चुदक्कड बहु की चूत और प्यासे ससुर का लौड़ा - 2
उस दिन भी वो दोनों चुदाई के बाद आराम कर रहे थे संजू उसके लौड़े को हल्के से सहला रही थी। तभी उसके दोस्त आशीष का फ़ोन आया और वह बोला: यार क्या तुम और आकाश कल यहाँ आ सकते हो? मैं चाहता हूँ कि कल तुम मेरे दोस्त राजेश की भतीजी को देख लो। बहुत प्यारी बच्ची है तुम लोगों को ज़रूर पसंद आएगी।

अजित ने संजू की गाँड़ सहलाते हुए कहा: अच्छा ये तो बहुत अच्छी बात है। कौन कौन है उसके घर में?

आशीष: यार बेचारी के पिता का तो बचपन में ही देहांत हो गया था वह अपनी माँ के साथ मेरे दोस्त के यहाँ पली है जो कि उसका ताया है । यानी वह राजेश की भतीजी है। बी कॉम किया है और दिखने में भी बहुत सुंदर है।

अजित: ओह चलो हम कल का प्लान बनाते हैं। तुमको ख़बर कर के कल शाम को आएँगे । तुम्हारा शहर सिर्फ़ दो घण्टे की ही दूर पर तो है। हम वहाँ पाँच बजे तक तो पहुँच ही जाएँगे। येसी हजारो कहानियां है मस्ताराम डॉट नेट पर जो आप पढ़ सकते है |

फिर इधर उधर की बात करके उसने फ़ोन रख दिया। फिर अजित ने उसकी गाँड़ में एक ऊँगली डाल दी और संजू आऽऽंह कर उठी ।

अजित: अरे एक ऊँगली नहीं ले पा रही है तो मेरा लौड़ा कैसे अंदर लेगी?

संजू: मुझे नहीं लेना आपका लौड़ा यहाँ। बुर को जितना चाहिए चोदिए। पर गाँड़ नहीं मरवाऊँगी।

अजित: अरे जब तुम गर्भ से हो जाओगी तो गाँड़ से ही काम चलाउंगा ना। डॉक्टर बोल देगी तीन चार महीने बाद कि बुर को चोदना बंद करो।

संजू हँसते हुए बोली: तब की तब देखी जाएगी। अच्छा तो कल आप बहु देखने जा रहे हैं।

अजित : हाँ हम जाएँगे। देखें क्या होता है वहाँ?

फिर वह किचन ने चली गयी और वह भी आराम करने लगा।
संजू खाना बना कर चली गयी और आकाश दुकान बंद कर घर आया तो अजित ने उसे अगले दिन लड़की देखने की बात बताई। आकाश ने ठीक है कहा और दोनों खाना खाते हुए दुकान की बात करने लगे। खाना खाकर थोड़ी देर टेलीविजन देखकर वो सोने चले गए।

रात को सोते हुए अजित सोचने लगा कि बहु के आने के बाद उसकी और संजू की चुदाई मुश्किल में पड़ जाएगी। उसे कोई रास्ता निकालना ही होगा ताकि वो संजू को बिना किसी अड़चन के चोद सके। वैसे भी उसकी आँखों में संजू की कुँवारी गाँड़ घूम रही थी और वह यह सोचकर गरम हो गया कि उसकी गाँड़ मारने में क्या मज़ा आएगा। फिर वह अपने खड़े लौड़े को दबाकर सो गया।

अगले दिन आकाश को जल्दी वापस आने के लिए बोल कर अजित ख़ुद भी तैयार होकर बाज़ार गया और वहाँ से मिठाई और फल ख़रीदे। बाज़ार से वापस आकर उसने संजू की एक राउंड चुदाई भी की और फिर शाम को आकाश और वह पास के शहर में आशीष से मिलने पहुँचे।

आशीष उनको लेकर अपने दोस्त राजेश के यहाँ पहुँचा । राजेश और उसकी पत्नी ने उनका बहुत स्वागत किया और फिर उनको रूपा से मिलवाया,जो कि राजेश के स्वर्गीय भाई की पत्नी और चांदनी की माँ थी। चांदनी ही वह लड़की थी जिसे देखने वह दोनों आए थे।

