दीदी की दमदार चुदाई
ये करीब दस साल पुरानी मेरी आपबीती है जिसे आज मैं आपके साथ शेयर कर रहा हूँ। आशा करता हूँ कि आपको पसंद आयेगी।
उस समय मई का महीना चल रहा था। गरमी अपने पूरे शबाब पर थी। गरमी के साथ-साथ उमस भी कुछ ज्यादा हीं थी जिसके कारण दिन में जब बिजली नहीं रहती थी तो गरमी और उमस से हालत खराब हो जाया करती थी। उस समय मैं घर मे अकेला हीं था, घर के बाकी लोग गांव गये हुए थे। सुबह में करीब साढ़े दस बजे अचानक मेरे दरवाजे पर दस्तक हुई तो मैने दरवाजा खोला और मुझे सामने बगल की नीरा दीदी खड़ी दिखाईं दीं। नीरा दीदी को सामने देखकर मुझे आश्चर्य हुआ और मैने उनसे पूछा कि नीरा दीदी आप कब आईं तो उन्होने कहा कि आज सुबह हीं आईं हूं, मां की तबीयत थोड़ी खराब है, तो जब तक वो ठीक नहीं हो जातीं हैं तबतक रूकूंगी। उनकी ये बात सुनके मैं बोला कि अकेलेहीं आईं हैं तो उन्होने कहा कि हाँ बच्चो का स्कूल चल रहा था तो मैने उन्हें वहीं छोड़ दिया है। इस बीच मैं लगातार उनकी चूचिओं को घूरे जा रहा था जोकि पहले से काफी ज्यादा बड़ी हो गईं थीं और साड़ी के पल्लू के उपर से भी उनकी चूचिओं के उभार और गोलाई का पता साफ-साफ चल रहा था। मुझे अपनी चूचिओं को घूरते पाकर नीरा दीदी थोड़ी असहज सी दिखीं और उनके चेहरे पर नाराजगी के हल्के से भाव आये परंतु मैने उनको नजरअंदाज कर दिया और उनकी चूचिओं को लगातार घूरे जा रहा था और उनसे इधर-उधर की बातें भी किये जा रहा था। नीरा दीदी भी कुछ देर मे समझ गईं कि जबतक वो मेरे सामने खड़ी रहेंगी मैं उनकी चूचिओं को घूरता रहूंगा तो उन्होने बात बदलकर कहा कि तुम्हारा आंगन खाली है क्या तो मैने कहा कि हाँ क्यों तो उन्होने कहा कि मेरे घर का हैंडपम्प खराब हो गया है और मुझे नहाना है तो अगर तुम्हारा आंगन खाली हो तो मैं नहा लूं तो उनकी इस बात को सुनकर मैने कहा कि ये भी कोई पूछने की बात है, नहा लीजीये तो उन्होने कहा कि ठीक है मैं बस थोड़ी देर मे अपने कपड़े लेकर आती हूँ तो मैने कहा कि ठीक है और नीरा दीदी वापस अपने घर जाने के लिये पलटीं तो उनके बदन के पीछे वाला भाग देखकर तो मेरे होश हीं उड़ गये। नीरा दीदी ने हल्के क्रीम कलर का सूती ब्लाउज पहन रखा था जोकि बहुत हीं महीन कपड़े का था जिसमे भीतर पहने हुए उजले रंग के ब्रा की साफ झलक मिल रही थी। उनका ब्लाउज काफी टाईट फिटिंग का था जो कि उनके मांसल बदन से एकदम चिपका हुआ था और ब्लाउज के पीछे वाला हिस्सा काफी डीप कट यानी कि सिर्फ तीन इंच की पट्टी के रूप में था जिसके कारण उनकी लगभग समूची पीठ नंगी हीं थी। उनके ब्लाउज का कपड़ा इतना ना ज्यादा महीन था कि भीतर पहने हुये टाईट फिटिंग के उजले रंग के ब्रा के स्ट्रैप का कसाव उनकी मांसल और गदराई पीठ पर साफ-साफ दिख रहा था और ब्लाउज को देखने से हीं साफ पता चल रहा था कि उन्होने ब्लाउज अपना शरीर ढ़कने के लिये नहीं वरन् अपना शरीर दिखाने के लिये पहना हुआ था तो मैने मन हीं मन ये भी अंदाजा लगाया कि जब इनका ब्लाउज पीछे की तरफ से इतना ज्यादा खुला है तो आगे की साईड भी काफी डीप कट होगा। साथ हीं जब नीरा दीदी पीछे पलटीं तो उनका चूतड़ों