चाची के घर में
मेरे प्यारे दोस्तो, मैं आप सबके सामने अपने जीवन का एक सच्चा किस्सा बताने जा रहा हूँ। मेरा नाम राजेश है मेरी आयु 18 साल है मैं उत्तर प्रदेश से हूँ। मेरी माँ मुझे पढ़ने के लिए मेरी चाची के घर भेज देती थी क्योंकि मेरी चाची अध्यापिका हैं। उनकी दो बेटियाँ हैं जिनकी आयु मुझसे क्रमश दो और तीन साल बड़ी है। मैं दिन में भी कभी कभी उन्हीं के घर में बैठ कर पढ़ता था और रात को कभी कभी चाची वही सोने को कह देती थीं।

चाची का पड़ोस के एक अंकल के साथ चक्कर था, यह बात दोनों बहनें और मैं भी जानते थे।

एक दिन दोनों बहनें निशा और मंजू किसी सहेली के घर गई थी नोट्स लेने। मैं अकेला पढ़ रहा था तभी चाची जी नहाने चली गई और जब उन्होंने अपने कपड़े उतार दिए तो उन्हें याद आया कि गर्म पानी लेना ही भूल गई।

तो उन्होंने आवाज़ दी- बेटा राजेश, ज़रा रसोई से पानी का भगोना ला देना मुझे !

मैं पानी लेकर बाथरूम के सामने गया तो उन्होंने अपनी ब्रा भी खोल रखी थी लेकिन पेटीकोट खुला होने के कारण नीचे उनकी गांड के पास से एक गहराई दिख रही थी। इतने गोरे स्तन देखकर मैं वैसे ही रोमांचित हो चुका था लेकिन जब वो पानी लेने उठी तो उनका पेटीकोट गांड से चिपका हुआ दिख रहा था क्योंकि कपडे धो रही थी इसलिए भीग गया था नीचे से। तब मैंने सोचा कि इसीलिए पड़ोस के अंकल चाची के दीवाने हैं।

खैर अब मैं इस ताक में लग गया कि चाची कब नहाना शुरू करेगी। वो मुझे छोटा समझती थीं इसलिए उन्होंने दरवाज़ा नहीं बंद किया।

मैंने थोड़ी सी आड़ पकड़ी और निहारने लगा तो मैंने देखा कि चाची का नहाते समय अपने प्राइवेट अंगों पर खास ध्यान है, अपनी दोनों टाँगे खोलकर गुलाबी चूत की सफाई और अपनी चूचियों को रगड़ने लगी।

मुझे लग रहा था- काश ! एक बार चाची अपनी चूत मुझे भी दे दें।

लेकिन मैंने सोचा भी नहीं था कि चाची से पहले बहनों की चूत चोदने का मौका मिल जायेगा।

चाची कह देती थी- तुम भाई बहन एक साथ सो जाना।

एक दिन मैंने सोते सोते महसूस किया कि मंजू दीदी मेरी ओर से करवट बदल कर दूसरी तरफ मुँह करके अपने हाथ से अपनी चूत को खुजला रही हैं।

मैंने जानबूझ कर पीछे से अपना लौड़ा धीरे से लगा दिया। वो उस समय भी लगभग छः इंच का था। दीदी को गर्म सा लगा तो उन्होंने अपनी गांड को आगे करके मुझसे दूर कर लिया।

अब मैं बहनों की ताक में लग गया था, अब मैं किसी बहाने अपनी दोनों बहनों के वक्ष पर हाथ स्पर्श कर देता था।

एक दिन किस्मत से दीदी मुझे स्कूटी पर बिठाकर अपनी सहेली के घर गई थी। तभी उन्हें फिर अपनी गांड के पास कुछ मोटी और गरम चीज लगी।

उस दिन उनकी सहेली ने उनसे कुछ सेक्स की बातें की थी इसलिए लौटते समय वो गर्म थी, उन्होंने रास्ते में मुझे डराया और कहा- राजेश आज मम्मी को बताऊँगी कि तू बदतमीजी करता है !

मैं डर गया और हिम्मत करके बोला- दीदी, शर्मा अंकल आपकी मम्मी से इतना क्यों मिलते हैं?

दीदी ने बताया- यह बात मैं पापा को बताने वाली हूँ !

इसके बाद कोई बात नहीं हुई।

इसके बाद एक दिन बड़ी दीदी निशा बीमार थी तो चाचीजी ने उन्हें अपने कमरे में सुला लिया था। आज मैं और मंजू दीदी अकेले थे।

उस दिन मैंने महसूस किया दीदी ने मेरा हाथ अपने वक्ष से स्पर्श किया है मैंने सोचा कि शायद गलती से हुआ होगा। लेकिन जब देखा की दीदी का एक हाथ नीचे है उनकी चूत पर, तो मैंने साहस किया और सहलाने लगा।

अब दीदी ने सोचा कि क्यूँ न मौके का फायदा उठाया जाये। दीदी ने कान में कहा- राजेश उठो और जो कुछ कर रहे हो जागकर करो।

मेरी साँसें थम गई। मैं जाग गया और मैंने दीदी को चूम लिया।

दीदी ने कहा- बेबकूफ चूमना ही है तो चलो एक दूसरे के अंगों को चूमते हैं।

फिर क्या दीदी ने मेरे लौड़े पर सहलाना और चूमना शुरू किया। और बातों-बातों में सब कुछ कह डाला- राजेश, मेरी मम्मी नंबर एक की सेक्सी औरत हैं, मैंने कई बार दिन में भी उनको शर्मा अंकल से करते हुए देखा है।

मैंने पूछा- कैसे करते हैं?

