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गहरी चाल - हिन्दी सेक्स कहानी
10-03-2010, 10:24 AM
Post: #51
RE: गहरी चाल - हिन्दी सेक्स कहानी
कामिनी के नज़रो मे उनकी इज़्ज़त और बढ़ गयी-वो ग़लती कर रहे थे,अपनी असिस्टेंट के साथ ये सब उन्हे शोभा नही देता था पर वक़्त रहते उन्होने खुद को संभाल लिया था.कोई और वकील होता तो अब तक उसे अपने बिस्तर मे घसीट चुका होता और फिर शायद उसकी विकास से शादी भी नही हुई होती.

अच्छा ही होता!..वो आज इस अकेलेपन,इस तन्हाई से तो बच जाती....पर वो फिर ऐसे क्यू सोच रही थी..2 जवान खूबसूरत मर्दो से उसका परिचय हुआ था & अगर किस्मत ने उसका साथ दिया तो वो किसी 1 के साथ या फिर दोनो के साथ फिर से अपनी राते रंगीन करेगी.ये ख़याल आते ही उसका हाथ अपनी नाइटी के नीचे नंगी चूत पे चला गया & उस से खेलने लगा.

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10-03-2010, 10:24 AM
Post: #52
RE: गहरी चाल - हिन्दी सेक्स कहानी
रात के 1 बजे शत्रुजीत अपने बेडरूम मे दाखिल हुआ.अंदर अंधेरा था & खिड़की से आती हल्की चाँदनी मे उसने देखा की नंदिता छ्होटी सी नेग्लिजी मे लेटी हुई है.वो उसकी तरफ ही देख रही थी.शत्रुजीत ने अपने कपड़े उतारे & पूरा नंगा हो उसके बगल मे चादर मे घुस गया पर उसने पत्नी को छुने की कोई कोशिश नही की ना ही नादिता ने उसकी तरफ हाथ बढ़ाया.दोनो को आज तक ये बात समझ मे नही आई थी-दोनो जवान & खूबसूरत थे,1 जैसे फॅमिली बॅकग्राउंड से थे,किसी और को चाहते भी नही थे फिर आख़िर क्यू उन्हे 1 दूसरे से प्यार नही हुआ था...बस अपनी भूख मिटाने के लिए दोनो चुदाई करते थे.उसमे भी बहुत मज़ा आता था उन्हे पर प्यार-प्यार उस वक़्त भी नही होता था उनके बीच.

शत्रुजीत ने गर्दन घुमाई तो पाया की नंदिता उसे देखा रही है.नज़रे मिलते ही जैसे कोई चिंगारी भड़की & दोनो घूम कर 1 दूसरे से चिपक गये.नंदिता ने खुद ही अपनी नेग्लिजी निकाल दी,उसने नीचे कुच्छ भी नही पहना था & शत्रुजीत उसके बदन को चूमने,चाटने लगा.हर बार ईयसे ही होता था दोनो ऐसे प्यार करते जैसे वक़्त ही ना हो उनके पास,ये आख़िरी रात हो उनके जीवन की.

शत्रुजीत उसकी चूचियो को चूस्ते हुए उसकी टाँगो के बीच आ रहा था की नादिता ने खुद अपनी जंघे फैला दी.शत्रुजीत ने 1 झटके मे अपना लंड अपनी बीवी की चूत मे उतार दिया.दोनो आहे भर रहे थे,1 दूसरे को चूम रहे थे,खरोंच रहे थे...पर 1 बार भी 1 दूसरे का नाम नही लिया..बस जैसे दो अजनबी 1 साथ 1 रात के लिए साथ हुए हो.पर वो अजनबी भी कुच्छ तो प्यार जताएंगे.

शत्रुजीत बस धक्के लगाए जा रहा था,बीवी की कसी चूत उसे हुमेशा पागल कर देती थी पर उसने कभी उसे ये नही बताया था.नंदिता भी पति की मर्दानगी की कायल थी.कितना भी थका हो जब तक वो ना झड़ती वो रुकता नही था.उसने हुमेशा उसे खुश किया था पर उसने भी कभी उसकी इस बात की तारीफ नही की थी.

