जूही - मेरे अनछुए सेक्सुअल अनुभव
मेरा उद्देश्य सिर्फ मेरी जिंदगी के उन पलों का सामने लाना हैं जो लगभग हर लड़की की जिंदगी में आतें हैं पर वो उन्हें छुपा लेती हैं. पर में वो सब आप सभी के साथ बांटना चाहती हूँ, वो भी इसलिए कि जिस से आप लोग एक लड़की कि निजता कि बारें में जानने कि जिन कोशिशों में लगे रहते हैं उसका काफी कुछ सच में सामने ला देती हूँ. यहाँ लिखा सब कुछ एकदम सत्य है और कुछ भी कहीं से जोड़ा या मरोड़ा नहीं गया है...इसलिए ऐसा कुछ न करें जिस से कि मुझे यह लगे कि मेरी यह कोशिश भी बेकार गयी...वैसे भी मुझे नहीं पता कि इस फोरम में कितनी लडकियां मेंबर हैं? पर जब से में मेंबर बनी हूँ, मुझे सभी ने अच्छा सम्मान ही दिया है...और कुछ लोग मेरे फ्रेंड्स भी बने.

चलिए शुरू करते हैं जब से जबकि मेरी योवनावस्था शुरू ही हुयी थी. और मेरा पहला सेक्सुअल अनुभव हुआ, और नेचुरली यह लेस्बियन ही था, क्योंकि अधिकतर लड़कयों के सेक्स अनुभव कि शुरुआत लेस्बियन अनुभवों से ही होती है, वैसे भी अधिकतर लड़कियों कि इतनी हिम्मत भी नहीं होती कि वो लड़के के साथ सेक्स करके अपने अनुभव कि शुरुआत कर सके. जब में १३ साल कि हुयी तभी से में लड़कों कि नजर में आने लगी थी. वजह मेरा लम्बा कद, आकर्षक शारीर और गोरा रंग था शायद. १२ साल कि उम्र में ही में सेक्सुअल रिलेशन के बारें में जान ने लगी थी. और मेरा ज्ञान का भण्डार थी मेरी कसिन बहिन किरण. वो भगवन को बहुत मानती थी. पर उसके बड़े भाई कि शादी जब हुयी तो उसकी भाभी आयी और वो बहुत ही ज्यादा सेक्सी और ज्यादा एक्टिव थी. वो जितनी ज्यादा सेक्सी और सुन्दर थीं उतनी ही करक्टेरलेस भी थी.

उनके शादी से पहले भी लड़कों से रिलेशन थे, और वो अभी उनसे सेक्स कर रही थी. उनकी सेक्सुअल जरूरते शायद एक आदमी से पूरी नहीं हो सकती थी. और इन सेक्सुअल एड्वेंचरों के लिए उन्हें किरण कि मदद कि जरुरत थी जिससे कि मुश्किल के समय में वो उन्हें बचा सके. और मेरी सिस्टर किरण बेचारी फंसी हुयी थी उनके साथ. लता भाभी ने सारा सेक्स ज्ञान उसे दे दिया और वो भी १२ १३ साल कि उम्र में. किरण भी मेरी ही उम्र के बराबर थी और इस तरह कि सेक्सी बातों में भाभी के साथ उसे मजा आने लगा. हम लोग जिस फॅमिली से थे जहाँ काफी साड़ी बंदिशे थी और इस वजह से जब किरण को यह सब पता चला तो वो सोचने लगी कि जैसे कोई खजाना उसके हाथ लग गया हो.

उसकी भाभी ने साड़ी हदें पार करदी और किरण के साथ लेस्बियन सेक्स भी शुरू करदिया.पर किरण मेरी बहुत अच्छी सहेली थी तो वो मुझे सारी बातें जरूर बताती थी. शुरू शुरू में , मैं चुपचाप ही रहती थी, और किरण ही बोलती थी. हम लोग सेक्स, और लड़कों के बारें में बातें करने लगे. वो घर के पास ही रहती थी सो हम लोग डेली ही मिलते थे. और हमारी बातें सेक्स के बारें ज्यादा होने लगी. हम लोग सेक्स करने के बारें में बहुत व्याकुल होते जा रहे थे.