तो दीदी ने तुरंत वो आसन बना लिया। वो बेड पर लेट गई और अपनी गांड बिस्तर से बाहर की तरफ कर दी और मुझसे कहा- चलो डालो अन्दर !

बाप रे ! डालना तो दूर की बात ! मैं तो आज इतनी सुन्दर और मोटी गांड पहली बार देख रहा था। मैं पागल हो चला था। अन्दर डालने के बदले पहले मैंने उनके चूतड़ों को चूमना शुरू किया लेकिन दीदी से रहा नहीं जा रहा था तो उन्होंने कहा- मेरे वीर, अब देर मत कर, जल्दी से प्यास बुझा दे।

मैंने अपना लौड़ा धीरे से दीदी की चूत के मुँह पर लगाया, तभी दीदी ने धक्का लगाया और यह क्या ! वो तुरंत अन्दर सरक गया।

मैंने पूछा- दीदी, क्या इससे पहले भी डाला है? यह तो आराम से चला गया?

तो दीदी ने कहा- यार, मम्मी को चुदते हुए जब भी देखा, मैंने इसमें कई उंगलियाँ एक साथ घुसाई हैं लेकिन अब तुम मिल गए हो न ... यह पहला मौका है जब मैंने अपने लौड़े को किसी छिद्र में घुसाया है।

मुझे स्वर्ग की अनुभूति हो रही थी, मेरे दिल में कभी यह ख्याल आ रहा था कि यह गलत है क्योंकि यह मेरी बहन है, लेकिन फिर सोचता था कि चूत नहीं देखती कि लौड़ा किसका है।

आखिर मैंने धक्के लगाने शुरू किये तो दीदी भी अपनी गांड को इधर-उधर हिलाने लगी। तभी मेरा लौड़ा बाहर निकल गया। फिर जैसे ही मैंने दोबारा लगाने के लिए छिद्र देखा तो मैं हैरान हो गया। क्योंकि इतनी पास से दोनों छिद्र आज ही देखे थे। मैंने अपनी एक ऊँगली पूरी लकीर पर फिरा दी।

दीदी तो तड़पने लगी और बोली- मेरे प्यारे भैया ! क्यूँ तड़पा रहा है अपनी बहन को ! फाड़ डाल न जल्दी से अपनी बहन की चूत ....!

मैंने जोर से धक्के लगाये तो दीदी बोलती ही रही- फाड़ दे इसे ! आज मौका है ! तूने मुझे खुश कर दिया तो कल तुझे निशा की चूत भी मारने दूंगी ! निशा और मैं दोनों रात में एक दूसरे की चूत रगड़ती हैं ! चल बना दे इस चूत का भोसड़ा, जैसा मेरी मम्मी का है...

मैंने पूछा- तुमने देखा है मम्मी का भोसड़ा ?

तो बोली- अरे दिन भर में कई बार दिख जाता है.. उन्होंने तो चुदवा चुदवा कर भट्टा बना दी अपनी चूत....! मार दे ........उईईइ ......मा ईईइ मर गई रे......राजू मैं जा रही हुईं........रोको मुझे.......

तभी मैंने भी सीत्कार भरी- दीदी, मुझे भी कुछ हो रहा है...........गया.........आआअ ......

और ज़ोरदार पिचकारी के साथ माल निकल गया।

अगली रात को किसी बहाने दोनों बहनों ने मिलकर मुझे रात को सोने के लिए रोक लिया और उस रात जो मज़ा आया वो शायद मैं जीवन भर नहीं भूल सकता क्योंकि क्या सगी बहनें इतनी बेशर्म भी हो सकती हैं?

दोनों ने मिलकर बारी-बारी चुदवाया लेकिन अपने पास बड़ी वाली ने सुलाया। बड़ी दीदी की तो चूत देखकर मैं हैरान रह गया। देखकर बिल्कुल ऐसी लग रही थी मानो भरवां करेला खोल कर रख दिया हो। इतनी बड़ी जगह घेरे हुए थी उनकी चूत। लेकिन मंजू दीदी से उनकी सख्त थी।

दोस्तो और देवियो, एक ऐसा समय भी आया कि एक दिन चाची ने भी चुदवा ही लिया मुझसे !

और आज तक चुदवाती हैं चाची और बड़ी बहन निशा।

निशा की तो शादी हो गई लेकिन वो कहती है- राजू, जो मज़ा तेरे लौड़े में आता है वो तेरे जीजू के लौड़े में भी नहीं...

चाची की चुदाई का सच दूसरी कहानी में.......

यहाँ तक कि दोनों बहनों की गांड और वक्ष की तस्वीरें भी हैं मेरे पास।


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