चुदक्कड बहु की चूत और प्यासे ससुर का लौड़ा - 16
अजित और चांदनी चुपचाप खाना खा रहे थे। अजित ने ख़ामोशी तोड़ी और बोला: तुमने देखा कि आदमी और औरत के बीच में सेक्स का रिश्ता ही सबसे बड़ा रिश्ता है। तुम्हारी मॉ मेरी समधन है पर उससे बड़ा रिश्ता है हमारे बीच सेक्स के रिश्ते का। वैसे ही तुम्हारे ताऊ जी रूपा के जेठ हैं पर उनके बीच भी चुदाई का ही रिश्ता सबसे बड़ा है। इसी तरह हम दोनों में भी ससुर बहु का रिश्ता है पर मैं चाहता हूँ की हमारे बीच भी मर्द और औरत का यानी चुदाई का रिश्ता भी हो जाए। बस इतनी सी बात है बहु संजू।

चांदनी: पापा जी, मैं नहीं जानती कि सच क्या है और क्या ग़लत , पर सच में मम्मी ने मुझे बहुत ठेस पहुँचाई है। मैंने कभी भी नहीं सोचा था कि वह इस तरह का व्यवहार या बातें कर सकती हैं। और ताऊजी भी ऐसे कर सकते हैं।

अजित: बहु , जैसे जैसे उम्र बढ़ती है, वैसे वैसे सेक्स की इच्छा भी बढ़ती है। यही हाल हम तीनों का है। अब कल हम दोनों तुम्हारी मम्मी को बहुत मज़ा देंगे। और वह भी हमें बहुत मज़ा देगी। इसी का नाम जीवन है बहु संजू। अब वह सोफ़े पर आकर बैठ गया। चांदनी टेबल से बर्तन हटा रही थी। जैसे ही वह उसके सामने से गुज़री , अजित ने उसके हाथ को पकड़ा और बोला: जानती हो तुम्हारा सबसे सेक्सी अंग क्या है?

चांदनी चुपचाप खड़ी रही और उसकी ओर देखती रही। वह उसके मस्त चूतरों पर हाथ फेरकर बोला: ये है तुम्हारे बदन का सबसे हॉट हिस्सा। पर बहु तुम भी अपनी मम्मी की तरह पैंटी पहनना बन्द कर दो। तभी इसको छूने से मस्त माँस का अहसास होगा। यह कहके उसने एक बार फिर से उसके चूतरों को दबाया और फिर उसे जाने दिया।

चांदनी सिहर कर किचन में चली गयी। उसने सोचा कि आज एक दिन में ही बाप और बेटे ने उसे पैंटी ना पहनने को कहा। सुबह आकाश भी तो यही बोला था। उफफफफ कितनी समानता है दोनों में और दोनों के हथियारों में भी। वह मुस्कुराती हुई सोची कि पता नहीं कब तक वो बच पाएगी इस शिकारी से । फिर वह आकर सोफ़े पर बैठी और टी वी देखने लगी।

अजित: कल तुम अपनी मम्मी से लड़ाई तो नहीं करोगी कि वह क्यों मुझसे चुदवाती है।ऐसा करोगी तो बेकार में माहोल ख़राब होगा।

चांदनी: नहीं मैं ऐसा कुछ नहीं करूँगी। अगर मम्मी को यह सब अच्छा लगता है तो मैं क्यों उनको इससे दूर रखूँ।

अजित: शाबाश ये हुई ना समझदारी वाली बात। इस बात पर मैं तुम्हें एक गिफ़्ट देना चाहता हूँ। अभी लाया। यह कहकर वह उठकर अपने कमरे में चला गया। थोड़ी देर में वह वापस आया और उसके हाथ में एक छोटी सी डिब्बी थी। वह आकर उसे खोला और चांदनी ने देखा कि उसने एक सोने की चेन थी। वह हैरानी से उसे देखी तो वो मुस्कुराया और उस चेन को लेकर उसके पास आया और वह चेन उसने चांदनी के गले में डाल दी और पीछे जाकर उसका हुक लगाया । फिर आगे आकर उसकी उभरी हुई छातियों पर रखी चेन को ठीक किया। और यह करते हुए उसने उसकी छातियों को छू भी लिया। उसकी ब्लाउस में कसी हुई छातियाँ और उस पर रखी वो चेन बहुत सुंदर लग रही थी। चांदनी ने अपना मुँह नीचे किया और अपनी छाती में रखी चेन को देखा। फिर बोली: ये क्या है पापा जी, मुझे क्यों दे रहे हैं?

अजित: बहु, ये मैं इसलिए दे रहा हूँ क्योंकि तुमने अभी कहा कि तुम अपनी मम्मी को कल मुझसे चुदवाने से मना नहीं करोगी। मेरे लिए ये बहुत बड़ी बात है। और देखो तुम्हारी छाती पर ये चेन कितनी सुंदर दिख रही है। जैसी मस्त छातियाँ वैसी ही मस्त चेन । उसने उसकी छातियों को घूरते हुए कहा।

चांदनी उसकी बात सुनकर लाल हो गयी और उठते हुए बोली: पाप जी थैंक्स, पर आकाश को मैं क्या बोलूँगी?

अजित: तुम उसे कुछ नहीं बोलना, जो बोलना होगा, मैं ही बोलूँगा। ठीक है?
चांदनी जाते हुए बोली: ठीक है आप जानो।

