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थोडा सा हट के एक प्रेम कथा
02-01-2013, 08:18 AM
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थोडा सा हट के एक प्रेम कथा
ये घटना आज से १५ साल पहले की है जब मेरी उम्र लगभग १५ साल थी, में एक मिडेल क्लास फॅमिली से हूँ पिताजी गवर्मेंट इंजिनियर थे , में अपने माता पिता की एकलौती संतान हूँ , जहाँ हम रहते थे वो एक गवर्मेंट कालोनी थी मकान लगभग सभी एक दुसरे से सटे हुए थे सभी लोग एक दूसरे को अच्छी तरह से जानते थे, मेरे घर से पांच घर दूर ही मेरे एक दोस्त का घर था उसकी दो बहने थी बड़ी शालिनी लगभग २२ साल की जो हम से लगभग ७ साल बड़ी थी वो एक गिर्ल्स डिग्री कॉलेज से बी. ए. कर रही थी ये उसकी सेकंड इयर थी, छोटी सपना हम ऊम्र ही थी लगभग एक साल हम से छोटी वो एक कन्या विद्यालय में नौवी क्लास में थी

मेरी शिक्षा आठवीं तक एक विद्या मंदिर में हुई थी जहाँ लड़कों के लिए सभी लड़कियों बहने और लड़कियों के लिए सभी लड़के भाई थे , रक्षा बंधन पर सभी लड़कियां सभी लड़कों को राखी बान्द थी ये जरुरी था पढाई हो या ना हो सम्बन्ध जरुर निभाए जाते थे, अगर उस दिन स्कूल ना जाओ तो आचार्य जी गांड तोड़ देते थे लेकिन उनकी ये तमाम कोशिश बच्चों को जवान होने से नहीं रोक सकती थीं, और जवानी की सुरुआत सेक्स से होती है

खैर जैसे-तैसे आठवीं पास करके मैंने दूसरे हाई स्कूल में एड्मिसन लिया, वहां मेरी मुलाकात पहले से ही एक्सपर्ट संजय से हुई संजय ही सपना और शालिनी का भाई था, उसने मुझे शुरु के कुछ महीनो में ही एहसास दिला दिया की अब तक मैंने क्या खोया है , मस्तराम की किताबें , एडल्ट मगज़िने सब कुछ उसी ने उपलब्ध कराईं पता नहीं उसके सोर्स क्या थे लेकिन उस पर सब कुछ उपलब्ध रहता था मेरे लिए नहीं क्लास के और लोंडों के लिए भी वो मसीहा था, मेरे लिए अच्छी बात थी की वो मेरा दोस्त था और मुझे फ्री में ही मजे दिलाता था औरों के लिए वो इसका चार्ज बसूलता था जिससे उसकी सिगरेट के पैसे निकलते थे , दो सेम अबिलिटी के बन्दों में दोस्ती नहीं हो सकती, दोनों की कमजोरी ही एक दूसरे को दोस्त बनाती है ताकि उसकी वो कमी वो दोस्त से पूरी कर सके , संजय पढाई में थोडा कमज़ोर था ये उसकी कमजोरी थी में चूँकि पढाई में ठीक था तो उसने मुझ से दोस्ती कर ली, मेरी कमजोरी वही थी जो क्लास में और लड़कों की थी ( सेक्स मटेरिअल )

में सुबह जब स्कूल जाता तो संजय को लेता हुआ जाता था इसके लिए मुझे उसके घर जाना पड़ता था, जब भी मेरी एंट्री उसके घर में होती बड़ी दीदी शालिनी बेड पर सोती हुई मिलती शायद घोडे बेच के सोती थी कुछ होश नहीं रहता था की कपडों की क्या हालत हो रही है , शालिनी मुझ से थोडा सहमती थी क्यूंकि मैंने उसे एक बार कालोनी में ही रहने वाले एक लड़के नवीन से बात करते देख लिया था, मिडेल क्लास में बात करना ही बहुत होता है अगर ये बात में संजय को बता देता तो वो नवीन का हवाई जहाज़ बना देता भले ही वो लड़का संजय से ७ साल बड़ा था लेकिन संजय के सोर्सेस के आगे कहीं नहीं टिकता था खैर मेरे लिए तो शालिनी का राज़, राज़ ही रखना था कम से कम इसी बहाने वो मुझ से थोडा बहुत बात कर लेती थी, नहीं तो वो किसी को घास भी नहीं डालती थी

शालिनी गजब की सुंदर लड़की थी गोरा रंग लाल होठ ५'२" लम्बी ३४डी - २५ - ३६ का साइज़ रहा होगा, मेरे लिए तो उन् कहानियों की काल्पनिक हेरोइन थी जो मस्तराम की किताबों में होती थी चूँकि उन् किताबों में करेक्टर के फोटो तो होते नहीं थे सो किसी ना किसी तो एमजेंन करना ही पड़ता था मेरी लिए हर स्टोरी की हेरोइन शालिनी ही रहती

हाई स्कूल के उस एक साल ने मुझ में कई परिवर्तन ला दिए थे सबसे बड़ा परिवर्तन मेरे लंड में था मैंने विद्या मंदिर की शिक्षा तक मुट्ठी नहीं मारी थी लेकिन इस एक साल में सायद हफ्ते में २ या ३ बार तो मार ही लेता था इसका असर ये हुआ की जो लंड एक साल पहले अस्तित्व में नहीं था वो आज अपनी उपस्थिति बहुत ही शानदार तरीके से करा रहा था

( दोस्तों ये मेरा अपना पर्सनल अनुभव है की मुट्ठी मारने से लंड का साइज़ बढता है, क्यूंकि आज में ७" के लंड का मालिक हूँ ये वही साइज़ है जो तभी बन गया था जब में १६ साल का था, वैसे भी साइज़ १८ से २० साल तक ही बढता है मेरे ख्याल से ये साइज़ नोर्मल से थोडा बड़ा ही है क्यूंकि एवरेज साइज़ ५ से ६ " का ही होता है और ये सब सायद मेरे मुट्ठी मारने की वजह से ही संभव हो पाया था )

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02-01-2013, 08:19 AM
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RE: थोडा सा हट के एक प्रेम कथा
सपना से मेरी बात कम ही होती थी वो बहुत ही रिज़र्व नेचर की लड़की थी , कम बोलना बात बात पर कमेन्ट कर देना जिससे किसी की भी गांड सुलग जाए लेकिन सुन्दरता में वो अपनी बहन पर ही गयी थी शालिनी के शरीर के दर्शन तो सुबह हो जाते थे जब वह सो रही होती थी कपडों में ही उसके अंगों का उतार चदाव नज़र आ जाता था लेकिन एक दिन वह हुआ जिसकी मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी

