जवानी का जलवा
रीटा कान्वेंट स्कूल की अति आधुनिक विचारों वाली सैक्सी छात्रा थी। रीटा अमेरीकन माँ और भारतीय बाप की इकलौती, खूबसूरत, चिकनी दोगली औलाद थी। गोल मासूम चेहरे पर रेशमी बाल, खूब उभरी हुई कश्मीरी सेबों सी लाल लाल गालें, मोटी मोटी गीली नशीली और बिल्ली सी हल्की भूरी बिल्लौरी आँखें, रस भरे लाल उचके हुऐ मोटे होंट जैसे लॉलीपोप को चूस्सा मारने को लालयित हों।

स्केटिंग रीटा की मनपसंद गेम थी। इससे रीटा का बदन भरपूर सुडौल और कड़ियल हो गया था। इस छोटी सी उमर में ही रीटा का गोरा चिट्टा तन्दरूस्त बदन हद से ज्यादा गदरा गया था। मलाई सी त्वचा, मक्खन में सिन्दूर मिला रंग, लम्बी पतली गर्दन, खड़े खड़े तराशे चुच्चे, पतली कमर, पिचका पेट, हीरे सी चमकती खूब गहरी नाभि, दायें बायें फैले कूल्हे, गोल गोल उभरे भारी चूतड़ और लम्बी सुडौल मरमरी टांगें। कुल मिला कर रीटा ताज़ी ताज़ी जवानी के भार से लदी फदी टना टन और पटाका लौंडिया थी।

रीटा की तूफानी और कातिल जवानी की खूबसूरती का कोई हिसाब किताब नहीं था। हसीन रीटा के हुस्न और कयामत जवानी ने स्कूल और मुहल्ले में गद़र मचा रखा था। हर एक जवान रीटा पर लाईन मारता था। पर रीटा ने जगह जगह पर अपनी शराफत के झन्डे गाड़ रखे थे। जिधर से एक बार निकल जाती लड़के पप्पू पकड़ कर हाय हाय कर उठते थे।

मैग्ना फोक्स, पामेला एम्डरसन, कैटरीना कैफ, लिज़ा रे और ऐश्वर्या राय की जवानी तो रीटा की झाँट की धूल के बराबर भी नहीं थी, वो बात अलग है कि 18 साल की रीटा की नादान कच्ची चूत पर रोंये का नामो निशान भी नहीं था। अभी तक नादान और अंगूठा चूसने वाली रीटा टैडीबियरों से ही खेलती रही थी। अभी तक बेचारी रीटा की नादान चूत मूतने के ही काम आ रही थी।

कुछ दिन पहले ही नई नई जवान हुई रीटा अपनी नई सहेली मोनिका से खूब घुलमिल गई। मोनिका जी भर के हसीन और दिलफेंक छोकरी थी। मोनिका बहुत शरारती थी और कभी भी स्कर्ट के नीचे कच्छी नहीं पहनती थी। मोनिका हमेशा अपनी चूत पर हल्का सा रूज़, लिपस्टिक और लिपग्लॉस का मेककप करके चूत पर चार चाँद लगाये रखती थी। मोनिका ने अपनी चूत को मक्खन और मलाई की मालिश कर के और भी हसीन और कातिल बना लिया था।

मोनिका स्कूल में क्लास, लाईबरेरी, स्कूल बस और मुहल्ले में अपनी नंगी चूत का हुस्न दिखा दिखा कर लड़कों को पागल बनाने और पटाने में उस्ताद थी। दिन में न जाने कितनी बार शरारती मोनिका अपने जूतों के फ़ीते बांधती और अलग अलग पोज़ बना बना कर लड़कों को अपनी नन्ही चूत से लिशकारे मार मार कर दीवाना करती रहती थी। लड़के गली के ठरकी कुत्तों जैसे मोनिका के आगे पीछे घूमते रहते थे। मोनिका की कटी पतंग सी जवानी को लूटने के लिये न जाने कितने लण्ड मोनिका के चारो तरफ मंडराते रहते थे।

एक दिन अकेले में मोनिका ने रीटा को घर बुला कर जब ब्लयू फ़िल्म दिखाई तो बेचारी नन्ही रीटा का तो दिमाग ही घूम गया। रीटा के लिये यह सब कुछ एकदम नया और बहुत ही मजेदार था। मोनिका ने अपने पसंदीदा दृश्य रीटा को रीवाईन्ड कर कर के दिखाये तो रीटा ने अपना सिर पकड़ कर सोचा- तौबा तौबा, ये लड़कियाँ कितनी गुन्डी गुन्डी बातें करती हैं, और ये मर्द कितनी बुरी तरह से सुन्दर सुन्दर लड़कियों को चोदा मारते हैं। ये बेशरम छोकरियाँ इत्ती बुरी तरह से मस्त होकर अपनी चूत और गाँड मरवाती हैं।कितने स्टाइल से परी सी विलायती छोकरियाँ लड़कों के केले से लम्बे लम्बे लण्डों को चुसड़-चुसड़ कर के चुस्सा मारती हैं और पलक झपकते लण्डों को अपनी गोरी-गोरी चूत और गाड में आसानी से सटक लेती हैं।

तब मोनिका ने बताया कि वह चंगे चंगे तगड़े लन्डों को अपनी टांगों के नीचे से निकाल कर उन्हें धूल चटा चुकी थी। इसलिये रीटा की चूत के मुकाबले में चुदक्कड़ मोनिका की चूत फूल सी खिली हुई सी मालूम पड़ती थी। मोनिका की चूत पर दिलकश छल्ली से सुनहरे कोमल और छितराये से झांट थे। मोनिका ने बताया की उसे अकंल लोगों और अपने से छोटे लड़कों के साथ छुप छुप कर चौदम-चुदाई का खेल खेलने में बहुत मजा आता है। कमीनी मोनिका हर महीने नये आशिक से चूत मरवाती थी। मोनिका ने बताया कि अब तो वह दस ईंच से कम लण्ड वाले को घास भी नहीं डालती।

फिर ब्लयू फ़िल्म देखने के बाद मोनिका ने रीटा से उलटी सीधी बेहूदी हरकतें शुरू कर दीं। शुरू शुरू में रीटा को मोनिका की गुन्डी हरकत पर बहुत गुस्सा आया, पर बाद में जब शातिर मोनिका ने रीटा की टांगों को चौड़ा कर जबरदस्ती रीटा की चूत को आम की गुठली की तरह चूसा तो रीटा मोमबत्ती सी पिघलती चली गई। मोनिका अपनी सांप सी लम्बी लपलपाती जीभ से रीटा की चूत को चाटने और चोदने लगी। कभी कभी मोनिका अपना मुँह टेढा कर रीटा की रसीली फांक दांतों में दबा कर जोर जोर से चूस कर रीटा की ना नाऽऽ करवा देती थी।

मोनिका के लाल लाल नेलपालिश से रंगे हुऐ नाखून रीटा के गोरे गदराये हुऐ चूतड़ों में धंसे हुए बड़े मोहक लग रहे थे। नाखूनों की तीखी चुभन भी रीटा को अजीब सा मजा दे रही थी।

अब रीटा का इंकार इकरार में बदल गया। तब रीटा के हाथ अपने आप मोनिका की खोपड़ी पर कस गये और अब तो रीटा का दिल कर रहा था कि वह मोनिका को पूरा का पूरा अन्दर सटक ले। रीटा को लगा जैसे मोनिका का मुँह वैक्यूम पम्प बन गया हो।

जब मोनिका दांतों से रीटा की चूत नौचने लगी तो रीटा मजे से पागल हो उठी और बेशरमी से अपनी टांगों को 180 डिगरी पर फ़ैला दिया। बेहया मोनिका के दांतों की कचोटों ने तो रीटा को जन्नत में पहुँचा दिया।

अन्त में ठरक से बदहवास और पगलाई हुई रीटा मोनिका को पलंग पर पटक कर उसके चेहरे को उछल उछल कर अन्धाधुन्ध अपनी मस्त चूत से पीटने लगी। रेशम सी मुलायम और गुदाज़ चूत की मार से एक बार तो मोनिका जैसी हिंसक चुदक्कड़ लड़की की भी सिट्टीपिटी गुम हो गई। धक्कों से, झटकों से रीटा के रेशमी बाल हवा में उड़ उड़ जाते थे और चुच्चे ज़ंगली जानवरों की तरह ऊपर-नीचे, दायें बायें उछल जाते।

मोनिका का सुन्दर चेहरा रीटा के जवानी के रस से तरबतर हो गया। कुँवारी रीटा की दबी दबी आनन्द भरी सुरीली चीखें, कराहटें और सिसकारियाँ सुन मोनिका और भी पागल हो गई।

चुदाई कला में निपुण़, वहशी मोनिका ने जंगली बिल्ली को काबू करने के लिये जवाबी हमले में रीटा की गाँड में अपनी थूक से सनी उंगली घुसेड़ कर गोल-गोल घुमाने लगी और चूत के दाने को होठों तले दबा कर जीभ से उस पर चुम्मा करने लगी तो रीटा का बैंड ही बज गया।

रीटा की चीखों और तेज़ी से मोनिका समझ गई कि बस अब लौंडिया खल्लास ही होने वाली है। फिर तो रीटा की बदन कमान की तरह अकड़ गया, आँखें ऊपर की ओर लुढ़क गई और कई छपाकों के साथ रीटा की नई नवेली चूत भरभरा कर झटकों के साथ हुच्च हुच्च कर पानी छोड़ने लगी। चूदास मस्ती से भाव-विभोर हुई रीटा की चूत से रह रह कर आनन्द का करंट निकल कर सारे शरीर में धमाकों के साथ फैल रहा था।

उधर मोनिका रीटा की चूत से कतरा कतरा जूस कचकचा कर पीने की नाकाम कोशिश कर रही थी पर रीटा की चूत तो जैसे हमेशा हमेशा के लिये बाल्टियाँ भर भर कर छपाक छपाक पानी फैंके जा रही थी। दे रेले पे रेला, दे रेले पे रेला।

रीटा की चूत की पिचकारियों ने मोनिका के बालों और बिस्तर की चादर को एकदम भिगो दिया। चुदी हुई कुतिया की तरह हांफती, कांपती हुई और करहाती सी निठाल हो रीटा मोनिका के ऊपर लुढ़क गई।

मोनिका ने तो अभी खेल चालू किया था। मोनिका ने जबरदस्ती तितली सी फड़फड़ाती रीटा के चूतड़ों को टेबल टेनिस के बैट से ताबड़तोड़ पीटा तो रीटा भी हिंसक चुदाई में विश्वास रखने लग पड़ी थी। पटाक-तड़ाक, पटाक-तड़ाक की चूतड़ों पर बैट टकराने की ऊँची आवाज़ और गाँड पर मीठी मीठी जलन ने तो रीटा को पागल कर दिया। फिर तो मस्ती में आकर रीटा ने अपनी जालिम गोरी-गोरी गाँड को हवा में ओर भी ऊपर उचका दिया।

मोनिका गालियाँ देती हुई रीटा के मलाई से चूतड़ों को पीट पीट कर गुलाबी से लाल और लाल से सुर्ख कर दिये तो रीटा को थोड़ी तसल्ली मिली।

फिर छीनाल मोनिका ने रीटा की चूत और गाँड को एक बार फिर से कोल्ड क्रीम चुपड़ कर छः ईंच के बैंगन से जबरन चोद दिया तो रीटा को दिन में तारे नज़र आ गये।

रीटा ने शरमाते और मुस्कुराते हुए मोनिका को थैन्क यू कहा और चूतड़ मटकाती और गुनगुनाती हुई घर को चल दी- "दिल का पंछी बोले कू कूह कूऽऽऽ कू कूह कूऽऽऽ"
दो दिन तक बैंगन से चुदी हुई रीटा की चूत और गाँड में सुरसुराहट होती रही थी। टेबल टेनिस के बैट से ताबड़तोड़ पिटे हुए चूतड़ों में मीठी मीठी जलन भी भरपूर मजा दे रही थी। ब्ल्यू फ़िल्म देख कर बैंगन की चुदाई से और मोनिका की बातों से रीटा को चूत और लण्ड का मज़ेदार खेल समझ आ गया था। मोनिका के साथ रह कर रीटा भी खूब गालियाँ देना भी सीख गई थी। अब तो रीटा मोनिका की छत्रछाया में अपनी जवानी को दोनों हाथों से लुटाने को आतुर हो उठी। रह रह कर उस नन्ही नवयौवना के सुकोमल अंगों में तनाव व कसाव आ जाता और कोरी फुद्दी किसी फड़फड़ाते लण्ड को गपकने के लिये कुलबुला उठती थी।
फिर रीटा कभी कभी पढ़ने के बहाने अपने पड़ोसी राजू से टशन मारने और ठरक भौरने चली जाया करती थी। कई बार अकेले में आपस में मज़ाक और छेड़छाड़ करते धींगामुश्ती और लिपटा चिपटी में राजू कच्ची कली के घस्से मार कर ऊपर ऊपर से ठरक पूरी कर लेता था। रीटा को भी अपने अंग राजू के जिस्म से रगड़ कर बहुत सकून और आनन्द मिलता था। रीटा के जाने के बाद ठरकी राजू आँखें बंद किये सैक्सी रीटा के बारे सोच सोच कर घण्टों मुठ मारता रहता था।
अकसर राजू रीटा से जानबूझ कर धींगामुश्ती में हार जाता था। हारने को बाद जब रीटा राजू के ऊपर होती तो घोड़ा-घोड़ा खेल खलने से नहीं चूकती थी। राजू को पीठ के बल चित कर राजू की पैंट में फंसे हुऐ पप्पू को जब अपनी चूत से पीटती और रगड़ती तो राजू शदाई हो जाता था। राजू के धक्कों से रीटा के सन्तरे पागलों की तरह उछल उछल पड़ते थे। रीटा का चेहरा अन्तर्वासना से तमतमा उठता था। राजू इस पोज का फायदा उठा कर रीटा की गदराई जांघों पर हाथ फ़ेर देता था। कभी कभी रीटा ठरक में खुद ही राजू के हाथों को खींच कर अपनी चिकनी संगमरी रानों पर रख देती थी। इस सूखी चुदाई से कई बार तो राजू का पैंट में ही छूट जाता था।
बहुतेरी बार रगड़म रगड़ाई और ठरक के मजे से रीटा की भी आँखें मुंद सी जाती थी और सिसकारियाँ भी निकल जाती थी।
कभी कभी कुश्ती कुश्ती खेलते राजू भी रीटा के गुदाज बदन को बिस्तर पर दबोचे लुढ़कियाँ लगा कर घस्से मार लेता था। कभी कभी रीटा राजू से डाक्टर-डाक्टर, टिकलिंग-टिकलिंग और तलाशी-तलाशी जैसे सैक्सी खेल खेलती थी। टीकलिंग करते करते राजू रीटा के चूतड़ों और जांघों की चिकनाहट और गदराहट का मजा लेने से नहीं चूकता था। जब राजू के हाथ रीटा की चूत के पास पहुँचते तो सुरसुराहट से रीटा की लीची सी लाल चूत के रौंगटे खड़े हो जाते और वह लिसलिसा उठती।
फिर एक दिन रीटा राजू के कमरे में पढ़ाई करने के बाद सू-सूऽऽ करने अटेच्ड बाथरूम में घुसी। रीटा अपनी स्कर्ट ऊपर उठा कच्छी को सुडौल चूतड़ों से नीचे खींचा और इण्डियन स्टाईल टायलट पर घुटने मोड़ कर बैठते ही रीटा की चाँद सी उजली चूत और गाँड घूम कर सामने आकर लिशकारे मारने लगी। ऐसा लगा जैसे छोटी सी मछली मुँह खोल गिल्लौरी पान खा रही हो।
फिर सन्नाटे में रीटा की फुद्दी ने बड़ी जोर की फ़िच्च शीऽऽऽऽऽऽ की आवाज से पेशाब का जबरदस्त और जोरदार शर्ला छोड़ा। अनचुदी नन्ही सी नादान चूत के रस भरे होंट आपस में बिल्कुल चिपके हुऐ थे। चिपकी फाँकों और बेहद तंग सुराख के कारण रीटा की चूत का शिशकाराऽऽऽ भी हद से ज्यादा ऊँचा और सुरीला था। कल कल करती पतली मूत की धार चुकन्दर सी लाल चूत के मुँह से निकल कर टायलट में दम तोड़ रही थी। बिना झाटों की मूतती चूत बहुत ही प्यारी और मनमोहक लग रही थी।
आखिर छबीली रीटा की रसीली चूत ने छोटे छोटे पाँच छः झझाकों के साथ मूतना बंद कर, टप टप हीरे सी जगमगाती बूंदे टपकाने लगी। पेशाब से गीली चूत अब लिश-लिश कर शीशे सी चमकने लगी। ऐसा लगा की खिले हुए गुलाब पर शबनम की बूंदें !
रीटा भी झुक अपनी सुन्दर चूत को निहारा और एक ठंडी झुरझुरी लेकर रीटा ने अपनी पेशाब से लबालब चूत को दोबारा गुलाबी रंग पोल्का बिन्दियों वाली कच्छी में छुपा लिया और स्कर्ट नीचे गिरा दी। मूत से डबडबाई हुई चूत ने कच्छी को फटाक से गीला कर के पारभासक बना दिया।
जब रीटा टायलट से वापिस बाहर आई तो राजू को कमरे में न पाकर ढूंढती हुई बगल वाले कमरे में जाकर देखा तो ठिठक गई। राजू टायलट के दरवाजे में अब भी आँख लगाये टायलट के अंन्दर देख रहा था और जीन्स के ऊपर से अपने लन्ड को जोर जोर से रगड़ और मसल रहा था।
यह देख कर रीटा की ऊपर की सांस ऊपर और नीचे की नीचे रह गई- साला ! मां का लौड़ा ! लड़की चौद ! चूतीया मेरी चूत देख रहा है? और वो भी मूतते हुए?
शर्म और गुस्से से लाल, पैर पटकती राजू को बिना बताये घर वापिस आ गई।
गुस्से में रोते रोते जब रीटा ने मोनिका को यह सब बताया तो मोनिका की बांछें खिल गई। मोनिका ने एक हाथ की अुंगली और अंगूठे से मोरी बना और दूसरे हाथ की उंगली मोरी के अंदर-बाहर करती हुई बोली- ऐ भौंसड़ी की ! शरमा नही़ं मौके का फायदा उठा। लौहा गर्म है, हथौड़ा मार दे। आजकल तो बहनें अपने सगे भाई को भी नहीं छोड़ती और सारे भाई बहनचौद होते हैं। फिर कभी न कभी तो चूत फटती ही है।
मोनिका ने रीटा को राजू से अपनी फ़ुद्दी मरवाने के लिये उकसा दिया।
उस दिन मोनिका कुछ ज्यादा ही मस्त थी। मोनिका ने रीटा को नंगा करके उसकी चूत को फ़ुट्टे से पीटा तो रीटा ठरक के मजे और पीड़ा से रो ही दी। रीटा के गोरे चूतड़ों रानो और चूत पर लाल लाल लकीरें पड़ गई और जब फिर मोनिका ने जलती हुई मोमबत्ती से गर्म गर्म मोम रीटा के चूतड़ों पर टपकाया तो रीटा मजे से बिलबिला कर कसमसा उठी।
अब ठरक के पागल रीटा कुछ भी करवाने के लिये राजी थी। मोनिका ने रीटा की चूत में उंगली करते करते रीटा के कड़े निप्पल पर कपड़े सुखाने बाली चुटकियाँ लगा दी, तो रीटा की खुशी के मारे सुरीली किलकारियाँ निकल गई।
टायलट की घटना ने रीटा को उस माँ के लौड़े राजू की बेईमान नीयत का पता चल गया था। अब राजू की हरकत सोच कर रीटा के दिल में लड्डू फूटने लगे और चूत में चींटियाँ सी रेंगने लगी। वह समझ गई कि राजू असल में महा ठरकी और नम्बर वन चोदू है। बुलबुल अपनी फुद्दी का पटाका बजवा कर भौसड़ा बनवाने को आतुर हो उठी। मोनिका ने बताया था कि लण्ड की पिटाई ही फुद्दी से चूत, चूत से भोंसड़ी और भौंसड़ी से भौसड़ा बनता है।
इस सबके बाद रीटा राजू को भईया तो कहती थी, पर दिल ही दिल में बहनचोद की नजर से देखने लगी थी। कई बार रीटा ने राजू को मज़ाक मज़ाक में द्वी-अर्थी बातें और उलटे सीधे इशारे किये, पर राजू रीटा को मासूम और स्कूल की बच्ची सोच कर और डर के मारे रीटा की हरकतों को नज़र-अंदाज कर देता था और ऊपर ही ऊपर से ठरक पूरा करता रहा।
मौका पाकर रीटा राजू से गलत-गलत सवाल पूछती, तो राजू के पसीने छूट जाते, जैसे-
लड़के खड़े होकर पिशाब क्यूँ करते हैं?
क्या लड़कियाँ लड़कों से बलात्कार नहीं कर सकती?
लड़के अपने दुधू क्यों नहीं छुपाते?
सुहागरात में लड़का लड़की क्या करते हैं?
ब्लयू फ़िल्म क्या होती है?
सैक्सी का क्या मतलब है?
क्या मैं सैक्सी हूँ?
रीटा के उलटे-सीधे सवालों पर राजू बगलें झांकने लगता और रीटा को डाँट कर चुप करवा देता।
उस दिन घर पर रीटा के इलावा कोई भी नहीं था, मम्मी-डैडी शहर से बाहर गए हुए थे। जैसे तैसे रीटा ने अपनी मम्मी को पटा कर राजू से कार चलाना सीखना शुरू कर दिया था।

