चुदक्कड बहु की चूत और प्यासे ससुर का लौड़ा - 11
अगले दिन सुबह महक उठी और संजू के लिए दरवाज़ा खोली। संजू महक के लिए चाय बनाकर लाई और महक चाय पीने लगी। फिर संजू चाय लेकर अजित के कमरे में गयी। पता नहीं महक को क्या सूझा कि वह खिड़की के पास आकर परदे के पीछे से झाँकने लगी। उसने देखा कि संजू अजित को उठा रही थी। अजित करवट लेकर सोया हुआ था। तभी वह सीधा लेटा पीठ के बल और उसका मोर्निंग इरेक्शन संजू और महक के सामने था। उसकी लूँगी का टेण्ट साफ़ दिखाई दे रहा था। अब संजू हँसी और उसके टेण्ट को मूठ्ठी में पकड़ ली और बोली: सपने में किसे चोद रहे थे? जो इतना बड़ा हो गया है यह ?

अजित: अरे तुम्हारे सिवाय और किसकी बुर का सोचूँगा। तुम्हें सपने में चोद रहा था।

संजू: चलो झूठ मत बोलो। आपको तो सपने में रूपा दिखी होंगी और क्या पता महक दीदी को ही चोद रहे होगे।

महक रूपा का नाम सुन कर चौकी और फिर अपना नाम सुनकर तो उछल ही पड़ी। उसने नोटिस किया कि पापा ने संजू को उसका नाम लेने पर ग़ुस्सा नहीं किया। तो क्या संजू और पापा अक्सर उसके बारे में ऐसी बातें करते रहते हैं? और क्या पाप रूपा आंटी को भी कर चुके हैं? और क्या पापा उसको अपनी सगी बेटी को भी चोदना चाहते हैं? हे भगवान ! वो तो पापा से थोड़ा सा फ़्लर्ट की थी और पापा उसे चोदने का प्लान बना रहे हैं?
तभी उसकी नज़र संजू पर पड़ी। वह अब लूँगी उठाकर उसके लौड़े को नंगा कर दी थी और उसे मूठिया रही थी और फिर अपना सिर झुकाकर उसे चूसने लगी। अजित बैठे हुए चाय पी रहा था और वह उसके लौड़े को बड़े प्यार से चूस रही थी। महक सोची- उफफफफ क्या पापा भी , सुबह सुबह नौकसंजू से लौड़ा चूसवा रहे है । और हे भगवान! कितना मोटा और बड़ा लौड़ा है! उसी समय अजित ने उसको हटाया और बोला: अभी नहीं बाद में चूस लेना। चलो मैं बाथरूम से फ़्रेश होकर आता हूँ। संजू ने थोड़ी अनिच्छा से लौड़े को मुँह से निकाला और चाय का ख़ाली कप लेकर किचन में चली गयी। महक उसके आने के पहले ही वहाँ से हट गयी। महक को अपनी गीली बुर में खुजली सी महसूस हुई। वैसे भी उसे अपने पति से अलग हुए बहुत दिन हो गए थे और घर के वातावरण में चुदाई का महोल था ही। आकाश भी अपनी बीवी को चोद चुका होगा रात में।

तभी अजित ड्रॉइंग रूम में आया और महक को नायटी में देखकर प्यार से गुड मोर्निंग बोला: बेटी, नींद आयी? मुझे तो बड़ी अच्छी आइ।

महक़ : जी पापा आइ । अच्छी तरह से सो ली।

अजित मुस्कुरा कर: आकाश और बहु नहीं उठे अभी?

महक: अभी कहाँ उठे है । और वो हँसने लगी।

अजित: हाँ भाई सुहागरत के बाद थक गए होंगे। वह भी हँसने लगा।

तभी अजित का फ़ोन बजा। अजित: हेलो , अरे सूबेदार तुम? कहाँ हो भाई, कल शादी में भी नहीं आए? मैं तुमसे नाराज़ हूँ। कैसे दोस्त हो?

सूबेदार: अरे यार KLPD हो गई। हम शादी के लिए ही निकले थे,पर हम नहीं पहुँच पाए। अभी होटेल में चेक इन किए हैं। और अभी सोएँगे। बहुत परेशान हुए हैं। आठ घंटे का सफ़र २४ घंटे में बदल गया क्योंकि नैनीताल के पास पहाड़ियों में रोड पर पहाड़ टूट कर गिर गए थे।

अजित: ओह, ये तो बहुत बुरा हुआ यार। तुम अकेले हो या बहु भी है?

सूबेदार: मैं अमिता के बिना कहीं नहीं जाता। वो भी है साथ में।

अजित: तो चलो आराम करो। दोपहर को आना और साथ में खाना खाएँगे, और नवविवाहितों को आशीर्वाद दे देना। क्योंकि वो दोनो रात को ही गोवा जा रहे हैं।

सूबेदार: हाँ यार ज़रूर आऊँगा। चल बाई।

महक: पापा ये आपके वही बचपन के दोस्त हैं जो आरमी से रेटायअर हुए हैं।

सूबेदार: हाँ बेटी, वही है और जिसने अपना जवान बेटा एक ऐक्सिडेंट में खोया है। अब उसकी बहु ही उसका ध्यान रखती है।
महक: वो आपके दोस्त हैं तो यहाँ क्यूँ नहीं आए?

