चुदक्कड बहु की चूत और प्यासे ससुर का लौड़ा - 10
जब आकाश दीदी से सुहागरत की ट्रेनिंग ले रहा था तभी चांदनी किचन में पानी पीकर किचन बंद करके सोने के लिए जाने लगी। तभी उसको एक कमरे के सामने से फुसफुसहाट सुनाई दी। वह रुक कर सुनने की कोशिश की। राजेश: अरे जान आज बहुत इच्छा हो रही है, रात को साथ सोते हैं। मैं उसको नींद की दवाई खिला देता हूँ और फिर रात को मज़े करते हैं। ठीक है?

रूपा: आऽऽह धीरे से दबाओ ना। अच्छा चलो एक घंटे में आती हूँ। तब तक भाभी सो जाएगी ना?

राजेश: बिलकुल मेरी जान। आ जाना।

रूपा: हाऽऽऽऽय क्या कर रहे हो अभी, उसी समय कर लेना ना ये सब । आऽऽऽह छोड़ो।

चांदनी ने धीरे से झाँक कर देखा । रूपा को राजेश पीछे से पकड़ा हुआ था और उसके दोनों बूब्ज़ उसके पंजों में थे और शायद वह उनको ज़ोर से दबा रहा था तभी रूपा की आऽऽऽह निकल रही थी। जब राजेश ने रूपा को छोड़ा तो उसके लूँगी का तंबू साफ़ दिख रहा था। वह शायद उसे रूपा के चूतरों पर रगड़ रहा था। अब रूपा ने बड़ी बेशर्मी से उस तंबू को दबाकर कहा: थोड़ी देर और धीरज रखो फिर शांत हो जाओगे। और यह कहकर हँसती हुई वहाँ से अपने कमरे में चली गयी। राजेश के जाने के बाद चांदनी भी चली आयी।

चांदनी को नींद नहीं आ रही थी। बार बार उसके कान में ये बात गूँज रही थी कि माँ अभी थोड़ी देर में राजेश ताऊजी से चुदेगी। आज तक जब भी वह उनको साथ देखी थी तब जल्दी से शर्माकर हट जाती थी। आज उसका मन कर रहा था कि पूरा खेल देखे। ये सोचकर वह उठी और माँ जे कमरे में झाँकी। मम्मी वहाँ नहीं थीं। वो अब राजेश के कमरे की ओर गयी। खिड़की के परदे को हटाया और अंदर का दृश्य उसकी आँखों के सामने था।

ताई सोयी हुई थी। और ताऊ जी बिस्तर पर बैठे थे और मम्मी नीचे में ज़मीन पर गद्दा बिछा रही थी। फिर वह वहीं लेट गयीं। नायटी में उनकी विशाल छातियाँ ऊपर नीचे हो रही थीं। अब वह राजेश को देख कर मुस्कुराई। राजेश आकर उसके साथ लेट गया। अब रूपा ने अपनीं बाहें उसकी गरदन में डाली और उससे लिपट गयी। वह। ही उसको अपने आप से चिपका लिया। अब उनके होंठ एक दूसरे से मानो चिपक से गए थे। राजेश की जीभ रूपा के मुँह में थी और राजेश के हाथ उसकी पीठ और कमर सहला रहे थे।

राजेश के हाथ इसकी नायटी को उठाए जा रहे थे और जल्दी ही रूपा नीचे से नंगी हो गयी। उसके बड़े चूतरों को वो दबाने लगा। और उसकी दरार में हाथ डालकर वह उसकी बुर और गाँड़ सहलाने लगा। रूपा भी उसकी लूँगी निकाल दी और उसके लौड़े को मसलने लगी। ताऊजी का लौड़ा उसे आकाश के लौड़े से थोड़ा छोटा ही लगा। अब रूपा उठी और अपनी नायटी उतार दी। वह नीचे पैंटी और ब्रा नहीं पहनी थी। ताऊजी भी चड्डी नहीं पहने थे। शायद ये उनका पहले से तय रहता है कि चुदाई के समय ये सब नहीं पहनेंगे।

चांदनी की हालत ख़राब होने लगी और उसका हाथ अपनी चूचियों पर चला गया और वह उनको दबाने लगी। तभी रूपा नीचे को झुकी और अपनी चूचि अपने हाथ में लेकर राजेश के मुँह में डाल दी। वह उसको चूसने लगा और दूसरी चूचि को दबाने लगा। अब रूपा आऽऽहहह कर उठी। फिर रूपा उसके लौड़े को सहलाने लगी। फिर वह झुकी और उसके लौंडे को चाटी जीभ फिराके, और फिर उसे चूसने लगी। राजेश भी मज़े से उसके मुँह को चोदे जा रहा था। फिर रूपा उसके ऊपर आ गयी और अपनी बुर को उसके मुँह पर रखी और अब ६९ की चुसाइ चालू हो गयी।

चांदनी की आँखें वहाँ जैसे चिपक सी गयी थीं। अब वह अपनी नायटी उठाकर पैंटी के अंदर उँगली डालकर अपनी बुर सहलाने लगी।
उसकी बुर पूरी गीली हो गयी थी।

अब रूपा उठी और उसके लौड़े पर बैठी और उसे अंदर लेकर चुदाई में लग गयी। राजेश उसके लटके हुए आमों को दबा और चूस रहा था। वह भी नीचे से धक्का मार रहा था। चांदनी को उसका लौड़ा मम्मी की बुर में अंदर बाहर होते हुए साफ़ दिख रहा था । फिर रूपा उसको कुछ बोली। वह उसको अपने से चिपकाए हुए ही पलट गया और अब ऊपर आकर उसकी मम्मी को ज़बरदस्त तरीक़े से चोदने लगा। रूपा अब उइइइइइइइ माँआऽऽऽऽ आऽऽऽऽऽऽऽहहह और जोओओओओओओओओओर से चोओओओओओओओदो चिल्ला रही थी। अब रूपा के चूतर भी नीचे से ज़ोर ज़ोर से उछल रहे थे। दोनों पसीने पसीने हो चुके थे । फिर वह दोनों चिल्लाकर झड़ने लगे। ऊपर ताई जी इन सबसे बेख़बर सोई हुई थी। फिर दोनों चिपक बातें करने लगे । रूपा अब उसके सुकड़े पड़े लौड़े को सहलाने लगी थी और वह भी फिर से चूची चूसने लगा था। चांदनी समझ गयी कि अगले राउंड की तैयरियाँ करने लगे हैं। अब उसकी बुर पूरी तरह गीली हो चुकी थी। वह कमरे में आयी और नायटी उठाकर अपनी बुर में ऊँगली करने लगी। और फिर clit को सहलाकर झड़ने लगी। वह अब शांत हो चुकी थी, पर उसे बड़ी शर्म आइ कि वह अपनी मम्मी और ताऊ की चुदाई देखी। फिर वह सो गयी।
अगले दिन सुबह संजू आइ , हमेशा की तरह दरवाज़ा अजित ने खोला और फिर वह किचन में जाकर चाय बनाई। अजित फ़्रेश होकर बिस्तर पर बैठा था, तभी वह चाय लेकर आयी। अजित ने उससे चाय ली और बग़ल के टेबल पर रख दी और उसको अपनी गोद में खींच लिया और उसको चूमने लगा। वह भी उससे लिपट गयी और उसको चूमने लगी। अब वह चाय पीते हुए उसकी चूचि दबाकर बोला: डॉक्टर के पास जाती रहती हो ना?