रीटा बाथटब नहा कर पानी में आग लगाने में मग्न थी। मल-मल कर नहाती रीटा के दोनों बावले चुच्चे गुलाबी गुब्बारों की तरह पानी के ऊपर तैर रहे थे। राजू के बारे सोचते ही ठरक के मारे रीटा ने अपनी चूत में किंग साईज साबुन की टिकिया गपक ली। नौजवान राजू हैंडसम और स्मार्ट लड़का था। राजू का लम्बा कद, चौड़ा चकला सीना और मांसपेशियों से भरपूर बदन याद कर रीटा पानी में पनिया गई। तीर सी तीखे शॉवर की तेज धार चूत पर पड़ने से रीटा की चूत और भी गुदगुदा गई। बदन में तनाव व कसाव बढ़ने से जवानी की दुखन और टीस भी बढ़ गई।

आज ताजी़ ताजी नहाई रीटा ने राजू भईया को पटाने की कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती थी। शरारती रीटा ने अपनी चार साल पुरानी स्कूल ड्रेस की काली शॉर्ट स्कर्ट और सफ़ेद शर्ट फंसा कर पैरों में ऊंची ऐड़ी के सैंडल पहन लिए।

रीटा ने अपनी मस्त जानलेवा कामुक जवानी को शीशे में निहारते हुए पन्जों के बल उचक कर गोरी-गोरी बाहें ऊपर उठा शीशे को तड़का देने वाली अंगड़ाई तोड़ी तो चटाक चटाक की आवाज से रीटा की तंग टैरालीन की शर्ट के टिच्च बटन खुलते चले गये।

उफ़्फ़ ! क्या नजारा था ! रीटा की जवान ठोस गोलाइयाँ बगावत पर उतर आई और दोनों शरारती कुंवारे कबूतर शर्ट से दाएं-बाएं बाहर झांक कर गुटर-गूं गुटर-गूं करने लगे। चुच्चों ने रीटा की शर्ट को चौड़ा कर 'वी' गले को 'यू' बना दिया था।

चूचों के श्यमल शिखर ऐसा लगते थे जैसे संगमरमर के चबूतरों पर कचनार की कच्ची गुलाबी कली चिपकी हो।

ठरकी रीटा ने अपने बगावत पे उतर आये चूचों को बाहर खींच कर उसे बेरहमी से मसलने लगी। चूचे मस्ती में चीं चीं कर चिंघाड़ उठे।

हाय ! माँ कित्ता मजा आ रहा है ! रीटा ने अपनी गुलाबी-गुलाबी छोटी छोटी नीम सी नीमोलियों से निप्पलों को अपनी थूक से सनी उंगली और अंगूठे में घुमाने से कमसिन बदन झनझना उठा और चूत पिनपिना उठी।

मोनिका ने बताया था कि चूत और चुच्चों का चोली दामन का साथ होता है।

रीटा की सैक्सी सुडौल कैबरे डांसरों जैसी लम्बी व चिकनी टांगों ने तो हाय हाय कर रखी थी। हाई हील से रीटा की गोरी गुदाज कदली जांघें और सुडौल पिंडलियाँ और भी उभर आई और जैसे "नमश्कार ! आइए और चोद डालिये !" का आमन्त्रण देती लगती थी।

गदराहट से मांसल घुटनों पर मादक बल पड़े हुए थे, बेहद पतली और पिचकी हुई कमर के नीचे मस्त गोल गोल चूतड़ और चूतड़ों में दबी फंसी कुंवारी गाण्ड में चींटियाँ सी रेंग रहीं थी। बेचारी नाम मात्र की नन्ही स्कर्ट रीटा की उफनती व उबलती शोला जवानी को रोकने में नाकाम थी।


अपनी स्कूल स्कर्ट ऊपर उठा कर सुर्ख लाल नाईलोन की कच्छी में अपने कसमसाते यौवन को निहारते ही रीटा की आँखों में लाल डोरे खिंच गये और गाल तमतमा उठे। पूरा बदन पप्पी फैट ! तौबा तौबा ! क्या हुस्न था, क्या शवाब था उस लौंडिया का, बिल्कुल ताजा ताजा खुली सोडे की बोतल के समान। अपने ज्वालामुखी से सुलगते और फट पड़ने को तैयार यौवन को देखते हुऐ अपने निचले होंट के कोने को दाँतों में दबा कर स्वयं को आँख मार दी और फिर अपनी ही बेशर्मी पर स्वयं ही लज्जा गई।

लीर सी नाम-मात्र कसी कच्छी रीटा की रोम-विहीन मलाई सी गोरी गदराई फुद्दी और गुदाज चूतड़ों में धंसी हुई थी और चलते समय रीटा को बुरी तरह गुदगुदा देती थी।

एकदम शीशे सी चिकनी और नादान चूत की गुलाबी फांकें कच्छी से बाहर झांक रही थी और चूत एकदम से पच्च-पच्च गीली थी।

ठरक के मारे रीटा की जवान फ़ुद्दी छोटी पाव रोटी की तरह फूल गई, पनीयाई हुई चूत का चीरा झिलमिला उठा और रीटा का लशलश करता बदमाश किशमिश सा दाना हौले हौले अकड़ता चला गया। अब रीटा का भगनासा किसी छोटे शरारती बच्चे की लुल्ली के समान चूत की बालकोनी से बाहर झांकने लगा।

अनजाने में ही रीटा की फूल सी गोरी गोरी उंगलियाँ अपनी शैतान नन्गी चूत से उलझ गई। गुस्से में बिफरी गीली चूत पिच्च पिच्च करके पानी छोड़ने लगी। दाने को छूते ही रीटा की चूत में फुलझड़ियाँ सी चल पड़ी और गाण्ड गुदगुदाने लगी। रीटा अपनी टांगों को चौड़ा किये, चूत को गिटार जैसे बजा़ने लगी।

रीटा ने अपनी मरमरी टांगों को भींच कर चूत को शाँत करने की नाकाम कोशिश की, पर अब पानी सर के ऊपर से निकल चुका था। रीटा अब बिल्कुल वनीला सॉफ़्टी सी पिंघल चुकी थी और उसकी हालत खराब होती जा रही थी।

आखिर तैश में आकर रीटा ने अपनी स्कूल स्कर्ट बिल्कुल ऊपर उठा कच्छी को घुटनों तक खींच कर अपनी नन्ही सी चूत में उंगली पिरो दी। रीटा ने उंगली 'प्चक' की गीली आवाजें करती सुराख मेंजड़ तक अंदर घुस गई। रीटा की चूत की दीवारें रीटा की उंगली पर बुरी तरह से कस गई और उंगली को चूसने लगी।

रीटा बुदबुदा उठी- आह मम्मी ! सीऽऽऽ ! साली तू मुझे बहुत सताती है ऽऽऽऽ ! चूत की फांकें दायें बायें फ़ैल गई। इस हालत में रीटा की नाजुक चूत किसी गधे के बच्चे का लण्ड का कचूमर निकाल कर उसका गरूर तोड़ सकती थी। आज तो रीटा किसी भी पहलवान के लौड़े को अपनी चूत की नींबू नीचौड़नी में निचौड़ कर लौड़े का रस्सा बना सकती थी।

हौले हौले रीटा उंगली सुराख के अन्दर-बाहर कर फिच फ़िच की आवाज़ से अपने आप ही अपनी चूत चोदने लगी। शायद चूत भी 'माँ चोद' और 'बहन चोद' की गालियाँ निकालने लगी थी।

मोनिका ठीक कहती थी- अगर उंगली से चूत मारने में ईत्ता मज़ा आता है, तो सच्ची-मुच्ची का गर्म और मोटा लण्ड तो दिन में तारे दिखा देगा।

यह सोच कर वह जोर जोर से अपनी चूत फैंटने लगी। चूत ने अब मस्त मोरनी की माफ़िक अपनी मुलायम पंखुड़ियाँ फैला दीं। लुत्फ़ से रीटा की चूत के दोनों पत्ते कंपकंपा रहे थे। पिटाई से गोरी चूत गुलाबी से लाल हो चली थी।

रीटा ने अपनी ठोस गोलाइयों को बेरहमी से मसल और रगड़ कर लाल कर लिया। गीली चूत की फचर-पचर, रीटा की मधुर ईस्सऽऽऽऽऽ ईस्सऽऽऽ सिसकारियाँ और बहकी बहकी बेतरतीब साँसें कमरे के वातावरण को रंगीन बनाने लगी। प्यासी रीटा का मादक यौवन, वासना के समुन्दर में हिचकोले खाने लगा।

उत्तेजना के मारे रीटा की आँखें ऊपर को लुढ़क गई और पेट अंदर को पिचक गया। बगावत पर उतर आऐ चुच्चे उठक-बैठक लगाने लगे। हर एक झटके पर रीटा चूच्चे ऐसे थरथराते जैसे उनमें पारा भरा हो। अपने ही चुच्चों को फूलते पिचकते देख कर रीटा की काम पीपासा दावानल सी भड़क उठी। एक हाथ से अपना चुच्चे को ऊपर उठा और मुँह झुका कर होंटों में लेकर चुमला दिया।

बीच बीच में रूक रूक कर रीटा अपनी कीचड़ हुई चूत में से उंगलियाँ निकाल कर चूत का हल्का नमकीन पाईन-एपल जूस किसी भूखी बिल्ली की तरह चुसड़-चुसड़ की आवाज़ से चाट लेती थी। जुकाम लगने के कारण रीटा की जगमगाती चूत पानी छोड़ कर, अपनी पड़ोसन गाण्ड को तरबतर कर रही थी। जब रीटा उंगलियाँ उसकी नन्ही चूत के अंदर जाती तो चूत की कसावट की वजह से पानी की पिचकारियाँ सी निकल पड़ती। वाह, क्या कयामत नज़ारा था।

"हायऽऽऽ पता नहीं कब चुदेगी यह निगौडी मां की लौड़ी मेरी चूत !" बुदबुदा उठी रीटा- काश, आज कोई मादरचोद मेरी कमरतोड़ चुदाई कर दे और मेरी मखमल सी रेशमी गाण्ड फाड़ कर मेरी चकाचक जवानी के कस-बल निकाल दे। कोई मतवाला अपना मस्त फनफनाता हुआ लण्ड दोनों ट्टटों समेत मेरी अनचुदी चूत में पेल कर फाड़ डाले और भौंसडा बना दे। मुझे चौपाया बना कर मेरी पौनी-टेल को पकड़ कर सड़क छाप कामुक कुतिया की तरह सड़क के चौराहे पर चोद दे। मेरी न न करने के बावाजूद भी मुझे पकड़ कर पीट पीट कर बेरहमी से गाण्ड के चीथड़े उड़ा दे और चूत की चिन्दी चिन्दी कर दे, मेरा पोर-पोर चटका दे और मेरे कोमल बदन को रोडरोलर की तरह रौंद कर रख दे।

काश मेरे रसभरे होंठों में किसी बहनचोद का मोटा फौलादी लन हो गले तक सटक के, आँखों में आँखे डाल कर चुसड़ चुसड़ कर मैं उसके लण्ड की झड़न के साथ, चूस कर ट्टटे भी पी जाऊँ। लौड़े पर दंदियाँ मार मार कर लण्ड की ऐसी की तैसी कर दूँ। पर कोई आशिक मिले तो सही।

रीटा को अब एक मूसल सा लण्ड चाहिए, जो रीटा की सुलगती जवानी की ईंट से ईंट बजा दे और अपनी जवानी के झन्डे गाड़ के रख दे।

तभी दरवाजे की घण्टी बजते ही रीटा के बदन में सिरहन दौड़ गई, चूत फड़फड़ा और गाण्ड गुदगुदा उठी। जरूर राजू कार चलाना सिखाने आया होगा, चूत मरवाने को बेताब रीटा के दिमाग में सारी योजना तैयार थी।

रीटा ने झटपट से अपनी कच्छी को घुटनों से कमर पर खींच लिया और छोटी सी स्कूल स्कर्ट नीचे कर और चूचों को शर्ट के वापिस अंदर ठोस कर छः में से चार बटन जैसे तैसे बंद कर दिये। जल्दी से चूत की फांकों को लैक्मे की सोलह नम्बर की लिपस्टिक से पोत लिआ। फिर कुछ सोच कर शरारती रीटा ने जाते जाते नेलपालिश की शीशी सोफे के आगे पड़े हुए मेज के नीचे फ़ेंक दी।

पिछले कुछ दिनों में रीटा मजाक करने में राजू से काफी खुल गई थी दरवाजा खोलते ही राजू को देखते, हरामज़ादी लौड़ै की भूखी रीटा की आँखों में चमक आ गई और बांछे खिल उठी।

राजू रीटा की पोशाक को देखते ही पहले तो सकपका गया। ताजी ताजी नहाई रीटा के गीले गीले बालों के बीच अति मासूम चेहरा। रीटा की तीन चौथाई गोल गोल गोलाइयाँ तंग शर्ट के खुले गले से बाहर उबल पड़ रही थी और राजू की तरफ तनी हुई थी। मिज़ाइलों से खड़े हुए निप्पल शर्ट को चीरफाड़ कर बाहर आने को बेताब लग रहे थे। काली स्कर्ट से बाहर झांकती नंगी संगमरमरी गोरी चिट्टी गदराई आपस में चिपकी रानें, खूबसूरत गुदाज पैरों में हाई हील। हाथ-पैरों पर लाल लाल नेलपालिश, प्यारे से नाक में नथ, कानों में सफ़ेद मैटल के टाप्स,पैरों में पाजेब और कलाइयों में सफ़ेद मैटल के कंगन।

बिजली गिराती मस्ताई हुई रीटा टेढ़ी दिलकश मुस्कान के साथ चहकती हुई सुरीली आवाज में बोली- हैल्लौ भईया ! हाऊ आर यू?