पर उस छोटी से उम्र में न तो हम कोई पॉर्न साईट देख पाते थे और न ही कोई सेक्सुअल जानकारी थी. और न ही हम हस्तमैथुन के बारें में जानते थे. और यह सब हमें चिडचिडा बनता जा रहा था. क्योंकि सेक्सुअल बातें करने के बाद हमारी पूसी गीली हो जाती थीं और उस बारें में कुछ भी नहीं जानते थी. हम नहीं जानते थी कि हम हमारी सेक्सुअल फ्रस्ट्रेशन , टेंशन और देस्प्रशन कैसे निकालें?
और तो और किरण की भाभी न सिर्फ उसे हस्तमैथुन के बारें में बताती थी बल्कि उसे करवाती भी थी. और यही उसके लेस्बियन संबंधों की शुरुआत थी, साथ ही उसके सेक्सुअल फ्रस्ट्रेशन की भी, क्योंकि अब जब भी वो सेक्सुअली उत्तेजित होती थी तो वो ऊँगली से हस्तमैथुन कर लेती थी. और जब वो मेरे से मिली, तो हस्तमैथुन के बारें में उसने मुझे बताया और वो सारी बातें मुझे बताना चाहती थी. उसने ओर्गास्म के बारे में जब बताया तो मुझे सच में कुछ समझ भी न आया. उसने बोला भी की लाओ में तुम्हारी पूसी पर करके दिखा देती हूँ. पर में शर्माने के कारण इतना साहस भी न कर पायी. मेने कभी कपडे तक नहीं बदले थे किसी के सामने , और तो और जब में १० साल की हुयी थी तब मम्मी से भी नहाना बंद कर दिया था और खुद ही नहाती थी. और जहाँ तक किरण का ऑफर था, उसे मेरी जाँघों के बीच नंगी पूसी दिखाने का, बड़ा ही अजीब था मेरे लिए.

पर जब इस सब के बारें में बातिएँ करने लगे तो वो मेरे में इंटरेस्ट भी लेने लगी. वो बहुत उत्तेजित रहती थी और मेरे साथ लेस्बियन वाला अनुभव बांटना चाहती थी. और उसने मुझे इतना राजी कर लिया की मेने उसे मेरे शरीर पर हाथ फेरने की इजाजत दे दी.

यह वो समय था जब हमारे स्तन बदने लगे थे. और हमारी पूसी पर हलके हलके बाल भी आने लगे थे. और क्योंकि हम एक अच्छे परिवार से थे तो खाने पीने की कोई कमी नहीं थी, और अच्छे खाने पीने के कारण शरीर का भी अच्छा विकास हो रहा था.
और इसका सीधा सा मतलब यही था की हमारे स्तन हमारी उम्र की और लड़कियों की तुलना में थोड़े ज्यादा ही थे. और क्योंकि निप्पलस भी अब बाहर की उभरने लगी थी तो हम लोगो ने ब्रा पहननी शुरू कर दी थी. अब में भी किरण की प्रति थोडी आकर्षित होने लगी थी. मैं हर समय यही सब सोचती रहती थी.

जब एक बार किरण एक हफ्ते के लिए शहर से बाहर गयी तो में बेसब्र हो गयी. मेरा मन पढाई में भी नहीं लग रहा था. और फिर एक दिन किरण मेरे घर आयी और पड़ने के बहाने मेरे घर भी रुकने का प्रोग्राम बना लिया. घर नजदीक होने के कारण ऐसी कोई दिक्कत भी नहीं थी...अमूमन हम लोग एक दूसरे के घर में रुकते भी रहते थे. रात को हम लोगो ने अपनी वही बातचीत शुरू की. और जब घर के सभी लोग सो गए, तो हमने अपने कमरे को अन्दर से बंद कर लिया. शुरू में हम थोडी असहजता महसूस कर रहे थे. वो भी नहीं जानती थी की क्या कहना है और मैं भी नहीं की क्या करना है? फिर भी किसी तरह शुरुआत हुयी और जब मेने कहा की मैं वास्तव में जानना चाहती हूँ इस बारे में, तो उसकी भी आँखें फैल गयी.

उसने मुझे ओर्गास्म के बारें में बताया और कहा की यह सबसे अच्छी अनुभूति होती है जोकि उसने अनुभव की. मैं क्योंकि बिलकुल भी नहीं जानती थी इस बारें में तो मेरा दिमाग बिलकुल खाली था ओर्गास्म के बारें में, बल्कि में ओर्गास्म की उस अनुभूति का इमेजिन भी नहीं कर पायी उस समय. मैं तो उस समय बस यह जानना चाहती थी की सेक्सुअल फ्रस्ट्रेशन को कैसे दूर किया जाता है. क्योंकि यह मेरी जिंदगी का हिस्सा बनता जा रहा था क्योंकि जब भी सेक्स के बारें में बात होती या, टीवी पर सेक्सुअल सीन देखती या कुछ बात सुनती तो मेरी पूसी गीली हो जाती थी. और उसमे खून का संचार इतना बाद जाता था कि थोडा सा कडापन महसूस होता था. हाथ लगाने का मन भी करता था पर उससे भी कुछ नहीं होता था. मैं जानती थी कि कुछ चाहिए पर क्या? यह पता नहीं था. इसलिए जब मुझे पता लगा किरण से कि ओर्गास्म पाने के बाद वो सेक्सुअल फ्रस्ट्रेशन से दूर हो गयी तो मैं भी उस बारे में जानने कि लिए इच्छुक थी.