अजित ने फल और मिठाई रूपा को दी। उसने देखा कि रूपा बला की ख़ूबसूरत महिला थी। बहुत गोरी और अपने उम्र के हिसाब से थोड़ी भरी हुई भी थी। बड़े बड़े दूध और उभरे हुए चूतर बहुत ही मादक थे। बहुत दिन बाद अजित के लौड़े ने एक नज़र देखकर ही एक औरत के लिए झटका मारा था। अजित उसकी गाँड़ के उभार को देखकर मस्ती से भर गया। फिर उसने अपने आप को याद दिलाया कि वह उसकी समधन हो जाएगी अगर ये रिश्ता हो जाता है।

उसने अपने आप को क़ाबू में किया और बोला: भाभी जी आप जब इतनी सुंदर हो तो आपकी बेटी भी यक़ीनन बहुत प्यारी होगी। आप यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

रूपा: अरे आपका बेटा भी तो बहुत प्यारा है। भाई सांब इन दोनों की जोड़ी बहुत जमेगी।

अजित हँसते हुए बोला: भाभी जी आपकी बेटी देख तो लें फिर शायद आपको बात से हम भी सहमत हो जाएँगे।

तभी राजेश आकर रूपा को बोला: रूपा आओ चांदनी को ले आते हैं। वो दोनों अंदर चले गए। अजित ने नोटिस किया कि राजेश अपनी बीवी की तरफ़ ज़्यादा ध्यान नहीं दे रहा था। वैसे उसकी बीवी काफ़ी दुबली पतली थी और बीमार सी दिखती थी।

अजित ने एक नौकर से कहा: मुँझे बाथरूम जाना है।

वह उसके साथ बाथरूम की ओर चल पड़ा। नौकर उसको एक कमरे में बाथरूम दिखाकर वापस चला गया। वह बाथरूम जाकर जब बाहर आया तभी उसको कुछ आवाज़ सी आयी। वह कमरे से बाहर आते हुए रुक गया और दरवाज़े के पास आकर थोड़ा सा दरवाज़ा खोलकर झाँका।
वहाँ सामने कोई नहीं था। वह बाहर आया और तभी उसको दबे स्वर में हँसने की आवाज़ आयी और वह पता नहीं क्यों उस कमरे के सामने पहुँचकर चुपचाप बातें सुनने लगा। अंदर आदमी बोल रहा था: अब यह शादी हो जाए तो हम खुलकर मस्ती कर सकेंगे । फिर चुम्बन की आवाज़ आइ । अब धीरे से वह अंदर झाँका। वहाँ का दृश्य बड़े ही हैरान करने वाला था। राजेश अपने भाई की बीवी के साथ लिपटा हुआ था और उसे चूमे जा रहा था। वह भी उससे मज़े से चिपकी हुई थी। राजेश के हाथ उसके बड़े बड़े चूतरों को दबा रहे थे।
रूपा: अच्छा अब छोड़िए। चांदनी तैयार हो गयी होगी।

राजेश: हाँ यार जितनी जल्दी उसकी शादी हो जाए हम मज़े से चुदाई कर सकेंगे।

रूपा: हाँ जी आपको भाभी तो मज़ा नहीं देती इसलिए मुझे ही रगड़ोगे आप तो। चलो अब जल्दी से वरना कोई देख लेगा। वो दोनों अलग हुए तो वह अपनी साड़ी का पल्लू ठीक करते हुए बोली: देखिए पूरा ब्लाउस छाती के ऊपर कैसा मसल दिया है आपने ।कोई भी समझ लेगा कि क्या हुआ है मेरे साथ।

राजेश: अरे तुम्हारी चूचियाँ हैं इतनी मस्त कि साला हाथ अपने आप ही उन पर चला जाता है। वह यह कहते हुए अपने लौड़े को पैंट में अजस्ट करने लगा।

फिर दोनों बाहर आने लगे। अजित जल्दी से वहाँ से हट कर छुप गया। उनके जाने के बाद वह वापस बाहर आ गया। आकाश वहीं बैठकर राजेश की बीवी से बातें कर रहा था।