अजित: बेटा, वो अपने हिसाब से रहता है। वो आया शादी में मेरे लिए यही बड़ी बात है।

तभी आकाश बाहर आया और अपने पापा से गले मिला और आशीर्वाद लिया और महक से भी गले मिला। तभी चांदनी भी बाहर आइ । उसने साड़ी पहनी थी। वह आकर अपने ससुर और अपनी ननद के पर छुए और उनसे आशीर्वाद लिया। फिर चांदनी किचन में चली गयी।

महक: अरे चांदनी, किचन में क्यों जा रही हो?

चांदनी: दीदी आज नाश्ता मैं बनाऊँगी। वो भी अपनी मर्ज़ी से , देखती हूँ आपको पसंद आता है या नहीं?

क़रीब एक घंटे के बाद संजू ने नाश्ते की टेबल सजायी और चांदनी ने उन सबको छोले पूरी और दही और हलवा खिलाया। सब उँगलियाँ चाटते रह गए।

अजित ने खाने के बाद उसको एक सुंदर सा हार दिया और बोला: बेटी, बहुत स्वाद खाना बनाया तुमने। ये रखो। एक बात और बेटी, मेरा दोस्त और उसकी बहु खाने पर आएँगे आज। तुम और संजू कुछ अच्छा सा बना लेना।

चांदनी: जी पापा जी , हो जाएगा।

महक ने भी उसे एक अँगूठी दी और उसके खाने की बहुत तारीफ़ की।

जब महक और आकाश अकेले बैठे थे तो महक बोली: फिर सब ठीक से हो गया ना? मिस्टर नर्वस मैन ।

आकाश: दीदी आपकी ट्रेनिंग काम आइ और सब बढ़िया से हो गया।

महक: उसको बहुत तंग तो नहीं किया?

आकाश शर्माकर: नहीं दीदी, आप भी ना, मैं ऐसा हूँ क्या?

महक: अरे मैं तो तुझे छेड़ रही थी।

फिर सब अपने कमरे में आराम किए। चांदनी ने संजू को सब्ज़ी वगेरह काटने को बोला। आकाश और वो गोवा जाने की पैकिंग भी करने लगे।

दोपहर को १ बजे सूबेदार और उसकी बहु आए जिनको अजित अंदर लाया। सूबेदार की बहु अमिता बहुत सुंदर और सेक्सी लग रही थी। उसने टॉप और स्कर्ट पहना था और सूबेदार टी शर्ट और जींस में था। सूबेदार आगे था उसके पीछे अमिता उसकी बहु और पीछे अजित चलकर ड्रॉइंग रूम में आए। अजित तो उसकी पतली कमर और उठी हुई गाँड़ देखकर ही मस्त होने लगा था

उनको मिलने महक भी बाहर आयी। वह अभी जींस और टॉप में थी। सूबेदार उससे गले मिला और बोला: अरे तुम तो बहुत बड़ी हो गयी हो बेटी। तुम्हारी शादी के बाद पहली बार देखा है तुमको। वह उसकी छातियों को घूरते हुए बोला। जब महक अमिता से गले मिल रही थी तो सूबेदार की आँखें महक की मस्त गोल गोल जींस में फँसी हुई गाँड़ पर ही थीं। फिर वह चारों बातें करने लगे।

तभी आकाश और चांदनी भी आए और दोनों ने सूबेदार के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। सूबेदार ने अमिता से एक लिफ़ाफ़ा लिया और उनको उपहार दिया। चांदनी ने सलवार कुर्ता पहना था और उसका बदन पूरा ढका हुआ था अमिता की जाँघें नंगी थी और अजित की आँखें बार बार वहीं पर जा रहीं थीं। सब खाना खाने बैठे और सबने चांदनी के बनाए भोजन की तारीफ़ की।

फिर अमिता महक के कमरे में चली गयी और अजित सूबेदार को अपने कमरे में ले गया और आकाश और चांदनी अपने कमरे में चले गए। नयी नयी शादी थी तो वह जल्दी ही चूम्मा चाटी करके चुदाई में लग गए। चुदाई उसी तरह से हुई जैसे रात को हुई थी।

महक और अमिता अपनी अपनी शादी की बातें कर रहीं थी। अमिता ने अपने पति के ऐक्सिडेंट का क़िस्सा भी सुनाया।

उधर सूबेदार और अजित भी बातें कर रहे थे।

अजित: यार तेरे साथ बहुत बुरा हुआ जो जवान लड़का चल बसा। मैंने सोचा था कि अमिता विधवा होकर अपने मॉ बाप के पास चली जाएगी। पर उसने तेरे पास ही रहना पसंद किया। ये बहुत बड़ी बात है।

सूबेदार: असल में बेटे की मौत के ग़म ने मुझे बिलकुल तोड़ दिया था। अमिता भी भारी सदमे में थी। तो हम दोनों एक दूसरे का सहारा बने। बाद में जब उसके माँ और बाप ने उसे अपने साथ चलने को कहा तो इसने मना कर दिया। जानते हो क्यों?

अजित: क्यों मना कर दिया?

सूबेदार: वो इसलिए, कि उसके पापा की आर्थिक स्तिथि अच्छी नहीं थी। अमिता को रईसी से जीने की आदत पड़ गयी थी। अच्छा खाना, महँगे कपड़े , पार्टी ,घूमना फिरना और बड़ी कारों का शौक़ था, जोकि उसके मायक़े में था ही नहीं।

अजित: ओह ये बात है। तो क्या तुम उसकी शादी करने की सोच रहे हो?

