चुदक्कड बहु की चूत और प्यासे ससुर का लौड़ा - 6
अजित: असल में वंदना जो कि तुम्हारी उम्र की थी अपनी बहू रेशमा को जब मुझे चुदवा कर माँ बना ली तो ये बात उसने एक औरत को बताई जो कि अपनी बेटी के माँ ना बन पाने के कारण परेशान थी। उस औरत का नाम आयशा था और उसकी बेटी का नाम आकाक्षा था।

रूपा: ओह फिर क्या हुआ? वो अब अजित के लौड़े को सहलाने लगी थी। अजित ने भी उसके ब्लाउस के ऊपर से उसकी चूचि दबायी और बोला: वंदना और आयशा एक क्लब की मेमबर थीं। वहाँ आयशा ने अपना दुखड़ा सुनाया कि उसके बेटी के ससुराल वाले उसको ताने मारते हैं कि वो बाँझ है और उसकी दूसरी शादी की धमकी देते हैं। जबकि उसकी बेटी में कोई कमी नहीं है। वो लोग उसके पति का चेकअप भी नहीं करवा रहे हैं।

रूपा: ओह फिर ?
अजित: आयशा की बात सुनकर वंदना उसे मेरे बारे में बतायी और आयशा अपनी बेटी से बात की और वह मुझसे चुदवा कर मॉ बनने तो तैयार हो गयी। इसी सिलसिले में वंदना आयशा को लेकर मेरे पास मेरे दोस्त के ख़ाली फ़्लैट में आयी। वहीं मैं उनका इंतज़ार कर रहा था। वंदना और आयशा अंदर आइ। वंदना ने मुझे पहले फ़ोन पर बता दिया था कि वो आयशा को बता दी है कि वो भी मुझसे चुदवाती थी। इसलिए मैंने वंदना को अपनी बाहों में लेकर चूम लिया। वह। भी मुझसे चिपक गयी। आयशा ये सब देखकर शर्मा रही थी।

रूपा: आप उस औरत के सामने ही वंदना से चिपक गए। ये कहकर वह अजित के लौड़े को दबाई और वह अब खड़ा होने लगा था। फिर वो पूछी: फिर क्या हुआ?

अजित: फिर मैं वंदना से अलग हुआ और वो मेरा परिचय आयशा से करवाई। आयशा एक गोरी दुबली औरत थी और उसने सलवार कुर्ता पहना था। वह चेहरे से सुंदर थी और उसकी छातियाँ भी उसके दुबले शरीर के लिहाज़ से काफ़ी बड़ी थीं जो डुपट्टे के नीचे से झाँक रही थीं।हम सब बैठे और वंदना ने आयशा के बारे में बताया कि वो एक आर्मी ऑफ़िसर की बीवी है और उसकी बेटी आकाक्षा शादी के ५ साल भी माँ नहीं बन पा रही है और जैसे आपने मेरी बहू को माँ बनाया है वह भी अपनी बेटी आकाक्षा को मुझसे गर्भवती करवाना चाहती है।
रूपा: वाह आपके तो मज़े ही मज़े हो गए होंगे?

अजित: हाँ , मैंने पूछा कि आकाक्षा की उम्र क्या है? वो बोली कि २६ साल की है। मेरा लौड़ा जींस के अंदर खड़ा होने लगा। और मेरी पैंट के ऊपर से उसको दबाया। मैंने देखा कि आयशा और वंदना की आँखें मेरे लौड़े पर ही थी।
रूपा: हाय बड़े बेशर्म हो आप? फिर क्या हुआ?

