चुदक्कड बहु की चूत और प्यासे ससुर का लौड़ा - 5
जैसा की आप लोगो ने चुदक्कड बहु की चूत प्यासे ससुर का लौड़ा की चौथी कड़ी में अपने पढ़ा की संजू ने अपनी साड़ी निचे गिरा दिया और खूब मजे ले रही थी बूढ़े के मुसल जैसे लंड का अब उसके आगे की कहानी पढ़िए |

अब वह बाथरूम जाकर हाथ धोया और फिर जाकर लेट गया और रूपा के बदन की ख़ुशबू को याद करते हुए सो गया।
शाम को उसने रूपा को sms किया: हाई , क्या हो रहा है?

रूपा का जवाब थोड़ी देर से आया: बस सगाई की प्लानिंग।

अजित: हम्म और मुझे मिस कर रही हो?

रूपा: आप मिस कर रहे हैं क्या?

अजित: बहुत ज़्यादा मिस कर रहा हूँ।

रूपा: मैं भी मिस कर रही हूँ।

अजित: अच्छा मैं तुमको कैसा लगता हूँ?

रूपा: अच्छे लगते हैं।

अजित: मेरा क्या अच्छा लगता है?

रूपा: आपकी बातें और आपका अपनापन दिखाना।

अजित: बस और कुछ नहीं?

रूपा: और अभी देखा ही क्या है अभी तक?

अजित: तुम मौक़ा तो दो, और सब भी दिखा देंगे।

रूपा: छी , कैसी बातें कर रहे हैं? कुछ तो उम्र का लिहाज़ कीजिए।

अजित: उम्र का क्या हुआ? ना मैं अभी बूढ़ा हुआ हूँ और तुम तो अभी बिलकुल जवान ही धरी हो।

रूपा: मेरी बेटी जवान हो गयी है और आपका बेटा भी जवान हो गया है और आप मुझे जवान कह रहे हैं?

अजित: ज़रा शीशे में देखो क्या मस्त जवान हो तुम। तुम्हारे सामने तो आज की जवान लड़कियाँ भी पानी भरेंगी।

रूपा: आप भी मुझे शर्मिंदा करने का कोई मौक़ा नहीं छोड़ते।

अजित: मैं सही कह रहा हूँ। तुम्हारे सामने तो अब क्या बोलूँ? तुम बुरा मान जाओगी।

रूपा: नहीं मानूँगी, बोलिए क्या बोलना है?

अजित: तुम चांदनी से भी ज़्यादा हसीन हो जानेमन। रूपा इस सम्बोधन से चौंकी और लिखी: अच्छा अब रखती हूँ।
अजित: नाराज़ हो गयी क्या? आप पढ़ रहे है चुदक्कड बहु की चूत प्यासे ससुर का लौड़ा |

रूपा: अब आप माँ बेटी में तुलना कर रहे हो, तो क्या कहूँ?

अजित: अच्छा चलो जाने दो, ये बताओ अब कब मिलना होगा?

रूपा: अभी तो कुछ पक्का नहीं है। देखिए कब भाग्य मिलाता है हमें।

अजित: ठीक है , इंतज़ार रहेगा। बाई ।

रूपा: बाई।
अजित ने सोचा कि गाड़ी सही लाइन पर है।

अगले कुछ दिन अजित ने पूरा दिन सगाई की प्लानिंग में लगाया। वह चाहता था कि पूरा फ़ंक्शन बढ़िया से हो। रूपा से वह sms के द्वारा बात करते रहता था। तभी राजेश का एक दिन फ़ोन आया कि वह अजित के शहर आ रहा है ताकि सारी बातें सगाई की अच्छी तरह से हो जाएँ। रूपा नहीं आ रही है ये जान कर वह काफ़ी निराश हुआ।
अगले दिन राजेश आया और दिन भर दोनों सगाई की तैयारीयों का जायज़ा लिया और फिर दोपहर को खाना एक रेस्तराँ में खाया। अजित ने बीयर ऑर्डर की तो राजेश बोला किमैं तो जिन पियूँगा। अजित बीयर और राजेश जिन पीने लगा। जल्दी ही राजेश को चढ़ गयी। आप यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

अजित ने सोचा कि इससे नशे की हालत में रूपा की कुछ बातें की जाएँ।

अजित: राजेश भाई ये तो बताओ कि रूपा इस उम्र में भी इतनी सुंदर कैसे है?

राजेश थोड़े से सरूर में आकर: पता नहीं यार, मगर भगवान उसपर कुछ ज़्यादा ही मेहरबान हैं। देखो ना इस उम्र में भी क्या क़यामत लगती है।

अजित: वही तो देखा जाए तो इस उम्र में औरतें मोटी और बेडौल हो जाती हैं, पर वह तो अभी भी मस्त फ़िगर मेंटेंन की है।

राजेश: हाँ भाई सच है अभी भी मस्ती से भरी हुई लगती है।

अजित: एक बात पूँछुँ बुरा तो नहीं मानोगे?

राजेश नशे में : पूछो यार अब तो हम दोस्त हो गए।

अजित: वो विधवा है और तुम दोनों एक ही घर में रहते हो। तुम्हारा ईमान नहीं डोलता ?

वह जान बूझकर पूछा हालाँकि उसको तो पता था कि वो रूपा की चुदाई करता रहता है।

राजेश झूमते हुए : अब यार तुमसे क्या छपाऊँ, सच तो ये है जब मेरा भाई इसको ब्याह के लाया था तभी से मैं उसका दीवाना हो गया था।

अजित: ओह तो क्या तुम उसकी इसके पति के जीते जी ही पटा चुके थे।

राजेश: हाँ यार , मेरी बीवी बीमार रहती थी और जवानी का मज़ा नहीं देती थी। और मेरा छोटा भाई भी इसे ज़्यादा सुख नहीं दे पाता था। सो ये मुझसे जल्दी ही आसानी से पट गयी। सच तो ये है कि चांदनी मेरी ही बेटी है।

अजित उसका मुँह देखता रह गया।

अजित: ओह ये बात है। तो क्या अभी भी तुम उसको चो- मतलब करते हो?
राजेश: हाँ यार पर सबसे छुपाकर। मगर मुझे शक है कि घर में सबको पता है और सब चुप रहते हैं। पर हम अभी भी खूल्लम ख़ूल्ला कभी नहीं करते।

अजित: यार तुम तो बहुत लकी हो ।

राजेश: लगता है कि तुमको भी पसंद है वो। है ना? मैंने तुमको उसे कई बार घूरते देखा है।

अजित: हाँ यार सच में बोम्ब है वो, मेरी नींद ही उड़ा दी है उसने।

राजेश: तुम चाहो तो उसे पटा सकते हो?

अजित: वो कैसे?

राजेश: देखो अभी हमें पैसों की बहुत ज़रूरत है अगर तुम इस समय उसकी मदद कर दोगे तो वह तुम्हारे सामने समर्पण कर देगी।

अजित: ओह ऐसा क्या?

