चुदक्कड बहु की चूत और प्यासे ससुर का लौड़ा - 4
उस दिन वंदना के जाने के बाद मैं रात को वंदना को SMS किया: कैसी हो? क्या कर रही हो?

वह लिखी: ठीक हूँ अभी खाना खाया है। आप क्या कर रहे हो?

मैं:: अरे अपना लौड़ा दबा रहा हूँ रेशमा की बुर के बारे में सोच कर।

वो : कल दिलवा तो रही हूँ।

मैं: तुम्हारा हबी क्या कर रहा है?

वो: यहाँ नहीं है , एक हफ़्ते के टूर पर हैं दोनों बाप बेटा।

मैं: ओह तो फिर मैं वहीं आ जाता हूँ और अभी चोद देता हूँ तुम दोनों को।

वो: नहीं हमारे साथ नौकर भी है। और हमारी सास भी रहती है। कल ही मिलेंगे।

मैं: अरे तो फ़ोन पर बात तो कर सकते हैं। रेशमा और तुम्हारे साथ।

वो: नहीं मेरी सास कभी भी आ जाती है। वो ८२ साल की है पर बहुत तेज़ है। फिर आपकी वाइफ़ भी तो होगी वहाँ ना?

मैं: अरे मैं छत पर जाकर बात कर सकता हूँ।

वो: नहीं हम बात नहीं कर पाएँगे। मैं उसको लेकर कल आ तो रही हूँ।

मैं : चलो अब क्या हो सकता है, कल का इंतज़ार करते हैं। बाय । और फ़ोन काट दिया।
दुसरे दिन वंदना रेशमा को अपने साथ लेकर आई मै घर के अन्दर था और वंदना ने दरवाजे के बाहर आकर डोरवेल बजायी और मै आकर दरवाजा खोला अब वो दोनों अंदर आयीं। रेशमा ने मुझे नमस्ते की और वंदना को मैंने अपने से लिपटा लिया। वंदना मुझे बता चुकी थी कि रेशमा हमारे रिश्ते के बारे में जानती है। अब मैं सोफ़े पर बैठा और वो भी सामने वाले सोफ़े पर बैठ गयीं।

वंदना: तो ये रेशमा है मेरी बहू। और आपके बारे में मैं इसे बता ही चुकी हूँ। रेशमा अपना सिर झुकाए बैठी थी।
उसके गाल शर्म से लाल हो रहे लगे।

मैं: अरे बेटी, इतना क्यों शर्मा रही हो। तुम तो पाँच साल से शादीशुदा हो इन सब बातों को समझती हो। है कि नहीं? कोई कुँवारी बच्ची तो हो नहीं? सही कहा ना मैंने?

उसने हाँ में सिर हिलाकर मेरी बात से सहमती व्यक्त की। अब वो सहज होने लगी थी। मैंने वंदना को देखा और कहा: आज तो इस रूप में तुम भी ग़ज़ब ढा रही हो।

वंदना: अरे ये सब इस लड़की का किया धरा है। मुझे अपने जैसे कपड़े पहना कर लाई है। भला अब मेरी उम्र क्या इस तरह के कपड़े पहनने की है? सब तरफ़ माँस बाहर आ रहा है। वो अपने पेट को देखकर बोली।
मैं: अरे नहीं जान, इस ड्रेस में तो तुम्हारा मस्त बदन और क़यामत बरसा रहा है। सच में आज मैं अपनी क़िस्मत पर फूला नहीं समा रहा कि क्या माल मिले हैं
आज मुझे वो भी दो दो ।

वंदना: मैं यहाँ नहीं रुकूँगी, बस अभी चली जाऊँगी। आप रेशमा के साथ अपना काम कर लो। मैं दो घंटे के बाद उसे लेने आऊँगी।

मैं हँसते हुए बोला: तुम्हारा आना अपनी इच्छा से हुआ पर जाना मेरी इच्छा से होगा। अच्छा आओ रेशमा बेटा, आओ हमारी गोद में बैठो। चलो तुमसे दोस्ती करते हैं। ये कहते हुए मैंने अपना आधा खड़ा लौड़ा पैंट में अजस्ट किया और रेशमा को उसपर बैठने का इशारा किया।

रेशमा झिझक रही थी तो उसकी सास उसे खड़ा की और मेरे पास लाकर मेरी गोद में बैठा दिया। रेशमा तो मेरे खड़े हो रहे लौड़े पर बैठकर थोड़ा सा चिंहुकी और अपने चूतरों को हिलाकर बैठ गयी। और इधर मैं: अरे नहीं जान, इस ड्रेस में तो तुम्हारा मस्त बदन और क़यामत बरसा रहा है। सच में आज मैं अपनी क़िस्मत पर फूला नहीं समा रहा कि क्या माल मिले हैं आज मुझे वो भी दो दो ।

अब मैंने वंदना के पेट को सहलाना शुरू किया और उसकी टॉप को उठा कर उसके नंगे पेट को चूमने लगा। उसकी नाभि भी जीभ से कुरेदने लगा। फिर मैंने हाथ बढ़ाकर रेशमा की बाँह सहलाते हुए उसकी चूचि पकड़ ली। आऽऽह क्या सख़्त अनार सी चूचि थी। साथ ही मैंने अपना एक पंजा सीधा वंदना की बुर के ऊपर उसकी पैंट के ऊपर से रख दिया और उसको मूठ्ठी में लेकर दबाने लगा। एक साथ सास और बहू की आऽऽऽह निकली। दोनों मेरे इस अचानक हमले के लिए तैयार नहीं थीं।

अब मैं बारी बारी से रेशमा की चूचि दबा रहा था और वंदना की बुर भी मसल रहा था। वंदना: आऽऽऽह छोड़िए ना। आज नहीं, आज सिर्फ़ रेशमा से मज़े लो। आऽऽहहहह मुझे जाने दो।

मैं: क्यों मज़ा ख़राब कर रही हो? देखो तुम्हारी बहु कितने मज़े से चूचियाँ दबवा रही है , तुम भी अपनी पैंट खोल दो अभी के अभी। ये कहते मैंने उसकी पैंट की ज़िपर नीचे कर दी और अंदर हाथ डाल दिया। मेरे हाथ उसकी बिलकुल गीली हो चुकी पैंटी पर थे और मैं बोला: देखो तुम्हारी बुर कितना पानी छोड़ रही है। चलो अब खोलो इसे और पहले मैं तुमको चोदूंग़ा और जब रेशमा की शर्म निकल जाएगी तब उसे भी चोद दूँगा।

अब मैंने रेशमा का टॉप खोला और वह हाथ उठाकर मुझे टॉप उतारने में मेरी मदद की। अब मैं ब्रा के ऊपर से उसकी बड़े अनारों के चूम रहा था। मैं: आऽऽहब क्या माल है तेरी बहु, आऽऽज बहुत मज़ा आएगा इसे चोदने में।

उधर वंदना बोली: तो चोदो ना उसे पर मुझे जाने दो। मुझे बड़ा अजीब लगेगा इसके सामने चुदवाने में।