एक सुबह जब में संजय के घर पंहुंचा तो उसके पापा ड्यूटी जा चुके थे मम्मी रसोई में थी, संजय नहा रहा था और शालिनी सोयी हुई थी सपना घर की सफाई कर रही थी झाडू वो लगा चुकी थी अब पोंछा लगा रही थी मेरे लिए दरवाजा खोल कर फिर अपने काम में लग गयी शायद जल्दी में थी इसलिए पोंछा लगते समय उसका स्कर्ट जो की घुटनों तक का ही था क्रोस टांगें होने की वजह से खुल गया और उसके अंदर उसकी सफ़ेद पैंटी की झलक मुझे मिल गयी ये घटना मेरे लिए एक दम नयी थी मैंने इस से पहले किसी लड़की की पैंटी नहीं देखी थी शायद उस दिन मुझे पहली बार एहसास हुआ की वास्तव में लड़की की जाघें कैसे होती हैं एकदम चिकनी गोरी घुटनों से ऊपर गजब की मोटाई सपना भले ही शालिनी से ८ साल छोटी थी लेकिन उसकी गांड उस से बिलकुल कम नहीं थी बल्कि शालिनी की चड्डी सपना के टाइट ही आती

सपना पोंछा लगा के जा चुकी थी लेकिन मुझे ऐसे चीज़ के दर्शन कराने के बाद जिसने मेरे सोचने के शक्ति पर रोक लगा दी मेरा ध्यान सिर्फ वहीँ अटक गया था और में मूर्ति की तरह पलंग पर बैठा हुआ था, तभी किसी ने मेरे कंधे पर हाथ रखा सपना की चड्डी के ख़याल में ऐसा खोया की ध्यान नहीं रहा पीछे बेड पर शालिनी सो रही है वो उठ चुकी थी और मुझे ऐसे हालत में बैठा देख वो तुंरत भांप गयी की शायद मैंने सोते समय उसका कोई अंग देख लिया है वो अपने कपडे जल्दी जल्दी ठीक करने लगी उसे क्या पता था की उसकी छोटी बहन मुझ पर ४४० वोल्ट का करंट गिरा कर गयी है, शालिनी ने तुंरत सवाल ढोक दिया तुम कब आये वो शायद कन्फर्म करना चाह रही थी की में कितनी देर से उसका शरीर निहार रहा हूँ में कुछ बोलता उस से पहले संजय नहा कर आ चुका था उसके आते ही शालिनी बिना अपना उत्तर सुने ही बाथरूम चली गयी और में संजय के साथ निकल लिया स्कूल के लिए ...

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02-01-2013, 08:19 AM
Post: #3
RE: थोडा सा हट के एक प्रेम कथा
सपना की सफ़ेद पैंटी ने मुझे पूरे दिन कोई काम नहीं करने दिया और फिर जैसा की होना ही था मुझे रात को उसके नाम की मुठी मार के लंड को धोका देना पड़ा अगली सुबह में फिर उसी उम्मीद से संजय की घर पहुंचा तो पता चला की वो जल्दी चला गया किसी काम की वजह से ( मुझे पता था कहाँ गया होगा अपने नए सोर्स बनाने ), में वहां से जाने लगा तो सपना बोली की तुम मुझे स्कूल तक छोड़ दो संजय नहीं है तो तुम्हारी साइकिल खाली जायेगी इस से बडिया मुझे ही ले चलो, में भी पैदल चलने से बच जाउंगी

उसका स्कूल हमारे स्कूल के रास्ते में ही पड़ता था लगभग घर से १ किलोमीटर और उसके स्कूल से १ किलोमीटर हमारा स्कूल था मुझे उसे ले जाने में कोई प्रॉब्लम नहीं थी लेकिन पीछे साइकिल में मेरा बैग लगा हुआ था और उसको पीछे ही बैठना था संजय तो आगे बैठ जाता था ( साइकिल की फ्रेम पर ) और साथ में सपना का अपना बैग भी था जो मेरे बैग से बड़ा ही था तो उसे दोनों बैग लेके पीछे बैठना पड़ा, थोडी दूर चलने पर ही उसका बैलेंस बिगड़ गया शायद उसकी ३६ साइज़ गांड साइकिल के कैरिएर पर फिट नहीं हो पा रही थी ऊपर से बेग्स का बोझ उसने दोनों बैगस गिरा दिए, उसकी इस हरकत से मुझे साइकिल रोकनी पड़ी अपने बैग को गिरा देख मुझे गुस्सा तो बहुत आया और मैंने उसे डांटते हुए कहा अपने बैग उठाओ और पैदल ही जाओ, लेकिन वो चुपचाप खडी रही रास्ते में उसके स्कूल की और लड़कियां भी पैदल जा रही थी शायद उसे अपनी बेजत्ति होने का डर सता रहा था, स्कूल की लड़कियों ने उसे मेरे साथ साइकिल पर आते हुए देख लिया था, अब अगर वो पैदल जाती तो उसका मजाक बन सकता था, उसके गोरे गाल टमाटर की तरह लाल हो चुके थे मुझे समझते देर ना लगी की अगले १-२ मिनट में ये आंसुओं की धारा निकालने वाली है, मैंने स्थिति को देखते हुए उस से कहा की तुम दोनों बैग पीछे लगा दो और आगे बैठ जाओ उसे मेरा आईडिया पसंद आ गया और वो आगे बैठ गयी, अब हम दोनों ही खुश थे सपना को पैदल चल कर अपना मजाक नहीं बनवाना पड़ता और मुझे तो जैसे भगवान् ने कुछ अच्छा महसूस कराना था, मेरे हर पेडल ( साइकिल चलने के स्टेप ) पर मेरा घुटना उसकी मुलायम और मोटी जाँघों से टकरा रहा था, टकरा घुटना रहा था और अहसास लंड को हो रहा था ( दोनों के बीच अच्छी अंडरस्टेनन्डिंग थी ) २ मिनट बाद ही लंड अपना पूरा आकार ले चुका था, सपना साइकिल पर पीछे की तरफ होकर बैठी थी मतलब उसकी कमर लगभग गद्दी से लगी हुई थी इस स्थिति में मेरा लंड उसकी कमर पर रगड़ खा रहा था इस बात का अहसास सपना को हो गया और वो थोडा आगे खिसक गयी लेकिन जब तक उसका स्कूल आ चुका था और मैंने साइकिल रोक दी थी, सपना और मेरा सामना बहुत कम समय के लिए होता लेकिन उतने समय में कोई ऐसे हरकत होती जो मुझे पागल कर जाती पहले उसके चड्डी के दर्शन और अब ये सब...