को देखकर भी मेरा मन डोल गया। उनके चूतड़ काफी बड़े-बड़े और हल्का पीछे की तरफ निकले हुए थे जिसे देखकर मेरा तो मन किया कि अभी उन्हे पीछे से पकड़ कर उनके गांड़ मे अपना लंड डाल दूं किंतु मैने खुद पर काबू रखा। नीरा दीदी जब जा रहीं थीं तो उन्हें भी अहसास था कि मैं उनके पिछवाड़े को घूर रहा होउँगा फिर भी वो काफी धीमे-धीमे और अपनी कमर को कुछ ज्यादा हीं लचका-लचका कर चल रहीं थीं और उनके इस तरीके से चलने से मैं काफी असहज महसूस कर रहा था और मेरी हालत एकदम खराब हो चुकी थी साथ हीं मेरा लंड़ पूरा खड़ा होके पैंट में तंबू बना चुका था। जबतक नीरा दीदी वहाँ से चली नहीं गईं मैं उन्हे घूरता रहा और उनके जाने के बाद मैं दरवाजा बंद करके अपने कमरे मे आकर बैठ गया और उनके फिर से आने का इंतजार करने लगा।
अब नीरा दीदी के बारे में विस्तार से आपको बताना चाहूँगा। नीरा दीदी अपने माँ-बाप की पांच में से दूसरी औलाद हैं और उनकी शादी बिहार के सारण जिले के एक गाँव मे हुई है। उनके पति इंडियन ऑयल मे टेक्नीशियन के पद पर भुवनेश्वर में काम करते हैं। नीरा दीदी के दो बच्चे हैं, बड़ा लड़का चौदह साल का और छोटा सात साल का। उनका बड़ा लड़का आठवीं क्लास में है और छोटा दूसरी। नीरा दीदी करीब छत्तीस-सैंतीस साल की गेहुंये रंग की और साधारण शक्ल-सूरत की लेकिन भरपूर मांसल और गदराये शरीर की औरत हैं। नीरा दीदी के चेहरे की मासूमियत को देख के ऐसा लगता है कि वो काफी संस्कारी औरत हैं लेकिन उनकी चूचिओं और उनकी गांड़ को देखने के बाद कम से कम मेरी राय तो उनके बारे मे बिल्कुल बदल गई। मुझे लगता है कि नीरा दीदी बहुत बड़ी चोदक्कड़ औरत हैं और उनकी चूचियों की बहुत ज्यादा रगड़ाई हुई है तभी उनकी चूचियों का साईज इतना ज्यादा बड़ा हो गया है, साथ हीं साथ उनकी गांड़ भी बिना मरवाये इतनी चौड़ी नहीं हो सकती, ऐसा मुझे उनके पिछवाड़े को देखकर लगा। नीरा दीदी के बारे मे सोच-सोच कर मैं पिछले कई सालों से मूठ मारा करता था जिसके कारण मेरे लंड का साईज काफी बड़ा हो गया था लेकिन मैं ये बात नहीं जानता था कि मेरे लंड का साईज काफी ज्यादा हो गया है और लगातार मूठ मारने से मेरे लंड की ताकत बढ़ गई थी और वो काफी देर मे झड़ता था। पिछले तीन साल से नीरा दीदी अपने मायके नहीं आईं थीं और इन तीन सालों में उनके शरीर मे बहुत भराव आ गया था और वो पहले से बहुत हीं ज्यादा सेक्सी लग रहीं थीं। साथ हीं नीरा दीदी का पहनावा पहले से काफी ज्यादा बदल गया था। पहले वो साड़ी-ब्लाउज हीं पहनती थीं लेकिन उनका ब्लाउज पूरे गले का होता था और आज उनको देख के मुझे ऐसा लगा कि वो सामने वाले को दिखाने और चोदाई निमंत्रण देने के लिये हीं ऐसे खुले गले का ब्लाउज पहनने लगी हैं। साथ हीं मुझे ऐसा लगा कि नीरा दीदी जानबूझ कर मुझे दिखाने के लिये हीं मेरे घर से जाते समय अपना कमर कुछ ज्यादा हीं लचकाते हुये जा रहीं थीं। मैने तय किया कि अब जबकि नीरा दीदी मेरे घर नहाने के लिये आ रहीं हैं मैं उन्हे बिना चोदे छोड़ूंगा नहीं और ये सोचकर मैं उनके आने का इंतजार करने लगा।
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