दोस्त की तलाश में इज्जत गई
मेरा नाम राज़ है और मैं अहमदाबाद, गुज़रात से हूं। मेरी उम्र ३० साल और कद ५'४" है।

यह बात अभी की है जब मैं ३ साल के बाद विदेश से वापिस आया।

अहमदाबाद में जो मेरे पुराने साथी थे वे सभी अपने अपने काम में व्यस्त हो गए थे इस लिए अहमदाबाद मेरे लिए एक नया शहर हो गया था और मुझे एक साथी की तलाश थी।

मेरे जो एक दो पुराने दोस्त मिले, उनसे इस बारे में बात कि तो एक ने मुझे एक फ़ोन नम्बर दिया जो वास्तव में एक विधवा का था और उसकी एक सात साल की बच्ची है।

तो मैंने उसको फ़ोन लगाया और बताया कि मैं कौन बोल रहा हूं और किसने मुझे उसका नम्बर दिया है, तो वो मुझसे बात करने लगी।

पहले पहले हम बस सीधी सीधी बातें करने लगे और हमें रोज़ बात करने की आदत सी हो गई।

बातों बातों में मुझे यह भी पता नहीं चला कि वो मुझसे इतनी प्रभावित हो गई कि उसने एक दिन मुझे अपने घर मिलने के लिए बुलाया और मैं चला गया।

जैसे ही मैं उसके घर गया तो उसकी बेटी ने दरवाज़ा खोला जो बहुत प्यारी थी। लेकिन मैंने जैसे ही उसकी मम्मी को देखा तो मेरे होश उड़ गए।

क्यों?

अरे ! वो इतनी खूबसूरत नहीं थी जितना मैंने सोचा था।

हाँ ! वो गोरी जरूर थी लेकिन उसकी सूरत मुझे जरा भी पसन्द नहीं आई।

फ़िर हम इधर उधर की बातें करने लगे। असल में मेरे बात करने के अंदाज़ से और मेरे विदेश में रहने के कारण वो मुझसे बहुत प्रभावित थी।

थोड़ी बातें करने के बाद उसने मुझे कोल्ड-ड्रिंक दिया और अपनी बेटी को कहा- जाओ ! चिराग के घर में जाकर खेलो जो कि उनके ऊपर वाली मंजिल पे रहता था।

असल में मैं उसके घर पर यह सोच कर गया था कि कोई अच्छा साथी मिल जाए जिससे मैं अपने दिल की बातें कर सकूँ।

यहाँ पर मैं आपको बता दूँ कि मैं भी एक शादीशुदा आदमी हूँ, पर जैसा कि आप जानते हैं कि आदमी की कई ऐसी बातें होती हैं जो वो अपनी पत्नी के साथ भी नहीं बाँट सकता।

मेरे विचार में जीवन में ऐसी कितनी ही बातें होती हैं जो आप अपने निकटतम मित्रों से ही बाँट सकते हैं( ऐसे ही एक मित्र की मुझे तलाश थी)। लेकिन यहाँ तो बात कुछ और ही निकली। मेरी जरूरत थी एक खूबसूरत दोस्त जो मुझे दिल से समझ सके(सिर्फ़ सेक्स नहीं)

यहाँ इस भाभी को देखने के बाद मैंने निश्चय किया कि कम से कम इसके साथ तो मैं आगे कोई सम्बंध नहीं रखूँगा।

लेकिन उल्टा यह हो गया कि जैसे मैंने आपको बताया कि भाभी कुछ ज्यादा ही प्रभावित हो गई थी मुझसे।

अब घर में सिर्फ़ हम दोनों थे और मेरे पास कोई बात नहीं थी उससे करने को।

इतने में उसने बोला कि आओ हमारा घर देख लो।

मैं और वो अपने हाथों में गिलास लिए खड़े हुए और पहले उसकी रसोई में गए जो कि अच्छा खासा पैसा खर्च करके बनाई थी, असल में उसके पति अच्छे पैसे वाले थे और उसकी मृत्यु के बाद भाभी ने भी अच्छी नौकरी कर ली थी।

उसने मुझे रसोई के बारे में पूरी जानकारी दी पर पता नहीं मुझे क्यों ऐसा लगा कि वो जो भी बात कर रही थी वो दोहरे अर्थ में ही कर रही थी। मुझे एक और बात महसूस हुई कि जहां कहीं भी उसे मुझे छूने का मौका मिलता वो छोड़ती नहीं थी।