अजित: अब तुम मेरा लौड़ा चूसो और बीच में नहीं बोलना तो मैं पूरी कहानी सुनाऊँगा।

रूपा ख़ुशी से उसका लौड़ा चूसने और चाटने लगी और अजित ने बोलना चालू किया |

मैं: आकाक्षा मान गयी है इसके लिए?
आयशा : हाँ वो मान गयी है।
मैं: फिर ठीक है, तो आज ही उसे ले आना था? मैंने अपना लौड़ा मसल कर कहा।
आयशा: जी मैं पहले आपसे मिलकर ये देखना चाहती थी कि आप कैसे हैं, वगेरह । आख़िर मेरी बेटी का सवाल है ।
मैं अपना लौड़ा दबाते हुए बोला: आपने मुझे देख लिया अब आपका क्या इरादा है?
आयशा: जी मैं कल उसे ले आऊँगी।
मैं मुस्कुराकर: पर आपने मेरी असली काम की चीज़ तो देखी नहीं है, जिसकी मदद से आपकी बेटी माँ बनेगी?
आयशा झेपकर: उसकी कोई ज़रूरत नहीं है।
मैं: पर मुझे तो आपको दिखाना ही होगा ताकि बाद में आप कोई शिकायत ना करो। ये कहते हुए मैंने अपनी जीन के बटन खोले और ज़िपर नीचे किया और अपनी जीन बैठे बैठे ही नीचे कर दी।अब मेरी चड्डी में खड़ा हुआ लौड़ा उनके सामने था। आयशा उसे ग़ौर से देख रही थी। इसके पहले कि वह कुछ और सोच पाती मैंने अपनी चड्डी भी नीचे कर दी और जींस और चड्डी मेरे पैरों पर आ गयी और मेरे नीचे का पूरा हिस्सा नंगा उन दोनों औरतों के सामने था।
आयशा की तो जैसे आँखें ही फट गयीं , वो बोली: इतना बड़ा?
मैंने उसे सहलाया और आयशा को दिखाकर बोला: अरे ऐसा कोई बड़ा नहीं है , वंदना तो बड़े आराम से ले लेती है। क्यों वंदना?
वंदना: हाऽऽय सच में बहुत मस्त मज़ा देता है। इसको मैं बहुत मिस करती हूँ।
मैंने देखा की आयशा सबकी नज़र बचा कर अपनी सलवार से बुर को खुजा रही थी। मैं मन ही मन मुस्कुराया।
मैं: आओ ना वंदना एक बार चुदवा लो इसके बाद आयशा को भी मज़ा दे देंगे।
वंदना: आह नहीं मुझे यूरीनरी इन्फ़ेक्शन हो गया है, अभी मैं नहीं ले सकती आपको भी इन्फ़ेक्शन हो जाएगा।
मैं: ओह फिर इसका क्या होगा? मैंने लौड़ा दबाकर कहा|
वंदना: चूस दूँ क्या?
मैं: अरे इसे मुँह से ज़्यादा बुर की ज़रूरत है। आयशा तुम ही अपनी बुर से दो ना।
आयशा एकदम से चौक गयी और इस तरह की भाषा से भी वह हड़बड़ा गयी।
वह: नहीं नहीं ये कैसे हो सकता है? मैं शादी शूदा हूँ और मैं तो यहाँ अपनी बेटी की मजबूरी के वजह से ही आयी हूँ।
मैं: अरे तो ये तो देख लो कि मैं तुम्हारी बेटी को कैसे चोदूँगा । तुम पर प्रैक्टिकल कर के बता देता हूँ।
आयशा: नहीं नहीं इसकी कोई ज़रूरत नहीं है।

तब मैं खड़ा हो गया और अपने पैरों से पैंट और चड्डी निकालकर सोफ़े पर बैठी आयशा के पास आकर उसके मुँह के पास अपना लौड़ा लहराकर उसके होंठों से अपना लौड़ा छुआ दिया।

वह एक मिनट के लिए सिहर गई और अपना मुँह पीछे कर लिया। अब मैं झुका और उसकी छातियों को कुर्ते के ऊपर से दबाने लगा और उसके होंठों पर अपना होंठ रखकर उनको चूसने लगा। वह मुझसे अलग होने के लिए छटपटाने लगी। मैंने अब भी उसकी छाती को दबाना जारी रखा। अब मैंने सलवार के ऊपर से उसकी बुर भी दबाने लगा। मैंने देखा कि उसकी सलवार नीचे से गीली थी।

अब उसका विरोध कम होने लगा था। तभी वंदना उठकर आयी और बोली: आयशा क्यों मना कर रही है, चुदवा ले ना , मैं ठीक होती तो मैं ही इसका मज़ा ले लेती। वंदना मेरे लौड़े को सहलाकर बोली।
अब आयशा ने मानो सरेंडर कर दिया। वह मेरा विरोध बंद कर दी। अब मैंने उसको अपनी बाँह में उठा लिया किसी बच्चे की तरह और जाकर बेडरूम में बिस्तर पर लिटा दिया। सबसे पहले मैंने अपनी शर्ट उतारी और पूरा नंगा हो गया। मैंने उसकी आँखों में अपने कसरती बदन के लिए प्रशंसा के भाव देखे। तभी मैंने देखा कि वंदना भी वहाँ खड़ी थी।
मैंने वंदना से कहा: तुम क़ुरती उतारो मैं सलवार उतारता हूँ। वह मुस्कुरा कर मेरा साथ देने लगी। जल्दी ही वह अब ब्रा और पैंटी में थी। पूरी तरह स्वस्थ बदन कोई चरबी नहीं। मज़ा आ गया देखकर। फिर मैं उसके ऊपर आकर उसके होंठ चूसने लगा और वह भी अपना हाथ मेरी कमर पर ले आयी और मेरी पीठ सहलाने लगी ।
अब मैंने उसकी ब्रा के हुक खोले और उसकी ३४ साइज़ की चूचियाँ दबाने और चूसने लगा। वह मस्ती से आहबह्ह्ह्ह्ह्ह कर उठी। फिर मैंने उसके पेट को चूमते हुए उसकी गीली पैंटी उतारी और उसे सूँघने लगा। वह शर्माकर मेरी हरकत देख रही थी।