रीटा ने राजू का हाथ पकड़ कर अंदर खींच लिया।

जैसे ही राजू अंदर घुसने लगा, शरारती रीटा ने अपनी अधनंगी व अकड़ी हुई छातियाँ राजू से भिड़ाती हुई बोली- आऊचऽऽऽ, आई एम सारी भईया।

इतने में ही राजू के लण्ड ने कच्छे की मां चोद के रख दी।

फिर शरारती रीटा ने घूम कर और उचक कर सिटकनी लगाने की असफल कोशिश करती बोली- भईया प्लीज़ हैल्प मी, मुझे थोड़ा ऊपर उठाआ नाऽऽऽ ! मुझे ऊपर वाली सिटकनी लगानी है।

राजू अब थोडा सम्भल चुका था और झट से मौके का फायदा उठाते हुऐ रीटा को उठाते हुए उस की कमर में हाथ डाल कर अपने लण्ड से रीटा की प्यारी की गाण्ड को गुदगुदा दिया। जब रीटा को नीचे उतारा तो राजू ने रीटा के दो सूखे घस्से मार दिये। राजू की सख्ती महसूस कर बदमाश रीटा के होंटो पर छुपी छुपी मुस्कूराहट आ गई।

राजू रीटा के नंगपने को देख कर मजाक में फुसफुसा कर बोला- बेबी यह क्या? कहीं तुम मॉडलिंग वाडलिंग करने लगी हो?

घर के लोग रीटा को प्यार से बेबी कहा करते थे।

रीटा बहुत ही मासूमियत से मुँह फुला अपने चुच्चों को उचकाती हुई बोली- ओह नो भईया, मैं तो अपने पुराने कपड़े ट्राई कर रही थी। पर भईया देखो ना ! ये कपड़े ईत्ते टाईट और छोटे हो गये हैं !

राजू रीटा की कमर सहला कर और चूतड़ को मसल कर, चूचों को देख कर अथर्पूण स्वर में बोला- बेबी कपड़े छोटे नहीं हुए, तुम्हारे ये बड़े हो गये हैं।

"धत्त भईया, मैं बहुत मारूँगी !" रीटा ने झेंपते हुए बनावटी गुस्सा करते हुए राजू का हाथ झटक दिया।

"बट भईया आई लाईक दि स्टफ वैरी मच !" गुन्ड़ी रीटा शर्ट के कपड़े की तरफ इशारा कर अपने चुच्चे हवा में राजू की तरफ उछालती बोली- भईया, फील करके देखो, बहुत ही मजेदार और साफ्ट साफ्ट है।

"देखूँ तो !" यह कह कर राजू ने रीटा के शर्ट के कपड़े को फील करके उसके गिरेबान में हाथ डाल कर चुच्चा टटोल सा दिया और मुस्कूरा कर बोला- सचमुच बहुत साफ्ट साफ्ट है।

रीटा किलकारी मार कर छिटक कर पीछे हट कर बोली- आऊचऽऽऽ ! ऊईऽऽ ! गुदगुदी मत करो नाऽऽऽऽ, हटो भईया आप तो बहुत ही बेशरम हो !

राजू रीटा की हर बात के पीछे नाऽऽऽ लगाने की अदा पर फिदा था।

"भईया बस पाँच मिनट रूको, मैं नेलपालिश लगा लूँ, फिर कार चलाने चलतें हैं !" यह कह कर रीटा अपने सिल्की बालों को अदा से पीछे झटकती हुई घूमी और चूतड़ों को जोर जोर से दायें बायें मटकाती चल दी।

रीटा की इठलाती बल खाती भरी भरी मटकती गाण्ड देख कर राजू को लगा के उसका लौड़ा पानी छोड़ देगा। ऐसा लग रहा था जैसे बड़े-बड़े पानी से भरे गुब्बारे थरथरा रहे हों।

हाई हील के कारण रीटा की कुछ ज्यादा ही उचकी हुई बुण्ड बहुत ही मस्त लग रही थी।

राजू को सोफे पर बैठा कर नेलपालिश की शीशी ढूंढती हुई बोली- कहाँ मर गई मेरी नेलपालिश की शीशी? मंमऽऽऽ वो रही !

यह कह कर रीटा सहारा लेकर झुकने के बहाने लापरवाही से राजू के अकड़े लण्ड को पकड़ लिया और बिना घुटने मोड़े ही नेलपालिश की शीशी उठाने को झुक गई।

पीछे से काली स्कर्ट रीटा की लम्बी टांगों से ऊपर उठती चली गई और लाल कच्छी में फंसे संगमरमरी सफेद चूतड़ राजू के सीने पर बिजली से गिरे।

बेरहम बेहया रीटा ने अपनी गाण्ड और भी पीछे को उचका दी तो चिकने चूतड़ों के बीच से भिंची भिंची चूत भी नुमाया हो आई। साथ ही झुकने से रीटा के चुच्चे कुछ पलों के लिये निप्पलों समेत शर्ट से बाहर आकर राजू को जीभ दिखा कर छका गये।

रीटा ने राजू के अकड़े लण्ड को जोर से दबा कर छोड़ दिया राजू के लण्ड की सख्ती भांप कर रीटा की सांसें भी तेज़ हो बेतरतीब हो गई।

राजू के सामने बैठकर छिनाल रीटा ने अपनी तिरछी निगाहों से देखकर टेढ़ी सी सैक्सी स्माईल उछाल दी और आखिरी तीर चला दिया।