रेशमा: माँ आप ये कैसी भाषा बोल रही हो?
मैं: अरे बेटा, चुदाई को तो चुदाई ही बोलेंगे ना? अब करवाएगी या मज़ा लेगी , इसका कुछ और मतलब भी हो सकता है, पर चुदाई का कुछ और मतलब सम्भव ही नहीं है । अब मेरी दो उँगलियाँ पैंटी के साइड से उसकी बुर में घुस गयीं। वंदना हाय्य्यय कहकर उछल गयी। फिर मैंने उँगलियाँ निकाली और रेशमा को दिखाकर बोला: देखो तुम्हारी सासु माँ की बुर कितनी चुदासि हो रही है। ये कहते हुए मैंने वो दोनों उँगलियाँ चाट लीं। रेशमा की आँखें अब मेरे द्वारा किए जा रहे चूचि मर्दन से और मेरी बातों से लाल होने लगी थी और वह चूतर हिलाकर मेरे लौड़े को अपनी गाँड़ पर महसूस करके मस्त हुई जा रही थी।

अब मैंने वंदना का पैंट का बेल्ट खोला और वह मेरे हाथ को हटाकर बोली: आप प्लीज़ मुझे जाने दो ना।
मैं: रेशमा फ़ैसला करेगी कि तुम जाओगी या नहीं। बोलो रेशमा क्या तुम चाहती हो कि तुम्हारी सासु माँ प्यासी रहे?

रेशमा: नहीं मैं ऐसा क्यों चाहूँगी? माँ आप रुक जाओ ना।
वंदना: तू भी इनकी तरफ़ हो गई? अभी तो चुदीं नहीं है तब ये हाल है, चुदाई के बाद तो मेरा साइड छोड़ ही देगी। अब हम तीनों हँसने लगे। अब वंदना ने भी विरोध छोड़ दिया और अपनी पैंट उतार दी। काली पैंटी में उसका गोरा भरा हुआ बदन बहुत कामुक दिख रहा था। मैंने उसकी मोटी जाँघें सहलायीं और फिर पैंटी नीचे कर दिया। उसने पैंटी भी उतार दी। उसकी मोटी फूली हुई बुर मेरी और रेशमा की आँखों के सामने थी।

रेशमा भी इसे पहली बार देख रही थी। उसको आँखें वहीं चिपक गयीं थीं। अब मैंने वंदना को अपने पास खिंचा और उसकी बुर पर अपना मुँह रख दिया और उसे चूसने और चाटने लगा। जल्दी ही उसकी आऽऽऽहहहह निकल गयी और वह मेरा सिर अपनी बुर पर दबाके अपनी कमर हिलाने लगी।
मेरे मुँह में उसकी दूसरी चूचि

एक हाथ से अभी भी मैं रेशमा की चूचि दबा रहा था। अब मैंने अपना मुँह उठाया और फिर मैंने रेशमा की ब्रा का स्ट्रैप खोला और उसकी नंगी चूचियाँ देखकर मैं जैसे अपने होश खो बैठा और उसकी चूचियाँ चूसने लगा ।अब मेरा हाथ वंदना के बुर में ऊँगली कर रहा था और दूसरा हाथ उसकी एक चूचि दबा रहा था और मेरे मुँह में उसकी दूसरी चूचि थी।
अब वो दोनों आऽऽऽहहह कर रही थीं और अब रेशमा खूल्लम ख़ूल्ला मेरे लौड़े पर अपनी बुर पैंट के ऊपर से रगड़ रही थी और उसकी कमर हिले जा रही थी। अब मैं बोला: चलो बिस्तर पर चलते हैं। वो दोनों मुस्करायीं और वंदना बोली: चलो आपने मुझे इतना गरम कर दिया है कि अब बिना चुदवाने मुझे चैन नहीं आने वाला।

हम बेडरूम में पहुँचे और वहाँ वंदना मेरे कपड़े उतारने लगी और मैंने उसका टॉप उतार दिया। फिर उसके ब्रा को खोलकर उसकी बड़ी बड़ी चूचियाँ नंगी हो गयी। उसने भी मुझे नंगा किया और मेरी चड्डी उतारकर मेरे लौड़े को पकड़कर रेशमा को दिखाकर बोली: ये है इनका मस्त लौड़ा जो तुमको माँ बनाएगा। देखो इनके बालस कितने बड़े हैं और मस्त मर्दाना स्पर्म से भरे हुए हैं जो तुमको जल्दी ही क्या पता आज ही माँ बना देंगे।

रेशमा मेरे लौड़े को और बॉल्ज़ को देखती रही।तब तक वंदना नीचे बैठ गयी और मेरा लौड़ा चूसने लगी।और फिर वह रेशमा को दिखाकर मेरे बालस चूसने लगी। अब मैं भी गरम हो गया था और मैंने रेशमा की पैंट उतारी और उसकी पैंटी को देखकर मस्त हो गया जो की सामने से पूरी गीली थी। मैं समझ गया कि वह बहुत गरम है और बड़े मज़े से चुदवाएगी । उसकी पैंटी नीचे करके मैंने उसकी बुर को देखा और बिना झाँट के बुर को देखकर मेरे लौड़े ने वंदना के मुँह में झटका मारा।

वह अब बहुत गरम थी और मैंने वंदना को नीचे लिटाया और उसके ऊपर आकर उसे पागलों की तरह चोदने लगा। वह भी कमर उठकर मज़ा देने लगी। मैंने देखा कि रेशमा भी बग़ल में आकर लेट गयी और अपनी बुर में ऊँगली डाल रही थी और हमारी चुदाई को ध्यान से देख रही थी। कमरा फ़च फ़च की आवाज़ों से गूँज रहा था और वह ध्यान से मेरे धक्कों को देख रही थी मानो वो भी कोई नया अजूबा देख रही हो।

मैं बोला: क्या बात है रेशमा , क्या देख रही हो? तुम्हारा पति भी तो ऐसे ही चोदता होगा ना तुमको रोज़ ?

रेशमा: मेरे पति मुझे बहुत प्यार करते हैं और बड़े आराम से करते हैं। आपके जैसे जंगली की तरह नहीं करते।

तभी वंदना हाय्य्य्य्य्य्य्य्य और ज़ोर से चोओओओओओदो चिल्लायी और रेशमा हैरानी से अपनी सास को देखने लगी। वह अब ज़ोर ज़ोर से अपनी कमर उछालकर हाय्य्यय आऽऽह करके झड़ने लगी। अब उसके झड़ने के बाद मैंने अपना लौड़ा बाहर निकाल लिया और अब रेशमा के ऊपर आ गया। मेरा लौड़ा अभी भी पूरा खड़ा था और वंदना की बुर के रस से गीला होकर चमक रहा था।
अपने लौड़े को रेशमा की आँखों के सामने लाकर उसको झुलाते हुए मैं बोला: रेशमा बेटा मर्दाना चुदायी ऐसी होटी है। क्या तुम्हारा पति भी ऐसे ही धमासान चुदाई करता है? देखो तुम्हारी सासु माँ क्या मस्ती से चुदायी। अभी मैं तुमको ऐसे ही चोदूँगा। तुम कभी नहीं भूलोगी और मेरे पास बार बार आओगी चुदवाने जैसे तुम्हारी सास आती है।

