दो बेटों की विधवा मा
इन तीनो को पटना आये 2 साल हो गए थे। रचना देवी एक भरे जिस्म की औरत थी 2 बच्चो की माँ होने के बावजूद उसका बदन भरा हुआ था अच्छे खान पान ओर सुकून भारी जिंदगी उसके सौंदर्य को बनाये हुए थे ।उसके दोनो बेटे बड़ा बेटा रवि छोटा बेटा सौरव दोनो जवानी की दहलीज को पार कर चुके थे।फिलहाल शादी की कोइ चर्चा नही थी।
बड़ा बेटा घर की जिम्मेदारियो को सही से संभाल रहा था वही छोटा बेटा घर की छोटी मोटी खर्चो के साथ साथ अपना जेबखर्च भी निकाल लेता था।
अब चलते है कहानी की ओर......
रवि के आफिस जाने से पहले उसके लिए नास्ता तैयार करने के बाद रोज की तरह नहाने के लिए बाथरूम की तरफ जाने को थी। अभी सुबह के 6 ही बज रहे थे इसलिए वो बेफिक्र हो कर अपने काम मे मशगुल थी। दूसरी ओर सौरव की नींद अचानक बर्तनों की खटपट से टूट गयी जो उसकी माँ धो कर किचन के स्लैब पर रख रही थी ।
इस वक़्त रचना ने केवल एक ब्लाउज और पेटीकोट पहन रखा था जिसमे से उसके जवानी के पूरे कटाव अच्छे से दिख रहे थे बर्तन धोने के बाद वो बाथरूम की तरफ चल पड़ी.... इधर सौरभ उठा और बॉथरूम की तरफ जाने को हुआ वो इस बात से अनजान था कि उधर उसकी माँ नहाने के लिए बाथरूम में गयी हुई है
इधर रचना बाथरूम आ कर अपने बदन पे बचे हुए आखिरी दो कपड़ों को भी धोने के लिए नीचे फर्श पर फेंक दिया और उकड़ू बैठ कर अपने कपड़ो को साफ करने में लग गयी थी। और वो मस्त नंगी ही बिना दरवाजा बंद किए नहा रही थी तभी रवि बाथरूम में अपनी नींद की अधखुली मदहोशी और सुबह सुबह का लंड का तनाव अलग ही कहर ढा रहा था। अचानक वो बाथरूम की तरफ गया जहाँ अपनी माँ को नंगी हालत में देख कर उसकी सारी नींद काफूर हो गयी और उसके लंड ने झटका मारा उधर रचना अपने काम में व्यस्त थी।सौरव इस नजारे को देख कर पूरी तरह से शॉक में खड़ा था
अचानक उसे ये मंजर भाने लगा और वो वही छुप कर अपने माँ के नंगे बदन का नजारा लेने लगा उधर उसकी माँ जो इससे बात से अनजान थी कि उसका सागा छोटा बेटा उसकी जवानी को आंखे फारे देखे जा रहा था वो नहा रही थी....अब सौरव के दिनचर्या में शामिल हो गया था उसका अपनी माँ के प्रति नजरिया बदल चुका था। एक दिन जब सौरव रचना को देख रहा था तो रचना को एहसास हुआ कि कोई उसे देख रहा है और वो पीछे मुड़ कर देखती है मगर वहां कोई नही था वो उसे एक वहम समझ कर वपिस नहाने लगी उधर सौरव की सास अटक गयी थी क्योकि उसे डर था कि कही उसकी माँ उसे देख ना ले मगर वो अभी बच गया था और वापिस अपने आंखों को सेकने में लग गया अब वो अक्सर अपनी माँ के नाम की मुठ मारता और अक्सर रचना को किसी ना किसी बहाने छूता प्यार दिखाने के बहाने ही सही मगर छूता और रचना को भी ये एहसास हो चला था कि सौरव के व्यवहार में कुछ बदलाव आया है।
अब देखना आगे है कि ये कहानी कौन सा मोर लेती है
अगले दिन सुबह में रचना जब नहाने के लिए जा रही थी तो उसने पहले से ही अपना ध्यान सौरव की तरफ लगा रखा था।
उधर सौरव अपने रोज की तरह अपनी माँ की नंगी देखने के लिए दरवाजे की तरफ जाने को आतुर था । जब रचना नहाने के लिए गयी तो उसने दरवाजा को पूरा खुला ना छोर कर थोड़ा सा खुला छोरा था ताकि वो अपने वहम को यकीन में बदल सके और हुआ भी ऐसा है जब रचना ने अपने बदन के सारे कपड़े उतार कर नहाने के लिए बैठी तो सौरव वहां आ गया मगर आज दरवाजा को लावा देख कर कुछ मायूसी सी हुयी लेकिन अगले ही पल वो दरवाजे की ओट से देखने लगा और उधर रचना का वहम यकीन में बदल चुका था कि उसका खुद का सगा छोटा बेटा उसे नंगी हलात में देखता था । इससे कारण से वो परेशान हो उठी की आखिर ऐसा क्यों कर रहा है उसने सोचा कि अभी के अभी जा कर उसको 2 थप्पड़ लगा कर पुछु की वो ऐसा क्यों कर रहा मगर उसके मन के एक कोने से आवाज आई कि अभी ये सही समय नही है बात करने का।
रवि के आफिस जाने के बाद वो उससे इसका कारण पूछेगी उधर सौरव इस बात से अनजान था कि उसकी माँ को उसके हरकत का पता चल चुका था।
नास्ते के टेबल पर :-
रवि - मा आज मुझे आफिस के कुछ काम से कोलकाता जाना होगा एक हफ्ते के लिए काल रात मैं बता नही पाया उसके लिए सॉरी