मैंने उसकी जाँघों को सहलाया और चूमा और फिर उसकी जाँघें फैलाके उसकी ४७ साल की बुर को देखा। पूरी चिकनी बुर थी और साफ़ दिख रहा था कि अच्छेसे चुदीं हुई बुर है। उसमें से गीला पानी निकल रहा था। मैंने झुक कर उसे चूमा और जीभ से कुरेदने लगा। वह उइइइइइइइइ माँआऽऽऽऽऽ कर उठी। मैंने समय ख़राब किए बग़ैर अपना लौड़े का सुपाड़ा उसकी बुर के छेद में रखा और वह कांप उठी और बोली: आऽऽऽऽह धीरे से डालिएगा। आपका बहुत बड़ा है , मैंने इतना बड़ा कभी नहीं लिया है।

मैं: सच क्या तुम्हारे पति का छोटा है?
वो: उनका नोर्मल साइज़ का है पर आपका तो ज़्यादा ही बड़ा है और मोटा भी बहुत है ।
मैं: ठीक है मैं धीरे से शुरू करूँगा।
अब मैं धीरे से सुपाड़ा दबाया और वह उसकी बुर में धँसता चला गया। वह हाऽऽऽऽऽऽऽय्य कर उठी।
मैं : अरे तुम तो इसमे से आकाक्षा को भी बाहर निकाली हो इसलिए कोई समस्या नहीं होगी।
वो: आकाक्षा सिजेरीयन से हुई थी।
वंदना: अरे मुझे भी पहली बार इनका लेने में थोड़ी तकलीफ़ हुई थी पर बाद में कोई समस्या नहीं थी और मज़ा ही मज़ा किया।
अब आयशा के होंठ चूसते हुए और उसकी चूचियाँ दबाते हुए मैंने अपना लौड़ा अंदर करना शुरू किया। आधा लौड़ा अंदर जा चुका था और तभी मैंने ज़ोर से धक्का मारा और पूरा लौड़ा अंदर जड़ तक समा गया। वह अब हाऽऽऽऽऽय्य्य्य्य मरीइइइइइइइइइइइ कहकर थोड़ी सी छटपटाई और फिर शांत हो गयी। मैं भी रुककर उसके होंठ चूसता रहा और चूचियाँ भी चूसने लगा। निपल्ज़ को दबाने से उसकी मस्ती वापस आने लगी और जल्दी ही वह ख़ुद कमर हिलाकर मुझे इशारा कि चलो अब मुझे चोदो।
पर मैं उसके मुँह से सुनना चाहता था सो बोला: संजू मज़ा आ रहा है कि नहीं।
वो: आऽऽऽह हाँ आ रहा है।
मैं: तो चोदूँ अब?
वो : हाऽऽऽऽक्ययय हाँ।
मैं: हाँ क्या करूँ? साफ़ साफ़ बोलो।
वो: उइइइइइइइओ आऽऽऽऽह चोओओओओओओओओदो मैं मुस्कुराकर अब ज़ोर से चुदाई में लग गया और मेरे धक्कों से पलंग बिचारा भी कराह उठा और चूँ चूँ करने लगा। वंदना वहाँ पलंग पर बैठ कर चुदाई का मज़ा ले रही थी, और अपनी बुर सहला रही थी।
अब आयशा भी अपनी गाँड़ उछालकर चुदाई में मेरा साथ देने लगी। हम दोनों पसीने से भीग गए थे और तभी वो और मैं दोनों एक साथ चिल्लाए : हाऽऽऽऽऽऽय्य मैं झड़ीइइइइइइइइइइइइ और मैं भी ह्म्म्म्म्म्म्म्म कहकर झड़ने लगा। वो चिल्लाई: मेरे अंदर मत गिराना।
मैंने समय रहते उसे निकाला और उसके दूध पर अपना वीर्य गिराने लगा और फिर उसके मुँह की तरफ़ भी अपना लौड़ा किया और उसका मुँह खुला और उसके अंदर मेरे वीर्य की एक पिचकारी चली गयी। वह उसे निगल गयी। अब मैंने अपना लौड़ा उसके मुँह में ठूँस दिया और वह प्यार से उसपर लगा वीर्य चाटने लगी और फिर चूस कर और चाट कर मेरे लौड़े को साफ़ कर दी। उसने अपनी छातियों के ऊपर गिरा वीर्य भी ऊँगली में लिया और चाटने लगी।
वंदना: मज़ा आया आयशा?
आयशा शर्माकर: हाँ बहुत मज़ा आया। सच में आकाक्षा को बहुत मज़ा मिलने वाला है। पहली बार तो उसको लेने में थोड़ा दर्द होगा पर बाद में मज़े करेगी। वैसे इनका जूस भी बहुत गाढ़ा और स्वाद है। वह अपनी ऊँगली चाट कर बोली।