सपना साइकिल से उतर कर अपना बैग निकालने लगी, बैग निकालते हुए मुझ से बोली अगर लोटने में संजय तुम्हारे साथ ना आया तो मुझे यहाँ से ले चलना, उसकी इस बात को सुनकर मैंने तुंरत ही निश्चय कर लिया की अब संजय को अकेले ही आना पड़ेगा

में ठीक २ बजे सपना के स्कूल पहुँच गया और गेट पर उसके बाहर निकलने का वेट करने लगा वो २ मिनट बाद ही बाहर आई, उसके साथ उसकी सहेली भी थी जो उसके साथ ही वापस जाती थी मुझे देख कर सपना ने तुंरत ही उस से पीछा छूदाते हुए कहा की वो मेरे साथ जायेगी तू आज अकेली चली जा, वो लड़की थोडा अपसेट हो गयी क्यूंकि सेम टाइम लड़कों की छुट्टी का भी होता था और वो अकेली जाती लड़कियों पर कमेन्ट करे बिना नहीं निकलते थे, इसलिए ज्यदातर लड़कियां या तो ग्रुप में या परेंट्स के साथ ही जाती थीं

सपना को इस बात से कोई मतलब नहीं था वो अपना बैग पीछे लगा चुकी थी और आगे बैठने की तेयारी कर रही थी, मुझे एक बार तो अजीब सा लगा लेकिन फिर अगले ही पल सोचा तुमने कोई समाज सुधार का ठेका नहीं ले रखा जब इसकी सहेली को इसकी परवाह नहीं तो तुम क्यूँ अपने हाथ में आये लडू फ़ेंक रहे हो, मैंने सपना को आगे बैठा लिया और साइकिल चला दी सब कुछ सुबह की तरह ही होने लगा लेकिन इस बार सपना मेरे लंड की टक्कर से आगे नहीं बड़ी और पीछे ही सटके बैठे रही या तो उसे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था या उसे मजा आ रहा था, कहना मुस्किल है क्या सही था

थोडी ही देर में सपना का घर आ गया उसका घर आते ही मुझे बिजली का झटका लगा, संजय घर पहुँच चुका था और गेट पर ही खडा था उसने सपना को मेरे साथ आगे साइकिल पर बैठा देख लिया, लेकिन में भी संजय का ही चेला था मेने तुंरत बात संभाली और उसको बोल दिया की मैंने उसे बहुत ढूंडा वो नहीं मिला तो रस्ते में सपना मिल गयी और मैंने उसे लिफ्ट दे दी, मेरी ये बात सुनकर संजय को तो यकीन हो गया लेकिन सपना की हसीं छूट गयी उसे पता था की में उसका वेट उसके स्कूल पर कर रहा था और इस टाइम में झूठ बोल रहा था, लेकिन वो हसंती हुयी अन्दर चली गयी

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02-01-2013, 08:19 AM
Post: #4
RE: थोडा सा हट के एक प्रेम कथा
सपना की हसीं उस दिन मुझे बहुत मीठी सी लगी वो कमेन्ट वाली हसीं नहीं थी, अब तो में ये सोचने लगा की अगली बार कब मोंका मिलेगा..

२ दिन बाद संजय मेरे घर आया और बोला आज आप लोगों का खाना हमारे यहाँ है सपना का बर्थडे है सो कुछ कालोनी के लोगों का खाना घर पर ही है, और उसने मेरे पापा से कोई भी गिफ्ट लेके आने के लिए मना कर दिया क्यूंकि ये सब संजय के पापा को पसंद नहीं था उन्हें तो सपना की जिद की वजह से ये सब करना पड़ रहा था, उसकी कुछ सहेलियों का जन्मदिन ऐसे ही बनता था तो उसने भी इस बार सलेबिरेट करने की जिद की जो उसके मम्मी पापा को माननी पड़ी, में शाम को घर जा रहा था उस दिन बारिस बहुत तेज़ हो रही थी में घर से अब भी ३ किलोमीटर दूर था, रास्ते में साइकिल पंक्चर हो गयी, साइकिल तो मैंने ठीक करा ली लेकिन बारिस बंद होने का वेट करने लगा अगर भीगता हुआ घर जाता तो घर वाले पूछते आज कैसे भीगा क्यूंकि मुझे भीगना पसंद नहीं था मुझे तुंरत झुकाम होता था, और फिर में घर वालों को कैसे बताता की सपना की बर्थडे की वजह से भागा चला आया.. इसलिए में वेट करने लगा लेकिन आज बारिस कुछ जादा ही लम्बी थी खैर लगभग २ घंटे बाद बारिस बंद हुई और में सीधे सपना के घर ही गया में आलरेडी लेट था केक कट चुका था

संजय और शालिनी मेहमानों को डिनर सर्वे कर रहे थे उनको मेरे लेट आने से कोई फर्क नहीं पड़ता था संजय ने बस इतना ही कहा "कहाँ गांड मरा रहा था बे" उसको ये हक़ था आखिर वो मेरा दोस्त था

मैंने सोचा की बर्थडे गर्ल को विश तो कर ही दूं, में सपना के पास गया वो अपनी सहेलियों के बीच बैठी थी मुझे देख कर मेरे पास आई और बोली केक तो ख़तम...

मैंने कहा कोई बात नहीं फिर खा लेंगे, मेरी इस बात पर तुंरत जवाब आया की जन्मदिन रोज़ रोज़ थोड़े ही बनता है जो फिर खा लेंगे फिर हंसने लगी, फिर अचानक मुझ से बोली की मेरा गिफ्ट कहाँ है, उसे पता था को कोई गिफ्ट नहीं है लेकिन फिर भी उसने मेरी गांड में ऊँगली कर दी, मुझे लगा की गलती मेरी है एक तो मैं लेट आया वो भी बिना गिफ्ट के खैर मैंने उसके कान में हलके से कहा की गिफ्ट तो है लेकिन में तुम्हें सबके सामने नहीं दे सकता, वो बोली ऐसा क्या लाये हो जो सबके सामने नहीं दे सकते...

अब सोचने की बारी मेरी थी क्यूंकि गिफ्ट तो मेरे पास था नहीं और इसके इस सवाल का क्या जवाब दूं, किताबें और स्टोरीज पड़ के मुझे इतना तो आईडिया हो ही गया था की लड़कियां बहुत भावुक होती हैं और छोटी सी बात भी उन्हें बहुत फील कर जाती है यही सोच कर मैंने उस से कहा की " देखो गिफ्ट ज्यादा महंगा नहीं हैं तुम्हें पसंद नहीं आया और तुमने अपनी सहेलियों के सामने खोल दिया और उन्होंने मेरा मजाक बना लिया तो मेरी बेइजत्ती हो जायेगी"

ये बात सपना को थोडी सी अजीब लगी और शायद सही भी वो थोडा सहमते हुए बोली .. ठीक है जब तुम्हें मोंका मिले तब दिखा देना, अब वो थोडा उदास सी लगने लगी उसे शायद पहली बार एहसास हो रहा था की वो दूसरो का मजाक बनाती है,

सच मानिये मैंने ये बात उसे आइना दिखाने के लिए नहीं कही थी, में इतना समझदार नहीं था की किसी को समझा सकता लेकिन अनजाने में चलाये तीर ने २ काम कर दिए एक तो सपना को मुझ पर तरस ( सिम्पेथी ) आने लगा, दूसरा उसे उसकी गलती का एहसास हो गया..