रचना - बेटा तुम्हे ऐसे अचानक से क्यों जाना है पहले से बता देते तो मैं कुछ तैयार कर के दे देती वैसे भी तू आजकल हमे भूल ही गया है हर वक़्त काम काम काम संडे को भी तू घर पे नही रहता ऐसा भी क्या बिजी है बेटा अब इतनी जल्दी मैं कैसे कैसे क्या तैयारी कर के दु ।
सौरव - बीच मे टोकते हुए कोई बात नही मा भैया ट्रैन में ही कुछ खा लेंगे और हा भैया कोलकाता से हमारे लिए कुछ अच्छी चीज लेते आना ।
रचना - सौरव तू तो चुप ही रह तुझे क्या पता बाहर का खाने से सेहत बिगर सकती है और वो कोलकाता आफिस के काम से जा रहा है घूमने या टूर पे नही और तुम रवि इधर ज्यादातर तुम बाहर का ही खाना खाते हो । इसका ध्यान रखो वरना सेहत खराब हो ज्यागी बेटा।
रवि - सॉरी मा बस ये हफ्ता निकाल लू फिर एक महीने की छुट्टी लूंगा प्रॉमिस।
सौरव - भैया कुछ लाना मत भूलना प्लीज।
रवि - अच्छा मेरे भाई ।
नास्ता खत्म करने के बाद रवि अपने जाने की तैयारी करने में लग जाता है ओर रचना उसकी थोड़ी मदद कर देती है उधर सौरव अपने कमरे में पढ़ने बैठ जाता है मगर उसके मन मे ये बात भी आ रही थी आनेवाला हफ्ता कैसा रहेगा और नास्ते के टेबल पर रचना की बेरुखी को देख कर उसे भी कुछ अजीब महसूस हुआ था मगर अब आगे देखना है कि रचना कैसे सौरव से बात करती है और वो बात उनके जीवन मे कौन सा मोर लाती है ।
रवि के जाने के बाद रचना सीधे सौरव के कमरे में जाती है जहा सौरव कोतबा खोले आपने मा के नंगे बदन को सोच सोच कर वासन से भरे खयालो में खोया हुआ था।

रचना - सौरव वो चिल्ला कर बोलती है सौरव पलट कर देखता है तो रचना गुस्से से भरी उसके सामने खड़ी थी ऐसे रूप देख कर सौरव को भी यकीन हो गया था कि उसकी करामात उसकी माँ को पता चल गयी है ।
रचना - तू आज सुबह बाथरूम के दरवाजे के पास खरे हो कर क्या कर रहा था ।
अपनी माँ के इससे सवाल से सौरव बहुत ज्यादा घबरा जाता है उसे जवाब देते नही बन रहा था कि वो क्या बोले....
रचना के बार बार पूछने पर भी जब सौरव ने जवाब नही दिया तो रचना रोते रोते उसके बेड के पास जमीन पे ही बैठ गयी और रोने लगी ।
सौरव - बेड से उतर कर मा के पास गया और बोला
सौरव - मुझे माफ़ कर दो मा मैं बहक गया था आई एम सॉरी मा मैं अब से ऐसा नही करूँगा मा मुझे माफ़ कर दो मा मैं आपका दिल नही दुखाना चाहता था और वो भी सुबकने लगा
रचना - मेरी परवरिश में कहा कौन सी गलती हो गयी जो तू ऐसी ओछी हरकत वो भी मेरे ही साथ कर रहा था....और रोने लगती है
सौरव - नही मा ऐसा मत बोलो मा तुम इससे संसार की सबसे अच्छी मा हो पिताजी के बाद तुमने ही तो हमे सारा कुछ दिया है प्यार दुलार सिख सब कुछ मा हमदोनो भाइयो का सब कुछ तुम ही तो हो माँ
माँ मुझसे ग़लती हो गयी मा मुझे माफ़ कर दो माँ
और रचना बिना कुछ बोले वहां से उठ कर चली जाती है और सौरव मा मा ही करता रह जाता है
इधर रचना खुद को कमरे में बंद कर लेती है और रट हुए ये सोचने लगती है कि आखिर ऐसा क्यों किआ सौरव ने
शाम को 6 बज चुके थे मगर अभी भी रचना कमरे से बाहर नही आई थी इधर सौरव अपने कमरे में ये सोचते सोचते सो गया था कि वो अपनी मा को कैसे मनाएगा अचानक फ़ोन की घंटी से उसकी नींद टूटती है फ़ोन रवि का था
रवि - भाई मैं कोलकाता के लिए निकल रहा हु तुम अपना ओर मा का ध्यान रखना
सौरव - जी भाई।
रवि - मा से बात करा दे थोड़ा।
सौरव - माँ अभी अपने कमरे में कुछ काम कर रही है बाद में बात कर दूंगा
रवि - अच्छा ठीक है बाय
सौरव - हैप्पी जर्नी भईया
और फोन कट गया।
अब सौरव उठ कर रचना के कमरे के तरफ बढ़ता है और उसके कमरे के सामने पहुच कर दरवाज़े के पास खड़े हो कर आवाज लगता है माँ माँ माँ दरवाजा खोलो मा शाम होने को आई मा भैया का फ़ोन आया था वो जा रहे है उनसे बात कर लो माँ।
तब रचना दरवाजा खोलती है और बिना सौरव की तरफ देखे बाथरूम की ओर चली जाती है वहां जा कर अपना चेहरा धो कर कुछ देर वैसे ही खड़ी रहती है और फिर बाहर आती है उसने मन ही मन ये सोच रखा था कि वो सौरव से कोई बात नही करेगी जब तक उसको उसकी गलती का एहसास नही हो जाता। इधर सौरव व्याकुल सा परेशानी में सोच रहा था कि आगे पता नही क्या होगा