मैंने उसे आगे बदने को कहा....
वो मेरी ओर बड़ी और मेरी आँखों में झाँकने लगी. वो भी नहीं समझ पा रही थी कैसे शुरुआत करे , आखिर वो कोई उसकी भाभी कि तरह तो थी नहीं. और वो भी शर्मा रही थी. उसने सबसे पहले मुझे किस किया तो में शर्माने लगी, वो बोली, "जैसे भाभी करती हैं वैसे ही मैं करुँगी..इसलिए मुझे करने दो...तुम्हे थोडा अटपटा लगेगा. पर विश्वास करो इसके बाद तुम्हे इतना अच्छा लगेगा जितना कि मुझे भाभी के साथ करने के बाद लगा था."

उसने मुझे मेरे कान के नीचे किस किया और मेरे शरीर को अपनी ओर खींच लिया. मैंने भी उसे किस कर दिया.शुरू शुरू में सिर्फ लिप्स ही टच हो रहे थे पर फिर फ्रेंच किस शुरू हो गया, उसने मुझे अपनी बाहों में भर रखा था और हम दोनों कि स्तन एक दूसरे से रगड़ खा रहे थे. मेरे निप्पलस भी कड़े हो गए थे उन्हें छूने कि इच्छा त्रीव हो रही थी. हम दोनों के दिल की धड़कन आसानी से सुनी जा सकती थी.

मैं शर्मा भी रही थी और शर्म से लाल हुयी जा रही थी और किरण निर्भीकता से अपने काम में मस्त थी. मैं शर्माने के कारण बस उसे अपनी बाहों में थाम रखा था और बाकी सब उसे ही करने दे रही थी. उसके हाथ मेरी पीन्थ पर चल रहे थे और मेरी हिप्स तक आ जा रहे थे. उसने अपनी दोनों हथेलियाँ मेरे दोनों हिप्स पर रखी और उन्हें जकड लिया. उसे अपनी बाहों में लेकर मेने अपना मुह उसकी गर्दन और बालों में के बीच छिपा लिया था. हालांकि मैं उसके किसी भी हरकत का विरोध नहीं कर रही थी और मजा भी आ रहा था. यह सब शुरुआत थी और मेरी पूसी गीली होने लगी थी. इसके बाद किरण ने मेरे से मेरी सलवार की गाँठ खोलने के लिए बोला. मैंने शरमाते हुए गाँठ खोल दी. सलवार की गाँठ कहने पर हम फिरसे एक दूसरे को अपनी बाहों में भरने लगे. किरण की हथेलियों की हरकतें पहले जैसी हीं थी मेरे हिप्स पर , बस अंतर यही था की अब वो मेरे नंगे हिप्स पर मेरी सलवार के अन्दर हरकत कर रही थी. मैंने अपने हिप्स को थोडा एडजस्ट करते हुए उसके हाथों को अन्दर आने दिया और बहुत ही गर्माहट थी उस छुहन में.
आप सभी मेरे बारें में पता नहीं क्या सोच रहे होगे, पर में क्या करूँ उस छोटी सी उम्र में यह सब फील करना बड़ा सेक्सी लग रहा था. मैं कोई Slut तो नहीं थी पर मैं क्या करती, उस एहसास के आगे मजबूर होती जा रही थी. मैं सिर्फ १३ साल की थी और एक लड़की के हाथ मेरे हिप्स पर चल रहे थे. थोडी सी सलवार नीचे हुयी तो मेरी गुलाबी चड्डी भी नजर आने लगी. और इस बार मैंने उस से कहा की 'किरण अब तुम पहले मुझे अपनी दिखाओ तब मैं कपडे खोलूंगी'. किरण मुस्कुराई और मेरा हाथ अपने हाथ में लिया और अपने पेट पर रख कर बोली , 'अब इसे ऊपर से नीचे तक चलाओ, मेरे बूब्स से लेकर मेरी पूसी (वैसे वो पूसी को फुद्दी बोलती है ) तक!'.

मैंने उसे किस किया और अपने हाथ उसके स्तनों की ओर बड़ा दिए. वो मेरे से एक साल बड़ी थी और उसके बूब्स भी मेरे से थोड़े से बड़े थे. किरण को शर्म नहीं आ रही थी बल्कि मेरे हाथों ने जब उसके स्तन को छुआ तो उसने बड़े ही मादक अदा से आह की आवाज निकाली. मैंने उसकी कुर्ती के अन्दर कभी बायाँ स्तन दवाती तो कभी दायाँ. और उस से रहा नहीं गया और उसने मुझे नंगी होने को कहा.