रेशमा: अंकल आपको पता है कि मैं आपके पास सिर्फ़ इस लिए आयी हूँ कि मुझे माँ बनना है । वैसे आपको बता दूँ कि मेरे पति भी मुझे बहुत अच्छी तरह से संतुष्ट करते है और उनका भी आपके जैसे ही बहुत बड़ा है। बस पता नहीं स्पर्म कैसे कम हो गए । इसीलिए आपके पास आयी हूँ। मैं उनसे बहुत प्यार करती हूँ। पर हाँ वो ऐसे ज़ोर ज़ोर से नहीं करते जैसे आप किए थे अभी माँ को!
मैं: अरे उसी जबदरस्त चुदाई में ही तो मज़ा है बेटा। अभी देखना कैसे तुमको मस्त करता हूँ। बेटी लड़की एक से ज़्यादा मर्द से भी तो प्यार कर सकती है। जैसे तुम्हारी सास अब मुझे भी प्यार करने लगी है। वैसे ही तुम भी बहुत जल्दी मुझे भी प्यार करने लगोगी। मैं भी तो अपनी बीवी से भी प्यार करता हूँ।

रेशमा: आपकी सोच मेरे से अलग है।

मैं: अब तुम दोनों सुनो मेरी सोच तो यह है कि जब तुम्हारे पति का लौड़ा बहुत मस्त है तो वंदना को बाहर आकर मुझसे चुदवाने की क्या ज़रूरत है वो तो अपने बेटे से भी चुदवा सकती है ना।

रेशमा: क्या बकवास कर रहे हैं आप? भला ऐसा भी कहीं होता है? वो माँ बेटा हैं।
मैं: क्यों वंदना, तुम्हारे बेटे का लौड़ा मस्त है और अगर रेशमा को कोई ऐतराज़ ना हो तो क्या तुम अपने बेटे से चुदवा नहीं सकती?

वंदना: छी कैसी बातें कर रहे है आप? छोड़िए ये सब बकवास और रेशमा को चोदिए अब।

रेशमा: एक बात पूँछुँ अंकल? आपकी बेटी को भी आप चोदना चाहोगे क्या?

मैं: सच बताऊँ, अगर अनीता नहीं होती तो सच में मैं अपनी बेटी को चोद देता। बस उसके डर से नहीं चोदा। वरना जब वह जवान हो रही थी तो कई बार मन में आया कि मेरी जवान बेटी किसी दूसरे से क्यों चुदवाए वो भी मेरे जैसे चुदक्कड के होते हुए।

रेशमा हैरानी से मुझे देख रही थी और मैंने अब अपने दोनों हाथ उसकी चूचियों पर रखे और उसके होंठ चूसने लगा। अब मैं रेशमा को चोद्ने की तैयारी करने लगा। मैंने देखा कि वंदना बाथरूम से वापस आ गयी थी और हमारी टांगों की तरफ़ आकर बैठ गयी थी। अब वह मेरे बॉल्ज़ का मसाज़ करने लगी। मैं अब बहुत मस्त हो कर उसे चोदने की तैयारी करने लगा।
अजित रुका और संजू को अपना लौड़ा चूसते देखकर उसकी चूचि दबाकर बोला: मज़ा आ रहा है चूसने में?

संजू: चूसने में तो आ ही रहा है पर आपकी बात में ज़्यादा मज़ा आ रहा है। आगे क्या हुआ ?

अजित आगे बोलता चला गया…

अब रेशमा की बुर में मैंने दो उँगलियाँ डालकर उसकी बुर और clit रगड़ने लगा और एक चूचि मुँह में और एक हाथ में लेकर उसके निप्पल्स को दबाने लगा। वंदना मेरे बॉल्ज़ चाटने लगी। फिर मैं नीचे आया और रेशमा की मस्त पूरी तरह से पनियाई हुई बुर को देखकर मस्ती से उसे चूम उठा। वह बहुत गरम होकर अपनी बुर को मेरे मुँह में अपने कमर उछालकर दबाने लगी।
अब वंदना बोली: क्यों तड़पा रहे हो बच्ची को ,

अब डाल भी दो ना। ये कहते हुए वह मेरे अकड़ा हुआ लौड़ा मसल दी। मैंने अब रेशमा की दोनों टाँगें पूरी तरह से फैलायी और उसके बीच में आकर अपना लौड़ा उसकी बुर के ऊपर सेट करके अपने लौड़े के सुपाडे से उसकी बुर के पूरे छेद और clit को लम्बाई में रगड़ने लगा। वह उइइइइइइइइ माँआऽऽ कर उठी।
मैं: रेशमा बेटा, बोलो चोदूँ? बोलो ना।

रेशमा: आऽऽहहह हाँ अंकल हाँ।

मैं : हाँ क्या? बोलो चोदूँ ?

रेशमा: हाऽऽयय्यय क्यों तड़पा रहे हैं अंकल । चोदिए ना प्लीज़ आऽऽऽऽऽऽऽहहह

मैं: ठीक है तो डाल दूँ ना अब अंदर अपना लौड़ा ?

रेशमा: हाय्य्य्य्य्य डालिए नाआऽऽऽऽ।

मैं: क्या डालूँ?

रेशमा: हाऽऽऽऽऽय्यय आऽऽऽऽऽऽपका गरम लौड़ाआऽऽऽऽ आऽऽह और क्या।

वंदना: क्यों तड़पा रहे हो चोदो ना अब उसको। देखो कैसी मरी जा रही है ये चुदवाने के लिए ।
मैंने मुस्कुराते हुए अपना लौड़ा उसकी गीली बुर में पेलना शुरू किया और टाइट जवान बुर मुँह खोलकर मेरा लौड़ा गपकते चली गयी। आऽऽहहह क्या ज़बरदस्त अनुभव था । उसकी बुर पूरे तरह से मेरे लौड़े को अपनी ग्रिप में जकड़ ली और मुझे बरसों के बाद बहुत मज़ा आया। अब मैंने चोदना शुरू किया। पहले धीरे धीरे से उसके होंठ और चूचि चूसते हुए और जल्दी ही ज़ोर से पिलाई करने लगा। वह पागलों की तरह चिल्ला कर आऽऽऽहहह हाय्य्यय और उइइइइइइइइ माँआऽऽऽऽऽ कहकर अपनी गाँड़ उठाकर चुदवा रही थी।वंदना उसके सिर के पास बैठ कर उसकी छाती सहला रही थी।

अचानक मुझे लगा की वह मुझसे बुरी तरह चिपक रही है और चिल्लाई : उओइइइइओओओओ हाऽऽऽऽऽऽय्य। मुझे लगा कि वह झड़ रही है। पर मैं रुका नहीं और चुदाई चालू रखा। अब मैं भी झड़ने वाला था पर मैं रुका और उसके होंठ चूसते हुए उसकी चूतरों को दबाने लगा। और बोला: रेशमा मज़ा आ रहा है।
रेशमा: आऽऽऽह बहुत मजाऽऽऽऽऽ आऽऽऽऽ रहा है। मैं तो एक बार झड़ भी गयी। अब दूसरी बार झड़ूँगी । आऽऽह आप चोदते रहिए। हाय्ययय क्या मस्त चोदते हैं आऽऽप। आऽऽऽहह।

मैं अब ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा। मैंने उसकी टाँगें उठाकर उसकी छाती पर रख दी और पूरी ताक़त से धक्के मारने लगा। पूरा पलंग हिल रहा था और फ़च फ़च के साथ ही हाय्य्य्य्यय मरीइइइइइइइइ की आवाज़ें गूँज रही थीं।