रात को खाने के टेबल पर भी रचना सौरव से बात नही करती मगर सौरव अपनी माँ से बात करना चाह रहा था मगर चाह लेने से कुछ नही होता । सौरव किसी न किसी बहाने से रचना से कुछ न कुछ बात कर रहा था कभी रोटी मांगने के बहाने कभी सब्जी कभी पानी रचना चुप चाप उसकी बातों के अनुसार उसको उसकी मांगी हुई चीज दे देती थी। मगर बोल नही रही थी। अंततः सौरव के सबर का बांध टूट गया और वो रचना के बाह को पकड़ कर बोलता है।

सौरव - मा तुम मुझसे बात क्यों नहीं कर रही मुझसे गलती हो गई मा मुझे माफ़ कर दो
रचना - ठीक है माफ़ किआ मगर मेरा जब तक मन नही होगा तुझसे बात करने का तबतक तू मुझे टोकेगा नही नाही कोई बात करने की कोशिस करेगा ।
सौरव कुछ नही बोलता ओर रचना उसकी हाँ समझ कर वह से किचन में चली जाती है।और सौरव अपने कमरे में
लेकिन सौरव भी अपने मन मे ये ठान लेता है कि वो अपनी माँ को पाकर रहेगा और इसके लिए उसे क्या करना है वो अच्छी तरह से जानता था।
अगली सुबह रचना जब नहाने गयी तो दरवाजा पूरा बंद कर के गयी थी।इधर सौरव ने अपनी योजना के तहत काम करना सुरु कर दिया था वो अपनी माँ को शीशी में उतारना चाहता था और इसका सबसे बढ़िया जरिया था अपनी माँ की सोई हुई कामाग्नि को भड़काना
जब रचना नहा कर अपने काम मे व्यस्त थी तो सौरव अपने कमरे से निकल कर बाथरूम में गया जहाँ उसने अपने माँ के बदन के बारे में सोच सोच कर अपना लंड फुल टाइट कर लिया और अपने लंड को अपने हाफ पैंट में डाल अपने कमरे की तरफ जाने लगा और किचन के पास पहुच कर फ्रीज में से बोतल निकालने के लिए घूमा और सामने रचना से आंखे मिलती है मगर अगले ही पल रचना की आंखे उसके पैंट को फार कर बाहर आने को आतुर लंड की तरफ जाती है और वो मन ही मन बाप रे बाप कर बैठती है मगर अपने चेहरे पे जाहिर नही होने देती मगर सौरव समझ जाता है कि तीर निशाने पे लगा है। उस पूरे दिन सौरव रचना को अपने लंड के दर्शन दिलवाता रहा और रचना सोच सोच के परेशान होती रही कि आखिर सौरव ऐसा क्यों कर रहा है।
अगले दिन सौरव देर तक सोया रहा और उधर रचना अपने सारे काम को निपटाने के बाद जब देखती है कि सौरव अपने कमरे से बाहर नही आया तो वो पहले सोचती है कि खुद आइएगा जब आना होगा और वो हॉल में बैठ कर टीवी देखने लगती है।
सुबह खत्म दोपहर चढ़ने को आई 12:30 हो रहे थे और सौरव अभी भी नही आया था तो अंत में थक हार कर रचना ही उसके कमरे में जाने का सोचती है कितना भी गुस्सा क्यों न हो आखिर थी तो वो एक माँ ही ना और अपने बच्चे को वो ऐसे नही देख सकती थी खैर वो उसके कमरे की तरफ बढ़ी जहा सौरव अपने योजना के अगले कड़ी को अंजाम देने वाला था उसने आने की आहट सुन कर अपने लंड को टाइट कर लिया वैसे भी वो अपने माँ के नंगे बदन के बारे में सोच सोच कर तुरंत गरम हो जाता था और उधर रचना जब उसके कमरे में दाखिल हुयी तो उसके आंखे चौड़ी हो गयी क्योंकि उसका बेटा बेड पर अपना लंड निकाले सोया हुआ था और वो भी पूरा अकड़ा हुआ जो कम से कम 7 इंच लंबा और 3 इंच मोटा था। रचना के पैर जहा थे वही के वही जम गए मानो काटो तो खून नही वो कुछ सेकण्ड्स तक उसको ऐसे ही नीहारती रही इससे दृश्य ने उसके अंडे एक तूफान खड़ा कर दिया था और जब वो सोची की नही ये गलत है और वो पलटने को हुई तो सौरव ने अपना अगला चाल चला और वो बेड पर पलट गया और सोने की एक्टिंग करते हुए चादर को अपने कमर तक खींच लिया तभी रचना ने उसे उठाने की सोची औऱ उसे आवाज लगाई सौरव उठने की एक्टिंग करता हुआ उठा और रचना की ओर देख कर मुस्कुराते हुए बोला गुड मोर्निग मा सॉरी वो रात को देर से सोया था।तुरंत उसने बात को पलटते हुए कहा मा प्लीज अब तो माफ कर दो मुझे।।।
रचना भी उसके इस सवाल का जवाब दे कर जल्दी से जल्दी वह से निकलना चाहती थी क्योंकि उसके बेटे का लन्ड ने उसे व्याकुल कर दिया था अंदर ही अंदर उसके वर्षो के सोये हुए योवन को जगा दिया था मगर वो अभी इसके भाव अपने चेहरे पे लाना नही चाहती थी इसलिए उसने जवाब दिया ..... ठीक है बेटा माफ किया तुझे चल अब हाथ मुह धो कर नहा ले फिर खाना देती हु।
इधर सौरव समझ जाता है कि उसका काम जल्दी ही बनने वाला है और अब वो अपनी माँ के तरफ से होने वाले हरकतों को बड़े ही ध्यान से देख रहा था और देखे भी क्यों ना आखिर उसने मा की सोई हुयी काम की ज्वाला में आग लगानी शुरूआत जो कर दी थीं।

