चाची का पुरा मजा लेता हूँ
मै बचपन से ही अपने चाचा चाची के साथ गाव मे रहता हू। चाचा हमेशा हफ्ते हफ्ते भर काम के कारण दुसरे गाव जाता रहता है। मेरे चाचा की शादी को दो साल हो गये थे। उनको एक साल की लडकी भी थी। चाचा बहुत टाइम बाहर होने के कारण चाची ही मेरा पुरा खयाल रखती थी। मै अब पाचवी कक्षा मे पढता हू। मेरी चाची हमेशा सारी और ब्लाऊज पहनती है। मुन्नी को वो किसी भी जगह स्तनपान करती थी। मैने उसके मुम्मे कभी देखे नही थे। पर मै दिन रात उसका दूध पिने का सपना देखा करता था। मैने बहुत दिनो से चाचीको मुझे स्तनपान कराने को पूछने की ठान रखी थी।
एक दिन हम शाम को हॉलमे टिव्ही देख रहे थे। चाचीने मुन्नी को गोद मे सुलाया था। थोडी देर बाद वो मुन्नी का सर पल्लू से ढककर उसको स्तनपान करने लगी। मैने धीरज रखते हुये चाची को पुछा, "बहुत दूध पीती है मुन्नी? " चाची, "नही राजू, अब वो पहिली तरह पीती नही। अब मै उसको पिलाना बंद करने वाली हूँ। " मै मायूस हो गया था। चाची ने हसते हुये पुछा, "पर तुम क्यू पुछ रहे हो राजू? तुझे भी पीना है? " मैने शरमाते हुये कहा, "पीना तो है चाची। पर मेरा नसीब कैसा? " चाची अब हसने लगी। मै, "हस क्यो रही हो चाची? " चाची बोली, "इतना ही ना। मुझे पूछते तो मै पीला देती थी ना। उसमे शरमाने की बाद क्या है? तुम अभी बच्चे ही हो। " मै बहुत खुश हो गया। चाची हसते हुये बोली, "तुझे मै रात को पिलाऊंगी। ठीक है? "
रात को खाना खाने के बाद चाची ने मुन्नी को हॉलमे सुला दिया। मुझे वो हसते हुये बोली, "चल राजू, मै तुझे रसोईघर मे दूध पिलाती हूँ। " मै चाची के साथ रसोईघर मे गया ।चाची ने निचे बैठते हुये कहा, "आ राजू। " मै उसके गोद मे सो गया। मेरा मुहँ अब चाची के मुम्मो के बहुत करीब था। चाची के मुम्मे देखकर मे तो पागल ही हो गया। उसने पल्लू हटाकर ब्लाऊजके निचले बटन खोल दिये। अब चाचीका सफेद ब्रा थोडा दिखने लगा। फिर चाचीने ब्लाऊज और ब्रा एक बाजूसे उपर करके उसका भरा हुआ मुम्मा मेरे मुहँ मे घुसा दिया। उसका मुम्मा बहुत सॉफ्ट था। मैने उसका निपल और उसके बाहर का चोकलेटी रंग का एरोला पुरा मुहँ लिया और धीरे से चुसने लगा। उसके मुम्मे से दूध आने लगा और मै वो पिने लगा। उसका स्वाद बहुतही मीठा था। मै अब सातवें आसमान पहुच गया था। चाचीने उसका मुम्मा मेरे मुहँ मे एक हाथ से पकडकर रखा था। चाची मुझे घंटेभर स्तनपान कप रही थी।
सुबह मै चाची के साथ रसोईघर मे नाष्टा कर रहा था। मुन्नी नाष्टा करके हॉलमे टिव्ही देख रही थी। मेरा नाष्टा करने मे मन नही लग रहा था। मैने नाष्टा कर लिया तो चाची बोली, "क्या हुआ राजू? तबियत ठिक नही है क्या तुम्हारी? " मैने कहा, "ठिक तो है चाची। " चाची, "तो तुने इतना कम नाष्टा क्यू खाया? " मैने कहा, "भुख नही है मुझे चाची। " चाची, "तो तुझे दूध पिलाऊं क्या? " मैने शरमाते हुये कहा, "पिलाओ। " चाची हसते हुये बोली, "इसमे शरमाने की क्या बात है। आ मेरे पास। " मै चाची के पास गया तो उसने मुझे गोद मे सुला दिया। मैने पुछा, "पर चाची, मुन्नी आ गयी तो? " चाची बोली, "वो अभी बहुत छोटी है। तु परेशान मत हो। " फिर वो मेरा सर घूँघट से ढककर मुझे छोटे बच्चे की तरह स्तनपान करने लगी। मै बहुत वक्त तक उसका दूध पिता रहा। फिर चाचीने मेरे सर से घूँघट हटा दिया और ब्लाऊजके बटन फिरसे लगा दिये। चाची बोली, "तुझे जब भी दूध पिना है ना तब मुझे कहो। ठीक है? "

अगले दिन चाचा आने वाला था। चाची ने पुछा, "अब तुझे मै दूध कैसे पिलाऊंगी? " मैने बहुत सोचकर एक आयडीया तयार की और वो चाची को बतायी। चाची बोली, "ठीक है राजू। मै ये करने के लिये तयार हूँ। " अगले दिन चाचा शाम को चाचा घर आया। मैने सुबह से ही बिमार पडने का नाटक शुरु किया था। शाम को रसोईघर मे नाष्टा करते टाइम चाचा ने चाची को पुछा, "राजू नाष्टा क्यू नही कर रहा? " चाची बोली, "राजू बिमार पड गया है। उसको अब भुख नही लगती। जबसे हमने दूध लेना बंद किया है तब से वो बहुत मायूस लगता है। " चाचा, "पर गाव मै अब दूध मिलता नही है