संजू: जी हाँ, बराबर जा रही हूँ । वो बोली कि सब ठीक ठाक है।

अजित उसकी जाँघ सहलाकर बोला: लड़का होगा देखना?

संजू: जो भी हो मुझे तो बस एक बच्चा चाहिए बस।

अजित उसकी जाँघ से हाथ ले जाकर उसकी बुर सहलाकर बोला: हाँ जान बच्चा तो निकलेगा ही यहाँ से ।

संजू: आज सुबह सुबह गरम हो रहें हैं, क्या बात है? वह उसके लौड़े को लूँगी के ऊपर से सहला कर बोली।

अजित: अरे तुम माल ही इतना बढ़िया हो जो लौड़े को खड़ा कर दे। चलो आज सुबह सुबह ही चुदाई कर लेते हैं। बाद में बच्चे उठ जाएँगे फिर मौक़ा नहीं मिलेगा।

संजू हँसती हुई खड़ी हुई तो उसने उसके चूतरों को दबोच लिया और ज़ोर से दबाने लगा। वह भी मस्ती में आकर चुपचाप खड़ी रही और मज़े लेती रही।

फिर दोनों बेडरूम की ओर चल दिए।

लगभग इसी समय महक की नींद खुली , उसे ज़ोर की पेशाब लगी थी। वह बाथरूम से निपटकर बाहर आइ और फिर उसे प्यास लगी तो वह किचन में जाकर पानी पीकर अपने कमरे में जाने लगी तब अचानक उसे एक औरत के हँसने की आवाज़ आइ । वह रुकी और पलट कर वापस अपने पापा के कमरे की ओर गयी । तभी उसे अंदर से उइइइइइइइ की आवाज़ आयी तो वह हैरान होकर खिड़की से अंदर झाँकी। उसकी आँखें फटी की फटी रह गयीं। अंदर उनकी नौकसंजू संजू पूरी नंगी बिस्तर पर घोड़ी बनी हुई थी और उसके पीछे उसके पापा ज़मीन में खड़े होकर उसकी बुर में अपना मोटा और लम्बा लौड़ा डालकर उसे बुरी तरह से चोद रहे थे और उसकी लटकी हुई चूचियाँ मसल रहे थे।

महक की आँखें पापा के लौड़े से, जो कि संजू की बुर के अंदर बाहर हो रहा था, हट ही नहीं पा रही थी। पापा का लंड पूरा गीला सा होकर चमक रहा था। संजू की घुटी हुई चीख़ें गूँज
रही थीं। उइइइइइइइ आऽऽऽऽह और जोओओओओओओओर से चोओओओओओओओओदो । मैं गईइइइइइइइइइइ। ।अब अजित भी ह्म्म्म्म्म्म्म कहकर झड़ने लगा और जब वह अपना लौड़ा वहाँ से निकाला तो महक की जैसे साँस ही रुक गयी। क्या मस्त लौड़ा था और पूरा काम रस से भीगा हुआ और अभी भी पूरी तरह खड़ा था। मोटे सुपाडे पर अभी भी गीली बूँदें चमक रही थीं। तभी संजू उठी और उसके लौड़े को चाटकर साफ़ करने लगी। जैसे आख़िरी बूँद भी निचोड़ कर पी जाएगी।

महक की बुर पूरी गीली हो चुकी थी और उसका हाथ अपने आप ही अपनी बुर को दबाने लगा। जब संजू ने मुँह हटाया तो उसके पापा का लौड़ा अब मुरझाने लगा था। इस अवस्था में भी बहुत सेक्सी लग रहा था। कितना मोटा और लम्बा सा लटका हुआ और नीचे बड़े बड़े बॉल्ज़ भी बहुत ही कामुक लग रहे थे। महक की आँखें अपने पापा के लौड़े से जैसे हटने का नाम ही नहीं ले रही थी। अब अचानक अजित की नज़र खिड़की पर पड़ी और उसकी आँखें महक की आँखों से टकरा गयीं। महक को तो काटो ख़ून नहीं, वह वहाँ से भागकर अपने कमरे में आ गयी। उसकी छाती ऊपर नीचे हो रही थीं। उसकी बुर में भी जैसे आग लगी हुई थी। उसकी आँख के सामने बार बार पापा का मदमस्त लौड़ा आ रहा था और फिर उसे अपने पापा की आँखें याद आयीं जिन्होंने उसको झाँकते हुए देख लिया था। वह अपनी बुर में ऊँगली करने लगी।

उधर अजित भी महक को उनकी चुदाई देखते हुए देखकर हड़बड़ा गया। उसे बड़ी शर्म आयी कि महक ने उसे संजू के साथ इस अवस्था में देख लिया। पर उसे एक बात की हैरानी थी कि वह उसके लौड़े को इतनी प्यासी निगाहों से क्यों देख रही थी। आख़िर वो शादी शुदा थी और उसके पति का लौड़ा उसे मज़ा देता ही होगा। वो थोड़ी सी उलझन में पड़ गया था। पता नहीं अपनी बेटी से नज़रें कैसे मिलूँगा, वह सोचा। संजू भी थोड़ी परेशान थी। अजित ने कहा: संजू मैं सम्भाल लूँगा , तुम परेशान मत हो।

संजू सिर हिलाकर किचन में जाकर अपने काम में लग गयी।क़रीब एक घंटे के बाद अजित ड्रॉइंग रूम में सोफ़े पर बैठा और चाय माँगा। तभी आकाश बाहर आया और चाय माँगा। दोनो बाप बेटे चाय पी रहे थे। आकाश: पापा , दीदी अभी तक नहीं उठी? मैं उसे उठाता हूँ।
अजित: ठीक है जाओ उठा दो।