राजेश: वो इस समय ज़ेवरों को लेकर बहुत चिंतित है। तुम इसमे उसकी मदद कर सकते हो।

अजित: अरे ये तो बहुत ही सिम्पल सी बात है। मैं अपनी बीवी के ज़ेवर पोलिश करवा के उसे दे दूँगा और वो उसे मेरी बहु को दे देगी। इस तरह घर का माल घर में वापस आ जाएगा। और सबकी इज़्ज़त भी रह जाएगी।

राजेश: वाह क्या सुझाव है। वो तो तुम्हारे अहसान तले दब ही जाएगी। तुम उससे मज़े कर लेना।

अजित: तुमको बुरा तो नहीं लगेगा।

राजेश: यार इसमें बुरा लगने की क्या बात है? यार औरत होती है चुदाई के लिए। तुमसे भी चूद जाएगी तो क्या उसकी बुर घिस जाएगी?

अजित: आऽऽह यार तुमने तो मस्त कर दिया। अभी उसे फ़ोन लगाऊँ क्या?

राजेश: लगाओ इसमे क्या प्रॉब्लम है।

अजित रूपा को फ़ोन लगाया।

रूपा: हाय ।

अजित: हाय कैसी हो?

रूपा: ठीक हूँ।

राजेश ने इशारा किया कि स्पीकर मोड में डालो और मेरे बारे में यहाँ होने की बात ना करो। ये कहते हुए उसने आँख मारी।

अजित: क्या कर रही हो? राजेश बोल रहा था कि तुम सगाई की तैयारी में लगी हो।
रूपा: हाँ बहुत काम है अभी। राजेश भाई सांब चले गए क्या वापस?

अजित ने आँख मारते हुए कहा: हाँ वो वापस चले गए। वो बता रहे थे कि तुम ज़ेवरों के लिए बहुत परेशान हो?

रूपा: वो क्या है ना मेरे पास इतने पैसे नहीं है कि बहुत महँगे ज़ेवर ख़रीद सकूँ तो थोड़ी सी परेशान हूँ।

अजित: अरे इसमे परेशानी की क्या बात है। तुम ऐसा करो कि कल यहाँ आ जाओ और मेरी बीवी के ज़ेवर पसंद कर लो। तुम उनको ही अपनी बेटी को दे देना। वह आख़िर मेरे घर में वापस आ जाएँगे। मुझे पैसे का कोई लालच नहीं है। मुझे तो बस अपने बेटे की ख़ुशी के लिए चांदनी जैसी प्यारी बहु चाहिए।

रूपा: ये क्या कह रहे हैं आप । क्या आप सच में ऐसा करेंगे? मेरी तो सारी परेशानी ही दूर हो जाएगी।
अजित: अरे मैं यही तो चाहता हूँ कि तुम्हारी सारी परेशानी दूर हो जाए। तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो। और तुमको परेशान नहीं देख सकता। आप यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

राजेश मुस्कुराया और आँख मारी।

रूपा: तो मैं कब आऊँ?

अजित : अरे कल ही आ जाओ और ज़ेवर पसंद कर लो तो मैं उनको पोलिश करवा दूँगा।

रूपा: ठीक है मैं कल राजेश भाई सांब के साथ आ जाऊँगी।

अजित : अरे वो तो अभी वापस गया है क्या फिर से कल वापस आ पाएगा?

रूपा: ओह हाँ देखिए मैं उनको बोलूँगी आ सके तो बढ़िया वरना अकेली ही आ जाऊँगी।

अजित: तुम मुझे बता देना तो मैं तुमको लेने बस अड्डे आ जाऊँगा। बस एक रिक्वेस्ट है।

रूपा: बोलिए ना ?

अजित: कल आप काली साड़ी और स्लीव्लेस ब्लाउस में आओगी।

रूपा: आप भी ना , मुझे हमेशा हेरोयन की तरह सजने को कहते रहते हैं।
अजित: क्या करूँ? दिल से मजबूर हूँ ना। आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो।
रूपा: भाई सांब आप भी ना ।
अजित: एक बात बोलूँ राजेश बहुत लकी है जो हमेशा तुम्हारे साथ रहता है। मुझे तो उससे जलन हो रही है।
रूपा हड़बड़ाकर : उन्होंने ऐसा कुछ कहा क्या?
अजित: क्या कहा? किस बारे में पूछ रही हो?
रूपा: वो कुछ नहीं।
राजेश मुस्कुराया और फिर आँख मारी।
अजित: एक बात पूछूँ ? बुरा ना मानो तो?
रूपा: पूछिए।
अजित: देखो तुम्हारे पति के जाने के बाद राजेश तुम्हारा बहुत ख़याल रखता है । वह तुमको बहुत घूरता भी है। तुम दोनों में कुछ चल रहा है क्या?
रूपा: क्या भाई सांब , आप भी, ऐसा कुछ नहीं है। वो मेरे जेठ जी हैं।
राजेश फिर से मुस्कुराया।
अजित: अच्छा चलो छोड़ो ये सब ,कल मिलते है। हाँ काली साड़ी याद रखना।
रूपा हँसते हुए : ठीक है काली साड़ी ही पहनूँगी। बाई।
अजित: बाई ड़ीयर । उसने फ़ोन काट दिया।
राजेश: अरे अपने मुँह से थोड़े मानेगी। वह बहुत तेज़ औरत है।
अजित: चुदाई में मज़ा देती है?
राजेश: अरे बहुत मज़ा देती है। वह बहुत प्यासी औरत है। पटा लो और ठोको।
अजित: देखो कल क्या होता है? वैसे तुम वापस आओगे क्या उसके साथ?
राजेश: अरे नहीं। तुम मज़े लो। मैं आऊँगा तो तुम्हारा काम बिगड़ जाएगा।
अजित : थैंक्स यार।
राजेश: अब वापस जाता हूँ।
अजित: चलो तुमको बस अड्डे छोड़ देता हूँ।
अजित उसे छोड़कर घर जाते हुए सोचने लगा कि कल देखो रूपा का बैंड बजता है कि नहीं।
सुबह संजू के हाथ की चाय पीते हुए अजित पूछा: संजू तुम्हारा पिरीयड कब आता है?
संजू: जी अगले चार पाँच दिन में आ जाना चाहिए।
अजित मुस्कुराया: इस बार नहीं आएगा। मुझे पक्का विश्वास है कि तुम गर्भ से हो जाओगी।
संजू ख़ुशी से उसकी गोद में बैठ कर उसको चूम ली और बोली: बस राजा आपकी बात सच हो जाए तो मेरा जीवन ही सँवर जाएगा।
अजित: उसकी चूचि दबाते हुए बोला: अच्छा अपने पति से भी चुदवाती रहती हो कि नहीं?
संजू मुँह बना कर: हाँ वह भी तीन चार दिन में एक बार कर ही लेता है पर पाँच मिनट में आहह्ह करके साला खलास हो जाता है।
अजित: चलो ना मैं तो तुमको एक एक घंटे रगड़ता ही हूँ ना। वो चोदे या ना चोदे क्या फ़र्क़ पड़ता है।
तभी रूपा का sms आया: अभी बात कर सकती हूँ?
अजित ने संजू की बुर को सलवार के ऊपर से दबाकर आँख मारकर कहा: समधन से बात करूँगा।
संजू: हमको भी सुनना है प्लीज़।
अजित ने फ़ोन लगाया और स्पीकर मोड में डाल दिया। संजू की सलवार का नाड़ा खोला और उसकी पैंटी में हाथ डालकर उसकी बुर को सहलाते हुए बोला: हाय रूपा कैसी हो?
रूपा : मैं ठीक हूँ, आपको ये बताना था कि राजेश भाई सांब तो मना कर दिए आने के लिए। अब मैं अकेली ही आऊँगी ।
अजित ने संजू की बुर में दो ऊँगली डाली और बोला: कितने बजे तक आ जाओगी?
रूपा: मैं क़रीब ११ बजे तक तो आ ही जाऊँगी। मैं आपको फ़ोन कर दूँगी बस अड्डे से।
अजित: नहीं, तुम मुझे पहले फ़ोन कर देना, ताकि तुम्हें बस अड्डे पर इंतज़ार ना करना पड़े।
फिर अजित ने उसके बुर से उँगलियाँ निकाली और उनको चाट लिया। संजू ने उसके हाथ में हाथ मारा और कान में कहा: छी क्या गंदे आदमी हो। आप पढ़ रहे है चुदक्कड बहु की चूत प्यासे ससुर का लौड़ा |

