फिल्म दिखाने लाये थे तुमदोनो...और वो दोनों हस देते है .....सौरव अपने माँ के कान में कहता है "रचना की प्यास"...... और हस देता है इस बात पे तीनो हस देते है और कुछ ही मिन्टो में इंटरवल हो जाता है...हॉल की लाइट्स जलने पे सब सामान्य ही रहता है और सौरव उठ कर पॉपकॉर्न और कोलड्रिंक ले आता है....वापिस फिल्म शुरू होने तक वो लोग हॉल से निकल कर रात के खाने के लिए कहा जाएँगे वो तय करते है और लाइट्स ऑफ़ होने के बाद वो लोग मूवी देखने लगते है इस बार कोई कुछ नहीं करता...बीस मिनट्स के बाद रचना कहती है सौरव मुझे बाथरूम जाना है....रवि भी ये सुनता है और कहता है इस वक़्त कहा जाओगी माँ थोरी देर रोक लो माँ बहार निकल कर कर लेना रचना अपना मुह बनाते हुए कहती है की मुझे लगी अभी है और करुँगी बाद में मेरे को जोरो की लगी है ले चलो न यहाँ बाथरूम होंगे न....तभी सौरव उसके साडी को उठाने लगता है.....रचना कहती है ये क्या कर रहा है मुझे पिशाब आई है....उफ्फ छोर ना सौरव मगर सौरव कहता है माँ रुको तो सही पिशाब कर लेना तुम पहले साडी तो उठाओ....और सौरव रचना की साडी को पूरा ऊपर उठा देता है रचना एक बार फिर से निचे से नंगी हो जाती है सौरव अपनी कोलड्रिंक की बोतल जो आधी से जायदा खाली हो चुकी थी उसे फट से रचना की चूत में घुसा देता है और कहता है मुतो माँ....और रचना कुछ सोचती नहीं और उस बोतल में मूतना शुरू कर देती है.....कोलड्रिंक के ठंडे बॉटल से रचना को बहुत आनंद आता है और वो अपनी पूरी टंकी उससे बॉटल में खाली कर देती है कुछ बूंदे बोतल से बाहर भी चु जाती है मूत लेने के बाद रचना कहती है अब निकाल दे बाहर.....सौरव बोतल बाहर निकाल लेता है....तभी रवि अपनी बोतल रचना की चूत में घुसेड़ देता है और उसे अंदर बाहर करने लगता है और रचना बोतल के ठंडे एहसास के कारण अपने आप को उसके सुपुर्द कर देती है और रवि आराम से उसकी बोतल से चुदाई करने लगता है उफ्फ हाय ओह्ह जैसे आवाजे रचना के मुख से निकलने लगती है और पंद्रह मिनट की चुदाई के बाद रचना उसी बोतल में झड़ जाती है....और रचना का चुत रस उस बोतल में जमा होने लगता है....पूरी तरह से झड़ने के बाद रवि उससे बोतल को निकालता है औऱ बड़े ही मजे से उसे पीने लगता है जिसे देख रचना शर्मा जाती है और कहती है धत्त बदमाश....तुमलोगो को पता नही कहा कहा से ये तरकीबे आती है....उफ्फ मेरी तो जान ही निकाल दी तुम लोगो ने....अजर सौरव कहता है अच्छा अब थोड़ा सा मूवी भी देख लो.....रचना अपनी साड़ी नीचे करने लगती है.....तब सौरव और रवि दोनो उसे रोकते है और कहते है ऐसे ही बैठो न माँ कौन तुम्हे यह देख रहा है....और सौरव उसकी ब्लाउज के बटन खोल कर चुचियो को भी बाहर निकाल देता है रचना कुछ नही कह पाती....बस नंगी हुई मूवी देखने लगती है जो समझ से बाहर थी......और सौरभ और रवि उसकी चुत और चुची से खेलने लगते है.....बीच बीच मे वो उसकी चुत में उंगली भी कर दे रहे थे......जिससे रचना चिहुँक जा रही थी मगर अब उसे भी मजा आ रहा था तभी तो उसकी चूत गीली थी और चुची कि घुंडीया कड़ी हो गयी थी....जब फ़िल्म खत्म होने को आई तब रचना ने अपने कपड़े ठीक कर लिए और सौरव और रवि ने भी फ़िल्म खत्म होने के बाद वो बाहर आये और होटल की तरफ चल पड़े.....
