चाचा चाची की चुदाई
हल्लो फ्रेंड स्टोरी काफ़ी लंबी है इसी लिए मैने इसके 15 पार्ट बनाए है मुझे लगता है कहानी आप लोगों को ज़रूर पसंद आएगी दोस्तो कहानी पढ़कर अपनी राय ज़रूर दें
सूरज के मा- बाप गाओं में रहते थे. पढ़ाई के लिए वो शहर में अपने चाचा – चाची के पास रहता था. उसकी उमरा 9 साल थी और उसकी चाची 28 साल की थी और चाचा 33 के. सूरज को उसकी चाची ही नंगा कर के नहलाती थी. नहलते समय वो रोज़ उसकी नून्न्ी पेर साबुन लगा कर उसको सॉफ करती थी. कई बार सूरज की नून्न्ी तन जाती तो चाची उसको थप्पड़ मार कर कहती अभी तेरी खड़े होने की उमर नही नून्न्ी. सूरज 13 साल का हो गया. चाची 32 की और चाचा 37 के. दुर्भाग्या से दोनो के अभी भी कोई बचा नहीं था इसलिए सूरज को वी बड़े लाड़ प्यार से रखते थे.

सूरज को इस उम्र में भी चाची ही नहलाती थी. वो बड़ा शरमाता था,’ चाचिजी में खुद नहा लूँगा में अब बड़ा हो गया हूँ.’ चाची कहती,’ अच्छा तू बड़ा हो गया, चल बातरूम में तुझे चेक करती हूँ,’ और वी उसके कापरे खोल देती. सूरज की चाची का रंग कला था लेकिन वी थी सनडर. कोई 5फ्ट 4 इंच हाइट थी. कोई 38 इंच के बूब्स थे जिन पेर काले बड़े निपल्स थे. उनकी कमर थोड़ी भारी थी कोई 30 इंच की. गांद विशाल थी कूम से मम 42 इंच. सूरज के सामने चूँकि चाची खुद भी नहा लेती थी इसलिए उसने उनको काई बार नंगा देखा हुआ था.

सूरज के लंड और आँड के आसपास छ्होटे छ्होटे बाल लग आए थे और उसकी नून्न्ी अब मोटी होने लगी थी. उसके अंडकोष भी भारी हो कर लटकने लगे थे. एक दिन जैसे ही चाची ने उसकी नून्न्ी को साबुन लगा कर सॉफ करना शुरू किया वो खड़ी हो गयी. चाची साबुन लगा कर उसको हिलाती रही. सूरज को बड़ी शरम आ रही थी. मगर चाची नही रुकी. कोई दुस मिनिट ऐसे ही हिलने के बाद सूरज की लुल्ली थोड़ी शांत हुई,’ अब तू बड़ा हो गया है सूरज अब तेरी लुल्ली लंड बन गयी है,’ चाची ने उसको कहा और चली गयी.

सूरज चाचा और चाची एक ही कमरे में सोते थे. कभी चाची चाचा के साथ पलंग पर उप्पेर सोती और कभी उसके साथ नीचे. उस रात चाची सूरज के पास आ कर सो गयी, उन्होने सिर्फ़ नाइटी पहनी थी अंडर कुछ भी नही था. सूरज ने सिर्फ़ लूँगी पहनी थी. चाचा चाची ने उसे अभी तक अंडरवेर खरीद कर नही दिया था. रात में चाची हमेशा की तरह सूरज को चपता कर सो रही थी तभी सूरज की लूँगी उप्पेर उठी उसका लंड फिर से तन गया था. चाची ने तुरंत उसके लंड को लूँगी उप्पेर कर के हाथ में लिया और बोली,’ दर्द तो नहीं हो रहा बेटा,’ वी बोली. सूरज बोला नही चाची. मगर चाची ने फिर से उसका सूखा लंड उप्पेर नीचे करना शुरू कर दिया था. शुरज़ को अच्छा भी लग रहा था मगर उसको डर था की कहीं चाचजी देख ना ले.

सूरज के साथ अब नयी दिक्कत होने लगी थी. रात में वो नींद में ही चाची अपनी मम्मी अपनी टीचर अपनी पड़ोसन, कामवाली वगेरह को चोद देता, सुबह उठता तो उसकी लूँगी गीली मिलती. अब उसके लंड से गीला गढ़ा सफेद द्रव्य निकलता था. दुर्भाग्या से उसके कपड़े भी चाची ही धोती थी. एक दिन उसके चाचा उसके लिए दो नयी लूँगी और दो अंडरवेर ले कर आए. चाचा चाची ने उसे उनके सामने ही पहनने को कहा,’ बेटे हुमसे क्या शरमाना, पहन कर दिखाओ ताकि पता चले की साइज़ सही है या नही,’ उसके चाचजी बोले.’ सूरज को चाचा के सामने ही चाची ने चड्डी पहनाई मारे डार्क ए फिर उसका लंड फूलने लगा था. “ अब रोज़ चढ़ि पहनना बेटा तुम बड़े हो गये हो,’ चाचिजी बोली. सूरज बाथरूम में जाकर वापस आ रहा था की उसके कान में चाचा- चाची की बातें पड़ी,’ अब तो इसका वीरया भी बनने लगा है अब देरी किस बात की है?’ चाचजी चाचिजी को कह रहे थे.” हा अब तो रोज़ सुबह इसका लंड खरा होता है और ये सपने में किसी को चोद्ता है और इसकी लूँगी में ही इसका वीरया डिसचार्ज हो जाता है,’ चाचिजी ने चाचजी को कहा.’ अब देर किस बात की है सुषमा( चाचिजी का नाम) , अब इस को चोद ही दो,’ चाचजी ने कहा.’ हा एक दो दिन में ही इसका लंड ले लूँगी,’ चाचिजी बोली. “ हो सकता है तुम्हारे सामने शरमाये दो- तीन दिन के लिए तुम बाहर चले जाओ तब तक में इसको चुदाई सीखा दूँगी,’ चाचिजी ने चाचजी को कहा.’ ठीक है में कल ही बड़े भैसाहब के पास दो दिन के लिए गाओं चला जाता हू,’ चाचजी ने जवाब दिया. सूरज को थोड़ा बहुत तो समझ आ रहा था मगर ज़्यादा कुछ नही.

अगले दिन सुबह चाचजी गाओं चले गये. नौ बजते ही चाचिजी ने सूरज को बाथरूम में आवाज़ दी. चाचिजी खुद टोलिया लपेटे हुए थी. “ आ बेटा तुझे नहला दे फिर हम खूब भी नहा लेंगे,’ चाचिजी बोली. “ चाचिजी अब हम बड़े हो गये हाइन ह्यूम शरम आती है हम खुद नहा लेंगे,’ सूरज बोला.’’ बेटा, तू मेरे लिए तो हमेशा ही छ्होटा रहेगा अब चाचिजी से क्या शरम आ जा,’ ये कह कर चाचिजी ने सूरज की लूँगी उतार दी और उसकी चड्डी पाओ के नीचे खिसका दी. चाचिजी ने खुद का तोलिया भी हटा दिया, चाची भतीजा दोनो बाथरूम में नंगे थे. सूरज ने देखा चाची के पाओ के बीच में बालों का एक गुच्छा था. काक में भी बॉल थे. सूरज के लिंग के आसपास भी बाल लब घने होने लगे थे.

चाचिजी खुद स्टूल पेर बेथ गयी और सूरज को पहले आगे से नहलाना शुरू किया. सूरज हमेशा की तरह घुटनो के बाल नीचे बेथ गया उसका औज़ार नीचे लटक रहा था और उसकी नज़रें चाची की काली बालो वाली चूत से हट नही रही थी. चाची ने पहले उसके बालों में शॅमपू किया फिर उसके सीने और काक में साबुन लगा कर सफाई की. फिर उसको उल्टा किया और उसकी पीठ और गेंड पेर और टाँगो पेर साबुन माला. गेंड पेर साबुन लगाते समय चाची की उंगलिया बार बार उसके च्छेद में सरक रही थी. असचर्यजनक रूप से आज चाची ने उसके लंड पेर ना साबुन लगाया ना उसको धोया जबकि हमेशा वो सबसे ज़्यादा समय उसके लंड को ही धोती थी.

अब चाची खुद खड़ी हो गयी उन्होने उसके लंड को हाथ में पकर कर कहा आज इसकी सफाई बाद में करूँगी ये बड़ा शैतान हो गया है।’ सूरज घबराया शायद चाची को उसकी लूँगी गीली होने का पता चल गया है. चाची ने खड़े होने के बाद कहा ,’ सूरज बेटा आज टब ही अपनी चाची के साबुन लगा कर उनकी सफाई कर दे.’ सूरज ने पहले चाची के सिर पेर शॅमपू किया और फिर वो उनकी छातियो और पेट पेर साबुन लगाने लगा उसने देखा की चाची के निपल्स खड़े हो रहे थे. उसके बाद उसने चाची की पीठ और पावं पेर भी साबुन लगाया, उसे चाची की गांद और चूत पेर साबुन लगाने में शरम आ रही थी,’ क्या हुआ बेटा तू रुक क्यू गया चाची की सब जगहों पेर साबुन लगा,’ चाची बोली. ये सुन कर सूरज चाची की बड़ी गांद पेर साबुन लगाने लगा उसने देखा चाची ने टाँगे चौड़ी कर ली है ,’ बेटा अंडर भी लगा पूरी सफाई कर,’ सूरज समझ गया, वो चाची की गांद के च्छेद के आसपास भी साबुन लगने लगा. इसके बाद चाची ने उसका हाथ अपनी चूत पेर रख दिया और बोली,’ इसके अंडर भी सफाई कर दे बेटा,’ वी बोली. सूरज साबुन लगाने लगा और चाची की चूत में उसकी उंगलिया सरकने लगी. चाची ने तुरंत साबुन लिया और उंसके लंड पेर फेरने लगी सूरज का लंड तन कर कोई 6 इंच फैल गया था. चाची उसके लंड पेर मुट्ठी मरने लगी उधर सूरज चाची की चूत में उंगली करने लगा. कोई दो मिनिट बाद ही सुरक के लंड से एक पिचकारी च्छुटी,’ बेटा इसको वीरया कहते हें ये बड़ा कीमती होता है, ये तेरे इन बड़े अंडकोषों में बनता है,’ चाची ने उसकी गोलियो को छूते हुए कहा.’ ‘ इसको लंड कहते हें ओए इस थेलि को आँड,’ चाची बोली. चाची ने उसके बताया की उनके गुप्तँग को चूत कहते हेँ. “ बेटा जब ये लंड चूत के अंडर जाता है तो वो होती है चुदाई,’ वी बोली.

चाचिजी चाचजी का शेविंग कीट लेकर आई और सूरज से बोली,’ बेटा तू टाँगे छोड़ी कर के बेथ जा स्टूल पेर तेरे लंड के आसपास के बॉल सॉफ करूँगी,’ सूरज अच्छे बच्चे की तरह एकद्ूम नंगा स्ट्क पेर बेथ गया. चाचिजी ने पहले क्रीम लगाया फिर ब्रश से झाग बनाए फिर वो रेज़र फेरने लगी. इस हिस्से में पहली बार रेज़र घूम रहा था सूरज बड़ा डर रहा था कहीं कट नहीं लग जाए,’ बेटा घबराना मत तेरे चाचजी के लंड ऑरा आंड के बॉल में ही सॉफ करती हू आज तक उनको कट नहीं आया,’ वी बोली. जब लंड के अप्पर के बॉल सॉफ हो गये तो चाची के उसके अंडकोष की चमरी पाकर कर उस पेर रेज़र फिरना शुरू कर दिया. धीरे धीरे उसके आँड एकद्ूम चिकने हो गये.चाचिजी ने उसको उल्टा किया औरुस्की गांद के च्छेद के आसपास भी शेविंग शुरू कर दी,’ यहाँ भी सॉफ सफाई ज़रूरी है बेटा,’ वी बोली. उन्होने सूरज के गुप्तँग को पानी से धोया,’ अब देख तेरा चिकना लंड और चिकने आँड, इनको चूसने में अब मज़ा आएगा, ये कह कर चचजी उसके लंड पेर झुकी और उसके मूह पेर जीभ फिरने लगी. सूरज का लंड उत्तेजना से फटा जर आहा था. चाची उसके लंड की आगे की चमरी अपने होतो से हिलने लगी. फिर चाची के हॉट नीचे आए और सूरज की गोलियो को चाटने लगी,’ कितनी बड़ी है तेरी गोलिया और कितनी रसीली भी इनका वेर्य मेरे बड़ा काम का है बेटा,’ ये कह कर वी भूखे कुत्ते की तरह उसके चिकने आँड च्चटने लगी. सूरज का लंड बेकाबू था. चाची ए उसके आँड चाटने के साथ साथ उसके लंड पेर मुट्ठी मारनी शुरू कर दी.
सूरज की हालत खराब थी. उसे लग रहा था उसकी पिचकारी छूटने वाली है. चाचिजी ने अब वापस उसके लंड को मूह में ले लिया और हाथों से आँड को थपकाने लगी,’ चाचिजी मेरा वीरया आने वाला है,’ सूरज पहली बार बोला.’ उधर चाची उसके वीरया की एके क बूँद गटक गयी और उसके लंड के आगे का हिस्सा अपनी जीभ से सॉफ करने लगी.” बेटा अब तेरे इस शानदार लॉड के लिए तेरी चाची को भी तय्यार होना है ,’ ये कह कर उन्होने टाँगे चोरी कर दी और शेविंग कीट की तरफ इशारा किया. सूरज समझ गया. उसने चाची की चूत पेर क्रीम लगा कर रेज़र फिरना शुरू कर दिया और वाहा के बॉल सॉफ करने लगा. जब सारे बॉल सॉफ हो गये तो चाची बोली बेटा अच्छी तरह देख ले एक दो बॉल छूट गये हो तो उनको भी सॉफ कर ले. सूरज ने पहली बार ज़िंदगी में 14 साल की मुरा में कोई चूत देखी थी, उसे दो- तीन बॉल नज़र आए वो उसने सॉफ किए. उसे चाची की चूत के अंडर दो काले होठ दिखाए दे रहे थे और एक कला च्छेद भी.

दिन तो गुज़र गया. रात को नौ बजे सूरज ने खाना खाया फिर वो टीवी देखने लगा. चाचिजी आज जल्दी ही अपने सारे काम ख़तम कर की आ गयी. उन्होने सिर्फ़ साडी और ब्लाउस पहना हुआ था. वी आकर सूरज के पास बेथ गयी. सूरज ने सिर्फ़ लूँगी पहनी थी अंडर अंडरवेर था. चाचिजी ने लाइट बंड कर दी और नाइट लॅंप जला लिया. सूरज को उन्होने गरम दूध दिया > सूरज को खुश्बू से लग रहा था चाचिजी नहा कर आई हेँ और पर्फ्यूम भी लगाया है. कुछ देर बाद वी सूरज के पास आई और उसकी गर्देन ओर सीने पेर हाथ फेरने लगी. चाचिजी की गरम सांसो से सूरज का लंड फूलने लगा, दो सेकेंड में वो 6 इंच का हो गया और उसकी लूँगी तंबू बनने लगी, सूरज ने अपनी टाँगे घुटनो से मोड़ कर उप्पेर करली. मगर चाची ने उसकी लूँगी उप्पेर की और अंडरवेर के उप्पेर हाथ लगा कर बोली,’ आज इसको चूत का रस पिलाना है बेटा,’. चाचिजी ने सूरज की लूँगी उतेरी और उसकी चड्डी नीचे खिसका दी. सूरज का ताना हुआ लॉडा आज़ाद था और छत की तरफ देख रहा था. चाचिजी ने उसको सहलाना शुरू कर दिया. उनकी उंगलिया धीरे धीरे उसके आंडयीयो को भी सहला रही थी. चाचिजी जानती थी सूरज ज़्यादा कंट्रोल नही कर पाएगा और दूसरी बार में ही उसका लंड कुछ कर पाएगा.