रूपा: ठीक है भाई सांब।

संजू की चूचि दबाते हुए अजित बोला: वो काली साड़ी याद है ना और स्लीव्लेस ब्लाउस भी। तुम्हें इस रूप में देखने की बहुत इच्छा है।

रूपा: अब मैं आपको क्या बोलूँ, साड़ी तो है पर ब्लाउस चार साल पुराना है छोटा हो गया है। उसमें साँस रुक रही है। समझ नहीं आ रहा है कि क्या करूँ।

अजित: अरे ये समस्या तो सरिता को भी आती थी, हर दो साल में उसका बदन भर जाता था और ब्लाउस यहाँ तक की ब्रा भी छोटी हो जाती थी। वो इसका दोष मुझे देती थी हा हा कहती थी कि मैंने दबा दबा कर बड़ा कर दिया, हा हा । बहुत मज़ाक़िया थी वो।

बातों बातों में अजित कमीनेपन पर उतर आया था।

रूपा: क्या भाई सांब कैसी बातें कर रहे हैं वह भी स्वर्गीय भाभी जी के बारे में।

अजित: अरे वही तो, फिर वह ब्लाउस की सिलाई खोल लेती थी और फिर से सिल लेती थी ढीला करके। पर ब्रा तो नई लाता था मैं बड़े साइज़ की, हा हा।

संजू उसको देखते हुए फुसफुसाई : बहुत कमीने साहब हो आप।

रूपा: आप भी ना कुछ भी बोले जा रहे हैं। मैं समझ गयी कि मुझे क्या करना है। अच्छा अब रखती हूँ, बाई।
अजित : ठीक है मिलते हैं। बाई।
अब फ़ोन काटकर वह संजू को बोला: आज रूपा आ रही है क़रीब १२ बजे। मैं चाहता हूँ कि तुम अपना काम करके खाना लगा कर ११:३० बजे तक चले जाना।
संजू: तो आज समधन की चुदाई का प्लान है, है ना?
अजित: सही सोचा तुमने, कोशिश तो करूँगा ही। अब चुदाई होगी या नहीं यह तो रूपा पर निर्भर है।
संजू: ठीक है मैं जल्दी चली जाऊँगी आप मज़े करना। वह यह कहकर उसकी गोद से उठी और किचन में जाने लगी।
अजित: संजू आज तुमको नहीं चोदूंग़ा । मैं चाहता हूँ कि अपना माल बचा कर रखूँ रूपा के लिए।

संजू हंस कर बोली: कहीं उसको भी प्रेगनेंट मत कर देना? आप यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |
अजित: हा हा नहीं अब इस उम्र में क्या होगा उसका?

फिर वह नहाने चला गया। थोड़ी देर बाद आकाश भी उठकर आया और संजू ने उसे भी चाय दी।
अजित: आज तुम्हारी सास आ रही है।

आकाश: हाँ चांदनी का SMS आया है अभी। क्यों आ रहीं हैं?
अजित: सगाई के बारे में कुछ बात करनी है उसने।
आकाश: ओह तो क्या मेरा होना भी ज़रूरी है?
अजित: अरे नहीं बेटा तुम उसमें क्या करोगे? वैसे मैं उनको तुमसे मिलवाने दुकान में ले आऊँगा ।
आकाश: ठीक है पापा अब मैं नहा लेता हूँ।
फिर बाद में दोनों नाश्ता किया और आकाश दुकान चला गया। संजू भी खाना बनाने लगी।
अजित ने अपने बेडरूम का दरवाज़ा बंद किया और तिजोरी से हीरे के तीन सेट निकाले और कुछ सोने के भी निकाले । फिर वह उनको देखकर सोचने लगा कि रूपा पर कौन सा ear ring अच्छा लगेगा। फिर उसने एक हीरे का कान का झुमका पसंद किया। अब वह तैयार था रूपा का दिल जीतने के लिए।
अजित ने आज एक बढ़िया टी शर्ट और जींस पहनी और सेंट लगाकर स्पोर्ट्स शू पहने। आज वह रूपा को पटाने का कोई मौक़ा नहीं छोड़ना चाहता था। आप यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

संजू जा चुकी थी और वह अब तैयार था तभी रूपा का फ़ोन आया : मैं बस अड्डे पहुँचनी वाली हूँ।
अजित: बस मैं अभी दस मिनट मे पहुँच रहा हूँ।

अजित की कार जब बस अड्डे पहुँची तो बस अभी आइ नहीं थी।

वह इंतज़ार कर रहा था तभी बस आयी और फिर उसमें से रूपा उतरी काली साड़ी में। आह क्या जँच रही थी। उसका गोरा दूधिया बदन मस्त दिख रहा था काली साड़ी में। कसी साड़ी में छातियों का उभार पहाड़ सा दिख रहा था। जब वह पास आइ तो पारदर्शी साड़ी से उसका गोरा पेट और गहरी नाभि देखकर अजित का लौड़ा झटके मार उठा।

तभी एक स्कूटर उसके पास आकर हॉर्न बजाया और वह पलटी उससे दूर होने के लिए और अजित की तो जैसे साँस ही रुक गयी। क्या मस्त बड़े बड़े गोल गोल चूतर थे। बहुत ही आकर्षक दिख रहे थे।टाइट पहनी साड़ी से पैंटी की लकीरें भी साफ़ दिख रही थीं। अब तो उसको अपना लौड़ा पैंट में अजस्ट करना ही पड़ा।

जब वह पास आइ तो उसने हाथ जोड़कर उसे नमस्ते की और उसने भी उसके हाथ को पकड़कर कहा: नमस्ते। सफ़र में कोई परेशानी तो नहीं हुई?