थोड़ी देर बाद वो दोनों आए और साथ में चांदनी भी आयी। उसने साड़ी पहनी हुई थी। वह माँ जैसी ही गोरी चिट्टि और थोड़े भरे बदन की नाटे क़द की लड़की थी। आकाश तो उसे एकटक देखता ही रह गया। चांदनी ने भी भरपूर नज़र से आकाश को देखा और वह भी उसको बहुत पसंद आ गया।

अजित ने भी चांदनी को देखा और वह सच में अपनी माँ का ही प्रतिरूप थी। भरे बदन के कारण वह बहुत सेक्सी भी दिख रही थी। साड़ी से उसकी चूचियों के उभार बहुत ही ग़ज़ब ढा रहे थे। और जब वह उसको नमस्ते करके उसकी बग़ल से आकर साइड के सोफ़े में बैठी तो उसके चूतरों का उभार उसको मस्त कर गया। तभी उसे याद आया कि वह उसकी होने वाली बहु है। उसे अपने आप पर बहुत शर्म आयी और उसने अपना सिर झटका जैसे वह गंदे ख़याल अपने दिमाग़ से बाहर निकाल रहा हो।

राजेश: ये है हमारी बिटिया संजू रूपा। और रूपा ये है आकाश और ये हैं इनके पिता।

रूपा ने फिर से सबको नमस्ते किया। वह अपना सिर झुका कर बैठी थी। अजित ने देखा कि आकाश उसे देखे ही जा रहा था। वह मन ही मन मुस्कुराया और बोला: आकाश मैं चाहता हूँ कि तुम और चांदनी अकेले में थोड़ी देर बातें कर लो और एक दूसरे को समझ लो। राजेश जी आपको कोई ऐतराज़ तो नहीं?

राजेश: अरे नहीं हमें क्यों ऐतराज़ होगा अच्छा ही है वो दोनों एक दूसरे को समझ लें।

रूपा उठी और चांदनी और आकाश को लेज़ाकर एक कमरे में बिठा आयी।

जब वो वापस आइ तो अजित उसको भरपूर नज़रों से देखा, उसको उसकी और राजेश की मस्ती याद आ गयी।

रूपा: भाई सांब लगता है दोनों एक दूसरे को पसंद करने लगे हैं।

अजित: हाँ बड़ी ही प्यारी बच्ची है , मुझे भी लगता है कि दोनों एक दूसरे को पसंद आ गए हैं।

उधर चांदनी और आकाश एक दूसरे से बातें किए जा रहे थे। आकाश उसको अपने बिज़नेस वग़ैरह के बारे ने बताया और चांदनी अपनी पढ़ाई और अपने खाना बनाने के शौक़ के बारे में बतायी। जल्दी ही उन दोनों को समझ में आ गया कि वह एक दूसरे को पसंद करने लगे हैं। आप यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

थोड़ी देर बाद आकाश बोला: आप मुझे पसंद हो, अब आप बताओ कि मैं आपको पसंद हूँ या नहीं?

चांदनी ने सिर झुका कर कहा: आप भी मुझे पसंद हो। येसी हजारो कहानियां है मस्ताराम डॉट नेट पर जो आप पढ़ सकते है |

फिर दोनों उठकर बाहर आए और अजित ने पूछा: हाँ अब बताओ कि क्या इरादा है?

आकाश: पापा मेरी तो हाँ है।

राजेश: और बेटी तुम्हारी?

चांदनी ने शर्माकर अपना सिर हाँ में हिला दिया।

अब अजित ख़ुशी से खड़ा हुआ और राजेश भी खड़े होकर उसके गले मिला। और उन्होंने एक दूसरे को बधाइयाँ दी। रूपा ने भी अजित को बधाई दी। फिर आकाश और चांदनी ने सबके पैर छुएँ। राजेश ने सबको मिठाई खिलाई।

अब अजित भी कार से मिठाई और एक अँगूठी निकाल लाया। रूपा भी एक अँगूठी लायी। अब आकाश और चांदनी ने एक दूसरे को अँगूठी पहनायी। सबने उनको बधाइयाँ दी।बहुत से फ़ोटो खिंचे गए। फिर सबने नाश्ता किया और बाद में आकाश और अजित वापस अपने घर आ गए।

रास्ते में अजित बोला: बेटा पहली बार में ही लड़की पसंद आ गई ?

