चढ़ी जवानी बुढ्ढे नू
मेरा नाम राजेश है। मैं इन्दौर में रहता हूँ। मेरी उमर अभी ५२ वर्ष है। मैं एक सरकारी नौकरी में हूँ। मैने कुछ ही दिनों से अनल्पाई.नेट पर कहानियाँ पढ़ रहा हूँ। मुझे भी अपनी आप बीती लिखने की इच्छा हुई। मुझे ये बताने में जरा भी संकोच नहीं है कि ये सब मैने नेहा वर्मा के कहने पर उसे बताया। और उसी ने मेरी आप बीती आप लोगों को बताने को कहा और आप तक पहुंचाया।

यूं तो मेरी आप बीती आप लोंगो को बहुत साधारण सी लगेगी.... क्योंकि ऐसा बहुत से लोगों के साथ होता है। सच तो यह है कि नेहा की कहानी "अंकल की प्यास" कुछ कुछ मुझे अपनी सी लगी।

मैने अदिति से लव मेरिज की थी। वो बहुत ही सेक्सी लड़की थी। हमने अपनी जिन्दगी में बहुत सेक्स का लुफ़्त उठाया, जैसा कि सभी लुफ़्त उठाते है। मेरी बचपन की गलत आदतों से मेरा लण्ड पिछले कई साल से कुछ ढीला पड़ गया था। अब धीरे धीरे रही सही कसावट भी जाती रही। बाज़ार में मिलने वाली सभी दवाईयों को मैं आजमा चुका था।

मेरा डाक्टर दोस्त ने भी खासे एक्सपेरिमेंट मेरे ऊपर किये....पर कोई फ़ायदा नहीं हुआ। एक बार तो मैने क्रीम का भी उपयोग किया .... पर उसका तो और ही उल्टा प्रभाव हुआ। नीम हकीमों के पास भी गया....कई बार तो मेरी तबियत भी इतनी खराब हो गई कि मुझे होस्पिटल में भरती होना पड़ा। इसलिये मेरा आपसे भी ये अनुरोध है कि आप भी अगर ऐसी कोई समस्या से पीड़ित हो तो कृपया नीम हकीम के चक्करों में ना पड़े।

मेरी इस हालत का असर मेरी पत्नी पर भी हुआ। अब वो मेरे से दूर रहने लगी। सेक्स की बात तक नहीं करती थी। मेरे हाथ भी लगाने से उसे अच्छा नहीं लगता था। धीरे धीरे मेरे सुनने में भी आने लगा कि अदिति के किसी दूसरे के साथ लग गई है। घर में इस बात को लेकर मैं उलझ भी पड़ता था। कइ बार मैने पत्नी से विनती भी की कि मुझे भी बहुत इच्छा होती है.... मुझे ऊपर से सहला कर या मुठ मार कर....या लण्ड चूस कर मेरा वीर्य निकाल दिया करो। पर उसका कहना था कि ऐसे करने से उसके तन बदन में आग लग जाती है....उसे कौन चोदेगा फिर। मेरा कहना था कि फिर मैं कहां जाऊं। किससे कहूं.... किसके साथ अपनी प्यास बुझाऊं।

अब तो ये हाल है कि मेरी पत्नी मुझसे ज्यादा बात ही नहीं करती। अब अलग कमरे में सोता हूँ.... बस देर रात तक मैं पोर्न साईट देखता रहता हूँ और मुठ मार कर अपना माल निकाल देता हूँ। अब तो इसकी मुझे आदत सी हो गई है।

इन्हीं दिनों मेरी मुलाकात नेहा से हुई। वो किसी समय में अदिति की छात्रा थी। उसमें मुझे कोई बात अलग सी लगी। उसके बात करने का अन्दाज़ और उसकी सहानुभूति का अन्दाज़ भी अलग था ....कहा जाये तो बहुत मधुर स्वभाव की जान पड़ी। हालांकि वो तो मेरे से बहुत छोटी थी। करीब २५ साल की होगी। फ़िगर और सेक्स अपील उसमे बहुत थी। मुझे वो सुन्दर भी बहुत लगती थी।

एक दिन बातों बातों में उसने मुझे पूछ ही लिया "अंकल.... आप अलग क्यो रहते हैं.... ये कमरा तो शायद बैठक है...." ये सीधे मेरे दिल पर चोट थी।

"ऐसी कोई बात नहीं है.... बस मैं लिखता पढ़ता बहुत हूँ....इसलिये मुझे डिस्टर्बेन्स नहीं चाहिये...."

