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जन्नत
11-09-2010, 01:59 PM
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जन्नत
चार दिनों का प्यार ओ रब्बा
लम्बी चुदाई लम्बी चुदाई

रब्बाऽऽऽ

चार दिनों का प्यार ओ रब्बा
लम्बी चुदाई लम्बी चुदाई

तेरे बिन मैं चुदुं किसी से ना
तेरे बिन मारे मेरी चूत कोई ना
कितने ज़माने बाद ओ रब्बा
चोदने तू आया चोदने तू आया

आऽऽऽऽऽआऽऽऽऽऽआऽऽऽऽऽ

खोई रही मैं जांघों में अपनी
आखरी बूंद भी तेरी चूस गयी मैं
सदियों से कितना चुदवा रही हूं
लौड़ा मैं तेरा चूस गयी हूं

आऽऽऽ हऽऽ

खोई रही मैं जांघों में अपनी
आखरी बूंद भी तेरी चूस गयी मैं
सदियों से कितना चुदवा रही हूं
लौड़ा मैं तेरा चूस गयी हूं

अब थक गयी मैं इस चुदवाई में
लूं क्या दवाई लूं क्या दवाई

ओऽऽऽऽ रब्बाऽऽ रब्बाऽऽऽऽ

आऽऽऽऽऽऽ

कित्थे मैं जांवां
सफ़ाई करांवां वे दस रब्बाऽऽ

हर कमरे में हर बिस्तर में
तुम्हारा ही चूसा तुमने ही चोदा
इन जांघों से गुजरा तेरा लन्ड था
तसल्ली मिली ना मज़ा ना आया

ओऽह होऽऽ

हर कमरे में हर बिस्तर में
तुम्हारा ही चूसा तुमने ही चोदा
इन जांघों से गुजरा तेरा लन्ड था
तसल्ली मिली ना मज़ा ना आया

खुद को चुदा के रातें गुजारी
बूब्स को सम्भाले बूब्स को सम्भाले

तेरे बिन मैं चुदुं किसी से ना
तेरे बिन मारे मेरी चूत कोई ना
कितने ज़माने बाद ओ रब्बा
चोदने तू आया चोदने तू आया

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