चाचिजी ने अपना मूह सूरज के लंड के पास किया और कुतिया की तरह उसके लंड को चूसने चाटने लगी. उनकी हथेलिया उसके नर्म अंडियीयो को मसल रही थी. सूरज दो मिनिट भी कंट्रोल नही कर पाया और चाचिजी के मूह में झाड़ गया. अब चाचिजी ने अपने कपड़े उतार दिए और लेट गयी,’ सूरज आज अपनी चाची की चूत चाट और इसको मज़ा दे,’ वी बोली. सूरज अग्यकारी पुत्रा की तरह झुका और चाची की चूत में जीभ अंडर बाहर करने लगा, चाचिजी गांद हवा में उप्पेर नीचे करने लगी,’ हा बेटा चाट इसको तेरी चाची की चूत तेरी प्यासी है इसको धान्या कर दे, पूरी जीभ अंडर डाल दे बेटा, इसको जीभ से चोद मेरे लाल,’ चाची जी गांद हिलाते हुए बोले जा रही थी. करीब 5 मिनिट बाद वो गॅंड को पागलो की तरह उप्पेर नीचे करने लगी और उनका पूरा बदन कमने लगा,’ में झाड़ रही हू बेटा पी जा अपनी चाची के चूत का पानी,’ ये कह कर वी ढीली पड़ गयी. सूरज नादान था उसका लॉडा वापस तन गया था. चाची ने उसको अपने उप्पेर खींच लिया अपना एक हाथ नीचे लिया और सूरज का लंड पकर कर अपनी चूत के होठों पेर रख दिया,’ अब एक धक्का मार बेटा और तेरे लंड को मेरी प्यासी चूत में घुसा दे,’ वी बोली. सूरज ने ऐसा ही किया. एक झटके में उसका सुपरा चाचिजी की गीली चूत में घुस गया,’ चाची चीख पड़ी, और धक्का मार बेटा,’ वी बोली. सूरज ने लंड को तोड़ा अप्पर किया और वापस एक ज़ोर का धक्का दिया. इस बार तीन चौथाई लंड चाची की चूत में गया था. “ थोड़ा और बेटा,’ वी बोली. सूरज ने इस अपनी गांद की पूरी टक़क लगा दी और इस बार लंड की जड़ तक उसका लंड चाची की चूत में सरक गया, चाची रोने लगी, सूरज को कुछ समझ नहीं आया,’ क्या हुआ चाची दर्द हो रहा है?” उसने पूछा.” नही बेटा मेरी चूत ने पहली बार कोई मर्द का लंड लिया है वो भी तेरा इसलिए खुशी से आँसू निकल पड़े, तू तो बस अपनी चाची को छोड़ बेटा, कोई रहम मत कर, फाड़ दे चाची की चूत, निकल दे उसकी और अपने अंडियीयो की गर्मी, तेरा वीरया पी कर ही ये ठंडी होगी,’ ये कह कर चाची ने उसके धक्को के साथ साथ नीचे से गांद हिलना शुरू कर दिया. सूरज का करक लंड चाची की गीली और टाइट चूत ने कस कर पाकर लिया था,’ आज तेरे गन्ने का रस मेरी चूत की मशीन निकलेगी मेरे लाल,’ ये कह कर चाची ने सूरज की गांद कस कर पाकर ली.’ सूरज उप्पेर नीचे होने लगा उसका पठार जैसा लंड चाची की चूत में अंडर बाहर होने लगा. “ बेटा मेरा पानी निकालने वाला है अब तू ही मेरे साथ साथ पानी छ्चोड़ दे कहते हें आदमी औरत दोनो का पानी एक साथ निकलता है तो बच्चा ज़रूर थारता है,’ सूरज तेज़ी से चोद्ने लगा और एक ही मिनिट में उसका वीरया चाची की चूत में निकल गया, चाची भी साथ ही झाड़ गयी. “ हिलना मत बेटा तेरा वीरया मेरे लिए बेशक़ीमती है ,’ ये कह कर चाची ने पानी दोनो टाँगे सूरज की कमर पेर लप्पेट ली. सूरज चाची को चूम रहा था चाची ने उसके बॉल पकड़ कर उसे भींचा हुआ था.
चाची के आँसू नही रुक रहे थे,’ बेटा आज पहली बार मैने 33 साल की उमरा में कोई मर्द का लंड और उसका वीरया लिया है बेटा,’ वी बोली. चाचिजी सूरज को सहलाते हुए बोली,’ बेटा तेरे चाचजी पूरे मर्द नही हेँ, उनके लंड में टक़क नहीं है और उनके अंडकोष बहुत छ्होटे हेँ, डॉक्टर ने उनके मूँगफली जिट्नी अंडकोष देख कर ही कह दिया था के ये कभी पिता नहीं बन पाएँगे,’ वी बोली. हालाँकि इन्होने मेरी चूत के लिए कई लंड ढूँढे मगर जब तुम आए तो हम दोनो को लगा कुछ साल तुम्हारे पूरे मर्द होने का इंतज़ार कर लेते हेँ ताकि में तुम्हारे बच्चे की मा बन साकु, हुमारे घर का बच्चा ही हो, इसलिए मैने दूसरे मर्दों को अपनी चूत तो चोद्ने दीं अगर वीरया नहीं डालने दिया, आज पहली बार मेरी प्यासी चूत में किसी का वररया डाला है, वी कहने लगी.’ तुम्हे नहलते वक़्त में तुम्हारे आँड देखा करती थी जो अच्छे आकर के थे मुझे लगा जैसी ही तुम्हारा लंड खड़ा होने लगेगा मैं तुम्हारी चुदाई शुरू कर दूँगी,’ चाची बोली.” तेरे चाचजी हमेशा कहते थे सूरज का बच्चा पेट में ले ले,’ वी कहने लगी.’ “ तो क्या चाचजी को कोई ऑब्जेक्षन नहीं?” सूरज ने पूछा,’ नहीं बेटा वी तो उल्टा हुमारी मदद करेंगे, एक बार मेरे गर्भ में तुम्हारा बच्चा आ गया तो चाचा जी खुश हो जाएँगे,’ चाचिजी बोली. ये सब सुनकर सूरज का जवान लंड फिर तनने लगा था और चाची की चूत के बाहरी होतो पेर च्छुने लगा था. चाचिजी को यह पता चल गया था. “ बेटा में इस बार घोड़ी बन जाती हूट उ मुझे वाइसे चोद इस से तेरा लंड चूत में गहरा जाएगा और तेरा पानी भी अंडर चला जाएगा,’ वी बोली और अपनी विशाल गांद हवा में उँची कर दी. ऐसी मोटी काली गांद देख कर सूरज उत्तेजित हो गया. उसने तुरंत अपना लंड चाची की चूत के काले होठों पेर लगाया और सरका दिया,’ चोद राजा चोद भर दे मेरी चूत को तेरे मज़बूत लॉड से,’ उन्होने कहा.’ सूरज का पूरा लंड अंडर सरक गया और अपनी उंगली से वो चाची की गंद मरने लगा,’ चोद्ता जा बेटा चोद और ज़ोर से चोद तेरी चाची की चूत और गांद,’ ये कहकर चाची भी उसके स्ट्रोक्स के साथ गांद हिलने लगी. कोई 5 मिनिट बाद सूरज बोला,’ चाछिईजी डाल दू मेरा वीरया आपकी चूत में?” “ हा बेटा तेरा वीरया तो इसका अमृत है डाल दे पूरा एक बूँद भी अपनेआ आंड में मत बचाना,’ वी बोली. सूरज कुत्ते की तरह हांफता हुआ चाची की चूत में झाड़ गया. उस रात और अगले दिन सूरज ने चाची को कोई 15 बार चोदा और कम से कम आधा लीटर वीरया उनकी चूत में उंड़ेल दिया.
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अगले दिन चाचा गाओं से लौट आए। सूरज दिन भर तो पढ़ाई- लिखाई और घर के कामों में बिज़ी रहा. रात को जल्दी ही खाना खाने के बाद सूरज सोन एके लिए आया. चाचिजी उसके लिए दूध लाई. चाचजी तो पलंग पेर ही खाली लूँगी पहने लेते हुए थे. चाचिजी ने खुद सूरज को अपने हाथो से दूध पिलाया फिर उन्होने लाइट बुझाए बगैर ही अपने कापरे खोल कर नाइटी पहन ली. सूरज का ये द्रश्य देख कर लंड खरा हो गया उसकी लूँगी फिर तंबू बन रही थी और उसको चाचजी के सामने शरम आ रही थी. चाचिजी उसके पास आई और एक ही झटके में उसकी लूँगी उप्पेर कर चड्डी खिसका दी और लंड चूसने लगी. सूरज को शरम आअ रही थी. उधर चाचिजी ने अपनी नाइटी उतार दी थी. “ चाचजी देख रहे हेँ चाचिजी,’ सूरज बोला.” देखने दे बेटा उन्होने अब तक मेरी चूत में कई मोटे लंड जाते देखे हेँ,’ चाचिजी हस्ते हुए बोली. सूरज का बेकाबू लंड चाचिजी के मूह को चोद रहा था.
सूरज से ज़्यादा सब्र नहीं हो रहा था. उसको पता था पहली बार वो ज़्यादा कंट्रोल नहीं कर पाता है और चाचिजी जैसे मंजे हुए खिलाड़ी को ये बात पता थी. चाचिजी उसका मोटे लंड लॉलीपोप की तरह चूस रही थी और उसके चिकने आँड सहला रही थी. चाचा के डर से चुप बैठे सूरज का एक मिनिट मे पानी चाचिजी के मूह में छूट गया उसके मूह से एक ज़ोरदार चीख निकल. चाचिजी उसके पानी को रस की तरह चाट गयी. उसके लंड को वे तब तक दबाती रही जब तक सूरज के रस की आखरी बूँद खाली नही हो गयी. सूरज का लंड जैसे ही सुस्त पड़ा चाचजी कापरे खोल कर नीचे आ गये. उन्होने चाची को सीधा लिटाया और उसके उप्पेर उल्टे हो गये, यानी चाची की चूत चाचा के मूह में और चाचा का लंड चाची के मूह में. सूरज की नज़र चाचा के लंड पेर पड़ी तो उसको बड़ा असचर्या हुआ. चाचा का लंड किसी 4 साल के बच्चे जितना था, ज़्यादा से ज़्यादा दो इंच. नीचे तेली भी छ्होटी थी, ऐसा लग रहा था जैसे अंडकोष के ठेले में किसी ने मूँगफली के दो दाने भर दिए हो. मगर चाची उनके लंड को मज़े से चूस रही थी और चाचा किसी भूके कुत्ते की तरह चाची की चूत और उसकी गांद बारी बारी से चूसे जा रहे थे,’ बस करो में तुम्हारे मूह में झड़ने वाली हू, थोडा गहरा डालो जीभ को,,’ चाची बोली. चाचा की चाटने की आवाज़ें ज़ोर ज़ोर से आ रही थी, ऐसा लग रहा था जैसे कोई बिल्ली कटोरे से दूध चट रही हो. कोई एक मिनिट बाद ही चाची की मोटी गांद शांत हुई , सूरज को पता चल गया चाची का पानी निकल गया. चाची अब बेथ गयी सूरज खड़ा हुआ था. वे उसके लंड को फिर से सहलाने लगी,’ बेटा अब तेरे इन अंडियीयो का रस मेरी बच्चेड़नी में दाल,’ ये कह के वी उसके अंडकोषों से खेलने लगी. सूरज जवान था दो मिनिट में ही उसका लंड तन गया और पूरा 7 इंच हो गया.
चाची ने सूरज की तरफ अपनी गांद कर दी, सूरज समझ गया चाची कुत्ति बन कर चुडवाएगी. सूरज ने अपने लंड का मूह चाची की गीली और फूली हुई चूत पेर रखा. एक झटके में उसने पूरा लंड अंडर पेल दिया. उधर सूरज ने देखा की चाचा चाची के नीचे सरक गये थे. उनका मूह चाची की चूत के पास था जबकि चाची वापस उनका छ्होटा लंड चूस रही थी. चाचा चाची के चूत की क्लाइटॉरिस चाट रहे थे साथ ही उनकी जीभ उसके आते जाते लंड को भी छ्छू रही थी. अब चाचा ने उसके आँड भी स्लर्प स्लर्प कर के चाटने शुरू कर दिए सूरज बेहाल था. थोड़ी देर बाद चाचा नीचे से हटे और सूरज के पीछे आ गये. चाचजी ने अब सूरज के कूद रहे आंडियीयो और उसकी गांद की च्छेद को चाटना शुरू कर दिया,’ चोद बेटा चोद अपने मोटे लंड से इस रांड को, तेरी चाची बेतचोद है इसको तेरे गरम पानी से ही ठंडक मिलेगी,’ वे बोले. अब चाचा उसके अंडकोषों पेर जीभ फिरने लगे और उनको हल्के हल्के मसालने लगे और थपकीया देने लगे,’ खाली कर्ट एरे इन मर्द वाले आण्दियों को इस रंडी के भोस्डे में,’ चाचा बोले.’ नहीं बेटा अभी तो मेरी चूत ही है तेरा बच्चा पैदा करने के बाद ही ये भोसड़ा बनेगी,’ ये कह आर चाची ने अपनी गांद सूरज के स्ट्रोक्स के साथ हिलनी शुरू कर दी. सूरज कोई 5 मिनिट चोद्ने के बाद तेज़ु से हांफता हुआ चाची की चूत में झाड़ गया. चाचा उसके आँड सहलाते रहे.

सूरज को लगा को दो बार की चुदाई के बो सब सो जाएँगे लेकिन चाचा चाची का ख़याल कुछ और ही था. चाचिजी नारियल का तेल लाई और सूरज ने देखा चाचजी घोड़ी बन गये हेँ. चाचिजी ने चाचा की गांद के च्छेद पेर तेल लगाया और उसको सहलाने लगी, चाचा ऊओह आ करते रहे. थोड़ी देर में चाची ने अपनी एक उंगली चाचा की गांद मे सरका दी, और चाचा की चुदाई करने लगी. कोई दो मिनिट बाद चाची की तीन उंगलिया चाचा की गांद मे हुरदंग कर रही थी. कोई पाँच मिनिट की चुदाई के बाद चाची सूरज के पास आई और उसके लंड पेर तेल मलने लगी. उसका लंड जब फूल कर बड़ा हो गया तो वो बोली, बेटा अब तेरे चाचा को उनकी बीवी चुड़वाने का इनाम दे, अपना लंड इनकी गांद मे दाल और इसके पानी से इस हिजड़े की गांद की प्यास बुझा,’ ये कह कर उन्होने सूरज का लंड चाचा की गांद के प्रवेश द्वार पेर रख दिया. सूरज का लंड इतना चिकना था की एक झटके में आधा चाचा की गांद के च्छेद में सरक गया,चाचा काँपने लगे. सूरज ने एकक बड़ा झटका और लगाया और इस बार उसका पूरा लंड चाचा की गंद के अंडर था,’ मार बेटा मार, फाड़ तेरे चाचा की चूत, तू चाचा चाची का सांड है, चोद हम दोनो को ज़ोर ज़ोर से,’ चाचा बोले. चाची पास आकर सूरज को किस करने लगी,, चाची की गरम सांसो और चाचा की टाइट गांद ने सूरज को पागल कर दिया,’ डाल बेटा सूरज डाल अपना मर्डवाले बीज इस नपुंसक की गांद में, भर दे इसकी गांद भी,’ ये कह कर चाची सूरज की आंड मसालने लगी. सूरज 6-7 मिनिट में झाड़ गया. उस एक रात सूरज से चाचा चाची ने कोई डस बार चुडवाया.
चाचा चाची के घर में एक 40 साल की नौकरानी काम करती थी. कभी कभी उसके साथ उसका जवान बेटा और बेटी भी आते थे. उसका नाम गीता था. गीता एकद्ूम छ्होटी और मोटी थी. हाइट 5 फ्ट से भी कम थी और वज़न 75 किलो से भी ज़्यादा. उसके मुममे कोई 42 इंच की हिंज, थोडा पेट भी निकला हुआ था और गांद तो हाथी जैसी थी. वो जब झाड़ू पोछा करती तो सारी को उतार देती और सिर्फ़ ब्लाउस पेटिकोट में ही सब काम करती थी. उसकी गांद के दरार साआफ दिखाई देती थी और उसके बूब्स ब्लाउस से सॉफ झांतके थे. वो ब्रा पनटी नही पहनती थी.

उधर दो महीने बाद चाची को उल्टिया आने लगी. सूरज को उन्होने बता दिया अब वी अपने भतीजे के बच्चे की मा बनने वाली है. चाचा भी खूब खुश थे. मगरा ब चाची ने बच्चा गिर जाने के डर से सूरज की चुदाई बंड कर दी थी. वी उसकी मुहत्ती मारती थी या चूस लेती थी और चाचा की गांद मरवती थी. मगर चूत बिना सूरज का लंड परेशान था. एक दिन जैसे ही गीता घर आई चाची ने उसको ज़ोर से बोला,” गीता, सुन सूरज को बचपन से आज तक में नहलाती आई हू अब में तो नहला नहीं सकती आज से तू ही इसको नहलाया कर.’ गीता सूरज को बाथरूम में ले जबे आई,’ नहीं चाची में अब बड़ा हो गया हू खुद नहला लूँगा,’ वो बोला.” बेटा गीता भी तो देखे तू कितना बड़ा हो गया है,’ ये कह कर उन्होने दोनो को आँख मारी. गीता बोली,’ आओ बाबूजी और अपने कापरे उतरो.’

सूरज बाथरूम में खाली चड्डी में खड़ा हो गया. गीता ने उसके बॉल पीठ पेर साबुन लगाया उसके पावं पेर भी फिर न्नीचे बैठे बैठे ही एक ही सेकेंड में सूरज की चड्डी नीचे सरका दी. सूरज का लंड एकद्ूम सीधा खड़ा था और गीता को सल्यूट कर रहा था,’ वा बाबूजी तुम्हारा लंड तो मस्त है, ये तो एकद्ूम मुस्टंडा है,’ ये कह कर गीता ने साबुन मसलना शुरू किया. गीता इस ढंग से उसके औज़ार को मसल रही थी की सूरज का एक मिनिट में फव्वारा छ्छूट गया,’ क्या बाबूजी इतनी जल्दी पानी निकाल दिया?’ कोई बात नहीं हम आपको पानी कंट्रोल कर्मा सिखाएँगे और लंड भी इस से मोटा कर देंगे,’ ये कह कर गीता ने उसके लंड को पानी से धो दिया. सूरज नहा कर बाहर आ गया,’ क्यू गीता सूरज बड़ा हुआ है की नहीं?” चाची ने पूछा.’ “ हा बेषी बहुजी बड़े तो हो गये मगर अभी शस्त्रा कला में इनको पूरा माहिर कर्मा बाकी है,’ ये कह कर वो हन्स दी.

रात में चाची रोज़ सूरज की मूठ मारती थी और जब चाचजी से रहा नही जाता तो उनकी गांद भी मरवा देती थी. “ बेटा गीता की मा कल सुबह आएगी, तेरे चाचजी के जाने के बाद, तू शरमाना मत, वो बुधिया खूब सारे तरीके जानती हेल अंड को बड़ा करने और पानी को कंट्रोल करने के, तू बिना झिझक और शरमाये हुए उंसको सहयोग कर्मा वो तुझे सबसे बड़ा चुड़क्कड़ बना देंगी, ताकि तेरी टाँग के नीचे से कोई लर्की निकल जाए तो फिर किसी दूसरे लंड के पास नहीं जाएगी,’ चाची बोली. “ उनकी उमरा कितनी है चाची?” सूरज ने पूछा,’ बेटा है तो वो साथ की मगर तुझे उनकी उम्र से क्या, तुझे अपना हथियार मज़बूत कर्मा है बस,’ ये कह कर चाची ने सूरज का पानी निकाला और उसे पी गयी.

अगले दिन चाचजी के जाते वक़्त चाचिजी उनसे बोली,’ सुनोजी 10-12 दिन सूरज के लंड का इलाज चलेगा दिन में खाना बाहर खा लेना ये आपसे शरमाएगा,’ चाचिजी उनसे बोली. चाचा के जाते ही गीता और उसकी मा आ गये. गीता की मा थी तो बुद्धि मगर उसकी नज़रें बड़ी कातिल थी. घर के आँगन में बिछे पाट पेर सूरज बेथा था. “ चाचिजी उसके पास आआए और बोली बेटा तेरे कपड़े उतार और नंगा हो जाअ, मे तेरे पास ही बैठी हू,’ उन्होने कहा. सूरज शर्मा रहा था, मगर चाचिजी ने खुद उसका निक्केर उतारा, शर्ट और बनियान उतारे और चड्डी उतार कर उसको लेटा दिया,’ आओ गीता, आओ अम्मी अब इसका इलाज शुरू करो,’ उन्होने कहा और वे पास में ही कुर्सी पेर बेथ गयी.कहानी अभी बाकी है मेरे दोस्त कमेन्ट जरुर देना कहानी कैसी लगी
गीता और उसकी मा ने अपना ब्लाउस खोल दिया और सिर्फ़ पेटिकोट पहन कर सूरज के पास आ गयी. गीता की मा के बूब्स भी मोटे मोटे थे, उम्र की वजह से ढीले ज़रूर दिख रहे थे मगर निपल्स ज़्यादा बड़े नहीं थे और ब्राउन कलर के थे. गीता के बूब्स तो तरबूज़ जैसे थे और निपल्स मोटे मोटे थे. लगता था जैसे गीता निपल्स चुसवाने की शौकीन है. दोनो औरतों ने सूरज की टाँगे चौरी कर दी. मारे उत्तेजना के सूरज का लंड आसमान की तरफ देख रहा था. “ बेटा ये एक र्वेडिक तेल की मालिश करेंगी जिस से तेरा औज़ार और ज़्यादा सख़्त और मोटा बनेगा,’ चाची बोली. गीत की मा ने एक शीशी से तेल निकाला और धीरे धीरे सूरज के लंड के सुपरे पेर मलने लगी. वो सुपरे की चमरी उप्पेर नीचे कर रही थी. सूरज की गांद मारे उत्तेजना के उप्पेर नीचे हो रही थी. उधर गीता ने अपनी हथेलियो में तेल लिया और उसके अंडकोषों की मालिश शुरू कर दी,’ सूरज बाबू, जैसे ही पानी आने को हो हुमको बताना,’ गीता की मा बोली. “ हा आंटीजी अब मेरा पानी निकालने वाला है,’ सूरज बोला. ये सुनते ही गीता की मा ने सूरज का सुपरा कस कर दबा दिया और हाथ हिलना छ्चोड़ दिया. गीता ने सूरज की गांद और अंडकोषों के बीच के हिस्से को ज़ोर से दबा दिया. सूरज का निकलता पानी रुक गया. कोई दो मिनिट रुकने के बाद दोनो ने फिर से मालिश शुरू कर दी. “बेटा पानी आने को हो तो पहले बता देना,’ गीता की मा बोली. सूरज का जैसे ही फव्वारा च्छुतने को होता दोनो औरते उसको दबा देती. ऐसे सूरज का पानी कोई दुस मिनिट तक उन्होने रोका. हर रोज़ तीन बार दोनो औरते ऐसा ही करती, छ्होते दिन सूरज अपने पानी को कोई 10 मिनिट तक रोक पाया , उसे समझ मे आ गया की पानी आने को हो तो रुक जाओ. पाछवे दिन सूरज खुद ही कंट्रोल करने लग गया,’ रुक जाओ, वो उनसे कहता, धीरे धीरे एक हफ्ते बाद सूरज अपने वीर्यापत पेर नियंत्रण सीख गया. चाची बड़ी खुश थी,’ गीता ये तूने बहुत अच्छा किया, बस पहला बच्चा हो जाए फिर दूसरा खूब चुदवा कर पैदा करूँगी,’ चाचिजी बोली.’ इस तेल में सांड़े का तेल भी मिला है 2-4 महीनों में इसका लंड ऑरा आंड दोनो मोटे हो जाएँगे,’ गीता की माँ बोली.

