चाची का पुरा मजा लेता हूँ
कुछ दिन बाद मै चाचा के घर रहने के लिए आ गया। मै अब 18 साल का हो चुका था। एक साल पहिले ही मै शहर मै जरूरी कोर्स करने गया था। चाचा तो दुसरे गाव गया था। घर मे सीमा चाची, पूजा चाची और मेरे दादाजी ही थे। मेरे पिताजी कुछ महिने पहिले शहर वापस गये थे। शाम को हॉल मे टिव्ही देखते टाइम पूजा चाची ने दादाजी को गोद मे सुलाया था। दादाजी का अपने बहुओं के तरफ का बरताव बहुत ही बचकाना था। थोडी देर बाद दादाजी ने पूजा चाचीका पल्लू बाजू करके उसके एक मुम्मे को ब्लाऊजके उपर से ही मुहँ मे लिया और उसे चुसने लगे। मुझे उन सबकी ये हरकते पता थी पर मेरे सामने ही वो घडने से मेरा लंड अब उत्तेजित हो रहा था। पूजा चाचीने दादाजी से पुछा , "दुदु पिना है तुझे मेरे बच्चे ? " दादाजी ने कहा, "भुख लगी है। पिलाओ ना जल्दी। " मेरे बगल मे सीमा चाची बैठी थी। उसका एक भरा हुआ मुम्मा पल्लू से बाहर ही था। मै उसकी तरफ देखने लगा तो चाची ने हसते हुये उसका हाथ उसके उपर से फिराते हुये मुझे पुछा, "एक साल मे मेरी याद तो आयी ना तुझे? " मै बोला, "याद कैसे नही आयेगी तेरी सीमा चाची? " मे वापस दादाजी का मजा देखने लगा। पूजा चाचीने ब्लाऊजके निचले बटन खोल दिये और वो बिना उनका सर ढके उनको पिलाने लगी। मेरा लंड तो एकदम से खडा हो गया और मेरे पैंट का तंबू हो गया। वो देखकर सीमा चाची बोली, "तु तो बडा हो गया है राजू। " मुझे रहा नही गया और मे उसके पल्लू के अंदर एक हाथ डालकर उसके मुम्मो को बहुत ही हलके से दबाने लगा। सीमा चाचीको भी अच्छा लग रहा था। वो एक हाथ से मेरे तंबू को मालिश करने लगी। मे तो स्वर्ग मे पहुच गया था। थोडी देर बाद मेरा वीर्यपतन हे गया। सीमा चाचीने उसका हाथ मेरे तंबू के उपर से निकाल लिया। पर मै तो एक हाथ से उसके मुम्मो का मजा लेता रहा।


रात को सीमा चाचीने हॉलमे बिस्तर फेर दिया था । पूजा चाची दादाजी के साथ बिस्तर पर सो गयी। वो लाइट बंद करने के पहले ही अपने ब्लाऊजके बटन खोलकर दादाजी को बच्चे की तरह पिलाने लगी। ये देखकर मेरा लंड पैंट के अंदर ही खडा हो गया और मुझे चलने की भी तकलीफ होने लगी। सीमा चाची हसकर बोली, "सो जा नही तो तेरा खडे खडे ही निकल जायेगा। " मै सो गया और सीमा चाची लाईट बंद करके मेरे बगल मे सो गयी। मै उसकी तरफ मुहँ करके सोया। सीमा चाची भी अपना पल्लू पुरा हटाके मुझे बोली, "आ, हम भी मजा करते है। " मै अपने दोनो हाथो से उसके मुम्मो को कपडे उपरसे हलके से दबाने लगा। चाची बोली, "जोर से दबा। " मै जोर से दबाने लगा। फिर मै उनको दबाते हुए ही बारी बारी से चुमने लगा। मेरा लंड तो उसके चुत के ठिक पास ही घिस रहा था। मैने उसके ब्लाऊजके बटन खोल दिये और उसकी ब्रा को दोनो मुम्मो से उतार दिया। फिर मे बारी बारी से उसके भरे हुये मुम्मो को चुसने लगा। उसका दूध तो पहिले जैसा ही स्वादिष्ट था। चाची सेक्सी आवाजें निकालने लगी और बोली, "पुरा खाली कर दे। " मैने बारी बारी चुसते हुए उनको जल्दी से खाली कर दिया। अब मेरा लंड तो पैंट के बाहर आने के लिए तडप रहा था। मैने पैंट उतार दी और अंडरवेअर भी निकाल दी। पूजा चाची हमारे तरफ पीठ करके दादाजी को दूध पिलाने मे व्यस्त थी। सीमा चाचीने अपनी सारी उपर कर ली और अपनी अंडी निचे कर दी और मुझे बोली, "आ अपने चाची को चोद। " मैने चाचीको अपने निचे ले लिया और उनकी जांघे फैलाकर अपना बढा हुआ लंड उसके चुत मे घुसा दिया। चाची ने एक हाथ से मेरी छाती आपने उपर दबायी और दुसरा हाथ मेरे हीप पर रखकर जोर देने लगी। मै उसको अब जमकर चोदने लगा। चाची बोली, "बहुत दिनो से चुदी नही हूँ। आह आह " बहुत देर बाद मेरा लंड फट गया और मेरे वीर्य की नदी चाचीके चुत मे पुरी भर गयी। मै फिर भी उसको चोदता रहा। बहुत देर बाद हम दोनो थक गये और मे चाची के उपर से हट गया। पर मै अपना लंड चाचीके चुत मे रखकर ही सो गया।