आकाश: जी पापा वो बहुत ही समझदार लड़की है और अपनी ज़िम्मेदारी भी समझती है।

अजित हँसते हुए बोला :और सुंदर भी है । है ना?
आकाश: जी पापा सुंदर तो है ही ।

अजित: तुम दोनों की जोड़ी ख़ूब जँचेगी। मुझे ख़ुशी है कि पहली बार में ही इतना बढ़िया रिश्ता मिल गया।

रात को सोते हुए अजित रूपा के बारे में सोच कर गरम होने लगा। क्या दूध हैं उसके। फिर अचानक उसको चांदनी के भी साड़ी से उभरे हुए दूध याद आ गए और उसका लौड़ा खड़ा हो गया। फिर उसे शर्म आइ और वह अपने आप को कोसा और सोने की कोशिश करने लगा।
सुबह उसने संजू के लिए दरवाज़ा खोला और आकर सोफ़े पर बैठ गया। संजू भी आकर उसकी गोद में बैठ गयी और बोली: तो क्या हुआ कल ? बहू पसंद आयी या नहीं?

अजित: बहुत पसंद आयी और हमने तो रोका भी कर दिया। अब सगाई की तारीख़ निकालेंगे।

संजू: कैसी है दिखने में?

अजित: बहुत प्यारी और सुंदर। तुमको फ़ोटो दिखाता हूँ। यह कहकर उसने संजू को मोबाइल पर कल की फ़ोटो दिखाई।

संजू: हाँ बहुत सुंदर है। भैया बहुत लकी है। वैसे भरी हुई है जैसी आपको अच्छी लगती हैं वैसे ही है।

अजित: बिलकुल खाते पीते घर की है, तुम्हारे जैसी सूखी और सुक़ड़ी सी नहीं है। यह कहते हुए वह हँसा और उसको चूम लिया। फिर उसकी छाती पर हाथ फेरने लगा।

संजू हँसते हुए बोली: आपकी बहू की छाती तो इतनी बड़ी है कि मेरी दोनों छातियाँ उसकी एक के बराबर होंगी।

अजित: अरे नहीं इतनी भी बड़ी नहीं हैं पर हाँ तुम्हारी छाती से काफ़ी बड़ी हैं।

संजू हँसते हुए: काफ़ी ध्यान से देखा है बहू की छातियों को? इरादा नेक है ना?

अजित: अरे तुम भी क्या फ़ालतू बात कर रही हो। ऐसी कोई बात नहीं है। वैसे इसकी माँ की चूचियाँ तुम्हारी से दुगुनी होंगी, ये देखो । ये कहकर उसने रूपा की फ़ोटो में उसकी छाती को ज़ूम करके दिखाया।

संजू: हाँ सच में इनकी बहुत बड़ी हैं। ये आपकी होने वाली समधन हैं क्या?

अजित: हाँ ये रूपा है मस्त माल है। और चालू भी है। ये कहते हुए उसका लौड़ा अकड़ने लगा और संजू को गाँड़ में चुभने लगा।

संजू गाँड़ को उचका कर बोली: आह इसे क्यों खड़ा कर लिए? समधन का जादू है क्या? आपने उसे चालू क्यों बोला?