सूबेदार कुटीलता से मुस्कुराया: देखो यार, जब तक मेरा बेटा ज़िंदा था तबतक वो उसकी बीवी थी। अब उसकी मौत के बाद मैंने देखा किपार्टी में लोग उसको खा जाने की कोशिश करते है। और फिर एक दिन मैंने उसको अपनी बुर में मोमबत्ती डालकर हिलाते देखा।बस तभी मैंने उसको समझाया कि घर के बाहर चुदवा कर मेरी बदनामी करवाने से अच्छा है कि वो मेरी ही बीवी की तरह रहे। मेरी बीवी को मरे तो एक अरसा हो गया था। उसकी प्यास भी बुझ जाएगी और मेरा रँडीयों पर होने वाला ख़र्च भी बच जाएगा। उसको समझ में आ गया कि अगर अमीरी की ज़िंदगी जीनी है तो उसे मेरी बीवी बनकर रहना ही होगा। वो मान गयी, और अब हम पति पत्नी की तरह रहते हैं। और सिर्फ़ दुनिया के सामने वो मुझे पापा कहती है। ये है हमारी कहानी।

अजित: ओह, मतलब तुम उस हसीन कमसिंन लौंडिया से पूरे मज़े कर रहे हो। यार बड़े क़िस्मत वाले हो।

सूबेदार: अरे यार क्या तुम्हारा भी मन है उसे चोदने का? ऐसा है तो बोलो, वो भी हो जाएगा। तुमको समीर याद है?

अजित: हाँ वो जो अहमदाबाद ने बड़ा व्यापारी है अपना दोस्त था।

सूबेदार: वह ३ महीने पहिले नैनिताल आया था हमारे यहाँ। वह भी इस पर लट्टू हो गया। मैंने अमिता को समझाया कि जवानी चार दिन की है, मज़े करो। वो मान गयी और हम लोग पूरे हफ़्ते सामूहिक चुदाई का मज़ा लिए।

अजित का मुँह खुला रह गया: ओह, तो तुमने और समीर ने मिलकर उसे चोदा, wow।

सूबेदार: अरे इसके बाद मेरा एक मिलिटेरी का दोस्त अपने बेटे और बहू को मेरे घर भेजा था छुट्टियाँ मनाने। उन दिनो बहुत बर्फ़ पड़ रही थी। बाहर जा ही नहीं पा रहे थे। मुझे वह चिकना लड़का और उसकी बहू बहुत पसंद आ गए थे। वो लड़का भी बाईसेक्शूअल था मेरे जैसा। मैंने पहले चिकने को पटाया और उसकी ले ली। फिर उसको अपनी बीवी देने के लिए पटाया और तुम विश्वास नहीं करोगे अगले दिन ही हम चारों बिस्तर पर नंगे होकर चुदाई कर रहे थे। उस लड़के ने भी अमिता को चोदा।

अजित: यार, तुम तो उसको रँडी बना दिए हो। यह कहते हुए वह अपना खड़ा लौड़ा मसलने लगा।

सूबेदार: लगता है तुझे भी इसकी बुर चोदने की बहुत हवस हो रही है? वैसे उसकी बुर और गाँड़ दोनों मस्त है। देखोगे?

अजित: दिखाओ ना फ़ोटो है क्या?

सूबेदार: हा हा फ़ोटो क्या देखना है, जब वो ही यहाँ है अपना ख़ज़ाना दिखाने के लिए। पर उसके पहले एक बात बोलूँ, बुरा तो नहीं मानोगे?
अजित: बोलो ना यार , तुम्हारी बात का क्या बुरा मानूँगा।

सूबेदार: मेरा महक पर दिल आ गया है। तुमने उसे चोदा है क्या?

अजित : अरे नहीं , वो मेरी बेटी है । मैं ऐसा कुछ नहीं किया।

महक भी हैरान रह गयी कि वो दोनों उसकी बात कर रहे हैं। वह सूबेदार की सोच पर हैरान रह गयी।

सूबेदार: क्या मस्त माल है यार तुम्हारी बेटी, एक बार बस मिल जाए तो। ये कहते हुए वह अपना लौड़ा मसलने लगा।
अजित ना हाँ कर पाया और ना ही ना।

सूबेदार बोलता चला गया: यार, अगर तुमको ऐतराज़ ना हो तो आज रात ही महक को भी बिस्तर पर खींच लाएँगे। फिर चारों मज़े से सामूहिक चुदाई करेंगे। क्या कहते हो?

अजित: मुझे समझ नहीं आ रहा है कुछ भी। वो अमिता की बुर और गाँड़ की फ़ोटो दिखाओ ना।

सूबेदार: कहा ना फ़ोटो क्या दिखाना है, अभी उसे बुलाता हूँ और जो देखना होगा सब देख लेना साली का।

यह कहकर उसने बाहर आकर अमिता को आवाज़ दी। अजित ने देखा कि सूबेदार की पैंट में भी तंबू बना हुआ है।

अमिता महक से बोली: मैं अभी आइ, पापा बुला रहे हैं।

वह उठकर अजित के कमरे में आइ और दरवाज़े के पीछे खड़े सूबेदार ने दरवाज़ा बंद कर दिया। अब सूबेदार आकर अजित के साथ बिस्तर पर बैठ गया। अमिता सामने खड़ी हो गयी थी।

उधर महक सोची कि ऐसी क्या बात है जिसके लिए अमिता को बुलाया है। वो जाकर खिड़की से परदा हटाकर झाँकी और उसका मुँह खुला रह गया।