शर्म, डर, संकोच सब कुछ दूर हो गया था. जब मैंने अपनी कुर्ती उतारनी शुरू की तो उसकी आँखों में एक चमक दिखाई दे रही थी. मेरी उत्तेजना अब मेरी शरमाहट पर भारी पड़ रही थी और किसी और के सामने नंगी होने में अलग ही मजा लग रहा था. मैं उस पल को जी रही थी जबकि कोई और मेरे गुप्तांगों को देखने जा रही थी. "wow !" किरण ने बोला जैसे ही उसने मेरे स्तनों को देखा. "यार जूही, तेरे तो बड़े हो गए हैं और सही शेप है यार...". उसने थोडी देर तक मेरे स्तनों को दबाया, उन्हें बायें दायें किया , मेरी निप्पलस से खेला. मुझे मेरे स्तनों पर बड़ा गर्व महसूस हुआ जब उसने ऐसा कहा. मुझे पता था की वैसे भी मेरी एज ग्रुप में मेरे सबसे अच्छे स्तन थे. मेरे निप्पलस के चारों ओर का घेरा भी छोटा था और निप्पलस भी कड़े थे. और फिर किरण के हाथों और लिप्स से वो और उत्तेजित हो खड़े से हो गए थे.
थोडी देर मेरे निप्पलस से खेलने के बाद उसने मेरी सलवार उतार दी. मैंने ब्रा तो नहीं पहन रखी थी पर एक चड्डी तो थी ही. मेरे हिप्स और जांघें मेरी गुलाबी पैंटी में फंसी सी नजर आ रही थी. मैंने उसकी ओर मुह करके बैठी थी. जिससे की वो मेरी चिकनी जाँघों को अच्छी तरह से देख पा रही थी. उसने मेरी जाँघों पर हाथ रखा और ऊपर की और तब तक बड़ी जब तक की मेरी पूसी लिप्स, जोकि मेरी पैंटी के अन्दर थे, से एक इंच की दूरी न रही. उसके बाद वो झुकी और जीभ से मेरी झांघों को चाटने सा लगी.. मैं बता नहीं सकती उस समय मेरी क्या फीलिंग्स थी..बस लगा की आज मर ही जाउंगी.

वो सनसनाहट बिलकुल अलग थी और पहली पहली बार हुयी थी. मेरी टांगें कमजोर लग रही थी. जिसने भी पहली बार सेक्स किया होगा वो अच्छी तरह समझ रहा होगा की मैं कौनसी फीलिंग की बात कर रही हूँ! किसी लड़के या लड़की से पहली बार अपने आंतरिक अंगों पर छुहन का एहसास.

किरण ने मुझे खड़े होकर पींठ उसकी ओर करके खड़े होने को कहा. वो पलंग पर बैठी थी. और उसके सामने मेरे हिप्स पैंटी के साथ थे. उसने मेरी चड्डी उतारनी शुरू की और घुटनों से नीचे लाकर छोड़ दी जिसे मैंने अपनी टांगों से निकाल कर एक और दाल दिया, और वापस किरण की और घूम गयी, बिलकुल एक मोडल की तरह. और इस तरह एक १३ साल की कुंवारी लड़की की पूसी उसके सामने थी. जोकि हलके हलके बालों से ढकी थी. वो अपना कण्ट्रोल खो बैठी और उसने अपना चेहरा मेरी पूसी पर पूरी ताकत से सटा दिया, मुझे लग रहा था की उसे इस सब में बड़ा मजा आ रहा है , क्योंकि उसने वहां काफी समय लगाया. कभी अपनी नाक से मेरे पूसी लिप्स को रगडा, कभी मेरी पूसी पर ही किस कर दिया. मेरी टांगें अपने आप खुलने लगी थी क्योंकि मन कर रहा था कि उसकी जीभ और अन्दर चोट मारे और मेरे पूसी होल को छू ले. मुझे मजा आने लगा था पर उसी समय किरण रुक गयी. मैंने उसे चालू रहने को कहा तो वो बोली, 'यार, पहले मेरा पहला ओर्गास्म हो जाने दे, मैं बहुत उत्तेजित हो गयी हूँ, मुझे अभी ओर्गास्म चाहिए. पहले एक दूसरे को ओर्गास्म देते हैं फिर आगे करेंगे." मैंने भी हामी भर दी और वो भी नंगी होने लगी. उसको नंगी होते हुए भी देखने में मजा आ रहा था, और जैसे ही उसकी शर्ट उतरी उसके स्तन बाहर कि और निकल पड़े, जिन्हें देखते हुए मेरी पूसी और गीली हो गयी. जल्दी ही वो पूरी नंगी थी पर कमाल कि बात थी कि उसकी पूसी पर एक भी बाल नहीं था, वो बिलकुल चिकनी थी. उसने मुझे पलंग पर लेटने के लिए कहा.