दुसरे दिन हमारा टिव्ही खराब हो गया था। शाम को सीमा चाची मुझे बोली, "चल, हम पडोस की रेखा के घर टिव्ही देखने जाते है। " पूजा चाची ने हसते हुए कहा ,"तुम दोनो जाओ। मुझे ससुरजीको को पिलाना है। " मै चाची के साथ पडोस के घर गया। रेखा चाची के पती काम के कारण शहर मे रहते है इसलिए वो उनके 10 साल के भतिजे के ही साथ रहती थी। वो दोनो टिव्ही के सामने जमीन पर बैठे हुए थे। हॉल की लाइट भी बंद थी। हम भी उनके थोडे पिछे दिवार को पिठ करके बैठ गये। सीमा चाची रेखा को बोली, "हमारा टिव्ही ही बंद पड गया। " रेखा ने पुछा, "पूजा नही आयी? " सीमा चाचीने बताया, "वो ससुरजीको पिला रही है। " वो दोनों टिव्ही देखने मे व्यस्त थे। मै अंधेरे का फायदा उठाते हुए अपना दाहीना हाथ सीमा चाची के पल्लू के अंदर डालकर उसके मुम्मो को बारी बारी हलके से दबाना लगा। मै उसके निपल्स को दो उँगलियों के बिच फसाकर मसल भी रहा था। थोडी देर चाची का मजा लेने के बाद मैने अपना हाथ उसके पल्लू के अंदर से निकाल लिया और उनको बोला, "चाची मुझे पिलाओ ना। " सीमा चाची बोली, "आ। " मै उसके गोद मे लेट गया। रमेश हसते हुये बोला, "क्या राजू भैया, तु इतना बडा होकर भी अपने चाची का दूध पिता है? तुझे शरम नही आती ? " रेखा चाचीने उसे हसते हुए कहा, "अब उसको आदत ही पडी है तो वो क्या करेगा? उसमे कोई शरमाने की बात नही है। " सीमा चाचीने अपना पल्लू हटाकर उसके ब्लाऊज के निचले बटन खोल दिए और फिर मेरा सर पल्लू से ढकते हुए मुझे छोटे बच्चे जैसा पिलाने लगी। रमेश बिच बिच मे मेरे चाची को मुझे पिलाते देख रहा था। मै पुरे घंटेभर दूध पिता रहा। दूध पिलाने के बाद सीमा चाची ने ब्लाऊजके बटन लगा लिए और अपना पल्लू ठिक करते हुए मुझे बोली, "अब तुझे रातको सोते टाइम पिलाऊंगी. ठिक है? "
मेरे पिताजी वापस गाव आ गये थे। वो तो हमेशा से ही दूध के प्यासे रहते थे। दोपहर को खाना खाकर होने के बाद हम सब हॉलमे लेटकर टिव्ही देखने लगे। सीमा चाची मेरे पिताजी के बगल मे लेटी थी और वो एक हाथ से अपने सर को सपोर्ट दे के टिव्ही देख रही थी। उसने अब मॅक्सी पहनी हुई थी। पूजा चाची दादाजी को अपनी गोद मे सुलाकर दिवार को पिठ करके बैठी थी। मै तो साइड मे बैठकर टिव्ही देख रहा था। थोडी देर बाद दादाजी पूजा चाचीका पल्लू थोडा हटाकर उसका बाया मुम्मा ब्लाऊजके उपर से ही चुसने लगे। पूजा चाची हसकर उनको बोली, "दुदु चाहीये तुझे मेरे बच्चे? " दादाजी ने हा कहने पर पूजा चाची उनका सर पल्लू से ढककर उनको छोटे बच्चे जैसा पिलाने लगी। अब मेरे पिताजी को भी प्यास लगी थी। वो सीमा चाची के तरफ मुहँ करके अपने एक हाथ से उसके मुम्मो को मॅक्सी के उपरसे ही हलके से दबाने लगे। उन्होने मॅक्सीके बटन खेलने की कोशिश की पर वो खोल नही पाये। सीमा चाची हसते हुए उनको बोली, "मॅक्सीके बटन भी खोलना नही आता। और चले दूध है पिने। " पिताजी उतावले होकर बोले, "पिला ना मुझे। कब से तडप रहा हूँ दूध पिने को। " सीमा चाची बोली, "अब तो आपका बेटा भी जवान हो गया है। इतने बडे होकर भी स्तनपान करते हो। अब तो थोडी शरम रखो आप। " फिर सीमा चाची ने मॅक्सीके बटन खोल दिये और वो टिव्ही देखते देखते ही मेरे पिताजी को पिलाने लगी। उसने एक हाथ से उसका मुम्मा मेरे पिताजी के मुहँ मे पकड के रखा था। पिताजी तो बच्चे जैसे बिनदास्त होकर दूध पी रहे थे। उनके होठ मुम्मे के एरोला को पुरे ढके हुए थे। उनके लगातार चुसने से एरोला के पास का मुम्मे का भाग थोडा थोडा उपर निचे हो रहा था। सीमा चाचीने मेरे पिताजी को डाटा जरुर था पर उनके ऐसे बच्चे जैसे दूध पिने से उसको बहुत आनंद भी मिल रहा था। वो उनको दो घंटे तक पिला रही थी।
मेरे दादाजी को थोडी कमजोरी महसूस हो रही थी। इसलिए मेरी दोनो चाचीया उनको लेकर डॉक्टर के क्लिनीक मे पहुच गयी। शाम होने के कारण क्लिनीक मे बहुत पेशंट थे। कम्पोन्डर ने दादाजी को उनका नंबर देते हुए सीमा चाचीको कहा, "आप बाजूके कमरे मे वेट कर सकते है। " दोनो चाचीया दादाजी को बाजूके कमरे मे लेकर गयी। कमरे मे पहिले से ही पडोस की कुछ महिलाएँ बैठी हुइ थी। दोनो चाचीया दादाजी के साथ दिवार के पास के एक बेंच पर बैठी। सब महिलाएँ आपस मे बातचीत कर रही थी। एक महिला सीमा चाचीको बोली, "लगता है आज बहुत वेट करना पडेगा। " सीमा चाची बोली, "हा। बाहर तो बहुत ही पेशंट बैठे है। " उस महिला ने पुछा, "क्या हुआ आपके ससुरजीको? " सीमा चाची बोली, "यही थोडी कमजोरी है उनको। लगता है सलाइन लगानी पडेगी। " दो मिनट बाद डॉक्टर महिला