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दो बेटों की विधवा मा
10-22-2018, 02:04 AM
Post: #11
RE: दो बेटों की विधवा मा
सुबह के 11:30 बजने को आये और इन दो दिनों की तरह आज भी सौरव नास्ते के लिए नही आया टेबल पर और अभी रचना सोच रही थी कि कही उसके इस फैसले से वो अपने छोटे बेटे को खो न दे या उसे कुछ हो न जाए हालांकि सौरव मस्त अपनी माँ के लिए आने वाले तोहफे का इंतेजार कर रहा था जो रवि उसके लिए ले कर आ रहा था और वो अपना खाना पीना भी टाइमली कर रहा था लेकिन रचना की नजरों से बच कर और रचना ये जानती थी कि वो बाहर से खाना खा रहा है मगर वो उसकी सेहत को ले कर परेशान थी क्योंकि बाहर का खाना सेहत के लिए हानिकारक होता है.....2 बजे दोपहर में रवि फाइनली आ गया और रचना ने ही दरवाजा खोला और अंदर आते के साथ वो अपना बैग को वही उतार कर रचना के गले लग गया और वो अपना हाथ सीधा रचना की पीठ से होता उसके चुतरो पर ले आया और कुछ देर जब तक वो गले लगा रहा तब गक अपना हाथ वहां से नही हटाया और नाही रचना ने कोइ विरोध किया क्योकि रचना को रवि के हाथों का स्पर्श उसके चुतरो पर होते ही झटका लगा मगर वो इसे मात्र एक इत्तफाक समझ कर रह गयी।

रवि - मा मैंने आपलोगो को बहुत मिस किया सौरव कहा है माँ रचना के मन मे आया कि वो अभी ही सारी बात बोल डाले मगर वो कह न पाई और इतना ही बोली कि अपने कमरे में है
तभी सौरव कमरे से बाहर आता है और अरे भाई वेलकम बैक होम कहते हुए गले लग जाता है और गले लगते ही रवि उसके कानों के पास कहता है
रवि - आते ही अपने काम मे लग गया हूं....और मुस्कुराता हुआ अलग होता है और कहता है माँ एक खुशखबरी है
रचना - क्या बेटा
रवि - पूरे एक महीने की छुट्टी ली है जैसा कि मैंने वादा किया था और हा बॉस ने मेरे काम में लगन को देखते हुए मेरे प्रमोशन की बात कही है अगर सब कुछ अच्छा रहा मा तो वेतन में पूरे 5000 की बढ़ोतरी होगी.....रचना के खुशि के मारे आंखों में आँसू आ जाते है और कहती है भगवान तेरी हर मनोकामना पूर्ण कर और तुझे तरक्की दे।
तभी सौरव कहता है अरे वाह भाई कांग्रट्स वैसे भाई मुझे भी एक जरुरी बात बतानी है जिस कंपनी के लिए मैं काम करता हु उसने भी मुझे मेरे सैलरी में इन्क्रीमेंट देने की बात कही है।
और अपनी खुशि को हस कर जाहिर करता है रवि एक बार फिर उससे गले मिल जाता है और फिर रचना कहती है
रवि बेटा जाओ और नहा कर आ जाओ मैं खाना लगा देती हूं और रवि चला जाता है और सौरव भी
रचना किचन में आ कर सोचती है सौरव कुछ भी किया हो मगर अपनी जिम्मेदारियों को सही से निभा रहा है।
तभी रवि बाथरूम से आवाज लगता है माँ ओ माँ माँ.....
रचना - हा रवि बेटा बोलो क्या हुआ
रवि - माँ मुझे टॉवल देना मैं भूल आया हु
रचना उसके कमरे में आती है और अलमीरा से टॉवल ले कर उसको देने आती है और दरवाजे के पास खड़े हो कर कहती है रवि बेटे ये लो टॉवल
तभी रवि दरवाजा खोल देता है और रचना की आंखे फैल जाती है रवि पूरा नंगा खड़ा था और उसका लन्ड टांगो के बीच मोटे पाइप की तरह लटक रहा था एक पल को रचना एकदम शांत हो गयी मगर अगले ही पल वो उसे कहती है ये लो बेटा और अपना हाथ आगे बढ़ाती है तभी रवि टॉवल लेने के लिये आगे बढ़ता है और फिसलने का नाटक करते हुए अपनी माँ को साथ मे ले कर गिर पड़ता है औऱ दर्द से कराहने लगता है माँ माँ कर कर
ये सब इतनी जल्दी में हुआ कि रचना को संभालने का मौका ही नही मिला।
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10-22-2018, 02:06 AM
Post: #12
RE: दो बेटों की विधवा मा
रचना हरबरा कर उठने की कोशिस करती है मगर रवि ने जान बूझ कर आने दर्द का बहाना बना कर उसके ऊपर ही लेटा रहा और अपनी माँ के दोनों चुचियो का पूरा माप ले रहा था और इधर उसके लन्ड का स्पर्श पा कर रचना को फिर से कुछ गिला गिला से मेहसूस होने लगा था उसकी चूत में मगर फिर भी वो उठने की नाकाम कोशिस में लगी हुई थी हालांकि उठना कोई नही चाह रहा था और रवि अभी भी नंगा अपनी माँ के ऊपर लेटा हुआ था और इन् कुछ सेकण्ड्स में उसले चूत का स्पर्श पा कर रवि के लन्ड में हरकत होनी शुरू हो गयी थी और उसके लन्ड का कड़ापन रचना महसूस कर पा रही थी तभी एकाकेक रचना ने रवि को साइड में ढकेल कर उतारा और कराहते हुए रवि से पूछी की बेटा कहा चोट लगी है मगर रवि जवाब नही देता बस्स कराहता रहता है और तभी कमरे के पास सौरव आता है और कमरे का दृश्य देख कर वो मन ही मन मुस्कुरा उठा औऱ सोचा वाह भाई पहले ही बॉल पर छक्का......और वो वही से उलटे पाव वापिस लौट जाता है इधर रचना.....

रचना - अरे रवि गिर कैसे गए उठो उठो और उसे सहारा दे कर उठाती है....इस दौरान रचना का पल्लू गिर जाता है और नंगा रवि अपनी अगली चाल जो उसने सोची भी नही थी उसे अंजाम दे देता है और वो रचना के गिरे हुए पल्लू पर पैर रख देता है जिससे रवि को उठाती हुई रचना की साड़ी उसमे फस कर निकाल जाती है अब हालात ये थे कि रवि नंगा था औऱ उसकी माँ की साड़ी लगभग लगभग निकल चुकी थी और वो केवल पेटिकोट में फांसी हुयी एक गांठ के सहारे उसके बदन से लटकी हुई थीं ।
रचना उसे उठाते हुए बेड पे लाती है औऱ रवि अपनी माँ की बाजुओ को पकड़ कर कहता है माँ मुझे कमर में चोट लग गयी है लगता है मोच आ गयी है माँ आह मा आह.....और रचना उसे पलटने की कोशिस करती है मगर रवि जोर से कराह उठता है जिससे रचना परेशान हो जाती है और ये रवि बखूबी अपनी चाल चल रहा था......
रचना उसे पलटने के लिए झुकती है जिससे उसकी चुचिया ब्लाउज से बाहर आने के लिए लटक सी जाती है और उसकी चुचियो की दरार भी कुछ ज्यादा ही नुमायिन्दा हो जाती है मगर रचना को इन् सब पे अभी कोई ध्यान नही था वो तो रवि को ले कर चिंतित थी और रवि जब घूमता है तो रचना को इतना जोर लगाना पड़ता है कि उसे अपनी एक टांग बेड पर रखनी पर जाती है जिससे साड़ी में लगी आखिरी गांठ भी खुल जाती है और वो अब पेटिकोट और ब्लाउज मव खरी थी अपने बरे बेटे के सामने और उसका बेटा पूरा नंगा
रचना - रवि बेटा तुम यही रुको मैं सौरव को बुलाती हु वो डॉक्टर को ले आएगा तभी रवि बोला मा मैं नंगा हु और आप अपनी हालत देखिए ऐसे में डॉक्टर को मत बुलाइये आप अपने हाथों से मालिश कर दीजिए मैं ठीक हो जाऊंगा.....आह मा आह

..