रूपा: दो घंटे में क्या परेशानी होगी?

अजित: अरे इतनी हॉट दिख रही हो किसी ने रास्ते में तंग तो नहीं किया?

रूपा: आप भी ना ,मेरे साथ एक महिला ही बैठी थी ।
अजित : चलो तब ठीक है, अगर कोई आदमी होता तो तुमको तंग कर डालता।
रूपा: अब चलिए यहाँ से पता नहीं क्या क्या बोले जा रहे हैं।
अजित: चलो,कार वहाँ है।
फिर अजित ने कार चालू की और बातें करने लगा।

अजित: तो काली साड़ी पहन ही ली। थैंक्स मेरी बात रखने के लिए।

रूपा: अब आप इतनी बार बोले थे तो आपकी बात तो रखनी ही थी।

अजित उसकी ब्लाउस को देखते हुए बोला: पर वो ब्लाउस का हल कैसे निकला?
रूपा हँसकर: वैसे ही जैसे आपने कहा था। साइड से थोड़ा ढीला करी हूँ।
अजित: और ब्रा का ? अब तुम काले ब्लाउस के नीचे सफ़ेद ब्रा तो पहन नहीं सकती ना?
रूपा शर्माकर: आप भी ना, कोई महिला से ऐसा सवाल करता है भला?
अजित: फिर भी बताओ ना ?
रूपा: चांदनी के पास काली ब्रा थी वही पहनी हूँ।
अजित चौंक कर: चांदनी बेटी की? पर उसके तो तुमसे काफ़ी छोटे हैं ना ? उसकी ब्रा तुमको कैसे आएगी?
रूपा: वह कोई बच्ची नहीं है २२ साल की लड़की है। मेरा और उसके साइज़ में दो नम्बर का ही अंतर है।इसलिए उसकी मुझे थोड़ी टाइट है पर काम चला ली हूँ। अजित बेशर्मी से उसकी छाती को देखकर बोला: तुम्हें तो ४० की आती होगी?
रूपा: आप भी ना, कोई ४० का साइज़ नहीं है।
अजित: तो ३८ तो होगा ही, मेरी बीवी का भी यही साइज़ था।
रूपा: अब आप सही बोल रहे हैं।
अजित : इसका मतलब चांदनी का भी ३६ के आसपास होगा। हालाँकि लगता नहीं उसका इतना बड़ा । तो चांदनी की ब्रा भी तुमको तंग तो होगी ही ना।
रूपा: पर मेरी पुसंजू ३४ वाली से तो बेटर है।
अजित: हाँ वो तो है।
रूपा: आप चांदनी की ब्रा का साइज़ भी भाँप रहे थे क्या? ये तो बड़ी ख़राब बात है।
अजित: अरे नहीं ऐसा कुछ नहीं है। पर तुम्हारे और उसके साइज़ की तुलना की बात कर रहा था।
रूपा: चलिए अब इस बात को ख़त्म कीजिए।
अजित: मैं तुम्हें घर जाकर सरिता की ब्रा दे दूँगा वो तुमको बिलकुल फ़िट आ जाएगी। हाँ कप साइज़ थोड़ा तुम्हारा बड़ा लगता है। चलो अभी के लिए चला लेना।

और सुनाओ सगाई की तैयारियाँ कैसी चल रही है?

रूपा: ठीक ही चल रही है। बस राजेश भाई सांब काफ़ी मदद कर रहे हैं।

अजित: राजेश भी तुम्हारी बड़ी तारीफ़ कर रहा था।

रूपा चौंक कर: कैसी तारीफ़?

अजित: अरे ऐसे ही जैसे तुम बहुत समझदार और शांत हो वगेरह वगेरह।

रूपा : ओह , वो भी तो बहुत अच्छे हैं।

अजित: वो तो है। पर बिचारा पत्नी के स्वास्थ्य को लेकर बहुत दुखी रहता है। पता नहीं उसका विवाहित जीवन कैसा होगा? उसकी बीवी को देखकर तो लगता है कि वो पता नहीं बिस्तर पर उसका साथ भी दे पाती होगी कि नहीं?
रूपा थोड़ी सी परेशान हो गयी, वो बोली: चलिए छोड़िए ना कोई और बात करिए ना।

अजित: तुम्हें तो ऐसा नहीं कहना चाहिए, क्योंकि हम तीनों की एक जैसी हालत है। तुम्हारे पति नहीं है , मेरी पत्नी नहीं रही और राजेश की पत्नी होकर भी ना होने के बराबर है। सही कह रहा हूँ ना?

रूपा: हाँ ये तो है।

अजित: मुझे तो बहुत परेशानी होती है अकेले रहने में। मुझे तो औरत की कमी बहुत खलती है। पता नहीं तुम्हारा और राजेश की क्या हालत है।

रूपा: देखिए सभी को अकेलापन बुरा लगता है, पर किया क्या जाए?

अजित: करने को तो बहुत कुछ किया जा सकता है, पर थोड़ी हिम्मत करनी पड़ती है।क्यों ठीक कहा ना?

रूपा: मैं क्या कह सकती हूँ।

घर पहुँचकर अजित उसे सोफ़े पर बिठाकर उसे पानी पिलाता है। फिर रूपा: आपकी मेड संजू नहीं दिख रही है?
अजित: आज उसे कुछ काम था इसलिए वो खाना बनाके जल्दी चली गयी है।

रूपा: मैं आपके लिए चाय बना दूँ?

अजित : अरे आप क्यूँ बनाएँगी? मैं आपके लिए बना देता हूँ।

रूपा उठी और किचन की ओर जाते हुए बोली: आप बैठिए मैं बनाती हूँ। वह जब उठ कर जाने लगी तो उसकी चौड़ी मटकती गाँड़ देखकर वह पागल सा हो गया और उसके चूतरों में थोड़ी सी साड़ी भी फँस गयी थी। वह अपना लौड़ा मसलने लगा। आप यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

तभी किचन से आवाज़ आइ: भाई सांब थोड़ा आइए ना।

अजित अपना लौड़ा अजस्ट करते हुए किचन में गया।

रूपा एक चाय के डिब्बे को निकालने की कोशिश कर रही थी जो की काफ़ी ऊपर रखा था। अजित उसके पीछे आकर उसके चूतरों में अपना लौड़ा सटाते हुए उस डिब्बे को निकाला और उसके बदन से आ रही मस्त गंध को सूंघकर जैसे मस्त हो गया। रूपा ने भी उसके डंडे का अहसास किया और काँप उठी।

फिर वह चाय बना कर लाई। अजित कमरे में नहीं था।

तभी वह बेडरूम से बाहर आया और उसके हाथ में एक काली ब्रा थी। वो बोला: देखो, ये ट्राई कर लो , इसमें तुम्हें आराम मिलेगा।

रूपा लाल होकर: ओह आप भी , मुझे बड़ी शर्म आती है। ठीक है बाद में पहन लूँगी।

अजित: अरे जाओ अभी बदल लो। इसने शर्म की क्या बात है।

रूपा उठी और उसके बेडरूम में जाकर ब्रा बदल कर वापस बाहर आइ तो वह बेशर्मी से उसकी छाती को घूरते हुए बोला: हाँ अभी ठीक है। आराम मिला ना? चांदनी के इतने बड़े थोड़ी है, इसी लिए उसमें तुम्हारी साँस रूकती होगी। सरिता और तुम्हारा एक साइज़ है तो आराम मिल रहा होगा। हैं ना?