क्या था वो आखिरी तीर?
बड़ी अदा से रीटा ने बहुत लाहपरवाही से अपनी सुडौल टांग को सुकौड़ कर मासूमीयत से पैर के नाखूनों पर नेलपालिश लगाने लगी। काली स्कर्ट शीशे से गौरे चिकने पट्टों से सरकती चली गई और टयूब लाईट में रीटा की लाल पैंटी की ओट में से रीटा की बच्ची सी लरजाती चूत कच्छी के पीछे से राजू को निहारने लगी। रीटा की टाईट पैंटी चलने की वजह से और ठरक के जूस से इकट्ठी हो कर चूत और चूतड़ों में घुस कर दुबक सी गई थी। गुलाबी चूत की अकड़ी मक्खन सी उजली फांकों का हुस्न देख राजू के लन ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था। राजू पास पड़ी गद्दी से लण्ड को छुपा कर हाथ से लण्ड को रगड़ कर शान्त करने लगा।
ऊपर से रीटा नेलपालिश की टचिंग करती हुई अश्लील गाना गाने लगी- हाय जागी बदन में ज्वाला, सईयां तूने ये क्या कर डाला !
रीटा की चूत का चीरा एकदम चकुंदर सा सुर्ख और झिलमिला रहा था। बेशर्म रीटा अपनी फुद्दी की फांकों को भींचने खोलने लगी, तो रीटा चूत के अंदर की नरम व नाजुक पत्तियाँ तितली के पंखों सी बन्द और खुलने लगी। चूत ऐसे लग रही थी जैसे नन्ही सी मछली जुगाली कर रही हो। लाल लाल चूत राजू को कच्छी के पीछे से छोटी शरारती लड़की की तरह लुका छिपी का खेल सा खेल रही थी।
"भईया मेरी लाल लाल अच्छी लग रही है नाऽऽऽ?" राजू की आँखों को अपने नंगे शवाब पर चिपकी देख रीटा शरारत से थोड़ा ठहर कर बोली,"नेलपालिश !"
और खिलखिला कर हंस दी।
राजू ने आज पहली बार रीटा की चूत को इतने करीब से देखा तो राजू को जैसे लकवा ही मार गया। राजू हड़बड़ा कर रीटा के पैर पर नजर टिकाता थूक निगलता बोला- ओह, हाँ ! हाँ, अच्छी है, लाल लाल वो वो !"
छीनाल रीटा राजू की पतली हालत देख फिर खिलखिला पड़ी। तभी नेलपालिश लगाने के बाद रीटा ने अपने पन्जों के बल उचक कर शानदार दिल दहला देने वाली अंगड़ाई तोड़ी। चटाक चटाक की आवाज से रीटा की कसी शर्ट के बटन खुलते चले गये। यह देख राजू की आँखें लाल हो गई और लण्ड ने कच्छे में धमाल मचा दी।
राजू की हालत पर मन मन मुस्कूराती मासूमीयत से बोली- भईया, आप की तबीयत तो ठीक है नाऽऽऽ?
यह कह कर रीटा राजू के माथे पर हाथ लगा कर बायां चुच्चा राजू की छाती में चुभोती धम से राजू की गोद में बैठ गई। राजू का खूंटे जैसा लण्ड रीटा के चूतड़ों के नीचे दबता चला गया। रीटा अपने चूतड़ों को दायें बायें हिला कर राजू के अकड़े लण्ड को ठीक से चूतडों को बीचो-बीच रख कर राजू के लण्ड की सख्ती का मजा लेने लगी।
अब रीटा राजू के लण्ड की गरमी से अपनी गाण्ड को सेक कर दीवानी सी होने लगी। राजू की हालत अब बद से बदतर हो गई। राजू बात बना कर सिर को पकड़ कर बोला "हाँ बेबी, वो वो, बस यूँ ही थोड़ा-थोड़ा सर में दर्द है, चलो कार चलाने चलें।"
"अरे नहीं भईया आप ने अभी तो देखी कि मेरी अभी बिल्कुल गीली है," हरामी रीटा हल्के से आँख दबा मुस्कुरा कर बोली।
"क्याऽऽऽ?" राजू लगभग हांफता सा बोला।
"भईया, मेरी नेलपालिश और क्या ! आपने क्या समझा?" कमीनी रीटा तिरछी निगाहों के बाण चलाती बोली और राजू की हालत पर खिलखला कर हंस पड़ी। लौड़े के तनाव से मज़बूर राजू ने कसमसा कर गोदी में बैठी रीटा के खींच के सूखा घस्सा मार दिया।
रीटा अपनी नेलपालिश को सुखाने के बहाने अपनी सैक्सी गोरी गुदाज़ टाँगों को हिलाने लगी। इस हरकत से रीटा की रसभरी गाण्ड राजू के केले को बुरी तरह से गुदगुदाने लगी। लण्ड अब पूरा अकड़ चुका था और पत्थर सा सख्त हो चरमरा उठा। हरामज़ादी रीटा भी लौडियाबाज़ लड़के के लौड़े की मीठी मीठी चुभन का स्वर्गीय सुख ले रही थी।
रीटा को पता था कि राजू उसे बच्ची समझता है और चोदने से डरता है। रीटा बात आगे बढ़ाती राजू के कान में फुसफुसा कर बोली- ऐऽऽऽ भईया, जब तक मैं गीली हूँ, तब तक कुछ खेलते हैं !
"क्या खेलें बेबी "? राजू जवान रीटा को बाहों में भींचता सा ठरक में कांपता सा बोला।
"कोई भी मजेदार और मस्त खेल जो मुझे ना आता हो और आपको अच्छा लगता हो !" रीटा भी अपनी शानदार फूले हुऐ गुब्बरों को राजू की छाती से रगड़ती आँखों में आँखों डाल कर बोली। अब रीटा सरेआम बेशमर हो अपने चूतड़ राजू के खड़े लण्ड पर आगे पीछे घिसने लगी।
"कौन सा खेल बेबी?" राजू रीटा की उसे बाहों में और जोर से भींचता अलबेली रीटा की मखमली रानों को सहलाता बोला।
रीटा शर्माती संकुचाती बोली- भईया, क्या आपको बहुत ज्यादा गुण्डी गुण्डी बातें करनी आती हैं?
"बेबी, मैं समझा नहीं !" राजू अनजान बनता और रीटा के चूतड़ मसलता हुआ बोला।
रीटा और भी शर्माती बोली- भईया, जैसा गुण्डी पिक्चरों में होता है, लालीपाप लालीपाप टाइप !
"क्याऽऽऽ मतलब, तुमने ब्ल्यू पिक्चर देखी हुई है?" राजू के दिमाग में जैसे किसी ने हथोड़ा मार दिया हो।
रीटा और भी जोर से शर्माती सकुचाती बोली- "येसऽऽ भईया, अपनी सहेली के घर पर, पर भईया आप किसी को बताना नहीं प्लीज़ऽऽऽ।
रीटा का आग्रह सुन कर राजू का ठरक के मारे बुरा हाल हो गया। छछौरी रीटा के इरादे से बेखबर राजू तो ऊपर ऊपर से ही ठरक पूरा करने के चक्कर में था- बेबी, अगर किसी को हमारी गुण्डी गेम के बारे पता लग गया तो?
राजू रीटा के मन को टटोलता बोला।
रीटा राजू के गाल पर गाल रगड़ती हुई फुसफुसाती और शर्माती बोली- भईया, मैं किसी को नहीं बताऊँगी और हम घर पर बिल्कुल अकेले हैं और दरवाजे और खिड़कियाँ भी तो बन्द हैं और भईया, वैसे भी अब मैं बच्ची थोड़े ही हूँ।
यह सुनते ही राजू का लण्ड बुरी तरह से फड़फड़ा उठा।
रीटा बड़े ही भोलेपन से बोली- पता है, अब मम्मी मुझे स्कर्ट के नीचे पेंटी ना पहनने पर डांटती है और कहती हैं कि अब मैं बड़ी हो गई हूँ। भईया क्या अब मैं सचमुच बड़ी हो गई हूँ?
"अच्छा देखें तो तुम कित्ती बड़ी हो गई हो?" राजू ने हाथ रीटा की रेशमी जांघों को सहलाते सहलाते ऊपर सरकाने लगा, किन्तु हरामी रीटा ने अपनी जांघों को भींच कर हाथ को मंजिल तक पहुंचने से रोक दिया। रीटा को राजू को सता कर खूब मजा आ रहा था पर रीटा की सांसें भी अब तेज हो गई थी।
"क्यों क्या हुआ?" राजू चिकनी रीटा की सुडौल जांघों की गदराहट का आनन्द लेता हुआ बोला।
"भईयाऽऽऽ ! कुछ कुछ होता है !" हांफती रीटा अपनी गोरी बांहों का हार राजू के गले में डाल कर मदभरी निगाहों से राजू को ताकती और मदहोशी में सरसराती अवाज़ में बोली।
"देखें कहाँ होती है ये कुछ कुछ?" राजू बोला। यह कहानी आप अन्तर्वासना.कॉंम पर पढ़ रहे हैं।
"यहाँ !" रीटा अपने उठते-गिरते चुच्चों की तरफ इशारा कर बुरी तरह शरमा कर हांफती हुई झटके से राजू से लिपटती हुई बोली। अब रीटा का दिल सीने के अंदर बुरी तरह से धक धक कर के धड़क रहा था।
"ज़रा देखें तो !" यह कह राजू ने रीटा की गले से बाहर उबल पड़ रहे मम्मे को पकड कर जोश में आकर जोर से दबा कर रीटा की लावारिस जवानी की कठोरता का मजा लेने लगा।
"ऊई माऽऽ भऽऽ-ईऽऽ-याऽऽऽ आहऽऽऽ कित्त्ती जोर से दबाया है, आप बड़े खचरे हो !" रीटा के होंठों पर दबी दबी आनन्द भरी चीख सी उगल पड़ी।
राजू रीटा के प्यासे मम्मों को बराबर मसलता रहा और प्यासी मस्ताई हुई रीटा राजू की आँखों में आँखों डाले होंटों में उंगली दबाये शर्माती सी चुच्चे खिंचवाती और दबवाती चली गई।
"सीऽऽऽ छोड़ो दो भईया ! आऊचऽऽऽ मैं तो आपकी बहन जैसी हूँ, ऊईऽऽ क्या करते हो भईया मैं तो जाती हूँ, हायऽऽ मम्मीऽऽऽ ओह हायऽऽऽ उफऽऽऽ बहुत मजा आ रहा है, दबाईये सीऽऽऽ और जोर से आहऽऽऽ भईया मत करो यह सब आऽऽऽ ओहऽऽऽ उफऽऽऽऽऽ !" ऊपर ऊपर से रीटा राजू का हल्का हल्का विरोध कर हाथ हटाने की कोशिश कर रही थी। राजू के लण्ड के इश्क में बावली हुई रीटा की हाँ हाँ और ना ना ने राजू को पागल सा कर दिया था। रीटा के स्तन अब पत्थर से कठोर हो कर अकड़ गये थे।
रीटा ने आज पहली बार किसी मर्द की गोदी में बैठ कर अपने मम्मे दववाये थे। अब रीटा का ठरक सातवें आसमान पर था, मुँह लाल और सिर घूम सा रहा था। राजू भी अपने से कई साल छोटी लौडिया को पाकर हाल बेहाल हो उठा था।
"बेबी पहले कभी किसी से ऐसा करवाया है क्या?" राजू ने रीटा के पत्थर से कठोर निप्पल को चुटकी में मसला तो रीटा मज़े से दोहरी हो कर चिंहुक के राजू से बुरी तरह से लिपटती और लज्जाती बोली- सीऽऽऽ नहीं भईया पहली बार करवा रही हूँ ये सब ! हायऽऽ ये आप क्या कर रहे हो?
"मज़ा आ रहा है ना?" राजू चूचों को पीसता बोला।
"जी भईया, बहुत अच्छा लग रहा है और बहुत मजा आ रहा है। करिये और करते रहिये, मैं किसी को नहीं बताऊँगी।" रीटा नींद में फुसफुसाती सी बोली।
रीटा ने मस्ती में आकर राजू को अपनी सुडौल चिकनी टांगों और गोरी गोरी बाहों में दबोच लिया और अपने कोमल अंगों को जोर खरोश से राजू के जिस्म से रगड़ने लगी।
"रीटा प्लीज़ एक बार अपनी चिड़िया तो दिखा दो?" राजू रीटा की स्कर्ट में हाथ डालता हुआ बोला।
"हाऽऽ भईया ! आप तो बहुत गुण्डे हो?" रीटा मुँह पर हाथ रख कर बोली,"हायऽऽ, भला मैं आपको अपनी क्यों दिखाऊँ? यहाँ कोई नुमायश लगी हुई है क्या?"
"अरे, मुझे तो सिर्फ यह देखना है कि तुम कितनी जवान हो गई हो?" राजू के हाथ रीटा स्कर्ट के नीचे घुस कर रीट के अधनंगे मलाई से मुलायम चूतड़ों पर ढक्कन की तरह चिपक गये।
रीटा की कमर सहलाते सहलाते राजू ने झटके से रीटा की कच्छी को केले के तनों सी रानों से नीचे सरका कर घुटनों तक खींच दी और फड़फड़ाती रीटा को जबरदस्ती स्कर्ट के नीचे से जन्मजात नन्गी कर दिया।
रीटा शर्म से पानी पानी हो गई और अनमाने स्वर में ना-नुकर करती बोली- प्लीज़ भईया छोड़िये, मुझे नन्गी मत करो नाऽऽऽऽ ! बहुत शर्म आयेगी !
"रीटा़, बस एक बार देख लेने दो अपनी प्लीज !" पगलाया सा राजू रीटा की स्कर्ट में हाथ डालता कर फरियाद सी करता बोला।
"अच्छा, आप जिद्द करते हो तो मैं आपको अपनी दिखा देती हूँ, पर कोई ज्यादा गुण्डी बात मत करना, ओके"? नन्ही रीटा ने पलकों को फड़फड़ाते हुए बहुत ही भोलेपन से कहा।
रीटा ने गोदी में बैठे बैठे ही बड़ी ही मासूमीयत से एक एक टांग को सुकोड़ कर बारी बारी अपनी कच्छी में से नजाकत से निकाला तो राजू की प्यासी आँखों को रीटा की एकदम नन्गी चूत की झलकी देखने को मिली।
चूत को अच्छी तरह से देखने के लिये राजू ने रीटा के घुटने को पकड़ कर जबरदस्ती रीटा की कन्धों से लगा कर कुकड़ी सा बना दिया तो रीटा ने झट से अपने छोटे छोटे फूल से हाथों की कटोरियाँ बना कर अपनी टाँगों के बीच चिपका कर नाचीज़ चूत के चीरे और बुण्ड के गुलाबी सुराख को छुपाती बोली- आहऽ ! नोऽऽऽ ! भईया, बहुत शर्म आ रही है।
पर राजू के सिर पर चूत का भूत सवार था- देखो बेबी, अगर तुम मुझे अपनी चिड़िया दिखाओगी, तो मैं तुम्हें अपना तोता दिखाऊँगा।
रीटा शक भरी निगाहों से राजू को देखती बोली- सच्चीऽऽऽऽऽ भईया?
"सच्ची बेबी, तुम्हारी कसम ! और चाहे तुम उससे लॉलीपोप-लॉलीपोप भी खेल लेना और मैं किसी को नहीं बताऊँगा।" राजू हांफता सा रीटा के चुच्चे को सहलाता बोला।
लॉलीपोप सुन कर सुन्दरी रीटा की आँखों में चमक आ गई और उसने नीचे से हाथ हटा कर शर्मा कर अपना मुंह हाथों में छुपा लिया।
क्या अदा थी लौंडिया की, चूत भी दिखा रही थी और शरमा भी रही थी।
राजू के सिर पर चूत का भूत सवार था- देखो बेबी, अगर तुम मुझे अपनी चिड़िया दिखाओगी, तो मैं तुम्हें अपना तोता दिखाऊँगा।
रीटा शक भरी निगाहों से राजू को देखती बोली- सच्चीऽऽऽऽऽ भईया?
"सच्ची बेबी, तुम्हारी कसम ! और चाहे तुम उससे लॉलीपोप-लॉलीपोप भी खेल लेना और मैं किसी को नहीं बताऊँगा।" राजू हांफता सा रीटा के चुच्चे को सहलाता बोला।
लॉलीपोप सुन कर सुन्दरी रीटा की आँखों में चमक आ गई और उसने नीचे से हाथ हटा कर शर्मा कर अपना मुंह हाथों में छुपा लिया।
क्या अदा थी लौंडिया की, चूत भी दिखा रही थी और शरमा भी रही थी।
राजू सम्मोहित सा फ़ैली हुई गोरी चिट्टी रीटा की बला सी खूबसूरत लबालब रस से भरी नन्ही सी सुडौल आमन्त्रण देती फुद्दी और रबड़ बैंड सी कसी गुलाबी गाण्ड का आँखों ही आँखों में चोदने लगा।
रोमविहीन फुद्दी के रक्तिम चीरे से रीटा का कंपकपाता छोटा सा कागजी बादाम सा दाना राजू को जैसे ललकार दे रहा था। राजू को लगा कि वो अब बिना हाथ लगाये ही झड़ जायेगा। दृश्य देख कर राजू के बिफरे हुआ लण्ड ने पानी के कई टुपके छोड़ दिये- ओहऽऽ रीटा ! यू आर सो ब्यूटीफ़ुल !
जैसे ही राजू का हाथ शरारत करने के लिये आगे आया, रीटा ने झटपट फुद्दी और गाण्ड को वापिस अपनी टांगो में भींच ली और बोली- नो नो भईया ! दिस ईज़ नाट अलाउड। अब आप अपना तोता दिखाओ, नहीं तो ये गेम यहीं खत्म !
रीटा राजू को प्यार से धमकाती हुई बोली।
"ओके ओके, तुम खुद ही देख लो और जो जी में आये कर लो !" राजू ने बात बिगड़ने के डर से सबर से काम लेना ठीक समझा।
"ओह भईया आई लव यू एन्ड यू आर सो क्यूट !" रीटा राजू की बात सुन कर खुशी के मारे चिल्ला सी पड़ी और राजू की गाल पे पटाक से एक चुम्मा ठोक दिया।
रीटा घुटने मोड़े राजू के आगे कारपेट पर बैठ गई और चरर्ऽऽऽऽ की अवाज़ से हसीन रीटा ने कांपते नाजुक हाथों से राजू की पैंट की जिप खींच दी। राजू का कच्छा नीचे खिचंते ही राजू का आठ इंच लंबा लण्ड फटाक से रीटा के मुँह पर लगा तो रीटा की डर के मारे चीख निकल गई- ऊईऽऽऽऽमांऽऽऽ ! ईत्ता बड़ा? हाय रब्बाऽऽऽ मैं मर जाऊँऽऽऽ !"