इधर रचना की बेचैनी बढ़ी हुई थीं आखिर उसे हुआ क्या है वो अपने बेटे के प्रति आकर्षित हो रही थी जो वो करना नही चाह रही थी मगर इस काम मे उसका शरीर उसका साथ नही दे रहा था।उस दिन भी सौरव ने कोई भी मौका नही छोरा अपनी माँ को अपना लन्ड दिखाने में और नतीजा ये हुआ कि रचना की बेचैनी उसके चेहरे पे जाहिर होने लगी थी मगर सौरव भी जानबूझ कर इस खेल का मजा ले रहा था। रवि को गए हुए आज तीसरा दिन था रचना नहा कर किचन का काम निपटा कर हॉल में बैठ कर टीवी देख रही थी मगर उसका ध्यान उसके बेटे के लन्ड पर लगा हुआ था।इधर सौरव को कॉलेज जाना था नही क्योकि उसके आखिरी साल के इम्तिहान आने को थे और उनके डेट्स फाइनल हो चुके थे तो वो चैप्टर्स के रीविशन में लगा हुआ था। और साथ साथ ये भी ध्यान लगाए हुए था कि उसकी माँ की हालत कैसी है
अब रचना की हालात बहुत ही ज्यादा खराब हो चले थे और वो मन ही मन इस बात को स्वीकार कर चुकी थी कि आज नही तो कल उसकी ये बेचैनी उसे मरवा देगी।उसी दिन दोपहर में सौरव अपने कमरे से निकल कर हॉल में आया जहा रचना भी मौजूद थी और वो बिना अंडरवियर के हाफ पैंट में आ कर बैठ गया और माँ को बोला क्या कर रही हो मा अकेले
रचना कुछ नही बस टीवी देख रही थी
तभी सौरव रवि की बात निकालता है और कहता है की माँ भइया को आने में अभी 4 दिन है उनसे मेरी बात हुई थी अभी वो काम से गये है शाम को कहा है तुमसे बात कर दु
रचना - ठिक है कर देना बात और बात तेरी तैयारी कैसी चल रही है
सौरव - अछि चल रही है माँ मैं पास हो जाऊंगा मा तुम देखना तुम्हे निराश नही करूँगा बस एक मौका तो दो
रचना उसके बात पे उसकी तरफ देखती है सवालिया नजरो से तभी सौरव कहता है मेरा मतलब की एग्जाम तो देने दो एक बार और मुस्कुरा देता है।
लेकिन रचना समझ जाती है कि उसका ईशारा किस तरफ था और वो भी सिर नीचे कर के हल्के से मुस्कुरा देती है । अब बस इन्तेजार था तो आगाज होने का।।
और इसकी शुरुआत रचना खुद ही करती है क्योकि वो जानती थी कि सौरव उसे किस नजरो से देखने लगा था और इधर की हुई घटनाओ के बाद ये साफ हो गया था उनके बीच जल्दी ही एक नए रिश्ते का जन्म होने वाला था । रचना ने खुद को बहुत समझाने की कोसिस की मगर सब बेकार क्योकि सौरव लगातार उसको आने लन्ड के दर्शन दिलवा रहा था कभी नंगा लन्ड तो कभी पैंट के भीतर से।
उसी दिन रात को खाना खाने के बाद रचना हॉल में बैठी होती है और टीवी पे सीरियल देख रही थी और सौरव वही फ़ोन में कुछ कर रहा होता है तभी रवि का फोन आता है।
सौरव - हा भइया कैसे हो कोलकाता कैसा लगा
रवि - अच्छा शहर है भाई और बता खाना पीना हो गया मा कहा है उससे बात करा दे तभी वो रचना को फोन देता है और माँ बेटे कुछ देर तक बात करते है और फिर फोन कट जाता है और वो फोन सौरव की तरफ बढा देती है।
तभी रचना कराहती हुई सोफे से उठती है और कमरे की तरफ जाने लगती है तो सौरव उसे टोकता है माँ।।
क्या हुआ मा कराह क्यू रही हो कही चोट लगी है क्या।
रचना - नही बेटे बदन में दर्द है काम करते करते थक जाती हु ना कोई बात नही काल सुबह तक ठीक हो जाएगी।
तभी सौरव बोलता है माँ चलो मैं मालिश कर देता हूं इससे आराम भी मिलेगा और नींद भी अछि आवेगी औऱ रचना कुछ ऐसा ही सोच रही थी मगर फिर भी वो बोलती है
रचना - नही बेटा रहने दे अपने आप ठीक हो जाएगी तू टेंशन मत ले
सौरव - नही मा मैं मालिश कर देता हूं न ओर इसमें टेंशन कैसी अपनी माँ की मालिश कर देना उसके दर्द से निजाग दिलाना में कही किसी बेटे को टेँशन होती है भला तुम भी मा कैसी कैसी बाते करती हो चलो कमरे में मैं मालिश कर देता हूं
वो अपनी माँ को कमरे में जाने का बोल कर खुद अपने कमरे में आता है और फटाफट अपने सारे कपड़े उतार देता है सिवाय हाफ पैंट के और तेल की शीशी के साथ वापिस मा के कमरे में जाता हैं और बोलता है।

सौरव - मा तुम बेड पे लेट जाओ मैं तुम्हारी मालिश किये देता हूं ।
रचना जब उसे इस हालत में देखती है तो पूछती है कि तूने कपड़े क्यों उतार दिए तो सौरव कहता है कि मालिश करने के दौरान उसके कपड़ो में तेल न लग जाये इसलिए उसे उतार दिये।इस जवाब पर रचना कुछ नही कहती और घूम जाती है।
इधर रचना के मन मे भी हजारों तरह की तरंगें उठ रही थी ये सोच सोच कर की अगला पल क्या लाने वाला है उसकी जिंदगी में इसी उधेड़बुन में वो बेड पे लेट जाती है और सौरव एक कुटिल मुस्कान के साथ तेल की शीशी ले कर बेड के किनारे खरा हो जाता है और कहता है।