अंदर सूबेदार अमिता के गाल सहलाकर बोला: अमिता, अजित का तुम पर दिल आ गया है। वो तुम्हारी बुर और गाँड़ देखना चाहता है। दिखा दो ज़रा। अपनी पैंटी नीचे करो।

अमिता शर्मा कर बोली: क्या पापा छी मुझे शर्म आ रही है।

सूबेदार: अरे मेरी रँडी बेटी, जैसा कह रहा हूँ करो, पैंटी नीचे करो।

अमिता ने चुपचाप पैंटी घुटनो तक नीचे कर दी। अब सूबेदार ने उसकी स्कर्ट ऊपर कर दी और महक के आँखों के सामने उसके मोटे गोल चूतर थे। अजित की आँखें उसकी बुर पर टिकी थी।

सूबेदार: बोलो मस्त फूलि हुई है ना इसकी बुर ?

अजित: हाँ यार बहुत सुंदर है। फिर वह हाथ बढ़ाकर उसकी बुर को सहलाने लगा। अनिता हाऽऽऽय्य कर उठी।

अजित: सच में यार मस्त चिकनी बुर है चोदने में बहुत मज़ा आएगा। फिर वह उसको सहलाया और दो ऊँगली अंदर डालकर बोला: आह मस्त टाइट बुर है। अब वो उँगलियाँ निकाल कर चाटने लगा।

सूबेदार: चल साली रँडी अब पलट कर अपनी गाँड़ दिखा।

अमिता चुपचाप पलट गयी। अब महक के सामने उसकी नंगी बुर थी। उधर अजित उसके मस्त गोल गोल चूतरों को सहला रहा था। तभी सूबेदार बोला: अमिता अपनी गाँड़ दिखाओ अंकल को , वो बहुत मस्ती से तुम्हारी गाँड़ मार कर तुमको मज़ा देंगे।

यह सुनकर अमिता ने अपने दोनो चूतरों को फ़ैलाया और अजित उसकी गाँड़ के खुले छेद को देखकर समझ गया कि वह अक्सर गाँड़ मरवाती है। अब अजित ने उसकी गाँड़ सहलायी और उसमें एक ऊँगली डाला और अंदर बाहर किया। तभी सूबेदार ने उसकी बुर को दबाना शुरू किया। अब अमिता आऽऽऽऽहहह करने लगी। फिर बोली: अभी छोड़िए ना, महक, आकाश और चांदनी घर में हैं। बाद में रात को कर लीजिएगा।

अब दोनों ने उसे छोड़ दिया पर सूबेदार बोला: बस एक बार आगे झुक कर अपनी बुर और गाँड़ की छवि तो दिखा दो अंकल को।

वह मुस्कुरा कर आगे झुकी और दोनों अधेड़ मर्द उसकी नंगी जवानी जा हुस्न देखकर मस्ती से अपने लौड़े मसलने लगे। फिर वह उठकर अपनी पैंटी ऊपर की और स्कर्ट नीचे करके कमरे से बाहर आने के पहले अपना हाथ बढ़ाकर एक एक हाथ में दोनों के लौड़ों को पैंट के ऊपर से दबा दी और बोली: रात को मज़ा करेंगे।

महक भी भागकर अपने कमरे में आयी और बाथरूम में घुस गयी। पिशाब करके उसने अपनी वासना को क़ाबू में किया और वापस कमरे में आयी तो अनिता वहाँ बैठकर टी वी देख रही थी जैसे कुछ हुआ ही नहीं हो। महक के दिमाग़ में एक बात ही चल रही थी कि उसके पापा ने सूबेदार की महक के बारे में की गई गंदी बातों का कोई जवाब नहीं दिया और ना ही उसे ऐसी बात करने से टोका। इसका मतलब वो भी यही चाहते हैं कि मैं उनके दोस्त से चुदवाऊँ!! हे भगवान , ये सब क्या हो रहा है? वो आज तक अपने पति के अलावा किसी और से नहीं चुदी थी। यहाँ उसके पापा के दोस्त और क्या पता पापा भी उसको चोदने के चक्कर में है।

महक का सिर घूमने लगा कि ये उसकी ज़िंदगी में कैसा मोड आने वाला है। क्या वो इसके लिए तैयार है ? पता नहीं आज की रात कैसे बीतेगी और उसकी ज़िंदगी में कैसा तूफ़ान आएगा?
शाम के नाश्ते के बाद आकाश और चांदनी एयरपोर्ट के लिए चले गए। अजित ने संजू को छुट्टी दे दी और डिनर बाहर एक रेस्तराँ में करने का प्लान बनाया। सब तैयार होकर एक रेस्तराँ के लिए निकले। महक भी अब अमिता की तरह स्कर्ट और टॉप में ही थी। दोनों की मस्त गोरी जाँघें बहुत मादक दिख रही थीं। कार में दोनों मर्द आगे बैठे और लड़कियाँ पीछे बैठीं।

रेस्तराँ में अजित और अमिता अग़ल बग़ल एक सोफ़े पर बैठे और महक के साथ सूबेदार बैठ गया। हल्का अँधेरा सा था हॉल में और सॉफ़्ट म्यूज़िक भी बज रहा था। कुछ जोड़े डान्स फ़्लोर पर नाच भी रहे थे। अजित ने अपने लिए और सूबेदार के लिए विस्की ऑर्डर की और लड़कियों को पूछा किक्या लेंगी।

सूबेदार: वाइन लेंगी और क्या लेंगी? ठीक है ना महक?