रूपा सिर झुका कर: हाँ ये ठीक है।

अब दोनों चाय पीने लगे।
रूपा आकाश और उसके बिज़नेस का पूछने लगी। वो बातें करते रहे। अजित को नज़र बार बार उसके उभरे हुए पेट और नाभि पर जाती थी।

अजित: चलो अब तुम्हें गहने दिखाता हूँ।

वह बेडरूम की ओर चला। रूपा थोड़ा हिचकते हुए उसके पीछे वहाँ पहुँची।
अजित ने उसे बेड पर बैठने का इशारा किया और वह सेफ़ खोला और उसमें से ज़ेवर के डिब्बे निकाल कर लाया। फिर उसने सब डिब्बे खोकर बिस्तर पर फैला दिए । रूपा की आँखें फट गयीं इतने ज़ेवर देख कर।

रूपा: भाई सांब ये तो एक से एक बढ़िया हैं।

अजित : इनमे से कौन सा चांदनी बिटिया पर जँचेगा बोलो।

रूपा: ये बहुत बढ़िया है। देखिए ।

अजित: हाँ सच कह रही हो। और ये वाला तुमपर जचेंगा । ये कहते हुए उसने एक सेट उसको दिखाया।
रूपा: मुझे कुछ नहीं चाहिए। आप मेरे ऊपर बहुत बड़ा अहसान कर रहे हो चांदनी को सेट देकर। अब मैं आपसे ये कैसे ले सकती हूँ।

अजित: चलो छोड़ो ये ear rings देखो । ये तुम्हारे कान में बहुत जचेंगा।

रूपा: मैं नहीं ले सकती।

अजित: चलो मैं ही पहना देता हूँ।

यह कहकर वो उसके कान के पास आकर उसे ख़ुद पहनाने लगा। वह अब मना नहीं कर रही थी। उसकी साँसे रूपा की साँस से टकरा रही थीं। उसकी नज़दीकियाँ उसे गरम कर रही थीं। उसका लौड़ा अब कड़ा होने लगा था। रूपा भी गरम हो रही थी। उसकी छाती भी अब उठने बैठने लगी थी। अजित को उसके बदन की मादक गंध जैसे मदहोश कर रही थी।

अजित उसे रिंग्स पहना कर बोला: देखो कितनी सुंदर लग रही है तुमपर।
रूपा ड्रेसिंग टेबल के शीशे में देखकर बोली: सच ने बहुत सुंदर है।
अजित उसके पास आकर उसका हाथ पकड़ा और बोला: पर तुमसे ज़्यादा सुंदर नहीं है। यह मेरे तरफ़ से तुमको सगाई का गिफ़्ट है। मना मत करना।

रूपा: पर ये तो बहुत महँगा होगा।

अजित: अरे तुम्हारे सामने इसकी क्या हैसियत है।

यह कहकर उसने रूपा को अपनी बाँहों में खिंचा और उसके होंठ पर अपने होंठ रख दिए। रूपा एक मिनट जे लिए चौकी पर फिर चुपचाप उसके चुम्बन को स्वीकार करने लगी। कमरा गरम हो उठा था।
अजित की बाहों में आकर रूपा जैसे पिघलने लगी। अजित उसके होंठों को चूसे जा रहा था। उनका पहला चुम्बन क़रीब पाँच मिनट तक चला, जिसमें अजित की जीभ रूपा के मुँह के अंदर थी और रूपा भी उसे चूसे जा रही थी। अब अजित ने भी अपना मुँह खोला और अनुभवी रूपा ने भी अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी। अब अजित उसकी जीभ चूस रहा था। अजित के हाथ रूपा के गालों पर थे और रूपा के हाथ उसकी पीठ से चिपके हुए थे ।अब अजित और रूपा हाँफते हुए अलग हुए और अजित ने अब उसके गरदन और कंधे को चूमना शुरू किया ।जल्दी ही अजित गरम हो गया और उसने रूपा की साड़ी का पल्लू गिरा दिया। अब उसके तने हुए चूचे जो कि मानो ब्लाउस फाड़ने को बेचैन थे, उसके सामने थे।

वह थोड़ी देर उनको देखा और फिर आगे झुक कर चूचियों के ऊपर के नंगे हिस्से को चूमने लगा। गोरे गोरे मोटे दूध को देखकर वह मस्त हो गया। अब वह दोनों हाथों से उसकी चूचियाँ दबाया और बोला: आऽऽऽह जाऽऽंन क्या चूचियाँ है। मस्त नरम और सख़्त भी।

वह अब उनको थोड़ा ज़ोर से दबाने लगा। रूपा हाऽऽऽय्य कर उठी और बोली: धीरे से दबाओ ना। वह फिर से आऽऽऽऽऽह कर उठी । और अपने नीचे के हिस्से को मस्ती में आकर अजित के नीचे के हिस्से से चिपकाने लगी। तभी उसको अपने पेट पर अजित के डंडे का अहसास हुआ, वह सिहर उठी।

अजित भी अब उसके नंगे पेट को सहलाया और नाभि में ऊँगली डालने लगा।

अजित: रूपा, साड़ी खोल दूँ?
रूपा मुस्कुराकर बोली: मैं मना करूँगी तो नहीं खोलेंगे?

अजित हँसकर उसकी साड़ी को कमर से खोला और एक झटके में साड़ी उसके पैरों पर थी। क्या माल लग रही थी वो ब्लाउस और पेटिकोट में।

अजित ने उसको अपने से चिपका लिया और फिर से होंठ चूसने लगा। अब उसके हाथ उसकी पीठ , नंगी कमर और फिर पेटिकोट के ऊपर से उसके मस्त मोटे उठान लिए चूतरों पर पड़े और वह उनको दबाने लगा।
रूपा की आह निकल गयी।