अजित ने उसे राजेश और रूपा की मस्ती के बारे में बताया कि कैसे वो एक दूसरे से लिपट कर मज़ा कर रहे थे और चांदनी की शादी का इंतज़ार कर रहे थे ताकि खुल कर मज़े ले सकें।

अजित: मुझे लगता है कि चांदनी के कारण वो ज़्यादा मज़ा नहीं ले पाते होंगे। वैसे भी राजेश की बीवी तो बहुत बीमार दिख रही थी। वो क्या इनके मज़े में ख़लल डाल पाएगी? आप यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

संजू: तब तो चांदनी को भी इसका अंदाज़ा तो होगा ही कि उसकी माँ उसके ताया जी के साथ फँसी हुई है। और वो चुदाई के बारे में सब जानती होगी। वैसे भी उसका भरा हुआ बदन देखकर लगता है कि वो शायद चुदवा चुकी होगी।

अजित: क्या फ़ालतू बात कर रही हो? वो एक बच्ची की तरह मासूम है। बहुत नादान है वो बिलकुल एक नगीना यानी कि हीरा है।
संजू हँसते हुए बोली: उस बिचारि नगीना को क्या पता कि उसका ससुर कितना कमीना है?

अजित झूठा ग़ुस्सा दिखाकर बोला: मैंने क्या कमीनी हरकत की है?

संजू हँसते हुए बोली: अपनी बहू के दूध देखना और उसको मेरे दूध से तुलना करना क्या कमीनापन नहीं है? अच्छा ये बताइए उसकी गाँड़ कैसी है? आपको तो बड़े चूतर अच्छे लगते हैं ना? बहू के कैसे हैं? वैसे इस फ़ोटो में तो बड़े मस्त गोल गोल दिख रहे हैं। !

अजित का लौड़ा अब पूरा खड़ा हो कर उसकी गाँड़ में ठोकर मार रहा था। वह बोला: साली कमिनी , ख़ुद मेरी बहू के बारे में गंदी बात कर रही है और मुझे कमीना बोल रही है। चल अभी तेरी गाँड़ मारता हूँ मादरचोद।

ये कहकर वह उसको अपनी गोद में उठाकर बेडरूम में ले जाकर बिस्तर पर पटका और उसकी साड़ी ऊपर करके उसकी बुर में दो ऊँगली डाल दिया। इस अचानक हमले से संजू हाय्य्यय कर उठी पर वह उसकी बुर में उँगलियाँ अंदर बाहर करने लगा । जल्दी ही बुर गीली हो गई और उसने अपना लोअर और चड्डी उतारा और फनफना रहे लौड़े को उसकी बुर में एक झटके में पेल दिया। फिर उसके ऊपर आकर उसके ब्लाउस और ब्रा को ऊपर किया और चूचियाँ मसलते हुए उसकी बेरहमी से चुदाई करने लगा।

संजू भी आऽऽऽहहह हाय्य्य्य्य कहकर मस्ती से कमर उछालने लगी और बोली: सच में बोलो ना बहू भी अपनी माँ की तरह माल है ना?

अजित: आऽऽहहह मादरचोओओओओओओओद फिर वही। कहा ना माँ साली रँडीइइइइइइइ है। बहू तो अभी बच्चीइइइइइइइइ है। येसी हजारो कहानियां है मस्ताराम डॉट नेट पर जो आप पढ़ सकते है |

संजू: फिर भी उसके चूतर और चूची तो मस्त है ना? वैसी है जैसे आपको अच्छी लगती है । है नाआऽऽऽऽऽऽऽ आऽऽऽऽऽह बोओओओओओओलो ना।

अजित ज़ोर ज़ोर से धक्का मारते हुए बोला: आऽऽऽहहह ह्म्म्म्म्म्म हाँआऽऽऽऽ सालीइइइइइइ बहू भी मस्त माआऽऽऽऽऽऽऽल है। चांदनी की भी मस्त गोओओओओओओओल गाँड़ है आऽऽऽह्ह्ह्ह्ह मैं गयाआऽऽऽऽऽऽ । साली क़ुतियाआऽऽऽऽऽऽ लेeeee मेराआऽऽऽऽ माआऽऽऽऽलल्ल अपनी बुर में। ह्म्म्म्म्म्न कहते हुए वह झड़ गया।

फिर जब वो सफ़ाई करके लेटे हुए थे, तब अजित बोला: सच में चांदनी बहुत मासूम सी बच्ची है। मुझे उसके बारे में ऐसी बातें नहीं करनी चाहिए।
संजू: पर मुझे तो लगता है कि आप उसकी भी ले लोगे।

अजित ग़ुस्से से : क्या बकवास कर रही हो? वो मेरे बेटे की बीवी होगी। उसके बारे में ऐसा कैसे कर सकता हूँ। हाँ उसकी माँ की बुर ज़रूर रगड़ूँगा। साली सिर्फ़ राजेश को क्यों मज़ा दे ? हम साले मर गए हैं क्या?