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02-01-2013, 08:19 AM
Post: #5
RE: थोडा सा हट के एक प्रेम कथा
थोडी देर बाद सभी मेहमान अपने-अपने घर चले गए, मैं भी अपने घर आ गया, आते वक़्त सपना ने मुझे दोबारा गिफ्ट के लिए नहीं पुछा शायद वो कुछ ज्यादा ही सहम गयी थी,

अगले दिन सुबह मुझे कई काम करने थे, गाँव मैं ताऊ जी की लड़की की शादी थी, मम्मी पापा को वहां जाना था सो उनके पैकिंग चल रही थी शादी ३ दिन बाद थी लेकिन घर की बात थी तो उन्हें पहले जाना पड़ता, मुझे शादी वाले दिन ही पहुंचना था, ईन ३ दिनों के लिए मैं घर पर अकेला था सोच कर ही रोमांचित हो गया था मैं सब काम स्वतंत्रता से कर सकता था, शाम को मम्मी ने कहा की उन्होंने मेरे रात के खाने के लिए संजय की मम्मी से बोल दिया है , दिन मैं कुछ हल्का फुल्का ही खा लूँगा, किसी को ज्यादा परेसान करना सही नहीं वैसे मुझे दुसरे के खाना अच्छा भी नहीं लगता था

अगले दिन सुबह होते ही मम्मी पापा गाँव जा चुके थे, अब मैं घर पर अकेला था और मैं इसका पूरा फायदा उठाना चाहता था मैंने अपने सारे कपडे उतार दिए और एडल्ट मगज़िने पड़ने लगा लंड मेरे हाथ मैं था, इतनी स्वतंत्रता से मैं पहली बार पड़ रहा था मुझे बहुत मजा आ रहा था, तभी डोर बेल बजी .. मैंने जल्दी से मगज़िन गद्दे के नीचे छुपा दी और सिर्फ पजामा पहन लिया लंड तो मेरा तम्बू बना हुआ था ऐसे स्थिति में दरबाजा खोलना मुस्किल था, मैं लंड डाउन होने का वेट करने लगा लेकिन वो डाउन होने का नाम ही नहीं ले रहा था इतने समय मैं जो भी दरबाजे पर था वो शायद घंटी से ही चिपक गया था लगातार बजा रहा था मैंने अन्दर से ही कहा "आ रहा हूँ भाई ज्यादा जल्दी मैं है क्या" मैंने गुस्से मैं दरबाजा खोला तो सामने सपना खड़ी थी स्कूल ड्रेस में, उसने व्हाइट स्कर्ट, व्हाइट शर्ट पहने हुए थे कंधे पर बैग था,

क्या कर रहे थे जो इतनी देर लगाइ, मुझे स्कूल के लिए देर हो रही है, उसकी निगाह मेरे शरीर को घूर रही थी ऊपर मैंने कुछ नहीं पहना हुआ था और नीचे सिर्फ हल्का सा पजामा था जिसमें मेरा लंड अभी पूरी तरह डाउन नहीं हो पाया था उस ने तुंरत निघाहें हटा लीं और बोली मम्मी ने तुम्हारे लिए नास्ता भेजा है,

मैंने उसे अंदर बुलाया, वो बेड पर बैठ गयी और टी.बी. देखने लगी, दोस्तों ये कहानी १३-१४ साल पुरानी है तब केबल टीबी का ज्यादा चलन नहीं था और कलर टीबी भी बहुत कम थे, सौभाग्य से दोनों चीज़ हमारे यहाँ थी, सपना के यहाँ ब्लैक/व्हाइट टीबी था और केबल भी नहीं थी, इसलिए उसे कलर टीबी देखना बहुत अचछा लगता था वो अक्सर हमारे यहाँ आकर टीबी देखती थी, अब भी टीबी मैं खो गयी... मैं सोफे पर बैठ गया तभी मेरा ध्यान गद्दे के नीचे मगज़ीन पर गया जल्दबाजी मै उसका एक कोना बाहर ही रह गया अब मैं उसे सपना के सामने ठीक नहीं कर सकता था वो देख लेती, मैंने सोचा इसकी नज़र वहां नहीं है तो तुम क्यूँ टेंशन ले रहो हो, और ये सोच कर मैंने सपना से कहा तुम बैठो मैं नहा कर आता हूँ फिर नास्ता कर लूँगा उसने हाँ मैं सर हिला दिया और मैं नहाने चला गया

नहाते समय मेरा लंड सपना को सोच को फिर खडा पड़ गया और मुझे मुठी मारनी पड़ी, नहा के मैं सिर्फ टॉवेल लपेट कर आया और सोफे पर बैठ गया, बैठते ही मुझे लगा सोफा गांड के नीचे से खिसक गया, वो मगज़ीन का कोना अब दिखाई नहीं दे रहा था, अब या तो वो सपना के बैग मैं थी या गद्दे के नीचे ही ढंग से छुपा दी गयी थी जो भी हुआ है सपना उसे देख चुकी थी क्यूंकि हम दोनों की अलावा तीसरा कोई नहीं था, और सपना का चेहरा बता रहा था उस ने कुछ ऐसा देख लिया है जो उसे नहीं देखना चाहिए था

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02-01-2013, 08:19 AM
Post: #6
RE: थोडा सा हट के एक प्रेम कथा
मैं बिना कुछ बोले नास्ता करने लगा, इस सब मैं १ घंटा बीत चुका था, सपना अभी भी टीबी मै निगाह गडा कर बैठी थी मैंने कमरे की खामोसी को तोड़ते हुए कहा तुम्हें स्कूल नहीं जाना, वो जैसे नींद से जागी, स्कूल का टाइम निकल चुका था, वो अब सोच मैं पड़ गयी और बोली "मैं लेट हो गयी अब तो गेट भी बंद हो गया होगा" मैंने उस से कहा ठीक है आज छुट्टी मना लो, आराम से यहाँ टीबी देखो मैं भी अकेला हूँ कंपनी मिल जायेगी जब स्कूल की छुट्टी हो जाए तो घर चली जाना उसे मेरा आईडिया पसंद आ गया और अब वो आराम से टीबी देखने लगी

मैं नास्ता करके बेड पर ही लेट गया वो मेरे पैरों की तरफ बैठी थी, मैंने सिर्फ अभी पजामा पहने हुए थे, १/२ घंटा ऐसे ही बीतने के बाद मुझे लगा इस तरह हाथ मैं आया मोका निकलने देना बेबकूफी है कुछ करना चाहिए यही सोचते हुए मैंने सपना से बोला की मेरी कमर से ऊपर थोडा सा दर्द है तुम थोडा दबा दो, उसने बिना किसी प्रॉब्लम के कहा ठीक है और वो दोनों हाथों से मेरे कंधे दबाने लगी नीचे मेरा लंड गद्दे मैं घुसा जा रहा था , थोडी देर ऐसे ही दबाने की बाद बोली कैसा लग रहा है मैंने कहा तुम्हारे हाथो मैं तो जादू है ये सुनकर वो थोडा सा मुस्कराई उसे शायद अपने ऊपर गर्व हो रहा था की वो अच्छी तरह दबा लेती है फिर बोली क्या ऐसा करने से वाकई आराम मिलता है? मैंने कहा-हाँ, लेकिन तुम्हें थोडी सी ट्रेनिंग की जरुरत है , इस पर उसने कहा मुझे कोन सी इसकी दुकान खोलनी है जो ट्रेनिंग लूं