"पर आन्टी तो आपको बुरा भला कहती है....कि बुढ्ढा तो किसी काम का नहीं है.... बस परेशान करता रहता है...." नेहा ने मुझसे हंसी में कहा। फिर एक चोट दिल पर लगी। मेरी आंखे कब गीली हो गई मुझे पता ही नहीं चला। पर मेरे छलकते आंसू नेहा की नजरों से नहीं छुप सके।

मै ऊपर से मुस्कराते हुए बोला...."अदिति....बहुत प्यारी है....वो तो मजाक में कहती है....देख मैं बुढ्ढा लगता हूँ...." अपनी लड़खड़ाती आवाज को मैं खुद भी नहीं छिपा सका।

"सॉरी अंकल.... मेरा मतलब ये नहीं था....सच में सॉरी...." उसने मेरा हाथ थाम लिया। मैं अपने आंसू नहीं रोक पाया पर दो बून्दें टपक ही पड़ी। नेहा को शायद दुख हुआ।

मेरे माथे को चूमती हुई बोली,"आप तो मेरे पिता समान है.... पर मैं तो आपको बोय फ़्रेंड मानती हूँ ना...." मैने माहौल को हल्का बनाने की कोशिश की। मैने भी हालात को सम्हालने की कोशिश की।

"हाय....मेरी गर्लफ़्रेन्ड.... " मैने उसके उसके गाल चूम लिये।

"अंकल.... कैसी भी बात हो ....प्लीज़ मुझे बताईये ना...."

"अरे छोड़ ना....जख्मो को कुरेदेगी तो फिर से घाव रिसने लगेगा...."

"एक अन्दर की बात बताऊं....आप को शक है ना कि मैं कामुक कहानियाँ लिखती हूँ....हां अंकल मैं ही वो नेहा हूँ...."

"सच.... देखा मेरा आईडिया सही था ना.... तब मै तुम्हे सब बता सकता हूँ।" मैने उसे धीरज से पूरी कहानी बताई.... नेहा ने मेरी इज़ाज़त लेकर उसे अपने छोटे से रेकोर्डर में रेकॉर्ड कर लिया।

"अंकल बुरा ना माने तो मैं एक बात कहू...."

" हां....हां....कहो मेरी गर्ल फ़्रेन्ड...." मैने उसे हल्का सा मजाक करते हुए कहा।

"आपने बताया कि आप में कमजोरी आ गई है.... मुझे लगता है आप इन्टरकोर्स कर सकते है.... बस आंटी का रूखापन आपको मार गया है...."

" हो सकता है.... आज कल उसके और आनन्द के चर्चे भी हो रहे है.... शायद वो उससे खुश भी है...." मैने अदिति की एक तरह से शिकायत की। पर नेहा का इरादा कुछ और ही था। उसने सीधा मुझ पर वार किया -"मैं कुछ आप पर ट्राई करूं...." उसने मेरी पेन्ट के ऊपर से मेरे लण्ड पर हाथ रखते हुए कहा।

मैं एकदम से शरमा सा गया....असंमजस की स्थिति में हो गया कि अचानक ये क्या....। पर दिमाग ने सोचा कि इससे मेरा क्या लेना देना.... करने दो....ज्यादा से ज्यादा मुझे गाली दे कर चली जायेगी और क्या होगा। मेरी सोच कुछ अलग होने लगी। शायद कुछ स्वार्थ समाने लगा था या मैं मजे का मौका नहीं छोड़ना चाह रहा था।

"क्या.... जैसे.... " उसका हाथ मेरे लण्ड पर कसता जा रहा था। मुझे तेज सिरहन आने लगी थी। मैने उसे निराशा से कहा -"नेहा.... छोड़ो ना.... कोई फ़ायदा नहीं है...."

