चाची का पुरा मजा लेता हूँ
रात को सब खाना खा रहे थे। चाची अभी साडी मे ही थी। मेरे पिताजी खाना कम और चाचीके मुम्मो को देखने मे जादा व्यस्त थे। चाचा ने उनको पुछा, "आप खाना इतना कम क्यू खा रहे हो बडे भैया? " चाची हसते हुये बोली, "अभी पेट भर कर क्या करेंगे देवरजी? रातभर मेरा दूध जो पिना है उनको। " चाचा हसकर बोला, "क्या बडे भैया? तु कब तक ये छोटे बच्चे जैसा स्तनपान करता रहेगा? अब तो ये बचकानी हरकत छोड दो। " मेरे पिताजी ने कहा, "पर मुझे तो दूध पिने मे बहुत मजा आता है। मै नही छोडूंगा ये आदत। अब मुझे कमजोरी महसूस नही होती। " चाची, "ये बात आपने सही कही। जबसे आपने मेरा दुध पिना शुरु किया है तब से आपकी तबियत सुधरी है। " चाचा, "ठिक है। तुम पिलाती रहो बडे भैया को। मेरी कोई शिकायत नही। " खाना खाने के बाद चाची ने बर्तन धो दिये और हॉलमे उसके और मेरे पिताजी के लिए बिस्तर फेर दिया। लाइट बंद करके सब सोने लगे। चाचा खटाई पर सो गया था। थोडी देर बाद चाची ने घूँघट हटाकर ब्लाऊज के उपरी बटन खोल दिये और वो मेरे पिताजी को स्तनपान करने लगी। मेरे पिताजी का रोज दूध पी पी के उसके मुम्मो मे दूध भी जादा आने लगा था। और वो बहुत मजा लेते हुये चाची का दूध पी रहे थे। वो थोडी थोडी देर बाद सास लेने के लिए रुक जाते थे । चाची फिर से उसका मुम्मा उनके मुहँ मे देती थी । इसी तरह चाची का दूध खतम करने मे उनको दो घंटे लग गये । तब तक उनका वीर्यपतन भी हो चुका था। फिर वो वैसे ही अपना सर चाची के मुम्मो के बिच रखके सो गये।

चाचा काम के कारण दुसरे गाव चला गया। पर उस ही दिन मेरे दादाजी हमारे घर रहने के लिए आये। वो अब 80 साल के थे। रात को सब सोने जा रहे थे। चाचीने दादाजी को कहा, "ससुरजी आप खटाई पर सो जाओ। देवरजी मेरे बगल मे सो जाएंगे। " दादाजी को आश्चर्य हुआ पर उन्होने कुछ कहा नही। वो खटाई पर सो गये। चाची लाईट बंद करके मेरे पिताजी के बगल मे सो गयी। दादाजी लंबे प्रवास के कारण बहुत थक गये थे इसलिए उनको जल्द से निंद आ गयी। चाचीने मेरे पिताजी के तरफ पलट कर कहा, "आओ देवरजी, दुदु पिना है ना आपको? " पिताजी घबराते हुये बोले, "पर मेरे पिताजी? " चाची ने घूँघट हटाकर कहा, "वो क्या करने वाले है? " चाची के भरे हुये मुम्मो को देखकर मेरे पिताजी का डर निकल गया। " चाची हसते हुये बोली, "अब अच्छे बच्चे की तरह मेरा दूध पी जाओ। " फिर वो मेरे पिताजी को स्तनपान करने लगी। चाची उनको रातभर अपना दूध पिलाती रही।

सुबह को दादाजी जल्दी उठ गये और रसोईघर मे जाने लगे। उनका ध्यान सोई हुयी बहु पर पड गया तो वो बहुत चकित हो गये। क्युकी चाची के ब्लाऊजके कुछ बटन खुले हुये थे और उसका एक मुम्मा बाहर निकला हुआ था। मुम्मे के पास ही मेरे पिताजी का सर था। वो पानी पी कर वापस हॉलमे आ गये तो चाची भी उठकर बैठी हुयी थी। उसने अपने ब्लाऊज के बटन लगा लिए और घूँघट भी ठिक कर लिया। दादाजी ने उसको पुछा, "तु ये क्या कर रही थी रात को? " चाची बोली, "वो देवरजी को रात को दूध पिने की आदत है ना। नही तो उनको निंद नही आती। " दादाजी अचंभीत हो कर बोले, " अपने बडे देवर को अपना दूध पिला रही थी तू? " चाची, "अब इसमे बडी बात क्या है ससुरजी? वो पहले बिमार पड गये थे तो मैने ही उनको स्तनपान करके ठिक किया। अब तो दूध पी के उनकी तबियत भी सुधरी है। इन्होंने भी कहा की तुम देवरजी को दूध पिलाती रहो। अब आप ही बताओ मैने गलत क्या किया? " दादाजी बोले, "ठिक है। पर बाहर किसीको बताना मत। " फिर वो मॉर्नींग वॉक को बाहर निकल गये। चाची भी अपने काम करने के लिए चली गयी।