ना? " चाची बोली, "वो तबेला जो बंद हो गया। " चाचा, "तो अब क्या करोगी? " चाची बोली, "क्यू ना मै उसको अपना दुध पिलाऊ? वैसे भी मुन्नी को पिलाना बंद किया है। " चाचा हसते हुये बोला, "राजू क्या तेरा दूध पिने को मान जायेगा? " चाची, "तो क्या हुआ? वो इतना बडा किधर हो गया है? " चाचा, "ठीक है। पिलाओ राजूको। " थोडी देर बाद हम सब हॉलमे टिव्ही देख रहे थे। चाची मुझे बोली, "इधर आ राजू। " मै उसके पास गया तो उसने मुझे अपनी गोद मे सुलाया। चाची मुझे बोली, "राजू तुझे दूध पिना था ना? " मैने कहा, "हा चाची। " चाची बोली, "तो तुझे स्तनपान करु क्या? " मैने कहा, "ये क्या कह रही हो चाची। मै क्या अब बच्चा थोडी हूँ? " चाची हसते हुये बोली, "तु इतने बडे थोडी हो गये हो। तो मेरा दुध पिने मे क्या दिक्कत है तुझे? " मै बोला, "मुझे शरम आ रही है। " चाची, "उसमे कोई गलत बात नही है। दुध तो दुध होता है। चल अब पी ले। " फिर चाची चाचा के सामने ही मेरा सर घूँघट से ढककर मुझे स्तनपान करने लगी। चाची चाचा को बोली, "देखो कैसे छोटे बच्चे की तरह दूध पी रहा है राजू। "
मै चाची के साथ कुछ दिन के लिए उसके मायके गया था। चाची के मायके उसकी माँ ही रहती थी। हम जब उसके मायके पहुचे तो शाम हो गयी थी। हमने रात को भोजन किया और दादी जी ने हॉलमे बिस्तर फेर दिया। वो चाचीको बोली, "राजू खटाई पर सो जाएगा ना? " चाची बोली, "नही, वो मेरे बगल मे सोता है। " दादी हसते हुये बोली, "ठिक है। " लाईट बंद करने के बाद हम सब सोने लगे। दादी चाचीके दुसरी बाजू मे सो गयी थी। चाची और दादी बाते कर रहे थे। थोडी देर बाद मैने चाची को अपनी तरफ घूमा लिया। चाची अभी दादी के साथ बाते कर रही थी। मैने चाची का घूँघट थोडा हटाकर उसका ब्लाऊज एक साइड से उपर करने की कोशिश की। पर चाची ने हसते हुये मेरा हात हटा दिया और बोली, "सो जाओ ना राजू। क्यू मस्ती कर रहे हो? " दादीने पुछा , "क्या हुआ? " चाची बोली, "राजू को जल्दी नींद नही आती है। उसको बच्चे की तरह सुलाना पडता है। " दादी हसकर बोली, "बच्चा ही तो है अभी वो। " चाची ने फिर ब्लाऊजके उपरी बटन खोल दिये और एक मुम्मा बाहर निकाल कर मुझे बोली, "आ राजू, तूझे बच्चे की तरह सुलाती हूँ। " मै उसके पास गया तो वो उसका मुम्मा मेरे मुहँ मे घुसाकर मुझे दूध पिलाने लगी। मुझे पिलाते पिलाते चाची दादी के साथ बाते भी कर रही थी।

सुबह चाची उठकर बैठी तो दादी पहले से ही जगी हुयी थी। चाचीने उसके ब्लाऊजके बटन फिरसे लगा दिये और घूँघट ठिक कर लिया। दादी हसते हुये बोली, "तुने ब्लाऊजके बटन क्यू खोल रखे थे? " चाची, "वो राजू कभी कभी दूध पिता है ना इसलिए। " दादी हसकर बोली, "राजू इतना बडा हो गया है फिर भी स्तनपान करता है? " चाची, "राजूको दूध पिना अच्छा लगता है। और गाव का तबेला भी बंद हो गया है। इसलिए पिलाती हूँ उसको। " दादी बोली, "ठिक है। राजू क्या इतना बडा नही है। तू उसको रोज पिलाती जा। दुध बहुत सेहतमंद भी होता है। "

बाद मे हम सब रसोईघर मे नाष्टा कर रहे थे। नाष्टा करने के बाद चाची मुझे दादी के सामने ही बोली, "आ राजू, तुझे स्तनपान करती हूँ। " मै शरमाने लगा तो दादी हस पडी और बोली, "उसमे शरमाने की क्या बात है राजू? " चाची, "उसे तुम्हारी यहा होने की शरम आ रही है। " दादी हसते हुये बोली, "ठिक है, मै चली अपना काम करने।" दादी जमीन से उठते उठते ही चाचीने घूँघट हटा कर उसके ब्लाऊजके निचले बटन खोल दिये। दादी काम करने चली गयी। फिर चाची मेरा सर घूँघट से ढककर मुझे छोटे बच्चे की तरह स्तनपान करने लगी।
कुछ दिन बाद मेरे पिताजी चाचा के घर रहने के लिए आये। उनकी तबियत थोडी ठिक नही थी इसलिए वो कुछ दिन गाव रहने आये थे। चाचा ने चाची को मेरे पिताजी का खयाल रखने के लिए कहा और वो काम के कारण दो हफ्ते के लिए दुसरे गाव चला गया।