सौरव - मा, तुम अपनी सारी को घुटनो तक ऊपर कर लो ताकि मैं तेल से तुम्हारी पैरो की मालिश कर सकू। रचना बिना कुछ बोले अपनी सारी ऊपर कर लेती आई हैं मगर घुटनो से नीचे ही रखती है क्योकि अभी भी उसे शर्म औऱ मर्यादा उसे ये करने की इजाजत नही दे रहा था मगर वो अपने शरीर के हाथों मजबूर हो चली थी तभी
सौरव - मा घुटनो तक बोला है क्या तुम भी ऐसे में मालिश कैसे करूँगा और वो खुद ही उसकी साड़ी को घुटनो के थोड़ा ऊपर तक उठा देता है जिससे रचना की जाँघे भी थोड़ी बहुत दिखाई देने लगी थी और सौरव मन ही मन अपनी जीत पर गौरवान्वित हो रहा था होता भी कयो ना आखिर वो अपने मंशा को पूरा करने के करीब आ गया था

वो अपनी माँ को कमरे में जाने का बोल कर खुद अपने कमरे में आता है और फटाफट अपने सारे कपड़े उतार देता है सिवाय हाफ पैंट के और तेल की शीशी के साथ वापिस मा के कमरे में जाता हैं और बोलता है।

सौरव - मा तुम बेड पे लेट जाओ मैं तुम्हारी मालिश किये देता हूं ।
रचना जब उसे इस हालत में देखती है तो पूछती है कि तूने कपड़े क्यों उतार दिए तो सौरव कहता है कि मालिश करने के दौरान उसके कपड़ो में तेल न लग जाये इसलिए उसे उतार दिये।इस जवाब पर रचना कुछ नही कहती और घूम जाती है।
इधर रचना के मन मे भी हजारों तरह की तरंगें उठ रही थी ये सोच सोच कर की अगला पल क्या लाने वाला है उसकी जिंदगी में इसी उधेड़बुन में वो बेड पे लेट जाती है और सौरव एक कुटिल मुस्कान के साथ तेल की शीशी ले कर बेड के किनारे खरा हो जाता है और कहता है।
सौरव - मा, तुम अपनी सारी को घुटनो तक ऊपर कर लो ताकि मैं तेल से तुम्हारी पैरो की मालिश कर सकू। रचना बिना कुछ बोले अपनी सारी ऊपर कर लेती आई हैं मगर घुटनो से नीचे ही रखती है क्योकि अभी भी उसे शर्म औऱ मर्यादा उसे ये करने की इजाजत नही दे रहा था मगर वो अपने शरीर के हाथों मजबूर हो चली थी तभी
सौरव - मा घुटनो तक बोला है क्या तुम भी ऐसे में मालिश कैसे करूँगा और वो खुद ही उसकी साड़ी को घुटनो के थोड़ा ऊपर तक उठा देता है जिससे रचना की जाँघे भी थोड़ी बहुत दिखाई देने लगी थी और सौरव मन ही मन अपनी जीत पर गौरवान्वित हो रहा था होता भी कयो ना आखिर वो अपने मंशा को पूरा करने के करीब आ गया था
सौरव अब हाथो में तेल ले कर रचना के पैरों की मालिश करना शुरू कर देता है और वो अभी बेड के किनारे ही था और मालिश पूरे जोरो से कर रहा था उधर रचना को उसके बेटे का स्पर्श अच्छा लग रहा था कई सालों के बाद आज किसी मर्द ने उसे इस तरह से छुआ था तो उसके योवन में लहरे उठ रही थी दूसरी तरफ सौरव अब अपने अगले हमले के लिए तैयार था और उसने अपना हमला कर दिया और उसका लन्ड फूल कर पैंट में तंबू बना चुका था और सौरव ने उसे छुपाने की बिल्कुल भी कोशिस नही करी बल्कि वो और उसे लहरा लहरा कर दिखाने की कोसिस में लगा था तभी रचना की नजर उसके पैंट में बने तंबू पर गयी और वो अंदर तक कॉप गयी कयोकि ये पहला मौका था जब सौरव के लन्ड के दर्शन वो इतने करीब से कर रही थी और तभी उसने दूसरी तरफ अपना सिर घूमा लिया । सौरव भली भांति अपने माँ के नजरो का पीछा कर रहा था तभी वो मा से कहता है।

सौरव - मा अब लाओ मैं तुम्हारे कमर की भी मालिश कर देता हूं पलटो।
रचना - नही बेटा हो गया रहने दे अब तू जा अब आराम कर मुझे अब काफी आराम मिल गया है
सौरव - नही मा मैं तुम्हारी कमर की मालिश कर देता हूं लाओ इधर सारा दिन काम काम करती रहती हो अभी थोड़ा सा आराम करने का मौका मिल रहा है तो उसमे भी तुमको चैन नही है लाओ इधर और रचना पलट जाती है तभी सौरव कहता है माँ अपनी साड़ी निकाल दो तभी तो मालिश कर पाऊंगा ऐसे तो तुम्हारी साड़ी गंदी भी हो जाएगी और कमर के चारो तरफ लपेटी हुई है कैसे मालिश करूँगा ये सुन कर रचना घबरा जाती है कि वो कैसे अपनी साड़ी उतारेगी तभी सौरव बोलता है माँ उतारो ना और रचना घबराई हुई सी उठती है और सौरव बोलता है माँ मैं आता हूं पानी पी कर प्यास लगी है ।
वो ऐसा इसलिए करता है ताकि वो अपनी माँ के झिझक को खत्म कर सके और वह कमरे से निकल कर वही साइड में छुप कर देखने लगता है