अपने कमरे में आकर वह शीशे के सामने खड़ी हुई और अपनी छातियों पर रखी इस सुंदर चेन को देखकर वह ख़ुश हो गयी। उसने चेक देखा और ख़ुश हो गयी कि आकाश इसको देख कर बहुत ख़ुश हो जाएगा। फिर उसे याद आया कि पापा जी कैसे उसकी छाती को घूर रहे थे। पता नहीं आज उसे कुछ ख़ास बुरा नहीं लगा। आज जब वह उसे चेन पहना रहे थे तब भी उनकी आँखों में उसे ढेर सारा प्यार दिखाई दिया था। फिर वह सोची कि पापा जी उतने भी बुरे नहीं है शायद जितना मैं समझ रही हूँ। शीशे में अपने आप को देखते हुए उसने अपनी गोलाइयों को सहलाया और सोची कि आख़िर ये हैं ही इतने सुंदर , अब बेचारे पापा जी भी क्या करें! आख़िर उनका भी दिल आ ही गया है इस सुंदरता पर। वह शीशे में अपने सुंदर रूप को देखकर मुस्करायी। फिर वह पीछे को मुड़ी और अपने पिछवाड़े को देखी और वहाँ हाथ फेरी और सोची कि सच में ये हिस्सा उसका अब बहुत ही मादक हो गया है। पतली कमर पर ये उभार सच में बहुत कामुक लगते होंगे पापा जी को। फिर उसका हाथ पैंटी के किनारों पर पड़ा और उसे याद आया कि आज तो दोनों बाप बेटे उससे अनुरोध कर चुके हैं कि पैंटी मत पहना करो। वह मुस्करायी और शरारत से अपनी साड़ी और पेटिकोट उठायी और पैंटी निकाल दी ।अब उसने अपने पिछवाड़े को देखा और वो समझ गयी कि इससे क्या फ़र्क़ पड़ा है। अब उसके चूतर खुल कर इधर उधर डोलने को स्वतंत्र थे। साथ ही अब उसे पैंटी के किनारे की लकीरें भी नहीं दिखाई दे रही थी। वह अब सोची कि देखें कौन पहले नोटिस करता है बाप या बेटा कि उसने पैंटी नहीं पहनी है। और मज़े की बात ये है कि वो दोनों सोचेंगे कि यह मैंने उनके कहने पर ही किया है। वह सोची कि यह उसे क्या हो रहा है? वो इस तरह के विचारों से ख़ुश क्यों हो रही है? इतना बड़ा परिवर्तन? ऐसा क्यों भला हो रहा है? वह फिर से उलझन में पड़ गयी। इसी उधेड़बन में वह सो गयी।

अजित अपने कमरे में आकर अब तक की घटनाओं का सोचा और मन ही मन में मुस्कुराया। वो जानता था कि बहु का विरोध अब कम हो रहा है। और आज की सेक्स चैट जो उसने राजेश और रूपा से की थी। उसका असर बहु पर ज़रूर पड़ेगा। ऊपर से उसने चेक और चेन देकर उसे काफ़ी ख़ुश कर दिया है। वह सोचने लगा कि कल जब रात को रूपा से सेक्स होगा तो कोई तरीक़े से बहु को अपनी चुदाई दिखा दे। फिर वह सोचा कि ये तो बिलकुल सीधे बात करके भी किया जा सकता है। वह फिर से मुस्कुरा उठा। फिर वह भी सो गया।

शाम को जब चांदनी कमला से काम करवा रही थी तो उसने महसूस किया कि बिना पैंटी के उसे थोड़ा सा अजीब सा लग रहा था । पर वो सहज भाव से अपना काम की और फिर अजित को चाय के लिए आवाज़ दी। अजित बाहर आया और दोनों चाय पीने लगे। कमला किचन में काम कर रही थी ।

अजित: नींद आइ या उलटा पुल्टा ही सोचती रही?

चांदनी: मैं सो गयी थी। कुछ नहीं सोची।

अजित: बढ़िया । मैं सोचा कि कहीं मम्मी का सोचकर परेशान तो नहीं हो रही थी?

चांदनी: उन्होंने मुझे दुखी तो किया ही है, पर क्या किया जा सकता है? आख़िर वो अपनी ज़िंदगी अपनी इच्छा से जीने का हक़ तो रखतीं है।

अजित ख़ुश होकर: वह बहु , तुम तो एकदम परिपक्व व्यक्ति के जैसे बात करने लगी। मुझे ये सुनकर बड़ी ख़ुशी हुई।

चांदनी उठी और चाय के कप लेकर जाने के लिए मुड़ी और तभी एक चम्मच नीचे गिर गया। जैसे ही वह उसे उठाने को झुकी , इसकी बड़ी गाँड़ साड़ी में लिपटी अजित के सामने थी और उसने नोटिस कर ही लिया कि वह पैंटी नहीं पहनी है। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ क्या उसने उसके अनुरोध को इतनी जल्दी स्वीकार कर लिया? उसका लौड़ा खड़ा होने लगा। अब वह चम्मच उठाकर किचन में चली गयी और काम में लग गयी

अजित वहाँ बैठा कमला के जाने का इंतज़ार करने लगा। और जब वह चली गयी तो वह किचन में गया और जाकर सब्ज़ी बना रही चांदनी के पीछे आकर खड़ा हो गया। इसके पहले कि चांदनी पलट पाती उसने उसके चूतरों पर दोनों हाथ रख दिए और वहाँ सहलाते हुए बोला: थैंक्स जान , तुमने पैंटी उतार दी। सच में अभी तुम्हारी गाँड़ मस्त मटक रही है।

चांदनी थोड़ी सी परेशान होकर बोली: पापा जी , प्लीज़ छोड़ दीजिए ना। क्या कर रहे हैं?

अजित: अरे क्या कर रहा हूँ, बस पैंटी के बिना तुम्हारे बदन का अहसास कर रहा हूँ। अब वह और ज़ोर से उसकी गाँड़ दबा कर बोला।

चांदनी: आऽऽंह पापा जी दुखता है ना? प्लीज़ हटिए यहाँ से।

अजित हँसकर वहाँ से बाहर आते हुए बोला: बहु आज तुमने पैंटी उतार कर सच में मेरा मन ख़ुशियों से भर दिया।

उसके बाहर जाने के बाद चांदनी ने सोचा कि इनको तो पता चल ही गया कि वो पैंटी नहीं पहनी है। इसका मतलब है कि पापा का ध्यान हर समय उसके पिछवाड़े पर ही रहता है। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ क्या अजीब सी स्तिथि बनती जा रही है।