महक मुस्कुरा दी: ठीक है अंकल ले लूँगी। अमिता क्या लेगी?

सूबेदार: अरे वो तो विस्की भी ले लेती है पर अभी वाइन से ही शुरुआत करेगी।

फिर जैसे जैसे शराब अंदर जाने लगी, माहोल रोमांटिक होने लगा। अजित का हाथ अमिता की नंगी जाँघों पर था और वह उसकी स्कर्ट को ऊपर करके सहलाए जा रहा था। अब सूबेदार महक को बोला: बेटी, अब तुम बड़ी हो गयी हो, विस्की का भी मज़ा लो।

महक भी सुरुर में आ गई थी: ठीक है अंकल दीजिए , मुझे सब चलता है।

जब सूबेदार ने देखा कि महक थोड़ी सी टुन्न हो रही है तो वह उसको बोला: क्या मैं अपनी प्यारी सी बेटी को डान्स फ़्लोर में चलने को कह सकता हूँ?

महक: ज़रूर अंकल चलिए ना डान्स करते हैं।
अमेरिकन सभ्यता का असर भी तो था।

अब वो दोनों डान्स करने लगे। अब सूबेदार ने उसकी कमर में हाथ डालके उसको अपने से चिपका लिया। उसके बड़े बड़े बूब्ज़ सूबेदार की छाती से टकरा रहे थे और वह उसके नंगी कमर को सहलाए जा रहा था। थोड़ी देर बाद सूबेदार ने उसके निचले हिस्से को भी अपने निचले हिस्से से चिपका लिया और महक को उसके खड़े लौड़े का अहसास अपने पेट के निचले हिस्से पर होने लगा। वो अब ख़ुद भी उसकी मर्दानी गंध से जैसे मदहोश सी होने लगी। तभी सूबेदार ने उसकी बाँह उठाकर नाचते हुए उसकी बग़ल में नाक घुसेड़ दी और उसकी गंध से मस्त होकर बोला: बेटी, तुम्हारे बदन की ख़ुशबू बहुत मादक है।

महक शर्मा कर: अंकल क्या कर रहे हैं? कोई देख लेगा?

सूबेदार: बेटी, सब अपनी मस्ती में खोए हुए हैं, किसी को दूसरे की कोई फ़िक्र ही नहीं है। यह कहते हुए उसने महक को अपने से और ज़ोर से चिपका लिया। फिर वह बोला: बेटी, मुझे तुम्हारे पति से जलन हो रही है।

महक: वो क्यों?

सूबेदार: क्या क़िस्मत पायी है जो उसे तुम्हारे जैसे बीवी मिली है। क्या मस्त बदन है तुम्हारा। वो तो तुमको छोड़ता ही नहीं होगा ना? दिन रात तुमसे लगा रहता होगा?

महक मुस्कुरा कर: अंकल शुरू शुरू में तो ऐसा ही था, पर अब हमारी शादी को छे साल हो गए हैं , अब वो बात कहाँ?

सूबेदार: बेटी, तुम्हारी जवानी तो अब निखार पर आइ है। फिर वो उसकी कमर से हाथ ले जाकर उसके चूतर को हल्के से सहलाया और बोला: देखो क्या मस्त बदन है अब तुम्हारा । हर जगह के उभार कितने मस्त हैं। और फिर वह उसके चूतर दबा दिया।

महक जानती थी कि अगर उसने अभी सूबेदार को नहीं रोका तो बाद में उसे रोकना नामुमकिन हो जाएगा। पर तभी सूबेदार ने झुक कर उसकी टॉप से बाहर झाँक रही चूचियों पर चुम्बन ले लिया और महक का रहा सहा विरोध भी ख़त्म हो गया। उसकी बुर गीली होकर चुदाई की डिमांड करने लगी। वैसे भी उसे काफ़ी दिन हो गए थे चुदवाए हुए।
महक: चलिए अब वापस टेबल पर चलते हैं।

उधर अजित और अमिता उनको देखे जा रहे थे। जैसे ही वो दोनों डान्स फ़्लोर पर गए अमिता बोली: अंकल सूबेदार साहब आज आपकी बेटी को पटा के ही छोड़ेंगे।

अजित ने उसकी जाँघ सहलाते हुए कहा: अच्छा है ना, अगर उसे सूबेदार पसंद है, तो वह उससे चुदवा ले। इसमें बुराई क्या है?

फिर वह अमिता को बोला: बेटी, तुम बाथरूम जाकर पैंटी उतार कर अपने पर्स में डाल लो। मुझे तुम्हारी बुर में ऊँगली करनी है।
अमिता: अंकल पैंटी को एक तरफ़ कर देती हूँ, आप ऊँगली डाल लीजिए। यह कहकर वो थोड़ी सी उठी और शायद उसने पैंटी को एक तरफ़ को कर दिया। अब अजित ने उसकी जाँघों के बीच उँगलिया डाली और वो सीधे बुर के अंदर चली गयीं। अमिता की आऽऽऽह निकल गयी। अजित की उँगलियाँ जल्दी ही गीली हो गयीं। वह उनको चाटने लगा। तभी अमिता बोली: देखिए अंकल, सूबेदार के हाथ अब महक के चूतर दबा रहे हैं। और आऽऽऽहहह देखिए वो अब उसकी चूचियाँ चूम रहे हैं।

अजित का लौड़ा अब पूरा कड़क हो चुका था और अपनी बेटी को अपने दोस्त के साथ मस्ती करते देख वह बहुत उत्तेजित हो रहा था। फिर जब वो दोनों वापस आए टेबल पर तो सूबेदार के पैंट का टेंट साफ़ दिखाई दे रहा था। टेबल पर बैठ कर वो फिर से पीने लगे। इस बार सूबेदार भी बेशर्म होकर अपने हाथ को उसकी नंगी जाँघों पर फेरने लगा। महक ने भी बेशर्मी से अपनी जाँघें फैला दी और अब उसकी उँगलियाँ उसकी बुर को पैंटी के ऊपर से छूने लगी। सूबेदार धीरे से महक के कान में बोला: बेटी, तुम्हारी पैंटी तो गीली हो रही है । सब ठीक है ना?