सुबह चाची और दादाजी रसोईघर मे नाष्टा कर रहे थे। दादाजी बोले, "समीर नाष्टा नही करता क्या? " चाची हसकर बोली, "नही, मे उनको स्तनपान करती हूँ। " दादाजी ने चाची के मुम्मो की तरफ देखा और झटसे अपना ध्यान नाष्टे पर केंद्रीत किया। वो शरमा रहे थे। चाची हसकर बोली, "इसमे शरमाने की क्या बात है ससुरजी? " दादाजी कुछ बोले नही और नाष्टे के बाद वो हॉलमे टिव्ही देखने चले गये। चाची ने मेरे पिताजी को अपने पास बुलाया और उनको गोद मे लिटाया। फिर वो उनका सर घूँघट से ढककर उनको स्तनपान करने लगी। थोडी देर बाद दादाजी पानी पिने के लिए रसोईघर मे आये तो वो चाची को मेरे पिताजी को दूध पिलाते देख बहक गये। पर वो बाद मे जल्दी से पानी पीके वापस हॉलमे चले गये। चाची हलके से हस रही थी।

शाम को हम सब टिव्ही देख रहे थे। हॉलमे थोडा अँधेरा ही था। थोडी देर बाद चाचीने मेरे पिताजी को गोद मे लिटाया और उनको पुछा, "आपको दुदु पिलाऊ? " पिताजी ने हा कहा। चाचीने घूँघट हटा कर ब्लाऊजके निचले बचन खोल दिये। उसने काले रंग का ब्लाऊज पहना था। वो ये सब जानबूझकर बहुत धीमे धीमे कर रही थी। उसके मुम्मो को दादाजी मुहँ खुला ही रखकर देखते रह गये। पिताजी ने चाचीका ब्लाऊज एक साइड से उपर करने की कोशिश की पर उनको सफलता नही मिली। उन्होने कहा, "पिलाओ ना जल्दी। बहुत प्यास लगी है। मैने कुछ खाया नही है। " चाची हसते हुये बोली, "पिला रही हूँ ना आपको। किधर जाना है आपको अभी? " चाची उसका ब्लाऊज एक साइड से उपर ही करने वाली थी तब उसने दादाजी के तरफ देखते हुये कहा, "माफ करना ससुरजी। मुझे ध्यान ही नही रहा। " फिर उसने मेरे पिताजी का सर घूँघट से ढक दिया और उनको छोटे बच्चे की तरह स्तनपान करने लगी। दादा जी बिच बिच मे चाची को मेरे पिताजी को दूध पिलाते देख रहे । पर चाची का पुरा ध्यान मेरे पिताजी को दूध पिलाने मे और टिव्ही देखने मे ही व्यस्त था । वो उनको बहुत वक्त तक स्तनपान कर रही थी ।
दुसरे दिन दादाजी को थोडा बुखार चढ गया था। वो चाचीको बोले, "मुझे थोडा अच्छा नही लग रहा। मुझे सूप बनाकर दो। " चाची ने सूप बनाकर दादाजी को दिया। वो चमच से सूप पिने की कोशिश करने लगे तो उनका चमच गिर गया। चाची ने परेशान हो कर पुछा, "आपको कमजोर महसूस हो रहा है क्या? " दादाजी हा बोले। चाची उनको बोली, "चलो आपको गोद मे सुलाकर सूप पिलाती हूँ। " चाचीने उनको रसोईघर मे अपने गोद मे लिटा दिया। चाचीका बाया मुम्मा घूँघट के बाहर था और वो दादाजी के मुहँ के पास ही था। वो उसके दूध से भरे हुये मुम्मे को देखते ही रह गये और उनका मुहँ खुला ही रह गया। चाची जब जमीन पर रखा हुआ सूप का बाऊल उठाने निचे झुकी तो उसका मुम्मा दादाजी के मुहँ मे चला गया। दादाजी के मुहँ से आवाज निकल गयी, "आह! " चाची बाऊल हाथ मे लेकर सीधी हो गयी तो उसने देखा की दादाजी ने अभी तक उसका मुम्मा मुहँ मे ही पकडकर रखा था। " चाची ने हसते हुये उसका मुम्मा उनके मुहँ से निकाल लिया और बोली, "माफ करना ससुरजी। जबसे देवरजी मेरा दूध पिने लगे है तब से मेरे मुम्मो मे बहुत दूध भरने लगा है। " फिर चाची उनको चमच से सूप पिलाने लगी।

शाम को चाची ने दादाजी को फिरसे रसोईघर मे गोद मे लिटा दिया और उनको सूप पिलाने लगी। सूप पिने के बाद दादाजी बोले, "सूप पिने मे मजा नही आता। बहुत कडवा है। " चाची हसते हुये बोली, "तो आपको कुछ स्वादिष्ट और सेहतमंद पिलाऊं? " दादाजी, "क्या पिलाओगी मुझे? " चाचीने पुछा, "स्तनपान करोगे? " दादाजी बोले, "ये क्या कह रही हो बहु? ये पाप है। " चाची हसकर बोली, "मे देवरजी को तो पिलाती हूँ ना। तो आपको पिने मे क्या दिक्कत है? दुध तो दुध होता है। " दादाजी बोले, "पर तुम्हारे पति को पता चला तो क्या होगा? " चाची, "वो क्या करने वाले है। वैसे भी वो दो दो हफ्ते दुसरे गाव रहते है। " चाचीे के बहुत समझाने के बाद दादाजी मान गये। चाचीने सूप बाजूमे रख दिया। फिर चाची ने घूँघट बाजू करके उसके ब्लाऊज के निचले बटन खोल दिये। दादाजी उसके मुम्मो को देखकर बोले, "मुझे अपना बच्चा समझकर स्तनपान करना। " चाची हसकर बोली, "आपको मेरा दूध पीला पीला कर छोटा बच्चा ही बना दूँगी। " फिर वो ब्लाऊज एक साइड से उपर करके दादाजी को स्तनपान करने लगी।
