दिल्ली कॉल-ब्वॉय की चुदाई-६, delhi-callboy-ki-chudai-6
हाय दोस्तों,

मैं लक्ष्य, दिल्ली से फिर आपके लिए एक शानदार सच्ची कहानी लेकर आया हूँ। मुझे मेरी पिछली कहानियों के लिए जिस तरह आप सबने टिप्पणियाँ भेजीं, उसने मुझे उत्साहित किया। तो मैं अब आपको अपना नया अनुभव सुनाता हूँ।

यह बात पिछले हफ्ते की है जब मैं अपनी मेल चेक कहा था, तो एक मेल मुझे प्रीत-विहार की एक महिला का मिला, जिसमें उन्होंने बताया कि उनके पति एक एन. आर. आई. हैं और इसलिए उन्हें मेरी सेवा चाहिए। पर वह अपने घर पर नहीं बुला सकती और मुझे ही कमरे की व्यवस्था करनी होगी। मैंने उन्हें हाँ कह दी और कहा कि जब भी आपको मेरी सेवा चाहिए तो आप मुझे दो दिन पहले मेर कर दें और अपना नम्बर दे दें।

तीन दिनों के बाद मुझे उनका मेल मिला कि वह अगले दिन मज़े करना चाहतीं हैं, साथ में उन्होंने अपना नम्बर भी दिया था। मैंने उन्हें फोन किया तो उन्होंने बताया कि उनका नाम प्रिया है और वह ३६ साल की हैं। हमने अगले दिन मिलने की जगह तय की और फिर उन्हें अपने कमरे पर ले आया।

मैंने ए.सी. ऑन किया और उनसे पूछा कि क्या आप बीयर लेना पसन्द करेंगी, तो उन्होंने हाँ में जवाब दिया। मैं फ्रिज़ मे से ३ बीयर निकाल लाया और थोड़े नमकीन भी। फिर हम बीयर पीते हुए बातें करने लगे। वह बेड पर मेरे पास आकर बैठ गईं और कहने लगी - "अब जल्दी करो, मुझे देर हो रही है।"

मैंने उनके गुलाबी होंठों को किस्स किया तो वह एकदम से सिसकारी भरने लगी... अअअअआआआहह्हहहह्हहह... प्लीज़ जल्दी। फिर हमने जल्दी से एक-दूसरे के कपड़े उतारे और उन्होंने मुझे अपनी बाँहों में कसकर एक शानदार किस किया। फिर मैंने उन्हें अपनी बाँहों में उठाकर बिस्तर पर लिटा दिया तब मैंने भरपूर नज़रों से देखा, वाक़ई शानदार बदन था। मुझे भी लगा कि शायद मैं भी अब और इन्तज़ार नहीं कर सकता, तो मैंने अपने हाथों को उनकी नरम और गोरी चूचियों की तरफ बढ़ाया और दबाने लगा।

अअआआआआहहहहआआआ... फिर मैंने धीरे से उनके एक निप्पल को अपने होंठो में दबाकर चूसने लगा तो उन्होंने अपनी आँखें बन्द कर ली, और मेरे बालों में हाथ फिराने लगीं। तभी मैंने अपनी दो ऊँगलियाँ उनकी चूत में डाल दीं, तो उन्होंने चिहुँक कर अपनी आँखें खोल दीं और कहने लगी, प्लीज़, धीरे करो, मुझे कुछ हो रहा है। मैंने कहा, अभी तो यह बस शुरुआत भर है।

उन्होंने अपनी आँखें फिर से बन्द कर लीं। मैं अब उठा और अपना लंड उनके होंठों पर टिका दिया। उन्होंने भी बिना आँखें खोले ही अपनी जीभ से सुपाड़े को चाटना शुरु कर दिया, फिर उसके बाद अपना मुँह खोलकर पूरे लंड को चूसने लगी। क़रीब १० मिनट तक चूसने के बाद वह बोली कि अब रुका नहीं जा रहा, अब जल्दी से मुझे चोदो... प्लीज़, आई लव यू, प्लीज़ जल्दी करो।