वंदना: थोड़ा धीरे से चोदो ना । क्या लड़की की फाड़ ही डालोगे।

रेशमा: आऽऽऽऽऽह माँ चोदने दो ऐसे है , हाय्य्य्य्य क्या मजाऽऽऽऽऽऽऽ आऽऽऽऽ रहाऽऽऽऽऽ है माँआऽऽऽऽऽऽ। सच ऐसे मैं कभी भी नहीं चुदीं। हूँ। उइइइइइइइइइ माँआऽऽऽऽऽऽ । ये कहकर वो अपनी गाँड़ उठा के मेरे धक्कों का जवाब देने लगी। अब मैंने भी उसके दोनों चूतरों को एक एक हाथ में लिया और ज़बरदस्त धक्के मारने लगा। वंदना अब उसके निप्पल्स दबाने लगी

मेरी एक ऊँगली उसकी गाँड़ के छेद को सहलाती हुई कब उसके छेद में घुस गयी मुझे भी पता नहीं चला। वह अब आऽऽऽहहह कर उठी। शायद उसका यह पहला अनुभव था गाँड़ में ऊँगली करवाने का ।

चुदाई अपने पूरे शबाब पर थी और वंदना की साँसे फिर से फूलने लगी थी हमारी चुदाई देखकर। वह अब अपनी बुर में दो ऊँगली डालके मज़े ले रही थी। रेशमा की मस्ती से भरी चीख़ें जैसे रुकने का नाम ही नहीं के रही थी। फिर अचानक वह चिल्लाई: आऽऽऽह्ह्ह्ह्ह मैं गइइइइइओओइओओओ । अब मैं भी झड़ने लगा। मैंने उसकी बुर के अंदर उसकी बच्चेदानी के मुँह पर ही अपना वीर्य छोड़ना शुरू किया। पता नहीं कितनी देर तक हम दोनों एक दूसरे से चिपके हुए अपने अपने ऑर्गैज़म का आनंद लेते रहे। वंदना बोली: अब उठो भी क्या ऐसे ही चिपके पड़े रहोगे?

मैं धीरे से उसके ऊपर से उठा और उसके बग़ल में लेट गया और बोला: आऽऽहहह आज बहुत दिन बाद असली चुदाई का मज़ा आया। वंदना , रेशमा तो बनी ही है चुदवाने के लिए। तुम इसे कहाँ छुपा कर रखी थी।
रेशमा मेरे नरम लौड़े से खेलते हुए बोली: मुझे क्यों ऐतराज़ होगा। उनका बेटा पहले है , मेरा पति तो बाद में बना है।

वंदना उलझन के साथ बोली: रेशमा क्या तुम भी यही चाहती हो?

रेशमा: माँ आज की चुदाई के बाद तो मुझे ऐसी चुदाई की ज़रूरत पड़ेगी ही। अब वो आपका बेटा करे तो ठीक नहीं तो अंकल तो हैं ही मेरे लिए। क्यों अंकल आप मुझे ऐसे ही चोदेंगे ना हमेशा? वो मुझसे चिपकते हुए और मेरी छाती को चूमते हुए बोली। उसका हाथ अभी भी मेरे लौड़े को सहला रहा था।

वंदना को सोच में देखकर मैं बोला: वंदना, ज़्यादा सोचो मत । तुम दोनों उसको अच्छी तरह से सिखा दो और फिर मज़े लो घर के घर में।

वंदना: हाँ लगता है आप ठीक ही कह रहे हो। अब बच्चा होने के बाद रेशमा आपसे हमेशा तो चुदवा नहीं सकती ना।
रेशमा: अंकल आपका फिर से खड़ा हो रहा है।
मैं: चलो चूसो इसको। वंदना तुम भी आओ और दोनों मिलके चूसो। वह दोनों मिलकर मेरे लौड़े और बॉल्ज़ को चूसने लगीं और मैं आनंद से भर उठा। आऽऽह क्या दृश्य था सास और बहू दोनों मेरे को अद्भुत मज़ा दे रहीं थीं। फिर मैंने वंदना को घोड़ी बनाया और पीछे से उसकी ज़बरदस्त चुदाई की , उसकी लटकी हुई चूचियाँ अब रेशमा दबा रही थी। वंदना उइइइइइइइइ आऽऽऽऽऽहहह उन्ह्ह्ह्ह्ह करके जल्दी ही झड़ गयी। अब मैंने रेशमा को घोड़ी बनाया और उसकी भूरि गाँड़ के छेद को देखकर वहाँ जीभ डालके उसे चाटने लगा।वह आऽऽऽह कर उठी। फिर मैंने उसकी बुर में लौड़ा पेला और उसकी गाँड़ में दो ऊँगली डालके उसे ज़बरदस्त तरीक़े से चोदने लगा। क़रीब २० मिनट की घिसाई के बाद हम दोनों झड़ गए।

बाद में वंदना अपने कपड़े पहनते हुए बोली: मुझे तो लागत है कि रेशमा को आज ही गर्भ ठहर गया होगा। आप ऐसी चुदाई किए हो आज कि मैं भी हिल गयी।
रेशमा मुझसे लिपट कर बोली: थैंक यू अंकल । इतना मज़ा दिया और अगर माँ भी बन गयी तो सोने पे सुहागा हो जाएगा।

मैं: अगर का क्या मतलब बेटा, माँ तो बनोगी ही। देखना भगवान ने चाहा तो इस महीने तुम्हारा पिरीयड आएगा ही नहीं।

वंदना मेरे लौड़े को पैंट के ऊपर से दबाके बोली: सब इसका कमाल है । आह क्या मस्ताना हथियार है आपका।

हम तीनों हँसने लगे। फिर अगले दिन मिलने का कहकर वो चली गयीं।
संजू ने लौंडे को चूसते हुए पूछा : फिर क्या हुआ ?

मैं: बस इसी तरह चूदाई चलती रही और उसका अगले महीने पिरीयड नहीं आया। फिर दो तीन महीने बाद वह चुदवाना बंद कर दी। बाद में वंदना बताई कि वह भी अपने बेटे से ही चुदावाने लगी थी, और अब रेशमा और वह दोनों उससे ही अपनी बुर की प्यास बुझवाते थे। समय पर उसके एक बेटा हुआ और वो मुझे उसे दिखाने मेरी दुकान पर आयीं। बहुत सुंदर और प्यारा लड़का था । बस इसके बाद कभी कभी वो दुकान पर आतीं हैं तो मुलाक़ात हो जाती है ,वरना वह अपने घर ख़ुश और मैं अपने घर ख़ुश ।

यही कहानी है रेशमा के माँ बनने की, अब तुम्हारी बारी है , तुम भी इसी महीने गर्भ से हो जाओगी, देखना?

फिर मैंने उसका सिर अपने लौंडे से हटाया और उसको लिटाकर उसकी ज़बरदस्त चूदाई की। अपना वीर्य मैंने उसकी बच्चेदानी के मुँह पर ही छोड़ा ताकि वो भी जल्दी से माँ बन जाए।
संजू को चोदने के बाद अजित जैसे बाथरूम से बाहर आया उसका फ़ोन बजा। रूपा थी वो बोली: नमस्ते भाई साब , कैसे हैं?