रचना जो खड़ी थी उसकी साँसे बुरी तरह से फूल रही थी कयोकि वो उत्तेजना में काफी गरम हो गयी थी ऑयर सौरव ये नजारा देख कर बार ही खुश हो रहा था उधर रचना की चुचिया ब्लाउज में ऊपर नीचे हो रही थी और तभी रचना ने अपनी साड़ी उत्तर फेकि ओर पेट के बल लेट कर सौरव के आने का इंतेजजार करने लगी तभी सौरव कमरे में दाखिल होता है और अपनी माँ को ऐसे हालात में देख कर बुरी तरह से उसका लन्ड झटका खाता है और वो इस बार सीधा बेड पे चढ़ के बैठ जाता है और बोलता है
ये ठीक किया मा अब आराम से मालिश कर सकूंगा तुम्हारी
रचना - हा बेटा कर दे और वो अपना चेहरा तकिये में दबा लेती है कयोकि उसके बेटे का जादुई स्पर्श उसे पागल बनाए जा रहा था और सौरव भी अपने उंगलियों को रचना के कमर पर इससे तरह से घुमा रहा था कि उसके कामाग्नि भड़के और वो खुद पलट कर उसके सामने समर्पण कर दे।
तभी सौरव वो करता है जिसकी शायद रचना को उम्मीद नही थी सौरव अपने तेल से गिले हाथो की उंगलियों को उसके पेटीकोट के नाडे के सहारे अंदर घुसाने लगा जो उसके चुतरो के दरार के पास छूने लगी जिससे रचना और सौरव दोनो को एक झटका लगता है।
लेकिन रचना की तरफ से कोई विरोध ना पा कर सौरव अपने उंगलियो को जोर जोर से उसकी चुतरो के दरार में ले जाने लगा नतीजतन रचना के पेटिकोट का नारा अब ढीला हो गया था जो सरक कर इतना नीचे आ गया था जहाँ से उसके चुतरो की दरार की शुरुआत देखी जा सकती थी तभी सौरव अपने दोनों पैर अपनी माँ के जिस्म के दोनों तरफ कर लेता है और मालिश करने लगता है इस वजह से उसका लन्ड मा के जांघो से होता हुआ उसके चुतरो के नीचे टक्कर खाने लगा जिसका एहसास रचना को अच्छे से हो रहा था और उसका पागलपन उसपे हावी होता जा रहा था तभी सौरव ने अपने हाथ इतने जोरो से उसके पेटिकोट के नारे के पास से रगड़ा की उसके आधे से ज्यादा चुटर नुमायिन्दा हो गये।
और सौरव के लन्ड ने अपनी माँ के चुतरो के इस दृश्य से एक जबरदस्त झटका खाया उसकी नसे फटने पे आमादा थी तभी सौरव कहता है।।
सौरव - मा तुम अब आगे की ओर घूम जाओ मैं जांघो की भी मालिश कर देता हूं और वो अपनी के ऊपर से उतर जाता है और रचना घूम जाती है और वो अपनी आंखें मारे आनंद के बंद किये लेटी रहती है और सौरव फिर से अपनी माँ मके जिस्म के दोनों तरफ पैर कर के अपनी माँ के पेटिकोट को उठाता है मगर उसका पेटिकोट घुटनो के पास आ कर अटक जाता है तब सौरव कहता है
सौरव - मा तुम अपनी पेटिकोट को ऊपर खिंच लो ताकि तुम्हारी जांघो की मालिश कर सकू रचना बिना कुछ बोले अपने पेटिकोट को उपर खिंच लेती है जांघो तक और सौरव अपने हाथों के जादूगरी को अंजाम देने में जुट जाता है और मालिश के दरमियान अब उसका वार उसकी माँ की चूत के तरफ था जो कुछ ही देर में उसके आंखों के सामने आने वाली थी।
वो मालिश के दौरान उसके पेटिकोट को इस तरह से छू रहा था कि हर छुअन के साथ उसका पेटिकोट कुछ ऊपर सरक रहा था औऱ रचना पागल हुए जा रही थी अब सौरव खुलकर अपने लन्ड का एहसास अपनी माँ को करवा रहा था।
तभी सौरव कहता है।
सौरव - माँ तुम अपनी पेटिकोट उतार दो ये मालिश में दिक्कत दे रही है और इसमें तेल भी लग रहा है और वो रचना का जवाब सुने बगैर उसके पेटिकोट का नारा जो केवल नाम के लिए बंधा हुआ था उसे एक झटके में ही खोल कर उसले बदन से नीचे खिंच देता है और अब उसकी माँ उसके सामने नीचे से बिल्कुल नंगी लेटी हुई थी।
तभी रचना अपनी आँखें खोल कर अचम्भे से सौरव को देखती है जो अभी भी मालिश में व्यस्त था और उसके हाथ अपनी माँ के चूत के चारो ओर औऱ कभी कभी चूत को भी भीच दे रहा था जिससे कि रचना की साँसे अटक जा रही थी तभी वो अचानक उठती है और सौरव इस बात से अनजान था जो अपनी माँ के पैरों के इर्द गिर्द अपनी टांगे फैला रखा था वो मा के अचानक उठने से बेड पे गिर जाता है और रचना अचानक से अपनी पेटिकोट उठा कर बाथरूम में भाग जाती है और सौरव हैरान सा देखता रह जाता है।

बाथरूम में जा कर रचना अभी भी नंगी हालात में पेटिकोट को अपने हाथों में पकड़े अपनी साँसों को काबू में करने की कोशिस में लगी होती है। और मन ही मन सोचती है कि अभी ये क्या हुआ आखिर वो ऐसे कैसे कर गयी है भगवान ये क्या हुआ मुझसे।
तभी सौरव बाहर से आवाज लगाता है....