रात को आकाश आया और चांदनी ने दरवाज़ा खोला और वह उसके पीछे पीछे घर जे अंदर आया। उसने भी नोटिस किया कि चांदनी के चूतर आज ज़्यादा ही हिल रहे हैं। जैसे ही वह कमरे में पहुँचा , उसने दरवाज़ा बंद किया और चांदनी को अपनी बाहों में भर लिया और उसके होंठ चूमते हुए उसकी कमर सहलाने लगा और फिर जब वह उसके चूतरों को सहलाने लगा तभी उसे भी पैंटी ना होने का अहसास हो गया। वह ख़ुश होकर पूरी तरह से उसके कोमल और गोल चूतरों को दबा कर मस्ती से भर कर बोला: आऽऽऽऽऽह जाऽऽऽन तुमने मेरी बात मान ली और पैंटी उतार दी, थैंक्स बेबी। सच में मस्त लग रहा है तुम्हारे चूतरों को दबाना।

चांदनी मन ही मन मुस्करायी कि जैसा बाप वैसा ही बेटा। दोनों का ध्यान उसके पिछवाड़े पर ही रहता है। आज चांदनी भी गरम थी तो जल्दी ही दोनों मस्त हो गए और आकाश ने उसकी साड़ी और पेटिकोट उठाकर उसकी बुर में अपना मुँह घुसेड़ दिया और उसको चूसने लगा। चांदनी उइइइइइइइइइ माँआऽऽऽऽऽऽऽ करके उसके सिर को अपनी जाँघों के बीच दबाने लगी । जल्दी ही आकाश ने उसकी बुर में अपना लौड़ा पेला और चोदने लगा। चांदनी भी गाँड़ उछालकर चुदवाने लगी। क़रीब बीस मिनट की ज़बरदस्त चुदाई के बाद दोनों लस्त होकर पड़ गए। फिर चांदनी ने आकाश को वह चेक दिया और आकाश ख़ुशी से भर गया। उसने चांदनी को चूमा। फिर चांदनी उठकर वह चेन लाई और बोली: पापा जी ने ये चेन आज मुझे उपहार में दी है।

आकाश: ये सच में बहुत सुंदर है। किस ख़ुशी में उन्होंने तुमको उपहार दिया उन्होंने?

चांदनी: वो बोले तुम बहुत अच्छा खाना बनाती हो। इसलिए यह उपहार दिया है।

आकाश: वो तो सच में बनाती हो, काश मैं भी तुमको कोई महँगा उपहार दे पाता।

चांदनी उससे लिपट गयी और बोली: आपका प्यार ही मेरे लिए सबसे बड़ा उपहार है। और फिर उसके लौड़े को दबाकर बोली: और ये भी तो है ना मेरा असली उपहार जो मुझे बहुत ख़ुशी देता है।

आकाश और चांदनी दोनों हँसने लगे। दिर वो बोली: चलो डिनर करते हैं। आप भी पापा जी को चेक देने के लिए थैंक्स कर दो।

डिनर करते हुए आकाश ने कहा: पापा जी थैंक्स, चेक के लिए । अब मुझे दुकान की शॉपिंग के लिए मुंबई जाना होगा। दो दिन तो लग ही जाएँगे। मैं लिस्ट बनाता हूँ और फिर कुछ दिनों में होकर आता हूँ।

अजित : हाँ क्यों नहीं, इतना एडवाँस दोगे तो वो ५/६ लाख का तो सामान दे ही देंगे। ठीक है प्लान कर लेना। वैसे कल बहु की माँ और ताऊजी भी आ रहे हैं। कल शाम को ज़रा जल्दी आ जाना। उनके साथ बाहर खाना खा लेंगे। रात को वह लोग यहीं रुकेंगे।

आकाश: वाह ये तो बड़ी अच्छी बात है, चांदनी तो बहुत ख़ुश होगी। है ना चांदनी?

चांदनी: हाँ ख़ुश तो हूँ, पर मेरे से ज़्यादा तो पापा जी ख़ुश हैं । है ना पापा जी? उसने कटाक्ष किया ।

अजित भी तो चिकना घड़ा था उसे कौन सा कोई फ़र्क़ पड़ता है। वह बोला: अरे मेरी ख़ुशी तो बहु की ख़ुशी में है। यह कहकर उसने आकाश की आँख बचाकर बहु को आँख मार दी। चांदनी ने चुपचाप सिर झुका लिया।

आकाश: पापाजी आपने बहुत सुंदर चेन दी है चांदनी को। सच में वह खाना बहुत अच्छा बनाती है।

अजित समझ गया कि बहु ने ये कारण बताया है आकाश को चेन देने का। वह मुस्कुराकर बोला: हाँ सच में बहुत स्वाद है वो मतलब उसका बनाया खाना।
उसने फिर से बहु को आँख मार दी।

खाने के बाद अजित उठते हुए बोला: बहु , मुझे एक ग्लास गरम दूध देती जाना।

चांदनी: जी पापा जी अभी गरम करके देती हूँ।

आकाश अपने कमरे में चला गया और चांदनी दूध गरम करते हुए सोची कि पापा को दूध की क्या सूझी? ज़रूर कोई शरारत करेंगे अपने कमरे में एकांत में। वह ग्लास लेकर अजित के कमरे में पहुँची और दरवाज़ा खटखटाया।

अजित: आओ बहु अंदर आ जाओ। जैसे ही वह अंदर पहुँची वह बोला: मेरे कमरे में आने के लिए दरवाज़ा खटखटाने की ज़रूरत नहीं है। और वैसे भी मैंने तुमको अपना सब कुछ तो दिखा ही दिया है। वह अपने लौड़े को मसल कर आँख मारते हुए बोला।

चांदनी कुछ नहीं बोली और ग्लास को साइड टेबल पर रखने लगी। जब वह पलटी तो उसके सामने अजित खड़ा था। वह इसके पहले कुछ समझ पाती उसने उसे अपनी बाहों में दबोच लिया और उसके होंठ पर अपने होंठ रख दिए। वह उसे चूमे जा रहा था और चांदनी चुपचाप खड़ी उसको देख रही थी और अपनी तरफ़ से कोई सहयोग नहीं कर रही थी।

जैसे ही उसने उसका मुँह छोड़ा वह बोली: पापा जी प्लीज़ मुझे जाने दीजिए।

अजित उसे अपने से चिपकाए हुए था। उसकी बड़ी बड़ी छातियाँ उसकी चौड़ी छाती में जैसे चिपक सी गयीं थीं। वह अपने हाथ अब उसके चूतरों पर फिराया और बोला: बहु पैंटी ना पहनकर तुमने मुझे बहुत ख़ुश किया है। अब एक ख़ुशी और दे दो।

चांदनी : क्या पापा जी?