संजू उठती हुई बोली: एक बात बताइए कि हमारा मिलन कैसे होगा बहु के आने के बाद?

अजित: ये चिंता तो मुझे भी है देखो कोई रास्ता निकालेंगे। ये कहकर वह फिर से उसको अपनी बाँहों में खींच लिया और बोला: तुम्हारा महवारी याने पिरीयड कब आता है?

संजू: अभी दस दिन हैं। क्यों पूछ रहे हैं आप?

अजित: अरे इसीलिए कि इस बार नहीं आएगा। तुमको गर्भ से जो कर चुका हूँ।

संजू: आप इतने यक़ीन से कैसे कह सकते हैं?

अजित: मैंने तुमको बताया था ना कि मैं पहले भी तीन लड़कियों को गर्भवती कर चुका हूँ और तीनों एक महीने की ही चुदाई में माँ बनने के रास्ते पर चल पड़ीं थीं।

संजू: मैं तो आपको कितनी ही बार पूछ चुकी हूँ पर आप अभी तक एक के बारे में भी नहीं बतायें हैं।

अजित: चलो अभी चाय पिलाओ और बाद में आकाश के दुकान जाने के बाद मैं तुमको बताऊँगा कि कैसे मैंने रेशमा को गर्भवती किया। वही पहली लड़की थी जिसे मैंने करीब पाँच साल पहले चोद के माँ बनाया था।

संजू: ठीक है बताइएगा आज रेशमा के बारे में। ये कहकर वह किचन मे चली गयी।

बाद में आकाश उठकर आया और चाय पीते हुए बाप बेटा बातें करने लगे।

अजित: फिर बरखुरदार, रात को नींद आयी या नहीं? कहीं रात भर शादी के सपने तो नहीं देखते रहे?

आकाश: क्या पापा आप भी ना ? छेड़ रहे हैं मुझे?

अजित हँसते हुए बोला: अरे बहु का सेल नम्बर लिया था कि नहीं?

आकाश शर्माकर: कहाँ ले पाया? सब कुछ इतनी जल्दी में हो गया।

अजित : अच्छा चल मैं ही जुगाड़ करता हूँ तेरे लिए। ये कहकर उसने राजेश को फ़ोन लगाया।

उधर से रूपा ने फ़ोन उठाया और बोली: हेलो कौन बोल रहे हैं?

अजित: मैं अजित बोल रहा हूँ भाभीजी । आप कैसी हैं?

रूपा: नमस्ते भाई सांब । मैं ठीक हूँ। आप लोग कल अच्छे से पहुँच गए थे ना?

अजित: हाँ जी सब बढ़िया है। मैंने इसलिए फ़ोन किया कि मुझे चांदनी का नम्बर चाहिए ,आकाश माँग रहा है। वो दोनों बातें करेंगे तो एक दूसरे को समझेंगे ना।

रूपा: जी बिलकुल ठीक कहा आपने। मैं अभी आपको sms करती हूँ। आकाश है क्या बात करवाइए ना?

आकाश ने फ़ोन लेकर कहा: नमस्ते मम्मी जी।

रूपा: नमस्ते बेटा , कैसे हो? चांदनी को हम लोग बहुत छेड़ रहे हैं तुम्हारा नाम लेकर।

आकाश: मम्मी आप लोग भी ना बेचारी को क्यों तंग कर रहे हो?

रूपा: लो अभी से उसकी तरफ़ से बोलने लगे? वाह जी वाह।

आकाश: मम्मी मेरी आप खिंचाई तो मत करो।

फिर कुछ देर इधर उधर की बातें करके वह फ़ोन अजित को दे दिया।

अजित: तो भाभीजी आप हमारे घर कब आ रही हैं? आपने तो हमारा घर भी नहीं देखा है।

रूपा: भाई सांब जल्दी ही आएँगे। आपने सगाई का कुछ सोचा?