ऐसी बातें सुनकर मेरा जोश भी बढ़ गया था। मैंने उनकी टाँगें फैलाकर एक जानदार धक्का दिया, तो वह कराह उठी, "प्लीज़, इतनी ज़ोर से मत करो।"

लंड क़रीब ३ इंच तक अन्दर चला गया था, फिर धीरे-धीरे मेरा पूरा ६ इंच का लंड उनकी चूत में चला गया तो वह भी अपनी चूतड़ उछाल-उछाल कर मेरा साथ देने लगीं। क़रीब १० मिनट बाद जब मुझे लगा कि मैं अब छूटने वाला हूँ तो मैंने उन्हें डॉगी स्टाईल में होने को कहा। फिर मैं उनके पीछे आ गया और पूरी ताक़त से धक्का लगाया तो वह कहने लगी, प्लीज़ दर्द हो रहा है, पर मैं रुका नहीं और लगातार धक्के मारता गया, साथ ही चूचियों को भी दबाता जा रहा था। तभी वह चिल्ला उठीं, "आआआआाहहहह.... मैं गई... और तेज़ करो..."

पर मैं अब ख़ुद पर नियंत्रण पा चुका था और लगातार चोदे जा रहा था। थोड़ी देर के बाद वह कहने लगीं "अब मुझे छोड़ दो, जलन हो रही है, मैं दो बार छूट चुकी हूँ।" मैंने कहा, "पर अभी मेरा तो रुका हुआ है।" उसने कहा "मैं मुँह से कर देती हूँ।" तो मैंने कहा "वह राउंड तो पहले ही हो चुका है। अब यदि तुम्हें दिक्क़त न हो तो गाँड में कर लूँ?"

वह कहने लगी, "नहीं मैंने कभी गाँड नहीं मरवाई।"

मैंने उन्हें जोश दिलवाते हुए कहा "एक बार मरवा लो, फिर गाँड ही मरवाने के लिए बुलाया करोगी।"

"चलो आज यह भी हो जाए।"

मैं अन्दर से तेल की बोतल ले आया और उनकी गाँड की छेद पर मला और एक ऊँगली डाली तो वह कहने लगी कि दर्द हो रहा है, तो मैंने धीरे-धीरे तेल उनकी गाँड के अन्दर डालता रहा। फिर उन्होंने मेरे लंड पर तेल लगाया फिर मैंने उन्हें पीछे से कसकर पकड़कर एक ज़ोरदार का धक्का लगाया तो लंड तेल की वज़ह से सरकता हुआ ४ इंच अन्दर चला गया। वह चिल्लाने लगी, "प्लीज़ मुझे छोड़ दो। मुझे बहुत दर्द हो रहा है।" उसकी आँखों में आँसू आने लगे, पर मैं जानता था कि यदि पहली बार में इसे छोड़ दिया तो फिर गाँड नहीं मरवाएगी, इसलिए मैं रुका नहीं और लगाता धक्के लगाता रहा और उसकी चूत में भी दो ऊँगलियाँ घुसा दीं। थोड़ी देर बाद उसे भी मज़ा आने लगा और वह गाँड हिलाने लगी।

मुझे लगा कि अब मैं छूटने वाला हूँ तो मैंने उसे बताया तो वह कहने लगी कि जल्दी से निकालो, मुझे पीना है। मैंने अपना लंड उसकी गाँड से निकाला और रुमाल से साफ करके उनके मुँह में डाल दिया, जिसे वह तेज़ी से चूसने लगीं। तभी मैंने अपना सारा वीर्य उनके मुँह में उड़ेल दिया जिसे वह चाट-चाटकर सारा पी गई। अब हम दोनों ही थककर बिस्तर लेट गए। क़रीब १५ मिनटों तक ऐसे ही लेटे रहने के बाद हम उठे और कपड़े पहनने लगे। फिर उसने मेरी फीस के ३००० रुपए मुझे दिए और कहने लगी - "वाक़ई काफी समय के बाद मुझे इतना मज़ा आया है... थैंक्यू, और एक ज़ोरदार किस किया।"
 


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