मैं पूरी तरह से नंगी, एकदम खुली हुयी पलंग पर लेट गयी. किरण ने मेरे पाँव से शुरुआत की, और उसके हाथ धीरे धीरे ऊपर की और बदने लगे. मेरी साँसे तेज तेज चलने लगी और गले से आह आह की आवाजे अपने आप आने लगी. वो जानती थी की मैं इस समय उसके हाथ की कठपुतली बन चुकी थी. वो मेरे को इतने दिनों से मनाने में लगी थी और आज वो दिन था. वो अभी १४ साल की ही थी पर इतने अच्छे तरीके से कर रही थी की साफ़ लग रहा था की वो भाभी के साथ कई बार कर चुकी है. उसकी उंगलियाँ मेरी बालों वाली पूसी के लिप्स से थोडी दूर ही रह गयी थीं. मेरे से रहा नहीं गया और में बोल ही पड़ी, "किरण...प्लीज़ मेरी पूसी को छुओ न..में अब नहीं रुक सकती."

वो हल्का सा मुस्कुराई और मेने उसकी ठुड्डी पकड़ कर उसके चेहरे हो मेरी पूसी से बिलकुल सटा डाला. और उसकी जीभ ने मेरी क्लिटोरिस को चाटना शुरू कर दिया. मेरे हाथ उसके बालों में थे और उसके सर को बार बार अपनी पूसी पर कसके दवा रही थी.
मैंने अपने चेहरे पर तकिया रख लिया सो मेरी आवाजे कमरे से बाहर न जाएँ. पर मुह से निकलने वाली आवाज ही कमरे में नहीं गूँज रही थी बल्कि किरण की जीभ और मेरी पूसी की गीलेपन की आवाज भी आ रही थी..जब जब उसकी जीभ मेरी पूसी के लिप्स को टटोलती थी एक आवाज कमरे में गूंज जाती थी. उसने मेरी क्लिटोरिस को भी सक किया और अपनी एक ऊँगली मेरी योनी की ओर डालनी चाही, पर मैंने उसे रोका और बोला, "किरण, प्लीज़ अन्दर नहीं डालना...!"

वो बोली, "चिंता मत करो, में ऐसे करुँगी की तुम्हारी हाईमन नहीं टूटेगी. तुम्हे अच्छा लगेगा की अन्दर करते हुए भी तुम्हे अच्छा लगेगा." उसने मेरी क्लिटोरिस को किस किया और अपनी ऊँगली धीरे से मेरी योनी के छेद के किनारे किनारे लगाई और अन्दर बाहर करने लगी, और यह अनुभव बहुत ही आनंद से भरा था , शरीर का एक एक अंग उन्माद में आ चूका था. मेरा शरीर कांपने सा लगा और मेरा पहला ओर्गास्म स्टार्ट होने लगा था. में बुरी तरह से इधर उधर हो रही थी और मेरा मन एक पानी से भरे तालाब में डूबा जा रहा था. वो प्मेरी पूसी को चाट रही थी और ऊँगली से भी कर रही थी, मेरा ओर्गास्म नजदीक ही था. में एहसास कर रही थी की मेरी पूसी से कुछ तरल सा निकल रहा हे और मेरी साँसे रुक रुक कर आणि शुरू हो गयी थीं. और जब ओर्गास्म हुआ तो मेरी बॉडी अकड़ सी गयी और बहुत जोर के साथ एक प्रेस्सर सा रिलीज़ हुआ मेरी थ्रोब्बिंग पूसी से और मेरा पूसी जूस बहने लगा. मुझे लगा जैसे मेरी सुसु निकल गयी हो. यह बिलकुल नया था. पहले कभी अनुभव नहीं किया था. में पहले कभी यह नहीं जानती थी पर तब ओर्गास्म के बारे में जान गयी थी.