आकाश महक के कमरे में जाकर सोई हुई दीदी को उठाने अंदर पहुँचा। महक अपनी बुर झाड़कर फिर से सो गयी थी। वो करवट में सो रही थी और उसकी बड़ी सी गाँड़ देखकर आकाश के लौड़े में हलचल होने लगी। वह सामने से आकर बोला: दीदी, उठो ना सुबह हो गयी है। महक ने एक क़ातिल अंगड़ाई ली और उसके बड़े बड़े बूब्ज़ जैसे नायटी से बाहर आने को मचल से गए। अब उसके आधे नंगे बूब्ज़ नायटी से बाहर आकर अजित को पागल कर दिए। उसका लौड़ा पूरा खड़ा हो गया। वह अपने लौड़े को छुपाकर बोला: चलिए अब उठिए, पापा इंतज़ार कर रहे हैं।

महक: आऽऽऽऽह अच्छा आती हूँ। तू चल।

आकाश अपने लौड़े को छुपाकर जैसे तैसे बाहर आया और सोफ़े में बैठकर चाय पीने लगा। उसे अपने आप पर ग्लानि हो रही थी कि वह अपनी दीदी के बदन को ऐसी नज़र से देखा । तभी महक आयी और संजू उसे भी चाय दे गयी। संजू महक से आँखें नहीं मिला पा रही थी। अजित ने भी महक को देखा और बोला: (झेंप कर) गुड मॉर्निंग बेटा ।

महक ने ऐसा दिखाया जैसे कुछ हुआ ही नहीं, और बोली: गुड मोर्निंग पापा।

फिर सब चाय पीने लगे और शादी की डिटेल्ज़ डिस्कस करने लगे। फिर आकाश तैयार होकर दुकान चला गया। संजू भी खाना बना कर चली गयी।

अजित: बेटी, ज़ेवरों को आज सुनार के यहाँ पोलिश करने देना है। चलो ज़ेवर पसंद कर लो, जो तुम पहनोगी।

महक पापा के साथ उनके कमरे में पहुँची और अजित ने तिजोरी खोलकर गहने निकाले और महक उनमें से कुछ पसंद की और अपनी मम्मी को याद करके रोने लगी। अजित ने उसके कंधे पर हाथ रखा और उसे चुप कराने लगा।

महक: पापा इन गहनों को देखकर मम्मी की याद आ गयी। पापा, आपको उनकी याद नहीं आती?

अजित: ऐसा क्यों बोल रही हो बेटी, उसकी याद तो हमेशा आती है।

महक: इसलिए आज आप संजू के साथ वो सब कर रहे थे?

अजित थोड़ा परेशान होकर बोला: बेटी, तुम्हारी मम्मी को याद करता हूँ, मिस भी करता हूँ। पर बेटी, ये शरीर भी तो बहुत कुछ माँगता है , उसका क्या करूँ ?

महक: पर पापा, वो एक नौकसंजू है, आपको बीमारी दे सकती है, पता नहीं किस किस के साथ करवाती होगी?

अजित: नहीं बेटी, संजू बहुत अच्छी लड़की है, वो मेरे सिवाय सिर अपने पति से ही चुद– मतलब करवाती है। इस शरीर की प्यास बुझाने के लिए मैं रँडी के पास तो नहीं गया।

महक: आपको कैसे पता? हो सकता है वो झूठ बोल रही हो।

अजित: बेटी, अब तुमसे क्या छुपाना? दरअसल उसका पति उसको माँ नहीं बना पा रहा था तो मैंने उसे वादा किया कि मैं उसे एक महीने में ही गारण्टी से मॉ बना दूँगा। इसीलिए वो मेरे साथ करवाने के लिए राज़ी हुई।

महक: ओह, तो क्या वो प्रेगनेंट हो गयी?

अजित: हाँ बेटी, वादे के अनुसार एक महीने में ही वो प्रेगनेंट हो गयी। वो अब जल्दी ही माँ बनेगी।

महक की आँखों के सामने पापा का बड़ा सा लौड़ा और बड़े बड़े बॉल्ज़ घूम गए। वह सोचने लगी कि इतना मर्दाना हथियार और ऐसे बड़े बॉल्ज़ की चुदाई से बच्चा तो होगा ही।
महक: ओह, पर उसके मर्द को तो शक नहीं होगा ना?

अजित : उसे कैसे शक होगा क्योंकि वह तो उसको हफ़्ते में एक दो बार चो- मतलब कर ही रहा था ना। वो तो यही सोचेगा ना कि उसकी चुदा- मतलब उसका ही बच्चा है वो।

महक देख रही थी कि पापा चुदायी और चोदने जैसे शब्द का उपयोग करने की कोशिश कर रहे थे। वह अब उत्तेजित होने लगी थी।

तभी अजित ने एक अजीब बात बोली: एक बात और संजू के पति का हथियार बहुत छोटा और कमज़ोर है और वह उसे बिस्तर पर संतुष्ट भी नहीं कर पाता।

महक की बुर अब गीली होने लगी थी। बातें अब अश्लीलता की हद पार कर रहीं थीं। वह बोली: ओह । और शर्म से लाल हो गयी। उसकी आँख अब अचानक पापा की लूँगी पर गयी तो वहाँ एक तंबू देखकर वह बहुत हैरान रह गयी। वह समझ गयी कि पापा भी उत्तेजित हो चले हैं। उसे बड़ा अजीब लग रहा था कि बाप बेटी की बातें अब इतनी बेशर्म हो गयीं थीं कि वह दोनों उत्तेजित हो चुके थे।

महक ने बात बदलने का सोचा और बोली: ओह अच्छा चलिए मैं ये ज़ेवर पहनूँगी , इसे ही पोलिश करवा लेती हूँ।

अजित : ठीक है बेटी। पर तुम मुझसे नाराज़ तो नहीं हो? मेरे और संजू के बारे में जान कर।

महक : पापा आप बड़े हैं और अपना अच्छा बुरा समझ सकते हैं। इसलिए आपको जो सही लगता है वह करो। पर एक बात है चांदनी के इस घर में आने के बाद यह सब कैसे करेंगे संजू के साथ?

अजित : बेटी सब मैनिज हो जाएगा। तब की तब देखेंगे।

तभी कॉल बेल बजी। महक ने दरवाज़ा खोला । सामने संजू खड़ी थी।

महक: अरे तुम वापस आ गयी? क्या हुआ?