इधर रचना भी ये सोचती है कि उसे सौरव के पास जाना होगा और अगले ही पल वो अपने औऱ सौरव के बीच हुए उस घटने को ले कर रुक जाती है और अपने कमरे में जा कर वॉलिनी स्प्रै उठा ले आती है ताकि उसकी मोच पर उसे स्प्रै कर सके और होता भी ऐसा ही है।
स्प्रे करने के बाद वो बोलती है बेटा इससे तुम्हे आराम मिलेगा और वो उसकी कमर पे हाथ रगड़ने लगती है तभी रवि बोलता है माँ....मुझे मेरी अंडरवियर दे दो मैं पहन लेता हूं मा और वो उठने लगता है मगर अगले ही पल वो कराहता हुआ बेड पे लेट जाता है तब रचना कहती है बेटा तुम्हारे ऊपर चादर डाल देती हूं और वो उसे कहती है तुम आराम करो मैं कुछ खाने के लिए ला देती हूं......
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10-22-2018, 02:07 AM
Post: #13
RE: दो बेटों की विधवा मा
रचना उसी हालत में किचन में चली जाती है केवल ब्लाउज़ औऱ पेटिकोट में जब वो किचन में आती है तो उसे आभास होता है कि वो अधनंगी हालात में अपने घर मे घूम रही है और ये सोच कर ही उसकी चूत मव सुरसुरी सी उठ गई.....की वो कैसे पहले सौरव के सामने नीचे से पुरी की पूरी नंगी हो गयी थी और और सौरव का लन्ड भी उसे याद आने लगा सारा का सारा कार्यक्रम उसके आंखों के सामने घूम गया औऱ आज रवि के साथ जो भी हुआ उसका भी लन्ड सौरव से ज्यादा तगड़ा है वो ये सोच ही रही थी तभी रवि आवाज लगाता है माँ ओ माँ..... रचना को खुद वे शर्म आ जाती है कि वो अपने बेटों के लन्डो के बारे में सोच सोच कर गीली हुई जा रही थी आज के घटने ने रचना की कामाग्नि को फिर से एक हल्की सी हवा दे दी थी....और ये हवा उसके लिए क्या रंग दिखाती है वो आने वाला वक़्त ही बताएगा......

रचना रवि के कमरे में वापिस उसी हालत में जाती है केवल ब्लाउज और पेटिकोट में कमरे मव जाते ही वो शर्म से दोहरी हो जाती है क्योंकि सौरव भी वहां आ चुका था और वो अधनंगी हालात में अपने दोनो बेटो के सामने आ रही थी.....
उफ्फ सौरव अपनी मा को ऐसे देख कर आहे भरता है जिसे रवि बखूबी सुनता है और रचना कमरे में टेबल पर चाय और ब्रेड रखती है और सौरव की तरफ बिना देखें पूछती है कैसा है दर्द रवि बेटे
रवि - कुछ आराम है माँ और आपके हाथों की मालिश ने भी उस दर्द को भगाने में बहुत मदद करी और वो फिर से उठने की कोशिस करता है और कराह उठता है जिसे रचना पकड़ने के लिए उसकी तरफ झुकती है जिस कारण उसकी चुचियो की दरार दोनो बेटो के सामने उजागर हो जाती है और इस बार रचना उठने में कोइ जल्दी नही करती औऱ रवि को आराम करने का बोल कर कहती है तुम लेते रहो मैं तुम्हे खिलाती हु.....और वो घूम जाती है जिससे उसकी चौड़ी गांड उन्न दोनो के सामने आ जाती है जिसके दर्शन दोनो खूब अच्छे से करते है और उसके बाद रचना रवि को खिलाने लगती है।
तभी सौरव सोचता है कि यह अच्छा मौका है माँ को मनाने का.....
सौरव - सारा प्यार आज तो माँ तुमपर ही लुटा रही है मुझे तो ऐसे कभी नसीब ही नही होगा......और रोनी सी सूरत बनाता हैं...... तभी रवि कहता है ऐसी भी क्या बात हो गयी भाई मेरे मा तुझे भी उतना ही प्यार करती है जितना मुझे ......और रचना इन् दोनो की बात सुन रही थी और वो रवि को खिला भी रही थी तभी रवि रचना का हाथ रोक देता है और कहता मा तुम सौरव को भी खिला दो मा देखो वो कैसे रोंदू सरत बना रहा है.....रचना कुछ नही बोलती है मगर वो उसे खिलाती भी नही है और वो केवल अपनी नजर उठा कर उसे देखती है और मन ही मन सोचती है कि प्यार तो मैं तुम दोनो को बराबर करती हूं लेकिन सौरव तेरी उस हरकत से मेरा दिल दुखा है....और वो अपनी नजर घूमा लेती है....सौरव फिर कहता है माँ प्लीज मा अब तो खिला दो उसने द्विअर्थी भाषा का प्रयोग किया....माफी भी और खिलाने की जिद भी.....
रचना अभी भी अधनंगी हालात में दोनों के बीच मव बैठी थी और उसका साड़ी पहनने की तरफ ध्यान बिल्कुल भी नही गया था.....रवि कहता है माँ अब खिला भी दो बच्चे की जान लोगी क्या उसने भी द्विअर्थी भाषा का प्रयोग किया.....
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10-22-2018, 02:08 AM
Post: #14
RE: दो बेटों की विधवा मा
अब रचना सोचने पे मजबूर हो जाती है कि आखिर वो क्या करे खिलाये या सारी की सारी बात रवि के सामने रख दे.....रवि अच्छे से समझ रहा था कि माँ क्यों नही आगे कर रही है और सौरव भी लेकिन दोनों भाई इस बात से गौरवान्वित हो रहे थे कि आखिर उनकी मेहनत कुछ तो रंग लाई तभी तो उनकी माँ उनके सामने अधनंगी हालात में बैठी थी अब वो दिन दूर नही था जब उनकी माँ नंगी हो कर उन्न दोनों के साथ सोएगी उनके साथ नंगी रहेगी घर मे नंगी किचन में खाना बनाएगी और नंगी हो कर चुदवायेगी भी एक लन्ड चूत में एक गांड में दोनों की दोनो चुचिया एक सौरव के मुह में और एक मेरे.....ऐसी ही बाते सोचते हुते रवि का लन्ड बुरी तरह खड़ा हो जाता है लेकिन चादर होने के वजह से वो ढका हुआ था मगर रवि उसे छुपाने की बिल्कुल भी जद्दोजेहद नही करता.....और सौरव बिना कुछ बोले वहां से उठ कर चला जाता है....रवि उसको रोकने की कोसिस करता है मगर वो नही रुकता है और चला जाता है।

रवि - क्या मा क्या हुआ है आपको आप सौरव को क्यों नही खिलाई क्या हो गया अचानक से मैं जब से आया हु देखा है आप उससे बात नही कर रही औऱ अभी अभी जो हुआ मा क्या बात है क्या आओ सौरव से नाराज है क्या सौरव से कोइ गलती हुई है क्या.....
रचना कुछ सोचती है मगर पता नही क्यों वो सच्चाई नही बोलती है और कहती है कि कुछ नही बेटा एक दिन को बाहर से ही खा कर आया था और मैन जो खाना बनाया था उसे वो नही खाया मुझे फेकना पड़ा इसलिए उससे मेरी बहस हुई थीं.... तब से मैं उससे गुस्सा हु.....
