चाची के घर में-2
मेरे प्यारे दोस्तो और देवियो व भाभियो, आपने पहला भाग पढ़ा तो शायद उसमे कुछ झूठ नहीं लगा होगा क्योंकि यह मेरे घर की ही सच्चाई है। अब चाची बिगड़ी हुई है तो बेटियां भी बिगड़ी ही होंगी न ....

मैं अपनी दोनों बहनों की चूत का स्वाद ले ही चुका था लेकिन मेरे मन में चाची का पिछवाड़ा देखकर कई बार यह सवाल उठता था कि "कभी चाची को चोदने का मौका मिल सकता है क्या ?"

एक दिन निशा दीदी की चुदाई करते करते मैंने कहा," दीदी, चाची जी यानि आपकी मम्मी भी अपने आपको बहुत संभाल कर रखती हैं !"

तो दीदी ने कहा," क्यूँ नहीं रखेंगी, उनका यार जो उन्हें चोदता है !"

एक दिन चाची जी को हम दोनों बहन-भाई पर शक हो गया था तो उन्होंने छोटी बहन मंजू से बाते की लेकिन मंजू ने उन्हें कुछ नहीं बताया।

अचानक मेरी किस्मत खुली, चाची को स्कूल की मीटिंग के सिलसिले में दूसरे शहर जाना था जो तीस किमी दूर था।

मेरे चाचा किसी दूसरे शहर में थे तो उन्होंने मेरी मम्मी से कहा- क्या राजू को ले जाऊँ...?

मम्मी ने इजाज़त दे दी।

मीटिंग शाम को 5 बजे ख़त्म हुई और तेज बारिश भी होने लगी थी। आखिरी बस भी जा चुकी थी। फिर चाची जी ने एक सुझाव दिया कि चलो राजू, यहाँ मेरी एक दूर की मौसी हैं, उनके घर रुकते हैं। मौसी के घर में बूढ़ी मौसी के सिवा कोई नहीं था। चाची ने भीगे कपड़े बदल लिए और सिर्फ पेटीकोट और ब्लाऊज़ में ही घूमती रही।

खाना खाकर जब सोने चले तो उनकी मौसी ने कहा- दोनों एक ही बिस्तर पर सो जायेंगे या दूसरा कमरा खोल दूँ?

लेकिन चाची ने खुद ही मन कर दिया और कहा," नहीं, यह तो मेरे पास ही सो जायेगा..."

अब तो मेरी ख़ुशी के ठिकाने नहीं थे ...क्योंकि अभी भी उन्होंने सिर्फ पेटीकोट पहना था।

लेटते ही उन्होंने उन.....आईई करना शुरू कर दिया।

मैंने पूछा- आपको क्या हुआ है?

तो उन्होंने कहा," बेटा, मैं भीग गई थी न इसलिए कमर में दर्द है। तू ऐसा कर मेरे बैग से मूव निकाल कर मेरी पीठ पर लगा दे....

मैंने जैसे ही लगाना शुरू किया वो अपने पेटीकोट का नाड़ा ढीला करते हुए बोली," बाप रे ! मर गई रे ! सुबह से पेट इतना दबा है"

और नाड़ा खोल दिया।

मैंने जैसे जैसे मूव लगाना शुरू किया मेरे स्पर्श से चाची का शरीर सिहरने लगा और धीरे धीरे उन्होंने पेटीकोट थोड़ा नीचे सरका लिया और कहा," बेटा थोड़ा हिप्स पर भी लगाना !"

और कुछ देर बाद नींद की एक्टिंग करते हुए जानबूझ कर उन्होंने पलटी मारी और अपनी चूत को खुजलाना शुरू किया।

हाय राम ! मैं तो देखकर मर ही गया," यह चूत है या घड़ियाल का मुँह? इतनी बड़ी और चौड़ी !"

खैर उन्होंने देर किये बिना आँखे खोल ली और कहा," बस कर बेटा, आ लेट जा !"

मैं पास में लेटा तो उन्होंने कहा," चल तूने बहुत सेवा कर दी, आ जा दूध पिलाती हूँ !"

और अपनी ब्रा खोल दी। इतने बड़े दूध कि दोनों हाथों में एक ही दूध आ रहा था। पहले मैं शरमाया लेकिन मैंने मौका नहीं गंवाया और मुँह लगा दिया।

फिर चाची ने कहा," इन्हें हाथ से मसल दे....."

मेरा लौड़ा अब चोदने को बेताब हो उठा था लेकिन मुझे कुछ नहीं करना पड़ा, चाची ने मेरा एक हाथ पकड़कर नीचे रख दिया और कहा," बेटा इसको सहला दे इसमें बहुत खुजली है !"

तब मैंने कहा," चाची जी यह तो बहुत गर्म है।"

तो उन्होंने गुस्सा करके कहा,"मुझे चाची मत बोल ... या तो पारुल जान कहो या सिर्फ जान कहो ...."

मैंने देखा कि इतनी गर्म चूत तो दोनों बहनों की भी नहीं थी !