अजित: जब तुम सुबह नायटी में आती हो तो तुम एक पेटिकोट भी नीचे से पहनती हो। आख़िर क्यों? अनीता भी नायटी पहनती थी पर उसने कभी नीचे पेटिकोट नहीं पहना। उसकी मस्तानी गाँड़ जब मटकती थी तो मैं तो जैसे दीवाना हो जाता था। और यहाँ तुम पेटिकोट पहनकर अपने पिछवाड़े का पूरा सौंदर्य ही समाप्त कर देती हो। आकाश कुछ नहीं कहता तुमको?

चांदनी: वह तो सोते रहते हैं , उनको क्या पता मैं पहनती हूँ या नहीं।

अजित: अरे रात को तो तुम नायटी पहनती होगी उसके सामने।

चांदनी का चेहरा लाल हो गया और वह बोली: रात को तो वो मुझे कुछ नहीं मतलब बिलकुल बिना कपड़े मतलब – चलिए अब जाने दीजिए ना प्लीज़।

अजित: अरे मतलब तुमको पूरी नंगी रखता है। वह ये तो मुझसे भी बड़ा बदमाश है। हा हा ।

चांदनी: प्लीज़ पापा जी , अब जाने दीजिए ना।

अजित: अभी चली जाओ, बस कल नीचे पेटिकोट मत पहनना। ठीक है?

चांदनी: देखूँगी पर अभी जाने दीजिए। वह सोचेंगे कि मैं इतनी देर क्यों लगा रही हूँ।

अजित ने उसको छोड़ दिया और वह जब जाने लगी तो वह पीछे से बोला: बहु पेटिकोट नहीं प्लीज़ । ओके ?

चांदनी बाहर जाते हुए पीछे मुड़कर बोली: पापा जी गुड नाइट ।

अजित: गुड नाइट बेबी।

पता नहीं क्यों अजित को ऐसा लगा कि बहु की आँखों में एक शरारत भरी मुस्कान थी, हालाँकि वह पक्की तरह से नहीं कह सकता।

चांदनी जब अपने कमरे में पहुँची तो आकाश बाथरूम से बाहर आया और वह नंगा ही बिस्तर पर लेट गया। उसका लौड़ा अभी आधा खड़ा था। चांदनी मुस्कुरा कर उसके पास आयी और एकदम से उसके लौड़े को अपने मुँह में लेकर पागलों की तरह चूसने लगी। आकाश हैरानी से उसे देख रहा था। उसे क्या पता था कि आज दिन भर जो घटनाएँ हुईं हैं उन्होंने उसको बहुत गरम कर दिया है । थोड़ी देर चूसने के बाद वह उठी और एक झटके में पूरी नंगी हो गयी और उसके लौड़े पर सवार होकर उसे अंदर अपनी बुर में डाल ली और फिर ज़ोरों से ऊपर नीचे करके अपनी गाँड़ उछालने लगी।

आकाश के लिए चांदनी का यह रूप नया रूप बढ़िया था। वह उसकी चूचियाँ दबाते हुए उनको चूस भी रहा था। वह भी नीचे से धक्के मारने लगा। चुदाई बहुत तूफ़ानी हो चली थी। पलंग बुरी तरह हिले जा रहा था। झड़ने के बाद आकाश बोला: जान क्या हो गया है आज बहुत गरम हो गयी थी?

चांदनी : पता नहीं मुझे क्या हो गया था। सॉरी अगर आपको तंग किया तो।

अजित: अरे नहीं जान, आज तो चुदाई का बहुत मज़ा आया। काश तुम रोज़ ही इतनी गरम हो तो और भी मज़ा आएगा।

चांदनी हँसने लगी और बोली: चलो कुछ भी बोल रहे हैं आप।

थोड़ी देर बाद दोनों फिर से गरम हो गए और एक राउंड की और चुदाई शुरू की। आधे घंटे की चुदाई के बाद दोनों थक कर नंगे ही लिपट कर सो गए।

सोने के पहले चांदनी को याद आया कि कैसे बातों बातों में वो पापा को बता बैठी थी कि वो अक्सर नंगी ही सोती है रात को। वह मुस्कुराई और सो गयी।
अगले दिन वो फ़्रेश हुई और अपनी ब्रा पहनी और नायटी डाली और सोची कि आज ताऊजी और मम्मी आएँगे। । इसके बाद वह आदतन पेटिकोट पहनने लगी, तभी उसे पापा की बात याद आइ । वह मुस्कुराई और सोए हुए आकाश को देखी जो कि नंगा ही पड़ा था और उसका लम्बा हथियार उसकी जाँघ के साथ एक तरफ़ को साँप जैसे पड़ा था।और पता नहीं क्यों वह पेटिकोट पहनते हुए रुक गयी और उसने उसे नहीं पहना। पैंटी तो वो पहन ही नहीं रही थी। वह शीशे के सामने ख़ुद को नायटी में देखा और फिर मुड़कर अपने पिछवाड़ा को देखा और सच में वह ख़ुद पर ही मुग्ध हो गयी। उफफफ क्या मादक थे उसके चूतर । वह थोड़ा मटक कर चली, उफफफफ क्या कामुक तरीक़े से हिल रही थे उसके गोल गोल चूतर। बेचारे पापा का क्या हाल होगा आज? वह यही सोचते हुए मुस्करायी और बाहर आयी और किचन में चली गयी।

अजित सुबह मॉर्निंग वॉक से वापस आया और अपना ट्रैक सूट खोलकर बनियान में आ गया। फिर उसने अपनी चड्डी भी उतारी और लूँगी पहनने लगा। तभी चांदनी की आवाज़ आइ: पापा जी चाय बन गयी है। आ जाइए।

अजित अपनी लूँगी पहनते हुए बोला: आ रहा हूँ बहु।

अजित बाहर आया तो चांदनी टेबल पर बैठ कर चाय रख कर बैठी थी। वो दोनों चाय पीने लगे।

अजित: रात कैसे बीती? कल तो दिन भर की घटनाओं से तुम बहुत गरम हो गयी थी, आकाश से मज़े करी होगी ख़ूब सारा?