अजित: नमस्ते भाभी जी बढ़िया हूँ। आपको मिस कर रहा हूँ। आप और चांदनी बिटिया की बड़ी याद आ रही थी।

रूपा: मैंने कूरीयर से चांदनी की कुंडली भेज दी है। आप पंडित जी से मिलवा लीजिएगा।

अजित: अरे अब उन दोनों के दिल मिल गए हैं कुंडली भी मिल ही जाएगी। और शादी के बाद वैसे भी बाक़ी सब का भी मिलन हो ही जाएगा। यह कहते हुए वह कमिनी हँसी हँसा।

रूपा: भाई सांब आप भी क्या क्या बोलते हैं । सगाई की कोई तारीख़ का सोचा आपने?

अजित: अरे आप कल आ जाइए ना फिर हम दोनों पंडित से कुंडली भी मिलवा लेंगे और सगाई की तारीख़ भी तय कर लेंगे। और फिर हम अपनी भी दोस्ती और पक्की कर लेंगे। वह फिर से फूहड़ सी हँसी हँसा। रूपा को उसके इरादों में गड़बड़ी दिखाई दी पर वह क्या कर सकती थी।
अजित भी बाई करके फ़ोन काटा और अपने लौड़े को सहलाते हुए सोचा कि साली क्या माल है, मज़े तो लूँगा ही।

संजू जो उसे ध्यान से देख रही थी बोली: आप समधन को ठोकने का प्लान बना रहे हैं। है ना?

अजित: साली मस्त माल है और अपने जेठ से ठुकवा रही है। मैं भी लाइन लगा लिया हूँ। यह कहते हुए वह हँसने लगा।
रात को आकाश से बात हुई तो वह बोला: आज मेरी चांदनी से बात हुई । वह बहुत संस्कारी लड़की है।

अजित : हाँ बहुत प्यारी लड़की है। उसकी माँ एक दो दिन में आएगी और हम पंडित से मिलेंगे तुम्हारी सगाई की तारीख़ के लिए।
आकाश: ठीक है पापा अब मैं सोता हूँ।

अजित हँसते हुए: क्या चांदनी से रात भर बात करनी है?

आकाश: नहीं पापा वो ऐसे ही, हाँ उसको गुड नाइट तो करूँगा ही। फिर वह हँसते हुए अपने कमरे में चला गया। उसके जाने के बाद वह भी सो गया । अगले दिन रूपा का फ़ोन आया : नमस्ते भाई सांब ।

अजित: नमस्ते जी। क्या प्लान बनाया है आपने?

रूपा: जी कल आऊँगी और पंडित जी से सगाई की बात भी कर लेंगे।
अजित: कौन कौन आएँगे?

रूपा: मैं और जेठ जी आएँगे।

अजित : चलिए बढ़िया है आइए और कल ही प्लान फ़ाइनल करते हैं। बस एक रिक्वेस्ट है?

रूपा: कहिए ना , आप आदेश दीजिए। रिक्वेस्ट क्यों कर रहे हैं?

अजित: आप गुलाबी साड़ी पहन कर आइएगा। आप पर बहुत जँचेगी।

रूपा: ओह,आप भी ना, ये कैसी फ़रमाइश है भला? देखती हूँ , मेरे पास है कि नहीं। बाई।

अजित भी अपना लौड़ा दबाते हुए सोचा कि क्या मस्त लगेगी वह गुलाबी साड़ी में।

अजित सोचने लगा कि ये तो जेठ के साथ आ रही है । उसकी बात कैसे बनेगी? वह बहुत सावधानी से धीरेधीरे आगे बढ़ना चाहता था। उसने सोचा चलो देखा जाएगा।
अजित ने आकाश को बताया कि कल उसकी होने वाली सास आ रही है। आकाश मुस्कुरा कर दुकान चला गया और संजू अजित की खिंचाई करने लगी, रूपा को लेकर। अजित ने उस दिन संजू की ज़बरदस्त चुदाई की उसको रूपा का सोचकर।
संजू की ज़बरदस्त चुदाई

अगले दिन आकाश के जाने के बाद राजेश और रूपा आए। अजित ने रूपा को देखा और देखता ही रह गया । वह गुलाबी साड़ी में मस्त क़ातिल माल लग रही थी। राजेश भी जींस और शर्ट में काफ़ी स्मार्ट लग रहा था। उसकी और अजित की उम्र में कोई ज़्यादा अंतर नहीं था। हाँ रूपा उनसे छोटी थी करीब ४५ की तो वो भी थी।
साड़ी उसने नाभि दर्शना ही पहनी थी और ब्लाउस भी छोटा सा था और पीछे से पीठ भी करीब पूरी नंगी ही थी। ब्लाउस में से उसके कसे स्तन देखकर अजित के लौड़े ने अंगड़ाई लेना शुरू कर दिया था। उससे तेज़ सेण्ट की ख़ुशबू भी आ रही थी।

अजित: आप लोग कैसे आए?

राजेश: बस से आए। अब सब बैठ गए।

अजित ने संजू को आवाज़ दी और वह पानी लाई।

अजित ने देखा कि राजेश संजू के ब्लाउस के अंदर झाँकने की कोशिश कर रहा था। वह समझ गया कि ये भी उसके जैसे ही कमीना है। वह मन ही मन मुस्कुराया।

रूपा: भाई सांब , पंडित जी से बात हुई क्या?

अजित: हाँ हुई है ना। अभी चाय पीकर वहाँ जाएँगे।

फिर सब चाय पीने लगे। इधर उधर की बातें भी होने लगी।

राजेश: बस से आए। अब सब बैठ गए।

अजित ने संजू को आवाज़ दी और वह पानी लाई।

अजित ने देखा कि राजेश संजू के ब्लाउस के अंदर झाँकने की कोशिश कर रहा था। वह समझ गया कि ये भी उसके जैसे ही कमीना है। वह मन ही मन मुस्कुराया।

रूपा: भाई सांब , पंडित जी से बात हुई क्या?

अजित: हाँ हुई है ना। अभी चाय पीकर वहाँ जाएँगे।

फिर सब चाय पीने लगे। इधर उधर की बातें भी होने लगी।

पंडित को अजित ने एक दिन पहले ही सेट किया था। देखना था कि पंडित कितना मेनेज कर पाता है रूपा को।
कार पंडित के घर के पास रुकी और रूपा अपना पल्लू ठीक करते हुए कार से उतरी और उसके बड़े दूध अजित को मस्त कर गए। पंडित की उम्र क़रीब ६५ साल की थी। उसके घर में बैठने के बाद अजित ने कुंडलियाँ देखीं और थोड़ी देर में ही गुँण मिलने की घोषणा कर दिया। अब राजेश और अजित एक दूसरे को बधाई देने लगे। रूपा ने भी बधाई दी।

अब अजित रूपा को बोला: भाभी जी , ये बहुत पहुँचे हुए ज्ञानी पंडित जी हैं। आप अपना हाथ इसे दिलाइए। बहुत सटीक भविष्य वाणी करते हैं।

रूपा बहुत उत्सुकता से अपना हाथ उनको दिखाई।

पंडित ने उसका हाथ देखा और बोला: मैं आपको अकेले में बताऊँगा । आप दोनों थोड़ा बाहर जाइए।
अजित और राजेश बाहर आ गए।

पंडित उसके मुलायम हाथ को सहला कर बोला: देखो बेटी, मैंने तुम्हारे हाथ को रेखाओं में कुछ अजीब चीज़ देखी है, इसीलिए तुमको बता रहा हूँ।

रूपा: क्या हुआ पंडितजी ? कुछ गड़बड़ है क्या?