संजू: दीदी मेरा मोबाइल यहीं रह गया है।

महक: ओह ठीक है ले लो। वह अब सोफ़े पर बैठ गयी।

संजू किचन में जाकर मोबाइल खोजी पर उसे नहीं मिला। उसने महक से कहा: दीदी आप मिस्ड कॉल दो ना । फिर उसने नम्बर बोला।

महक ने कॉल किया और घंटी पापा के कमरे में बजी। संजू थोड़ा सा डरकर अजित के कमरे में पहुँची।

महक दौड़कर दरवाज़े के पीछे खड़ी होकर उनकी बातें सुनने लगी।

अजित: अरे संजू क्या हुआ? तुम्हारे फ़ोन की घंटी यहाँ बजी अभी।

संजू: मेरा फ़ोन यहाँ आपके कमरे में ही गिर गया है। फिर वह बिस्तर में खोजी तो उसे तकिए के नीचे मिल गया।

संजू: दीदी ने कुछ कहा क्या आपसे हमारी चुदाई के बारे में? और ये आपका फिर से खड़ा क्यों है? वह लूँगी के तंबू को देखकर बोली।

अजित अपने लौड़े को मसल कर बोला: वो महक से तुम्हारी चुदाई की बातें कर रहा था तो खड़ा हो गया।

संजू: अपनी बेटी से हमारी चुदाई की बातें कर रहे थे? हे भगवान, कितने कमीने आदमी हो आप?

अजित: अरे वो भी तो बड़े मज़े से सब पूछ रही थी।

संजू: तो अब क्या हमारी चुदाई बंद?

अजित: अरे नहीं मेरी जान, उसे कोई इतराजीवनहीं है। चल अब तू आइ है तो मेरा लौड़ा चूस दे अभी।

संजू हँसती हुई नीचे बैठी और उसकी लूँगी हटाई और उसके मोटे लौड़े पर नाक लगाकर सूंघी और बोली: आऽऽह क्या मस्त गंध है आपकी। फिर वह अपनी जीभ से उसके सुपाडे को चाटने लगी और बोली: म्म्म्म्म्म्म क्या स्वाद है। म्म्म्म्म।

अब महक से रहा नहीं गया और वह फिर से खिड़की से झाँकने लगी। अंदर का दृश्य देखकर उसकी बुर गीली होने लगी। संजू की जीभ अभी भी उसके सुपाडे पर थी। फिर वह उसके बॉल्ज़ को सूँघने लगी और फिर चाटी। महक को लगा कि वह अभी झड़ जाएगी। फिर संजू ने ज़ोर ज़ोर से उसके लौड़े को चूसना शुरू किया। महक ने देखा कि वह डीप थ्रोट दे रही थी। लगता है पापा ने उसे मस्त ट्रेन कर दिया है। क़रीब दस मिनट की चुसाई के बाद वह उसके मुँह में झड़ने लगा। उसके मुँह के साइड से गाढ़ा सा सफ़ेद रस गिर रहा था। महक की ऊँगली अपने बुर पर चली गयी और वह अपने पापा के लौड़े को एकटक देखती रही जो अब उसके मुँह से बाहर आ कर अभी भी हवा में झूल रहा था।

अब महक अपने कमरे में आकर अपनी नायटी उठायी और तीन ऊँगली डालकर अपनी बुर को रगड़ने लगी और जल्दी ही उओओइइइइइइइ कहकर झड़ गयी।

संजू के जाने के बाद अजित तैयार होकर महक से बोला: बेटी, चलो सुनार के यहाँ चलते हैं और एक बार होटेल का चक्कर भी मार लेते हैं। देखें मैनेजर को अभी भी कुछ समझना तो नहीं है।
महक: ठीक है पापा , मैं अभी तैयार होकर आती हूँ।

महक ने सोचा कि उसके सेक्सी पापा को आज अपना सेक्सी रूप दिखा ही देती हूँ। वह जब तैयार होकर आयी तो अजित की आँखें जैसे फटी सी ही रह गयीं। महक ने एक छोटा सा पारदर्शी टॉप पहना था जिसमें से उसकी ब्रा भी नज़र आ रही थी। उसके आधे बूब्ज़ नंगे ही थे। उसके पेट और कमर का हिस्सा बहुत गोरा और चिकना सा नज़र आ रहा था। नीचे उसने एक मिनी स्कर्ट पहनी थी जिसमें से उसकी गदराई हुई गोल गोल चिकनी जाँघें घुटनो से भी काफ़ी ऊपर तक नज़र आ रही थीं।

अजित: बेटी, आज लगता है अमेरिकन कपड़े पहन ली हो।

महक: जी पापा, सोचा आज कुछ नया पहनूँ। कैसी लग रही हूँ?

अजित को अपना गला सूखता सा महसूस हुआ। वह बोला: बहुत प्यारी लग रही हो।

महक हँसते हुए: सिर्फ़ प्यारी सेक्सी नहीं?

अजित: अरे हाँ सेक्सी भी लग रही हो। अब चलें।

महक: चलिए । कहकर आगे चलने लगी। पीछे से अजित उसके उभारों को देखकर अपने खड़े होते लौड़े को ऐडजस्ट करते हुए चल पड़ा।
अजित कार लेकर गरॉज़ से बाहर लाया और जब महक उसकी बग़ल की सीट में बैठने के लिए अपना एक पैर उठाकर अंदर की तब अजित को अपनी प्यारी बेटी की गुलाबी क़च्छी नज़र आ गयी। उसकी छोटी सी क़च्छी बस उसकी बुर को ही ढाँक रही थी। अब तो उसका लौड़ा जैसे क़ाबू के बाहर ही होने लगा। उसकी क़च्छी से उसकी बुर की फाँकें भी साफ़ दिखाई दी। अपने लौड़े को दबाके वह कार आगे बढ़ाया। महक भी अपने पापा के पैंट के उभार को देखकर बिलकुल मस्त होकर सोची कि पापा को आख़िर उसने अपने जाल में फँसाने की तैयारी शुरू कर ही दी। वह सफल भी हो रही थी। वैसे उसकी भी पैंटी थोड़ी गीली हो चली थी, पापा का तंबू देखकर।