जवाब में उसने मुस्कराते हुए अपने होंठ मेरे होंटो पर चिपका दिये.... मुझे धकेल कर सोफ़े पर लेटाने लगी। मेरे हाथों को उसने अपनी छातियों पर रख दिया। मेरी इच्छायें बलवती होने लगी। अन्दर का मर्द जाग उठा। मेरा ठन्डा खून एकाएक उबल पड़ा। मैंने उसे कस लिया। नेहा ने भी ऐसा दिखाया कि जैसे उसे नशा सा आ गया हो।

"मैं आपको खुश कर रही हूँ....कुछ इनाम दोगे....?"

"हाय....नेहा.... तुम कितनी अच्छी हो...."

"अंकल.... अपना पजामा उतारो ना...." नेहा ने भी अपनी जीन्स उतार दी.... आश्चर्य ....मेरा लंड खड़ा हो चुका था....

नेहा बिस्तर पर लेट गई और अपने दोनों पांव ऊपर उठा लिये। उसकी गोल गोल गाण्ड और चूत रोशनी में चमक उठी। उसकी जवानी और नीचे के कटाव गजब के थे.... फूल जैसी चूत की दो पन्खुड़ियां खिल उठी।
"अंकल ....आओ न...." नेहा ने मुझे चोदने का न्योता दिया। मैं लपक कर उसके दोनो पांवो के बीच आ गया.... मेरे अन्दर नई उत्तेजना थी....लण्ड को खड़ा देख कर और जवान लड़की को देख कर मेरी उत्तेजना फ़ूटी पड़ रही थी। मेरा सुपाड़ा भी फूल कर लाल हो गया। पर उसी समय मुझे अपना कोन्फ़ीडेन्स डगमगाता हुआ दिखाई दिया और मेरा लण्ड मुझे ठन्डा होता जान पड़ा। मैने अपना लण्ड नेहा की चूत में लगाया और धक्का दिया। पर हाय.... वो अन्दर नहीं गया और फ़िसल कर नीचे आ गया। मैने फिर से ट्राई किया पर नहीं घुसा।

मैं घोर निराशा में डूब गया। मैं धीरे से उठा और बिस्तर से नीचे आ गया। मेरा मुँह उतर गया था। नेहा तुरन्त बिस्तर से उतर आई और अपनी जीन्स पहन ली।

"अंकल .... आप बिलकुल ठीक है....इतना कठोर था.... बस आप कोन्फ़ीडेन्स छोड़ देते है...."

"नही....नेहा सॉरी.... तुम बेकार ही ये सब कर रही हो...."

"नहीं अंकल.... बस आप मुझे अच्छे लगते है.... मेरा तो मन आप पर आ गया है...." नेहा ने मुझे प्यार करते हुए कहा।

"क्याऽऽऽ....तुम्हारा दिमाग तो सही है न.... मै बुढ्ढा ५२ साल का और अभी तो तुम ...."

"आपकी गर्लफ़्रेन्ड........ अच्छा अंकल कल मैं इसी समय फिर आऊन्गी.... आंटी तो स्कूल जाती है ना इस टाईम...." नेहा इठलाते हुए चली गई।

मैं सोचता रहा कि क्या कुछ जादू हो गया.... नेहा एक दम से मुझसे कैसे प्यार करने लगी.... हुहं मरने दो........ साली चालू होगी....। वरना कोई क्या ऐसे ही चुदने को तैयार हो जायेगी ??

अगले दिन ठीक उसी समय नेहा आ गई। मैने सोच लिया था कि आज ये जितना मजा देगी उसका मैं उसे पेमेंट कर दूंगा। आते उसने सवधानी से सभी ओर देखा....

"कोई नहीं है.... " मैने हंस कर कहा। और वो मुझसे लिपट गई.... उसने फिर से मुझे उत्तेजित करना चालू कर दिया। इस बार मैने सोच लिया था कि मजे करूंगा और उसे कुछ रूपये दे दूंगा। मैने भी उसके बोबे मसलने शुरु कर दिये। उसने मेरा पायजामा खोल दिया।

आज वो साड़ी पहन कर आई थी। उसने साड़ी समेत अपना पेटिकोट ऊंचा कर लिया और बिस्तर पर लेट गई। मुझे ख्याल ही नहीं रहा कि मेरा लण्ड खड़ा हो चुका था। बस मैं उसके ऊपर चढ गया और लण्ड नेहा की चूत में घुसा डाला।

"हाय अंकल.... मैं तो चुद गई.... कस के चोद दो....प्लीज....धक्के लगाओ.... हाय रे...."