पडदा हटाकर कमरे मे आ गयी। उसने सीमा चाचीको पुछा, "क्या हुआ है आपके ससुरजीको? " उसने बताया, "उनको थोडी कमजोरी है। " डॉक्टर उसको बोली, "अब बुढापे मे कभी कभी उनको कमजोरी तो आती ही रहेगी। उनको सलाइन की कोई जरुरत नही। बस रोज उनको अपना दूध पिलाया करो। " सीमा चाची बोली, "ठिक है। " डॉक्टरने कहा, "तो आप अब उनको स्तनपान करो। मै दो घंटे बाद उनको चेक करने आऊंगी। " डॉक्टर उसके केबिन मे वापस चली गयी। सीमा चाचीने दादाजी को कहा, "आओ मेरे बच्चे, डॉक्टर ने तुझे दुदु पिलाने कहा है ना । " दादाजी उसके गोद मे लेट गये। एक महिला हसते हुए बोली, "कितना खयाल रखती हो तुम अपने ससुरजी का । और वो भी तेरे बच्चे जैसा बरताव करते है. " सीमा चाचीने कहा, "मेरे बच्चे जैसा बरताव तो करेंगे ही ना वो। मेरा दूध जो पिते है रोज। " सब महिला मेरे चाचीयो के साथ हस रही थी। सीमा चाचीने उसका पल्लू बाजू करके उसके ब्लाऊज के निचले बटन खोल दिए। फिर वो दादाजी का सर पल्लू से ढककर उनको दूध पिलाने लगी। उनको पिलाते पिलाते वो बाकी महिलाओं के साथ बाते भी कर रही थी। दो घंटे बाद डॉक्टर पडदा हटाकर कमरे मे आ गयी । सीमा चाची अपना पल्लू दादाजी के सर से हटाते हुए उनको बोली, "चलो छोडो अब। डॉक्टर चेक करने आ गयी है ना? " उसने एक हाथ से अपना मुम्मा हलके से दादाजी के मुहँ से निकालने की कोशिश की। पर वो उसके सुडौल मुम्मे का निपल और पुरा एरोला मुहँ मे लेकर छोटे बच्चे जैसे चूस रहे थे। दादाजी का पुरा ध्यान दूध पिने मे ही व्यस्त था। डॉक्टर सामने वाले बेंच पर बैठते हुए हसकर बोली, "पिने दो ना उनको।" दादाजी और दस मिनट तक पिते रहे। सीमा चाचीने दूध खतम होते ही उसका मुम्मा उनके मुहँ से निकाल लिया और उनको बोली, "अब तुझे बाद मे पूजा पिलाएगी । ठिक है? " सीमा चाचीने अपने ब्लाऊजके बटन बंद कर दिये और पल्लू भी ठिक कर लिया। डॉक्टरने दादाजी को चेक करके उनको देने के लिए कुछ दवाईया भी दी। फिर वो अपने केबिन मे चली गयी। अब कमरे मे मेरे चाचीयो के अलावा दो महिलाएं ही थी। पूजा चाची ने दादाजी को अपने गोद मे सुलाया और उनको बोली, "अब दवाईया भी लेनी है ना तुझे? फिर तुझे दुदु तो पिना ही पडेगा। " और वो भी उनको अपना दूध पिलाने लगी। दादाजी को स्तनपान करने का आनंद पूजा चाचीके चेहरे पे साफ दिख रहा था।
मेरा चाचा घर आया था। शाम को सब टिव्ही देख रहे थे। पूजा चाचीे पहले सेे ही दादाजी को गोद मे सुलाकर उनको अपने बच्चे जैसा स्तनपान कर रही थी। थोडी देर बाद मेरे पिताजी सीमा चाचीके पास गये और बिना बताये ही उसके गोद मे लेट गये। सीमा चाचीने उन्हे कुछ कहा नही और वो टिव्ही देखती रही। पर मेरे पिताजी का कुछ अलग ही विचार था। उन्होने सीमा चाचीका पल्लू थोडा बाजू करके उसके सुडौल बायें मुम्मे को ब्लाऊजके उपरसे ही अपने मुहँ मे लिया और उसको छोटे बच्चे जैसा चुसने लगे । सीमा चाचीने बिना उनके तरफ ध्यान देते हुए अपना मुम्मा उनके मुहँ से निकाल लिया और अपना पल्लू भी ठिक कर लिया। मेरे पिताजी ने उतावले स्वर मे उसे कहा, "पिलाओ ना। " सीमा चाची निचे उनके तरफ देखते हुए उनको बोली, "नही देवरजी, पूजा के बाद मुझे भी ससुरजी को पिलाना है। " मेरे पिताजी बोले, "तुम दोनो तो दिनभर उनको पिलाती हो। तो तू दिन मे एकबार मुझे नही पिला सकती? " सीमा चाचीने बोला, "पर डॉक्टरने तो उनको दिन मे चार बार स्तनपान करने के लिए कहा है। उनको दवाईया जो लेनी है। इसलिए मे आपको नही पिला पाऊंगी। " पर पिताजी अपने जिद पर अडे रहे। वो फिरसे उसका पल्लू बाजू करके उसका मुम्मा मुहँ मे लेकर चुसने लगे। इस बार सीमा चाचीने उनको थोडी देर तक चुसने दिया और वापस अपना मुम्मा उनके मुहँ से निकाल लिया। मेरे पिताजी अब रोने लग गये। चाचा बोला, "देखा? अब तुने बडे भैया को रुला दिया। एक बार उसे पिला देती थी तो क्या बिगड़ जाता? अब तुम ही मनाओ उनको । " आखिर मे सीमा चाचीने हार मान ली। अपने पल्लू को हटाकर ब्लाऊजके निचले बटन खोलते हुए उसने मेरे पिताजी को कहा, "अब आपको पिला रही हूँ। पर कल से ससुरजी का पेट पुरा भरने के बाद ही आपको पिलाऊंगी। ठिक है? " उन्होने अपने आसू पोछते हुए हा कर दी। फिर सीमा चाची उनका सर पल्लू से ढककर उनको अपना दूध पिलाने लगी। मेरे पिताजी दो दिन के भुखे आदमी की तरह ही पी रहे थे । वो सीमा चाची का मुम्मा चुसते हुए थोडा हिल झुल रहे थे और उसके पल्लू के निचे से उनके चुसने का आवाज भी हॉलमे सबको सुनाई दे रहा था। सीमा चाची ने उसका दायां हाथ पल्लू के निचे डालकर अपना मुम्मा मेरे पिताजी के मुहँ मे पकड रखा था। ये देखकर चाचा हसते हुए ऐसे ही बोला, "बच्चे कही के। "