उस रात पिताजी खटिये पर सो गये। चाची पिताजी को बोली, "राजू मेरे बगल मे ही सोता है। उसको कभी कभी दूध पिलाना पडता है ना? " मेरे पिताजी अचंभीत होकर बोले, "राजू अभी स्तनपान करता है? " चाची हसकर बोली, "तो क्या हुआ देवरजी? वो इतना बडा थोडी है? " पिताजी, "बहुत खयाल रखती हो राजूका। " लाइट बंद करने के बाद चाची ब्लाऊजके उपरी बटन खोलकर मुझे दूध पिलाने लगी।
सुबह मेरे पिताजी जल्दी उठ गये थे। थोडी देर बाद चाची उठकर बैठी और उसने मेरे पिताजी के सामने ही अपने ब्लाऊजके बटन फिरसे लगा लिए और अपना घूँघट ठिक कर लिया। मेरे पिताजी उसके मुम्मो को आखें फाडकर देखते रहे। फिर चाची घर के काम करने के लिए चली गयी।
दो दिन बाद मेरे पिताजी की तबियत बहुत खराब हो गयी। उनको अब खाना हजम करने की भी दिक्कत हो रही थी। चाची परेशान होकर उनको बोली, "देवरजी आपको खाना हजम नही हो रहा ना। मे आपको सूप बनाकर पिलाती हूँ। " पिताजीने हा कहा। सुबह को चाचीने सूप बनाया। फिर मेरे पिताजी को रसोईघर मे गोद मे सुलाकर वो उनको जबरदस्ती सूप पिलाने लगी। पिताजी ने थोडा सूप पिया और बोले, "बस कर, अब और नही पी सकता। " चाचीे सूप जमीन पर रखने के लिए झुकी तो उसका एक मुम्मा मेरे पिताजी के मुहँ मे चला गया। चाची ने झटसे वो मुम्मा उनके मुहँसे निकाल लिया और बोली, "माफ करना देवरजी। मेरे मुम्मे दुध से भरे हुये रहते है। " पिताजी बोले, "कोई बात नही। तुम मेरा इतना खयाल जो रखती हे। " चाची, "बस करो, अब इतनी तारीफ मत करो मेरी। " मेरे पिताजी को सुलाकर चाची मेरे साथ हॉलमे टिव्ही देखने लगी। उसने मुझे गोद मे सुलाया और ब्लाऊज के निचले बटन खोलते हुये बोली, "मुझे अब देवरजी की बहुत फिक्र हो रही है। " फिर वो ब्लाऊज एक साइड से उपर करके मुझे स्तनपान करने लगी।
अगले दिन चाची ने मेरे पिताजी को सूप पिलाने के लिए गोद मे सुलाया और वो उनको चमच से सूप पिलाने लगी। दो तीन बार पिते ही पिताजी बोले, "बस हूआ। और नही पी सकता। " चाची सूप बाजूमे रखते हुए बोली, "क्या हूआ देवरजी? " पिताजी, "मुझे सूप अच्छा नही लगता। " चाची बोली, "अब तो आपको स्तनपान ही करना पडेगा। " पिताजी बोले, "ये क्या कह रही हो? " चाची, "जैसे राजू को पिलाती हूँ वैसे ही आपको भी पिलाऊंगी। " पिताजी डरते हुये बोले, "पर ये पाप है। " चाची, "आपको दूध पीके अच्छा लगा तो उसमे पाप नही होगा। " मेरे पिताजी ना ना कह रहे थे फिर भी चाची ने उसका घूंघट हटा कर उसके ब्लाऊजके निचले बटन खोल दिये। मेरे पिताजी ने चाचीके मुम्मे इतने करीब से देखते ही उनकी जबान अटक गयी। उन्होने बोलने के लिए मुहँ खोला, "पर।" उस ही वक्त चाचीने उसका ब्लाऊज एक साइड से उपर करके उसका भरा हुआ मुम्मा मेरे पिताजी के मुहँ मे घुसा दिया और उनका सर दुसरे हाथ से पकडकर रखा। थोडी देर बाद मेरे पिताजी अपने आप दूध पिने लगे। चाचीने अब भी उसका मुम्मा उनके मुहँ मे पकडकर रखा था। थोडी देर बाद चाचीका मुम्मा खाली होते ही वो पिताजी को दुसरे मुम्मे पर पिलाने लगी। पिताजी अब छोटे बच्चे की तरह चाचीका दूध पी रहे थे। उनको दूध पिलाने के बाद चाची ने ब्लाऊजके बटन फिरसे लगा दिये और उनको पुछा, "अब कैसा लग रहा है आपको? " पिताजी बोले, "अब तो थोडी ताकद आ गयी है। " चाची, "आपको अब शाम को फिरसे पिलाऊंगी। " पिताजी बोले, "ठिक है। "

शाम को मै हॉलमे टिव्ही देख रहा था तब चाची मेरे पिताजी को बाजू के कमरे मे लेकर गयी और उसने उनको गोद मे सुलाया। उस कमरे मे थोडा अंधेरा ही था। चाची ने सफेद रंग का बहुत ही ढीला ब्लाऊज पहना था। फिर चाची उनका सर घूँघट से ढककर उनको छोटे बच्चे की तरह अपना दूध पिलाने लगी।