वही सौरव उन्न दोनो की बातचीत सुन रहा था और ये सुनते ही उसके लन्ड में एक अजब सी लहर उठी की उसकी माँ ने उसका सच्चाई रवि को नही बताई मगर ये दोनों भाई तो सारा खेल मिल कर खेल रहे थे....सौरव खुश हुआ कि चलो कम से कम इतना पता तो चला कि माँ भी थोड़ी थोड़ी रजामंदी दिखला रही है तभी तो उसने उसकी बात सामने नही लायी....
तभी रवि कहता है माँ अब थूक दो गुस्सा और उसे उसके कमरे में जा कर खिला आओ..... रचना भी सोचती है कि चलो छोरो इतना भी गुस्सा ठीक नही और वैसे भी सौरव बाहर से ही खा कर आ रहा था जो वो नही चाहती थी.....इसलिए वो वैसी ही उठी और उसके कमरे की तरफ चल दी लेकिन वो सोच रही थी कि सौरव ने कहा था की वो उसे पा कर रहेगा.....मगर अगले ही पल वो सोची अब जो होगा देखा जाएगा वैसे भी रवि अभी 1 महीने तक यही घर पर ही रहने वाला था तो अगर कुछ होता भी है तो रवि है यहां...... और वो उसके कमरे में घुसती है दरवाजा उसने खुला छोड़ रखा था तो वो बिना खटखटाये घुस जाती है मगर वो रुक जाती है क्योंकि सौरव किसी की तस्वीर को हाथो में ले कर सुबक रहा था वो ध्यान से सुनने लगी
सौरव - माँ मेरी प्यारी माँ मैं तुझे कैसे समझाऊ की तुम मेरे लिए क्या मायने रखती हो....माँ मैं तुमसे बहुत प्यार करता हु मगर मैं तुम्हे उदास कर कर अपनी हवस शांत नही करना चाहता था तुमने मुझे गलत समझा मा मैं तो तुम्हे प्यार से पाना चाहता हु मा मैं तुम्हे दुनिया की हर वो खुसी देना चाहता हु जिससे तुम हमेसा खुश रहो माँ.... जिस दिन से तुमने मुझे झटक कर खुद से दूर किया था मा मैन उस दिन तुम्हारी आँखों मे मेरे लिए नफरत देखी थी जो मैं नही देख सकता हु मा इसलिए मैं तुम्हारी नजरो आए दूर जाने का फैसला ले लिया था मा क्योकि मैं तुम्हे दुख कतई नही देना चाहता हु इसलिए मैंने खुद को खत्म करने की भी कोशिस की लेकिन नाकाम रहा मुझे माफ़ कर दो ना मा मैं तुम्हारे बगैर रह ही नही सकता....जैसे तुम बचपन मे मुझे अपने सीने से लगा कर रखती थी अपना दूध पिलाती थी जैसे प्यार करती थी मेरी हर जिद्द पूरी करती थी मा मैं सब कुछ वैसा ही वापिस से जीना चाहता हु बिल्कुल तुम्हारे छोटे नन्हे मुन्ने सुरू के तरह....मा प्लीज् मा मुझे माफ़ कर दो ना.....और आओ रोने की एक्टिंग करता है जिसे रचना अच्छे से सुन औऱ देख रही थी....
उसकी आंखें भर आयी थी कि उसने अपने बच्चे को कितना गलत समझा और वो उसकी नाराजगी के कारण खुद को खत्म करने चला गया था हे भगवान ये सब क्या करने जा रहा था मेरा बच्चा....उसकी आँखों से आंसू बहने लगते है मगर वो ये भी समझ नही पा रही थीं को आखिर वो सौरव को कैसे समझाए की वो जो चाहता है वो गलत है लेकिन इन् सब से परे वो सौरव को रोते हुए आवाज लगाती है बेटा सौरव.....
सौरव पीछे घूमते ही अपने आंख के आसुओ को पोछने लगता है
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10-22-2018, 02:09 AM
Post: #15
RE: दो बेटों की विधवा मा
और वो तस्वीर छुपाने की कोसिस करता है लेकिन रचना अपने हाथ से ट्रे बेड पर रख कर उसे गले से लगा लेती है और सौरव उसे दूर हटाने की कोशिशें करता है लेकिन रचना उसे नही छोड़ती जिससे उसकी चुचिया सौरव के सिने में धसने लगती है और सौरव कहता है माँ मुझसे दूर हट जाओ मा मैं गंदी नजरो वाला जानवर हु मा हट जाओ मा प्लीज हट जाओ और रचना पिछे हटती है लेकिन सौरव के गालों पे अपने हाथ ले जा कर उसके चेहरे को थाम कर कहती है मेरे बच्चे मुझे माफ़ कर दे बेटा मैं गुस्से में पागल हो गयी थीं मेरे बच्चे और उसे फिर से गले से लगा लेती है....तब भी सौरव उसे हटने के लिये ही बोलता रहता है मगर रचना उसके चेहरे को पकड़ कर अपने आधी निकली हुई चुचियो पर लगा देती है और अपने दोनों हाथों को उसके बदन के इर्द गिर्द लपेट लेती है......

दोस्तो कहते है ना जो काम गुस्से और दबाव से नही होता उसे प्यार एक पल में करवा देता है । इसी चीज का प्रयोग सौरव ने किया था ।
इधर रचना मन ही मन वो सोचती है कि वो सौरव की बात मानेगी....
और सौरव अपनी माँ की चुचियो में मुह रगड़ने लगता है मगर तभी रवि आवाज लगता है माँ ओ माँ क्या हुआ मा कहा हो इधर आओ तभी रचना तुरंत सौरव को अलग कर के कहती है बेटा तू मेरी कसम खा कर कह की तू दुबारा ऐसा कुछ नही करेगा मैं तेरी हर बात मानूँगी....बस्स तू मेरी कसम खा....सौरव कुछ कहता नही और अपना सिर हाँ में हिला देता है और रचना ये कहते हुए उसके कमरे से निकल जाती है कि वो रवि के सोने के बाद आएगी.... और उसे एक बार फिर से गले लगा कर चली जाती है और ट्रे में से चाय और ब्रेड वही रख जाती है।
सौरव बहुत ही खुश था आखिर उसने रचना को लगभग लगभग पा ही लिया था अब उसके आने का इंतेजार था ।
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10-22-2018, 02:10 AM
Post: #16
RE: दो बेटों की विधवा मा
रवि के रूम में आकर वो हस्ते हुए कहती है शैतान है वो बच्चे की तरह करने लगा था इसलिए देर हो गयी

अच्छा बेटा दर्द कम हुआ
रवि - हा माँ हुआ तुमने जो मालिश करी थी.... देखना तुम्हारी भी मैं ऐसी ही मालिश कर दूंगा तुम्हारा भी बदन का दर्द गायब हो जाएगा.... रचना को एकदम से झटका लगता है कि रवि ये क्या बोल गया मगर फिर वो कहती है कि अच्छा बेटा अभी खुद तो नंगे बिस्तर पर उल्टे पड़े हुए है और अभी मा की मालिश भी के दोगे.... और हस देती हैं.... मगर रचना इतनी बेबाकी से रवि क्व नंगे होने की बात बोल गए वो खुद में शर्मा गयी.....
रवि कहता है कोई बात नही मा नंगा हुआ तो क्या हुआ हूं तो तुम्हारे ही सामने ना वैसे भी तुमने मुझे जन्म दिया है तुम मुझे किसी भी हालत में देखो क्या फर्क पडता है.....और उसकी तरफ देखने लगता है...रचना बोलती है चुप बदमाश....और कहती है बेटा तू आराम से सो जा थोड़ी देर मैं तब तक दोपहर के खाने की तैयारी करती हूं....और उसके कमरे से बाहर आ जाती है और उसका दरवाजा भी बन्द कर देती है ओर वो जाती सौरव क्व कमरे मे और जा कर उसको पुकारती है और सौरव हस्ता हुआ अपनी माँ के पास आता है.....रचना अभी भी ब्लाउज औऱ पेटिकोट में थी....