रात को हॉल मे सीमा चाची ने जमीन पर बिस्तर फेर देने के बाद दादाजी उसपर लेट गये। सीमा चाची उनके ही पास बैठकर पूजा चाची से बाते कर रही थी। थोडी देर बाद दादाजी ने सीमा चाचीसे कहा, "दुदु पिलाओ ना। " वो हसते हुए बोली, "लगता है आज तुझे बहुत ही जल्दी भुख लगी है। पर हम दोनो ने तुझे शाम को पिलाया था ना? " दादाजी बोले, "हा। पर अब मैने दवाई पी ली तो मेरे जीभ बहुत ही कडवी हो गयी है। अब मुझे जल्दी से अपना दूध पिलाके मेरे मुहँ का कडवापन दूर कर दो। " सीमा चाची ने हसते हुए अपना पल्लू पुरा हटा दिया और ब्लाऊजके उपरी तीन बटन खोल दिए। हॉल की लाइट चालू ही थी। वो दादाजी के तरफ मुहँ करके सो गयी और दादाजी को बोली, "आ। " दादाजी उसके पास खिसक गये। सीमा चाची ने अपना बायां हाथ उनके सर के निचे से उनके पीठ पर रखा और उनको अपने मुम्मो के पास ओढ लिया। उसने अपना पल्लू भी उन दोनो के बिच से उठाकर अपने पिछे डाल दिया। दादाजी उसके भरे हुए मुम्मे भुखे बच्चे जैसे देख रहे थे। फिर चाचीने अपना ब्लाऊज बायें साइड से निचे किया और अपने ससुर को वो दूध पिलाने लगी। दादाजी ने मुहँ से उसके निपल और एरोला को लॅच किया था और वो बहुत ही हलके से उसे चूस रहे थे । सीमा चाचीने अपने दो ऊंगलियों से अपना मुम्मा उनके मुहँ मे पकड के रखा था। उसका बायां हाथ अभी भी दादाजी के सर के निचे से उनकी पीठ पर था। वो बहुत आनंद से अपने ससुरजीको बच्चे जैसा दूध पिते देख रही थी। दस मिनट बाद उसने पूजा चाची को लाइट बंद करने को बोला। पूजा चाची लाइट बंद करके दादाजी के दुसरे बाजू मे सो गयी और वो दोनो बाते करनी लगी। चाचा और मेरे पिताजी पहिले से ही सो गये थे। सीमा चाची और पूजा चाची बाते करते करते ही रातभर दादाजी को दूध पिला रही थी।
दूसरे दिन हमारे घर मेरे पिताजी के एक अच्छे दोस्त रमेश चाचा आये थे। वो कुछ दिन हमारे घर ही रहने वाले थे। उनकी उम्र 50 साल थी। उनके पत्नी की हाल ही मे मौत हो गयी थी और वो निसंतान थे। चाचा दुसरे गाव गया था। दोपहर को रसोईघर मे खाना खाते वक्त रमेश चाचा ने मेरे पिताजी से पुछा, "तुम्हारे पिताजी इतना कम खाना क्यू खाते है? उनको तो अब अपने सेहत का बहुत खयाल रखना चाहीये। " मेरे पिताजी शरमाते हुए बोलने लगे, "वो..." और चुप बैठ गये। सीमा चाची हसते हुए मेेेरे पिताजी को बोली, "इसमे शरमाने की क्या बात है देवरजी ? " फिर उसने रमेश चाचा से कहा, "ससुरजी को अब रोज का खाना हजम नही होता है। इसलिए हम दोनो बहुयें उनको स्तनपान करते है। " रमेश चाला हसते हुए बोले, "तुम मजाक नही ना कर रही हो? " सीमा चाचीने कहा, "मै बिलकुल मजाक नही कर रही रमेशजी । डॉक्टर ने ही ससुरजीको स्तनपान करने को कहा है। रोज दूध पी के अब उनकी तबियत भी सुधरी है। " रमेश चाचा ने मुस्कुराकर कहा, "अब डॉक्टरने ही कहा है तो आपको पिलाना ही पडेगा। " दोनो चाचीया हसने लगी। सीमा चाची हसते हुए बोली, "और हाँ, देवरजी को भी कभी कभी पिलाती हूँ। " रमेश चाचा ने मेरे पिताजी से कहा, "तेरे तो बहुत मजे चल रहे है। " मेरे पिताजी बिना कुछ कहे बहुत शरमाते हुए खाना खा रहे थे और रमेश चाचा मेरे चाचीयों के साथ खुलकर हस रहे थे।



दोपहर को रमेश चाचा हॉलमे लेट रहे थे। मेरे पिताजी खटाई पर सो गये थे। थोडी देर बाद सीमा चाची दिवार को पीठ लगा के बैठी और उसने दादाजी को कहा, "आ मेरे बच्चे, दुदु पीना है ना तुझे? " ससुरजी उसके पास गये तो उसने उनको अपने गोद मे सुलाया। रमेश चाचा मुस्कुराते हुए बोले, "वा। अब तुम अपने ससुर को बच्चा बना रही हो। " सीमा चाची हसते हुए उनको बोली, "इस वक्त वो मेरे बच्चे ही होते है। मै उनको स्तनपान जो करती हूँ। " रमेश चाचा फिरसे हसने लगे। दादाजी हलचल करने लगे तो सीमा चाची उनका सर पल्लू से ढककर उनको अपने बच्चे जैसा पिलाने लगी। रमेश चाचा थोडी देर तक उसको अपने ससुर को दूध पिलाते देख रहे थे। फिर वो सो गये।