सुबह रसोईघर मे नाष्टा करने के बाद चाचीने मेरे पिताजी को कहा, "आओ देवरजी, आपको दुदु पिलाती हूँ। " मेरे पिताजी चाची के गोदमे सो गये। चाचीने घूँघट हटाते ही मेरे पिताजी ने उसका एक मुम्मा ब्लाऊजके उपरसे ही मुहँ मे ले लिया। चाचीने थोडी देर बाद वो उनके मुहँ से निकाल लिया। पिताजी बोले, "पिलाओ ना जल्दी। बहुत भुख लगी है। " चाची हसते हुये बोली, "पिला तो रही हूँ ना आपको। क्यू इतनी जल्दी है आपको? " मेरे पिताजी ने फिरसे उसका मुम्मा उनके मुहँ मे लिया। चाची थोडी देर उनका कारनामा देखती रही। फिर वो मेरे ही सामने अपना ब्लाऊज एक साइड से उपर करके उनको छोटे बच्चे की तरह स्तनपान करने लगी। चाची मुझे बोली, "देख तेरे पिताजी कैसे बच्चे की तरह छोटे भाभी का दूध पी रहे है। शरम भी नही आती उनको। "
मै, चाची और मेरे पिताजी गाव की कुछ महिलाओं के साथ काशी जा रहे थे। ट्रेन का सफर था। हम सबको सो ने के लिए एक डिब्बा मिल गया था। रात होते ही पिताजी उपरी बंक पर सो गये। महिलाएं थोडी देर बाते कर रही थी। बाद मे सब सोने लगे। चाची मुझे बोली, "राजू, तू देवरजी के सामने वाले बंकपर सो जा। मै देवरजी के बाजू मे सोती हूँ। " हमारी पडोस की सीमा हसकर बोली, "देवरजी को रात मे प्यास लगी तो क्या पिलाओगी? अब राजू होता तो तू उसको दूध पिलाकर सुला देती। " उसपर बाकी महिलाएं भी हसने लगी। चाची, "चुप बैठो तुम सब। देवरजी बिमार है इसलिए उनके बाजूमे सो रही हूँ। " सब लाईट बंद करके सो गये। मैने उपर से देखा तो चाची मेरे पिताजी की तरफ मुहँ करके उनको सुला रही थी। थोडी देर बाद पिताजी निंद मे ही हलचल करने लगे। तब चाचीने पल्लू हटाकर अपने ब्लाऊजकी उपरी दो बटन खोल दिये और फिर वो मेरे पिताजी को दूध पिलाने लगी। पिताजीकी हलचल कम हो गयी। अब वो छोटे बच्चे की तरह अपने जवान भाभी का दूध पी रहे थे। चाची उनको रातभर स्तनपान करती रही।

अब पडोस की महिलाओं को पता चल गया था की चाची मुझे स्तनपान करती थी। एक रात को पडोस की कुछ महिलाएं हमारे घर पत्ते खेलने के लिए आयी हुयी थी। वो सब हॉलमे पत्ते खेलने लगी। मेरी चाची सिर्फ उनको चाय पानी देने मे व्यस्त थी। बहुत टाइम उन महिलाओं को पत्ते खेलते और बाते करते देख मुझे निंद आने लगी। एक महिला मेरे चाची को हसकर बोली, "देख तेरे भतीजे को निंद आ रही है। उसको सुला दे अभी। " यह सुनकर बाकी की महिलाएं भी हसने लगी। चाचीने हसते हुये मुझे बोला, "आ राजू, तुझे दूध पिलाती हूँ। " मै शरमाते हुये उसके पास गया। चाचीने मुझे गोदमे सुलाया। कुछ महिलाएं मेरे तरफ देखकर हस रही थी। एक महिला ने कहा, "इतने शरमाते क्यू हो राजू? दुध तो सब पिते है। " कुछ महिलाओं ने भी हा कर दी। चाचीने मेरा सर घूँघट से ढक दिया और वो मुझे अपना दूध पिलाने लगी। दूध पिते पिते मुझे महिलाओं की हसी सुनाई दे रही थी। पर थोडी देर बाद वो बंद हो गयी। चाची मुझे घंटेभर स्तनपान कर रही थी।
हमारे घर चाची की माँ कुछ दिनो के लिए रहने आयी थी। रात को चाचीने सबके लिए हॉलमे बिस्तर फेर दिया और दादी को बोली, "तुम वो बाजू मे सो जाओ। " दादी बोली, "तुम्हारे देवरजी किधर सोने वाले है? " चाची बोली, "वो थोडे बिमार है ना तो वो मेरे बगल मे सो जाएंगे। " दादी ने हा कहा। वो एक कोने मे सो गयी। उसके बाद थोडा अंतर रखकर मै सो गया। मेरे पिताजी अंत मे सो गये। चाचीने लाईट बंद किया और मेरे और पिताजी के बिच सो गयी। चाची दादी के साथ बाते करने लगी। थोडी देर बाद मेरे पिताजी ने चाची को अपनी तरफ घुमा लिया और वो हलचल करने लगे। चाची उनके उपर हाथ रखकर उनको सुलाने लगी। दादी ने पुछा, "क्या हुआ? " चाची बोली, "कुछ नही। ये देवरजी निंद मे ही बच्चो जैसी हरकतें करते है। उनको सुला रही हूँ। " दादी हसते हुये बोली, "बहुत खयाल रखती हो अपने देवर का। " चाची, "खयाल तो रखना ही पडेगा। बिमार जो है वो। " मेरे पिताजी अब भी हलचल कर रहे थे। फिर चाची ने उसका घूँघट हटाकर अपने ब्लाऊजके निचले बटन खोल दिये और वो मेरे पिताजी को अपना दूध पिलाने लगी। थोडी देर बाद दादीने पुछा, "तेरे देवरजी सो गये क्या? " चाची हसते हुये बोली, "अब वो छोटे बच्चे की तरह सो रहे है। "