सौरव - माँ मुझे माफ़ करने के लीये थैंकयू माँ यु आर डी बेस्ट मॉम इन थिस वर्ल्ड....औऱ रचना के गले लग जाता है और एक चुम्बन मा के गाल पे रसीद कर देता है......
रचना - बेटा आखिर तूने अपनी जिद पूरी करवा ही ली मैंने तुझे खुद आ कर ही बुलाया बहुत बदमाश है तू....
और एक बात कान खोल के सुन ले और उसके कान पकड़ कर ऐंठ देती है
सौरव - आह मा आह मा दर्द होता है माँ आह
रचना - आज के बाद ये छोड़ कर जाने वाली बात दिमाग मे भी लायी ना तो मेरा मरा मुह देखेगा....
सौरव - मुझे माफ़ कर दो माँ..... आई लव यू माँ आई लव यू सो मच.... और फिर वो कहता है माँ मूझे दूध पिलाओ ना.....रचना शर्मा जाती है और उसे छोड़ कर बेड पर आ कर बैठ जाती है....और अपनी बाहे फैला कर उसे बुलाती है....सौरव सीधा बेड पर चढ़ कर बैठ जाता है और फिर अपना सिर मा की गोद मे रख देता है.....रचना उसे कहती है कि बेटा अब इनमे दूध नही आता....क्या पिएगा.... इनमे कुछ नही है।
सौरव - फिर भी माँ मुझे पीना है इन्हें....ब्लाउज उतारो ना मा
रचना उसके मुह पे हल्के से चपत लगाती है और कहती है चुप बदमाश इत्ता बड़ा हो गया है और ब्लाउज उतारने कह रहा बेशर्म....
सौरव - हस कर प्लीज मा प्लीज....
रचना - खुद से खोल ले मुझसे नही होगा.....और झुक कर उसके सिर को चूम लेती है...
सौरव उछल कर बेड पे बैठ जाता है और कहता है माँ मैं आपका बच्चा हु न तो मैं खुद से कैसे खोल कर पी लू आप खोल कर मुझे खुद से पिलाओ न मा.....और अपना सिर वापिस से उसकी गोद मे रख लेता है।
रचना कहती है बहुत जिद्दी है तू.....और वो अपने ब्लाउज के बटन पर हाथ ले जाती है और अपने बटन खोलने लगती है और एक एक कर अपने ब्लाउज के सारे बटन खोल देती है और उसकी चुचिया सौरव के आंखों के सामने आ जाती है और सौरव कहता है माँ ब्लाउज पूरा उतार दो और रचना बिना देर किए पूरा का पूरा ब्लाउज उतार देती है और ऊपर से नंगी हो जाती है और कहती है बहुत बदमाश है तू
ये देख कर सौरव की खुसी का ठिकाना नही रहता औऱ वो अपने मुह में उसकी चुचिया को ले कर चूसने लगता है बारी बारी से दोनों को और रचना की चूत गीली होने लगती है.....काफी अर्से के बाद किसी ने उसकी चुचियो को चूसा था.....वो उत्तेजना में आ कर पूरी तरह से झुक कर उसको अपने दोनी उरोजों को उसके मुह तक पहुचाती है ताकि वो अच्छे से चूस सके.....और कहती है चूस बेटा चूस ले इन्हें.....तभी सौरव उसके उरोजों को कस कर काट लेता है जिससे रचना तड़प उठती है....आह बेटा ओह....और वो उसके दोनों उरोजों को ताक़रीबन आधे घण्टे तक बारी बारी से चूसता है....और रचना की चूत गीली हो कर झर झर बहने लगती है.....और वो सौरव को कस कर पकड़ लेती है जिससे सौरव का चेहरा उसके चुचियो में दब जाता है और रचना जब होश में आती है तो वो अपना बदन उठाती है और देखती है कि सौरव का चेहरा लाल हो गया है और वो जोर जोर से साँसे ले रहा है....वो फिर से अपनी लटकती हुई चुचियो को उसके तरफ झुकाती है और उसका सिर चुम लेती है औऱ कहती है माफ करना बेटा और शर्मा जाती है और फिर कहती है कि चलो अब बहुत हो गया अब अभी के लिए इतना काफी है दूध पिलाई बाकी का कोटा रात में....और सौरव चहकते हुए उठता है और ऊपर से अपनी नंगी मा को कहता है थैंक्स मा मुझे समझने के लिए.....
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10-22-2018, 02:12 AM
Post: #17
RE: दो बेटों की विधवा मा
अब रचना उठती है और अपने ब्लाउज को पहन कर उसके बटन लगाने लगती हैं तब सौरव उसके हाथों को पकड़ के रोक लेता है और कहता है माँ इन्हें ऐसे ही रहने दो ना ....

रचना - पागल हो गया है क्या रवि घर पर ही है तो सौरव फटाक से कहता है कि मैं उसके दरवाजे की कुंडी बाहर से लगा देता हूं वो जब उठेगा तो तुम्हे या मुझे आवाज जरूर लगाएगा तब मैं उसे खोल दूंगा और फिर से जिद्द करने लगता है कि प्लीज मा । तब रचना कहती हैं कि ठीक है और वो वापिस से ब्लाउज उतार कर ऊपर से नंगी हो जाती है और किचन में चली जाती है और सौरव हॉल में बैठ कर अपनी माँ को नंगी काम करते हुए देखते रहता है........
रचना की हिलती हुई चुचिया सौरव के लन्ड को अकड़ने पर मजबूर कर रही थी और जब सौरव को बर्दाश्त नही हुआ तो वो अपने लन्ड को बाहर निकाल कर हिलाने लगा काम करते करते जब रचना अचानक से पलटी तो सौरव को और उसके लन्ड को देख के वो पिघलने लगी और कुछ देर तक वो उसे ऐसे ही नीहारती रही फिर सौरव उसे देख कर हस दिया तब रचना उसे अपनी आंखें दिखा कर वापिस अपने काम मे लग गयी.....।
दोपहर का खाना तैयार करने के बाद रचना वापिस हॉल में आई तब तक सौरव वही लन्ड निकले सोफे पे बैठ कर टीवी पे गाने देख रहा था मगर उसका ध्यान टीवी पर कम रचना पे ज्यादा था.....रचना जब उसके पास आई तो सौरव से बोली कि जा रवि को उठा दे और फिर खाना खाते है सब मिल कर....तब सौरव ने रचना को झुकने को कहा और उसके झुकते ही उसकी चुचियो को वापिस से मुह में भर लिया और रचना एक बार फिर से पागल होने लगी.....उससे खड़ा होना मुश्किल हो रहा था तब उसने जबरदस्ती अपनी चुचिया सौरव के मुह से छुड़ा कर कहती है क्या है सौरव जा तेरे भाई को उठा दे उसे चोट लगी है खाना खिला दूंगी।
सौरव - मा तुम खुद जाओ ना मैं इसे ऐसे कैसे ले कर जाऊ....(उसका इशारा खड़े लन्ड की तरफ था)......
रचना - और मैं ऐसे जाऊ..... गधा....चल जा और वो सौरव के कमरे में जाति है जहाँ उसकी ब्लाउज उतरी हुई थी.....कमरे में आने के बाद वो सोची की वो कितनी गलत थी सौरव क्या था और क्या समझ बैठी थी और साथ ही साथ किचन में नंगी चुचिया हिला हिला कर काम की ये सब उस्की चूत को और भी गीली बना रहे थे....