शाम को नाश्ता करने के बाद सब हॉल मे टिव्ही देख रहे थे। एक कोने मे पूजा चाची दादाजी को गोद मे लिटाकर टिव्ही देख रही थी। सीमा चाची अकेले ही टिव्ही के सामने बैठी थी। थोडे दूर मे मेरे पिताजी बैठकर बार बार उसके बायें मुम्मे को साइड से देख रहे थे। और रमेश चाचा उसके दुसरे बाजू के दिवार को पीठ करके टिव्ही देख रहे थे। थोडी देर बाद सीमा चाचीने मेरे पिताजी को उसके मुम्मे को निहारते देखा । उसने उनको पुछा, "आज आपको दूध नही पिना है ? " मेरे पिताजी ने शरमाते हुए कुछ कहा नही। सीमा चाची हसते हुए बोली, "क्या देवरजी? कल मैने आपको पिलाने से मना कर दिया था तो आप रोने लगे । और आज जब मै पिला रही हूँ तो आप शरमा रहे हो। आओ जल्दी। नही तो मे ससुरजी को पिलादॅुंगी। " वो जानबूझकर अपने सुडौल बायें मुम्मे के उपरसे अपनी एक उँगली गोल गोल फिराने लगी। मेरे पिताजी को रहा नही गया। वो झटसे सीमा चाची के पास गये और उसने उनको अपने गोदमे लिटा दिया । सीमा चाची ने उनको बायें हाथ से सपोर्ट दिया और दायें हाथ से उनका सर पल्लूसे ढक दिया। मेरे पिताजी बच्चे जैसी हलचल करने लगे। तब सीमा चाची पल्लू के निचे हाथ डालकर उनको दूध पिलाने लगी। अब उनकी हलचल बंद हो गयी पर उनके दूध चुसने की आवाज हॉलमे सबको सुनाई दे रही थी। सीमा चाचीने हसते हुए मेरे पिताजी को ताना मारा, "बच्चे जैसा दुदु पिते रहो मेरा। ठीक है, देवरजी ? " रमेश चाचा भी उसके साथ हस रहे थे। पर मेरे पिताजी को कुछ फरक नही पडा। उनका पुरा ध्यान तो उन्होने दूध पिने मे ही एकाग्र किया था। थोडी देर बाद सीमा चाचीने हसना बंद किया और उसने भी अपना ध्यान अपने देवरजी को दूध पिलाने मे लगाया। उसको स्तनपान करने से बहुत आनंद जो मिल रहा था। वो दो घंटे तक उनको पिला रही थी। दूध खतम होने के बाद सीमा चाचीने अपना ब्लाऊज और पल्लू ठिक कर लिया और पल्लू से मेरे पिताजी का मुहँ पोछ लिया। उनको अब निंद आ रही थी इसलिए सीमा चाची उनको अपने गोदमे ही सुलाने लगी। रमेश चाचा उसे बोले, "बहुत ही लकी है मेरा दोस्त। तुम्हारे जैसी भाभी जो मिली है उसको। " सीमा चाची हसते हुए बोली, "बस बस। इतनी भी तारीफ मत करो मेरी। " थोडी देर बाद रमेश चाचाने उसको कहा , "तुम बुरा मत मानो पर एक बात पुछू क्या? " वो हसकर बोली, "पुछो ना रमेशजी ।" अब रमेश चाचाने थोडे वक्त के बाद शरमाते हुए पुछा, "मुझे भी बच्चे जैसा दूध पिलाओगी क्या? " सीमा चाचीने मुस्कुराते हुए कहा, "इतना ही ना रमेशजी। मुझे तो आप अपने घरके ही लगते हो । अब मै घरके दो लोगो को पिलाती हूँ तो फिर आपको क्यू नही पिला सकती ? " रमेश चाचा खुश हो गये और उसको बोले, "तुम्हारे जैसी भाभी जिसको मिलेगी उसकी तो सारी इच्छा पुरी हो जायेगी। "
एक दिन शाम को सीमा चाची और पूजा चाची रसोईघर मे बैठी थी। सीमा चाचीने दादाजी को अपने गोद मे लिटाया था और वो पूजा चाचीके साथ बोल रही थी। पूजा चाचीने कहा, "मेरे चाचा के बेटी रमा की शादी तिन दिन बाद है। मुझे उन्होने शादी का निमंत्रण देकर दो दिन पहिले ही बुलाया है। " सीमा चाची उसको बोली, "तो तुम जाओ ना। उनको एक ही लडकी है। उनके घर मे फिरसे शादी नही होने वाली। " पूजा चाची ने उसे कहा, "पर मुझे अकेले ट्रेन का सफर करने मे डर लगता है। तुम भी आओगी तो अच्छा होगा सीमा। " सीमा चाची बोली, "ठिक है। " ससुरजी उसके गोद मे लेटे हुए सब सुन रहे थे। उन्होने मायूस होकर पुछा, "तुम दोनो जाओगी तो मेरी सेहत का क्या होगा? " सीमा चाचीने अपना पल्लू बाजू करके दोनो हाथो से ब्लाऊजके निचले हूक खोलते हुए उनको बोला, "अब तुम तो हमेशा हमारे पास ही रहते हो ना ? तो तुझे हम साथ ही लेकर जाएँगे। " फिर वो दादाजी को इस बात पर उनकी खुशी दिखाने के पहिले ही उनको अपना दूध पिलाकर उनका मुहँ मिठा करने लगी।