सुनार के यहाँ काम ख़त्म करके वो दोनों होटेल में पहुँचे जहाँ शादी की पूरी फ़ंक्शन होने वाली थी। होटेल में सब लोग ख़ूबसूरत औरत को देखे जा रहे थे। अजित ने ध्यान से देखा कि क्या जवान क्या अधेड़ सभी उसको वासना भरी निगाहों से देखे जा रहे थे। अब वो दोनों रेस्तराँ के एक कोने में बैठे और मैनेजर को बुलाया । अब वो सब फ़ाइनल तैयारियों के बारे में डिस्कस करने लगे। अजित ने देखा कि मैनेजर भी महक की छातियों को घूरे जा रहा था। अजित को अचानक जलन सी होने लगी। फिर अजित का हाथ मोबाइल से टकराया और वह नीचे गिर गया। वह झुक कर उसे उठाने लगा तभी उसकी नज़र टेबल के नीचे से महक की फैली हुई जाँघों पर पड़ीं। वहाँ उसे उसकी क़च्छी दिखाई दी जो कि एक तरफ़ खिसक गयी थी और उसकी बुर एक साइड से दिख रही थी। बुर की एक फाँक दिख रही थी। वहाँ थोड़े से काले बाल भी दिखाई दे रहे थे। उसकी इच्छा हुई कि उस सुंदर सी बुर की पप्पी ले ले। पर अपने को संभाल कर वो उठा।

महक ने शैतानी मुस्कुराहट से पूछा: पापा कुछ दिखा?

अजित सकपका कर बोला: हाँ मोबाइल मिल गया। वो गिर गया था ना।

महक मुस्कुराई: अच्छा दिख गया ना ? फिर वह उठी और बोली: चलो पापा चलते हैं।

अब वो दोनों घर की ओर चले गए।

महक मन ही मन मुस्कुरा रही थी। अजित की आँखों के सामने महक की बुर की एक फाँक आ रही थी।
दोनों अपने अपने ख़यालों में गुम से थे।
शादी में अब ३ दिन बचे थे। रिश्तेदार भी आने शुरू हो गए थे। दूर और पास के भाई चचेरा, ममेरा और मौसी और ना जाने कौन कौन आए थे। अब तो किसी को भी फ़ुर्सत नहीं थी। आकाश, महक, संजू और अजित सभी बहुत व्यस्त हो गए थे ।किसी को चुदाई की याद भी नहीं आ रही थी। शाम तक सभी बहुत थक जाते थे और सो जाते थे। यही हाल रूपा , राजेश और चांदनी का भी था। घर मेहमानो से पट गया था।

ख़ैर शादी का दिन भी आ ही गया। रूपा अपने परिवार के साथ होटेल में शिफ़्ट हो चुकी थी। वह सब तैयार होकर दूल्हे और बारात के आने का इंतज़ार करने लगे। चांदनी भी आज बहुत सुंदर लग रही थी,शादी के लाल जोड़े में।

उधर बारात नाचते हुए होटेल के पास आइ और आकाश के दोस्त और रिश्तेदार भी बहुत ज़ोर से नाचने लगे। आकाश फूलों से लदी कार में बैठा था । उसके सामने सभी नाच रहे थे। अजित सिक्के बरसा रहा था। महक भी भारी साड़ी में मस्ती से नाच रही थी। उसकी चिकनी बग़लें मर्दों को बहुत आकर्षित कर रही थीं। बार बार उसका पल्लू खिसक जाती थी और उसकी भारी छातियाँ देखकर मर्द लौड़े मसल रहे थे। कई लोग नाचने के बहाने उसकी गाँड़ पर हाथ भी फेर चुके थे।

जब बारात बिलकुल होटेल के सामने पहुँची तो सब ज़ोर से नाचने लगे। अब अजित भी नाचने लगा क्योंकि महक उसको खींच लायी थी । महक पसीने से भीगी हुई थी। उसकी बग़ल की ख़ुशबू अजित के नथुनों में घुसी और साथ ही उसके बड़े दूध जो नाचने से हिल रहे थे , उसे मस्त कर गए थे। फिर उसे याद आया कि उसे और भी काम हैं, तो वह आगे बढ़कर दुल्हन के परिवार से मिला। उसने रूपा को देखा तो देखता ही रह गया। क्या जँच रही थी वह आज। फिर शादी हो गयी और रात भर चली । सुबह के ५ बजे फेरे ख़त्म हुए। और आकाश रोती हुई दुल्हन लेकर अपने घर आ गया।

कई मेहमान तो उसी दिन चले गए। दिन भर महक ने चांदनी का बहुत ख़याल रखा और चांदनी ने दिन में महक के कमरे में ही आराम किया। शाम तक सभी मेहमान चले गए थे। अजित और महक ने चैन की साँस ली। आकाश और चांदनी दोपहर में आराम किए थे सो फ़्रेश थे।

महक ने एक फ़ोन लगाया और होटेल से एक आदमी आया और आकाश के कमरे को फूलों और मोमबतीयों से सजाया । सुहाग की सेज तैयार थी और महक ने ख़ुद उसे सजवाया था अपने भाई और भाभी के लिए। रात को खाना खाकर अजित ने आकाश को एक हीरे की अँगूठी दी और बोला: बेटा , ये अँगूठी बहू को मुँह दिखाई में दे देना। फिर वह अपने कमरे में चले गया। महक चांदनी को लेकर आकाश के कमरे में ले गयी और चांदनी ये सजावट देखकर बहुत शर्मा गयी । महक: चलो भाभी अब मेरे भाई के साथ सुहाग रात मनाओ। ख़ूब मज़े करो। मैं चलती हूँ, ये दूध रखा है पी लेना दोनों। ठीक है ना?

चांदनी ने उसका हाथ पकड़ लिया और बोली: दीदी रुकिए ना, मुझे डर लग रहा है।

महक: अरे पगली , इसमें काहे का डरना। आज की रात तो मज़े की रात है। आज तुम दोनों एक हो जाओगे। ख़ूब प्यार करो एक दूसरे को। अब जाऊँ?

चांदनी शर्माकर हाँ में सिर हिला दी। अब महक बाहर आइ और आकाश को बोली: जाओ अपनी दुल्हन से मिलो और दोनों एक दूसरे के हो जाओ। बेस्ट ओफ़ लक। मेरी बात याद है कि नहीं?