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10-22-2018, 02:20 AM
Post: #18
RE: दो बेटों की विधवा मा
रचना वापिस सौरव के कमरे में आ कर अपना ब्लाउज पहनती है और कमरे से निकल जाती है तबतक रवि भी उठ चुका होता है और रचम सीधे उसके कमरे में जाति है और सौरव बाथरूम में जा कर अपने माँ को सोच सोच कर मुठ मारने लगता है जब रचना रवि के पास जाती है और उससे पूछती है ।

रचना - बेटा दर्द कैसा है.....
रवि - अभी काफी आराम है माँ....तुंहरी मालिश ने काफी हद तक आराम दिलवाया....सौरव कहा है...
रचना - वो शायद बाथरूम में गया है...
तभी रवि जो चादर के नीचे अभी भी नंगा बैठा हुआ था वो अपना हाथ बढ़ा कर बोलता है माँ तुम्हारे ब्लाउज का एक बटन खुला हुआ है और माँ तुमने साड़ी भी अभी तक नही पहनी है.....रचना उसके इस सवाल से बहुत ही ज्यादा घबरा और शर्मा जाती है...उसके कुछ बोलते नही बन रहा था....रचना- वो बेटा वो....आज गर्मी बहुत है ना जब तुझे संभालते वक़्त साड़ी खुल गयी थी तो उससे वक़्त ध्यान ही नही रहा और उसके बाद कामो में इतनी उलझ गयी कि क्या बताऊँ वैसे मुझे गर्मी से काफी राहत मिल रही थी शायद इसलिए भी ध्यान नही रहा....मैं अभी पहन लेती हूं कह कर वो साड़ी उठाने के लिए बढ़ी ही रही थी कि रवि ने उसका हाथ पकड़ कर रोक दिया और कहा.....
रवि - रहने दो मा ऎसे ही ठीक है वैसे भी तुम्हे इन् कपड़ो में ज्यादा आराम है और मेरे और सौरव के अलावा है ही कौन....और उसका हाथ पकड़ कर बेड पे बैठा लेता है और फिर बोलता है ।
रवि - मा तुम घर मे कैसे भी रह सकती हो मा तुम्हे हमसे घबराने की कोई जरूरत नही है वैसे भी पापा के जाने के बाद काफी दुख और तकलीफे उठायी है तुमने....अब जितना हो सके आराम और खुसी से रहा करो...उसकी नजर बार बार अपनी माँ के खुले हुए ब्लाउज के बटन पर जा रही थी जिसे रचना बखूबी देख रही थी मगर वो रवि की बाते चुपचाप सुन रही थी.... तभी कमरे में सौरव आया.....और आते के साथ बोला है माँ भइया बिल्कुल ठीक कह रहा है....तुम घर मे साड़ी मत पहना करो.....जब गर्मी लगती है तो उसको खुद में क्यों दबाये रखना और जबकि घर मे केवल हम दोनों ही रहते है....
रचना - चुप करो तुम दोनों कैसे कहते हो मैं केवल ब्लाउज और पेटिकोट में रहू तुम दोनों मेरे बेटे हो इतना बोल ही रही थी रचना की रवि ने उसके मुह पे हाथ रख दिया और नाटकीय ढंग से बोला....
रवि - मा मेरी इतनी तनख्वाह तो है नही की मैं एक ऐ.सी. लगवा दु और अगर तुम हमारे कारण खुद को ऐसे जलाओगी तो हमारा दिल दुखेगा.....
रचना उसके कहने का मतलब साफ साफ समझ चुकी थी कि वो उसे क्या कहना चाहता है....और वो नही चाहती थी कि रवि या सौरव को उसके वजह से दिल दुखे या आंखों में आंसू आये.....उसने तुरंत रवि को बोला बेटा कैसी बाते करता है मैन कभी कहा क्या तुझे ऐसी किसी भी चीज के लिए......
रवि - तुमने बोला नही तो क्या मा हमने महसूस किया है कि तुम कैसे एक छोटी से छोटी चीज के लिये तड़पी हो.....और अब हम दोनो ये नही चाहते बिल्कुल भी....बस्स सौरव भी रचना का हाथ पकड़ता है और उसके सीने मे सिर सटा कर कहता है माँ तुम हमे समझने की कोसिस करो कुछ गलत नही है इसमें....तभी रवि भी रचना की छाती में सिर लगा देता है और रचना उन्न दोनो को अपने सिने में दबा लेती है..... और कहती है मेरे बच्चो मुझे गलत मत समझना मैं कुछ सोच समझ नही पाई थी और अब से मैं एक वादा करती हूं जब भी मुझे कली तकलीफ या किसी चीज की जरूरत होगी मैं तुमदोनो से बोला करूंगी...और जोर से उन्न दोनो को अपने सीने में दबा लेती है ।
उसके ब्लाउज के उससे एक खुले हुए बटन से सौरव ने बड़ी ही चालाकी से ब्लाउज के तीन और बटन खोल दिये अब केवल एक बटन पर उसका ब्लाउज उसके छातियों पर टिका हुआ था औऱ तभी सौरव ने उसकी एक चूची को पूरा का पुरा बाहर कर दिया और निप्पल को चूसने लगा जिसका आभास होते ही रचना ने सौरव को हटाया सौरव भी तुरंत हट गया मगर जब रवि हटा तो रचना शर्म से दोहरी हो गयी क्योकि उसकी दोनो चुचिया लगभग लगभग नंगी हालात में उसके दोनों बेटों के सामने उन्न दोनो के बीच केवल एक पेटिकोट में बैठी थी....
रचना लगभग चिल्ल्लाते हुए सौरव को कहती है ये क्या करता है तू सौरव मेरा ब्लाउज क्यों खोल दिया....सौरव के बोलने से पहले रवि कहता है.....
रवि - मा तुम्हारे दूध पिने की इच्छा हुई कई सालों के बाद तुमने हमे इस तरह अपने सीने से लगाया ना और तुम्हारे ब्लाउज के बटन भी खुले हुए थे इसलिए माँ..... और वो तुरत ग्लानि भाव से घूम जाता है और उठने लगता है मगर दर्द का नाटक करते हुए वो लरखरा जाता है जिसे रचना पकड़ती है और तभी रवि के हाथ से रचना का ब्लाउज का आखिरी बटन टूट जाता है और दोनों चुचिया लटक जाती है.... रवि - मुझे माफ़ करना मा मैं ने गलत किया मा मैं .....तभी रचना अपनी एक चूची रवि के मूह में दे देती है....जिसे रवि कुछ सेकण्ड्स तक ऐसे ही रखे रहता है और फिर चुसने लगता है
रवि जैसे ही चूची चुसने लगता है इधर सौरव भी दूसरी चूची को मुह में भर लेता है और साथ साथ अपना शॉर्ट्स को उतार देता है और पूरा नंगा हो जाता है.....
और अब आलम ये था कि एक कमरे में रचना ऊपर से अपने ब्लाउज को खोल कर अपनी दोनों चुचियो को अपने बेटों के मुह में दिए अपने दोनों हाथ उनके सरो पे रख कर आंखे बंद किये उसके दोनों बेटे जो भी पूरे तरह से नंगे था उनके साथ अधनंगी हालत में खड़ी थी.....तभी सौरव ऐसा कुछ करता है जिसकी कल्पना रचना ने की ही नही थी....
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10-22-2018, 02:25 AM
Post: #19
RE: दो बेटों की विधवा मा
सौरव अपनी माँ की चूची के निप्पल को काफी बेदर्दी से दांतों में ले कर चुभलाते हुए चूस भी रहा और काट भी रहा था ठीक वैसा ही रवि भी कर रहा था और वो दोनों नंगे थे.....