होटल में खाना कर वे लोग घर आ गये और बिना कुछ शरारत किये सो गये क्युकी रचना काफी थक गयी थी और कमोबेश दोनों बेटो का भी यही हाल था .....सुबह रचना जब जागी तो दोनों बेटो घोरे बेचे नंगे उसके बगल में सो रहे थे और उसकी हालात भी लगभग वैसी ही थी .....ब्लाउज खुला हुआ...और साड़ी आधे से जायदा जांघो तक चढ़ा हुआ वो उठती है और जा कर अपने कामो में लग जाती है .......कुछ देर बाद दोनों जनाब अपनी नींद से जागते हुए कमरे से बाहर आते है और किचन में काम कर रही रचना के गले लग जाते है और सौरव अपनी माँ के पहनावे को देख कर खुश होता है क्योकि रचना ने उसके मन मुताबिक कपडे डाले हुए थे ......तभी रवि का फ़ोन बजता है.....वो फोने पिक करता है...

आवाज किसी बूढ़े की लग रही थी ....
आवाज - हेल्लो के बोलाता....रवि बबुआ
रवि - हां मै रवि ही बोल रहा हु आप कौन...
आवाज - हम संभु बोलातानी तोहार दादू .....बनारस से....और अचानक से वो रोने लागते है और कहते है की ऐ बेटा तोहार दादी चल बसल रे बबुआ .....और रोने की आवाज आती है फिर कहते है की तोहार माई कहा बारी बात करावा ......
रवि फ़ोन हटाते हुए कहता है माँ बनारस से दादू का फोन है और कह रहे है की दादी चल बसी ...रचना और सौरव दोनों हक्के बक्के उसकी बात को सुनते है और रचना दौड़ कर आती है संभु से बात करने......
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दरसल जब रचना और उसका परिवार बनारस में थे तो वे लोग अपने ससुराल से अलग हो कर रहते थे ...और रचना के पति की मृत्यु के बाद रचना ने भी उनसे सम्बन्ध सुधरने की कोसिस नहीं करी क्योकि रचना के पति द्वारा छोड़ा गया कर्ज उनके लिए काफी मुसिबाते खड़ी कर चूका था और वो नहीं चाहती थी की उनकी मुसीबत उन्न्दोनो बुजुर्गो पे पड़े.....|
बनारस में सम्भूनाथ और उसकी पत्नी सरला.....अपने सरकारी क्वार्टर में रहते थे रेलवे की नौकरी से सेवानिवृत होने के बाद पेंशन पर जिंदगी अछे से कट रही थी मगर अब संभु की एक मात्र साथी जीवनसंगिनी उसका साथ छोड़ गयी थी और वो बिलकुल अकेला हो गया था और जीवन के ऐसे पड़ाव पर अकेले गुजरबसर करना काफी मुस्किल था इसलिए उसने अपने पोतो और बहु के पास जाने की सोची....इधर रचना फ़ोन पे आ कर कहती है
रचना - प्रणाम बाबूजी आप मत घबराइये हम अभी ही निकल रहे है यहाँ से कुछ घंटो में वहा पहुच रहे है आप बिलकुल मत घबराइये हम है और आ रहे है इतनी देर में ही सौरव ने सारी बात समझते हुए 11 बजे की गाडी की टिकेट वेटिंग में ही मगर बुक कर दी और वो भी इस विपदा से थोरा चिंतित गया था मगर उन्न्दोनो से जायदा रचना व्याकुल लग रही थी जल्दी जल्दी अपने कपडे रखे और कुछ ही देर में वे लोग बनारस के लिए निकल चुके थे और अब रचना भी रो रही थी .....ट्रेन अपने तय समय से थोड़ी लेट वाराणसी स्टेशन पहुची और अपने गंतव्य तक पहुचते पहुचते उनको शाम के चार बज गये वह पहुची तो देखा की सम्भूनाथ और उनके आसपास के पडोसी और मित्र लोग सरला की अर्थी के पास बैठे शोकाकुल थे ...और पंडित अर्थी को सम्शन ले जाने की अंतिम तयारी में था...और इंनके पहुचते ही संभु का दर्द और फुट पड़ा और चीख पुकार से माहोल गमगीन हो गया रचना सुर बाकी सब लोग संभु को सान्तवना देने में लगे थे ....कुछ देर बाद अर्थी सम्शन में पहुच चुकी थी और वहा की क्रिया के बाद देर रात वे घर को लौटे जहा मोहल्ले की कुछ औरते और रचना थी....घर पे आने के बाद बाकी सब लोग अपने अपने घर चले गए...और ये लोग सरला की याद में डूबे संभु को सँभालने लगे...रात जैसे तैसे बीती,......अगले कुछ दिन तक सरला का श्राद्ध कार्यक्रम चला और पटना से इन् तीनो को आये हुए लगभग आधा महिना हो चला था और इन् 15 दिनों में रचना ने सम्भोग की तरफ ध्यान ही नहीं दिया था नाही उसके बेटो ने क्योकि माहोल ही वैसा था ....दो तिन दिन के बाद सौरव सम्भूनाथ से बोला .....