खुली हवा में आठ इन्च लण्ड झटकों के साथ ऊपर उठता चला गया और बुरी तरह से लोहे सा टना टन छत की तरफ अकड़ गया। मोटे लण्ड का गीली गीली जामुनी गुलाबी टोपी के ऊपर खूब बड़ा सुराख था। खून की तेज़ी से मजबूत लन की नसें फूल गई और लन हवा में ही झटके खाने लगा। लण्ड के नीचे खूब बड़े-बड़े सांवले सलौने ट्टटों की रेशमी थैलियाँ।
रीटा के जीवन का आज सबसे महत्वपूर्ण दिन था। अंगूठे चूसने की उमर में रीटा को शानदार और जानदार लण्ड चूसने को मिल गया था। सम्मोहित सी रीटा ने झटके खाते लण्ड को लपक के अपने छोटे छोटे मखमली हाथों में लेकर लौड़े की ऊपरी चमड़ी को नीचे सरका दी, तो राजू की सिसकारी ही निकल गई। सख्त और सुलगते लौड़े के सुपाड़े से निकली सुगंधित हवा का झोंका रीटा के नथुनों में घुस कर रीटा का दिल बाग बाग कर गया। रीटा के फूल से नादान हाथों की गरमी और नरमी पा कर राजू को लण्ड ने कम्पकपा कर झरझरा कर थोड़ा सा पानी छोड़ दिया।
मदहोशी में राजू की आँखें बंद सी हो गई। रीटा ने लन पर अपनी छोटी सी मुट्ठी कस कर ऊपर नीचे करने लगी। अब रीटा की मंजिल करीब थी, लण्ड की खूबसूरती के आगे अब रीटा राजू को भूल चुकी थी। रीटा अपने होंटों पर भूखी बिल्ली की तरह जीभ फेर रही थी और रीटा की हल्की भूरी आँखों में बला की चमक थी।
तभी रीटा ने अचानक झटके से राजू के लण्ड की टोपी पर अपने लाल लाल रसीले होंट चिपका दिये और राजू की आँखों में आँखें डाल कर चुसड़ चुसड़ कर लॉलीपॉप की तरह चुस्सा मारने लगी। रीटा ने अपना छोटा सा मुँह पूरा खोल कर राजू का लण्ड अपने गले तक अंदर ले लिया तो राजू के मजे की सीमा न रही और राजू चीख पड़ा।
राजू की चीख सुन कर उत्तेजित रीटा ने लण्ड पर अपना मुँह आगे पीछे करने लगी, तो राजू ने घस्से मार मार का रीटा के सुन्दर मुख को चोदना शुरू कर दिया। राजू ने लण्ड को रीटा के गले तक ठोक दिया। रीटा की जीभ रह रह कर राजू को लण्ड पे वार पे वार कर रही थी। कभी कभी रीटा नीचे से ऊपर तक राजू के औजार को प्यार से दाँतों से रगड़ देती। अब रीटा खुलकर और बुन्ड तक जोर लगा कर राजू का लण्ड चुसड़ चुसड़ करके चूसने लगी। रीटा ने अपनी जीभ से लण्ड की गरारी को छेड़ कर पूरे जोर से चुस्सा मारा तो लण्ड ने भरभरा कर सारा रस रीटा के मुँह में छोड़ दिया। प्यासी रीटा लण्ड की झड़न का कतरा कतरा पीने में मस्त हो गई।
हांफते और करहाते हुए बड़ी ही मुश्किल से ज़बरदस्ती जोर लगा कर राजू ने रीटा के मुँह से अपना लण्ड को झटके से 'प्लापऽऽ !' की ऊँची आवाज़ के साथ बाहर खींचा। ऐसा लगा की जैसे शैम्पेन की बोतल से कार्क हटाने से आवाज आई हो। लण्ड का सुपाड़ रीटा के मुखचोदन से गुलाबी से जामुनी हो गया और रह रह कर झटके खा रहा था। दम तोड़ते लण्ड ने आखिरी दो पिचकारियाँ रीटा के सुन्दर सलोने चेहरे पर पड़ी। वासना से अन्धी हुई रीटा हाँफती सी अपनी सांप सी लम्बी और गुलाबी जबान को बाहर निकाल कर सड़प सड़प की आवाज़ से राजू के लण्ड की सफेद मलाई को भूखी बिल्ली की तरह चाट गई।
राजू के लण्ड के कस बल निकाल रीटा की आँखों में अज़ीब सी सन्तुष्टि थी। पर रीटा की चूत की हालत बद से बदतर हो गई थी।
रीटा की जाघें घुटनों तक तरबतर थी और पनीयाई हुई चूत से पानी अब बह सा रहा था। रीटा अपना सिर पकड़ कर कारपेट पर ढेर होती बोली- हायऽऽऽ भईया ! अब मैं क्या करूँ?
रीटा अपने चुच्चे मसलती और चूत को रगड़ती और कसमसाने लगी। रीटा वासना में, खुमार में अपनी कंदली जांघें रगड़ती सिसकती सी बोली- सीऽऽऽऽ भईया ! ऐसे तो मैं पागल हो जाऊँगी !
हाँफने से रीटा की नंगी लौहार की धौंकनी सी फैलती सुकड़ती छातियाँ छत को छूने को बेताब लग रही थी। याकूत से सुर्ख लाल निप्पल अकड़ कर एक एक इंच लम्बे हो चुके थे। रीटा ने अपने घुटनों को ऊपर उठ कर बेशर्मी से चौड़ा किया तो गजब की खूबसूरत चूत और चूत की पड़ौसन ने सारे कमरे में जैसे रौशनी सी फैला दी। चूत एकदम सफाचट, जुगनू सी जगमग करती चिकनी चूत पर रौयों का नामोनिशान न था। भला खेलने के मैदान में घास का क्या काम।
राजू ने रीटा की दहकती और जलती जवानी को खींच कर अपने आगोश में ले लिया, गोदी में बैठाने से पहले ही समझदार रीटा ने खुद ही अपना स्कर्ट ऊपर उठा कर अपनी नंगे रेशमी अंगों से राजू का लण्ड मसल सा डाला। रीटा ने अपनी गोरे बाजू राजू के गले में डाल कर सीऽऽऽ सीऽऽऽ करती जोर जोर से अपना जलता और गीला यौवन रगड़ कर राजू के लण्ड खडा करने लगी|
राजू ने धधकती सुलगती जवानी को बाहो में ले कर ताबड़तोड़ पटाक पटाक से चुम्बन रीटा के गुलाबी गालों पर जड़ दिये। रीटा ने भी राजू पर जवाबी चुम्मियों की बौछार सी कर दी। रीटा को अपनी गाल चुसवा कर बहुत ही मजा आ रहा था। पुच्च पुच की लम्बी लम्बी गीली गीली आवाजों से और गीली फुद्दी की रगड़ से लण्ड का ठरक बुलंदियों पर पहुंच गया। निहाल और बलिहारी हुई रीटा अब राजू से अगं प्रत्यंग पर गीली मुहरें ठुकवा रही थी।
राजू अब रीटा के नीचे वाले होंट को चूसने और काटने लगा तो रीटा ने अपनी गुलाबी जुबान बाहर निकाल दी। राजू भी झट से रीटा की जुबान को अपने मुँह में सटक कर बुरी तरह चूसने लगा, बीच बीच में रीटा भी राजू की ज़बान को अपने मुँह में खींच कर जवाब दे देती, तो कभी कभी दोनों की जुबानें मिल कर डांस सा करने लगती।
रीटा बुरी तरह राजू की जुबान को बहुत बुरी तरह वहशी होकर चूस रही थी। एक बार राजू को लगा कि अगर उसने जुबान को ढीला छोड़ा तो शायद रीटा राजू की जुबान को पी ही ना जाये।
रीटा की मलाई सी गुदगुदी गाण्ड और गीली भाम्प छोड़ती चूत की घिसन से राजू का लण्ड फिर से तुनके लगा कर खड़ा होने लगा। रीटा राजू का सरसराते लण्ड अपनी रेशमी मुलायम जांघों में दबोच कर मसलने और पीसने लगी तो राजू हाय हाय कर उठा।
बावली रीटा पटाक की अवाज़ से चुम्बन तोड़ती और हाँफते हुई राजू के कान में फुसफुसाती बोली- भईया आपको छोटी-छोटी स्कूल गर्ल्स से ऐसी बाते करते शर्म नहीं आती?
"बेबी अब तुम जवान और समझदार हो गई हो !" राजू रीटा के नंगे मम्मों पर चुम्बन ठोकता और स्कर्ट के नीचे हाथ आगे बढ़ाता बोला।
रीटा राजू के आगे अपने मम्मे नचाती और सताती सी बोली- पर भईया, मैं तो आपकी छोटी बहन जैसी हूँ।
"अच्छा, तो मैं यह सब नहीं करता !" यह कह राजू ने अपना हाथ वापिस खींच लिया तो रीटा झट से ठुनक कर झूठे गुस्से से बोली- अरेऽऽऽ मैंने ऐसा तो नहीं कहा था।
अब तो राजू ने अपनी हथेली रज़ामंद रीटा की पानी पानी हुई चूत से चिपका दी और ऊपर से रीटा का एक चुच्चे की टौंटी को होंठों में ले जोर से पीने लगा। अब तो रीटा अपने आप को भूल चुकी थी रीटा ने अपना पूरा का पूरा मम्मा राजू के मुँह में ठोक दिया। रीटा का सारा बदन कमान की तरह अकड़ गया और झनझना उठा।
अनजाने में ही चुदास मस्ती में आई रीटा के मुँह से निकल गया- ऊफऽऽऽ बाबा रेऽऽऽऽ ! बाबा भईयाऽऽऽ ! आप तो बड़े बहनचोद निकले। बहनचोद भाई अगली बार मैं राखी तेरे पप्पू पर ही बांधूगी। फिर राजू की उंगली नीचे सरकती हुई रीटा की फूल सी तूफानी जवानी की नरमी, गरमी और गहराई भांपने लगी।
रीटा ने पूरी उंगली गपकने के लिये अपनी चूत को ढीला दिया और कमर को आगे और ऊपर को उछालने लगी। उंगली जड़ तक अन्दर लेने को बाद रीटा ने अपनी कसी चूत की मखमली फांकों से भींच कर टाँगों को बंद करके राजू के हाथ को जैसे हमेशा के लिये कैद कर लिया। जब राजू ने रीटा के जी स्पॉट को गुदगुदाया तो स्वाद से रीटा का पौर पौर पिनपिना उठा। रीटा जोर से सिसकारा मार राजू की उंगली को अपनी जानदार फांकों में भींचती-खोलती और चूतड़ों पर राजू के डण्डे से लण्ड की सख्ती का मजा लेती बोली- सीऽऽऽ भईया, उफ ! आप बहुत ज़ालिम हो, सीऽऽऽ हाय हाय भईया, मैं तो ऐसे मर जाऊँगीऽऽऽ सीऽऽऽ कुछ करिये नाऽऽऽ !
मजे की ज्यादती से रीटा बड़ी अदा से अपने नीचे वाले होंट के कोने को दांतों में दबा दोनो हाथों को ढीला कर जोर जोर से झटकने लगी।
राजू वासना के ज्वालामुखी में धधकती रीटा की हालत ताड़ गया, अब राजू खुद भी रीटा को छोड़ने वाली हालत में नहीं था। रीटा को घुमा कर रीटा की पीठ अपनी तरफ करके रीटा के शर्ट से बाहर आये आज़ाद चूचों में अपनी अंगुलियाँ धंसा दी और पौं पौं करने लगा। इस हालत में तो यह चिकनी चिड़िया की गाण्ड तो दे ही देगी, ये सोच राजू ने रीट की गाण्ड को ऊपर उठा कर चूतड़ों को दाँतों से कौंचने लगा। राजू की दंदियाँ तो उलटी हुई रीटा पे कहर बन कर गिरीं। साथ में ही राजू ने रीटा की गाण्ड को अपनी जबान से गुदगुदा कर ठेर सारा थूक से गीला कर दिया और अपने लण्ड का गरम सुपाड़ा रीटा की चूत के पानी से तर गाण्ड पर टिका दिया तो नादान रीटा सिहर कर अपनी कुंवारी गाण्ड को जोर से भींच कर लौड़ का रास्ता रोक बोली- भईया, मैं तो बहुत छोटी हूँ !
राजू रीटा की गाण्ड के सुराख पर दबाव बढ़ाता हुआ बोला- चिन्त्ता मत करो बेबी, इस हालत में तुम्हारी शदाई चूत या गाण्ड किसी गधे का लण्ड सटक सकती है और फिर थूक से मैंने तुम्हारी एकदम गीली कर दी है।
रीटा पीछे मुड़ कर राजू की तरफ देखती मासूमीयत से बोली- पर भईया कहीं मेरी फट गई तो?
राजू बोला- बेबी, बहुत प्यार से मारूँगा और फिर मैं तो कुछ कर भी नहीं रहा। जो भी करना हे वो तुम्हीं को करना है।
राजू की झूठी तसल्ली से रीटा ने अपनी गाण्ड को आहिस्ता आहिस्ता ढीला छोड़ दिया। रीटा की चूत थूक और राजू की अपनी लेस से लिबड़े लण्ड की टोपी 'पक्क' की आवाज़ से रीटा की गाण्ड में घुस गया।
"आईऽऽऽऽऽ" हल्की सी मीठी दर्द की लहर और मजे से रीटा चीख सी उठी और गाण्ड को दुबारा से भींच लिया। इतनी छोटी, टाईट और बच्ची गाण्ड में राजू का लण्ड पिनपिना उठा।
परन्तु तुरन्त ही रीटा ने चुदास मस्ती में अपनी गाण्ड को ढीला छोड़ अपने दांत भींच कर राजू के लोह-लण्ड पर बैठती सी चली गई।राजू का दहकता सरिये सा लौडा़ रीटा की बेहद कसी गाण्ड की मखमली दीवारों को रगड़ता शनै शनै अन्दर घुसता चला गया। गाण्ड के रेशमी चंगुल में फंसा लौड़ा हिनहिना कर बिफर उठा। बार बार रीटा राजू के लौडे को अपनी गाण्ड को भींच कर चूस सा देती थी तो राजू को अपनी नानी याद आ जाती थी।
जैसे तैसे खुद रीटा ने लगभग तीन चौथाई लौड़े को अपनी गाण्ड में सटक ही लिया और हाँफती बोली- आहऽऽऽ ! बस भईया, और नहीं ले सकती मैं। आपका तो बहुत ही मोटा और लम्बा है।
रीटा पीछे मुड़ कर राजू की तरफ देखती बोली, तो शैतान राजू मौका देख रीटा के होंटो अपने होंटो में प्यार से दबा कर चूसने लगा और साथ ही रीटा की पतली कमर पकड़ कर नीचे दबा कर और नीचे से लगातार एक के बाद एक तीन जबरदस्त धक्के लगा कर रीटा की गाण्ड में पूरा का पूरा मुगदर सा लण्ड पेल दिया। राजू की मजबूत बांहों में रीटा किसी घायल चिड़िया सी फड़फडा़ के रह गई। बेचारी बेबस बिलबिलाती रीटा की चीख चुम्बन में ही घुट के रह गई। पीड़ा से नन्ही रीटा की आँखों में मोटे मोटे आंसू गुलाबी गालों पर लुढ़कते चले गये।
राजू के लण्ड पर रीटा की गाण्ड टाईट रबडबैंड की तरह चढ़ी हुई थी। रीटा करहाती और रोती हुई बोली- आहऽऽ ईऽऽऽऽ ! मेरी फट गई ! आहऽऽऽऽ ! मुझे नहीं करवाना यह सब ! भईया छोड़ दो मुझे !
गिड़गिड़ाती रोती रीटा ने दर्द की वजह से अपने दोनों होटों को दाँतों में दबा कर चीखों को रोकने की असफल कोशिश कर रही थी।
परन्तु ठरक से अन्धा राजू अड़ियल सांड की तरह काबू में आई हुई नई कबूतरी रीटा को बालों से पकड़ रीटा का मुँह कारपेट पर लगा दिया तो रीटा की गाण्ड अब छत की तरफ उठ गई और राजू ने चीखती चिल्लाती रीटा के अन्दर अपने लण्ड को थौड़ा सा बाहर खींच कर दुबारा पूरा का पूरा ठोक दिया।
रीटा की स्कर्ट अब उलट चुकी थी और उसकी कसमसाती गोरी गोरी मखमली गाण्ड बाहर झाँक रही थी। स्कूल ड्रैस और कुतिया स्टाईल में रीटा और भी सैक्सी लगने लगी थी। राजू बेरहमी से शैतान लौंडिया की गाण्ड मारने लगा। रीटा गाण्ड को टाईट कर राजू के लण्ड को रोकने की असफल कोशिश करने लगी तो राजू तैश में आकर रीटा के उचके हुऐ चूतड़ों पर खींच कर पूरे जोर से पाँच छ: थप्पड़ जमाते हुए बोला- साली, फाड़ के रख दूंगा अगर अपनी गाण्ड को टाईट किया तो !
राजू के हाथ रीटा की मलाई सी गोरी गाण्ड पर छपते चले गये साथ में राजू ने ढेर सारा थूक रीटा गाण्ड पर थूक दिया। जल्दी ही राजू का आगे पीछे होता मस्त थूक से सना लण्ड रीटा को मस्ती देने लगा।
आखिर मुकाबला करने को तैयार रीटा ने दाँत भींच कर जैसे तैसे मेज का पाया पकड़ और पोजीशन सम्भाल कर अपनी शानदार गाण्ड और ऊपर उठा दिया। राजू के ठप्पों की वजह से मेज और सौफे की चरर्ऽऽऽ चरर्ऽऽऽ की चरमराहट होने लगी। अब नन्ही रीटा भी अपनी गाण्ड की लौड़े की ताल से ताल मिलाने लगी। राजू भी अब रीटा की गाण्ड से पूरा का पूरा लण्ड खींच कर धक्के पर धक्के मारने लगा तो रीटा मजे के मारे चिल्ला उठी।
सुन्दर रीटा की उछलती सिल्की गाण्ड को देख राजू उत्तेजित हो निगोड़ी छोकरी की बुण्ड को और जोर से मारने लगा।
अब तक बदमाश रीटा ने राजू के शैतान लौड़े पर पूरी तरह काबू पा लिया था। रीटा लौड़े को अपनी गाण्ड में भींच भींच कर पीसने लगी। जब राजू धक्के मारता तो रीटा अपनी गाण्ड को बिलकुल ठीला छोड़ कर गाण्ड पीछे ओर ऊपर उछाल देती और जब राजू लौड़े को बाहर खींचता तो रीटा अपनी टाईट गाण्ड को जोर से सुकोड़ कर लौड़े को भींच सा लेती। लण्ड व गाण्ड की लड़ाई की घचर पचर और रीटा की गाण्ड पर राजू के मन्ज़ी तोड़ घस्सों की धपाधप की आवाज ने रीटा के बचे खुचे होश उड़ा दिये। जंगली चुदाई से चूत डबडबा गई और सुराख से टप टप पानी बहने लगा। राजू का खम्बे सा लम्बा लौड़ा अपनी नन्ही सी गाण्ड में गपक कर रीटा का चूत मरवाने का आत्मविश्वास बुलंद हो गया था।