सौरव अपना लन्ड हाथो में पकड़े हुए था जबकि रवि का लन्ड चादर के अंदर था मगर पूरी तरह से अकड़ा हुआ और रचना टी चूची चुसाई में मशगूल थी
तभी सौरव रचना के पेटिकोट का नाड़ा खिंच देता है जिससे पेटिकोट एक पल में जमीन पे गिर जाता है....रचना भी पूरी की पूरी नंगी हो जाती है और सौरव अपने हाथ रचना की चुतरो पर ले जा कर कस कर दबाता है और उसके चुतरो की दरार में अपनी उंगली को ऊपर से नीचे फिराने लगता है....इधर रवि का हाथ ज्योही रचना की चुतरो को छूता है वो झटके से पीछे होती है जिसका नतीजा ये होता है कि दोनों बेटों ने जो उसके निप्पल्स को दांतो में गड़ा कर चूसे जा रहे थे वो छिल जाते है औऱ रचना चिहुँक उठती है और वो वैसे ही नंगी हालत में सौरव को कहती है ये तुमने मेरी पेटिकोट को क्यों उत्तर दीया और वो अपने पेटिकोट को उठाती है मगर पहनती नही उसे केवल अपने बदन से चीपका लेती है
रचना का ब्लाउज पूरा खुला हुआ था और तो और वो नीचे से भी नंगी थी एक तरह से देखा जाए तो वक वो पूर्ण रूप से नंगी खड़ी थी अपने दोनों बेटों के सामने..... तभी सौरव के कहने से पहले रवि कहता है....
माफ करना मा वो मैं जज्बातों में बह गया था तभी मेरी हाथो से तुम्हारा पेटिकोट का नाड़ा खुल गया और तुम नंगी हो गयी माँ.... रचना उसे देखती है ये तुम दोनों क्या कर दिए मुझे ही नंगी कर दिया पहले बोला दूध पीना है और अब इस हाल में नंगी कर के खड़ी कर रखा है मुझे....हालांकि रचना कह तो रही थी मगर वो अपनी पेटिकोट को पहन नही रही थी....
सौरव - माँ ये तो नाइंसाफी है ना हमदोनो भाई नंगे है और तुम कपड़ो में क्यो रहोगी इसलिए शायद भाई ने इसे खोल दिया अब जब उतर ही गयी है तो रहने दो ऐसे ही वैसे भी हमसे क्या छुपा रह गया है तुम्हारा मा हम कोई गैर थोड़े है....
रचना - नही बिल्कुल नहीं मै नंगी नही रहूंगी तुमदोनो को रहना है रहो और रवि तुम्हे चोट लगी है ना आराम करो अब...खाना लगा देती हूं और ले कर आती हु तब खिलाऊंगी....ये सब बातें बोलते बोलते रचना के हाथ खुद ब खुद अलग हो जाते है और उसका पेटिकोट उसके हाथ मे था और जमीन पे रगड़ा रहा था उसका पूरा बदन उन्न दोनो के सामने था तभी सौरव रचना का हाथ पकड़ कर वापिस से बेड पे बैठा देता है और इस बार रचना का पेटिकोट वही गिर जाता है जहाँ वो खड़ी थी
अब वो केवल एक खुले हुए ब्लाउज में दोनों के बीच पूरी की पूरी नंगी बैठी थी और रवि कहता है....मा अब जब हम नंगे है ही तो क्या दिक्कत है ऐसे रहने में यह हमारे अलावा और कौन है ही....औऱ तो और ऐसे में हमे जब मन करेगा तब तब हम तुम्हारे ये दूध पी सकते है और ऐसा कह कर वो झुकता है चुचियो की तरफ मगर वो देखता है कि उसकी माँ की चुचियो आए खून निकल रहा था....वो जोर से आवाज लगा कर कहता है माँ....ये क्या हुआ माँ... और उसकी चुचियो को हाथो में ले कर देखता है और सौरव भी वही करता है सामने से आकर उसकी दूसरी चूची को देखता है और सच में रोते हुए कहता है ओह्ह माँ हमे माफ कर दो माँ
सौरव सच मे रो रहा था रचना को फिर से दुख होता है और खुशि भी की ये सौरव उससे कितना प्यार करता है....और वो दोनों उसके खून बहते हुए चुचियो को वापिस से मुह में भर लेते है और रचना फिर से दर्द और मजे के एहसास के समंदर में गोते लगाने लगती है....कुछ देर के बाद रचना कहती है कि चलो चलो बहुत हो गया दूध पीना अब चलो खाना खाते है...और वो उठने लगती है और उठ कर सामने गिरे हुए पेटिकोट को उठाने लगती है तो रवि कहता है माँ रहने दो ना....हम भी तो ऐसे ही है...और तुम्हे ऐसे में गर्मी बिल्कुल भी नही लगेगी.....वो फिर भी पेटिकोट उठा लेती है....औऱ कहती है कि मैं माँ हु तुम्हारी दूध पिलाने की बात अलग थी नंगी रहना एक अलग बात है....2 जवान बेटो के सामने उनकी माँ ऐसे नंगी घूमेगी और उनका ये (उसका इशारा लन्ड की तरफ था) ऐसे ही लहराता रहेगा जिससे तुम्हे तकलीफ होगी और ये मैं बिल्कुल नही चाहती.... और पेटिकोट पहन लेती है और वापिस से अपने ब्लाउज के हुक लगाने लगती है मैं साड़ी नही पहनूँगी ठीक है लेकिन नंगी नही रहूंगी....कतई नही....तभी अचानक सौरव रचना का पेटिकोट वापिस से खोल देता है वो उसे कहती है देख सौरव बदमाशी न कर वरना मैं फिर से गुस्सा हो जाऊंगी....तभी सौरव कहता है अच्छा तो फिर रहना रवि भैया के साथ मैं तो चल जाऊँगा....और अपना सिर घूम लेता है.....
रचना फिर से वो सब सोच लेती है जो सौरव ने उसे अपने कमरे में बताया था....ओर वो तुरन्त अपना ब्लाउज भी उतार देती है और नंगी खड़ी हो कर कहती है दोनो से की अब ठीक है मेरे बच्चों.... और बेमन से मुस्कुरा देती है सौरव इसे भाप लेता है और रचना को पेटिकोट वापिस करते हुए कहता है माँ तुम उदास मत रहो मा पहन लो पेटिकोट ये लो!....