पूजा चाची के रिश्तेदार के घर जाने के लिए उन तिनो ने दुसरी रात नाइट ट्रेन पकड ली। सफर को पुरी रात और दो घंटे जादा लगने वाले थे। उनको भाग्य से जो डिब्बा मिला था उसमे सिर्फ तिन महिलाएं ही बैठे हुयी मिली। उसमे से दो तो चाचीयो के उम्र की थी और एक वयस्क थी। उनकी आपस की बातों से तो वो एक ही घर की लग रही थी। रात का सफर होने के कारण सब घर से ही खाना खाकर आये थे। सबको अब ट्रेन की आवाज और खिडकी के बाहर के अँधेरे से निंद आने लगी। सीमा चाची ससुरजी को बोली, "आपने दवाईया ली है ना? तो चलो मे आपको सुला देती हूँ।" उसने वही लोवर बर्थ पर दादाजी को लिटा दिया और उनके बाजू मे बैठी रही। थोडी देर बाद दुसरी महिलाएं भी सो ने लगी। चाचीयो की उम्र की दो महिलाएं एक दुसरे के सामने वाले मिडल बर्थपर चढकर लेट गयी । वयस्क महिला सीमा चाचीे को बोली, "माफ करना हा बेटी। मेरी दो बहुयें बिमार है। उनको मै अस्पताल लेकर जा रही हूँ। इसलिए वो उपर लेट गयी है। " सीमा चाचीने हसते हुए कहा, "कोई बात नही माताजी। मे इसी बर्थपर सो जाऊँगी। " वो वयस्क महिला उसको धन्यवाद कहते हुए सामने वाली बर्थपर सो गयी। अब पूजा चाची को सो ने के लिए जगह नही थी और उसे उपरी बर्थपर तो जाना नही था इसलिए वो दादाजी के बर्थपर ही खिडकी के पास बैठ गयी क्यूँ की बर्थ लंबाई मे बडा था। सीमा चाची उसको बोली, "तुम थोडी देर बैठे हुए सो ना। मे दो घंटे बाद तुम्हे अपनी जगह पर सो ने दूँगी ।ठिक है? " पूजा चाची हसते हुए बोली, "हम दोनो मे से एक को हरवक्त ससुरजी पर वो सोते हुए ध्यान देना ही पडेगा। वो निंद मे हलचल जो करते है। गिर गये तो क्या होगा? " सीमा चाचीने उपरी बर्थपर देखा तो दोनो महिलाएं चादर अपने सर के उपर से ओढकर गहरी निंद मे सो रही थी और उन दोनो की सास खर्राटे मार रही थी। उसने हसते हुए उठकर डिब्बे की लाइट बंद कर दी और अंधेरे मे ही अपना पल्लू बाजू करके ब्लाऊजके के उपरी कुछ हूक खोलते हुए वापस अपने ससुरजीके बर्थपर बैठ गयी। ससुरजी दुसरी तरफ मुहँ करके लेट रहे थे। सीमा चाचीको पता था की वो किस चीज की राह देख रहे है। उसने उनके बाजूमे लेटकर अपना पल्लू पूरा हटा दिया। सीमा चाचीने उनके कान के पास बहुत ही धीरी आवाज मे कहा, "दुदु पिना है ना बच्चे? " फिर दादाजी उसकी तरफ पलट जाते ही वो अपना ब्लाऊज एक साइड से निचे करके उनको स्तनपान करने लगी। उनको पिलाते हुए ही सीमा चाचीने अपना बायां हाथ उनके सर के निचे रख दिया और अपना दुसरा हाथ वो उनके पीठ पर फिराने लगी । पिछे से वयस्क महिला के खर्राटे अभी भी सुनाई दे रहे थे। ट्रेन के थोडा थोडा हिलने से दादाजी को दूध पिने मे परेशानी हो रही थी इसलिए सीमा चाचीने दायें हाथ से अपना मुम्मा उनके मुहँ मे पकडकर रखा। अपने बहु का दूध पिने मे जितना मजा दादाजी को आ रहा था उससे भी सौ गुना मजा सीमा चाचीको उनको पिलाने मे आ रहा था। वो उनको ऐसे ही बच्चे की तरह दो घंटे तक पिलाती रही। दूध खतम होने के बाद सीमा चाची उठकर बैठी और उसने अपना ब्लाऊज और पल्लू ठिक कर लिया। फिर उसने पूजा चाची को उठाकर उसको दादाजी के बगल मे सो ने को कहा और खुद खिडकी के पास बैठ गयी। पूजा चाची आधी नींद मे ही अपने ससुरजी का सर पल्लू से ढककर उनको फिरसे पिलाने लगी। सीमा चाची अब खुद आँखे बंद करके सो गयी ।
सुबह पूजा के रिश्तेदार के घर पहुचने पर उनकी बेटी रमा ने सबका बहुत उत्साह से स्वागत किया। पूजा के समीर चाचा एक बहुत नेक इन्सान थे। वो ससुरजी से दस साल छोटे थे और उनके पत्नी की चार साल पहिले ही मौत हो चुकी थी। उन्होने सबका हाल पुछा और उनको एक कमरे मे अपना सामान रखने कहा। उनके घर मे पाच कमरे थे। दोनो महिलाओंने एक कमरेमें अपना सामान रख दिया और फिर उन सब ने नहा लिया। सीमा और पूजा साडीं पहनकर उनके बडे किचन मे नाश्ता करने गयी। समीर चाचा ने उनको देख कर बोला, "बहुत ही सुंदर दिख रही है आप दोनो। " वो दोनों उनका ये खुलापन देखकर हसने लगी। ससुरजी पहले से ही नाश्ता कर रहे थे। अब बाकी सब लोग भी नाश्ता करने लगे। समीर चाचा ने कहा, "मै मंदिर जा रहा हूँ। पंडित ने कुछ पुजा करने बोली है। " वो नाश्ते के बाद मंदिर चले गये। पूजा और रमा नाश्ता करके रमा के कमरे मे बाते करने गयी और उन्होने कमरे का दरवाजा बंद कर लिया। सीमा ने अपने ससुरजी को कहा, "आ बच्चे, अब कुछ सेहतमंद भी पी ले।" ससुरजी उसके गोद मे लेट गये। फिर वो उनका सर अपने पल्लू से ढककर उनको छोटे बच्चे की तरह दूध पिलाने लगी।