अजित: आज पंडित जी से बात करूँगा मुहूर्त के लिए। चांदनी की कुंडली भी भेज दीजिएगा। आकाश की कुंडली से मिलवा लेंगे। येसी हजारो कहानियां है मस्ताराम डॉट नेट पर जो आप पढ़ सकते है |
रूपा: भाई सांब सगाई कहाँ करेंगे?

अजित : आप जहाँ बोलेंगी वहाँ करेंगे। अजी हम तो आपके हुक्म के ग़ुलाम हैं।

रूपा: कैसी बात कर रहे हैं, हम लड़की वाले हैं हम झुक कर रहेंगे।

(तभी आकाश का फ़ोन बजा और वह अपने बेडरूम में चला गया। )

अजित: अरे भाभीजी आप जैसी सुंदर महिला की ग़ुलामी करने का मज़ा ही कुछ और है।

रूपा: भाई सांब आप भी अब मुझे खींच रहे हैं ।

अजित: अरे भाभी जी मेरी क्या औक़ात है आपकी खींचने की? मैं तो ख़ुद ही खिंचा जा रहा हीं आपकी तरफ़।

रूपा: भाई सांब आपको बातों ने जीतना बहुत मुश्किल है।

अजित: भाभीजी बातों में जीत सकती है पर हमें एक बार सेवा का मौक़ा दीजिए। सच कहता हूँ आप भी क्या याद करेंगी। आप यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

इस बार अजित ने द्वीयर्थी डायलॉग बोल ही दिया।वह अपने लौड़े को हल्के से दबाया जो अपना सिर उठा रहा था।

रूपा एक मिनट के लिए तो चुप सी हो गयी फिर बोली: चलिए सगाई आपके यहाँ ही रखते हैं , देखते हैं कितनी सेवा करते हैं आप?

अजित ख़ुश होकर बोला: ये हुई ना बात ।भाभीजी ऐसी सेवा करूँगा आप भी याद रखोगी। बस एक मौक़ा तो दीजिए। और हाँ अपना नम्बर भी दे दीजिए। राजेश के नम्बर पर आपको बार बार फ़ोन नहीं कर सकता।

रूपा: भाई सांब रखती हूँ । भैया आ रहे हैं। मैं आपको sms करती हूँ अपना और चांदनी का नम्बर।

फिर फ़ोन कट गया। अजित अभी भी लौड़ा दबाये जा रहा था। तभी संजू आयी और मुस्कुरा कर बोली: क्या हो रहा है? मैं दबा दूँ? समधन को पटा रहे थे? मैं सब सुन रही थी।

अजित: आकाश को दुकान जाने दो फिर जो करना है कर लेना। समधन तो साली रँडी है उसे तो शादी के पहले ही चोद दूँगा।

तभी आकाश के आने की आवाज़ आइ और संजू वहाँ से बाहर चली गई। तभी रूपा का sms भी आ गया। उसने चांदनी का नम्बर आकाश को फ़ॉर्वर्ड कर दिया और अपने फ़ोन में भी बहू के नाम से सेव कर लिया। और रूपा का नम्बर भी सेव कर लिया।

अब आकाश भी अपने समय पर दुकान को चला गया।

उसके जाने के बाद संजू आकर अजित के पास आकर बैठी और अजित ने उसे अपनी गोद में खींच लिया और उसको चूमने लगा। वो रूपा से बात करके उत्तेजित हो चुका था ।

तभी संजू बोली: आज आप मुझे रेशमा के माँ बनने की कहानी सुनाएँगे।याद है ना?

अजित उसकी बुर को साड़ी के ऊपर से दबाकर बोला: ज़रूर मेरी जान, बिलकुल सुनाएँगे।
संजू की बुर साड़ी के ऊपर से दबाकर वह बोला: चलो चुदाई करते हैं।

संजू: अभी नहीं पहले रेशमा के बारे में बताइए की उसको कैसे गर्भ वती किया आपने?

अजित: अच्छा पीछे पड़ गयी हो , ठीक है सुनो। फिर उसने अपनी बात बोलनी शुरू की——————


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