वो हँसकर बोली: अंकल सब आपका किया धरा है।

सूबेदार ने अब हिम्मत की और उसका हाथ पकड़कर अपने पैंट के ऊपर से अपने लौड़े पर रखा और बोला: देखो मेरा भी बुरा हाल है। ये तो तुम्हारा ही किया धरा है।

महक भी बेशर्मी से उसके लौड़े को सहलायी और उसकी लम्बाई और मोटाई का अहसास करके बोली: आऽऽह आपका तो बहुत बड़ा है अंकल।

सूबेदार: क्यों तुम्हारे पति का छोटा है क्या?

महक: उनका सामान्य साइज़ का है, पर आपका तो बहुत बड़ा है।

ये कहते हुए वह उसका लौड़ा सहलाए जा रही थी। तभी महक का फ़ोन बजा। उसके पति का फ़ोन था। महक: हाय कैसे हो?

वो: ठीक हूँ, तुम्हारी याद आ रही है, अब तो शादी भी हो गयी , अब वापस आ जाओ ना।

महक नशे में थी और उसके आँखों के सामने उसका सामान्य लौड़ा आ गया। अभी भी उसका एक हाथ सूबेदार के लौड़े पर था। ओह भगवान मैं क्या करूँ? एक तरफ़ इतना मस्त लौड़ा है और दूसरी तरफ़ पति का सामान्य सा लौड़ा। वो सोचने लगी कि अंकल की चुदाई भी मस्त होगी। उसकी बुर अब पूरी तरह से पनिया गयी थी। वो बोली: बस अभी पापा अकेले हैं, जैसे ही आकाश और चांदनी होनिमून से वापस आएँगे मैं भी आ जाऊँगी।

अजित का लंड अभी अमिता के हाथ में था और वह यह सुनकर बुरी तरह से मचल गया कि अभी महक बहुत दिन यहाँ रहेगी। वो मस्ती से अपनी उँगलियाँ अमिता की बुर में भी डाला और हिलाने लगा। तभी महक ने मोबाइल बंद किया और टेबल पर रखने लगी तभी वह नीचे गिर गया। वह उठाने के लिए झुकी और उसकी आँखों के सामने उसके पापा की उँगलियाँ अमिता की बुर में हिल रही थीं और उधर अमिता के हाथ उसके पापा के लौड़े पर चल रहे थे। वह ये देखकर बहुत उत्तेजित हो गयी।
फिर मोबाइल उठाकर वह और ज़ोर से उसका लौड़ा दबाने लगी। उधर सूबेदार भी उसकी बुर को पैंटी के ऊपर से सहलाने लगा। फिर सूबेदार ने जो अंधेरे में बैठा था अपना लौड़ा बाहर निकाल लिया था। अब अमिता उसके नंगे लौंडे को मसल कर मस्ती से भर उठी थी। उफफफ कितना मोटा कड़ा और गरम लौड़ा है। वो सोची और मज़े से भर उठी।

अब सभी बहुत उत्तेजित हो चुके थे। तभी सूबेदार ने एक एस॰एम॰एस॰ लिखा और अजित को भेजा। अजित ने एस॰एम॰एस॰ पढ़ा। उसमें लिखा था नीचे झुक कर अपनी बेटी की हरकत देखो।
अजित ने अपना रुमाल गिराया और उठाने के बहाने नीचे झुका और देखा कि महक की बुर में सूबेदार की उँगलियाँ चल रही है और वह सूबेदार का लौड़ा मसल रही है, जिसे सूबेदार ने पैंट से बाहर निकाल रखा था। अजित तो जैसे पागल ही हो गया था अपनी बेटी की इस हरकत से।

अजित: चलो सबका खाना हो गया क्या ? अब घर चलें? दस बज गए हैं।
फिर उसने बिल पटाया और वो चारों अपने कपड़े ठीक करके बाहर आ गए। कार में अमिता अजित के साथ बैठी और पीछे सूबेदार और महक बैठीं। कार के चलते ही सूबेदार ने महक का टॉप उठाकर उसकी ब्रा से उसकी एक चूचि बाहर निकाल ली और उसको पहले दबाया और फिर मुँह में लेकर चूसने लगा।

अजित ने चूसने की आवाज़ सुनी तो पीछे रीयर व्यू मिरर में देखा और महक के बड़े दूध सूबेदार के मुँह में देखकर वह बहुत उत्तेजित हो गया। उसने हाथ बढ़ाकर अमिता के दूध दबाने शुरू किए। पर कोई रीऐक्शन ना देखकर वह उसे देखा तो पाया कि वह लुढ़क गयी है।

अजित: अरे अमिता तो सो गयी।

सूबेदार: अरे वह दारू नहीं पचा पाती । अब वो सुबह तक बेहोश रहेगी। अब हमारे पास बस एक यही महक बची है मज़े लेने के लिए।