वो मुझे जब तक चाट टी रही जब तक की मेरी कंपकंपाहट ख़तम नहीं हुयी. वो उठी और मेरी ओर मुस्कुराकर बोली, "कैसा लगा जूही? चलो अब मेरी बारी...वैसे भी मेरी तुम्हारी तरह बालों वाली नहीं है". वो एक मिनट भी बर्बाद नहीं करना चाहती थी. मैंने उसकी पूसी चाटनी शुरू करदी जोकि चिकनी भी थी और गीली भी थी. जैसे जैसे उसने मेरी पूसी से किया था वो वो में भी कर रही थी, मैंने अपनी जीभ उसकी पूसी में डाल दी और उसकी पूसी काफी गीली हो चुकी थी क्योंकि वो काफी देर से इन्तजार भी कर रही थी. इसलिए उसे ओर्गास्म पर पहुँचने में ज्यादा समय नहीं लगा. मैंने अपनी tounge-fucking जारी रखी जब तक की वो ओर्गास्म पर नहीं पहुंची. उसका ओर्गास्म और भी ज्यादा पोवेर्फुल था क्योंकि उसे इस बात का पूरा पूरा अनुभव था की कब ओर्गास्म रिलीज़ करना है. और जब उसका क्लाइमेक्स हुआ तो मैंने एक शक्तिशाली ओर्गास्म होते हुए देखा, 'ओह किरण...में सोच भी नहीं सकती की यह सब इतना मजा देता है." मैंने उसे कहा.

उस रात सोने से पहले हमने दो बार फिर से यह किया. और यह मेरी जिंदगी का पहला सेक्स अनुभव था जो हमेश याद रहेगा. और इसी वजह से एक एक बात मुझे अच्छी तरह याद थी...
उस दिन किरण के साथ जो कुछ भी किया , उससे मैंने एक लड़की की जिंदगी के उस छिपे हुए पहलु को जान लिया था और अब जब भी कभी सेक्सुअल फ्रस्ट्रेशन होती तो मैं हस्तमैथुन कर लेती थी. तीन - चार महीने तक हम लोग साथ मिल कर इस तरह से अपने इस नए प्रयोग को अंजाम देते रहे. इससे आगे नहीं बड़े. पर अब हम एक दुसरे के प्रति और खुल गए थे.

अब बात करती उन दिनों की जब मैं हस्तमैथुन नियमित करती थी, पर सिर्फ उत्पन्न हुयी उत्तेजना शांत करने के लिए. अभी तक मैंने कोई पेनिस नहीं देखा था (मेरा मतलब मेरी उम्र के लड़कों का) पर अंदाज था की छोटे बच्चों के पेनिस से थोडा बड़ा ही होगा. किरण बताती थी की उसके भैया का पेनिस काफी बड़ा है, तो मैंने पुछा की तुझे कैसे पता? तो उसने बताया की उसकी लता भाभी में बताया बातों बातों में. अब मन मैं पेनिस को लेकर कई सवाल उठने लगे थे. और यह सवाल हल हुआ लगभग एक साल बाद, जब हम दोनों अपने स्कूल के एक फंक्शन की तयारी कर रहे थे. मैं रिहर्सल में किरण की हेल्प कर रही थी और हम लोग एक ड्रामा प्रेसेंट करने वाले थे. मुझे बहुत जोर से टॉयलेट लगी, हमारे स्कूल का टॉयलेट खेल के मैंदान की दूसरी और था और में वहां तक नहीं जाना चाह रही थी और किरण भी व्यस्त थी और वो भी नहीं जा रही थी साथ में. तभी किरण ने कृष्ण को मेरे साथ वहां तक जाने और वापस लाने को कहा और मैं उसके साथ चली गयी. वहां पहुंची तो पता चला की सारे टोइलेट्स भरे हुए थे. मुझसे रुका नहीं जा रहा था तो कृष्ण ने सुझाव दिया की मैं किसी खाली क्लास रूम में टॉयलेट कर सकती हूँ. मुझे आईडिया अच्छा लगा. हम तुंरत एक खाली क्लास रूम की और चले. और मैं क्लास रूम में अन्दर गयी और दरवाजा फेरते हुए बोली, 'मैं अभी आती हूँ, देखना कोई आये न..!'