"आहह....आअहह...",नंदिता अपने पति से चिपकी झड़ने लगी तो शत्रुजीत ने भी अपना वीर्या उसकी चूत मे गिरा दिया.फिर वो उसके उपर से अपना लंड निकाल कर उतर कर अपनी जगह पे लेट गया.नंदिता थोड़ी देर पड़ी रही फिर उठ कर बाथरूम चली गयी,अपनी चूत सॉफ करने के लिए.शत्रुजीत उसके लौटने का इंतेज़ार करने लगा ताकि फिर वो बाथरूम जा अपना लंड सॉफ कर सके.

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10-03-2010, 10:25 AM
Post: #53
RE: गहरी चाल - हिन्दी सेक्स कहानी
रात के 1 बजे करण अपने बिस्तर पे नंगा लेटा अपना लंड हिलाते हुए अपने मोबाइल से नंबर डाइयल कर रहा था.थोड़ी देर बाद किसी ने कॉल रिसीव किया तो उसके होंठो पे मुस्कुराहट फैल गयी & वो और तेज़ी से लंड हिलाने लगा.

इस रात सभी जाग रहे थे & किसी ना किसी तरीके से अपने जिस्म की आग को शांत कर रहे थे बस 1 इंसान था जिसे शायद इस काम से कोई मतलब नही था-अब्दुल पाशा.वो पाशा जिसकी 1 नज़र अच्छे-अछो का खून जमा देती थी,जिसकी हरी आँखे किसी ठंडी झील के जैसी थी वो इस वक़्त 1 मासूम बच्चे की तरह अपने कमरे मे गहरी नींद मे सो रहा था.

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10-03-2010, 10:25 AM
Post: #54
RE: गहरी चाल - हिन्दी सेक्स कहानी
लाल रंग की स्लीव्ले वेस्ट& काले रंग की शॉर्ट्स मे अपनी गोरी बाहो & टाँगो की नुमाइश करती कामिनी जॉगिंग कर रही थी की सामने से उसे करण आता दिखा.उसके ज़हन मे कल सुबह की गोल्फ कोर्स की घटना घूम गयी & उसे करण का सामना करने मे थोड़ी झिझक महसूस होने लगी.

"हाई!कामिनी.",कारण उसके करीब पहुँच चुका था.

"हेलो!",दोनो साथ-2 जॉगिंग करने लगे.जॉगिंग ट्रॅक 1 फुटबॉल फील्ड के गिर्द बना था & इस वक़्त कुच्छ बच्चे वाहा फुटबॉल खेल रहे थे.

"ऑफ..ओह!..",किसी बच्चे की किक से बॉल ट्रॅक के किनारे जमे पानी मे गिरी & उसकी वजह से उड़े कीचड़ के छ्चीनटे कामिनी के उपर पड़े,"..ये बच्चे भी ना!"

"सॉरी,आंटी!",1 बच्चा आया & बाल लेके वापस भाग गया.कीचड़ कामिनी के शॉर्ट्स & जाँघो पे पड़ा था & वो खड़ी सोच रही थी की अब क्या करे.

"इधर आओ,कामिनी.",थोड़ी दूर 1 बड़े से पेड़ के से थोड़ा हट के किसी माली ने घास के लिए पानी का पाइप लगा छ्चोड़ा था,कारण उसी ओर चलने को कह रहा था.

"यहा खड़ी हो जाओ.",कामिनी पेड़ से सॅट के खड़ी हो गयी.कारण ने पाइप उठाया & उसकी हल्की फुहार से उसकी नंगी जाँघो पे छ्चोड़ दी.कामिनी को गुदगुदी सी हुई.फिर करण ने अपने हाथो मे पानी ले उसकी शॉर्ट्स पे डाला,"..कीचड़ तो हट गया...पर मैं गीली हो गयी."

"इसका भी उपाय कर देता हू.",कारण ने अपनी जेब से रुमाल निकाला & झुक कर कामिनी के सामने बैठ गया,"..अरे मैं कर लूँगी,करना."

"कोई बात नही!मैं ही कर देता हू.",कामिनी के जवाब का इंतेअज़र किए बगैर कारण उसकी जंघे पोच्छने लगा.कामिनी के चेहरे का रंग ही बदल गया.कारण का सर उसके पेट से बस 2-3 इंच की दूरी पे था,उसकी गरम साँसे सीधा उसकी चूत पे पड़ रही थी & वो हाथ दबा-2 के उसकी जंघे सूखा रहा था.करण ने सहारे के लिए अपने बाए हाथ से उसकी दाई जाँघ को पकड़ लिया & दाए से उसकी बाई जाँघ को रगड़ कर पोंच्छने लगा.