राजू ने पूरे आधे धण्टे तक मेज की चरमराहट को बनाये रखी। चुदास से पगलाई और मस्ताई हुई रीटा 'डफली वाले, डफली बजा' की पैरोडी गाने लगी जो कि रीटा ने मोनिका से सीखी थी-
लौड़े वाले लण्ड दिखाऽऽऽऽ मेरी गाण्ड तुझे बुलाती है,
आऽऽऽऽ
तू चौदे, मैं चुदाऊँऽऽऽऽ
गाण्ड में गपक लूंगी,
चूत में सटक लूंगी,
कर लूंगी झट इसको अंदरऽऽऽ
लौड़े वाले लण्ड दिखाऽऽऽ
मेरी गाण्ड, तुझे बुलाती है आऽऽऽ
तू चोदे मैं चुदाऊँऽऽऽ
हवस में अन्धी रीटा अपने आप को भूल कर अश्लील हो गई और बकबक करने लगी- भईया, और जोर से धक्के मारिये ! ईऽऽऽऽ आहऽऽऽ आह भईया ऊईऽऽऽ मांऽऽऽ ! हायऽऽऽ रेऽऽऽ मैं चुद गई रे ! मेरी मम्मीऽऽऽऽ सीऽऽऽ बडा मज़ा आ रहा है। भईया अच्छी तरह से चौदिये, फाड़ दीजिये मेरी निगोड़ी गाण्ड को ऊफऽऽ ईसऽऽऽ ईसऽऽऽ बहुत सताती है साली, मां की लौड़ी, आह मेरे गाण्डू भईया लूट लो मेरी जवानी, और जोर से, येस ओर जोर से वाहऽऽऽ फाड डालोऽऽऽ चौदू, चौद अपनी बहन की चूत कोऽऽऽ, कैरी आन डौन्ट स्टाप यू फकर बास्टर्ड !
रीटा जैसी मासूम स्कूल गर्ल के मुँह से शानदार गालियाँ सुन कर राजू का ठरक चरम सीमा तक पहुँच गया।
"लेऽऽऽ माँ की लौड़ी, हाय मेरी जलेबी, हाय मेरी रसमलाई, ये ले भौंसड़ी की, चोद के रख दूंगा, फाड़ के रख दूंगा, साली रंडी कुतिया, तेरी चूत पर बहुत चर्बी चढ़ गई है, ले हरामजादी ले !"
राजू ने रीटा की गुदाज और गदराई हुई कमर में उंगलियाँ धंसा दी और लौंडिया उछल उछल कर जानलेवा चोदा मारने लगा। ज़ालिम राजू ने आखिरी कमरा हिला देने वाले आटोमिक धक्के रीटा सम्भाल ना पाई और दोनों चूदाई करते करते कारपेट पर ढेर हो गए।
गिरने से राजू के लण्ड रीटा की गाण्ड में जड़ तक धंस गया और दोनों ठरक की चरम सीमा पर पँहुच गये। राजू के लण्ड ने फव्वारे छोड़ने शुरू किए तो रीटा की चूत ने भी झरझरा कर बिना चुदे ही पानी छोड़ दिया। मजे से राजू ने रीटा को इस कदर बाहों में दबाया, तो रीटा को लगा कि उसके ऊपर से बुलड़ोज़र निकल गया हो और हड्डियाँ जैसे चरमरा सी उठी।
इस ताबड़तोड़ चुदाई से रीटा का रोम-रोम पुलकित हो गया और उसकी आँखों में खुशी के आँसू छलछला पड़े। रीटा कुतिया की तरह राजू के लण्ड को अपनी नन्ही सी गाण्ड को सुकोड़ कर लण्ड को निचोड़ने लगी। थोड़ी देर बाद राजू ने पटाक की आवाज से अपना लण्ड बाहर खींचा तो गुलाबी गाण्ड हुच हुच कर लौड़े का झाग वाला पानी उगलने लगी।
वासना का तूफान खत्म होने पर राजू के नीचे दबी रीट हांफती और अपनी गाण्ड सहलाती बोली- आहऽऽऽ भईया, आप तो बड़े ही कसाई निकले ! उफऽऽऽ सारा बदन तोड़ मरोड के रख दिया ! हायऽऽऽ कितनी जोरो के मारी है मेरी उफऽऽ !"
राजू रीटा की गाण्ड पर चटाक से चपत जमाते बोला- बेबी, तुम भी तो ये उछल उछल कर मेरे लण्ड के परखच्चे उड़ने पर तुली हुई थी। चूसी और चुदी हुई रीटा बुरी तरह शरमा कर अपना चेहरा अपने हाथों में ढांप कर राजू की छाती में छिपने की कोशिश करने लगी।
इस ताबड़तोड़ चुदाई से रीटा का रोम-रोम पुलकित हो गया और उसकी आँखों में खुशी के आँसू छलछला पड़े। रीटा कुतिया की तरह राजू के लण्ड को अपनी नन्ही सी गाण्ड को सुकोड़ कर लण्ड को निचोड़ने लगी। थोड़ी देर बाद राजू ने पटाक की आवाज से अपना लण्ड बाहर खींचा तो गुलाबी गाण्ड हुच हुच कर लौड़े का झाग वाला पानी उगलने लगी।
वासना का तूफान खत्म होने पर राजू के नीचे दबी रीट हांफती और अपनी गाण्ड सहलाती बोली- आहऽऽऽ भईया, आप तो बड़े ही कसाई निकले ! उफऽऽऽ सारा बदन तोड़ मरोड के रख दिया ! हायऽऽऽ कितनी जोरो के मारी है मेरी उफऽऽ !"
राजू रीटा की गाण्ड पर चटाक से चपत जमाते बोला- बेबी, तुम भी तो ये उछल उछल कर मेरे लण्ड के परखच्चे उड़ने पर तुली हुई थी। चूसी और चुदी हुई रीटा बुरी तरह शरमा कर अपना चेहरा अपने हाथों में ढांप कर राजू की छाती में छिपने की कोशिश करने लगी।
रीटा को लुत्फ़ तो बहुत आया पर पूरी सन्तुष्टि नहीं हुई। बेचैन रीटा को लगा कि अगर उसने आज चूत नहीं मरवाई तो वह पागल हो जायेगी। दूसरी तरफ से रीटा राजू के मोटे और लम्बे लण्ड से डर भी रही थी। खड़े लौड़े का आकार सोच कर रीटा की चूत थर-थर कांप उठती थी।
राजू से अलग हो कर रीटा शीशे के सामने खड़ी हो अपनी हालत सुधारने लगी। रीटा ने अपने मसली-मुचड़ी और गीली स्कर्ट और शर्ट उतार फ़ेंकी और जन्मजात नंगी हो गई। अब रीटा के जि़स्म पर हाई हील और ज्वैलरी के अलावा पर एक धज्जी भी नहीं थी। राजू को खड़की और चुदी हुई रीटा और भी मस्त और सैक्सी लगने लगी। रीटा के गोरे-गोरे बदन पर राजू के चुम्बनों की मुहरें, दांतों के नीले नीले कचौके, हाथों के ठप्पे, उंगलियों की धसावट, घुटनों और कोहनियों पर कारपेट की रगड़ के लाल निशान गीली जांघें बहुत ही लुभावनी लग रही थी। बिखरे उलझे बाल, आँखों का फैला काज़ल और मेकअप, गीली चूत, रिसती गाण्ड, चुसे हुऐ चुच्चे और सूजे होंट तो देखते ही बनते थे।
राजू का लण्ड दुबारा छत की तरफ तना देख रीटा डर कर चीख मार के भागने लगी तो राजू ने रीटा को उठा किंग साईज़ बैड पर पटक दिया और रीटा की अंगुलियों में अंगुलियाँ पिरो कर फड़फड़ाती रीटा को दबोच कर चित कर लिया। राजू रीटा के घुटने मोड़ कर रीटा को कंधों से मिला दिये और बोला- जाती कहाँ है साली ! माँ की लौड़ी, अभी तो तेरी मां की चूत भी मारनी है।
बेचारी तीन-फोल्ड हुई रीटा किसी घायल हिरणी की भांति छटपटा कर रह गई- आहऽऽऽ नहीं छोड़ो मुझे ! प्लीज़ छोड़ो नाऽऽऽ ! मैं मर जाऊँगी, आपका बहुत बड़ा है।
पर जब राजू ने अपना लण्ड का सुलगता सुपारा रीटा की नन्ही चूत के चीरे पर आगे पीछे फिसलाया तो रीटा का बदन ढीला पड़ गया और ना-नुकर हाँ में तबदील हो गई। रीटा मचलने के बहाने अपनी फड़फड़ाती चूत को राजू के लण्ड को चूत में गपकने लगी तो राजू शरारत में लण्ड को पीछे खींच कर रीटा को सताने लगा तो रीटा ने राजू की गाल पर जोर से चपेड़ लगा कर गन्दी गन्दी गालियाँ बकने लगी- बहनचोद ! माँ के लौड़े, अब डाल अंदर और चोद अपनी बहन को ! साले मादरचोद, चोद नाऽऽऽऽ।
राजू ने रजामंद रीटा को जैसे ही ढीला छोड़ा तो रीटा ने झट से राजू का लण्ड पकड कर अपने चूत के मुँह पर सटा के नीचे से खींच के धक्का जमा दिया। ऊपर से रीटा ने अपनी हाई हील राजू के चूतड़ों में चुभो कर राजू को अपनी तरफ दबा लिया। पलक झपकते ही राजू का लण्ड का आलूबुखारे सा सुपारा रीटा की चिकनी चूत में था। ऊपर से रीटा राजू के लण्ड के सुपाड़े को चूत से चिकोटी काटने लगी। रेशम सी मुलायम चूत तन्दूर सी गरम और दहक रही थी और पहली चुदाई के पानी से अभी भी पच्च पच्च गीली थी।
राजू का लण्ड अब रीटा की चूत की झिल्ली पर दबाव डाल रहा था पल भर के लिये दोनों ठहर से गये और राजू ने रीटा की झील सी आँखों में झाँख कर पूछा- चोदूँ?
"चौदिये नाऽऽऽ !" चुदास की ठरक भाव विभोर हुई रीटा शहद से मीठे स्वर में बोली।
पीड़ा के डर से आँखें भींच और थूक निगलती रीटा की टांगों ने घड़ी के दस बज कर दस बजा दिये।
राजू ने रीटा की चीख को दबाने के लिये रीटा के होंटों को फिर अपने होंटों में दबा लिया और चूसने लगा। राजू ने कड़ियल लण्ड को बाहर खींच कर वापिस रीटा की चूत में पूरे वेग से वापिस धकेल दिया। लण्ड राजा अपने ट्टटों की सेना समेत, रीटा रानी की चूत की सील को तोड़ता और धज्जियाँ उड़ाता हुआ, चूत की मुलायम दीवारों को बेरहमी से रगड़ता हुआ अंदर और अंदर और अंदर घुसता चला गया।
दर्द की वजह से रीटा बुरी तरह से राजू की मजबूत बाहों में फड़फड़ाई और उसकी आँखें बाहर उबल पड़ी। राजू अब भी बुरी तरह से रीटा के होंटों के चबाये और चूसे जा रहा था और रीटा की चीखें गले में ही घुट कर रह गई थी और वो घूं घूं की आवाजें निकालने लगी।
रीटा अपनी छोटी छोटी हथेलियों से राजू को अपने ऊपर से धकेलने की असफल कोशिश कर रही थी पर राजू ने लौंडिया को अपने शिकंजे में बुरी तरह से जकड़ रखा था। रीटा की चूत से निकलते पानी में हल्का सा खून भी आने लगा था। पीड़ा में करहाती रीटा को मोनिका की बात याद आ गई कि चूत और दूध गर्म हो कर ही फटते हैं और दोनों के फटने की अवाज नहीं आती, बस फट जातें हैं।
लगभग दो मिनट तक राजू दर्द से बिलबिलाती और करहाती रीटा को बाहों में दबाये उसकी चूत की कसावट, गर्मी और नर्मी का मजा लेता यूँ ही पड़ा रहा। जैसे ही चूत और लण्ड की गरमी एक हुई और बेहाल हुई रीटा ने निढाल सी होकर चूत ढीली छोड़ी तो कसाई राजू ने अधमुइ रीटा को रूई पिजंने वाली मशीन की तरह पिजंना शुरू कर दिया। रीटा के ऊपर की साँस ऊपर और नीचे की साँस नीचे रह गई। पहले एक मिनट तो रीटा को लगा वह मर जायेगी, परन्तु तुरन्त ही रीटा का दर्द काफूर हो गया और वह अलौकिक स्वर्गिक सुख में विचरण करने लगी।
चुदती चूत ने ठेर सारा पानी उगल दिया, तो लण्ड बिना तकलीफ अंदर बाहर घचर पचर की मीठी मीठी आवाज के साथ चूत में अन्दर बाहर फिसलने लगा।
अब राजू ने छमक छल्लो को चुच्चियों से पकड़ कर ठप्पे पे ठप्पे मारने आरम्भ किये, तो रीटा की ठरक सातवें आसमान पर और मस्ती अंतिम छोर तक पहुँच गई। अब तो बेशर्म रीटा अपनी चूत को पूरी तरह से ढीला छोड़ कर गाण्ड को एक एक फुट ऊपर उछाल देती।तब राजू तैश में वेग से धक्का मार कर उसकी उछाल को दुगने वेग से दबा देता, तो रीटा गुदगुदे बैड में धंस सी जाती। अन्ततः लण्ड का मुँह पीड़ा से बिलबिलाती रीटा की बच्चेदानी में फंस गया।
राजू का लण्ड जब जब रीटा की चूत में अंदर जाता तो राजू के लण्ड की गरारी पर चूत की मुलायम दीवारों की रगड़ से लण्ड मजे से गदगदा उठता और राजू बकरी सा मिनमिना उठता। तब लण्ड रीटा के दाने को रगड़ता हुआ रीटा की बच्चेदानी से टकरा कर रीटा को गुदगुदा जाता तो हरामी रीटा मजे से दोहरी हो प्यार में अपने चूचों को राजू के सीने से रगड़ कर राजू के मुँह पर चुम्बन जड़ देती। जब राजू लौड़े को बाहर खींचता तो रीटा अपनी चूत की फाँकों को ज़ोर से सुकौड़ कर लौड़े को पकड़ सा लेती।
एक बार तो राजू को लगा कि रीटा की चूत उसके लन का कचूमर सा बना देगी। नन्ही रीटा के जोश खरोश के सामने राजू के हवली लौड़े की हवा सरक गई।
चूत बेहद कसी और लौड़ा बहुत मोटा होने की वजह से रीटा की चूत से पानी फिच्चक पिच्चक करके पिच्चकारियों जैसे निकल रहा था। रसीली चूत के पानी से झाग और झाग से बुलबुले बन के फटते जा रहे थे। लण्ड व चूत से पच्च पच्चर फच्च फच्चर की गुन्डी आवाजें, मस्ताई हुई रीटा की सुरीली ईसऽऽऽ ईसऽऽऽ सिसकारियाँ और किलकारियाँ, पलंग की चरमराहट राजू के दिल दहला देने वाले ठप्पों की थाप की आवाज और दोनों की बहकी बहकी साँसों ने वातावरण को और भी गर्म और रंगीला बना दिया।
वासना के उन्माद में रीटा आपे से बाहर होकर मदहोशी में अनाप शनाप बकने लगी- हायऽऽऽ ले ले मेरी चूत, ईसस ईसस चोद साले मां के लौड़े, चोद लड़की चौद चूतीया और जोर से धक्के मार, ऊईईईई मांऽऽऽ, येसस फासटर, याहऽऽऽ, हारडर, आहऽऽऽ आह फाड़ दे मेरी गुलाबो को सीईईईई, डोन्ट स्टाप रे, हाए मैं चुद गई रेएए, मेरी मम्मीईईई डेडीईई जीइ बड़ा मज़ा आ रहा है, चोद बहनचोद चोद अपनी बहन को, चोद मादरचोद आहऽऽऽ मेरे चोदू राजा मसल दे मेरी जवानी को, चटनी बना दे मेरी एकलौती चूत की, ईस ईईस ले मार ले अपनी बहन की चूत, भौसड़ी के हाय मेरे राजाऽऽऽऽ चक दे फटे देएए मेरी चूत ले वाहऽऽ शाबाश और जोर से यू बासटर्ड मदर फकर।
"ले सम्भाल अपने बाप के लौड़े को ये लेएए और लेएए हायएएए मेरी रानी और जोर से कमर हिला आहऽऽऽ, ये ले भौंसड़ी की, आज चौद दूंगा, तेरी ऐसी की तैसी, तेरे जैसी कई रंडियों को मैंने चौदा, साली कुतिया, तेरी चूत फाड़ के तेरे गले में डाल दूंगा, मां की लौड़ी हंम्फ हंम्फ” करते राजू ने अपने लण्ड से रीटा की चूत में आठ बना कर चोदना शुरू किया, तो रीटा की खुशी के मारे चीखें ही निकल गई।
"हाय रेएए में तो गईईईई !" यह कह रीटा राजू को अपनी गोरी गोरी टांगों और बाहों में दबोच कर राजू से बुरी तरह से चिपक गई और जंगली बिल्ली की तरह राजू के कन्धे में दाँत गड़ा दिये और भूखी चूत की दीवारों को लण्ड पर पूरे जोर से कस दीं।चोदू राजू रीटा की तँग चूत के चूस्से को सह नहीं पाया और वह भी रीटा के साथ झड़ने लगा। धमाके पे धमाका और पिचकारियों पे पिचकारियाँ ! समय रूक सा गया।
रीटा सूखे तिनके की भान्ति काँपने लगी। दोनों हांफते हुऐ एक दूसरे में समा जाने की कोशिश कर रहे थे। हाय हाय करती रीटा अपनी प्यासी चूत से राजू के लौड़े को पूरा जोर लगा लगा कर चूस रही थी। राजू को लगा कि जैसे रीटा की जानदार चूत उसके लण्ड को पी ही जायेगी। राजू का लौड़ा भी कसी चूत की रगड़ाई से लाल और जल सा रहा था। दोनों का भिन्डा कुत्ते और कुतिया की चुदाई के बाद की तरह अब भी भिडा़ हुआ था।
असल में रीटा की चुदाई कम और रगड़ाई ज्यादा हुई थी। धूमधाम से चुदी हुई खस्ता हालत में रीटा के बदन में रह रह कर दर्द की टीसने उठ रही थी। मस्त लण्ड की पिटाई से चूत खूब लाल और सूज गई थी और टांगें बुरी तरह कांप रही थी। राजू ने रीटा की हड्डी पसली एक कर दी थी और उसकी जवानी को चारों खाने चित कर दिया था। रीटा गली के नुक्कड़ पर चार कुत्तों से चुदी कुतिया की तरह कराह रही थी।
पर अब रीटा अपनी ठुकाई से पूरी तरह सन्तुष्ट थी। भयंकर ऐतिहासिक चुदाई के बाद रीटा की प्यासी जवानी तरोतर हो उठी और वह कली फूल बन गई। रीटा की बन्द चूत अब नये नये फूल की तरह थोड़ा सा खिल कर छोटी भौंसड़ी बन गई, चूत की बाहरी फाकें खुल सी गई थीं और बीच में से गुलाबी पंखुड़ियाँ अब दिखाई देने लगी थी। रीटा का अब फेवरेट गेम स्केटिंग से चुदाई हो गया।