मा मा ओ मा क्या हुआ मा कुछ बोलो मा
रचना कोई जवाब नही देती सौरव काफी देर तक दरवाजा पे दस्तक देते रहता है मगर रचना कोई जवाब नही देती टैब सौरव वहां से हट कर सोफे पे जा बैठता है
कुछ देर बाद रचना बाहर आती है केवल ब्लाउज और पेटिकोट में वो सौरव की ओर बिना देखे रूम मव चली जाती है और कमर बन्द कर लेती है।सौरव फिर से आवाज लगाता है मगर रचना नही जावाब देती है नाही कमरा का दरवाजा खोलती है सौरव उसके इस रवैये से परेशान हो जाता है कि आखिर बात क्या हुई।
तभी आधे घण्टे बाद रचना दरवाजा खोल कर बाहर आती है और किचन में चली जाती है सौरव भी दौरा दौरा किचन में आता है और माँ को पीछे से गले लगा कर कहने वाला ही होता है की तभी रचना उसका हाथ झटक के दूर कर देती है और कहती है
देख सौरव अभी कमरे में जो कुछ हुआ या जो भी तुमने किआ वो सब एक बहकावे में हुआ वो हमदोनो के बीच संभव नही है हमारा रिश्ता इस बात की मंजुरी नही देता।और आज के बाद तू इन् सब के तरफ ध्यान ना ही दे तो बेहतर होगा ये मेरी सख्त हिदायत है तुझको इस बार रचना का गुस्सा एक्दम चरम पर था।
सौरव - मा तुम समझ नही रही हो मा मैं तुम्हे प्यार करता हु तुम्हारे बगैर अब नही रह सकता मुझे पता है कि ये रिश्ता कभी भी सही नही होगा ना कोइ मजूर करेगा मगर मा तुम एक औरत हो और मैं एक मर्द और किसी बजी रिश्ते से सबसे पहले रिश्ता है मर्द और औरत का और मैन तुम्हारी बेचैनी देखी है और अच्छे से जनता हु की तुम भी यही चाहती हो मगर पता नही क्यों ऐसे बर्ताव कर रही हो मा समझो मा मैन आज तक किसी और लड़की के बारे में सोचा तक नही है लेकिन जब से तुम्हे उस दिन बाथरूम में देखा उस दिन से ही मेरी जिंदगी में तुम्हारे तस्वीर उत्तर सी गयी है .....रचना बात को बीच मव काटते हुए कहती है
रचना - सौरव मैंने एक बार कह दिया न कि नही तो नही अब तू जितना जल्दी इस बात को समझ ले उतना ही अच्छा रहेगा।

सौरव बिना कुछ बोले घूम कर चला जाता है तभी वो दरवाजे पे बिना घूमे कहता है कि माँ आज तो तुमने मुझे आज मना तो कर दिया लेकिन मा आज के बाद तुम्हे वो सौरव कही नही दिखेगा जो पहले हुआ करता था और आज तक जो तुमने देखा अब जब तक तुम मुझे खुद आ कर अपने सीने से नही लगा कर कहोगी की बेटा मै तेरी हर बात मानूँगी तू बस पहले जैसा हो जा तब तक ये मेरी प्रतिज्ञा है माँ।
रचना - ये कभी नही होगा सौरव कभी भी नही और मैं भी देखती हूं कब तक तू क्या करता है।
उस दिन कुछ खास नही होता और अगले दिन सुबह में रचना जैसे काम करती थी करने के बाद वो खाना टेबल पर लगा कर खुद का खाना निकाल कर खाने लगी लेकिन सौरव बाहर नही आया नाही उसने कल से रचना से कोई बात करी थी वो काल शाम से ही अपने कमरे में था और इधर न ही रचना उसके कमरे में गयी थी.....लेकिन उसके मन मे ये बात जरूर कौंध रही थी कि आखिर सौरव आगे क्या करने वाला उसने जो कहा है कि वो अब पहले वाला सौरव नही रहेगा उसका क्या मतलब निकलता है।

इधर रवि को गए हुए आज 5 दिन हो गए थे रचना सोची की रवि को इस मामले से दूर ही रखती हूं कयोकि वो नही चाहती थी कि दोनों भाइयों में उसको ले कर कोई झगड़ा हो.....इस बात से अनजान रचना की सौरव और रवि एक भाई के रिश्ते से कही ज्यादा अपने सारी बाते एल दूसरे को बताते थे।और रवि को ये पता था कि उसके गैरहाजिरी में क्या क्या हुआ है पटना में.......
सौरव मन ही मन सोचा कि वो अपने मकसद में कामयाब हो ही गया होता अगर मा का ये पवित्रता उकसा नही सकता था इसलिए उसने रवि को कॉल लगाया
सौरव - भाई कब आ रहे हो वापिस.....यहां पासा उलटा हो गया है जो काम तुमने मेरे जिम्मे छोरा था वो अब अटक गया है और फिर उसने सारी आपबीती बयान कर डाली.....