आकाश: जी दीदी याद है। कोशिश करूँगा कि नर्वस ना होऊँ। थोड़ा अजीब तो लग रहा है।

महक ने उसकी पीठ पर एक धौल मारी और बोली: अरे सब बढ़िया होगा, भाई मेरे,अब जाओ। और हँसती हुई अपने कमरे में चली गयी।

आकाश अब अपने कमरे में गया और वहाँ की सजावट देखकर वह भी दंग रह गया। बहुत ही रोमांटिक माहोल बना रखा था दीदी ने । उसने देखा कि चांदनी बिस्तर पर बैठी उसका इंतज़ार कर रही थी। उसने साड़ी के पल्लू से घूँघट सा भी बना रखा था। बिलकुल फ़िल्मी अन्दाज़ में ।

वह बिस्तर पर बैठा और जेब से वो हीरे की अँगूठी निकाली और फिर प्यार से बोला: चांदनी, मेरी जान मुखड़ा तो दिखाओ। ये कहते हुए उसने घूँघट उठा दिया और उसके सामने चांदनी का गोरा चाँद सा मुखड़ा था। वो उसे मंत्रमुग्ध सा देखता रह गया और फिर उसने उसे अँगूठी पहनाई। वह बहुत ख़ुश हुई और थैंक्स बोली।

आकाश: अब तुम बताओ तुम मुझे क्या गिफ़्ट दोगी ?

चांदनी: मैंने आपका घूँघट थोड़े उठाया है जो मैं आपको गिफ़्ट दूँ। यह कहकर वह मुस्कुराई । आकाश भी हँसने लगा।
अब आकाश उसे देखते हुए बोला: चांदनी, वैसे एक गिफ़्ट तो दे ही सकती हो?

चांदनी: वो क्या?

आकाश ने अपने होंठों पर ऊँगली रखी और बोला: एक पप्पी अपने कोमल होठों की।

चांदनी शरारत से मुस्कुराकर बोली: पहली बात कि आपको कैसे पता कि मेरे होंठ कोमल हैं? और फिर क्या सिर्फ़ एक पप्पी लेंगे? वो भी सुहाग रात में?

दोनों ज़ोर से हँसने लगे। अब आकाश ने चांदनी को पकड़ा और ख़ुद बिस्तर पर लुढ़क गया और साथ में उसे भी अपने ऊपर लिटा लिया। अब दोनों के होंठ आमने सामने थे।
अब आकाश ने चांदनी के होंठ का एक हल्के से चुम्बन लिया। चांदनी हँसकर बोली: चलो हो गया आज का कोटा और मेरी रिटर्न गिफ़्ट भी आपको मिल गयी। यह कहकर वह पलटी और उसके बग़ल में लेट गयी। अब आकाश ने उसको अपनी बाहों में भरा और उसको अपने से चिपका लिया।

फिर दोनों ने ख़ूब सारी बातें की। स्कूल , कॉलेज , दोस्तों और रिश्तेदारों के बारे में भी एक दूसरे से बहुत कुछ शेयर किया। इस बीच में दोनों एक दूसरे के बदन पर हाथ भी फेर रहे थे। आकाश के हाथ उसकी नरम कलाइयों और पीठ पर थे। चांदनी के हाथ आकाश की बाहों की मछलियों पर और उसकी छाती पर थे।

बातें करते हुए ११ बज गए और चांदनी ने एक उबासी ली। आकाश: नींद आ रही है जानू?

चांदनी: आ रही है तो क्या सोने दोगे?

आकाश: सोना चाहोगी तो ज़रूर सोने दूँगा।

चांदनी: और सुबह सब पूछेंगे कि सुहागरत कैसी रही तो क्या बोलेंगे?

आकाश : कह देंगे मस्त रही और क्या?
चांदनी: याने कि झूठ बोलेंगे?

आकाश: इसमें झूठ क्या है। मुझे तो तुमसे बात करके बहुत मज़ा आया। तुम्हारी तुम जानो।

चांदनी: मुझे भी बहुत अच्छा लगा। फिर वह आँखें मटका कर के बोली: वैसे अभी नींद नहीं आ रही है। आप चाहो तो कल आपको झूठ नहीं बोलना पड़ेगा।

आकाश हंस पड़ा और उसको अपनी बाहों में भर कर उसके गाल चूम लिया। वह भी अब मज़े के मूड में आ चुकी थी सो उसने भी उसके गाल चूम लिए। अब आकाश उसके गाल, आँखें, और नाक भी चूमा। फिर उसने अपने होंठ उसके होंठ पर रखे और चूमने लगा। जल्दी ही दोनों गरम होने लगे। अब उसने चांदनी की गरदन भी चुमी और नीचे आकर उसके पल्लू को हटाया और ब्लाउस में कसे उसके कबूतरों के बाहर निकले हुए हिस्से को चूमने लगा।

चांदनी भी मस्ती से उसके गरदन को चूम रही थी। अब उसे अपनी जाँघ पर उसका डंडा गड़ रहा था। उसकी बुर गीली होने लगी और ब्रा के अंदर उसके निपल तन कर खड़े हो गए। वह अब उससे ज़ोर से चिपकने लगी। अब आकाश बोला: जानू, ब्लाउस उतार दूँ।

चांदनी हँसकर: अगर नहीं कहूँगी तो नहीं उतारेंगे?

आकाश हँसते हुए उसके ब्लाउस का हुक खोला। और अब ब्रा में कसे हुए दूध उसके सामने थे । वह उनको चूमता चला गया। उधर चांदनी उसकी क़मीज़ के बटन खोल रही थी। अब उसके हाथ उसकी बालों से भारी मर्दानी छाती को सहला रहे थे। आकाश उठा और अपनी क़मीज़ उतार दिया। फिर वह उसकी साड़ी को पेट के पास से ढीला किया और चांदनी ने अपनी कमर उठाकर उसको साड़ी निकालने में मदद की। अब वह सिर्फ़ पेटिकोट और ब्रा में थी। उसका दूधिया गोरा जवान बदन हल्की रौशनी में चमक रहा था। अब आकाश उसके पेट को चूमने हुए उसकी कमर तक आया और फिर उसने उसके पेटिकोट का भी नाड़ा खोल दिया।अब फिर से चांदनी ने अपनी कमर उठाई और पेटिकोट भी उतर गया। अब चांदनी की गोरी गदराई हुई मस्त गोल भरी हुई जाँघें उसकी आँखों के सामने थे। उफ़ क्या चिकनी जाँघें थीं। उनके बीच में पतली सी गुलाबी पैंटी जैसे ग़ज़ब ढा रही थी। पैंटी में से उसकी फूली हुई बुर बहुत मस्त नज़र आ रही थी। अब आकाश बिस्तर से उठकर नीचे आया और अपनी पैंट भी उतार दिया। चड्डी में उसका फूला हुआ लौड़ा बहुत ही बड़ा और एक तरफ़ को डंडे की तरह अकड़ा हुआ दिख रहा था। चांदनी अब उसे देखकर डर भी गयी थी और उत्तेजित भी हो रही थी।

