दीप्ती की चूत और गांड दोनों मारी
मैं अजमेर का रहने वाला हूं। मेरा नाम मनोहर है मैं 45 साल का हूं। और यहां मैं अपने परिवार के साथ रहता हूं। मेरे दो बेटे हैं। एक बाहर दूसरे शहर में रहता है। एक हमारे साथ ही रहता है। मेरी पत्नी घर के ही कामों में उलझी रहती है। मैं स्कूल में प्रिंसिपल के पद पर हूं। मैंने अभी-अभी एक नया घर बनवाया। जिसमें हम लोग कुछ ही दिन पहले शिफ्ट हुए। कुछ महीने बाद हमारे यहां 2 लड़कियां रहने आई। वह दोनों कॉलेज की पढ़ाई के लिए अजमेर आए थे। वह रहने के लिए घर ढूंढ रहे थे। और फिर वह हमारे पास आए। हमने कॉलेज की स्टूडेंट्स सोच कर उन्हें अपना 1 फ्लोर किराए पर दे दिया। उनका नाम पूजा और शिवानी था। वह दोनों कॉलेज जाती और शाम को घर आती। कभी-कभी वह हमारे साथ ही खाना खा लेती थी। और घर के कामों में हाथ बटाती थी। यह बात मेरे छोटे बेटे को बिल्कुल भी पसन्द नही थी। कुछ समय तक ऐसे ही वो लड़कियां हम से मिलजुल कर रहने लगे। हमें भी वह दोनों लड़कियां अच्छी लगने लगी। हमने सोचा अच्छे घर की लड़कियां हैं तो क्यों ना हम इन्हें भी अपने परिवार की तरह समझे। लेकिन कुछ समय बाद हमारे घर में उनके दोस्तों का भी आना जाना हो गया था। उस टाइम तक तो सही था लेकिन धीरे-धीरे यह बात बढ़ने लगी। कभी लड़कियां आती तो कभी लड़के आने लगे थे। लड़कियों तक तो ठीक था, लेकिन यूं रोज रोज लड़कों का आना हमें अच्छा नहीं लगा।

एक दिन हमने सोचा क्यों ना उन लड़कियों से बात की जाए कि यह सब यहां नहीं चलेगा। फिर हमने उनसे बात की तो उन्होंने कहा ठीक है। अगले दिन से ऐसा नहीं होगा। उस दिन तक तो सही चलता रहा। लेकिन वह दोनों रात को देर से घर लौटते। हमें भी उनकी चिंता होती जब वह देर रात से घर लौटते। हम कई बार उन्हें फोन करते लेकिन उनका नंबर नहीं लगता। फिर एक दिन घर आकर मैंने उनसे पूछा कि इतनी देर तक तुम दोनों कहां रहते हो। उन्होंने कहा कॉलेज के काम से देरी हो गई और फिर वह चली गई। एक बार तो मैंने सोचा कि इनके माता-पिता से बात की जाए लेकिन फिर मेरा विचार बदल गया। मैंने सोचा उनके माता-पिता के बदले पहले इनसे ही बात करूं। मुझे उनकी आदतें कुछ अच्छी नहीं लगी। मुझे लगा कि वह दोनों सुधर जाएंगे। लेकिन नही वह कहां सुधरने वाली थी। पहले तक तो वह दोनों ठीक थी। लेकिन जैसे जैसे समय बीतता गया वह दोनों भी बदलती गई। जब मैं और मेरी पत्नी घर से बाहर होते तो वह लड़कियां अपने दोस्तों को बुलाते।
यह बात हमें घर आने पर पता लगती जब हम उन्हें जाते देखते। फिर भी हमने कुछ नहीं कहा। हम भी देख रहे थे कि कब तक यह सब चलता। और 1 दिन की बात है। जब मैं मेरी पत्नी और मेरा बेटा कहीं शादी में बाहर गए थे। तो उन लड़कियों ने घर पर अपने दोस्तों को बुलाकर जमकर पार्टी की। और जब मैं 2 दिन बाद घर आया तो यह बात मुझे मेरे पड़ोसियों से पता चली। उन्होंने कहां की हमने सोचा तुम्हारे घर पर कोई पार्टी रखी है क्योंकि शोर शराबा ही इतना हो रहा था। फिर मैंने कहा कि हम तो 2 दिन से घर पर ही नहीं थे। तो पार्टी कहां से करते। फिर पता चला कि यह पार्टी लड़कियां अपने दोस्तों के साथ मिलकर कर रही थी। मुझे इस बात पर बहुत गुस्सा आया लेकिन जैसे तैसे करके मेरी पत्नी ने मेरा गुस्सा शांत किया। हम लोग इन लड़कियों से बहुत परेशान हो गए थे। अब तो पड़ोसी भी इन लड़कियों से परेशान होने लगे थे। मेरे बेटे को तो ये लड़कियां पहले से ही पसन्द नही थी।