अजित: आऽऽऽऽह जाऽऽऽन क्या मस्त चूतर है तुम्हारे।
रूपा मुस्कुराकर: और क्या क्या मस्त है मेरा?
अजित: अरे जाऽऽंन तुम तो ऊपर से नीचे तक मस्ती का पिटारा हो।
रूपा हंस दी और अजित की गरदन चूमने लगी।
अजित ने ब्लाउस के हुक खोले और रूपा ने हाथ उठाकर अपना सहयोग दिया ब्लाउस उतारने में। उसकी चिकनी बग़ल देख कर वह मस्त हुआ और उसके हाथ को उठाकर बग़ल को सूँघने लगा और फिर जीभ से चाटने लगा। दोनों बग़लों को चूमने के बाद वह उसका पेटिकोट का नाड़ा भी खोल दिया और अब रूपा सिर्फ़ ब्रा और पेंटी में थी।
अब वो पीछे हटा और थोड़ी दूर से उसके गोरे बदन को काली ब्रा और काली ही पैंटी में देखकर मस्ती से अपना लौड़ा मसलने लगा। रूपा की निगाहें भी उसके फूले हुए हथियार पर थी और उसकी पैंटी गीली होने लगी थी।
रूपा: वाह मेरे कपड़े तो उतारे जा रहे हैं और ख़ुद पूरे कपड़े में खड़े हैं।
अजित: लो मैं भी उतार देता हूँ। ये कहते हुए उसने अपनी टी शर्ट उतार दी। उसका चौड़ा सीना रूपा की बुर को और भी गीला करने लगा।फिर उसने पैंट भी उतारी और अब बालों से भरी पुष्ट जाँघों के बीच फूली हुई चड्डी को देखकर उसकी आँखें चौड़ी हो गयी।
अब रूपा के पास आकर वह उसको बाहों में ले लिया और उसकी ब्रा का हुक खोल दिया। उसकी ब्रा निकालकर वह उसकी चूचियों को और उसके खड़े निपल्ज़ को नंगा देख कर वह मस्त हो गया। फिर वह झुक कर घुटने के बल बैठा और उसकी पैंटी भी धीरे से उतार दिया। अब उसके सामने रूपा की मस्त फूली हुई बुर थी। उसने देखा कि उसके पेड़ू पर बालों को दिल का शेप दिया हुआ था। हालाँकि बुर बिलकुल बाल रहित थी।
अजित ने उसके दिल के शेप के बालों को सहलाते हुए बोला: वाह जान क्या शेप बनाई हो? फिर वह आगे होकर उसके उस दिल को चूमने लगा। फिर वह नीचे होकर उसकी बुर को सहलाया और उसे भी चूम लिया। फिर वह उसे घुमाया और और उसके बड़े चूतरों को दबाने लगा और चूमने भी लगा। रूपा आऽऽहहह कर उठी। फिर वह उठा और उसके दूध दबाकर उनको भी मुँह में लेकर चूसने लगा। उसके निप्पल्स को दबाया और रूपा हाऽऽऽऽऽय्यय कर उठी। रूपा भी उससे चिपक रही थी और चड्डी में से उसका लौड़ा उसकी नंगी जाँघों पर रगड़ रहा था। रूपा ने हाथ बढ़ाकर अजित की चड्डी के ऊपर से उसका लौड़ा पकड़ लिया, और बोली: आऽऽऽऽह आपका तो बहुत बड़ा है।
अजित उसकी चूचि दबाके बोला: तुम्हारे पति से भी बड़ा है?
रूपा: आऽऽऽह उनका तो बहुत कमज़ोर था। आऽऽहहह आपके वाले से तो आधा भी नहीं होगा। वह उसके चड्डी में हाथ डालकर उसकी पूरी लम्बाई को फ़ील करते हुए बोली।
अजित: तुम्हारे दूध बहुत ही मस्त है। चलो अब बिस्तर में लेटो। अजित ने भी चड्डी उतार दी। रूपा ने उसके लौड़े को देखा और एक बार उसकी लम्बाई और मोटाई को सहला कर और दबाकर बिस्तर पर लेट गयी।
रूपा के लेटने के बाद अजित भी उसकी बग़ल में आकर लेटा और उसको अपनी बाहों में लेकर चूमने लगा। वह भी उससे लिपट कर उसको चूमने लगी।
अब वह उसकी चूचियाँ दबाते हुए चूसने लगा। रूपा की हाऽऽऽऽऽऽयययय निकलने लगी। अब उसके हाथ उसके पेट से होते हुए उसकी बुर पर घूमने लगे। उसकी दो उँगलियाँ उसकी बुर की गहराई नापने लगी। वह हैरान हो गया कि उसकी उम्र के हिसाब से उसकी बुर भी काफ़ी टाइट थी। फिर वह उठकर उसके ऊपर आया और उसकी टाँगें सहलाकर फैलाया और मस्त गीली बुर देखकर वह झुका और उसको चूमने लगा। जल्दी ही उसकी जीभ उसके बुर के अंदर थी और वहाँ हलचल मचाने लगा। रूपा चीख़ी: उइइइइइइइइ माँआऽऽऽऽऽऽऽऽ।
अजित: जाऽऽऽऽंन मज़ा आऽऽऽया ना?
रूपा: आऽऽऽह वहाँ जीभ डालोगे तो मज़ा नहीं आऽऽऽऽऽऽयेगाआऽऽऽऽ क्याआऽऽऽऽऽ उइइइइइइइ ।
अब वह उसके चूतरों को दबाते हुए उसकी गाँड़ के छेद को देखकर मस्ती से भर गया और उसकी गाँड़ की पूरी दरार को जीभ से चाटने लगा। उसकी जीभ बुर की clit से होकर उसकी बुर को चाटा और नीचे जाकर गाँड़ के छेद को भी चाटा। रूपा हाऽऽऽऽय्य्य्य्य्य आऽऽऽऽऽऽज माऽऽऽऽर ड़ालोगेएएएएएए क्याआऽऽऽऽऽऽ।
वह बोला: जाऽऽऽंन क्या माल हो तुम? अब मेरा लौड़ा चूसोगी या अभी चोदूँ पहले।
रूपा: आऽऽऽह चोद दीजिए आऽऽऽह अब नहीं रुक सकती। बाद में आपका चूस दूँगी। हाऽऽय्यय ड़ालिए नाऽऽऽऽऽऽ ।प्लीज़ आऽऽहहह ।
अजित ने अब पोजीशन बनाई और रूपा भी अपनी टाँगे घुटनो से मोड़कर अपनी छाती पर रखी और पूरा खेत उसे जोतने को ऑफ़र कर दिया। अजित ने अपने लौड़े पर ढेर सा थूक लगाकर उसकी बुर के मुँह पर रखा और दबाने लगा। जैसे जैसे सुपाड़ा अपनी जगह बुर के अंदर बनाकर उसमें समाने लगा। रूपा की आऽऽऽऽह्ह्ह्ह्ह निकलने लगी।फिर जब पूरा लौड़ा अंदर समा गया तो वह झुक कर उसके होंठ चुमते हुए उसकी चूचियाँ मसलने लगा और निपल्ज़ को ऐंठने लगा।साथ ही अब उसने धक्के भी लगाने शुरू कर दिए।
रूपा: हाय्य्य्य्य्य्य। करके अपनी कमर उछालकर मज़े से चुदवाने लगी।
कमरे में फ़च फ़च की आवाज़ें और पलंग की चूँ चूँ की आवाज़ भी गूँजने लगी।
अजित: आऽऽऽहब जाऽऽन क्या टाइट बुर है तुम्हारी?एक बात बताओ दो दो बच्चे पैदा करने के बाद भी बुर इतनी टाइट कैसी है?
रूपा. आऽऽऽह मेरे दोनों बच्चे सिजेरीयन से हुए है।
अजित: आऽऽऽहहह तभी तो, अनीता की बुर तो काफ़ी ढीली पड़ गयी थी मेरी बड़ी बेटी के जन्म के बाद। और आकाश के जन्म के बाद और भी ढीली पड़ गयी। तुम्हारी मस्त है जानू।
ये कहते हुए वह और ज़ोर से रूपा के चूतरों को दबाकर धुआँ धार चुदाई करने लगा। अब रूपा भी हाऽऽऽऽय्यय मरीइइइइइइइ उईइइइइइइइइइ माँआऽऽऽऽ कहकर नीचे से अपनी गाँड़ उछालकर बड़बड़ाती हुई चुदवाने लगी।
थोड़ी देर बाद रूपा और अजित दोनों आऽऽऽहहह मेरा होने वाला है , कहते हुए झड़ने लगे।
दोनों पस्त होकर अग़ल बग़ल लेट गए। फिर अजित बाथरूम से फ़्रेश होकर आया और बाद ने रूपा भी फ़्रेश होकर आयी और अपने कपड़े की ओर हाथ बढाइ।
अजित: अरे जानू अभी कपड़े कैसे पहनोगी? अभी तो एक राउंड और होगा। तुम्हारे जैसे माल से एक बार में दिल कहाँ भरेगा।
रूपा हँसकर बोली: मैं सोची कि आप शांत हो गए तो अब बस करें।
अजित ने हाथ बढ़ाकर उसको अपने ऊपर खींच लिया और उसके होंठ चूसने लगा। उसके हाथ रूपा की पीठ और गोल गोल चूतरों पर घूम रहे थे।
अजित: एक बात बताओ कि डिलीवरी के समय सिजेरीयन करना किसका सुझाव था? तुम्हारा , तुम्हारे पति का या राजेश का?
रूपा: इसमे राजेश भाई सांब कहाँ से आए?
अजित उसकी गाँड़ में ऊँगली करते हुए बोला: मुझे पता है कि तुम अपने जेठ राजेश से शादी के बाद से ही चुदवा रही हो। और उस समय तुम्हारे पति का ऐक्सिडेंट भी नहीं हुआ था।
रूपा: आऽऽह ऊँगली निकालिए ना, सूखी ही डाल दिए हैं। जलन होती है ना।ये आप क्या कह रहे है, राजेश भाई सांब से मेरा कोई चक्कर नहीं है।
अजित : जानू झूठ मत बोलो, जब मैं तुम्हारे घर गया था तभी मैंने तुमको और राजेश को लिपट कर चूमा चाटी करते देखा था। जब मैंने कल राजेश से पूछा तो शराब के नशे में वह सब बक गया और यह भी की चांदनी और उसका भाई राजेश के ही बच्चें हैं।
रूपा का चेहरा सफ़ेद पड़ गया। वह गिड़गिड़ाते हुए बोली: आप ये सब किसी को नहीं बताओगे ना। प्लीज़ प्लीज़।
अजित ने अपनी ऊँगली ने थूक लगाया और फिर से उसकी गाँड़ में डालकर बोला: नहीं जानू किसी को नहीं बताऊँगा।
रूपा: आऽऽह मैं आपसे बहुत प्यार करने लगी हूँ, प्लीज़ मेरा ये राजीवराजीवही रहने दीजिएगा। हाय्य्य्य्य्य।
वह अपनी गाँड़ उठाकर उसकी ऊँगली का मज़ा लेने लगी।
अजित उसके होंठ चूसते हुए बोला: बिलकुल निश्चिन्त रहो जानू किसिको नहीं बताऊँगा। पर ये तो बताओ कि क्या चांदनी बेटी को तुम्हारे राजेश से सम्बन्धों के बारे में पता है?