अजित ने शीशे में देखा और पाया कि अब सूबेदार का लौड़ा फिर से पैंट से बाहर था और महक अब उसे चूस रही थी। अजित को लगा कि उसकी पैंट फट जाएगी , उसका लौड़ा इतना कड़क हो चुका था।

घर पहुँचने के पहले सूबेदार और महक ने अपने कपड़े ठीक कर लिए थे। अब सूबेदार ने अमिता को गोद में उठाया और लेज़ाकर उसको महक के बिस्तर पर सुला दिया। फिर वह बाहर आया और ड्रॉइंग रूम में सोफ़े पर बैठा और महक भी अपना पर्स वगेरह रख कर बाथरूम से वापस आकर सोफ़े में बैठी। तभी अजित भी आया और सोफ़े पर बैठ गया। एक अजीब सी ख़ामोशी थी कमरे में।

सूबेदार ने ख़ामोशी तोड़ी और बोला: यार साली अमिता तो टुन्न हो गयी अब महक का हो सहारा है । क्या बोलते हो?

अजित : महक ने ही फ़ैसला करना है कि वह क्या चाहती है?

महक: अंकल आप इतनी देर से मुझे तंग कर रहे हो और अब क्या ऐसी ही प्यासी छोड़ दोगे?

सूबेदार: बेटी, मैं तेरे पापा की बात कर रहा हूँ। क्या तुम उससे भी चुदवाओगी?

महक: पापा तो मरे जा रहे हैं मुझे चोदने को, मुझे सब पता है। मैंने आजतक अपने पति के अलावा किसी से भी किया नहीं है। पर आज बड़ा मन है आप दोनों से करवाने का। कहते हुए वह मुस्कुराते हुए एक ज़बरदस्त अंगड़ाई ली। उसके बड़े कबूतर टॉप में फड़फड़ा उठे।

सूबेदार हँसते हुए बोला: वाह बेटी तुमने तो समस्या ही हल कर दी। और वह उठकर उसके पास आया और उसको अपनी गोद में खींचकर उसके होंठ चूसने लगा। फिर वह अजित को बोला: आजा यार अब तेरी बेटी का मज़ा लेते हैं। ये कहते हुए उसने महक का टॉप उतार दिया और ब्रा के ऊपर से उसकी चूचियाँ दबाने लगा। तभी उसने अगला ऐक्शन किया और ब्रा भी निकाल दी। अब उसकी बड़ी चूचियाँ दोनों के सामने थीं। वह एक चूचि चूसते हुए बोला: आजा यार अब चूस अपनी बेटी की चूचि , देख क्या मस्त मलाई है । अब अजित नहीं रुक पाया और आकर महक के बग़ल में बैठा और हाथ बढ़ाकर उसकी चूचि सहलाया और फिर वह भी एक चूचि चूसने लगा। महक ने नीचे देखा कि कैसे उसके पापा और अंकल उसकी एक एक चूचि चूस रहे थे। वह दोनों के सिर में हाथ फेरने लगी।

दोनों मर्द अब उसकी निपल को अपने होंठों में लेकर हल्के से दाँत से काट भी रहे थे। महक मज़े से आऽऽऽह्ह्ह्ह्ह करने लगी। उधर दोनों के हाथ उसके पेट से होकर उसकी जाँघ पर घूम रहे थे। वह उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ करने लगी। दोनों की उँगलियाँ उसकी बुर के आसपास घूम रही थीं। वह अब अपनी गीली बुर की असहनीय खुजली को महसूस कर रही थी। तभी अजित नीचे आकर उसकी स्कर्ट उतार दिया और अब पैंटी का गीलापन देखकर दोनों मर्द मुस्कुरा उठे। फिर अजित ने उसकी पैंटी भी उतार दी । अब उसकी जाँघों को अलग करके उसकी बुर को देखा और मस्ती से उसको चूमने लगा। फिर वह उसे जीभ से चाटने लगे। फिर उसने उसकी कमर को और ऊपर उठाया और अब उसकी सिकुड़ी हुई गाँड़ भी उसके सामने थी । वह उसे भी चूमा और फिर से जीभ से चाटने लगा। महक पागल सी हो गयी थी। सूबेदार उसकी चूचियों पर हमला किए था और पापा उसकी बुर और गाँड़ पर। वह उइइइइइइइइइ हाऽऽऽयय्य चिल्ला रही थी।
अब सूबेदार खड़े हुआ और पूरा नंगा हो गया।

उसका लौड़ा बहुत कड़ा होकर ऊपर नीचे हो रहा था। वह लौड़ा महक के मुख के पास लाया और महक ने बिना देर किए उसे चूसना शुरू कर दिया। तभी अजित भी खड़ा हुआ और नंगा होकर अपना लौड़ा महक के मुँह के पास लाया। वह अब उसका भी लौड़ा चूसने लगी। अब वह बारी बारी से दोनों का लौड़ा चूस रही थी।

सूबेदार: चलो बेटी, बिस्तर पर चलो और डबल चुदाई का मज़ा लो। अमिता तो कई बार इसका मज़ा ले चुकी है।