सुबह चाची उठकर बैठी और उसने अपने ब्लाऊजके बटन फिरसे लगा लिए और घूँघट भी ठिक किया। पर दादी तो कब की जाग गयी थी और वो ऐसे ही लेट रही थी। उसने चाचीको हसते हुये पुछा, "तुने ब्लाऊजके बटन क्यू खोले थे? " चाची बोली, "वो राजू अब भी मेरा दूध पिता है ना। लगता है मै उसको पिलाते पिलाते ही सो गयी और बाद मे निंद मे ही देवरजी की तरफ पलट गयी। " दादी हसकर बोली, "मुझे लगा तु देवरजी को दूध पिला रहा थी। " चाची बोली, "तुम ना कुछ भी कहती हो। एक तो वो थोडे बिमार है। " दादी, "ठिक है, मै उन्हे तंग नही करुंगी अब। "
दोपहर को खाना खाने के बाद चाची ने बर्तन धो लिये और मेरे पिताजी को बोली, "चलो मे आपको खोली मे सुला देती हूँ। " वो पिताजी के साथ उनके कमरे मे गयी। उसने बिस्तर फेर दिया और मेरे पिताजी को गोद मे सुलाने लगी। थोडी देर बाद दादीने कमरे मे जा कर देखा तो मेरे पिताजी निंद मे ही हलचल कर रहे थे और चाची उनको हिलाते हुये सुला रही थी। थोडी देर बाद मेरे पिताजी ने निंद मे ही चाचीका एक मुम्मा ब्लाऊजके उपर से ही अपने मुहँ मे ले लिया। दादी हसकर बोली, "लगता है तेरे देवरजी को भुख लगी है। " चाची बोली , "वो निंद मे ऐसी ही हरकत करते है। " उसने पिताजी के मुह से उसका मुम्मा निकाल लिया। दादी ने कहा, "उनको निंद मे ही स्तनपान कर देना ना।" चाची हसते हुये बोली, "ये क्या कह रही हो? वो मेरे देवर है। " दादी, "देवर हो तो क्या हुआ? अभी वो बिमार है ना? और उनका खयाल रखना तेरा परम कर्तव्य है। " चाची बोली, "ठिक है। अब तुम कहती हो तो देवरजी को करती हूँ स्तनपान। आप जा कर सो जाओ। " दादी हसते हुये सोने के लिये चली गयी। फिर चाची अपने ब्लाऊजके निचले बटन खोलकर मेरे पिताजी को छोटे बच्चे की तरह अपना दुध पिलाने लगी। वो उनको बहुत वक्त स्तनपान करती रही।
शाम को हम सब रसोईघर मे नाष्टा कर रहे थे तब दादी ने पिताजी से पुछा, "देवरजी, आपकी तबियत कैसी है अभी? " पिताजी बोले, "अब थोडी ठिक है। दोपहर की निंद के बाद मुझे जरा अच्छा लग रहा है। " दादी हसकर बोली, "अच्छा तो आपको लगेगा ही ना। आपकी भाभी आपको अपना दूध जो पिला रही थी। " पिताजी बोले, "ये क्या बोल रही है आप? " चाची हसते हुये बोली , "आपको मे निंद मे ही स्तनपान कर रही थी और आप बच्चे की तरह मेरा दूध पी रहे थे। " पिताजी, "ये मैने क्या कर दिया? मुझे ईश्वर कभी माफ नही करेगा। " दादी, "आप बिन वजह परेशान हो रहे हो देवरजी। स्तनपान करने मे कौनसा पाप है? अब आप एक आदमी हो यही एक बात है। पर दुध तो आप गाय का भी पिते हो। तो एक औरत का पिने मे क्या दिक्कत है? " पिताजी बोले, "मुझे आपकी बात हजम हो रही है। पर फिर भी मुझे शरम आ रही है। " चाची हसते हुये बोली, "आपको चाहिये तो मै आपको अभी स्तनपान करती हूँ। फिर आप ही तय करो की इसमे पाप है या नही। " पिताजी ने चाचीके मुम्मो को देखा और बोला, "ठिक है। पिलाओ मुझे। " चाची ने मेरे पिताजी को अपनी गोद मे सुलाया। पिताजी चाचीके मुम्मो को देखकर बोले, "मुझे छोटे बच्चे की तरह स्तनपान करना। " चाचीने घूँघट हटाकर उसके ब्लाऊजके निचले बटन खोलते हुये कहा, "हा देवरजी, आपको दूध पिने का पुरा मजा मिलेगा। " दादी उठते हुये बोली, "मे तो चली टिव्ही देखने। " दादी हॉलमे गयी। फिर चाची अपना ब्लाऊज एक बाजू से उपर करके मेरे पिताजी को बच्चे की तरह स्तनपान करने लगी। पिताजी बहुत धीरे धीरे दूध पी रहे थे। चाची उनको दो घंटे स्तनपान कर रही थी। फिर चाचीने अपने ब्लाऊजके बटन फिर से लगा लिए और मेरे पिताजी को पुछा, "मजा आ गया ना देवरजी आपको? " पिताजी, "बहुत मजा आ गया। " चाची हसकर बोली, "अब आप ठिक होने तक मै आपको ऐसे ही स्तनपान करुंगी। " पिताजी, "तुम्हारी जैसी भाभी मिलना बहुत ही सौभाग्य का लक्षण है। " चाची, "अब इतनी तारीफ मत करो। मै मेरा कर्तव्य ही कर रही हूँ।