अब मैंने सोच लिया था कि उनको मैं सबक सिखा कर रहूंगा और इनकी गांड मार कर ही रहूंगा। मैंने भी रात को चुपके से देखने लगा। घर पर कौन-कौन आता है। मैंने रात को देखा कि वहां पर लड़के आए हुए है।

मैं चुपके से खिड़की से देख रहा था। मैंने देखा कि वह लड़कों से चुद रही है। उन लड़कों ने इन्हें नंगा कर रखा है और उनकी गांड ले रहे हैं। यह देख कर मेरा लंड भी खड़ा हो गया और मैंने भी सोच लिया कि मैं इनको सबक सिखा कर ही रहूंगा। इनकी गांड में अब लाल कर कर ही छोडूंगा।

मैंने एकदम से दरवाजा खोल दिया और वह दोनों डर गई। वह लड़के भी कोने में जाकर छुप गए। वह कहने लगे हमने कुछ नहीं किया आप हमें छोड़ दीजिए। उन्होंने कहा कि मैं पुलिस में कंप्लेंट कर दूंगा। तुम दोनों की भी गांड ने पुलिस ही तोडेगी, तुम दोनों को बहुत चोदने का शौक है। अब मैं तुम दोनों को बताता हूं। वह दोनों के दोनों मेरे पैर पर नाक रगड़ने लगे और कहने लगे हमें छोड़ दीजिए। हमने कुछ नहीं किया है। इन दोनों ने ही हमें यहां बुलाया था और हमने इन्हें पैसे दिए थे। आप हमसे कुछ पैसे ले लीजिए पर हमें छोड़ दीजिए। मै उन लड़कों को देखकर थोड़ा पिघल गया। मैंने कहा तुम जाओ अपना नाम और पता मुझे बता जाओ तुम्हारा घर कहां पर है और अपना नंबर दे दो। उन्होंने मुझे अपना नंबर दे दिया। मैंने उन दोनों को छोड़ दिया।

मैं उन दोनों के पास गया दोनों नंगी बिस्तर पर पड़ी हुई थी। उन दोनों की चूत में एक भी बाल नहीं था। अब वह दोनों भी गिड़गिड़ाने लगे। मैंने कहा तुम अपने घर में फोन करोगी या मैं तुम्हारे घर में फोन करूं। वो कहने लगी आप हमें माफ कर दीजिए हमें छोड़ दीजिए। मैंने भी अपना लंड बाहर निकाला और कहा कि इसे अपने मुंह में लेकर चूसते रहो और मेरे माल को अपने गले तक भर लेना। अब पूजा और शिवानी ने बारी-बारी से मेरे लंड को चूसना शुरू किया। मैंने उन दोनों के गले तक अपने लंड को दे दिया और दोनों के मुंह में अपने माल को भर लिया। पहले वह कह रही थी हम इसे अंदर नहीं लेंगे। मैंने उन्हें कहा मेरे वीर्य को तुम्हें निकलना है। उन दोनों ने मेरे माल को पी लिया। उसके बाद मैंने उन दोनों को घोड़ी बनाया और चोदना शुरू कर दिया।