दुसरे दीन सुबह रसोईघर मे नाष्टा करने के बाद चाचीने मेरे पिताजी से कहा, "कुछ दिन तक मै सिर्फ ससुरजी को ही स्तनपान करुंगी। " पिताजी मायूस हो कर हॉलमे टिव्ही देखने गये। चाचीने दादाजी को बुलाया। वो रसोईघर मे आते ही चाची उनको बोली, "आओ बच्चे, तुझे दुदु पिना है ना? नही तो मै घर के काम करने मे लग जाती हूँ। " दादाजी खुश हो कर उसकी गोद मे सो गये और बोले, "स्तनपान करने मे जो मजा आता है उसकी तुलना संसार मे किसी भी सुख से नही हो सकती। " चाची हसते हुये बोली, "अब भाषण बंद करो और चुपचाप मेरे बच्चे की तरह दुदु पी लो। " दादाजी और भी कुछ बोलना चाहते थे पर चाचीने उसका घूँघट बाजू करके ब्लाऊजके निचले बटन खोल दीये। दादाजी के मुहँ से लाल टपकने लगी। फिर चाची उनका सर घूँघट से ढककर उनको स्तनपान करने लगी। दादाजी मेरे पिताजी से भी आहिस्ता दूध पी रहे थे। चाची उनको दो घंटे तक अपना दूध पिला रही थी। 

दोपहर को चाची ने मॅक्सी पहनी थी और वो दादाजी को सुलाने के लिए अपने कमरे मे लेकर गयी। फिर वो उनके बाजूमे लेटते हुये मॅक्सीके बटन खोलकर उन्हे स्तनपान करने लगी।

शाम को टिव्ही देखते समय चाचीने दादाजी को गोद मे लिटाया था। थोडी देर बाद उन्होंने चाची का घूँघट थोडा हटाकर उसका बाया मुम्मा ब्लाऊजके उपरसे ही अपने मुहँ मे लिया और उसको चुसने लगे। दादाजी की ये बच्चे जैसी हरकत का चाची पर कोई असर नही हुआ। वो तो टिव्ही देखने मे दंग थी। थोडी देर बाद दादाजी चाचीसे बोले, "पिलाओ ना मुझे दुदु। कब से तडप रहा हूँ । " चाची हसकर बोली, "पहले कहा होता तो पिला देती ना, मेरे बच्चे। " चाची उनका सर घूँघट से ढककर उनको स्तनपान करने लगी और फिर टिव्ही देखने मे दंग हो गयी।

रात को मेरे पिताजी खटाई पर सो गये और उपर से चाची को दादाजी को स्तनपान करते देखते रहे। दो घंटे बाद चाचीने अपने ब्लाऊज के बटन फिर से लगा लिए और बोली, "लगता है ससुरजी दूध पिते पिते ही सो गये। " पिताजी उसे बोले, "मै क्या अब ऐसे ही मेरा लवडा हिलाते रहू? " चाची हसते हुये बोली, "चलो मे आपके लंड को देखती हूँ। " वो मेरे पिताजी को कमरे मे लेकर गयी और घुटने पर खडे रह कर उनका पैंट उतारने लगी। पिताजी बोले, "क्या कर रही हो? " चाची बोली, "मुझे आपका लंड चखना है। " उसने पिताजी को पुरा नंगा किया और थोडी देर उनका लंड मसलती रही। वो बहुत बडा होनेपर चाचीने उसके टोक को अपने जीभ से चाटा। पिताजी दर्दभरी आवाज मे बोले, "जल्दी निकाल दोगी। " चाची बोली, "जल्दी नही निकलेगा। " फिर उसने मेरे पिताजी का पुरा लंड अपने मुहँ मे ले लिया। पिताजी, "आह आह। " चाचीने लंड को अपने मुहँ से बाहर निकाला और फिरसे ले लिया। उसने अब उसे चुसना भी शुरु किया। पिताजी, "मार दोगी मुझे। " चाची बहुत टाइम मेरे पिताजी के लंड को चुसती और मुहँ के अंदर बाहर करती रही। पिताजी बोले, "अब नही कंट्रोल कर सकता और। " उन्होने चाचीका सर पिछे से पकड लिया और वो खुद अपना लंड चाचीके मुहँ के अंदर बाहर करने लगे। और वो दुसरे हाथ से चाचीके मुम्मो को कपडे के उपरसे दबाने लगे। थोडी देर बाद चिल्लाते हुए उन्होने चाची के मुहँ मे ही वीर्यपतन कर दिया। वो उनका वीर्य पुरा बाहर निकलने तक चाचीका सर पकडे रहे। फिर उन्होने चाचीका सर छोड दिया। चाचीने उनके लंड को वीर्य की आखिरी बूंद खतम होने तक चाट लिया। फिर उसने मेरे पिताजी के लंड को मुहँ से बाहर निकाला। पिताजी ने पुछा, "कैसा लगा? " चाची हसते हुए बोली, "बहुत ही मिठास भरा था। "