फ़िर वो मुझे बाहर लाई जहां हम पहले बैठे थे और हर बात बड़े विस्तार से बता रही थी। बात करते करते उसका हाथ मेरे हाथ से टकरा गया और मेरा कोल्ड ड्रिंक मेरे शर्ट पर गिर गया। उसने मुझ से माफ़ी मांगी और कहा कि आप जल्दी से शर्ट उतार दीजिए, मैं साफ़ कर देती हूं।

मैंने शर्ट उतार कर उसे दी तो उसकी नज़र मेरे सीने से हट नहीं रही थी क्योंकि मेरा सीना चौड़ा है, कोलेज़ के समय से ही मैं अखाड़े में जाया करता था।

मैंने उसे फ़िर कहा- भाभी जी ! शर्ट !

वो मेरे हाथ से शर्ट लेकर बेडरूम की ओर जाने लगी तो मेरी नज़र उसके पृष्ठ उभारों पर पड़ी जो कि मुझे पांच पांच किलो के नज़र आ रहे थे और ऊपर नीचे हो रहे थे। बेडरूम में जाकर उसने मुझे आवाज़ दी- राज़ ! यहाँ आओ ! देखो यह मेरा बेडरूम है और बाथरूम भी यहीं पर है। फ़िर उसने कहा- तुम यहीं बेड पर बैठो, मैं आपका शर्ट मशीन में डाल देती हूँ। और वो बाथरूम में चली गई।

वहाँ बैठे बैठे मैं बोर हो रहा था और पता नहीं मुझे ज़रा नींद सी आ गई। मैं सोया नहीं था पर ज़रा आंख बंद हो रही थी। थोड़ी देर में मुझे ऐसा महसूस हुआ कि मेरे लण्ड पर किसी का हाथ घूम रहा है, पर मेरे मन में ऐसा कोई विचार था ही नहीं इसलिए मेरा लण्ड सामान्य ही था।

मैंने आंखें खोल कर देखा तो वो मेरे पूरे बदन को चूमने लगी तो मैं एकदम उसे रोकने लगा और कहने लगा कि आप यह क्या कर रही हैं। तो उसने कहा कि मैं तुमसे यौन सम्बंध बनाना चाहती हूँ और फ़िर मुझे जोर जोर से चूमने लगी।

दोस्तो ! विश्वास करना कि इतना सब कुछ होने के बाद भी मेरे लण्ड पर कोई असर नहीं हुआ क्योंकि मैं उसे चोदना ही नहीं चाहता था।

मेरी कोई प्रतिक्रिया ना मिलने पर उसने मुझसे पूछा कि क्या तुम मुझसे कुछ भी करना नहीं चाहते?

मैंने साफ़ मना कर दिया कि नहीं मुझे तुम में कोई रुचि नहीं है, आप अच्छी हैं, आप का स्वभाव भी अच्छा है पर मैं आपके साथ सेक्स नहीं करना चाहता।

तो उसने कहा- तो फ़िर तुम मेरे घर क्यों आए और अब तक मुझसे बातें क्यों करते रहे?

मैंने उसे साफ़ बता दिया कि मैं उसके बुलाने पर ही उसके घर आया हूं और बातें इसलिए करता रहा कि आप अपनी किसी अच्छी सी खूबसूरत सहेली से मेरी दोस्ती करा दोगी, जैसा कि आपने वादा भी किया था।

यह सुन कर वो एकदम निराश हो गई और उसकी आंखों में आँसू आ गए। तभी उसने मुझे उसकी सारी बातें बताई और मुझे एकदम भावुक कर दिया और जोर जोर से रो रो कर मुझसे चिपक गई।

उसकी इतनी सालों की वासना की भूख सुन कर मुझे उस पर तरस आ गया और मैं उसके सिर पर हाथ फ़िराने लगा।

फ़िर उसने कहा- राज़ ! मैं तुम्हें अपनी दो तीन अच्छी सहेलियों से मिलाऊँगी और दोस्ती भी करा दूंगी, पर तुम मुझे एक बार अच्छी तरह से संतुष्ट कर दो। जब से मैंने तुम्हारा यह गोरा और चौड़ा सीना देखा है मुझसे रहा नहीं जाता।

यह बात करते करते उसने फ़िर से मेरा लण्ड सहलाना शुरू कर दिया। मैंने सोचा कि यह औरत इतने सालों से भूखी है तो क्यों ना मैं इसकी आग ठण्डी कर दूँ!