पंडित: अरे नहीं बेटी, अब तुम बिना पति के अपनी बिटिया की शादी करने जा रही हो ना? तो तुम बहुत ख़ुश क़िस्मत हो कि तुमने बहुत अच्छा परिवार मिला है रिश्ते के लिए।

रूपा ख़ुश होकर: जी पंडित जी , आप सही कह रहे हैं।

पंडित: एक बात और ये रेखा बता रही है कि तुम्हें अब एक नया प्रेमी मिलने वाला है जो तुमको बहुत प्यार करेगा।
रूपा चौंक कर बोली: छि पंडित जी , ये क्या कह रहे हैं? भला इस उम्र में मुझे ये सब करना शोभा देता है क्या? ये नहीं हो सकता।
पंडित: बेटी, मैं तो वही बताऊँगा जो कि रेखाएँ दर्शा रही है। तुम्हारे जीवन में अब कोई पुरुष आने वाला है जो कि तुम्हें बहुत प्यार करेगा ।

रूपा: आपने तो मुझे उलझन में डाल दिया। अच्छा सगाई की तारीख़ कब की निकली?
पंडित: अगले महीने की दस को।

रूपा ने पंडित के पैर छुए और उसे दक्षिणा दी। पंडित मन ही मन मुस्कुराया और सोचा किउसने अजित का काम शायद सही तरीक़े से कर दिया है।

रूपा बाहर आइ और बोली: चलिए सगाई की तारीख़ अगले महीने की १० को निकली है।

राजेश: पंडित ने तुमको अकेले में क्या बताया?

अजित ने ध्यान से देखा कि उसके गाल शर्म से लाल हो गए थे। वह बोली: बस ऐसे ही कुछ चांदनी और आकाश के बारे में बता रहे थे। कुछ ख़ास बात नहीं है। चलिए अब ।

अजित ने देखा किपंडित ने अपना काम ठीक से कर दिया है। अब उसका काम है दाना डालने का। वो कमिनी मुस्कान लाकर सोचा कि अब इसे पटाना है।
मुझे नाम से ही बुलाइए

अजित : चलो कहीं कॉफ़ी हाउस में कॉफ़ी पीते हैं।
फिर वो सब एक कॉफ़ी हाउस पहुँचे।
बहुत सही जा रहे हो डिअर…
अपडेट बड़े नहीं ले रहा तो कोई बात नहीं… आप छोटे छोटे अपडेट डालते रहो…’मज़ा आ रहा हँ…
इस वक़्त जब कोई भी लेखक बहे अपडेट नहीं डाल प् रहा होगा तो आपके छोटे छोटे अपडेट सभी पाठकगण
बड़े चाव से पड़ेंगे… यानि मामला टी आर पि का हँ बॉस….
जितने ज्यादा अपडेट उतनी थी ज्यादा व्यूज मिलेगी…
बेस्ट ऑफ़ लक…
कॉफ़ी हाउस में राजेश और अजित रूपा के आजु बाजु बैठे। इन्होंने एक कैबिन लिया था ।
अजित: भाभी जी क्या लेंगीं?
रूपा: आप मुझे भाभीजी मत कहिए , मैं तो आपसे छोटी हूँ। आप मुझे नाम से ही बुलाइए।
अजित: अच्छा रूपा क्या लोगी कॉफ़ी के साथ?
रूपा: मुझे तो सिर्फ़ कॉफ़ी पीनी है।
तभी राजेश का फ़ोन बजा और वह बाहर चला गया कहकर कि एक मिनट में आया।
अजित : आप कुछ खाती नहीं क्योंकि आपको अपना फिगर बनाए रखना है ना ?
रूपा: काहे का फ़िगर ? कितनी मोटी तो हूँ मैं?
अजित: तुम और मोटी? तुम्हारा फ़िगर तो किसी को भी पागल कर दे रूपा। सच कहता हूँ कि तुममें जो बात है ना वह मुश्किल से किसी में मिलती है। मैं बताऊँ मुझे तो तुम्हारी जैसी भरी हुई औरतें ही अच्छी लगती हैं । मेरी वाइफ़ का भी फ़िगर बिलकुल तुम्हारे जैसे ही था । मस्त भरा हुआ बदन।
ये सब उसने उसकी चूचि को घूरते हुए कहा।
रूपा की हालत काफ़ी ख़राब हो रही थी, इस तरह की तारीफ़ सुनकर। आख़िर तो वह भी एक औरत ही थी, जिसे अपने रूप का बखान अच्छा लगता है।
रूपा: क्या भाई सांब आप तो मेरे पीछे ही पड़ गए।
अजित ने हिम्मत की और उसका हाथ अपने हाथ में लेकर बोला: रूपा सच में तुम्हें देखकर मुझे अपनी स्वर्गीय बीवी की याद आती है । वह भी बिलकुल तुम्हारी जैसी प्यारी थी।
ये कहते हुए उसने अपने आँसू पोछने की ऐक्टिंग की ।
रूपा भावुक हो गयी और बोली: आप बहुत अच्छे हैं, भाई सांब । कई लोग तो बीवी के जाते ही नयी शादी कर लेते हैं । आपने ऐसा नहीं किया।

अजित: अगर तुम जैसी कोई मिल जाती तो मैं वो भी कर लेता।

रूपा: क्या भाई सांब आप भी कुछ भी बोल देते हैं?

अजित : मैं तो दिल की बात कर रहा हूँ। वैसे एक विचार आया है, क्यों ना हम दोनों भी उसी मंडप में शादी कर लें जिसने आकाश और चांदनी की शादी होगी? क्या कहती हो?

उसने रूपा का हाथ सहलाते हुए कहा।

रूपा हंस दी: आप भी ना , कोई ऐसा मज़ाक़ भी करता है?

अजित: रूपा, जब तुम हँसती हो तो और भी सेक्सी लगती हो।

रूपा: छी ये क्या बोल रहे हैं। अजित ने देखा कि वह अपना हाथ उसके हाथ से छुड़ाने का कोई प्रयास नहीं कर रही थी ।
रूपा सोचने लगी किक्या पंडित जी ने अजित के बारे में ही कहा था कि उसके ज़िंदगी में प्यार आएगा।

तभी राजेश अंदर आया और अपनी कुर्सी ओर बैठ गया। रूपा ने अपना हाथ अजित के हाथ से छुड़ा लिया था। राजेश के बैठने के बाद अजित ने रूपा का हाथ टेबल के नीचे से फिर पकड़ लिया था। रूपा ने भी मना नहीं किया। अब वह उसकी नरम और गुदाज कलाई को सहलाए जा रहा था। तभी अजित की नज़र राजेश के पीछे रखे आइने पर पड़ी और वह चौक गया। राजेश ने भी उसकी एक कलाई को अपने हाथ में लेकर सहलाना शुरू कर दिया था।

बेचारी रूपा दो दो मर्दों के हाथों में अपना हाथ दे रखी थी। तभी कोफ़्फ़ी आयी और रूपा ने बेज़ारगी से अजित को देखा और उसने उसका हाथ छोड़ दिया।

अजित ने देखा की राजेश अब भी उसकी कलाई सहला रहा था ।फिर वो उसकी जाँघ भी सहलाने लगा ।