चांदनी: आपको अपनी बहू से ऐसी बातें करते शर्म नहीं आती? मुझे आपसे बात ही नहीं करनी ।

अजित: अरे बहू ग़ुस्सा क्यों कर रही हो। मैं तो मज़ाक़ कर रहा था। चलो ग़ुस्सा थूक दो । अच्छा अपनी मम्मी और ताऊजी को क्या खिलाना है? डिनर तो हम बाहर ही करेंगे। शाम के लिए कुछ मँगाना हो तो मुझे बता देना।

चांदनी: ठीक है शाम को समोसा और जलेबी ला दीजिएगा।
अजित: ज़रूर बहू। यह ठीक रहेगा।

चाय पीने के बाद चांदनी उठी और कप लेकर किचन में जाने के लिए मुड़ी और अजित के लौड़े ने झटका मारा। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ क्या मटक रही है आज बहू की गाँड़ । एक गोलाई इधर जा रही है तो दूसरी उधर। आऽऽहहह उसने अपना लौड़ा लूँगी के ऊपर से दबा दिया । फिर वह खड़ा हुआ और किचन में जाकर चांदनी को देखने लगा। वह स्टोव में कुछ पका रही थी। अजित दबे पाँव उसके पीछे आके उसकी नायटी को पास से देखा। नायटी का कपड़ा उसके चूतरों की गोलाइयों पर कुछ इस तरह से सटा था कि वह पक्की तरह से कह सकता था कि उसने पेटिकोट नहीं पहना हुआ था। उसका लौड़ा लूँगी के अंदर पूरा खड़ा था।

अब अजित उसके पास आया और चांदनी को अहसास हुआ कि कोई पीछे खड़ा है, वो पलटने लगी, पर अजित ने उसके कंधे पकड़ कर उसे घूमने नहीं दिया और अब वह उसकी कमर में हाथ रखकर उसने अपने दोनों हाथ उसने पेट पर रख दिए और उसे ज़ोर से जकड़ लिया। अब वह पीछे से उसके पिछवाड़े से सट गया ।उसका खड़ा लौड़ा अब उसकी गाँड़ से टकरा रहा था। चांदनी हल्की आवाज़ में चिल्लाई: पापा जी मुझे छोड़ दीजिए। प्लीज़ हटिए।

अजित ने बेशर्मी से अपने लौड़े को उसके चूतरों पर रगड़कर मस्त होकर बोला: आऽऽऽह बहु , तुम्हें कैसे धन्यवाद दूँ कि तुमने मेरी बात मान ली और पेटिकोट नहीं पहना।

अब वह पीछे को हुआ और फिर चांदनी के चूतरों को दोनों हाथों से दबोच लिया और उनको दबाने लगा। वह बोला: उफफफफ क्या मक्खन जैसा माल है जान। सच में ऐसी गाँड़ आज तक नहीं सहलाई। ह्म्म्म्म्म्म।

चांदनी: उइइइइइ माँआऽऽऽ पापा जी छोड़िए ना। हाय्ययय दर्द हो रहा है ना।

अजित ने उसे छोड़ दिया। चांदनी बोली: पापा जी आपको इस तरह की हरकत नहीं करनी चाहिए। आपने कहा था कि आप मेरे साथ कोई ज़बरदस्ती नहीं करेंगे। फिर ये सब क्या है?

अजित: बहु , असल में मैं ख़ुशी में अपना आपा खो बैठा था, क्योंकि मेरे कहने पर कल तुमने पैंटी नहीं पहनी और आज मेरे कहने पर पेटकोट भी नहीं पहनी ।मैंने सोचा कि शायद तुम मेरे रंग में रंगने को तैयार हो। चलो कोई बात नहीं , हम और कोशिश करेंगे तुम्हें जीतने की।

चांदनी: आप बाहर जाइए और मुझे अपना काम करने दें।

अजित मुस्कुराया और बोला: ठीक है बहु चला जाता हूँ , बस एक बार तुम्हारी मीठी सो पप्पी ले लेता हूँ। यह कह कर उसने चांदनी को बाहों में ले लिया और उसके होंठ चूमने लगा। और उसके हाथ उसके मस्त चूतरों पर घूमने लगे। चांदनी ने उसे धक्का दिया और बोली: आपको क्या हो गया है? आप समझते क्यों नहीं,कि यह सही नहीं है।

अजित बेशर्मी से मुस्कुराया और बोला: ठीक है बहु , मैं और इंतज़ार करने को तैयार हूँ।पर एक बात कहूँगा कि तुम्हारी गाँड़ मस्त मुलायम है जान।

इसके बाद अजित अपने कमरे में चला गया। चांदनी ने आकर आकाश को उठाया और उसको चाय दी। चाय पीने के बाद आकाश फ़्रेश होकर बाहर आकर सोफ़े पर बैठकर पेपर पढ़ने लगा। चांदनी को किचन में जाते देखकर वह उसे बुलाया और बोला: अरे आज तुम्हारे चूतर बहुत मटक रहे हैं , क्या बात है? यह कहकर वह उसकी गाँड़ पर हाथ फेरा और मस्ती से बोला: आऽऽह पेटिकोट नहीं पहना है, इसलिए बिचारे उछल रहे हैं। ये सही किया तुमने जो की पेटिकोट और पैंटी नहीं पहनी हो। सच में मस्त इधर से उधर हो रहे हैं जैसे मचल रहे हों यह कहने के लिए कि आओ मुझे मसलो और दबाओ।

चांदनी: छोड़ो मुझे गंदे कहीं के। कुछ भी बोले जा रहे हैं आप।

आकाश: एक बात बोलूँ , सच में तुम बहुत ही सेक्सी स्त्री हो।मैं बहुत क़िस्मत वाला हूँ जो तुम मेरी बीवी हो।

चांदनी हँसकर बोली: अच्छा जी, मैंने आज पेटिकोट नहीं पहना तो मैं सेक्सी हो गयी। वाह जी । और आपके साथ तो मैं रात भर नंगी भी पड़ी रहती हूँ, उसका क्या?