चाचा दिवाली की छुट्टी मे घर आया था। वो दस दिन घर मे ही रहने वाला था। चाची ने पिताजी को पुछा, "अब मे आपको दूध कैसे पिलाऊंगी? " मेरे पिताजी ने कहा, "मेरे पास एक आयडीया है। " चाची नाटक करने के लिए तयार हो गयी।

रात को पिताजी चाची के पास जिद करने लगे। चाचीने कहा, "बिलकुल नही पिलाऊंगी। " चाचा बोला, "क्या हुआ बडे भैया? " चाची बोली, "अब आप ही देवरजी को समझाओ। " चाचा बोला, "पर हुआ क्या है? " चाची, "देवरजी को राजू जैसा स्तनपान करना है। इसलिए वो मेरे पिछे पडे है। " चाचा हसकर बोला, "भैया, अब आप क्या छोटे हो स्तनपान करने के लिए। बच्चे जैसी जिद मत करो। " पिताजी बोले, "पर मुझे भी दूध पीना अच्छा लगता है। वो जब राजू को पिलाती है तो मुझे भी दूध पिने की याद आती है। अब मै किधर जाऊ दूध पिने के लिए? " चाचा ने मेरे पिताजी को बहुत समझाने की कोशिश की पर पिताजी अपनी जिद पर अडे रहे। फिर चाचा चाची को बोला, "अब बडे भैया इतनी जिद कर रहे है ते पिलाओ उनको दूध। " चाची बोली, "अब आप कह रहे हो इसलिए पिलाऊंगी देवरजी को। " चाची मेरे पिताजी को बाजू के कमरे मे ले गयी। उसने कमरे का लाईट बंद ही रखा और दरवाजा भी खुला ही छोड दिया। चाची ने फिर निचे बैठते हुये मेरे पिताजी को अपने गोद मे सुलाया। चाची घूँघट बाजू मे करके ब्लाऊजके निचले बटन खोलते हुये मेरे पिताजी को बोली, "आप तो बच्चो जैसी जिद करते हो देवरजी। " फिर वो उनको स्तनपान करने लगी। पिताजी बच्चे की तरह दूध पी रहे थे। बहुत वक्त बाद चाची पिताजी को कमरे से बाहर लेकर आयी। चाचा ने हसते हुये पुछा, "तो कैसा लगा दुध आपको, बडे भैया? " पिताजी बोले, "बहुत स्वादिष्ट था। " चाची हसकर बोली, "अब आपको दूध पिने का इतना ही शौक है तो मै आपको रोज पिलाऊंगी। "
दुसरी रात हम दिवाली का डेकोरेशन कर रहे थे। मेरे पिताजी मुझे और चाचा को मदद कर रहे थे। पर उनको ना डेकोरेशन का कुछ पता था और ना की वो हमे चाहिये वैसी मदद कर रहे थे। चाचा उनसे बहुत परेशान हो गया था। थोडी देर बाद चाची हॉलमे आ गयी और वो दुसरे बाजू निचे बैठकें हमारा काम देखती रही। चाचा ने परेशान होकर चाची से कहा, "बडे भैया को जरा सुला दो। देखो हमको कितना परेशान कर रहे है वो। " मेरे पिताजी बोले, "पर मुझे तो तुम दोनो को मदद करनी है। " चाचा, "रहने दो, बडे भैया। " चाची मोरे पिताजी को बोली, "आओ देवरजी मे आपको सुला देती हूँ। " चाचीने जानबूझकर उसका घूँघट उसके एक मुम्मे से थोडा हटा दिया था। वो देखते ही पिताजी काम छोडकर उसके पास गये। चाची उनको अपनी गोद मे लिटाकर सुलाने लगी। पर मेरे पिताजी को निंद नही आ रही थी। चाची हसते हुये बोली, "अब आपको दूध पिलाकर ही सुलाना पडेगा। " फिर चाची हमारे सामने ही मेरे पिताजी का सर घूँघट से ढककर उनको छोटे बच्चे की तरह स्तनपान करने लगी। चाचा हसते हुये बोला, "क्या मजा है बडे भैया का। "
अब मेरे पिताजी जब भी चाची को दुध पिलाने को कहते थे तब वो उनको पिलाने लगी। उस रात हम सो रहे थे। मेरे पिताजी उसके बगल मे सो रहे थे। और चाचा खटाई पर सो गया था । थोडी देर बाद पिताजी ने चाची को उनकी तरफ घूमा लिया। फिर वो चाची के मुम्मो को मॅक्सीके उपर से ही हलके से दबाने लगे। चाची को उनकी इस हरकतों से बहुत आनंद मिल रहा था। फिर पिताजी उसके मॅक्सीके बटन खोलने का प्रयास करने लगे पर वो असफल रहे। चाची हसते हुये बोली, "आपको मॅक्सीके बटन खोलने नही आते ? और चले दुदु पिने। " मेरे पिताजी उतावले हो रहे थे। वो बोले, "पिलाओ ना जल्दी से। मुझे बहुत प्यास लगी है। " चाची हसकर बोली, "आपको जल्द से दुदु पिलाने के लिए ही तो मैने ये मॅक्सी पहनी है। " पिताजी बोले, "और मत तडफाओ मुझे। पिलाओ ना। " चाची थोडी देर उनकी बचकाना बाते सुनती रही। फिर उसने मॅक्सीके बटन खोल दिये और एक भरा हुआ मुम्मा मेरे पिताजी के मुहँ मे घुसा दिया। पिताजी तुरन्त उसका दुध पिने लगे। चाची ने उनको ताना मारा, "देवरजी, आप तो सिर्फ दुदु पिने मे ही एक्सपर्ट हो। मुझे ही कुछ करना पडेगा। " पर मेरे पिताजी थोडी सुन रहे थे। वो तो बच्चे की तरह स्तनपान करने मे व्यस्त थे।