इधर इस बात से रवि थोड़ा परेशान हुआ मगर अगले ही पल वो सौरव से बोला कि ककी दिक्कत नही है भाई मेरे आने तक इंतेजार कर आगे का क्या करना है मैं देखता हूं
सौरव - ठीक है भाई और फिर दोनो आगे कैसे क्या करना है वो डिसकस करते है और फिर फोन कट जाता है।धर्म न जागता लेकिन इसके साथ साथ ये मुसीबत भी खड़ी हो गयी थी कि वो अब अपनी माँ को उकसा नही सकता था इसलिए उसने रवि को कॉल लगाया
सौरव - भाई कब आ रहे हो वापिस.....यहां पासा उलटा हो गया है जो काम तुमने मेरे जिम्मे छोरा था वो अब अटक गया है और फिर उसने सारी आपबीती बयान कर डाली.....
इधर इस बात से रवि थोड़ा परेशान हुआ मगर अगले ही पल वो सौरव से बोला कि ककी दिक्कत नही है भाई मेरे आने तक इंतेजार कर आगे का क्या करना है मैं देखता हूं
सौरव - ठीक है भाई और फिर दोनो आगे कैसे क्या करना है वो डिसकस करते है और फिर फोन कट जाता है।
इधर शाम होने को आई और सौरव अभी भी कमरे में बंद था बीच में वो बाजार गया था और होटल में खाना खा कर आ गया था वो बिल्कुल वैसा ही कर रहा था जैसा रवि ने उसे करने को कहा था
जब रचना सो कर उठी तो उसने देखा की खाना अभी भी वैसा ही रखा हुआ था उसने सोचा कि जब अकल ठिकाने आ जाएगी तो खुद खाने आएगा.... लेकिन वो अंदर से थोड़ी परेशान भी हुई कि सौरव अब ये नया क्या कर रहा था एक पल को वो सोची की सौरव को टोके मगर अगले ही पल वो ये बात को आने मन से निकाल दी और अपने रात की खाने की तौयारी में जुट गई
रात के समय रचना खाने की मेज पर सौरव का इंतेजार की की वो आये और वो खाना खाये मगर ऐसा नही हुआ सौरव नही आया वो अपने कमरे में निश्चिन्त रुप से अपने पार्ट टाइम जॉब के काम को पूरा कर रहा था जिसको उसे इस हफ्ते ईमेल करना था..... इससे पूरे हफ्ते रवि के जाने के बाद उसने अपने काम पे बिल्कुल भी समय नही दिया था।

इधर रचना को जब यकीन हो गया कि वो अब नही आएगा तो वो खाने को वही टेबल पर ढक कर अपना खाना खा कर सोने को चली गयी लेकिन अब वो थोड़ी थोड़ी परेशान होने लगी थी आखिर सौरव को वो कैसे इस वासना के खेल से दूर करे.....
लेकिन उसे क्या पता था कि उसके बेटे उसके लिए पागल हो चुके है और अब अगला वार रवि करने वाला था जिसकी योजना रवि के मन मे बखूबी बन गयी थी कि घर आने के बाद उसे अपनी माँ को बोतल में कैसे उतारना है.....
सौरव को भूख तो लग रही थी लेकिन वो भी पूरी तैयारी कर के आया था मार्केट से उसने अपने बैग से बर्गर निकल कर बड़े ही चाव से खाया और मस्त पेट भरने के बाद नींद की आगोश में चला गया वैसे भी अब उसे कुछ करना था नही जो वो अपना दिमाग लगाए।
सुबह जब रचना हॉल में आई तो देखा कि खाना वैसे का वैसा ही रखा हुआ है जिसे देख रचना को बहुत गुस्सा आया और उसने वो सारा खाना कूड़ेदान में फेंक दिया और उसने भी ठान लिया कि देखती हूं आखिर कब तक ये लड़का ऐसे मुझे मजबूर करता है और वो अपने दिनचर्या के कामो में लग गयी।
कुछ देर बाद सौरव कमरे से बाहर आया तो देखा कि रचना हॉल में बैठी टीवी देख रही है वो उसके तरफ बिना कुछ देखे और बोले बाहर निकल जाता है और सीधे रात को लौटता है।
इससे पूरे दिन में रचना बहुत ही परेशान रही कि आखिर सौरव ऐसे कहा चला गया।
कितना भी गुस्सा क्यों न हो थी तो वो आखिर एक माँ ही ना और वो इसी लिए परेशान थी हालांकि जब से उसे सौरव ने उस तरह के हाल में पहुचाया था तब से वो कभी कभी उत्तेजित भी हो जाती थी लेकिन वो उसे खुल कर अपने ऊपर हावी नही होने दे पाती थी और अब तो सौरव की कारस्तानीया भी बंद हो गयी थी।
रात को जब सौरव आया तो उसने सोचा कि जा कर उससे सीधा सीधा सवाल करे या उसे खिंच कर दो थप्पड़ लगाए मगर वो ऐसा कर ना सकी..... हालांकि उसने रात का खाना बनाया था उसके लिए मगर वो आज भी खाना खाने नही आया और तो और इन दिनों में उन्नदोनो में बात भी नही हुई थी जिससे माहौल और तनावपूर्ण हो चला था।
अगली सुबह रवि को आना था और रचना अब सोच ली थी कि वो इस मसले पर रवि से जरूर बात करेगी मगर रवि तो कुछ और ही धमाका करने वाला था.......


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