आकाश: वो दृश्य भी मस्त मज़ा देता है और ये दृश्य भी मस्त मज़ा देरहा है । ये कहकर उसने एक बार फिर उसकी गाँड़ दबा दी और उठा और नहाने के लिए जाने लगा। और जाते जाते बोला: चलो ना आज साथ में नहाते हैं। कई दिन हो गए साथ में नहाए हुए। चलो ना जानू।

चांदनी मुस्कुरा कर बोली: अच्छा चलो आज आपको नहला देती हूँ। पर आप कोई शरारत नहीं करना। ठीक है?

आकाश: अरे बिलकुल नहीं करूँगा। वैसे भी मुझसे शरीफ़ आदमी दुनिया में कोई और है ही नहीं है।

चांदनी: हाँ जी पता है मुझे कि आप कितने शरीफ़ हो। अब चलो और नहा लो।

आकाश अपने कमरे में जाकर अपने कपड़े उतारा और नंगा ही बाथरूम में दाख़िल हुआ। चांदनी भी अपने कपड़े उतारी और बिलकुल नंगी होकर बाथरूम में घुस गयी। वहाँ आकाश उसको अपनी बाहों में भींच लिया और चूमने लगा।

चांदनी: आपको नहाना है या ये सब करना है।

आकाश: ये सब भी करना है और नहाना भी है। वह उसके होंठ चूसते हुए बोला।

चांदनी ने शॉवर चालू किया और दोनों एक दूसरे से चिपके हुए पानी में गीले होने लगे। फिर चांदनी ने साबुन लिया और आकाश की छाती में लगाना चालू किया। वह चुपचाप साबुन लगवा रहा था। चांदनी ने छाती के बाद उसके पेट में साबुन लगाया। फिर वह उसकी बाहों में साबुन लगायी। फिर वह उसकी गरदन और पीठ में भी साबुन लगायी। वो नीचे बैठ कर उसके पैरों और जाँघों में भी साबुन लगाई। अब वह उसके सख़्त चूतरों पर भी साबुन लगायी। फिर वह अपने हाथ को उसकी गाँड़ के छेद और चूतरों की दरार में डालकर वह साबुन लगायी। और आकाश का लौड़ा पूरा खड़ा हो गया। फिर आकाश को घुमाई और उसके बॉल्ज़ और लौड़े में भी साबुन लगायी। उसने उसके सुपाडे का चमड़ा पीछे किया और उसको भी अच्छी तरह से साफ़ किया। फिर वह उठी और शॉवर चालू किया। उसने आकाश के बदन से साबुन धोना शुरू किया। जल्दी ही वह पूरी तरह से नहा लिया था। उसने उसके लौड़े और बॉल्ज़ के साथ ही उसकी गाँड़ में भी हाथ डालकर सफ़ाई कर दी थी। आकाश का लौंडा उत्तेजना से ऊपर नीचे हो रहा था।

आकाश: चलो अब मैं तुमको नहा देता हूँ।

चांदनी: नहीं बाबा, मैं ख़ुद ही नहा लूँगी। चलो आप बाहर जाओ मैं अभी नहा कर आती हूँ।

आकाश हँसते हुए अपना लौड़ा सहला कर बोला: अरे इसका क्या होगा? इसका भी तो इलाज करो ना।

वह हँसकर बोली: यहाँ ही इलाज करूँ या बिस्तर पर चलें?

आकाश: अरे यहीं करो ना। यह कहते हुए उसने चांदनी को कंधे से पकड़कर नीचे बैठाया। वह नीचे बैठी और उसके लौड़े को मुँह के पास लाकर उसे जीभ से चाटी और फिर चूसने लगी। दस मिनट चूसकर वह उठी और आकाश ने उसे दीवार के सहारे आगे को झुकाया और पीछे से उसकी मस्तानी गाँड़ को दबाते हुए उसकी बुर में ऊँगली की और फिर वहाँ अपने लौंडे को सेट किया और धीरे से लौड़ा अंदर डाल दिया और चांदनी की उइइइइइइइ माँआऽऽऽऽ निकल गयी। फिर वह उसकी नीचे को झुकी चूचियों को दबाकर उसकी चुदाई में लग गया। फ़च फ़च की आवाज़ों से बाथरूम गूँजने लगा। साथ ही ठप्प ठप्प की आवाज़ भी आने लगी जो कि आकाश की जाँघें और चांदनी के मोटे चूतरों से टकराने से निकल रही थी। उधर चांदनी भी मज़े से आऽऽऽऽहहहह जीइइइइइइइइ बहुत मज़ाआऽऽऽऽऽऽ रहाआऽऽऽऽ है। हाय्य्य्य्य्यू मैं गयीइइइइइइइइइइइ । आकाश भी ह्म्म्म्म्म्म मैं भी झड़ गयाआऽऽऽऽऽऽऽ । फिर चांदनी टोयलेट की सीट पर बैठी और पेशाब करने लगी। आकाश उसके उठने के बाद ख़ुद भी पेशाब करने लगा। फिर वह शॉवर लिया और बाहर आकर तैयार होने लगा। तब तक चांदनी भी नहा करके बाहर आयी और तैयार होकर किचन में गयी।
थोड़ी देर बाद सब नाश्ता करने लगे।

अजित: बेटा शाम को जल्दी आना , तेरी सास और उसके ज़ेठ आने वाले हैं। रात को हम डिनर भी बाहर करेंगे।

आकाश: ठीक है पापा जी। मैं आ जाऊँगा।
फिर वह दुकान चला गया।

अजित उसके जाते ही बोला: बहु ,तुम आज बड़ी जल्दी नहा ली। मैं तो तुमने नायटी में देखकर ही मस्त हो रहा था और तुम साड़ी में आ गयी। लगता है दोनों साथ में ही नहाए हो? कभी हमारे साथ भी नहाओ।बड़ा मज़ा आएगा।

चांदनी कुछ नहीं बोली और उठकर जाने लगी।

अजित: बहु मेरा तो आज जैसे समय ही नहीं कट रहा है । पता नहीं कब शाम होगी और तुम्हारी सेक्सी मम्मी आएगी और आऽऽऽऽह मेरी रात रंगीन करेगी। यह कहकर उसने बड़ी बेशर्मी से अपना लौड़ा दबा दिया। तभी चांदनी का फ़ोन बजा और उसने देखा कि उसकी मम्मी का फ़ोन था।

चांदनी: हाय मम्मी ।

रूपा: हाय , कैसी हो बेटी?