अजित ने भी हिम्मत की और अपना एक हाथ उसके घुटने पर रख दिया। रूपा चौक कर उसकी ओर देखी। पर कुछ नहीं बोली।

फिर जब राजेश का हाथ उसकी जाँघ पर ज़्यादा ही ऊपर की ओर आ गया तब वह राजेश से बोली: भाई सांब , आपकी कुर्सी पीछे करिए ना मुझसे टकरा रही है। राजेश समझ गया कि वह कुर्सी के बहाने उसे जाँघ से हाथ हटाने को कह रही है। उसने हाथ भी हटा लिया और कुर्सी भी खिसका ली।

अजित ने आइने में सब देखा और फिर अपना हाथ धीरे से उसकी जाँघ पर फेरने लगा , रूपा ने उसकी तरफ़ देखा पर वह चुपचाप उसकी जाँघ सहलाता रहा। अब रूपा के चुप रहने से उसकी हिम्मत भी बढ़ी और वह जाँघ को हल्के से दबाने भी लगा। रूपा की बुर में हलचल होने लगी।

राजेश तो उसको चोदते ही रहता था पर अजित का स्पर्श नया था और पंडित भी बोला था कि नया प्रेमी मिलेगा। तभी अजित ने अपना चम्मच नीचे गिरा दिया और उसको उठाने के बहाने रूपा की साड़ी को भी थोड़ा सा उठा दिया और उसकी पिंडलियां सहलाने लगा। नरम नरम भरी हुई पिंडली और घुटना मस्त लगा उसको।

रूपा भी उसकी हिम्मत की दाद देने लगी। उसने अपना हाथ अजित के हाथ पर रखा और उसे हटाने को इशारा किया। पर अजित की तो हिम्मत जैसे और बढ़ गयी। वो उसकी साड़ी को और उठाके उसकी नरम गुदाज जाँघ सहलाने लगा। रूपा की आह निकल गयी। राजेश ने पूछा क्या हुआ?

रूपा: कुछ नहीं मुँह जल गया थोड़ी ज़्यादा गरम है कोफ़्फ़ी ।

तभी अजित का हाथ उसकी जाँघ में और आगे बढ़ता हुआ उसकी पैंटी से थोड़ा ही दूर था । तभी वेटर बिल ले आया और उसने अपना हाथ बाहर निकाल लिया और अपनी उँगलियाँ चाट लिया। रूपा उसके इशारों को समझ गयी और उसका चेहरा लाल हो चुका था । उसकी बुर पैंटी को गीला करने लगी थी । फिर वो कोफ़्फ़ी हाउस से बाहर आए।
अजित बाहर आते हुए बोला: चलिए आपको दुकान दिखाया जाए और आकाश से भी मिल लेना।
मस्त नरम कमर है तुम्हारी

रूपा: हाँ हाँ मुझे दामाद से तो मिलना ही है चलिए। कोफ़्फ़ी हाउस बाहर आते आते अजित ने उसकी नंगी कमर को हल्के से छुआ और वो सिहर उठी। अजित धीरे से उसके पीछे चलते हुए बोला: मस्त नरम कमर है तुम्हारी।
रूपा: आप अब बच्चों जैसी हरकत बन्द करिए आपको शोभा नहीं देती ।

राजेश आगे चल रहा था अब अजित ने उसके चूतरपर भी हल्के से हाथ फेरा। वह मुड़कर उससे बोली: क्या कर रहे हैं। कोई देख लेगा।

अजित: सॉरी । और फिर वो कार में बैठकर दुकान की ओर चल पड़े।

दुकान में आकाश ने उनका स्वागत किया और उसने राजेश और रूपा के पैर छुए। रूपा ने उसे आशीर्वाद दिया और प्यार से उसका माथा चूमा। ऐसा करते हुए उसकी बड़ी चूचियाँ आकाश की ठुड्डी को छू गयीं और अजित को आकाश से जलन होने लगी।

आकाश उन दोनों को बड़े उत्साह से दुकान दिखा रहा था। और अजित की नज़र अपनी समधन के बदन से हट ही नहीं रही थी। फिर राजेश आकाश के साथ men सेक्शन में कपड़े देखने लगा और अजित रूपा को बोला: चलो मैं तुम्हें कुछ ख़ास साड़ियाँ दिखाता हूँ। वह उसे लेकर साड़ी के काउंटर में पहुँचा और उसको कई शानदार साड़ियाँ दिखाकर बोला: ये सब तुमको बहुत अच्छी लगेंगी। अपने ऊपर लपेट कर देखो।

रूपा उदास होकर बोली: भाई सांब, अभी तो मुझे चांदनी के लिए कपड़े लेने है और शादी में बहुत ख़र्च होगा इसलिए मैं अपने लिए तो अभी कुछ नहीं खरिदूँगी।

अजित: अरे तुमसे पैसे भला कौन माँग रहा है। तुम बस साड़ी पसंद करो मेरी ओर से गिफ़्ट समझना।
रूपा: नहीं नहीं मैं आपसे कैसे गिफ़्ट ले सकती हूँ? हम तो लड़की वाले हैं।
अजित: अगर चांदनी के पापा होते तो तुम्हारी बात सही होती पर अभी इसका कोई मतलब नहीं है। ठीक है? मैं चाहता हूँ कि ये गिफ़्ट तुम मेरी प्रेमिका बन कर लो।
रूपा हैरानी से बोली: ये आप क्या बोल रहे हैं? मैं कैसे आपकी प्रेमिका हो सकती हूँ भला?
अजित: क्यों मर्द और औरत ही तो प्रेम करते हैं । तो हम क्यों नहीं कर सकते?
रूपा उठकर जाने लगी तब अजित बोला: तुम्हें मेरी क़सम है अगर तुम बिना साड़ी लिए गई तो ।
रूपा फिर से बैठ गयी और बोली; सब पूछेंगे तो मैं क्या बोलूँगी कि गिफ़्ट क्यों ली?
अजित ने जेब से ५४००/ निकाले और उसको देकर बोला: कहना कि तुमने साड़ी अपने बचाए हुए पैसों से ख़रीदी है।
वो चुपचाप पैसे रख ली और फिर २ साड़ियाँ ली एक अपने लिए और एक चांदनी के लिए।
अपनी साड़ी उसने अजित की पसंद की ही ली थी। अजित ने उसे साड़ी के ऊपर ही साड़ी पहनने में मदद भी की और इस बहाने उसके गुदाज बदन का भी मज़ा लिया। उसके हाथ एक बार उसकी चूचि पर भी पड़े और दोनों सिहर उठे।
काउंटर पर पैसे देने के समय अजित बोला: क्यों आकाश अपनी सास और बीवी की साड़ियों के पैसे लेगा
आकाश ने पैसे नहीं लिए और साड़ियाँ पैक करके रूपा को दे दीं।
रूपा धीरे से बोली: और वो पैसे जो आपने मुझे दिए उनका क्या?
अजित: मेरी तरफ़ से कुछ अच्छी सी झूमके ले लेना। तुम पर बहुत सजेंगे।
रूपा मुस्कुराती हुए बोली: शादी मेरी नहीं मेरी बेटी की हो रही है।