वो बाहर ही रुक गया और में अन्दर एक कोने में आ कर अपने पायजामे की गाँठ खोलने लगी. मेरा टॉयलेट का प्रेस्सर बढता ही जा रहा था और घबराहट में मेरे से नारे की गाँठ भी नहीं खुल पा रही थी और जैसे ही नारे की गाँठ खुली मेने पायजामा नीचे किया और पैंटी नीचे घुटनों तक की और बैठने से पहले ही टॉयलेट करना चालू कर दिया. धार मेरी टांगों के बीच से होती हुयी फर्श पर गिरने लगी और कमरे में एक हलकी सी Sshhhhhhh..... की आवाज आने लगी, अभी तीन चार सेकेंड ही हुए थे की अचानक कृष्ण अन्दर आया और चिल्लाया ,'जल्दी जूही, पाठक मैडम आ रही हैं इस तरफ!'
मैं फर्श पर टॉयलेट करते हुए उसे गुस्से से देखती हुयी बोली, 'ये क्या कृष्ण ? तुम अन्दर क्यों आये...मैं टॉयलेट कर रही हूँ.' वो बोला,'मैं क्या करता ? बाहर रहता तो मैडम पूछती की यहाँ क्या कर रहे हो? तो मैं क्या जवाब देता ?' वो वास्तव मैं सही कह रहा था. मैं इस तरह बैठी थी की मेरी पीन्थ उसकी तरफ थी, मैंने काफी कोशिश की उससे अपने हिप्स छिपाने की पर वो मुझे शुशु करते देख चूका था. उसने दरवाजा अन्दर से बंद कर दिया था. मेने टॉयलेट कर लिया था और अब मैं यही सोच रही थी इसके सामने खड़े होकर पायजामा और पैंटी कैसे पहनू? पर मैंने हिम्मत की और कड़ी हुयी और जैसे ही खड़ी होकर अपनी पैंटी चडानी चाही तो मुझे कुछ पानी सा गिरने की आवाज आयी..तो मुड़कर देखा तो कृष्ण भी शुशु कर रहा था. पर जो देखा उसे देख कर मेरे हाथ पैंटी चडाना भूल गए. कृष्ण मेरे पीछे खड़े होकर एक और टॉयलेट कर रहा था. उसने अपने पेनिस को अपने हाथ में ले रखा था और उस में से शुशु निकल कर फर्श पर गिर रही थी. oh my god..पहली बार देखा था ऐसा....तो एक शोक सा लगा था, मेरी पैंटी मेरे घुटनों में थी और पयाजामी उससे भी नीचे.. सिर्फ कुर्ती थी जिसने मेरी पूसी को और मेरी जाँघों को ढाका हुआ था.

वो मेरे को देखता हुआ बोला, 'सॉरी जूही..मुझे भी लगी थी....तुम्हे बुरा तो नहीं लगा...प्लीज मुझे माफ़ कर देना...'
पर में तो एकटक उसके लिंग (पेनिस) को देखे जा रही थी. वो १५ साल का था उस समय और उसका पेनिस करीब ५ इंच का हो चूका था जिसे उसने अपनी पेंट की जिप में से बाहर निकाल रखा था. मैंने सिर्फ उस से यही पुछा उस समय, 'यह क्या इतना...ब.. बड़ा होता है..?'

और वो हस्ते हुए बोला,'वैसे तो छोटा ही रहता है, पर तुम्हे अभी जैसे देखा तो यह बड़ा हो गया!' मुझे यह बात उस समय बिलकुल समझ नहीं आयी. वो टॉयलेट कर चूका था और अपने लिंग को धीरे धीरे मल रहा था. मेरी पूसी भी गीली होने का एहसास देने लगी और तभी उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपने लिंग पर रख दिया. मेरे पूरे बदन में जैसे बिजली का करेंट लग गया. मेने उसके लिंग को पकडा और दबाया भी. उसका भी बुरा हाल हो गया. मेने वो चीज पहली बार हाथ में पकड़ी थी सो में उसे ऊपर नीचे आगे पीछे करने लगी और उसने मुझे अपने पास किया और अपने हाथ मेरे हिप्स पर रख दिए जो की अभी भी नंगे थे. उसने कुर्ती ऊपर की और मेरे हिप्स , मेरी जाँघों और आखिर में मेरी गीली हो चुकी पूसी पर पहुँच गया. हम एक दुसरे से कुछ भी नहीं बोल रहे थे. बस वो मेरी पूसी लिप्स को मसल रहा था, रगड़ रहा था, और में उसके लिंग को पकड़ कर जोर जोर से हिला रही थी...न जाने क्यों मुझे ऐसा लग रहा था की अभी उसका लिंग और बढता जा रहा है...वो एकदम पत्थर की तरह कठोर हो गया था...और मोटा भी...मेरे पूरा ध्यान उसी पर था...तभी उसकी उँगलियों ने मेरी क्लिटोरिस पर अपना कमाल दिखाना शुरू कर दिया, वो उसे बुरी तरह रगड़ रहा था और मेरी पूसी के लिप्स की दरार पर अपनी ऊँगली फिराता हुआ मेरी योनी के ऊपर से निकालता. उसके हर बार ऐसा करने पर मेरी योनी संकुचन ले रही थी और योवन रस बहे जा रहा था. मुझे ओर्गास्म की फीलिंग हुयी पर एक नए अंदाज मैं , आज एक लड़के ने ओर्गास्म दिया था. उसकी इन हरकतों से मुझे पता नहीं क्या हो गया , मेने उसके लिंग को और जोरों से हिलाना शुरू कर दिया और.....