रचना सोचती है कि कितना प्यार करता है ये मगर वो रवि के सामने कैसे खुल कर बोलती तभी रवि कहता है कि माँ अब क्यों आप शर्मा रही हो अब हमदोनो ने आपको नंगी देखा छुआ है अभी भी आप नंगी ही खड़ी हो बल्कि हम दोनों भी नंगे बैठे है...रचना को भी ये सही ही लगता है कि दोनों से छुपाने के लिए बचा ही क्या है.....और वो फिर कहती है मैं उदास नही हु बस्स थोड़ा अजीब लग रहा है....ऐसे नंगी रहने में .....और घूम कर बाहर जाने लगती है ये कह कर की सौरव रवि की सहारा दे कर बाहर हॉल में ले आ खाना खाएंगे....औऱ वो चली जाती है...इधर दोनो भाई आपस में गले मिलते है औऱ कहते है मुबारक हो भाई आखिर हमें आधी सफलता मिल ही गयी....अब बाकी का आधा बड़े ही सोच समझ कर करना होगा....कह कर दोनो फिर से गले मिलते है और रवि खरा होता है और अंगराई लेता है और सौरव उसे आराम से साथ ले कर हॉल में पहुचता है.....जब उनकी नजर उनकी नंगी मा पर जाती है तो उन्न दोनो के लन्ड बगावत पर उतर आए मगर अभी कोई भी जल्दबाजी काम बिगर सकती थी.....इसलिए वो आ कर खाने के टेबल पर बैठ जाते है....रचना खाना ले कर आती है और खुद अपने हाथों से दोनो नंगे बेटो को नंगी हो कर खिलाई और खुद भी खाई....खाना खाने के बाद दोनों भाई वही हॉल में ही सोफे ऑयर बैठ जाते है और रचना किचन में नंगी काम कर रही होती है...जिसको दोनो भाई बारी बारी से देख रहे थे और रचना भी जानती थी कि उनदोनो की नजर उसपर ही चिपकी हुई है...काम खत्म करने के बाद वो नंगी ही हॉल में आती है और कहती है कि वो लेटने जा रही है और वो जब जाने लगती है तो रवि कहता है रुको माँ हम भी चलते है....आज से हम सब एक ही बिस्तर पर सोया करेंगे.... तुम्हारे दूधो को पीते हुए....जैसे बचपन मे सोते थे.... रचना हस कर कहती है ठीक है मेरे बच्चो जैसा तुम कहो....और वो रूम में आ जाती है और सौरव और रवि उसके पीछे पीछे कमरे में बेड पर पहले सौरव रवि को चढ़ाता है फिर रचना उसे सहारा दे कर आगे बढ़ाती है फिर सौरव भी चढ़ जाता है अब रचना पूरी नंगी उनदोनो के साथ बेड पर बैठी थी तभी सौरव कहता है माँ तुम अपने बालों की सफाई नही करती हो उसकी चूत पे हाथ रखते हुए और रवि भी सौरव की हा में हा मिलाते हुए वो भी हाथ रख देता है जिससे रचना के बदन मव सुरसुरी दौड़ जाती है वो केवल इतना ही कह पाती है कि ये सब मुझे नही आता और नाही कभी जरूरत पड़ी..... तब सौरव कहता है कोई बात नही मा मगर एक बात बताऊ ऐसे बाल रखने से इन्फेक्शन का खतरा बना रहता है और कभी कभी तो पसीने के कारण खुजली भी हो जाती है और वही खुजली आगे चल कर घाव कर देती है....रचना बोलती है मुझे इन् सब का ज्ञान नही है....मैं शुरू से ऐसी ही रही हु...
रवि - तभी तो माँ तुम बराबर इसे खुजाती रहती थी अपने साड़ी के ऊपर से....सौरव ऐसा कर शेविंग किट ले आ आज मा की बालो की सफाई कर देते है....
रचना - क्या तुम लोग भी अभी ये सब करना जरूरी है बाद में करेंगे.... अभी रहने दो तभी सौरव कहता है नही मा करवा लो साफ और उठ कर शेविंग किट ले आता है और फिर एक बोतल ठंडा पानी.... और चादर तो थी ही.....
ये सब होने तक रचना कुछ नही कहती और वैसे ही बैठी रहती है....
उसके बाद सौरव कहता है माँ लेट जाओ भइया तुम्हारी बालो की सफाई कर देगा...वो चुपचाप लेट जाती है ऑयर सौरव खुद अपने हाथों से रचना की पैरो को फैला देता है जिससे रचना की चूत खुल जाती है....और उन्नदोनो कि आंखे चमक उठती है....रचना शर्मा जाती है....ये सोच कर की है भगवान ये वो कहा से कहा आ गयी एक ही दिन में....और रवि उसकी जांघो के बीच ठंडे पानी की कुछ छीटे उसकी चूत पर गिराता है रचना आह कर उठती है
उसके बाद रवि अपनी माँ की चूत पे शेविंग फोम लगाता है और कुछ ही सेकण्ड्स के बाद वो रेजर से बड़ी ही सावधानी से उसके बालो की सफाई करने लगता है.....कुछ ही पलों में रचना की चूत चमक उठती है....एकदम पावरोटी के तरह फूली हुई....बिना बालो वाली चूत उसके बेटो के सामने थी.....तभी सौरव रचना की चुत पर ठंडे पानी का छिड़काव करता है जिससे रचना बोल उठती हक़ी हाय बेटा ये क्या करते हो !!! उफ्फ मेरी जान लोगे क्या....
सौरव - नही माँ कैसी बाते करती है देखो तो अपनी चुत को कैसे निखर आयी है....और तभी रवि कहता है कि सौरव मा की पीछे भी काफी बाल है उन्हें भी साफ किये देता हूं...इतना कहना था कि सौरव रचना को उलटी कर देता है जिससे उसकी गाड़ उनके सामने आ जाती है
रचना हाथ पीछे ले जा कर कहती है यह कुछ नही है ये गंदी जगह है इसे छोर दो...
सौरव - नही मा ऐसा कुछ नही है तुम बस्स लेटी रहो हमे अपना काम करने दो और अब उसकी गांड को सौरव दोनो हाथो से फैला कर रवि को दिखता है और कहता है भाई यहां भी करो और फ़ी रवि अपने काम मे लग जाता है जब तक सौरव रचना की गांड को दोनो हाथो से फैलाये रखता है जिससे रचना का गुलाबी छेद उन्न दोनो के सामने खुलता औऱ सिकुड़ता रहता है जिससे रचना के साथ साथ दोनो की भी हालत खराब हो रही थी.....
सौरव का तो मन हो रहा था कि अभी वो अपना लन्ड रचना की गांड में ठूस दे....मगर वो ये सब प्यार से करना चाहता था इतनी मेहनत को वो बेकार नही करना चाहता था....वैसे भी सब्र का फल मीठा होता है.....गांड की भी सफ़ाई करने के बाद वो रचना को पलटते है और रचना का चेहरा देखने लायक था...पूरा लाल लाल हो गया था उसका चेहरा उत्तेजना के कारण....दोनो भाइयो ने उससे पूछा कि माँ अब देखो तुम्हारी ये चुत की हालत और अपने गांड की भी...रचना मुस्कुरा कर कहती है तुम दोनों को पसंद आई न तुम्हे ही किया तुमलोगो को पसंद आनी चाहिए....मेरी खुशि तुमदोनो में ही है....
सौरव और रवि - ओह्ह मा कहते हुए उसे गालो पे चुम लेते है तभी सौरव शेविंग किट उठा कर रख आता है...और वापिस आ कर रचना से चिपक कर लेट जाता है जबकि उन्नदोनो के हाथ रचना की चुचियो और चूत से खिलवाड़ करते रहते है।।।जिससे रचना रोक कर कहती है अब थोड़ा आराम भी करने दो....जब से लगे पड़े हो....फिर दोनों भाई हस कर अपने सिर रचना की चुचियो पे रख कर लेट जाते है....
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10-22-2018, 10:00 AM
Post: #20
RE: दो बेटों की विधवा मा
शाम के वक़्त जब रचना जब नींद से जागती है तब वो देखती है कि दोनो बेटे उसकी चुचियो पर सर रखे और हाथ उसकी चूत पर रखे सो रहे है....उसे उनदोनो पर बहुत ही प्यार आता है....कुछ देर ऐसे ही लेटे रहने के बाद वो उनदोनो को उठाती है और कहती है उठो बच्चो शाम हो गयी है.....और फिर वो दोनों नींद से जागते ही अपनी माँ की चूत को मुट्ठी में भर का भींच देते है जिससे रचना कराह उठती है और कहती है जगते ही शैतानी शुरू....और फिर वो उन्नदोनो के बीच से उठ कर बेहद ही कामुकता के साथ ये कहते हुए बाहर चली जाती है कि उठ कर मुह हाथ धो लो और सौरव तुम रवि की मदद कर देना....मैं चाय बना कर लाती हु....और अपनी गांड मटकाती हुई बाथरूम चली जाती है वो आज पहली बार पूरी नंगी हालत में अपने घर मे घूम रही थी वो भी उसके दोनों बेटों के मौझुदगी में....उसे खुद में आश्चर्य होता है

तभी उसका ध्यान अपनी चिकनी चूत पर जाता है उस पर हाथ लगाते ही वो सिहर उठती है उसकी चूत काफी चिकनी हो गयी थी और इसका एहसास उसके लिए बिल्कुल नया था वो सोची की पता नही आगे ये क्या क्या करवाएंगे.....खैर वो मूतने के बाद वापिस नंगी हॉल में आती है जहाँ वो दोनों पहले से ही बैठे रहते है वो रचना को कहते है....