एक हफ्ते बाद गीता और उसकी मा ने सूरज से कहा,’ आज से चुदाई शुरू होगी इसमे कंट्रोल दिखाना परेगा बाबू,’ ये कह कर गीता और उसकी मा ने फिर से सूरज की मालिश शुरू कर दी. इस बार दोनो बिल्कुल नंगी हो गयी. गीता की चूत पेर बालों का गुच्छा था जबकि उसकी मा की चूत एकद्ूम चिकनी थी, गीता की चूत के होठ अंडर दबे हुए थे जबकि उसकी मा की चूत के हॉट फूले हुए थे. दोनो की गांद मोटी थी. कोई दो मिनिट तेल लगा ने के बाद गीता की मा सूरज के अप्पर आई और अपनी चूत का मूह उसके लंड के सुपरे पेर रखा और धीरे से उसका सुपरा अपने भोस्डे में सरका दिया. धीरे धीरे गीता की मा ने गांद फिर उप्पेर की और लंड को दबा दिया, सूरज का आधा गीला लंड उसकी मा के भोस्डे मे सरक गया. अब गीता की मा अपनी गांद को पूरे ज़ोर से नीचे लाई और इस बार उसने पूरा लंड खा लिया. लंड के पूरा सरकते ही गीता की मा सूरज को चोद्ने लगी और बड़बड़ाने लगी,’ हफ्ते भर की स्वेआ के बाद कोरा लंड मिला है मेरे भोस्डे को, आज इसका रस निचोड़ निचोड़ कर निकालूंगी इस मदारचोड़ का,’ ये कह कर वो ज़ोर ज़ोर से सूरज को चोद्ने लगी. सूरज भी नीचे से चूतड़ हिला रहा था. उधर गीता सूरज क ईक एक आँड को अपने एके क हाथ से अलग अलग मसल रही थी,’ बेटा पानी निकल रहा हो तो बताना,’ गीता की मा बोली. कोई 5 मिनिट की चुदाई के बाद सूरज बोला अब निकालने वाला है, ये सुनते ही गीता की मा तुरंत उसके लंड पेर बेथ गयी और अपनी चूत से उसको कस कर पकड़ लिया. गीता ने तुरंत आँड और गांद के बीच का हिस्सा दबा दिया. ऐसे ही कोई 10-12 मिनिट सूरज चला. पानी निकलते ही दोनो औरतों ने उसे चाट लिया. अगली बार गीता सूरज पेर चढ़ि. ऐसे ही अगले 5-6 दिन तक दोनो औरतें सूरज के अप्पर चढ़ कर उसको चोद्ति रही. 12वी दिन सूरज ने खुद अप्पर चढ़ कर चुदाई शुरू की. अब वो अप्पर भी कंट्रोल सीख गया था अब सूरज आसानी से 20- 25 मिनिट तक चोद सकता था. चाची बड़ी खुश थी.

15 दिन के बाद गीता के साथ एक नयी औरत आई. वो भी कोई 55 साल कीट ही मगर कसा हुआ बदन था. बूब्स छ्होटे थे कोई 32 के. गांद भी हाथ मे आ जाए जितनी ही थी. चाची, गीता और उसकी मा ने आपस मे कुछ बातें की उनके जाने के बाद चाची सूरज से बोली,’ बेटा इस औरत का बेटा पूरा मर्द नहीं है और ये चाहती है इसके पोटा हो, तू इसके घर जाकर सो जाया कर, 10-15 में ज़रूर गर्भ ठहर जाएगा फिर वापस आ जाना’ वो बोली.’ मगर चाची फिर आपको और चाचा को मेरे बगैर कैसे नींद आएगी?’ सूरज ने पूछा,’ कोई बात नही बेटा सांड का फ़र्ज़ है गायों को बच्चा दे,’ ये कह कर चाची ने उसे समझाया. शाम को खाना खाने एके बाद गीता और उसकी मा सूरज को लेन्ने आए साथ मे वो औरत भी थी,’ चलो बेटा ,’ ये कह कर सूरज उनके साथ चल दिया. उन लोगो का घर बड़ा था. सूरज सीधे बेडरूम मे गया. गीता वाहा पेर भी काम करती थी. “ गीता अब तुम और तुम्हारी मा जाओ मे हुमारे हिस्से में से तुम्हे कुछ नही दूँगी, ये कह कर उस औरत ने उनको 500 र्स दिए. दोनो औरतें चली गयीं. “ एटा कपड्रे खोल कर रिलॅक्स हो जाओ पलंग पेर,’ ये कह कर उस औरत ने सूरज के कपड़े उतारने शुरू कर दिए. सूरज अब बिल्कुल नंगा था. उसका जवान लंड खड़ा था. “ बेटा आज कितने सालों बाद असली लंड देखा है मैने, मेरी चूत की प्यास बुझा,’ ये कह कर उस औरत ने सूरज के लंड को किस किया. “ मगर आंटिजी आप तो मुझे अपनी बहू को मुझसे चुड़वाने लाई थी?” सूरज बोला.’ “ नही बेटा, बहू को तो सिर्फ़ तेरा वीरया चाहिए, उसको वो ही दूँगी, चोदेगा तू मुझे पिचकारी उसमे छ्चोड़ेगा,’ ये कह कर उसने अपने कपड़े उतार दिए और सूरज के मूह मे अपने निपल डाल दिए. सूरज उनको चूसने लगा. उसी वक़्त एक जवान औरत वाहा आई जिसके हाथ में दूध का ग्लास था. उमरा कोई 22-24 साल. एकद्ूम गोरी, गुलाबी होठ और कसा हुआ बदन. सास ने बहू के हाथ से दूध का ग्लास लिया और सूरज के होतो से लगा दिया. सूरज एक घूँट मे दूध पी गया. बहू भी पास बैठी थी,’ अब कपड़े उतार बहू, वीरया तो नंगी चूत में लेना पड़ेगा ना,’ यह कह कर सास ने बहू के कपड़े उतारने शुरू कर दिए. सूरज की आँखें फटी रह गयी. उस लेडी जितनी सनडर औरत उसने आज तक नही देखी थी, एकद्ूम गुलाबी निपल्स और वो भी छ्होटे छ्होटे, पतला सा पेट और एकद्ूम चिकनी गुलाबी चूत. गांद थोड़ी सी बाहर निकली हुई. सूरज का लंड एकद्ूम सीधा था, मगर उसको पता था बुधिया को संतुष्ट किए बगैर वो इस सनडर औरत को चोद नही पाएगा. बुधिया तुरंत अपनी टाँगे छोड़ी कर लेट गयी और सूरज को उप्पेर खेंच लिया. सूरज का कसा हुआ लॉडा सतत से उसकी गीली चूत में सरक गया. कोई दो- तीन झटको में उसका विशाल लंड बूढ़ी चूत की सेवा कर रहा था, बहू आश्चर्या से सास की एक जवान लौंदे से चुदाई देखी रही थी. चूड़ते चूड़ते ही सास को बहू का ख़याल आया,’ अब तू भी पास आकर लेट जा और अपनी चूत को गरम कर जैसी ही ये सांड झड़ने को होगा इसको तेरे उप्पेर भेज दूँगी तू इसका सारा पानी चूत में ले लेना,’ वो बोली. वो लर्की पास आकर लेट गयी, सास को चोद्ते चोद्ते ही सूरज ने उसके होठ मूह मे ले लिए और गुलाबी होठों को किस करने लगा, उधर सास चुद्ते चुद्ते बोले जा रही थी,’ चोद मुझे मेरे सांड, चोद फाड़ दे मेरा भोसड़ा मदारचोड़,’ सूरज को पता था बुधिया का पानी निकालने वाला है. किस करते करते सूरज का राइट हॅंड बहू के वक्ष पेर गया और वो उसकी केरियों को ज़ोर ज़ोर से मसालने लगा. बहू की हालत खराब थी. सूरज अब चुदाई का राजा था. बुधिया गाली बोलते बोलते झाड़ गयी. सूरज तुरंत उस पेर से हटा और बहू के उप्पेर आ गया वो तय्यार ही थी. सूरज को पता था कूम चूड़ी चूत में एंट्री थोड़ा टाइम लेगी. उसने धीरे धीरे अपना लॉडा अड्जस्ट किया और सरकने लगा सास की चूत क एरस से भरा लंड बहू की जवान चूत में सरक रहा था और उसकी चीखें बढ़ रही थी,’ थोडा धीरे करो भैया मेरी चूत फट जाएगी,’ बहू बोली. कोई 2 मिनिट बाद सूरज का पूरा लंड उसकी गुलाबी चूत की गिरफ़्त में था. सूरज ने अब रफ्तेर बढ़ा दी थी और उसकी गांद ज़ोर ज़ोर से हिलने लगी. उधर बहू की साँस उप्पेर ही थी, भयानक चुदाई से उसके होश उड़ गये,’ क्यू आंटिजी अगर आपका बेटा मर्द नहीं तो फिर आपकी बहू की सील किसने तोड़ी?” सूरज ने सास से पूछा.’ बेटा ये तो मैने ही मोमबत्ती, गाजर, मूली से इसकी चूत को चोद चोद कर इसकी सील तोड़ी है,’ सास बोली. “ मगरा ब जल्दी इसकी चूत में अपने बीज डालो बेटा ये ज़्यादा चुदाई की अभ्यस्त नहीं है धीरे धीरे होगी,’ सास बोली और सूरज के पीछे आ कर उसके अमरूद के आकर के अंडकोष दबाने लगी,’ अब इन चिकुयों का रस इस गुलाबी चूत मे डालो बेटा,’ वो बोली. सूरज उतीज्न से पागल था. उधर बहू कोई दो बार झाड़ चुकी थी,’ हा भाय्या अब भर दो हुमारी चूत तुम्हारे मर्द के रस से, ह्यूम बच्चा दे दो जल्दी से,’ ये कह कर बहू ने सूरज को कस कर दबा दिया. एक ही मिनिट में सूरज ज़ोर से चीखा और पेड़ से गिरे पत्ते की तरह काँपने लगा. सास के हाथ में उसके चिकू पतहर जैसे कठोर हो गये थे. बहू की प्यासी चूत त्रप्त हो गयी. ऐसे ही कोई 15 दिन तक सूरज रोज़ रात सास बहू को चोद्ता रहा. प्रेग्नेन्सी टेस्ट में बहू पॉज़िटिव निकली, सास ने सूरज के चिकू को धन्यवाद दिया,’ हुमने इनकी मालिश कर के इनको इतना रसीला बनाया है, गीता और उसकी मा बोली.

साल भर के भीतेर भीतेर सूरज की चाची और उस बहू ने बिटो को जन्म दिया. इस से दोनो को संतुष्टि नही हुई. अगले साल दोनो ने एक एक बेटी को जन्म दिया. 20 साल का होते होते सूरज 4 बच्चों का बाप बन चुका था. उसका लंड अब पूरे 8 इंच का था और अंडकोष इतने भारी थे की उसके पॅंट से सॉफ दिखाई देते थे
दो बच्चो के बाद चाची ने ऑपरेशन करवा लिया था, अब सूरज उनको आराम से चोद्ता था. बच्चे हालाँकि छ्होटे थे लेकिन चाची उनके सामने ही आराम से सूरज को चोद्ति थी. सूरज जब 22 साल का हुआ तो चाचा- चाची ने उसके लिए एक सनडर सी लड़की ढूंढी और उस से उसकी शादी कर दी. शादी में हालाँकि सूरज के मा- बाप उसके घरवाले भी मौजूद थे लेकिन चाचा चाची सबसे ज़्याद खुश थे. चाचा चाची के दोनो बच्चे यानी सूरज के बच्चे अपने कज़िन या पिता की शादी में खूब मज़े कर रहे थे.
सूरज की पत्नी का नाम निशा था. वो 20 साल की कमसिन लड़की थी. कोई 5फ्ट 4 इंच ट, 36, 26, 38 का फिगर और रंग गोरा था. जब रात को सूरज सुहग्रात के लिए कमरे में जाने लगा तो चाचिजी उसको कोने में ले गयी,’ बेटा, उसकी कुँवारी चूत को नर्मी से चोदना, ज़्यादा खून ख़राबा मत करना, ‘ वे बोली. सूरज के लंड को उन्होने पाजामा के उप्पेर ही दबा दिया,’ इतना मोटा हथियार कुँवारी चूत एकद्ूम नही ले पाएगी मेरे राजा,’ उन्होने कहा.

सूरज कमरे में घुसा तो निशा ने उसके पॅव च्छुए और दूध का ग्लास पकरा कर कोने में खड़ी हो गयी. सूरज ने उसे पाकर कर बिस्तेर पेर लिटाया, और धीरे धीरे उसके गहने कापरे उतरने लगा,’ लाइट तो बंड कर दो जी,’ निशा बोली. सूरज ने नाइट लॅंप जला लिया. जब सिर्फ़ ब्रा और चड्डी बचे तो निशा बोली,’ मुझे बहुत शरम आ रही है इनको मत उतारना,’ उसने कहा. सूरज ने अपने कापरे भी उतार दिए और सिर्फ़ चड्डी पहन कर निशा को किस करने लगा. निशा की खुश्बू से सूरज सांड़ की तरह बेक़ाबू हो रहा था. उसने निशा की ब्रा भी उतार फेंकी और उसके बूब्स मसालने लगा चूसने लगा. दूसरे हाथ से वो निशा की चूत को चड्डी के अप्पर से दबा रहा था. जब उसको लगा की निशा की चड्डी गीली हो गयी है तो उसने ज़बरदस्ती उसकी चड्डी उतार फेंकी. निशा ने दोनो हाथो से अपनी चूत को धक दिया. सूरज नीचे आया और उसकी मलाईदार चूत चाटने लगा. निशा उत्तेजना के शिखर पेर थी. सूरज ने लोहे को गरम देख कर हथोदे से वार कर्मा मुनासिब समझा. उसने अपने लंड का मूह उसकी कुवारि चूत के मूह पेर रखा और धीरे धीरे सरकने लगा, निशा दर्द से छटपटा रही थी,’ बस रानी तोड़ा धैर्या रखो इतना सा दर्द सहन कर लो फिर तुम्हे बहुत आनंद मिलेगा,’ वा बोला.’ ऐसा कौनसा ज़रूरी हैजी ये सब,बाद में कर लेना मेरे वाहा बहुत दर्द हो रहा है, निशा बोली. मगर सूरज अपनी ज़िंदगी की पहली सील तोड़ने को बेक़ाबू था. इस से पहले उसने चुदाई तो बहुत कीट ही मगर सील बंद चूत उसको आज पहली बार ही नॅसीब हुई थी. सूरज अपना मज़बूत लंड बेरहमी से सरकता गया,निशा रोटी रही और माना करती रही. सूरज का लंड उसकी छूट के खून से लथपथ था मगर वो रुका नही और बो लंड को कम जगह में ही अंडर बाहर करने लगा. सूरज का आधा लंड ही अंडर गया था. चदडार पूरी की पूरी निशा के खून से भर गयी थी. उधर निशा दर्द से चीखने लगी तो डर कर सूरज को लंड बाहर निकलना पड़ा.’ में मार जौंगी प्लीज़ ये काम फिर कर लेना मुझ पेर रहम करो आज आज,’ निशा गिड़गिदने लगी. सूरज गुस्से से कमरे से बाहर आ गया. चाची वहीं खड़ी थी,’ मैने दरवाज़े के च्छेद से सब कुछ देखा है, बहू की सील तो टूट गयी अब 2-3 रुक कर उसको चॉड्ना , 4-5 चुदाई के बाद वो नॉर्मल होगी,’ उन्होने कहा.’ लेकिन चाची कुँवारी चूत को ये लंड आधा ही चोद पाया, मेरा लंड तो अब नियंत्रण से बाहर है, उसने चाची से कहा. चाची बोली,’ चल बेटा मेरे रूम में तेरी चाची ही तेरे काम आएगी,’ उन्होने कहा. रूम का दरवाज़ा बूँद होते ही सूरज ने चाची का पेटिकोट उप्पेर किया और एक ही स्कोंद में निशा के खून से लाल लंड चाची के भोस्डे में सरका दिया,’ बेटा इस से ज़्यादा मेरी क्या ख़ुशनसीबी होगी कीट उ अपनी सुहग्रात के दिन अपनी चाची को चोद रहा है, जी भर के चाची को चोद, इस सुहग्रात को में याद रखूँगी,’ चाची बोली. चाचजी ने इन दोनो चुदाई करने वालो पेर फूल बरसाने शुरू कर दिए. सूरज को लगा जैसे वो चाची को नही अपनी पत्नी को चोद रहा है चाची को लगा जैसे वो अपने पति के साथ सुहाग रात माना रही है.
शादी के बाद सूरज ने चाचिजी की चुदाई जारी रखी. निशा को भी वो चोद्ता लेकिन उसको बिल्कुल भी मज़ा नही आता था,’ चाचिजी वो चुपचाप लेटी रहती है कुछ भी नही बोलती ऐसा लगता है जैसे किसी लाश को चोद रहा हू,’ सूरज ने चाचिजी से कहा. “ बेटा, में हू ना तेरे गरम लंड के लिए कभी कभी उसको चेंज के लिए चोद दिया कर,’ चाची बोली. निशा शादी के ठीक 4 महीने बाद गर्भवती हो गयी और बच्चा पैदा करने अपने मयके चली गयी, सूरज की चाची- चाचा की चुदाई चलती रही. उधर गीता की मा तो चल बसी थी वो भी अब ज़्यादा काम नही करती थी, उसकी 18 साल की बेटी पूनम अब घर का काम करती थी. वो एकद्ूम काले रंग कीट ही और उसके बूब्स मोटे थे और उसके दुबले पतले बदन पेर अलग से नज़र आते थे. कोई 36-37 का साइज़ होगा. सूरज के मूह में उसके बूब्स देखते ही पानी आअ जाता. वो उसके काले निपल्स की कल्पना करता. पूनम की कमर पतली थी गांद आवरेज थी कोई 34 की होगी. “ चाची पूनम की चुदाई कारवओ ना उसके बूब्स देख कर लंड बेक़ाबू हो जाता है,’ सूरज ने चाची के सामने फरमाइश रखी. अगले दिन गीता को कोने में ले जा कर चाची ने पूछा,’ गीता सूरज का तेरी बेटी को चोद्ने का बड़ा मन है, क्या करे?’ उसने पूछा,’ दो- तीन महीने रुक जाओ चाचिजी, इसका गौना हो गया है, शादी हो जाए फिर कोई दिक्कत नही,’ उसने कहा. कभी कभी गीता के साथ उसका 16 साल का बेटा कालू भी घर आ जाता था. एक दिन गीता ने चाचिजी से कहा,’ चाचिजी कालू का लंड भी तय्यार है, कहो तो आपकी चूत पेर चोट करवा दू?” उसने पूछा, चाची जैसा चुड़क्कड़ कहा मना करने वाला था.