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10-03-2010, 10:25 AM
Post: #55
RE: गहरी चाल - हिन्दी सेक्स कहानी
कामिनी की चूत ने बदतमीज़ी करना शुरू कर दिया & वो मदहोश होने लगी.उसका जी कर रहा था की वो करण का सर पकड़ कर सीधा अपनी चूत पे भींच दे.अब कारण अपने हाथो की पोज़िशन बदल कर उसकी बाई जाँघ पोंच्छ रहा था.उसका दाया हाथ अब उसकी बाई जाँघ के पीछे था & उसकी गरम साँसे उसकी चूत को बस गीला किए जा रही थी.

"लगता तो है की सुख गयी.",करण ने अपने हाथ बारी-2 से उसकी दोनो जाँघो पे घुटने तक फिराए.कामिनी की टाँगो मे तो जान ही नही बची थी & वो बस पेड़ से लग कर किसी तरह खड़ी थी."..यहा पे कुच्छ मिट्टी अभी भी है.",कामिनी की शॉर्ट्स पे उसकी चूत की बाई तरफ अभी भी कुच्छ कीचड़ लगा हुआ था.कारण ने अपने हाथ से वाहा पे झाड़ा & ऐसा करते वक़्त हाथ उसकी चूत के उपर भी लगा.कामिनी की चूत मस्ती मे और गीली हो गयी.बड़ी मुश्किल से उसने अपने होंठो को काट अपनी आह को रोका.

"अब चलें..",कारण खड़ा हो गया.

"ह्म्म...",कामिनी के मुँह से बस इतना ही निकला.

"कामिनी.".दोनो स्पोर्ट्स कॉंप्लेक्स के मैं गेट से बाहर निकल आए थे,"..आज दोपहर को क्या कर रही हो?"

"कोर्ट जाऊंगी.क्यू?"

"पर कोर्ट से 2 बजे तक तो फ्री हो जाओगी ना?"

"हां."

"मैं सोच रहा था की अगर तुम फ्री हो तो क्यू ना आज हम लंच पे चलें...वो जो ए&एम माल हैं ना तुम्हारे कोर्ट के पास!"

"हां.."

"..वाहा 1 नया चाइनीस रेस्टोरेंट खुला है,वही जाने की सोच रहा था अगर तुम हां कहो तो."

कामिनी का दिमाग़ तेज़ी से काम कर रहा था..क्या मतलब था इसका?..क्या करण भी उसमे दिलचस्पी लेने लगा है?..या फिर वो बस 1 दोस्त की हैसियत से ऐसा कह रहा है..पर थोड़ी देर पहले वो उसकी जंघे साफ करा रहा था-अब कोई मर्द इतना भी भोला तो नही होता की 1 औरत के बदन के सबसे नाज़ुक अंग के आस-पास हाथ लगाए & उसके दिल मे ऐसे-वैसे ख़याल ना आएँ!जो भी हो,फायडा तो उसी का होना था ना!आख़िर उसके अकेलेपन के दिन ख़त्म होने के आसार दिखाई देने लगे थे,"ओके.मैं 2:30 बजे तक माल पहुँच जाऊंगी."

"थॅंक्स,कामिनी."

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10-03-2010, 10:26 AM
Post: #56
RE: गहरी चाल - हिन्दी सेक्स कहानी
"मिलॉर्ड!त्रिवेणी ग्रूप ने 1000 टन आइरन ओर एक्सपोर्ट किया पर उसपे ड्यूटी पे की बस 10 टन की कीमत की जब की असल मे ड्यूटी होनी चाहिए थी 50 टन की कीमत के बराबर.",सरकारी वकील जड्ज के सामने अपनी दलील पेश कर रहा था.

"..इसलिए मिलॉर्ड!मेरी आपसे दरखास्त है की ना सिर्फ़ त्रिवेणी ग्रूप से बकाया ड्यूटी वसूली जाए & नियमानुसार फाइन ली जाए,बल्कि इस बात के लिए ज़िम्मेदार इनके मॅनेज्मेंट के लोगो को भी सज़ा दी जाए."