आकाश अब फिर से उसके ऊपर आया और उसके होंठ चूमने लगा। तभी उसे याद आया कि मंगेश कैसे नर्गिस के मुँह में अपनी जीभ डाल रहा था। उसने भी अपनी जीभ चांदनी के मुँह में डाली और चांदनी को भी अपनी मम्मी की याद आयी कि कैसे वो ताऊजी की जीभ चूस रही थीं। वह भी वैसे ही आकाश की जीभ चूसने लगी। अब आकाश ने अपना मुँह खोला। चांदनी समझ गई कि वह उसकी जीभ माँग रहा है। उसने थोड़ा सा झिझकते हुए अपनी जीभ उसके मुँह में दे दी और आकाश उसकी जीभ चूसने लगा। उफफफफ क्या फ़ीलिंग़स थी। चांदनी पूरी गीली हो चुकी थी।

अब आकाश ने उसकी ब्रा खोलने की कोशिश की, पर खोल नहीं पाया। वह बोला: ये कैसे खुलता है? मुझसे तो खुल ही नहीं रहा है।

चांदनी मुस्कुराती हुई बोली: सीख जाएँगे आप जल्दी ही। चलिए मैं खोल देती हूँ। फिर वह अपना हाथ पीछे लेज़ाकर ब्रा खोली और लेट गयी। अभी भी ब्रा उसकी छातियों पर ही थीं। आकाश बे ब्रा हटाया और उसकी चूचियों की सुंदरता देखकर जैसे मुग्ध सा रह गया। आऽऽऽहहह क्या चूचियाँ थीं। बिलकुल बड़े अनारों की तरह सख़्त और नरम भी। निपल्ज़ एकदम तने हुए। एकदम गोरे बड़े बड़े तने हुए दूध उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़।

आकाश उनको पंजों में दबाकर बोला: उफफफफ जानू क्या मस्त चूचियाँ हैं। आऽऽऽह क्या बड़ी बड़ी हैं।

चांदनी हँसकर बोली: आऽऽऽह बस आपके लिए ही इतने दिन सम्भाल के रखे हैं और इतने बड़े किए हैं।

आकाश मुस्कुराकर: थैंक्स जानू, आह क्या मस्त चूचियाँ हैं। मज़ा आ रहा है दबाने में। अब चूसने का मन कर रहा है।

चांदनी: आऽऽऽह चूसिए ना , आपका माल है, जो करना है करिए। हाऽऽय्यय मस्त लग रहा है जी।

अब आकाश एक चूची दबा रहा था और एक मुँह में लेकर चूस रहा था। चांदनी अब खुलकर आऽऽह चिल्ला रही थी।
आकाश भी मस्ती से बारी बारी से चूचि चूसे जा रहा था। अब वो अपना लौड़ा चड्डी के ऊपर से उसकी जाँघ से रगड़ रहा था। चांदनी के हाथ उसकी पीठ पर थे। अब आकाश उसके पेट को चूमते हुए उसकी गहरी नाभि में जीभ घुमाने लगा। फिर नीचे जाकर उसकी पैंटी को धीरे से नीचे खिसकाने लगा। चांदनी की चिकनी फूली हुई बुर उसके सामने थी और अब चांदनी ने भी अपनी कमर उठाकर आकाश को पैंटी निकालने में सहायता की। आकाश बुर को पास से देखते हुए वहाँ हथेली रखकर सहलाने लगा। बुर पनियायी हुई थी। यह उसकी ज़िन्दगी की पहली बुर थी जिसे वो सहला रहा था।

आकाश ने उसकी फाँकों को अलग किया और अंदर की गुलाबी बुर देखकर मस्त हो गया और बोला : आऽऽह क्या मस्त बुर है जानू तुम्हारी। फिर वह झुककर एक पप्पी ले लिया उसके बुर की। चांदनी सिहर उठी।वह नीचे झुक कर आकाश को देखी जो उसकी बुर को चूम रहा था। अब आकाश ने उसकी बुर में ऊँगली डाली और चांदनी का पूरा बदन सिहर उठा। वह उइइइइइइ कर उठी। अब आकाश उठा और अपनी चड्डी भी उतारकर अपना लौड़ा सहलाया। चांदनी की आँखें उसको देखकर फट सी गयीं थीं। बाप रे कितना मोटा और लम्बा है -वो सोची। अब आकाश ने उसका हाथ पकड़ा और अपना लौड़ा उसके हाथ में दे दिया। चांदनी चुपचाप उसको पकड़कर सहलाने लगी। उफफफ कितना गरम और कड़ा था वो- उसने सोचा। चांदनी ने अपनी ज़िन्दगी में पहली बार लौड़ा पकड़ा था। उसे बहुत अच्छा लगा। आकाश भी अब उसे लिटा कर उसकी जाँघें फैलाकर उनके बीच में आकर बैठा और अपना लौड़ा उसकी बुर में दबाने लगा। वह उइइइइइइ माँआऽऽऽ कह उठी। वह लौड़े को हाथ में लेकर उसकी बुर के ऊपर रगड़ने लगा। वह उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ कर उठी। अब आकाश ने उसकी फाँकों को फैलाया और उसने अपना मोटा सुपाड़ा फंसा दिया और अब हल्के से एक धक्का मारा। लौड़ा उसकी बुर की झिल्ली फाड़ता हुआ अंदर धँस गया।
चांदनी चीख़ उठी: हाय्य्य्य्य मरीइइइइइइइ।

आकाश ने फिर से धक्का मारा और अबके आधे से भी ज़्यादा लौड़ा अंदर चला गया। अब चांदनी चिल्लाई: हाऽऽऽऽऽय निकाआऽऽऽऽऽऽलो प्लीज़ निकाऽऽऽऽऽऽलो।

आकाश उसके ऊपर आकर उसके होंठ चूसने लगा और उसकी चूचियाँ भी दबाने लगा। अभी वो रुका हुआ था और उसका थोड़ा सा ही लौड़ा बाहर था बाक़ी अंदर जा चुका था। जब चांदनी थोड़ा शांत हुई और मज़े में आने लगी। तब आकाश ने आख़री धक्के से अपना पूरा लौड़ा पेल दिया। चांदनी फिर से चिहूंक उठी: उइइइइइइइइ आऽऽहहह।
आकाश अब हल्के हल्के धक्के मारने लगा जैसा उसने मंगेश को करते हुए देखा था नर्गिस के साथ। जल्दी ही चांदनी भी मस्ती में आ गयी और उन्न्न्न्न्न्न्न उन्न्न्न्न करके अपनी ख़ुशी का इजहार करने लगी। आकाश अभी भी उसके निपल और दूध को प्यार किए जा रहा था।