अगले दिन कालू निक्केर पहन कर मा के साथ आया. “ कालू तू चाचिजी के कमरे में जा उनके बदन में दर्द है उनकी मालिश कर आ,’ गीता ने अपने बेटे से कहा. कालू कमरे में गया तो देखा चाचिजी खाली ब्रा और चड्डी पहन कर उल्टी लेटी हुई थी उनकी मोटी गांद कालू को सॉफ दिखाई दे रही थी. बॅक और टाँगो पेर मालिश करते करते कालू का लंड बेक़ाबू था. उसका निक्केर फटा जा रहा था. चाचीजी सीधी हुई. कालू उनकी थाइस और पेट और कंधो पेर मालिश कर रहा था, चाचिजी ने उसका खड़ा लंड देख कर ब्रा उतार दी और बोली,’ ले बेटा थोड़ी इधर भी मालिश कर दे.’ कालू चाची के मोटे मोटे बूब्स मसालने लगा. दो मिनिट बाद ही चाचिजी ने चड्डी नीचे खिसका दी और बोली,’ कालू बेटा इधर भी तेल लगा कर अच्छी मालिश कर दे.’ कालू ने पहली बार असली चूत देखी थी वो भी इतनी नज़दीक से, वो चुपच्छप चूत की मालिश करने लगा.’ बेटा थोड़ी उंगली से इसकी चुदाई भी कर दे,’ चाची बोली. कालू चाचिजी की चूत में अपनी उंगली अंनदर बाहर करने लगा.
कालू चाचिजी की चूत को तेल भरी उंगली से चोदे जा रहा था और चाचिजी उतीजित अवस्था में गांद उपेर किए जा रही थी. चाचिजी ज़्यादा इंतेज़ार नहीं कर सकी उन्होने नेकार के उप्पेर ही कालू का गरम लंड दबा दिया. कालू के निक्केर के साइड से अब चाचिजी ने लंड बाहर निकाला और उसको बेरहमी से मसालने लगी. कालू से भी रहा नहीं गया उसने अपना निक्केर नीचे सरका दिया. उधर चाचिजी झड़ने वाली थी,’ कालू मदारचोड़ चोद्ता जा मेरी चूत, रुक मत भोसड़ी के चोद ज़र ज़ोर से चोद भद्वे..’ कहते कहते चाचिजी झाड़ गयी. उधर कालू का पानी भी चाचिजी के हाथ में छ्छूट गया. कालू ने निक्केर पहना और बाहर भाग गया. गीता अंडर आई और पूछा,’ क्या हुआ बीबीजी?” ‘ कुछ नहीं गीता नया लौंडा है आज तो सिर्फ़ मूठ मारी है कल परसो इसको चोदुन्गि,’ चाचिजी बोली.’ “लंड कैसा है मेरे बेटे का?” गीता ने पूछा.’ अरे अपने बाप पेर गया है, एकद्ूम क़ाला और मोटा है, सुपरा तो एकद्ूम आलू जितना बड़ा और मोटा है, चूत में जाकर फस जाएगा,’ चाचिजी बोली. “ तूने तो अपने बेटे को नहीं चोदा?” चाचिजी ने पूछा.’ नही मालकिन हम सब एक कमरे में सोते हेँ इसके बाप को पता चल जाता तो मेरी चूत में मिर्ची डाल देता,’ गीता बोली.’ “ पेर तेरा मन तो है ना अपने बेटे का लंड लेने का?” चाचिजी ने पूछा. “ हा मन तो बहुत होता है जवान लंड किस औरत को अच्छा नही लगेगा,’ गीता बोली. “ तो ठीक है कोई बहाने से 3-4 रात तुम मा बेटे यहा आ जाओ हम दोनो कालू को चोद चोद कर पागल कर देंगे उसको,’ चाचिजी बोली.’ तेरी बेटी को भी ले आना ताकि सूरज को भी नयी चूत मिल जाए, नहीं तो हम कालू को खुल कर नहीं चोद पाएँगे,’ चाचिजी बोली.
कोई दो नहीने बाद गीता की बेटी की शादी हो गयी. हफ्ते भर वो ससुराल रह कर अपने मयके चली आई. अब सब कुछ तय था. एक दिन गीता अपने बेटे बेटी के साथ चाचिजी के घर चली आई. “ सूरज बेटा अब गीता 4-5 दिन यहीं रहेगी, तू उसकी बेटी को चोद्ने की अपनी इच्छा पूरी कर लेना, लेकिन में भी कालू को चोदुन्गि, वो तुझसे शरमाएगा, इसलिए जब तक वो खुल ना जाए, तू हुमारे कमरे में मत आना,’ चाचिजी बोली. चाचजी को अब बिल्कुल सन्यासी हो चुके थे. जब भी ऐसा कुछ होता वी छत पेर जा कर सो जाते. रात को सबने खाना खाया. गीता, कालू और चाचिजी एक कमरे में चले गये. सूरज और गीता की बेटी दूसरे कमरे में.
कालू मूठ ज़रूर मारता था मगर उसने चुदाई अभी तक नहीं की थी. उसके लंड के आगे की चमरी तक नहीं हटी थी. ग़रीबो को भगवान शायद सारी ताक़त लंड में दे देता है. अमरी लोगो के लंड जहाँ छ्होटे होते हेँ वही ग़रीबों के लंड एकद्ूम मज़बूत ऑरा आंड वीरया से भरे हुए होते हेँ. कालू का लंड एकद्ूम क़ाला था और कोई 7 इंच के था. उसका सुपरा एकद्ूम गोल और फूला हुआ था. गीता कालू और चाचिजी बाथरूम में गये और तीन वन एक सुसरे को रगर रगर कर नहलाया. कालू दो नगी औरतों के साथ नहा रहा था इसलिए उसका लंड तो पूरा खरा था. चाचिजी ने कालू की मुट्ठी मारनी शुरू कर दी और गीता ने उसके आँड पेर साबुन लगाना शुरू कर दिया. बस दो मिनिट में कालू के काले आँड की सफेद मलाई निकल गयी,’ अब ये दूसरे रौंद में ज़्यादा देर चोद सकेगा,’ चाचिजी गीता से बोली.
तीनो कमरे में आ गये. कालू को बिस्तेर पेर लिटाया और चाचिजी ने कालू का लंड चाटना और चूसना शुरू कर दिया,’ गीता इस लौंदे का लंड इस मुरा में इतना मज़बूत है आगे जाकर तो ये औरतों के चूत फाड़ देगा,’ ये कह कर वी थूक गिरा कर कालू का चिकना लंड मसालने लगी. उधर गीता ने अपने बेट एके अंडकोष चाटना शुरू कर दिए,’ कालू बेट एके अंडकोष बड़े रसीले हेँ इनका रस ही हम दोनो की चूत की जलती आग को बुझाएगा,’ गीता बोली. कालू का लंड दो मिनिट में फड़फड़ने लगा.. चाचिजी ने अब अपनी गांद उसके अप्पर रखी और अपनी गीली चूत में कालू का लंड सरका दिया. 10-12 झटकों में कालू का पूरा लंड चाचिजी की चूत में था और वी उसको हुमच मुमच कर चोद रही थी,’ मदारचोड़ क्या लंड है तेरा मेरी चूत का कचूमर बना रहा है,’ चाचिजी बोली. गीता तब तक तेल ले आई थी और अपने बेट एके गोल और काले आंदियो पेर मालिश करने लगी,’ कर दे बेटा इन आंदियो का रस खाली, भर दे इस रांड़ की चूत,’ ये कह कर वो उनको धीरे धीरे मसालने लगी.’ कालू अब बेक़ाबू था,’ मा मेरा पानी छ्छूट रहा है,’ वो बोला.’ चाचिजी की चूत तो इंतज़ार कर रही थी,’ छ्चोड़ पानी भद्वे छ्चोड़ इसको मेरी चूत के अंडर अंडियीयो मे एक बूँद भी बचाई तो उनको काट कर तेरे को हिजड़ा बना दूँगी,’ ये कह कर चाची की स्पीड तेज़ हो गयी.’ कालू ने पानी छ्चोड़ दिया. चाचिजी नीचे उतरी और गीता ने अब अपने बेटे का ताज़ा स्वादिष्ट वीरया चाटना शुरू कर दिया. चाचिजी भी वही आ गयी दोनो औरते कालू के वीरया का मज़ा लेने लगी. गीता ने कालू को खड़ा किया और फिर से उसका लंड चाटने लगी,’ जिस चूत से तू बाहर आया है बेटा अब समय आ गया है इसके अंडर जाने का,’ वो बोली. कालू समझ गया अब वो मदारचोड़ बनने वाला है
गीता अपने बेटे का जवान और क़ाला लंड शॅपर शॅपर चूस रही थी,’ कैसा लग रहा है अपने बेट एके लंड का स्वाद?” चाची ने पूछा,’ ऐसा मस्त लॉडा निकला तो मेरी चूत से ही है इसमे मेरी चूत का स्वाद भी शामिल है,’ गीता बोली. “ अगर बेटे का लंड मज़बूत हो तो लोग समझ जाते हेँ की मा चुड़दकड़ है,’ गीता ने कहा,’ अब अपने बेटे को भी तय्यार कर्मा शुरू कर जब तू बुद्धि हो जाएगी तब तुझे जवान लंड की तलाश नहीं करनी पड़ेगी बल्कि घर में ही मिल जाएगा,’ गीता ने चाचिजी से कहा,’ वो तो मे करूँगी ही और तब तक तू ज़िंदा रही तो उसको तेरी बुद्धि चूत भी दूँगी,’ चाचिजी ने कहा. अब तक कालू का लंड मा के मूह में समा नही रहा था. गीता बिस्तेर पेर लेती और कालू से बोली,’ आ बेटा चोद अपनी मा को और उसकी चूत को धान्या कर,’ ये कहते ही कालू मा के उप्पेर आ गया. निशाना चूक ना जाए इसलिए चाचिजी ने उसका मोटा लंड पकरा और उसके सुपरे को गीता की चूत के होट चौरे कर उस पेर रख दिया, कालू का लंड घच की आवाज़ से मा की चूत मे चला गया,’ श मेरे बेटे ऐसा गरम और लोहे की तरह मज़बूत लंड और कहा.. पूरा तूस दे तेरी मा के भोस्डे में और चोद उसको,’ वो बोली. कालू उस्ताद चुड़दकड़ की तरह मा की चोट में लंड अंडर बाहर करता रहा, कोई 3 मिनिट भी नही चोदा होगा की मारे उत्तेजना के गीता का पानी छूटने लगा,’ चोद बेटा चोद अपनी रंडी मा को, अपने मोटे काले लॉड से उसके भोस्डे का कचूमर बना दे , चोद्ता जा मदारचोड़ चोद तेरी मा को भद्वे,’ वो बोली. चाची को लगा अगर मा के साथ बेटे का पॅनिक हूट हे तो दोनो को मज़ा आ जाएगा. उसने अपने दोनो हाथो की उंगलियो से उसके आँड को मसलना शुरू कर दिया, कोई एक मिनिट मे कालू की आंड पठार जैसे हो रहे थे,’ मा मेरे पानी छ्छूट रहा है,’ वो बोला.’ खाली कर दे तेरे आँड मेरे भोस मे और दे दे मुझे एक बच्चा,’ गीता बोली. लगभग चीखता हुआ कालू झाड़ गया. उस रात कालू ने डूस बार अपनी मा और सूरज की चाची को चोदा.
उधर सूरज का सपना पूरा होने वाला था, पूनम को द्ख्ते ही उसकी लूँगी तंबू बन गयी. देख कर पूनम हस्ने लगी,’ क्या तूने कभी खरा हुआ लंड नही देखा है क्या जो बेशार्मो की तरह हस रही है?” सूरज ने गुस्से से पूछा. “ लंड तो मैने कई देख लिए बाबूजी पेर चुदाई के लिए इतना बेताब लंड आज तक नही देखा,’ ये कह कर उसने लूँगी के अप्पर ही सूरज का लंड कस के दबा दिया.’ सूरज का लंड गरम था. दूसरे हाथ से पोनं ने सूरज की आंड दबा दिए,’ हिजरा बनाएगी क्या इतने ज़ोर से आँड दबा रही है?” सूरज ने पूछा. औरत के दबाने से कोई मर्द हिजरा हुआ है क्या बौजी ,’ ये कह कर पूनम ने सूरज की आंड एर ज़ोर से मसल डाले, इस से पहले की सूरज लंड को लूँगी से आज़ाद करता आँड और लंड मसल कर पूनम ने उसी के पानी से उसकी लूँगी भर दी,’ अरे तूने ये क्या किया, जो पानी तेरी चूत मे जाना थॉ ओ मेरी लूँगी मे ही निकल दिया,’ सूरज ने अफ़सोस किया.’ कोई बात नही बाबूजी हुमारी चूत मे अपना नल तो पूरी रात खाली करते रहना थोड़ा लूँगी का भी शगुन हो गया,’ ये कह कर पूनम हास दी. पूनम ने धीरे धीरे सूरज के कापरे उतार डाले और खुद भी एकद्ूम नंगी हो गयी. सूरज उसका नंगा बदन देख कर डंग रह गया मोटे मोटे बूब्स, एकद्ूम सॉफ और फूली हुई छूट मोटी गांद और काले निपल्स. सूरज ने उसके बोबे मसालने शुरू किए तो उसके निपल लंड की तरह खड़े हो गये. सूरज ने उसके निपल्स चूसने शुरू किए. निपल्स का रस लंड मे नया जोश भर देता है. सूरज का लंड फैलने लगा,’ लो बाबूजी लोहा गरम हो रहा है चोट कर दो,’ पूनम बोली.
सूरज ने पूनम को घोड़ी बनाया और एक ही झटके मे अपना गरम लंड उसकी गीली चूत मे पेल दिया,' फाड़ डालोगे क्या मेरी चूत बाबूजी,' पूनम बोली. ये सुन कर सूरज के अंडर का राक्षस जाग गया वो पागलो की तरह अपनी गांद हिलाने लगा. पूनम को लगा जैसे कोई प्यासा लंड पहली बार कोई चूत चोद रहा हो. " बाबूजी आप तो ऐसे चोद रहे हो जैसे अपने इस से पहले कभी किसी को नही चोदा.' " हा रंडी, ऐसी जवान चूत तो मुझे पहली बार ही मिली है, इसको फड़ुँगा तो ही शांति मिलेगी,' ये कह कर उसने स्पीक और तेज़ कर दी. सूरज की गोलिया पोन्नम की गांद से टकरा कर फॅक फॅक की आवाज़े कर रही थी और पूनम भी अपनी मोटी गांद सूरज के झटको के साथ हिलती जा रही थी,' चोदो बाबूजी अपने मूसल से मेरी रसीली चूत, निकल दो इस कुतिया की गर्मी, चो भेन्चोद, चोद मदर्चोद, चोद भद्वे, चोद गॅंडू,..' पूनम गालिया बोले जा रही थी. कोई 5 मिनिट मे पूनम का पानी निकला और उसके एक मिनिट बाद सूरज का. रात मे कोई 6 बार सूरज ने पूनम को चोदा,' बाबूजी इतना पानी डाला है मेरी चूत मे अपने की अब बच्चा तो हो कर रहेगा,' पूनम बोली. पूनम की चिंता थी की वो एक दो बार अपने पति को भी चोद ले ताकि बच्चा होने पेर वो उसे अपना ही समझे. अगले ही दिन वो अपने पति के पास चली गयी और दो दिन उस को चोद कर वापस आ गयी. उधर कालू मा और चाची को चोदे जा रहा था
चाचिजी सूरज से बोली,’ बेटा, कैसी रही पोन्नम की चुदाई?’ ‘ चाची उसकी चूत तो जैसे कोई रस की डली है,’ सूरज बोला.’ “ उसका भाई भी कम चडककर नही इस उम्र मे साले का लंड गधे को टक्कर देता है,’ वो बोली. “ कालू ने अपनी मा को भी चोद दिया क्या?” सूरज ने पुचछा.’ “ वो साली एक नंबर की चुड़ककर है, मुझसे भी कालू को इसलिए चुडवाया ताकि इसी बहाने उसका लंड खा सके,’ चाचिजी बोली. “ आज रात तुब ही आजा तू में, कालू और गीता पूरी रात चुदाई करेंगे,’ चाचिजी बोली.
खाना खाने के बाद चाचिजी और सूरज ने बिस्तेर पेर लेते लेते ब्लू फिल्म लगा दी जिसमे कुत्ता एक अँग्रेज़ औरत को चोद रहा था,’ देख बेटा इस कुते का मोटा गुलाबी लंड कम से कम डूस इंच का होगा, इस औरत की चूत ही फाड़ देगा,’ चाचिजी बोली.’ नही चाची ये अँग्रेज़ औरतें लंड खाने में एक्सपर्ट होती है, कुत्ता थक जाएगा मगर ये चुड़दकर नही थकेगी,’ सूरज ने कहा. चाची ने फिल्म देखते देखते सूरज की लूँगी उतार दी और उसकी चड्डी खिसका दी. फिल्म के एग्ज़ाइट्मेंट से सूरज का लंड एकद्ूम चट्टान की तरह खरा था,’ वा मेरे लाल आज तो तेरा लंड कमाल का कारक है,’ ये कह कर चाची ने सूरज के लंड के सुपरे को अपने होथो से अप्पर नीचे कर्मा शुरू कर दिया. उधर चाची भी नंगी हो चुकी थी. उन्होने अपनी मोटी गांद सूरज के मूह पेर रख दी सूरज उस कुत्ते की तरह चाची की चूत चाटने लगा,’ ओह ब्स्डी के तू तो मेरी चूत खा ही जाएगा, इसको इतने गीला भी मत कर्ट एरा लंड फिसल जाएगा,’ चाची बोली.
उधर मा बेटे अंडर दाखिल हुए तो ये द्रश्य देख कर डंग रह गये. कालू ने चाची की मोटी गांद को काटना और चाटना शुरू कर दिया. उधर गीता नीचे आ गयी और सूरज के आँड चाटने और मसालने लगी. सूरज की गांद उत्तेजने से उप्पेर नीचे होने लगी और वो चाची का मूह चोद्ने लगा. सूरज ज़्यादा सबर नही कर सका कोई दो मिनिट बाद उसका फव्वारा चाची के मूह मे छ्छूट गया, गीता ने उसके टाइट आँड दबा कर सारा रस निकल दिया. उधर कालू ने चाची की गांद चाट चाट कर गीली कर दी थी. इस से पहले की चाची को कुछ पता चले उसने अपना मोटा लंड गुप से चाची की गांद मे सरका दिया,’ अरे कालू ग़लत जगह दाल दिया ये चूत नही है बेटा,’ चाची बोली.’ चिंता मत करो मालकिन आज कालू आपकी चूत की नही गांद की स्वेआ करेगा थोड़ा सबर करो मज़ा आएगा,’ गीता बोली. उधर कालू धीरे धीरे अपना लंड चाची की गांद मे सरकए जा रहा था. सूरज की आँके ये द्रश्य देख कर डंग रह गयी. उसके मूह से कोई एक इंच उप्पेर कालू की आंड लटक रहे थे और उसको एकद्ूम नज़दीक से चाची के गांद मे आता जाता कालू का मस्त लंड दिख रहा था. सूरज को ना जाने क्या सूझी उसने कालू की आंड चूसना शुरू कर दिए कालू की स्पीड बढ़ गयी , कोई दो मिनिट बाद वो गर्राटा हुआ चाची की गांद मे झाड़ गया. चाची के दोनो च्छेद चुद्ने के बाद दोनो लॉंडू ने अब एक साथ गीता के दोनो च्छेदो की चुदाई शुरू कर दी,’ अरे मदारचोड़ो मे चल भी नही पौँगी इतनी बेरहमी से मत चोदो मुझे,’ गीता बोली. मगर वी दोनो चोद्ते रहे जब तक गीता के अंडर दोनो का वीरया नही चला गया