"मिलॉर्ड!मेरी समझ मे नही आता की सरकारी महकमे के अफसरो के साथ-2 वकील साहब भी कैसे ऐसी बात कर सकते हैं.मेरे क्लाइंट ने जब ये ओरडर एक्सपोर्ट किया था उस वक़्त ड्यूटी बस 1% थी.उसके बाद ये ड्यूटी सरकार ने बढ़ा कर 5% कर दी.ड्यूटी पे करने के वक़्त नया रेट लागू हो चुका था मगर एक्सपोर्ट के वक़्त तो पुराना रेट लागू था,फिर कैसे मेरे क्लाइंट पे ये बेबुनियाद इल्ज़ाम लगाया जा रहा है की उन्होने ड्यूटी चोरी की है."

"..मगर फिर भी मेरे क्लाइंट ने सरकारी नोटीस मिलने के बाद अपना केस समझते हुए सारे दस्तावेज़ो के साथ लेटर्स भेजे थे,मगर इन लोगो ने उन्हे 1 बार भी सुनवाई के लिए नही बुलाया & केस ठोंक दिया.ये उनपपेर्स की कॉपी है.",मुकुल ने सारे पेपर्स की कॉपीस कोर्ट पीयान को दी जिसने उन्हे जड्ज तक पहुँचा दिया.

"..मिलॉर्ड,ये 1 सॉफ-2 हरासमेंट का केस है.सरकारी मुलाज़िम ये भूल जाते हैं कि वो जनता की सेवा के लिए है,उन्हे परेशान करने के लिए नही.इसीलिए मेरी आपसे गुज़ारिश है की प्लीज़ आप इस केस से जुड़े सभी अफसरो की जाँच के ऑर्डर्स दे & मेरे क्लाइंट को बरी कर इस हरासमेंट से छुटकारा दिलाएँ."

जड्ज ने सारे पेपर्स देखे & फिर दोनो वकिलो से कुच्छ सवाल किए.थोड़ी देर बाद दोनो वकील उनका फ़ैसला सुन रहे थे,"..त्रिवेणी ग्रूप ने कोई ग़लती नही की क्यूकी एक्सपोर्ट के वक़्त नयी ड्यूटी लागू ही नही हुई थी.इसलिए उन्हे इस मामले से बरी किया जाता है.मगर अदालत को 1 बात बहुत चिंताजनक लगी है & वो ये की त्रिवेणी ग्रूप के बार-2 लेटर्स भेजने पर भी सरकार ने उनकी कोई सुनवाई नही की & मामला यहा तक ले आई.अगर उन्होने लेटर्स पे ध्यान दिया होता तो अदालत का कीमती वक़्त & जनता का पैसा,दोनो की बचत होती.इसलिए अदालत सरकार को मामले से जुड़े अफसरो की जाँच का हुक्म सुनाती है."

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10-03-2010, 10:26 AM
Post: #57
RE: गहरी चाल - हिन्दी सेक्स कहानी
"मुकुल,तुम यहा से ऑफीस चले जाओ,मैं 2 घंटे बाद वाहा पहुँच जाऊंगी.",कामिनी ने अपना बॅग उठाया & कोर्ट कॉंप्लेक्स मे बने अपने चेंबर से बाहर जाने लगी.

"ओके,मॅ'म."

जिस वक़्त कामिनी चेंबर से बाहर निकल रही थी,ठीक उसी वक़्त कोई उसमे दाखिल हो रहा था & वो उस इंसान से टकरा गयी,"ओह!आइ'म सॉरी.",वो षत्रुजीत सिंग था & उसने टकराने से लड़खड़ाई कामिनी को आगे बढ़ अपनी बाहो मे थाम लिया.उसकी बाई बाँह कामिनी की कमर को पकड़े थी,"ओह!आप हैं!"

कामिनी के बदन मे सिहरन दौड़ गयी क्यूकी शत्रुजीत ने अपना हाथ हटाते हुए उसकी कमर को हल्के से दबा दिया था,"कंग्रॅजुलेशन्स!"उसने कामिनी से हाथ मिलाया तो वो फिर बेचैन हो उठी.शत्रुजीत के च्छुने से उसका हाल तो बुरा हो जाता था मगर सच्ची बात ये थी की उसे भी इस एहसास का इंतेज़ार रहता था,"आपने हुमारे ग्रूप के लिए पहला केस जीता है."

"थॅंक्स.आप सिर्फ़ इसलिए यहा आए थे?",शत्रुजीत अभी भी उसका हाथ थामे था & अब उसे यकीन होने लगा था की उसे अपना लीगल आड्वाइज़र बनाना केवल 1 बिज़्नेस को ध्यान मे रख कर किया गया फ़ैसला नही था,शत्रुजीत भी ज़रूर उसके नज़दीक आना चाहता था वरना इतने बड़े ग्रूप का मालिक इतने मामूली से केस की जीत के लिए बधाई देने खुद क्यू आएगा-ये काम तो 1 फोन कॉल से भी हो सकता था.