मैंने उसे समझाते हुए कहा अरे !! अगर कुछ अच्छा आ जाए तो क्या गलत है और तुम्हें कोन सा इसके लिए फीस देनी पड़ रही है मैं तुम्हें समझाता हूँ कहाँ कहाँ दबाते हैं, मुझे थोडा बहुत एकुपंचर आता था क्यूंकि मम्मी को इसकी शिकायत रहती थी, मैंने उस से कहा तुम लेटो मैं तुम्हें बताता हूँ , पहले तो वो थोडा हिचक गयी फिर अपने जूते उतार कर बेड पर पीठ के बल लेट गयी उसकी ३२ साइज़ खरबूज जैसे चूचियां पंखे की तरफ तन गयी, उसे ऐसा लेटा देख मेरा लंड फुल खडा हो गया फिर भी मैंने कण्ट्रोल करते हुए कहा की मुझे तुम्हारा पेट नहीं दबाना, कमर पर शिखाना है, ये सुनकर वो थोडा मुस्कराई और बेड पर पलट गयी अब उसकी ३६ साइज़ गांड हवा मैं थी , कमर के बाद इस तरह का उठान था की कमर का सारा मांस फिसल कर गांड पर चढ़ गया है , मैं उसके बगल मैं बैठ गया और उसके कंधे दबाने लगा मेरे कठोर हाथ और शायद एक-दो सही पॉइंट्स की जानकारी ने उसकी आँखें बंद करा दी, उसे बहुत आराम मिल रहा था ये उसके चहरे से पता चल रहा था , बात बनते देख मैंने उससे कहा मुझे हल्का सा तुम्हारे ऊपर आना पड़ेगा जिस से तुम्हें और आराम मिलेगा, उसने हाँ मैं गर्दन हिला दी, मजे ने उसके होठ सिल दिए थे, अब मैं तुंरत उसकी गांड से थोडा नीचे जाँघों पर बैठ गया मैंने अपना पूरा बजन उस पर नहीं डाला था इस स्थिति में लंड का टोपा ठीक उसकी चूत के दरबाजे पर था सिर्फ १ " दूर, उसकी गांड की चोडाई वाकई गजब थी मुझे अपनी टांगों को बहुत खोलना पड़ा, एक मन कर रहा था की इसके कंधे छोड़ इसकी गांड दबा दूं, लेकिन मैं कोई जल्दी नहीं करना चाहता था, मैंने उसकी कमर दबाना जारी रखा उसने अभी भी स्कूल ड्रेस पहनी हुई थी और मैं शर्ट के ऊपर से ही दबा रहा था मैंने कहा "सपना अगर मेरे हाथ सीधे कमर पर जाएँ तो तुम्हें और बडिया लगेगा, वो बोली कमर पर ही तो हैं और कैसे जायेंगे , मैंने कहा नहीं अगर बीच मैं कोई कपडा ना आये तो.. उसने तुंरत ही कहा नहीं मैं ड्रेस नहीं उतरूंगी, मुझे लगा जल्दबाजी करने मैं कहीं ये सुख भी हाथ से ना निकल जाए

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02-01-2013, 08:19 AM
Post: #7
RE: थोडा सा हट के एक प्रेम कथा
मैंने उसे समझाते हुए कहा " मैं तुम्हें ड्रेस उतारने के लिए नहीं कह रहा मैं बस हल्का सा हाथ तुम्हारी शर्ट के अन्दर डाल कर बताता हूँ - इस पर वो बोली ठीक है अब हम फिर उसी पोसिशन मैं आ गए लेकिन मेरे दोनों हाथ इस बार उसकी शर्ट के अन्दर थे और उसकी चिकनी कमर पर फिसल रहे थे रास्ते मैं उसकी ब्रा के स्टेप ही आते थे, मैं कुछ देख तो नहीं पा रह था लेकिन महसूस कर रहा था

५ मिनिट की इस मालिस ने उसकी आँखें दोबारा बंद कर दी मैं अब भी उसकी गांड के थोडा नीचे बैठा था लंड और उसकी चूत के बीच मैं उसकी स्कर्ट और चड्डी दोनों ही थी उसकी स्कर्ट शोर्ट थी, और घेराई मैं फेली हुई अगर मैं ४ या ५ " उसे उठा देता तो उसे पता भी नहीं चलता यही सोच कर मैं थोडा और नीचे खसक गया और हलके से उसकी स्कर्ट उठाई, हालत तो ख़राब होनी ही थी स्कर्ट उठाते ही उसकी काली चड्डी के दर्शन मुझे हुए, उसकी चड्डी वाकई बहुत छोटी थी चूतडों पर बहुत मुस्किल से ही फ़सी हुयी थी ऐसा लग रहा था की चुतड अभी इसे फाड़ देंगे, चूत की जगह पर काफी फूली हुई थी, ऐसा लग रहा था जैसे इसकी चूत सूज गयी हो , हल्का सा सफ़ेद पानी चड्डी मैं से रिस रहा था, जो काली चड्डी पर साफ दिखाई दे रहा था, मैं लगभग १ मिनट तक इसका नज़ारा किया और स्कर्ट का पर्दा गिरा दिया,

मुझे एहसास हो गया था की मालिस ने इसके शरीर को कहाँ कहाँ आराम पहुँचाया है, सपना की ऑंखें अभी भी बंद थी मुझे लगा की कहीं ये सो तो नहीं गयी, मैं ये सोच ही रहा था की अचानक सपना ने अपना चेहरा तकिये मैं गडा दिया और तकिये को कसकर पकड़ किया, उसने अपने चुतड इतने जोर से हिलाए की मैं एक तरफ गिर गया मैं कुछ समझता उस से पहले सपना २ - ३ बार ऐसे हिली जैसे इसे दोरा पड़ गया हो और फिर एक दम शांत जैसे जान ही ना रही हो, मैं कुछ भी करने की हालत मैं नहीं था, उस एक मिनट मैं पता नहीं क्या क्या सोच डाला लगा की अगर इसे कुछ हो गया तो मैं कहाँ ले के जाऊंगा कैसे बताऊंगा, घर वाले क्या कहेंगे ये क्या कर रही थी यहाँ ....