रूपा; मुझे लगता है कि उसे शक तो है पर पक्का नहीं कह सकती।

अजित उसकी चूचि दबाते हुए बोला: आह क्या बड़ी बड़ी चूचियाँ है तुम्हारी। एक बात बताओ अगर चांदनी का साइज़ तुमसे दो नम्बर ही छोटा है इसका मतलब वह भी किसी से चु मतलब उसका भी कोई बोय फ़्रेंड तो होगा, जिसने दबा दबा कर उसकी चूचियाँ इतनी बड़ी कर दी होंगी। ये कहते हुए वह अब दो ऊँगली उसकी गाँड़ में डालकर अंदर बाहर करने लगा।

रूपा आऽऽऽऽऽह करके बोली: आप भी उसके बारे में ऐसा कैसे बोल सकते हैं। उसका कोई बोय फ़्रेंड नहीं है। आह वह बहुत सीधी लड़की है।
अजित: ओह पर चूचि तो उसकी काफ़ी बड़ी है, हालाँकि पता नहीं चलता पर अब तुमने ही उसका साइज़ बताया है कि ३४ का है।
फिर वह उसके दिल के आकर की झाँट को सहलाकर पूछा: ये कौन बनाया है इस आकर का? तुम ख़ुद तो ऐसे काट नहीं सकती अपनी झाँट को।
रूपा शर्मा कर बोली: ये राजेश भाई सांब का काम है। उनको मेरी झाँटें बनाने में बहुत मज़ा आता है। ये उन्होंने ही बनाया है।
ओह , कहते हुए वह बोला: चलो मेरा लौड़ा चूसो।
रूपा : पहले ऊँगली तो निकालो बाहर।
अजित ने उँगलियाँ बाहर निकाली और उनको सूँघने लगा। रूपा चिल्लाई: छी छी क्या करते हो? फिर वह उसके लौंडे को सहलाकर बोली: हाय ये तो खड़ा हो गया। फिर उसने अपनी जीभ निकाली और उसके लौड़े के एक एक हिस्से को चाटा और चूमने लगी। फिर उसके बॉल्ज़ को सहलायी और बोली: बाप रे कितने बड़े है ये। फिर वह उनको भी चाटने लगी। फिर वह पूरा लौड़ा मुँह में लेकर डीप थ्रोट देने लगी। अब अजित अपनी कमर उछालकर उसके मुँह को चोदने लगा।
अजित ने उसे रोका और पेट के बल लिटाया और उसके मस्त चूतरों को दबाकर चूमने लगा। फिर वह उसे अपने चूतरों को उठाने को बोला: जानू क्या मस्त चूतर हैं । फिर वह उसकी गाँड़ का छेद चाटने लगा और बोला: जानू तुम्हारा छेद देख कर लगता है कि राजेश तुम्हारी गाँड़ भी मारता होगा। दरसल सरिता की भी मैं गाँड़ मारता था और उसका छेद भी ऐसे ही दिखता था। सही कहा ना? फिर वह उसकी गाँड़ में क्रीम डाला और उँगलियाँ डालकर क्रीम को अच्छी तरह से छेद में लगा दिया।
रूपा: आऽऽह हाँ राजेश को मेरी गाँड़ मारना बहुत पसंद है।
अजित: और तुम्हें गाँड़ मरवाने में मज़ा आता है ना?
उसकी गाँड़ में अब वो तीन ऊँगलियाँ डाल कर हिला रहा था।
रूपा: आऽऽह। हाँ बहुत मज़ा आता है । पर आपका बड़ा ही मोटा और लम्बा है शायद दुखेगा।
अजित : अरे नहीं मेरी जान नहीं दुखेगा। मैं बहुत धीरे से करूँगा। तो डालूँ अंदर?
रूपा: आऽऽऽह डालिए ना अब क्यों तड़पा रहे हैं।
अजित मुस्कुराया और अपना क्रीम से चुपड़ा हुआ लौड़ा उसकी गाँड़ में डाला और वह चिल्लाने लगी : आऽऽऽह धीइइइइइइइरे से डालो। अजित ने अपना दबाव बढ़ाया और उसका लौड़ा उसकी गाँड़ में घुसता चला गया। अब रूपा की चीख़ें बढ़ गयीं और वह चिल्लाई: उइइइइइइइइ मरीइइइइइइइइइ । आऽऽऽऽह मेरीइइइइइइइ फटीइइइइइइइइइ ।
अब अजित ने उसकी गाँड़ मारनी शुरू की और साथ ही अपना एक हाथ उसकी बुर में लेज़ाकर उसकी clit को रगड़कर उसकी बुर में तीन उँगलियाँ डालकर उसकी बुर को गीली करने लगा।
बुर से पानी निकले ही जा रहा था