उधर पूनम ने नौ महीने बाद सूरज के बेटे को जन्म दिया और उसका पति बड़ा खुश था. उसे लगा की वो बाप बन गया है. कालू चाचिजी और गीता को चोद्ता रहा. सूरज की पत्नी निशा भी अपनी बेटी को जन्म देने के बाद ससुराल लौट आई थी. सूरज दो बेटो और दो बेटियो का बाप बन गया था. चाचजी घर छ्चोड़ कर ऋषिकेश चले गये और पूजा ध्यान में अपने बचे खुचे दिन गुज़ारने लगे.
एक बच्चे के जन्म के बाद निशा की चूत भी भोसड़ा बन गयी थी. चाचिजी और सूरज अब चोदने के लिए तरस जाते थे. एक दिन निशा नहाने गयी तो सूरज ने तुरंत चाचिजी की सड़ी उप्पेर कर दी,' आज लंड आपको चोदने के लिए मचल रहा है,' वो बोली.' मार ले मेरी बेटा मगर जल्दी करना निशा ना आ जाए,' चाचिजी बोली और अपनी टाँगे फैला दी. सूरज ने गॅप से अपना गरमा गरम लॉडा अंडर पेल दिया और कुत्ते की तरह तेज़ी से अपनी चाची को चोदने लगा,' जल्दी निकाल अपना पानी बेटा बहू आ जाएगी,' चाचिजी बोली. सूरज ने स्पीड बढ़ा दी और एक ही पल में दोनो होश खो बेथे. उधर निशा हमेशा की तरह जल्दी ही बाहर आ गयी, देखा तो उसके होश उड़ गये. उसका पति उसकी सास को यानी अपनी चाची को चोद रहा है. निशा चीखी और दूसरे रूम मे भाग गयी.
सूरज और चाची बड़े परेशान थे. दो दिन तक निशा रोती रही कुछ भी खाया पिया नही. तीसरे दिन सूरज ने हिम्मत की,' निशा सॉरी वो सब मेरी ग़लती थी मुझे माफ़ कर दो,' वो बोला.' " ग़लती, अपनी चाची को नही छ्चोड़ा अपने, में मर गयी थी क्या?" उसने पूछा. " ऐसा नही निशा मेरी ग़लती है ये,' सूरज ने कहा और निशा से माफी माँगने लगा. निशा हफ्ते भर तक समन्य नही हुई. " देखो निशा, चाचिजी भी इंसान है उनकी भी ज़रूरते हेँ अगर मुझसे पूरी हो गयी तो क्या हर्ज़ है?" सूरज ने कहा.' निशा का रोना धोना चलता रहा. आख़िर सूरज का सब्र टूट पड़ा,' इन्होने मुझे पाला पोसा बड़ा किया है, और हा तुम्हे बुरा लगे तो तुम चली जाओ अपने मयके, में चाचिजी को नही छ्चोड़ूँगा,' उसने कहा. सूरज ने यह भी बता दिया की चाचिजी के दोनो बच्चे भी उसीकि औलाद हेँ.
उधर गीता भी कम नही थी,' बहू मान जाओ, चुदाई तो मर्द औरत के बीच चलती रहती है, दो मिनिट में आकड़ा हुआ मर्द औरत की चूत में टंकी खाली कर भूल जाता है, इसको इतना बड़ा मुद्दा मत बनाओ,' उन्होने निशा से कहा. उधर सूरज और चाचिजी अब और बेशरम हो गये थे. रात में सूरज चाचिजी के कमरे मे ही सोता और दरवाज़ा खुला रख कर ही उनको चोद्ता. निशा को समझ मे आ गया की उसका पति अपनी चाची को चोदे बगैर नही मानेगा.
गीता के साथ कालू भी काम करने आ जाता था. वो निशा को हमेशा हसरत भारी नज़र से देखता. एक दिन उप्पेर वाले आले से निशा को कुछ समान चाहिए था. कालू लंबे स्टूल पेर चढ़ा और निशा उसे नीचे से पाकरे हुए थी. कालू ग़रीब था अंडरवेर तो पहनता नही था सिर्फ़ निकेर पहना हुआ था. निशा ने उप्पेर देखा तो उसकी नज़रे फटी रह गयी. निक्केर की साइड से कालू का मोटा सुपरा और मूत का च्छेद उसको देख रहा था, उसी की साइड से एक आँड भी लटका हुआ था. निशा ने इतना मोटा सुपरा ऑरा आंड अभी तक नही देखा था. उस दिन के बाद उसको दिन रात बस कालू का सुपरा और आँड ही दिखाई देने लगे. निशा अब कालू को चाइ का पूछने लगी, उस से हस बोल कर बाते करने लगी. मगर ना उसकी ना कालू की दोनो की आगे बढ़ने की हिम्मत नही थी. अगर गीता की अनुभवी आँखे ये सब भाँप गयी. " निशा की नज़रे कालू पर है, कहो तो दोनो को चुद्ववा दू, फिर वो कुछ नही कह पाएगी,' गीता ने चाची से बोला," हा गीता अब तो यही एक उपाय है जल्दी ये काम कर ले,' गीता बोली. दोनो कालू को कमरे मे बुलाया,' कालू अब तुझे किसी भी हालत में गीता को चोद्नना है बेटा हम तेरा पूरा सहयोग करेंगे,' उन्होने कालू से कहा.' " सूरज बेटा गीता कह रही थी निशा को कालू से चुड़वा देते है और बाद में उसे भी रंगे हाथो पकर लेंगे ताकि फिर वो हमे कुछ भी नही कह पाएगी,' गीता ने सूरज को कहा, सूरज तो इसके लिए तय्यार ही बेठा था. गीता और चाचिजी ने प्लान बनाया की दोनो और सूरज कुछ दिन बाहर चले जाते हेँ ताकि कालू को एकांत मिल जाए,' एक बार दोनो की चुदाई शुरू हो जाए फिर हम लौट आएँगे,' गीता बोली.
अगले दिन सूरज और चाचिजी गाओं जाने का कह कर अपने दोनो बच्चो के साथ निकल परे. गीता एक दिन तो काम पेर आई फिर बोली,' बहूरानी हुमारी तबीयत कुछ ठीक नही, 3-4 दिन कालू ही आपकी मदद कर देगा. चाचो तो इसको घर पेर ही रख लेना आपको डर नही लगेगा,' गीता बोली. निशा को लगा ठीक रहेगा ताकि रात मे उसको डर नही लगेगा. गीता कालू को छ्चोड़ कर चली गयी. दोपहर में गीता ने कालू को चाइ बनाने के लिए कहा और खुद अपनी छ्होटी बेटी को दूध पिलाने बेठ गयी, कालू चाइ बना कर लाया और चाइ का कप रखते रखते उसकी नज़र निशा के दूध से भरे बोबो पेर पड़ी, एकद्ूम गोरे बूब्स और गुलाबी निपल्स थे उसके. कालू की नज़रे वही गड़ गयी. निशा हड़बड़ाई और तुरंत अपनी सड़ी से अपने बूब्स धक लिए
कालू लॉबी मे ही सोता था. निशा रात मे आराम से सो गयी. रात मे उसको बच्ची के दूध के लिए किचन मे जाना था. वो बेडरूम से बाहर आई तो कुछ अलग ही नज़ारा था. कालू नेट पेर कोई ब्लू फिल्म लगा रखी थी और खुद सोफे पेर आधा लेटा हुआ अपनी मूठ मार रहा था. टीवी की रोशनी मे निशा ने देखा कालू का लंड कम से कम 9 इंच था और एकद्ूम सीधा खड़ा था. निशा को समझ नही आया क्या करे मगर दूध लाना भी ज़रूरी था, उसने जैसे ही लाइट ऑन की, कालू एकद्ूम से हड़बड़ा कर खड़ा हो गया और निक्केर उची कर ली. उसकी निक्केर उसका लंड फाडे जा रहा था. " क्या कर रहे थे कालू?" निशा ने पूछा. "कुछ नही मेमसाहिब टीवी देख रहा था,' ये कह कर कालू ने रिमोट से टीवी ऑफ कर दिया. निशा ने कालू की हालत पेर रहम किया और खुद ही किचन मे जाकर दूध गरम करने लगी. थोड़ी देर मे कालू आआया,' में गरम कर देता हू मेडम,' वो बोला. निशा कुछ नही बोली. कालू चुपचाप खड़ा रहा. निशा ने तिरछी नज़रो से देखा की कालू का लंड अभी भी पूरी तरह बेठा नही था, हालाँकि वो उसको पाओ के बीच मे दबाए हुए था. निशा ने कहा,' कालू तुम दूध पियोगे?" ' नही मेमसाहिब,' कालू बोला. निशा ने बच्चे का दूध बॉटल मे डाला और दो ग्लासस मे खुद का और कालू का दूध डाल दिया. ' इन दोनो ग्लासस को लॉगी मे ले चलो,' उसने कालू से कहा. बच्चे को दूध पीला कर निशा लॉबी मे आई. कालू नीचे ज़मीन पेर बैठा था. वो खुद सोफे पेर बेठी,' कालू दूध पी लो मे भी पी रही हू,' उसने कहा. कालू भी दूध पीने लगा. " अच्छा सच बताना तुम क्या कर रहे थे और टीवी पेर क्या देख रहे थे?" निशा ने पूछा.' "कोई फिल्म थी मेमसाहिब,' कालू बोला. " " देखो कालू अगर तुमने सच नही बताया तो मुझसे बुरा कोई नही होगा,' बोलो क्या देख रहे थे?" निशा ने पूछा. " वो ऐसी वैसी फिल्म देख रहा था,' कालू नीचे देख कर बोला.
" उसको वापस लगाओ, मे भी देखती हू तुम क्या देख रहे थे,' निशा बोली. कालू ने टीवी ऑन कर दिया, कुछ ही देर मे निशा ने देखा की एक मोटे लंड वाला हबशी किसी अँग्रेज़ लड़की की गांद मार रहा था. लर्की कोई 15-16 साल की थी और उस आदमी का लंड कोई 10 इंच से कम नही था. " इतना बड़ा भी किसी का हो सकता है क्या कालू?" निशा ने पूछा,' क्यू नही मेमसाहिब, " कालू बोला. उधर ब्लू फिल्म ओन होते ही कालू का नक्केर फिर से तंबू बन गया था. " तुम इसको देख कर क्या कर रहे थे?" निशा ने पूछा,' "हाथ से कर रहा था मेमसाहिब,' कालू बोला. " इतना एग्ज़ाइट्मेंट होता है तुमको?" निशा ने पूछा,' हा मेमसाहिब,' कालू बोला. "चलो निक्केर खोलो मे हाथ से कर देती हू,' निशा ने बोला.कालू शरमाते शरमाते खड़ा हो गया. निशा ने उसका निक्केर नीचे खिसकाया तो कालू का मोटा लंड ठीक उसकी आँखो के सामने आ गया. निशा दंग रह गयी,; तुम सच कहते थे कालू हबशियो जैसा लंड भी हो सकता है,' ये कह कर उसने कालू के आलू जिट्नी बड़े सुपरे की चमरी अप्पर नीचे करनी शुरू कर दी. दूसरे हाथ से उसने कालू की मोटी मोटी गोलिया सहलाना शुरू कर दी. कालू ने उत्तेजना मे सीधा निशा के बूब्स पेर हाथ डाला और उनको नाइटी के अप्पर से ही दबाने लगा. निशा की नाइटी गीली हो गयी उसने अपनी नाइटी कंधो से नीचे खिसका दी, कालू ने अपने होठ लगाए और निशा का दूध पीने लगा. उसके बूब्स मसालने लगा. उधर निशा की स्पीड बढ़ गयी. उत्तेजित कालू ने कोई दो मिनिट मे ही अपनी टंकी निशा के हाथ मे खाली कर दी निशा ने उठ कर वासनबसन मे अपने हाथ धोए और सोने चली गयी. रात 3 बजे उसकी बच्ची रोई तो उसकी नींद खुली, उसका दूध तो कालू पी चक्का था और बॉटल उसने कब की खाली कर दी थी, निशा ने कालू को आवाज़ दी,' कालू गुड़िया के लिए बॉटल मे दूध गरम कर लाओ,' उसने कालू से कहा. कालू 5 मिनिट मे बॉटल ले कर आ गया. निशा ने कालू से बिस्तेर पेर ही बेठ जाने को कहा. कालू का लंड उत्तेजना से फॉर खड़ा था,' कल में तुमको पॅंट दील्वौनगी, इतना बड़ा समान तुम्हारे निक्केर ने नही आता कालू,' निशा ने बोला. बच्ची दूध पीते ही सो गयी. " तुमने कभी किसी के साथ किया है कालू?" निशा ने पूछा.' हा मेमसाहिब,' कालू बोला.' किस किस के साथ?" निशा ने पूछा.कालू चुप रहा. निशा को गुस्सा आया,' अब किया है तो बताने मे क्या शर्म जल्दी बताओ,' उसने कहा.' कालू बोला की उसने अपनी मा और सूरज को चाची दोनो को चोदा है. निशा पूछती गयी और कालू सारी बाते बताता गया निशा को लगा जैसे इस घर मे सेक्स के अलावा कुछ और नही होता. निशा को लगा वो फालतू ही इतनी पतिव्रता बनती है,' अपना निक्केर उतार कर अप्पर आ जाओ कालू,' उसने कहा. निशा ने अपने कपड़े उतारे और बोली,' अब मुझे वैसे ही चोदो जैसे चाचिजी को चोदा था,' वो बोली.' कालू के सामने गोरी जवान औरत टाँगे फैलाए नंगी लेटी थी, उसने आव देखा ना ताव अपना सुपरा उसकी चूत के मूह पेर रखा और अंडर घुसाने लगा. निशा ने हाथ नीचे किया और कालू का मज़बूत लंड पकर कर उसको आधा अपनी चूत मे सरका दिया. कालू ने ज़ोर से एक झटके मे पूरा लंड अंडर पेल दिया,' कालू मेरी चूत फाड़ देगा तू तो, तेरा लंड बहुत बड़ा है,' निशा बोली. " नही मेमसाहिब आप तो बस इसको लेती जाओ मेरा लंड आपको बहुत मज़ा देगा,' कालू बोला और उसने स्पीड बढ़ा दी. " चाचिजी क्या चूड़ते वक़्त गांद उप्पेर नीचे करती है?" उसने पूछा.' हा मेमसाहिब और गाली बहुत बोलती है,' कालू बोला.' गाली कैसे?" निशा ने पूछा,' वो मुझे भेंचोड़ मदर्चोद भद्वे गॅंडू वगेरह कहती है,' कालू बोला.' निशा ने ईर्ष्या मे गलिया बोलनी शुरू कर दी,' हा कालू तू मदारचोड़ है चोद मूज़े,' वो बोली. "मेरी और उसकी चूत मे क्या फ़र्क है कालू?" निशा ने पूछा.' मेमसाहब उनकी चूत कहा उनका तो भोसड़ा है आपकी चूत तो मलाई है,' वो बोला और ज़ोर ज़ोर से झटके मारने लगा.' निशा का मिनिट मे पानी छ्छूट गया. कालू नेभी ही कोई दो मिनिट मे अपने अंडकोष निशा के पेट मे खाली कर दिए,' सूरज ने चार बच्चे पैदा कर दिए तेरी बहन तक को नही छोड़ा, अब तू मुझे एक बेटा देगा कालू,' ये कह के निशा ने कालू को भीच लिया.
हल्लो फ्रेंड आप कहानी का मज़ा लो ओर अपने हाथों को हिलाते रहो मतलब हेंड प्रेक्टिस करते रहो क्योकि कहानी आप लोगों
को बहुत पसंद आ रही है मुझे लगातार मैल आ रहे है की राज भाई कहानी को जल्दी से जल्दी पूरी कर दो
अब मई आपका ओर ज़्यादा टाइम खराब करूँगा क्योकि मई जानता हूँ की आप कहानी पढ़ने के लिए उताबले हो रहे हैं

कालू ने अगले तीन दीनो तक निशा को जानवरो की तरह चोडा. निशा उसको चाचिजी से ज़्यादा मज़े देना चाहती थी. तीन दीनो बाद सूरज, चाचिजी और गीता आ गये. " क्यू मेमसाहिब कैसा है मेरा बेटा चुदाई मे? कैसा लगा उसका लंड?" गेटा ने निशा से पूछा. " मेरे हज़्बेंड से तो हर मामले मे अच्छा है,' निशा बोली. " अब मुझे सिर्फ़ वो ही चोदेगा उसको ही मे एक बच्चे का बाप बनौँगी,' निशा ने सॉफ कह दिया. "लेकिन सूरज बाबू?" गीता ने पूछा. " उन्होने चार बच्चे दो चुतो से पैदा कर दिए तुमको तुम्हारी बेटी को तुम्हारी मा को अपनी चाची को और और भी ना जाने कितनी चूटे उन्होने चोदि होगी अब वो मुझे कैसे रोकेंगे? वो अपनी चाची को चोदे मेरी चूत तो अब नये लंड ही खाएगी,' निशा बोली.

गीता ने जा कर सारी बात चाचिजी और सूरज को बता दी,'अब आप की और चाचिजी के चुदाई और आपसे उनके दो बच्चो के बारे मे मे कुछ नही कहूँगी लेकिन अगर मेरी चुदाई को लेकर आप कुछ बोले तो मे दुनिया को ये सब बता दूँगी,' निशा ने सूरज को बता दिया. अब ये तय हो गया की एक कमरे मे कालू निशा को चोदेगा तो दूसरे मे सूरज चाचिजी को. गीता दोनो कमरो मे आ जा सकती थी. कालू को चाचिजी को चोद्नेने की मनाही थी. अपनी मा को वो चोद सकता था. कालू ने अपने मोटे अंडकोषो का पानी निशा की चूत मे खाली करना जारी रखा. कोई दो महीनो बाद ये कन्फर्म हो गया की निशा के पेट मे कालू का बच्चा ठहर गया है. निशा उसको जन्म देने पीहर चली गयी. उसको लरका हुआ. बच्चा होने के बाद भी वो कोई साल भर तक वही रही. सूरज को पता चला की वो अपने मोहल्ले की रांड़ बन गयी थी. दो बच्चो के बाद उसने नसबंदी करा लीथी.