मैंने जैसे ही पूजा की चूत मे अपना कड़क व सख्त लंड डाला। वह चिल्ला पड़ी और कहने लगी आपका तो बहुत मोटा और बड़ा है। मैंने कहा चुपचाप मेरे लंड को अपने अंदर लो। मैंने उसके चूतड़ों को पकड़ा और धक्का मारना शुरू किया। पूजा भी मेरा पूरा साथ देने लगी थी। वह भी अपने चूतड़ों को पीछे मेरे लंड की तरफ करती और मैं उसकी गांड की तरफ अपने लंड को करता। मैंने उसे बहुत अच्छे से चोदा। उसके बाद मैंने शिवानी को कहा मेरे पास आओ अब मैंने उसको लेटा कर चोदना शुरू किया। मैंने उसे बिस्तर में लेटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गया। मैंने उसके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रख लिया और उसकी योनि में अपना लंड डाला। जैसे ही मेरा लंड उसकी योनि में गया। वह चिल्ला उठी और मुझे कहने लगी आपका तो बहुत ही मोटा है। मैंने उससे बोला पूजा से पूछना कितना मोटा है। मैं उसको बड़ी तेजी से झटके मार रहा था। मुझे बहुत मजा आ रहा था। क्योंकि मैंने काफी समय बाद जवा चूत के मजे लिए थे और मुझे काफी आनंद आ रहा था। यह सब करने में मेरा कुछ समय बाद वीर्य निकलने वाला था। मैंने उन दोनों को मेरे लंड से सटा दिया और मैंने उन दोनों के मुंह पर अपनी पिचकारी मार दी। जैसे ही मेरी पिचकारी उन दोनों के मुंह पर गिरी। वह दोनों उसे चटने लगी। मैंने उन दोनों को वहीं पर रखे टेबल पर लेटा दिया और उनकी चूतड़ों को अपने मुंह की तरफ करते हुए। उन दोनों की गांड में भी एक-एक करके अपना लंड घुसा दिया। पहले मैंने शिवानी की गांड में अपना लंड डाला तो वो एकदम से चिल्ला उठी और कहने लगी मुझसे नहीं हो पा रहा है। मैंने उसके बाद उसे धक्का देना शुरू किया। वह बहुत तेज छटपटा रही थी। उसके बाद मैंने अपना लंड उसकी गांड से निकाला और पूजा की गांड में डाल दिया। जैसे ही मैंने उसकी गांड में अपना डाला तो वह भी बड़ी तेजी से उछल गई। मैंने उसे खींचकर अपने पास पकड़ लिया और गांड में धक्का मारने लगा। मैंने उन दोनों की गांड के छेद को मोटा कर दिया था क्योंकि मुझे उन दोनों पर बहुत ही गुस्सा आ रहा था। उन दोनों की गांड के गूदे सूज गए थे। मैंने उनका भी बुरा हाल कर दिया क्योंकि उन दोनों की गांड बहुत टाइट थी। लेकिन मुझे तो उनसे यह करना ही था नहीं तो वह दोनों सारे पड़ोस में मेरी बदनामी करवा रही थी। अब मैं जब उन दोनों को पेल कर नीचे आया।

वह दोनों बिस्तर पर बेसुध होकर लेट गई। उसके थोड़े समय बाद वह दोनों हमरे घर मे आई और मेरी पत्नी से कहने लगी आज के बाद हम कभी भी ऐसा नहीं करेंगे। मेरी पत्नी खुश हो गई और कहने लगी आपने ऐसा क्या डोज दिया इन्हें मैंने मुस्कुरा कर बात को टाल दिया।
 


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