सौरव - दादू आप हमारे साथ पटना चलिए अब यहाँ रह कर क्या करियेगा वहां हमलोग के साथ रहिएगा तो आपको दादी की याद भी नहीं सताएगी और आपका मन भी लगा रहेगा.....मगर उसकी इस बात से रवि बिलकुल भी खुश नहीं हुआ क्योकि दादा के आने से उनकी और रचना की चुदाई में दिक्कत आती मगर अब देर हो चुकी थी |
संभु - बात तो तू ठीक कहत बारे बचवा बाकी दिक्कत इ बा की हम्मार पेंशनवा इहे आवे ला आऊ अगर हम एहा से चल गयनी ता ओक्कर का होई..उ के लिही...और तो और इ सरकारी घरवो छोरे के पड़ी ...
सौरव - कोई बात के टेनसन ना ली दादू हम बानी नु सब सेट कर देब आऊ जहवा दिक्कत बुझाई रवि भईया बरले बानी मदद खातिर.....
संभु - बाकी बचवा तू करबा का तानी हमरो बतवा....
सौरव - हम यहाँ के पता बदल के पटना के पता पे पेंशन भेजे के एप्लीकेशन डाल देब आऊ इ घर के भारा पे लगा देब आऊ हर महीने के महीने आ के भारा ले जाएब |
संभु - बहुत बढ़िया उपाय लगावला है बचवा
सौरव - हां दादू बस इ सब काम निपटा के यहाँ से निकल चले के.....
रचना मन ही मन सोचती है की ये जो भी हो रहा अच्छा नहीं हो रहा क्योकि इससे उसकी चुदाई में विघ्न पड़ने वाला था मगर अब तो बात काफी बढ़ चुकी थी तो उसने भी बिच में टोकना सही नहीं समझा और हां में हां मिला दी....रात के खाने के बाद संभु अपने कमरे में चला गया जहा सौरव उसके साथ सोता था और रचना हॉल में और रवि भी वही सोफे पे सोता था .......मगर आज की बात के बाद मौका देख कर रवि ने सौरव से कहा था की दादू के सोने के बाद वो हम सब से मिलने हॉल में आएअगा..रात के साढ़े बारह बज रहे थे रवि सोफे पे लेटा हुआ था मगर आँखे खुली थी और उधर रचना भी अपने बिस्तर पे लेटी हुयी थी तभी सौरव आता है और रवि के पास जा कर बोलता है भाई क्या हुआ क्यों परेशान हो .......रचना भी उसकी आवाज सुन के वहा आ जाती है
रवि - ये तू क्या कर रहा है दादा जी को वहा चलने को कहने की क्या जरुरत थी वह उनके आने से क्या दिक्कत होगी तुझे अंदाजा भी है.....
रचना - हां सौरव तू भी न कभी कभी बेवकुफो की तरह हरकते करता है ...बता अब क्या करेंगे....