मैं ये सब सोच ही रहा था की सपना ने ऑंखें खोली, उसे होश मैं देख मेरी जान मैं जान आई, मैंने पूछा तुम ठीक तो हो वो कुछ नहीं बोली और उठने लगी उसके उठते ही मेरी नज़र उसकी स्कर्ट पर पड़ी वो अब आगे से पूरी भीग गयी थी, ये सब सपना और मेरे लिए एकदम नया था, ना उसकी समझ मैं कुछ आ रहा था ना मेरे, थोडी देर बाद उसने अपनी चुप्पी तोडी और बोली ये क्या हुआ अब मैं घर कैसे जाउंगी, मैंने थोडा हिम्मत करके कहा कोई बात नहीं तुम ये स्कर्ट मुझे दो मैं इसे धो देता हूँ अभी तुम्हारी स्कूल की छुट्टी मैं टाइम है तब तक ये सूख जायेगी, उस पर कोई दूसरा रास्ता भी नहीं था, मैंने कहा तुम जब तक टॉवेल लपेट लो, वो मेरे सामने स्कर्ट उतारने में थोडा शर्मा रही थी.. में समझ गया ... मैंने कहा ठीक है में बाथरूम में हूँ वहां ले आना और में बाथरूम में वेट करने लगा, थोडी देर में वो अपनी स्कर्ट हाथ में ले आई और मुझे दे कर वापस कमरे में चली गयी


मैंने उसकी स्कर्ट को ज़मीन पर डाला ही था की उसमें से उसकी चड्डी भी निकल आई, असल में धुलाई तो चड्डी की ही होनी थी वो इतनी चिपचिपा रही थी की मेरे हाथ भी चिपकने लगे, एक बार तो मुझे लगा लोंडिया कंधे पे पर बैठ कर कान में मूत रही है , मांगी स्कर्ट थी चड्डी ऐसे थमा गयी जैसे में इसके बाप का नौकर हूँ, फिर मुझे लगा इसमें इसकी क्या गलती सब अनजाने में हो गया उसकी चड्डी अनुमान की मुताबिक ही छोटी थी एक ही मुठी में आ गयी, मैंने पूरे मजे से उसे साफ़ किया और धुप में सुखा दीं और वापस कमरे में आ गया

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02-01-2013, 08:20 AM
Post: #8
RE: थोडा सा हट के एक प्रेम कथा
सपना बेड पर चादर ओडे बैठी थी, में भी उसके पास बेड पर ही बैठ गया, उसने मुझ से धीरे से कहा देखो २ बूँद बेडशीट पर भी हैं मैंने उसकी तरफ देखा और कहा अब इसे भी धो के आऊ क्या, मेरे मुंह से ये सुनकर उसकी हंसी छूट गयी, उसे हँसता देख मुझे भी हंसी आ गयी, टेंशन ख़तम हो चुकी थी ..

अब सपना और मैं एक ही चादर में बैठे थे और टीबी देख रहे थे मुझे अछी तरह पता था की मेरे बगल में नीचे से नंगी लड़की बैठी है, ये सोच कर लंड फिर आकार लेने लगा और चादर को उठाने लगा इस बार सपना ने पूछ ही लिया ये क्या डंडा लगा के घूम रहे हो अजीब सा लगता है, सुबह भी था.. मैंने उसकी बात का तभी जवाब दिया " अरे वाह !! तुम जो कमीज़ के अंदर खरबूज रख कर घूम रही हो वो अजीब नहीं लगते " इस बात पर वो निरुतर हो गयी फिर थोडा सोच के बोली मैंने नहीं रखे अपने आप उग आये हैं और फिर हंसने लगी ( उसकी बात बात पर हंसने की अदा पर ही तो मैं फ़िदा था ) , मैंने भी कहा मेरा भी डंडा अपने आप निकला है मैं नहीं लगाया, उसने दुबारा प्रशन किया मेरे जैसे खरबूज तो और लड़कियों के भी होते हैं लेकिन तुम्हारे जैसे डंडा लिए मैंने किसी लड़के को नहीं देखा, मैं उसकी जिज्ञासा शांत की और कहा ये सब लड़कों पर होता है लेकिन छोटे आकार में.. बड़ा ये तभी होता है जब इसे कुछ करना होता और तभी ये दिखाई देता है. मेरी बात सुनकर वो चुप हो गयी लेकिन उस पर सवालों की कमी नहीं थी फिर पूछने लगी लेकिन इसे क्या काम करना होता है जो बड़ा हो जाता है .....

अनजाने मैं गुरु बन के अपनी चेली को सेक्स का ज्ञान दे रहा था .. उसे पूछने मैं उतना ही मजा आ रहा था जितना मुझे बताने मैं ..

मैंने बात आगे बड़ाई और कहा तुम लड़कियों मैं कुछ ऐसे होल होते हैं, जिनको टाइम टाइम पर बंद करना जरुरी होता है नहीं तो प्रॉब्लम हो जाती है

उसने फिर पूछा ऐसे कोन से होल हैं मुझ मैं तो कोई नहीं है और बंद करना क्यूँ जरुरी है

मैंने कहा बंद ना करने से कई बीमारी लग सकती हैं और ये सभी लड़कियों पर होते हैं, फिर मैं थोडा रुकते हुए बोला देखो तुम्हारा पहला होल .... और मैंने चादर मैं ही हाथ उसकी चूत पर पहुंचा दिया उसने इस हरकत की कल्पना भी नहीं की थी और ना ही तैयार थी नगी चूत पर हाथ पड़ते ही वो उछल गयी, मैं उसकी चूत पर बहुत हलके से ऊँगली लगते हुए कहा ये वो पहला छेद है जहाँ इसे काम करना है , और मैंने तुंरत वहां से ऊँगली हटा ली

हमारी बातें बंद हो गयी और टीबी देखने लगे ५ मिनट बाद सपना ने फिर चुप्पी तोडी और बोली ये कैसे संभव है मैंने हलके से ऊँगली अंदर करने की कोसिस की वो अन्दर ही नहीं जा रही है, और तुम इतने बड़े को अन्दर करने की बात कर रहे हो

मुझे लगा तो था की चादर मैं हलचल हो रही है लेकिन मैं कन्फर्म नहीं था, सपना की बात ने राज़ खोल ही दिया की वो चूत मैं ऊँगली ट्राई कर रही थी

अब प्रक्टिकल से समझाने का टाइम था लेक्चर बहुत हो गया था, मैंने कहा ठीक है तुम लम्बी हो के लेटो मैं तुम्हें समझाता हूँ कैसे जाता है , उसे लगा ये बोर्ड का एक्साम है और समझना बहुत जरुरी है नहीं तो वो इस अजूबे को कभी नहीं समझ पायेगी

मेरे कहते ही वो चादर मैं लम्बी हो गयी मैं अगले पल उसके ऊपर था समझाना जरुरी था... मैंने उसकी टांगें १८० डिग्री पर फैला दी, हम अभी भी चादर मैं थे और मैं नीचे उसकी चूत की झलक भी नहीं देखि थी, मेरा चेहरा ठीक उसके चेहरे के ऊपर, छाती ठीक उसकी चुचिओं के सामने, और लंड का टोपा चूत का दरबाजा खट-खटा चुका था

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02-01-2013, 08:20 AM
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RE: थोडा सा हट के एक प्रेम कथा
मैं सिर्फ उसकी चूत का अपने लंड के छुने से एहसास कर पा रहा था, मुझे ऐसा लगा जैसे किसी गरम फोम से मेरा लंड टकरा रहा है, सपना ने निगाहें मेरी आँखों मैं डाल दी जैसे पूछ रही हो अब क्या करोगे, मैंने एक हाथ नीचे ले जाकर उसकी चूत चेक की मुझे पोल कहाँ गाड़ना है, कुछ क्रियायें ऐसे होती हैं जिन पर ह्यूमन बॉडी कण्ट्रोल नहीं कर पाती जैसे पलकें झपकना.. ठीक वैसे ही सपना के ना चाहते हुए उसकी चूत लंड को आसानी से अन्दर लेने के लिए लुब्रिकेंट छोड़ रही थी, मेरा हाथ ठीक उसकी गीली हुई चूत पर ही पड़ा और मैंने लंड छेद पर टिका दिया, एक गरम सांस लंड ने छोड़ी जिसका एहसास सपना के दिमाग को हुआ, मैंने अपनी सारी मांसपेसिया की तागत इकठा कर लंड तक भेजी और एक जोर दार धक्का लगा दिया, गीली चूत ने तुंरत उसे लपक लिया और सुपाडा अन्दर सरक गया, सपना की चीख निकलना स्वाभाविक था वो इतनी तेज़ चीखी की पूरा कमरा गूँज गया, आँखों से आंसू बहने लगे ...