सौरव - मा बहुत ही अच्छी लग रही हो और तो और अब गर्मी भी नही लग रही होगी ।
इनके ऐसे बात सुन कर वो शर्मा जाती है और कहती है चुप करो सब तुमदोनो का किया धरा है....और फिर किचन में चली जाती है.... चाय बना कर लाती है और दोनो बेटो को झुक कर देती है तो उसकी चुचिया लटक जाती है उनके सामने जिससे उनके लन्ड में फिर से तनाव आने लगता है....वो बोलती है अभी सोचना भी मत अभी खाने की तैयारी करनी है कपडे रखे है धोने है....चुय चाप चाय पी कर टिवी देखो मैं चली काम निपटाने.... ये सब रात को....ये बात बोल कर वो फिर से शर्मा जाती है....की वो ये क्या बोले जा रही है और कितनी बेबाक तरीके से नंगी हो कर उनके सामने चाय दे रही है....तभी सौरव उसकी एक चुचि को चाय के गर्म कप में डूबा कर हटा लेता है जिससे रचना की चुचियो में गरम चाय का एहसास होते ही वो चिल्ला उठती है.....और कहती है ये क्या हरकत है सौरव इनको जला देगा तो चूसेगा किसे...और वो वही सोफे पे उनके बीच मे बैठ जाती है और रवि अपना हाथ रचना की चुतरो पे रख देता है और रचना के बैठते ही वो दब जाते है रचना कुछ नही बोलती और अपनी एक चुची को हाथो में लिए उसे फुकने लगती है तभी सौरव उसकी चुची को अपने हाथो में ले कर मुह में ले लेता है और चुसने लगता है क्योंकि सुबह उन्नदोनो ने उसकी चुचियो को छील दिया था और अभी उसपे गर्म चाय उफ्फ क्या जुल्म किया था उसने....रचना की दूसरी चुची को रवि चुसने लगता है...5 मिनट की चुसाई के बाद सौरव सोचता है कि आगे बढ़ा जाए मगर तभी रचना खुद ब खुद अपने दोनों हाथ दोनो के लन्ड पर रख देती है और सहलाने लगती है और उसकी साँसे बहुत ही ज्यादा उत्तेजित हो गयी थी....उन्नदोनो के खुसी का ठिकाना नही रहता दरअसल रचना जो है वो कब से अपने अंदर की कामाग्नि को दबाये हुए थी मगर आज वो सब बाहर आने को आतुर था अब वो भी अपने बदन की ज्वाला को बुझाना चाहती थी...लग ही नही रहा था कि वो दो जवान बेटो की माँ है....एक वासना की भूखी औरत की तरह व्यवहार कर रही थी तभी सौरव बिना वक़्त गवाए झटके से उठ कर सोफे के नीचे फर्श पर आ जाता है औऱ रचना की टांगो को फैला देता है.....और अपना मुह उसकी सालो से अनछुई चूत पर लगा देता है और चाटने लगता है रचना तो जैसे अब मरी तब मरी वालो हालत हो गयी थीं उसने रवि के लन्ड को इतनी जोर से रगड़ना चालू किया कि वो भी बेचारा आह आह माँ करने लगा पर रचना तो चूट चटवाई में इतनी खो गयी थी कि उसे कुछ नही सूझ रहा था....वो आह सुरु मेरे बच्चे आह मार डाला रे आह क्या कर रहा है कहा मुह लगा दिया।।।।। ओह्ह माँ मैं मरी रे।।आह ओह्ह सौरव रचना की टांगे पूरी तरह से खोल कर चुत की गहराइयों तक चुसने लगा बीच बीच मे उसके दाने को काट भी ले रहा था ऊपर रवि उसकी दोनो चुचियो पे कब्जा जमाए हुए था जिससे रचना मजे ओर दर्द से दोहरी हो जा रही थी और 10 मिनट की लगातार चुत चटवाई और चुची चुसाई के बाद उसका बदन ऐंठने लगा और वो झरने लगी और उसका सारा रस सौरव पीने लगता है....1 मिनट तक झरने के बाद रचना हांफती हुई सोफे पे निढाल सी पड़ जाती है.....अब सौरव अपनी माँ को खड़े हो कर उसके होठो को चूम लेता है और ये देख कर रवि भी उसके होठ चुम लेता है....औऱ तभी रचना कहती है....शैतानों तुम्हारी वजह से आज मवरे शरीर का एक बहुत ही बड़ा बोझ हल्का हो गया ऐसा लगा जैसे कितनी दिनो कि कसर आज निकली हो.....मेरे प्यारे शैतानो....आज तुमने मुझे जो मजा दिया वो मैं कभी नही भुल पाऊंगी....तभी सौरव कहता है....
मा अभी तो ये शुरुवात है....आगे आगे देखो तुम्हे तुम्हारे ये शैतान कैसे कैसे मजा देते है....बस्स तुम अपना प्यार हमे देना और कभी भी गलग मत समझना....हम दोनों भाई तुम्हे हमेशा खुश रखेंगे....दुनिया की हर खुशि तुम्हारे कदमो में ला कर रखेंगे माँ.... और वो हस्ते हुए दोनो को अपने सिने से वापस लगा लेती है....
फिर वो कहती है तुम दोनो ने शाम की चाय भी नही पीने दी...बहुत ज्यादा बदमाश हो भाई....और हस देती है....तभी रवि कहता है अब से हम घर मे नंगे ही रहेंगे.... सब काम तुम नंगी ही रह कर करोगी माँ अब से ये कपड़े की कोई जरूरत नही....और हा मा आज का खाना बाहर से आएगा वो भी तुम्हारी पसन्द का...
रचना - मेरी पसंद वही है जो तुमदोनो कि है तुमदोनो जो लाओगे मैं खाऊँगी.... और एक बात अगर घर मव कोई आएगा तब भी ऐसे ही नंगे रहेंगे हम....सौरव कहता है कौन आता ही है यह मा हमारे पास.... ओर अगर गलती से आ भी गया तो तब की तब देखेंगे... फिलहाल तो हम नंगे ही रहेंगे... और रवि सौरव को कहता है खाना बाहर से लाने...तब वो कहता है भाई तुम भी साथ मे चलो....तब रचना कहती है इसको चोट लगी है ये कहा से जाएगा.... रवि सौरव को आंखों ही आंखों में इशारे से कहता है कि वो चला जाए अभी चोट का भेद खोलना सही नही रहेगा....तीनो एक साथ खड़े होते है और रवि और सौरव एक साथ उसकी चुतरो के दोनों पल्लो को अपने अपने एक हाथ मे दबा कर दूसरे हाथ से उसकी एक एक चुची को पकर कर कहते है
रवि - सौरव - आज रात को हम तुम्हे एक बार फिर से औरत बनानेवाले है माँ और उसके गालो के साथ साथ उसके गर्दन पर भी चुम लेते है.....रचना फिर से एक बार अंदर तक सिहर जाती है...
वो कहती है अब मैं तुमदोनो की ही हु.....जैसे रखो बस मुझे कभी छोर कर मत जाना और ये बोल कर वो सौरव के कान पकड़ लेती है और कहती है.... खास कर तू समझा...
सौरव - हा मा हा समझ गया...आह अब कान तो छोरो.....वो उसके कान छोर देती है और किचन में जाने लगती है चाय के कप्स को उठा कर और दोनों भाई...अपने कमरे मे आ कर एक दूसरे से गले मिल कर खुसी जाहिर करते है....की आखिर इस जंग में उनकी जीत हुई....अब आने वाले रात का इंतेजार था...
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