मैंने अपनी ज़िप खोल कर अपना ४ इन्च का लण्ड उसके हवाले कर दिया जो कि अभी तक उठा नहीं था।

वो मेरे लन्ड से खिलवाड़ करने लगी जैसे किसी छोटे बच्चे को खिलौना मिल गया हो।

फ़िर उसने मेरे लण्ड को अपने मुंह में ले लिया और ऐसे चूसने लगी जैसे आम चूस रही हो। अब यह तो स्वाभाविक ही है कि इतना लण्ड चुसवाने के बाद तो सत्तर साल के बुढ्ढे का भी खड़ा हो जाए, मैं तो सिर्फ़ तीस का था।

वो मेरा ७" का खड़ा लण्ड देख कर पागल सी हो गई और जोर जोर से चूसने लगी। चूसते चूसते उसने मेरी पैन्ट और अन्डरवीयर निकाल दी थी। लगातार बीस मिनट लण्ड चूसने के बाद उसने मुझे बेड पर लेटने को कहा और उसने खुद अपने सारे कपड़े उतार दिए।

और उसने मुझे बताया कि मुझे पता है कि मेरी सूरत तुमको पसंद नहीं है, पर आज के किए तुम मुझे खुश करो।

तो ना चाहते हुए भी मैंने उसके बड़े बड़े स्तन जो कि एकदम गोरे अड़तीस इन्च के थे, दबाए फ़िर उसने अपने स्तन चुसवाए। मैं करता रहा क्योंकि मैं उसको प्यासी नहीं रखना चाहता था।

थोड़ी देर बाद वो खुद मेरे ऊपर चढ़ गई और अपने आप ही मेरा लण्ड अपनी चूत पर लगा कर अन्दर डलवाने की कोशिश करने लगी, लेकिन अन्दर नहीं जा रहा था क्योंकि उसकी चूत बहुत समय से प्रयोग ही नहीं हुई थी।

तो उसने कहा- आप अपने लण्ड को ज़रा पकड़ो, मैंने पकड़ा, फ़िर उसने अच्छी तरह से मेरे लण्ड की टोपी अपनी गीली चूत के मुँह पर जमाई और ज़रा सा जोर लगाया तो सिर्फ़ मेरा टोपा ही अन्दर घुस सका और वो चिल्ला उठी। पर वो हटी नहीं और दर्द होने के बावज़ूद दो तीन झटके लगा कर मेरा पूरा लण्ड अन्दर ले ही लिया और बिना हिले पाँच मिनट तक चुपचाप मेरे ऊपर बैठी रही(शायद दर्द के कारण!)

फ़िर धीरे धीरे हिलना शुरू होकर जो शताब्दी एक्स्प्रेस वाली गति पकड़ी कि रुकने का नाम ही नहीं लिया।

दोस्तो ! वैसे मैं चोदने में माहिर हूं और किसी भी महिला को दुनिया का स्वर्ग दिखा सकता हूं, मैं तीस चालीस मिनट तक चोदने की ताकत रखता हूँ। पर यहाँ मेरी इच्छा के विरुद्ध काम चल रहा था। मुझे उत्तेज़ना नहीं थी, मैं तो सिर्फ़ एक भूखी औरत को संतुष्ट करना चाह रहा था।

वो करीब बीस मिनट लगातार झटके लगाने के बाद आह ऊह की जोरों की आवज़ों के बाद मुझ से चिपक कर ढेर हो गई पर मुझे और मेरे लण्ड को आज़ाद करने से मना कर रही थी।

फ़िर उसने मुझे बोला कि मैं उसे अलग अलग तरीके से चोदूँ, तो मैंने उसे पाँच छः तरीकों से खुश किया और पता नहीं वो कितनी बार झड़ चुकी होगी।

तब उसने कहा कि आज के बाद अगर मैं सात जन्म तक नहीं चुदवाऊंगी तो भी अफ़सोस नहीं होगा। और रही तुम्हारी बात तो मैं तुम्हें अपनी ऐसी ऐसी दोस्तों से मिलवाऊँगी कि मुझे चोदने के बाद तो तुम्हारा नहीं छुटा पर मेरी सहेलियों को देख कर ही तुम्हारा लण्ड पानी छोड़ देगा।

दोस्तो ! विश्वास करो कि मैंने अपना खड़ा लण्ड ऐसे ही वापिस अपनी पैन्ट में समेट लिया और वहाँ से निकल लिया।

करीब दो दिन के बाद मेरे मोबाईल पर उसका फ़ोन आया और…

आपको कैसी लगी मेरी सच्ची कहानी?


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