"जी,हां.मैं सुभाष नगर की तरफ जा रहा था,कोर्ट रास्ते मे पड़ा तो सोचा की इसी बहाने आपको खुद बधाई दे दू."

"..और 1 बार फिर आपको इसी बहाने छु लू!",कामिनी मन ही मन मुस्कुराइ.उसे भी इस प्लेबाय के साथ इस खेल को खेलने मे मज़ा आने लगा था.शत्रुजीत के च्छुने से वो मदहोश हो जाती थी & उस वक़्त उसकी चूत मे जो मीठी कसक उठती थी,वैसा एहसास उसे अब तक ज़िंदगी मे नही हुआ था.

"अछा,अब मैं चलता हू.बाइ!",आख़िरकार उसने कामिनी का हाथ छ्चोड़ा & वाहा से चला गया.उसके जाने के बाद कामिनी भी करण से मिलने के लिए निकल पड़ी.

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10-03-2010, 10:26 AM
Post: #58
RE: गहरी चाल - हिन्दी सेक्स कहानी
"कामिनी,अगर बुरा ना मानो तो 1 बात पुच्छू?"

"हां-2,कारण",कामिनी ने काँटे से नूडल्स उठा कर अपने मुँह मे डाला.

"देखो,मुझे ग़लत मत समझना.मैं बस 1 दोस्त की हैसियत से पुच्छ रहा हू."

"करण!सवाल पुछो."

"कामिनी,तुम इतनी खूबसूरत हो.इतनी समझदार & अपने पेशे मे भी तुम्हे कामयाबी हासिल है,फिर तुमने अभी तक शादी क्यू नही की?"

कामिनी ने अपना काँटा नीचे रख दिया & 1 पल खामोश रही,"मैने शादी की थी,करण पर...मेरा डाइवोर्स हो गया."

"ओह...ई'एम सॉरी,कामिनी...शायद मैने ग़लत सवाल पुच्छ लिया.."

"कम ऑन,करण!इट'स ओके.तुमने खुद कहा ना की दोस्त के नाते पुच्छ रहे हो..तो दोस्तो को हक़ होता है बेझिझक सवाल पुच्छने का!",कामिनी ने चिकन के 1 टुकड़े को काँटे से अपने मुँह मे डाला,"अब तुम बताओ.तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड नही है?",जवाब का कामिनी को धड़कते दिल से इंतेज़ार था.
करण के होंठो पे हल्की सी मुस्कान खेल गयी,शायद उसमे थोड़ी शरारत भी मिली थी,"फिलहाल तो नही."

"फिलहाल?"

"हां..1 लड़की तो है...1 दिन उस से पुच्हूंगा देखते हैं क्या कहती है!",उसका जवाब सुन कामिनी कुच्छ नही बोली बस खामोशी से खाना खाती रही मगर उसके दिल मे बड़ी उथल-पुथल मची हुई थी....करण किस लड़की के बारे मे बोल रहा था?...कही उसी के बारे मे तो नही?...कोई और भी तो हो सकती है..अब जो भी हो...अब तो करण ही से इस बारे मे पता चल सकता है...उसने अभी खामोश रहना ही बेहतर समझा 7 दूसरी बाते करने लगी.

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10-03-2010, 10:27 AM
Post: #59
RE: गहरी चाल - हिन्दी सेक्स कहानी
खाना ख़त्म कर दोनो माल से बाहर निकल रहे थे.उनके करीब पहुँचते ही माल के अटमॅटिक स्लाइडिंग डोर्स अपनेआप खुल गये,"ओह्ह..!",दोनो बाहर तो आ गये थे पर कामिनी की सारी का लहराता आँचल बंद होते स्लाइडिंग डोर्स मे फँस गया था.कामिनी फँसे आँचल को पकड़ कर थोड़ा झुकती हुई सी पलटी & ऐसा करते ही उसका गोरा सपाट पेट & कसे ब्लाउस के गले से झँकता उसका बड़ा सा दूधिया क्लीवेज कारण की नज़रो के सामने आ गये.