सुबह को चाचा काम के कारण दुसरे गाव चला गया। अब वो पुरे महीने भर आने वाला नही था। मेरे पिताजी बहुत खुश हो गये थे। चाची ने उनको ताना मारा, "अब आपका तो क्या बहुत मजा है। " पिताजी बोले, "चल मुझे स्तनपान कर अभी। " चाची ने कहा, "मेरी एक शर्त है देवरजी। " पिताजी ने पुछा, "कैसी शर्त? " चाची बोली, "मुझे भी आपका मजा लेना है। " पिताजी बोले, "ठिक है। पर मुझे पहले दुदु पिलाओ। " चाची उनको उसके कमरे मे लेकर गयी। उसने निचे बैठ कर मेरे पिताजी को अपने गोद मे सुलाया। चाची बोली, "अब मै भी आपका मजा लुंगी। " फिर उसने मेरे पिताजी के पैंट का बटन खोल दिया और पैंट का झीपर भी निचे कर दिया। पिताजी घबराते हुये बोले, "ये क्या कर रही हो? " चाची बोली, "आपको स्तनपान करना है तो आपको मुझे अपने लंड के साथ खेलने देना होगा। " पिताजी बोले, "पर, मै तुम्हारा देवर हूँ। ये पाप है। " चाची बोली, "मे आपको मुझे चोदने को नही कह रही हूँ। इसमे किसी का नुकसान नही है। मान जाइए नही तो मे आपका स्तनपान बंद कर दूंगी। " मेरे पिताजी बोले, "अब क्या करु। ठिक है। मुझे मंजूर है। " चाचीने घूँघट हटा कर ब्लाऊजके निचले बटन खोल दिये और वो उनको स्तनपान करने लगी। पिताजी हमेशा की तरह उसका दूध पीने लगे। चाचीने एक हाथ उनके सर के निचे रखा और दुसरा हाथ उनके अंडरवेअर के अंदर डालकर उनका लंड बाहर निकाला। पिताजी थोडे रुक गये और फिरसे दूध पिने मे व्यस्त हो गये। चाची उनका लंड सहलाते हुये बोली, "आपका तो इनसे भी बडा है। " चाची उनका लंड धीरे धीरे हिलाने लगी। पिताजी को दर्द हो रहा था पर उनका ध्यान दूध पीने पर ही था। चाची पुरे घंटे भर उनका लंड हिलाते रही। मेरे पिताजी का दूध पीके हो गया तो चाची उनका लंड जोर जोर से हिलाने लगी। पिताजी बेबस होके बोले, "क्या अब पुरे महीने भर का निकाल लोगी। " चाचीने उनकी बात नही सुनी और वो लंड को हिलाती रही। थोडी देर बाद पिताजी चिल्ला गये और उनके लंड से वीर्य का फव्वारा निकल गया। चाची हसकर बोली, "अब मुझे अच्छा लग रहा है। चलो आपको पोछ देती हूँ। "
सुबह को चाची ने मेरे पिताजी को कहा, "चलो मै आपको नहला देती हूँ। " वो पिताजी को हमारे घर के पिछवाड़े स्थित बाथरूम मे लेकर गयी। हमारा बाथरूम बहुत ही बडा है। चाचीने दरवाजा बंद किया और मेरे पिताजी को बोली, "अब आप अपने सब कपडे उतार दो देवरजी। " पिताजी, "ये क्या कह रही हो? " चाची बोली, "कपडे उतार दो नही तो मै आपको स्तनपान नही करुंगी। " मेरे पिताजी ने सब कपडे उतार दिये। चाची निचे बैठकर बोली , "अब मेरे गोद मे लेट जाओ। " पिताजी उसके गोदमे लेट गये। चाची उनका लंड हाथ मे लेकर उसको हलके से मसलने लगी। पिताजी बोले, "दर्द होता है। " चाची, "थोडा दर्द सेह लो। बाद मे आपको दुदु पिलाऊंगी। " पिताजी ने खुश हो कर पुछा, "अभी पिलाओगी क्या? " चाची हसते हुये बोली, "हा हा, थोडी सब्र करो अब। " चाची बहुत देर तक पिताजी के लंड को मसलती रही। थोडी देर बाद मेरे पिताजी का दूध बाहर आ गया। पिताजी अब कमजोर लगने लगे। चाची बोली, "आपको अभी दुदु पिलाऊ ना, देवरजी? " पिताजी बोले, "हा, बहुत प्यास लगी है मुझे अभी। " चाचीने उसका घूँघट पुरा हटा दिया। उसने सफेद ब्लाऊज पहना था। उसने ब्लाऊजके निचले बटन खोल दिये और वो ब्लाऊज एक बाजूसे उपर करके मेरे पिताजी को स्तनपान करने लगी। पिताजी को बहुत प्यास लगी थी इसलिए वो तुरन्त दूध पिने लगे। चाची उनको घंटेभर अपना दूध पिलाती रही। उसके बाद चाची ने उनको नहला दिया।