रीटा अपनी ठुकाई से पूरी तरह सन्तुष्ट थी। भयंकर ऐतिहासिक चुदाई के बाद रीटा की प्यासी जवानी तरोतर हो उठी और वह कली फूल बन गई। रीटा की बन्द चूत अब नये नये फूल की तरह थोड़ा सा खिल कर छोटी भौंसड़ी बन गई, चूत की बाहरी फाकें खुल सी गई थीं और बीच में से गुलाबी पंखुड़ियाँ अब दिखाई देने लगी थी। रीटा का अब फेवरेट गेम स्केटिंग से चुदाई हो गया।
इस तरह रीटा और राजू का चौदम चुदाई का सिलसिला जारी रहा और रीटा को तो सही मायनों में चुदाई की लत लग गई थी। कई कई बार तो रीटा सुबह सुबह स्कूल की बस चढ़ने से पहले लोगों की नजर बचा कर राजू के कमरे में घुस कर जिद्द करके खड़े खड़े एक टांग उठा कर चुपचाप चुदवा लेती थी। शाम को स्केटिंग करने के बहाने राजू से चुदवाती रहती थी।
रीटा ने अपनी कई सलवारों को नीचे से उधेड़ के रख दिया। कई बार तो रीटा सबके सामने सबकी नजरें बचा कर राजू से घोड़ा घोड़ा खेल खेल कर अपनी उधड़ी सलवार में से ही राजू का लण्ड अपनी चूत में सरका लेती थी।
कभी कभी सब घर वालों और राजू के साथ टेलीवीज़न पर पिक्चर देखते तो रीटा राजू की गोद में टैडीबियर लेकर बैठ जाती और टैडीबियर के नीचे रीटा के हाथ राजू के लण्ड को खूब सहलाती और राजू रीटा की चूत रगड़ता रहता।
कई बार तो रीटा बैठे बैठे बिना हिले ही राजू के पप्पू को अपनी चूत में भींच भींच कर पप्पू के पसीने निकाल देती थी।
कभी कभी मस्ती में अकेले में रीटा नन्गी होकर राजू को लण्ड पर बैठ झूले लेती तो कभी राजू रीटा को अपने खड़े लण्ड से खूब पीटता। कई बार तो रीटा लण्ड से पिटती पिटती ही झड़ जाती थी। कभी कभी रीटा लजीज गालियों के साथ राजू के थप्पड़ शप्पड़ भी ठोक देती थी, तो राजू ने हिंसक रीटा की गाण्ड को झाड़ू, बैट, चप्पल और बैल्ट से भी खूब पीटा और जंगली रीटा को भी पीट कर चुदने में खूब मज़ा आता था। ना जाने कितनी बार रीटा ने राजू को शावर के नीचे अपने मूत से नहलाया और कई बार तो रीटा दीवाने राजू को अपना पेशाब भी पिला चुकी थी।
रीटा हर बार नये नये अन्दाज और आसन में चुदना पसन्द करती थी। राजू ने रीटा को अलग अलग जगह पर दिन रात खूब चौदा मारा।किचन में मक्खन लगा कर, डायनिंग टेबल पर टमेटो केचअप लगा कर, गैराज में कार के बोनट पर ग्रीस लगा कर, शावर के नीचे और टब बाथ में तेल लगा कर, छत पर रात को चान्दनी के नीचे थूक लगा कर, लैदर के सोफे पर जूतों की पालिश लगा कर, घास पर झाड़ियों के पीछे क्रीम से और ना जाने कहाँ कहाँ भौंसड़ी की रीटा चुदती रहती थी। रीटा की वासना दिन दुगनी और रात चौगनी होती जा रही थी। मस्त रीटा ने राजू को लण्ड को एक महीने में ही निचौड़ कर रख दिया। कभी कभी रीटा राजू से जिद कर के पाँच पाँच बार चुदवाने के बाद भी और चुदवाने की जि़द करती। अब राजू रीटा से अब कतराने लगा था। रीटा को अब समझ आया कि हर महीने मतवाली मोनिका नये आशिक से चूत क्यों मरवाया करती थी। फिर राजू के डैडी की ट्रांसफर किसी और शहर में हो गया और राजू वहाँ से दूसरे शहर में चला गया।
तनहा रीटा अपनी मासूम चूत की ठरक पूरा करने के लिये ना जाने क्या क्या अपनी चूत और गाण्ड में सटका चुकी थी - बैंगन, कमल-ककड़ी, हेयर ब्रश, हेयर ड्रायर, सैंडल, कोका-कोला की बोतल, मोमबत्ती, केला, घीया, खीरा, छल्ली, तौरी, कचालू, टेलीवीज़न रीमोट, टैलीफ़ोन का हैंडसेट, फ़्लॉवरपॉट, पैन और पैंसिल।
ये सब करते करते और गुदगुदे बिस्तर पर नंगी हो लुढ़कियाँ लगाते लगाते रीटा को अपने अंग ही चुभने लगते थे। ऊपर से मोनिका के दिये हुई ब्ल्यू मूवीज़ और मस्त राम के सैक्सी नावल देख और पढ़ कर रीटा की चूत ने "चोदा मरवाओ- चोदा मरवाओ !" की बगावत कर दी।
फिर एक दिन स्कूल बस खराब होने की वजहा से रीटा के डैडी ने अपने नये चपड़ासी को साईकल से रीटा को स्कूल छोड़ने और लाने की ड्यूटी लगा दी।चपड़ासी नया नया गाँव से शहर आया था, खूब जवान, हटाकटा और खूब तन्दरूस्त था। गौरखा होने से उसका रंग भी साफ व गोरा था। और सब उसे बहादुर के नाम से पुकारते थे।
सुबह सुबह मम्मी ने बहादुर को रीटा के कमरे में रीटा का स्कूल बैग तैयार करने के लिये भेज दिया। जब बहादुर अन्दर आया तो ताज़ी ताज़ी नहाई रीटा ड्रेसिंग टेबल के सामने बैठी अपने बालों को संवार रही थी। ना जाने क्यों बहादुर की जवानी को देख रीटा की चूत में मीठी सी सरसरी सी दौड़ गई।
कुछ सोच कर रीटा ने बहादुर को अपने जुराबें और हील वाले सेन्डिल पहनाने को कहा।
बहादुर रीटा के सामने बैठा तो शरारती रीटा ने अपना अपने नन्हे नन्हे सुडौल और सुन्दर पैर बहादुर की गोदी में रख दिये।
बहादुर के रीटा की मरमरी पिडंली पकड़ कर सेन्डिल पहनाने लगा।
मर्द के खुरदरे हाथों के स्पर्श मात्र से ही रीटा की चूत फड़फड़ा उठी और झट से पनीया गई।
शैतान रीटा लापरवाही से गुनगुनाती हुई अपने बालों में कंघी करने लगी। रीटा ने महसूस किया कि बहादुर भी कुछ ज्यादा ही रीटा की टाँगों पर हाथ फ़ेर रहा था। बहादुर रीटा की मलाई सी चिकनी टाँगों पर हाथ फ़ेर रात को मुठ मारने का सामान बना रहा था।
रीटा ने भी नौकर को शह देने के लिये अपना पैर से बहादुर के लण्ड को सरेआम दबा दिया और पैर से सहला कर बहादुर के लण्ड को खडा कर दिया। फिर बेशर्म रीटा ने बहादुर के लण्ड की टौटनी को पैर के अंगूँठे और उंगली में लेकर जोर से दबाया तो बहादुर चिंहुक पड़ा। रीटा के चेहरे पर शरारती मुस्कुराहट आ गई।
फिर स्ट्रेप बांधने के लिये रीटा ने अपना स्कर्ट ऊपर उठा पैर ड्रेसिंग टेबल पर रख दिया। रीटा तिरछी निगाहों से बहादुर की झुकी झुकी नजरों को अपनी स्कर्ट कर अंदर अपनी पैंटी से चिपकी देख समझ गई कि चूतिये को आसानी से पटाया जा सकता है।
फिर रीटा अपना स्कूल बैच को बहादुर के हाथ थमा कर चूच्चे को आगे बढ़ाती हुई बोली- जरा यह भी लगा दो।
बहादुर घबरा कर पिन की तरफ इशारा कर बोला- बेबी यह चुभ जायेगा तुम खुद ही लगा लो।
रीटा टाई बांधती बोली- अरेऽऽ कैसे चुभेगा? एक हाथ अन्दर डाल कर लगाओ नाऽऽ।
बहादुर थूक सटकता, रीटा की शर्ट में हाथ डाल कर बैच लगाने लगा तो रीटा प्यार से बोली- ठहरो बहादुर ऐसे नहीं !
फिर रीटा ने लाहपरवाही से अपनी शर्ट के अगले तीन बटन खोल दिये और बोली- अब लगाओ, बड़ी आसनी से लगेगा।
रीटा ने शर्ट के अंदर कुछ भी नहीं पहन रखा था और उस नवयौवना की आवारा रसभरी छातियों की गोलाइयाँ व कटाव सरेआम नुमाया हो रही थी।
रीटा के गोरेपन और जवानी के कसाव कटाव से रीटा की पुष्ट उरोजों में गुलाबी और नीली गुलाबी नसें साफ दिखाई दे रही थी। खुले गले में से उफनते उरोजों की छोटी छोटी गुलाबी चुचकियाँ बहादुर की आँखों से लुका छिप्पी खेल रही थी।
रीटा भी नम्बर एक की मां की लौड़ी थी, अपनी शर्ट के ऊपर से, अपने चुच्चे की चौंच पे उंगली लगाती बोली- बहादुर बिल्कुल यहाँ लगाना है, टिप पे, जरा जल्दी करो।
घबराये और हड़बड़ाये बहादुर ने अपना पूरा का पूरा हाथ रीटा की शर्ट में डाल दिया। पर बहादुर अब थोड़ा संभल चुका था, वह रीटा को लाहपरवाह समझ हाथ निकालते निकालते रीटा के ठोस स्तन को भींच कर खींच सा दिया। रीटा समझ गई कि बहादुर जाल में तो फंस गया है पर बहादुर का डर को दूर करने के लिये कुछ करना पड़ेगा।
रीटा का स्कूल बैग साईकल के पीछे रख बहादुर ने रीटा की बगलों में हाथ डाल कर रीटा को उठा अगले डण्डे पर बैठाया। ऐसा करते बहादुर ने बहुत चालाकी से रीटा की चूचों की सही ढंग से दुबारा मालिश कर दी। मस्त रीटा स्कर्ट को खूब ऊपर उठा के सायकल के डण्डे पर बैठ गई। रीटा ने सोचा काश बहादुर की लेडी सायकल होती और वह शान से बहादुर के लण्ड पर बैठ कर स्कूल जाती।
रास्ते में रीटा की जवान चूचों और टाँगों को देख देख कर बहादुर का लण्ड फुंफकार उठता।
बातों बातों में रीटा बहादुर से और बहादुर रीटा से खुलता चला गया। बहादुर ने बताया कि उसकी शादी नहीं हुई और वह अकेला रहता है।तो रीटा की जोरों से गाण्ड कसमसा उठी और चूत में सितार सी बजने लगी। रीटा की प्यासी चूत में अब जैसे असंख्य बुलबुले से फूटते जा रहे थे, रीटा बोली- बहादुर तुम मुझे बहुत पसन्द हो।
रास्ते में बहादुर ने इशारा करके बताया कि वो उस का घर है, तो रीटा के दिमाग में बिजली सा विचार आया। फटाक से अपनी टांगों के बीच को हाथ से दबाती बोली- हाय बहादुर, मुझे बड़ी जोर से पेशाब आया है, प्लीज़ जरा जल्दी से अपने घर ले लो, नहीं तो यहीं निकल जायेगा।
"ओह अच्छा बेबी !" यह कह बहादुर ने साईकल तेज चला कर अपने घर के आगे रोक दी। मौका देख बहादुर ने रीटा की बगल में हाथ डाल कर रीटा के चूचों को सरेआम अपनी मुट्ठियों में भींच कर रीटा को साईकल से नीचे उतारा तो रीटा के मुंह से मदभरी सिसकारी निकल गई।
"आह बहादुर ! जल्दी ! मुझे लगता है कि मेरी फट ही जायेगी।" रीटा अपनी चूत को जोर जोर से स्कर्ट के ऊपर से रगड़ती बोली।
"तुम साईकल को ताला लगाओ और मैं ताला खोलती हूँ।" हरामज़ादी रीटा ने चाबी निकालने के बहाने बहादुर की पैंट की पाकीट में हाथ डाल कर बहादुर का अधअकड़ा लण्ड का आकार भांपा तो सिहर उठी।
बहादुर का लण्ड भी कन्या के हाथ का स्पर्श से और तन गया।
रीटा ताला खोल, ठरक में हांफती और लड़खड़ाती सी कमरे अंदर घुसी। बहादुर टायलट की तरफ इशारा कर बोला- बेबी, टायलट वह है।
हरामी रीटा मासूमीयत से बोली- बहादुर, मुझे अकेले जाते तो बहुत डर लगता है, तुम साथ आ जाओ नाऽऽऽ !
यह सुन कर ठरकी बहादुर के लण्ड की बांछें खिल गई और वह रीटा के पीछे कुते सा दुम हिलाता चल पड़ा। राजू से गाण्ड मरवा मरवा कर रीटा की चाल अब और भी मस्तानी हो गई थी। ऊपर से रीटा बहादुर को उकसाने के लिये अपनी स्कूल स्कर्ट ऊपर उठा कर अपने चूतड़ जानबूझ कर दायें बायें उछालती बहादुर के आगे आगे चलने लगी।
रीटा टायलट के आगे ठिठकी तो बहादुर का लण्ड रीटा की हाहाकार करती गाण्ड में भिड़ गया।
"आऊचऽऽऽ सारी बहादुर, लाईट कहाँ है ?"
बहादुर ठिठकी हुई रीटा के पीछे से हाथ बढ़ा कर टायलट की लाईट का बटन टटोलते टटोलते रीटा की गाण्ड पर अपना लण्ड घिस कर उचक कर एक घस्सा मार दिया- यही तो थी कहाँ गई? ये है लाईट।
रीटा को बहादुर का सूखा घस्सा बहुत ही प्यारा लगा और जवाब में रीटा ने भी अपनी शानदार गाण्ड को थोड़ा सा पीछे उचका कर बहादुर के खड़े लण्ड को गुदगुदा दिया।
अचानक रीटा मुड़ी और अपनी मम्मे बहादुर के चौड़े चकले सीने से भिड़ा दिये और अपनी स्कर्ट हल्की सी ऊपर उठा कर बोली- जरा मेरी कच्छी तो उतार दो।
रीटा जैसी सुन्दर लौंडिया की चूत देखने के चक्कर में बहादुर बैठ कर कांपते हाथों से रीटा की कच्छी को कमर से नीचे खिसका कर घुटनों तक सरका दी।शरारती रीटा ने बहादुर के कन्धे का सहारा लेते हुए अपनी सुडौल चिकनी टांग को सुकोड़ कर कच्छी से पांव बाहर खींच कर बहादुर को अपने गुलाबी गदराये यौवन को झलकी दिखा दी। तीर निशाने पर लगा और बहादुर का लण्ड कच्छे में फड़फड़ा कर घायल हो गया।
फिर रीटा बहादुर के हाथ में अपनी कच्छी पकड़ा कर बहादुर को टायलट के दरवाजे पर ही रोकती बोली- बहादुर, तुम यही ठहरो नहीं तो मेरी शेम-शेम हो जायेगी। मैं अंदर अकेली ही मूत के आती हूँ।
अब रीटा की पीठ बहादुर की तरफ थी। रीटा ने अपना स्कर्ट ऊपर उठा कर अपने चाँद से गोल गोल चूतड़ों की नुमायश लगा दी। काले हाई हील वाले सेन्डिल और लम्बी मरमरी टांगें और मलाई सी गाण्ड देख बहादुर के मुँह से लार टपकाता सोचने लगा- क्या गज़ब की गाण्ड है, अगर इसकी गाण्ड पटाका है, तो चूत तो धमाका होगी।
बैठते ही रीटा की फुद्दी ने फीच्च शीऽऽऽऽऽऽ से पिशाब का शिशकारे की मस्त आवाज सुन बहादुर के लण्ड ने 'चोद डालो, चोद डालो !' के नारे लगाने शुरू कर दिये। फिर रीटा ने खड़े होकर स्कर्ट नीचे कर दी तो बहादुर के लण्ड ठण्डी सांस भर कर रह गया।
फिर रीटा बहादुर के हाथ से अपनी कच्छी लेकर अपने चूतड़ों को सहलाती बोली- उफ तुम्हारे डण्डे ने तो मेरा बुरा हाल कर दिया है। हाय बहादुर, मुझसे तो अब चला भी नहीं जा रहा ! उई मांऽऽऽ"।
रीटा अपनी स्कर्ट पीछे से ऊपर उठा कर अपने गोरी गोरी गाण्ड पीछे उचका कर साईकल के डण्डे के निशान बहादुर को दिखाती बोली।
रीटा की गोरी चिट्टी जांघों के पीछे साईकल के डण्डे के लाल लाल निशान पड़े हुए थे।
"बहादुर थोड़ा सहला दो नाऽऽऽ !" रीटा बहादुर को आँखों ही आंखों में पी जाने वाली नजरों से देखा तो बहादुर के लण्ड में झुरझुरी सी दौड़ गई।
बहादुर ने रीटा को सामने पड़ी चारपाई पर उल्टा लिटा कर रीटा की जांघों को डरते डरते सहलाते बोला- बेबी, कुछ आराम आया?
रीटा बोली- नहीं, थोड़ा ऊपर करिये तो बताती हूँ।
बहादुर ने हाथ थोड़ा ऊपर सरका दिया- बेबी, अब कुछ आराम आया?
रीटा सरसराते स्वर में बोली- नहीं, थोड़ा सा और ऊपर करिये तो बताती हूँ।
बहादुर ने हाथ ओर ऊपर सरका दिया- अब?
मस्ती में रीटा स्कर्ट उलटती बोली- नहीं, जरा सा और ऊपर करिये तो बताती हूँ !
बहादुर एक हाथ से अपना लौड़ा रगड़ने लगा और दूसरे हाथ से हाथ रीटा की मक्खन सी गुदगुदी गाण्ड को मसलने लगा- अब कुछ आराम आया?
बेहया रीटा टांगों को चौड़ाती बुदबुदाती सी बोली- नहीं, जरा बीच में करिये तो बताती हूँ।
बहादुर अपनी अंगुलियों से रीटा की बुंड टटोलता बोला- अब कुछ आराम आया क्या?