दादाजी को जरा कमजोरी महसूस हो रही थी। चाची उनको लेकर दुसरे दिन सुबह एक मध्यम वयस्क महिला डॉक्टर के क्लिनीक मे गयी। इतने जल्दी एक भी पेशंट आया नही था। कम्पौंडर महिला ने चाचीसे कहा, "डॉक्टर को आने मे एक घंटा लगेगा। आप डॉक्टर के कमरे मे वेट करो। " चाची दादाजी को डॉक्टर के कमरे मे लेकर गयी। कमरे का एक भाग पडदे के पिछे ढका हुआ था। चाची और दादाजी डॉक्टर के सामने वाली बेंच पर बैठ गये। चाची दादाजी को बोली, "हम खालीमे इतने जल्दी आ गये। डॉक्टर को आने मे अभी बहुत टाइम है। " दादाजी बोले, "मुझे स्तनपान करो ना। " चाची हसते हुये बोली, "नादान मत बनो बच्चे। ये जगह नही है दुदु पिने की। " पर दादाजी ने अपनी जिद छोडी नही। आखिर मे चाची मान गयी और उसने दादाजी को अपने गोद मे लिटाया। अपना घूँघट बाजूमे करके ब्लाऊज के निचले बटन खोलते हुये वो बोली, "किसी ने मुझे तुझे दुदु पिलाते देखा ना तो बहुत बुरा होगा। " फिर वो दादाजी का सर घूँघट से ढककर उनको अपने बच्चे की तरह स्तनपान करने लगी। दादाजी को पिलाते पिलाते वो दिवार पर टंगी घडी को बार बार देख रही थी। आधे घंटे बाद भी डॉक्टर आने का कोई नामोनिशान नही था। इसलिए चाची ने अपना पुरा ध्यान दादाजी को दूध पिलाने मे केंद्रीत किया। वो उनको दूध पिलाने मे इतनी दंग थी की डॉक्टर कमरे मे आ गयी तब भी चाचीको पता नही चला। डॉक्टर को देखते ही चाचीने दादाजी के सर से घूँघट हटा दिया और अपना ब्लाऊज निचे कर लिया। दादाजी भी उठकर बैठे। डॉक्टर हसते हुए अपने खुर्सी पर जा बैठी। चाची शरमाते हुए बोली,"माफ करना डॉक्टर। वो ससुरजी को थोडी कमजोरी है ना इसलिए उनको मेरा दूध पिला रही थी। ऐसा फिरसे नही करुंगी। " डॉक्टर हसते हुये बोली, "अपने वयस्क ससुर को स्तनपान करना कोई पाप नही है। दुध पिने से उनको अच्छा लगता है तो उनको रोज पिलाया करो। उनके इस बुढापे मे उनको ऐसे ही तंदरुस्त रखना होगा। ठिक है। " डॉक्टर ने दादाजी को चेक करके कुछ गोलीया लिखकर दी और चाचीको बोली, "पडदे के पिछेवाले भाग मे उनका स्तनपान पुरा करो। " चाची बोली, "जी डॉक्टर। " वो दादाजी को लेकर पडदे के पिछे चली गयी और डॉक्टर ने अगले पेशंट को अंदर बुलाया। चाची एक बेंच पर बैठकर दादाजी को फिरसे स्तनपान करने लगी। पडदे के उस पार से डॉक्टर और पेशंट की आवाजें आ रही थी। पर चाची तो दादाजी को अपना दूध पिलाने मे व्यस्त हो गयी।
कुछ दिन बाद चाचा फिरसे घर आ गया। मेरे पिताजी की खुशी उनके चेहरे पर साफ दिख रही थी। क्यू की चाची अपने पती के सामने अपने ससुर को स्तनपान नही कर सकती थी। पर दादाजी के मन मे एक अलग ही विचार आया था। उस शाम टिव्ही देखते टाइम चाचीने मेरे पिताजी को गोद मे लिटा सुलाया था। बहुत दिनो के बाद चाची के मुम्मो को इतनी करीब से देखकर मेरे पिताजी को रहा नही गया। उन्होने जल्द से चाचीका घूँघट थोडा बाजू करके उसका भरा हुआ मुम्मा मुहँ मे लेकर कपडेके उपरसे ही चुसना शुरु किया। उनकी ये बचकानी हरकत देख चाचा हसते हुए बोला, "लगता है बडे भैया को बहुत भुख लगी है। " चाची मेरे पिताजी को बोली, "छोडीये। पिला रही हूँ ना आपको।" उसने अपना मुम्मा मेरे पिताजी के मुहँ से निकाल लिया और ब्लाऊजके बटन खोलकर उनको स्तनपान करने लगी। मेरे पिताजी तुरन्त उसका दूध पिने लगे। चाची हसते हुये मेरे पिताजी को बोली, "धीरे धीरे पीजीये ना देवरजी। आप को देख कर लग रहा है की आप बहुत