मैं उसकी नंगी भाषा से और उत्तेजित हो उठा। और मस्त हो कर उसे चोदने लगा। मुझे लगा कि सारी जन्नत मेरे नीचे है.... सारी नसें खिंच कर लण्ड में भरने लगी। शरीर में फ़ुरहरी छूट गई.... और.... मेरे लण्ड ने फ़ुहार छोड़ दी। नेहा ने मुझे कस कर पकड़ लिया.... मै झड़ता रहा .... लगा मेरे शरीर की एक एक बूंद निकल गई है.... मैं हांफ़ उठा था।

अचानक मुझे मह्सूस हुआ....अरे ये कैसे हो गया....क्या मैने अभी अभी चुदाई की थी। नेहा अपनी साड़ी ठीक कर रही थी।

"थेंक यू माय बॉय फ़्रेंड.... फ़ोर ए नाईस फ़क...." नेहा ने मुस्करा कर कहा।

"नेहा....पर ये सब.... हो गया ना...."

"आप मर्द है....अभी आप सब कुछ कर सकते हो.... पर कल मैं फिर आ रही हूँ.... कल जरा और जोरदार फ़क....थोड़ा ज्यादा देर तक.... ठीक है ना....।"

मैं नेहा से लिपट पड़ा। मैने जेब से उसे १००० रु का नोट निकाल कर दिया....

"नेहा प्लीज मना मत करना.... अपने लिये मेरी तरफ़ से कोई गिफ़्ट ले लेना...."

" बस अंकल.... मेरी बोली लगा दी ना आपने...."

"नेहा नहीं....नहीं.... क्या मैं अपनी गर्लफ़्रेन्ड को कोई गिफ़्ट नहीं कर सकता....?" मैने अपनी नजरे शर्म से झुका ली....जिसमे गलती का अहसास भी था और ग्लानी भी थी....शायद पकड़े जाने की....

"अंकल लाओ ये रुपये अब मेरे.... पर देखा आप कहते थे ना.... आंटी आपको बुढ्ढा कह्ती थी.... अरे अपनी मर्दानगी बता दो उसे.... "

"नेहा .... पर ये अचानक ही कैसे हो गया...."

"एक जैसे लाईफ़........ एक जैसी रोज की चुदाई.... ज़िन्दगी में एकरसता.... कोई नयापन नही.... नया आसन नही.... वगैरह....ना तो आपमे कोई कमी है और ना ही आंटी में...."

मैं उसे देखता ही रह गया। इतनी सी उमर मे....इतना ज्ञान.... फिर क्या नेहा ने सिर्फ़ मेरा आत्मविश्वास उठाने के लिये ये सब किया।

"अब मैं जाती हूँ.... अंकल कल मैं इसी समय फिर आऊंगी.... याद रहे.... कल कस के चुदाई करना.... कि मुझे नानी याद आ जाये...."

वो लहराती हुई चली गई.... मैं दरवाजे पर खड़ा उसे देखता रह गया.... जिसे मैं शुरु से अपनी बेटी की तरह प्यार करता था उसने मुझे ये सब करके मेरी ज़िन्दगी में फिर से एक आत्मविश्वास जगाया। मुझे अपना बॉय फ़्रेन्ड बना कर मुझे बता दिया कि मैं अभी भी सब कुछ कर सकता हूँ।

ये थी राजेश की आप बीती सच्ची कहानी.... जिसमे मैने अपने आपको हिरोइन के रूप में रखा है। इन दोनो चरित्रों के नाम बदले हुए है। ये आप बीती मुझे एक मेल द्वारा प्राप्त हुई थी। पर मेरा मानना है कि ये एक अस्थाई वासना का रूप है.... जो कि एक जवान लड़की को देख कर आग की तरह भड़क जाती है....तो जल्दी बुझ भी जाती है। एक नयापन जिन्दगी में आता है.... । नसों में नया जोश....नया खून दौड़ पड़ता है.... लण्ड एक बारगी तो फ़ड़फ़ड़ा उठता है.... और आगे....
 


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