छोटी छोटी झांटें हाथ में चुभ रही थी और एक मोटा सा दाना भी स्पर्श हो रहा था, मैंने कहा, "पारुल जान, यह क्या है?"

वो बोली,"यही तो सबसे बड़ी क़यामत है ....मसल दे बेटा इसे जोर से !"

चूत ने इतना एरिया घेर रखा था कि मानो इतनी जगह में दोनों हथेली रखी जा सकती हैं। अब उन्होंने एक हाथ से मेरा लौड़ा पकड़कर कहा," ऐसे ही अपनी पारुल को तड़पाएगा या इसे अन्दर भी डालेगा।"

मैं तैयार हो गया।

चाची ने कहा,"मौसी तो बरामदे में हैं और सोई हैं तू लाइट जला ले।"

उन्होंने दोनों टाँगे ऐसे खोल दी कि अब मैं उनकी चूत देखकर डर गया क्योंकि वो चूत नहीं रही थी, वो तो इतनी बड़ी भोसड़ी दिख रही थी...

मैंने अपनी दो ऊँगलियाँ अन्दर डाली तो देखा कि दो क्या पूरा हाथ डाल सकते हैं और फिर अंगूठा छोड़कर चारों ऊँगलियाँ अन्दर घुसानी शुरू कर दी और बड़बड़ाने लगा,"पारुल जान, यह इतनी बड़ी कैसे है?"

उन्होंने कहा,"बेटा इसी से तो तेरी दो मोटी मोटी बहनें निकली हैं। तो क्या बड़ी नहीं होगी? अब देर मत कर जल्दी अन्दर सरका दे ...."

मैंने अपना लौड़ा जैसे ही चाची की चूत पर टिकाया तो यह क्या ! बिना जोर लगाये ऐसे सरक गया अन्दर मानो किसी बैग में डाल दिया हो।

और फिर इतनी चिकनाई छोड़ दी थी उन्होंने कि फिसलता हुआ जा रहा था। लेकिन चाची चिल्ला रही थी, वो कह रही थी," हाईई रे मर गई रे.......यह तो इतना लम्बा है मेरे पेट में चुभ रहा है......."

और कहा," धीरे धीरे चोदो बेटा, मंहगाई का ज़माना है, इस २ इंच की चूत को जिंदगी भर चलाना है !"

कुछ ही देर में चाची ने बाहर निकाल दिया और कहा,"तू नीचे लेट जा...."

और पहले पेटीकोट उतार कर फेंक दिया। अब मेरे ऊपर आकर बैठ गई और अपनी गांड को थोड़ा ऊपर उठाकर हल्के से ही चूत के मुँह पर स्पर्श किया था कि तुरंत अन्दर प्रवेश कर गया। इस बार ज्यादा मज़ा आ रहा था ...... अब वो खुद ऊपर नीचे हो रही थीं।

" मर गई रे......तू मेरा असली बेटा क्यूँ नहीं हुआ ! वर्ना तुझसे तो रोज़ चुदवाती...."

मैंने कहा,"पारुल जान, मैं जा रहा हूँ !"

तभी उन्होंने कहा," चल तुझे दिखाती हूँ कि छोटा छिद्र क्या होता है।"

और उतर कर घोड़ी बन गई।

बाप रे ! मैंने गौर से देखा, इतनी बड़ी गांड..... इतनी गोरी और चिकनी.... लगता है अन्दर डालने की भी जरुरत नहीं ऐसे ही निकल जायेगा.....

उन्होंने कहा,"लगा अन्दर बेटा ! अब मुझे घोड़ी बनाकर चोद दे......."

मेरा लौड़ा तो चिकना हो ही रखा था, मैंने जैसे ही लगाया, मुझे लगने लगा कि आज मेरा लौड़ा छिल जायेगा क्योंकि ६-७ इंच का बड़ा लौड़ा भी छिद्र तक नहीं पहुँच रहा था, बस इतनी मोटी दरार में ही फँस गया ......और पारुल जान ने सिर्फ 2-3 धक्के ही मारने के लिए गांड आगे पीछे की थी कि मेरी पिचकारी छुट गई......और पूरा माल गांड से बाहर बहने लगा।

चाची ने फिर मुझसे वादा लिया," बेटा, मुझे हमेशा चोदोगे न....? चिंता मत करो, तुम चाहोगे तो तुम्हें निशा और मंजू की चूत भी दिला सकती हूँ। लेकिन उसके लिए पहले तुम्हें मुझे खुश करना पड़ेगा।"

वो नहीं जानती थी कि दोनों पहले ही चुद चुकी हैं....

उस रात में 3 बार मरवाई चाची ने 2 बार चूत और एक बार गांड। आजकल भी मौका मिलते ही हम हाथ मार लेते हैं।

शायद कुछ लोग मुझे गलत कहेंगे पर कन्यायें और भाभियाँ बताएँ कि मैं क्या करता? जब वो तीनों मुझे खुद ही ऑफर कर रही हैं तो... क्या मैं गलत था ? अपनी राय अवश्य भेज़ें। मैं आपके मेल का इंतज़ार करूँगा।


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