दिनो के बाद पी रहे है। " चाचा भी हसते हुये बोला, "बडे भैया तो कभी नही सुधरेंगे। " दादाजी बोले, "उसे ऐसे बहु का दूध पिते देख मुझे भी पिने का मन हो रहा है। " चाचा हसकर बोला, "अब आपको भी स्तनपान करना है पिताजी? " दादाजी बोले, "तो क्या हुआ। उससे ज्यादा जरुरत तो मुझे है। वो तो सिर्फ मजे के लिए पी रहा है। मेरी बात अलग है। मै अब बुढ्ढा हो चुका हू। मुझे रोज का खाना भी हजम नही होता अभी। " चाचा बोला, "आपकी बात तो सही है। " चाची अपने ससुर को बोली, "आपको पीना हो तो पिला दूंगी कल। " दादाजी खुश हो गये।

सुबह रसोईघर मे सबका नाष्टा पुरा होने के बाद चाचीने चाचा और मेरे पिताजी को को हॉलमे जाकर टिव्ही देखने को कहा। मेरे पिताजी मायूस हो गये। चाची उनको बोली, "मै आपको शाम को पिला दूंगी। ठिक है देवरजी? " पिताजी चाचा के साथ हॉलमे टिव्ही देखने के लिए गये। चाचीने दादाजी को बोला, "आइये ससुरजी। " उसने दादाजी को अपने गोद मे सुलाया और धीरे आवाज मे बोली, "पुरे दिन दुदु नही पिया ना तुने, मेरे बच्चे? " दादाजी, "हा ना। " फिर चाची उनको अपने बच्चे की तरह स्तनपान करने लगी।
रात को सबका खाना खा के हो गया। चाचीने हॉलमे बिस्तर फेर दिया और दादाजी को बोली, "आपको सोते वक्त स्तनपान करु क्या ससुरजी? " दादाजी बोले, "बहुत ही अच्छा होगा बहु। " चाचीने मेरे पिताजी को कहा, "आप दुसरे खटाई पर सो जाओ। मै ससुरजी के बगल मे सोती हू। " चाची लाइट बंद करके दादाजी के बगल मे सो गयी और उनको बोली, "आओ ससुरजी, आपको दूध पिना है ना? " दादाजी चाचीके तरफ पलट गये। चाचीने घूँघट हटाकर अपने ब्लाऊजके उपरी बटन खोल दिये। फिर वो अपना एक मुम्मा बाहर निकाल कर दादाजी को बच्चे की तरह स्तनपान करने लगी। दादाजी रातभर अपने बहु का दूध पी रहे थे।
डॉक्टरने दादाजी को पाँच दिन बाद फिरसे बुलाया था इसलिए चाची उनको लेकर सुबह को क्लिनीक मे पहुच गयी। चाचीने कम्पोन्डर से बात करने पर उसने दादाजी को सांतवा नंबर दिया और उनको बोली, "डॉक्टर ने आपको बाजूके कमरे मे वेट करने को बताया है। " चाची अपने ससुर को लेके बाजूके कमरेमें गयी। ये कमरा वही कमरा था जिधर डॉक्टर ने पिछली बार चाचीको दूध पिलाने के लिए सुझाया था। कमरे के साइड मे जो पडदा था उसके पार से डॉक्टर और पेशंट की आवाजें आ रही थी। दो मिनट बार डॉक्टर पडदा थोडा हटाकर कमरे मे आ गयी। उसने दादाजी का हाल पुछा और चाची को बोला, "आप मैने बताया वैसा अपने ससुर को स्तनपान कर रही है ना? " चाची बोली, "कर तो रही हूँ डॉक्टर ।" डॉक्टर बोली, "अच्छी बात है। अब आप उनको स्तनपान करो। मै आपका नंबर आयेगा तो आपको बुलाने आऊंगी। " चाचीने हा कहा। डॉक्टर उसके केबीन मे चली गयी और उसने पडदा ठिक कर दिया । चाची बेंच पर बैठ गयी और अपने ससुर से बोली, "आ मेरे बेटे, तुझे दुदु पिलाती हूँ। " दादाजी उसके गोद मे लेट गये। फिर वो उनका सर घूँघट से ढककर उनको बच्चे की तरह स्तनपान करने लगी। एक घंटे बाद डॉक्टर पडदा थोडा हटाकर कमरे मे आ गयी। डॉक्टर चाचीको अपने ससुर को दूध पिलाते देख हसकर बोली, "सब थिकठाक है ना? कोई परेशानी नही हुयी? " चाची, "नही तो। उनको एक घंटे से पिला रही हूँ। " चाचीने उसका घूँघट हटाकर दादाजी कैसे दूध पी रहे है वो डॉक्टर को दिखाया और बोली, "देखा कैसे छोटे बच्चे की तरह मेरा दूध पी रहे है? " डॉक्टर बोली, "वयस्क लोगो को बच्चा समझकर ही दूध पिलाना चाहीये। उनका बरताव बच्चो जैसा ही तो होता है ना। " थोडी देर बाद चाची का मुम्मा खाली हो गया तो चाचीने वो उनके मुहँ से निकाल लिया और उनको बोली, "उठो चलो। आपको घर जाने के बाद फिरसे पिलाऊंगी। " दादाजी उठकर बैठे। डॉक्टर ने उनको चेक किया और उनको तंदरुस्त बताया। डॉक्टर को धन्यवाद कह के चाची उनको वापस घर लेके आयी। अब चाची अपने ससुर को दिन मे चार बार स्तनपान करती है।