मैं: आकाक्षा के साथ तुम भी आ जाना और मज़े कर लेना माँ बेटी दोनों एक साथ। बिर्य उसके अंदर डालूँगा और चुदाई दोनों की करूँगा। बोलो ठीक है ना ?
आयशा: नहीं नहीं आप उसे नहीं बताना कि मैं आपसे करवा चुकी हूँ वरना उसे बुरा लगेगा।
मैं: एक बात बताओ, तुम दोनों क्लब जाती हो माडर्न हो और ज़रूर बाहर भी मुँह मारती होगी।
वो दोनों एक दूसरे के देखने लगीं।
वंदना: अब आपसे क्या छिपाना , हाँ हम शादी के बाहर भी मज़े ले रहे हैं। मेरा तो आपको पता ही है।
आजकल घर का घर में ही चल रहा है।मैं और बहू दोनों मेरे बेटे से चुदवा रही हैं। तुम भी बता दो आयशा या मैं बोलूँ?इसका पति तो आर्मी में है यहाँ कम ही रहता है।
आयशा: मैंने भी घर का घर में ही इंतज़ाम किया हुआ है। मेरा एक २२ साल का नौकर है वही मुझे मज़ा देता है। मैंने उससे बेटी को नहीं चूदवया क्योंकि वह काला है और मुझे गोरा बच्चा चाहिए। वंदना मुझे बतायी थी कि आप बहुत गोरे हैं इसीलिए आपके पास आयी हूँ।
मैं: ओह तो तुम दोनों मज़े से चुदवा रही हो। बिलकुल सही है अगर मर्द मज़ा ना दे पाएँ तो क्या किया जाए।
आयशा बोली: अब मैं बाथरूम जाती हूँ।
फिर हम सब अपने घर चले गए। आकाक्षा की चुदाई का कार्यक्रम अगले दिन १२ बजे दिन का बना था।
यह कहकर अजित बोला: आऽऽऽऽऽऽहहह क्या चूस रही हो। हाऽऽय्य्य्य्य मैं गयाआऽऽऽऽऽऽ । और वह उसके मुँह में झड़ने लगा। रूपा ने एक बूँद भी बाहर गिरने नहीं दिया और पूरा वीर्य गटक गयी। फिर रूपा ने उसके लौड़े को बड़े प्यार से चाटकर साफ़ किया।
अजित बड़े प्यार से उसके सर पर हाथ फेरा।
अजित: चलो खाना खाते हैं उसके बाद हम दुकान चलते हैं।
रूपा: नीरू की चुदाई का क़िस्सा नहीं सुनाओगे?
अजित: फिर कभी , वैसे उसमें कुछ ख़ास नहीं है ।वह मुझसे चुदीं और एक महीने में माँ बन गयी। प्यारी लड़की थी मज़े से चुदवाती थी।
फिर दोनों खाना खाकर आकाश से मिलने दुकान की ओर चल पड़े।
उधर आकाश खाना खाकर चांदनी को फ़ोन किया।
आकाश: चांदनी, कैसी हो?
चांदनी: ठीक हूँ , आप मम्मी से मिले क्या?
आकाश: नहीं तो वो यहाँ हैं क्या?
चांदनी: हाँ आपके पापा से मिलने गयी हैं।
आकाश: सिर्फ़ मेरे पापा तुम्हारे नहीं?
चांदनी: सॉरी मेर भी पापा हैं।
आकाश : मैं अभी फ़ोन करके पूछता हूँ कहाँ है दोनों?
तभी उसने देखा कि रूपा और अजित अंदर आ रहे हैं।
वो: अरे वो दोनों आ गए हैं। मैं बाद में फ़ोन करता हूँ।
बाई।
चांदनी: बाई।
आकाश ने देखा कि उसकी सास काली साड़ी में बहुत सुंदर लग रही थी। उसे लगा कि पापा का हाथ शायद उनके हिप्स पर थे, पर वह पक्का नहीं था।
आकाश आगे बढ़ा और अपनी सास के पैर छूये ।रूपा ने उसे झुक कर उठाया और अपने गले से लगा ली। रूपा की साड़ी का पल्लू गिरा और आकाश के सामने उसकी बड़ी बड़ी छातियाँ थीं, गोरी और आधी ब्लाउस के बाहर ,मोटे चूचे । उसे अचानक याद आया कि वह उसकी सास है तो वो झेंपकर अपनी आँखें वहाँ से हटाया। सास के गले लगने पर उसके बदन की गंध और उसके बड़े चूचे जो उसकी छाती से थोड़ी देर के लिए ही सटे उसे बेचैन कर दिए।
अब वो सब काउंटर के पीछे बने ऑफ़िस में बैठे और चाय पीने लगे।
आकाश चाय पीते हुए बोला: मम्मी आप वापस जाओगी क्या आज? या रात रुकोगी?