उधर सूरज चाचिजी और गीता को चोद चोद कर बोर हो गया था. गीता और चाचिजी भी नया लंड तलाश रही थी. एक दिन गीता ने कहा की उनका कोई रिश्तेदार नेपाल से काम करनेवालो को लाता है. चाचिजी ने उस से कहा की हो सके तो पूरा परिवार ले आओ ताकि सबकी चुदाई हो सके. कोई एक महीने बाद नेपाल से एक परिवार उनसे मिलने आया. कोई 45 साल का आदमी था, उसकी वाइफ 40 की होगी, एक लरका था 16 साल का, दो लरकिया, 18 और 14 की. सब गोरे चित्ते और चिकने थे. गीता ने आँख मारी,' देखो हुमारे यहा पेर भी बहुत सारा काम रहता है तुम चाहो तो हुमारी पीछे के सेवन्त क्वॉर्टर मे रह जाना. चाचिजी का साबुन और पेपड बनाना का धंधा था. काम मे बहुत सारी औरते और आदमियो की ज़रूरत पड़ती थी. चाचिजी आदमी को बड़ा बहादुर और उनके लरके को छ्होटा बहादुर कहती थी. बड़ी लर्की को वो बार्की और छ्होटी को चुटकी कहती थी. कोई 3-4 महीनो मे पूरा परिवार वाहा सेट हो गया. गीता की भी उनसे दोस्ती हो गयी. " अभी भी तुम्हारी चुदाई चलती हा क्या?" गीता ने एक दिन उस औरत से पूछा,' इतने छ्होटे कमरे मे चुदाई की सुविधा ही नही मिलती,' वो औरत बोली. उसका नाम अनुराधा था. गीता ने बतो बतो मे उसके पति के औज़ार और उसकी ताक़त का पूछ लिया,' देखो, मेमसाहब बिल्कुल मस्त है, तुम्हारा मूड हो तो मुझे बता देना, मे उनसे कह दूँगी तुम बंगले मे आ कर कमरे मे चुदाई कर लेना,' उसने कहा. अनुराधा ने अपने पति को ये बताया, दोनो चुदाई को तरस रहे थे, उसने गीता से कह दिया. उसी दिन रात मे गीता ने उनको छत वाले कमरे की चाबी दी और कहा,' देखो तुम दोनो अंडर चले जाना, मे बाहर से ताला बुन्द कर दूँगी, जुब चुदाई हो जाए तो दरवाज़ा खटखटा देना मे खोल दूँगी.' दोनो अंडर गये गीता ने ताला लगा दिया. उसने पहले ही दरवाज़े मे बड़ा च्छेद कर रखा था. चाचिजी को भी बुला लिया. उधर बहादुर ने आव देखा ना ताव अपनी पॅंट खोली और अपनी पत्नी का पेटिकोट अप्पर कर दिया. एक ही मिनिट मे भूखा बहडूर बीवी पेर टूट पड़ा. वो ऊहह आ करती रही. उत्तेजित बहादुर एक ही मिनिट मे झाड़ गया. " गीता इसका लंड तो चिकना और मज़बूत है, मोटाई भी अच्छी है सिर्फ़ ज़िसे 6 इंच से ज़्यादा नही है,' चाचीज़ बोली. " दूसरी बार की चुदाई देख ले मेमसाहिब उस से पता चल जाएगा चलता कितना है,' गीता बोली. दो मिनिट मे बहादुर का लंड फिर से खड़ा था इस बार उसने कोई 15-20 मिनिट तक अपनी बीवी की मारी,' पास हो गया ये मर्द, बाक़ी हुम्से सीख जाएगा,' गीता को चाचिजी ने कहा. बहादुर ने दरवाज़ा खटखटाया और गीता ने खोल दिया. उसने बहादुर को आँख मारी बहादुर उसका मतलब समझ गया

बहादुर और उसकी बीवी अब दो दिन मे एक बार चाबी लेकर चुदाई करते रहे. एक दिन गीता ने बहादुर को बुलाया और बोली,' बहडूर तुम चुदाई तो बहुत अच्छी करते हो मैने और चाचिजी ने छुप छुप कर कई बार देखी है,' बहादुर शर्मा कर हस्ने लगा. गीता को कोई शर्म नही थी, उसने नीचे बेठे बठे ही अपना पेटिकोट उँचा किया और अपनी बालो वाली मोटी चूत बहादुर को दिखा कर बोली ,' अब मेरी चूत मे अपना लंड कब डालोगे?" बहडूर शर्मा कर चला गया मगर उसने आज तक ऐसी औरत नही देखी थी जो खुद का पेटिकोट अप्पर कर के लंड माँगे. उसकी पत्नी तो बहुत शरमाती थी. बहादुर को अब दिन रात ख़यालो में गीता की बालो वाली चूत दिखाई देने लगी. उधर गीता सही मौके का इंतज़ार करने लगी, एक दिन उसने बहादुर को छत के कमरे की सफाई के लिए बुलाया और कुण्डी लगा दी. गीता ने बहादुर को कस कर पकड़ा और हाथ नीचे ले जाकर उसकी पॅंट के उप्पेर से ही उसके लंड को आटे की तरह मसालने लगी. जैसी ही उसके हाथो मे बहादुर का लंड सामने नही लगा वो बिस्तेर पेर लेटी और अपना पेटिकोट उप्पेर कर के पाव चौडे कर दिए,' आजा राजा चोद अपनी इस रानी को.' बहादुर अब रुक नही सकता था. उसने अपना गोरा लंड गीता की चूत मे डाला जो रस से पूरी गीली थी और मशीन की तरह उसको चोदने लगा. " चोद राजे चोद निकाल मेरे भोस्डे की गर्मी तेरे नेपाली लंड से,' वो बोली. बहादुर हॅफ्टा हुआ दो मिनिट मे ही झद गया. गीता ने अब लगभग हर रोज़ बहादुर को चोद्नना शुरू कर दिया. जब दोनो बिल्कुल खुल गये तो गीता बोली,' आज रात को तुम हुमारे घर मे ही सोना कुछ काम का बहाना कर के मे तुझे मेमसाहिब को चुदवाउ गी.'
बहडूर रात का इंतज़ार करने लगा. चाचिजी मे अभी भी डम था. बड़े बड़े बूब्स मोटी गांद सूजे हुए होतो वाली चूत और पूरा जोश. रात मे बहादुर को गीता ने बेडरूम मे बुलाया. बहादुर अंडर गया तो उसने देखा की चाचिजी गाउन पहने लेटी हुई थी. ' बहादुर मेमसाहिब के बदन मे बहुत दर्द है आ जा तू और मे दोनो मिल कर मालिश कर देते है.' गीता ने एक पिंडली और बहादुर ने दूसरी पिंडली पेर मालिश शुरू कर दी. गीता बड़ी उस्ताद थी मालिश करते करते उसने चाचिजी का गाउन उनकी गॅंड तक सरका दिया था,' चाचिजी उप्पेर भी दर्द है क्या?" उसने पूछा,' हा गीता पूरे बदन मे दर्द है,' चाचिजी बोली.' लेकिन बहादुर है,' गीता बोली,' अरे बहादुर घर का ही आदमी है इस से क्या शरमाना,' चाचिजी उल्टे लेट हुए बोली.
गीता ने चाचिजी का गाउन कमर तक उप्पेर कर दिया. " मे गाउन उतार ही देती हू,' चाचिजी बोली. उन्होने गाउन उतारा और चड्डी और ब्रा मे ही लेट गयी. चाचिजी ने काली चॅड्डी और काली ब्रा पहनी हुई थी. उल्टी लेते चाचिजी की पहाड़ जैसी मोटी गेंड देख कर बहादुर का लंड बेक़ाबू हो गया. गीता को उसका फूला हुआ पॅंट देख कर सब पता चल रहा था पेर वो चाहती थी लोहा गरम हो तभी हाथोरे की चोट हो. गीता अब चड्डी की साइड से चाचिजी की गेंड भी मसालने लगी. उसने धीरे से चाचिजी की चड्डी को उनकी गेंड की छेद मे डाल दिया. अब चाची जी की गेंड के दोनो चूतर सॉफ दिख रहे थे,' बहादुर एक गॅंड तुम मसालो एक मे मसलती हू,' बहादुर चाचिजी की गेंड मसल्ने लगा. उसका लंड एकद्ूम गीला हो चुक्का था. " बहादुर तुम्हारे कपड़े तेल से गीले हो जाएँगे तुम उप्पेर के सारे कपड़े उतार दो सिर्फ़ चड्डी पहन कर ही मालिश कर दो,' गीता बोली और बोलते बोलते खुद के सारे कपड़े उतार दिए. बहादुर की हालत पतली हो गयी एक औरत पूरी नंगी थी दूसरी आधी. बहादुर ने अपना शर्ट और बनियान उतार दिया लेकिन पॅंट पहनी हुई थी गीता ने उसके पॅंट की ज़िप खोली और जबरन उसे नीचे खेचने लगी, बहादुर ने खुद ही उसको नीचे खिसका दिया. बहादुर अब धरीदार कछे मे था जिसमे से उसका सीधा खड़ा लंड सॉफ दिख रहा था. गीता ने चाचिजी की चड्डी नीचे खेच दी. चाचिजी ने जैसे ही गेंड उप्पेर की बहादुर ने उनकी सॉफ चूत की झलक देखी. चाचिजी ने चूत के सारे बॉल सॉफ कर रखे थे.
गीता का विचार कुछ अलग था. उसने चाचिजी की गेंड की च्छेद मे खूब सारा तेल डाला और उनकी दरार मे हाथ फिरने लगी. फिर उसने चाचिजी की गेंड के छेद मे तेल डाला और अपनी उंगली अंडर बाहर करने लगी और तेल डालने लगी. बहादुर चाचिजी के विशाल चूटर मसले जा रहा था. चाचिजी की गांद मे धीरे धीरे गीता ने अपनी तीन उंगलिया डाल दी और उनकी गांद चोद्नेने लगी. पता नही गीता को क्या ख़याल आया वो उठी नंगी ही किचन तक गयी और वाहा से एक खीरा उठा लाई. खेरे को उसने तेल पिलाया और चाचिजी की खुली गांद मे उसका मूह घुसा दिया,' ये क्या कर रही है तू गीता?" चाचिजी ने पूछा,' बहादुर के साथ आज आपकी सुहाग रात है चूत तो आपकी चुद चुद कर बड़ी हो गयी गांद मे अभी तक कोई दूसरी चीज़ नही गयी, आज इस से आपकी गान्द मर्वौन्गि,' गीता बोली.' " देख मुझे दर्द हुआ तो मे इसका गरम लंड तेरी सुखी गांद मे डलवा दूँगी,' चाचिजी लेते लेते ही बोली. गीता को पता था अब चाचिजी की गांद पूरी तरह खुल चुकी है उसने बहादुर से कहा,' देर मत कर राजा चोद इस पहाड़ को.' बहडूर ने अपना कच्छा उतारा और चाचिजी की गान्द के च्छेद पेर अपने लंड का गुलाबी सुपरा रखा. गीता ने उसको आगे से पकर कर आधा सुपरा चाचिजी की गांद के च्छेद मे डाल दिया. लंड अपने आप अपना रास्ता खोज लेता है. बहादुर ने थोडा धक्का दिया तो उसका सुपरा चाची की गांद मे पूरा समा गया, चाचिजी दर्द से थोडा चीखी. ये सुन कर बहादुर मे और जोश आया, उसने लंड अंडर खिसकना जारी रखा,' ओह मदारचोड़ तू मेरी कुवारि गांद फाड़ डालेगा क्या भोसड़ी के,' चाचिजी बोली.' हा चाचिजी इसका लंड ही आपकी कुवारि गांद का रास्ता खोजेगा,' गीता बोली. बहादुर तब तक रास्ता समझ चक्का था. अब वो लंड अंडर बाहर करने लगा. चाचिजी भी अपनी गांद हिलाने लगी. गीता दोनो के पीछे आ गयी. एक हाथ से उसने चाचिजी की चूत सहलाना शुरू कर दिया और उनकी क्लाइटॉरिस दबाने लगी और दूसरे हाथ से बहादुर के गुलाबी अंडकोष से खेलने लगी. बहादुर बहुत उत्तेजित था. दो औरते उस से खेल रही थी. उधर चाचिजी चरम सुख मे ज़ोर से चीखी और इधर उनकी गांद मे बहादुर का पानी छुत गया. उस रात बहादुर को दोनो चुड़क्कड़ औरतो ने खूब चोदा.

बहादुर अब तीनो औरतो का सामूहिक चोदन करता रहा. गीता, चाचिजी और अपनी पत्नी तीनो को वो जम कर चोद्ता. उधर सूरज ने बहादुर की पत्नी की चुदाई चालू कर दी. दो आदमी और तीन औरते रोज़ रात दिन चोदने लगे. सूरज की नज़र अब बहादुर की दोनो बेटियो पेर थी. दोनो पति पत्नी जानते थे की अब दोनो बेटी चुदाई ने एक्सपर्ट हो कर रहेगी. मगर एक दिन यकायक निशा वापस घर चली आई. कालू अब कही मज़दूरी करने जाता था. निशा को घर मे घुसते ही पता चल गया की उसकी सास ने बहडूर की और उसके हरामी पति ने उसकी पत्नी की चुदाई शुरू कर दी है और सूरज की नज़र अब दो कुवारि चुतो पर है.
मगर निशा की कामुक नज़रो ने शिकार ढूँढ लिया. उसको लगा की इस से पहले की चाची छ्होटे बहादुर को चोदे उस से पहले ही उसे उसको अपनी गिरफ़्त मे लेना परेगा. निशा ने बच्चे की देखभाल के लिए छ्होटे बहादुर को अपने यहा बुला लिया. वो उसके सामने ही आराम से कपड़े बदल लेती और नहा कर नंगी ही बाहर आ जाती. एक दिन नहाते वक़्त उसने उसको अंडर बुलाया और अपनी पीठ रगर्ने को कहा. बहादुर नंगी निशा की पीठ रगर्ने लगा. वो अब पूरा जवान हो चक्का था. निशा ने उस से कहा,' बहादुर तुम्हारे कापरे गीले हो जाएगे इनको उतार दो,' बहादुर शरमाने लगा. निशा तुरंत खड़ी हुई और उसका शर्ट और निक्केर उतार दिया. वो चड्डी बनियान नही पहनता था. बहादुर का कुवरा चमरी वाला लंड एकद्ूम सीधा खरा था. इतना ताज़ा लंड देख कर निशा के मूह मे पानी आ गया. उसने अपने होटो से उसके चमरी को पीछे किया और उसका गुलाबी सुपरा लॉलीपोप की तरह चूसने लगी. इस से पहले की बहादुर कुछ समझता उसका जवान वीरया निशा के गले के ज़रिए उसके पेट मे उतार गया. अब कुछ भी बाक़ी नही था. एक कमरे मे निशा और छ्होटा बहादुर, दूसरे मे गीता, चाचिजी, बड़ा बहादुर, उसकी पत्नी और सूरज चोद्ते. पूरी रात भेंचोड़ मदर चोद और लंड चूत की टकराहतो की आवाज़े घर मे गूँजती.
छ्होटा बहादुर धीरे ढेरे चुदाई मे बड़ा बन गया. निशा ने उसको एक नंबर का चुड़क्कड़ बना दिया था. शुरू शुरू मे उसकी पिचकारी जल्दी छुट्टी थी मगर निशा ने उसको आँड खाली करने मे जल्दबाज़ी से बचना भी सीखा दिया. उधर एक दिन कालू निशा से मिलने आया, निशा बड़ी खुश हुई वो भी अपने बेटे को देख कर बड़ा खुश था. निशा ने उसके लड़के की लंगोट खोली और उसकी छ्होटी मगर काली नून्न्ी दिखा कर कहा देख ले एक्दुम बाप पेर गयी है इसकी नुन्नि, कालू हस्ने लगा. दोनो ने इस मुलाक़ात मे भी खूब जूम कर चुदाई की,' कालू अब तू तो आता नही मुझे कोई मस्त लंड खाने की इच्छा होती है तू ही ढूँढ ला,' निशा उससे बोली. कालू ने निशा से वादा किया.
कोई दो दिन बाद कालू एक 60 साल के बूढ़े को लेकर आया,' बीबीजी ये साधुरम है मेरे दूर के रिश्ते मे ताऊ लगता है, आपसे मिलवाने लाया हू,' उसने कहा. उस बुड्ढे ने धोती पहनी हुई थी. मेला सा कुर्ता था. पाओ मे भी चप्पल थे. निशा ने उन दोनो को छाई पिलाई फिर उनको रवाना कर दिया. अगले दिन जुब कालू वापस मिलने आया तो निशा बोली,' साले भद्वे मैने तुझे कोई तगड़ा लंड ढूँढने को कहा और तू बुद्धा ले आया, ये तो चोद्ते चोद्ते मेरे उप्पेर ही मार जाएगा,' वो बोली. " ग़लत बीबीजी ऐसा लड पूरे कस्बे मे किसी का नही, खड़ा हो जाए तो ऐसे लगे जैसे कोई गढा हो, एकद्ूम क़ाला और बcचे की कलाई जितना मोटा,' कालू बोला.' मुझे तो विश्वास नही होता,' निशा बोली.' नही बीबीजी ये रोज़ मेरी गांद मारता है चोदना शुरू करता है तो मदारचोड़ का पानी ही नही निकलता,' कालू बोला.' तू तो पूरा मर्द है, तू कब से गांद मरवाने लग गया?" निशा ने असचर्या से पूछा. " बस इस दुनिया मे ऐसा ही है मेमसाहिब जिसके पास जितना बड़ा लंड उसके पास उतनी ही ताक़त, साधुरम का हथियार ज़्यादा मज़बूत है इसलिए मे हार गया,' कालू बोला. " ये मुझे संतुष्ट तो कर देगा?" निशा ने पूछा.' ये बुद्धा चुदाई की मशीन है, पूरी रात भर हम दोनो की मार देगा फिर भी खुद नही झदेगा,' कालू ने कहा. " ठीक है फिर कल रात को इसको ले आ मगर पहले इसको नहलाना धुलना, सफाई वगेरह करना,' निशा बोली.
अगले दिन रात को कालू और साधु आए. कालू उसको बाथरूम मे ले गया और पहले उसको रगर रगर कर साबुन से नहलाया फिर रेज़र से उसके आँड और लंड के पास के बॉल सॉफ किए. साधु अब खुश्बू मार रहा था. निशा ने उसके लिए नये धोती कुर्ते ला रखे थे. उधर कालू नेभी निशा की दी हुई नयी पॅंट और शर्ट पहनी. दोनो निशा के बेडरूम मे आए. गीता को सब पता था,' चाचिजी अब बहू की चुदास इतनी बढ़ गयी की बुद्धो के लंड भी लेने लग गयी,' वो बोली,' हूमे क्या वो जाने और उसकी चूत जाने तू तो अपनी चुदाई से मतलब रख,' चाचिजी बोली.
निशा बिस्तेर पेर लेटी थी डाई तरफ और साधु उसकी बाई तरफ आ गये. उसने सिर्फ़ ब्लॅक कलर की नाइटी पहनी थी, अंडर कुछ भी नही था. कालू ने धीरे धीरे उसका दया बूब दबाना शुरू किया, उधर बुद्धा निशा का दूसरा बूब मसल रहा था. दोनो ने उसकी नाइटी पेट तक नीचे खिसका दी थी, निशा के नरम और गोरे बूब्स पेर दो सख़्त और काले हाथ थे. दोनो ने अब उसके निपल्स को चूसना शुरू कर दिया. पहली बार कोई संभ्रांत महिला के नर्म और गोरे बूब्स इन भूखे ग़रीबो को मिले थे, भूखो की तरह वो उसके बूब्स को लगभग खाने लगे. निशा को दर्द हो रहा था मगर उसे मज़ा भी आ रहा था, जो चीज़ सूरज कीट ही उसे वो सड़कच्छप लोगो मे लूटा कर अच्छा महसूस कर रही थी. उसे लगता था उसके रूप यौवन की उसके पति ने बेइज़्ज़ती की इसलिए वो इसका बदला लेकर रहेगी.
पाँच मिनिट तक किसी औरत के बूब्स से दो मर्द एक साथ खेले तो उसकी चूत तो गीली होगी ही और वो उत्तेजित भी हो जाएगी. निशा पहले तो दोनो के बॉल सहला रही थी फिर उसके हाथ उनके गुप्तांगो पेर चले गये. एक हाथ से उसने कालू के लंड को दबाना शुरू किया दूसरे से साधु का औज़ार नापने लगी. निशा के हाथ से साधु का लंड बार बार फिसल रहा था. उसको लगने लगा की कालू झूट नही बोल रहा था. कालू ने अपने सारे पपड़े खोले और निशा की नाइटी भी उतार दी. वो खड़ा हुआ और निशा के मूह के पास अपना लंड लाया. निशा ने पहले तो उसके सुपरे को किस किया फिर उसके पूरे लंड और आंदियो को चूमने लगी. कालू का लंड फंफनाने लगा. निशा ने कालू के लंड की चमरी पीछे की और उसके मोटे सुपरे पेर जीभ फेरने लगी. कालू का सुपरा लहू के प्रवाह से फटा जर आहा था. साधु ने पहली बार किसी औरत को लंड चूस्ते हुए देखा था. उसकी भी इच्छा हो आई की वो भी अपना लंड निशा के मूह मे दे.' उधर निशा ने कालू के लंड को उसके पेट से सटा दिया और वो आइस्क्रीम की तरह उसको चाटने लगी उसकी जीभ अंडकोष से शुरू कर लंड की टिप तक जाती. थोड़ी देर बाद निशा ने उसका लंड लगभग आधा मूह मे लिया और उसको चूसने चाटने लगी. उसका एक हाथ कालू की गोटियो को धीरे धीरे मसल रहा था ताकि उसो दर्द भी ना हो और मज़ा भी ना आए,' कालू तेरी इन गोलियो को मे बहुत प्यार करती हू क्यूकी यही से मेरा बेटा आया है,' ये कह की ब उसने उसकी एक गोली मूह मे ली और कॅंडी की तरह चूसने लगे. बारी बारी से वो उसकी गोलिया चुस्ती रही, कालू इतना उत्तेजित हो गया की उसका लावा फूटने को आया,' ओह भेंचोड़ मेरा पानी च्छुतने को है, इसको गटक मदारचोड़ नही तो तेरी गांद मार दूँगा रंडी,'' कालू बोला. " हा मेरे राजा तेरा वीरया तो मेरा अमृत है भर दे मेरे पेट को इसकी बूँदो से,' निहा ये कह कर उसके आँड थोड़ा ज़ोर से मसालने लगी. कालू ज़ोर से चीखा और निशा के गले मे झाड़ गया. उसकी गांद कपने लगी.
साधु ने अपनी धोती उतार फेंकी और कालू जैसे ही हटा वो अपना औज़ार लेकर निशा के मूह के सामने आ गया. निशा ने अपनी अब तक की ज़िंदगी मे ऐसी चीज़ नही देखी थी. उसके पास इंची टेप तो नही था मगर कोई एक फुट बड़ा तो उसका हथियार था ही. खाली सुपरा किसी चीकू के आकर का था. साधु के क्लुंड की मोटाई इतनी थी उसके हाथ के घेरे मे शायद वो आधा ही नही सीमतेगा,' कालू ये क्या है?" निशा विस्मित हो कर बोली,' बीबीजी लंड है और क्या असली लंड,' कालू बोला.' मगर ये आदमी का लंड तो नही ऐसा लगता है किसी राक्षस का लंड है या किसी गधे का,' वो बोली. निशा की नज़र अब उस विकराल लंड के नीचे के ठेले पेर पड़ी. उसे लगा जैसे वाहा दो बड़े बड़े चिकू लटक रहे हो,' पूरी दुनिया का वीरया इसने अपने आंदियो मे ही भर लिया क्या?" निशा ने पूछा. मगर उतेज़ित साधु ने अपना मोटा सुपरा निशा के होटो पेर लगा दिया,' चूस रंडी इसको चूस,' उसने कहा. निशा आग्या मानते हुए उस महके लंड को चूसने चूमने चाटने लगी. उसकी चूत का पानी बह कर उसकी पूरी गंद को भिगो चक्का था. कालू ने उसकी चूत के फेक फैलाई और अपनी जीभ अंडर घुसा दी. साधु निशा का मूह चोद रहा था और कालू अपनी जीभ से निशा की चूत चोद रहा था.
हालाँकि साधु का कंट्रोल मशहूर था मगर पहली बार लंड चूस्ते देख वो बेहद उत्तेजित था और 4-5 मिनिट मे उसने अपना गढा क्रीम निशा के पेट मे उतार दिया,' पी जमेरा पानी भेंचोड़ बुझा अपनी प्यास चुड़क्कड़ रांड़, ये कहते हुए वो छ्छूट गया. " निशा के मूह मे चूँकि उसका लंड था इसलिए वो बोल तो कुछ भी नही पाई मगर कालू चुप नही था,' हा उस्ताद ये रंडी आंडरास की शौकीन है, खाली कर दो अपने चीकु इसके अंडर,' वो बोला. उधर निशा कालू के मूह पेर झड़ने को थी,' हा कालू चोद मेरी चूत , चॉड भद्वे चोद्ता जा रुक मत,' ये कह कर वो गांद उप्पेर नीचे करने लगी. कालू ने एक हाथ से तो उसकी चूत के बाहर के हॉट फैलाए हुए थे दूसरे से वो उसकी गांद मे उंगली कर रहा था. निशा की गांद एकद्ूम चिकनी थी. एक सेकेंड मे पूरी उंगली सॅट्ट से भीतेर सरक जाती थी. गांद पेर एक भी बॉल भी नही था. कालू उसकी क्लाइटॉरिस को सॉफ्ट्ली चबा रहा था जो फूल कर किसी बच्चे के लंड जितनी बड़ी हो गयी थी. निशा ने ज़ोर से चीख लगाई, इतनी ज़ोर से की उसके पति और सास को दूसरे कमरे मे सॉफ सुनाई दी,' ये रंडी चुदाई मे हम सबको पीछे छ्चोड़ देगी,' चाचिजी बोली.