अजित अब ख़ुश था उसको पता चल गया था कि उसे पैसों की ज़रूरत है और वह रूपा को पटाने में क़रीब क़रीब सफल होने जा रहा था।
समधन को कहाँ छोड़ आए

राजेश बोला: अब चलते हैं, आप हमें बस स्टॉप पर छोड़ दो।
अजित : खाना खा कर जाना अभी इतनी जल्दी क्या है।
रूपा: नहीं अभी जाना होगा। अब सगाई की तैयारी भी तो करनी है।
अजित उनको बस स्टॉप तक ले गया। जब राजेश टिकट लेने गया तब अजित ने रूपा का हाथ पकड़ लिया और बोला: रूपा मुझे तुमसे प्यार हो गया है। तुम चाहो तो मैं तुमसे शादी करने को तैयार हूँ।
रूपा: काश आप मुझे पहले मिले होते तो मैं आपसे शादी कर लेती पर अब तो बहुत देर हो चुकी है।
अजित: तो क्या हमारा प्यार ऐसे ही दम तोड़ देगा। कमसे कम कुछ समय तो हमें एकांत में आपस में बातें करते हुए बिताना चाहिए।
रूपा: मैं भी आपसे मिलना चाहती हूँ, पर देखिए भाग्य को क्या मंज़ूर है।
अजित: हम चाहें तो हम ज़रूर मिल सकते हैं। मैं तुम्हें फ़ोन करूँगा ठीक है?
रूपा: फ़ोन नहीं SMS करिएगा।

फिर राजेश को आते देख अजित ने रूपा के हाथ को एक बार और दबाया और फिर उसका हाथ छोड़ दिया।

अब राजेश बस में चढ़ गया पर साड़ी के कारण रूपा को चढ़ने में थोड़ी दिक़्क़त हो रही थी। अजित ने उसकी कमर और चूतरों को दबाकर उसको ऊपर चढ़ा दिया। वो मुस्कुरा कर पलटी और प्यार से थैंक्स बोलकर गाड़ी में बैठ गयी और बस चली गयी।

अजित रूपा के बारे में सोचते हुए अपने घर को वापस आया। घर पर संजू खाना लगा रही थी।

वो आँख मारकर बोली: समधन को कहाँ छोड़ आए?
अजित उसको खींचकर अपनी गोद में बिठाया और बोला: समधन को मारो गोली। यहाँ तू तो है ना मेरे लिए । ये बोलते हुए उसकी छातियाँ दबाते हुए उसके होंठ चूसने लग। संजू ने कोई विरोध नहीं किया। वो भी सुबह से चुदासि थी। उसको अपनी गोद से हटाकर अजित खड़ा हुआ और अपनी पैंट और चड्डी निकाल दिया। उसका खड़ा लौड़ा बुरी तरह से अकड़ा हुआ था ।

वह वापस सोफ़े पर बैठा और संजू को ज़मीन में बिठाया और वह उसकी जाँघों के बीच आके उसका मोटा लौड़ा चूसने लगी। थोड़ी देर बाद वह संजू को सोफ़े पर उलटा लिटाया और उसकी साड़ी और पेटिकोट को एक साथ ऊपर चढ़ाया और उसके नंगे चूतरों को दबाकर उसको सोफ़े के किनारे पर लाया और उसकी कमर को पकड़कर उसकी टाँगे फैलाकर उसकी बुर में पीछे से अपना लौड़ा पेल दिया। वो अब उसे चौपाया बनाकर बुरी तरह से चोदने लगा। उसने आँखें बन्द की और रूपा के चेहरे को याद किया और ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा।

संजू की चीख़ें निकलने लगी और वह आऽऽऽऽहहह मरीइइइइइइओइ उइइइइइइइ कहकर मज़े से चुदवाने लगी। जल्दी ही संजू झड़ने लगी। अब उसने रस से सना अपना लौड़ा बाहर निकाला और उसने उसपर थूक लगाया और ऊँगली में ढेर सारा थूक लेकर उसकी गाँड़ में दो ऊँगली डाल कर अंदर बाहर करने लगा। संजू चीख़ी :आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह जलन हो रही है।
पर आज तो अजित कुछ भी सुनने को जैसे तैयार नहीं था । वह सामने पड़ी क्रीम की शीशी से क्रीम निकाला और संजू की गाँड़ में लगाया और अपने लौड़े पर भी मला और फिर उसकी गाँड़ में अपने लौड़े का सुपाड़ा अंदर करने लगा।
संजू चिल्लाई: आऽऽऽऽंह दर्द हो रहा है।
पर अजित आज कुछ अलग ही मूड में था। उसने आधा लौड़ा एक धक्के में ही अंदर कर दिया। और अगले धक्के में पूरा लौड़ा आँड तक पेल दिया।
अब वह संजू की गाँड़ को ज़बरदस्त तरीक़े से चोदने लगा। कमरा ठप ठप की आवाज़ों से और संजू की हाय्य्यय उइइओओइओओ मरीइइइइइइइ गूँजने लगा।
जल्दी ही संजू भी मज़े में आ गयी और अपने चूतरों को पीछे दबाके पूरा मज़ा लेने लगी। अब अजित ने अपनी चुदाई की गति बढ़ाई और वह आऽऽहहहह ह्म्म्म्म्म्म करके झड़ने लगा। उसने नीचे हाथ बढ़ाकर संजू की बुर में भी तीन ऊँगली डाली और उसकी clit को भी रगड़ा। संजू भी उइइइइइइइओ माँआऽऽऽऽऽऽ कहकर झड़ गयी। अब अजित उसके अंदर से अपना लौड़ा निकाला और बाथरूम में जाकर सफ़ाई करके बाहर आकर नंगा ही सोफ़े पर बैठा। संजू भी बाथरूम से आयी और उसंके पास बैठ गयी।
इतनी बुरी तरह से चोद रहे थे

संजू: आज आपको क्या हो गया था? इतनी बुरी तरह से चोद रहे थे?

अजित: बस ऐसे ही , सुबह से रूपा ने बहुत गरम कर दिया था। वैसे तुम्हारी गाँड़ बहुत मस्त है। दुःख रही होगी ना?
संजू: नहीं दुखेगी? पूरी फाड़ दी है आपने। ख़ून भी आ गया है।

अजित: क्या करूँ? इतनी सुंदर दिख रही थी कि रहा नहीं गया और पेल दिया। पर बहुत मज़ा आया । और हाँ मज़ा तो तुमको भी आया क्योंकि चूतर दबाकर पूरा लौड़ा निगल रही थी तुम भी।

संजू: जी मज़ा तो आया पर अब दुःख रही है।

अजित उठा और एक मलहम लेकर आया और बोला: चलो साड़ी उठाओ मैं ये मलहम लग देता हूँ। जब मैं अनीता याने अपनी बीवी की गाँड़ मारता था तब भी ये क्रीम लगा देता था।

संजू उठी और अपनी साड़ी उठायी और अपने चूतरों को उसके सामने करके आगे को झुकी और अपने चूतरों को फैला दी। उसकी बुरी तरह से लाल गाँड़ का छेद उसके सामने था । उसने छेद को फैलाकर उसकी गाँड़ में उँगली से क्रीम डाली और बाद में उसके छेद के ऊपर भी क्रीम लगा दिया। संजू: आह अब आराम मिल रहा है। ये कहकर उसने अपनी साड़ी नीचे गिरा दी।


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