चांदनी: मम्मी मैं ठीक हूँ। आप कब निकलोगी?

रूपा: हम पाँच बजे तक आएँगे बेटी। तुम्हारे लिए क्या लाएँ?

चांदनी: मुझे कुछ नहीं चाहिए। बस आप लोगों से मिलना हो जाएगा।

अजित ने चांदनी से फ़ोन माँगा और बोला: अरे भाभी जी हमसे भी बात कर लीजिए। सिर्फ़ बेटी ही आपकी रिश्तेदार है क्या? हम तो भी आपके समधी हैं।

रूपा सकपका कर: अरे मुझे क्या पता था कि आप भी उसके साथ बैठे हो। कैसे हैं आप?

अजित: मस्त हैं और आपको याद कर रहे हैं। इंतज़ार है शाम का जब आप आएँगी और हम आपसे मिलकर मस्त हो जाएँगे।

रूपा: कैसी बातें कर रहे है? चांदनी भी तो होगी वहाँ?

अजित ने चांदनी को आँख मारी और कहा: अरे वो तो अपने कमरे में चली गयी है शायद बाथरूम आयी होगी।

चांदनी उसकी मंशा समझकर उठने लगी, पर अजित ने उसे पकड़कर अपनी बग़ल में बिठा लिया और फ़ोन को स्पीकर मोड में डाल दिया। अब बहु के कंधे को सहलाता हुआ फिर बोला: जान, रात में तुमको बहुत याद किया और मूठ्ठ भी मारी। तुम तो मुझे याद ही नहीं करती होगी।

चांदनी हैरत से ससुर को देखी कि कितनी अश्लील बात कितने आराम से कह दिए।

रूपा: अरे आपने मूठ्ठ क्यों मारी? मैं आ तो रही हूँ आज आपके पास। वैसे रात मुझे भी बड़ी मुश्किल से नींद आयी। एक बात बोलूँ?

हतप्रभ चांदनी के कंधे सहलाता हुआ अजित बोला: हाँ हाँ बोलो ना?

रूपा: आप जैसी मेरी नीचे वाली चूसते हो ना , आज तक किसी ने भी वैसी नहीं चूसी। उफफफफ मस्त कर देते हो आप।

अजित अब उत्तेजित होकर अपना लंड दबाया और चांदनी को उसका आकार लूँगी से साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा था। उसने फ़ोन अपनी एक जाँघ पर रखा था। जोश में उसने चांदनी के कंधे को ज़ोर से दबा दिया। चांदनी की सिसकी निकल गयी। पर उसने अपने मुँह पर हाथ रख कर उसे दबा दिया।

अजित: अरे क्या नीचे वाली लगा रखा है। उसका नाम बोलो मेरी जान।

रूपा हँसकर: आप भी ना,मैं बुर की बात कर रही हूँ।

अजित चांदनी को आँख मारा और बोला: और क्या मैं तुम्हारी चूचियाँ अच्छी तरह से नहीं चूसता?

चांदनी साँस रोक के सुन रही थी कि उसकी मम्मी कितनी अश्लील बात कर रही थी। वह फिर से उठकर जाने की कोशिश की पर अजित की पकड़ मज़बूत थी, वह हिल भी नहीं पाई। रूपा: अरे वो तो आप मस्त चूसते हैं। सच आपके साथ जो मज़ा आता है, किसी और के साथ आ ही नहीं सकता। इसीलिए तो बार बार आ जाती हूँ आपसे करवाने के लिए?

अब चांदनी को भी अपनी बुर में गीलापन सा लगा। और अजित ने भी कल जैसे ही आज भी अपना लौड़ा बाहर निकाल लिया था और उसे मसल रहा था। चांदनी की उत्तेजना भी बढ़ रही थी, उसके निपल्ज़ एकदम कड़े हो गए थे।

अजित उसके कंधे से हाथ नीचे लेजाकर उसके ब्लाउस तक पहुँचा और उसकी बाँह सहलाते हुए उसकी एक चूची को साइड से छूने लगा।

अजित: क्या करवाने आती हो, जानू साफ़ साफ़ बोलो ना।

रूपा: आऽऽऽह आप भी ना, चुदाई करवाने आती हूँ और क्या? आऽऽऽह अब मैं भी गरम हो गयी हूँ आपकी बातों से । अब बंद करूँगी फ़ोन, नहीं तो मुझे भी बुर में ऊँगली करनी पड़ेगी।

चांदनी का मुँह खुला का खुला रह गया। उफफफफ मम्मी को क्या हो गया है। कितनी गंदी बातें कर रही हैं। उसकी आँख अजित के मोटे लौड़े पर गयी।

अजित: आऽऽऽऽह मेरा भी खड़ा है। चलो फ़ोन बंद करता हूँ। ये कहते हुए उसने फ़ोन काटा। और फिर जो हरकत अजित ने की, उसके लिए चांदनी बिलकुल तैयार नहीं थी। अजित ने चांदनी का एक हाथ पकड़कर अपने लौड़े पर रखा और उसे दबाने लगा। दूसरे हाथ से वह उसकी ब्लाउस के ऊपर से एक चूची दबाने लगा। और अपना मुँह उसके मुँह पर रख कर उसके होंठ चूमने लगा। चांदनी इस अचानक से हुए तीन तरफ़ा हमले से हक्की बक्की रह गई और उसके मुँह से गन्न्न्न्न्न्न की आवाज़ निकलने लगी।