निशा तो झाड़ गयी मगर कालू अब दुबारा तय्यार था. उधर साधु का लंड दुबारा खड़ा होने मे टाइम लेता था मगर वो इस वक़्त का इस्तेमाल करना चाहता था. अब उस्ताद के कहे अनुसार कालू नीचे लेट गया निशा उस पेर उल्टी लेट गयी. कालू उसकी चूत चाट रहा था और वो कालू के लंड को तय्यार कर रही थी. साधु एक और कला मे माहिर था. वो गांद ऐसे चाटता था जैसे कोई प्यासा जानवर तालाब का पानी पीता हो. उसने कालू के मूह के अप्पर पड़ी निशा की गोरी मगर मज़बूत गांद का गुलाबी च्छेद ढूँढा और उसके च्छेद पेर अपनी जीभ लगा दी. निशा को सनसनी हुई , कोई पहली बार उसकी गांद के च्छेद को ऐसे चाट रहा था. साधु ने धीरे धीरे अपने थूक और उंगली से उसकी गांद को खोलना शुरू कर दिया, निशा को लगने लगा आज साधु उसकी गांद फड़ेगा. उसे पता चल गया दोनो कुत्ते अपने अपने च्छेद ढूंड चुके है. कोई 5 मिनिट मे साधु ने अपनी तीन उंगलियो से निशा की गांद चोदना शुरू कर दिया. निशा की गांद ऐसे खुल गयी थी जैसे कोई कमल का फूल सुबह सुबह खिलता हो. कोई 4-5 मिनिट बाद साधु ने आलू जैसे मोटे सुपरे को निशा की गांद के च्छेद मे सरका दिया. दर्द और एग्ज़ाइट्मेंट मे उसने कालू के लंड को काट लिया,' भांचोड़ रंडी मुझे हिजड़ा बनाएगी क्या ,' कालू बोला. कालू की आँखो के बिल्कुल उप्पेर उसके चुदाई के उस्ताद की आंड झूल रहे थे जिनको द्देख उसके मूह मे पानी आ रहा था. साधु धीरे धीरे अपना औज़ार निशा की गांद मे अड्जस्ट करने लगा.निशा चीखने लगी,' कालू ये बुद्धा मदारचोड़ मेरे गांद फाड़ देगा उसको रोक,' वो बोली.' उस्ताद रंडी को मज़ा आ रहा है पूरा थुस दो,' कालू बोला. साधु ने पूरा लंड घुसा दिया था. निशा चीख पड़ी.
कालू के सामने उस्ताद के विशाल आँड नाच रहे थे. उसने अपना हाथ बढ़ाया और साधु की गोटिओ को धीरे धीरे मसालने लगा. साधु उतीजित हो कर निशा की गांद कुत्तो की तरह मारने लगा. " कालू ये भड़वा मेरी गांद फाड़ देगा मे पॉटी तक नही जा पौँगी, इसको कह मेरी चूतड़ छोड़ दे और अपना मूसल वाहा से निकाल दे,' निशा बोली.' " नही मेमसाहबशुरू शुरू मे गांद मे दर्द होगा बाद मे ये भी चूत जितना ही मज़ा देगी,' कालू बोला. साधु अब अपना पूरा लंड बाहर निकलता और फिर उसको पूरा अंडर पेल देता, निशा चीक्ख परटी,' ओह मा मर गयी,' उधर कालू ने अपनी दिशा चेंज कर ली. वो निशा के नीचे आया और उसकी चूत मे अपना लंड अड्जस्ट करने लगा,' ओह चुदु तुम दोनो मेरे दोनो च्छेद एक साथ फड़ोगे क्या?" निशा बोली,' भेंचोड़ रंडी तेरे च्छेद चुड़ाने के लिए ही तो बने है, तू क्या सोचती है हम तेरी गांद और चूत की अगरबत्ती करेंगे,' साधु बोला और उसने स्पीड बढ़ा दी.' कालू अब तक नीचे से पूरा लंड निशा की चूत मे घुसा चक्का था. साधु और कालू के आँड एक दूसरे से टकरा रहे थे. निशा की चूत और गांद के बीच की पतली चमरी से दोनो को एक दूसरे का लंड एक दूसरे के लंड पेर रगारता महसूस हो रहा था. कालू नीचे से निशा को किस जकर रहा था. उधर साधु ने निशा के गोरे लटकते हुए बूब्स दबा रखे थे. वो गांद मारते मारते निशा की गांद पेर ज़ोर ज़ोर से थप्पड़ मारे जा रहा था. पिटाई से निशा की गांद लाल हो गयी थी मगर उसको मज़ा आ रहा था. उसको लग रहा था जैसे दो जंगली जानवर उसकी ऐसी तैसी कर रहे है. " मे मार जौंगी कालू धीरे धीरे लो मेरी, तुम्हारी ही दौलत है मेर चूत और गांद, एक दिन मे ही लूट लोगे क्या?" " साली ये दौलत तो लूटने से बढ़ती है अभी तो पूरी रात बाकी है,' साधु बोला.
कोई 10 मिनिट तक निशा की भयानक चुदाई हुई कोई 5 बार उसको ऑर्गॅज़म हो गया. वो इंतेज़ार करने लगी की दोनो बेरहम चुड़क्कड़ कब अपने भरे हुए अंडकोष उसके पेट मे खाली करेंगे,' अब निकालो अपना पानी और बुझा दो मेरी चूत और गांद की प्यास,' वो बोली.' गर्र्र्र की आवाज़ करते हुए पहले कालू खल्लास हुआ, उसने इतना पानी छोड़ा को वो निशा की चूत से बह कर उसके काले अंडकोषो को पूरा भिगो गया. उसके बाद ,' ले रंडी मेरा पानी ले तेरी गांद को आज इस से भर दूँगा,' ये कह कर चीख कर साधु निशा की गांद मे झाड़ गया. बिस्तेर पेर वीरया ही वीरया बिखरा हुआ था. चीखे सुन तीनो औरते सूरज को छोड चली आई, पीछे पीछे सूरज भी चला आया, बहादुर बी, पाँचो ने ऐसी भयानक चुदाई का द्रश्य आज तक नही देखा था. उधर साधु का लॉडा देख पाँचो की आँखे फटी रह गयी,' चुदाई पूरी होने के 5 मिनिट बाद तीनो को होश आया. " आओ बेटा तुम्हारा और तुम्हारे इस दोस्त का लंड धो देती हू,' गीता बोली. वो साधु के लंड को इसी बहाने हाथ मे लेना चाहती थी. दोनो मर्द गीता के साथ बाथरूम मे गये तो निशा बोली,' मे तो आपके कमरे मे आकर आपकी चुदाई नही देखती आप यहा क्यू आए?" उसने चाचिजी से पूछा.' बहू हम तो तेरी चीख सुन कर घबरा गये थे,' चाचिजी बोली.' " आप जैसी चुड़क्कड़ औरत क्या चुदाई की चीख नही पहचानती?" निशा ने पूछा. ये सुन कर सूरज और चाचिजी बाहर चले गये. गीता मौके का फयडा उठा कर वही रुक गयी.

चाचिजी बहादुर और सूरज के लंड से अब कहा सन्तुस्ट होने वाली थी? उनकी आँखो के सामने साधु का विकराल लंड घूम रहा था. उस रात उन्होने चुदाई बड़े बुझे मन से की और निशा से उनको खूब ईर्ष्या हुई. सूरज भी अपनी बीवी की गांद और चूत मे मोटे लंड जाते देख हीनभावना से भर गया. चाचिजी को उम्मीद थी की गीता कोई रास्ता निकल लेगी.
उधर निशा के कमरे मे दोनो मर्द लंड सॉफ कर के वापस आ गये थे. साधु दोनो तरफ चलता था. कालू को पता था उसको अपनी गांद का प्रसाद चाड़ना परेगा. उसको लगा वो निशा से कैसे कहे,' मा अब साधु मेरी गांद की ऐसी तैसी करेगा तू इसको थूक या तेल वेल से चिकना कर इसके मुस्टंडे के लिए खोल दे,' ये कह के उसने अपने चुतताड बिस्तेर के कोने पेर उँचे कर दिए. मा अपने ही लाल को उसकी दूरगत के लिए तय्यार कर रही थी. वो अंडर जीभ डाल कर उसकी गांद खोलने लगी, कालू को बड़ा मज़ा आ रहा था. साथ ही वो नीचे हाथ बढ़ा कर अपने बेटे का आधा खड़ा लॉडा भी दबाने लगी और धीरे धीरे उसके आंदियो पेर थपकीया देने लगी.' कालू को बहुत मज़ा आ रहा था,' अब मेरी गांद छोड़ मा,' वो बोला. गीता ने अपनी एक उंगली उसकी गांद मे सरका दी और अंडर बाहर करने लगी,' मा और समान डाल इस भद्वे साधु ने चोद चोद कर मेरी गांद का च्छेद मोटा कर दिया है तेरी एक उंगली का कुछ असर नही होगा,' वो बोला. गीता ने धीरे धीरे अपनी चार उंगलिया डाल दीं अगर कालू शांत नही हुआ,' मा और कुछ डाल गांद की खाज मिटी नही, उसने कहा. गीता ने अब अपना पूरा हाथ कलाई तक कालू की गांद मे सरका दिया. पहली बार उसने इतना बड़ा गांद का च्छेद देखा था,' हा मा अब कुछ महसूस हुआ चोद्ति जा,' कालू ने कहा. गीता अपना हाथ उसकी गांद मे अंडर बाहर करने लगी,' मेरे लाल तेरी गांद का तो इस मदारचोड़ ने भुर्ता बना दिया पता नही कितनी बार किस बेरहमी से चोदा है तुझे,' गीता बोली. " मे तो इसके लॉड का घुलाम हू मा,' कालू ने कहा. " उस्ताद मेरी चूत तुम्हारे हथोदे की चोट के लिए तय्यार है,' कालू साधु से बोला.
उधर निशा साधु को चूस कर उसको कालू के लिए तय्यार कर रही थी. साधु तो नीचे खड़ा था और निशा बिस्तेर पेर बैठी थी,' साले रांदबाज़ ऐसा औज़ार ले करके अब तक कहा च्छूपा हुआ रहा?" निशा ने कहा.' कस्बे की सारी औरते मर गयी थी जो तू आदमियो की गांद मारता फिर रहा था?" उसने कहा और लॉलीपोप की तरह साधु का गुप्तन्ग चाटने चूसने लगी,' चाट भोसड़ी की रंडी चाट मेरा हथोदा,' साधु निशा के बॉल पकर कर बोला. निशा हल्के हल्के उसके विशाल सूपदे पेर दाँत भी गाड़ा रही थी जिससे साधु और उत्तेजित हो रहा था. साधु ने कोई 5 मिनिट मे विकराल रूप धारण कर लिया अब निशा का मूह छ्होटा परने लग गया, वो उसके लंड के चारो तरफ जीभ फिरने लगी, इन अंडू को भी चट ,' ये कह कर साधु ने अपने टटटे उसके मूह मे एक एक कर के डाल दिए. निशा पागल हो रही थी उसकी चूत का रस बह कर उसके घुटनो तक आ गया.
अब साधु को अपनी मंज़िल पता थी. उसने निशा के मूह से लंड हटाया और कालू की गांद के च्छेद पेर रख दिया. गीता ने उसके सूपदे को च्छेद पेर रख कर दबा दिया,' मार मेरे बेटे की गांद मेरे सांड चोद इस भद्वे को,' गीता बोली. साधु लगभग हर रोज़ कालू को चोद्ता था. उसे पता था उसे क्या करना है. उसने एक ज़ोर का झतका दिया और आधा लंड कालू की गांद मे सरका दिया,' मर गया उस्ताद रहम करो,' कालू चीखा. कालू की चीख कम से कम पूरे घर मे सुनाई दी. जिग्यासा वश चाचिजी, सूरज वगेरह सब भी पर्दे के पीछे से देखने लगे. कालू की गांद मे फासे हुए साधु के विकराल लंड को देख उनके पसीने छ्छूट गये,' ये तो कालू को मार डालेगा ज़ालिम,' चाचिजी बोली. मगर साधु रुका नही थोड़ा बाहर खीच कर उसने एक और झटका मारा इस बार तीन चौथाई लंड अंडर था,' छ्चोड़ दो उस्ताद फट जाएगी मेरी गांद,' कालू चीखा.' " तेरी मा और तेरी रंडी बैठी तो है सीलने के लिए तू तो ऐसे नखरे कर रहा है जैसी किसी कुँवारी रांड़ की सुहग्रात हो,' साधु बोला और लंड खिसकता रहा. कोई दो मिनिट बाद उसका पूरा गधे जैसा लंड कालू की गाड़ ने खा लिया,' शॅबहश मेरे लाल जुग जुग जीओ, तूने आज तेरे उस्ताद का पूरा लंड खा लिया,' गीता बोली.' साधु अब चुदाई शुरू कर चक्का था. कालू भी अब पूरी मस्ती मे था,' चोदो उस्ताद फाडो इस भद्वे की गांद,' कालू बोला. साधु की स्पीड बढ़ गयी थी. कालू का मूह लाल था. निशा अपने बेटे के बाप के नीचे सरक गयी और कालू का गीला ओर छ्होटा लंड चूसने लगी, उसे असचर्या था उतीज्न के बावजूद कालू का लंड नरम कैसे था जबकि खूब सारा प्रिकूं उसके सुपरे पेर लगा हुआ था,' तुम्हे अच्छा तो लग रहा है कालू?" निशा ने पूछा.' हा बहुत अच्छा लग रहा है थोड़ी देर मे तुम्हारे मूह मे पानी छ्चोड़ दूँगा,' कालू ने कहा.' मगर इतने नरम लंड से कैसे पानी छूतेगा?" निशा ने पूछा.' अरे भेंचोड़ जब गांद मे मूसल हो तो लंड खड़ा कैसे होगा? ऐसे ही नरम लंड पानी छ्चोड़ देगा भाडवी,' कालू बोला. निशा कालू के अंडकोष पेर भी उंगलिया फिरने लगी और उन पेर हल्का हल्का दबाव देने लगी. उधर गीता ने साधु के लंड का बेस कस के पाकर लिया और उसकी विशाल गोलियो को एके क कर के दबाने लगी,' अब छ्चोड़ दे मेरे बेटे की गॅंड मे अपना पानी मेरे साड,' गीता बोली.' अभी कहा अभी तो साले को इतना चोदुन्गा की दो दिन तक टट्टी जाना भूल जाएगा,' साधु ने कहा और पूरा बेरहम हो गया.' सूरज की चीखे जारी रही, गीता के उस्ताद हाथ वन कालू का काम आसान कर दिया, साधु इस बार 5 मिनिट मे ही झाड़ गया. उधर कालू नरम लंड से ही निशा के मूह मे झाड़ गया. ये द्रश्य चाचिजी और सूरज के रोंगटे खड़ा कर गया. मदारचोड़ ऐसा चुड़क्कड़ आदमी ये रंडी कहा से ढूँढ लाई? चाचिजी ने कहा.
उस रात चुदाई का भयंकर द्रश्य था घर मे साधु के लंड से चूटे और गांडे चुद चुद कर घायल हो रही थी. मगर चाचिजी को अब हर कीमत पेर साधु का लंड चाहिए था. उनको पता था गीता के सिवई यह काम कोई नही कर पाएगा. गीता मालकिन के लिए साधु के लंड के बंदोबस्त मे अगले दिन से ही लग गयी. एक दिन निशा का अच्छा मूड देख कर वो बोली,' मेमसाहिब, साधु इतना भयंकर चुड़क्कड़ है की एक रात मे आपको और मेरे बेटे को चोद कर संतुष्ट करने के बाद भी कम से कम दो तीन और लोगो की मार ले,' वो बोली. " हा गीता है तो वो मदारचोड़ सांड कुछ ऐसा ही,' निशा ने कहा. " तो फिर आप उस से चाचिजी की बुद्धि चूत क्यू नही चूड़ने देती?" " उसने मेरे पति को मुझसे छ्चीना है उस रंडी को मे कभी चुदाई का असली मज़ा लेते हुए नही देख सकती, जो मुझे चोदेगा वो उस बुद्धि भिस्दी को नही,' निशा ने कहा. कोई दो दिन बाद निशा यकायक गीता से बोली,' सुन गीता में साधु को चाचिजी को चोदने दे सकती हू मगर मेरी एक शर्त है,' उसने कहा.' " क्या शर्त है मेमसाहिब?" गीता ने पूछा. " साधु और कालू सूरज की गांद मारेंगे,' निशा बोली.' और हा चाचिजी को अगर साधु से चूड़ना है तो फिर सूरज का लंड छ्चोड़ना पड़ेगा और उसकी गांद मेरे सांड से मर्वानी प
गीता ने अगले ही दिन सब चाचिजी को बता दिया. चाचिजी की आँखो के सामने दिन रात साधु का विकराल लॉडा घूमता था. वो सूरज को मानने मे जुट गयी,' बेटा, तूने इतनी चुदाई कर ली, गांद मरवाने का भी तो मज़ा है, तेरे चाचजी नेभी तो कितने सौक से मरवाई, तू अपनी गांद मरवा ले बेटा ताकि तेरी चाचिजी को साधु का गरम लॉडा मिल सके,' उन्होने कहा.' सूरज मना करता रहा. मगर गीता और चाचिजी दोनो ने संकल्प ले रखा था. अगले दिन जब सूरज चाचिजी पेर चढ़ कर उनको चोदने लगा तो गीता ने कुछ नया काम शुरू कर दिया. वो सूरज के आँड की मालिश तो करती ही थी चुदाई के वक़्त उनसे खेलती भी थी, मगर उस रात उसने आँड के तेल मालिश करते करते काफ़ी सारा तेल सूरज की गांद मे लगा दिया और एक हाथ से सूरज की आंड मसालते मसालते दूसरे से उसकी गांद के च्छेद से खेलना शुरू कर दिया. सूरज लंबा चोद्ता था. गीता ने धीरे धीरे अपनी उंगलिओ से उसकी गांद मारनी शुरू कर दी, सूरज की भी अच्छा लग रहा था. वो तोड़ा जल्दी झाड़ा. ऐसे कोई 5-7 दिन मे गीता चुड्ती तो चाचिजी सूरज की गांद मारती और चाचिजी चुड्ती तो गीता उसकी गांद मारती. धीरे धीरे सूरज गांद मरवाने का अभ्यस्त हो गया. दोनो औरते अब उसकी गांद मे गाजर मूली तक सरकने लगी. अब मंज़िल दूर नही थी.