अगले दिन सुबह चाची ने रसोईघर मे मेरे पिताजी को रोज की तरह ही स्तनपान कराया। पर शाम को वो पिताजी को बोली, "अब मेरा मजा लेने का टाइम है। " पिताजी ने पुछा, "आज क्या करोगी मेरे साथ? " चाची बोली, "मे आज आप के लंड के साथ कुछ करने वाली नही हूँ। पर फिर भी मुझे मजा आयेगा।" वो मेरे पिताजी को कमरे मे लेकर गयी और उसने उनको गोद मे सुलाया। अपना घूँघट पूरा हटाते हुये वो बोली, "मे आज आपको नर्सींग ब्रा मे स्तनपान करुंगी। " उसने ब्लाऊजके सब बटन खोल दिये और अपना ब्लाऊज पुरा उतार दिया। उसने अंदर सफेद रंग का बहुत ही सेक्सी नर्सींग ब्रा पहना था। उसके दोनो मुम्मे बहुत ही पर्फेक्ट आकार के थे। मेरे पिताजी मुहँ खुला ही रखके उसके मुम्मो को देखते रहे। और उनका लंड पैंट के अंदर ही खडा हो गया। चाची उनके चेहरे पर का भाव देखकर हस पडी और बोली, "क्या आपने कभी ब्रा पहनी औरत नही देखी? " पिताजी, "नही। मे सिर्फ दूध पिने मे व्यस्त रहता हूँ। " चाची ने हसते हुये उसके एक बाजू के मुम्मे का स्ट्रॅप खोल दिया और थोडा निचे झुकते हुये अपना भरा हुआ मुम्मा मेरे पिताजी के मुहँ मे दे दिया। पिताजी तुरन्त उसका दूध पिने लगे। चाची ने उनके सर के निचे एक हाथ रखकर उनको सपोर्ट दिया और दुसरे हाथ से उसने उसका मुम्मा उनके मुहँ मे पकडकर रखा। दूध पिते पिते मेरे पिताजी उत्तेजित भी हो गये थे। स्तनपान करते वक्त पिताजी का वीर्यपतन कब हो गया वो उनको भी पता नही चला। चाची का पुरा दूध पिने के बाद वो थोडी देर ऐसे ही पडे रहे। चाची उनके पैंट को देखकर बोली,"लगता है आज आपका दूध फिरसे निकल गया। " चाची ने ब्लाऊज फिरसे पहनकर अपना घूँघट ठिक कर लिया और वो अपने काम करने चली गयी । 

कुछ दिन बाद चाचा घर आया था। दोपहर को खाना खाकर थोडी देर बाद सब हॉलमे लेट रहे थे। चाचा हमेशा खटाई पर ही सोता है। मेरे पिताजी चाची के बगल मे सो रहे थे। चाची पिताजी के तरफ मुहँ करके सोयी थी। उसने आज काले रंग की बहुत ही सेक्सी मॅक्सी पहनी हुई थी। थोडी देर बाद चाचा उठकर पानी पिने के लिए रसोईघर मे चला गया। मेरे पिताजी चाची के पास खिसककर बोले, "मुझे भी प्यास लगी है। दुदु पिलाओ ना। " चाचीने तुरन्त मॅक्सीके बटन खोल दीये और उनको अपना दूध पिलाने लगी। चाचा पानी पीकर वापस हॉलमे आ गया तो अपने बडे भैया को अपने पत्नी का किसी बच्चे की तरह दूध पिता देख हसते हुये पुछा, "बडे भैया अब भी तुम्हारा दूध पिते है?" चाची बोली, "अब देवरजी क्या स्तनपान करना छोडने वाले है। वो छोटे बच्चे की तरह मेरा दूध पिते रहते है। " चाचा बोला, "अब उसको आदत जो लग गयी है दूध पिने की तो तुम क्या करोगी? " चाचा खटाई पर सो गया। चाची मेरे पिताजी को पुरे घंटेभर स्तनपान करती रही।

दुसरे दिन सुबह पिताजी चाची के साथ हमारे खेत की सैर करने गये। हमारा खेत दो सौ एकर का था। खेत की सैर करते करते गरमी बहुत बढ गयी। चाची खेत के कोने मे जो कुछ पेड थे उधर रुक गयी। वो पेडो की छाव के निचे बैठी और मेरे पिताजी को बोली, "देवरजी आपको बहुत प्यास लगी होगी ना। आओ, मै आपको दुदु पिलाती हूँ। " पिताजी बोले, "पर किसी ने देखा तो क्या होगा? " चाची हसते हुये बोली, "कौन देखने आने वाला है इधर? अब बहाने मत बनाओ। आओ जल्दी। " मेरे पिताजी चाचीके गोद मे सो गये। वो पहले तो डर रहे थे। चाची उनका सर घूँघट से ढककर उनको दूध पिलाने लगी। थोडी देर बाद वो बेशरमी से दूध पिने लगे। चाची उनके पैंट के तंबू को देखकर बोली, "देखो आपका लंड भी खुली हवा खाने के लिए तरस रहा है। " उसने पिताजी के पैंट की चेन खोल दी और उनका लंड बाहर निकाला। वो फिर उसको हलके से मसलने लगी। थोडी ही देर बाद उनका वीर्यपतन हो गया। चाची ने उनका लंड वापस पैंट के अंदर डाल दिया और चेन भी लगा दी। फिर उसने अपना पुरा ध्यान पिताजी को स्तनपान करने मे लगा दिया।


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