कुछ दिन बाद हमारे घर मेरी दुसरी चाची पूजा रहने के लिए आयी। उसकी उम्र और मेरे पहिले चाची सीमा की उम्र मे सिर्फ दो साल का अंतर था। चाचा तो उसके काम के कारण दुसरे गाव गया था। रात को खाना खाने के बाद चाचीने हॉलमे बिस्तर फेरा और पूजा चाची को बोला, "ससुरजी मेरे बगल मे ही सोते है। " पूजा चाची ने हसकर पुछा, "क्यू ? उनको सुलाना पडता है क्या? " सीमा चाची बोली , "हा, उनको स्तनपान जो करती हूँ। " पूजा चाची चौककर बोली , "ये क्या कह रही हो सीमा? वो तो हमारे ससुरजी है। " सीमा चाची हसते हुये बोली, "ससुरजी हुए तो क्या हो गया। अब उनकी बहुत उम्र हो गयी है। उनको तंदरुस्त रखने के लिए मुझे उनको दूध पिलाना पडता है। डॉक्टर ने भी उनको मेरा दूध पिलाना अच्छी बात कही है। " पूजा चाची बोली, "अच्छा ये बात है? फिर तो मुझे कोई परेशानी नही। " मेरे पिताजी खटाई पर सो गये। सीमा चाचीने लाइट बंद किया और वो पूजा चाची और दादाजी के बिच सो गयी। दोनो चाचीया बाते करने लगी। थोडी देर बाद वो बोलते बोलते ही दादाजी की तरफ घुम गयी और उसने उनको कहा, "आ बेटे, दुदु नही पिना तुझे ? " दादाजी उसके पास खिसक गये। पूजा चाची हसकर बोली, "वा। तुने तो ससुरजीको अपना बच्चा ही बना लिया है। " सीमा चाची हसते हुये बोली, "वो दूध जो पिते है मेरा। " फिर वो उसका घूँघट बाजू करके और ब्लाऊजके उपरी बटन खोल के दादाजी को स्तनपान करने लगी। दादाजी को दूध पिलाते पिलाते दोनो चाचीया बाते भी कर रही थी।
सुबह नाश्ता करके मेरे पिताजी हॉलमे टिव्ही देखने चले गये। रसोईघर मे अब मेरी दो चाचीया और दादाजी ही थे। दादाजी बार बार सीमा चाची के मुम्मो को निहार रहे थे। वो उनको बोली, "आओ बेटे। " दादाजी सीमा चाचीके गोद मे लेट गये। पूजा चाची ने उनको ताना मारा, "क्या ससुरजी? आपको शरम नही लगती अपने बहु का दूध पिने मे? " दादाजी बोले , "अब डॉक्टरने ही कहा है और सीमा बहु भी पिला रही है तो मे छोड दू ऐसा मोका? " उन्होने सीमा चाची को कहा, "पिलाओ ना दुदु। " सीमा चाची ने अपना घूँघट साइड मे करके उसके ब्लाऊजके निचले बटन खोल दिये। फिर वो उनका सर घूँघट से ढककर उनको स्तनपान करने लगी। पूजा चाची ने पुछा, "बहुत दूध पिते है ससुरजी? " सीमा चाची बोली, "अब तो वो बुढ्ढे हो गये है। उनको पुरा दूध खतम करने मे दो घंटे लगते है। " पूजा चाची हसकर बोली, "बहुत मजा आता होगा ना तुझे? " उसपर दोनों चाचीया हसने लगी।

दोपहर को सीमा चाची ने मॅक्सी पहनी हुयी थी। खाना खाने के बाद मेरी चाचीया हॉलमे लेट रही थी। सीमा चाचीने उनके बिच मे दादाजी को सोने के लिए कहा था। पर दादाजी को निंद नही आ रही थी। सीमा चाचीने उनसे कहा, "दुदु पिना है तुझे मेरे बच्चे? " दादाजी हा बोले तो सीमा चाचीने उसके मॅक्सीके बटन खोल दिये और अपना एक भरा हुआ मुम्मा बाहर निकालकर उनको दूध पिलाने लगी। दादाजी तो बच्चे की तरह उसका दूध पी रहे थे। पूजा चाची बोली, "उफ। अब मुझे भी ससुरजी को स्तनपान करने की इच्छा हो रही है। " सीमा बोली, "तो फिर कर ना। वो ना नही करेंगे। " पूजा चाची बोली, "पर मेरे मुम्मो मे दूध ही नही है। " सीमा चाची बोली, "इतनी सी दिक्कत है? पर तु तो गोलीया लेकर अपने मुम्मो को भर सकती है। मै तुझे डॉक्टर के पास लेकर जाऊँगी। ठिक है? "