सौरव अरे मेरी प्यारी प्यारी माँ मैंने भी तुम्हारे इन् चुचियो का दूध पिया है और मई इतना बेवकूफ तो हो नहीं सकता न की अपनी माँ को तकलीफ दू...और अपने भाई को भी...और वो आगे बढ़ कर रचना की ब्लाउज को खोलने लगता है जिससे रचना भी मदद करती है उतारने में अगले ही पल रचना ऊपर से नंगी अपने दोनों बेटो के बिच बैठी होती है सौरव और रवि दोनों उसकी चुचियो से खेलने लगते है सौरव बोलता है दादा जी अगर हमारे साथ रहेंगे तो उनके पेंशन की राशि हमारे भी काम आएअगी और रही बात आपके प्यास की तो उसके लिए भी मैंने सोच रखा है ...रात को दूध में दादू को नींद की गोलिया दे दिया करेंगे और फिर होगी अपनी रंगीन रात की शुरुवात और वो रचना की चुचियो को चूसने लगता है ...इसको देख कर रवि भी अपने सुरूर में आ जाता है और रचना अपने दोनों बछो का सर अपनी छाती पे दबाने लगती है और कहती है चुसो बेटा आह इन्हें चुसो कितने दिनों से ये सुखी पड़ी थी आह बेटा आह ...और फिर रवि कहता है की दादा के जाने से दिक्कत तो होगी ही हम खुल के ये सब नहीं कर पाएँगे और तो औरफ पकडे जाने का भी डर बना रहेगा ....रचना भी रवि की हां में हां मिलाती है ...क्योकि बात तो सही थी तभी सौरव कहता है .....तो अप्मने इस खेल में उनको भी शामिल कर लेंगे और क्या रचना अपनी आखे गोल कर के कहती है की ये कभी नही हो सकता वो मेरे पिता सामान है और आगे से कभी ऐसी बात अपने जबां से मत निकलना ...और वो शांत बैठी रहती है...
सौरव - माँ क्या तुम भी तुरंत में मुह फुला लेती हो मैंने कहा न की तुम्हे कोई कुछ नहीं कर सकता जब तक हम ना चाह ले और वो फिर से रचना की चूची मुह में भर लेता है और रचना को आह भरने पे मजबूर कर देता है रवि का मन कशमकश में था पता नहीं आगे क्या होने वाला था और कुछ ही देर में रचना नंगी हो कर दोनों बेटो से हॉल के फर्श पे चुद रही थी डेढ़ घंटे चुदने के बाद वो अपनी जगह पे जा कर सो गयी और दोनों शैतान भी मगर उन्हें मालूम नहीं था की उनकी ये रासलीला सम्भूनाथ ने अपनी खुली आँखों से देख ली थी.....
अगली सुबह रचना जब जागी तो उसने पाया की उसके ब्लाउज के तिन बटन्स खुले हुए थे और उसकी एक चूची पूरी तरह से बाहर लटक रही थी वो हरबरा कर उठती है और बाथरूम की और जाती है जहा सम्भूनाथ पहले से दातुन कर रहा था..रचना मन ही मन ये सोचती है की जब बाबूजी कमरे से बहार आए होंगे तब्ब उन्होंने मेरी चुचिया जरुर नजर आई होंगी हे भगवान् ये क्या हो गया वो नजरे चुराते हुए कहती है बाबूजी आप कब उठे हमे आवाज लगा दिया होता.......