रूपा: अरे बेटा बस अभी वापस जाऊँगी। मेरा काम तो हो गया है। मैं तो समधी जी की अहसान मंद हूँ कि उन्होंने मेरी ज़ेवर को लेकर पूरी परेशानी को दूर कर दिया है।

अजित: अरे रूपा जी, सब कुछ इन बच्चों का ही तो है । आकाश , चांदनी और महक का।

रूपा: महक और उसके पति कब तक आएँगे?

आकाश: पापा, मेरी महक दीदी से बात हुई है वह अकेली ही आएँगी शादी में । जीजा जी नहीं आ पा रहे हैं।

रूपा: सगाई में भी वो रहती तो अच्छा होता।

आकाश: अरे USA से आना कौन सी छोटी बात है।

रूपा: हाँ ये तो है। वो वहाँ जॉब करती हैं क्या?

अजित: हाँ वो और दामाद दोनों बैंक में जॉब करते हैं।
अब दुकान पर आइ हो तो एक साड़ी अपने लिए और एक बहू के लिए पसंद करिए।

रूपा: नहीं नहीं आप पैसे नहीं लोगे और मुझे बड़ा अजीब लगता है।

आकाश: मम्मी अपनी ही दुकान है, आप ऐसा मत बोलिए।

फिर आकाश रूपा को साड़ी के काउंटर पर ले गया और रूपा साड़ी का सिलेक्शन करके अपने ऊपर रख कर देखने लगी। आकाश ने देखा कि इस दौरान उसका पल्लू बार बार गिर जाता था। और आकाश के सामने उसकी भारी छातियाँ आ जाती थीं। वह थोड़ा बेचेंन होकर दूसरी तरफ़ देखने लगता। तभी रूपा ने शीशे के सामने एक साड़ी लपेट कर अपने पिछवाड़े को देखा कि कैसी लगती है साड़ी। क्या दृश्य था आकाश का लौड़ा कड़ा होने लगा। क्या उभार था गाँड़ का आऽऽऽऽह। वो सोचा कि मम्मी इस उम्र में भी मस्त माल है।
फिर वह अपने को कोसने लगा कि छि कितनी गंदी बात है। चांदनी को कितना ख़राब लगेगा अगर उसे भनक भी मिल गयी उसके विचारों की।

रूपा: ठीक है बेटा ये ही रख लूँ ना? तुम्हें कैसी लगी?

आकाश हकलाकर: जी जी अच्छी है। आप ये भी रख लीजिए। यह कहकर उसने एक पैकेट रूपा को दिया।

रूपा: ये क्या है?

आकाश: चांदनी की साड़ी, मैंने पसंद की है।आप उसे दे दीजिएगा।
रूपा: अभी सगाई भी नहीं हुई और ये सब शुरू हो गया?

आकाश झेंप कर: क्या मम्मी जी आप भी मेरी टाँग खींच रही हैं।
उधर राजेश का फ़ोन अजित को आया।

राजेश: क्या हाल है।

अजित : बढ़िया।

राजेश: दोनों काम हो गए?

अजित: हाँ रूपा ने ज़ेवर पसंद कर लिए हैं। और कौन सा दूसरा काम?

राजेश: अरे उसे पटाने का काम और क्या?

अजित हँसते हुए: हाँ यार वह भी हो गया। और बहुत अच्छे से हो गया। मैंने उसके तीनों छेदों का मज़ा ले लिया। क्या माल है यार।

राजेश: यार बड़े बदमाश हो जो इतनी जल्दी से इतना मज़ा ले लिए।

अजित हँसते हुए: अपना काम तो ऐसा ही है।

राजेश: अरे भाई अब उसको वापस तो भेजो या वहाँ ही रात भर रख कर ठोकने का इरादा है?

अजित कमिनी हँसी हँसकर : यार मन तो यही कर रहा है पर क्या किया जाए। वापस भेजता हूँ उसे । चलो फिर बात करेंगे।

फिर अजित आकाश और रूपा के पास आया और बोला: चलो सब काम हो गया? राजेश का फ़ोन आया था , कह रहा था कि रूपा जी को जल्दी से भेज दो। सो ,चलो अब मैं आपको बस अड्डे तक छोड़ आता हूँ।

रूपा ने आकाश को गले लगाया और उसका माथा चूमा और अजित के साथ साड़ियों के पैकेट लेकर कार में बैठी और कर बस अड्डे को चल पड़ी।

रूपा: राजेश भाई सब क्या बोले?

अजित: वो पूछ रहा था कि रूपा की चुदाई कर दी ना?

रूपा: छी क्या बोल रहे हैं? वो ऐसा कभी नहीं पूछेंगे। आपने क्या बात दिया।

अजित: हाँ मैंने बता दिया किहमारे सम्बंध अब बहुत मधुर हो गए हैं। आज मैंने तुम्हारे तीनों छेदों का मज़ा ले लिया है।

रूपा: ही भगवान । आप कितनी गंदी बातें करते हो। कोई ऐसा भी बोलता है भला? भाई सब क्या बोले?