बात सही थी जहाँ वो अपनी ऊँगली नहीं डाल पा रही थी वहां ५" मोटा और १.५" लम्बा सुपाडा फंसा हुआ था, सपना की आँखें फट गयी, जितना दर्द सपना को हो रहा था उतना ही मुझे, मुझे ऐसा लगा जैसे किसी ने मेरा टोपा काट दिया, मैंने पहली बार सपना के कांपते होठों को चूमा, फिर उन्हें मुहँ मैं भर लिया और ऐसे चूसने लगा जैसे कोई टॉफी मेरे मुंह में हो, इस मरहम का असर सपना पर होने लगा उसके आंसू सूखने लगे, लेकिन उसकी टांगें ऐसे जम गयी जैसे किसी ने बाँध दी हो

लगभग ५ मिनट तक होठों का रस चूसने का बाद मैंने अपनी गर्दन नीचे करके लंड की पोसिशन का जायजा लिया, मैंने पहली बार सपना की चूत देखी वो भी तब जब वो मेरा सुपाडा निगल चुकी थी, मेरा लंड आज और दिनों से ज्यादा मोटा नज़र आ रहा था नसें बुरी तरह फूली हुई थी ऐसा लग रहा था फट जायेंगी इतनी टेंशन लंड को कभी मुठी मारने में नहीं हुई थी, सपना की एक दम गोरी चूत मैं काला लंड ऐसे फंसा हुआ था जैसे काला तगड़ा आदमी किसी मासूम बच्चे को मार रहा हो,

सपना की निगाहें लगातार मुझे ही घूर रही थीं की मैं नीचे क्या देख रहा हूँ, मैंने फिर से चेहरा ऊपर किया और होठ सपना की होठ से लगा दिए, १ मिनट फिर रस चूसने के बाद मैंने कहा नीचे हाथ लगा कर देखो तुम्हारी ऊँगली नहीं जा रही थी लेकिन मेरा डंडा चला गया, सपना ने मुझे ऐसे घूरा जैसे कहना चाहती हो " हाँ चला गया लेकिन मेरी जान निकालने के बाद " उसने अपने एक हाथ को नीचे की तरफ बढाया, और मेरे लंड को पहली बार स्पर्श किया उसका मुलायम हाथ लगते ही लंड और अकड़ने लगा, सपना लंड पर ऐसे उँगलियाँ चला रही थी जैसे नाप रही हो मेरा सिर्फ १.५" लंड ही अन्दर था बाकि ६" बाहर,

लम्बाई का एहसास होते ही सपना ने उसे अपनी हथेली में बंद करने की कोशिश की, उसकी कोशिश अधूरी रह गयी, लंड पूरा उसके हाथ मैं नहीं आ पा रहा था उसने तुंरत अपना हाथ खिंचा और बोली तुमने अन्दर क्या डाला है ये तो पूरा बाहर ही है, उसे एहसास हो चूका था की अगर ये पूरा अन्दर गया तो आज वो घर वापस नहीं जा पायेगी, उसने बड़े धीमे से कहा प्लीज़ अब निकाल लो, फिर किसी दीन देख लेंगे, उसकी इस रेकुएस्ट से मुझे थोडा अजीब लगा, लेकिन मुझे पता था ये सिर्फ उसकी जुबान बोल रही उसका क्या जो उसकी चूत अन्दर पड़े सुपाडे पर लगातार पानी छोड़ रही है जैसे सुपाडे से कह रही हो पानी पियो और आगे बडो...

लंड ने अपनी मित्र चूत की बात मान ली और मुझे अपने लंड की माननी पड़ी, तभी मेरे हाथों ने सन्देश दिमाग को भेजा हमने क्या बुरा किया है जो हमैं किसी काम पर नहीं लगाया.. ये ध्यान आते ही मुझे उसकी चूचियां नज़र आने लगी जो अभी शर्ट और ब्रा मैं कैद थी, सपना की रेकुएस्ट अनसुनी करते हुए मैं उसके शर्ट के बटन खोलता चला गया, शर्ट के पल्ले इधर उधर गिरते ही चूचियां तन कर खड़ी थी, जैसे कहना चाहती हों अब आये हम मैदान मैं...

हांथों को दोनों मम्मे ब्रा से बाहर निकालने मैं 1 मिनट लगा, उसने ब्रा इतनी टाइट बाधी हुई थी, की ब्रा चुचियों को छोड़ने को तैयार नहीं थी, बाहर निकलते ही उन्होंने खुल के सांस ली और फेलना सुरु कर दिया, मैंने दोनों हाथों को एक एक दे दिया मैं जितना ताकत से उन्हें दबा सकता था दबा दिया, इस बात का एहसास सपना को जबरदस्त हुआ और एक उसकी हलकी सी घुटी हुई चीख निकल गई

अब मैंने अपना मुंह उसके निप्पल पर रख दिया और चूसने लगा, सपना अब ये भूल गई थी की निचे लंड उसकी चूत में है अब वो मुझे मम्मे पीते हुए देखने लगी, मैं उसके मम्मे ऐसे पी रहा था जैसे बच्चा दूध पीता है, आनंद ने उसकी ऑंखें फिर बंद कर दी, अचानक उसने एक झटके से अपने मम्मे को मेरे मुंह से बाहर खीच लिया, और मेरी तरफ एक कातिल मुस्कान छोड़ी उसे अब अपने लड़की होने पर घमंड होने लगा, उसे लगने लगा मैं उसका गुलाम बन चूका हूँ, लेकिन मेरी उम्मीद की विपरीत उसने मेरा सर पकड़ के दुसरे मम्मे की तरफ कर दिया,

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02-01-2013, 08:20 AM
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RE: थोडा सा हट के एक प्रेम कथा
मुझे ध्यान आया..... मैं दूध पीने में इतना मस्त हो गया की भूल गया ये पेअर मैं है और दूसरा खाली है, मैंने अब दुसरे को मुंह मैं भर लिया और उसकी नसें निचोड़ने लगा, सपना मस्ती मैं भर चुकी थी और दर्द भूल चुकी थी