एक राज और खुला, ........उसके लिंग ने एक जोरदार झटका लिया और एक सफ़ेद धार उसके लिंग से निकल कर सीधे मेरे हाथ में आ लगी...मैं जब तक कुछ समझ पाती तब तक.....दूसरी......तीसरी.....चौथी ....धार निकल गयी...और उसका मुह फटा हुआ था...उसका हाथ मेरी पूसी से हटा और उसने मेरा हाथ अपने लिंग से हटा दिया...

मेरी तो समझ में नहीं आया की यह हुआ क्या...और यह सफ़ेद सफ़ेद चिपचिपा क्या है? वो बस इतना बोला, 'जूही, ओह्ह तुमने यह क्या किया , में झड़ गया...!' मेने अपने कपडे ठीक किये ओर उसने भी, और ५ मिनट बाद हम बाहर आ गए. रास्ते में हम चुपचाप थे, उसने बस यही कहा की किसी को मत बताना की क्या हुआ था...
उस दिन किरण को पूरा शक हो गया था की मेरे ओर कृष्ण के बीच में कुछ तो हुआ है..उसने अपनी पूछताछ जारी रखी ओर आखिर वो ही जीती, मुझे उसे सब कुछ बताना पड़ा. ओर जब बात आयी उस सफ़ेद से द्रव्य की जो उसके लिंग से निकला था तो उसने बताया की उसे वीर्य कहते हैं ओर लिंग को योनी में डाला जाता है ओर फिर वीर्य अन्दर निकल जाता है तो बाद में बच्चे होते हैं...

में आश्चर्यकित थी...उसने बताया की उसने भैया ओर भाभी को सेक्स करते हुए देखा है...! बस उसने मेरी ज्ञान की प्यास ओर बड़ा दी. तब वो बोली, जब मौका मिला तो वो मुझे भी देखने के लिए बुला लेगी.

करीब ढेड साल बाद वो मौका आया..... मैं करीब १६ साल की हो गयी थी ओर मेरा योवन पहले से भी ज्यादा निखर गया था. किरण के भैया मर्चेंट नेवी में थे ओर एक साल के बाद लौटे थे. किरण को पूरा विश्वास था की अब उनकी सेक्स लाइफ फिर से चल पड़ेगी. सो उसने एक दिन फिर से मुझे अपने घर बुला लिया. उसका ओर उसके भैया का कमरा अगल बगल में था. बीच में एक छोटी से संध थी जहाँ से दीवार का प्लास्टर उखड गया था ओर वहां किरण ने छेद कर रखे थे. जिसमे से वो समय समय पर उनके कमरे में झांकती आयी थी.

हम लोग किरण के कमरे में पढ़ रहे थे (या पढने का नाटक कर रहे थे), रात को करीब १० बजे उनके कमरे के दरवाजे बंद हो गए तो हम समझ गए की वो लोग कमरे में आ चुके हैं. हम लोग छेदों के रास्ते उनके कमरे में झाँकने लगे, मेरे स्तन ओर उनके निप्पलस पहले से ही उतेजना में थे. रवि (किरण का भाई) ने लता (भाभी) को किस किया , दोनों खड़े हुए थे ओर एक दुसरे को बाहों में भर रखा था. भाभी ने पता नहीं क्या इशारा किया रवि को, रवि ने उसे गोद में उठाया ओर पलंग पर लिटा दिया. मुह पर चुम्बन करते हुए रवि के हाथ लता के स्तनों पर चलने लगे. ओर लता के हाथ रवि भैया की जाँघों के बीच उनके लिंग को टटोलने लगे. ओर हमारे देखते देखते दोनों ने अपने सारे कपडे उतार डाले. लता नंगी होकर बड़ी सेक्सी लग रही थी. वो वास्तव मैं बहुत कामुक लग रही थी . उसके गोल गोल स्तन हम दोनों से तो बहुत बड़े थे ओर भैया के हाथो में पूरे भी नहीं आ रहे थे. उनके नितम्ब भी चौडे थे. जांघें भी चिकनी ओर सुडोल थी. उनकी पूसी पर बाल भी थे ओर भैया की उंगलियाँ उनको सुलझाने में लगी थी.

सबसे ज्यादा ताज्जुब जब हुआ जब किरण के भाई हमारी वाली दीवार की ओर थोडा मुदे तो मेने एक पुरुष का पूर्ण उत्तेजित लिंग देखा. करीब ७ इंच लम्बा ओर ३ इंच गोलाई वाला...एकदम खडा हुआ... मेरी पूसी तर हो गयी थी ओर किरण के हाथ मेरे हिप्स पर चल रहे थे ओर में अपने निप्पलस को दबा रही थी.


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