अजित: वो बोला कि प्यासे को पानी देना पुण्य का काम है। हम दोनों प्यासे हैं और अपनी अपनी प्यास बुझा लिए तो उसने बुराई क्या है।

रूपा उसकी जाँघ पर हाथ रखकर: आप किसी और को तो नहीं बताएँगे ना?

अजित उसके हाथ को सहलाया और फिर उसके हाथ को उठाकर अपने लौड़े के ऊपर रखकर बोला: जानू, बस तुम इसकी प्यास बुझाती रहो, बाक़ी जो तुम चाहोगी, सब हो जाएगा।

रूपा ने प्यार से लौड़े को पैंट के ऊपर से दबाकर कहा: मैंने कभी मना किया है। आप जब कहेंगे हाज़िर हो जाऊँगी।

अजित ने भी हाथ बढ़ाकर उसकी साड़ी के ऊपर से बुर को दबाकर कहा: सच आज का मज़ा हमेशा याद रहेगा। क्या मस्त बुर और गाँड़ है तुम्हारी। चूसती भी बहुत बढ़िया हो। राजेश की ट्रेनिंग पक्की है।
रूपा: चूसना तो मैंने शादी के पहले ही सीख लिया था ।

अजित: सच मे ? कौन था?

रूपा हंस कर : अगली बार मिलूँगी तो बताऊँगी। चलिए आप हाथ हटाइए नहीं तो साड़ी भी गीली हो जाएगी।

अजित: क्यों पैंटी तो पहनी हो? पेटिकोट भी है।

रूपा: आपके छूने से बाढ़ आ जाती है वहाँ। बस अब हाथ हटायिए। यह कहकर वह अपना हाथ भी उसके पैंट से हटा लेती है।

बस अड्डे पहुँचकर अजित बोला: अरे पैंट में लौड़ा अजस्ट करना पड़ेगा , ये तो एकदम खड़ा हो गया है।

रूपा हँसते हुए बाहर आ गयी और अजित भी पैंट ठीक करके बाहर आया।

फिर वह उसको बस पर चढ़ाकर वापस घर को चला गया।

शाम को संजू आइ तो वह अभी भी नींद में था। संजू चाय बनाकर लाई । अजित फ़्रेश होकर सोफ़े पर बैठा था। उसने संजू को गोद में खींचकर कहा: और पिरीयड तो नहीं आया।

संजू: नहीं अभी तक नहीं आया।

अजित : भगवान ने चाहा तो आएगा भी नहीं।

अजित उसके पेट को सहलाते हुए उसकी चूचि दबाने लगा।
संजू: आऽऽऽह क्या कर रहे हैं। समधन को नहीं चोद पाए क्या? जो मेरे पीछे पड़े हो।

अजित: अरे उसकी तो तीनों छेद का मज़ा के लिया। वो तो ४५ साल की है और तू तो अभी भी जवान है मेरी जान। ये कहते हुए उसने उसकी सलवार के ऊपर से उसकी बुर दबा दी।

संजू: आऽऽह तीन बार झड़ने के बाद अभी भी गरम हो रहे हैं। आप आदमी हो या राक्षश ?

अजित: वो मेरी समधन जाते जाते भी मेरा लौड़ा गरम कर गई है , अब तुम ही उसे ठण्डा कर दो।

संजू मुस्कुरा कर बोली: मैं तो इसको शांत करने को हमेशा तैयार हूँ। ये कहते हुए उसने अपनी गाँड़ उठायी और लौड़े को दबा दिया।

अजित मुस्कुरा कर उसकी सलवार खोल दिया और उसने पैंटी भी निकाल दी। अजित उसको अपने सामने खड़ा करके उसकी बुर को चाटने लगा । वह जल्दी ही गरम होकर हाऽऽऽय्यय करने लगी। अब अजित ने बैठे हुए अपनी पैंट और चड्डी उतार करके नीचे खिसका दी। उसने संजू को खींचकर अपने लौड़े को चूसने का इशारा किया। वह अब उसके पैरों के बीच घुटने के बल बैठ कर उसका लौड़ा चूसने लगी। अब अजित ने उसको अपनी गोद में खींच कर उसकी टांगों को अपनी गोद के दोनों ओर किया और संजू ने भी अपनी गाँड़ उठाकर अपनी बुर के मुँह में लौड़े को रखा और धीरे से उसपर बैठने लगी। अब वह पूरा नीचे होकर उसका मोटा लौड़ा अपनी बुर में निगल चुकी थी।