अब तीनो नंगे ही बिस्तर पर आकर लेटे। महक पीठ के बल लेटीं थी और दोनों मर्द उसकी चूचि पी रहे थे। उनके हाथ उसकी बुर और जाँघ पर थे। उधर महक ने भी उनका लौड़ा एक एक हाथ में लेकर सहलाना शुरू किया था। उग्फ़्फ़्फ़्फ़ क्या मस्त मोटे और बड़े लौड़े थे। वह सोची कि आज की चुदाई उसे हमेशा याद रहेगी।

अब अजित बोला: बेटी, पिल्ज़ ले रही हो ना? कहीं प्रेग्नन्सी ना हो जाए।

महक: पापा आज आपको एक बात बतानी है। हमने चार साल फ़ैमिली प्लानिंग की थी। पर पिछल दो साल से हम बच्चे की कोशिश कर रहे हैं, पर अभी तक कुछ नहीं हुआ है। मैंने अपना चेकअप करवाया है, सब ठीक है। आपका दामाद अपनी जाँच के लिए तैयार नहीं है।

अजित: ओह तुमने यह तो कभी बताया नहीं बेटी। उसकी बुर सहलाते हुए वह बोला।

अब सूबेदार और अजित अग़ल बग़ल लेट गए और वह उठकर दोनों के लौड़े चूसने लगी। फिर वह उनके बॉल्ज़ को सहलाते हुए और चाटते हुए बोली: आपके इतने बड़े बड़े बॉल्ज़ में बहुत रस होगा । आप दोनों आज ही मुझे प्रेगनेंट कर दोगे , वैसे भी मेरा अन्सेफ़ पिरीयड चल रहा है।

अजित: आऽऽह बेटी, ज़रूर आज तुम प्रेगनेंट हो ही जाओगी। आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह क्या चूसती हो ह्म्म्म्म्म्म्म।

सूबेदार उठा और नीचे जाकर उसकी बुर और गाँड़ चाटा और बोला: यार तू क्या चोदेगा? बुर या गाँड़?

अजित: पहले बुर फिर गाँड़।

सूबेदार: तो फिर चल तू लेट जा और महक तुम उसके ऊपर आकर लौड़े को अपनी बुर में ले लो। मैं पीछे से गाँड़ मारूँगा। यह कह कर वह ड्रेसिंग टेबल से क्रीम उठाकर लाया और अपने लौड़े पर मलने लगा।

अजित के लौड़े पर अपना बुर रखकर महक बैठी और उसका लौड़ा अपनी बुर में धीरे धीरे अंदर करने लगी। अब वो आऽऽऽऽहहह कहती हुई पूरा लौड़ा अंदर कर ली। अब अजित उसकी बड़ी बड़ी छातियाँ दबाने लगा।सूबेदार ने उसकी गाँड़ में क्रीम लगाकर अपना लौड़ा वहाँ सेट किया और धीरे से पेलने लगा। महक चिल्लाई: आऽऽऽहहहह दुःख रहा है, अंकल आपका बहुत मोटा है।

सूबेदार: बस बेटी बस, देखो पूरा चला गया तुम्हारी टाइट गाँड़ में। आऽऽहाह मज़ा आ गया। फिर वह धक्के मारने लगा। अजित भी नीचे से कमर उठाकर उसकी बुर फाड़ने लगा । महक इस डबल चुदाई से अब मस्त होने लगी। उसके निपल भी मसलकर लाल कर दिए थे दोनों ने।

अब महक भी अपनी गाँड़ उछालकर आऽऽऽऽऽहहह और चोओओओओओओदो आऽऽहहहह फ़ाआऽऽऽऽड़ दोओओओओओओओ चिल्लाने लगी।

दोनों मर्द अब मज़े से चोदने में लग गए। पलंग ज़ोर ज़ोर से हिले जा रहा था और फ़चफ़च और ठप्प ठप्प की आवाज़ भी गूँज रही थी।

अचानक महक बोली: अंकल आप अपना रस मेरी गाँड़ में नहीं मेरी बुर में ही छोड़ना, मैं आज ही गर्भवती होना चाहती हूँ। आऽऽऽह। हाऽऽऽऽऽय्य।

सूबेदार: ठीक है बेटी, जैसा तुम कहो। और वो और ज़ोर से गाँड़ मारने लगा।

अब अजित चिल्लाया: आऽऽऽऽऽऽह बेटी मैं गया। और वो झड़ने लगा। महक भी पाऽऽऽऽऽपा मैं भी गईइइइइइइइइ। कहकर झड़ गयी। सूबेदार ने अपना लौड़ा बाहर निकाला और चादर से पोंछा और महक के अजित के ऊपर से हटने का इंतज़ार करने लगा। जब महक उठकर लेटी तो वह उसकी टाँगें उठाकर उसकी बुर में अपना लौड़ा डाल दिया। उसकी बुर अजित के वीर्य से भरी हुई थी। अब वह भी दस बारह धक्के लगाकर झड़ने लगा। उसका वीर्य भी महक की बुर में सामने लगा।

महक आऽऽहहहह करके लेटी रही और बोली: आऽऽऽहब आप दोनों का कितना रस मेरे अंदर भर गया है। आज तो मैं ज़रूर से प्रेगनेंट हो ही जाऊँगी।

फिर सब फ़्रेश होकर लेट कर चूमा चाटी करने लगे। क़रीब एक घंटे के बाद फिर से चुदाई शुरू हुई, बस इतना फ़र्क़ था कि उसकी गाँड़ में इस बार पापा का और बुर में अंकल का लौड़ा था। लेकिन उनका वीर्य इस बार भी उसकी बुर को ही मिला। बाद में सब नंगे ही लिपट कर सो गए।


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