मस्ती में रीटा सिर को हाँ में हिलाती बोली- हूमऽऽऽ जरा थोड़ा और अन्दर और जोर से करिये तो बताती हूँ, सीऽऽऽ !
रीटा के मुँह से अनजाने में बहुत जोर से आनन्द भरी सिसकारी फूट पड़ी जैसे किसी ने गर्म गर्म तवे पर ठण्डा पानी छिड़क दिया हो।
धूर्त बहादुर अपने खड़े लौड़े की टोटनी को अंगूठे और उंगली में रगड़ता हाथ को रीटा की नमकीन व चांदी सी चपडगंजी चूत को मुट्ठी में जोर से भींचता बोला- बेबी अब कुछ आराम आया?
रीटा अब बोलने वाली हालत में नहीं थी- ओर जोर से बहादुर सीऽऽऽ ऊईऽऽऽ सीऽऽऽऽ।
बहादुर ने एक मोटी और खुरदरी उंगली रीटा की गीली चूत में पिरो दी तो रीटा की छोटी छोटी मुट्ठियाँ चादर पर कस गई- सीऽऽऽऽ आहऽऽऽ ! ये क्या कर रहे हो बहादुर सीऽऽऽऽ आहऽऽऽ !
बहादुर रीटा की चूत में उंगली घुमाता और छोकरी की चूत का जायजा लेता बोला- बेबी, लगता है तुम काफी खेली खाई हो।
रीटा पलटी और मुस्कुरा कर बोली- इस में शक ही क्या है, तुम बतलाओ, खेलोगे मुझसे?
बेहया रीटा ने बहादुर के खेलने के लिये अपनी शर्ट के सारे को सारे बटन झटके से चटाक चटाक करके खोल कर अपने उरोज़ों को बेशर्मी से आगे उचका कर हिला दिया, तो बहादुर रीटा का पारे सी थरथराती गोलाइयों को देखा तो ठरक से पागल हो गया।
फिर रीटा ने बड़ी अदा से अपने गुलाबी निप्पलों को अपनी छोटी छोटी अुंगलियों की चुटकियों में मसला तो दोनों निप्पल तैश में आकर बुलेटस के माफ़िक अकड़ कर बहादुर की तरफ तनते चले गये।
बहादुर आँखों से रीटा की जवानी का रसपान करता घबरा कर हकलाता सा बोला- वो ! वो ! मैं बेबी?
पर रीटा अब रूकने वाली नहीं थी रीटा ने चारपाई पर बैठे बैठे अपने कपड़े उतार नंगी होती चली गई। हील वाले सेन्डिल के अलावा रीटा अब बिलकुल नंगधड़ंग थी और बेइन्तिहा सैक्सी लग रही थी। अब रीटा अपने घुटने मोड़े चारपाई पर उकड़ू बैठ गई। सर से पाँव तक नन्गी रीटा बहादुर के पैंट के तम्बू को हसरत भरी निगाहों से देखते हुए होले होले अपनी सुडौल मरमरी टांगों को दायें बायें चौड़ाती चली गई और शानदार अंगड़ाई तोड़ती बोली- बहादुर आओ नाऽऽऽ ! ज़रा देखूँ तो तुम कितने बहादुर हो?
इस अवस्था में रीटा का संगमरमर से तराशा जिस्म तड़क सा उठा।
टांगें चौड़ाते ही रीटा की फूल सी खिली हुई चूत का झिलमिल करता दो इंच लम्बा चीरा और बिन्दी सी गाण्ड का रेशमी सुराख का रोम रोम नुमाया हो उठा। टाँगों को दायें बायें चौड़ाने से डबडबाई चूत का सुर्ख दान भी कसमसा कर चूत की फांकों से सरसरा कर बाहर आकर लिश्कारे मारते लगा, तो बहादुर का बेहाल लण्ड पिंघलता चला गया।
दुनिया का सारा हुस्न जैसे अलबेली रीटा में समाया हुआ था। मस्ती में आ रीटा अपनी चिकनी चूत और गाण्ड को भींचने और खोलने लगी तो बहादुर ठगा सा टकटकी बांधे शहर की लौंडिया की कयामत सी खूबसूरत, तन्दरूस्त, पनीयाई हुई और गुलाबी सुकड़ती फैलती चूत और गाण्ड देखता रह गया। बहादुर का लौड़ा रीटा की रसभरी दशहरी आम सी पकी हुई चूत को देख डण्डे सा खड़ा हो गया।
"हायऽऽऽ बहादुर ! कितना सताओगे मुझे? कुछ करो नाऽऽऽ !" नशीली अधखुली आँखों से देखती और अंगड़ाई लेती रीटा की छोटी छोटी मुट्ठियाँ अब भी हवा में ही थी।
बहादुर रीटा का खुला आमन्त्रण पाकर डरते डरते रीटा के सन्तरों को पौं पौं कर दबाने लगा और दूसरे हाथ से रीटा की दहकती और रिसती चूत में उंगली करने लगा। रीटा की बल खाई नागिन सी पतली कमर के नीचे रीटा के सरसराता यौवन का रस रीटा की गाण्ड को गीला करके टिप टिप कर टपकने लगा और फर्श को गीला करने लगा। सुन्दर रीटा मस्ती में आकर सीऽऽ सीऽऽ सिस्कारें मारती और उसी अंगड़ाती पोज़ में अपनी कमर को आगे पीछे करने लगी, तो बहादुर का लण्ड के मुँह से लार टपक पड़ी।
तब रीटा ने चीते की तेजी से झटके से बहादुर को अपने आगोश में खींच लिया और बहादुर की पैंट खोल कर उसके तड़पते लण्ड को आजाद कर दिया। रीटा अपने मुँह पर हाथ रखे हक्की-बक्की सी बहादुर के दस इंच लम्बे और चार इंच मोटे लण्ड को देखती रह गई।बहादुर का गोरा चिट्टा तन्दरूस्त गौरखा लण्ड का सुपारा हद से ज्यादा मोटा और लण्ड केले की शेप का था।
"वाआवऽऽ वाहट ए लवली लौड़ाऽऽ !" चूत के हमदम का आकार देख कर रीटा की चूत की धड़कन तेज हो गई। चुदने को राज़ी रीटा ने बहादुर के लिये अपने आठों द्वार खोल दिये। दो इंच की चूत पूरी तरह चुदरी हुई और अब चुद कर फटने को तैयार थी और चौदू लौड़ा नन्ही चूत को चौद कर भौंसडी बनाने को तैयार था।
हफ्तों से लण्ड के लिये तरसी रीटा ने बहादुर को अपनी गोरी गुदाज़ बाहों में लेकर बहादुर के कन्धे पर अपने दांत गड़ा कर खून निकाल दिया तो पीड़ा से बिलबिला कर और तैश में आकर बहादुर ने अपने एक हाथ से रीटा के फूल से दोनों हाथों को जबरदस्ती पकड़ लिया और अपने डण्डे से अकड़े लण्ड से रीटा के चेहरे को फटाक फटाक से पीट कर, रीटा का चेहरा गुलाबी कर दिया। रीटा को लण्ड की पिटाई से रीटा की ठरक सातवें आसमान पर पहुँच गई, कभी कभी रीटा बहादुर के लण्ड को लपक कर मुँह में लेकर चुमलाने में सफल हो जाती, कभी हिसंक हुई रीटा बहादुर के लण्ड में दांत गड़ा देती तो बहादुर रीटा को बालों से पकड़ कर उसके चुच्चे को मरोड़ देता तो रीटा चीख कर उसका लण्ड छोड़ने पर मज़बूर हो जाती।
इस खेल में समझदार रीटा ने बहादुर के लण्ड पर ढेर सा थूक थूका और लण्ड को खूब गीला पिच्च कर दिया। अनुभवी बहादुर ने नन्ही रीटा की चूत की कसावट को देख कर उसकी चूत पर मुरगी का अण्डा फोड़ कर चूत को अच्छी तरह से चिकनी कर दिया।
निर्लज्ज नंगी रीटा ने बहादुर की गदर्न में बाहों का हार डाल कर बहादुर को जबर्दस्ती अपने ऊपर खींच कर बहादुर की कमर अपनी सुडौल व गुदाज़ टांगों का ताला लगा दिया। बहादुर को लगा कि वह जैसे वह रेशम का ढेर में धंस गया हो।
रीटा के हाथ नीचे सरक कर बहादुर के तपते लण्ड को फड़फड़ाती चूत के सूराख पर घिसने लगी। बहादुर के हाथ रीटा की मखमली और कठोर नारंगियों को नोचता बोला- हाय बेबी, तुम तो बिल्कुल बंगाली रसगुल्ला हो।
रीटा की तो खुशी को मारे किलकारियाँ सी निकल पड़ी- उई ई ईई आहऽऽऽ आहऽऽऽ आज से पहले किसी ने मेरे कबूतरों को इतनी बुरी तरह नहीं रगड़ा ! आहऽऽऽ ! शाबाश मेरे राजाऽऽऽ !
दस इंच का लम्बा लण्ड देख कर लौंडिया की चुदास ठरक अब काबू से बाहर हो चुकी थी। हवस से रीटा का सारा बदन बुरी तरह से सुलग कर जल उठा। अब तो बहादुर के लण्ड की फायरब्रिगेड ही प्यासी रीटा की काम पिपासा बुझा सकती थी। बहादुर समझ गया कि आज पाला शहर की महा-चुदक्कड़ छोकरी से पड़ गया है। बहादुर ने सोचा कि क्या किस्मत है, मेरे लण्ड को रीटा जैसी शहर की येंकी चूत चखने को मिली और वो भी स्कूल की टनाटन लौंडिया।
जंगली बिल्ली सी रीटा ने बहादुर की खोपड़ी के पीछे से हाथ से दबा और दूसरे हाथ से अपना चुच्चे की टोटनी पकड़ कर बहादुर के मुंह में घुसाती बोली- ये ले चूस और चुप कर जा मां के लौड़े ! सीईईईईई, यू बहन चौद, चूत के कीड़े, जल्दी जल्दी चौद अपनी मां को, स्कूल भी जाना है मुझे, देखू तो तेरे लण्ड में कितना ज़ोर है हायऽऽ रेएए !
जैसे ही बहादुर ने रीटा का पूरा का पूरा चुच्चा मुँह में लिया तो रीटा ने अपनी जीभ बहादुर के कान में घुमा कर बहादुर को बावला कर दिया। बहादुर के दाँत रीटा की चूच्चे में धंसे तो मदहोश रीटा को लगा जैसे वह बिना चुदे ही झड़ जायेगी।
तब बहादुर ने रीटा की फड़कती फुदकती और उछलती चूत में एक झटके से अपना लण्ड ठोक दिया तो बेचारी रीटा की अपनी सुधबुध खो बैठी। अण्डे के कारण चूत में फिसलन बहुत ज्यादा थी और रीटा बहादुर का लण्ड जैसे तैसे सहार ही गई। बहादुर का लण्ड भी शहर की लौंडिया की चूत पाते बुरी तरह से मस्ता के अकड़ गया था और रीटा गांव के तन्दरूस्त ताकतवर और फौलादी लौड़े को पाकर निहाल हो उठी और उसकी चूत झनझना उठी।
फिर तो बहादुर के हथौड़े से लन ने रीटा को कसमसाने की भी जगहा नहीं दी और चूत की चूलें हिला दीं। बहादुर के मोटे घीये जैसे लण्ड ने रीटा की चूत के बखीये उधेड़ के रख दिये, हिचकोले खाती नन्ही रीटा किसी छिपकली सी बहादुर से चिपकी और बहादुर के कन्धे में दांत गड़ाये अपनी चीखों को दबा कर बहादुर के लण्ड की पिटाई की पीड़ा पी गई।
रीटा के लम्बे लम्बे नाखून बहादुर की पीठ में धन्से हुए थे और बहादुर रीटा को उछल उछल सरकारी साण्ड की तरह चौदा मार कर रौंद रहा था। बहादुर पूरा का पूरा लण्ड बाहर खींच कर पूरे वेग से वापिस अंदर ठोकता तो रीटा की चुदक्कड़ चूत को थोड़ा सा चैन पड़ता।
कुछ ही देर में बेचारी चारपाई दोनों की लड़ाई को संभाल न पाई और चरमराती हुई टूट गई। चारपाई टूटते हुऐ रीटा बहादुर के नीचे थी और ज़मीन पर गिरने से बहादुर का लण्ड का सुपाड़ा रीटा की बच्चेदानी में घुस गया तो रीटा चिहुंक कर दोहरी हो गई। एक बार तो रीटा को लगा जैसे बहादुर का लण्ड रीटा के मुँह से बाहर आ जायेगा।
दर्द के मारे रीटा की चीख भी रीटा के गले में ही घुट कर रह गई। रीटा को लगा के जैसे किसी पेड़ का तना उसकी चूत में घुस गया हो। बेचारी अधमुई सी रीटा कराह भी नहीं पा रही थी। चारपाई से ज़मीन पर गिरने पर भी बहादुर की स्पीड जरा भी कम नहीं हुई। एक बार तो रीटा को लगा कि वह बेहोशी ही हो जायेगी। वासना को उन्माद में रीटा को सब कुछ धुंधला सा दिखाई देने लगा।
पर रीटा ने जल्दी ही होश सम्हाल लिया और मस्ती में आकर अपनी गोरी गोरी चिकनी टांगों को हवा में ऊपर उठा दिया तो बहादुर का लौड़ा चूत की कुंवारी गहराइयों में विचरण करने लगा। इस आसन में रीटा का दाना बहादुर के लण्ड के साथ अंदर-बाहर होने लगा तो रीटा की चूत तितली सी फड़फड़ा उठी और रीटा फट से झड़ती चली गई- बूम बूमम बूमममम !
मिनमीनाती रीटा ने बहादुर के चूतड़ों में अपने नाखून घोंप दिये। बहादुर ने रीटा को जन्नत में पहुँचा दिया तो रीटा ने बहादुर पर ताबड़तोड़ चुम्मियों की बरसात कर दी। परन्तु बहादुर की स्पीड जरा भी कम नहीं हुई और वह जंगली जानवर की तरह रीटा की मारता रहा, हर ठप्पे पर बहादुर के अण्डे रीटा गाण्ड का दरवाज़ा खटखटा देते थे और अंदर घुसने की नाकाम कोशिश करते। रीटा के चुच्चे बहादुर की छाती के दबाव से पिचक कर गुब्बारों की तरह ऊपर आ चुके थे। बहादुर की भयंकर चुदाई ने कमरे की दीवारों की फचाफच फचाफच कर के माँ चोद कर रख दी थी।
थोडी देर में रीटा अब फर्श पर दो बार झड़ चुकी थी और बहादुर अब भी रीटा को बकरी के मेमने की तरह अन्धाधुन्ध चोदे जा रहा था, चोदे जा रहा था। अन्तिम समय में बहादुर ने सांस रोक कर गाड़ी फुल स्पीड पर छोड़ दी- छकाछक ! छकाछक ! फिर चरम सीमा पर पहुँच कर बहादुर का लण्ड और भी फूल गया और भचाक भचाक से गर्म पानी के रेले छोड़ने लगा। बहादुर ने रीटा को कस कर आपने आगोश में ले लिया और अपना तीर सा लण्ड अब रीटा की चूत में आखिर तक घुसेड़ दिया तो रीटा का बदन तले पापड़ सा अकड़ कर तड़क गया।
रीटा ने भी बहादुर को कस कर बांहो में भींच कर अपनी सैन्डल की हील बहादुर के चूतड़ों में गाड़ दी और अपनी बुंड को हवा में बुलंद कर दी ताकि बहादुर का घीया जड़ तक अंदर ले सके। शुरू से आखिर तक बहादुर ने रीटा को पूरी स्पीड से चोदने से रीटा बहादुर की बहादुरी पर बलिहारी हो तीसरी बार लगातार झड़ती चली गई। रीटा की आँखें धुन्धला गई और चूत सुन्न हो गई थी। रीटा ने पूरे जोर लगा कर बहादुर के लण्ड को अपनी नन्ही चूत में दबा रखा था। फिर रीटा और बहादुर के बदन अकड़ने के बाद एकदम ढीले पड़ते चले गये। दोनों कुत्तों माफ़िक हाँफ रहे थे और फर्श पर दूर दूर तक सफेद पानी फैल चुका था।
कुछ देर बाद जब रीटा ने होशोहवास सम्भाला तो स्कूल लगने में अभी दस मिनट बाकी थे। चुदी हुई रीटा अपने चकराते हुऐ सिर को पकड़ जमीन पर बैठ अपनी बेतरतीब सांसों को सम्भालने लगी। खतरनाक तरह से चुदने के बाद जब रीटा खड़ी हुई तो लड़खड़ा कर धड़ाम से वापिस जमीन पर गिर पड़ी। अब रीटा की टांगें जैसे खोखली हो कर जवाब सा दे गई थी।
बहादुर ने रीटा की जवानी का पोर पोर चटका दिया था। बहादुर के जांबाज लण्ड ने उसकी बच्ची चूत का पतीला बना दिया था। रीटा को ऐसा लग रहा था जैसे पाँच छः जवानों ने रीटा को इकठे ही चोद डाला हो। रीटा ने झुक कर जब अपनी चूत को देखा तो रीटा के मुँह से दबी दबी चीख निकल गई। रीटा की चूत फट चुकी थी और चूत से पानी के साथ खून भी रिस रहा था।
बहादुर ने रीटा की चूत का नक्शा बिगाड़ दिया था। रीटा को अपनी ही चूत पहचान में नहीं आ रही थी। रीटा को लग रहा था जैसे बहादुर का धांसू लौड़ा अब भी उसकी चूत में फंसा हो।
थोड़ी देर बाद बहादुर ने चुदी हुई रीटा को वापिस साईकल पर बिठा स्कूल छोड़ने चल पड़ा।
"बहादुर तुम्हारा लण्ड तो बडा शैतान निकला। कितने कस के ठोका है तुमने मुझे ! मुझे लगा जैसे तुम्हारा छूटेगा ही नहीं। ऊफऽऽ अभी तक मेरा बदन टूट रहा है, हाय मेरी फुद्दी, यू रास्कल आई लव यू !" रीटा की आवाज अब भी काँप रही थी।
रास्ते में बहादुर ने रीटा को बताया कि छोटी उमर में ही उसने गाँव में खूब चौदे मारे हैं इसीलिये बहादुर के लण्ड में बला की तपिश और ताकत आ गई थी।


Read More Related Stories
Thread:Views:
  कमसिन जवानी 373
  गुमराह पिता की हमराह बेटी की जवानी 54,652
  मेरी मस्त जवानी 43,288
  रीटा की तड़पती जवानी 12,484
  रिया की जवानी 7,580
  भाभी को जवानी में चोदा 21,176
  जवानी का रिश्ता 12,078
  विधवा की जवानी 85,772
  जवानी एक बला 6,107
  जवानी का खेल 6,179
 
Return to Top indiansexstories