अजित ने उसके दोनों चूतरों को पकड़ा और उसकी कमर को उछालकर अपने लौड़े पर दबाकर चुदाई करने लगा। संजू भी हाऽऽऽऽय करके अपनी गाँड़ उछालकर उसके लौड़े पर ऊपर नीचे हो रही थी। अजित ने अपनी एक ऊँगली में थूक लगाया और उसकी गाँड़ में डाल दिया। वह आऽऽऽऽऽऽह कर उठी और भी ज़ोर ज़ोर से चुदाई करने लगी। उसकी टाइट बुर में उसका मोटा लौड़ा जैसे फँस सा रहा था। अजित ने महसूस किया कि जवान बुर आख़िर जवान ही होती है। सच में संजू की बुर रूपा की बुर से बहुत टाइट थी। वह अब मस्ती से नीचे से धक्के मारने लगा और संजू की सिसकारियाँ निकलने लगीं। वह अब कुर्ते को उठाकर उसकी चूचियाँ भी ब्रा के अंदर हाथ डाल कर मसलने लगा था। उसके निपल्ज़ भी तन गए थे जिसे उसने मसल कर संजू को मस्ती से भर दिया।

वह उइइइइइइइइइइइइ माँआऽऽऽऽऽऽऽऽऽ करके झड़ने लगी।
अजित भी अपना लौड़ा उछालकर उसकी बुर में झड़ गया। अब संजू जब उसके लौड़े के ऊपर से उठी तो उसकी जाँघों से उसका और अजित का काम रस बह रहा था।

अब दोनों फ़्रेश होकर बैठे तो संजू ने रूपा की चुदाई की पूरी कहानी सुनी और हँसकर बोली: आप भी एक दिन में बिचारि का कोई छेद नहीं छोड़े। सभी में लौड़ा पेल दिए।

अजित भी कमीनी हँसी हँसने लगा। उस दिन और कुछ ख़ास नहीं हुआ।

रात को अजित ने महक से बात की फ़ोन पर आकाश के सामने। वह बोली: पापा मैं शादी में पक्का आऊँगी। सगाई में मुझे माफ़ कर दो।

आकाश: ठीक है दीदी शादी में ख़ूब मस्ती करेंगे। जीजा जी को भी ले आओ ना।

महक: वो नहीं आ पाएँगे। लो पापा उनसे बात करो।

राजीव( महक का पति) : नमस्ते पापा जी, सच में मुझे छुट्टी नहीं मिल रही है। पर मैं अभी भी कोशिश कर रहा हूँ। अगर छुट्टी मिली तो मैं ज़रूर आऊँगा।

अजित: ठीक है बेटा कोशिश करना। अच्छा अब रखता हूँ।

आकाश: पापा लगता है जीजा जी भी आ ही जाएँगे।

अजित: उसका पक्का नहीं है।पर हमारी दुलारि बेटी तो आएगी ही।

तभी उसकी निगाह एक ग्रूप फ़ोटो पर पड़ी जिसमें अनीता अपने दोनों बच्चों के साथ थी। उस फ़ोटो में आकाश बहुत शांत दिख रहा था और महक बहुत चुलबुली दिख रही थी। महक की बड़ी बड़ी छातियाँ टी शर्ट में जैसे फटी जा रही थी। अजित को अपने लौड़े में थोड़ी सी अकड़न महसूस हुई पर उसने अपने सिर को झटका और अपने आप पर कंट्रोल करके सोने चला गया।
अगले कुछ दिनों में सब सगाई की तैयारी में व्यस्त रहे। आकाश और चांदनी प्यारी प्यारी बातें करते रहते। उधर अजित रूपा से गंदी बातें करता रहता। संजू की चुदाई चालू थी और आख़िर एक दिन संजू बोली: साहब , एक महीने से ऊपर हो गया है मेरे पिरीयड को आए हुए।

अजित: ओह बढ़िया, चलो मैं अभी मेडिकल स्टोर से प्रेग्नन्सी टेस्टिंग की किट लेकर आता हूँ। यह कहकर वो किट लेने गया और लेकर वापस आया। वो संजू को समझाने की कोशिश किया कि उसको कैसे उपयोग करना है, पर संजू परेशान होकर बोली: मुझे समझ नहीं आ रहा है।

अजित: अच्छा चलो बाथरूम में चलते हैं। वहाँ पहुँचकर वह उसको सलवार और पैंटी खोलने को बोला। वह दोनों खोल दी और कमर के नीचे नंगी हो गयी। अब वह उसको नीचे बैठ कर मूतने को बोला और किट की स्ट्रिप हाथ में ले लिया और उसके सामने ख़ुद भी बैठ गया ।वह सी सी की आवाज़ के साथ मूतने लगी और अजित ने स्ट्रिप को उसके पिशाब की धार के सामने रखा। अब अजित ने देखा कि स्ट्रिप गीली हो गयी है और उसका हाथ भी पेशाब से गीला हो चुका था। उसने खड़ा होकर स्ट्रिप को ध्यान से देखा। थोड़ी ही देर में स्ट्रिप ने रंग बदला और अजित मुस्कुरा उठा। अब वह अपना हाथ धोया और कमर से नीचे नंगी खड़ी संजू को गोद में उठाकर चूमने लगा।

फिर वह उसे बिस्तर पर लिटाया और बोला: संजू तू प्रेगनेनेट हो गयी मेरी जान। यह कहकर वह उसे बेतहाशा चूमने लगा।