अब ठप ठप की आवाज़ के साथ वह पूरे ज़ोरों से गाँड़ मारने लगा। अब रूपा भी बुर में ऊँगली और गाँड़ में मोटे लौड़े की चुदाई से मस्त हो कर अपनी गाँड़ पीछे दबा दबा कर अपनी मस्ती दिखाई और गाँड़ मरवाने लगी।
जल्दी ही उसकी बुर ने पानी छोड़ना शुरू किया और वह आऽऽऽक़्ह्ह्ह्ह मैं गईइइइइइइइइइइ कहकर गाँड़ हिला हिला कर झड़ने लगी। इधर अजित के हाथ में जैसे पानी का सैलाब भरने लगा। उसकी बुर से पानी निकले ही जा रहा था तभी वह भी झड़ने लगा और आऽऽह्ह्ह्ह्ह ह्म्म्म्म्म्म्म कहकर उसकी पीठ पर लेट सा गया।
अब वह अपना वज़न उसके ऊपर से हटाकर उसकी बग़ल ने लेट गया। वह आँखें बंद करके उन लमहों को याद करके मस्त होने लगा जब वह उसकी गाँड़ मार रहा था। आह क्या मस्त टाइट गाँड़ और बुर हैं। बहुत दिन बाद वह इतनी मज़ेदार चुदाई का आनंद लिया था।

उधर रूपा भी लेटे हुए सोच रही थी कि क्या मस्त मर्द है , कितना मज़ा दिया है इन्होंने। राजेश से भी ज़्यादा मज़ा दिया है इन्होंने।

वह पलटी और अजित को अपनी ओर देखते हुए देख कर बोली: आज बहुत मज़ा आया सच में आपने जो मज़ा दिया है , मैं तो आपकी ग़ुलाम हो गयी हूँ।
अजित: इसका मतलब जब चाहूँ तुमको चोद सकता हूँ।
रूपा हँसकर: ये भी कोई पूछने की बात है।
ये कहते हुए उसने उसके लटके हुए लौड़े को सहलाया और उसे दबा दिया। फिर बोली: ये जब चाहे मेरे अंदर जाकर मज़ा कर सकता है।
अजित मस्ती से उसके होंठों को चूम लिया। और वो दोनों एक दूसरे से चिपक गए और चुम्बन में लीन हो गए।
दोनों दो राउंड की चुदाई के बाद थकान महसूस कर रहे थे। रूपा उठकर बाथरूम से फ़्रेश होकर आइ और ब्रा और पैंटी पहनकर ब्लाउस और पेटिकोट भी पहन ली। फिर वह किचन में जाकर फ्रिज से जूस निकाल कर लाई तब तक अजित भी फ़्रेश होकर आ गया था। वह अभी भी नंगा था और फिर दोनों जूस पीने लगे। अजित अभी भी नंगा पड़ा था और उसका लंड साँप की तरह उसकी एक जाँघ पर पड़ा था और उसके बॉल्ज़ लटके से थे।
रूपा उसकी कमर के पास बैठी और उसकी छाती को सहला कर बोली: यहाँ आइ हूँ तो दामाद से भी मिलवा दीजिए ना।
अजित: हाँ हाँ क्यों नहीं? अभी खाना खाकर चलते हैं।
रूपा अब अपना हाथ उसकी छाती से नीचे लाकर उसके पेट से होते हुए उसके लौड़े के पास लाई। अब वो उसकी छोटी कटी झाँटों से खेलने लगी । फिर उसने लौड़े को दबाया और बॉल्ज़ को भी सहला कर बोली: आपके बॉल्ज़ बहुत बड़े हैं।
अजित: अरे इसी बॉल्ज़ की सहायता से मैंने कई लड़कियों को माँ बनाया है।
रूपा चौंक कर: मतलब? मैं समझी नहीं। वह अभी भी उसके बॉल्ज़ को सहलाए जा रही थी।
अजित: लम्बी कहानी है । असल में मैंने तीन लड़कियों को माँ बनाया है उनके अनुरोध पर ही।
रूपा: उनको कैसे पता चला कि आपसे अनुरोध करना है इसके लिए?
अजित: देखो हुआ ये कि एक लड़की को मैंने फँसाया और वह एक महीने में ही प्रेगनेंट हो गयी। उसका तो मैंने गर्भपात करवा दिया। जब मैंने ये बात एक और औरत वंदना को बताई जो उन दिनो मेरे से फँसी हुई थी तो वह अपनी बहू रेशमा को मुझसे चुदवाइ और वो भी एक महीने में ही प्रेगनेंट हो गई।
रूपा: वो अपनी बहू को आपसे चुदवाइ ? क्यों भला?
अजित: क्योंकि उसका बेटा बाप नहीं बन सकता था और वो दोनों नहीं चाहतीं थीं कि ये बात लड़के को पता चले क्योंकि उसके डिप्रेशन में जाने का डर था।
रूपा: ओह तो आप उस लड़की से बाद में मिले जब वह माँ बन गयी थी?
अजित: हाँ सास बहू दोनों उसे लेकर मेरे पास आइ थीं। बहुत ही प्यारा बच्चा था। उस दिन मैंने जिभरके बहू का दूध पिया और उन दोनों को भरपूर चोदा । वो तो मेरी अहसान मंद थीं ना। बस उस दिन के बात कभी नहीं मिला।
रूपा: आपने तीन लड़कियाँ कहीं, दो और कौन थीं?

दोस्तों कहानी थोड़ी लम्बी जरुर है पर है तो मजेदार तो आप पढ़ते रहिये और अपने दोस्तों को भी शेयर करते रहिये ताकि मै इस कहानी को और भी मजेदार बना सकू और उसके लिए आपका प्यार ही मेरे लिए काफी है | अब उन तीनो लडकियों के बारे में जानने के लिए अगली कड़ी को पढ़ना ना भूले |


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