डॉक्टर से गोलीया लेकर दो दिन बाद पूजा चाची के मुम्मो से थोडा दुध आने लगा। अब वो बहुत खुश हो गयी। सीमा चाची उसे बोली, "शुरु मे तेरे मुम्मो से थोडा सा ही दूध आयेगा। पर तु रोज स्तनपान करेगी तो दूध बढ जाएगा। तु आज से मेरे साथ ससुरजी को पिलाना शुरु कर दो। " उस रात सीमा चाचीने दादाजी को उन दोनो के बिच मे सुलाया । सीमा चाची दादाजी को बोली, "बेटे,आज पूजा भी तुझे स्तनपान करेगी। तो अच्छे बच्चे की तरह उसका दुदु पी ले। " पूजा चाची उनको बोली, "आओ ससुरजी। " उसने अपना घूँघट हटाकर अपने ब्लाऊज के उपरी बटन खोल दिये और उसका एक मुम्मा बाहर निकाल दिया। दादाजी बोले, "तेरे मुम्मे सीमा से थोडे छोटे है। पर मै उनको पी पी के बडा कर दूंगा। " फिर वो बच्चे की तरह पूजा चाची का दूध पीने लगे। पूजा चाची को भी अच्छा लग रहा था। थोडी देर बाद पूजा चाची का दूध खतम हो गया। फिर सीमा चाची ने उनको अपनी तरफ घुमा दिया और उनको अपने ब्लाऊज के बटन खोल कर फिरसे स्तनपान करने लगी। सीमा चाची बोली, "पी मेरे बच्चे। सारा दूध पी जा। "
कुछ दिन बाद एक रात हमारे घर सीमा चाचीने पडोस की महिलाओं को पत्ते खेलने बुलाया था। सब महिलाएं हमारे घर आने के बाद हॉलमे बैठ कर पत्ते खेलने लगी। पूजा चाची भी खेल रही थी। पर सीमा चाची सबको चाय पानी देने मे व्यस्त थी। सबका चाय वगैरा होने के बाद सीमा चाची बाजू मे बैठ कर महिलाओं का खेल देखने लगी। मेरे दादाजी भी खेल देख रहे थे पर वो जल्दी से बोर हो गये। सीमा चाची उनको बोली, "आओ ससुरजी, मै आपको सुलाती हूँ। " दादाजी उसके पास खिसक गये। सीमा चाचीने उनको अपने गोद मे लिटाया। वो उनको धीरे धीरे हिलाकर सुलाने लगी। पर दादाजी को निंद नही आ रही थी। चाचीने अपना पल्लू हटाकर उसका एक मुम्मा ब्लाऊज के उपर से ही उनके मुहँ मे दे दिया। दादाजी का परावर्तन अब बच्चे मे हो गया और वो अपने बहु के मुम्मे को ब्लाऊजके उपर से ही चुसने लगे। एक महिला हसते हुये बोली, "सीमा, तेरा ससुरू तो अब बहुत बचकानी हरकत करने लगा है। क्या अब तुम उनको अपना दूध भी पिलाती हो? " सीमा चाची बोली, "पिलाती हूँ उनको। डॉक्टर ने कहा है उनका अपने बच्चे जैसा खयाल रखो। " दुसरी महिला बोली, "तेरा तो नसीब बहुत अच्छा है की तुझे दूध पिने वाला ससुर मिला है। " दुसरी महिलाएं भी मान गयी। सीमा चाची ने दादाजी के मुहँ से अपना मुम्मा निकाल लिया और उनको पुछा, "क्या तुम्हे अब दुदु भी पिलाऊ, मेरे बेटे? " दादाजी हा बोले। चाची ने अपने ब्लाऊजके निचले बचन खोल दिये। फिर वो उनका सर पल्लू से ढककर उनको बच्चे जैसा पिलाने लगी।
अब पुरे गाव की महिलाओं को पता चला था की सीमा चाची अपने बुढ्ढे ससुर को स्तनपान करती है। कुछ दिन बाद पूजा चाची बिमार पड गयी। सीमा चाची उसको लेकर डॉक्टर के पास जाने निकली। दादाजी बोले, "अब मुझे भी साथ लेके जाओ ना। " सीमा चाची दोनो को लेकर डॉक्टर के क्लिनीक पहुंच गयी। क्लिनीक मे पहिले से ही चार पेशंट आ गये थे। कम्पोन्डर महिला ने उनको 5 वा नंबर बताया और सीमा चाचीको बोली, "आप अपने ससुरजी को बाजूके कमरे मे पिला सकती है। " सीमा चाचीने उनको धन्यवाद दिया और पूजा चाची को बिठा के वो दादाजी को लेकर बाजूके कमरे मे चली गयी। एक कोने मे बेंच पर बैठते हुए वो दादाजी को बोली, "आ मेरे बच्चे, तुझे इधर दुदु पीने मे कोई परेशानी नही होगी। " दादाजी उसके गोद मे लेट गये। सीमा चाचीने उसका पल्लू बाजू करके ब्लाऊजके निचले बटन खोल दिये। दादाजी बोले, "बहुत भुख लगी है। " सीमा चाची बोली, "आराम से पीते रहो। " फिर सीमा चाची उनका सर पल्लू से ढककर उनको पिलाने लगी। दादाजी अब उसका बच्चा बनकर दूध पीने लगे। अपने ससुर को पिलाने से सीमा चाचीको भी बहुत आनंद मिल रहा था। उनको पिलाते पिलाते टाइम कैसे निकल गया वो सीमा चाचीको पता भी नही चला। एक घंटे बाद दादाजी अभी उसका पहिला मुम्मा ही खाली कर रहे थे तब पूजा चाची दरवाजा खोल कर अंदर आ गयी। उसने दरवाजा फिरसे लगा लिया और सीमा चाची को पुछा, "तुम्हारा ससुरजीको पिलाना हो गया क्या? " सीमा चाची बोली, "अब एक दो मिनट मे मेरा पहिला खाली हो जाएगा। " पूजा चाचीने थोडी देर वेट किया। दादाजी ने मुम्मा खाली करते ही सीमा चाचीने अपने ब्लाऊजके बटन फिरसे लगा लिए और उनको बोली, "अब घर जा के पिलाऊंगी हा तुझे। " फिर वो सब घर आ गये।