संजू भी ख़ुशी के मारे उससे लिपट गयी और उसको चूमते हुए बोली: साहब, आपने अपना वादा निभा दिया और मुझे एक महीने ही में गर्भ से कर दिया। मैं ये आपका अहसान कभी नहीं भूल पाऊँगी। अब संजू उठी और उसका पजामा खोल दिया और चड्डी नीचे करके उसके नरम सोए हुए लौड़े पर चुंबनों की बरसात कर दी। फिर नीचे जाकर उसके बड़े बॉल्ज़ को भी चूमे जा रही थी। फिर वह बोली: सच में मेरा तो जीवन ही आपने बचा लिया। अब वह मेरी कुतिया सास मुझे ताना नहीं दे सकेगी। मेरा पति भी बहुत ख़ुश होगा। यह कहकर वह फिर लौड़े और बॉल्ज़ को चूमने लगी।

अजित उसे खींच कर अपने गले से लगा लिया और बिस्तर से उठके अपना पजामा पहना और फिर किचन से मिठाई लाया और संजू को अपनी गोद में बिठाकर खिलाया और ख़ुद भी खाया। थोड़ी देर तक उसने संजू को चूमा और प्यार किया । फिर वह उठकर तिजोरी खोला और उसमें से सोने की एक चेन निकाल कर संजू को अपनी गोद में बिठाकर उसके गले में पहना दिया और बोला: संजू, मेरी तरफ़ से गर्भवति होने की बधाई और उपहार।

संजू की आँख में आँसू आ गए , वह बोली: माँ भी बनाया और उपहार भी दे दिया। आप कितने अच्छें हैं।

अजित उसकी चूचि दबाकर बोला: देखो वैसे मैं हूँ तो कमीना पर इन बातों में मेरा विश्वास है कि बच्चा तो भगवान की मर्ज़ी से ही होता है। और सच में आज मैं बहुत ख़ुश हूँ।

उस दिन संजू बड़े देर तक चुदवाइ और उसके जाने के बाद अजित सोचने लगा कि अभी भी इस उम्र में मर्दानगी है मुझमें। और वो मुस्कुरा उठा और अपने लौड़े पर हाथ फेर कर अपनी ख़ुशी को महसूस करने लगा।

सगाई के एक दिन पहले रूपा का फ़ोन आया : कैसे है आप?

अजित: बस तुम्हारे ख़यालों में गुम हूँ।

रूपा: यहाँ मेरी जान निकले जा रही है और आप हैं कि बस मस्ती कर रहे हैं।

अजित: अरे मुझे बताओ ना क्या समस्या है।

रूपा: बस सहमी हुई हूँ कि सब कुछ ठीक से हो जाए।

अजित: अरे घर की ही बात है, अगर कुछ गड़बड़ हो भी गयी तो तुम सब तो अपने ही हो। चिंता छोड़ो।

रूपा: यह कह कर आपने मेरा बोझ कम कर दिया ।

अजित: तो कल तुम सब कितने बजे आ जाओगे?

रूपा: हम सब दो कार से करीब ६ बजे शाम को होटेल रॉयल में पहुँचेंगे। आप वहाँ कितने बजे पहूँचोगे?

अजित: हम लोग एक घंटे पहले पहुँच कर पूरा इंतज़ाम चेक कर लेंगे। हमारे तरफ़ से हमने क़रीब १० परिवारों को बुलाया है। और तुम लोग भी क़रीब १० लोग होगे तो एक अच्छा सा पारिवारिक महोल में सगाई की रस्म हो जाएगी।

रूपा: ठीक है बस सब कुछ बढ़िया से हो जाए।

अजित: सब बढ़िया ही होगा। मैंने दो कमरे भी होटेल में बुक किए हैं। एक में दारू पार्टी होगी, सगाई के बाद और दूसरा कमरे में मैं और तुम मस्ती करेंगे।

रूपा: आप भी ना, मस्ती फिर कभी कर लीजिएगा। बस सगाई अच्छी तरह से हो जाए। और हाँ आपने वो सेट जो पोलिश करके भिजवाया था चांदनी को बहुत पसंद आया है।

अजित: अरे अब सब कुछ तो बच्चों का ही है। चलो कल मिलते है। बहुत दिन हो गए तुमको देखे हुए।

अजित ने फ़ोन काटकर राजेश को लगाया। वो बोला: हाय राजेश क्या हाल है? उसने उसे भाई सांब बोलना बन्द कर दिया था।

राजेश: बढ़िया है , बस सगाई की तैयारी में लगे हैं।

अजित: यार मैंने कल दारू और रूपा की चुदाई का भी इंतज़ाम किया है। ठीक है ना?

रूपा: दारू तो सही है, पर सबकी मौजूदगी में चुदाई कैसे करोगे?

अजित: मैंने प्लान बनाया है। मिलने पर बताऊँगा।


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