दोपहर को खाना खाने के बाद सब हॉलमे बैठ रहे थे। थोडी देर बाद ससुरजी को नींद आने लगी तो सीमा उनको बोली, "चलो मे आपको कमरेमें सुलाती हूँ। " समीर चाचाने हसकर पुछा, "उनको सुलाना पडता है? वो बच्चे है क्या? " सीमा ने उन्हे कहा, "अब उनकी उम्र हो गयी है तो मुझे उनका बच्चे जैसा ही खयाल रखना पडेगा ना? " वो बोले, "ये बात तो तुने सही कही है। " सीमा अपने ससुरजी को लेकर अपने कमरे मे गयी। ये कमरा हॉल से बहुत दूर था। उसने उनको बेड पर लिटा दिया और दरवाजा खुला ही छोडकर उनके बगल मे दरवाजे को पीठ करके सो गयी। सीमा ने अपने ससुरजी को पुछा , "दुदु पीना है ना बच्चे ? " ससुरजी उसकी तरफ मुहँ करके बोले, "तेरा दूध पिने के बगैर मुझे अच्छा ही नही लगता। " सीमा ने अपना बायां हाथ उनके सर के निचे रखा। फिर वो अपना पल्लू साइड करके ब्लाऊजके बटन खोलकर उनको स्तनपान करने लगी। वो सीमा के निपल और एरोला को अपने ओठों मे लॅच करके धीरे धीरे चुस रहे थे। वो अपने ससुरजी को बोली, "पी बच्चे, सब दुदु पी जा । " उनको बच्चे की तरह अपना दूध पीता देख उसे बहुत सुख मिल रखा था। दो घंटे बाद वो पिते पिते ही सो गये। सीमा अपने ब्लाऊज सीधा करते हुए उनके बगल मे ही सो गयी।
शाम को समीर चाचा सीमा और उसके ससुरजी को नाश्ते को बुलाने उनके कमरे के बाहर आ गये। उन्होने सीमा को बाहर से ही आवाज दी। सीमा ने निंद से जगते हुए उनके सामने ही अपने ब्लाऊजके खुले हुए बटन लगा लिए और पल्लू भी ठिक कर लिया। समीर चाचा को बहुत आश्चर्य हुआ पर उन्होने कुछ नही कहा। सीमा ने उनकी तरफ हसते हुए देखा और अपने ससुरजी को जगाने लगी। किचन मे नाश्ता करते वक्त समीर चाचा बिच बिच मे उसके मुम्मो को देख रहे थे। फिरभी वो बिनदास्त हो कर उनके सामने नाश्ता कर रही थी।
रात को खाना खाने के बाद पूजा रमा के साथ उसके कमरे मे सो ने गयी। अब हॉल मे सिर्फ सीमा अपने ससुरजी के साथ जमीन पर बैठे टिव्ही देख रही थी। थोडी देर बाद समीर चाचा भी टिव्ही देखने आये । सीमा ने हसते हुए पुछा, "आपको निंद नही आ रही? " उन्होंने कहा, "परसों मेरे इकलौती बेटी की शादी है ।मुझे निंद कैसे आ सकती है ? " अपने ससुर को निंद आने लगते ही सीमा ने उनको गोद मे लिटा दिया। वो उनको हिला हिला कर सुला रही थी और उसका एक मुम्मा पल्लू से ढका हुआ नही था। यह देखकर चाचाजी को रहा नही गया और उन्होने उसे पुछा, "तुने दोपहर को अपने ससुर के बगल मे सोते हुए अपना ब्लाऊज क्यू खोला था? " सीमा हसते हुए बोली, "वो मे उनको अपना दूध पिला रही थी ना इसलिए। " समीर दादाजी हसते हुए बोले, "तुम मजाक कर रही हो ना? " सीमा चाचीने कहा, "नही चाचाजी। हमारे गाव के डॉक्टर महिलाने ही उनको रोज स्तनपान करने कहा है। उनको रोज पिलाकर उनकी सेहत भी अभी सुधरी है। " समीर दादाजी ने कहा, "वा! उनको दूध पिते वक्त क्या मजा आता होगा। बहुत ही भाग्यवान है तुम्हारे ससुरजी। " सीमा ने उसके गोद मे लेटे ससुरजीको कहा, "दुदु नही पिना है बच्चे? निंद आने के पहिले ही सब पी जाओ । नही तो रातमे मुझे उठाकर पिलाने कहोगे। " उसके ससुरजी ने कहा, "पिलाओ ना अभी। " सीमा चाचीने अपने पल्लू के निचे हाथ डालकर ब्लाऊजके निचले बटन खोल दिये। फिर वो उनका सर पल्लू से ढकते हुए समीर चाचाजी के सामने ही उनको बच्चे जैसा पिलाने लगी। समीर चाचा का लंड उसकी यह बिनदास्त हरकत देखकर बहुत सालो बाद उठ गया। उनको अपने पैंट का तंबू देखकर खुद की बहुत शरम आ रही थी पर वो भी क्या कर सकते थे? सीमा को अपने ससुरजी को स्तनपान करते देख उनको खुद को भी ऐसा दूध पिने की बहुत इच्छा हो रही थी। वो उसको देखकर मनमें ही उसको चोदने लगे। सपने मे सीमा को नंगा करने पर जो छबि उनके दिमाग मे आ गयी उससे तो उनका पानी पाच मिनट में ही बहने लगा। एक मिनट मे ही उनकी पैंट पर धब्बे दिखने लगे। वो जोर जोर से साँसें लेने लगे। सीमा ने उनकी तरफ देखा तो वो भी आश्चर्यचकित हो गयी। चाचाजी ने उसे कहा, "माफ करना मुझे। ऐसे फिरसे नही होगा। " सीमा बोली, "आपको शरमाने की कोई जरुरत नही चाचाजी। मै कोई आपकी रिश्तेदार नही हूँ। " फिर उसने चाचाजी के गीली पैंट को देखकर कहा, "आपको जब भी ऐसा प्रॉब्लेम फिरसे होगा तो मेरे पास आ जाओ। मै उसको ठिक कर दूँगी। " समीर चाचा मनमें ही खुश होकर अपनी पैंट बदलने चले गये। सीमा बहुत वक्त तक अपने ससुरजी को पिलाती रही।