संभु - नाही बहुरानी तू नींद में रहलू तो तहरा के तंग करल ठीक न सोचिनी एही से न उठावनी ह और मुस्कुरा देता है ...रचना बखूबी समझ जाती है की बाबूजी के मुस्कुराना किस और इशारा कर रहा था खैर वो भी नित्य क्रिया में लग गयी और फिर सब से नाश्ते के समय भेट हुयी जहा सौरव ने बोला की आज वो दादू के ऑफिस में एप्लीकेशन डालने जा रहा और वो रवि को कहता है की भईया तुम भी चलना मेरे साथ
रवि - ठीक है
संभु - बबुआ कोसिस करिह की काम जल्दी से जल्दी हो जाए ताकि हमहू तू लोगन के साथे पटना चल सकी ....और रचना की तरफ देख कर मुस्कुरा देता है....रचना इस बार बुरी तरह झेप जाती है
और कुछ देर बाद दोनों भाई अपने काम के लिए निकल जाते है........नाश्ते के बाद रचना दोपहर के खाने की तयारी कर के नहाने के लिए जाती है और इस समय संभु अपने बरामदे में बैठा अखबार पढ़ रहा था...........तभी उसका ध्यान रचना की तरफ गया जो नहाने के लिए गुस्सल्खाने में जा चुकी थी.संभु के मन में खुराफात ने दस्तक दी और वो दबे पाँव बाथरूम की तरफ चल पड़ा अपनी बहु के जिस्म को निहारने जहा रचना बेफिक्र हो कर नहा रही थी.....संभुनाथ उधर जा ही रहा था कि तभी सौरव और रवि आवाज लगते हुए घर मे आते है और संभुनाथ हड़बड़ा कर वापस बरामदे में दौरा आता है जहाँ रवि और सौरव एक साथ कहते है कि दादा जी माफ करियेगा काम मे देरी होगी आपके दफ्तर वालो ने कहा कि इस काम मे समय लगेगा कम से कम दो महीने कागजी काम है ऊपर आए पेंशन वाली इसलिए संभुनाथ बेचारा ये बात सुन कर मायूस हो जाता है कहा वो रचना को भोगने की तैयारी में थे और अब उसे यही रहना था अब इन दो महीनों में उसका काम बिगाड़ दिया था खैर वो अब नही जा सकेगा ये तय हो गया था और तभी रचना नहा कर वहा आती है और उसे भी ये खबर मिलती है तो वो मन ही मन सोची की चलो बला टली.....
उसके बाद सभी खाना खाने बैठते है और रचना ने आज ही निकलने का सोच लिया था और हुआ भी ऐसा ही संभुनाथ बेचारा करता भी क्या.....
मगर इन् सब पचड़ों में पड़ कर रवि के एक महीने की छुट्टी की वाट लग गयी थी और उसे अगले हफ्ते से काम पे जाना था....रचना और सौरभ रवि तीनो के मुह लटके हुए थे.....इसी तरह वो देर रात घर पहुचे......घर की हालत भी खस्ता हो चुकी थी मगर रचना अभी बहूत थकी हुई थी और दोनो बेटे भी बिना किसी शरारत के वो नींद की आगोश में समा गए.....
सुबह रचना की आंख खुली तो पाया कि उसकी दोनो चुचिया उसके बेटो के मुह में है और सौरभ के हाथ उसकी चुत के दरार पर घूम रहे है जिसका आभास होते ही रचना ने अपनी टांगे खोल दी और फिर शुरू हुआ घमासान चुदाई का दौर....अगले कुछ ही पलों में रचना नंगी हो चुकी थी और रवि रचना की चुत चाट रहा था और सौरव उसकी चुचिया को बेदर्दी से चूस चाट रहा था कुछ देर में दोनो के लौड़े रचना के दोनों छेदों को फाड़ने के लिए तैयार थे और अगले कुछ देर के लिए रचना की दर्द और लिज्जत भरी सिसकियों से कमर गूंजता रहा.....दोनो छेदों को अदल बदल कर अपने माल से भरने के बाद वो दोनो उठे और रचना को भी साथ मे ले कर बाथरूम में घुस गए जहाँ नहाते वक्त भी एक राउंड चुदाई और हुई और फिर नहाने के बाद रचना ने एक पेटिकोट पहन लिया और रवि ने टॉवल लपेट लिया और घर की साफ़ाई में लग गए जबकि सौरव नास्ता का प्रबंध करने चला गया.....घर की साफ़ाई और नास्ता के बाद तीनों हॉल में बैठे थे जहाँ रचना बोली.....बनारस में बाबूजी ने मेरी चुचिया नंगी देख ली थी....और वो उसके बाद से मुझे अजीब नजरो से देख रहे थे......मुझे बहुत शर्म आ रही थी।
सौरव- कोई बात नही माँ देख ही लिया तो क्या हो गया.......तुम्हारी ये चुचिया है ही देखने के लिए....औऱ उसकी एक चुची को पेटिकोट के बंधन से बाहर निकाल देता है.....और दबाने लगता है.....
रचना कुछ कहती इससे पहले रवि - मुझे तो इस बात का डर है कि दादू के यह आने के बाद हमारा ये प्यार से भरा रिश्ता कैसे चलेगा.....उफ्फ माँ और वो भी उसकी दूसरी चुची पे अपने होठ जामाता है.......सौरव के मन मे कुछ और ही था...
 


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