यही मोका था नेक्स्ट स्टेप का.. सपना का सारा ध्यान मुझे मम्मे पिलाने में था...मैंने बिना एक सेकंड गवाएँ दुबारा सारी मांसपेसिया की तागत इकठा करी और लंड तक भेजी और एक जोर दार धक्का चूत में लगा दिया, चूत पहले से ही बेतहासा गीली थी, लंड ऐसे सरकता चला गया जैसे केक पर चाकू चलता है, सपना की एक और जोरदार चीख कमरे में फ़ैल गई, लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी मेरा पूरा लंड सपना की चूत में गड चूका था , मैंने चुचियों की चुसाई जारी रखी, मैंने तुंरत सपना की हिम्मत बडाते हुए कहा देखो तुमने पूरा खा लिया, उसे मेरी बात पर विश्वाश नहीं हुआ तुंरत अपना हाथ नीचे ले जा कर चेक किया वहां उसके हाथ मेरे टट्टे ही आये, केला उसकी चूत खा चुकी थी

इस बार सपना की ऑंखें इस आश्चर्य से फटी की ये कैसे पोस्सिबल हुआ, जहाँ ऊँगली को ये चूत जाने नहीं दे रही थी वहाँ ७" लम्बा लंड निगल गई, खैर अब सोचना छोड़ के मजे लेने की बारी थी, चूत लगातार पानी फ़ेंक रही थी, उसकी नसों ने फूलते हुए लंड को चारों तरफ से घेर लिया, जैसे कहना चाहती हों "बेटा अन्दर तो आ गया अब बाहर निकल के दिखा "

बात सही थी मेरा लंड चूत में घुस तो गया लेकिन अब बाहर नहीं आ रहा था, लेकिन भगवान् ने मुझे ये लंड दिया ही ऐसे नसों की पिटाई करने के लिए था, मेंने जिस तागत से लोंडा अन्दर डाला था उसी से बाहर खिंचा, ऐसा लगा... साथ में इसकी चूत की नसें भी बाहर आ जायेंगी, सुपाडे तक बाहर निकालने के बाद फिर वैसा ही धक्का, २-३ ऐसे धक्कों ने सपना की चूत की नसों की अकड़ ढीली कर दी, नसों ने अपने हथियार डाल दिए और लंड के लिए रास्ता छोड़ दिया,

लेकिन इन् ३-४ धक्कों ने सपना का सारा शरीर हिला दिया, वो दूसरी दुनिया में थी, उसे कुछ होश नहीं था उसके साथ क्या हो रहा है, कुछ बोलना तो दूर की बात थी, हमें कुछ बोलना भी नहीं था लड़ाई चूत और लंड की चल रही थी जिसमें मेरा लंड जीत ही रहा था, थोडी ही देर में चूत ढीली पड़ गई, अब लंड पिचकारी की तरह अन्दर बाहर होने लगा चूत में इतना पानी भरा हुआ था की कमरे में फचा फच की आवाज गूंजने लगी, नीचे लंड चूत की पिटाई में लगा हुआ था और ऊपर में उसकी छातियों के नसें चूस चूस कर निचोड़ रहा था, सपना सुख के सागर में गोते लगा रही थी आँखें बंद किये हुए ....

१५ मिनट की घनघोर चुदाई ने सपना को गांड उछालने पर मजबूर कर दिया हम दोनों ही एक एक बार झड़ चुके थे ( में बाथरूम में मुठी मार के आया था सुबह जब नहाने गया था, और सपना की स्कर्ट अब भी सूख रही थी ) इसलिए इस बार टाइम लगा, सपना की चूत कम नहीं थी , उसने मुझे एहसास दिला दिया की चूत मारना किसे कहते हैं , मेरा लंड बुरी तरह छिल चूका था, मैंने अपनी स्पीड और बड़ा दी, हर धक्के पर टट्टे उसकी गांड को चूम लेते थे और इस बार सपना का बाँध टूट गया, मम्म्म्म्म्म्म्म्म्म्मी ......... कहते हुए इतनी जोर से मेरे लंड पर झडी की मुझे लगा किसी ने एक बाल्टी भर कर पानी प्रेसर के साथ मेरे लंड पर फेंका है, उसका इस तरह पानी फेंकना मेरा लंड बर्दास्त नहीं कर पाया, और मैंने एक झटके से उसे चूत से बाहर खिंच लिया, लंड बाहर निकलते ही चूत ने ऐसे पानी बहाया जैसे वाकई बाड़ आ गई हो, में लंड हाथ में लिया और वीर्य के प्रेसर से उसकी चूत धोनी शुरु कर दी, सारा माल उसकी हलकी सी झांटों में फसने लगा और अगले कुछ मिनट में ही सपना के पानी में मिल गया

सपना निढाल पड़ी हुई थी में भी बगल में लेट गया, थोडी देर बाद जैसे सपना नींद से जागी और बोली अब मुझे घर जाना चहिये, मुझ से बोली.. आज हमारे बीच जो कुछ हुआ तुम ये बात किसी को बताना मत, मैंने कहा तुम भी नहीं .... और वो फिर हलके से मुस्करा दी..

लेकिन जैसे ही सपना ने अपने पैर बेड से उतारे और खड़े होने की कोशिश की उसकी टांगों ने जवाब दे दिया वो कण्ट्रोल नहीं कर पाई और धडाम से जमीन पर गिर गई, मैंने तुंरत उसे उठा कर बेड पर लेटा दिया, उसको एक पैन किलर दे के १/२ घंटा सोने के लिए बोला वो गोली खा के सो गई.....

१/२ घंटा बाद जब वो उठी तो थोडा फ्रेश लग रही थी, में नहा चूका था और टीबी देख रहा था, वो मुझे फ्रेश देख कर हंसती हुई बोली कहाँ जा रहे हो तैयार हो कर .... और फिर बाथरूम चली गयी १० मिनट बाद नहा कर स्कूल ड्रेस पहन कर आई उसे देख कर ऐसा लगा जैसे अभी स्कूल जाने के लिए तैयार हुई है, उसके स्कूल की भी छुट्टी हो चुकी थी, में उसे बिदा करने को तेयार था, उसे अपने पास में खीच कर पीछे से उसकी स्कर्ट उठा कर दोनों हाथ गांड पर रख दिए, काली चड्डी ने चूतडों को फिर ढक लिया था, उसने कोई विरोध नहीं किया, सारी चुदाई में मैंने उसकी गांड तो सहलाई ही नहीं थी, पहाडों पर हाथ फिराते ही लंड फिर अकड़ने लगा, जैसे ही मैंने उसकी चड्डी की इलास्टिक खिंच कर नीचे करने की कोसिस की उसने मुझे धक्का दे के बेड पर गिरा दिया, और हंसती हुई बोली दुसरे छेद को फिर किसी दिन बंद करना अपने इस डंडे से, वो समझ चुकी थी अब मेरा निशाना उसका कोन सा छेद है .. और वो दरवाजा खोल के अपने घर की तरफ दौड़ गयी.....

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