रसोईघर मे नाश्ता करने के बाद पूजा चाची ने दादाजी को बोला, "पहिले मेरा दूध पी लो ससुरजी। " दादाजी उसके गोद मे लेट गये। पूजा चाची ने पल्लू हटा के ब्लाऊजके निचले बटन खोल दिये और फिर उनको पिलाने लगी। सीमा चाची उसके मुम्मे को देखकर बोला, "लगता है तेरा दूध बढ गया है। " पूजा चाची, "हा। बहुत अच्छा लग रहा है अब। " दादाजी को उसका पुरा दूध पिने मे एक घंटा लग गया। सीमा चाची उनको बोली, "आ अब मेरा भी पी ले। " और वो दादाजी को गोद मे सुलाकर उनको फिरसे पिलाने लगी।
चाचा बहुत दिनो के बाद घर आ गया था। शाम को रसोईघर मे नाश्ता करने के बाद मेरे पिताजी उसको बोले, "देख भैया। अब हमारे पिताजी को उनकी दोनो बहुयें अपना दूध पिलाती है। पर मुझे भी दूध पिने की बहुत इच्छा होती है। बहुत दिनो से पिया नही है। " चाचा चाचीको बोला, "अपने देवर का भी खयाल रख जरा। " सीमा चाची बोली, "ठिक है। " मेरे पिताजी ने उसके मुम्मो को निहारा और बोले, "बहुत प्यास लगी है। " सीमा चाची अपने पल्लू के बाहरवाले मुम्मेके उपर से अपना हाथ फिराते हुयी उनको बोली, "चलो अपको पिलाती हूँ। " वो उनको लेकर बाजूके कमरे मे चली गयी। दरवाजा खुला ही रखकर सीमा चाचीने मेरे पिताजी को अपने गोदमे सुला दिया। फिर सीमा चाची पल्लू हटाकर उनको स्तनपान करने लगी। मेरे पिताजी बहुत दिनो से प्यासे थे इसलिए उन्होने एक घंटे मे ही उसका सारा दूध खाली कर दिया। सीमा चाचीने अपने ब्लाऊजके बटन फिरसे लगा दिये। मेरे पिताजी ने उससे पुछा, "अब फिर से कब पिलाओगी? " सीमा चाची बोली, "कल सुबह पिलाऊंगी हा? "

रात को सब खाना खा रहे थे। दादाजी दो रोटीया खा कर ही हॉलमे टिव्ही देखने गये। चाचाने सीमा चाचीसे पुछा, "पिताजी ने खाना इतना कम क्यू खाया? " सीमा चाची हसते हुए बोली, "उनको रातभर दो दो बहुओं का दूध जो पिना है। " चाचा बोला, "बहुत खयाल रखती हो तुम दोनो अपने ससुर का। " सीमा चाची बोली, "उसमे इतनी तारीफ करने की जरुरत नही है । वो तो हमारा कर्तव्य ही तो है। " खाना खाने के बाद दोनो चाचीयो ने हॉलमे बिस्तर फेर दिया। मेरे पिताजी और चाचा अलग अलग खटाईयो पर सो गये। सीमा चाची ने लाइट बंद की और वो दादाजी के बगल मे सो गयी। पूजा चाची दादाजी के दुसरे बगल मे सो रही थी। सीमा चाचीने अपना पल्लू हटाकर अपने ब्लाऊजके उपरी बटन खोलते हुये दादाजी से कहा, "आओ मेरे बच्चे, दुदु पीना है ना तुझे? या फिर तुझे पहिले अपने पूजा बहु से पिना है? " दादाजी बोले, "तुम दोनो अपने ब्लाऊजके बटन खोल के रखो। मै बारी बारी से दोनो का दूध पिऊंगा। " पूजा चाची ने हसते हुए अपना पल्लू हटाके ब्लाऊजके उपरी बटन खोल दिये । दादाजी उसके तरफ पलट गये और बोले, "दे अब। " पूजा चाचीने उसका ब्लाऊज एक साइड से उपर करके अपना भरा हुआ मुम्मा दादाजी के मुहँ मे घुसा दिया। दादाजी तुरन्त उसका दूध पिने लगे। पाच मिनट बाद उन्होंने उसका मुम्मा छोड दिया और सीमा चाचीके तरफ पलट गये। वो अपना ब्लाऊज एक बाजूसे उपर करके उनको पिलाने लगी और बोली, "पी मेरे बच्चे। " पाच मिनट बाद दादाजी फिरसे पूजा चाचीके तरफ घुमके उसका दूध पिने लगे। इसी तरह दादाजी रातभर दोनो बहुओं का बारी बारी से मजा लेते रहे।
 


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