अब चांदनी भी अपनी टाँगे उठाकर आकाश के चूतरों के ऊपर रख दी और पूरे मज़े से चुदाई का आनंद लेने लगी। क़रीब आधे घंटे की चुदाई के बाद चांदनी चिल्लाई: उइइइइइइइ मैं तोओओओओओओओओ गयीइइइइइइइइइ। अब आकाश भी ह्म्म्म्म्म्म कहकर झड़ने लगा। दोनों अब भी एक दूसरे से चिपके हुए थे। आकाश अभी भी चांदनी को चूमे जा रहा था। वह भी उसके चुम्बन का बराबरी से जवाब दे रही थी। फिर चांदनी उठी और अपनी बुर को ध्यान से देखकर बोली: देखिए फाड़ ही दी आपने मेरी।

आकाश उठकर उसकी बुर का मुआयना किया और बोला: मेरी जान, थोड़ा सा ही ख़ून निकला है। अभी ठीक हो जाएगा। चलो बाथरूम में ,में साफ़ कर देता हूँ।

चांदनी: वाह पहले फाड़ेंगे, फिर इलाज करेंगे। मैं ख़ुद साफ़ कर लूँगी। यह कह कर वो बाथरूम गयी और सफ़ाई करके वापस आ गयी। फिर आकाश भी फ़्रेश होकर आया और चांदनी ने उसके लटके हुए लौड़े को पकड़कर कहा: बाप रे कितना बड़ा है। पूरी फाड़ दी इसने तो मेरी।

आकाश: बेचारे ने तुम्हारी इतनी सेवा की और तुम इसे प्यार ही नहीं कर रही हो।

चांदनी को याद आया कि उसकी मम्मी कैसे ताऊजी का लौड़ा चूस रही थीं। वो आकाश के लौड़े को देखी और झुककर उसकी एक पप्पी ले ली। फिर उसने उसके सुपाडे को भी चूम लिया। आकाश का पूरा बदन जैसे सिहर उठा। आह क्या मस्त लगा था। उसे दीदी की कही हुई बात याद आ गयी कि ओरल सेक्स तो लड़का और लड़की की मर्ज़ी पर निर्भर करता है। यहाँ तो लगता है कि इसमें कोई दिक़्क़त नहीं होगी। थोड़ी देर आराम करने के बाद वो दोनों एक दूसरे से नंगे ही चिपके रहे। चांदनी ने शर्म के मारे चद्दर ढाक ली थी। आकाश के हाथ अब उसके चूतरों पर फिर रहे थे।
वह बोला: आह कितने मस्त चिकने चूतर हैं तुम्हारे? दबाने में बहुत मज़ा आ रहा है।

चांदनी: आप उनको दबा रहे हो या आटा गूंद रहे हो? वो हँसने लगी।

आकाश: आह कितने बड़े हैं और मस्त चिकने हैं। उसकी उँगलियाँ अब चूतरों के दरार में जाने लगीं। अब आकाश उसकी गाँड़ और बुर के छेद को सहलाए जा रहा था। वह भी आऽऽहहह कहे जा रही थी । अब वह भी उसका लौड़ा सहलाने लगी। उसका लौड़ा उसके हाथ में बड़ा ही हुए जा रहा था। अब वह अपने अंगूठे से उसके चिकने सुपाडे को सहला कर मस्ती से भर उठी। आकाश का मुँह अब उसकी चूचियों को चूसने में व्यस्त थे। शीघ्र ही वह फिर से उसके ऊपर आकर उसके बुर में अपना लौड़ा डालकर उसकी चुदाई करने लगा। अब चांदनी की भी शर्म थोड़ी सी कम हो गयी थी। वह भी अब मज़े से उउउउउम्मम उम्म्म्म्म्म करके चुदवाने लगी।

आकाश: जानू, फ़िल्मों में लड़कियाँ अपनी कमर उठाकर चुदवाती है। तुम भी नीचे से उठाकर धक्का मारो ना।

चांदनी मस्त होकर अपनी गाँड़ उचकाइ और बोली: ऐसे?

आकाश: हाँ जानू ऐसे ही। लगातार उछालो ना।

चांदनी ने अब अपनी कमर उछाल कर चुदवाना शुरू किया। आकाश: मज़ा आ रहा है जानू?

चांदनी: हाँ जी बहुत मज़ा आ रहा है। और ज़ोर से करिए।

आकाश: क्या करूँ? बोलो ना?

चांदनी हँसकर: वही जो कर रहे हो।

आकाश: बोलो ना ज़ोर से चोदो।

चांदनी: मुझसे गंदी बात क्यों बुलवा रहे हैं आप?

आकाश: इसमें गंदा क्या है? चुदाई को चुदाई ही तो कहेंगे ना?

चांदनी: ठीक है आप चाहते हो तो यही सही। अब वह अपनी गाँड़ और ज़ोर से उछालके चुदवाने लगी और बड़बड़ाने लगी: आऽऽऽऽऽहहह और ज़ोर से चोदिए ।हाय्य्य्य्य्य कितना अच्छा लग रहा है उइओइइइइइइइ माँआऽऽऽऽ । अब वह ज़ोर ज़ोर से बड़बड़ाने लगी: उम्म्म्म्म्म्म मैं गईइइइइइइइ। अब आकाश भी ह्न्म्म्म्म्म कहकर झड़ने लगा।

जब दोनों फ़्रेश होकर लेटे थे तब आकाश बोला: जानू तुम्हें प्रेगनैन्सी का तो डर नहीं है? वरना पिल्ज़ वगेरह लेना पड़ेगा।

चांदनी: मुझे बच्चे बहुत पसंद हैं , भगवान अगर देंगे तो मुझे बहुत ख़ुशी होगी। आपका क्या ख़याल है?

आकाश: जानू जो तुमको पसंद है वो मुझे भी पसंद है। फिर वह उसे चूम लिया।

चांदनी: अब मैं कपड़े पहन लूँ? नींद आ रही है।

आकाश: एक राउंड और नहीं करोगी?

चांदनी: जी नीचे बहुत दुःख रहा है। आज अब रहने दीजिए।

आकाश: मैं दवाई लगा दूँ वहाँ नीचे। वैसे उस जगह को बुर बोलते हैं। और इसे लौड़ा कहते हैं। उसने अपना लौड़ा दिखाकर कहा।

चांदनी: आपका ये बहुत बड़ा है ना, इसीलिए इतना दुखा है मुझे। चलिए अभी सो जाते हैं।

दिर दोनों ने कपड़े पहने और एक दूसरे को किस करके सो गए।


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