एक दिन सुबह सीमा चाची मेरे पिताजी के साथ हमारा खेत देखने गयी थी। हमारे खेत मे गाँव की बहुत सारी महिलाएं काम करती है। खेत मे पहुचने के बाद चाचीने उन महिलाओं का काम देखा। वो महिलाएं आपस मे बाते करते करते हुए अपना काम कर रही थी। थोडी देर बाद सीमा चाची एक पेड की छाँव मे बैठ गयी। उसके सामने ही कुछ महिलाएं काम कर रही थी। सीमा चाचीने मेरे पिताजी को अपने गोद मे सुलाया और बोली, "आपको दुदु पिलाऊ क्या देवरजी? " मेरे पिताजी, "पर यहा? इन महिलाओं के सामने? " चाची हसते हुए बोली, "अब तो पुरे गाँव को पता है मै ससुरजी को स्तनपान करती हूँ। तो किसी ने आपको पिते देखा तो क्या फरक पडेगा? " सीमा चाचीने उसका पल्लू बाजू करते ही मेरे पिताजी ने उसका बाया मुम्मा ब्लाऊजके उपरसे ही मुहँ मे ले लिया। उनकी ये बचकानी हरकत देखकर पास की महिलाएं हसने लगी। उनकी तरफ देखते हुए सीमा चाची बोली, "लगता है देवरजी को प्यास लगी है। " फिर सीमा चाची मेरे पिताजी का सर पल्लू से ढककर उनको उन महिलाओं के सामने ही अपना दूध पिलाने लगी। महिलाएं काम करते करते सीमा चाची को मेरे पिताजी को स्तनपान करते देख रही थी।


रात को हमारे घर पडोस की कुछ महिलाएं टिव्ही देखने आई थी। वो सब हॉल मे लाईट बंद करके टिव्ही देख रही थी। मेरे पिताजी को सीमा चाची अपने गोद मे सुला रही थी। उसने जानबूझकर अपना एक मुम्मा पल्लू के बाहर ही रखा था। वो देखकर मेरे पिताजी के मुहँ से लाल टपक रही थी। थोडी देर बाद उन्होने सीमा चाची को कहा, "मुझे दुदु पिलाओ ना। " ये सुनकर महिलाएं चाची के साथ हसने लगी। एक महिला बोली, "क्या देवरजी? आप तो इतने बडे होकर भी स्तनपान करते हो? शरम नही आती आपको? " सीमा चाची, "दूध पिने मे कैसी शरम? " फिर वो सबके सामने ही मेरे पिताजी को स्तनपान करने लगी। सीमा चाची बोली, "देखो कैसे देवरजी छोटे बच्चे जैसे मेरा दूध पी रहे हे। " दूसरी महिला बोली, "तुम तो बहुत भाग्यवान हो सीमा। " सीमा चाची मेरे पिताजी को दो घंटे तक पिला रही थी।

सीमा चाची कुछ दिन के लिए हमारे शहर के घर रहने आई थी। घर मे मै और मेरे पिताजी ही रहते थे। रात को सब हॉलमे सो रहे थे। सीमा चाची हम दोनो के बीच सो रही थी। मेरे पिताजी ने उसे अपनी तरफ घूमा लिया और वो उसका पल्लू बाजू करके उसके मुम्मो को ब्लाऊजके उपरसे ही बारी बारी से मुहँ मे लेकर चुसने लगे। थोडी देर बाद सीमा चाची ब्लाऊजके बटन खोलकर उनको पिलाने लगी। एक घंटे बाद पिताजी दूध पिते पिते ही सो गये। सीमा चाची मेरे तरफ घूम गयी। मै बारी बारी से उसके दोनों मुम्मो को चुसने लगा। उसका पुरा दूध पिने के बाद मै उसे अपने निचे लेकर उसे रातभर जमकर चोद रहा था।

सुबह पिताजी काम पर जाने के पहले हम सब रसोईघर मे नाश्ता कर रहे थे। थोडा नाश्ता करने के बाद मेरे पिताजी सीमा चाची को बोले, "मुझे अब दुदु भी पिलाओ। " सीमा चाची हसते हुए बोली, "आप तो दूध पिना कभी छोडने वाले नही है। " उसने मेरे पिताजी को अपने गोद मे सुलाया। फिर वो उनका सर पल्लू से ढककर मेरे ही सामने उनको छोटे बच्चे जैसा पिलाने लगी।
 


Possibly Related Threads...
Thread:AuthorReplies:Views:Last Post
  चाची की बेटी को बहुत मजे से चोदा Le Lee 0 157 04-01-2019
Last Post: Le Lee
  चाची की चूत की चाहत Le Lee 0 5,322 07-27-2017
Last Post: Le Lee
  विधवा चाची की चुदाई Le Lee 0 7,033 06-01-2017
Last Post: Le Lee
  जवान चाची का कमाल Le Lee 2 6,968 03-30-2017
Last Post: Le Lee
  चाची का कमाल Penis Fire 2 40,411 02-22-2014
Last Post: Penis Fire
  चाची को चोदने का मज़ा Sex-Stories 0 38,885 09-06-2013
Last Post: Sex-Stories
  चाची का दीवाना Sex-Stories 0 19,790 09-06-2013
Last Post: Sex-Stories
  चाची की चुदाई से शुभारम्भ Sex-Stories 64 220,974 08-09-2013
Last Post: Sex-Stories
  रेखा चाची का बेटा Sex-Stories 0 21,508 06-20-2013
Last Post: Sex-Stories
  चाची की भावनाएँ Sex-Stories 0 16,753 06-20-2013
Last Post: Sex-Stories