अजित अपने हाथ से उसके हाथ को दबाकर अपना लौड़ा दबवा रहा था। और चूची भी दबाए जा रहा था। चांदनी ने अपने बदन को ज़ोर से झटका दिया और अपने होंठों से उसके होंठों को हटाने की कोशिश की और कुछ बोलने को मुँह खोला। अजित ने अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी और अब चांदनी और ज़ोर से फड़फड़ाई और अपने को छुड़ाने के लिए ज़ोर लगाई। अजित को आँखें चांदनी की आखों से टकराई। चांदनी की आँखों में आँसू आ गए थे। अजित ने आँसू देखे और एकदम से पीछे हटकर बैठ गया। उसने दोनों हाथ भी हटा लिए।

अजित का लौड़ा अभी भी उत्तेजना से ऊपर नीचे हो रहा था। चांदनी उठी और क़रीब भागती हुई अपने कमरे में जाकर बिस्तर पर लेट गयी और इस सदमे से बाहर आने की कोशिश करने लगी। वह करवट लेती हुई लम्बी साँसें ले रही थी। उसके बदन में एक अजीब सी सिहरन दौड़ रही थी। उसकी बुर गीली थी और एक चूची जो अजित दबाया था ,वहाँ उसे कड़ेपन का अहसास हो रहा था। तभी इसे अहसास हुआ कि वो अकेली नहीं है। वो जैसे ही घूमी और पीठ के बल हुई, अजित उसे बिस्तर पर बैठे नज़र आया। वो सहम गयी। पर अजित मुस्कुराते हुए बोला: बहु, मैं अपना अधूरा काम पूरा करने आया हूँ।
चांदनी: कौन सा अधूरा काम?

अजित ने उसकी दूसरी चूची पकड़ ली और दबाते हुए बोला: मैंने एक ही चूची दबाई थी, अब दूसरी भी दबा देता हूँ।

चांदनी उसके हाथ को पकड़ती हुई बोली: पापा जी आज आपको क्या हो गया है? क्या मेरा रेप करेंगे? हाथ हटाइए।

अजित: नहीं बहु, मैं कभी रेप कर ही नहीं सकता वो अभी अपनी लाड़ली बहु का? ये कहते हुए उसने उसकी चूचि छोड़ दी। और बोला: लो बहु अब बराबर हो गया। दोनों चूचियाँ बराबर से दबा दीं।

चांदनी हैरानी से उसे देखती हुई बोली: पापा जी आप जाइए यहाँ से । आज तो आप सारी लिमिट पार कर गए हैं।

अजित हँसकर: अरे बहु, अभी कहाँ लिमिट पार की है। आख़री लिमिट तो तुमने साड़ी में यहाँ छुपा कर रखी है जिसे पार भी करना है और प्यार भी करना है। ये कहते हुए उसने साड़ी के ऊपर से उसकी बुर को मूठ्ठी में लेकर दबा दिया।

चांदनी उछल पड़ी और बोली: आऽऽह पापा जी ये क्या कर रहे है? छोड़िए ना प्लीज़। उइइइइइइ माँआऽऽऽऽ हाथ हटाइए।

अजित हँसता हुआ उठा और बोला: बहू , अभी तो कई लिमिट पार करनी है। चलो अब आराम करो मेरी नन्ही सी जान। यह कहकर वो अपना लौड़ा लूँगी के ऊपर से मसलकर बाहर चला गया। चांदनी सन्न होकर लेटी रही। वह सोचने लगी कि आज पापा जी को क्या हो गया था जो वो इस हद तक उतर आए।

तभी आकाश का फ़ोन आया और वो अपनी बुर के ऊपर से साड़ी ठीक करके बोली: हाँ जी कैसे हैं?

आकाश: बस तुम्हारी याद आ रही थी, आज सुबह की चुदाई में तुम्हारी गाँड़ पीछे से बहुत मस्त लग रही थी। वही याद कर रहा था।

चांदनी सोची कि बाप बेटा दोनों एक से हैं। वह बोली: छी, फ़ोन पर भी आप यही बात करते हैं। काम कैसा चल रहा है?

आकाश: बहुत बढ़िया। अच्छा, आज असलम का फ़ोन आया था, कह रहा था कि खाने पर आओ।

चांदनी: कौन असलम? वही बीवी बदलने वाला?

आकाश हँसकर: हाँ वही असलम। अरे भाई उसे और भी काम है बीवी बदलने के अलावा।

चांदनी: मुझे नहीं जाना उसके घर खाना खाने को। क्या पता उसकी बीवी पर आपका दिल आ जाए और फिर आप मेरे पीछे पड़ जाओगे कि जानू चलो बीवियाँ बदल लेते हैं। मुझे नहीं जाना।

आकाश हँसकर: वाह क्या कल्पना की है? लगता है तुम भी यही चाहती हो।

चांदनी: आओ घर वापस, बताती हूँ कि मैं क्या चाहती हूँ।

आकाश हँसते हुए: अरे जान, ग़ुस्सा मत करो, मैं मना कर देता हूँ । कह दूँगा फिर देखेंगे कभी और दिन। अब तो ठीक है?

चांदनी: हाँ ठीक है। आपने खाना खा लिया?

आकाश: बस खाने जा रहा हूँ।

चांदनी: चलो अब मैं भी खाना लगाती हूँ। चलो बाई।

आकाश: हाँ पापा जी को भी भूक़ लगी होगी।बाई।

चांदनी सोची कि पापा जी को तो बस एक ही चीज़ की भूक़ है उसकी इस जगह की। उसने अपनी बुर को सहलाकर सोची।उसकी बुर का गीलापन बढ़ने लगा था। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ यह कैसी फ़ीलिंग़स है कि एक तरफ़ तो उसे लगता है कि यह सब ग़लत है। पर दूसरी तरफ़ यह शरीर ग़लत सिग्नल भी दे देता है।जैसे अब भी उसकी चूचियों में मीठा सा दर्द हो रहा था मसले जाने का। और यह कमीनी बुर तो बस पनियाना ही जानती है। अब आज शाम को मम्मी और ताऊजी के आने के बाद भगवान ही जानता है कि क्या होने वाला है इस घर में? वह सोची और उठकर खाना लगाने किचन में चली गयी।


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