करण की निगाहो ने थोड़ी देर तक उसके जवान जिस्म को निहारा,फिर वो दरवाज़े के पास गया.करीब जाते ही दरवाज़े खुले & आँचल छूट गया.करण ने उसे थामा & वापस कामिनी के पास आ उसे उसके कंधे पे डाल दिया.

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10-03-2010, 10:27 AM
Post: #60
RE: गहरी चाल - हिन्दी सेक्स कहानी
केयी साल पहले पंचमहल के बाहर 1 कपड़े की काफ़ी बड़ी मिल खुली थी.मिल खुली तो उसमे काम करने वाले कारीगर & बाकी लोग मिल के पास रहने की जगह तलाशने लगे.मज़दूरो ने तो मिल के पास की खाली सरकारी ज़मीन पे ही अपनी झोपडिया डाल ली.धीरे-2 कर के मिल के पास की सारी सरकारी ज़मीन पे ऐसे ही काई सारी इल्लीगल कॉलोनीस बस गयी.

वो मिल ज़्यादा दीनो तक चल नही पाई & बंद हो गयी पर वो कॉलोनीस जस की तस बनी रही.धीरे-2 शहर ने पाँव पसारे & वो मिल & कॉलोनीस जो कभी शहर के बाहर हुआ करती थी,आज शहर का हिस्सा थी.

शत्रुजीत ने सरकार को 1 प्रपोज़ल दिया जिसमे मिल & उसके पास की सारी कॉलोनीस को तोड़ कर शूपिंग माल,अपार्टमेंट्स & ऑफीस कॉंप्लेक्स बनाने का सुझाव था.सरकार को उस पूरे इलाक़े से ना कोई टॅक्स मिलता था ना कोई रेवेन्यू-उल्टे ये सब सरदर्द ही बनी हुई थी.शत्रुजीत ने सभी कॉलोनीस के लोगो को उनके घरो के एवज मे मोटा हर्ज़ाना & दूसरे घर देने की बात कही थी.प्रपोज़ल मंज़ूर हो गया & उसपे काम भी शुरू हो गया.धीरे-2 करके सभी कॉलोनीस के लोग भी उसकी बात मान गये.

इन्ही कॉलोनीस मे से 1 थी सुभाष नगर,यहा कुल 40 मकान थे जिनमे से सभी उसकी बात मान चुके थे सिवाय 1 के-नत्थू राम,"अब्दुल,ये नत्थू राम आदमी कैसा है?",शत्रुजीत ने कार की पिच्छली सीट पे बैठे खिड़की से बाहर झाँका.

"भाई,1 नंबर का शराबी & सनकी है.पता नही क्यू हमारी बात नही मान रहा.1 तो साले का घर कॉलोनी के बीचोबीच है...जब तक वो नही मानता वाहा का काम अटका रहेगा.",बाजुओ को कोहनियो तक मोडी हुई शर्ट,जीन्स & काले चश्मे मे अब्दुल पाशा किसी फिल्मस्टर जैसा खूबसूरत लग रहा था.

कार सुभाष नगर पहुँच गयी तो दोनो उतर कर नत्थू राम के घर पहुँचे & उसका दरवाज़ा खटखटाया.दरवाज़ा खुला & 1 50-55 साल का लगभग पूरा गंजा हो चुका आदमी-उसके कानो के उपर & पीछे की तरफ बस थोड़े से बाल थे- 1 बनियान & मैला सा पाजामा पहने बाहर आया,"नमस्कार,मैं शत्रुजीत सिंग हू."

"मुझे आपसे कोई बात नही करनी.इन साहब को मैने पहले ही अपना फ़ैसला सुना दिया है.",थयोरिया चढ़ाए उसने पाशा की ओर इशारा किया.

"नत्थू राम जी!1 बार मुझे भी तो बताइए की आख़िर क्या बात है?आप क्यू नही बेचना चाहते अपना घर?आख़िर आपके सारे पड़ोसी भी तो अपने-2 घर बेच रहे हैं."

"कोई कुच्छ भी करे,मैं तो यही रहूँगा.इस जगह से मेरी बहुत सारी यादे जुड़ी हैं...अब मुझे और परेशान नही कीजिए.जाइए.",उसने शत्रुजीत & पशा के मुँह पे दरवाज़ा बंद कर दिया.दोनो ने 1 दूसरे की ओर देखा & फिर कार मे बैठ गये,"क्या करोगे भाई?"

"कुच्छ सोचता हू,बेटा.",शत्रुजीत खिड़की से बाहर देख रहा था.

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