उधर जब सूरज की गांद पूरी तरह खुल गयी तो गीता ने निशा को इसकी सूचना दी,' मेमसाहिब अब सूरज . की गांद पूरी तरह चुड़ाने के लिए तय्यार है,' उसने कहा. "मगर मेरी एक शर्त और है गीता,' निशा बोली.' वो क्या मेमसाहिब?" गीता ने पूछा. अगर तुम एक रात साधु और कालू को चोदो तो उस से पहले पूरी एक रात सूरज उन दोनो से गांद मरवाएगा,' वो बोली. "जितनी चुदाई मेरे सॅंडो से चाहिए उतनी ही मेरे पति की गांद घिसेगी,' निशा बोली.
गीता अब सब कुछ समझ गयी. उसको और चाचिजी को समझ आ गया की अब सूरज मर्द नही रह पाएगा. " इतनी गांद मरवाते मरवाते वो पूरा गान्डू हो जाएगा फिर उसका लंड बेकार हो जाएगा चाचिजी,' गीता ने कहा.' हा वो तो है मगर इस से हुमको क्या, उल्टा हुमारे लिए नये लॉड खुद ढूँढ ढूँढ कर लाएगा,' चाचिजी हस कर बोली. मगर गीता की खुद की चूत भी तो साधु का लंड ख़ान एके लिए खुजली मचा रही थी,' हा चाचिजी अब होने दो सूरज बाबा को गान्डू,' उसने कहा. रात मे चुदाई चालू होते ही चाचिजी ने कहा,' सूरज बेटा, कल तू कालू और साधु से चुड ले ताकि हम दोनो बुद्धि चुतो को चैन पड़े,' उन्होने कहा और ऊओह आ करने लगी. " लेकिन चाची मुझे इसका अनुभव नही,' वो बोला.' मे कल कालू को ले आउन्गि सूरज दादा आप एक बार उस से चुड कर देखना अच्छा लगे तो फिर साधु को बुलाएँगे,' गीता बोली.' "ठीक है चाची आप देख लो,' सूरज ने कहा और उसके धक्के तेज़ हो गये.' गीता उसकी गांद मे लगभग पूरा हाथ डाले हुए थी,' ओह सूरज बाबा क्या रसीली गांद है आपकी,उसने कहा.
जैसा की तय था अगले दिन कालू आया. दोनो औरतो ने कालू को सब बता रखा था,' देख धीरे धीरे मारना और मज़ा देना ताकि गांद मरवाने का इसको मज़ा आए,' गीता ने अपने बेटे से कहा,' तू चिंता मत कर मा मे ऐसी गांद मारूँगा को वो गान्डू बन कर रहेगा,' कालू ने कहा. चाचिजी ने कालू के आने से पहले एक बार सूरज को चोद दिया था ताकि उसका पुरुष्टव थोड़ा और कमज़ोर हो जाए. जब गीता और कालू कमरे मे पहुचे तो भतीजा और चाची दोनो नंगे लेटे हुए थे. कालू और गीता ने भी कापरे उतार दिए. "ले बेटा घोड़ी बन तो ज़रा तेरी गांद की मालिश कर दू ज़रा,' गीता बोली. ये सुनते ही किसी अग्यकारी पशु की तरह सूरज ने अपनी बड़ी गांद उप्पेर कर दी. गीता और चाचिजी दोनो उसके पीछे आ गयी. चाचिजी ने अपने दोनो हाथो से उसकी गांद के काले च्छेद को फैलाया और गीता ने कोई पाव भर नारियल का तेल अंडर सरका दिया, उसकी उंगलिया अब सूरज की गांद मे पच पच्छ की आवाज़े करने लगी. गीता ने धीरे धीरे सूरज की गांद को एक उंगली से चोदना शुरू कर दिया,' अपनी गांद का च्छेद तो किसी कुँवारी की चूत सा टाइट है सूरज बाबू,' गीता बोली. " हा रे आज इसकी गांद की सील कालू तोड़ेगा और कल साधु के साथ इसकी सुहग्रात है,' चाचिजी बोली. गीता अब दो उंगलिओ से चोदने लगी,' अब तुम्हारी गांद थोड़ी खुली बाबूजी मज़े लो मेरी चुदाई के,' उसने कहा. गीता ने अब पूरी तीन उंगलिया अंडर सरका दी थी सूरज की गांद उत्तेजना मे उप्पेर नीचे हो रही थी,' देखो इस कुँवारी गांद को लंड लेने के लिए कैसी मचल रही है,' गीता बोली.' " मगर तेरे बेटे से कहना मेरे बेटे को धीरे धीरे चोदे खून ना आए कही और हा बीज इतना गहरा ना डाले की इसके पेट मे बच्चा ठहर जाए,' चाचिजी बोली. उधर सूरज की गांद अब पूरी खुल चुकी थी गीता को पता चल गया कि लोहा गरम है, उसने इशारा किया और उसके इशारा करते ही चाचिजी ने कालू के लंड पेर तेल मालिश शुरू कर दी. चाचिजी ने पहले उसके लंड की चमरी पीछे कर सुपरे को खूब रग्रा और उसको तेल पिलाया फिर चमरी से वापस सुपरे को क़ैद कर दिया और उसके लंड पेर चारो तरफ और अप्पर नीचे तेल मलने लगी, उसकी गोलिओ तक को नही छोड़ा. कालू का लंड अब तय्यार था और तेल से एकद्ूम चिकना हो चक्का था.
कालू सूरज के पूछे आया और अपना हथियार उसकी गांद के च्छेद पेर रखा, गीता ने अपने बेटे के लंड की चमरी पीछे खिसका दी और तेल से गीला सुपरा सूरज के मलद्वार के प्रवेश पेर दबा दिया. कालू ने हल्का सा ज़ोर लगाया तो खुली हुई गांद मे उसका मोटा सुपरा फँस गया. वो एक मिनिट तक ऐसे ही रहा फिर उसने थोडा अड्जस्टमेंट किया और हल्का सा लंड और अंडर सरका दिया. अब तक सूरज को दर्द नही हुआ था. कालू ने थोडा और ज़ोर लगाया तो आधा लंड सरक गया अब सूरज के मूह से हल्की चीख निकली मगर चाचिजी ने अपने होट उसके होटो मे डाल उसको किस करना शुरू कर दिया ताकि वो कुछ बोल ना सके. उधर कालू का लंड सरकता रहा. कोई 3 मिनिट मे उसका लगभग पूरा लंड भीतेर सरक गया. अब कालू अपनी गांद हिला हिला कर लंड को अड्जस्ट करने लगा. उसको लगा की अब सब ठीक है तो उसने चोदना शुरू कर दिया. " मज़ा आ रहा है बेटे?" चाचिजी ने पूछा.' ज़्यादा नही आ रहा चाचिजी ,' सूरज बोला. तू बस मज़े ले मेरे बेटे, कालू बहुत प्यार से ले रहा है तेरी,' चाचिजी बोली. " ऊ चाची ये मोटा लॉडा मेरी गांद का कचूमर निकल देगा,' सूरज बोला. " बेटा मोटा लंड तो चूत और गांद का कचूमर निकालने की लिए ही बना होता है,' चाचिजी बोली.

उधर कालू को पता था अब सूरज की गांद लंड खाने को तय्यार है इसलिए उसने स्पीड बढ़ा दी. " चोद मेरे लाल चोद इसकी मोटी गांद, तेरा मोटा लंड इसको खूब मज़ा देगा,' गीता बोली.' सूरज ऊवू आ करता रहा मगर कालू के लंड की चुदाई के मज़े भी लेता रहा. 5 मिनिट की चुदाई के बाद कालू ने हथियार डाल दिए और उसकी पिचकारी सूरज की कुँवारी गांद मे जा गिरी,' श मा मेरा पानी छ्छूट रहा है,' वो बोला.' " डाल मेरे बेटे डाल इसकी गांद मे अपना पानी और सींच इसको,' गीता बोली.' " ले ले बेटा इस सांड़ का ताक़तवर पानी अपने अंडर,' चाचिजी बोली.' सूरज भी पानी के गिरते ही सुस्त पड़ गया. अद्ढा काम हो चुका था. उस रात कालू ने चार बार सूरज की गांद मारी. अब अगले दिन सूरज को सुहाग रात थी.

उधर जब सूरज की गांद पूरी तरह खुल गयी तो गीता ने निशा को इसकी सूचना दी,' मेमसाहिब अब सूरज . की गांद पूरी तरह चुड़ाने के लिए तय्यार है,' उसने कहा. "मगर मेरी एक शर्त और है गीता,' निशा बोली.' वो क्या मेमसाहिब?" गीता ने पूछा. अगर तुम एक रात साधु और कालू को चोदो तो उस से पहले पूरी एक रात सूरज उन दोनो से गांद मरवाएगा,' वो बोली. "जितनी चुदाई मेरे सॅंडो से चाहिए उतनी ही मेरे पति की गांद घिसेगी,' निशा बोली.
गीता अब सब कुछ समझ गयी. उसको और चाचिजी को समझ आ गया की अब सूरज मर्द नही रह पाएगा. " इतनी गांद मरवाते मरवाते वो पूरा गान्डू हो जाएगा फिर उसका लंड बेकार हो जाएगा चाचिजी,' गीता ने कहा.' हा वो तो है मगर इस से हुमको क्या, उल्टा हुमारे लिए नये लॉड खुद ढूँढ ढूँढ कर लाएगा,' चाचिजी हस कर बोली. मगर गीता की खुद की चूत भी तो साधु का लंड ख़ान एके लिए खुजली मचा रही थी,' हा चाचिजी अब होने दो सूरज बाबा को गान्डू,' उसने कहा. रात मे चुदाई चालू होते ही चाचिजी ने कहा,' सूरज बेटा, कल तू कालू और साधु से चुड ले ताकि हम दोनो बुद्धि चुतो को चैन पड़े,' उन्होने कहा और ऊओह आ करने लगी. " लेकिन चाची मुझे इसका अनुभव नही,' वो बोला.' मे कल कालू को ले आउन्गि सूरज दादा आप एक बार उस से चुड कर देखना अच्छा लगे तो फिर साधु को बुलाएँगे,' गीता बोली.' "ठीक है चाची आप देख लो,' सूरज ने कहा और उसके धक्के तेज़ हो गये.' गीता उसकी गांद मे लगभग पूरा हाथ डाले हुए थी,' ओह सूरज बाबा क्या रसीली गांद है आपकी,उसने कहा.
जैसा की तय था अगले दिन कालू आया. दोनो औरतो ने कालू को सब बता रखा था,' देख धीरे धीरे मारना और मज़ा देना ताकि गांद मरवाने का इसको मज़ा आए,' गीता ने अपने बेटे से कहा,' तू चिंता मत कर मा मे ऐसी गांद मारूँगा को वो गान्डू बन कर रहेगा,' कालू ने कहा. चाचिजी ने कालू के आने से पहले एक बार सूरज को चोद दिया था ताकि उसका पुरुष्टव थोड़ा और कमज़ोर हो जाए. जब गीता और कालू कमरे मे पहुचे तो भतीजा और चाची दोनो नंगे लेटे हुए थे. कालू और गीता ने भी कापरे उतार दिए. "ले बेटा घोड़ी बन तो ज़रा तेरी गांद की मालिश कर दू ज़रा,' गीता बोली. ये सुनते ही किसी अग्यकारी पशु की तरह सूरज ने अपनी बड़ी गांद उप्पेर कर दी. गीता और चाचिजी दोनो उसके पीछे आ गयी. चाचिजी ने अपने दोनो हाथो से उसकी गांद के काले च्छेद को फैलाया और गीता ने कोई पाव भर नारियल का तेल अंडर सरका दिया, उसकी उंगलिया अब सूरज की गांद मे पच पच्छ की आवाज़े करने लगी. गीता ने धीरे धीरे सूरज की गांद को एक उंगली से चोदना शुरू कर दिया,' अपनी गांद का च्छेद तो किसी कुँवारी की चूत सा टाइट है सूरज बाबू,' गीता बोली. " हा रे आज इसकी गांद की सील कालू तोड़ेगा और कल साधु के साथ इसकी सुहग्रात है,' चाचिजी बोली. गीता अब दो उंगलिओ से चोदने लगी,' अब तुम्हारी गांद थोड़ी खुली बाबूजी मज़े लो मेरी चुदाई के,' उसने कहा. गीता ने अब पूरी तीन उंगलिया अंडर सरका दी थी सूरज की गांद उत्तेजना मे उप्पेर नीचे हो रही थी,' देखो इस कुँवारी गांद को लंड लेने के लिए कैसी मचल रही है,' गीता बोली.' " मगर तेरे बेटे से कहना मेरे बेटे को धीरे धीरे चोदे खून ना आए कही और हा बीज इतना गहरा ना डाले की इसके पेट मे बच्चा ठहर जाए,' चाचिजी बोली. उधर सूरज की गांद अब पूरी खुल चुकी थी गीता को पता चल गया कि लोहा गरम है, उसने इशारा किया और उसके इशारा करते ही चाचिजी ने कालू के लंड पेर तेल मालिश शुरू कर दी. चाचिजी ने पहले उसके लंड की चमरी पीछे कर सुपरे को खूब रग्रा और उसको तेल पिलाया फिर चमरी से वापस सुपरे को क़ैद कर दिया और उसके लंड पेर चारो तरफ और अप्पर नीचे तेल मलने लगी, उसकी गोलिओ तक को नही छोड़ा. कालू का लंड अब तय्यार था और तेल से एकद्ूम चिकना हो चक्का था.
कालू सूरज के पूछे आया और अपना हथियार उसकी गांद के च्छेद पेर रखा, गीता ने अपने बेटे के लंड की चमरी पीछे खिसका दी और तेल से गीला सुपरा सूरज के मलद्वार के प्रवेश पेर दबा दिया. कालू ने हल्का सा ज़ोर लगाया तो खुली हुई गांद मे उसका मोटा सुपरा फँस गया. वो एक मिनिट तक ऐसे ही रहा फिर उसने थोडा अड्जस्टमेंट किया और हल्का सा लंड और अंडर सरका दिया. अब तक सूरज को दर्द नही हुआ था. कालू ने थोडा और ज़ोर लगाया तो आधा लंड सरक गया अब सूरज के मूह से हल्की चीख निकली मगर चाचिजी ने अपने होट उसके होटो मे डाल उसको किस करना शुरू कर दिया ताकि वो कुछ बोल ना सके. उधर कालू का लंड सरकता रहा. कोई 3 मिनिट मे उसका लगभग पूरा लंड भीतेर सरक गया. अब कालू अपनी गांद हिला हिला कर लंड को अड्जस्ट करने लगा. उसको लगा की अब सब ठीक है तो उसने चोदना शुरू कर दिया. " मज़ा आ रहा है बेटे?" चाचिजी ने पूछा.' ज़्यादा नही आ रहा चाचिजी ,' सूरज बोला. तू बस मज़े ले मेरे बेटे, कालू बहुत प्यार से ले रहा है तेरी,' चाचिजी बोली. " ऊ चाची ये मोटा लॉडा मेरी गांद का कचूमर निकल देगा,' सूरज बोला. " बेटा मोटा लंड तो चूत और गांद का कचूमर निकालने की लिए ही बना होता है,' चाचिजी बोली.
उधर कालू को पता था अब सूरज की गांद लंड खाने को तय्यार है इसलिए उसने स्पीड बढ़ा दी. " चोद मेरे लाल चोद इसकी मोटी गांद, तेरा मोटा लंड इसको खूब मज़ा देगा,' गीता बोली.' सूरज ऊवू आ करता रहा मगर कालू के लंड की चुदाई के मज़े भी लेता रहा. 5 मिनिट की चुदाई के बाद कालू ने हथियार डाल दिए और उसकी पिचकारी सूरज की कुँवारी गांद मे जा गिरी,' श मा मेरा पानी छ्छूट रहा है,' वो बोला.' " डाल मेरे बेटे डाल इसकी गांद मे अपना पानी और सींच इसको,' गीता बोली.' " ले ले बेटा इस सांड़ का ताक़तवर पानी अपने अंडर,' चाचिजी बोली.' सूरज भी पानी के गिरते ही सुस्त पड़ गया. अद्ढा काम हो चुका था. उस रात कालू ने चार बार सूरज की गांद मारी. अब अगले दिन सूरज को सुहाग रात थी.


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